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राहुल गांधी के तंज से संसद में हंगामा, जलेबी फैक्ट्री और तपस्या वाली टिप्पणी पर तीखी नोकझोंक

नई दिल्ली लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर डिबेट चल रही है। इस दौरान कांग्रेस ने प्रस्ताव को लेकर कहा कि ओम बिरला ने नेता विपक्ष को समय ही नहीं दिया। उन्हें 20 बार बोलने से रोका दिया गया। इस मामले पर अब सरकार ने जवाब दिया है। भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा कि राहुल गांधी को ना बोलने की शिकायत की जाती है, लेकिन सवाल है कि वे आखिर बोलते क्या हैं। उन्होंने कहा कि मैं हरियाणा में चुनाव प्रचार में गया था तो किसी ने बताया कि राहुल गांधी ने कहा कि जलेबी की फैक्ट्री लगाएंगे। मुझे यकीन नहीं हुआ तो वीडियो दिखाया गया। भाजपा नेता ने कहा कि मैं हैरान रह गया कि आखिर ऐसा कैसे कहा जा सकता है। देश के गांव-गांव में जलेबी छनती है। इसे फैक्ट्री में नहीं बनाया जाता। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि राहुल गांधी ने अमेरिकी राजदूत से यह भी कह दिया कि भारत में इस्लामिक कट्टरपंथ से ज्यादा चिंता की बात हिंदू रैडिकल हैं। उन्होंने कहा कि इन्होंने क्या-क्या बोला, सब कुछ मेरे पास है। यहां बताऊंगा तो लंबी लिस्ट हो जाएगी। उन्होंने कहा कि स्पीकर के खिलाफ जो अविश्वास प्रस्ताव है, वह किसी के अहंकार की संतुष्टि का प्रयास है। ‘इंदिरा गांधी के पोते के ज्ञान पर मैं तो सन्न रह गया’ रविशंकर प्रसाद ने कहा कि राहुल गांधी आरोप लगाते हैं कि मुझे बोलने नहीं दिया। आखिर वह बोलते क्या हैं। इनका कहना है कि तपस्या से गर्मी आती है। मैं तो सन्न रह गया कि आत्मा से परमात्मा का मिलन है तपस्या। आखिर इंदिरा जी के पोते का इस पर क्या ज्ञान है। इस पर मुझे हैरानी हुई। प्रधानमंत्री जी की कुर्सी के पास जिस तरह से विपक्ष के लोग आए थे, वह सबने देखा था। राहुल गांधी इस सदन को अराजकता में बदल देना चाहते हैं। यह संसद सर्वोच्च है और इसकी गरिमा बनी रहनी चाहिए। यदि स्पीकर के खिलाफ बेबुनियाद प्रस्ताव लाया गया है तो हम उसका विरोध करते हैं। बीच में बोलने लगे राहुल गांधी, नियमों का दिया गया हवाला इस दौरान राहुल गांधी ने बीच में बोलने का भी प्रयास किया, जिस पर रविशंकर प्रसाद ने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि आप बाद में बोल सकते हैं। इस डिबेट में सपा सांसद आनंद भदौरिया ने भी हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि स्पीकर ओम बिरला भले आदमी हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि सरकार ने उनसे जबरदस्ती ऐसा व्यवहार कराया। यह दुख की बात है कि उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया है। गौरतलब है कि लोकसभा स्पीकर के खिलाफ आए प्रस्ताव पर आज होम मिनिस्टर अमित शाह भी स्पीच देंगे।  

क्रिकेट फैंस के लिए खुशखबरी! IPL का पूरा शेड्यूल जारी, पहले मैच में RCB-SRH भिड़ंत

नई दिल्ली  आईपीएल का शेड्यूल जारी, पहले मैच में RCB से बेंगलुरु में भिड़ेगी SRH, जानें बाकी मैचों की पूरी डिटेल इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल 2026) के 19वें सीजन का शेड्यूल जारी हो गया है. टूर्नामेंट की शुरुआत 28 मार्च से होगी और पहला मैच डिफेंडिंग चैम्पियन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच खेला जाएगा. यह ओपनिंग मैच बेंगलुरु में ही खेला जाएगा. बता दें कि पिछले साल आरसीबी के चैम्पियन बनने के बाद बेंगलुरु में ही विक्ट्री परेड के दौरान भगदड़ मची थी. तब से यहां आईपीएल मैच को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे. हालांकि, बीसीसीआई ने आईपीएल का पूरा शेड्यूल जारी नहीं किया है. शुरुआत में केवल 20 मैचों का ही शेड्यूल जारी किया गया है. यानी 12 अप्रैल तक होने वाले मुकाबलों का ही शेड्यूल अभी जारी किया गया है. आगे के मुकाबलों का शेड्यूल बीसीसीआई बाद में जारी करेगा.  चुनावों की वजह से पूरा शेड्यूल अभी नहीं इस बार शेड्यूल बनाना थोड़ा मुश्किल रहा है क्योंकि कई राज्यों में चुनाव होने हैं. असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल में विधानसभा के चुनाव होने हैं. इसके चलते फिलहाल टूर्नामेंट के सिर्फ पहले 20 मैचों का कार्यक्रम जारी किया गया.  देखें 20 मैचों का पूरा शेड्यूल: 28 मार्च 2026 (शनिवार, शाम) रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु vs सनराइजर्स हैदराबाद — बेंगलुरु 29 मार्च 2026 (रविवार, शाम) मुंबई इंडियंस vs कोलकाता नाइट राइडर्स — मुंबई 30 मार्च 2026 (सोमवार, शाम) राजस्थान रॉयल्स vs चेन्नई सुपर किंग्स — गुवाहाटी 31 मार्च 2026 (मंगलवार, शाम) पंजाब किंग्स vs गुजरात टाइटंस — मुल्लांपुर 1 अप्रैल 2026 (बुधवार, शाम) लखनऊ सुपर जायंट्स vs दिल्ली कैपिटल्स — लखनऊ 2 अप्रैल 2026 (गुरुवार, शाम) कोलकाता नाइट राइडर्स vs सनराइजर्स हैदराबाद — कोलकाता 3 अप्रैल 2026 (शुक्रवार, शाम) चेन्नई सुपर किंग्स vs पंजाब किंग्स — चेन्नई 4 अप्रैल 2026 (शनिवार, दोपहर) दिल्ली कैपिटल्स vs मुंबई इंडियंस — दिल्ली 4 अप्रैल 2026 (शनिवार, शाम) गुजरात टाइटंस vs राजस्थान रॉयल्स — अहमदाबाद 5 अप्रैल 2026 (रविवार, दोपहर) सनराइजर्स हैदराबाद vs लखनऊ सुपर जायंट्स — हैदराबाद 5 अप्रैल 2026 (रविवार, शाम) रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु vs चेन्नई सुपर किंग्स — बेंगलुरु 6 अप्रैल 2026 (सोमवार, शाम) कोलकाता नाइट राइडर्स vs पंजाब किंग्स — कोलकाता 7 अप्रैल 2026 (मंगलवार, शाम) राजस्थान रॉयल्स vs मुंबई इंडियंस — गुवाहाटी 8 अप्रैल 2026 (बुधवार, शाम) दिल्ली कैपिटल्स vs गुजरात टाइटंस — दिल्ली 9 अप्रैल 2026 (गुरुवार, शाम) कोलकाता नाइट राइडर्स vs लखनऊ सुपर जायंट्स — कोलकाता 10 अप्रैल 2026 (शुक्रवार, शाम) राजस्थान रॉयल्स vs रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु — गुवाहाटी 11 अप्रैल 2026 (शनिवार, दोपहर) पंजाब किंग्स vs सनराइजर्स हैदराबाद — मुल्लांपुर 11 अप्रैल 2026 (शनिवार, शाम) चेन्नई सुपर किंग्स vs दिल्ली कैपिटल्स — चेन्नई 12 अप्रैल 2026 (रविवार, दोपहर) लखनऊ सुपर जायंट्स vs गुजरात टाइटंस — लखनऊ 12 अप्रैल 2026 (रविवार, शाम) मुंबई इंडियंस vs रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु — मुंबई RCB डिफेंडिंग चैम्पियन के तौर पर उतरेगी आईपीएल 2026 में आरसीबी डिफेंडिंग चैम्पियन के तौर पर मैदान में उतरेगी. वहीं मुंबई और चेन्नई अब तक की सबसे सफल टीमें हैं, जिन्होंने पांच-पांच बार खिताब जीता है.

IMD का बड़ा अलर्ट: 12 से 14 मार्च तक इन राज्यों में तेज बारिश और खराब मौसम का खतरा

नई दिल्ली देश में मौसम का मिजाज एक बार फिर बदलता नजर आ रहा है। पिछले साल Indian Monsoon 2025 का सीजन देश के लिए काफी अच्छा रहा था और कई राज्यों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई थी। मानसून के खत्म होने के बाद भी कई इलाकों में रुक-रुक कर बारिश का सिलसिला जारी रहा। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में भी बारिश की स्थिति बेहतर बनी रह सकती है। इसी बीच India Meteorological Department (IMD) ने 12, 13 और 14 मार्च के लिए देश के कई राज्यों में भारी बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के मुताबिक इस दौरान कई जगह तेज हवा के साथ बारिश होने की संभावना है। तमिलनाडु में जारी रह सकता है बारिश का दौर दक्षिण भारत के Tamil Nadu में पिछले मानसून सीजन के दौरान अच्छी बारिश हुई थी। मानसून खत्म होने के बाद भी राज्य के कई इलाकों में समय-समय पर बारिश देखने को मिली। अब मौसम विभाग का कहना है कि 12 से 14 मार्च के बीच तमिलनाडु के कई हिस्सों में एक बार फिर भारी बारिश हो सकती है। इसके साथ ही कुछ क्षेत्रों में तेज हवाएं भी चलने की संभावना जताई गई है। अरुणाचल प्रदेश में भी बदल सकता है मौसम पूर्वोत्तर भारत के Arunachal Pradesh में भी पिछले साल मानसून के दौरान अच्छी बारिश दर्ज की गई थी। मानसून के बाद भी यहां कई इलाकों में बादल छाए रहने और हल्की बारिश का सिलसिला जारी रहा। मौसम विभाग के अनुसार 12, 13 और 14 मार्च को अरुणाचल प्रदेश के कई हिस्सों में तेज बारिश हो सकती है। इससे पहाड़ी इलाकों में मौसम अचानक ठंडा हो सकता है। इन राज्यों में भी भारी बारिश की संभावना देश में मौसम के तेवर बदल गए है। ऐसे में मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है कि 12, 13 और 14 मार्च को पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, ओड़िशा, विदर्भ, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और झारखंड में कई जगह भारी बारिश हो सकती है। इस दौरान तेज़ हवा चलने की भी संभावना है। वहीं केरल, असम, मणिपुर, मिज़ोरम, मेघालय, नागालैंड, त्रिपुरा, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, माहे, पुडुचेरी, यनम और कराईकल में भी मौसम विभाग के अनुसार 12, 13 और 14 मार्च को जमकर बादल बरसेंगे। मौसम विभाग की सलाह मौसम विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि जिन इलाकों में भारी बारिश की संभावना है, वहां रहने वाले लोग मौसम की अपडेट पर नजर रखें और जरूरत पड़ने पर सावधानी बरतें। खासकर पहाड़ी और तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि मार्च के महीने में मौसम का अचानक बदलना असामान्य नहीं है, लेकिन कई राज्यों में लगातार बारिश और तेज हवाओं के कारण तापमान में गिरावट भी देखने को मिल सकती है।  

PM Kisan Samman Nidhi: कृषि मंत्री का ऐलान, 22वीं किस्त की तारीख तय

दिल्ली  देश के करोड़ों अन्नदाताओं के लिए होली से पहले एक बड़ी खुशखबरी आई है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पीएम किसान सम्मान निधि (PM-Kisan) की अगली किस्त को लेकर आधिकारिक घोषणा कर दी है। केंद्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि 13 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी असम के गुवाहाटी (मां कामाख्या की पावन भूमि) से देशभर के पात्र किसानों के खातों में योजना की 22वीं किस्त हस्तांतरित करेंगे। किस्त से जुड़ी मुख्य बातें…      कुल लाभार्थी: 9.32 करोड़ से अधिक किसान।     जारी होने वाली कुल राशि: ₹18,640 करोड़ से अधिक।     दिनांक: 13 मार्च, 2026।     स्थान: गुवाहाटी, असम। “मेहनत का मान, माटी का सम्मान” शिवराज सिंह चौहान ने इस योजना को केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि किसानों के ‘आत्मबल’ का प्रतीक बताया। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा: “यह राशि मेहनत का मान और माटी का सम्मान है। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में यह योजना समृद्धि, सशक्तिकरण और सुशासन का वह संगम है, जिसने खेती की नियति और किसान की परिस्थिति को बदलने का संकल्प सिद्ध किया है।” उन्होंने आगे कहा कि पीएम किसान निधि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की गति को बढ़ाने वाला एक ऐतिहासिक महा-अभियान है। सरकार का निरंतर प्रयास है कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में किसान सशक्त हों और भारत कृषि क्षेत्र में पूर्णतः आत्मनिर्भर बने। किसानों के लिए जरूरी सलाह यदि आप भी इस योजना के लाभार्थी हैं, तो 13 मार्च से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि:       आपका e-KYC पूरा हो चुका हो।     बैंक खाता आधार से लिंक हो।     भू-सत्यापन (Land Seeding) की प्रक्रिया पूर्ण हो।  

हरीश राणा को इच्छामृत्यु की मंजूरी, फैसला सुनाते समय भावुक हुए सुप्रीम कोर्ट के जज

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को 32 साल के हरीश राणा को इच्छामृत्यु की इजाजत देते हुए ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट में गमगीन माहौल देखने को मिला। फैसला सुनाते समय जस्टिस जे. बी. पारदीवाला बेहद भावुक हो गए और उनकी आंखें नम हो गई थी। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जे. बी. पारदीवाला और जस्टिस के. वी. विश्वनाथन की पीठ ने हरीश राणा के माता-पिता को उनकी जीवनरक्षक चिकित्सा हटाने की इजाजत दे दी है। हरीश राणा पिछले 13 साल से लगातार वेजिटेटिव स्टेट यानी कोमा में हैं। इससे पहले यह मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया था। इस मामले से सम्मानजनक मृत्यु के अधिकार यानी ‘राइट टू डाई विद डिग्निटी’ जैसे अहम सवाल भी जुड़े हुए थे। बुधवार को फैसला पढ़ते समय जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि हरीश राणा कभी एक होनहार छात्र थे और अपनी पढ़ाई कर रहे थे, लेकिन एक दुर्घटना ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। मामले की परिस्थितियों का जिक्र करते समय जस्टिस पारदीवाला भावुक हो गए और कुछ समय के लिए उनकी आवाज भी भर आई। कोई प्रतिक्रिया नहींं दे रहे हरिश पीठ ने आगे अपने फैसले में कहा कि ऐसे मामलों में मुख्य सवाल यह नहीं होता कि मरीज के लिए मौत बेहतर है या नहीं, बल्कि यह देखा जाना चाहिए कि जीवन को बनाए रखने वाला इलाज मरीज के हित में है या नहीं। अदालत ने कहा कि हरीश राणा में सिर्फ सोने-जागने के चक्र में फंसे हुए हैं, लेकिन वह किसी भी तरह की अर्थपूर्ण प्रतिक्रिया नहीं दे पा रहे हैं। वह अपने दैनिक कामों के लिए पूरी तरह दूसरों पर निर्भर हैं। अदालत ने यह भी बताया कि हरीश को पीईजी ट्यूब के जरिए क्लिनिकली एडमिनिस्टरड न्यूट्रिशन (CAN) दिया जा रहा है और इतने सालों में उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ है। हरीश राणा के साथ क्या हुआ था? गौरतलब है कि हरीश राणा 20 अगस्त 2013 में अपनी PG की चौथी मंजिल से गिर गए थे। इससे उनके सिर में गहरी चोट लगी और वह एक दशक से अधिक समय से कोमा में है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने नई दिल्ली स्थित एम्स के चिकित्सकों के द्वितीयक चिकित्सा बोर्ड द्वारा दाखिल की गई राणा की चिकित्सा संबंधी रिपोर्ट का अवलोकन किया था और कहा था कि यह रिपोर्ट ‘दुखद’ है। प्राथमिक चिकित्सा बोर्ड ने मरीज की स्थिति की जांच करने के बाद कहा था कि उसके ठीक होने की संभावना नगण्य है। उच्चतम न्यायालय ने पिछले साल 11 दिसंबर को मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि प्राथमिक चिकित्सा बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार यह व्यक्ति ‘बेहद दयनीय स्थिति’ में है। हरीश राणा को कैसे दी जाएगी इच्छामृत्यु? पीठ ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) को राणा को उपशामक देखभाल इकाई में भर्ती करने का निर्देश दिया है ताकि चिकित्सकीय उपचार बंद किया जा सके। पीठ ने यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि उपचार को एक सुनियोजित तरीके से बंद किया जाए ताकि गरिमा बनी रहे।  

बढ़ता गैस संकट: चेन्नई में रेस्तरां बंद पड़े, हाई कोर्ट में लंच बंद, रेलवे इंडक्शन पर शिफ्ट

नई दिल्ली ईरान में जारी जंग का असर अब सीधे तौर पर भारत में भी दिखने लगा है। देश भर में एलपीजी की कमी देखी जा रही है। यहां तक कि सप्लाई ठीक बनी रहे और किसी तरह की अफवाह ना फैले। इससे बचाव के लिए सरकार ने एस्मा लागू कर दिया है। इसके तहत तय किया गया है कि उद्योगों को सप्लाई में पहले की तुलना में 80 फीसदी ही सप्लाई की जाएगी। वहीं घरेलू उपभोक्ताओं को पहले की तरह गैस मिलती रहेगी।   पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और इसके परिणामस्वरूप गैस आपूर्ति में व्यवधान के बीच, उत्तराखंड सरकार ने जरूरत की स्थिति में व्यावसायिक उपयोग के लिए लकड़ी उपलब्ध कराने की तैयारी शुरू कर दी है। उत्तराखंड के वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि वर्तमान स्थिति संकटपूर्ण है। उन्होंने कहा, ‘कई पश्चिम एशियाई देशों में युद्ध जैसी परिस्थितियां बन रही हैं, इसलिए गैस की कमी की आशंका को नकारा नहीं जा सकता।’ इस स्थिति से निपटने के लिए उत्तराखंड वन विकास निगम को लकड़ी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए हैं ताकि गैस संकट बढ़ने की स्थिति में वाणिज्यिक गतिविधियों में इसका उपयोग वैकल्पिक ईंधन के रूप में किया जा सके। खाड़ी देशों में युद्ध का असर नोएडा तक, गैस सिलेंडर की किल्लत बढ़ने से एजेंसियों पर उमड़ी भीड़ खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध का असर अब भारत के कई हिस्सों में दिखाई देने लगा है। उत्तर प्रदेश के नोएडा शहर में घरेलू गैस सिलेंडरों की आपूर्ति प्रभावित होने से कई इलाकों में किल्लत बढ़ गई है। स्थिति यह है कि गैस सिलेंडर लेने के लिए बड़ी संख्या में लोग गैस एजेंसियों के बाहर पहुंच रहे हैं और लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं। नोएडा सेक्टर-24 थाना क्षेत्र के सेक्टर-54 स्थित गैस एजेंसियों के बाहर बुधवार सुबह से ही ग्राहकों की भीड़ देखने को मिली। जैसे ही सिलेंडर की कमी की खबर फैली, लोग समय से पहले ही एजेंसियों पर पहुंचने लगे। कई उपभोक्ता अपने खाली सिलेंडर लेकर लाइन में खड़े नजर आए। कुछ जगहों पर इतनी भीड़ हो गई कि एजेंसी के बाहर अव्यवस्था जैसी स्थिति बनती दिखाई दी। माइक्रोवेव, इंडक्शन का इस्तेमाल करें वेंडर्स- IRCTC IRCTC ने वेंडर्स से खाना पकाने के तरीके बदलने को कहा, क्योंकि ईरान युद्ध से LNG का फ्लो रुका हुआ है। रेलवे ने कहा है कि ‘माइक्रोवेव, इंडक्शन का इस्तेमाल करें’ दिल्ली हाई कोर्ट में लंच उपलब्ध नहीं। एलपीजी संकट के चलते हालात ऐसे हो गए हैं कि दिल्ली हाई कोर्ट में लंच उपलब्ध नहीं है। चेन्नई में एलपीजी सिलेंडर का संकट गहराया, होटलों-रेस्तरां ने घोषित की छुट्टी चेन्नई और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में संचालित होटलों और रेस्तरां के एक वर्ग ने वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति न होने के कारण बुधवार को छुट्टी घोषित कर दी। कर्मचारियों ने यह जानकारी दी। सुबह-सुबह चाय-कॉफी के लिए पहुंचे ग्राहकों ने होटलों के बंद रहने पर निराशा व्यक्त की और आशा जताई कि केंद्र सरकार स्थिति सुधारने के लिए जरूरी कदम उठाएगी। शहर के एक लोकप्रिय होटल में बुधवार को लगे नोटिस में लिखा था, ‘एलपीजी आपूर्ति न होने के कारण 11 मार्च 2026 को छुट्टी घोषित की गई है।’ करोड़ लोगों के बेरोजगार होने का खतरा- केजरीवाल एलपीजी संकट के कारण होटल और रेस्तरां पर पड़ने वाले प्रभाव से एक करोड़ लोगों के बेरोजगार होने का खतरा: अरविंद केजरीवाल

NCERT पाठ्यक्रम पर फिर बहस, सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा—पूरे सिलेबस की करेंगे समीक्षा

नई दिल्ली एनसीईआरटी की कक्षा 8वीं की पुस्तक में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार और लंबित मामलों को लेकर एक अध्याय दिया गया था। यह अध्याय नए तैयार हुए सिलेबस का हिस्सा था, जिस पर खूब विवाद हुआ और सुप्रीम कोर्ट ने ऐतराज जताया था। इस को लेकर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सरकार ने कहा कि हम NCERT के पूरे सिलेबस की ही समीक्षा कराएंगे। इस संबंध में आदेश जारी कर दिया गया है। वहीं बेंच ने केंद्र, राज्यों और विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया है कि वे एनसीईआरटी की कक्षा आठ की पुस्तक में विवादास्पद अध्याय का मसौदा तैयार करने वाले तीन विशेषज्ञों से दूरी बनाएं। अदालत ने कहा कि उसके आदेशों का उद्देश्य न्यायपालिका के संस्थागत कार्यों की किसी भी स्वस्थ एवं वस्तुनिष्ठ आलोचना को रोकना नहीं है। इसके साथ ही बेंच ने केंद्र सरकार को आदेश दिया कि वह विधि अध्ययन पाठ्यक्रम को अंतिम रूप देने के लिए संबंधित क्षेत्रों के विशेषज्ञों का पैनल एक सप्ताह के भीतर गठित करे। इस पर सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि हमने एनसीईआरटी में व्यवस्थागत बदलाव शुरू किए हैं। विषय विशेषज्ञों द्वारा जांच-पड़ताल किए बिना कुछ भी प्रकाशित नहीं किया जाएगा। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि अगर केंद्र एनसीईआरटी को पाठ्यक्रम की समीक्षा करने के लिए कहने के बजाय इसके लिए विशेषज्ञ समिति का गठन करे तो यह बेहतर होगा। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने उच्चतम न्यायालय को बताया कि केंद्र ने एनसीईआरटी को सभी कक्षाओं की पाठ्यपुस्तकों की समीक्षा करने का निर्देश दिया है। बता दें कि मंगलवार को ही NCERT ने विवादित चैप्टर को लेकर माफी मांगी थी। संस्था के निदेशक और सदस्यों ने कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक ‘समाज की खोज: भारत और उससे आगे’ के एक विवादित अध्याय को लेकर मंगलवार को बिना शर्त और बिना किसी योग्यता के सार्वजनिक माफी मांगी है। विवाद पुस्तक के अध्याय-4 ‘हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका’ को लेकर हुआ था। इसमें न्यायपालिका में कथित भ्रष्टाचार से जुड़े संदर्भों का उल्लेख किया गया था। एनसीईआरटी ने कहा है कि यह पूरी पुस्तक अब वापस ले ली गई है और फिलहाल उपलब्ध नहीं है। एनसीईआरटी की ओर से जारी बयान में कहा गया, ‘असुविधा के लिए हमें गहरा खेद है और हम सभी हितधारकों की समझदारी की सराहना करते हैं। एनसीईआरटी शैक्षणिक सामग्री में सटीकता, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।’ सुप्रीम कोर्ट ने लगा दिया था पुस्तक पर बैन इस मामले में पहले ही उच्चतम न्यायालय ने इस पाठ्यपुस्तक पर प्रतिबंध लगा दिया था। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत , न्यायमूर्ति जॉयमाला बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने पुस्तक की सभी भौतिक तथा डिजिटल प्रतियों को जब्त करने का आदेश दिया था। साथ ही अदालत ने एनसीईआरटी के निदेशक और स्कूल शिक्षा सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी कर यह भी पूछा था कि विवादित अध्याय के साथ पुस्तक प्रकाशित करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए।  

खाड़ी देशों का आभार, कांग्रेस पर वार—पीएम मोदी बोले: संकट पर भी राजनीति बंद करे विपक्ष

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केरल में बुधवार को ईरान-अमेरिका युद्ध को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा। पीएम मोदी ने कहा कि इस समय खाड़ी देशों की सरकारें भारतीय नागरिकों की रक्षा कर रही हैं, लेकिन ऐसे संकट में भी कांग्रेस राजनीति कर रही। उन्होंने कहा, ”मैं इस बात का भी शुक्रगुजार हूं कि खाड़ी देशों की सरकारें हमारे नागरिकों की रक्षा कर रही हैं। हमारी भारतीय एम्बेसी 24 घंटे उनकी मदद कर रही हैं। चाहे खाना हो, मेडिकल हो या कानूनी मदद, सब कुछ दिया जा रहा है। लेकिन दुख की बात है कि ऐसे ग्लोबल संकट में भी कांग्रेस राजनीति कर रही है और ऐसे बयान दे रही है जिससे हालात और खराब हो सकते हैं और लोग मुश्किल में पड़ सकते हैं, ताकि आखिर में वे मोदी पर इल्जाम लगा सकें। प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस और उसके नेता राहुल गांधी पर हमला करते हुए आरोप लगाया कि उन्हें देश में हो रहे डेवलपमेंट के बारे में पता नहीं है। कोच्चि में एनडीए की रैली को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि राज्य के फायदे के लिए केरल में LDF और UDF सरकारों के बीच बारी-बारी से आने का पैटर्न खत्म होना चाहिए। उन्होंने केरल के लोगों से अपील की कि वे भाजपा की अगुवाई वाली एनडीए को अगले पांच साल तक उनकी सेवा करने का मौका दें क्योंकि यह मोदी की गारंटी के साथ आता है। पीएम ने कहा कि लोग LDF-UDF की पॉलिटिक्स से दूर जाने के लिए तैयार हैं और कहा कि 2024 में त्रिशूर लोकसभा सीट और हाल ही में तिरुवनंतपुरम कॉर्पोरेशन में भाजपा की जीत का असर पूरे केरल में दिखेगा। राहुल गांधी पर हमला करते हुए, मोदी ने दावा किया कि कांग्रेस के “युवराज” (राजकुमार) को देश में हो रहे डेवलपमेंट के बारे में नहीं पता है क्योंकि उन्हें इस बात का पता नहीं है कि केरल समेत भारत के युवा और कई कंपनियां ड्रोन बनाने का काम कर रही हैं। मोदी ने अपने भाषण में यह भी कहा कि भाजपा केरल को एआई और भविष्य की टेक्नोलॉजी का हब बनाने के लिए काम करेगी। वेस्ट एशिया संकट का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि आज का भारत अपने नागरिकों को कहीं और फंसा हुआ नहीं छोड़ता और केंद्र सरकार यह पक्का करने के लिए काम कर रही है कि खाड़ी क्षेत्र में फंसे भारतीयों को हर तरह की मदद दी जाए। उन्होंने वेस्ट एशिया संकट के सिलसिले में कांग्रेस पर भी हमला किया और दावा किया कि विपक्षी पार्टी इस मुद्दे पर राजनीति कर रही है। पीएम ने आगे कहा कि खाड़ी देश वहां काम कर रहे भारतीयों का पूरा ध्यान रख रहे हैं और वह इसके लिए उनके शुक्रगुजार हैं।  

LPG संकट: केवल दो दिन की गैस बची, रेस्तरां और होटल में चिल्लाते हालात

नई दिल्ली अमेरिका और इजरायल के खिलाफ ईरान की जंग का असर भारत के करोड़ों लोगों पर पड़ता दिख रहा है. पश्चिम एशिया में जारी इस तनाव के बीच क्रूड ऑयल के दाम में तेजी के साथ ही एलपीजी सप्‍लाई में भी द‍िक्‍कत की खबरें आ रही हैं. कई लोगों की शिकायत है कि गैस सिलेंडर की बुकिंग करवाने के बावजूद 4-5 दिनों तक एलपीजी सिलेंडर उन्हें नहीं मिल पाई है. रसोई गैस की सप्लाई में दिक्कत की खबरों के सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. पूरे देश में केंद्र सरकार ने ईसीए यानी एसेंशियल कमोडिटी एक्ट लागू कर दिया है. केंद्र सरकार ने एलपीजी और सीएनजी की आपूर्ति तय करने के लिए बड़ा फैसला लिया है. सरकार के मुताबिक, आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी और कुछ उद्योगों को सीमित गैस आपूर्ति मिलेगी। प्रधानमंत्री मोदी ने भी कैबिनेट मीटिंग में मंत्रियों को साफ निर्देश दिए कि पश्चिम एशिया में जारी संकट का असर आम आदमी पर बिल्कुल नहीं पड़ना चाहिए. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस वैश्विक उथल-पुथल के समय जनता का भरोसा बनाए रखना सबसे ज़रूरी है. प्रधानमंत्री ने मंत्रियों से कहा कि तेल की क़ीमतें स्थिर हैं, ये बात लोगों तक पहुंचाएं और ये भी बताएं कि देश में तेल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. प्रधानमंत्री ने ये भी कहा कि भारत ने सप्लाई चेन मैनेजमेंट सिस्टम इस संकट को ध्यान में रखकर तैयार किया है, इसे भी जनता तक पहुंचाया जाए। भारत सरकार ने दावा किया है कि इस जंग का तेल की कीमतों पर कोई असर नहीं पड़ेगा और देश में घरेलू उपभोक्ता के लिए गैस की कोई कमी नहीं है. सरकार की तरफ से बताया गया कि भारत में फ़िलहाल पेट्रोल और डीज़ल के दाम स्थिर ही रहेंगे वो नहीं बढ़ेंगे. वहीं गैस क़ीमतों में हुआ 60 रुपये का इजाफा मौजूदा हालत की वजह से नहीं, बल्कि पिछले साल की अंडरकवरी की वजह से बढ़े हैं। दरअसल इजरायल और अमेरिका के खिलाफ ईरान की जंग के चलते मिडिल ईस्ट के प्रमुख ऊर्जा परिवहन मार्गों में आई बाधाओं के चलते पिछले एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में शनिवार को ही इजाफा किया गया था. घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की कीमत में 60 रुपये और कमर्शियल रसोई गैस सिलेंडरों की कीमत में 115 रुपये की बढ़ोतरी की गई। तमिलनाडु में एलपीजी की कमी से बंद होने के कगार पर एक लाख रेस्तरां तमिलनाडु होटल ओनर्स एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि राज्यभर में व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की गंभीर कमी के कारण अगले दो दिनों के भीतर लगभग एक लाख रेस्तरां बंद हो सकते हैं. एसोसिएशन ने केंद्र सरकार से व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को खाना पकाने की गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए तत्काल उपाय करने का आग्रह किया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष एम. वेंकटसुब्बू ने कहा कि व्यावसायिक खाना पकाने की गैस की आपूर्ति में व्यवधान का असर कई जिलों के रेस्टोरेंट पर पड़ना शुरू हो गया है. अगर स्थिति ऐसी ही बनी रही तो बड़े रेस्टोरेंट से लेकर छोटे चाय-स्टॉलों तक, सभी को अपना संचालन बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि लगभग 50 लाख श्रमिक प्रत्यक्ष रूप से रेस्तरांओं पर निर्भर हैं, जबकि अन्य 50 लाख लोग अप्रत्यक्ष रूप से इस क्षेत्र पर निर्भर हैं. अगर गैस की आपूर्ति तुरंत बहाल नहीं की गई, तो पूरा उद्योग संकट में आ जाएगा। घरेलू यूजर्स के लिए रसोई गैस की कमी नहीं, कमर्शियल ग्राहकों के लिए एलपीजी डिलीवरी बंद- गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन कर्नाटक के हुबली में गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन के नेता सुरेशा ने बताया कि घरेलू उपभोक्ताओं को फिलहाल किसी तरह की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि पहले घरेलू उपभोक्ताओं के लिए गैस सिलेंडर लेने का अंतराल 21 दिन था, जिसे अब 4 दिन बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है. यानी अब ग्राहक 25 दिन बाद गैस सिलेंडर ले सकेंगे. हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए गैस की कोई कमी नहीं है, लेकिन कमर्शियल ग्राहकों के लिए गैस की डिलीवरी फिलहाल बंद कर दी गई है. इस फैसले से होटल और कैटरिंग कारोबार पर बड़ा असर पड़ा है. हुबली कैटरिंग एसोसिएशन के प्रमुख रत्नाकर शेट्टी ने कहा कि गैस सप्लाई की समस्या इस समय बहुत गंभीर हो गई है. उन्होंने कहा, ‘अचानक गैस सप्लाई बंद हो जाने से हमें बहुत परेशानी हो रही है और कारोबार चलाना बेहद मुश्किल हो गया है. हमारा व्यवसाय सिर्फ हमारी रोज़ी-रोटी नहीं है, बल्कि करीब 150 लोग हमारे साथ काम करते हैं और उनकी आजीविका भी इसी पर निर्भर है।  एलपीजी सप्लाई के लिए एक्शन में सरकार, लागू किया ईसीए, कैसे खत्म होगी रसोई गैस की किल्लत पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण गैस सप्लाई में आई बाधाओं को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम (ईसीए) के तहत आदेश जारी कर घरेलू रसोई के लिए पाइपलाइन से आने वाली प्राकृतिक गैस, परिवहन के लिए एलपीजी और सीएनजी की निर्बाध आपूर्ति को सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है. आदेश में कहा गया है कि केंद्र ने आकलन किया है कि मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के परिणामस्वरूप होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से एलएनजी के शिपमेंट में रुकावट पैदा हुई है और आपूर्तिकर्ताओं ने फोर्स मेज्योर का ऐलान किया है, जिसके तहत प्राकृतिक गैस को पहले प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में भेजा जाएगा. केंद्र सरकार ने रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल इकाइयों को एलपीजीका उत्पादन अधिकतम करने और प्रमुख हाइड्रोकार्बन स्ट्रीम को एलपीजी पूल में भेजने का निर्देश दिया है। एलपीजी गैस संकट में घिरे होटल-रेस्टोरेंट, एक-दो दिन में बंद करना पड़ सकता है किचन हैदराबाद में होटल और रेस्टोरेंट कारोबार पर इन दिनों गैस संकट का असर दिखने लगा है. शहर के कई होटल और रेस्टोरेंट कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कमी से जूझ रहे हैं, जिससे किचन चलाना भी मुश्किल हो रहा है. कई रेस्टोरेंट और होटल मालिकों का कहना है कि उनके पास गैस का बेहद कम स्टॉक बचा है. अगर हालात नहीं सुधरे तो वे सिर्फ एक-दो दिन तक ही किचन जारी रख पाएंगे।  ‘लोगों को कोई परेशानी नहीं होगी…’ रसोई गैस संकट पर पीयूष गोयल का दिलासा केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भरोसा दिलाया … Read more

ईरान की धमकी के बीच अमेरिका ने लिया फैसला बदलने का कदम, होर्मुज स्ट्रेट पर तेल टैंकरों की आवाजाही पर असर

वाशिंगटन मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध के बीच एक सोशल मीडिया पोस्ट ने वैश्विक तेल बाजार में अचानक हलचल मचा दी. अमेरिका के ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने दावा किया कि अमेरिकी नौसेना ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे एक तेल टैंकर को सुरक्षा देते हुए एस्कॉर्ट किया है, ताकि दुनिया तक तेल की आपूर्ति जारी रह सके. लेकिन यह दावा ज्यादा देर तक नहीं टिक पाया. कुछ ही मिनटों बाद यह पोस्ट हटा दी गई और व्हाइट हाउस को आगे आकर सफाई देनी पड़ी। क्रिस राइट ने अपने पोस्ट में लिखा था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान के दौरान भी वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी नौसेना ने सफलतापूर्वक एक तेल टैंकर को होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित बाहर निकलने में मदद की, ताकि वैश्विक बाजारों तक तेल की आपूर्ति बनी रहे। हालांकि, यह जानकारी सामने आते ही तेल बाजार में तेज प्रतिक्रिया देखने को मिली. कुछ ही देर में कीमतों में उतार-चढ़ाव शुरू हो गया. इसके बाद व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने प्रेस ब्रीफिंग में साफ किया कि अमेरिकी नौसेना ने फिलहाल किसी भी तेल टैंकर को एस्कॉर्ट नहीं किया है. उन्होंने कहा कि ऐसा करना एक विकल्प जरूर हो सकता है, लेकिन अभी ऐसा कोई मिशन नहीं चल रहा है। अमेरिकी मंत्री के दावे को IRGC ने नकारा इस मामले पर ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने भी प्रतिक्रिया दी थी. ईरान के अधिकारियों ने अमेरिकी ऊर्जा मंत्री के दावे को पूरी तरह गलत बताया. उनका कहना था कि कोई भी अमेरिकी नौसैनिक जहाज होर्मुज स्ट्रेट के आसपास आने की हिम्मत तक नहीं कर पाया. बाद में अमेरिकी ऊर्जा विभाग के एक प्रवक्ता ने भी कहा कि ऊर्जा मंत्री के एक्स अकाउंट से जो वीडियो पोस्ट किया गया था, उसे विभाग के कर्मचारियों ने गलत कैप्शन के साथ साझा कर दिया था, इसलिए उसे हटा दिया गया। यह पूरा मामला ऐसे समय सामने आया है जब होर्मुज स्ट्रेट को लेकर वैश्विक बाजार पहले से ही बेहद संवेदनशील स्थिति में हैं. होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री ऊर्जा मार्गों में से एक है. यहां से दुनिया के करीब 20 फीसदी कच्चे तेल और बड़ी मात्रा में एलएनजी की सप्लाई गुजरती है। ऑयल टैंकर पर हमले, शिपिंग कंपनियों ने बंद की सर्विस हाल ही में यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑर्गनाइजेशन और अन्य एजेंसियों के आंकड़ों में भी चिंता जताई गई है. 1 से 10 मार्च के बीच कम से कम 10 तेल टैंकरों पर हमले या हमले की कोशिशें दर्ज की गई हैं. इन घटनाओं के बाद कई शिपिंग कंपनियों ने सुरक्षा कारणों से इस रास्ते से गुजरना बंद कर दिया है। ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से फारस की खाड़ी में व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई है. इसके कारण खाड़ी क्षेत्र में तेल का भंडार बढ़ने लगा है. कई तेल उत्पादक देशों को मजबूर होकर उत्पादन कम करना पड़ा है. सऊदी अरब, कुवैत, इराक और संयुक्त अरब अमीरात जैसे बड़े तेल उत्पादक देश रोजाना लाखों बैरल कम तेल निकाल रहे हैं। अगर बंद रहा होर्मुज स्ट्रेट तो वैश्विक बाजार पर पड़ेगा असर विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही जल्दी बहाल नहीं हुई, तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर और ज्यादा पड़ सकता है. हालांकि, ईरान ने साफ संकेत दिया है कि जब तक युद्ध जारी रहेगा, तब तक फारस की खाड़ी से तेल निर्यात सामान्य नहीं होने दिया जाएगा। युद्ध से पहले हर दिन औसतन करीब 138 जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजरते थे, लेकिन अब यह संख्या लगभग शून्य के करीब पहुंच गई है. इसी बीच ट्रंप प्रशासन वैश्विक बाजार को भरोसा दिलाने की कोशिश कर रहा है. अमेरिका ने शिपिंग कंपनियों को बीमा सुरक्षा देने और जरूरत पड़ने पर नौसेना से टैंकरों को एस्कॉर्ट करने का प्रस्ताव दिया है. इसके बावजूद तेल बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। JPMorgan Chase के कमोडिटी विश्लेषकों ने मंगलवार को कहा, जब तक Strait of Hormuz से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित नहीं हो जाती, तब तक ऐसे नीतिगत फैसलों का तेल की कीमतों पर ज्यादा असर नहीं होगा। युद्ध के कारण सप्लाई प्रभावित होने से कच्चे तेल की कीमतों में भी तेज उछाल आया. सोमवार को कीमतें करीब 30 फीसदी बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं. हालांकि बाद में थोड़ी गिरावट आई, जब राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया कि युद्ध जल्द खत्म हो सकता है. लेकिन इसके अगले ही दिन अमेरिकी रक्षा मंत्री ने कहा कि ईरान के अंदर अब तक के सबसे आक्रामक हमले किए जाएंगे, जिससे बाजार में फिर अनिश्चितता बढ़ गई।

तारिक रहमान की पहल: भारत के साथ बेहतर रिश्तों के लिए बांग्लादेश के इंटेलिजेंस चीफ को दिल्ली भेजा

नई दिल्ली बांग्लादेश में बीएनपी (BNP) की जीत और तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत के साथ रिश्ते सुधारने की कोशिशें तेज हो गई हैं। देशों के बीच कूटनीतिक और सुरक्षा संबंधों को पटरी पर लाने की कोशिश की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, मार्च की शुरुआत में बांग्लादेश की शीर्ष रक्षा खुफिया एजेंसी डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फोर्सेज इंटेलिजेंस (DGFI) के प्रमुख ने भारत का एक उच्च-स्तरीय दौरा किया। तारिक रहमान सरकार के सत्ता संभालने के बाद से किसी शीर्ष अधिकारी की यह पहली भारत यात्रा है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश के नवनियुक्त DGFI महानिदेशक मेजर-जनरल कैसर राशिद चौधरी ने 1 से 3 मार्च के बीच दिल्ली का दौरा किया। अपनी इस यात्रा के दौरान उन्होंने भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ प्रमुख पराग जैन और सैन्य खुफिया महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल आर. एस. रमन के साथ महत्वपूर्ण बैठकें कीं। 2 मार्च को एक निजी रात्रिभोज के दौरान दोनों देशों के खुफिया प्रमुखों ने खुफिया जानकारी साझा करने और सुरक्षा साझेदारी को गहरा करने पर विस्तार से चर्चा की। आपको बता दें कि भारत लंबे समय से बांग्लादेश की धरती पर होने वाली भारत विरोधी गतिविधियों को लेकर चिंतित रहा है। भारत की प्राथमिकता नई सरकार के साथ मिलकर इन चुनौतियों का समाधान करना है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान बांग्लादेश की कानून-व्यवस्था में जो गिरावट आई थी, उसे सुधारने के लिए तारिक रहमान सरकार अब भारत के साथ मिलकर काम करना चाहती है। इस सुरक्षा सहयोग का पहला बड़ा परिणाम पश्चिम बंगाल में देखने को मिला। राज्य की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने रविवार को घोषणा की कि बांग्लादेश के प्रसिद्ध राजनीतिक कार्यकर्ता शरीफ उस्मान बिन हादी की हत्या के दो मुख्य आरोपियों को उत्तर 24 परगना के बनगांव इलाके से गिरफ्तार कर लिया गया है। आपको बता दें कि 2024 के छात्र आंदोलन के प्रमुख युवा नेता और ‘इंकलाब मंच’ के प्रवक्ता हादी को दिसंबर 2025 में ढाका में सिर में गोली मारी गई थी, जिसके बाद सिंगापुर में उनकी मौत हो गई थी। आरोपियों की पहचान फैसल करीम मसूद और आलमगीर हुसैन के रूप में हुई है। इन्हें शुक्रवार और शनिवार की दरम्यानी रात बनगांव से पकड़ा गया। बांग्लादेश सरकार ने गिरफ्तार व्यक्तियों तक ‘काउंसुलर एक्सेस’ मांगी है ताकि उनकी पहचान की पुष्टि की जा सके। बांग्लादेश की विदेश राज्य मंत्री शामा ओबैद इस्लाम ने सोमवार को ढाका में पत्रकारों से कहा कि सरकार हादी हत्याकांड में न्याय सुनिश्चित करने के लिए सभी स्थापित नियमों का पालन करेगी। उन्होंने कहा, “हमने कोलकाता स्थित अपने मिशन के माध्यम से आरोपियों तक पहुंच मांगी है। चूंकि भारत और बांग्लादेश के बीच बंदियों के हस्तांतरण की संधि मौजूद है, इसलिए हम आरोपियों को वापस लाने के लिए सभी कूटनीतिक प्रयास करेंगे। हमें इस मामले में भारत से पूर्ण सहयोग की अपेक्षा है।” सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि मेजर-जनरल कैसर राशिद का दिल्ली दौरा और उसके तुरंत बाद हादी के हत्यारों की भारत में गिरफ्तारी यह संकेत देती है कि तारिक रहमान सरकार भारत के साथ अपने सुरक्षा संबंधों को एक नई दिशा देने के लिए तैयार है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सीमा सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दों पर यह सहयोग कितना प्रभावी साबित होता है।

युद्ध का 12वां दिन: 140 अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद ईरान ने हॉर्मुज की रणनीति मजबूत की

तेहरान ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच जारी युद्ध बुधवार को 12वें दिन में प्रवेश कर गया. रात भर पूरे पश्चिम एशिया में हवाई हमले के सायरन, मिसाइल लॉन्च और नए हमलों की खबरें सामने आईं. इजरायल और अमेरिका ने ईरान के कई ठिकानों पर हमले जारी रखे, जबकि ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सहयोगी देशों को निशाना बनाया. हालांकि अब इन हमलों से ज्यादा बड़ा मुद्दा स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज बना हुआ है, जिसने बंद होने से पूरी दुनिया में हाहाकार मचा हुआ है।  ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने कहा कि उसने अपने सैन्य अभियान की 35वीं लहर शुरू कर दी है. इसमें मध्य-पूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इजरायल के मध्य हिस्सों को निशाना बनाया गया. वहीं इजरायली सेना ने दावा किया कि उसने तेहरान में ईरानी सरकार से जुड़े कई ठिकानों पर एक और बड़ा हमला किया है. उधर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का ईरान के लोगों को सीधा संदेश यह आपके लिए जीवन में एक बार मिलने वाला ऐसा अवसर है जिससे आप अयातुल्लाहशासन को हटाकर अपनी स्वतंत्रता प्राप्त कर सकते हैं. अयातुल्ला अब इस दुनिया में नहीं हैं और मैं जानता हूं कि आप नहीं चाहते कि उनकी जगह कोई दूसरा तानाशाह आ जाए।  स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज पर बढ़ा तनाव, बड़ी मुसीबत अमेरिकी सेना ने कहा कि उसने हॉर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरान के 16 नौसैनिक जहाजों को नष्ट कर दिया, जिनमें बारूदी सुरंग बिछाने वाले जहाज भी शामिल थे. हॉर्मुज दुनिया का सबसे अहम समुद्री मार्ग माना जाता है क्योंकि यहां से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल की सप्लाई गुजरती है. रिपोर्टों के मुताबिक ईरान इस जलमार्ग में बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी कर रहा था. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया कि उसके बलों ने इस अहम तेल मार्ग के पास इन जहाजों को निशाना बनाया।  1300 से ज्यादा की हो चुकी है मौत संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत ने कहा कि युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक अमेरिका और इजराइल के हमलों में 1300 से ज्यादा नागरिकों की मौत हो चुकी है. रिपोर्टों के अनुसार 28 फरवरी को दक्षिणी ईरान के एक प्राथमिक स्कूल पर हुए हमले में मिले मिसाइल के अवशेष अमेरिकी टॉमहॉक क्रूज मिसाइल के हो सकते हैं. वहीं अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने बताया कि ईरान के हमलों में लगभग 140 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं, जिनमें से 8 की हालत गंभीर बताई जा रही है।  बढ़ रहा है संघर्ष का दायरा     इस युद्ध का असर पूरे पश्चिम एशिया में दिखाई दे रहा है. लेबनान की राजधानी बेरूत के दहिया इलाके में इजरायल ने हवाई हमले किए, जो ईरान समर्थित संगठन हिज्बुल्लाह का गढ़ माना जाता है. लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार मंगलवार को हुए हमलों में कम से कम 95 लोगों की मौत हुई. वहीं हिज्बुल्लाह ने उसी दिन इजरायल पर 30 हमले करने का दावा किया।      खाड़ी देशों में भी हवाई सुरक्षा अलर्ट जारी किए गए. बहरीन ने बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद से उसने 106 मिसाइल और 176 ड्रोन मार गिराए हैं. कतर ने सात मिसाइल हमलों की पुष्टि की जबकि कुवैत ने अपने हवाई क्षेत्र में पांच ड्रोन घुसने की जानकारी दी।      सऊदी अरब ने चार ड्रोन और 7 बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने का दावा किया. वहीं संयुक्त अरब अमीरात ने कहा कि युद्ध शुरू होने के बाद से उसके खिलाफ 1,475 ड्रोन और 260 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गई हैं. इससे साफ है कि यह संघर्ष धीरे-धीरे पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में लेता जा रहा है।  इजरायल ने रात में किया हमला, ईरान ने सुबह-सुबह दिया धुआंधार जवाब मध्य-पूर्व में जारी युद्ध के बीच इजरायल ने तेहरान में हमलों की दूसरी लहर शुरू की. इजरायली सेना ने बताया कि उसने लेबनान की राजधानी बेरूत में भी हवाई हमले किए. बुधवार सुबह ईरान की ओर से ने कहा कि तेहरान के एक रिहायशी इलाके को निशाना बनाया गया. वहीं लेबनान में इजरायली हमले के दौरान रेड क्रॉस की एक एम्बुलेंस पर हमला हुआ, जिसमें एक पैरामेडिक की मौत हो गई. दूसरी ओर ईरान की सेना ने दावा किया कि उसने युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक का सबसे तेज और भारी ऑपरेशन शुरू किया है. सरकारी मीडिया के अनुसार इस हमले में इजरायल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया. ईरान की 175 बच्चियों का हत्यारा कौन? ट्रंप की सेक्रेटरी ने क्या कहा व्हाइट हाउस की प्रेस ब्रीफिंग के दौरान एक पत्रकार ने सवाल किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के एक स्कूल पर हमले के मामले में क्यों कहा कि ईरान के पास टॉमहॉक मिसाइल हो सकती है, जबकि ये मिसाइलें केवल अमेरिका और उसके तीन सहयोगी देशों के पास हैं. इस पर व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने जवाब दिया कि राष्ट्रपति को अमेरिकी जनता के सामने अपनी राय रखने का पूरा अधिकार है और इस पर जांच चल रही है. ईरान ने दागीं सऊदी अरब पर बैलिस्टिक मिसाइलें, 7 को मार गिराया गया ईरान के साथ चल रहे युद्ध के 12वें दिन सऊदी अरब ने कहा कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने देश की ओर दागी गई सात बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराया. सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक ये मिसाइलें देश के विभिन्न इलाकों की ओर बढ़ रही थीं, लेकिन उन्हें हवा में ही नष्ट कर दिया गया. मंत्रालय ने बताया कि सऊदी सेना लगातार हाई अलर्ट पर है और किसी भी हमले से निपटने के लिए तैयार है. हाल के दिनों में ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच बढ़ते संघर्ष का असर खाड़ी देशों पर भी पड़ रहा है। कई देशों में मिसाइल और ड्रोन हमलों की घटनाएं सामने आई हैं.  ईरान ने इजरायल में मचाई है भारी तबाही, दिखा नहीं रहे नेतन्याहू: अरागची ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर आरोप लगाया कि वे दुनिया से सच्चाई छिपाने की कोशिश कर रहे हैं. अरागची ने दावा किया कि ईरान की शक्तिशाली सेना इजरायल के हमलों का मुंहतोड़ जवाब दे रही है, जिसे नेतन्याहू नहीं चाहते कि लोग देखें. उन्होंने दावा किया कि जमीन पर … Read more

क्या अंतरराष्ट्रीय कानून किसी देश को दूसरे देश को हड़पने की अनुमति देता है?

संयुक्त राष्ट्र दुनियाभर में अभी दो जंगे चल रही हैं, जिनकी चर्चा हर जगह हो रही है। इसमें पहला युद्ध तो अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच हो रहा है, जबकि दूसरा रूस-यूक्रेन के बीच चल रहा है। रूस-यूक्रेन जंग फरवरी 2022 से ही जारी है। इस युद्ध में रूस ने यूक्रेन के कई हिस्सों को कब्जाया है, जिसमें डोनेट्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया जैसी जगहें शामिल हैं। इसके अलावा वह 2014 से ही क्रीमिया पर कब्जा करके बैठा है, जो कभी यूक्रेन का हिस्सा हुआ करता था। ये तो बस एक ताजा उदाहरण है, जिसमें किसी देश ने दूसरे देश के हिस्सों को कब्जाया है। अगर इतिहास उठाकर देखें तो ऐसे कई उदाहरण मिलेंगे, जहां किसी देश ने पहले दूसरे मुल्क के खिलाफ जंग छेड़ दी। फिर उस मुल्क के किसी हिस्से को कब्जा लिया। ईरान के साथ चल रही अमेरिका-इजरायल की जंग में भी ऐसा होने की संभावना जताई जा रही है। अब यहां सवाल उठता है कि क्या कोई देश ऐसा कर सकता है? क्या किसी देश को दूसरे मुल्क की जमीन पर जबरन कब्जा करने का अधिकार है? संयुक्त राष्ट्र के नियम इस संबंध में क्या कहते हैं? अगर आप इंटरनेशनल रिलेशन के स्टूडेंट हैं या फिर सरकारी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, तो फिर आपको इसका जवाब भी मालूम होना चाहिए। देश कब्जाने को लेकर UN के नियम क्या हैं? संयुक्त राष्ट्र (UN) एक ऐसी संस्था है, जिसका प्रमुख काम दुनिया में शांति बनाए रखना है, ताकि युद्ध की संभावना पैदा ना हो। मगर फिर भी कई देशों के बीच युद्ध होते रहते हैं। UN के 193 सदस्य देश हैं, जिन्हें संयुक्त राष्ट्र चार्टर का पालन करना होता है। इस चार्टर को आप UN का संविधान मान सकते हैं, जिसमें बताया गया है कि किसी देश को क्या करना है और क्या नहीं करना है। इसी चार्टर में इस बात की भी जानकारी दी गई है कि क्या कोई देश दूसरे देश के किसी हिस्से पर कब्जा कर सकता है या नहीं। UN चार्टर के आर्टिकल 2 में इस बारे में विस्तार से बात की गई है। इस आर्टिकल में 7 प्वाइंट्स हैं, जिसमें आर्टिकल 2(4) में कब्जे से संबंधित बातें हैं। आर्टिकल 2(4) में कहा गया है, ‘सभी सदस्य देश अपने अंतरराष्ट्रीय संबंधों में किसी भी मुल्क की क्षेत्रीय अखंडता या राजनीतिक स्वतंत्रता के विरुद्ध बल प्रयोग या धमकी से परहेज करेंगे, या किसी भी अन्य ऐसे तरीके से परहेज करेंगे जो संयुक्त राष्ट्र के उद्देश्यों के साथ मेल नहीं खाता हो।’ आसान भाषा में कहें तो इस आर्टिकल में कहा गया है कि दूसरे देशों पर ना तो हमला करें और ना ही उन्हें धमकी दें। यहां जिस क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखने की बात हुई है, उसका मतलब है कि किसी देश की ना तो जमीन कब्जाई जाए और ना ही उसके बॉर्डर चेंज किए जाएं। कुल मिलाकर शांति से रहें और युद्ध ना करें। जमीन कब्जाने के बाद क्या नियम लागू होते हैं? हालांकि, ऐसा देखने को मिलता है कि भले ही हर देश UN चार्टर पर साइन कर दे, लेकिन वह इसके नियमों का पालन नहीं करता है। जैसे रूस का ही उदाहरण लेते हैं, उसने UN के नियमों का पालन नहीं किया और यूक्रेन के कई हिस्सों को कब्जा लिया। अब यहां सवाल उठता है कि अगर कोई देश ऐसा कर देता है, तो फिर उसे कब्जे वाली जगह पर किन नियमों का पालन करना चाहिए। 12 अगस्त, 1949 को अपनाई गई चौथी जिनेवा संधि में इस बारे में विस्तार से बात हुई है। ये संधि युद्ध के समय और कब्जे वाले क्षेत्रों में लोगों की सुरक्षा के लिए समर्पित है। इसमें कहा गया है कि कब्जे वाले इलाके में उन सभी लोगों की सुरक्षा करनी चाहिए, जो सेना के सदस्य नहीं हैं। कब्जे वाले इलाके में रहने वाले सभी लोगों के साथ मानवीय व्यवहार किया जाना चाहिए। उनके साथ मारपीट या उन्हें टॉर्चर नहीं किया जा सकता है। कब्जाने वाले देश को इस बात की इजाजत नहीं है कि वह लोगों को भगाए या उन्हें डिपोर्ट करे। उसे इस बात की भी इजाजत नहीं है कि वह कब्जे वाले इलाके में अपने देश के नागरिकों को बसा सके। सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि कब्जा वाले इलाके में खाना और दवाएं पहुंचाने की जिम्मेदारी भी उसी की है।

सोशल मीडिया पर ‘नए रेंट नियम 2026’ का दावा: क्या सच में बदल गई बेदखली की प्रक्रिया?

नई दिल्ली ‘नए रेंट नियम 2026’ वाला एक पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। ‘भारत का नया किराया कानून 2026’ के दावे के साथ शेयर किए गए ऐसे पोस्ट में किराएदारों और मकान मालिकों से संबंधित नियमों को लेकर कई बड़े सनसनीखेज बदलाव के दावे किए गए हैं। वायरल पोस्ट के अनुसार किराया कानूनों में सरकार ने बहुत ज्यादा परिवर्तन कर दिया है। इसमें किराया, एडवांस और मकान खाली कराने के लिए नई वैद्यानिक प्रक्रिया में संशोधन की बात कही गई है। नए रेंट नियम 2026 के दावे से कंफ्यूजन ऑनलाइन तेजी से फैलने की वजह से ऐसे पोस्ट ने किराएदारों और मकान मालिकों में बहुत ही ज्यादा कंफ्यूजन पैदा कर दिया है। अलबत्ता,शेयर किए जा रहे तथ्यों में तकनीकी तौर पर कुछ सही हैं, लेकिन उनके पीछे की सच्चाई पूरी तरह से अलग है। ‘नए रेंट नियम 2026’ वाले पोस्ट में दावा     पहला तो वायरल पोस्ट के माध्यम से यह दावा किया जा रहा है कि नया किराया नियम इसी साल लागू हुआ है।     इसे इस तरह से बताने की कोशिश की गई है कि ये नियम एकसाथ पूरे देश में लागू हैं।     डिपॉजिट के तौर पर मकान मालिक दो महीने से ज्यादा का किराया नहीं ले सकता।     बिना कानूनी प्रक्रिया का पालन किए किराएदारों को नहीं निकाला जा सकता।     रेंट एग्रीमेंट डिजिटली स्टैंप्ड होना जरूरी है और 60 दिन के अंदर रजिस्ट्रेशन आवश्यक है।     12 महीने में सिर्फ एक बार किराया बढ़ सकता है, इसके लिए 90 दिनों की पूर्व सूचना जरूरी है।     मकान मालिक को प्रॉपर्टी में दाखिल होने से 24 घंटे पहले नोटिस देना होगा।     अगर 30 दिनों के भीतर जरूरी मरम्मत नहीं करवाए जाते हैं तो किराएदार उसे खुद ही करवा सकता है और किराए से उसमें लगा खर्च काट सकता है।     ताला बदलना, पानी/बिजली काटना या किराएदारों को धमकाना दंडनीय है।     कुछ रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि अगर किराया, संपत्ति को नुकसान या एग्रीमेंट को लेकर कोई विवाद होता है, तो इसका निपटारा किराया अदालत या ट्रिब्यूनल के द्वारा 60 दिन के अंदर किया जाएगा।   ‘रेंट नियम 2026’ जैसा कोई नियम नहीं बनाया गया है। अलबत्ता इनके कुछ प्रावधान मॉडल टेनेंसी एक्ट(MTA) 2021 में शामिल हैं।     केंद्रीय कैबिनेट से मंजूरी के बाद सरकार ने इसे एक गाइडलाइन नियमावली की तरह जारी किया था।     राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इसके आधार पर अपने किराया नियम तैयार करने थे।     भारत में आवासीय और किराया संबंधी कानून राज्य सरकारों के अधीन आते हैं।     यानी किराया से संबंधित नियावली तैयार करने या उसमें संशोधन का अधिकार राज्य सरकारों के पास है। मॉडल टेनेंसी एक्ट पर केंद्र सरकार का स्टैंड     दिसंबर, 2021 में तत्कालीन आवास और शहरी मामलों के राज्यमंत्री कौशल किशोर ने एक सवाल के जवाब में लोकसभा में कहा था कि लैंड और कोलोनाइजेशन राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है।     उन्होंने केंद्र शासित प्रदेशों को लेकर भी ये बताया था कि उन्हें सलाह दी गई है कि वह या तो मॉडल टेनेंसी एक्ट के आधार पर नया कानून लागू करें या फिर अपने मौजूदा किराया नियावली में संशोधन करें। मॉडल टेनेंसी एक्ट को किन राज्यों ने अपनाया     राज्यसभा में पिछले साल अगस्त तक की दी गई जानकारी के अनुसार कुछ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने मॉडल टेनेंसी एक्ट के आधार पर नियम तैयार किए हैं।     असम, अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्य और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव और लक्षद्वीप जैसे केंद्र शासित प्रदेश इनमें शामिल हैं।     केंद्र की ओर से यह भी कहा गया कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों से कहा गया है कि वह मॉडल टेनेंसी एक्ट के ताजा स्वरूप के अनुरूप अपने किराया कानूनों में बदलाव करें। इन राज्यों ने इसके पुराने ड्राफ्ट के आधार पर इसे नोटिफाई कर लिया था। मॉडल टेनेंसी एक्ट को लेकर विवाद     रेंटल एग्रीमेंट के दौरान ‘आधार’ डिटेल उपलब्ध करवाने के प्रावधान पर सवाल उठाए गए हैं और इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के विपरीत बताया जाता है।     इस कानून के तहत रेंट एग्रीमेंट के डिजिटल रजिस्ट्रेशन का यह कहकर विरोध होता है कि इससे किराएदार और मकान मालिक दोनों के निजी डेटा एक्सपोज होने का खतरा है।

मैक्सिको के तट पर दिखीं ‘प्रलय की मछलियां’, कैमरे में कैद हुई हैरान कर देने वाली तस्वीरें

मैक्सिको बीच पर टहलना ही अपने आप में अनोखा अनुभव होता है। यहीं पर अगर कोइ दुर्लभ मछली दिख जाए तो दिन यादगार होना तय है। मैक्सिको के काबो सैन लुकास में बीच पर मोनिका पिटेंगर के साथ ऐसा ही हुआ है। उन्हें वो मछली दिखी है जो कई सालों में एक झलक दिखाती है। इस फिश को डूम्स डे फिश कहते हैं। डूम्स डे का मतलब ‘प्रलय का दिन’ होता है। मोनिका ने इसका वीडियो बनाकर अपना अनुभव साझा किया है। मोनिका वीडियो में बोलती दिख रही हैं कि मुझे अपनी आंखों पर विश्वास ही नहीं हुआ। मैंने ऐसा पहले कभी नहीं देखा था। फिक्शन मूवी वाला सीन था बिल्कुल। कुछ सेकंड बाद ही उन्हें दूसरी मछली भी दिखी तो वो नर्वस हो गईं। वो अजीब सी चमकती हुई आकृति थी इसलिए सभी परेशान हो रहे थे। पानी में वापस भेजा उनकी बहन को लगा कि ये मछली किसी दिक्कत में हैं। फिर उन्होंने मछली को धक्का देकर पानी में वापस भेजने की कोशिश शुरू की। तब कई और लोग भी आए और धक्का देने लगे। कितना अद्भुत मौका था जब मछलियां काफी देर बाद भी वापस नहीं आईं तो मोनिका और उनके परिवार ने इन फिश के बारे में पढ़ा और समझ आया ये तो अद्भुत मौका था। ये हर कोई नहीं अनुभव कर पाता है। 3000 फीट नीचे ये मछली 30 फीट तक लंबी होती है। ये पानी में 3000 फीट नीचे रहती हैं। इसलिए इन्हें अद्भुत माना जाता है। इनका असली नाम ओर फिश है। जापानी मान्यता इन्हें डूम्स डे फिश नाम जापान से मिला है। वहां माना जाता है कि ये समुद्र के देवता Ryūjin का संदेश देती हैं। ये बताती हैं कि सुनामी या भूकंप आने वाला है।

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