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प्लेन यात्रा में पसंदीदा सीट पर अब अतिरिक्त पैसे नहीं चुकाने होंगे, नया बदलाव

 नई दिल्ली भारत में हवाई यात्रियों को जल्द ही छिपे हुए खर्चों से बड़ी राहत मिल सकती है, क्योंकि सरकार ने सीट चुनने पर लगने वाले एक्स्ट्रा चार्ज पर रोक लगाने और सभी एयरलाइंस में यात्रियों के अधिकारों को और मज़बूत करने के लिए कदम उठाए हैं. नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयरलाइन ऑपरेटरों को निर्देश दिया है कि वे यह तय करें कि किसी भी फ़्लाइट में करीब 60 फीसदी सीटें चुनने के लिए मुफ़्त में उपलब्ध हों. इसका मतलब है कि वेब चेक-इन या सीट सिलेक्शन के दौरान यात्रियों से वसूले जाने वाले एक्स्ट्रा शुल्क पर लगाम लगेगी। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय द्वारा जारी इस आदेश का मकसद हवाई यात्रा को ज्यादा सहज और पारदर्शी बनाना है। कई एयरलाइंस टिकट बुक करने के बाद या वेब चेक-इन के दौरान पसंदीदा सीट चुनने के लिए एक्स्ट्रा चार्ज ले रही थीं. नए निर्देश का मकसद इस तरह एक्टिविटीज पर लगाम लगाना और यात्रियों को बेहतर सुविधा मुहैया करवाना है। साथ बैठेंगे एक ही बुकिंग वाले यात्री मंत्रालय ने एयरलाइंस से यह भी तय करने को कहा है कि एक ही PNR पर सफर करने वाले यात्री साथ बैठें और हो सके तो उन्हें आस-पास की सीटें ही अलॉट हों. इससे उन परिवारों और ग्रुप्स को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें अक्सर एक-दूसरे के पास सीटें पाने के लिए ज़्यादा पैसे देने पड़ते थे। एयरलाइंस को सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए, खेल के सामान और म्यूज़िकल इंस्ट्रूमेंट्स को ले जाने की सुविधा पारदर्शी और यात्री-अनुकूल तरीके से देनी होगी. उनसे यह भी कहा गया है कि वे पालतू जानवरों को ले जाने के बारे में साफ़ नीतियां प्रकाशित करें; यह एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें यात्रियों के बीच अक्सर भ्रम की स्थिति बनी रहती है। यात्रियों के अधिकारों और पारदर्शिता पर ज़ोर सरकार ने यात्रियों के अधिकारों का सख्ती से पालन करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया है, खासकर तब जब उड़ान में देरी हो, उड़ान रद्द हो जाए या यात्रियों को बोर्डिंग से रोक दिया जाए. एयरलाइंस को अपनी वेबसाइट, मोबाइल ऐप, बुकिंग प्लेटफ़ॉर्म और एयरपोर्ट्स के काउंटरों पर इन अधिकारों को साफ़-साफ़ दिखाना होगा. ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंच स्थापित करने के लिए यात्रियों को उनके अधिकारों के बारे में क्षेत्रीय भाषाओं में भी जानकारी दी जानी चाहिए। भारत का घरेलू एविएशन सेक्टर तेज़ी से बढ़ा है और दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बाज़ार बन गया है. यहां के हवाई अड्डों पर रोज़ाना पांच लाख से ज़्यादा यात्री आते-जाते हैं. ऐसे में मंत्रालय ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि यात्रियों को सुविधाएं देना सबसे बड़ी प्राथमिकता है. मंत्रालय ने ‘UDAN यात्री कैफ़े’ जैसी पहलों का ज़िक्र किया है, जहां हवाई अड्डों पर किफ़ायती खाना और मुफ़्त Wi-Fi की सुविधा मिलती है।

अमेरिका ने 23 क्विंटल का बम गिराकर होर्मुज के हमलावरों पर किया हमला, ट्रंप ने खेल पलटा

वाशिंगटन  ईरान के साथ जंग में अमेरिका अकेला पड़ चुका है. उसका साथ कोई नहीं दे रहा है. ऐसे में अब अमेरिका ने अकेले ही ईरान से आर-पार की जंग लड़ने की ठान ली है. अमेरिका अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अकेले ईरान के कब्जे से मुक्त कराने में जुट गया है. जी हां, इसी सिलसिले में अमेरिका ने होर्मुज के पास 23 क्विंटल के खतरनाक बमों की बमबारी की है. इस बमबारी का मकसद होर्मुज के पास स्थित ईरानी मिसाइल साइटों को ध्वस्त करना था. ताकि होर्मुज के दरवाजे को समुद्री व्यापार के लिए खोला जा सके. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने एक्स पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी. इसके मुताबिक, ईरान की इन क्रूज मिसाइलों से होर्मुज से होने वाली अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को खतरा था। दरअसल, अमेरिकी फोर्स ने कई 5000 पाउंड वजन वाले गहराई तक घुसने वाले बम गिराए. यानी अमेरिका ने करीब 23 क्विंटल के बम से ईरान के मिसाइल भंडार पर हमला किया है. ये बम ईरान के मजबूत बनाए गए मिसाइल स्टोरेज और लॉन्च साइटों पर गिराए गए, जो समुद्र किनारे बने थे. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इसकी सफलता की जानकारी दी। यूएस सेंट्रल कमांड के मुताबिक, ‘कुछ घंटे पहले अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरान के समुद्र तट पर स्थित ईरान की मजबूत मिसाइल साइटों पर 5000 पाउंड के कई ‘डीप पेनिट्रेटर’ बमों का सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया. इन साइटों पर मौजूद ईरान की जहाज-रोधी क्रूज मिसाइलों से इस जलडमरूमध्य में होने वाली अंतर्राष्ट्रीय जहाज़ों की आवाजाही को खतरा था.’ इसका मतलब है कि अमेरिका इस कार्रवाई को सफल मान रहा है। क्यों दुनिया के लिए खास है होर्मुज गौरतलब है कि होर्मुज की खाड़ी दुनिया के लिए बहुत अहम है. यहां से दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल गुजरता है. अगर ये रास्ता बंद हो जाए तो पूरी दुनिया में तेल की कीमतें आसमान छू जाती हैं. अभी इस होर्मुज के कारण पूरी दुनिया में खलबली है. कारण कि पिछले कुछ हफ्तों से ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जंग चल रही है. ईरान ने बदला लेते हुए होर्मुज को बंद कर दिया है. ईरान लगातार होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को टारगेट करने के लिए मिसाइलें, ड्रोन और माइन्स का इस्तेमाल कर रहा है. इस खौफ से ईंधन वाले जहाज पार नहीं कर पा रहे हैं. इससे तेल के टैंकर रुक गए और दुनिया भर में तेल संकट खड़ा हो गया है। होर्मुज के पास ईरानी मिसाइल पर अटैक क्यों? होर्मुज खोलना अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती है. कारण कि ईरान ने भारत समेत एशिया के कुछ देशों को छूट तो दी है, मगर अमेरिका और यूरोप के लिए पूरी तरह से होर्मुज का दरवाजा बंद कर रखा है. ऐसे में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लगातार नाटो और अन्य देशों से होर्मुज खोलने में मदद मांग रहे हैं. उन्होंने कहा कि होर्मुज को खुला और सुरक्षित रखने के लिए दूसरे देश भी जहाज भेजें.  लेकिन कई सहयोगी देशों ने मना कर दिया. ट्रंप ने नाराजगी जताई और कहा कि अमेरिका अकेले ही ये काम कर सकता है. यहा कारण है कि अब अमेरिका अकेले ही होर्मुज को खुलवाने में जुट गया है. आज का यह एक्शन इसी का नतीजा है। अमेरिका ने गेम पलटना शुरू किया पहले अमेरिका ने ईरान के खार्ग द्वीप पर भी हमले किए थे. वहां मिलिट्री टारगेट नष्ट किए गए, लेकिन तेल सुविधाओं को बचाया गया. ट्रंप ने कहा था कि अगर जरूरत पड़ी तो तेल सुविधाएं भी निशाना बनाई जा सकती हैं. अब ये नया हमला ट्रंप की रणनीति का हिस्सा लगता है. होर्मुज के पास ईरानी मिसाइल भंडार को तबाह करके ट्रंप ने गेम पलट दिया है. अमेरिका के इस एक्शन से होर्जुम में ईरान का खतरा कम हो जाएगा. ईरान की मिसाइलें नष्ट होने से होर्मुज का दरवाजा फिर से खुलने की उम्मीद बढ़ गई है। अमेरिका ने किस बम से किया अटैक अमेरिका का ये हमला बंकर-बस्टर बमों से किया गया. ये बम जमीन के अंदर घुसकर मजबूत ठिकानों को तबाह कर देते हैं. अमेरिका ने 5000 पाउंड यानी करीब 23 क्विंटल बमों से अटैक किया. ईरान की तरफ से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. लेकिन ये साफ है कि अमेरिका ईरान की समुद्री ताकत को कमजोर करने पर जोर दे रहा है. अगर अमेरिका का यह दावा सही है तो दुनिया भर के व्यापारियों और तेल कंपनियों को राहत मिल सकती है. अगर होर्मुज खुल गया तो तेल की सप्लाई सामान्य हो जाएगी और कीमतें गिरेंगी. वैसे भी ट्रंप का कहना है कि अमेरिका अपने सहयोगियों के बिना भी इस रास्ते को सुरक्षित रखेगा. बता दें कि 28 फरवरी से ही युद्ध जारी है। क्या है ये बंकर बस्टर बम और क्यों है इसकी इतनी चर्चा? अब सवाल उठता है कि ये बंकर बस्टर बम आखिर बला क्या है? आम भाषा में समझें तो ये ऐसे बम हैं जो जमीन या कंक्रीट की मोटी दीवारों को भेदकर गहराई में छिपे दुश्मनों का काल बन जाते हैं. 2022 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक ऐसे बम की कीमत करीब 2.88 लाख डॉलर होती है. हालांकि, अमेरिका के पास इससे भी बड़े 30,000 पाउंड वाले बम हैं, लेकिन फिलहाल ईरान के इन मिसाइल ठिकानों को मिट्टी में मिलाने के लिए ये 5,000 पाउंड यानी 2200 किलो वाले बम ही काफी थे। पूरी कहानी का दूसरा पहलू ये भी है कि इस जंग के पीछे इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का भी हाथ माना जा रहा है, जो महीनों से अमेरिका को इस रास्ते पर चलने के लिए उकसा रहे थे. लेकिन ट्रंप का कहना है कि यह उनकी अपनी फीलिंग थी कि ईरान से खतरा बढ़ रहा है, इसलिए उन्होंने यह कदम उठाया. दूसरी तरफ, ईरान आज भी अपनी बात पर अड़ा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम सिर्फ बिजली बनाने जैसे शांतिपूर्ण कामों के लिए है और उसका बम बनाने का कोई इरादा नहीं है। फिलहाल, हालात ये हैं कि पूरी दुनिया की नजरें होर्मुज के इस रास्ते पर टिकी हैं. अमेरिका ने अपनी ताकत दिखाकर ये साफ कर दिया है कि वो पीछे हटने वाला नहीं है. अब देखना ये होगा कि ईरान इस बंकर बस्टर हमले का क्या … Read more

चाय और दूध की कीमतों में बढ़ोतरी का डर, LPG की किल्लत से महंगे हो सकते हैं दाम

नई दिल्ली ईरान-इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के कारण भारत में एलपीजी की किल्लत देखने को मिल रही है. कई जगह लोगों को लंबी लाइनों में लगकर महंगे दाम पर गैस सिलेंडर खरीदना पड़ रहा है. एलपीजी की बढ़ती कीमतों का असर अब आम लोगों तक पहुंच गया है. चाय बेचने वालों ने भी चाय की कीमत 10 रुपये से बढ़ाकर 15 रुपये कर दी है. यह संकट सिर्फ रेस्टोरेंट और होटल तक सीमित नहीं है, बल्कि दूध के कारोबार पर भी इसका असर पड़ रहा है. भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है। पहले गल्फ देशों से 85-90 प्रतिशत एलपीजी आती थी, लेकिन अब आयात पर संकट आ गया है. जिससे घरेलू गैस के साथ-साथ इंडस्ट्रीज को भी मार पड़ रही है. रेस्टोरेंट, होटल पहले से परेशान थे और अब डेयरी वाले भी इसकी मार खा रहे हैं. डेयरी उद्योग में एलपीजी का इस्तेमाल बहुत जरूरी है. दूध को पाश्चराइजेशन (खास तापमान पर गर्म करके बैक्टीरिया मारना) के लिए बड़ी मात्रा में गैस चाहिए. बिना नियमित गैस के दूध जल्दी खराब हो सकता है. छोटे-मध्यम डेयरी प्लांट्स को यह समस्या सबसे ज्यादा झेलनी पड़ रही है. महाराष्ट्र जैसे राज्यों में कई डेयरी मालिकों ने बताया कि गैस न मिलने से प्रोसेसिंग और पैकेजिंग के काम में रुकावट आ रही है. इससे दूध की सप्लाई पर असर पड़ सकता है। मुश्किल में पड़ी दूध की पैकेजिंग इस इंडस्ट्री में सबसे बड़ी समस्या पैकेजिंग की है. दूध के प्लास्टिक पैकेट और कार्टन बनाने वाली फैक्टरियां भी एलपीजी पर निर्भर हैं. इन फैक्टरियों को पर्याप्त गैस नहीं मिल रही, इसलिए प्रोडक्शन धीमा हो गया है. नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, गोवर्धन डेयरी के फाउंडर देवेंद्र शाह ने कहा, “हमारे पास अभी सिर्फ 10 दिन का पैकेजिंग मटेरियल स्टॉक बचा है. अगर सप्लाई जल्द नॉर्मल नहीं हुई तो दूध सप्लाई करना मुश्किल हो जाएगा.” चेंबूर के सुरेश डेयरी के मैनेजर शरीब शेख ने भी चेतावनी दी, “अगले 10 दिनों में स्थिति नहीं सुधरी तो पूरी डेयरी इंडस्ट्री बड़े संकट में फंस सकती है। दूध स्टोर करने की क्षमता कम इसके अलावा मनीकंट्रोल की रिपोर्ट में बताया गया है कि बॉम्बे मिल्क प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सीके सिंह के अनुसार, हाल ही में भैंस के दूध के तीन बड़े ऑर्डर रद्द हुए. छोटी डेयरियों के पास दूध स्टोर करने की क्षमता नहीं है. इसलिए वे गाय और भैंस का दूध कम कीमतों पर बेचने को मजबूर हैं. यह संकट सिर्फ महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है. देश के कई हिस्सों में डेयरी ऑपरेटर्स इसी तरह की शिकायतें कर रहे हैं. होटल और रेस्टोरेंट पहले से दूध के ऑर्डर कम कर रहे हैं. अगर पैकेजिंग रुक गई तो दुकानों पर दूध के पैकेट कम मिलेंगे. इससे आम लोग प्रभावित होंगे, खासकर शहरों में जहां लोग पैकेज्ड मिल्क पर निर्भर हैं. गांवों में जहां ढीला दूध बिकता है, वहां भी प्रोसेसिंग प्रभावित हो सकती है। डेयरी मालिकों की मांग क्या है? डेयरी मालिकों की मांग है कि कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई प्राथमिकता से बढ़ाई जाए. उनका कहना है कि दूध एक जरूरी चीज है, इसे संकट में नहीं छोड़ना चाहिए. अगर 10 दिन में सुधार नहीं हुआ तो दूध की कीमतें बढ़ सकती हैं या उपलब्धता कम हो सकती है. कुछ जगहों पर किसान बायोगैस जैसे विकल्प अपना रहे हैं, लेकिन बड़े स्तर पर यह मुश्किल है। भारत अपनी जरूरत का करीब 88% कच्चा तेल, 50% प्राकृतिक गैस और 60% एलपीजी आयात करता है. पहले भारत का बड़ा हिस्सा तेल, गैस और एलपीजी सऊदी अरब और यूएई जैसे पश्चिम एशियाई देशों से आता था. लेकिन ईरान-अमेरिका-इजराइल के बीच बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट बंद होने की वजह से सप्लाई प्रभावित हुई है. हालांकि, भारत ने रूस जैसे देशों से तेल खरीदकर कच्चे तेल की सप्लाई कुछ हद तक संभाली है, लेकिन औद्योगिक ग्राहकों के लिए गैस की सप्लाई कम कर दी गई है और होटल-रेस्तरां जैसे कमर्शियल इस्तेमाल के लिए एलपीजी में भी कटौती की गई है। यह संकट अस्थायी है, लेकिन इसका असर आम आदमी तक पहुंच रहा है. पहले रेस्टोरेंट में एक्स्ट्रा चार्ज लगे, अब दूध पर खतरा मंडरा रहा है. सरकार को जल्द कदम उठाने होंगे ताकि दूध जैसी बेसिक चीज प्रभावित न हो।

सोसाइटी लिफ्ट में महिला का प्राइवेट वीडियो हुआ वायरल, हिडेन कैमरा पहचानने के तरीके

मुंबई मुंबई के अंधेरी में हाल ही में एक ऐसा मामला सामने आया जिसने प्राइवेसी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए. एक 36 साल की महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है. उनका आरोप है कि की लिफ्ट में लगे CCTV का एक निजी वीडियो अचानक वायरल हो गया।  रिपोर्ट्स के मुताबिक महिला लिफ्ट में एक व्यक्ति के साथ थी और दोनों को यह पता नहीं था कि कैमरा उनकी रिकॉर्डिंग कर रहा है. बाद में यह वीडियो किसी ने CCTV बैकअप सिस्टम से निकालकर सोसाइटी और सोशल मीडिया में फैलाना शुरू कर दिया, जिसके बाद महिला को सार्वजनिक रूप से शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा।  पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि CCTV सिस्टम तक पहुंच रखने वाले व्यक्ति ने ही बैकअप से वीडियो निकाला और उसे शेयर किया. इस मामले में IT एक्ट और अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है. CCTV की सिक्योरिटी पर सवाल यह घटना सिर्फ एक वायरल वीडियो की कहानी नहीं है. यह एक बड़ा सवाल भी उठाती है कि आज के समय में जब हर जगह कैमरे लगे हैं, तो हमारी प्राइवेसी कितनी सुरक्षित है. CCTV या कैमरा सिस्टम सुरक्षित तरीके से मैनेज नहीं किया जाए तो उसका गलत इस्तेमाल बहुत आसानी से हो सकता है. कई बार छोटी गलती जैसे सॉफ्टवेयर अपडेट ना करने की वजह से भी कैमरा हैक हो सकता है.  होटल और ट्रायल रूम में हिडेन कैमरा का खतरा आजकल होटल, ट्रायल रूम, चेंजिंग रूम और रेंटल अपार्टमेंट में छिपे कैमरों की खबरें भी सामने आती रहती हैं. टेक्नोलॉजी छोटी और सस्ती होने की वजह से ऐसे स्पाई कैमरे बनाना आसान हो गया है जिन्हें स्मोक डिटेक्टर, चार्जर, घड़ी, एयर वेंट या दीवार के छोटे छेद में छिपाया जा सकता है. कई बार लोग सोचते हैं कि चेंजिंग रूम या ट्रायल रूम पूरी तरह सुरक्षित जगह है. लेकिन अगर समय समय पर ट्रायल रूम और होटल के लीक्ड फुटेज की खबरें आती रहती हैं. कैसे पता लगाएं हिडेन कैमरा कहां है?  ऐसे में सबसे पहला सवाल यही है कि किसी कमरे में छिपा कैमरा है या नहीं, यह कैसे पहचाना जाए?  कमरे में घुसते ही सबसे पहले आसपास की चीजों को ध्यान से देखना जरूरी है. अगर कोई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस अजीब जगह लगा हुआ है या किसी चीज में छोटा गोल छेद दिखाई देता है तो उस पर ध्यान देना चाहिए. स्पाई कैमरे अक्सर ऐसी जगहों पर लगाए जाते हैं जहां से पूरा कमरा दिखाई दे सके, जैसे दीवार के कोने, छत के पास लगे डिवाइस या स्मोक डिटेक्टर. मोबाइल फोन से पता करें मोबाइल फोन भी छिपे कैमरे पहचानने में मदद कर सकता है. अगर कमरे की लाइट बंद करके मोबाइल की टॉर्च दीवारों और उपकरणों पर डाली जाए तो कैमरे का लेंस अक्सर रोशनी को रिफ्लेक्ट करता है. अगर कहीं छोटा सा चमकता हुआ बिंदु दिखाई दे तो वहां कैमरा हो सकता है. कुछ स्पाई कैमरे इन्फ्रारेड लाइट का इस्तेमाल करते हैं ताकि वे कम रोशनी में भी रिकॉर्डिंग कर सकें. यह रोशनी इंसानी आंख से दिखाई नहीं देती लेकिन मोबाइल कैमरा उसे पकड़ सकता है. अगर मोबाइल कैमरे से कमरे को स्कैन किया जाए और स्क्रीन पर कहीं छोटी चमकती रोशनी दिखे तो वहां कैमरा हो सकता है. WiFI स्कैनिंग से भी जान सकते हैं इसके अलावा कई कैमरे इंटरनेट से जुड़े होते हैं. ऐसे में अगर आप कमरे के WiFi नेटवर्क से जुड़े हैं तो नेटवर्क स्कैनिंग ऐप से यह देखा जा सकता है कि कितने डिवाइस नेटवर्क से जुड़े हुए हैं. अगर कोई संदिग्ध डिवाइस दिखाई दे तो सावधान रहने की जरूरत होती है. एक और तरीका है कमरे के शीशों की जांच करना. कई बार टू-वे मिरर का इस्तेमाल किया जाता है जिसमें एक तरफ से आईना दिखाई देता है लेकिन दूसरी तरफ से कमरे के अंदर देखा जा सकता है. ऐसे शीशे की पहचान करने के लिए लोग उंगली टेस्ट भी करते हैं. सिक्योरिटी बेहद जरूरी हालांकि सिर्फ छिपे कैमरे ही खतरा नहीं हैं. कई बार कैमरे तो सुरक्षा के लिए लगाए जाते हैं लेकिन बाद में उनकी रिकॉर्डिंग का गलत इस्तेमाल किया जाता है. अंधेरी का मामला इसी बात का उदाहरण है जहां एक निजी पल CCTV में रिकॉर्ड हुआ और फिर सिस्टम से निकालकर वायरल कर दिया गया. साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि CCTV सिस्टम को ठीक से सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है. अगर बैकअप सर्वर या रिकॉर्डिंग सिस्टम तक बहुत ज्यादा लोगों की पहुंच हो तो फुटेज चोरी या लीक होने का खतरा बढ़ जाता है. स्पाई कैम का खतरा होने पर तुरंत रिकॉर्ड कर लें अगर किसी जगह आपको स्पाई कैमरा होने का शक हो तो उसे तुरंत छेड़ना नहीं चाहिए. पहले उसकी फोटो या वीडियो रिकॉर्ड कर लें ताकि सबूत सुरक्षित रहे. इसके बाद होटल मैनेजमेंट, स्टोर स्टाफ या संबंधित लोगों को जानकारी दें. जरूरत पड़े तो पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई जा सकती है. आज के डिजिटल दौर में कैमरे सुरक्षा के लिए जरूरी हैं, लेकिन अगर उनका गलत इस्तेमाल हो जाए तो वही कैमरे किसी की प्राइवेसी के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं. इसलिए चाहे होटल का कमरा हो, ट्रायल रूम हो या चेंजिंग रूम, कुछ मिनट का सावधानी भरा चेक कई बार आपकी प्राइवेसी को सुरक्षित रख सकता है.

LPG सिलेंडर बुक करें घर बैठे, WhatsApp, ऐप और कॉल से होगी प्रक्रिया आसान, लंबी लाइन से मिलेगी राहत

नई दिल्ली अगर आपके घर में LPG सिलेंडर खत्म होने वाला है तो उसे बुक करने के लिए अब सिर्फ गैस एजेंसी जाने की जरूरत नहीं है. आजकल Indane, HP Gas और Bharat Gas तीनों कंपनियां कॉल, SMS, WhatsApp और मोबाइल ऐप जैसे कई तरीकों से सिलेंडर बुक करने की सुविधा देती हैं।  हाल के दिनों में देश के कई हिस्सों में LPG बुकिंग सिस्टम पर लोड बढ़ने की खबरें भी आई हैं, जिसकी वजह से ऐप और कॉल सर्विस में दिक्कतें भी देखी गईं.  ऐसे में अगर कॉल से बुकिंग नहीं हो पा रही है तो आप दूसरे तरीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं। कॉल करके ऐसे करें LPG सिलेंडर बुक अगर आपके पास HP Gas कनेक्शन है तो आप अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से IVRS नंबर 88888 23456 पर कॉल करके सिलेंडर बुक कर सकते हैं. इसके अलावा 94936 02222 पर मिस्ड कॉल देकर भी बुकिंग की जा सकती है.  Bharat Gas के कस्टमर्स 77150 12345 या 77180 12345 नंबर पर कॉल करके LPG रिफिल बुक कर सकते हैं. वहीं Indane Gas यूजर्स 7718955555 नंबर पर कॉल या SMS के जरिए सिलेंडर बुक कर सकते हैं.  WhatsApp से भी हो जाती है LPG बुकिंग अब गैस सिलेंडर WhatsApp से भी आसानी से बुक किया जा सकता है. इसके लिए आपको अपनी गैस कंपनी का नंबर फोन में सेव करना होगा. लीडिंग कंपनियों के बुकिंग नंबर्स ये हैं:      Indane Gas WhatsApp: 75888 88824     HP Gas WhatsApp: 92222 01122     Bharat Gas WhatsApp: 1800 22 4344 WhatsApp पर इन नंबरों पर Hi या REFILL लिखकर मैसेज भेजना होता है. इसके बाद स्क्रीन पर आने वाले स्टेप्स को फॉलो करके सिलेंडर बुक किया जा सकता है.  मोबाइल ऐप से भी कर सकते हैं बुकिंग तीनों गैस कंपनियों की अपनी मोबाइल ऐप भी हैं.     Indane: IndianOil ONE ऐप     HP Gas: HP Gas ऐप     Bharat Gas: Hello BPCL ऐप इन ऐप्स में लॉगिन करने के बाद आप सिलेंडर बुकिंग, पेमेंट और डिलीवरी स्टेटस भी देख सकते हैं. ये ऐप गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड कर सकते हैं. डाउनलोड करने के बाद लॉग LPG बुकिंग के नियम में भी हुआ बदलाव हाल ही में सरकार ने LPG सिलेंडर बुकिंग से जुड़ा एक नियम भी बदला है. अब एक सिलेंडर लेने के बाद दूसरा सिलेंडर बुक करने के लिए कम से कम 25 दिन का इंतजार करना होगा, पहले यह समय 21 दिन था. सरकार का कहना है कि यह फैसला सिलेंडर की जमाखोरी रोकने और सभी उपभोक्ताओं तक गैस की सप्लाई बराबर पहुंचाने के लिए लिया गया है. ग्रामीण इलाकों में यह गैप और ज्यादा हो सकता है, जहां कुछ जगहों पर इसे 45 दिन तक बढ़ाया गया है.

CBSE 10वीं बोर्ड परीक्षा 2026: LOC भरना शुरू, जानिए कौन है पात्र और क्या हैं नियम

नई दिल्ली सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने 2026 की दूसरी कक्षा 10 बोर्ड परीक्षा के लिए उम्मीदवारों की सूची (LOC) जमा करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार, स्कूल पहले चरण के दौरान LOC जमा कर सकेंगे, जो 18 मार्च से 31 मार्च, 2026 तक निर्धारित है। साल में दो बार बोर्ड परीक्षा आयोजित करने की नीति के अनुसार जिसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत लागू किया गया है। कक्षा 10 के छात्रों को अब एक ही शैक्षणिक वर्ष के भीतर दो बार बोर्ड परीक्षा में बैठने का अवसर मिलेगा। दूसरी परीक्षा मई 2026 में आयोजित होने वाली है, जिससे छात्रों को अपने प्रदर्शन में सुधार करने का मौका मिलेगा। CBSE ने स्पष्ट किया है कि LOC स्कूलों द्वारा केवल उन छात्रों के लिए जमा की जानी है जो परीक्षा में बैठना चाहते हैं। इससे बोर्ड को पहले से ही यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि दूसरी बोर्ड परीक्षा में कितने छात्र बैठने का इरादा रखते हैं, साथ ही वे किन विशिष्ट विषयों की परीक्षा देना चाहते हैं। LOC जमा करने की प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी होगी बोर्ड के अनुसार, LOC जमा करने की प्रक्रिया तीन अलग-अलग चरणों में पूरी की जाएगी। पहला चरण 18 मार्च से 31 मार्च तक चलेगा। इसके बाद, दूसरे और तीसरे चरण में भी LOC जमा करने का अवसर मिलेगा, हालांकि इसके लिए विलंब शुल्क (late fee) का भुगतान करना होगा। शुल्क जमा करने की अंतिम समय सीमा रात 11:59 बजे निर्धारित की गई है। स्कूलों के लिए निर्देश जारी CBSE ने स्कूलों के प्रधानाचार्यों को निर्देश जारी किए हैं, जिसमें उन्हें छात्रों और अभिभावकों को दूसरी बोर्ड परीक्षा की प्रक्रिया, पात्रता मानदंड और शुल्क संरचना के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करने को कहा गया है। इसके अलावा, यह भी स्पष्ट किया गया है कि परीक्षा केंद्रों की संख्या सीमित हो सकती है; परिणामस्वरूप, इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि प्रत्येक छात्र को उसके तत्काल आसपास के क्षेत्र में ही परीक्षा केंद्र आवंटित किया जाएगा। पात्रता और नियम बोर्ड के अनुसार, केवल वही छात्र दूसरी बोर्ड परीक्षा में भाग लेने के पात्र होंगे जो पहली बोर्ड परीक्षा में शामिल हुए थे। छात्र विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान और भाषा विषयों में से चुने गए अधिकतम तीन विषयों में अपने अंकों में सुधार करने का प्रयास कर सकते हैं। इसके अलावा, जो छात्र पहली परीक्षा के दौरान तीन या उससे ज्यादा विषयों में अनुपस्थित थे, वे दूसरी बोर्ड परीक्षा में बैठने के पात्र नहीं होंगे। ऐसे छात्रों को अगले शैक्षणिक वर्ष में मुख्य परीक्षा में बैठना होगा। इसके विपरीत, जो छात्र ‘कम्पार्टमेंट’ श्रेणी में रखे गए हैं, वे विशिष्ट कम्पार्टमेंट श्रेणी के तहत दूसरी बोर्ड परीक्षा में बैठने के पात्र होंगे। डेटा या विषयों में कोई बदलाव नहीं  CBSE ने यह भी स्पष्ट किया है कि पहली और दूसरी परीक्षा के बीच छात्र के डेटा में किसी भी तरह के बदलाव की अनुमति नहीं होगी। आम तौर पर, विषयों को बदलने की भी अनुमति नहीं होगी, सिवाय गणित से जुड़े विशेष मामलों के। बोर्ड ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आंतरिक मूल्यांकन (Internal Assessments) में सुधार के लिए कोई प्रावधान नहीं दिया जाएगा, क्योंकि यह एक साल तक चलने वाली प्रक्रिया है।

PM Narendra Modi से Eknath Shinde की मुलाकात, मिडिल ईस्ट संकट पर हुई खास बातचीत

नई दिल्ली शिवसेना प्रमुख और महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने मंगलवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने ईरान-इजरायल युद्ध, घरेलू हालात और महाराष्ट्र के अलग-अलग मुद्दों पर विस्तार से बातचीत की। इस दौरान शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे, नरेश म्हस्के, मिलिंद देवड़ा, धैर्यशील माने, श्रीरंग बारणे और रवींद्र वायकर मौजूद रहे। एकनाथ शिंदे ने भरोसा दिलाया कि युद्ध जैसे हालात में ‘एनडीए’ की सहयोगी के तौर पर शिवसेना, पीएम के स्टैंड का सपोर्ट करती है और हम देश के साथ हैं। इस मीटिंग के बाद डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने मीडिया से बातचीत की। डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर खाड़ी देशों में युद्ध जैसे हालात के दौरान भारत में झूठा प्रोपेगेंडा फैलाकर राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि कुछ लोग हेडलाइन बनाने के लिए पाकिस्तान की बात करते हैं। बालासाहेब के लिए देश पहले था और राजनीति बाद में। आज हम बालासाहेब के विचारों के साथ आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री को बताया कि युद्ध के कारण कुवैत, दुबई, मस्कट में फंसे महाराष्ट्र के नागरिकों को मुंबई और पुणे सुरक्षित वापस लाया गया। उन्होंने कोविड के बाद से खाड़ी देशों के साथ बने अच्छे रिश्तों की वजह से होर्मुज स्ट्रेट से दो जहाजों की सुरक्षित वापसी के लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के साथ राज्य में विकास के कामों और अलग-अलग मुद्दों पर बातचीत हुई। उन्होंने आगे कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि विपक्ष युद्ध जैसे हालात का इस्तेमाल राजनीति के लिए कर रहा है। कांग्रेस और शिवसेना-यूबीटी देश में गैस की कमी की अफवाह फैला रहे हैं। इससे ब्लैक मार्केट करने वालों को मौका मिल रहा है। राजनीति के लिए और भी मुद्दे हैं, लेकिन जब युद्ध जैसे हालात में देश के साथ रहने की उम्मीद है, तब विपक्ष राजनीति कर रहा है। विपक्ष ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भी ऐसी ही राजनीति की थी, जिसका पाकिस्तान में भी ध्यान रखा गया था। कुछ लोग हेडलाइन बनाने के लिए पाकिस्तान में बोलते हैं। डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने शिवसेना एमपी को देश में गैस की कमी के मुद्दे पर कड़ा स्टैंड लेने और सदन में विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे झूठे प्रोपेगेंडा को नाकाम करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य में कहीं भी गैस सिलेंडर की कमी नहीं है। सरकार ब्लैक मार्केट करने वालों को रोकने के लिए पूरी मेहनत से काम कर रही है।

ईरान के नए सुप्रीम लीडर पर विवाद, लीक ऑडियो से उठे कई सवाल

ईरान ईरान के नव नियुक्त सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमले में मौत को महज कुछ सेकंड से चकमा देकर जान बचाई थी। इस बात का खुलासा एक लीक हुई ऑडियो रिकॉर्डिंग से हुआ है। ऑडियो रिकॉर्डिंग के अनुसार, 28 फरवरी 2026 को इजरायल के ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत किए गए मिसाइल हमले में उनके पिता और ईरान के भूतपूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई, लेकिन मोजतबा ठीक समय पर इमारत से बाहर निकल आए थे, इस कारण उनकी जान बच गई। ब्रिटिश अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, यह ऑडियो 12 मार्च को वरिष्ठ ईरानी धर्मगुरुओं और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) कमांडरों की एक आंतरिक बैठक से लीक हुआ है। बैठक में दिवंगत नेता के कार्यालय के प्रोटोकॉल प्रमुख मजाहेर हुसैनी ने बताया कि मोजतबा खामेनेई अपने पिता के साथ इमारत के अंदर थे, लेकिन मिसाइलें गिरने से ठीक पहले वे किसी काम से आंगन में बाहर निकल गए थे। ऑडियो रिकॉर्डिंग में और क्या हुसैनी के हवाले से रिकॉर्डिंग में कहा गया है कि ईश्वर की मर्जी से मोजतबा को कुछ काम के लिए बाहर जाना पड़ा और वे वापस लौट रहे थे। वे बाहर थे और ऊपर की ओर जा रहे थे, तभी इमारत पर मिसाइल हमला हुआ। हमले के तुरंत बाद इजरायली ब्लू स्पैरो बैलिस्टिक मिसाइलों ने परिसर को निशाना बनाया, जिसमें अयातुल्ला अली खामेनेई सहित दर्जनों वरिष्ठ अधिकारी और परिवारजन मारे गए। रिपोर्ट के अनुसार, कम से कम तीन मिसाइलें दागी गईं थी। बताया गया कि एक मुख्य निवास पर, दूसरी मोजतबा के ऊपरी मंजिल आवास पर और तीसरी उनके बहनोई मिस्बाह अल-हुदा बाघेरी कानी के घर पर। हमले के प्रभाव को बताते हुए हुसैनी ने कहा कि ईरानी सैन्य प्रमुख मोहम्मद शिराजी का शरीर टुकड़ों में बंट गया और केवल कुछ किलो मांस से उनकी पहचान हुई। एक अन्य मिसाइल से बाघेरी कानी का सिर दो हिस्सों में कट गया। मोजतबा के पैर में चोट लगने की बात आगे बताया गया कि मोजतबा खामेनेई को हमले में पैर में मामूली चोट आई, जबकि उनकी पत्नी हद्दाद की मौके पर ही मौत हो गई। दिवंगत नेता के एक अन्य बेटे मुस्तफा खामेनेई और उनकी पत्नी भी बाल-बाल बच गए। अब ऑडियो लीक होने के बाद से मोजतबा खामेनेई की सेहत और ठिकाने को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। संघर्ष शुरू होने के बाद से वे सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं, जिससे उनकी चोटों की गंभीरता पर सवाल उठ रहे हैं। कई मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि उनके पैर का नुकसान पहुंचा है, हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हुई है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि अधिकारी ईरानी नेता की स्थिति से अनिश्चित हैं। ट्रंप ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि बहुत से लोग कह रहे हैं कि उनका चेहरा बुरी तरह विकृत हो गया है। वे कह रहे हैं कि उन्होंने एक पैर खो दिया है और गंभीर चोटें आई हैं। कुछ लोग उनकी मौत की भी बात कर रहे हैं। हमने उन्हें बिल्कुल नहीं देखा है। हमें नहीं पता कि वे जिंदा हैं या नहीं।  

किसानों की खुशहाली से देश की तरक्की, Shivraj Singh Chouhan ने बताया सरकार का प्रमुख एजेंडा

नई दिल्ली केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लोकसभा में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार किसानों की आय और सुरक्षा बढ़ाने को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दे रही है। इसके लिए सरकार कई कदम उठा रही है, जैसे तंबाकू जैसी हानिकारक फसलों की जगह लाभदायक फसलों को बढ़ावा देना, एमएसपी पर रिकॉर्ड खरीद, फसल बीमा योजना में सुधार और सख्त निगरानी व्यवस्था लागू करना। संसद के निचले सदन में सांसदों द्वारा उठाए गए विभिन्न प्रश्नों का उत्तर देते हुए कृषि मंत्री चौहान ने कहा कि सरकार ने किसानों से तंबाकू की खेती छोड़ने की अपील की है और इसके बदले कई फायदे वाली फसलों की पहचान की है। इनमें हाइब्रिड मक्का, मिर्च, शकरकंद, कपास, आलू, चिया, फीड बीन्स, लोबिया, रागी, अरहर, गन्ना, सोयाबीन, ज्वार और मूंगफली जैसी फसलें शामिल हैं, ताकि किसानों की नकद आय सुरक्षित बनी रहे।  मंत्री ने कहा कि देश के ज्यादातर किसानों के पास छोटी जमीन होती है, इसलिए केवल एक ही फसल पर निर्भर रहना जोखिम भरा होता है। इसको देखते हुए सरकार ने इंटीग्रेटेड फार्मिंग (मिश्रित खेती) के कई मॉडल तैयार किए हैं, जिनका अलग-अलग राज्यों में प्रदर्शन भी किया जा रहा है। इन मॉडलों के तहत किसान अनाज (गेहूं और धान), सब्जियां, फल, पशुपालन, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन, बकरी पालन और एग्रो-फॉरेस्ट्री जैसी गतिविधियों को एक साथ अपना सकते हैं। इससे उन्हें पूरे साल स्थिर और ज्यादा आय मिल सकती है। चौहान ने आगे बताया कि किसानों को उनकी उपज का सही दाम दिलाने के लिए एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) बढ़ाया गया है और इस सीजन में एमएसपी पर रिकॉर्ड खरीद की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने दालों जैसे तूर, मसूर और उड़द के लिए भी व्यवस्था की है, जिसमें किसान रजिस्ट्रेशन के बाद अपनी पूरी उपज बेच सकते हैं और सरकार उसे खरीदने के लिए प्रतिबद्ध है। इससे दाल उत्पादक किसानों को बड़ा सहारा मिला है। फसल बीमा योजना को लेकर उन्होंने कहा कि पहले किसानों को मुआवजा पाने में कई महीने लग जाते थे, लेकिन अब नियमों में बदलाव कर दिया गया है, जिससे अगर किसी एक किसान की फसल भी खराब होती है तो उसे मुआवजा मिलना जरूरी होगा। उन्होंने यह भी बताया कि अगर 21 दिनों के भीतर बीमा राशि किसान के खाते में नहीं आती है, तो बीमा कंपनी और राज्य सरकार को 12 प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान करना होगा। इससे किसानों को देरी का नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त है और फसल बीमा या अन्य योजनाओं में किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने बताया कि कृषि रक्षक पोर्टल जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए प्राप्त शिकायतों की गंभीरता से जांच की जा रही है और जहां भी अनियमितता पाई जाती है, वहां दोषियों पर कार्रवाई की जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में राजस्थान सहित कई राज्यों में फसल बीमा के तहत हजारों करोड़ रुपए सीधे किसानों के बैंक खातों में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के जरिए भेजे गए हैं, जिससे किसानों को सीधा फायदा मिला है।

LPG क्राइसिस पर सुनवाई: कोर्ट के सवालों पर सरकार ने रखी अपनी बात

नई दिल्ली एलपीजी संकट को लेकर केंद्र सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट को जवाब दिया है। सरकार ने इस जवाब में कहा है कि एलपीजी संकट से उबरने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। ताकि ईरान-इजरायल युद्ध के चलते भारत में एलपीजी की सप्लाई प्रभावित न होने पाए। सरकार के दूसरे वरिष्ठतम कानून अधिकारी, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस अनिल एस किलोर और राज डी वाकोड़े की बेंच को बताया कि बातचीत जारी है और सरकार अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जिन कदमों को उठाया जा रहा है, उन्हें जानबूझकर नहीं बताया जा रहा है। साथ ही सरकार पर भरोसा बनाए रखने की भी अपील की। अपनी तरफ से पूरी कोशिश इसलिए, उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि वह एलपीजी डीलरों द्वारा दायर याचिका को बंद कर दे। डीलरों ने दावा किया था कि ईरान-इजरायल युद्ध के चलते घरेलू आपूर्ति की तुलना में निर्यात को प्राथमिकता दी जा रही है। एसजी मेहता ने कहाकि कूटनीतिक स्तर पर बातचीत चल रही है। हम अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे हैं। सरकार पर भरोसा करते हुए अदालत इसे बंद करने पर विचार कर सकती है। अदालत ने सरकार की प्रस्तुतियों पर विचार किया और याचिका को बंद कर दिया। यह याचिका एलपीजी डीलरों द्वारा दायर की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि घरेलू आपूर्ति की तुलना में निर्यात को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि एलपीजी की गंभीर कमी है। डीलरों ने कहाकि महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में आपूर्ति मध्य पूर्व के संघर्ष के कारण प्रभावित हुई। सरकार को दी थी नोटिस इससे पहले 12 मार्च को बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने घरेलू रसोई गैस सिलेंडरों की आपूर्ति बढ़ाने की मांग को लेकर दायर याचिका पर गुरुवार को पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, विदेश व्यापार महानिदेशालय और एक निजी कंपनी को नोटिस जारी किया था। छह रसोई गैस वितरकों द्वारा दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि नागपुर स्थित कॉन्फिडेंस पेट्रोलियम इंडिया लिमिटेड ने केन्द्र सरकार के घरेलू आपूर्ति को प्राथमिकता देने के निर्देशों के बावजूद घरेलू गैस सिलेंडरों की आपूर्ति नहीं बढ़ाई है। अधिवक्ता श्याम देवानी और साहिल देवानी के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया था कि ईरान युद्ध के कारण वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति में व्यवधान से रसोई गैस उत्पादन पर दबाव बढ़ गया है। इस स्थिति को देखते हुए पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने घरेलू उपभोक्ताओं के लिए रसोई गैस के उत्पादन और आपूर्ति को प्राथमिकता देने के निर्देश जारी किए थे। याचिका में क्या था याचिका में यह भी आरोप लगाया गया था कि कंपनी से निर्यात रोककर घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ाने के लिए कई बार अनुरोध किए गए, लेकिन कंपनी ने इसे नजरअंदाज कर दिया। याचिकाकर्ताओं के अनुसार कंपनी ने जवाब दिया कि वह अपनी निर्यात नीति के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति जारी रखने के लिए बाध्य है और घरेलू बाजार को प्राथमिकता नहीं दे सकती। जस्टिस अनिल एस किलोरे और न्यायमूर्ति राज डी वाकोड़े की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, विदेश व्यापार महानिदेशालय और कॉन्फिडेंस पेट्रोलियम इंडिया लिमिटेड को नोटिस जारी किए और मामले की अगली सुनवाई सोमवार को निर्धारित की थी।  

दिनदहाड़े बड़ी लूट: बाइक सवारों ने मिर्च पाउडर फेंककर 1 करोड़ उड़ाए

तेलंगाना तेलंगाना के हैदराबाद में एक बड़ी लूट की घटना ने पुलिस को हिलाकर रख दिया है। 16 मार्च की रात करीब 9:40 बजे कुकटपल्ली इलाके में पिलर नंबर 837 के पास दो एसी मैकेनिक्स स्कूटी पर जा रहे थे। मोहम्मद खुसरू और मोहम्मद अजीमुद्दीन बहादुरपुरा निवासी हैं, वे गोल्ड ड्रॉप कार्टन बॉक्स में 1 करोड़ रुपये नकद लेकर जा रहे थे। अचानक चार अज्ञात व्यक्ति बाइकों पर आए और उन पर मिर्च पाउडर फेंक दिया। मिर्च पाउडर से उनकी आंखें जलने लगीं और वे असहाय हो गए। हमलावरों ने तुरंत कार्टन बॉक्स छीन लिया और अपनी बाइकों पर तेजी से भाग निकले। यह घटना इतनी तेज हुई कि आसपास के लोग भी कुछ समझ नहीं पाए। पीड़ितों ने तुरंत कुकटपल्ली पुलिस को सूचना दी। दोनों मैकेनिक्स एसी रिपेयर का काम करते हैं और शायद यह राशि किसी बड़े काम या व्यापार से जुड़ी हुई थी। लुटेरों ने बहुत चालाकी से हमला किया, क्योंकि मिर्च पाउडर फेंकने से पीड़ितों की दृष्टि क्षणभर के लिए चली गई और वे विरोध नहीं कर पाए। यह तरीका अपराधियों की ओर से अक्सर इस्तेमाल किया जाता है, क्योंकि यह सस्ता, आसान और प्रभावी हथियार है। घटना के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की और सीसीटीवी फुटेज व गवाहों के बयानों को इकट्ठा करना शुरू किया। लूट की राशि इतनी बड़ी होने से यह मामला संवेदनशील हो गया है। जांच में जुटी पुलिस तेलंगाना पुलिस ने इस घटना को गंभीरता से लिया है और चार अलग-अलग जांच टीमें गठित की हैं। ये टीमें मैनहंट अभियान चला रही हैं ताकि जल्द से जल्द चारों लुटेरों को पकड़ा जा सके। पुलिस ने आसपास के इलाकों में सघन तलाशी अभियान शुरू किया है और बाइक की नंबर प्लेट या चेहरों की पहचान के लिए प्रयासरत है। हालांकि अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन पुलिस का दावा है कि वे जल्द ही सुराग हासिल कर लेंगे। यह घटना शहर में सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर रही है, खासकर जब बड़ी रकम लेकर लोग यात्रा करते हैं।

मध्य-पूर्व में बढ़ा तनाव: इजरायल ने ईरान के बड़े सैन्य चेहरों को किया ढेर, खलबली मची

ईरान ईरान युद्ध का आज (मंगलवार, 17 मार्च को) 18वां दिन है। इस बीच इजरायली सुरक्षा बल (IDF) ने बड़ा दावा किया है। IDF ने कहा है कि बीती रात ईरान में किए गए हवाई हमले में ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के चीफ यानी सबसे बड़े सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी को निशाना बनाया गया है। हालांकि, अभी तक यह साफ नहीं हो सका है कि लारीजानी इस हमले में मारे गए हैं या घायल हुए हैं। इसके अलावा इजरायली सेना ने यह भी दावा किया है कि उसने रात के हमले में IRGC की बासिज फ़ोर्स के टॉप कमांडर घोलमरेज़ा सोलेमानी को मार गिराया है। इजरायल के रक्षा मंत्री इजराइल कार्ट्ज ने इससे भी आगे बढ़कर दावा किया है कि IDF के हमले में लारीजानी की मौत हो गई है। इजरायल के इस दावे ने ईरान में खलबली मचा दी है। हालांकि, ईरान की ओर से अभी तक इस पर कोई टिप्पणी नहीं आई है। IDF ने कहा है कि सोलेमानी की कथित हत्या ईरान के “कमांड-एंड-कंट्रोल ढांचे” के लिए एक बड़ा झटका है। पिछले दिनों अली खामेनेई और ईरान के बाकी बड़े नेतृत्व के मारे जाने के बाद अली लारीजानी को ही सबसे ताकतवर शख्स माना जा रहा था, जो इस युद्ध में ईरान की अगुवाई कर रहे हैं। अली लारीजानी को कथित तौर पर आखिरी बार 13 मार्च को कुद्स डे पर देखा गया था। पहले परमाणु वार्ताकार रहे हैं लारीजानी लारीजानी, जो पहले परमाणु वार्ताकार रह चुके हैं और वर्तमान में ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव के रूप में कार्यरत हैं, उन्हें ईरान की सत्ता संरचना में सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों में से एक माना जाता है। अगर उनकी मौत की पुष्टि होती है, तो लारीजानी सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के बाद मारे जाने वाले ईरान के सबसे वरिष्ठ अधिकारी होंगे। तेहरान, शिराज और तबरीज़ में हमले बता दें कि अमेरिका ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े 10 व्यक्तियों की सूची में, लारीजानी सहित वरिष्ठ ईरानी सैन्य और खुफिया अधिकारियों के बारे में जानकारी देने पर 1 करोड़ डॉलर तक का इनाम देने की घोषणा की थी। IDF का कहना है कि उसने सोमवार की रात तेहरान, शिराज और तबरीज़ में ईरान के कई अहम ठिकानों और आधारभूत संरचनाओं पर हमले किए हैं। इजरायली सेना का दावा है कि इन हमलों में तेहरान में कमांड सेंटर, लॉन्च साइट और एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाया गया है जबकि शिराज में, आंतरिक सुरक्षा बलों के कमांड सेंटर और एक बैलिस्टिक मिसाइल साइट पर हमला किया गया है। IDF का ये भी दावा है कि तबरीज़ में हुए हमलों ने ईरान के अतिरिक्त एयर डिफेंस सिस्टम को खत्म कर दिया है।  

राहुल गांधी पर बढ़ा दबाव: पूर्व नौकरशाहों और सैन्य अधिकारियों ने लिखी खुली चिट्ठी, माफी की मांग

नई दिल्ली संसद भवन परिसर में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की अगुवाई में कांग्रेस के हालिया विरोध-प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। 204 सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों, पूर्व नौकरशाहों, पूर्व राजनयिकों और वकीलों ने राहुल गांधी से उनके आचरण के लिए देश से माफी मांगने की मांग की है। मंगलवार को पूर्व अधिकारियों ने राहुल गांधी के नाम लिखी एक खुली चिट्ठी जारी की जिसमें कहा गया है कि 12 मार्च को संसद परिसर में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान गांधी और अन्य सांसदों का व्यवहार संसदीय मर्यादा और संस्थागत गरिमा के खिलाफ था। पत्र में आरोप लगाया गया है कि लोकसभा अध्यक्ष के स्पष्ट निर्देश के बावजूद संसद परिसर में प्रदर्शन किया गया, जो “अध्यक्ष के आदेश की अवहेलना” और संसदीय परंपराओं का उल्लंघन है। चिट्ठी में राहुल गांधी के व्यवहार को मर्यादा और संस्थागत गरिमा का उल्लंघन बताया गया है। खुले पत्र में, हस्ताक्षरकर्ताओं ने कहा कि 12 मार्च को संसद भवन परिसर के भीतर एक विरोध प्रदर्शन के दौरान गांधी के कार्यों को ‘पीठ’ (Chair) की जानबूझकर अवहेलना माना जा सकता है, और यह संसदीय अधिकार के प्रति उपेक्षा को दर्शाता है। “राजनीतिक नाटक का मंच नहीं संसद” पत्र में कहा गया है, “संसद देश का सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्थान है, इसे राजनीतिक नाटक का मंच नहीं बनाया जाना चाहिए।” हस्ताक्षरकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि सांसदों का संसद की सीढ़ियों पर बैठकर चाय-बिस्किट खाना और प्रदर्शन करना “जनप्रतिनिधियों के आचरण के अनुरूप नहीं” है। खुले पत्र में कहा गया कि इस तरह का व्यवहार न केवल संसदीय प्रक्रियाओं को कमजोर करता है, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचाता है। माफी और आत्ममंथन की मांग उन्होंने लिखा है, “संसद के हर हिस्से, सीढ़ियां, गलियारे और लॉबी की समान गरिमा है। जनप्रतिनिधियों का आचरण इन स्थानों पर भी उसी स्तर का होना चाहिए।” पत्र में यह भी कहा गया है कि बार-बार इस तरह की घटनाएं सार्वजनिक संवाद के स्तर को गिराती हैं। पूर्व अधिकारियों ने नेता प्रतिपक्ष से अपील की है कि वे देश से माफी मांगें और अपने व्यवहार पर आत्ममंथन करें, ताकि संसद की गरिमा और विश्वसनीयता बनी रहे। पत्र में कहा गया है, “एक संवैधानिक संस्था के संरक्षक के रूप में, जो एक अरब से अधिक लोगों की लोकतांत्रिक आकांक्षाओं का प्रतीक है, सांसदों को इस बात का हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि उनके कार्यों का प्रतीकात्मक और संस्थागत महत्व होता है।” पत्र का नेतृत्व इस पत्र का समन्वय जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने किया। हस्ताक्षरकर्ताओं में 100 से अधिक पूर्व सैन्य अधिकारी, कई पूर्व नौकरशाह, राजनयिक और वरिष्ठ अधिवक्ता शामिल हैं। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब संसद के भीतर और बाहर विरोध प्रदर्शनों को लेकर राजनीतिक माहौल पहले से ही गर्म है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस विवाद से संसदीय आचरण और लोकतांत्रिक परंपराओं पर एक नई बहस छिड़ सकती है।  

रमजान में हमला, अहमदियों पर जुल्म… UN में भारत ने पाकिस्तान को घेरा, दुनिया के सामने रखी सच्चाई

संयुक्त राष्ट्र संयुक्त राष्ट्र (UN) में ‘इस्लामोफोबिया से निपटने के अंतर्राष्ट्रीय दिवस’ के अवसर पर भारत ने पाकिस्तान पर तीखा प्रहार किया है। भारत ने कहा कि पाकिस्तान की पड़ोसी देशों में ‘इस्लामोफोबिया’ की ‘काल्पनिक कहानियां गढ़ने की आदत है। भारतीय दूत ने सवाल उठाया कि इस्लामाबाद के अपने ही देश में अहमदिया समुदाय के क्रूर दमन या रमजान के दौरान अफगानिस्तान पर हवाई बमबारी को कैसे देखा जाए। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत पर्वतनेनी हरीश ने महासभा को संबोधित करते हुए भारत का कड़ा रुख स्पष्ट किया। पाकिस्तान का दोहरा चरित्र और क्रूरता राजदूत हरीश ने पाकिस्तान पर कटाक्ष करते हुए कहा कि भारत का पश्चिमी पड़ोसी (पाकिस्तान) अपने पड़ोस में इस्लामोफोबिया की काल्पनिक कहानियां गढ़ने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने सवाल उठाया कि पाकिस्तान में अहमदियों के क्रूर दमन, असहाय अफगान शरणार्थियों को जबरन वापस भेजने और रमजान के पवित्र महीने में अफगानिस्तान पर किए गए हवाई हमलों को आखिर क्या नाम दिया जाएगा? बता दें कि भारत ने पाकिस्तान को ऐसे समय पर फटकार लगाई है जब पिछली रात ही पाक ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल पर हवाई हमला कर 400 लोगों की जान ले ली। अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर काबुल के एक अस्पताल पर हवाई हमले का बड़ा आरोप लगाया है, जिसमें कम से कम 400 लोग मारे गए और करीब 250 घायल हुए हैं। यह घटना 16 मार्च की रात करीब 9 बजे हुई, जब पाकिस्तानी वायुसेना ने काबुल में हमला किया। अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के उप-प्रवक्ता हमदुल्लाह फितरत ने X पर पोस्ट करके बताया कि हमला काबुल स्थित ओमिद नामक 2000 बेड वाले ड्रग रिहैबिलिटेशन अस्पताल (नशामुक्ति केंद्र) पर हुआ, जहां नशेड़ी मरीजों का इलाज चल रहा था। उन्होंने कहा कि अस्पताल के बड़े हिस्से तबाह हो गए, आग लग गई और बचाव दल अब भी शव निकालने और आग बुझाने में जुटे हैं। अधिकांश मृतक और घायल नशे की लत से मुक्ति पा रहे मरीज थे। तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने इसे मानवता के खिलाफ अपराध करार दिया और कहा कि अस्पताल साफ तौर पर चिह्नित था। उन्होंने पत्रकारों और राजनयिकों को साइट पर आने का न्योता भी दिया। अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर नागरिक स्थलों को जानबूझकर निशाना बनाने का आरोप लगाया है। भारत पहले भी की मौकों पर पाकिस्तान के खिलाफ यूएन में अफगानिस्तान का साथ देता आया है। OIC का दुरुपयोग भारत ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पाकिस्तान ने ‘इस्लामिक सहयोग संगठन’ (OIC) को भारत के खिलाफ एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की सुनियोजित कोशिश की है और इस मंच से भारत के खिलाफ बार-बार झूठे और निराधार आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि भारत 20 करोड़ से अधिक मुसलमानों का घर है जो दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादियों में से एक है। हरीश ने कहा कि जम्मू-कश्मीर सहित पूरे भारत में मुस्लिम समुदाय अपने प्रतिनिधि खुद चुनता है जो उनकी आवाज उठाते हैं। पाकिस्तान की ‘असली फोबिया’ और आतंकी मानसिकता भारतीय राजदूत ने कहा कि पाकिस्तान का असली ‘फोबिया’ (डर) भारत के उस बहुसांस्कृतिक और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के खिलाफ है, जिसका आनंद मुस्लिम समुदाय सहित सभी भारतीय उठाते हैं। पाकिस्तान का नैरेटिव उसकी उस सांप्रदायिक और आतंकवादी मानसिकता को दर्शाता है जिसे उसने अपने जन्म से ही पाला-पोसा है। संयुक्त राष्ट्र को नसीहत – ‘रिलीजिओफोबिया’ पर हो बात भारत ने स्पष्ट किया कि धर्म का राजनीतिकरण कभी भी समस्याओं का समाधान नहीं करता, बल्कि यह ध्रुवीकरण को बढ़ावा देता है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र से आग्रह किया कि वह केवल एक धर्म (इस्लाम) पर केंद्रित ढांचों से बचे और सभी प्रकार के ‘रिलीजिओफोबिया’ (धर्म-आधारित घृणा) से निपटने पर ध्यान दे। हरीश ने कहा कि इतिहास गवाह है कि धर्म का राजनीतिकरण समस्याओं का समाधान नहीं करता, बल्कि इससे विभाजनकारी सोच को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने कहा, ‘संयुक्त राष्ट्र एक ऐसी संस्था है जो धर्म, संस्कृति और राजनीति से ऊपर है। इसकी विश्वसनीयता इसकी सार्वभौमिकता और निष्पक्षता में है। इसलिए हम ऐसे ढांचों से सावधान रहने की अपील करते हैं जो केवल एक धर्म पर केंद्रित हों।’ भारत ने खुद को हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख धर्म की जन्मस्थली बताते हुए कहा कि ‘सर्व धर्म समभाव’ यानी सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान भारत की सभ्यतागत जीवन शैली रही है। भारत ने 1981 के उस घोषणापत्र का भी समर्थन किया जो बिना किसी विशेषाधिकार के सभी धर्मों के अनुयायियों के अधिकारों की रक्षा करता है। अंत में भारत ने संयुक्त राष्ट्र से आग्रह किया कि वह अपना समय और सीमित संसाधन ध्रुवीकरण करने वाले नैरेटिव्स के बजाय संघर्ष समाधान, गरीबी उन्मूलन और हर धर्म के व्यक्ति के लिए समानता और गरिमा पर आधारित समाज के निर्माण में लगाए।  

इस्लामिक दुनिया में दरार: क्यों ईरान को अलग-थलग देखना चाहते हैं उसके पड़ोसी?

वाशिंगटन अमेरिका के हमले के बाद भड़का ईरान अपने ही पड़ोसी खाड़ी देशों को निशाना बना रहा है। इसपर खाड़ी देशों ने अमेरिका से कहा है कि उसका अभियान इतना तेज होना चाहिए कि ईरान कमजोर हो जाए। हालांकि इस युद्ध में सीधे तौर पर कोई भी देश शामिल नहीं होना चाहता। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक खाड़ी देशों को डर है कि ईरान उनके तेल के ठिकानों, पोर्ट्स और समुद्री रास्तों को निशाना बना सकता है। ऐसे में उनके पास अमेरिका की ओर देखने के अलावा कोई विकल्प ही नहीं है।   अमेरिका चाहता है, खाड़ी देश भी युद्ध में कूदें अमेरिका चाहता है कि इस युद्ध में खाड़ी देश भी कूद पड़ें और होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने का खुलकर विरोध करें। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मुद्दे पर बाकी देशों का आह्वान किया है। वह चाहते हैं कि ईरान समझ जाए कि उसके ही क्षेत्र में उसके खिलाफ सारे देश खड़े हैं। सऊदी में गल्फ रिसर्टे सेंटर के चेयरमैन अब्दुलअजीज सेगर ने कहा कि सारे खाड़ी देश सोचते हैं कि ईरान ने सारी सीमाएं लांघदी हैं। उन्होंने कहा, शुरू में हमने ईरान का पक्ष लिया और अमेरिका के युद्ध का विरोध किया। हालांकि इसके बाद जब हवाई हमले हम पर भी होने लगे तो ईरान दुश्मन हो गया। ईरान से बढ़े हुए तनाव के बीच भी खाड़ी देश युद्ध में सीधे हिस्सा नहीं लेना चाहते हैं। ईरान ने यूएई समेत कई देशों के एयरपोर्ट्स को भी निशाना बनाया है। बहरीन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब और ओमान में एयरपोर्टस पर धमाके हुए हैं। इसके अलावा ईरान के खतरनाक कदमों की वजह से समुद्री व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। युद्ध को 16 दिन से ज्यादा बीत चुके हैं। ईरान लगातार खाड़ी देशों में अमेरिका के ठिकानों और आम नागरिको को निशाना बना रहा है। डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उनके हमलो की वजह से ईरान की सेना की कमर टूट गई है। वहीं जब होर्मुज के मुद्दे पर अमेरिका के साथ कोई नहीं आया तो वह अपने मित्र देशों पर ही नाराज हो गए। ट्रंप ने कहा, हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य मार्ग को सुरक्षित करने के लिए उन्होंने जिस गठबंधन का प्रस्ताव रखा है, उसके प्रति सहयोगियों में “उत्साह” की कमी है। हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से ही दुनिया के ऊर्जा संसाधनों के पाँचवें हिस्से की जहाज़ों से जरिये आपूर्ति की जाती है। डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार देर रात ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि ईरान के साथ संघर्ष जल्द ही खत्म हो सकता है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि इस हफ़्ते किसी समाधान की संभावना कम है। उन्होंने इस सैन्य अभियान का बचाव करते हुए कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए यह ज़रूरी था। गौरतलब है कि ईरान ने 28 फ़रवरी को अमेरिका और इज़रायल द्वारा किए गए हमलों के जवाब में इस क्षेत्र से होकर गुजरने वाले जहाज़ों को निशाना बनाने की धमकी दी थी जिसके बाद फ़ारस की खाड़ी से होने वाली जहाज़ों की आवाजाही काफ़ी हद तक कम हो गई है। ट्रंप ने ब्रिटेन की प्रतिक्रिया पर असंतोष ज़ाहिर करते हुए कहा ” ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर द्वारा इस संघर्ष में नाटो को शामिल करने में दिखाई गई हिचकिचाहट से मैं “खुश नहीं हैं” और “बहुत हैरान हूँ। मैं ब्रिटेन के रवैये से खुश नहीं था। मुझे लगता है कि शायद वे इसमें शामिल होंगे, लेकिन उन्हें पूरे उत्साह के साथ शामिल होना चाहिए।”  

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