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रिश्तों पर शक पड़ा भारी: मर्डर के बाद अमानवीय हरकतें, इंदौर की वारदात ने झकझोरा

नई दिल्ली प्यार, शादी का दवाब, शक, हत्या, लाश से रेप और फिर आत्मा से मुलाकात की कोशिश। इंदौर में एमबीए की एक स्टूडेंट के साथ हुई दरिंदगी और उसके कातिल की हैवानियत ने सबको झकझोर दिया है। पुलिस की पूछताछ में आरोपी ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उसने बताया है कि किस तरह शादी के दबाव और शक के उपजे गुस्से में उसने गर्लफ्रेंड को बेरहमी से मार डाला और फिर बार-बार लाश के साथ रेप करता रहा। बाद में उसने तंत्र-मंत्र के जरिए गर्लफ्रेंड की आत्मा से बात करने की कोशिश की थी। मंदसौर के पीयूष धामनोदिया को मां-बाप ने इंदौर में पढ़लिखकर अपना करियर बनाने के लिए भेजा था। उसके पिता एक किराना व्यापारी हैं। एक बहन और एक भाई जो पढ़ाई कर रहे हैं। इंदौर में पीयूष एक निजी कॉलेज में पढ़ता था, जहां उसकी मुलाकात द्वारकापुरी की रहने वाली एक एमबीए स्टूडेंट से हुई। डीसीपी कृष्णलाल चंदानी ने बताया कि दोनों करीब एक साल से रिलेशन में थे। दोनों शादी करना चाहते थे पर लड़के के घरवाले इसके लिए तैयार नहीं थे। इस बात पर दोनों के बीच झगड़े होते थे। डीसीपी ने कहा कि आरोपी ने यह भी कहा है कि उसे शक था कि डेटिंग ऐप के जरिए वह दूसरे लड़कों के साथ संपर्क में थी। आधार कार्ड बनवाने निकली लड़की हो गई थी लापता मृतक लड़की 10 फरवरी को घर से यह कहकर निकली थी कि आधार कार्ड अपडेट कराने जा रही है। लेकिन वह लौटकर नहीं आई। लड़की के परिजनों ने काफी तलाश के बाद 11 फरवरी को पंढरीनाथ थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। तलाश के बीच 13 फरवरी को द्वारकापुरी के ही अंकल वाली गली में उस कमरे से उठी दुर्गंध ने लड़की की गुमशुदगी का राज खोला। पड़ोसियों की शिकायत के बाद पुलिस जब मौके पर पहुंची तो 25 वर्षीय लड़की की निर्वस्त्र लाश देखकर हैरान रह गई। शरीर को चाकू से गोदा गया था। उधर मुंबई में गर्लफ्रेंड की आत्मा बुलाने की कोशिश में जुटा था पीयूष इधर, पुलिस लड़की हत्यारे की तलाश में जुटी थी तो दूसरी तरफ इंदौर से भागकर मुंबई पहुंचा पीयूष ‘जादू-टोने’ में जुट गया था। यूट्यूब से कथित तौर पर कुछ ‘तंत्र-मंत्र’ सीखकर वह उस लड़की की आत्मा को बुलाना चाहता था। जिंदा रहते उसने जिसकी ‘ना’ नहीं सुन सका उसकी आत्मा को अब वह अपनी बात समझाना चाहता था। अगले ही दिन पकड़ा गया आरोपी हत्या के बाद आरोपी ने पीड़िता की लाश के साथ कई बार संबंध बनाए और अपनी इस गंदी हरकत को उसने लड़की के मोबाइल में कैद किया। आरोपी ने गिरफ्तारी के बाद बताया कि उसने उस मोबाइल को तोड़कर चलती ट्रेन से रास्ते में कहीं फेंक दिया। पुलिस अभी इस मोबाइल को बरामद नहीं कर पाई है, जिसमें कई तरह के सबूत हो सकते हैं। पुलिस ने आरोपी का लोकेशन ट्रेस कर उसे 14 फरवरी को गिरफ्तार कर लिया था। वह 18 फरवरी तक पुलिस रिमांड पर है। डेटिंग ऐप्स की वजह से हुआ झगड़ा आरोपी का कहना है कि पीड़िता ने उसे बताया था कि वह कुछ और लड़कों के साथ भी उसके अफेयर रहे हैं, लेकिन उसने वादा किया था अब उसके साथ ही रहेगी। लेकिन हाल ही में उसने देखा कि उसके मोबाइल में डेटिंग ऐप है और वह लड़कों से बातचीत करती है। उसे शक हो गया कि प्रेमिका उसे धोखा दे रही है और इस बात से वह बहुत गुस्से में था। हत्या वाले दिन दिन क्या-क्या किया उसने पीयूष ने पुलिस पूछताछ में बताया कि उस दिन जब वह पीड़िता को अपने साथ कमरे पर लेकर पहुंचा तो उसे बहुत भूख लगी थी। उसने लड़की के लिए मैगी बनाई। मैगी खिलाने के बाद वह उससे संबंध बनाना चाहता था। लेकिन लड़की ने इससे इनकार कर दिया। लड़की ने उसे बताया कि उसके पीरियड्स चल रहे हैं। उसने जबरन उसने छात्रा से संबंध बनाए। छात्रा का गला दबाकर दोबारा ज्यादती की। इस दौरान अप्राकृतिक कृत्य भी किया। उसने लड़की के हाथ-पैर बांध दिए थे और रस्सी से गला घोंट दिया। इसके बाद वह बीयर पीने चला गया। लौटा तो उसे लगा कि लड़की के प्राण बाकी हैं तो उसने चाकू से 18 बार गोद डाला। इसके बाद भी वह लाश के साथ बार-बार संबंध बनाता रहा। छात्रा के मोबाइल से वीडियो बनाया। बाद में कमरे में लाश को बंद कर वह मुंबई भाग गया। साइको जैसी कर रहा हरकत पुलिस सत्रों के मुताबिक पूछताछ के दौरान पीयूष कभी हंसने लगता है तो कभी रोने लगता है। वह लगातार साइको जैसी हरकत कर रहा है। वह खुद को साइको साबित करना चाहता है।

पाकिस्तान सीमा के पास अमेरिकी प्रतिनिधि की मौजूदगी से हंगामा, जानें पूरा मामला

  नई दिल्ली अमेरिका के विशेष दूत सर्जियो गोर और अमेरिकी इंडो-पैसिफिक कमांडर एडमिरल सैमुअल जे पापारो ने भारतीय सेना के वेस्टर्न कमांड (चंडीगढ़) का दौरा किया. यह दौरा पाकिस्तान बॉर्डर के बहुत करीब था. पिछले साल हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद किसी विदेशी डेलिगेशन का यह पहला ऐसा हाई-प्रोफाइल विजिट है. इसकी वजह से राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चा और बवाल हो गया. वेस्टर्न कमांड इतना महत्वपूर्ण क्यों?     मुख्यालय: चंडीगढ़     क्षेत्र: जम्मू-कश्मीर के अखनूर से पंजाब के फाजिल्का तक पाकिस्तान बॉर्डर.     200 से ज्यादा सैन्य बेस देखता है.     पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के आतंकी कैंप और एयर बेस पर हमला करने में यह कमांड सबसे आगे था.     इसलिए इस जगह का दौरा सिर्फ औपचारिक नहीं, बहुत संवेदनशील माना जा रहा है. क्या हुआ विजिट में? भारतीय सेना ने उन्हें वेस्टर्न फ्रंट (पाकिस्तान बॉर्डर) की पूरी तैयारियों, ऑपरेशन सिंदूर और क्षेत्रीय स्थिरता में भारतीय सेना की भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी. एडमिरल पापारो ने पहले ही पत्रकारों से कहा था कि भारतीय सेना का ऑपरेशन सिंदूर बहुत सटीक और शानदार था. लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार ने डेलिगेशन का स्वागत किया.  विपक्ष ने क्यों उठाए सवाल? कांग्रेस और राजयसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि भारत अब अपनी रणनीतिक नीतियां अमेरिका के हिसाब से बना रहा है. उन्होंने ट्रंप के ‘मैंने भारत-पाकिस्तान युद्ध रुकवाया’ वाले बयान का जिक्र किया. कांग्रेस ने ट्वीट कर कहा कि सरकार पाकिस्तान के ISI को भी पठानकोट एयरबेस दिखा चुकी है, अब अमेरिका को संवेदनशील जगह दिखा रही है. लेकिन सच्चाई क्या है? ऐसे विजिट बिल्कुल नई बात नहीं हैं. भारत और अमेरिका के बीच मिलिट्री-टू-मिलिट्री एक्सचेंज का पुराना कार्यक्रम है. पहले भी विदेशी राजनयिक कमांड हेडक्वार्टर विजिट कर चुके हैं. भारतीय राजनयिक भी अमेरिका के पेंटागन और CIA हेडक्वार्टर जाते रहे हैं. असली मैसेज क्या है? यह विजिट सिर्फ फोटो खिंचवाने के लिए नहीं थी. इसका बड़ा संदेश है…     अमेरिका भारत के साथ रक्षा संबंध और मजबूत करना चाहता है.      चीन के खिलाफ इंडो-पैसिफिक में भारत को काउंटर-बैलेंस के रूप में देखता है.     पाकिस्तान अब अमेरिका के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं रहा (ट्रंप की नई नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रेटजी में पाकिस्तान का नाम तक नहीं).     भारत को रूस से हथियार खरीदने से धीरे-धीरे दूर करना चाहता है (अमेरिका भारत का तीसरा सबसे बड़ा हथियार सप्लायर है, फ्रांस के बाद).     अभी हाल ही में भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बाद संबंधों में नया रीसेट हुआ है. एडमिरल पापारो ने कहा – भारत-अमेरिका रक्षा संबंध तेजी से ऊपर जा रहे हैं.  विजिट के पीछे राजनीतिक बवाल तो है, लेकिन रणनीतिक रूप से यह भारत-अमेरिका के बढ़ते विश्वास और साझेदारी का संकेत है. भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर कायम है, लेकिन चीन जैसे बड़े खतरे के सामने मजबूत साथी ढूंढ रहा है. 

HC ने कहा—कर्मचारी का इस्तीफा रोकना आर्टिकल 23 का उल्लंघन, बंधुआ मजदूरी जैसा है व्यवहार

तिरुवनंतपुरम केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में एक मामले की सुनवाई स्पष्ट किया है कि किसी कर्मचारी द्वारा इस्तीफा देने की स्थिति में कंपनी को उसे स्वीकार करना ही होगा। हाईकोर्ट ने इस दौरान कहा है कि अगर कोई एंप्लॉयर कर्मचारी का इस्तीफा स्वीकार करने से इनकार करता है तो यह ‘बंधुआ मजदूरी’ के समान माना जाएगा। बार एंड बेंच की की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस मामले में अहम टिप्पणी करते हुए जस्टिस एन नागरेश ने कहा कि जब कोई कर्मचारी सेवा शर्तों के अनुसार इस्तीफा देता है तो नियोक्ता का कर्तव्य है कि वह उसे स्वीकार करे, बशर्ते अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन ना हुआ हो। अदालत ने साफ किया कि इस्तीफा सिर्फ कुछ खास हालात में ही रोका जा सकता है, जैसे नोटिस पीरियड पूरा ना होना, गुस्से में दिया गया इस्तीफा जिसे वापस लिया जा सकता हो, गंभीर अनुशासनात्मक कार्रवाई लंबित हो या संस्था को बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ हो। कोर्ट ने कहा कि मौजूदा मामले में ऐसी कोई स्थिति नहीं थी। कंपनी द्वारा वित्तीय संकट का हवाला देकर कंपनी सेक्रेटरी का इस्तीफा ना मानना कानूनी रूप से सही नहीं है। क्या था मामला? दरअसल यह मामला ट्राको केबल कंपनी लिमिटेड नाम की एक संस्था से जुड़ा था। याचिकाकर्ता ग्रीवस जॉब पनक्कल कंपनी में सेक्रेटरी के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने बताया कि अक्टूबर 2022 से उनका वेतन नियमित नहीं मिल रहा था, जिससे वे अपना और अपनी बीमार मां का खर्च नहीं उठा पा रहे थे। उन्होंने मार्च 2024 में इस्तीफा देकर सेवा से मुक्त करने का अनुरोध किया। हालांकि कंपनी बोर्ड ने यह कहकर इस्तीफा खारिज कर दिया कि उनकी भूमिका जरूरी है और कंपनी आर्थिक संकट में है। प्रबंधन ने उन्हें ड्यूटी पर लौटने के निर्देश दिए और अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी। अंत में पनक्कल ने इन नोटिस को रद्द करने और इस्तीफा स्वीकार करने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने पाया कि कंपनी सेक्रेटरी की नियुक्ति कंपनी अधिनियम 2013 के तहत रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज में दर्ज होती है। जब तक कंपनी जरूरी फॉर्म दाखिल नहीं करती, तब तक कर्मचारी दूसरी जगह नौकरी नहीं कर सकता। इससे याचिकाकर्ता के रोजगार के अवसर बाधित हो रहे थे। अनुच्छेद 23 का उल्लंघन कोर्ट ने इस्तीफा अस्वीकार करने और अनुशासनात्मक नोटिस को रद्द कर दिया। साथ ही कंपनी को दो महीने के भीतर इस्तीफा स्वीकार कर सेवा से मुक्त करने और वेतन बकाया, अवकाश समर्पण लाभ तथा अन्य देय राशि का भुगतान जल्द करने का निर्देश दिया। जस्टिस नागरेश ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा, “वित्तीय समस्या या आपात स्थिति के नाम पर किसी कंपनी सेक्रेटरी को उसकी इच्छा और सहमति के खिलाफ काम करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।” अदालत ने यह भी कहा कि कर्मचारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी देना उसके इस्तीफा देने के अधिकार का उल्लंघन है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस्तीफा स्वीकार ना करना संविधान के अनुच्छेद 23 के तहत प्रतिबंधित बंधुआ मजदूरी जैसा है।

विश्व मंच पर भारत की भूमिका महत्वपूर्ण, UN चीफ ने कहा – योगदान है जरूरी

नई दिल्ली संयुक्त राष्ट्र (UN) प्रमुख ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र के एजेंडे में भारत का स्थायी योगदान ‘हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण’ है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत जैसी विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की वैश्विक स्तर पर बढ़ती और सशक्त होती भूमिका एक ‘सकारात्मक मेगा ट्रेंड’ के रूप में उभर रही है। भारत को माना अहम शक्ति संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने ये टिप्पणियां कृत्रिम मेधा पर ‘ग्लोबल साउथ’ में आयोजित होने वाले पहले शिखर सम्मेलन ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ में भाग लेने के लिए नई दिल्ली रवाना होने से पहले कीं। गुतारेस ने यहां ‘पीटीआई’ को दिए एक विशेष साक्षात्कार में कहा, ‘संयुक्त राष्ट्र की गतिविधियों के सभी पहलुओं मसलन शांति और सुरक्षा, सतत विकास पर चर्चा में भारत एक अत्यंत अहम शक्ति बन गया है। मुझे भारत द्वारा आयोजित जी20 की अध्यक्षता याद है जहां बहुत महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए थे।’ भारत का जताया आभार गुतारेस ने कहा, ‘और एक लोकतांत्रिक देश के रूप में मानवाधिकारों के मामले में भी वह अहम शक्ति बन गया है, वो भी एक ऐसी दुनिया में जहां दुर्भाग्य से हम दुनिया के कई हिस्सों में लोकतंत्र को संकट में देखते हैं।’ संयुक्त राष्ट्र में भारत की भूमिका से संबंधित एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा, ‘सबसे पहले हम संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षा में भारत की उपस्थिति के लिए उसके प्रति बहुत आभारी हैं। वर्तमान में लगभग 5000 भारतीय महिलाएं और पुरुष दुनिया भर में शांति रक्षा अभियानों में तैनात हैं।’ इन मुद्दों पर भी की बात उन्होंने “शांति स्थापना में भारत के पहले पूर्ण महिला पुलिस दल” पर भी प्रकाश डाला और उसे “उल्लेखनीय” करार दिया। संयुक्त राष्ट्र प्रमुख के रूप में गुतारेस का कार्यकाल इस वर्ष समाप्त हो रहा है। उन्होंने बढ़ते संघर्षों और बढ़ती असमानताओं के बीच दुनिया में उभर रहे कुछ ‘सकारात्मक मेगा ट्रेंड’ पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, ‘मेरा संदेश यह है कि चिंता करने के कई कारण हैं। हमने देखा है कि संघर्ष बढ़ रहे हैं, अन्याय और असमानताएं बढ़ रही हैं और दुनिया में गरीबी और भूख की समस्या का समाधान नहीं हो रहा है।’ उन्होंने कहा, ‘हमने दुनिया के विभिन्न हिस्सों में आतंकवाद को पनपते और एक भयावह रूप में बदलते देखा है। इसलिए चिंता के कई कारण हैं, लेकिन कुछ सकारात्मक मेगा ट्रेंड भी हैं।’ गुतारेस ने इस बात पर जोर दिया कि “सबसे महत्वपूर्ण मेगा ट्रेंड” में एक भारत जैसे देशों और अर्थव्यवस्थाओं की भूमिका से संबंधित है। संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने कहा कि विकसित देशों का समूह-जी7 और इसी तरह के अन्य देशों की वैश्विक अर्थव्यवस्था में हिस्सेदारी हर दिन कम होती जा रही है, जबकि उभरती अर्थव्यवस्थाएं, जिनमें भारत एक प्रमुख स्तंभ है, विश्व की अर्थव्यवस्था में लगातार अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रही हैं।’ उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया प्रतिदिन जारी है और यही “मेगा ट्रेंड” समय के साथ ऐसी विश्व व्यवस्था के निर्माण में योगदान देगा, जहां न्याय, समानता और शांति के लिए अधिक अनुकूल परिस्थितियां उपलब्ध होंगी।

दाग मिटाने की कोशिश में तारिक रहमान, कैबिनेट में हिंदू नेताओं की एंट्री से दिया बड़ा संदेश

ढाका बांग्लादेश के 13वें संसदीय चुनाव में जबरदस्त जीत हासिल करने वाले तारिक रहमान की कैबिनेट में दो अल्पसंख्यक समुदाय के नेताओं को जगह दी गई है. 25 सांसदों ने मंत्री पद की शपथ ली. इनमें निताई रॉय चौधरी का नाम भी शामिल है. हालांकि पहले चर्चा थी कि चौधरी के समधी और अहम महकमों के मंत्री रह चुके गोयेश्वर चंद्र रॉय को जगह मिलेगी. वहीं दूसरे अल्पसंख्यक नेता का नाम दीपेन दीवान है. कौन हैं निताई रॉय चौधरी? तृतीयोमात्रा डॉट कॉम के मुताबिक, 1949 में पैदा हुए निताई रॉय चौधरी एक बांग्लादेशी वकील और राजनीतिज्ञ हैं. निताई रॉय चौधरी, जो मगुरा निर्वाचन क्षेत्र से सांसद चुने गए हैं, पार्टी के शीर्ष रणनीतिकारों में से एक हैं और शीर्ष नेतृत्व के वरिष्ठ रणनीतिक सलाहकार माने जाते हैं. उन्होंने जमात-ए-इस्लामी के प्रत्याशी को सीधी टक्कर में मात दी है. 12 फरवरी 2026 को हुए 13वें संसदीय चुनाव में उन्होंने मगुरा-2 संसदीय क्षेत्र से जीत हासिल की. निताई रॉय चौधरी को 147896 वोट मिले हैं. उन्होंने जमात उम्मीदवार मुस्तर्शीद बिल्लाह को 30,838 वोटों के अंतर से हराया है.   कौन हैं दीपेन दीवान? दूसरे अल्पसंख्यक नेता दीपेन दीवान, बौद्ध मेजोरिटी वाले चकमा एथनिक माइनॉरिटी ग्रुप से हैं. इन्होंने दक्षिण-पूर्व रंगमती जिले की एक सीट से जीत हासिल की. हालांकि उनकी धार्मिक पहचान साफ नहीं है और कई लोग उन्हें हिंदू बताते हैं. दीवान ने अपने सबसे करीबी प्रतिद्वंद्वी के तौर पर एक निर्दलीय चकमा उम्मीदवार को हराया. हिंदू मंत्रियों की नियुक्ति और मां से नाता तारिक रहमान की कैबिनेट में मंत्री पद को लेकर गोयेश्वर रॉय को लेकर थी, जो बांग्लादेश की राजनीति में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के प्रमुख चेहरों में से एक माने जाते हैं. खालिदा जिया सरकार में लगभग 30 साल पहले (1991-1996) वो राज्य मंत्री थे. इस बार उन्हें जगह न देकर उनके समधी निताई रॉय चौधरी को मंत्री बनाया गया है. खालिदा जिया की पार्टी भले ही अल्पसंख्यकों को ज्यादा महत्वपूर्ण पद न देती हो लेकिन खालिदा जिया के दो कार्यकाल में हिंदू मंत्री शामिल रहे – 1991-1996 में गयेश्वर चंद्र रॉय राज्य मंत्री (स्टेट मिनिस्टर) के रूप में शामिल थे. वे पर्यावरण एवं वन मंत्रालय तथा मत्स्य एवं पशुपालन मंत्रालय के प्रभारी थे. अब वे बड़ा अल्पसंख्यक चेहरा बन चुके हैं. 2001-2006 में गौतम चक्रबर्ती राज्य मंत्री के रूप में जल संसाधन मंत्रालय के प्रभारी थे. वे बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई कल्याण फ्रंट के कन्वेनर भी थे. तारिक रहमान ने भी मां की राह पर चलते हुए अपनी कैबिनेट में हिंदू चेहरों को शामिल किया है. उनकी मां की कैबिनेट में एक हिंदू मंत्री रहे लेकिन रहमान कैबिनेट में 2 अल्पसंख्यक चेहरे हैं, वो भी ऐसे वक्त में जब बांग्लादेश अल्पसंख्यकों के लिए नर्क बना हुआ है. बांग्लादेश के दामन से खून का दाग धोएंगे तारिक रहमान? तारिक रहमान ऐसे वक्त में बांग्लादेश की सत्ता संभाल रहे हैं, जब वहां अस्थिरता के साथ-साथ अल्पसंख्यकों के लिए बेहद बुरे हालात हैं. अंतरिम सरकार के राज में हिंदुओं का खूब कत्लेआम हुआ. मॉब लिंचिंग की ऐसी-ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं. खासतौर पर चुनावों की घोषणा होने के बाद से अलग-अलग इलाकों से लगभग हर रोज हिंदुओं की हत्या की खबरें आती रहीं. खासतौर पर नवंबर के अंत से फरवरी के पहले हफ्ते तक अल्पसंख्यकों के खून से बांग्लादेश का दामन रंग गया. क्या तारिक रहमान बदलाव के छोटे से कदम से अपने देश की इमेज सुधार पाएंगे? BNP कैबिनेट में किसे कौन सी जिम्मेदारी दी जाएगी?   BNP के सूत्रों के हवाले से एक लिस्ट हासिल की है, जिसमें बताया गया है कि किन मंत्रियों और राज्य मंत्रियों को कौन से मंत्रालय दिए जाएंगे.     मिर्ज़ा फ़ख़रुल इस्लाम आलमगीर – स्थानीय सरकार, ग्रामीण विकास और सहकारिता मंत्रालय     सलाहुद्दीन अहमद – गृह मंत्रालय     अमीर खसरू महमूद चौधरी – वित्त और योजना मंत्रालय     मेजर (रिटायर्ड) हाफिज उद्दीन अहमद – मुक्ति युद्ध मामलों का मंत्रालय     इकबाल हसन महमूद तुकू – बिजली, ऊर्जा और खनिज संसाधन मंत्रालय     AZM ज़ाहिद हुसैन – महिला और बाल मंत्रालय, सामाजिक कल्याण     खलीलुर रहमान – विदेश मंत्रालय     अब्दुल अवल मिंटू – पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय     मिजानुर रहमान मीनू – भूमि मंत्रालय     निताई रॉय चौधरी – सांस्कृतिक मामलों का मंत्रालय     मोहम्मद असदुज्जमां – कानून, न्याय और संसदीय मामलों का मंत्रालय     काज़ी शाह मोफ़ज्जल हुसैन कैकोबाद – धार्मिक मामलों का मंत्रालय     अरिफुल हक चौधरी – श्रम और रोज़गार मंत्रालय, प्रवासी कल्याण और विदेशी रोज़गार     खानदेकर अब्दुल मुक्तदिर – वाणिज्य, उद्योग, कपड़ा और जूट मंत्रालय     ज़ाहिर उद्दीन स्वपन – सूचना और प्रसारण मंत्रालय शाहिद     उद्दीन चौधरी एनी – जल संसाधन मंत्रालय     एहसानुल हक मिलन – शिक्षा, प्राइमरी और मास एजुकेशन मंत्रालय     अमीन उर ​​राशिद – कृषि, मत्स्य पालन और पशुधन मंत्रालय, खाद्य मंत्रालय     अफरोजा खानम – नागरिक उड्डयन और पर्यटन मंत्रालय     असदुल हबीब दुलु – आपदा प्रबंधन और राहत मंत्रालय     ज़कारिया ताहिर – आवास और सार्वजनिक निर्माण मंत्रालय     दीपेन दीवान – चटगाँव पहाड़ी इलाकों के मामले मंत्रालय     सरदार एमडी सखावत हुसैन बकुल – स्वास्थ्य और परिवार नियोजन मंत्रालय     फकीर महबूब अनम – डाक और दूरसंचार विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय     शेख रबीउल आलम, सड़क परिवहन और पुल, रेलवे और शिपिंग मंत्रालय.

3.25 लाख करोड़ की राफेल डील समझें: भारत क्यों बुला रहा है फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों को

नई दिल्ली  फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भारत दौरे पर आ चुके हैं. इमैनुएल मैक्रों आज यानी मंगलवार को मुंबई पहुंचे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ आज उनकी मुलाकात और बैठक होगी. इमैनुएल मैक्रों और मोदी की मुलाकात से रक्षा और तकनीक की दुनिया में हलचल मचने वाली है. इमैनुएल मैक्रों चार दिवसीय भारत यात्रा पर हैं. इसका मुख्य मकसद भारत-फ्रांस के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना है. मगर उनकी यात्रा सबसे बड़ा फोकस है 3.25 लाख करोड़ रुपये की महाडील. जी हां, भारत और फ्रांस के बीच 3.25 लाख करोड़ रुपए की राफेल वाली मेगा डिफेंस डील होने वाली है. यह डील भारतीय वायुसेना को 114 आधुनिक राफेल लड़ाकू विमानों से लैस करेगी. इमैनुएल मैक्रों की यह यात्रा न केवल डिप्लोमेसी का प्रतीक है, बल्कि भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ मुहिम को गति देने वाली सौगात भी है. अब सवाल है कि आखिर यह डील इतनी बड़ी क्यों है, और ‘F-5 वाला राफेल’ क्या बला है? इमैनुएल मैक्रों की यात्रा का बैकग्राउंड देखें तो भारत और फ्रांस के रिश्ते पहले से ही मजबूत हैं. 2016 में 36 राफेल जेट्स की पहली डील के बाद दोनों देशों ने कई प्रोजेक्ट्स पर हाथ मिलाया. मसलन स्कॉर्पीन पनडुब्बियां. अब 2026 में यह यात्रा इसलिए अहम है क्योंकि चीन की बढ़ती आक्रामकता और पाकिस्तान की हरकतों के बीच भारत अपनी हवाई ताकत को दोगुना करना चाहता है. इमैनुएल मैक्रों भी मानते हैं कि भारत फ्रांस का सबसे बड़ा साझेदार है. ऑपरेशन सिंदूर में भारत राफेल की ताकत का सबूत देख चुका है. यही कारण है कि इमैनुएल मैक्रों की यात्रा का मुख्य फोकस राफेल डील ही है. यह डील न सिर्फ रक्षा को मजबूत करेगी, बल्कि भारत-फ्रांस साझेदारी की गारंटी भी बनेगी. भारत-फ्रांस के बीच बड़ी डील यह भारत की आजादी के बाद की सबसे बड़ी हथियार खरीद है. रक्षा मंत्रालय की डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने हाल ही में राफेल डील को हरी झंडी दी. डील के तहत फ्रांस की दसॉल्ट एविएशन कंपनी से 114 राफेल मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) खरीदे जाएंगे. इनमें से 18 विमान सीधे फ्रांस से ‘ऑफ-द-शेल्फ’ खरीदे जाएंगे यानी तैयार माल की तरह. बाकी 96 विमान भारत में ही बनाए जाएंगे. इसकी कुल लागत करीब 30 अरब यूरो (लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये) है. इसमें विमानों के अलावा रखरखाव, ट्रेनिंग, लॉजिस्टिक्स और मिसाइल सिस्टम जैसे स्कैल्प भी शामिल हैं. यह डील भारतीय वायुसेना की ताकत को 50 फीसदी तक बढ़ा देगी, क्योंकि वर्तमान में 36 राफेल ही हैं. राफेल डील में क्या अहम? इस डील में एक चीज सबसे अहम है, वह है राफेल का एफ-5 वर्जन. जी हां, राफेल एक फ्रेंच लड़ाकू विमान है. यह ‘मल्टी-रोल’ वाला विमान है. जल, थल और नभ तीनों जगह कारगर. राफेल के अलग-अलग वर्जन हैं. जैसे F3, F4. अब नई डील में F4 और F5 वेरिएंट्स आ रहे हैं. भारत-फ्रांस के बीच राफेल डील की सबसे खास बात ये है कि इनमें से 24 विमान ‘सुपर राफेल’ होंगे. इन एडवांस्ड जेट को ही F-5 वर्जन कहा जा रहा है. अभी भारत के पास जो राफेल हैं, वे F-3 वेरिएंट के हैं. ये राफेल 4.5 जेनरेशन फाइटर माने जाते हैं. अभी जो डील होने जा रही है, इनमें ज्यादातर राफेल F-4 वर्जन के होंगे. यह अधिक एडवांस सिस्टम और अपग्रेड टेक्नोलॉजी के साथ आएंगे. जबकि F-5 राफेल एक ‘सुपर अपग्रेड वर्जन’ है. यह छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों जैसा होगा. क्या है एफ-5 वाला राफेल? इसमें एडवांस्ड सेंसर, स्टील्थ फीचर्स (जो रडार से छिप जाएं), AI-बेस्ड ऑटोनॉमी (खुद फैसले लेना) और ‘किल-वेब’ तकनीक है, जो कई विमानों को एक साथ जोड़कर दुश्मन को निशाना बनाती है. F5 में नए इंजन, बेहतर मिसाइलें और ड्रोन इंटीग्रेशन होगा. भारत को 24 ‘सुपर राफेल’ भी मिलेंगे, जो F5 के प्रोटोटाइप हैं. फ्रांस इसे 2030 तक डिलीवर करेगा. यह डील सिर्फ हथियारों की नहीं, बल्कि स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप की है. भारत को राफेल डील के तहत टेक्नोलॉजी ट्रांसफर मिलेगा, जिससे हम खुद राफेल जैसे विमान बना सकेंगे. आज क्या-क्या होगा?     भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज यानी 17 फरवरी 2026 को मुंबई जा रहे हैं. यहां वे फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मिलेंगे. पीएम मोदी के निमंत्रण पर राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों 17-19 फरवरी 2026 तक भारत के ऑफिशियल दौरे पर हैं. वे भारत में हो रहे एआई इम्पैक्ट समिट में हिस्सा लेंगे और मुंबई में प्रधानमंत्री के साथ द्विपक्षीय बैठक भी करेंगे. यह राष्ट्रपति मैक्रों का भारत का चौथा और मुंबई का पहला दौरा होगा.     17 फरवरी को दोपहर करीब 3:15 बजे दोनों नेता मुंबई के लोक भवन में द्विपक्षीय मीटिंग करेंगे. इस मीटिंग के दौरान, वे भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी में हुए विकास की समीक्षा करेंगे. उनकी बातचीत रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने और इसे नए और उभरते क्षेत्र में और डाइवर्सिफाई करने पर फोकस होगी. प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों क्षेत्रीय और वैश्विक इंपॉर्टेंस के मुद्दों पर भी विचारों का लेन-देन करेंगे.     शाम करीब 5:15 बजे, दोनों नेता भारत-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन 2026 का उद्घाटन करेंगे और दोनों देशों के बिजनेस लीडर्स, स्टार्ट-अप्स, रिसर्चर्स और दूसरे इनोवेटर्स की एक मीटिंग को संबोधित करेंगे. मैक्रों के दौरे पर क्या-क्या होगा? इस दौरे के दौरान दोनों नेता हॉरिजोन 2047 रोडमैप में बताए गए कई क्षेत्रों में आपसी सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा करेंगे. इसके अलावा, आपसी फायदे के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा करेंगे, जिसमें इंडो-पैसिफिक में सहयोग भी शामिल है. दोनों नेता भारत-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन का उद्घाटन करने के लिए मुंबई में उपस्थित होंगे. इस इवेंट को दोनों देशों में पूरे साल 2026 तक मनाया जाएगा. राष्ट्रपति मैक्रों 19 फरवरी को नई दिल्ली में एआई इम्पैक्ट समिट में हिस्सा लेंगे. और क्या-क्या होने की संभावना?     मोदी और मैक्रो की द्विपक्षीय बैठक के बाद करीब एक दर्जन समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना     रक्षा, व्यापार, कौशल विकास, स्वास्थ्य और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्र में होगा समझौता     मुंबई में दोनों नेता भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष का संयुक्त उद्घाटन करेंगे, जो 2026 तक दोनों देशों में मनाया जाएगा.     भारत और फ्रांस के बीच रक्षा, टेक्नोलॉजी और व्यापार संबंधों को मिलेगा बढ़ावा     भारत सरकार ने हाल ही में फ्रांस से … Read more

भारत-UK समझौते से बड़ा फायदा, 99% भारतीय सामान पर जीरो-ड्यूटी संभव

नई दिल्ली  भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) इस साल अप्रैल 2026 से लागू होने के लिए पूरी तरह तैयार है. एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने पुष्टि की है कि इस समझौते के लागू होने से न केवल द्विपक्षीय व्यापार में ऐतिहासिक वृद्धि होगी, बल्कि भारतीय श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए ब्रिटेन के दरवाजे पूरी तरह खुल जाएंगे. 99% भारतीय उत्पादों पर जीरो-ड्यूटी इस ऐतिहासिक समझौते की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि ब्रिटेन को निर्यात किए जाने वाले 99 प्रतिशत भारतीय उत्पादों पर अब कोई सीमा शुल्क (Customs Duty) नहीं लगेगा. इससे भारत के उन क्षेत्रों को जबरदस्त फायदा होगा जहां बड़ी संख्या में लोग काम करते हैं. विशेष रूप से टेक्सटाइल (कपड़ा), रत्न एवं आभूषण, चमड़ा, फुटवियर, खिलौने, और समुद्री उत्पादों के निर्यातकों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है. अब ये उत्पाद ब्रिटिश बाजार में वियतनाम और बांग्लादेश जैसे प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले ज्यादा सस्ते और प्रतिस्पर्धी होंगे. IT सेक्टर और पेशेवरों को बड़ी राहत व्यापार के साथ-साथ, सेवाओं के क्षेत्र में भी बड़ी जीत हासिल हुई है. दोनों देशों ने ‘डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन’ (DCC) पर हस्ताक्षर किए हैं. इसका मतलब यह है कि जो भारतीय आईटी पेशेवर या अन्य कर्मचारी अस्थायी रूप से (3 साल तक) ब्रिटेन में काम करने जाएंगे, उन्हें और उनके नियोक्ताओं को वहां ‘सोशल सिक्योरिटी’ टैक्स नहीं देना होगा. इससे भारतीय कंपनियों की लागत कम होगी और उनके कर्मचारी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे. व्हिस्की और कारों पर घटेगा आयात शुल्क भारत ने भी ब्रिटिश उत्पादों के लिए अपने बाजार खोले हैं. भारत में बेहद लोकप्रिय स्कॉच व्हिस्की पर आयात शुल्क 150% से घटाकर तत्काल 75% कर दिया जाएगा, जिसे 2035 तक धीरे-धीरे 40% तक लाया जाएगा. इसी तरह, ब्रिटिश कारों पर लगने वाले भारी-भरकम शुल्क को अगले 5 वर्षों में घटाकर 10% तक लाया जाएगा. बदले में, भारतीय इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों को ब्रिटेन के बाजार में विशेष कोटा मिलेगा. आर्थिक लक्ष्य और भविष्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने मई 2025 में इस डील को अंतिम रूप दिया था. वर्तमान में यह समझौता ब्रिटिश संसद में अनुसमर्थन की प्रक्रिया में है. दोनों देशों का लक्ष्य है कि वर्तमान के $60 बिलियन के द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक $100 बिलियन के पार पहुँचाया जाए. विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत को एक वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के सपने को गति प्रदान करेगा.

आज की ताजपोशी में चर्चा का केंद्र—तारिक रहमान की दौलत और पत्नी जुबैदा की अधिक संपत्ति

ढाका  तारिक रहमान की ताजपोशी होने वाली है. दुनियाभर से करीब 1200 मेहमान शपथ ग्रहण समारोह में पहुंचने वाले हैं. दरअसल, तारिक रहमान बांग्लादेशी के अगले प्रधानमंत्री बनने वाले हैं. ये पूर्व राष्ट्रपति जिया उर रहमान और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बड़े बेटे हैं, और 17 साल के निर्वासन के बाद 2025 में लंदन से बांग्लादेश लौटकर आए हैं.  बंपर जीत के बाद तारिक रहमान की खूब चर्चा हो रही है. लोग जानना चाहते हैं कि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कार्यकारी प्रमुख तारिक रहमान की कुल संपत्ति कितनी है, उनकी कमाई का जरिया क्या है?  पति से ज्यादा पत्नी अमीर चुनावी हलफनामे के मुताबिक तारिक रहमान की कुल नेटवर्थ करीब 1.97 करोड़ बांग्लादेशी टका है, जो भारतीय करेंसी में करीब 1.48 करोड़ रुपये के बराबर है. उनकी यह नेटवर्थ मुख्य रूप से बैंक बैलेंस, फिक्स्ड डिपॉजिट, शेयर और अचल संपत्ति मिलाकर है. चुनाव आयोग के सामने जमा किए गए हलफनामे में यह विवरण साफ दर्ज किया गया है.  बता दें, तारिक रहमान ने ढाका-17 और बोगुरा-6 दोनों सीटों से भारी मतों से जीत हासिल की है. Election Affidavit के अनुसार तारिक रहमान की सालाना आय करीब 6.76 लाख टका (लगभग 5 लाख रुपये) है, जो उन्होंने शेयर, बॉन्ड और बैंक जमा पर अर्जित किया है.  उनके बैंक खातों में कुल जमा लगभग 1.23 करोड़ टका (यानी करीब 92.25 लाख रुपये) हैं, जिनमें से लगभग 31.6 लाख टका नकद या चालू बचत में रखे हुए हैं. Fixed Deposits में कुछ उनके बेटी के नाम पर भी हैं, तारिक रहमान द्वारा घोषित चल संपत्ति (movable assets) में फर्नीचर लगभग 2 लाख टका का है. इसके अलावा उनके पास बोगुरा में 2 एकड़ से अधिक जमीन है.  तारिक रहमान की पत्नी डॉक्टर तारिक की पत्नी डॉ. जुबैदा रहमान ने अपने हलफनामे में काफी अधिक आय और संपत्ति घोषित की है. वे एक डॉक्टर हैं और उनकी वर्षीय आय लगभग 35.6 लाख टका (लगभग 26.7 लाख रुपये) है, यह उनकी पति की आय से लगभग 5 गुना अधिक है. उनके बैंक जमा लगभग 1 करोड़ बांग्लादेशी टका हैं, जिसमें से 66.5 लाख टका बचत खाते में हैं, वे 111.25 डिसिटल भूमि और 800-स्क्वायर-फुट के डुप्लेक्स घर की भी मालकिन हैं. टैक्स रिकॉर्ड्स से पता चलता है कि तारिक ने पिछले साल करीब 1 लाख टका टैक्स दिया, हलफनामे के अनुसार, उनके पास कोई भी कर्ज या सरकारी बकाया नहीं है. जबकि उनकी पत्नी ने लगभग 5.6 लाख टका टैक्स दिया. शेयरों में भी दोनों का मिलकर कुछ निवेश है, जिसमें लगभग 5 लाख रुपये से अधिक का शेयर और अन्य कंपनियों में 18.5 लाख रुपये का निवेश शामिल है. हलफनामे में यह भी उल्लेख है कि 2004 से अब तक दर्ज 77 कानूनी मामलों में उन्हें पूरी तरह से बरी कर दिया गया है.

क्या AI छीन लेगा नौकरियां? 800 करोड़ लोगों के रोजगार पर मंडराता बड़ा खतरा

मुंबई  आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) लगातार एडवांस होता जा रहा है और हर फील्ड में इसकी धमक देखने को मिल रही है. आज AI दुनिया की सबसे बड़ी तकनीकी क्रांति बन चुका है. चैटबॉट से लेकर सेल्फ-ड्राइविंग कार, मेडिकल डायग्नोसिस से लेकर कंटेंट राइटिंग तक हर क्षेत्र में AI तेजी से अपनी जगह बना रहा है. ऐसे में एक बड़ा सवाल लोगों के मन में उठता है कि अगर सभी काम AI ही कर देगा, तो दुनिया के 800 करोड़ लोग क्या करेंगे? क्या नौकरियां खत्म हो जाएंगी? क्या इंसान बेकार हो जाएगा? आइए इस सवाल का जवाब ChatGPT से जान लेते हैं. ChatGPT के मुताबिक सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि AI का उद्देश्य इंसानों को पूरी तरह रिप्लेस करना नहीं, बल्कि उनके काम को आसान और तेज बनाना है. इतिहास गवाह है कि जब भी नई तकनीक आई जैसे औद्योगिक क्रांति, कंप्यूटर या इंटरनेट आया, तब शुरुआत में नौकरियों को लेकर डर पैदा हुआ. हालांकि समय के साथ नई तकनीक ने पुराने कामों को बदला और नई नौकरियां भी पैदा कीं. AI भी कुछ दोहराए जाने वाले और डेटा आधारित कामों को संभालेगा, लेकिन रचनात्मकता, भावनात्मक समझ और नैतिक निर्णय जैसे क्षेत्रों में इंसान की भूमिका अभी भी अहम रहेगी. दूसरा पहलू है नौकरियों का बदलाव. कई पारंपरिक नौकरियां कम हो सकती हैं, लेकिन AI से जुड़े नए क्षेत्र तेजी से उभर रहे हैं- जैसे डेटा साइंस, मशीन लर्निंग, साइबर सिक्योरिटी, AI ट्रेनिंग, रोबोटिक्स और डिजिटल मैनेजमेंट. इसके अलावा हेल्थकेयर, शिक्षा, मानसिक स्वास्थ्य, कला और मनोरंजन जैसे क्षेत्रों में इंसानी स्पर्श की जरूरत हमेशा बनी रहेगी. यानी भविष्य में नौकरियां खत्म नहीं होंगी, बल्कि उनका स्वरूप बदलेगा. तीसरा महत्वपूर्ण मुद्दा है स्किल्स का. आने वाले समय में वही लोग सफल होंगे जो नई तकनीक के साथ खुद को अपडेट करेंगे. डिजिटल लिटरेसी, क्रिटिकल थिंकिंग, क्रिएटिविटी और समस्या सुलझाने की क्षमता बेहद जरूरी होगी. सरकारों और संस्थानों को भी शिक्षा प्रणाली में बदलाव लाकर लोगों को भविष्य की जरूरतों के हिसाब से प्रशिक्षित करना होगा. AI को दुश्मन नहीं, बल्कि एक टूल के रूप में देखने की जरूरत है. हालांकि यह भी सच है कि AI से असमानता बढ़ने का खतरा हो सकता है. अगर तकनीक का लाभ केवल कुछ कंपनियों या देशों तक सीमित रह गया, तो बेरोजगारी और आर्थिक अंतर बढ़ सकता है. इसलिए नीति-निर्माताओं के लिए जरूरी है कि वे AI के विकास के साथ-साथ सामाजिक सुरक्षा, नई नौकरियों के अवसर और रिस्किलिंग प्रोग्राम पर भी ध्यान दें. कुछ विशेषज्ञ यूनिवर्सल बेसिक इनकम जैसे विकल्पों पर भी चर्चा कर रहे हैं, ताकि तकनीकी बदलाव का असर संतुलित रहे. यह कहना गलत होगा कि AI सब कुछ कर देगा और इंसान के पास कोई काम नहीं बचेगा. AI एक शक्तिशाली असिस्टेंस है, लेकिन मानव बुद्धि, भावनाएं और नैतिकता की बराबरी अभी नहीं कर सकता. भविष्य इंसान और मशीन के सहयोग का होगा, प्रतिस्पर्धा का नहीं. अगर हम बदलाव को अपनाएं और खुद को तैयार रखें, तो AI 800 करोड़ लोगों के लिए खतरा नहीं, बल्कि नए अवसरों का दरवाजा साबित हो सकता है.

8वें वेतन आयोग ने दी राहत, केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों के खाते में लाखों रुपये बढ़त

नई दिल्ली   केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए बड़ी खबर। सरकार ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग को आधिकारिक रूप से अधिसूचित कर दिया है। अगर इसे जनवरी 2026 से प्रभावी मानकर 2027 में लागू किया जाता है, तो कर्मचारियों को लाखों रुपये का एरियर एकमुश्त मिल सकता है। कब से लागू होगा नया वेतन? सरकार की ओर से संकेत हैं कि आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से प्रभावी मानी जा सकती हैं। व्यावहारिक रूप से इसे 2027 में लागू किया जा सकता है। इसके बाद कर्मचारियों को 12–20 महीने तक का एरियर एक साथ मिलेगा। फिटमेंट फैक्टर और संभावित बढ़ोतरी फिटमेंट फैक्टर लगभग 2.57 माना जा रहा है। इससे सैलरी में 30% से 50% तक बढ़ोतरी संभव है। अनुमानित एरियर राशि लेवल    संभावित एरियर (₹) लेवल-1     3.60 लाख – 5.65 लाख   लेवल-2      3.98 लाख – 6.25 लाख लेवल-4     5.10 लाख – 8.01 लाख एरियर की गणना कैसे होगी? पुरानी और नई बेसिक सैलरी का अंतर निकाला जाएगा। अंतर को लागू होने तक के महीनों से गुणा किया जाएगा। महंगाई भत्ता (DA) भी बढ़ेगा, जिससे एरियर में अतिरिक्त लाभ जुड़ जाएगा। भेदभाव का कोई प्रावधान नहीं पेंशनर्स के लिए सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि नियम कहते हैं कि सिर्फ इस आधार पर कि कोई व्यक्ति 31 दिसंबर 2025 से पहले रिटायर हुआ है या उसके बाद, उनके साथ अलग तरह का व्यवहार नहीं किया जाएगा. 8वें वेतन आयोग से क्या बदलेगा? अगर 8वां वेतन आयोग 1 जनवरी 2026 से लागू होता है, तो इसका असर दो तरह से पड़ेगा. पहले यहा कि जो 1 जनवरी 2026 के बाद रिटायर होंगे, उनकी पेंशन की कैलकुलेशन सीधे नए बेसिक पे के आधार पर होगी. साथ ही पुराने पेंशनर्स, जो 31 दिसंबर 2025 तक रिटायर हो चुके होंगे, उनकी पेंशन को एक फिक्स फिटमेंट फैक्टर के जरिए रिवाइज किया जाएगा. सरकार के जवाब से यह साफ है कि 31 दिसंबर 2025 की तारीख कोई डेडलाइन नहीं है जो आपको बढ़ी हुई पेंशन के फायदे से बाहर कर दे. पिछले समय की तरह हर वेतन आयोग ने पुराने पेंशनभोगियों की पेंशन को भी रिवाइज किया है, जिससे वह महंगाई के दौर में पीछे न छूटें. किन्हें मिलेगा फायदा? केंद्रीय कर्मचारी रक्षा कर्मी ऑल इंडिया सर्विसेज अधिकारी पेंशनर कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए राहत लंबे समय से वेतन संशोधन की मांग कर रहे कर्मचारियों के लिए यह एक बड़ी राहत है। बढ़ती महंगाई और जीवनयापन की लागत को देखते हुए यह कदम जरूरी माना जा रहा है।

AI Impact Summit 2026 बना भारत की ताकत का मंच, राघव चड्ढा ने बताया वैश्विक प्रभाव

नई दिल्ली आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने सोमवार को कहा कि एआई इम्पैक्ट समिट 2026 ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और प्रौद्योगिकी शासन से संबंधित चर्चाओं को आकार देने में भारत को वैश्विक मानचित्र पर मजबूती से स्थापित कर दिया है। यहां शिखर सम्मेलन में अपने संबोधन में चड्ढा ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के शासन, विकास और जनहित में इसके उपयोग को लेकर वैश्विक बहसों में भारत की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। उन्होंने रेखांकित किया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) अब केवल एक तकनीकी मुद्दा नहीं बल्कि एक रणनीतिक मुद्दा है। उन्होंने कहा कि मजबूत कंप्यूटिंग क्षमता और बुनियादी ढांचे वाले देश आने वाले वर्षों में विश्व पर हावी होने की संभावना रखते हैं। चड्ढा ने कहा कि प्रसंस्करण क्षमता और डिजिटल बुनियादी ढांचा यह तय करेगा कि एआई युग में कौन से देश नेतृत्व करेंगे। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में तीन वैश्विक एकाधिकारों की ओर भी इशारा किया। चड्ढा ने कहा कि एआई डिजाइन पर नियंत्रण कुछ ही कंपनियों के हाथों में है, उत्पादन सीमित क्षेत्रों में केंद्रित है, और अमेरिका जैसी नीतियों के कारण निर्यात प्रतिबंधित है। उन्होंने आगे कहा कि भारत अभी तक इन तीनों स्तंभों पर नियंत्रण नहीं कर पाया है, लेकिन मानव संसाधन के मामले में देश की एक बड़ी ताकत है। भारत की प्रतिभाओं की प्रचुरता पर जोर देते हुए, चड्ढा ने कहा कि विश्व एआई पेशेवरों और कुशल मानव संसाधन के लिए भारत की ओर तेजी से देख रहा है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि केवल प्रतिभा ही पर्याप्त नहीं है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए भारत को उच्च स्तरीय कंप्यूटिंग संसाधनों तक पहुंच सुनिश्चित करनी होगी, आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लानी होगी और मजबूत घरेलू बुनियादी ढांचा तैयार करना होगा। ऐतिहासिक तुलना करते हुए चड्ढा ने कहा कि जिस प्रकार 20वीं शताब्दी में तेल, गैस और इस्पात ने वैश्विक शक्ति को परिभाषित किया, उसी प्रकार कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सेमीकंडक्टर निर्माण 21वीं शताब्दी में भू-राजनीतिक प्रभाव को आकार देंगे। उन्होंने आगे कहा कि इस नई वैश्विक व्यवस्था में अपना स्थान सुरक्षित करने के लिए भारत को निर्णायक कदम उठाने होंगे।

यूजीसी एक्ट के पक्ष में जनआंदोलन तेज, सड़क पर उतरे लोग, प्रशासन पर दबाव

महाराजगंज आज महाराजगंज में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुआ। अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग के शिक्षकों-छात्रों से जुड़े भेदभाव निरोधक प्रावधानों पर लगी रोक के विरोध में भारतीय बौद्ध महासभा व एससी, एसटी, ओबीसी संयुक्त मोर्चा के बैनर तले लोगों ने जवाहरलाल नेहरू स्मारक पीजी कॉलेज से प्रदर्शन शुरू किया। यूजीसी एक्ट के समर्थन और विरोध में प्रदर्शनों का दौर थम नहीं रहा है। एक्ट के समर्थन और उच्च शिक्षा में समान अवसर और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने की मांग को लेकर सोमवार को यूपी के महाराजगंज की सड़कों पर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुआ। अनुसूचित जाति, जनजाति व पिछड़ा वर्ग के शिक्षकों-छात्रों से जुड़े भेदभाव निरोधक प्रावधानों पर लगी रोक के विरोध में भारतीय बौद्ध महासभा व एससी, एसटी, ओबीसी संयुक्त मोर्चा के बैनर तले सैकड़ों लोगों ने जवाहरलाल नेहरू स्मारक पीजी कॉलेज के खेल मैदान से नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन शुरू किया। जुलूस की शक्ल में जिला मुख्यालय पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति को संबोधित छह सूत्रीय मांग पत्र प्रशासनिक अधिकारी को सौंपा और तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। इसका नेतृत्व भारतीय बौद्ध महासभा के जिलाध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह व प्रांतीय महासचिव श्रवण कुमार पटेल ने किया। जिलाध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि यूजीसी एक्ट का उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति, धर्म, लिंग, जन्मस्थान व दिव्यांगता के आधार पर होने वाले भेदभाव पर सख्त रोक लगाना था। उनका आरोप था कि संबंधित प्रावधानों के खिलाफ दायर याचिकाओं की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में प्रभावी पैरवी नहीं की, जिसके चलते आदेश पर स्थगन लग गया। प्रांतीय महासचिव श्रवण पटेल ने कहा कि यूजीसी की रिपोर्टों में दलित-पिछड़े वर्ग के छात्रों के साथ भेदभाव की घटनाओं में वृद्धि दर्ज है और उन्होंने आरोप लगाया कि उत्पीड़न व मानसिक दबाव के कारण कई छात्र आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर हुए हैं। संयुक्त मोर्चा ने मांग की कि सरकार तत्काल हस्तक्षेप कर स्थगन हटवाए और पूर्व व्यवस्था बहाल कराए, जिससे विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में पारदर्शी, जवाबदेह व भेदभाव-मुक्त शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित किया जा सके। इस दौरान शिवमंगल गौतम, अरविन्द प्रताप निषाद, रामचंद्र बौद्ध, वकील प्रजापति, रामसमुझ मौर्या, डॉ. एलबी प्रसाद, हरिश्चन्द्र बौद्ध, बाल गोपाल, बैजनाथ बौद्ध, पदमाकर बौद्ध, प्रदीप कुमार गौतम, सुधाकर भारती, सतीश चन्द, नागेंद्र बौद्ध, सूर्यमनि प्रसाद, चन्द्रबली, अतुल, अमरनाथ यादव, मदन मोहन साहनी, शैलेश मौर्या सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।  

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए जरूरी खबर: 8वें वेतन आयोग पर सरकार का बड़ा बयान

नई दिल्ली केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारी और पेंशनभोगी जहां 8वां वेतन आयोग के तहत संभावित वेतन बढ़ोतरी का इंतजार कर रहे हैं, वहीं साइबर ठग उनकी इसी उत्सुकता का फायदा उठा रहे हैं। हाल ही में “8th पे कमीशन सैलरी कैलकुलटर” नाम का एक फर्जी ऐप तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे डाउनलोड करने के लिए लोगों को मैसेज और व्हाट्सएप के जरिए लिंक भेजे जा रहे हैं। दावा किया जाता है कि इस ऐप से कर्मचारी अपनी संशोधित सैलरी का हिसाब लगा सकते हैं, लेकिन असल में यह एक बड़ा साइबर फ्रॉड है। कई लोगों के साथ ठगी की घटनाएं सामने आने के बाद एजेंसियों ने चेतावनी जारी की है। सरकार की चेतावनी गृह मंत्रालय की साइबर सुरक्षा पहल Cyber Dost ने इस मामले को लेकर अलर्ट जारी किया है। बताया गया है कि यह ऐप किसी भी आधिकारिक प्लेटफॉर्म जैसे गुगल प्ले पर उपलब्ध नहीं है। ठग इसे APK फाइल के रूप में भेजते हैं और लोगों से कहते हैं कि इसे सीधे फोन में इंस्टॉल कर लें। आमतौर पर अनजान लोग यह समझ नहीं पाते कि APK फाइल को साइडलोड करना कितना खतरनाक हो सकता है। सरकार ने साफ कहा है कि वह कभी भी व्हाट्सएप या किसी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए APK फाइल नहीं भेजती। जानकारों की राय विशेषज्ञों के अनुसार, जैसे ही यह फर्जी ऐप फोन में इंस्टॉल होता है, यह बैकग्राउंड में काम करना शुरू कर देता है। इसके जरिए ठग मोबाइल के मैसेज, बैंक डिटेल और यहां तक कि OTP तक एक्सेस कर लेते हैं। कई मामलों में देखा गया है कि यूजर को भनक भी नहीं लगती और कुछ ही मिनटों में उनके बैंक खाते खाली हो जाते हैं। साइबर अपराधी इसी तरीके से लोगों की मेहनत की कमाई पर हाथ साफ कर रहे हैं। इसलिए किसी भी अनजान लिंक या फाइल को डाउनलोड करने से पहले पूरी जांच-पड़ताल जरूरी है। क्या करें कर्मचारी अगर गलती से ऐसा कोई संदिग्ध ऐप डाउनलोड हो जाए तो उसे तुरंत अनइंस्टॉल करें और जरूरत पड़े तो फोन को फैक्ट्री रीसेट कर दें। किसी भी सूरत में OTP या बैंक से जुड़ी जानकारी साझा न करें। 8th पे कमीशन से जुड़ी जानकारी केवल आधिकारिक सरकारी वेबसाइट से ही प्राप्त करें। किसी भी तरह की साइबर ठगी की शिकायत राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर या आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से तुरंत दर्ज कराएं। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें—क्योंकि एक छोटी सी लापरवाही भारी नुकसान का कारण बन सकती है।

खुशियों के बीच मातम: मैटरनिटी शूट के दौरान बच्चे की पूल में गिरकर मौत

कर्नाटक बेंगलुरु में एक दुखद घटना सामने आई है, जहां तीन साल के बच्चे की मौत वाटर पूल में गिरने से हो गई। मां की मैटरनिटी फोटोशूट में बिजी थी। बच्चे का नाम लक्ष्मी था, जो चरण और स्वाति का बेटा था। स्वाति 8 महीने की गर्भवती थी और वह अपने दूसरे बच्चे के आने की तैयारी में मैटरनिटी फोटोशूट करवा रही थी। यह घटना शनिवार को बेंगलुरु के गिद्दनहल्ली इलाके में एक प्राइवेट स्टूडियो में हुई, जहां फोटोशूट के लिए छोटा सा आर्टिफिशियल वाटर पूल बनाया गया था। बच्चा मां के साथ स्टूडियो में मौजूद था और खेलते-खेलते वह इस पूल में फिसलकर गिर गया। घटना के समय स्वाति फोटोशूट में व्यस्त थी, जबकि लक्ष्मी आसपास खेल रहा था। अचानक वह पूल में गिर गया, लेकिन मौके पर मौजूद लोगों को इसकी सूचना तुरंत नहीं मिल सकी।जब बच्चे को बाहर निकाला गया, तब तक वह बेहोश हो चुका था और डूबने के कारण उसकी सांसें रुक गई थीं। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पोस्टमॉर्टम जांच के लिए शव को सरकारी अस्पताल भेजा गया। पुलिस के अनुसार, बच्चे के पिता चरण उस समय काम के सिलसिले में विदेश में थे और उन्हें सूचना मिलते ही वे बेंगलुरु लौट रहे हैं। सुरक्षा के लिए उचित इंतजाम नहीं यह हादसा एक छोटी सी लापरवाही का नतीजा माना जा रहा है। स्टूडियो में मौजूद पूल फोटोशूट के लिए सजावट के तौर पर बनाया गया था, लेकिन बच्चे की सुरक्षा के लिए उचित इंतजाम नहीं किए गए थे। पुलिस ने मामले में लापरवाही की जांच शुरू कर दी है और यह देखा जा रहा है कि फोटोशूट के दौरान पर्याप्त सावधानियां बरती गई थीं या नहीं। कई रिपोर्ट्स में बताया गया है कि बच्चा मां की दोस्त की मैटरनिटी शूट के लिए भी साथ गया था, लेकिन मुख्य रूप से यह स्वाति की ही फोटोशूट से जुड़ा मामला है। इस घटना ने माता-पिता और स्टूडियो मालिकों के लिए बच्चों की सुरक्षा को लेकर बड़ा सबक दिया है। लापरवाही के चलते मौत का मामला यह दर्दनाक घटना परिवार के लिए बेहद झटका लेकर आई है। एक तरफ स्वाति दूसरी संतान के स्वागत की खुशी में थीं, वहीं दूसरी तरफ उनके बड़े बेटे की अचानक मौत ने सब कुछ उजाड़ दिया। पुलिस जांच जारी है और आगे की कार्रवाई की जा रही है। ऐसी घटनाएं हमें याद दिलाती हैं कि बच्चों के साथ हर जगह सतर्क रहना कितना जरूरी है, खासकर ऐसी जगहों पर जहां पानी या खतरनाक चीजें मौजूद हों। लोगों ने परिवार के प्रति गहरी संवेदना जताई है और उम्मीद है कि जांच से सच्चाई सामने आएगी।  

किसानों के लिए गेमचेंजर बनेगा AI-पावर्ड भारत-विस्तार, लॉन्च से पहले जानें इसके बड़े फायदे

नई दिल्ली कृषि क्षेत्र में डिजिटल क्रांति लाकर भारत मंगलवार (17 फरवरी) को एक इतिहास रचने जा रहा है क्योंकि उस दिन केंद्र सरकार भारत-विस्तार (Bharat-VISTAAR) नाम का एक क्रांतिकारी AI-पावर्ड मल्टीलिंगुअल टूल लॉन्च करने जा रही है। यह किसानों को डिजिटल तकनीक से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने हालिया बजट में आर्टिफिशियल इंटेलिसजेंस (AI) पर आधारित कृषि प्लेटफॉर्म भारत-विस्तार (Bharat-VISTAAR) को जल्द लॉन्च करने का ऐलान किया था। इस प्लेटफॉर्म का शुभारंभ केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा जयपुर में किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य किसानों तक तकनीक को सरल तरीके से और सरल भाषा में पहुंचाना है, ताकि वे सही समय पर सही खेती संबंधी निर्णय ले सकें। यह टूल किसानों को उनकी अपनी भाषा में खेती से जुड़ी जरूरी जानकारी मोबाइल ऐप या फोन कॉल के जरिए उपलब्ध कराएगा। क्या है Bharat-VISTAAR यह AI आधारित एक मल्टीलिंगुअल अत्याधुनिक टूल है, जो देश के करोड़ों किसानों के लिए ‘डिजिटल कृषि विशेषज्ञ’ की भूमिका निभाएगा। इसका पूरा नाम ‘वर्चुअली इंटीग्रेटेड सिस्टम टू एक्सेस एग्रीकल्चरल रिसोर्सेज’ (Virtually Integrated System to Access Agricultural Resources _VISTAAR) है। यह डिजिटल सिस्टम किसानों के लिए 24 घंटे उपलब्ध रहेगा और इसमें ‘भारती’ नाम का AI वॉइस असिस्टेंट होगा। किसान इसे मोबाइल ऐप या साधारण वॉइस कॉल यानी हेल्पलाइन नंबर 155261 नंबर डायल करके सीधे जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। शुरुआत में यह सेवा हिंदी और अंग्रेजी में उपलब्ध होगी, बाद में इसे क्षेत्रीय भाषाओं में भी शुरू किया जाएगा। ओला-बारिश, बाढ़-सुखाड़ का पूर्वानुमान इस टूल के माध्यम से किसानों को फसल योजना, खेती की तकनीक, कीट नियंत्रण, मौसम पूर्वानुमान, बाजार कीमत और सरकारी योजनाओं की जानकारी मिलेगी। इसके जरिए किसान प्रधानमंत्री किसान योजना, फसल बीमा योजना, सॉइल हेल्थ कार्ड, किसान क्रेडिट कार्ड और अन्य कई सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी लेकर आवेदन भी कर सकेंगे। सरकार के अनुसार यह सिस्टम देश के कृषि डेटा और रिसर्च को एक प्लेटफॉर्म पर जोड़ने का काम करेगा। इसमें कृषि अनुसंधान संस्थान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की जानकारी और राष्ट्रीय AI ढांचे जैसे India AI Mission और BHASHINI का सहयोग लिया जाएगा। परियोजना पर इस वर्ष 150 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 में इस परियोजना पर लगभग 150 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस राशि का हालिया बजट में आवंटन किया गया है। सरकार का मानना है कि यह सिर्फ एक ऐप नहीं बल्कि देश का डिजिटल कृषि ढांचा बनेगा, जिससे किसानों की आय बढ़ाने, खेती का जोखिम कम करने और कृषि नीति को डेटा के आधार पर बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह योजना सही तरीके से लागू होती है, तो यह भारत के कृषि क्षेत्र में डिजिटल क्रांति साबित हो सकती है और छोटे किसानों को भी तकनीक का पूरा लाभ मिल सकेगा। बजट में सीतारमण ने किया था ऐलान बता दें कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी, 2026 को अपना लगातार 9वां बजट पेश करते हुए इस स्कीम की घोषणा की थी और कहा था, “मैं भारत-विस्तार लॉन्च करने का प्रस्ताव करती हूं—एक मल्टीलिंगुअल AI टूल जो एग्रीस्टैक पोर्टल्स और खेती के तरीकों पर ICAR पैकेज को AI सिस्टम के साथ इंटीग्रेट करेगा। इससे खेती की प्रोडक्टिविटी बढ़ेगी, किसानों को बेहतर फैसले लेने में मदद मिलेगी और कस्टमाइज्ड एडवाइजरी सपोर्ट देकर रिस्क कम होगा।” विशेषज्ञों के मुताबिक, “भारत विस्तार इंटरैक्टिव है। इसके जरिए किसानों का फीडबैक सरकारी सिस्टम में वापस आएगा। इसके सबूतों के आधार पर पॉलिसी बनाने और रिसर्च को प्राथमिकता देने में मदद मिलेगी।”  

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