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सावरकर टिप्पणी विवाद थमा, कोर्ट ने राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि केस किया बंद

मुंबई महाराष्ट्र के नासिक जिले की एक आपराधिक अदालत ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी को बुधवार, 11 मार्च को बड़ी राहत दी है। एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट आर.एल. नरवाडे की अदालत ने गांधी के खिलाफ दायर मानहानि के एक मामले को बंद कर दिया है। यह मामला उनके द्वारा हिंदुत्व विचारक विनायक दामोदर सावरकर को लेकर की गई टिप्पणियों से जुड़ा था, जो उन्होंने 2022 में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान की थीं। अकोला में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सावरकर से जुड़े कुछ ऐतिहासिक दस्तावेज दिखाते हुए टिप्पणी की थी। राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत नासिक स्थित निर्भया फाउंडेशन के अध्यक्ष देवेंद्र भुटाडा ने दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि 15 और 16 जून, 2022 को हिंगोली और अकोला में रैलियों में गांधी की टिप्पणियां मानहानि करने वाली और अपमानजनक थीं। किन धाराओं में मामला दर्ज हुआ था भुटाडा की शिकायत के आधार पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 499 (मानहानि) और 504 (जानबूझकर अपमान) के तहत मामला दर्ज किया गया था। सितंबर 2024 में नासिक अदालत ने राहुल गांधी को इस मामले में समन भी जारी किया था। बाद में राहुल गांधी को अदालत से जमानत मिल गई और उन्हें कार्यवाही में वर्चुअल माध्यम से उपस्थित होने की अनुमति भी दी गई। सुनवाई के दौरान उन्होंने खुद को निर्दोष बताया था। शिकायतकर्ता ने वापस ली शिकायत बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने पहले दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 202 के तहत जांच के आदेश दिए थे। पुलिस की रिपोर्ट आने के बाद शिकायतकर्ता ने अदालत में आवेदन देकर मामला वापस लेने की मांग की थी। इसके बाद ट्रायल जज ने मानहानि से जुड़ी पूरी कार्यवाही को औपचारिक रूप से बंद कर दिया।  

8th Pay Commission अपडेट: 6% वार्षिक इंक्रीमेंट और नए DA फॉर्मूले की मांग, सैलरी स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव संभव

नई दिल्ली केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए बनने वाले अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी संघ (AIDEF) ने 8वां केंद्रीय वेतन आयोग को कई अहम सुझाव दिए हैं। कर्मचारी संगठन ने आयोग की चेयरपर्सन न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई को भेजे अपने जवाब में कुल 17 मांगें रखी हैं। इनमें सबसे बड़ी मांग महंगाई भत्ता (DA) की गणना के तरीके को बदलने की है। AIDEF का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था कर्मचारियों को मिलने वाले वास्तविक महंगाई प्रभाव को सही तरह से नहीं दर्शाती। क्या है डिटेल अभी केंद्र सरकार के कर्मचारियों का महंगाई भत्ता औद्योगिक श्रमिकों के लिए अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI-IW) के 12 महीने के औसत के आधार पर तय होता है। इस इंडेक्स को लेबर ब्यूरो तैयार करता है, जिसमें सब्जी, फल, कपड़े और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों को शामिल किया जाता है। इसी के आधार पर साल में दो बार DA बढ़ोतरी तय होती है। क्या है DA कैलकुलेशन लेकिन, AIDEF का कहना है कि यह इंडेक्स कर्मचारियों और पेंशनरों की वास्तविक खर्च स्थिति को नहीं दिखाता। संगठन के मुताबिक CPI बास्केट में कई वस्तुओं की कीमतें पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (राशन) या सब्सिडी वाली दरों पर मानी जाती हैं, जबकि ज्यादातर कर्मचारी बाजार से ऊंची कीमत पर सामान खरीदते हैं। इसलिए महंगाई की असली मार इस इंडेक्स में दिखाई नहीं देती। इसी वजह से AIDEF ने सुझाव दिया है कि 8वें वेतन आयोग में DA की गणना के लिए नया और ज्यादा वास्तविक इंडेक्स बनाया जाए। संगठन का कहना है कि इसमें खुली रिटेल मार्केट में मिलने वाली कीमतों या सरकारी कोऑपरेटिव कंज्यूमर स्टोर्स की दरों को आधार बनाया जाना चाहिए। इससे कर्मचारियों को महंगाई के अनुसार सही भत्ता मिल सकेगा। इसके अलावा AIDEF ने कई अन्य अहम मांगें भी रखी हैं। संगठन ने सेना में लागू अग्निपथ योजना के तहत अग्निवीर जैसी फिक्स्ड टर्म भर्ती व्यवस्था को खत्म करने और सभी अग्निवीरों को नियमित करने की मांग की है। साथ ही मौजूदा मिलिट्री सर्विस पे (MSP) को हटाकर ‘डायनेमिक रिस्क एंड रेडीनेस प्रीमियम’ देने का प्रस्ताव रखा गया है, जो पुलिस और अन्य बलों की एंट्री लेवल सैलरी से कम से कम 25% ज्यादा होना चाहिए। वेतन और प्रमोशन से जुड़े मामलों में भी AIDEF ने बड़े बदलाव सुझाए हैं। संगठन ने मौजूदा 3% सालाना वेतन वृद्धि को बढ़ाकर 6% करने, सेवा के 30 साल में कम से कम 5 गारंटीड प्रमोशन देने और सबसे ज्यादा तथा सबसे कम वेतन के बीच अनुपात 1:10 रखने की मांग की है। इसके अलावा सशस्त्र बलों के लिए पुरानी पेंशन योजना को जारी रखने और सेवानिवृत्ति आयु में मानवीय तरीके से चरणबद्ध बढ़ोतरी जैसे सुझाव भी दिए गए हैं।

पेशावर दूतावास बंद करने के पीछे क्या है वजह? अमेरिका के फैसले से मची हलचल

वाशिंगटन अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के पेशावर में स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास को स्थायी रूप से बंद करने का फैसला ले लिया है। यह दूतावास अफगान सीमा के सबसे नजदीक स्थित अमेरिकी राजनयिक मिशन था और 2001 में अफगानिस्तान पर अमेरिका के हमले से बाद से एक प्राथमिक संचालन केंद्र था। बुधवार को मिली अधिसूचना की एक प्रति के मुताबिक अमेरिका ने इस सप्ताह अमेरिकी संसद को वाणिज्य दूतावास को बंद करने के अपने इरादे के बारे में सूचित किया और कहा कि इससे प्रति वर्ष 75 लाख अमेरिकी डॉलर की बचत होगी। अमेरिका ने यह भी कहा है कि पाकिस्तान में अमेरिकी राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाने की उसकी क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। बता दें कि पेशावर वाणिज्य दूतावास में 18 अमेरिकी राजनयिक और अन्य सरकारी कर्मचारी तथा 89 स्थानीय कर्मचारी कार्यरत हैं। नोटिस में कहा गया है कि मंत्रालय इसे बंद करने के लिए 30 लाख अमेरिकी डॉलर खर्च करेगा। अमेरिका ने क्यों किया बंद? जानकारी के मुताबिक इस फैसले का ईरान युद्ध से लेना देना नहीं है। ट्रंप प्रशासन द्वारा लगभग सभी संघीय एजेंसियों में कटौती शुरू करने के बाद से यह कदम एक साल से अधिक समय तक विचाराधीन रहने के बाद यह फैसला लिया गया है। इस बीच ईरान युद्ध के कारण कराची और पेशावर सहित विभिन्न पाकिस्तानी शहरों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं जिसके कारण अमेरिकी वाणिज्य दूतावासों ने अस्थायी रूप से अपना संचालन निलंबित कर दिया है। अमेरिकी दूतावास में हुई थी हिंसा इससे पहले इजरायल-अमेरिका के हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के विरोध में, पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हाल में हुई झड़पों के बाद पाकिस्तान के सिंध प्रांत की सरकार ने अमेरिकी वाणिज्य दूतावास में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती भी बढ़ा दी थी। कराची में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास का सुरक्षा घेरा तोड़ने की कोशिश में एक मार्च को 12 से अधिक प्रदर्शनकारी मारे गए और लगभग 47 अन्य घायल हो गए। लाहौर और इस्लामाबाद में भी इसी तरह के प्रदर्शन हुए थे।

ऊर्जा क्षेत्र में भारत की बढ़ती ताकत, डीजल के लिए पड़ोसी देशों ने की मदद की मांग: MEA

नई दिल्ली मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत से उसके पड़ोसी देशों ने खास गुजारिश की है। विदेश मंत्रालय ने बताया कि बांग्लादेश, मालदीव और श्रीलंका ने डीजल आपूर्ति का अनुरोध भारत से किया है। गुरुवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस वार्ता में कहा कि भारत अपनी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए आगे का फैसला लेगा। जायसवाल ने कहा, “भारत रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों का प्रमुख निर्यातक है, विशेषकर अपने पड़ोसियों के लिए—जैसे बांग्लादेश सरकार से डीजल आपूर्ति के लिए अनुरोध प्राप्त हुआ है।” बांग्लादेश से भारत के पुराने रिश्तों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने आगे कहा, “उनके साथ हमारे जन-केंद्रित और विकासोन्मुख दृष्टिकोण को देखते हुए, 2007 से नुमालीगढ़ रिफाइनरी से हम विभिन्न माध्यमों—जैसे जलमार्ग, रेलमार्ग, और बाद में भारत-बांग्लादेश मैत्री पाइपलाइन—से डीजल की आपूर्ति कर रहे हैं। अक्टूबर 2017 में नुमालीगढ़ रिफाइनरी और बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉरपोरेशन के बीच हाई-स्पीड डीजल आपूर्ति को लेकर एक समग्र बिक्री-खरीद समझौते पर हस्ताक्षर किया गया था। यह 2007 से जारी है।” उन्होंने कहा कि हमें बांग्लादेश के अलावा मालदीव और श्रीलंका से भी अनुरोध प्राप्त हुआ है। भारत विचार कर रहा है, लेकिन हम अपनी ऊर्जा आवश्यकता और डीजल की उपलब्धता को देखते हुए आगे बढ़ेंगे।” एक सवाल के जवाब में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खाड़ी देशों के कई नेताओं से बातचीत की है। प्रधानमंत्री ने “संवाद और कूटनीति के जरिए जल्द शांति बहाल करने पर जोर दिया,” जिससे हमारे नागरिक लौट सकें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत में नागरिकों को होने वाले नुकसान से बचाने और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। जीसीसी (खाड़ी सहयोग परिषद) में हमारे कई नागरिक रहते हैं। भारत का स्पष्ट मत रहा है कि किसी देश की संप्रभुता या अखंडता के उल्लंघन को हम सही नहीं मानते हैं।

युद्ध की मार रसोई तक: ईरान संकट से दिल्ली के होटल-ढाबों में महंगाई, मेन्यू से हटे दाल मखनी-कबाब

ईरान ईरान और इजरायल-अमेरिका युद्ध की वजह से उपजे गैस संकट का असर राजधानी के होटलों पर देखने को मिल रहा है। होटल ईंधन बचाने के लिए कई तरह के बदलाव कर रहे हैं। खासतौर पर धीमी आंच पर पकाने वाले पकवान जैसे कबाब और दाल मखनी को मेन्यू से अस्थायी रूप से हटा दिया गया है। वहीं, अधिकतर होटल-ढाबों में खाना-पीना महंगा हो चुका है। लागत में इजाफे की वजह से ग्राहकों को चाय से रोटी तक के लिए अधिक कीमत देनी पड़ रही है। दाल मखनी और गलौटी कबाब जैसी डिशेज जिन्हें 8 से 12 घंटे तक धीमी आंच पर पकाना पड़ता है, उन्हें कई रेस्तरां ने अस्थायी रूप से अनुपलब्ध कर दिया है। गैस आधारित तंदूरों का उपयोग सीमित कर दिया गया है। कई होटलों में अब केवल पीक ऑवर्स (रात 8 से 11 बजे) में ही तंदूरी डिशेज परोसी जा रही हैं। होटलों ने अपने 10-15 पन्नों के विस्तृत मेन्यू को छोटा करके 2-3 पन्नों का लिमिटेड मेन्यू कर दिया है। फोकस उन डिशेज पर है जो सॉते या स्टीमिंग तकनीक से जल्दी बन जाती हैं, क्योंकि इनमें गैस की खपत कम होती है। कई प्रीमियम डाइनिंग आउटलेट्स अब कोल्ड ऐपेटाइज़र सलाद और सैंडविच जैसी चीजों को प्रमोट कर रहे हैं जिन्हें पकाने की आवश्यकता नहीं होती। इससे उनकी गैस की निर्भरता कम हो रही है। बड़े होटलों ने भारी कमर्शियल इंडक्शन प्लेट्स, एयर फ्रायर्स और इलेक्ट्रिक ओवन का इस्तेमाल 40% तक बढ़ा दिया है। हालांकि, इससे बिजली के बिल में बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन गैस की अनिश्चितता से बचने का यह एकमात्र तरीका बचा है। इससे उनका ब्रांड का नाम कायम रहेगा। होटलों में लाइव कुकिंग काउंटर (जहां शेफ सामने खाना बनाते थे) ग्राहकों के आकर्षण का केंद्र होते थे, उन्हें फिलहाल बंद कर दिया है क्योंकि वहां गैस की बर्बादी अधिक होती है। रेहड़ी-पटरी व छोटे ढाबों पर आजीविका का संकट यह वर्ग स्ट्रीट फूड संस्कृति का आधार है। इन्हें रोजाना नकद में सिलेंडर लेना पड़ता है। आपूर्ति कम होने से वेंडर्स छोटे दुकानदारों के बजाय बड़े होटलों को प्राथमिकता दे रहे हैं। सिलेंडर न मिलने पर कई रेहड़ी वाले अवैध रिफिलिंग (छोटे 5 किलो के अवैध सिलेंडर) का सहारा ले रहे हैं। गैस की कीमत बढ़ने से रोज़ाना की बचत में ₹200-₹400 की कमी आई है। 7 रुपये वाली रोटी 9 की हुई गैस सिलेंडर आपूर्ति प्रभावित होने से द्वारका मोड़ इलाके में एक रेस्तरां ने रोटी के दाम में अचानक दो रुपये की बढ़ोतरी कर दी। रेस्तरां मालिक का कहना था कि गैस का दाम बढ़ने के चलते रोटी का दाम भी बढ़ाना पड़ रहा है। द्वारका मोड़ इलाके में रहने वाले आकाश कुमार ने बताया कि अक्सर ऑफिस से देर से आने पर वह सब्जी तो घर में बनाते हैं लेकिन रोटी रेस्तरां से मंगा लेते हैं। उनके करीब स्थित एक रेस्तरां में तवा रोटी उन्हें सात रुपये के दर से पड़ती है, अब अचानक मालिक ने दाम बढ़ा दिए हैं। वहीं, नोएडा में एक चाय विक्रेता ने बताया कि उन्होंने 10 रुपये वाली चाय की कीमत अब 15 रुपये कर दी है। उन्होंने कहा कि जो सिलेंडर उन्हें 1000 रुपये में मिल जाता था उसके लिए अब 2500 रुपये देने पड़े हैं। इस वजह से कीमत में इजाफा करना पड़ा है। ढाबा बंद होने की कगार पर कनॉट प्लेस स्थित सिंधिया हाउस के पास एक तंग गली में स्थित ढाबा अब बंद होने की कगार पर है। यह ढाबा ऑफिस कर्मचारियों, टैक्सी ड्राइवरों और दूसरे रोजगार से जुड़े लोगों के लिए सस्ता और स्वादिष्ट भोजन का प्रमुख ठिकाना है, लेकिन कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई रुकने से मालिक की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ढाबा मालिक ने बताया कि उनके यहां रोजाना दो सिलेंडर की खपत होती है, लेकिन अब सप्लाई पूरी तरह बंद कर दी गई है। स्टॉक में सिर्फ एक सिलेंडर बचा है, जिसके बाद रसोई ठप हो जाएगी। यहां भोजन करने पहुंचे मेरठ के गोविंद प्रसाद ने कहा कि वे मार्केटिंग के जॉब में हैं, लिहाजा सुबह मेरठ से जल्दी निकलने के कारण टिफिन नहीं लाते, दोपहर में यह ढाबा ही सहारा है। यदि बंद हुआ तो महंगे रेस्टोरेंट में खाना या घर से पैक करना पड़ेगा, जो मुश्किल होगा। टैक्सी ड्राइवर वीरू मौर्या ने बताया कि मंडी हाउस के अन्य ढाबों में भी रेट बढ़ गए हैं। समारोह में खाने के मेन्यू में कटौती की सरोजिनी नगर में स्थित सामुदायिक भवन में अलग-अलग दिनों में शादी समारोह हैं। एलपीजी गैस संकट के बीच बैंक्वेट हॉल में भी परेशानी बढ़ गई है। हलवाइयों ने खाने के मेन्यू में कटौती कर दी है। पिलंजी गांव के रहने वाले रोहन ने बताया कि शुक्रवार को उनके भाई की रिसेप्शन पार्टी है। वहीं, गैस सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि अधिक रुपये देने पर भी कोई सिलेंडर देने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि घर पर मेहमान आ रहे हैं। लेकिन, अचानक आए एलपीजी संकट ने पूरी तैयारी बिगाड़ दी है। रोहन ने बताया कि उन्होंने जिसे खाने का ठेका सौंपा था, उन्होंने अंतिम मौके पर सिलेंडर की कमी होने पर तय मेन्यू तैयार करने से मना कर दिया है। उन्होंने कहा कि 30 से 40 फीसदी मेन्यू में कटौती की गई है।

अविश्वास प्रस्ताव खारिज होने के बाद बोले ओम बिरला: संसद की गरिमा सबसे ऊपर

नई दिल्ली लोकसभा के स्पीकर ओम बिरला पर विपक्ष के द्वारा अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। इसपर दो दिनों तक सुनवाई हुई। इसके बाद संसद ने इसे ध्वनि मत से खारिज कर दिया। इसके बाद आज उन्होंने पहली बार संसद को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप सही नहीं है, उन्होंने सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, सभी को बराबर मौका दिया। उन्होंने कहा कि जब कोई सांसद संसद की मर्यादा को भंग करते हैं तो तब उन्हें कठोर कदम उठाते हैं। आपको बता दें कि ओम बिरला इस पूरे अविश्वास प्रस्ताव की कार्रवाई के दौरान खुद को स्पीकर की कुर्सी से दूर रखा था। आज जब वह बोल रहे थे तो उन्होंने हर उन आरोपों के जवाब देने की कोशिश की, जो उनके खिलाफ लगाए गए थे। ओम बिरला ने कहा, ‘सबको बराबर बोलने का मौका दिया। अविश्वास प्रस्ताव पर दो दिनों तक चर्चा हुई। यह 140 करोड़ जनता का सदन है। सदन को नियमों से चलाने की कोशिश की। निष्पक्षता का ध्यान रखा। मेरे पर विपक्ष की आवाज दबाने के आरोप लगे। संसदीय व्यवस्था में मेरा अटूट भरोसा रहा है। सदन में सहमति और असहमति की परंपरा रही है। मैंने प्रत्येक सदस्य की बात को गंभीरता से सुना। मैं समर्थन और आलोचना करने वाले सभी सांसदों का आभार प्रकट करता हूं। यह आसन किसी व्यक्ति का नहीं है। निष्पक्षता से चलाया संसद अपने संबोधन की शुरुआत में उन्होंने कहा, मैंने हमेशा यह प्रयास किया है कि लोकसभा में प्रत्येक सदस्य नियमों के अनुसार अपने विचार रखें, इसके लिए सभी को समय देने का प्रयास किया है। मैंने हमेशा यह प्रयास किया कि सदन की कार्यवाही निष्पक्षता, अनुशासन, संतुलन और नियमों के साथ संचालित हो। मैंने अपने नैतिक कर्तव्य का पालन करते हुए अपने खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिए जाने के साथ ही लोकसभा की कार्यवाही के संचालन से खुद को अलग कर लिया। सदन से ऊपर नहीं नेता प्रतिपक्ष ओम बिरला ने कहा, ”कुछ सदस्यों का मानना था कि नेता प्रतिपक्ष सदन से ऊपर हैं और किसी भी विषय पर बोल सकते हैं, लेकिन ऐसा विशेषाधिकार किसी को नहीं है और चाहे प्रधानमंत्री हों, मंत्री हों, विपक्ष के नेता हों या अन्य सदस्य, सभी को नियम के अनुसार ही बोलने का अधिकार है। ये नियम सदन ने ही बनाए हैं और मुझे विरासत में मिले हैं।” स्पीकर ने कहा कि सदन द्वारा मुझ पर व्यक्त किए गए विश्वास के लिए सभी का आभार व्यक्त करता हूं, इस विश्वास को अपनी जिम्मेदारी मानते हुए पूरी निष्ठा, निष्पक्षता और संवैधानिक मर्यादा के साथ निभाऊंगा।  

टीम इंडिया के स्टार स्पिनर कुलदीप यादव की शादी तय, मसूरी में 14 मार्च को लेंगे सात फेरे

मसूरी भारतीय क्रिकेट टीम के चाइनामैन गेंदबाज कुलदीप यादव गुरुवार दोपहर पहाड़ों की रानी मसूरी पहुंचे। यहां 14 मार्च को वह अपने बचपन की दोस्त वंशिका के साथ सात फेरे लेंगे। लाइब्रेरी बाजार क्षेत्र स्थित होटल सेवॉय में शुक्रवार और शनिवार को शादी की रस्में होनी हैं। होटल सेवाय में होंगे कार्यक्रम बता दें भारतीय क्रिकेट टीम के चाइनामैन गेंदबाज कुलदीप यादव के शादी के बंधन में बंधने की तारीख नजदीक आ गई है। वह 14 मार्च शनिवार को मसूरी में अपने बचपन की दोस्त वंशिका के साथ सात फेरे लेंगे। वैवाहिक कार्यक्रम लाइब्रेरी बाजार स्थित होटल सेवाय में होगा। होटल के सारे कमरे बुक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, होटल सेवाय में 13 और 14 मार्च के लिए सभी कमरे बुक किए गए हैं। बताया जा रहा है कि मेहमानों के लिए होटल जेडब्लू मैरियट में भी कमरे बुक किए गए हैं। पहले नवंबर में होनी थी शादी शादी समारोह में सूर्य कुमार यादव, जय शाह सहित भारतीय टीम के अन्य खिलाड़ियों के आने की भी संभावना है। यह शादी पहले नवंबर में होनी वाली थी, लेकिन कुलदीप यादव के मैचों में व्यस्तता के कारण इसे टाल दिया गया था। जून 2025 में हुई थी सगाई कुलदीप यादव और वंशिका की सगाई जून 2025 में हुई थी। बताया जा रहा है कि रिसेप्शन 17 मार्च को लखनऊ एक होटल में होगा। उसमें भी क्रिकेटर, राजनेता, बालीवुड और बीसीसीआइ से जुड़े लोग आ सकते हैं।  

Iran-US War: FBI की चेतावनी के बाद अमेरिका में सुरक्षा बढ़ी, ईरान के हमले की आशंका

तेहरान  ईरान पर अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद से पश्चिम एशिया में भीषण जंग छिड़ चुकी है। बौखलाए ईरान ने इजरायल के साथ साथ सऊदी अरब, बहरीन, UAE और कतर जैसे खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य अड्डों को लगातार निशाना बनाया है। अब खबर है कि ईरान सीधा अमेरिका पर ही हमला बोल सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान अमरीकी राज्य कैलिफोर्निया पर हमला करने की योजना बना रहा है। अमेरिका की फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन ने हाल ही में कैलिफोर्निया के पुलिस डिपार्टमेंट को चेतावनी दी है कि ईरान पश्चिमी तट पर ड्रोन के जरिए अमेरिकियों पर हमला कर सकता है। फर्स्टपोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक FBI के अधिकारियों ने एक अलर्ट जारी किया है जिसमें अमेरिकी सरकार को चेतावनी दी गई है कि युद्ध जारी रहा तो ईरान के बदले के लिए तैयार रहें। अलर्ट पर कैलिफोर्निया रिपोर्ट में ABC न्यूज की एक रिपोर्ट का हवाला दिया गया है। इसमें फरवरी के आखिर में भेजे गए अलर्ट के मुताबिक, “हमें हाल ही में जानकारी मिली है कि फरवरी 2026 की शुरुआत में, ईरान कथित तौर पर अमेरिकी होमलैंड के तट पर एक अनजान जहाज से UAV का इस्तेमाल करके अचानक हमला करने की सोच रहा था। अगर US ईरान पर हमला करता है तो ईरान कैलिफोर्निया को निशाना बना सकता है।” जानकारी के मुताबिक राज्य इसे लेकर हाई अलर्ट पर है। डोनाल्ड ट्रंप को भी दी थी धमकी इससे पहले ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी अपनी जान बचाने की चेतावनी दी थी। ईरान के एक शीर्ष सुरक्षा अधिकारी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए ट्रंप को धमकी दी। अली लारिजानी ने बीते मंगलवार को एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, ”ईरान जैसा बलिदानी राष्ट्र तुम्हारी खोखली धमकियों से नहीं डरता। तुमसे बड़े भी ईरान को खत्म नहीं कर सके। सावधान रहें, कहीं खुद आपका सफाया ना हो जाए।” ईरान ने रखी शर्तें इस बीच ईरान ने युद्ध खत्म करने के लिए 3 शर्तें रख दी हैं। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने बुधवार को कहा है कि अमेरिका को ईरान के अधिकारों को मान्यता देनी ही होगी और यह गारंटी देनी होगी कि देश पर भविष्य में हमले नहीं होंगे। बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किए गए एक बयान में, पेजेशकियन ने कहा कि जंग का हल सिर्फ इन शर्तों के जरिए ही निकलेगा। पेजेशकियन ने लिखा, “इस जंग को, जिसे यहूदियों और अमेरिका ने शुरू किया है, को खत्म करने का एक मात्र तरीका है, ईरान के कानूनी अधिकारों को मान्यता देना, युद्ध का हर्जाना देना और भविष्य में हमले के खिलाफ पक्की अंतर्राष्ट्रीय गारंटी देना।”

“आदि कैलाश यात्रा 1 मई से शुरू, 30 हजार श्रद्धालु पहुंचे थे पिछले साल, इस बार भी उम्मीदें हैं बड़ी

पिथौरागढ़ उत्तराखंड के सीमांत पिथौरागढ़ जिले की व्यास घाटी में भगवान शिव के धाम की प्रसिद्ध आदि कैलाश यात्रा इस वर्ष आठ मई को प्रदेश के तीन स्थानों से शुरू होगी. यात्रा की नोडल एजेंसी ‘कुमाऊं मंडल विकास निगम लिमिटेड’ (केएमवीएन) के महाप्रबंधक विजयनाथ शुक्ला ने बताया कि हल्द्वानी, टनकपुर और धारचूला से श्रद्धालुओं के कुल 15 जत्थे आदि कैलाश की यात्रा करेंगे.उन्होंने बताया हल्द्वानी से होने वाली आदि कैलाश यात्रा आठ दिन की होगी. टनकपुर से छह दिन और धारचूला से यात्रा पांच दिन में संपन्न होगी. विजयनाथ शुक्ला ने बताया यात्रा का पहला चरण 10 जून को समाप्त होगा. आदि कैलाश यात्रा को पीएम मोदी ने दिया बढ़ावा: अधिकारियों के अनुसार, प्रधानमंत्री के आने से पहले हर साल करीब 2000 श्रद्धालु आदि कैलाश यात्रा पर आते थे. 2023 में मोदी के यहां आने के बाद तीर्थयात्रियों की संख्या 28,000 पहुंच गई. पिछले साल यह आंकड़ा 36,000 को पार कर गया. उत्तराखंड में आदि कैलाश यात्रा 1 मई से शुरू करने की तैयारी है. मौसम अनुकूल रहा तो प्रशासन अप्रैल के आखिरी सप्ताह से इनर लाइन परमिट जारी कर सकता है. पिछले साल यहां 30 हजार से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे थे. ऐसे में इस बार और बड़ी संख्या में यात्रियों के आने की उम्मीद है. आदि कैलाश पिथौरागढ़ जिले के धारचूला क्षेत्र की व्यास घाटी में स्थित है. नवंबर से मार्च तक यहां भारी बर्फबारी के कारण आवागमन बंद रहता है. सुरक्षा कारणों के चलते व्यास घाटी में छियालेख से आगे जाने के लिए इनर लाइन परमिट अनिवार्य होता है. जिसे तहसील प्रशासन जारी करता है. आदि कैलाश और ओम पर्वत की यात्रा के लिए इनर लाइन परमिट धारचूला स्थित एसडीएम कार्यालय से ऑफलाइन लिया जा सकता है. आवेदन के लिए आधार कार्ड, मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट और पासपोर्ट साइज फोटो जरूरी होते हैं. यात्रा के लिए ऑनलाइन आवेदन की भी सुविधा है. आदि कैलाश और ओम पर्वत के दर्शन के लिए आने वाले पर्यटकों की संख्या पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है. साल 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के बाद इस धार्मिक स्थल को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर पहचान मिली. इसके बाद यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है. साल 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड दौरे के दौरान आदि कैलाश क्षेत्र का भ्रमण किया था. तब उन्होंने पिथौरागढ़ जिले में स्थित आदि कैलाश और पार्वती कुंड में पूजा-अर्चना की, साथ ही कुमाऊं के प्रसिद्ध जागेश्वर धाम में भी दर्शन किए थे. आदि कैलाश उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले की व्यास घाटी में भारत की सीमा के भीतर स्थित है, इसलिए यहां की यात्रा अपेक्षाकृत आसान मानी जाती है. इसके लिए केवल इनर लाइन परमिट, मेडिकल जांच और स्थानीय प्रशासन की अनुमति जरूरी होती है. सड़क बनने के बाद अब श्रद्धालु धारचूला, गुंजी और जोलिंगकोंग तक वाहनों से पहुंचकर पार्वती सरोवर और गौरी कुंड के साथ आदि कैलाश के दर्शन कर सकते हैं. कैलाश पर्वत तिब्बत (चीन) में स्थित है और उसके पास पवित्र मानसरोवर झील है. वहां की यात्रा अंतरराष्ट्रीय होने के कारण पासपोर्ट-वीजा और भारत सरकार की आधिकारिक प्रक्रिया से होकर गुजरती है. यह यात्रा अधिक कठिन मानी जाती है.

LPG सप्लाई को लेकर सरकार का बड़ा बयान: हरदीप पुरी बोले – पर्याप्त है गैस और ईंधन

नई दिल्ली देश में एलपीजी संकट पर लोकसभा में केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत 40 देशों से क्रूड ऑयल ले रहा है। गैस-सिलेंडर पर पैनिक होने की कोई बात नहीं है। हरदीप सिंह पुरी ने लोकसभा में वेस्ट एशिया संकट पर कहा कि एनर्जी के इतिहास में दुनिया ने ऐसा पहले कभी नहीं देखा। होर्मुज स्ट्रेट को इतिहास में पहली बार कमर्शियल शिपिंग के लिए बंद कर दिया गया। संघर्ष पैदा करने में कोई भूमिका नहीं है, भारत को इसके नतीजों से निपटना होगा। भारत की क्रूड ऑयल सप्लाई की स्थिति सुरक्षित है।  LPG का प्रोडक्शन 28% बढ़ा दिया गया- हरदीप सिंह पुरी हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि पिछले पांच दिनों में, रिफाइनरी के निर्देशों के जरिए LPG का प्रोडक्शन 28% बढ़ा दिया गया है और असल में आगे की खरीद चल रही है। मोदी सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता यह है कि भारत के 33 करोड़ परिवारों, खासकर गरीबों और जरूरतमंदों की रसोई में किसी भी तरह की कमी न हो। घरेलू सप्लाई पूरी तरह से सुरक्षित है और डिलीवरी साइकिल में कोई बदलाव नहीं हुआ है। घर और इंडस्ट्री के लिए बिजली का प्रोडक्शन सुरक्षित- पुरी उन्होंने कहा कि बड़े LNG कार्गो लगभग रोज दूसरे सप्लाई रास्तों से आ रहे हैं। भारत के पास गैस प्रोडक्शन और सप्लाई के इतने इंतजाम हैं कि लंबे समय तक लड़ाई चलने पर भी यह स्थिति बनी रहेगी। हर घर और इंडस्ट्री के लिए बिजली का प्रोडक्शन पूरी तरह से सुरक्षित है। अब प्रोक्योरमेंट को एक्टिवली डायवर्सिफाई किया गया है और कार्गो को यूनाइटेड स्टेट्स, नॉर्वे, कनाडा, अल्जीरिया और रूस से मंगाया जा रहा है।  

ईरान के सैन्य दबदबे के बीच इराक, सऊदी और बहरीन में हमलों की लहर, अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हमला

तेहरान   मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच तनाव और भी गहरा होता जा रहा है. खाड़ी देश के इलाके में ईरान भारी पड़ता दिख रहा है. अमेरिका और इजरायल पर काल बनकर टूट पड़ा है. गुरुवार को ईरान ने पर्शियन गल्फ में दो तेल टैंकरों पर सुसाइड अटैक किया, जिसमें एक अमेरिकी स्वामित्व वाली टैंकर थी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने यूएई और कुवैत में तीन स्ट्रेटेजिक टारगेट पर हमला किया. सैटेलाइट इमेज में साफ दिख रहा है कि फुजैराह के तेल जोन, शारजाह के इंडस्ट्रियल एरिया और कुवैत के अल-सलेम बेस पर हमले हुए हैं. दुबई के क्रीक हार्बर जैसे रिहायशी इलाकों में ईरानी ड्रोन हमलों ने पेंटागन की नींद उड़ा दी है. इराक से लेकर सऊदी अरब तक फैले इस बारूदी खेल और तेल टैंकरों पर होते लगातार हमलों ने साबित कर दिया है कि ईरान अब आर-पार की जंग के मूड में है, जिससे पूरी दुनिया पर महायुद्ध और वैश्विक ऊर्जा संकट का खतरा मंडराने लगा है. ईरान ने गुरुवार को इराक के क्षेत्रीय जल क्षेत्र (Territorial Waters) में दो विदेशी तेल टैंकरों ड्रोन हमला किया. इस भीषण हमले में चालक दल के एक सदस्य की मौत हो गई है, जबकि इराकी अधिकारियों ने अब तक 38 लोगों को सुरक्षित बचा लिया है. ईरान ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए दावा किया है कि उसके अंडरवॉटर ड्रोन ने टैंकरों को उड़ा दिया, जिसे इराक ने अपनी संप्रभुता का सीधा उल्लंघन करार दिया है. दुबई के इन इलाके पर हमला दुबई मीडिया ऑफिस ने बताया कि अधिकारियों ने कन्फर्म किया है कि आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया है और बिल्डिंग में रहने वाले सभी लोग सुरक्षित हैं. दुबई क्रीक हार्बर के पास एक बिल्डिंग पर ड्रोन गिरने की घटना हुई थी. सिविल डिफेंस टीमों ने ड्रोन के बिल्डिंग से टकराने के बाद लगी छोटी सी आग पर तुरंत काबू पा लिया. अधिकारियों ने कन्फर्म किया कि किसी के घायल होने की खबर नहीं है. अमेरिका के तीन ठिकानों पर ईरान का हमला ईरान ने तेहरान के तेल ठिकानों पर हुए हालिया अमेरिका-इजरायल हमले का करारा जवाब देते हुए संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कुवैत में तीन रणनीतिक ठिकानों पर भीषण हमला किया है. सैटेलाइट तस्वीरों ने पुष्टि की है कि यूएई के फुजैराह तेल क्षेत्र और शारजाह के औद्योगिक इलाके को निशाना बनाया गया है. इसके अलावा, कुवैत स्थित ‘अल-सालेम’ सैन्य अड्डे पर अमेरिकी लॉजिस्टिक्स सेंटर्स पर भी सीधे प्रहार हुए हैं. ईरान का यह प्रतिशोध न केवल खाड़ी देशों में युद्ध की आग भड़का रहा है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बन गया है. तेल टैंकरों पर हमले के बाद इराक का बयान इराकी पोर्ट्स कंपनी के महानिदेशक फरहान अल-फर्तूसी ने बताया कि हमला उस समय हुआ जब माल्टीज़ ध्वज वाला जेफिरोस (Zefyros) और मार्शल द्वीप समूह के ध्वज वाला सेफसी विष्णु (Safesea Vishnu) इराक के खोर अल-जुबैर बंदरगाह के पास साइडलोडिंग क्षेत्र में लंगर डाले हुए थे. चश्मदीदों और सैटेलाइट फुटेज में दोनों टैंकरों को आग की लपटों में घिरा देखा गया. आग इतनी भीषण थी कि तेल रिसाव के कारण समुद्र की सतह पर भी लपटें फैल गईं, जिससे बड़े पर्यावरणीय संकट का खतरा पैदा हो गया है. इराक ने दी ईरान को चेतावनी ईरानी के सरकारी न्यूज एजेंसी ने बताया कि उनकी सेना ने अंडरवॉटर ड्रोन के जरिए इस ऑपरेशन को अंजाम दिया है. दूसरी ओर, इराक के संयुक्त अभियान कमान के लेफ्टिनेंट जनरल साद मान ने इसे इराकी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है. सुरक्षा सूत्रों का कहना है कि धमाके के लिए विस्फोटकों से लदी एक ईरानी नाव का भी इस्तेमाल किया गया होगा. हमले के तुरंत बाद, इराक ने एहतियात के तौर पर अपने तेल बंदरगाहों का संचालन रोक दिया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान आने की आशंका है. ऑयल टैंकर का अमेरिका-ग्रीक कनेक्शन ईरान के हमले का शिकार हुए जहाजों में से एक सेफसी विष्णु का मालिकाना हक अमेरिका की कंपनी सेफसी ट्रांसपोर्ट इंक के पास है. वहीं, दूसरी जहाज जेफिरोस ग्रीस की एक कंपनी का है. चूंकि एक जहाज अमेरिकी कंपनी का है, इसलिए इस घटना में वाशिंगटन के सीधे हस्तक्षेप की संभावना बढ़ गई है. इराक के तेल मंत्रालय ने इसे तनाव बढ़ाने वाला एक चिंताजनक संकेतक बताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए वैश्विक समुदाय से संयम और सुरक्षा की अपील की है. खतरनाक जंग की आहट? इराकी मीडिया सेल ने इसे सोची-समझी तोड़फोड़ करार दिया है. वर्तमान में लापता चालक दल के सदस्यों की तलाश के लिए बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन जारी है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान और इराक के बीच यह समुद्री टकराव और बढ़ा, तो फारस की खाड़ी में वैश्विक व्यापार पूरी तरह ठप हो सकता है. इराक ने साफ कर दिया है कि वह इस हमले के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का अधिकार सुरक्षित रखता है.  

ईरान ने अमेरिका से युद्ध खत्म करने की दी बात, तीन शर्तें ट्रंप के लिए बनी चुनौती

वाशिंगटन ईरान के खिलाफ जारी युद्ध अमेरिका के लिए बेहद महंगा साबित हो रहा है. पेंटागन के शुरुआती अनुमान के मुताबिक जंग के पहले छह दिनों में ही अमेरिकी टैक्सपेयर्स के कम से कम 11.3 अरब डॉलर खर्च हो चुके हैं. इस बीच ईरानी राष्ट्रपति ने अमेरिका के सामने युद्ध खत्म करने का ऑफर रखा है. लेकिन इसके साथ उन्होंने तीन शर्तें भी रखी हैं. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा है कि तेहरान क्षेत्रीय शांति के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन मौजूदा संघर्ष तभी खत्म हो सकता है जब ईरान के ‘वैध अधिकारों’ को मान्यता दी जाए. उन्होंने साफ किया कि किसी भी समाधान के लिए ईरान की मुख्य मांगों को स्वीकार करना जरूरी होगा। ईरान ने युद्ध खत्म करने की क्या शर्तें रखीं? पेजेश्कियान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए बताया कि उन्होंने इस मुद्दे पर रूस और पाकिस्तान के नेताओं से बातचीत की है. उन्होंने दोहराया कि ईरान का मानना है कि मौजूदा संघर्ष की शुरुआत ‘जायनिस्ट शासन और अमेरिका’ की कार्रवाई से हुई. ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि इस संकट के समाधान के लिए तीन अहम बातें जरूरी हैं।     ईरान के वैध अधिकारों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दी जाए.     युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई यानी मुआवजा दिया जाए.     भविष्य में ईरान पर हमले रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय गारंटी दी जाए. अमेरिका ईरान से जीत गया- ट्रंप एक तरफ जब पेंटागन कह रहा है कि अरबों डॉलर हर रोज इस युद्ध में खर्च हो रहे हैं. तो वहीं दूसरी तरफ ट्रंप जीत का दावा कर रहे हैं. केंटकी में एक रैली करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि युद्ध अमेरिका जीत चुका है. हालांकि उन्होंने आगे बताया कि ऑपरेशन खत्म नहीं होगा. वहीं उन्होंने दावा किया कि अब तक 58 नौसैनिक जहाज नष्ट किए गए हैं. उन्होंने कहा कि अमेरिका काम पूरा होने तक अभियान जारी रखेगा. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि यह युद्ध जल्द खत्म हो सकता है, लेकिन उन्होंने कोई स्पष्ट समयसीमा नहीं बताई है। युद्ध में अब तक कितनी मौत? अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान पर संयुक्त हमले शुरू किए थे. इसके बाद से दोनों देशों ने ईरान के कई सैन्य और राजनीतिक ठिकानों पर हमले किए. रिपोर्टों के मुताबिक इन हमलों में 1,200 से ज्यादा ईरानी नागरिकों की मौत हो चुकी है. दूसरी ओर ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों और सहयोगी देशों पर हमले किए, जिनमें 7 अमेरिकी सैनिकों की मौत और 140 से ज्यादा घायल हुए हैं।

रूस से तेल आयात में 50% की वृद्धि, भारत ने युद्ध के संकट में बढ़ाई आयात की मात्रा

नई दिल्ली पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और तनाव ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा के सामने एक गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है. विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से होने वाली आपूर्ति ठप होने से देश में कुकिंग गैस की भारी किल्लत देखी जा रही है। रूस बना संकटमोचक, कच्चे तेल के आयात में उछाल ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारत ने मार्च महीने में रूस से कच्चे तेल की खरीद में 50 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी की है. फरवरी में जहां भारत रूस से 10.4 लाख बैरल प्रतिदिन (bpd) तेल खरीद रहा था, वहीं मार्च में यह आंकड़ा बढ़कर 15 लाख बैरल प्रतिदिन पहुंच गया है. भारत अपनी तेल जरूरतों का 88% आयात करता है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा सऊदी अरब, इराक और यूएई जैसे देशों से होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता था. इस रास्ते के बंद होने के बाद भारत ने तेजी से अपनी निर्भरता रूस की ओर स्थानांतरित की है। LPG का असली संकट: क्यों खाली हो रहे हैं सिलेंडर? कच्चे तेल की आपूर्ति को तो रूस के जरिए काफी हद तक संभाल लिया गया है, लेकिन रसोई गैस का संकट अभी भी बरकरार है. विशेषज्ञों के अनुसार, भारत अपनी जरूरत का लगभग 55-60% LPG आयात करता है. इस आयातित गैस का 80 से 90 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज की खाड़ी से होकर आता है. युद्ध के कारण इस समुद्री मार्ग से आवाजाही लगभग बंद है. भारत प्रतिदिन करीब 10 लाख बैरल LPG की खपत करता है, लेकिन घरेलू उत्पादन केवल 40-45% ही है। आम जनता और व्यापार पर असर गैस की इस किल्लत का सबसे बुरा असर कमर्शियल सेक्टर पर पड़ा है. मुंबई, बेंगलुरु और दिल्ली जैसे महानगरों में लगभग 20% होटल और रेस्टोरेंट या तो बंद हो गए हैं या उन्होंने अपना मेन्यू सीमित कर दिया है. कई जगहों पर लोग अब पुराने समय की तरह लकड़ी के चूल्हों या इलेक्ट्रिक इंडक्शन का सहारा ले रहे हैं। सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने के लिए अनिवार्य वस्तु अधिनियम लागू किया है और रिफाइनरियों को उत्पादन 25% बढ़ाने के निर्देश दिए हैं. हालांकि, स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है. केप्लर के विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले हफ्ते भारत के लिए चुनौतीपूर्ण होंगे. तेल का विकल्प तो मिल गया है, लेकिन LPG की आपूर्ति को सुचारू करना एक बड़ी कूटनीतिक और लॉजिस्टिक चुनौती है।

LPG की किल्लत पर राहुल गांधी का कटाक्ष, बोले- संसद से नरेंद्र और देश से सिलेंडर दोनों गायब

नई दिल्ली कांग्रेस सहित विपक्ष के कई दलों ने आज ईरान युद्ध के कारण देश में गहराए एलपीजी संकट को लेकर संसद भवन के बाद प्रदर्शन किया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस संकट के लिए सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जिम्मेदार ठहराया। संसद के मकर द्वार के निकट कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, द्रमुक और कई अन्य विपक्षी दलों के सांसद एकत्र हुए और उन्होंने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। विपक्षी सांसदों ने गुरुवार को संसद भवन के बाद ”मोदी जी एलपीजी” के नारे लगाए। इसके बाद राहुल गांधी ने एक्स पर तस्वीरें शेयर करते हुए पीएम पर कटाक्ष किया। राहुल लिखते हैं, ‘संसद से नरेंदर गायब, देश से सिलेंडर गायब’ आपको बता दें कि संसद के बाहर विपक्षी सांसदों ने गैस सिलेंडर की आकृति वाली तख्तियां भी ले रखी थीं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का कहना है कि ईंधन संकट को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है लेकिन वह ख़ुद अलग कारणों से घबराए हुए नजर आ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि रसोई गैस की किल्लत को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लोगों से नहीं घबराने की अपील कर रहे हैं, जबकि वह खुद अलग कारणों से घबराए हुए हैं। राहुल गांधी ने संसद परिसर में मीडिया से कहा, ”प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन खुद प्रधानमंत्री बिल्कुल अलग वजहों से घबराए हुए हैं। वह अदाणी मामले, ‘एप्सटीन फाइल’ के कारण घबराए हुए हैं।” उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री सदन के अंदर नहीं आ पा रहे हैं और देश से कह रहे हैं कि घबराओ मत, जबकि वह खुद घबराए हुए हैं। आपको बता दें कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण रसोई गैस की किल्लत के बीच, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को लोगों से नहीं घबराने की अपील की थी और जनहित की रक्षा का आश्वासन दिया था। उन्होंने कहा था, ”मैं लोगों से अपील करना चाहता हूं कि हम केवल सही और सत्यापित जानकारी ही फैलाएं।”  

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरेंगे भारतीय जहाज, जयशंकर और अराघची के बीच हुई महत्वपूर्ण चर्चा

 नई दिल्ली पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष (ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध) के बीच भारत को बड़ी राहत मिली है. सूत्रों ने बताया कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर की ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से हुई टेलीफोनिक बातचीत के बाद ईरान ने भारतीय टैंकरों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दी गई है. ये भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा गुजरता है। सूत्रों ने गुरुवार को बताया कि विदेश मंत्री ने ईरान के अराघची से बात के बाद ईरान ने भारतीय तेल टैंकरों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की अनुमति दी है. दोनों देशों के विदेश मंत्री की बातचीत का उद्देश्य इस अहम समुद्री मार्ग को खुला रखना था, जिससे कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति प्रभावित न हो। रूस और फ्रांस के विदेश मंत्रियों से भी की बात सूत्रों ने ये भी बताया कि विदेश मंत्री एस जयशंकर ने केवल ईरान ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर अन्य प्रमुख शक्तियों के साथ भी तालमेल बिठाया. उन्होंने रूस के विदेश मंत्री सेर्गेई लावरोव और फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारो से भी इस गंभीर मुद्दे पर चर्चा की. इन चर्चाओं का उद्देश्य समुद्री व्यापारिक मार्गों को खुला रखना और वैश्विक सप्लाई चेन को टूटने से बचाना था.भारत की इस सक्रिय विदेश नीति ने ये साबित कर दिया है कि तनाव के वक्त में भी वह अपने हितों की रक्षा के लिए सभी पक्षों के साथ संवाद स्थापित करने में सक्षम है। USA-यूरोप और इजरायल पर जारी रहेगा प्रतिबंध ईरान ने यह विशेष रियायत भारत को ऐसे वक्त में दी है जब अमेरिका, यूरोप और इजरायल से जुड़े जहाजों को इस मार्ग पर कड़े प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है। भारत को छूट देते हुए ईरान ने ये भी स्पष्ट किया है कि अमेरिका, यूरोप और इजरायल से जुड़े जहाजों पर फिलहाल प्रतिबंध जारी रहेंगे, लेकिन भारतीय टैंकर सुरक्षित रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर सकेंगे. ये भारत की कूटनीतिक सफलता है, क्योंकि वर्तमान में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों का ट्रैफिक 90% तक कम हो गया है और कई देशों के टैंकर फंस गए हैं।

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