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मार्च में ही झुलसाने वाली गर्मी: राजस्थान की लपट से MP, दिल्ली-UP में पारा 40 के पास

नई दिल्ली राजस्थान से आ रही गर्म हवाओं का असर अब पूरे मध्य भारत में दिखने लगा है। मध्य प्रदेश के अधिकांश जिलों में तापमान तेजी से बढ़ा है और कई जगहों पर यह सामान्य से 4 से 6 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल प्रदेश में मौसम शुष्क रहने के आसार हैं और अगले एक सप्ताह तक तेज धूप और गर्म हवाओं का असर बना रह सकता है। दिल्ली में भी तापमान बढ़ने लगा है। मंगलवार को राजधानी में अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है, जबकि न्यूनतम तापमान 24 डिग्री के करीब रहेगा। हालांकि शहर की हवा की गुणवत्ता खराब बनी हुई है। एयर क्वालिटी इंडेक्स 326 दर्ज किया गया, जो Severe श्रेणी में आता है।   UP में मौसम का बदला मिजाज उत्तर प्रदेश में भी मौसम तेजी से करवट ले रहा है। आगरा, झांसी और बांदा जैसे जिलों में तापमान 37 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है। वहीं मेरठ, हापुड़ और कासगंज में सुबह हल्की धुंध और कोहरा भी देखने को मिला। मध्यप्रदेश में बढ़ी गर्मी प्रदेश में सबसे अधिक तापमान रतलाम में दर्ज किया गया, जहां पारा 39.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो सामान्य से 6.4 डिग्री अधिक है। पचमढ़ी को छोड़कर प्रदेश के अधिकांश संभागों में अधिकतम तापमान 35 से 38 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया। दिन में तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण लोगों को गर्मी का तीखा असर महसूस होने लगा है। ट्रफ सिस्टम का असर, कहीं हल्की बारिश संभव मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस समय बिहार से मराठवाड़ा तक एक ट्रफ लाइन झारखंड, छत्तीसगढ़ और विदर्भ के ऊपर से गुजर रही है। इसके प्रभाव से मध्य प्रदेश के दक्षिण-पूर्वी हिस्सों में कहीं-कहीं हल्की बारिश या बादल छाने की संभावना जताई गई है। इसके अलावा मध्य क्षोभमंडल में पश्चिमी हवाओं के साथ एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय है और जम्मू-कश्मीर के ऊपर उपोष्ण पश्चिमी जेट स्ट्रीम भी बह रही है। प्रमुख शहरों का तापमान भोपाल – अधिकतम 36.8°C, न्यूनतम 15°C इंदौर – अधिकतम 36.4°C, न्यूनतम 15.5°C ग्वालियर – अधिकतम 37.2°C, न्यूनतम 18.2°C जबलपुर – अधिकतम 36°C, न्यूनतम 17°C राजस्थान में मार्च में ही हीटवेव राजस्थान में गर्मी ने मार्च की शुरुआत में ही अपने तेवर दिखा दिए हैं। बाड़मेर में तापमान 40.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो प्रदेश का सबसे अधिक रहा। वहीं जयपुर में पारा 37.8 डिग्री तक पहुंच गया है। मौसम विभाग ने जैसलमेर और बाड़मेर सहित चार जिलों में 10-11 मार्च के लिए हीटवेव का येलो अलर्ट जारी किया है। जल्दी क्यों बढ़ रही गर्मी मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि फरवरी में उत्तर और मध्य भारत में सामान्य से कम बारिश हुई। इसके कारण आसमान साफ रहा और सूर्य की किरणें सीधे जमीन तक पहुंचने लगीं, जिससे तापमान तेजी से बढ़ गया। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले तीन-चार दिनों में तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी हो सकती है। 15 मार्च के बाद पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने पर कुछ जगहों पर हल्की बारिश या बूंदाबांदी की संभावना भी है।

गैस संकट पर काबू! सरकार का दावा—रिफाइनरियों ने बढ़ाया LPG उत्पादन

ईरान ईरान युद्ध और मिडिल-ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच तेल और गैस सप्लाई में आई बाधा के बीच केंद्र सरकार ने मंगलवार को स्पष्ट किया है कि देश में एलपीजी (रसोई गैस) की कोई कमी नहीं है और हाल के दिनों में व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की संभावित कमी को लेकर जो चिंताएं सामने आई थीं, अब स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, तेल रिफाइनरियों को निर्देश दिए जाने के बाद एलपीजी उत्पादन में लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। साथ ही जमाखोरी और अनियमितताओं को रोकने के लिए अतिरिक्त प्रशासनिक कदम भी उठाए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने बताया कि देश की सभी तेल रिफाइनरियां फिलहाल 100 प्रतिशत क्षमता के साथ काम कर रही हैं ताकि एलपीजी की आपूर्ति लगातार बनी रहे। इसके अलावा वितरण व्यवस्था पर निगरानी को और सख्त करने के लिए मॉनिटरिंग अवधि को 21 दिनों से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है। सरकार ने जमाखोरी और काला बाजारी पर रोक लगाने के लिए Essential Commodities Act के प्रावधान लागू किए हैं। हालांकि अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि Essential Services Maintenance Act (ESMA) लागू नहीं किया गया है। अफवाहों से बचने की अपील सरकार ने कहा कि कुछ समय के लिए बाजार में चिंता की स्थिति बनी थी, लेकिन अब आपूर्ति पूरी तरह सामान्य हो चुकी है। लोगों से सोशल मीडिया पर फैल रही अपुष्ट खबरों पर विश्वास न करने की अपील की गई है, क्योंकि ऐसी अफवाहें अनावश्यक घबराहट पैदा कर सकती हैं। घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता अधिकारियों ने बताया कि घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं की जरूरतों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। कुछ उद्योग संगठनों द्वारा व्यावसायिक एलपीजी की संभावित कमी को लेकर चिंता जताई गई थी, लेकिन सरकार ने कहा कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। वैश्विक संकट के बीच भारत की तैयारी सरकारी सूत्रों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव के बावजूद India ऊर्जा आपूर्ति के मामले में कई देशों से बेहतर स्थिति में है। ऊर्जा मंत्रालय और तेल कंपनियां लगातार अंतरराष्ट्रीय आपूर्तिकर्ताओं के संपर्क में हैं ताकि आपूर्ति श्रृंखला में कोई बाधा न आए। सरकार का कहना है कि देश में एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता है और मांग को संभालने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं मौजूद हैं। किसी प्रकार का संकट नहीं है।  

Uniform Civil Code पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा संकेत, संसद से कानून बनाने की अपील

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर देश में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। शरीयत कानून को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि इस मामले में संसद को विचार करना चाहिए। कानूनी शून्य (Legal Vacuum) पैदा होने का खतरा चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने मामले की गंभीरता को समझते हुए कहा कि यदि अदालत सीधे शरीयत कानून को खत्म कर देती है, तो इससे एक ‘कानूनी शून्य’ पैदा हो जाएगा। पीठ के अनुसार, ऐसी स्थिति में मुस्लिम विरासत (Inheritance) को नियंत्रित करने के लिए कोई वैकल्पिक कानून मौजूद नहीं रहेगा। अदालत ने याचिकाकर्ता की मांग को सकारात्मक बताते हुए इसे विधायिका (Legislature) के पाले में डाल दिया। हक और सुधारों के बीच संतुलन सीजेआई सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि सुधारों की प्रक्रिया में हमें यह ध्यान रखना होगा कि किसी समुदाय को उन अधिकारों से वंचित न कर दिया जाए जो उन्हें वर्तमान में मिल रहे हैं। वहीं, जस्तटिस बागची ने रेखांकित किया कि UCC लागू करने का अधिकार संसद के विवेक पर निर्भर है। उन्होंने कहा… “एक पुरुष के लिए एक पत्नी का नियम फिलहाल सभी समुदायों पर समान रूप से लागू नहीं है। इसका अर्थ यह नहीं कि कोर्ट सभी दूसरी शादियों को असंवैधानिक घोषित कर दे। हमें नीति निदेशक सिद्धांतों (Directive प्रिंसिपल्स) को प्रभावी बनाने के लिए विधायी शक्ति पर निर्भर रहना होगा।”  

तनाव बढ़ा: ईरान की ट्रंप को सख्त चेतावनी, कहा– अलर्ट रहें वरना अंजाम गंभीर होगा

ईरान ईरान और अमेरिका के बीच जंग जारी है। गोला-बारूद के अलावा अब जुबानी हमले भी तेज हो गए हैं। बढ़ते तनाव के बीच ईरान के एक शीर्ष सुरक्षा अधिकारी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कड़ी चेतावनी दी है। न्यूज एजेंसी के अनुसार, अधिकारी ने कहा कि ट्रंप को अलर्ट रहना चाहिए, कहीं ऐसा न हो कि वह खुद ही खत्म हो जाएं। गौरतलब है कि यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के ठिकानों पर हमलों और तेहरान की जवाबी कार्रवाई के बाद क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है। ईरान की ओर से कहा गया है कि अगर अमेरिका ने हमले जारी रखे तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। बता दें कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा था कि ईरान के खिलाफ युद्ध अल्पकालिक हो सकता है, लेकिन उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर इस्लामी गणराज्य वैश्विक तेल आपूर्ति को बाधित करता है तो लड़ाई और तेज हो सकती है। ट्रंप ने मियामी के पास अपने गोल्फ क्लब में रिपब्लिकन सांसदों से कहा कि हम कुछ शैतानी ताकतों को खत्म करने के इरादे से कुछ समय के लिए पश्चिम एशिया में थे और मुझे उम्मीद है कि यह सब जल्द खत्म हो जाएगा। इस बयान के कुछ घंटे बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल के प्रवाह को रोकने वाला कोई भी कदम उठाता है तो अमेरिका उस पर अब तक की तुलना में बीस गुना अधिक जोरदार हमले करेगा। इससे पहले ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा था कि अमेरिका के साथ बातचीत का अनुभव ‘कड़वा’ रहा है और अब उसके साथ नए सिरे से कूटनीतिक वार्ता की संभावना नहीं है। अराघची ने पीबीएस को दिए एक साक्षात्कार में अमेरिका पर बार-बार विश्वासघात और सैन्य आक्रामकता का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि अमेरिकियों से बातचीत या उनके साथ बातचीत करने का सवाल अब एजेंडे में होगा। हमारे लिए यह अनुभव बहुत कड़वा रहा है। उन्होंने दावा किया कि ईरान ने पिछले वर्ष जून में अमेरिका के साथ अच्छे इरादे से बातचीत शुरू की थी, लेकिन बातचीत के दौरान ही उस पर हमला कर दिया गया। अराघची के अनुसार इस वर्ष भी अमेरिका ने यह भरोसा दिलाया था कि वह हमला नहीं करेगा और ईरान के परमाणु मुद्दे का शांतिपूर्ण समाधान चाहता है। विदेश मंत्री ने कहा कि तीन दौर की बातचीत में प्रगति के बावजूद हालात सुधरने के बजाय और बिगड़ गए। उन्होंने कहा कि अमेरिकी वार्ता दल ने भी प्रगति को स्वीकार किया था, लेकिन इसके बावजूद हमला किया गया। अराघची ने फारस की खाड़ी के देशों को संदेश देते हुए कहा कि क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर ईरान के हमले आत्मरक्षा के अधिकार के तहत किये गये हैं। उन्होंने कहा कि यदि अन्य देश अपनी सुविधाओं की सुरक्षा के लिए कदम उठा सकते हैं तो ईरान को भी अपने लोगों की रक्षा करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि यह युद्ध ईरान ने नहीं चुना बल्कि उस पर थोपा गया है और देश केवल अपनी रक्षा कर रहा है। अराघची ने यह भी कहा कि ईरान जरूरत पड़ने तक मिसाइल हमले जारी रखने के लिए तैयार है। उन्होंने क्षेत्रीय देशों के साथ संबंधों को लेकर उठ रही चिंताओं को खारिज करते हुए कहा कि ईरानी जनता की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।  

चीन से शिफ्ट हो रहा उत्पादन, भारत में 2025 में 5.5 करोड़ आईफोन बने

नई दिल्ली Apple ने पिछले साल भारत में iPhone का प्रोडक्शन लगभग 53% बढ़ा दिया था। अब कंपनी अपने खास डिवाइस का एक-चौथाई हिस्सा देश में ही बनाती है। इससे पता चल रहा है कि चीन पर लगने वाले टैरिफ से बचने के लिए ऐपल भारत में अपना प्रोडक्शन बढ़ा रही है। रिपोर्ट्स की मानें तो कंपनी ने 2025 में भारत में लगभग 55 मिलियन (5.5 करोड़) iPhone असेंबल किए थे। यह संख्या 2024 से काफी ज्यादा है। एक साल पहले यानी 2024 में कंपनी ने 36 मिलियन यानी लगभग 3.6 करोड़ आईफोन असेंबल किए थे। 2025 में असेंबल किए 5.5 करोड़ आईफोन  रिपोर्ट के अनुसार, कुछ सोर्स ने अपना नाम ना बताने की शर्त पर जानकारी दी है कि 2025 में भारत में 55 मिलियन (5.5 करोड़) आईफोन असेंबल किए गए। बता दें कि अभी ये डेटा रिलीज नहीं किया गया है। इस कारण सोर्स ने अपना नाम छिपाने के लिए कहा। Apple दुनिया भर में हर साल लगभग 220 से 230 मिलियन (22 करोड़ से 23 करोड़) iPhone बनाती है। इस संख्या में भारत की हिस्सेदारी साल दर साल बढ़ती जा रही है। भारत में आईफोन के प्रोडक्शन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव’ से बढ़ावा मिला है। इसका मकसद भारत को ‘दुनिया की फैक्ट्री’ बनाना है। आईफोन के नए मॉडल भी भारत में हो रहे असेंबल Apple फिलहाल अपने लेटेस्ट iPhone 17 लाइनअप के सभी वर्जन भारत में असेंबल करता है, जिसमें हाई-एंड Pro और Pro Max मॉडल भी शामिल हैं। भारत में इसके सप्लायर Foxconn Technology Group, Tata Electronics और Pegatron Corp हैं। लोकल मार्केट में बिक्री और एक्सपोर्ट के लिए iPhone 15 और iPhone 16 जैसे पुराने मॉडल भी भारत में असेंबल होते हैं। आगे आने वाले समय में कंपनी अपने और भी मॉडल भारत में असेंबल कर सकती है और यहां अपना प्रोडक्शन और भी बढ़ा सकती है। ज्यादा टैरिफ बना चीन के लिए मुसीबत चीन में ऐपल अभी भी अपने ज्यादा आईफोन बनाता है। इसके बाद भी 2025 में कंपनी को चीन से होने वाली शिपमेंट में काफी मुश्किलें आईं थी। इसका कारण अमेरिका और चीन के बीच चल रहे टैरिफ विवाद था। इस वजह से ऐपल और उसके सप्लायर्स को अमेरिकी बाजार के लिए बनने वाले ज्यादातर डिवाइसों का उत्पादन चीन से हटाकर दूसरी जगहों पर ले जाना पड़ा। इस बीच ऐपल के लिए भारत एक सही और आसान ऑप्शन के रूप में सामने आया और कंपनी ने यहां अपना प्रोडक्शन बढ़ा दिया। हालांकि, Apple के एक प्रवक्ता ने इस मामले पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

महिला आरक्षण पर सरकार का नया प्लान, यूपी चुनाव से पहले कानून में संशोधन संभव

 नई दिल्ली अब सरकार महिला आरक्षण को 2027 के यूपी और उत्तराखंड चुनाव से ही लागू करने की तैयारी में है। पंजाब और गोवा के चुनाव भी यूपी के साथ ही होने हैं। रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने इस संबंध में विपक्ष की राय लेने का प्रयास किया है। उसने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से इस मसले पर बात की है। लोकसभा और विधानसभा के चुनावों में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण दिए जाने वाले कानून में सरकार बदलाव करना चाहती है। महिला आरक्षण अधिनियम, 2023 में प्रावधान था कि जनगणना और परिसीमन के बाद इसे लागू किया जाएगा। लेकिन अब सरकार इसे 2027 के यूपी और उत्तराखंड चुनाव से ही लागू करने की तैयारी में है। पंजाब और गोवा के चुनाव भी यूपी के साथ ही होने हैं। रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने इस संबंध में विपक्ष की राय लेने का प्रयास किया है। उसने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से इस मसले पर बात की है। जानकारी के मुताबिक इन विधानसभा चुनावों में महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीटें आरक्षण करने का फैसला लॉटरी सिस्टम से लिया जा सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस मसले पर राय लेने के लिए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने दो बार कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से संपर्क साधा है। सरकार ने दोनों सदनों से नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित कराया था और इस पर राष्ट्रपति के साइन के साथ मुहर लग गई थी। इसमें प्रावधान है कि जनगणना और परिसीमन के बाद इसे लागू किया जाएगा। अब माना जा रहा है कि तब तक काफी देर हो जाएगी। इसलिए विधानसभा चुनावों से ही इसकी शुरुआत कर दी जाए। विपक्ष ने भी इसके लागू होने में देरी को लेकर सवाल उठाया था। जानकारी मिली है कि रिजिजू ने कांग्रेस से कहा है कि हम इस संशोधन विधेयक को मौजूदा बजट सेशन में ही लाना चाहते हैं, जो 2 अप्रैल तक चलने वाला है। सरकार चाहती है कि इस मसले पर सहमति बना ली जाए। इसी मकसद से उसने कांग्रेस के अलावा भी अन्य दलों से संपर्क साधने की कोशिश की है। कांग्रेस एवं अन्य कई दलों ने पहले ही मांग की थी कि इस कानून को पहले लागू किया जाए। यदि इसे जनगणना और परिसीमन से जोड़ा गया तो फिर सालों का वक्त लगेगा। कांग्रेस के साथ ही डीएमके और टीएमसी की भी ऐसी मांग थी। बता दें कि भाजपा ने बुधवार के लिए अपने सांसदों को व्हिप जारी किया है। सांसदों से कहा गया है कि कुछ जरूरी विधायी काम संसद में पेश किए जाएंगे। इस पर अपने दल का समर्थन करने के लिए सभी सांसदों को सदन में मौजूद रहना है। 2024 के आम चुनाव से पहले सितंबर 2023 में इस कानून को लाया गया था। इसके तहत यह तय किया गया था कि जनगणना और परिसीमन के बाद इसे लागू किया जाएगा। ऐसी स्थिति में इस कानून का 2029 के आम चुनाव में भी लागू होना मुश्किल दिखता है। 2021 में होने वाली जनगणना पहले ही देरी से चल रही है। इसलिए अब इस मामले में सरकार चाहती है कि संशोधन करके जल्दी से कानून लागू किया जाए।  

सुप्रीम कोर्ट में SIR याचिका पर CJI भड़के, कहा– ऐसी अर्जी कैसे दाखिल कर दी?

नई दिल्ली देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ आज (मंगलवार, 10 मार्च को) पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही थी। इस दौरान राज्य सरकार की तरफ से मामले की पैरवी कर रहीं सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी पर CJI भड़क गए। दरअसल, 28 फरवरी को प्रकाशित हुई पश्चिम बंगाल की अंतिम मतदाता सूची से नाम हटाने को चुनौती दी गई थी, जिसकी वह पैरवी कर रही थीं। याचिका में याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि उनके नाम SIR से पहले मतदाता सूची में थे और उन्होंने मतदाता के तौर पर नाम शामिल करने तथा बने रहने के समर्थन में सभी जरूरी दस्तावेज जमा कर दिए थे लेकिन जरूरी डॉक्यूमेंट्स स्वीकार न करने की वजह से वोटर लिस्ट से नाम हटा दिया गया है। ज्यूडिशियल ऑफिसर्स पर आपको भरोसा नहीं है? बहस के दौरान गुरुस्वामी ने कहा, “ज्यूडिशियल ऑफिसर्स ने लगभग 7 लाख दावों पर फैसला किया है। 63 लाख पर फैसला हो रहा था। 57 लाख अभी बाकी हैं।” इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा, “हमें पता था कि जब ज्यूडिशियल ऑफिसर्स अपॉइंट होंगे तो आप लोग भाग जाएँगे। HC के चीफ जस्टिस ने हमें बताया है कि 10 लाख पर फैसला हो चुका है। आज सुबह हमें बताया गया।” इसके बाद CJI ने् भड़कते हुए कहा, “आपका एप्लीकेशन प्रीमैच्योर है और इससे लगता है कि आपको ज्यूडिशियल ऑफिसर्स पर भरोसा नहीं है। आपने ऐसी याचिका डालने की हिम्मत कैसे की? किसी को भी ज्यूडिशियल ऑफिसर्स से सवाल करने की हिम्मत नहीं करनी चाहिए।” ‘CJI के रूप में इसे बर्दाश्त नहीं करूंगा’ इस पर गुरुस्वामी ने कहा कि हम ज्यूडिशियल ऑफिसर्स से सवाल नहीं कर रहे हैं। इस पर CJI ने कहा, “हो सकता है आपने न किया हो। लेकिन सवाल हैं। भारत के चीफ जस्टिस के तौर पर मैं इसे बर्दाश्त नहीं करूँगा।” इसके बाद गुरुस्वामी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि कोई भी ज्यूडिशियल ऑफिसर्स पर सवाल नहीं उठा सकता। हम चीफ जस्टिस के सामने पेश हुए हैं और उनके सामने पेश होना हमारे लिए सम्मान की बात है। उन्होंने कहा कि ज्यूडिशियल ऑफिसर्स के पास अब मोटे तौर पर 50 लाख केस हैं जिन पर फैसला होना है। लगभग 48 लाख मैप्ड वोटर हैं.. हम कहते हैं कि वे मैप्ड हैं क्योंकि वे 2002 के इलेक्टोरल रोल में थे और उन्होंने वोट दिया है.. वोटिंग से एक दिन पहले तक… CJI ने कहा, “इसीलिए SIR हैं। सभी असली वोटर शामिल किए जाएंगे। सभी अनऑथराइज्ड वगैरह नहीं होंगे। इस पर ज्यूडिशियल ऑफिसर्स विचार कर रहे हैं। हमें इस पर क्यों विचार करना चाहिए। वोटिंग से एक दिन पहले तक अगर किसी वोटर पर से बादल हट जाता है तो वह वोट दे सकता है।” इसी बीच CJI ने दूसरे वकील की तरफ इशारा करते हुए कहा कि मुझे वह एप्लीकेशन ढूंढने दीजिए। उस पर कंटेम्प्ट जारी किया जाना चाहिए। उन्होंने पूछा, “क्या आपने इसे फाइल किया है?” अगर हम सजा देना चाहते तो… बार एंड बेंच के मुताबिक, इस पर सीनियर एडवोकेट कल्याण बनर्जी ने कहा, “नहीं माय लॉर्ड। हमने नहीं किया है। चिंता यह है कि बाद में सप्लीमेंट्री लिस्ट पब्लिश करनी होगी।” इस पर CJI ने कहा, “तो हमें इसे ढूंढने दीजिए।” इसी दौरान एडवोकेट गुरुस्वामी ने फिर से CJI से अनुरोध करते हुए कहा, प्लीज 48 लाख मैप्ड वोटरों को सजा न दें। इतना सुनते ही बेंच के दूसरे जज जस्टिस बागची ने कहा कि अगर हम सजा देना चाहते तो हम इतनी बड़ी कार्रवाई नहीं करते। उन्होंने कहा कि हम तारीख के करीब आने पर स्थिति का जायज़ा लेंगे। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले 20 फरवरी को पश्चिम बंगाल सरकार और निर्वाचन आयोग के बीच “विश्वास की कमी” और सहयोग के अभाव का उल्लेख करते हुए इस स्थिति को “असाधारण” बताया था और मतदाता सूची में “तार्किक विसंगतियां” श्रेणी से जुड़े दावों और आपत्तियों के निपटारे की निगरानी के लिए सेवारत और सेवानिवृत्त जिला एवं अतिरिक्त जिला न्यायाधीशों (ज्यूडिशियल ऑफिसर्स) की तैनाती का निर्देश दिया था।  

ट्रंप की ‘मैडमैन थ्योरी’ क्या है? क्यों ईरान पर कभी नरमी तो कभी युद्ध की भभकी देते हैं

ईरान ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद से मिडिल-ईस्ट में छिड़े युद्ध के 10 दिन बीत चुके हैं। बावजूद इसके अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अभी तक यह स्पष्ट रूप से नहीं बता पाए हैं कि ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू करने की ठोस वजह क्या थी और इसका अंतिम लक्ष्य क्या है। ऐसे में ईरान जंग पर ट्रंप सरकार की न शुरुआत स्पष्ट है और न ही युद्ध अंत करने का कोई रोडमैप सामने आ रहा है। इससे अमेरिका और विश्व राजनीति में अनिश्चितता बढ़ती जा रही है। इतना ही नहीं ट्रंप की ईरान नीति पर भी कई सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू करने के बाद ट्रंप प्रशासन की रणनीति और संदेश लगातार बदलते रहे हैं। दस दिन बाद भी, ट्रंप अभी तक इस बात का कोई पक्का कारण नहीं बता पाए हैं कि उन्होंने युद्ध क्यों किया। अब, वह इशारा कर रहे हैं कि शांति जल्द ही आ सकती है, जबकि दूसरी तरफ वह खुद और उनके टॉप सहयोगी साथ चेतावनी दे रहे हैं कि लड़ाई और तेज और भीषण हो सकती है और ज़्यादा समय तक चल सकती है। ट्रंप एक तरफ कड़ी सैन्य कार्रवाई और तेल आपूर्ति रोकने पर “20 गुना घातक” हमले की धमकी दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर रूस के राष्ट्रपति पुतिन से मदद और बातचीत की संभावनाओं पर भी चर्चा कर रहे हैं। इससे अमेरिका समेत पूरी दुनिया में भारी कन्फ्यूजन का स्थिति है। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर इस युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई है। शेयर बाजारों में गिरावट और तेल की कीमतों में तेज उछाल ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर खतरे की आशंका पैदा कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह जंग लंबी खिंचती है तो इसका असर विश्व आर्थिक वृद्धि पर पड़ सकता है। इसके साथ ही ईरान द्वारा खाड़ी देशों पर ड्रोन और मिसाइल हमलों से पूरे मध्य-पूर्व में बड़े क्षेत्रीय युद्ध की आशंका और गहरा सकती है। अमेरिका के अंदर बढ़ रहा राजनीतिक दबाव खबर के मुताबिक, अमेरिका के भीतर भी इस युद्ध को लेकर राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है। आम चुनावों और मध्यावधि चुनावों की पृष्ठभूमि में महंगाई और बढ़ती ऊर्जा कीमतों ने सरकार के लिए चुनौती खड़ी कर दी है। कई सर्वेक्षणों में यह संकेत मिला है कि अमेरिकी जनता का बड़ा हिस्सा किसी नए विदेशी युद्ध के पक्ष में नहीं था। दूसरी तरफ, फ्लोरिडा में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने दावा किया कि यदि अमेरिका ने हमला नहीं किया होता तो ईरान पूरे मध्य-पूर्व पर कब्जा कर सकता था। हालांकि उन्होंने इस दावे के समर्थन में कोई ठोस प्रमाण नहीं दिया। विशेषज्ञों की अलग राय ट्रंप ने यह भी कहा कि यह अभियान अमेरिका के लिए आर्थिक रूप से लाभदायक साबित होगा और अंततः इससे तेल और गैस की कीमतें कम हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि यह एक जरूरी सैन्य कार्रवाई थी और युद्ध अपने अंतिम चरण में हो सकता है। हालांकि, कई विश्लेषकों का मानना है कि युद्ध शुरू होने का एक कारण यह भी हो सकता है कि ईरान पहले से ही कमजोर स्थिति में था। हाल के वर्षों में हमास और हिज्बुल्ला जैसे ईरान समर्थित समूहों को भारी सैन्य नुकसान हुआ था, जबकि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था भी दबाव में थी। ट्रंप की “मैडमैन थ्योरी” क्या? कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि यह कन्फ्यूजन दरअसल ट्रंप की “मैडमैन थ्योरी” (Madman Theory) का हिस्सा हो सकता है, जहाँ वे दुश्मन को अनिश्चित रखकर दबाव बनाना चाहते हैं। साथ ही, घरेलू स्तर पर तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी युद्धों के प्रति अमेरिकी जनता की कम सहनशीलता भी उन्हें जल्द युद्ध खत्म करने का दावा करने पर मजबूर कर रही है। हालांकि, युद्ध शुरू करने के पीछे उनके तर्क बदलते रहे हैं, कभी इसे ईरान का आसन्न परमाणु खतरा बताया, तो कभी दावा किया कि ईरान अमेरिका पर हमला करने वाला था, और कभी इसे इजरायल के हितों की रक्षा से जोड़ा। असली सवाल: क्या युद्ध खत्म करना आसान होगा? विशेषज्ञों के अनुसार अब सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि ट्रंप युद्ध खत्म करना चाहते हैं या नहीं, बल्कि यह है कि क्या वे इसे जल्दी समाप्त कर पाएंगे। अमेरिका और इजरायल द्वारा किए जा रहे हमलों ने ईरान की सैन्य क्षमता, मिसाइल कार्यक्रम और परमाणु ढांचे को काफी नुकसान पहुंचाया है, लेकिन अभी तक स्वतंत्र रूप से इसकी पूरी पुष्टि नहीं हुई है। बहरहाल, ईरान युद्ध अब केवल सैन्य संघर्ष नहीं रह गया है। यह वैश्विक ऊर्जा बाजार, अंतरराष्ट्रीय राजनीति और अमेरिकी घरेलू राजनीति- तीनों पर गहरा असर डाल रहा है। जब तक स्पष्ट रणनीति और कूटनीतिक समाधान सामने नहीं आता, तब तक इस संघर्ष के जल्दी समाप्त होने की संभावना अनिश्चित बनी हुई है।  

असम में महिलाओं को 9 हजार रुपये की सौगात, चुनाव से पहले बड़ा मास्टरस्ट्रोक

असम असम में 40 लाख परिवारों की महिलाओं को 9,000-9,000 रुपये उनके बैंक खातों में भेजे गए। राज्य सरकार की योजना अरुणोदय के तहत मंगलवार को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए शिफ्ट की गई। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने गुवाहाटी में आयोजित केंद्रीय समारोह में इसकी शुरुआत की। उन्होंने कहा कि यह राशि राज्य सरकार की करुणामयी नीति का प्रतीक है, जो महिलाओं के नेतृत्व वाले घरों को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने एक्स पर पोस्ट करते हुए इसे महिलाओं की वित्तीय सुरक्षा और गरिमा को मजबूत करने वाली पहल बताया। राज्य भर में 3,800 से अधिक सार्वजनिक कार्यक्रमों के जरिए लाभार्थी महिलाएं वर्चुअली जुड़ीं, जिसमें गांव पंचायतें, स्वायत्त परिषद क्षेत्र, ग्राम विकास समितियां और शहरी वार्ड समितियां शामिल थीं। अरुणोदय योजना की शुरुआत वर्ष 2020 में भाजपा सरकार की ओर से गरीबी उन्मूलन के लिए की गई थी। इस योजना के तहत प्रत्येक पात्र परिवार की एक महिला को प्रतिमाह 1,250 रुपये की सहायता प्रदान की जाती है। मुख्यमंत्री ने पहले घोषणा की थी कि इस साल जनवरी से चार महीनों की राशि (5,000 रुपये) के साथ बोहाग बिहू (असमिया नववर्ष) के अवसर पर अतिरिक्त राशि मिलाकर कुल 9,000 रुपये मार्च में एक साथ दिए जाएंगे। एकमुश्त मिली आर्थिक सहायता राशि रिपोर्ट के मुताबिक, इस तरह लाखों महिलाओं को एकमुश्त आर्थिक सहायता मिली, जो उनके परिवारों के लिए अहम सहारा साबित होगी। योजना केवल खास मानदंडों को पूरा करने वाली महिलाओं तक सीमित है, जिससे इसका दायरा नियंत्रित और टारगेटेड है। सीएम सरमा ने कहा कि अरुणोदय योजना का आगामी विधानसभा चुनावों से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों की तरह यहां कोई सामूहिक या सार्वभौमिक हस्तांतरण नहीं किया जाता। अगर यह चुनावी लाभ के लिए होती तो सभी को कवर किया जाता, लेकिन यह एक नियंत्रित और चयनित योजना है। सरमा ने दावा किया कि पिछले 6 वर्षों से सरकार करुणा के साथ इसे चला रही है। हिमंता बिस्वा सरमा ने जोर देकर कहा कि चुनाव जीतने का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा को जाता है, न कि योजनाओं को। अन्य विपक्षी शासित राज्यों में भी ऐसी योजनाएं चल रही हैं, लेकिन असम की यह योजना महिलाओं के सशक्तिकरण पर केंद्रित है। यह योजना असम में महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और परिवारों में उनकी भूमिका को बढ़ाने में अहम साबित हो रही है। लाखों महिलाओं को नियमित सहायता मिलने से उनकी गरिमा और आत्मविश्वास में वृद्धि हुई है। मुख्यमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि ऐसी योजनाएं राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि निरंतर सामाजिक कल्याण के लिए चलाई जानी चाहिए।  

ऑपरेशन सिंदूर की गूंज: 10 महीने बाद भी पाकिस्तान के एयरबेस पर दिख रहा असर

नईं दिल्ली  मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष के दौरान भारतीय वायुसेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान के सैन्य बुनियादी ढांचे को तबाह कर दिया था। इस स्ट्राइक का सबसे घातक असर चकवाल स्थित मुरीद एयरबेस पर पड़ा, जहां पाकिस्तान का ‘कमांड एंड कंट्रोल सेंटर’ आज भी मलबे के ढेर में तब्दील है। 10 महीने बाद भी मरम्मत में नाकाम पाकिस्तान लेटेस्ट सैटेलाइट इमेजरी (फरवरी 2026) के विश्लेषण से चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। सैटेलाइट इमेजरी एनालिस्ट डेमियन साइमन के अनुसार, भारत के हमले में क्षतिग्रस्त हुई मुख्य इमारत अब पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। 28 फरवरी की वैंटोर (Ventor) इमेज दिखाती है कि जिस हिस्से को पाकिस्तान ने मरम्मत के लिए तिरपाल से ढका था, वहां अब सिर्फ गुलाबी-लाल मलबा और खाली जमीन बची है। राफेल और पेनेट्रेटर मिसाइलों का सटीक प्रहार 10 मई 2025 को तड़के 2 से 5 बजे के बीच भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के 10 एयरबेस पर हमले किए थे। मुरीद एयरबेस, जो कि ड्रोन ऑपरेशंस का मुख्य केंद्र था, को विशेष रूप से निशाना बनाया गया: राफेल की ताकत: इन हमलों के लिए राफेल फाइटर जेट्स का इस्तेमाल किया गया। पेनेट्रेटर मुनिशन: राफेल से लॉन्च किए गए पेनेट्रेटर वारहेड्स ने कंक्रीट की मजबूत छतों को भेदकर इमारत के भीतर विस्फोट किया। ढांचागत क्षति: विस्फोट इतना जबरदस्त था कि इमारत की आंतरिक संरचना (Internal Structure) पूरी तरह कमजोर हो गई, जिसे दोबारा उपयोग के लायक नहीं बनाया जा सका। छिपाने की कोशिशें हुईं नाकाम सैटेलाइट तस्वीरों के टाइमलाइन से पाकिस्तान की हताशा साफ झलकती है…     मई-जून 2025: हमले के तुरंत बाद नुकसान को छिपाने के लिए हरे तिरपाल का इस्तेमाल किया गया।     दिसंबर 2025: लाल तिरपाल और कंस्ट्रक्शन मेश लगाकर मरम्मत का नाटक शुरू हुआ।     फरवरी 2026: ताजा तस्वीरों से साफ है कि मरम्मत की कोशिशें पूरी तरह विफल रहीं और जर्जर हो चुकी पूरी इमारत को        अंततः तोड़ना पड़ा। अंडरग्राउंड फैसिलिटी पर भी सटीक चोट मुरीद एयरबेस पर केवल इमारत ही नहीं, बल्कि अंडरग्राउंड ड्रोन स्टोरेज और स्पेशल इक्विपमेंट फैसिलिटी के प्रवेश द्वार को भी निशाना बनाया गया था। गेट से मात्र 30 मीटर की दूरी पर बने 3 मीटर चौड़े क्रेटर (गड्ढे) ने पाकिस्तान की रणनीतिक तैयारियों को भारी नुकसान पहुंचाया।

हर घर जल योजना को बढ़ावा: कैबिनेट ने जल जीवन मिशन विस्तार सहित 6 फैसलों को दी मंजूरी

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आज केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में 6 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है, जिन पर कुल 8.8 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाने की योजना है। इस मीटिंग में कैबिनेट ने जल जीवन मिशन का विस्तार करने और उसे 2028 तक जारी रखने को मंजूरी दी है। इसके अलावा केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मदुरै हवाई अड्डे को अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा घोषित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। कैबिनेट मीटिंग में लिए गए फैसलों के बारे में जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, “जल जीवन मिशन 2.0 को आज मंज़ूरी मिल गई… अब इस प्रोजेक्ट को सस्टेनेबल बनाने का समय आ गया है। उन्होंने बताया कि इस प्रोजेक्ट को पूरी तरह से रीस्ट्रक्चर किया जा रहा है। अब इंफ्रा क्रिएशन से सर्विस डिलीवरी पर फोकस होगा। वैष्णव ने बताया कि इसकी अलॉटेड रकम बढ़ाकर 8 लाख 70 करोड़ रुपये कर दी गई है और इसका मुख्य फोकस ऑपरेशन और मेंटेनेंस में समुदायों को शामिल करना होगा। उन्होंने बताया कि योजना के तहत सभी एसेट्स की डिजिटल मैपिंग की जाएगी… सभी प्रोग्राम सर्टिफाइड किए जाएंगे। एक रिलीज़ के मुताबिक, एक यूनिफ़ॉर्म नेशनल डिजिटल फ्रेमवर्क, जिसका नाम “सुजलम भारत” है, बनाया जाएगा, जिसके तहत हर गाँव को एक यूनिक सुजल गाँव / सर्विस एरिया ID दी जाएगी, जो सोर्स से नल तक पूरे पीने के पानी के सप्लाई सिस्टम की डिजिटल मैपिंग करेगी। ट्रांसपेरेंसी और अकाउंटेबिलिटी पक्का करने के लिए, “जल अर्पण” के ज़रिए स्कीमों को शुरू करने और फॉर्मल हैंडओवर करने में ग्राम पंचायतों और VWSCs को शामिल किया जाएगा। कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश के जेवर एयरपोर्ट को एलिवेटेड रोड के जरिए फरीदाबाद से जोड़ने वाली योजना को भी मंजूरी दी है और इसके लिए 3,631 करोड़ रुपये बजट को मंजबरी दी है।

CBSE का बड़ा बयान: 12वीं गणित का पेपर लीक नहीं हुआ, परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित

नई दिल्ली सीबीएसई के कक्षा 12 के गणित प्रश्नपत्र को लेकर सोशल मीडिया पर कई शंकाएं साझा की जा रही हैं। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई ने मंगलवार को इन शंकाओं पर स्पष्टीकरण देते हुए बताया कि बोर्ड परीक्षा के प्रश्नपत्र पूरी तरह असली और सुरक्षित हैं। बोर्ड के मुताबिक परीक्षा पत्र की सुरक्षा में किसी प्रकार की कोई कमी या सेंध नहीं लगी है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब प्रश्नपत्र पर दिए गए एक क्यूआर कोड को स्कैन करने पर वह यूट्यूब वीडियो से जुड़ने लगा। इसके कारण प्रश्नपत्र की प्रामाणिकता पर सवाल उठने लगे। सीबीएसई ने मंगलवार को जारी आधिकारिक बयान में बताया कि प्रश्नपत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बोर्ड द्वारा कई सुरक्षा व्यवस्था की जाती हैं। इन सुरक्षा उपायों में क्यूआर कोड भी शामिल हैं। क्यूआर कोड का उपयोग किसी संभावित सुरक्षा उल्लंघन की स्थिति में प्रश्नपत्र की सत्यता की पुष्टि करने के लिए किया जाता है। गौरतलब है कि 9 मार्च को कक्षा 12 के छात्रों की गणित विषय की परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा के बाद कुछ छात्रों और अभिभावकों के बीच यह चर्चा शुरू हो गई कि प्रश्नपत्र पर दिए गए एक क्यूआर कोड को स्कैन करने पर वह यूट्यूब वीडियो से जुड़ रहा है। इस घटना के बाद कुछ लोगों ने प्रश्नपत्र की प्रामाणिकता (असली होने) पर सवाल उठाए। यही वह कारण है जिससे छात्रों और उनके अभिभावकों के बीच प्रश्न पत्र को लेकर चिंता उत्पन्न हो गई। हालांकि सभी प्रश्नपत्र की प्रामाणिकता को लेकर बोर्ड ने स्पष्ट कहा है कि प्रश्नपत्र पूरी तरह से सही व असली है। सीबीएसई ने अपने बयान में स्पष्ट किया है कि परीक्षा में वितरित किए गए सभी प्रश्नपत्र पूरी तरह असली हैं। प्रश्नपत्रों की सुरक्षा में कोई समझौता नहीं हुआ है। बोर्ड के अनुसार, क्यूआर कोड से जुड़े इस मामले के कारण जो संदेह उत्पन्न हुआ था, उसे अब दूर कर दिया गया है। बोर्ड का कहना है कि उन्होंने इस मामले को पूरी गंभीरता से लिया गया है। बोर्ड ने कहा कि इस घटना को गंभीरता से लिया गया है और सीबीएसई ने आश्वासन दिया है कि भविष्य में इस प्रकार की स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं और पूरी प्रक्रिया की समीक्षा की जा रही है। सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक डॉ संयम भारद्वाज ने कहा कि छात्रों और अभिभावकों को किसी भी तरह की अफवाह पर विश्वास नहीं करना चाहिए, क्योंकि परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित और व्यवस्थित है। कुछ प्रश्नपत्रों के क्यूआर कोड स्कैन करने पर यूट्यूब वीडियो खुलने की बात सामने आई। भविष्य में ऐसी समस्या न हो, इसके लिए बोर्ड कदम उठा रहा है। हालांकि सीबीएसई ने स्पष्ट किया कि प्रश्नपत्र असली हैं और सुरक्षा में कोई सेंध नहीं लगी।

बाढ़ संकट से जूझ रहे मोजाम्बिक की मदद को आगे आया भारत, राहत सामग्री व दवाइयों की सप्लाई

नई दिल्ली पूर्वी अफ्रीका के देश मोजाम्बिक के मध्य और दक्षिणी हिस्सों में आई भीषण बाढ़ का जनजीवन पर बुरा असर पड़ा है। हजारों लोग प्रभावित हुए हैं, और कई इलाकों में राहत एवं पुनर्वास की तत्काल जरूरत महसूस की जा रही है। इस कठिन परिस्थिति में भारत ने मानवीय सहायता का हाथ बढ़ाते हुए बड़े पैमाने पर राहत सामग्री भेजी है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने विभिन्न सोशल प्लेटफॉर्म्स पर इसकी सूचना दी है। इसमें बताया है कि अपनी ह्यूमनिटेरियन असिस्टेंस और डिजास्टर रिलीफ (एचएडीआर) कोशिशों के तहत, भारत ने मोजाम्बिक को सहायता सामग्री पहुंचाई है। इस सहायता में 500 मीट्रिक टन चावल, अस्थायी आश्रय के लिए टेंट, हाइजीन किट और पुनर्वास कार्यों में उपयोगी कई अन्य आवश्यक सामान शामिल हैं। इसके अलावा आपदा प्रभावित लोगों की तात्कालिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 10 मीट्रिक टन आवश्यक राहत सामग्री भी भेजी गई है। राहत अभियान के तहत भारतीय नौसेना के एक जहाज के माध्यम से लगभग 3 टन आवश्यक दवाइयां भी मोजाम्बिक पहुंचाई जा रही हैं, ताकि बाढ़ के बाद फैलने वाली बीमारियों से निपटने में स्थानीय प्रशासन को मदद मिल सके। भारत पहले ही समुद्री मार्ग के जरिए 86 मीट्रिक टन जीवन रक्षक दवाइयों की खेप मोजाम्बिक भेज चुका है। इन दवाइयों का उद्देश्य आपदा-प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना और पीड़ितों को आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है। बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के बाद खाद्य सुरक्षा, स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाएं सबसे बड़ी चुनौती बन जाती हैं। ऐसे में भारत द्वारा भेजी गई खाद्य सामग्री, स्वच्छता किट और दवाइयां राहत कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। भारत ने हमेशा प्राकृतिक आपदाओं के समय अपने मित्र देशों की सहायता की है। हिंद महासागर क्षेत्र और अफ्रीकी देशों के साथ भारत के मजबूत संबंध रहे हैं, और आपदा के समय दी जाने वाली मानवीय सहायता इन संबंधों को और मजबूत करती है। भारत मानवीय, चिकित्सीय और लॉजिस्टिक सहायता देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस पहल के माध्यम से भारत न केवल संकट के समय मदद पहुंचा रहा है, बल्कि हिंद महासागर और अफ्रीका क्षेत्र में एक भरोसेमंद और जिम्मेदार साझेदार के रूप में अपनी भूमिका को भी मजबूत कर रहा है।

भयमुक्त मतदान सुनिश्चित करने के निर्देश, लापरवाही बर्दाश्त नहीं: ज्ञानेश कुमार

कोलकाता मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने निर्वाचन आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी के साथ मिलकर कोलकाता में आगामी पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के लिए तैयारियों की विस्तृत और व्यापक समीक्षा की। इसके बाद मंगलवार को प्रेस कांफ्रेंस कर एसआईआर सहित चुनाव से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय रखी। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा, “भारत निर्वाचन आयोग पश्चिम बंगाल के सभी मतदाताओं को आश्वासन दिलाता है कि आगामी चुनाव हिंसा और भय से मुक्त वातावरण में संपन्न होंगे। सभी मतदाता निश्चित रूप से मतदान करने के लिए बाहर आएं।” ज्ञानेश कुमार ने कहा, “मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का एकमात्र उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि वोटर लिस्ट लोकतंत्र की आधारशिला है। कोई भी पात्र मतदाता छूटना नहीं चाहिए, लेकिन किसी भी अपात्र व्यक्ति को मतदाता सूची में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। हाल ही में 28 फरवरी को पश्चिम बंगाल की अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की गई, जिसमें कुल 7 करोड़ 8 लाख नाम हैं।” मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया, “गणना प्रपत्र प्राप्त होने के बाद यह पाया गया कि जब पिछली बार विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) किया गया था तो लगभग 4-5 फीसदी मतदाताओं का मिलान 2002 की मतदाता सूचियों से नहीं हो पाया था। इन्हें ‘अमान्य मामले’ के रूप में वर्गीकृत किया गया। इसके अतिरिक्त लगभग 7-8 फीसदी मतदाताओं ने अपना मिलान स्वयं किया था, लेकिन या तो गलत तरीके से या संदिग्ध त्रुटियों के साथ, जो जानबूझकर या अनजाने में हो सकती हैं।” ज्ञानेश कुमार ने कहा, “चुनाव कर्मचारियों की सख्ती के संबंध में चुनाव आयोग मीडिया के माध्यम से प्रत्येक मतदाता, विशेष रूप से पश्चिम बंगाल के मतदाताओं को आश्वस्त करना चाहता है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान सभी स्तरों पर प्रत्येक अधिकारी चुनाव आयोग के कानूनों, नियमों और निर्देशों के अनुसार कार्य करेगा। यदि कोई लापरवाही पाई जाती है, तो जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।” मुख्य चुनाव ने कहा “विचाराधीन नामों के संबंध माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार और पश्चिम बंगाल के मुख्य न्यायाधीश की देखरेख में चल रही है। न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति पहले ही हो चुकी है और वे अनुच्छेद 326 के अनुसार मतदाताओं की पात्रता पर निर्णय ले रहे हैं। जहां तक ​​मतदाता सूची का संबंध है, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम और विशेष गहन पुनरीक्षण के आदेशों के अनुसार अंतिम सूची 28 फरवरी को प्रकाशित की गई थी।” मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा, “पिछले दो दिनों में हमने राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा की है। राष्ट्रीय और राज्य स्तर की सभी राजनीतिक पार्टियों, मुख्य सचिव के नेतृत्व वाली राज्य सरकार, सभी जिला कलेक्टरों, पुलिस आयुक्त, पुलिस महानिदेशक और सभी एसपी ने चुनाव आयोग को आश्वासन दिया है कि पश्चिम बंगाल में आगामी चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से, हिंसा और धमकी से मुक्त होकर संपन्न किए जाएंगे।”

तनाव बढ़ा: IRGC बोला—होर्मुज स्ट्रेट से एक बूंद तेल भी बाहर नहीं जाने देंगे

तेहरान ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के जनरल ने कहा है कि जब तक युद्ध जारी रहेगा, ईरानी सेना होर्मुज स्ट्रेट से अमेरिका और इजरायल के सहयोगी देशों को एक लीटर तेल भी निर्यात नहीं करने देगी। ईरान की तस्नीम न्यूज एजेंसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जनरल अली मोहम्मद नैनी ने कहा, “ईरानी सेना… अगली सूचना तक इस इलाके से दुश्मन देश और उसके सहयोगियों को एक लीटर तेल भी निर्यात नहीं करने देगी। तेल और गैस की कीमतों को कम करने और कंट्रोल करने की उनकी कोशिश सफल नहीं होगी।” जनरल ने कहा कि दुनिया में तेल की कीमतों पर कंट्रोल अब ईरान के हाथ में है और अमेरिका को इंतजार करना पड़ेगा कि ईरान आगे क्या कदम उठाता है। अधिकारी के मुताबिक एनर्जी मार्केट पहले से ही अस्थिर हो चुका है और ईरान तब तक लड़ाई जारी रखेगा जब तक अमेरिका की ओर से हार का ऐलान नहीं हो जाता। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का बहुत अहम समुद्री रास्ता है। हर साल दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है। जनरल के मुताबिक, “अमेरिका का दावा है कि कमर्शियल और मिलिट्री जहाज इस इलाके में मौजूद हैं और होर्मुज स्ट्रेट से आसानी से गुजर रहे हैं, जबकि अमेरिकी नौसेना के जहाज, विमान और सभी फाइटर जेट ईरान की ताकतवर मिसाइलों और ड्रोन से सुरक्षित रहने के लिए 1,000 किलोमीटर से ज्यादा पीछे हट गए हैं।” ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने ये भी दावा किया है कि उसने इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने को भी निशाने पर लिया है। आईआरजीसी के जनसंपर्क कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि इरबिल में हरिर एयर बेस पर अमेरिकी सेना के मुख्यालय को लक्ष्य बनाकर मिसाइलें दागी गईं। इस सैन्य ठिकाने पर कुल पांच मिसाइलें दागी गईं। हालांकि इस हमले से हुए नुकसान या हताहतों के बारे में अभी तक कोई जानकारी सामने नहीं आई है।

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