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तालिबान का बड़ा अलर्ट: इस्लामाबाद, कराची और क्वेटा को निशाना बनाने की धमकी

कंधार अफगानिस्तान पर पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक के बाद दोनों देशों के बीच तनाव अब ‘आर-पार’ की जंग में तब्दील होता दिख रहा है. पाकिस्तान द्वारा की गई एयरस्ट्राइक के बाद अब तालिबान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पाकिस्तान के प्रमुख शहरों पर हमले की धमकी दी है. यह चेतावनी कथित तौर पर अफगानिस्तान में पाकिस्तानी हवाई हमलों के बाद सामने आई है।  रिपोर्ट के अनुसार, अफगानिस्तान के बल्ख प्रांत के तालिबान गवर्नर के प्रवक्ता हाजी जाहिद ने कहा कि यदि पाकिस्तान की ओर से ऐसे हमले जारी रहते हैं तो पाकिस्तान के बड़े शहरों को निशाना बनाया जा सकता है. उन्होंने विशेष रूप से इस्लामाबाद, कराची और क्वेटा का उल्लेख किया।  यह बयान ऐसे समय आया है जब अफगानिस्तान में तालिबान प्रशासन ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तान की सेना ने अफगानिस्तान के कई इलाकों में हवाई हमले किए हैं. इन हमलों में राजधानी काबुल और कंधार सहित कुछ अन्य क्षेत्रों को भी निशाना बनाए जाने की खबरें हैं।  हाजी जाहिद,हाजी युसूफ के प्रवक्ता हैं. वफा को तालिबान के शीर्ष नेता हैबतुल्ला अखुंदजादा का करीबी माना जाता है और उत्तरी अफगानिस्तान में उनका प्रभाव काफी मजबूत बताया जाता है।  विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव का संकेत है. अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा लंबे समय से विवाद और सैन्य झड़पों का केंद्र रही है. समय-समय पर दोनों पक्ष एक-दूसरे पर सीमा पार हमलों और उग्रवादियों को समर्थन देने के आरोप लगाते रहे हैं।  ताजा बयान के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं. विश्लेषकों के मुताबिक यदि दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई और बयानबाजी इसी तरह जारी रही तो इससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ सकती है।  फिलहाल पाकिस्तान की ओर से तालिबान के इस बयान पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जरूरी होगी। 

ईरान के सुप्रीम लीडर पर विवादित रिपोर्ट, कोमा और पैर कटने की खबरें वायरल

तेहरान ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं. सबसे हैरान करने वाला दावा है कि मोजतबा खामेनेई कोमा में हैं. उनका एक पैर भी काट दिया गया है और उनकी हालत बेहद संजीदा है. ये दावा ब्रिटिश अखबार ‘द सन’ ने अपनी रिपोर्ट में किया है।  ‘द सन’ की ये रिपोर्ट उस समय सामने आई, जब कुछ घंटों पहले ही मोजतबा खामेनेई का पहला संदेश सामने आया, जिसमें उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों में हमले जारी रखे जाएंगे और होर्मुज स्ट्रेट की भी नाकेबंदी रहेगी।   ‘द सन’ ने ये रिपोर्ट अपने सूत्र के हवाले से चलाई है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मोजतबा खामेनेई की हालत बहुत खराब है और वह कोमा में है. वह अस्पताल में ईरान के स्वास्थ्य और शिक्षा मंत्री मोहम्मद रजा जफरगंदी की निगरानी में हैं. जफरगंदी ईरान के टॉप सर्जन्स में से एक हैं।  रिपोर्ट में क्या दावा किया गया? ‘द सन’ ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया कि मोजतबा खामेनेई तेहरान की सिना यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल में इंटेसिव केयर में है. इस बिल्डिंग के एक हिस्से को भारी सिक्योरिटी के बीच सील कर दिया गया है।  रिपोर्ट में बताया गया कि मोजतबा का एक पैर कट गया है और उनके पेट और लिवर को भी गंभीर चोटें आई हैं. हालांकि, यह साफ नहीं है कि मोजतबा खामेनेई 28 फरवरी को उसी हमले में घायल हुए थे, जिसमें आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई थी. हालांकि, ईरान के सरकारी टीवी के एंकर मोजतबा खामेनेई को ‘रमजान का जांबाज’ यानी ‘घायल योद्धा’ बताते हैं।  ‘द सन’ को सूत्र ने बताया, ‘उनका एक या दोनों पैर काट दिए गए हैं. उनका लिवर या पेट भी फट गया है. वह शायद कोमा में भी हैं.’ रिपोर्ट में कहा गया है कि दो दिन पहले ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान चुपके से मोजतबा खामेनेई से मिलने गए थे. सिना हॉस्पिटल की इंटेंसिव केयर यूनिट में सिर्फ कुछ ही ऑथराइज्ड लोगों को ही जाने की इजाजत है.  कितना मजबूत है ये दावा? 28 फरवरी से जब से अमेरिका-इजरायल और ईरान की जंग शुरू हुई है, तब से मोजतबा खामेनेई एक बार भी सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए हैं।  मोजतबा खामेनेई को 8 मार्च को ईरान का नया सुप्रीम लीडर चुना गया था. खामेनेई की मौत के लगभग एक हफ्ते बाद. उसी दिन ईरानी मीडिया ने खबरें दी थीं कि मोजतबा खामेनेई देश को संबोधित करेंगे. लेकिन ऐसा नहीं हुआ।  सुप्रीम लीडर चुने जाने के पांच दिन के बाद मोजतबा खामेनेई का पहला संदेश दुनिया के सामने आया. लेकिन उनके संदेश को टीवी पर एक एंकर ने पढ़ा. वह कैमरे पर भी दिखाई नहीं दिए।  ईरान के सरकारी टीवी रिपोर्ट्स के एंकर्स ने मोजतबा खामेनेई को ‘रमजान युद्ध का जांबाज’ यानी ‘घायल योद्धा’ बताया. हालांकि, इस बात की पुष्टि नहीं की कि मोजतबा 28 फरवरी को घायल हुए थे या नहीं।  इन्हीं सब बातों के कारण उनकी हेल्थ को लेकर अटकलें, अफवाहें और दावे और भी बढ़ गए हैं. हालांकि, अब तक मोजतबा खामेनेई को सिर्फ दावे ही किए जा रहे हैं, कुछ पुष्टि नहीं हुई है।   

CRPF में 27 हजार खाली पद, सेंट्रल फोर्स में 93 हजार रिक्तियां; 5 साल में इस्तीफे 86% बढ़े

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने  संसद में बताया कि सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स (CAPF) और असम राइफल्स में कुल 93,139 पद खाली हैं। यह जानकारी गृह राज्य मंत्री  नित्यानंद राय ने लिखित जवाब में दी।सबसे ज्यादा पद CRPF में 27,124 खाली हैं, वहीं CISF में 28,342 पद खाली हैं। सबसे कम खाली पद असम राइफल्स में 3,749 हैं। सरकार ने भर्ती प्रक्रिया तेज करने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें कर्मचारी चयन आयोग के माध्यम से हर साल कांस्टेबल भर्ती, प्रमुख रैंकों के लिए नोडल बल की व्यवस्था और शारीरिक परीक्षण में रेडियो फ्रीक्वेंसी पहचान तकनीक (RFID) का उपयोग शामिल है। 5 साल में CAPF में इस्तीफे 86% बढ़े CAPF में इस्तीफों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है। 2021 में 1,255 कर्मियों ने इस्तीफा दिया था, जबकि 2025 में यह संख्या बढ़कर 2,333 हो गई, यानी करीब 86% की बढ़ोतरी।  भर्ती प्रक्रिया का नया रास्ता राज्य मंत्री राय ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया को तेज करने के लिए कई ठोस कदम उठाए गए हैं। इनमें कर्मचारी चयन आयोग के जरिए हर साल कांस्टेबल भर्ती, प्रमुख रैंकों के लिए नोडल बल की व्यवस्था और शारीरिक परीक्षण में रेडियो फ्रीक्वेंसी पहचान तकनीक का इस्तेमाल शामिल है। सरकार का मानना है कि इन उपायों से रिक्तियों को भरने में तेजी आएगी। इस्तीफों की alarming बढ़ोतरी सरकार के मुताबिक CAPF में इस्तीफों की संख्या पिछले कुछ वर्षों में बढ़ी है। 2021 में 1,255 के मुकाबले 2025 में 2,333 कर्मियों ने इस्तीफा दिया, जो कि लगभग 86 प्रतिशत की बढ़ोतरी दिखाता है। हालांकि, सुसाइड, आपसी हत्या और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के मामलों में कमी आई है, जो एक सुकून भरी बात है। भारत टैक्सी का नया विस्तार इस बीच, भारत टैक्सी ने अपने राइड-हेलिंग सेवा का विस्तार करने का ऐलान किया है। सहकारी क्षेत्र की इस सेवा को अगले 2 से 3 वर्षों में सभी बड़े शहरों तक पहुँचाया जाएगा। सहकारिता राज्य मंत्री कृष्ण पाल ने कहा कि यह सेवा वर्तमान में दिल्ली-एनसीआर और गुजरात के अहमदाबाद, राजकोट, सोमनाथ और द्वारका में कार्यरत है। अब तक 4 लाख ड्राइवर इस सेवा से जुड़ चुके हैं। ग्रीन एक्सप्रेसवे का ऐतिहासिक प्रोजेक्ट सरकार ने ग्रीन एक्सप्रेसवे बनाने का एक बड़ा निर्णय लिया है। यह एक्सप्रेसवे सूरत से नासिक, अहमदनगर और सोलापुर होते हुए कुरनूल तक जाएगा। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि इससे दिल्ली-चेन्नई की दूरी 320 किलोमीटर घट जाएगी। साथ ही, दिल्ली-मुंबई यात्रा भी लगभग 12 घंटे में संभव होगी। गडकरी बोले- सूरत से कुरनूल तक ग्रीन एक्सप्रेसवे बनेगा सरकार सूरत से नासिक, अहमदनगर और सोलापुर होते हुए कुरनूल तक ग्रीन एक्सप्रेसवे बनाएगी। इससे दिल्ली-चेन्नई दूरी 320 किमी घटेगी। गडकरी ने कहा, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पूरा होने पर दिल्ली-मुंबई यात्रा भी लगभग 12 घंटे में संभव होगी।     2025 में एक लाख से ज्यादा पेंशन शिकायतें दर्ज- सरकार ने लोकसभा में बताया कि पोर्टल पर 2025 में 1.07 लाख पेंशन शिकायतें मिलीं। औसत निपटान समय 19 दिन रहा।     पीएम सूर्य घर योजना से 31 लाख लोग लाभान्वित- सरकार ने बताया कि पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत 6 मार्च 2026 तक 31.12 लाख घरों में रूफटॉप सोलर लगे। लक्ष्य 2027 तक एक करोड़ घरों का है।     वरिष्ठ पदों पर SC/ST प्रतिनिधित्व का डेटा नहीं- संयुक्त सचिव और उससे ऊपर के पदों पर एससी/एसटी प्रतिनिधित्व का अलग डेटा नहीं रखा जाता। पदोन्नति में ग्रुप-ए की शुरुआती श्रेणी तक 15% एससी और 7.5% एसटी आरक्षण है।     टीवी विज्ञापनों में चमत्कारी दावे नहीं कर सकते- सरकार ने कहा कि निजी टीवी चैनलों के सभी विज्ञापन केबल टीवी नेटवर्क एक्ट, 1995 के एडवरटाइजिंग कोड के तहत होंगे। चमत्कारी गुणों के दावे प्रतिबंधित हैं, उल्लंघन पर कार्रवाई होती है।    

ट्रैफिक से मुक्ति! Air Taxi का टेस्ट रन, मिनटों में पहुंचे ऑफिस और एयरपोर्ट

नई दिल्ली  आसमान में उड़ती टैक्सी. सुनने में अब भी थोड़ा साइंस-फिक्शन जैसा लगता है. लेकिन तकनीक की दुनिया इस सपने को धीरे-धीरे सच में बदल रही है. अमेरिकी कंपनी Joby Aviation ने अपनी पहली प्रोडक्शन इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी (Air Taxi) की उड़ान शुरू कर दी है. यानी एक ऐसी मशीन, जिसमें आने वाले समय में लोग बैठकर शहर के ऊपर से उड़ते हुए ऑफिस या एयरपोर्ट जा सकेंगे. कंपनी का दावा है कि अगर सब ठीक रहा तो जल्द ही यह एयर टैक्सी आम लोगों के लिए भी उपलब्ध हो सकेगी। जॉबी एविएशन ने घोषणा की है कि, कंपनी ने अपनी पहली प्रोडक्शन एयर टैक्सी की टेस्टिंग शुरू कर दी है. कंपनी का कहना है कि यह कदम पैसेंजर सर्विस शुरू करने की दिशा में एक बड़ा कदम है. अगर सब कुछ योजना के मुताबिक चला तो आने वाले समय में लोग शहरों के ऊपर से इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी में सफर करते नजर आ सकते हैं। कंपनी ने बताया कि शुरुआती उड़ानें उसके मरीना, कैलिफोर्निया स्थित प्लांट में की जा रही हैं. यहां कंपनी के पायलट एयरक्राफ्ट की टेस्टिंग कर रहे हैं. दरअसल, कंपनी ये टेस्टिंग इसलिए कर रही है ताकि एयरक्रॉफ्ट बिना किसी तकनीकी खामी के फेडरेशन के सामने पेश किया जा सके. अमेरिकी विमानन नियामक संस्था फेडरेशन एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) इसकी आधिकारिक जांच और सर्टिफिकेशन प्रक्रिया शुरू करेगी. कंपनी को उम्मीद है कि इसी साल इसके लिए जरूरी टेस्ट पूरे कर लिए जाएंगे। कैसी है ये Air Taxi Joby Aviation कई साल से इस प्रोजेक्ट पर काम कर रही है. कंपनी पहले ही नियामकों (रेगुलेटर्स) के साथ मिलकर एयरक्राफ्ट के डिजाइन, उसके पार्ट्स और प्रोडक्शन प्लान को मंजूरी दिलाने की प्रक्रिया में काफी आगे बढ़ चुकी है. कंपनी के डेवलपमेंट मॉडल पहले की टेस्टिंग में 50,000 मील से ज्यादा उड़ान भी भर चुके हैं. यानी टेक्निकली अब तक इस फ्लाइंग प्रोसेस में कंपनी कोई ख़ास समस्या नहीं आई है। Joby की एयर टैक्सी का डिजाइन काफी खास है. यह हेलिकॉप्टर और हवाई जहाज दोनों का मिला-जुला रूप है. इसमें 6 रोटर लगे हैं जो इसे अपनी जगह से ही सीधा टेक-ऑफ और लैंडिंग करने में मदद करते हैं. इसके बाद यह सामान्य एयरक्रॉफ्ट की तरह आगे की ओर उड़ान भरती है. यह इलेक्ट्रिक एयरक्राफ्ट एक पायलट और 4 पैसेंजर को लेकर उड़ान भर सकता है. कंपनी का दावा है कि यह हेलिकॉप्टर की तुलना में ज्यादा साइलेंट है। ये एक इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ एंड लैंडिंग (eVTOL) एयरक्राफ्ट जैसा होगा. इसकी अधिकतम रफ्तार करीब 200 मील प्रति घंटा (321 किमी/घंटा) होगी और एक बार चार्ज करने पर यह लगभग 100 मील (160 किमी) तक उड़ान भर सकेगी. शहर के भीतर यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए इसमें कई अलग-अलग लेवल की सेफ्टी सिस्टम भी लगाए गए हैं। जल्द शुरू होगी पैसेंजर सर्विस कंपनी की योजना इस साल के अंत तक Dubai में अपनी पहली पैसेंजर सर्विस शुरू करने की है. इसके लिए शहर में 4 लैंडिंग साइट बनाने की योजना है, जिनमें से दो पर काम शुरू हो चुका है. इसके अलावा कंपनी अमेरिका में भी लिमिटेड लेवल पर ऑपरेशन शुरू करने की तैयारी कर रही है. यह एक फेडरल प्रोग्राम का हिस्सा होगा, जिसका मकसद इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी को नेशनल एयरस्पेस में शामिल करना है। UBER का ऐलान हाल ही में मशहूर राइड-हेलिंग ऐप Uber ने ऐलान किया था कि, कंपनी जॉबी एविएशन के साथ मिलकर एयर टैक्सी सर्विस शुरू करने जा रही है. एयर टैक्सी की बुकिंग प्रक्रिया बिल्कुल सामान्य राइड की तरह होगी. आप ऐप खोलेंगे, अपना डेस्टिनेशन डालेंगे और अगर उस रास्ते पर हवाई सफर संभव होगा तो एयर टैक्सी का विकल्प अपने आप दिख जाएगा. इस एक ही बुकिंग में आपको पहले टेक-ऑफ प्वाइंट तक वाया रोड ले जाया जाएगा, फिर हवा में उड़ान होगी और उतरने के बाद आखिरी मंजिल तक फिर सड़क मार्ग से ही सफर कराया जाएगा. यानी पूरा सफर एक ही टिकट और एक ही ऐप में। आने वाले वर्षों में कंपनी अपने प्रोडक्शन को भी तेजी से बढ़ाने की योजना बना रही है. इसके लिए कैलिफोर्निया के प्लांट के साथ-साथ डेटन, ओहियो स्थित फैक्ट्री में भी प्रोडक्शन बढ़ाया जाएगा. कंपनी का टार्गेट है कि साल 2027 तक हर महीने करीब 4 एयरक्राफ्ट का निर्माण किया जाए. इससे भविष्य में बड़े पैमाने पर एयर टैक्सी सेवा शुरू करने का रास्ता साफ हो सकता है।

13 मार्च को किसानों को मिलेगा 22वीं किस्त का भुगतान, यह किसान नहीं होंगे पात्र, जानें लेटेस्ट अपडेट

नई दिल्ली  देशभर के करोड़ों किसान जिस किस्त का इंतजार कर रहे थे, उसका समय अब करीब आ गया है. सरकार ने साफ कर दिया है कि किसानों को मिलने वाली अगली राशि जल्द उनके खातों में पहुंचने वाली है. दरअसल पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों को हर साल आर्थिक मदद दी जाती है। जिससे खेती से जुड़े छोटे खर्चों में राहत मिल सके. कई दिनों से यह चर्चा चल रही थी कि अगली किस्त कब जारी होगी. अब इस पर तस्वीर साफ हो गई है. सरकार के मुताबिक पात्र किसानों के बैंक खातों में 13 मार्च को 22वीं किस्त भेजी जाएगी. हालांकि हर बार की तरह इस बार भी कुछ किसान ऐसे होंगे जिनके खाते में पैसे नहीं पहुंचेंगे। कब खाते में आएंगे 2 हजार रुपये? काफी समय से किसानों के बीच यह सवाल चल रहा था कि अगली किस्त कब जारी होगी. पहले माना जा रहा था कि फरवरी के आखिर तक पैसे आ सकते हैं. फिर यह चर्चा भी हुई कि होली से पहले किस्त जारी हो सकती है. अब सरकार की तरफ से यह साफ कर दिया गया है कि 13 मार्च को किसानों के खातों में 2000 रुपये भेजे जाएंगे. यह पैसा सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर किया जाता है, इसलिए किसानों को कहीं जाने की जरूरत नहीं होती। किसान योजना में ऐसे मिलता है फायदा     हर साल किसानों को कुल 6000 रुपये की मदद मिलती है.     यह रकम तीन किस्तों में दी जाती है.     हर चार महीने में 2,000 रुपये खाते में भेजे जाते हैं.     अब तक किसानों को 21 किस्तें मिल चुकी हैं.     अब 22वीं किस्त जारी होने के बाद लाखों किसानों को एक बार फिर सीधी आर्थिक मदद मिलने वाली है. इन किसानों को नहीं मिलेंगे पैसे हालांकि सभी किसानों को इस बार किस्त का फायदा नहीं मिलेगा. कुछ जरूरी नियम पूरे न होने पर किस्त अटक सकती है. सरकार ने पहले ही साफ कर दिया है कि योजना का लाभ लेने के लिए कुछ प्रक्रियाएं पूरी करना जरूरी है। अगर ये काम पूरे नहीं हैं तो पैसे रुक सकते हैं:     ई-केवाईसी पूरा नहीं किया है.     फार्मर आईडी नहीं बनवाई है.     बैंक खाते की जानकारी गलत है.     आधार और बैंक अकाउंट लिंक नहीं है. इन कारणों से कई किसानों की किस्त रुक जाती है. इसलिए जिन किसानों ने अभी तक ये काम पूरे नहीं किए हैं. उन्हें जल्द से जल्द अपडेट कर लेना चाहिए। आपके खाते में पैसे आएंगे या नहीं किसानों के लिए यह जानना भी आसान है कि उनके खाते में किस्त आएगी या नहीं. इसके लिए ऑनलाइन स्टेटस चेक किया जा सकता है.स्टेटस चेक करने के लिए ये आसान तरीका अपनाएं। ऐसे चेक करें स्टेटस     पीएम किसान की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं.     Farmers Corner में Know Your Status ऑप्शन पर क्लिक करें.     अपना रजिस्ट्रेशन नंबर और कैप्चा भरें.     इसके बाद स्क्रीन पर पूरी जानकारी दिखाई दे जाएगी. यहां से किसान यह भी देख सकते हैं कि उनका ई-केवाईसी, लैंड सीडिंग और आधार बैंक सीडिंग पूरा है या नहीं. अगर पहले किसी वजह से किस्त रुक गई थी और अब सभी जरूरी काम पूरे कर दिए गए हैं. तो आगे आने वाली किस्त फिर से मिल सकती है।

राहुल गांधी ने संसद में उठाया LPG-तेल संकट, एपस्टीन का नाम लेते ही सदन में हंगामा

नई दिल्ली लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने गुरुवार को ईरान-अमेरिका युद्ध की वजह से पैदा हुए तेल और एलपीजी संकट का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यह तो बस अभी शुरुआत है। इसका बहुत बुरा असर होगा। राहुल गांधी ने एपस्टीन का भी जिक्र किया, जिसके बाद हंगामा मच गया। राहुल गांधी ने कहा, ”मिडिल ईस्ट में जंग छिड़ गई है। अमेरिका, इजरायल और ईरान जंग में हैं। इस जंग के बहुत बड़े नतीजे होंगे। सेंट्रल रास्ता, जहां से दुनिया का 20 फीसदी तेल बहता है, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, बंद हो गया है। इसका बहुत बुरा असर होगा, खासकर हम पर, क्योंकि हमारे तेल और नैचुरल गैस का एक बहुत बड़ा हिस्सा स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज से आता है। दर्द तो अभी शुरू हुआ है। रेस्टोरेंट बंद हो रहे हैं। एलपीजी को लेकर बहुत ज़्यादा पैनिक है…यह तो बस शुरुआत है।”  

‘जो कर्ज देगा, पाकिस्तान उसका?’ संकट के बीच सऊदी अरब पहुंचे शहबाज शरीफ

इस्लामाबाद पाकिस्तान अकसर इस्लामिक एकता की बातें करता है। अब जबकि ईरान पर अमेरिका और इजरायल ने हमले किए हैं तो इस संघर्ष में सऊदी अरब भी अमेरिकी पाले में है। ऐसे हालात में पाकिस्तान ने इस्लामिक एकता की कोई दुहाई नहीं दी है और सीधे तौर पर सऊदी अरब के साथ दिख रहा है। यहां उसने ना तो सऊदी अरब को इस्लामिक एकता की सीख दी और ना ही ईरान से समझौते की अपील की। उसने सीधे तौर पर सऊदी अरब का साथ दिया है और पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ खुद ही इस्लामिक मुल्क पहुंच गए हैं। इससे पहले पाकिस्तान ने सऊदी अरब की सुरक्षा चिंता पर बात की थी। उसके इस रुख को लेकर माना जा रहा है कि पाकिस्तान ने सिर्फ अपने कर्ज के हित को देखते हुए सऊदी अरब का साथ दिया है। इसके अलावा शिया और सुन्नी वाला विवाद भी अहम है। पाकिस्तान नहीं चाहता कि वह शिया मुल्क ईरान के साथ बहुत ज्यादा दिखे, जबकि सुन्नी देश सऊदी अरब के साथ रहना आंतरिक राजनीति में भी फायदा देगा। फिर सऊदी अरब से मोटा कर्ज पाकिस्तान को मिलता रहा है और बदहाली के दौर में ऊर्जा सुरक्षा की गारंटी भी उसे मिलती रही है। बदले में पाकिस्तान ने अपने परमाणु हथियारों की धौंस दिखाते हुए सऊदी अरब को सुरक्षा की गारंटी देने के प्रयास किए हैं। बीते साल दोनों देशों का एक डिफेंस समझौता भी हुआ था। इसमें सऊदी अरब और पाकिस्तान ने तय किया था कि किसी एक मुल्क पर हमला दोनों पर माना जाएगा और मिलकर लड़ेंगे। अब मुश्किल यह है कि सऊदी अरब पर वह ईरान हमले कर रहा है, जो खुद एक इस्लामिक देश है। पाकिस्तान के लिए मुसीबत यह है कि फंड उसे सऊदी अरब से मिलता है, जबकि पड़ोस में ईरान है। यदि पाकिस्तान ने सऊदी अरब से ज्यादा नजदीकी बढ़ाई तो फिर बलूचिस्तान में ईरान भी मुश्किलें बढ़ा सकता है। बलूचिस्तान एक सांस्कृतिक इकाई है, जिसका एक बड़ा हिस्सा ईरान में भी लगता है। ऐसे में यहां के पेच हमेशा उसके पास रहे हैं और वह कभी भी पाकिस्तान की परेशानी बढ़ा सकता है। पाक पीएम के प्रवक्ता ने कहा- हम सऊदी अरब के साथ बता दें कि एक दिन पहले ही पाकिस्तानी पीएम के प्रवक्ता मुशर्रफ जैदी ने कहा था कि सऊदी अरब को जहां भी जरूरत होगी, हम खड़े मिलेंगे। इस बीच शहबाज शरीफ खुद ही सऊदी अरब निकले हैं। सरकारी सूत्रों का कहना है कि वह मोहम्मद बिन सलमान के निमंत्रण पर पहुंचे हैं। इस दौरान दोनों देशों के बीच क्षेत्रीय अशांति, अस्थिरता और ईरान के रुख को लेकर बात हो सकती है। शहबाज शरीफ सिर्फ एक दिन की विजिट पर ही सऊदी अरब पहुंचे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि शायद कोई अहम बात करने के लिए वह निकले हैं।  

एशिया में ईंधन की किल्लत से हाहाकार: सरकारों के बड़े फैसले, लोगों की दिनचर्या पर पड़ा असर

ईरान ईरान पर अमेरिकी-इजरायल हमले के बाद मध्य-पूर्व में छिड़े संघर्ष और तेल-गैस की कीमतों में भारी उछाल के बीच भारत समेत सभी एशियाई देशों ने ऊर्जा बचाने और आर्थिक असर को कम करने के लिए कई आपात कदम उठाए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार एशिया अपनी कुल तेल जरूरतों का लगभग 60% मध्य-पूर्व से आयात करता है, इसलिए ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव का असर इस क्षेत्र पर सबसे ज्यादा पड़ता है। इंधन संकट को देखते हुए भारत ने रणनीतिक तेल भंडार का उपयोग, रूस से तेल आयात में वृद्धि, और घरेलू रिफाइनरियों को LPG उत्पादन बढ़ाने के निर्देश जैसे कड़े कदम उठाए हैं। इसके अलावा सरकार ने जमाखोरी रोकने के लिए कड़ी निगरानी कर रही है, वैकल्पिक आपूर्ति मार्ग तलाश रही है, और खुदरा कीमतों को स्थिर रखने का प्रयास कर रही है। भारत ने आपात प्रावधानों का उपयोग करते हुए एलपीजी (LPG) को औद्योगिक उपयोग से हटाकर घरेलू उपभोक्ताओं की ओर मोड़ने का भी फैसला किया है, ताकि आम जनता को गैस की कमी का सामना न करना पड़े। सरकार ने राज्यों को एलपीजी की कालाबाजारी रोकने के लिए सतर्क रहने और मॉनिटरिंग बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। पड़ोसी देशों में क्या उपाय किए जा रहे पूर्वी पड़ोसी देश बांग्लादेश फिलहाल गंभीर ईंधन संकट (Fuel Crisis) का सामना कर रहा है, जिसका मुख्य कारण मध्य पूर्व में चल रहा ईरान युद्ध है। देश की 95% ऊर्जा जरूरतें आयात पर निर्भर हैं, जो वैश्विक आपूर्ति बाधित होने के कारण प्रभावित हुई हैं। इस संकट की वजह से बांग्लादेश में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं क्योंकि सरकार ने ईंधन आपूर्ति सीमित कर दी है। ऊर्जा बचत के लिए कई विश्वविद्यालयों को भी अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। संकट के बीच भारत ने “नेबरहुड फर्स्ट” नीति के तहत बांग्लादेश को 5,000 टन डीजल की पहली खेप पाइपलाइन के जरिए भेजी है। पाकिस्तान में स्कूल बंद, सेवाएं ऑनलाइन पश्चिमी पड़ोसी देश पाकिस्तान ने भी ईंधन संकट के बीच ऊर्जा बचत के लिए कई सख्त कदम उठाए हैं। पाक सरकार ने सरकारी वाहनों के ईंधन में 50% कटौती कर दी है, जबकि दफ्तरों में 4-दिवसीय कार्य सप्ताह लागू किया है। इसके अलावा 50% कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम करने का आदेश दिया गया है। स्कूलों को दो सप्ताह के लिए बंद करना, और सरकारी स्तर पर अनावश्यक कार्यक्रमों पर भी रोक लगा दी गई है। पाकिस्तान ने मंत्रियों, सलाहकारों और सरकारी अधिकारियों के विदेशी दौरों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। सरकारी इफ्तार पार्टियों और कार्यक्रमों पर भी पूर्ण पाबंदी लगा दी है। अन्य एशियाई देशों में क्या कदम? चीन ने ईंधन संकट से बचने के लिए अपने विशाल स्ट्रैटेजिक ऑयल रिजर्व (रणनीतिक तेल भंडार) का उपयोग शुरू कर दिया है, जो 100 दिनों से अधिक की जरूरतें पूरी कर सकते हैं। इसके साथ ही, चीन ने क्रूड ऑयल की खरीद बढ़ा दी है और ईंधन निर्यात को अस्थाई रूप से रोक दिया है। चीन ने अगले पांच वर्षों में कार्बन तीव्रता घटाने और नवीकरणीय ऊर्जा पर निवेश बढ़ाने की योजना तेज कर दी है।   विदेश यात्राओं पर रोक दक्षिण कोरिया ने बड़ा कदम उठाते हुए लगभग 30 वर्षों में पहली बार ईंधन कीमतों पर सीमा (price cap) लगाने का निर्णय लिया है। साथ ही वह होर्मुज स्ट्रेट के बाहर अन्य स्रोतों से ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है। वहीं दक्षिण-पूर्वी एशियाई देश वियतनाम ने कंपनियों से कर्मचारियों को वर्क-फ्रॉम-होम (WFH) की सुविधा देने की अपील की है। थाईलैंड ने सरकारी कर्मचारियों को विदेश यात्राएं रोकने और घर से काम करने के निर्देश दिए हैं, जबकि फिलिपीन्स में कुछ सरकारी कार्यालयों में अस्थायी रूप से चार दिन का कार्य सप्ताह लागू किया गया है। साथ ही एयर-कंडीशनिंग का तापमान 24°C से कम न रखने का निर्देश दिया गया है और बैठकों को वर्चुअल तरीके से करने को कहा गया है। संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी इस बीच, संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि यदि ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान लंबे समय तक जारी रहा तो खाद और खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेज वृद्धि हो सकती है, जिसका सबसे अधिक असर एशिया की कमजोर अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ेगा। विश्लेषकों का कहना है कि ऊर्जा संकट लंबा खिंचने पर एशिया की अर्थव्यवस्थाओं और आम जनता दोनों पर बड़ा दबाव पड़ सकता है।  

एलपीजी सप्लाई में सुधार, उत्पादन 28% बढ़ा; 2.5 दिन में घर पहुंचेगा सिलेंडर: पुरी

नई दिल्ली पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरुवार को संसद में कहा कि पिछले पांच दिनों में रिफाइनरियों को दिए गए निर्देशों के बाद एलपीजी उत्पादन में 28 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। साथ ही अतिरिक्त एलपीजी की खरीद भी सक्रिय रूप से की जा रही है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता यह है कि देश के 33 करोड़ से अधिक परिवारों, खासकर गरीब और वंचित वर्ग की रसोई में गैस की कमी न हो। उन्होंने बताया कि घरेलू गैस की सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित है और सिलेंडर की डिलीवरी का समय पहले की तरह ही बना हुआ है। पुरी ने संसद को बताया कि घरेलू एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग से लेकर डिलीवरी तक का औसत समय अभी भी 2.5 दिन है, जो संकट से पहले भी इतना ही था। इसके अलावा, अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को प्राथमिकता के आधार पर बिना रुकावट गैस सप्लाई दी जा रही है। उन्होंने कहा कि कुछ जगहों से ऐसी जानकारी मिली है कि डिस्ट्रीब्यूटर और रिटेल स्तर पर गैस सिलेंडर जमा करने और घबराहट में ज्यादा बुकिंग करने की प्रवृत्ति देखी जा रही है। हालांकि यह स्थिति किसी वास्तविक सप्लाई की कमी के कारण नहीं, बल्कि लोगों की चिंता के कारण पैदा हुई है। पुरी ने आगे कहा कि सरकार डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (डीएसी) प्रणाली का विस्तार कर रही है। अभी यह करीब 50 प्रतिशत उपभोक्ताओं के लिए लागू है, जिसे बढ़ाकर 90 प्रतिशत तक किया जा रहा है। इस व्यवस्था में सिलेंडर की डिलीवरी तभी दर्ज होगी, जब उपभोक्ता अपने मोबाइल पर आए वन-टाइम कोड से इसकी पुष्टि करेगा, जिससे गैस की गलत तरीके से सप्लाई या हेरफेर को रोकना आसान होगा। मांग को संतुलित रखने के लिए शहरी क्षेत्रों में गैस सिलेंडर की बुकिंग के बीच कम से कम 25 दिन का अंतर और ग्रामीण तथा दुर्गम क्षेत्रों में 45 दिन का अंतर तय किया गया है। मंत्री ने बताया कि तेल मार्केटिंग कंपनियों के फील्ड अधिकारी और एंटी-अडल्टरेशन सेल डिस्ट्रीब्यूटर स्तर पर निगरानी कर रहे हैं। इसके अलावा केंद्रीय गृह सचिव ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ बैठक कर राज्य प्रशासन को इस व्यवस्था के साथ जोड़ने पर चर्चा की है। पुरी ने कहा कि कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई को नियंत्रित करने का उद्देश्य काला बाजारी रोकना है, न कि होटल और रेस्टोरेंट उद्योग को नुकसान पहुंचाना। कमर्शियल एलपीजी पूरी तरह बाजार आधारित कीमत पर बिना सब्सिडी के बेची जाती है और इसके लिए कोई पंजीकरण या बुकिंग प्रणाली नहीं होती। उन्होंने कहा कि अगर कमर्शियल एलपीजी की बिक्री पूरी तरह खुली छोड़ दी जाती, तो काउंटर से खरीदे गए सिलेंडर अवैध बाजार में भेजे जा सकते थे, जिससे असली व्यावसायिक और घरेलू उपभोक्ताओं को नुकसान होता। इसलिए सरकार ने स्पष्ट प्राथमिकता और पारदर्शी आवंटन प्रणाली लागू की है। इस व्यवस्था की निगरानी के लिए इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम के कार्यकारी निदेशकों की तीन सदस्यीय समिति 9 मार्च को बनाई गई थी। इस समिति ने देश भर में राज्य के नागरिक आपूर्ति विभागों और रेस्तरां संघों के साथ बैठकें आयोजित की हैं और ये बैठकें जारी हैं। समिति ने विभिन्न क्षेत्रों और सेक्टरों के आधार पर कमर्शियल एलपीजी की वास्तविक जरूरत का आकलन किया है। इसके तहत एक बड़े फैसले में आज से तेल कंपनियां औसत मासिक कमर्शियल एलपीजी मांग का 20 प्रतिशत हिस्सा आवंटित करेंगी, ताकि जमाखोरी और काला बाजारी न हो। पुरी ने कहा कि एलपीजी और गैस पर दबाव कम करने के लिए वैकल्पिक ईंधन विकल्पों को भी सक्रिय किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि हालिया 60 रुपए के समायोजन के बाद बिना सब्सिडी वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 913 रुपए है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार के हिसाब से इसकी कीमत करीब 987 रुपए होनी चाहिए थी। वैश्विक कीमतों के अनुसार, प्रति सिलेंडर 134 रुपए की बढ़ोतरी की जरूरत थी, लेकिन सरकार ने 74 रुपए खुद वहन किए। इसके कारण उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए अतिरिक्त खर्च प्रतिदिन 80 पैसे से भी कम बैठता है। पुरी ने बताया कि पड़ोसी देशों में एलपीजी की कीमतें भारत से ज्यादा हैं। पाकिस्तान में एलपीजी सिलेंडर करीब 1,046 रुपए, श्रीलंका में 1,242 रुपए और नेपाल में 1,208 रुपए के आसपास है। उन्होंने यह भी कहा कि तेल मार्केटिंग कंपनियों को 2024-25 में हुए करीब 40,000 करोड़ रुपए के नुकसान की भरपाई के लिए सरकार ने 30,000 करोड़ रुपए के मुआवजे को मंजूरी दी है।

भारत-ईरान संवाद जारी: जयशंकर ने ईरानी समकक्ष से तीन बार की बातचीत, जहाजों की सुरक्षा पर चिंता

नई दिल्ली   ईरान-अमेरिका युद्ध की वजह से दुनियाभर में तेल संकट पैदा हो गया है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से किसी भी कार्गो जहाज को जाने से मनाही है, जिसकी वजह से कच्चे तेल के आयात पर असर पड़ा है। इस बीच, भारत सरकार ने बताया है कि भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर की पिछले कुछ दिनों में ईरानी विदेश मंत्री के साथ तीन बार बातचीत हुई है। आखिरी बातचीत में शिपिंग (जहाजों) की सुरक्षा और भारत में ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि इसके अलावा, इस मामले में मेरे लिए कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। इससे पहले, पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य संघर्ष के बीच, भारत सरकार ने बुधवार को कहा कि खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले लगभग एक करोड़ भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा और कल्याण उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बुधवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पश्चिम एशिया संकट के दौरान एक पोत पर हुए हमले में दो भारतीयों की मौत हो गई और एक लापता हो गया। उन्होंने कहा, ”प्रवासी समुदाय की सुरक्षा और कल्याण हमारे लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है।” प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कतर, सऊदी अरब, ओमान, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन और इजराइल समेत क्षेत्र के कई नेताओं से बातचीत की है, वहीं विदेश मंत्री एस जयशंकर भी इन देशों के साथ-साथ ईरान के अपने समकक्षों के साथ नियमित संपर्क में हैं। जायसवाल ने कहा, ”हम अपने नागरिकों, जीसीसी और पश्चिम एशियाई देशों में रहने वाले अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस क्षेत्र में हमारे सभी मिशन समुदाय के सदस्यों के साथ नियमित संपर्क में हैं।” उन्होंने कहा कि वाणज्यिक जहाजों से जुड़ी घटनाओं में दो भारतीयों की मौत हो गई है और एक लापता है। जायसवाल ने कहा, ”जीसीसी क्षेत्र में घायल हुए कुछ अन्य भारतीयों की देखभाल की जा रही है। उनका इलाज जारी है और हमारा दूतावास और वाणिज्य दूतावास उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उनके साथ लगातार संपर्क में हैं।” उन्होंने कहा कि विदेश मंत्रालय इस क्षेत्र में भारतीय नागरिकों से जुड़ी स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है और भारतीय दूतावास प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) देशों में भारत के लगभग एक करोड़ नागरिक रहते हैं और उनकी सुरक्षा हमारी प्राथमिकता बनी हुई है।  

OBC आरक्षण मामला: क्रीमी लेयर तय करने में सिर्फ आय को आधार नहीं बना सकते – सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षण को लेकर एक बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि किसी उम्मीदवार के क्रीमी लेयर में होने या न होने का निर्धारण केवल उसकी पारिवारिक आय के आधार पर नहीं किया जा सकता है। पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा, “पदों की श्रेणियों और स्टेटस मापदंडों का संदर्भ लिए बिना, केवल आय के आधार पर क्रीमी लेयर का दर्जा तय करना कानून की दृष्टि से टिकाऊ नहीं है।” अदालत का मानना है कि आय के साथ-साथ व्यक्ति के सामाजिक और व्यावसायिक पद को भी ध्यान में रखा जाना अनिवार्य है। क्या है क्रीमी लेयर की अवधारणा? क्रीमी लेयर शब्द का प्रयोग ओबीसी समुदाय के उन लोगों के लिए किया जाता है जो आर्थिक और सामाजिक रूप से काफी समृद्ध हो चुके हैं। आरक्षण का लाभ इस वर्ग को न मिलकर समुदाय के उन गरीब और पिछड़े लोगों तक पहुंचे, जिन्हें इसकी वास्तव में आवश्यकता है। इस अवधारणा की शुरुआत 1992 के प्रसिद्ध इंद्रा सहनी बनाम भारत सरकार मामले के बाद हुई थी। तब सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी आरक्षण को तो बरकरार रखा था, लेकिन संपन्न तबके को इससे बाहर रखने का आदेश दिया था। इसके बाद 1993 में सरकार ने इसे लागू करने के नियम बनाए थे। वर्तमान नियमों के अनुसार, यदि किसी ओबीसी परिवार की वार्षिक आय 8 लाख रुपये से अधिक है तो उसे क्रीमी लेयर में माना जाता है। ऐसे उम्मीदवार सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण के हकदार नहीं होते। आय की यह सीमा आखिरी बार 2017 में 6 लाख रुपये से बढ़ाकर 8 लाख रुपये की गई थी। आय के अलावा उच्च संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों, वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, सशस्त्र बलों के उच्च अधिकारियों और बड़े व्यवसायियों के बच्चों को भी क्रीमी लेयर की श्रेणी में रखा जाता है। सुप्रीम कोर्ट के इस नए फैसले से सरकार पर क्रीमी लेयर की पहचान करने वाले 1993 के नियमों की समीक्षा करने का दबाव बढ़ सकता है। अदालत ने संकेत दिया है कि केवल पैसे को पैमाना मान लेना सामाजिक न्याय के व्यापक उद्देश्यों के खिलाफ हो सकता है। उदाहरण के लिए एक कम वेतन पाने वाला व्यक्ति भी अगर ऊंचे प्रशासनिक पद पर है तो उसकी सामाजिक स्थिति एक अमीर व्यापारी से भिन्न हो सकती है।  

एलपीजी उपभोक्ताओं को राहत: वित्त वर्ष 2025-26 में 30,000 करोड़ की सब्सिडी का ऐलान

नई दिल्ली सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 में सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों (पीएसयू) को एलपीजी सब्सिडी के लिए 30,000 करोड़ रुपए देने को मंजूरी दी है। यह राशि इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी तेल कंपनियों को दी जाएगी ताकि वे घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) सिलेंडर को रियायती कीमतों पर उपलब्ध करा सकें। यह जानकारी गुरुवार को संसद में दी गई। दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत फिलहाल 913 रुपए है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) के तहत गरीब उपभोक्ताओं को प्रति सिलेंडर 300 रुपए की लक्षित सब्सिडी देने के बाद केंद्र सरकार लाभार्थियों को 14.2 किलोग्राम एलपीजी सिलेंडर 613 रुपए प्रति सिलेंडर (दिल्ली में) की प्रभावी कीमत पर उपलब्ध करा रही है। घरेलू बाजार में एलपीजी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए मंत्रालय ने सभी घरेलू तेल रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स को सी3 और सी4 गैस स्ट्रीम को एलपीजी उत्पादन के लिए इस्तेमाल करने का निर्देश दिया है। मंत्री ने बताया कि यह एलपीजी उत्पादन सिर्फ सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को सप्लाई किया जाएगा। यह आदेश आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत जारी किए गए हैं। सुरेश गोपी ने यह भी कहा कि सरकार ने इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड (आईएसपीआरएल) नाम की विशेष कंपनी के जरिए 5.33 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता वाले रणनीतिक कच्चे तेल भंडार बनाए हैं। ये भंडार ईरान युद्ध जैसे हालात में सप्लाई चेन में आने वाली बाधाओं से निपटने में मदद करेंगे। मंत्री ने बताया कि देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बाजार के अनुसार तय होती हैं, और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल मार्केटिंग कंपनियां इनकी कीमतों पर फैसला करती हैं। हालांकि जरूरत पड़ने पर सरकार टैक्स संरचना में बदलाव करके उपभोक्ताओं पर बोझ कम करने के लिए वित्तीय हस्तक्षेप भी करती है।उन्होंने बताया कि नवंबर 2021 और मई 2022 में केंद्र सरकार ने दो चरणों में पेट्रोल पर 13 रुपए और डीजल पर 16 रुपए प्रति लीटर तक केंद्रीय उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) कम की थी, जिसका पूरा फायदा उपभोक्ताओं को दिया गया था। इसके अलावा मार्च 2024 में तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में 2 रुपए प्रति लीटर की कटौती की थी। हालांकि अप्रैल 2025 में जब पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 2 रुपए प्रति लीटर बढ़ाई गई, तब इसका बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला गया।

Indane यूजर्स परेशान: सिस्टम क्रैश होने से गैस सिलेंडर बुकिंग ठप

नई दिल्ली दुनिया के कई हिस्सों में चल रहे युद्ध और बढ़ते अंतरराष्ट्रीय तनाव की वजह से गैस सिलेंडर की कमी हो रही है। इसी वजह से अचानक गैस बुकिंग की कॉल्स में भारी बढ़ोतरी देखने को मिली है। मनीकंट्रोल के मुताबिक, गैस बुकिंग के लिए आने वाली कॉल्स सामान्य दिनों की तुलना में 8 से 10 गुना तक बढ़ गईं, जिससे Indane का बुकिंग सिस्टम कुछ समय के लिए क्रैश हो गया। इसका असर यह हुआ कि कई यूजर्स फोन, ऐप या वेबसाइट के जरिए सिलेंडर बुक नहीं कर पाए और उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा। कुछ शहरों में तो लोग सीधे गैस एजेंसी के दफ्तर पहुंच गए, जिससे वहां लंबी लाइनें भी लग गईं। वहीं रिसर्चर्स का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय हालात और गैस सप्लाई को लेकर बनी चिंता के कारण लोगों ने एक साथ सिलेंडर बुक करना शुरू कर दिया, जिससे सिस्टम पर अचानक ज्यादा दबाव पड़ गया। ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि आखिर LPG बुकिंग सिस्टम क्यों क्रैश हुआ और इसका यूजर्स पर क्या असर पड़ सकता है। इसी वजह से कई जगह लोगों को IVRS नंबर या मिस्ड कॉल के जरिए सिलेंडर बुक करने में दिक्कत हुई। कुछ जगहों पर तो लोग सीधे गैस एजेंसी के दफ्तर पहुंच गए, जिससे वहां लंबी लाइनें लग गईं। 8–10 गुना बढ़ी कॉल्स से सिस्टम पर पड़ा दबाव मनीकंट्रोल के अनुसार Indane के IVRS और मिस्ड कॉल नंबर पर बुकिंग के लिए अचानक कॉल्स की संख्या बहुत ज्यादा बढ़ गई। सामान्य दिनों के मुकाबले कॉल्स लगभग 8 से 10 गुना ज्यादा आ गईं। कंपनी ने अपने डीलरों को भेजे एक message में बताया कि इतनी ज्यादा कॉल्स आने की वजह से पूरा सिस्टम भारी दबाव में आ गया और कई बार ग्राहकों को कनेक्ट होने में दिक्कत होने लगी। लोगों की हुई परेशानी सिस्टम में आई टेक्निकल दिक्कत की वजह से कई शहरों में लोग गैस सिलेंडर बुक नहीं कर पाए। कुछ जगहों पर मोबाइल ऐप और वेबसाइट भी ठीक से काम नहीं कर रही थीं। ऐसे में कई लोग सीधे गैस एजेंसी के दफ्तर पहुंच गए, जिससे वहां लंबी लाइनें लग गईं और काफी भीड़ देखने को मिली। कई ग्राहकों ने शिकायत की कि उन्होंने कई बार कॉल करने की कोशिश की लेकिन बुकिंग नहीं हो सकी। सरकार ने बदला गैस बुकिंग का नियम सरकार ने घरेलू LPG सिलेंडर की बुकिंग को लेकर एक नया नियम भी लागू किया है। अब एक सिलेंडर बुक करने के बाद दूसरा सिलेंडर बुक करने के लिए कम से कम 25 दिन का इंतजार करना होगा। पहले यह समय 21 दिन था। सरकार का कहना है कि यह कदम इसलिए उठाया है ताकि लोग जरूरत से ज्यादा सिलेंडर बुक न करें और सभी यूजर्स को गैस मिल सके।  

एयर चीफ मार्शल की सोलो उड़ान से गूंजा आसमान, मल्टी-रोल फाइटर जेट के साथ वायु सेना का शक्ति प्रदर्शन

नई दिल्ली आज भारत की वायु सेना का सीमावर्ती क्षेत्र में मजबूत प्रदर्शन करने के लिए देखने को मिला। भारतीय वायु सेना के प्रमुख एयर चीफ़ मार्शल एपी सिंह ने आज मिग-29 यूपीजी मल्टी-रोल लड़ाकू विमान को अकेले उड़ाया। एपी सिंह ने एक प्रमुख सीमावर्ती बेस से उड़ान भरी। विमान के लैंड करने का वीडियो भी सामने आया है।   अपनी यात्रा के बाद, एयर चीफ़ ने बेस पर भारतीय वायु सेना के  पूर्व सैनिकों से भी बातचीत की। इस दौरे में भारतीय वायु सेना की ऑपरेशनल तैयारी, लड़ाकू क्षमताओं और फ़ॉरवर्ड बेस पर मिशन की तैयारी पर ज़ोर दिया गया। मिकोयान MiG-29 सोवियत यूनियन का बनाया हुआ एक द्वी-इंजन लड़ाकू विमान है। भारतीय वायु सेना चार दशकों से इस्तमाल हो रहे अपने MiG-29 फ़्लीट को अपग्रेड करने का फ़ैसला किया था। सोवियत में बना यह विमान 1970 के दशक में बनाया गया था और 1980 के दशक में वायु सेना में शामिल किया गया था। इसे असल में अमेरिकन F-16 लड़ाकू विमान का मुकाबला करने के लिए बनाया गया था। MiG-29 के कई वेरिएंट हैं, जिनमें से कुछ का इस्तेमाल भारतीय नौसेना भी करती है। मिकोयान MiG-29 (अपग्रेड) चौथी जेनरेशन का सर्वश्रेष्ठता लड़ाकू विमान है। इस विमान को नई एवियोनिक्स, रडार और हवा ही हवा में रिफ्यूलिंग क्षमता के साथ अपग्रेड किया गया है। यह विमान जानलेवा है और हवा ही हवा, हवा से जमीन और सटीक गोला-बारूद दागने में सक्षम है।

ईरान में अमेरिकी कोशिशें नाकाम! खामेनेई के बेटे की सरकार पर कोई संकट नहीं

वाशिंगटन अमेरिका और इजरायल बीते 13 दिनों से ईरान पर लगातार हमले कर रहे हैं। शुरुआती दिनों ही ईरान के शीर्ष नेता अयातुल्लाह खामेनेई मारे गए थे, लेकिन अब भी देश की जनता का भरोसा अपने नेतृत्व पर कायम है। यह बात तो खुद अमेरिकी एजेंसियों ने भी स्वीकार की है। अमेरिकी इंटेलिजेंस सूत्रों का कहना है कि ईरान की सरकार गिरने का फिलहाल कोई संकेत नहीं है। इसकी वजह यह है कि अब भी जनता पर उसकी पकड़ बनी हुई है। तीन अमेरिकी खुफिया सूत्रों ने कहा कि ईरान की जनता पर लीडरशिप की पकड़ कायम है। इसका अर्थ यह है कि अयातुल्लाह खामेनेई के बेटे मुजतबा खामेनेई को जनता ने स्वीकार कर लिया है। सूत्रों का कहना है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने बीते कुछ दिनों में यह जानकारी निकाली है। दुनिया भर में तेल की कीमतों में तेजी से इजाफा हुआ है। इसके अलावा गैस की भी किल्लत हो रही है। शायद इसी को ध्यान में रखते हुए अमेरिका का कहना है कि हम जल्दी ही जंग खत्म कर सकते हैं। लेकिन यह ईरान के नेतृत्व का शायद जज्बा है या फिर उसे मिल रहा जनता का समर्थन है कि उसका कहना है कि जंग भले ही अमेरिका ने शुरू की थी, लेकिन इसे अब खत्म हम ही करेंगे। यह बात दिलचस्प है कि ईरान के शीर्ष नेता मारे गए हैं। फिर भी उसकी नई लीडरशिप को जनता ने ना सिर्फ स्वीकार किया है बल्कि उसके साथ खड़ी है। ईरानी लीडरशिप को मिली ताकत से कैसे अमेरिका को झटका यह अहम इसलिए भी है क्योंकि अमेरिका को उम्मीद थी कि खामेनेई के मारे जाने के बाद ईरान की जनता सड़कों पर होगी। फिर लोकतंत्र बहाली के नाम पर वह दखल दे सकेगा और अपने किसी करीबी को कमान सौंपा देगा। निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी को ऐसी उम्मीदें भी थीं, लेकिन जनता ने खामेनेई के बेटे को ही लीडर मान लिया है। ऐसे हालात तब हैं, जबकि अमेरिका लगातार हमले कर रहा है और मुजतबा खुद भी खतरे में हैं। जंग के पहले ही दिन मारे गए थे अयातुल्लाह खामेनेई, अब तक नहीं निकला जनाजा बता दें कि जंग के पहले ही दिन अयातुल्लाह खामेनेई मारे गए थे। उनका तब से अब तक जनाजा नहीं निकाला गया है। माना जा रहा है कि इस नमाज-ए-जनाजा में करोड़ों की भीड़ जुटेगी। इसी के कारण ईरानी लीडरशिप उन्हें अभी दफनाने से बच रहा है। यदि ऐसा कोई आयोजन हुआ तो अमेरिका और इजरायल एक बार फिर से बड़ी तबाही कर सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि सीजफायर के हालात बनने पर ही शायद अब खामेनेई का अंतिम संस्कार किया जाएगा।  

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