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एमपी-यूपी तपेंगे, कई राज्यों में बरसेंगे बादल: मौसम विभाग ने जारी किया डबल अलर्ट

देश  इस साल मौसम के मिजाज ने वैज्ञानिकों और आम जनता दोनों को हैरान कर दिया है। सर्दियों की विदाई के बाद बसंत की गुलाबी ठंड गायब रही और सीधे भीषण गर्मी ने दस्तक दे दी। हालांकि, अब मौसम विभाग (IMD) ने एक नई चेतावनी जारी की है, जिसके मुताबिक अगले कुछ दिनों तक देश को लू (Heatwave) और तूफानी बारिश के दोहरे वार का सामना करना पड़ेगा। भीषण लू की चेतावनी राजस्थान से आ रही गर्म हवाओं ने मध्य प्रदेश सहित मध्य भारत को भट्टी बना दिया है। मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम में तापमान लगातार दूसरे दिन 40 डिग्री सेल्सियस के पार दर्ज किया गया। 15 मार्च तक मध्य प्रदेश, विदर्भ (महाराष्ट्र), कोंकण, सौराष्ट्र, कच्छ, ओडिशा और झारखंड में भीषण लू चलने की संभावना है। तेज धूप और शुष्क हवाओं के कारण दोपहर के समय सड़कों पर कर्फ्यू जैसा नजारा दिखने लगा है। हिमालयी क्षेत्रों में ‘पश्चिमी विक्षोभ’ का असर एक तरफ जहां मैदानी इलाके जल रहे हैं, वहीं पहाड़ी राज्यों में पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) सक्रिय हो रहा है। 14 मार्च से मौसम में बड़ा बदलाव आएगा: जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश में 14 मार्च तक हल्की बर्फबारी होगी, जो 15 से 19 मार्च के बीच और तेज हो सकती है। 15 और 16 मार्च को उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में ओले गिरने की प्रबल संभावना है। इस दौरान हवा की रफ्तार 70 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। पूर्वोत्तर में भारी बारिश का ‘रेड अलर्ट’ देश के पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों में भारी बारिश का संकट मंडरा रहा है:अरुणाचल प्रदेश: 13 से 16 मार्च के बीच मूसलाधार बारिश की चेतावनी। असम, मेघालय और सिक्किम: 13 से 15 मार्च के दौरान भारी बारिश के साथ बिजली गिरने की आशंका है। धूल भरी आंधी और गरज-चमक मौसम विभाग के अनुसार, 15 और 16 मार्च को उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में धूल भरी आंधी चल सकती है: राजस्थान, पंजाब और हरियाणा: 14-15 मार्च को छिटपुट बारिश और गरज-चमक के साथ 30-50 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चलेंगी। उत्तर प्रदेश: 15 और 16 मार्च को पूर्वी और पश्चिमी यूपी में ओलावृष्टि और बारिश की संभावना जताई गई है, जिससे तापमान में थोड़ी गिरावट आ सकती है। कैसा रहेगा एमपी का मौसम? मध्य प्रदेश में फिलहाल गर्मी से राहत मिलने के आसार कम हैं, लेकिन 14 मार्च के बाद सक्रिय होने वाले पश्चिमी विक्षोभ के कारण बादलों की आवाजाही शुरू हो सकती है, जिससे रात के तापमान में मामूली बदलाव संभव है। मौसम विभाग ने लू के दौरान दोपहर 12 से 3 बजे के बीच घर से बाहर निकलने से बचने और ओलावृष्टि के समय सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है।

पीएम मोदी ने किया ऐलान, सरकार वैश्विक संघर्षों के असर से बचने के लिए कर रही है कदम

सिलचर  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि केंद्र सरकार दुनिया भर में हो रहे झगड़ों का लोगों पर पड़ने वाले असर को कम करने के लिए काम कर रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी कांग्रेस देश में पैनिक पैदा करने की कोशिश करके “गैर-जिम्मेदाराना” काम कर रही है।  प्रधानमंत्री ने यह बात असम के सिलचर शहर में विधानसभा चुनाव से पहले 23,550 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन करने के बाद एक रैली को संबोधित करते हुए कही.उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने नॉर्थईस्ट को नजरअंदाज किया और आजादी के समय ऐसा बॉर्डर बनाने दिया जिससे बराक वैली की समुद्र तक पहुंच काट दी।  उन्होंने कहा, दुनिया युद्धों का सामना कर रही है, हमारी कोशिश है कि देश के लोगों पर उनका असर कम से कम हो।  उन्होंने आरोप लगाया, “कांग्रेस को एक जिम्मेदार राजनीतिक पार्टी की भूमिका निभानी चाहिए थी, लेकिन वह ऐसा करने में नाकाम रही. वह लोगों में पैनिक पैदा करने की कोशिश कर रही है।  उन्होंने दावा किया, “उनके पास न तो असम के लिए और न ही देश के लिए कोई विजन है, बल्कि वे सिर्फ मोदी को गाली देना, लोगों को गुमराह करने के लिए अफवाहें और झूठ फैलाना जानते हैं.” मोदी ने कहा कि बराक घाटी कभी व्यापार और वाणिज्य का प्रमुख केंद्र थी।  उन्होंने आरोप लगाया, जैसे कांग्रेस ने नॉर्थ-ईस्ट को अपने हाल पर छोड़ दिया, वैसे ही बराक वैली को कमजोर करने में भी उसकी बड़ी भूमिका रही. जब भारत आजाद हुआ, तो कांग्रेस ने एक ऐसा बॉर्डर बनाने दिया जिससे बराक वैली का समुद्र तक संपर्क कट गया।  बराक घाटी, जो कभी एक औद्योगिक केंद्र के तौर पर जानी जाती थी, उसकी ताकत छीन ली गई. उन्होंने कहा, “आजादी के बाद दशकों तक कांग्रेस की सरकारें सत्ता में रही, फिर भी इस इलाके में बहुत कम विकास हुआ. आज, भाजपा सरकार इसे बदलने के लिए काम कर रही है।  पीएम ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस ने राज्य के युवाओं को हिंसा और आतंकवाद के रास्ते पर गुमराह किया, जबकि भाजपा ने यह पक्का किया है कि राज्य उनके लिए मौकों का सागर बन जाए।  उन्होंने कहा, जहां कांग्रेस सोचना बंद कर देती है, हम काम करना शुरू कर देते हैं.” उन्होंने कहा कि भाजपा का मंत्र विकास में पीछे रह गए लोगों को प्राथमिकता देना है। 

मोजतबा खामेनेई का पता बताने पर US सिटीजनशिप और 92.47 करोड़ रुपये का इनाम मिलेगा

 मुंबई  अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ 28 फरवरी की रात को युद्ध छेड़ दिया था। उसके हमले में इरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई थी। उसके बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को ईरान का नया सुप्रीम लीडर चुना गया। अब अमेरिका और इजरायल के टारगेट पर मोजतबा आ गए हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो आयतुल्ला अली खामेनेई पर हुए हमले में मोजतबा भी गंभीर घायल हो गए थे। वह इस समय कोमा में हैं, लेकिन अमेरिका और इजरायल कोई रिस्क नहीं लेना चाहते हैं। वह मौजूदा लीडरशिप को भी खत्म कर देना चाहते हैं। ऐसे में अमेरिका ने एलान किया है कि ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) से जुड़े कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों का पुख्ता पता बताने वालों को 10 मिलियन डॉलर का इनाम मिलेगा। यह राशि भारतीय रुपयों में 92,47,48,000 रुपये तक की होती है। यह घोषणा अमेरिकी विदेश विभाग के ‘रिवॉर्ड्स फॉर जस्टिस’ कार्यक्रम के तहत की गई है, जिसका संचालन राजनयिक सुरक्षा सेवा करती है। अमेरिका में बसने का भी मिलेगा मौका     अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार ये लोग उन नेटवर्क का हिस्सा हैं, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न गतिविधियों की योजना बनाने और उन्हें अंजाम देने में शामिल रहे हैं। ‘रिवॉर्ड्स फॉर जस्टिस’ कार्यक्रम का उद्देश्य ऐसे नेटवर्क को कमजोर करना है, जो वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करते हैं। कार्यक्रम के तहत सूचना देने वाले व्यक्तियों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है। जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षा प्रदान करने, स्थानांतरण सहायता देने और अमेरिका में बसने का अवसर भी दिया जा सकता है। ईरान के खिलाफ होगी कठोर कार्रवाई यह घोषणा ऐसे समय में की गई है, जब अमेरिका और इजरायल ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान को तेज कर रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक साक्षात्कार में कहा कि आने वाले दिनों में अमेरिकी सेना ईरानी ठिकानों पर और सख्त कार्रवाई कर सकती है।  

बंगाल में हिंदुओं को अल्पसंख्यक बना रही है ममता सरकार’, पीएम मोदी ने किया कड़ा हमला

कोलकाता बंगाल की धरती से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ममता सरकार पर तीखा प्रहार क‍िया. कोलकाता में परिवर्तन संकल्प यात्रा को संबोध‍ित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, पीएम मोदी ने कहा- बंगाल में ह‍िन्‍दुओं को अल्‍पसंख्‍य बनाया जा रहा है. अब बंगाल से निर्मम सरकार का अंत होकर रहेगा. अब बंगाल से महाजंगलराज का खात्मा होगा… कल TMC ने इस रैली में आने वाले आप सभी लोगों को ‘चोर’ कहकर गाली दी है, असली चोर कौन है यह बंगाल की प्रबुद्ध जनता जानती है. अपनी कुर्सी जाते हुए देखकर यहां की निर्मम सरकार बौखला गई है. वह केंद्र सरकार की योजनाएं रोक रही हैं. उन्‍हें एक पैसा नहीं देना है, फ‍िर भी नहीं चाहतीं क‍ि केंद्र की योजनाओं का लाभ बंगाल के लोगों को मिले. पीएम मोदी ने कहा, ये TMC सरकार अपनी स्वार्थी राजनीति की वजह से यहां आयुष्मान भारत योजना को भी लागू नहीं कर रही है. देश भर के करोड़ों लोग इस योजना के तहत 5 लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज का लाभ उठा रहे हैं. ये लाभ आप सबको भी मिलना चाहिए. लेकिन बंगाल के परिवारों को इस योजना के अधिकार से भी TMC सरकार ने वंचित रखा है. गरीब परिवारों को पक्का घर मिल रहा  पीएम मोदी ने कहा- आप सबने देश भर में प्रधानमंत्री आवास योजना की सफलता के बारे में सुना है. गरीब परिवारों को पक्का घर मिल रहा है. लेकिन यहां क्या हुआ? योजना का नाम बदल दिया गया, लाभार्थियों की सूची में गड़बड़ की गई और जिन गरीबों को घर मिलना था वे आज भी इंतजार कर रहे हैं. केवल बिजली, पानी, सड़क, घर की बात नहीं है, TMC सरकार अपनी राजनीति की वजह से आयुष्मान योजना को भी लागू नहीं कर रही है. ट्रैफिक जाम करवाया, भाजपा के झंडे उखड़वा दिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, आज भी इस विशाल सभा को रोकने के लिए निर्मम सरकार ने सारे हथियार निकाल लिए. आप लोगों को आने से रोकने के लिए ब्रिज बंद करवा दिए, गाड़ियां रुकवा दी, ट्रैफिक जाम करवाया, भाजपा के झंडे उखड़वा दिए, पोस्टर निकलवाए लेकिन निर्मम सरकार साफ-साफ देख लो- आज के जनसैलाब को रोक नहीं पाई हो. बंगाल में महाजंगलराज लाने वालों का काउंटडाउन शुरू हो चुका है. वह दिन दूर नहीं जब बंगाल में फिर से कानून का राज होगा. पीएम मोदी ने कहा अब बंगाल का विकास नेक नीयत से होगा, सही नीतियों से होगा, बंगाल में अभी हमारी सरकार नहीं है लेकिन फिर भी केंद्र सरकार के ज़रिए भाजपा बंगाल के विकास में लगी है… अभी हमने 18 हजार करोड़ की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण किया है… ब्रिगेड परेड ग्राउंड का इतिहास याद द‍िलाया पीएम मोदी ने कहा- ब्रिगेड परेड ग्राउंड का इतिहास साक्षी है जब-जब बंगाल देश को दिशा देता है, यह ब्रिगेड मैदान बंगाल की आवाज बनता है. इस मैदान से अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ उठी आवाज हिंदुस्तान में क्रांति बन गई थी और उसका नतीजा क्या हुआ, अंग्रेजों के अत्याचार और लूट का खात्मा हुआ. आज यहां से नए बंगाल की क्रांति का बिगुल बज गया है. बंगाल में बदलाव अब दीवारों पर भी लिख चुका है और बंगाल के लोगों के दिलों में भी छप चुका है. निर्मम सरकार ने बंगाल के युवाओं को पलायन का अभिशाप दिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, यहां की निर्मम सरकार ने बंगाल के युवाओं को पलायन का अभिशाप दिया है. बंगाल के युवा प्रतिभा में सबसे आगे है, मेहनत में सबसे आगे है… लेकिन आज हालत क्या है? यहां का युवा न डिग्री ले पा रहा है और न ही उसे रोजगार मिल रहा है… पहले कांग्रेस, फिर कम्युनिस्ट और अब TMC, ये लोग एक के बाद एक आते रहे और अपनी जेबें भरते रहे और बंगाल में विकास कार्य ठप रहे. TMC सरकार में नौकरियां खुलेआम बेची जा रही हैं, भर्तियों में घोटाले हो रहे हैं. अब समय आ गया है कि हालात बदलें… जानें पीएम मोदी ने और क्‍या कहा… भाजपा और NDA के साथ महिषासुर मर्दिनी का आशीर्वाद: यहां की निर्मम सरकार चाहे अब जितना जोर लगा ले, परिवर्तन की इस आंधी को वो अब रोक नहीं पाएगी. भाजपा और NDA के साथ महिषासुर मर्दिनी का आशीर्वाद है. श्री रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद, नेताजी सुभाषचंद्र बोस, ऋषि बंकिमचंद्र, गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर, ईश्वरचन्द्र विद्यासागर, खुदीराम बोस, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसी सभी महान विभूतियों ने जिस बंगाल की कल्पना की थी. भाजपा की सरकार उस बंगाल का निर्माण करेगी, नवनिर्माण करेगी. पलायन करना मजबूरी बना: एक समय बंगाल पूरे भारत को गति देता था, बंगाल व्यापार और उद्योगों में सबसे आगे था. लेकिन आज यहां का युवा न डिग्री ले पा रहा है और न ही उसे रोजगार मिल पा रहा है. आपके बेटे-बेटियों को काम की तलाश में दूसरे राज्यों में पलायन करना पड़ता है. ये TMC वाले न खुद काम करेंगे, न करने देंगे: पहले कांग्रेस, फिर कम्युनिस्ट और अब TMC… ये लोग एक के बाद एक आते रहे… अपनी जेबें भरते रहे… और बंगाल में विकास के काम ठप्प पड़े रहे. अब TMC सरकार का एक ही एजेंडा है. ये TMC वाले न खुद काम करेंगे, न करने देंगे. जब तक इनको अपना कटमनी नहीं मिल जाता, ये किसी भी योजना को गांव, गरीब तक नहीं पहुंचने देते. इसलिए TMC सरकार केंद्र की योजनाओं को रोककर रखती है. पीएम मोदी ने राष्ट्रपति मुर्मू के मुद्दा उठाया: पीएम मोदी ने कहा- राष्ट्रपति बंगाल आई थीं, लेकिन अहंकार में डूबी इस निर्मम सरकार ना सिर्फ कार्यक्रम का बहिष्कार किया जबकि बंदइंतजामी की. एक आदिवासी बेटी इतनी बड़े पद पर है ये इनसे देखा नहीं गया. टीएमसी वालों को ये याद रखना पड़ेगी कि उन्होनें सिर्फ द्रौपदी मुर्मू जी का अपमान नहीं किया, देश के संविधान का अपमान किया है. इसका जवाब निर्मम सरकार को मिलने वाला है. यहां बिजली बिल जीरो क्‍यों नहीं आता: पीएम मोदी ने कहा- देशवासियों को मुफ्त बिजली देने के लिए हमने पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना शुरू की है. केंद्र की भाजपा सरकार इसके लिए हर लाभार्थी को 75 से 80 हजार रुपये देती है. जो लाभार्थी इस योजना से जुड़ता है, उसके घर का बिजली बिल जीरो हो जाता है. … Read more

लद्दाख हिंसा पर सरकार का बड़ा फैसला, सोनम वांगचुक जेल से रिहा, NSA केस हटाया

नई दिल्ली लद्दाख में भड़की हिंसा के बाद हिरासत में लिए गए सामाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर सोनम वांगचुक को केंद्र सरकार ने रिहा करने का फैसला किया है. सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत उनकी हिरासत को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है. सोनम वांगचुक को लद्दाख में कुछ महीनों पहले हुई हिंसा के आरोपों के बाद हिरासत में लिया गया था और वे पिछले कई महीनों से पुलिस की निगरानी में थे. सरकार का कहना है कि यह फैसला लद्दाख में शांति और स्थिरता का माहौल मजबूत करने और सभी पक्षों के साथ रचनात्मक संवाद को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया है। सरकार की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि सरकार लद्दाख में शांति, स्थिरता और आपसी विश्वास का वातावरण बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि सभी हितधारकों के साथ सार्थक बातचीत संभव हो सके. इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए और सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद गृह मंत्रालय ने सोनम वांगचुक की हिरासत समाप्त करने का निर्णय लिया है. सरकार ने यह भी दोहराया कि लद्दाख की सुरक्षा और क्षेत्र की स्थिरता के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाते रहेंगे। सोनम वांगचुक को क्यों किया गया था गिरफ्तार? दरअसल, सोनम वांगचुक को लद्दाख में कुछ महीने पहले हुई हिंसक घटनाओं के सिलसिले में हिरासत में लिया गया था. आरोप था कि एक प्रदर्शन के दौरान हालात बिगड़ने के बाद कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हुई थी. इसी मामले में प्रशासन ने एहतियात के तौर पर उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत कार्रवाई करते हुए उन्हें हिरासत में लिया था। कौन हैं सोनम वांगचुक? सोनम वांगचुक लद्दाख के जाने-माने इंजीनियर, शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता हैं. वे शिक्षा और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर लंबे समय से सक्रिय रहे हैं. उन्होंने लद्दाख में शिक्षा सुधार और स्थानीय पर्यावरण संरक्षण को लेकर कई अभियान चलाए हैं. फिल्म थ्री इडियट्स आमिर खान का कैरेक्टर फुनसुक वांगडू इन्हीं सोनम वांगचुक से प्रेरित था. पिछले कुछ समय से वे लद्दाख से जुड़े राजनीतिक और संवैधानिक मुद्दों को लेकर भी मुखर रहे हैं. खास तौर पर लद्दाख के लिए संवैधानिक सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय लोगों के अधिकारों को लेकर उन्होंने कई बार आंदोलन और प्रदर्शन किए थे. सरकार का कहना है कि वर्तमान समय में क्षेत्र में शांति और संवाद का माहौल बनाना जरूरी है. इसी वजह से सरकार ने यह फैसला लिया है कि सोनम वांगचुक की हिरासत को समाप्त किया जाए और आगे की प्रक्रिया सामान्य कानूनी ढांचे के तहत चलती रहे. केंद्र सरकार ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि लद्दाख की सुरक्षा और स्थिरता सर्वोच्च प्राथमिकता है. सरकार ने भरोसा दिलाया कि क्षेत्र की सुरक्षा, विकास और लोगों के हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक उपाय किए जाते रहेंगे.

ईरान-इजरायल जंग के बीच अलर्ट हुए पड़ोसी देशों, उत्तर कोरिया ने दागी मिसाइल, THAAD हटाएगा अमेरिका

फियोंगयांग ईरान वॉर अभी तक समाप्‍त नहीं हुआ है, पर एक और क्षेत्र में तनाव की आहट ने खलबली मचा दी है. कोरियाई प्रायद्वीप से बड़ी खबर सामने आ रही है. दक्षिण कोरिया का कहना है कि उत्‍तर कोरिया ने मिसाइल दागी है. उत्‍तर और दक्षिण केारिया के बीच तनाव नई बात नहीं है. दोनों देशों के बीच संबंध लंबे समय से तल्‍ख हैं. उत्‍तर कोरिया को चीन और रूस का करीबी माना जाता है, जब‍कि साउथ कोरिया अमेरिका का करीबी सहयोगी है. दक्षिण कोरिया में अमेरिकी सैन्‍य बेस भी स्थित है. किम जॉन्‍ग उन के देश की तरफ से ऐसे समय में मिसाइल दागी गई है, जब अमेरिका दक्षिण कोरिया से अपने कुछ THAAD मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम को हटाने पर विचार कर रहा है. ऐसे में उत्‍तर कोरिया के कदम से दक्षिण कोरिया की चिंता बढ़ गई है. रिपोर्ट के अनुसार, नॉर्थ कोरिया ने समंदर की तरफ मिसाइल दागी है. उत्‍तर कोरिया की तरफ से अक्‍सर ही समंदर का रुख कर मिसाइल परीक्षण किए जाते रहे हैं. यह कोई पहला मौका नहीं है, जब किम जोंग उन के देश की तरफ से इस तरह की कार्रवाई की गई है. हालांकि, इस बार की टाइमिंग काफी अहम है. पश्चिम एशिया में हालात पहले से ही खराब है. अमेरिका और इजरायल ने संयुक्‍त रूप से ईरान पर अटैक कर दिया है. तेहरान की तरफ किए गए पलटवार से माहौल पहले ही तनावपूर्ण और गंभीर हो चुके हैं. ऐसे में उत्‍तर कोरिया की ओर से मिसाइल दागने से एशिया के एक और जोन में हालात तनावपूर्ण होने की आशंका बढ़ गई है. चीन की आक्रामक नीतियों की वजह से इस क्षेत्र में ऐसे ही तनाव का आलम है. जापान सतर्क उत्तर कोरिया ने शनिवार को एक संदिग्ध बैलिस्टिक मिसाइल का प्रक्षेपण किया है. जापान के रक्षा मंत्रालय ने यह जानकारी दी है. ‘निक्‍केई एशिया’ के अनुसार, सूत्रों का कहना है कि यह मिसाइल संभवतः जापान के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के बाहर जाकर गिरी. इस प्रक्षेपण के कारण किसी प्रकार के नुकसान की कोई खबर नहीं है. वहीं, दक्षिण कोरिया की सेना ने बताया कि उत्तर कोरिया ने पूर्व दिशा की ओर कम से कम एक अज्ञात प्रक्षेपास्त्र यानी प्रोजेक्‍टाइल दागा. इससे पहले उत्तर कोरिया ने 27 जनवरी को जापान सागर की ओर दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं, जिनके बारे में भी आकलन किया गया था कि वे जापान के ईईजेड के बाहर गिरी थीं. बढ़ा तनाव, क्या खुलेगा जंग का तीसरा मोर्चा या होगी World WAR 3? दक्षिण कोरिया की सेना के अनुसार, शनिवार को उत्तर कोरिया ने जापान सागर की ओर एक संदिग्ध बैलिस्टिक मिसाइल दागी। इससे पूर्वी एशिया में नया तनाव पैदा हो गया है, जबकि दुनिया के अन्य हिस्सों में चल रहे संघर्ष अभी भी वैश्विक सुरक्षा चिंताओं का मुख्य केंद्र बने हुए हैं। दक्षिण कोरिया के जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ ने बताया कि यह मिसाइल उत्तर कोरिया से उसके पूर्वी जलक्षेत्र की ओर दागी गई थी, जिसे आमतौर पर जापान सागर (पूर्वी सागर) के नाम से जाना जाता है। अधिकारियों ने शुरू में इस हथियार को अज्ञात मिसाइल बताया था, लेकिन माना जा रहा है कि यह एक बैलिस्टिक मिसाइल ही थी। अमेरिका- दक्षिण कोरिया कर रहे सैन्य अभ्यास बता दें कि यह मिसाइल तब दागी गई जब अमेरिका और दक्षिण कोरिया मिलकर अपना सालाना स्प्रिंगटाइम संयुक्त सैन्य अभ्यास कर रहे थे, जिसमें हजारों सैनिक हिस्सा ले रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, ट्रंप प्रशासन ईरान के खिलाफ भी एक बढ़ता हुआ युद्ध लड़ रहा है। हाल ही में इजरायल और अमेरिका ने मिलकर ईरान पर हमला बोल दिया था, जो कि युद्ध हर दिन के साथ बढ़ा और हर जगह तबाही मची हुई है। इसमें ईरान से लेकर इजयारल और अमेरिका तक को नुकसान हो रहा है, क्योंकि ईरान खाड़ी देश में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना रहा है। उत्तर कोरिया ने क्यों की होगी मिसाइल लॉन्च? उत्तरी कोरिया लंबे समय से सहयोगी देशों के सैन्य अभ्यासों को ‘आक्रमण का पूर्वाभ्यास’ बताता रहा है, और अक्सर इनका इस्तेमाल अपने सैन्य प्रदर्शनों या हथियारों के परीक्षण को तेज करने के बहाने के तौर पर करता है। यह मिसाइल लॉन्च, उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन की प्रभावशाली बहन द्वारा मंगलवार को वॉशिंगटन और सियोल की आलोचना किए जाने के कुछ ही दिनों बाद हुआ। उन्होंने वैश्विक सुरक्षा के लिए एक खतरनाक मोड़ पर अपने सैन्य अभ्यास जारी रखने के लिए इन दोनों देशों की आलोचना की थी, और चेतावनी दी थी कि उत्तर कोरिया की सुरक्षा को दी गई कोई भी चुनौती भयानक परिणामों को जन्म देगी। बता दें कि 11-दिवसीय ‘फ्रीडम शील्ड’ अभ्यास, जो 19 मार्च तक चलेगा, यह संयुक्त राज्य अमेरिका और दक्षिण कोरिया की सेनाओं द्वारा आयोजित किए जाने वाले दो वार्षिक कमांड पोस्ट अभ्यासों में से एक है।

ईरान का करारा तंज, अमेरिका ने पहले आंख दिखाई और अब भारत से रूसी तेल खरीदने की गुहार लगाई

नई दिल्ली ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने शनिवार को रूसी तेल पर अमेरिकी रुख की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका अब भारत सहित दुनिया भर के देशों से रूसी कच्चा तेल खरीदने की भीख मांग रहा है, जबकि पहले अमेरिका ने ही इस तरह के आयात को रोकने के लिए कई देशों पर भारी दबाव डाला था। ‘एक्स’ पर अमेरिका को घेरा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट करते हुए अराघची ने लिखा- अमेरिका ने भारत को रूस से तेल आयात बंद करने के लिए धमकाने में महीनों लगा दिए। लेकिन ईरान के साथ दो सप्ताह के युद्ध के बाद, अब वाइट हाउस भारत सहित पूरी दुनिया से रूसी कच्चा तेल खरीदने की भीख मांग रहा है। यूरोपीय देशों की भी की कड़ी आलोचना ईरानी विदेश मंत्री ने ईरान के खिलाफ अवैध युद्ध का समर्थन करने के लिए यूरोपीय देशों पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि यूरोपीय देशों को लगा था कि इसके बदले में उन्हें रूस के खिलाफ अमेरिका का समर्थन मिलेगा। अराघची ने तंज कसते हुए कहा- यूरोप ने सोचा कि ईरान पर अवैध युद्ध का समर्थन करने से उसे रूस के खिलाफ अमेरिकी समर्थन मिल जाएगा। यह बहुत ही दयनीय है। भारत के जहाजों को ईरान ने दी सुरक्षित निकासी एक तरफ जहां पश्चिम एशिया में तनाव और संघर्ष जारी है, वहीं इस बीच ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य से दो भारतीय झंडे वाले तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) वाहक जहाजों को सुरक्षित गुजरने की अनुमति दी है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने मामले की प्रत्यक्ष जानकारी रखने वाले चार सूत्रों के हवाले से यह खबर दी है। लॉयड लिस्ट इंटेलिजेंस के शिपिंग डेटा का हवाला देते हुए रॉयटर्स ने यह भी बताया कि सऊदी अरब का तेल ले जाने वाले एक कच्चे तेल के टैंकर के शनिवार को भारत पहुंचने की उम्मीद है। यह जहाज 1 मार्च के आसपास हॉर्मुज जलडमरूमध्य से होकर ही गुजरा था। ‘भारत हमारा मित्र है, हमारी नियति एक है’ इससे पहले, भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथली ने भी इस बात की पुष्टि की थी कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच तेहरान हॉर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से भारत आने वाले जहाजों को सुरक्षित मार्ग प्रदान करेगा। उन्होंने इसके पीछे दोनों देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही दोस्ती और साझा हितों का हवाला दिया था। जब फथली से पूछा गया कि क्या वैश्विक ऊर्जा व्यापार के इस सबसे महत्वपूर्ण मार्ग से ईरान भारतीय जहाजों को सुरक्षित निकलने देगा, तो उन्होंने जवाब दिया: हां। क्योंकि भारत और हम दोस्त हैं। हम मानते हैं कि ईरान और भारत मित्र हैं। हमारे समान हित हैं; हमारी एक साझा नियति है। उन्होंने दोनों देशों के बीच मजबूत आपसी संबंधों पर जोर देते हुए आगे कहा- भारत के लोगों की पीड़ा हमारी पीड़ा है और इसके विपरीत हमारी पीड़ा उनकी है। इसी कारण से भारत सरकार हमारी मदद करती है, और हमें भी भारत सरकार की मदद करनी चाहिए क्योंकि हमारा भाग्य और हित एक समान हैं।

संसद की कैंटीन में चाय-कॉफी की कमी, LPG सिलेंडर संकट की बढ़ी मुश्किलें!

नई दिल्ली देशभर में रसोई गैस की किल्लत की शिकायतों के बीच सरकार ने साफ किया है कि एलपीजी की कोई कमी नहीं है. लोगों को परेशानी की असल वजह कालाबाजारी है. सरकार ने इसके साथ ही इन कालाबाजारियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. केंद्र सरकार का कहना है कि देश में रसोई गैस की सप्लाई पूरी तरह सामान्य है और घरेलू एलपीजी उत्पादन में करीब 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की गई है. सरकार का दावा है कि पेट्रोल, डीजल और गैस का पर्याप्त भंडार मौजूद है, लेकिन विपक्ष का आरोप है कि जमीनी स्तर पर हालात अलग हैं और कई शहरों में लोग सिलेंडर के लिए लंबी लाइनों में खड़े दिखाई दे रहे हैं। सरकार का यह भी दावा है कि देश में पेट्रोल और डीजल का भी पर्याप्त भंडार मौजूद है और करीब एक लाख पेट्रोल पंपों में कहीं से भी ईंधन खत्म होने की सूचना नहीं मिली है. साथ ही पीएनजी और सीएनजी की सप्लाई भी सामान्य बताई जा रही है. पेट्रोलियम मंत्रालय ने साफ किया है कि घरों, अस्पतालों और जरूरी संस्थानों को एलपीजी सप्लाई को प्राथमिकता दी जा रही है। भाजपा नेताओं ने एलपीजी संकट को अफवाह करार देते हुए विपक्ष पर जनता में घबराहट फैलाने का आरोप लगाया है. वहीं कांग्रेस, सपा और अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि देश के कई हिस्सों में गैस की कमी से लोग परेशान हैं और सरकार को वास्तविक स्थिति स्वीकार करनी चाहिए. विपक्षी दलों का दावा है कि जमीनी हकीकत इससे अलग है. कई शहरों में लोग एलपीजी सिलेंडर के लिए लंबी-लंबी कतारों में खड़े दिखाई दे रहे हैं. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दावा किया है कि देश के कई शहरों में गैस जैसे ‘गायब’ हो गई है और लोग भारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं।  नोएडा में 14 गैस एजेंसियों पर रेड, कालाबाजारी के नहीं मिले सबूत, लेकिन लोग परेशान गौतमबुद्ध नगर में एलपीजी गैस सिलेंडर की कथित किल्लत और कालाबाजारी की शिकायतों के बीच जिला प्रशासन ने अपनी जांच तेज कर दी है. प्रशासन का दावा है कि फिलहाल जिले में गैस की कोई कमी नहीं है और जो माहौल बनाया जा रहा है, वह महज अफवाह है. हालांकि, जमीनी हकीकत इसके उलट दिख रही है, जहां गैस एजेंसियों पर उपभोक्ताओं की भीड़ सिलेंडर के लिए तरस रही है। जिलाधिकारी मेघा रूपम के निर्देशन में गठित चार संयुक्त टीमें लगातार अलग-अलग गैस एजेंसियों और पेट्रोल पंपों पर छापेमारी कर रही हैं. इन टीमों में खाद्य और रसद विभाग, नापतोल विभाग और संबंधित तेल कंपनियों के अधिकारी शामिल हैं. शुक्रवार को तहसील दादरी क्षेत्र के अंतर्गत 14 गैस एजेंसियों पर विशेष जांच अभियान चलाया गया। प्रशासन का कहना है कि इन एजेंसियों पर पर्याप्त मात्रा में स्टॉक पाया गया और कालाबाजारी के कोई सबूत नहीं मिले. जनपद में कुल 65 गैस एजेंसियां हैं, जिनमें इंडियन ऑयल की 13, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम की 26-26 एजेंसियां शामिल हैं। ‘संसद की कैंटीन में भी नहीं मिल रही चाय-कॉफी’ LPG सिलेंडर की किल्लत पर कांग्रेस सांसद का दावा LPG सिलेंडर की किल्लत की खबरों पर कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने कहा, ‘इसमें कोई शक नहीं है कि कमी है… मैं रोज़ा रख रहा हूं, लेकिन कल संसद में चर्चा चल रही थी कि जब सांसदों ने संसद कैंटीन में चाय या कॉफ़ी मांगी, तो उन्हें बताया गया कि यह उपलब्ध नहीं है. और फिर भी, आप दावा करते हैं कि घबराने की कोई बात नहीं है. कालाबाज़ारी की खबरें आ रही हैं, जिसमें कीमतें 1,500 रुपये से लेकर 2,000 रुपये तक मांगी जा रही हैं… 1483 जगहों पर रेड, 24 एफआईआर, 6 गिरफ्तार… यूपी में एलपीजी की कालाबाजारी पर ताबड़तोड़ एक्शन उत्तर प्रदेश में एलपीजी सिलेंडरों की कालाबाजारी को रोकने के लिए सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं. प्रदेशभर में विशेष अभियान चलाते हुए 1483 स्थानों पर निरीक्षण और छापेमारी की गई. इस दौरान कालाबाजारी और अनियमितताओं के मामलों में 24 एफआईआर दर्ज की गईं और 6 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इसके अलावा 19 अन्य लोगों के खिलाफ भी मुकदमे दर्ज किए गए हैं। सरकार के निर्देश पर खाद्य एवं रसद विभाग की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं ताकि किसी भी तरह की जमाखोरी या अवैध बिक्री को रोका जा सके. अधिकारियों का कहना है कि एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति और वितरण व्यवस्था पर विशेष नजर रखी जा रही है। राज्य सरकार ने प्रदेशभर में 24 घंटे सक्रिय कंट्रोल रूम भी स्थापित किए हैं, जहां से पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की आपूर्ति की निगरानी की जा रही है. सरकार का कहना है कि आम नागरिकों को ईंधन की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं और किसी भी तरह की कालाबाजारी को सख्ती से रोका जाएगा। पटना में एलपीजी की कालाबाजी पर सख्त एक्शन, 4 एफआईआर दर्ज बिहार की राजधानी पटना में एलपीजी की सुचारू आपूर्ति और वितरण सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है. अब तक एलपीजी नियमों के उल्लंघन के संबंध में चार मामले दर्ज किए गए हैं. इनमें से तीन एफआईआर बाढ़ उपमंडल में और एक दानापुर उपमंडल में दर्ज की गई है। अधिकारियों ने बताया कि बाढ़ में रेस्तरां और कैफे संचालकों के खिलाफ घरेलू एलपीजी सिलेंडरों का इस्तेमाल करने के आरोप में मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि व्यावसायिक सिलेंडरों का इस्तेमाल करना मौजूदा नियमों का उल्लंघन है. दानापुर में एलपीजी सिलेंडरों की कालाबाजारी के संबंध में एफआईआर दर्ज की गई है। जिला मजिस्ट्रेट ने कहा कि प्रशासन उपभोक्ताओं के हित में घरेलू एलपीजी की पारदर्शी और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेटों, जिला स्तरीय अधिकारियों, उप-मंडल अधिकारियों और ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों को एलपीजी डीलरों और वितरकों के ठिकानों पर नियमित निरीक्षण और छापेमारी करने के निर्देश दिए गए हैं. अधिकारी उपभोक्ताओं और आम जनता से भी प्रतिक्रिया प्राप्त कर रहे हैं। डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि कालाबाजारी, जमाखोरी या अधिक कीमत वसूलने की शिकायतें मिलने पर तुरंत एफआईआर दर्ज करें और दोषियों को गिरफ्तार करें. उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी प्रकार की ढिलाई, लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी … Read more

बगदाद में अमेरिकी एंबेसी पर मिसाइल और ड्रोन हमले से बड़ा खतरा

बगदाद इराक की राजधानी बगदाद के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले ‘ग्रीन ज़ोन’ में स्थित अमेरिकी दूतावास पर एक बड़ा हमला हुआ है. इराकी अधिकारियों के अनुसार, दूतावास परिसर के भीतर मौजूद हेलीपैड को निशाना बनाकर मिसाइल दागी गई है. हमले के तुरंत बाद दूतावास परिसर से काला धुआं निकलता देखा गया, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया है. अमेरिकी दूतावास में लगे रडार सिस्टम को एक आत्मघाती ड्रोन द्वारा निशाना बनाया गया। सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में अमेरिकी दूतावास परिसर के भीतर से धुएं का गुबार उठता साफ दिखाई दे रहा है. हालांकि, अभी तक दूतावास के भीतर किसी के हताहत होने या सटीक नुकसान की आधिकारिक पुष्टि अमेरिकी पक्ष से नहीं की गई है. सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी है। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब हाल ही में ‘इराकी इस्लामिक रेजिस्टेंस’ ने अमेरिकी सैन्य और खुफिया कर्मियों पर भारी इनाम की घोषणा की थी और एक अमेरिकी विमान को मार गिराने का दावा किया था। माना जा रहा है कि यह हमला उसी कड़ी का हिस्सा हो सकता है. दूतावास पर हमला सीधे तौर पर वाशिंगटन को दी गई एक बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। बगदाद में अमेरिकी दूतावास सबसे सुरक्षित राजनयिक परिसरों में से एक माना जाता है. इसके बावजूद मिसाइल का हेलिपैड तक पहुंचना सुरक्षा में एक बड़ी सेंध मानी जा रही है। ईरान को घुटनों पर लाने का ट्रंप कार्ड?  फारस की खाड़ी के शांत दिखने वाले नीले पानी के बीच एक छोटा सा द्वीप है – खार्ग आइलैंड. आकार में यह इतना छोटा है कि पहली नजर में इसे मैप पर ढूंढना भी मुश्किल लगता है. लेकिन आज यही छोटा सा द्वीप वैश्विक राजनीति, ऊर्जा बाजार और सैन्य रणनीति के केंद्र में आ गया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ऐलान किया कि अमेरिकी सेना ने खार्ग आइलैंड पर बड़ा सैन्य हमला किया है. ट्रंप के मुताबिक यह हमला “मध्य पूर्व के इतिहास की सबसे शक्तिशाली बमबारी में से एक” था, जिसमें द्वीप पर मौजूद लगभग सभी सैन्य ठिकानों को नष्ट कर दिया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इस द्वीप को ईरानी शासन का “क्राउन ज्वेल” यानी सबसे कीमती संपत्ति बताया. उन्होंने यह भी कहा कि हमले के दौरान जानबूझकर तेल से जुड़ी सुविधाओं को निशाना नहीं बनाया गया. यह हमला ऐसे समय हुआ है जब ईरान पर होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही को बाधित करने के आरोप लग रहे हैं. यही वजह है कि अचानक खार्ग आइलैंड अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में आ गया है.खार्ग आइलैंड आकार में सिर्फ 20 वर्ग किलोमीटर का है. इसकी चौड़ाई करीब 3 मील और लंबाई लगभग 7 मील है. यह ईरान के बुशेहर प्रांत के तट से लगभग 25 किलोमीटर दूर स्थित है. द्वीप की आबादी बहुत बड़ी नहीं है. यहां लगभग 3,000 से 5,000 लोग रहते हैं. इनमें स्थानीय मछुआरों के परिवार, ईरान की राष्ट्रीय तेल कंपनी के कर्मचारी और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC के सैनिक शामिल हैं।  

सुकन्या समृद्धि योजना: अंतिम मौका 31 मार्च, जरूरी कार्रवाई न करने पर अकाउंट बंद

नई दिल्ली अपनी बेटियों के भविष्य को सुरक्षित और मजबूत बनाने के लिए माता पिता अक्सर छोटी उम्र से ही निवेश शुरू कर देते हैं. इसी सोच के साथ सरकार की सुकन्या समृद्धि योजना काफी फेमस स्कीम बन चुकी है. इस योजना में निवेश करने पर अच्छी ब्याज दर मिलती है और लंबे समय में अच्छा फंड तैयार हो सकता है. लेकिन इस खाते से जुड़ा एक जरूरी नियम भी है। जिसे नजरअंदाज करना महंगा पड़ सकता है. अगर आपने इस फाइनेंशियल ईयर में अपने खाते में जरूरी रकम जमा नहीं की है. तो 31 मार्च से पहले यह काम जरूर कर लें. अगर ऐसा नहीं किया गया तो खाता इनएक्टिव हो सकता है. इसलिए बेहतर यही है कि समय रहते खाते का स्टेटस चेक कर लें। 31 मार्च से पहले करना होगा यह जरूरी काम सुकन्या समृद्धि योजना में खाता चालू बनाए रखने के लिए हर वित्त वर्ष में न्यूनतम रकम जमा करना जरूरी होता है. कई लोग साल भर में पैसे जमा करना भूल जाते हैं, लेकिन वित्त वर्ष खत्म होने से पहले इसे ठीक किया जा सकता है। ध्यान रखने वाली जरूरी बातें:     हर वित्त वर्ष में खाते में न्यूनतम 250 रुपये जमा करना जरूरी है.     अगर पूरे साल में पैसा जमा नहीं हुआ है तो 31 मार्च से पहले जमा करना होगा.     समय पर राशि जमा करने से खाता सक्रिय बना रहता है.     छोटी राशि होने के कारण कई लोग इसे टाल देते हैं, लेकिन यही नियम खाते की स्थिति तय करता है.     समय रहते जमा करने से आगे की निवेश प्रक्रिया बिना रुकावट जारी रहती है. पैसे जमा नहीं किए तो देना पड़ सकता है जुर्माना अगर किसी फाइनेंशियल ईयर में सुकन्या समृद्धि खाते में न्यूनतम राशि जमा नहीं की जाती है. तो खाता इनएक्टिव हो सकता है. और बाद में इसे फिर से चालू कराने के लिए अलग से पूरी प्रोसेस दोहरानी पड़ती है। जरूरी बातें जो आपको जाननी चाहिए:     न्यूनतम रकम जमा न होने पर खाता इनएक्टिव हो सकता है.     खाते को दोबारा सक्रिय करने के लिए 50 रुपये का जुर्माना देना पड़ सकता है.     साथ में छूटी हुई न्यूनतम राशि भी जमा करनी होती है.     फिलहाल इस योजना में करीब 8.2 प्रतिशत सालाना ब्याज मिल रहा है.     नियमित निवेश करने पर बेटी की पढ़ाई और भविष्य के लिए अच्छा फंड तैयार हो सकता है.  

फिटमेंट फैक्टर से OPS बहाली तक: 8वें वेतन आयोग की हर नई जानकारी

नई दिल्ली 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन के बाद से केंद्रीय कर्मचारियों की उम्मीदें आसमान पर हैं। इसी बीच देश के प्रमुख ट्रेड यूनियन संगठन ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) ने आयोग की अध्यक्ष जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई को एक विस्तृत पत्र लिखकर कर्मचारियों के हितों से जुड़ी 12 अहम मांगें रखी हैं। इन मांगों में फिटमेंट फैक्टर 3.0, ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) की बहाली और सालाना इंक्रीमेंट दोगुना करने जैसे प्रमुख सुझाव शामिल हैं। आइए जानते हैं इन मांगों के बारे में विस्तार से। वेतन और भत्तों से जुड़ी प्रमुख मांगें 1. फिटमेंट फैक्टर 3.0: सैलरी बढ़ोतरी की मुख्य कुंजी AITUC ने सबसे अहम मांग के तौर पर 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर कम से कम 3.0 रखने की बात कही है। फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक है, जिसके आधार पर कर्मचारियों की मौजूदा सैलरी को नए स्ट्रक्चर में बदला जाता है। यूनियन का मानना है कि 3.0 का फिटमेंट फैक्टर लागू होने से कर्मचारियों के सैलरी में पर्याप्त इजाफा होगा और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। 2. सैलरी कैलकुलेशन के लिए फैमिली यूनिट बढ़ाने का प्रस्ताव एनडीटीवी की खबर के मुताबिक वेतन निर्धारण में इस्तेमाल होने वाली फैमिली यूनिट को बढ़ाने की भी मांग उठाई गई है। 7वें वेतन आयोग में परिवार की इकाई तीन सदस्यों (पति, पत्नी और दो बच्चे) पर आधारित थी। AITUC ने इसे बढ़ाकर पांच सदस्यीय इकाई करने का सुझाव दिया है, जिसमें माता-पिता को भी शामिल किया जाए। इससे कर्मचारियों की बढ़ती जिम्मेदारियों को आर्थिक समर्थन मिल सकेगा। 3. सालाना इंक्रीमेंट 3% से बढ़ाकर 6% करने की मांग फिलहाल 7वें वेतन आयोग के तहत सभी 18 पे-लेवल के कर्मचारियों को हर साल उनके बेसिक सैलरी का 3% इंक्रीमेंट मिलता है। AITUC का तर्क है कि बढ़ती महंगाई और जीवन स्तर को देखते हुए 8वें वेतन आयोग में इसे बढ़ाकर कम से कम 6% सालाना किया जाना चाहिए। 4. न्यूनतम और अधिकतम वेतन का अनुपात 1:10 हो यूनियन ने सैलरी स्ट्रक्चर में समानता लाने पर जोर देते हुए कहा कि न्यूनतम और अधिकतम वेतन का अनुपात 1:10 होना चाहिए। मौजूदा 7वें वेतन आयोग में यह अनुपात लगभग 1:14 है, जहां न्यूनतम वेतन 18,000 रुपये और अधिकतम वेतन 2,50,000 रुपये है। AITUC का मानना है कि अनुपात कम होने से वेतन में असमानता कम होगी। पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभों से जुड़ी मांगें 5. NPS और UPS खत्म कर OPS बहाल करने की मांग AITUC ने केंद्र सररी के कर्मचारियों के लिए नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) को समाप्त करने की मांग की है। संगठन ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) को फिर से लागू करने पर जोर दिया है, क्योंकि वह पेंशन को कर्मचारी की “डिफर्ड सैलरी” (स्थगित वेतन) मानता है। साथ ही, हर पांच साल में पेंशन में 5% की वृद्धि का भी सुझाव दिया गया है। 6. पेंशन कम्यूटेशन बहाली की अवधि घटाने का प्रस्ताव फिलहाल पेंशन के कम्यूटेशन (अग्रिम भुगतान) के बाद उस राशि को 15 साल में बहाल किया जाता है। AITUC ने इस अवधि को घटाकर 11 से 12 साल करने की मांग की है, जिससे पेंशनभोगियों को जल्द पूरी पेंशन मिलना शुरू हो सके। 7. लीव एनकैशमेंट की सीमा 300 से बढ़ाकर 450 दिन करें रिटायरमेंट के समय मिलने वाले लीव एनकैशमेंट की अधिकतम सीमा को 300 दिनों से बढ़ाकर 450 दिन करने का प्रस्ताव रखा गया है। इससे कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद एक बड़ी राशि एकमुश्त मिल सकेगी। सेवा शर्तों और अन्य सुविधाओं से जुड़ी मांगें 8. करियर में कम से कम 5 प्रमोशन की गारंटी सरकारी नौकरी में 30 साल के करियर के दौरान कर्मचारियों को कम से कम पांच प्रमोशन मिलने चाहिए। यूनियन का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में कर्मचारी लंबे समय तक एक ही पद पर अटके रहते हैं, जिससे उनके करियर ग्रोथ में रुकावट आती है। 9. जोखिम भत्ता, चिकित्सा सुविधा और अवकाश में बढ़ोतरी AITUC ने अतिरिक्त सुविधाओं के तौर पर रिस्क और हार्डशिप अलाउंस बढ़ाने, कैशलेस मेडिकल ट्रीटमेंट, महिलाओं के लिए मेंस्ट्रुअल लीव और पितृत्व अवकाश (Paternity Leave) देने की मांग उठाई है। 10. रेलवे, CAPF और डिफेंस कर्मियों के लिए विशेष मुआवजा रेलवे, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) और रक्षा क्षेत्र के सिविल कर्मचारियों के लिए अलग से बढ़ा हुआ मुआवजा देने की मांग की गई है। प्रस्ताव के अनुसार, ड्यूटी के दौरान मौत पर 2 करोड़ रुपये, बड़े हादसे पर 1.5 करोड़ रुपये और छोटे हादसों पर 10 से 25 लाख रुपये तक का मुआवजा दिया जाए। रोजगार नीति और बोनस से जुड़ी मांगें 11. कॉन्ट्रैक्ट जॉब और आउटसोर्सिंग खत्म करें, 15 लाख पद भरें AITUC ने केंद्र सरकार की नौकरियों में कॉन्ट्रैक्ट जॉब, आउटसोर्सिंग और लैटरल एंट्री का विरोध किया है। साथ ही सरकार में करीब 15 लाख खाली पदों को नियमित भर्ती के जरिए जल्द से जल्द भरने की मांग की है, ताकि रोजगार के अवसर बढ़ सकें और कर्मचारियों को नौकरी की सुरक्षा मिले। 12. बोनस की सीमा समाप्त करें, वास्तविक वेतन के बराबर करें प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस (PLB) को कर्मचारियों के वास्तविक बेसिक सैलरी के बराबर करने की मांग की गई है। फिलहाल यह बोनस अधिकतम 30 दिनों के लिए 7,000 रुपये तक सीमित है। AITUC ने इस सीमा को हटाने और इसे कम से कम 18,000 रुपये या 30 दिनों की मूल सैलरी के बराबर करने का सुझाव दिया है।

खैबर पख्तूनख्वा में पुलिस पर हमला: धमाके में 7 जवानों की जान गई

इस्लामाबाद पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के लक्की मरवत जिले के बेट्टानी कबीले में एक पुलिस गाड़ी के पास हुए ब्लास्ट में एसएचओ समेत कम से कम सात पुलिसकर्मी मारे गए। स्थानीय मीडिया की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को हुए इस धमाके में एक शख्स के घायल होने की खबर है। स्थानीय पुलिस के एक प्रवक्ता के मुताबिक, धमाका एक पुलिस मोबाइल के पास हुआ, जिसमें सात पुलिसवालों की मौत हो गई और एक अन्य घायल हो गया। पाकिस्तान के मीडिया आउटलेट जियो न्यूज के अनुसार, पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि घटनास्थल को सुरक्षित करने और आगे के एक्शन में मदद के लिए अन्य पुलिसवालों को तैनात किया गया था। जब से तालिबान ने काबुल में सत्ता पर कब्जा किया है, पाकिस्तान में सीमा पार से आतंकवादी गतिविधियों में बढ़ोतरी देखी गई है। खासकर खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान प्रांतों में, जिनकी सीमा अफगानिस्तान से जुड़ी है, वहां ऐसी घटनाएं ज्यादातर देखने को मिलती हैं। पाकिस्तान ने आतंकवादी घटनाओं के जवाब में ऑपरेशन ‘गजब लिल-हक’ शुरू किया है और दावा किया है कि सीमा पर और अफगानिस्तान में किए गए हमलों में कम से कम 641 अफगान तालिबान लड़ाके मारे गए हैं। इस ऑपरेशन से पहले, पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के नंगरहार, पक्तिका और खोस्त प्रांतों में हवाई हमले किए थे। तालिबान ने पाकिस्तान पर नंगरहार और पक्तिका प्रांतों के रिहायशी इलाकों में जानलेवा हवाई हमले करने का आरोप लगाया है, जिससे कई आम लोगों की मौत हो गई। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इससे पहले 8 मार्च को पाकिस्तान के क्वेटा के किल्ली इस्माइल इलाके में काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (सीटीडी) के एक वरिष्ठ अधिकारी पर अनजान हमलावरों ने गोलियां चलाईं, जिसमें उनकी मौत हो गई। पाकिस्तान मीडिया डॉन के अनुसार, पुलिस ने कहा कि इंस्पेक्टर मेथा खान, जो हाल ही में सीटीडी में शामिल हुए थे, को 8 मार्च को किल्ली इस्माइल इलाके से गुजरते समय हथियारबंद लोगों ने गोली मार दी। एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने बताया कि मोटरसाइकिल सवार हथियारबंद लोगों ने सीटीडी अधिकारी पर गोलियां चलाईं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। अधिकारी ने कहा कि घटना के बाद बंदूकधारी मौके से भाग गए। पुलिस ने इलाके को घेर लिया और हमलावरों को पकड़ने के लिए सर्च ऑपरेशन शुरू किया। इस बीच, इस्लामाबाद के एक थिंक टैंक की रिपोर्ट से पता चला है कि फरवरी में पाकिस्तान में लड़ाई से जुड़ी मौतों में 30 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जिसका कारण देशभर में आत्मघाती हमलों में वृद्धि है।

कोयला उत्पादन ने बनाया नया कीर्तिमान, 200 मिलियन टन का आंकड़ा पार

मुंबई कोयला मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 11 मार्च तक कैप्टिव, वाणिज्यिक और अन्य कोयला खदानों ने 200 मिलियन टन (एमटी) कोयला उत्पादन का मील पत्थर पार कर लिया। कुल उत्पादन में से, कैप्टिव और वाणिज्यिक कोयला खदानों का योगदान 194.17 एमटी रहा, जबकि अन्य खदानों का योगदान 6.06 एमटी रहा, जिससे कुल उत्पादन ऐतिहासिक 200 एमटी के आंकड़े को पार कर गया। विशेष रूप से, वित्त वर्ष 2025-26 में कोयले का उत्पादन वित्त वर्ष 2024-25 (197.32 एमटी) के कुल उत्पादन को 7 मार्च, 2026 को ही पार कर गया, और यह उपलब्धि पिछले वर्ष की तुलना में 24 दिन पहले ही हासिल कर ली गई। इस क्षेत्र ने अपनी मजबूत गति को बरकरार रखते हुए इसी अवधि में वार्षिक आधार पर 10.56 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। मंत्रालय ने कहा, “यह उपलब्धि विभिन्न केंद्रीय और राज्य सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (सीपीएसयू/एसपीएसयू) के साथ-साथ निजी क्षेत्र के प्रतिभागियों के सामूहिक प्रयासों और अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिनके अथक परिश्रम और दृढ़ता ने देश के कोयला उत्पादन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।” कोयले की आपूर्ति में भी लगातार वृद्धि दर्ज की गई है, जो वार्षिक आधार पर 7.71 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 182.98 एमटी से बढ़कर 197.09 एमटी हो गया है। सरकार के अनुसार, कोयले के वितरण में यह निरंतर वृद्धि देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने और प्रमुख उपभोक्ता क्षेत्रों को विश्वसनीय कोयला आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए इस क्षेत्र की बढ़ती क्षमता को दर्शाती है। मंत्रालय ने कहा कि वह भारत के ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र के प्रमुख चालक के रूप में कैप्टिव और वाणिज्यिक कोयला खनन को और आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।दूरदर्शी नीतियों, तकनीकी नवाचार और खनन कार्यबल के समर्पण के बल पर, यह क्षेत्र राष्ट्रीय विकास में अपना योगदान लगातार बढ़ा रहा है। मंत्रालय ने आगे कहा कि ये उपलब्धियां विश्वसनीय ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने, औद्योगिक प्रगति को बढ़ावा देने और आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को सुदृढ़ करने में कोयले की महत्वपूर्ण भूमिका की पुष्टि करती हैं, क्योंकि भारत 2047 तक विकसित भारत बनने की दिशा में अग्रसर है। इस वर्ष घरेलू कोयला उत्पादन और आपूर्ति खपत से अधिक रही है, जिसके परिणामस्वरूप खानों और ताप विद्युत संयंत्रों में कोयले का भंडार रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया है।

अमेरिका ने बांग्लादेशी निर्यात की जांच तेज की, वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है असर

नई दिल्ली अमेरिका ने बताया था कि वह 16 देशों के व्यापार को लेकर जांच शुरू कर रहा है। इन देशों में भारत और चीन के अलावा बांग्लादेश का नाम भी शामिल है। ढाका की ‘द मॉर्निंग स्टार’ की एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका ने बांग्लादेश में एक जांच शुरू कर दी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या उनकी पॉलिसी और प्रोडक्शन के तरीके से अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग को नुकसान हो सकता है। यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (यूएसटीआर) के ऑफिस ने यह जांच बुधवार को ट्रेड एक्ट 1974 के तहत शुरू की। यह एक पावरफुल ट्रेड एनफोर्समेंट टूल है जिसका इस्तेमाल अमेरिका द्वारा गलत विदेशी तरीकों को चुनौती देने के लिए किया जाता है। रिपोर्ट में यूएसटीआर के हवाले से कहा गया है कि बांग्लादेश में स्ट्रक्चरल एक्स्ट्रा कैपेसिटी और प्रोडक्शन के सबूत मौजूद हैं, जिसका अमेरिका के साथ लगभग 60 लाख 50 हजार डॉलर का गुड्स व्यापार अधिशेष (ट्रेड सरप्लस) है। दोनों देशों के बीच यह व्यापार अधिशेष मुख्य रूप से टेक्सटाइल सेक्टर के निर्यात से पैदा होता है, जहां सरकार घरेलू वस्त्र और चमड़ा उत्पादों सहित 43 क्षेत्रों में निर्यात को बढ़ावा देने के लिए नकद प्रोत्साहन प्रदान करती है। यूएसटीआर ने कहा कि बांग्लादेश के सीमेंट उद्योग में सालों में सबसे खराब मंदी के बावजूद काफी अतिरिक्त क्षमता है। 2024 में बांग्लादेश की सीमेंट की राष्ट्रीय खपत घटकर 38 मिलियन टन रह गई, जो कुल क्षमता का 40 फीसदी से भी कम है और अगले साल इसमें और गिरावट आई। बांग्लादेश गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष महमूद हसन खान ने कहा, “जांच की सूची में देश का नाम देखना अच्छा नहीं है।” रिपोर्ट के अनुसार, जिन मामलों की जांच की जाएगी, जैसे उत्पादन क्षमता, बौद्धिक संपदा अधिकार और प्रोत्साहन, उनसे बांग्लादेश पर बहुत ज्यादा असर पड़ने की उम्मीद नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बांग्लादेश का उत्पादन अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से वर्क ऑर्डर मिलने पर आधारित है, इसलिए ज्यादा उत्पादन मुमकिन नहीं है। इसके अलावा, बांग्लादेश ने पिछले वर्ष अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) की सिफारिशों के अनुरूप अपने श्रम कानूनों में संशोधन किया है और तीन महत्वपूर्ण आईएलओ कन्वेंशनों को भी मंजूरी दी है। रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने इस वर्ष नवंबर में सबसे कम विकसित देशों (एलडीसी) की श्रेणी से बाहर निकलने की तैयारी के तहत निर्यात प्राप्तियों पर दिए जाने वाले प्रोत्साहनों को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करना भी शुरू कर दिया है।

भारत-US संबंधों को मिलेगी नई ताकत! दुर्लभ खनिजों पर डील की जल्द हो सकती है घोषणा

नई दिल्ली भारत और अमेरिका एक और समझौते पर मुहर लगाने के बेहद करीब हैं। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने शुक्रवार को यह खुशखबरी देते हुए कहा है कि दोनों देश क्रिटिकल मिनरल्स से जुड़े अहम समझौते को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और आने वाले कुछ महीनों में इस पर बड़ी घोषणा हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा है कि दोनों देश मैन्युफैक्चरिंग और नई तकनीकों के लिए जरूरी दुर्लभ खनिज की सप्लाई चेन को सुरक्षित करने के लिए इस समझौते पर तेजी से काम कर रहे हैं। सर्जियो गोर ने इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में इस पर खुशी जताते हुए कहा, “मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि हम क्रिटिकल मिनरल्स समझौते को अंतिम रूप देने के बहुत करीब पहुंच गए हैं। यह समझौता एडवांस मैन्युफैक्चरिंग, एनर्जी सिस्टम और उभरती तकनीकों के लिए जरूरी सप्लाई चेन को सुरक्षित करने में मदद करेगा। अगले कुछ महीनों में इस पर बड़ी घोषणा होने की उम्मीद है।” सर्जियो गोर ने कहा कि आने वाले महीनों में दोनों देश ठोस नतीजे दिखा सकते हैं। उन्होंने बताया कि दोनों सरकारों में इस साझेदारी को आगे बढ़ाने की मजबूत राजनीतिक इच्छा दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा, “हम कुछ अलग देख रहे हैं। जहां पहले रुकावटें होती थीं, अब वहां प्रगति दिखाई दे रही है। अमेरिका और भारत की साझेदारी की ताकत और गति को बढ़ाने वाली कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां सामने आई हैं।” भारत-अमेरिका के रिश्तों पर क्या बोले? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूत ने यह भी कहा है कि भारत और अमेरिका के रिश्ते ऐतिहासिक ऊंचाइयों तक पहुंचने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने हाल में हुए कई महत्वपूर्ण समझौतों और प्रगति का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस साझेदारी में तीन बड़ी प्रगति हुई है। पहली व्यापार के क्षेत्र में, दूसरी भरोसे और तकनीक के क्षेत्र में और तीसरी रणनीतिक समन्वय के क्षेत्र में। उनके अनुसार यह तीनों पहलू दिखाते हैं कि अमेरिका और भारत की साझेदारी किस दिशा में आगे बढ़ रही है। अंतरिम समझौते पर सहमति इस दौरान अमेरिका-भारत अंतरिम व्यापार समझौते के बारे में बोलते हुए गोर ने कहा कि दोनों देशों की अर्थव्यवस्था का आकार, लोगों की प्रतिभा और समाज में मौजूद उद्यमशीलता की ऊर्जा यह साफ दिखाती है कि सहयोग की संभावनाएं बहुत बड़ी हैं। उन्होंने कहा कि जरूरत सिर्फ गति और राजनीतिक इच्छाशक्ति की थी, ताकि इन अवसरों को ठोस परिणामों में बदला जा सके। गौरतलब है कि भारत और अमेरिका ने बीते 7 फरवरी को एक अंतरिम समझौते पर सहमति जताई थी।  

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