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किसी के घर जाएं तो ना करें ये गलती, चिढ़ने लगते हैं लोग

हिंदू धर्म में मेहमानों के लिए ‘अतिथि देवो भव:’ बोला जाता है। लेकिन इसका मतलब बिल्कुल नहीं कि किसी के घर जाकर आप बेसिक मैनर भूल जाएं। कई बार लोग मेहमान बनकर घर जाते हैं तो कुछ बहुत ही नॉर्मल बिहेवियर पर कंट्रोल नहीं करते। जिसकी वजह से ना केवल होस्ट को दिक्कत उठानी पड़ती है। बल्कि वो आपको नेक्स्ट टाइम अपने घर बुलाने से भी बचता है। आजकल की भागदौड़ भरी लाइफ में जब लोगों के पास टाइम नहीं है और घर में मेहमानों को पार्टी दे रखी है। तो आपकी कुछ हरकतें होस्ट को मुश्किल में डाल सकती हैं। सुनने में अजीब लग सकता है लेकिन आपकी ये हरकते होस्ट के लिए दिक्कत पैदा कर सकती है।’ ना करें अलग से खाने-पीने की चीजों की डिमांड नया साल और क्रिसमस वगैरह नजदीक है। ऐसे में काफी सारे लोग घर में पार्टी देते हैं और एक साथ कई सारे लोग आते हैं। अगर सारे गेस्ट चाय-कॉफी जैसी एक ही चीज को पीने के लिए राजी हैं तो अपने लिए स्पेशल अलग से किसी एक चीज की डिमांड ना करें। ऐसा करना होस्ट के लिए टाइम टेकिंग हो सकता है और उसे केवल एक इंसान के लिए खाने-पीने की चीज बनाने में भी मेहनत करनी पड़ेगी। इसलिए उन्हीं चीजों को खा-पी लें जो बाकी गेस्ट खा रहे हैं। सर्व फूड या ड्रिंक को खाली करवाना अक्सर घर में ऐसे मेहमान आते हैं जो सर्व फूड या ड्रिंक को आधा खाली कराए बगैर नहीं मानते। अगर आपकी आदत भी ऐसी ही है तो फौरन बदल दें। क्योंकि कोई भी होस्ट इस आदत को पसंद नहीं करता। घर के बाहर बातें करना अगर आप उन गेस्ट की लिस्ट में हैं जो घर के बाहर गेट, लिफ्ट या मेनडोर पर खड़े होकर आधा घंटा बात करते हैं। तो अपनी इस आदत को भी खत्म कर दें। अगर आपको लेट हो रहा तो फौरन टाटा-बाय कहकर निकल जाएं। गेट पर खड़े होकर बातें करना काफी सारे होस्ट को इरिटेटिंग लगता है। घर की पार्टी में साथ में बिन बुलाए इंसान को ले जाना अगर किसी ने घर में छोटी सी पार्टी दे रखी है और आपको पर्सनली इनवाइट किया है। तो अपने साथ किसी दोस्त या जानने वाले के साथ ना जाएं। ऐसा करना कम इरिटेटिंग नहीं होता। खाली हाथ जाना किसी के घर में खाली हाथ जाना भी बेसिक एटीकेट में कमी है। अगर आप गेस्ट बनकर कहीं पहुंचे हैं तो छोटा सा गिफ्ट जरूर साथ ले जाएं। जिसे होस्ट को दे सकें।  

अपने गैजट्स में जोड़िए फंक्शन, बनाइए बेहतर

आप अपने पास मौजूद कई गैजट्स (स्मार्टफोन, टैबलट, वाई-फाई राउटर, कैमरे) में ऐसे फीचर्स जोड़ सकते हैं, जिनकी सुविधा कंपनी ने नहीं दी है। इसके लिए बस आपको थोड़ा सा दिमाग लगाने की जरूरत होती है। बाकी हितेश राज भगत और करण बजाज बता देते हैं कि इसे आप कैसे कर सकते हैं, आगे क्लिक करते जाइए और जानिए… आपका मल्टिफंक्शनल स्मार्टफोन:- क्या आपके लैपटॉप में वेबकैम नहीं है? तो आपको फिक्र करने की कोई जरूरत नहीं है। फ्री ऐंड्रॉयड ऐप ड्रॉइडकैम के जरिए आप फोन के कैमरे और माइक्रोफोन का इस्तेमाल कर स्काइप, गूगल हैंगआउट और बाकी प्लैटफॉर्म पर दोस्तों से बात कर सकते हैं। इसके लिए फ्री ऐप और फ्री विंडोज, लाइनक्स सर्वर सॉफ्टवेयर चाहिए। इसके बारे में आपको विस्तार से जानकारी ‘डब्लूडब्लूडब्लू डॉट डीईवी7एप्पस डॉट कॉम’ पर मिल सकती है। वाई-फाई रेंज दुगनी-तिगुनी करिए:- वाई-फाई एक अजीब साइंस है। आप ठीक-ठीक नहीं पता लगा सकते कि आपका वाई-फाई कहीं पर क्यों कमजोर होता है, लेकिन आप कुछ गाइडलाइंस के मुताबिक काम करके वाई-फाई की रेंज बढ़ा सकते हैं। बेहतर कवरेज के लिए राउटर को घर के बीचो-बीच रखिए और इसे 6 फीट या इससे ज्यादा की ऊंचाई पर रखिए। ऐसा इस वजह से क्योंकि वाई-फाई सिग्नल ओमनी-डायरेक्शनल होते हैं और वे ऊपर जाने की जगह नीचे की तरफ आते हैं। अगर आपके पास दो ऐंटेना वाला राउटर है, तो एक को वर्टिकल रखिए, दूसरे को हॉरिजनटल। अगर आप ये न कर सकें या इन तरीकों से फायदा न हो, तो रेंज बढ़ाने के लिए पुराने राउटर्स को वाई-फाई सिग्नल रिपीटर्स के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं या आप किसी इलेक्ट्रिकल आउटलेट में सीधे लगाने के लिए डीलिंक और नेटगियर जैसे ब्रैंड्स के छोटे रिपीटर्स (कीमत करीब 1500 रुपए) खरीद सकते हैं। रिपीटर अपने नेटवर्क की सीमा पर लगाएं, जिससे वह वहां से सिग्नल को आगे भेज सके। इसे लगाना बहुत आसान होता है। इसमें रिपीटर मोड चुनिए, अपने वाई-फाई नाम और पासवर्ड को डालिए, बस हो गया। आप दुगना या तिगुना या आउटडोर तक सिग्नल पहुंचाने के लिए और रिपीटर्स का इस्तेमाल कर सकते हैं। अपने कैमरे की क्षमता बढ़ाइए:- किसी कैमरे से आरएडब्लू फॉर्मैट की इमेज उस तस्वीर का डिजिटल नेगेटिव होता है। सही सॉफ्टवेयर की मदद से आप आरएडब्लू इमेज को बेहतर प्रोसेस कर सकते हैं, ताकि आपको अच्छी तस्वीर मिल सके। आम तौर पर डीएसएलआर कैमरों में आरएडब्लू का ऑप्शन होता है। कई मिड-रेंज और एंट्री लेवल कैमरों में यह नहीं होता, जबकि कई बार उनका हार्डवेयर इसे सपॉर्ट करता है। आप एक टेंपररी फर्मवेयर (एक तरह का सॉफ्टवेयर) की मदद से आप अपने कैमरे को ऐसा ऐसा बना सकते हैं कि वह आरएडब्लू इमेज ले सके और आपको कुछ अतिरिक्त सेटिंग्स दे सके। कैनन के कैमरे रखने वाले लोग ले सकते हैं। आप अपने कैमरा मॉडल को सर्च करिए और सही फर्मवेयर डाउनलोड कर लीजिए। इसमें स्टेप-बाई-स्टेप बताया गया है कि कैमरे में फर्मवेयर कैसे लोड करें। एक बार फर्मवेयर अपडेट होने के बाद आप आरएडब्लू ऑप्शन के अलावा कई और सेटिंग्स देख सकेंगे। यह ध्यान रखिएगा कि आरएडब्लू इमेज सेव करने में ज्यादा वक्त और ज्यादा जगह लगती है। कैनन डीएसएलआर यूजर मैजिक लैंटर्न नाम का फर्मवेयर ले सकते हैं। इससे वे अपने म्व्ै कैमरे में और फंक्शनैलिटी डाल सकते हैं। इससे लाइव हिस्टोग्राम, फोकस पीकिंग, स्पॉटमीटर, एचडीआर विडियो, अनकम्प्रेस्ड रॉ विडियो सपॉर्ट, मोशन डिटेक्शन जैसे कई फीचर मिलेंगे. सपोर्टेड डीएसएलआर कैमरों की लिस्ट के लिए डबलूडबलूडबलू डॉट मैजिकक्लैंटर्न डॉट एफएम पर जा सकते हैं। वायरलेस हार्ड ड्राइव और प्रिंटर:- वाई-फाई शेयर करने का शानदार जरिया है। लिहाजा आपके पास मौजूदा प्रिंटर (नॉन-वायरलेस) या एक्सटर्नल हार्ड ड्राइव है, तो आपको इन बिल्ट यूएसबी पोर्ट और प्रिंट सर्वर से लैस राउटर लेना चाहिए। मिसाल के तौर पर बेल्किन का प्लेमैक्स एन600 (8, 000 रुपए) वाई-फाई एन सर्टिफाइड राउटर है और ड्यूल यूएसबी पोर्ट भी है। साथ ही, इसे परंपरागत वायरलेस राउटर की तरह भी इस्तेमाल किया जा सकता है। आप इसमें एक साथ यूएसबी हार्ड ड्राइवर और यूएसबी प्रिंटर कनेक्ट कर सकते हैं। इसका मतलब यह हुआ कि इस नेटवर्क पर कोई भी कंप्यूटर घर में किसी जगह से प्रिंट करने में सक्षम होगा। साथ ही, हार्ड ड्राइव में मौजूद कॉन्टेंट का भी ऐक्सेस मुमकिन होगा। टीवी का वायरलेस विडियो सिग्नल:- अगर आपको अपने स्टाइलिश एलईडी-एलसीडी टीवी के केबल के कारण आने वाली खड़खड़ाहट पसंद नहीं है, तो आप अपने टीवी को वायरलेस बना सकते हैं। आपको अपनी मौजूदा डिवाइसेज (मसलन केबल सेट टॉप बॉक्स, डीवीडी प्लेयर और गेम कंसोल) के लिए वायरलेस एडीएमआई अडॉप्टर खरीदना होगा। इसके बाद टीवी के एचडीएमआई पोर्ट में रिसीवर और बाकी डिवाइस में ट्रांसमीटर लगाना होगा। वायरलेस एवी ट्रांसमीटर और रिसीवर की कॉस्ट 4, 000 लेकर 65, 000 रुपए तक बैठती है। कॉन्टेंट (फोटो, म्यूजिक, विडियो) की स्ट्रीमिंग के लिए मौजूदा वाई-फाई कनेक्शन का इस्तेमाल करते हुए स्मार्टफोन या टैबलट जैसी डिवाइस से टीवी को जोड़ने के लिए डीएलएनए टेक्नॉलजी का इस्तेमाल किया जा सकता है। आईपैड को बनाइए दूसरा डिस्प्ले:- आईपैड का डिस्प्ले काफी शानदार है। चाहे आप आईपैड 2 इस्तेमाल करें या फस्र्ट जेनरेशन आईपैड मिनी, डिस्प्ले की क्वॉलिटी काफी बेहतरीन है। इस वजह से आपको इसे अपने कंप्यूटर के लिए दूसरे डिस्प्ले की तरह इस्तेमाल करना चाहिए। यह ट्रिक विंडोज और मैक दोनों पर काम करती है। इसके लिए सबसे पहले यह पक्का करें कि कंप्यूटर और आईपैड दोनों एक ही वाई-फाई नेटवर्क से जुड़े हों। साथ ही, एयर डिस्प्ले 2 (9.99 डॉलर) या डिस्प्लेपैड (2.99 डॉलर) और कंप्यूटर के लिए संबंधित सर्वर ऐप लेना होगा। यह ऐप आपके आईपैड को वायरलेस सेकंड डिस्प्ले में बदल देगा, जो एक्सटेंडेड डिस्प्ले हो सकता है।  

ब्रेक पर जाना चाहते हैं तो..

कामकाजी जीवन में निजी या अन्य कारणों से कुछ न कुछ रुकावटें आती रहती हैं। कई प्रोफेशनल्स के करियर में चाहे-अनचाहे ब्रेक्स आ जाते हैं। हालांकि, महिलाओं के करियर में ऐसे ब्रेक्स ज्यादा आते हैं, फिर भी महिला कर्मचारी हों या पुरुष, ऐसे लोगों की संख्या में इजाफा हो रहा है, जो अपने काम से कुछ देर या लंबे समय के लिए दूर चले जाते हैं। पहले जरूरत यह समझने की है कि ब्रेक पर जाना क्यों जरूरी हो जाता है? आज वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण जरूरी हो गया है कि संस्थान अपने कार्यकारी ढांचे में जरूरी तब्दीलियां लाएं। इस कारण कुछ कर्मचारियों का काम से दूर जाना उनकी मजबूरी बन जाता है। एक अन्य कारण कर्मचारी का एक ही बंधे-बंधाए ढांचे में लंबे समय तक काम करने से जुड़ी बोरियत भी हो सकता है या फिर अपना काम शुरू करने के प्रयास में मिली असफलता, जिसके बाद उन्हें लौटने में कुछ समय लगता है। ऐसे कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। ब्रेक के दौरान:- हम अक्सर अपनी मान्यताओं के रूप में कई ऐसी भ्रामक धारणाएं पाले रखते हैं, जिन्हें खुद से दूर रखना ही बेहतर होता है। यह धारणाएं अपनी क्षमताओं (या कमियों) के रूप में भी हो सकती हैं या सही-गलत से जुड़े निजी पूर्वाग्रहों की भी। जाहिर है कि यह धारणाएं लंबे कार्यानुभव के आधार पर ही बनती हैं, जिन पर ब्रेक के दौरान आप पुनर्विचार कर सकते हैं। यह भी जरूरी है कि आप इस दौरान अपनी खूबियों-खामियों पर भी सोचें, ध्यान दें कि कार्य से जुड़ी आपकी असली दक्षता उसके किस पक्ष से जुड़ी है। बेशक आप अपने काम से दूर हैं, परंतु आपके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष, जो अभी तक कुछ पीछे रहा था, अब उसे आगे लाना होगा। यहां आशय है आपके परिवार से। परिवार के साथ फुर्सत के कुछ पल बिताना भी खासा स्फूर्तिदायक होता है, जो किसी भी समस्या पर नए सिरे से सोचने के लिए भी प्रेरित करता है। आपको अपने कार्यक्षेत्र में लौटना ही है तो क्यों न किसी नए उद्देश्य को ध्यान में रख कर वापसी की जाए। फिर चाहे यह नयापन किसी नए करियर की ही नींव क्यों न रखे। इससे न केवल आप खुद से जुड़ी एक नई खोज कर पाएंगे, बल्कि एक नया परिदृश्य आपके सामने रूपांतरित होगा, जिसमें आप अपनी कुछ शर्तों को पूरा करने में सफल होंगे। मुमकिन है जब आप बाहर थे, तब इंडस्ट्री में कुछ व्यापक परिवर्तन आए हों; हो सकता है आपकी सोच-समझ के अनुसार इंडस्ट्री का नया रूप सामने आ चुका हो, इसलिए जरूरी है कि ब्रेक के दौरान कुछ नए हुनर भी सीख लें। अन्य जरूरी बातें:- विदेशों में करियर ब्रेक और विश्राम काल (सैबेटिकल) के बीच कुछ फर्क होता है। विश्राम काल से जुड़ी पॉलिसी किसी कंपनी में हो सकती है और वह अपेक्षाकृत अधिक औपचारिक होती है। इसके अंतर्गत, कर्मचारी मैनेजमेंट की रजामंदी से कुछ समय का ब्रेक लेता है, जिस दौरान आय और पेंशन के लिए कटने वाली राशि रोकी जा सकती है। विश्राम काल की अवधि कंपनी तय कर सकती है और इसकी जद में सीनियर मैनेजर्स या फुल-टाइम स्टाफ ही आता है। दरअसल यह सुविधा उन लोगों को मिलती है, जिन्हें लौट कर अपनी पुरानी जिम्मेदारी संभालनी हो। इस अवधि के दौरान व्यक्ति अपने करियर की दशा-दिशा को लेकर मनन कर सकता है। बेशक यह सुविधा सुनने में नई लगे, परंतु दुनिया में कई जगह इसका अभ्यास जारी है। क्या सोचते हैं एम्प्लॉयर्स:- करियर में ब्रेक लेने की जरूरत बेशक आपको महसूस हो रही हो, लेकिन इस बारे में कंपनी या मैनेजमेंट के भी कुछ विचार हो सकते हैं, इसलिए जरूरी है कि उन्हें भी जान लिया जाए। आपका ब्रेक लेना इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस इंडस्ट्री से जुड़े हैं। यदि ब्रेक के दौरान आप अपने ही पेशे से जुड़ा कोई प्रोजेक्ट निजी तौर पर करते हैं तो उसका जिक्र अपने रिज्यूमे में कर सकते हैं, जो तथ्य संभवतः आपको भविष्य में किसी अन्य स्थान पर नौकरी खोजने में सहायक बने। आपकी एग्जिट स्ट्रैटजी:- आपकी एग्जिट स्ट्रैटजी यानी ब्रेक पर जाने की तैयारी बॉस के साथ आपके रिश्तों पर बहुत निर्भर करती है। इस बारे में अपनी कंपनी के नियम-कायदों को भी जान लें। उदाहरण के लिए यदि आप आगे शिक्षा प्राप्ति की योजना बना रहे हैं तो हो सकता है कि कंपनी इसमें आपकी कुछ मदद भी कर सके; शिक्षा से जुड़े कुछ भत्ते आपको मिल सकते हैं। यदि इस विषय में कोई स्पष्ट पॉलिसी नहीं है तो भी आप वेतनरहित छुट्टी की बात कर सकते हैं। यदि ब्रेक से जुड़ी बात कंपनी के साथ नहीं बन पाती और आपको मजबूरन नौकरी को अलविदा भी कहना पड़ता है तो पूरे शिष्ट तरीके से इस प्रक्रिया पर अमल करें। याद रखें, यह दुनिया अगर कई मायनों में बड़ी है तो छोटी भी है, इसलिए आपके भावी अवसर आपके व्यवहार की बलि न चढ़ें, ब्रेक पर जाने से जुड़ा नोटिस पीरियड भी दें, आपके स्थान पर जो काम संभालेंगे उन्हें काम समझा दें, आवेदन पत्र में शिष्टता झलकनी चाहिए और उसे आप खुद प्रेषित करें और अंततः एग्जिट इंटरव्यू में प्रोफेशनल व्यवहार दिखाएं। नई शुरुआत:- यदि आप अपने सहकर्मियों को अंतिम विदा देने जा रहे हैं तो इस बदलाव के कुछ शुरुआती हफ्तों की एक स्पष्ट योजना आपके दिमाग में या लिखित रूप से हो। सामाजिकता अपनाएं और अकेलेपन को दूर रखें। नए स्थानों, अनुभवों और काम सीखने में व्यस्त रहें और साथ ही पुराने संबंधों को भी ताजा करते रहें। यदि रिटायरमेंट से पहले कोई व्यक्ति लंबे ब्रेक पर जाने की मंशा रखता है तो इस अवधि की सफलता का सारा दारोमदार उसके अपने व्यवहार और योजना पर निर्भर करता है। यदि वह सही दिशा में जा रहा है तो उसे सहयोग भी स्वतः ही मिलेगा। जानें ये बातें भी:- निश्चित तिथि और विमर्श:- ब्रेक पर जाने के कई अलग-अलग कारण भी हो सकते हैं। जरूरी यह है कि ब्रेक की शुरुआत एक निश्चित तिथि से हो, जल्दी ही या निकट भविष्य में जैसी अनिश्चितता विकल्प नहीं होती। यदि संभव हो तो अपने ब्रेक को जीवन के किसी महत्वपूर्ण उपलक्ष्य से जोड़ें। ऐसा … Read more

जरा कान की भी सुनिए

आजकल सुनने की क्षमता में कमी की समस्या तेजी से बढ़ रही है। एक शोध कहता है कि 20 से 40 आयु वर्ग के 80 प्रतिशत लोगों में यह समस्या मोबाइल फोन के ज्यादा उपयोग के कारण बढ़ रही है। इसके अलावा भी इस समस्या के अनेक कारण हैं, जो आपके कानों को परेशान करते हैं। आप अपने कानों का कैसे रख सकते हैं ख्याल… विज्ञान के विकास ने हमारी जीवनशैली को काफी बदल दिया है। मोबाइल और गाडियों के बढ़ते उपयोग से ध्वनि प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ गया है और उसी अनुपात में कानों की समस्याएं भी बढ़ी हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि कानों की समस्याएं युवाओं में तेजी से बढ़ रही हैं। आंकड़ों के मुताबिक भारत के 20-22 प्रतिशत लोग कान की किसी न किसी बीमारी के शिकार हैं। इनमें कानों में दर्द होना, धीमी आवाजें सुनाई न देना, कान में किसी तरह का दबाव महसूस होना, कान में सूजन आ जाना या कान से तरल पदार्थ का बहना प्रमुख हैं। इसके अलावा कानों की एक गंभीर समस्या और है कि जब बाहर कोई आवाज नहीं है, तब भी आवाज सुनाई देना या कानों में घंटी बजना। ये समस्याएं आपके एक या दोनों कानों में हो सकती हैं। ध्वनि प्रदूषण का स्वास्थ्य पर प्रभाव:- ध्वनि प्रदूषण का सबसे अधिक जाना-पहचाना नुकसान है सुनने की क्षमता प्रभावित होना या कुछ निश्चित आवाजों को सुनने में अक्षमता, लेकिन ध्वनि प्रदूषण के कुछ दूसरे प्रभाव भी हैं। -ब्लड प्रेशर, हृदय की धड़कनें और सांस की गति बढ़ जाना -पाचन तंत्र गड़बड़ा जाना -कुछ लोगों में शोर माइग्रेन के ट्रिगर का कार्य करता है -ध्यान केंद्रन की शक्ति कमजोर होना और इम्यून तंत्र का कमजोर हो जाना -शोर घावों के भरने और स्वस्थ होने की गति को भी धीमा कर देता है -शोर तनाव के स्तर को बढ़ाता है -कभी-कभी अत्यधिक तेज ध्वनि या वायु दाब में परिवर्तन से कान का पर्दा फट जाता है -अधिक शोर वाले स्थानों में रहने वाले लोगों का व्यवहार चिड़चिड़ा हो जाता है। ईयरफोन से दूरी जरूरी:- आजकल युवाओं में ईयरफोन या हेडफोन का बड़ा क्रेज है। इनके लगातार इस्तेमाल से सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। लंबे समय तक तेज ध्वनि सुनने से कान के पर्दे की मोटाई प्रभावित होती है। इससे सुनने की क्षमता प्रभावित होती है और धीमी आवाजें सुनाई नहीं देती हैं। इसके अलावा इससे याददाश्त और बोलने की क्षमता भी प्रभावित होती है। शोधों में यह बात सामने आई है कि यदि कोई व्यक्ति रोज एक घंटे से अधिक 80 डेसीबल्स से तेज वॉल्यूम में संगीत सुनता है तो उसे अगले पांच वर्षों में सुनने में कठिनाई हो सकती है या स्थाई रूप से बहरा हो सकता है। कान के पर्दे में छेद होना:- जानलेवा घटना जैसे विस्फोट या वाहन चलाते समय कोई दुर्घटना घटित होने से कान में अचानक तेज दर्द हो तो हो सकता है कि कान के पर्दे में छेद हो गया हो। अगर दुर्घटना के समय तेज दर्द हो और फिर सुनाई पड़ना बंद हो जाए तो समझिए की कान के मध्य भाग को नुकसान पहुंचा है। अगर कान के पर्दे में छोटा छेद है तो वह खुद ही भर जाता है, लेकिन अगर बड़ा छेद हो जाए तो सर्जरी की आवश्यकता होती है। स्विमिंग से संक्रमण:- देर तक पानी में रहने से कानों में पानी चला जाता है। इससे कानों में दर्द होना या तरल पदार्थ बहने की समस्या हो सकती है। बचाव के लिए ईयर प्लग का इस्तेमाल करें। हवाई यात्रा में बरतें सावधानी:- हवाई यात्रा के दौरान अक्सर लोगों को कान में दर्द की शिकायत होती है। यह समस्या प्लेन के लैंडिंग करते समय अधिक होती है। बचाव के लिए ईयर प्लग का इस्तेमाल करें। च्यूइंगम चबा कर भी बच सकते हैं। सावधानी से करें सफाई:- कान से मैल अपने आप न निकल पाने के कारण अंदर जमा होने लगता है। इस पर तेल, धूल, धुआं, कचरा आदि लगने के कारण यह कड़ा हो जाता है, जिसे निकालना बेहद जरूरी होता है। कुछ दवाओं की मदद से मैल को मुलायम करके उसे निकाला जाता है। शोर-शराबे से रहें दूर:- मशीनों, फैक्ट्रियों और खासतौर पर ऑटोमोबाइल से निकलने वाले शोर के कारण वातावरण में ध्वनि प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। इस शोर-शराबे का हमारे स्वास्थ्य पर दो तरह से प्रभाव होता है। प्राथमिक स्तर पर इससे हमारी सुनने की क्षमता प्रभावित होती है। दूसरे स्तर पर एंग्जाइटी और अनिद्रा की समस्या होती है। 20-40 वर्ष की आयु वर्ग के 80 प्रतिशत लोगों में सुनने की समस्या अत्यधिक मोबाइल फोन का उपयोग करने से होती है। हालांकि अभी इसका कोई डॉंक्टरी आधार नहीं है, लेकिन कई शोधों में मोबाइल से निकलने वाले रेडिएशंस को इसका सबसे प्रमुख कारण माना गया है। कानों को स्वस्थ रखने के टिप्स:- -अपने कानों को अत्यधिक सावधानी से साफ करें। कान में कोई नुकीली चीज न डालें। इससे ईयर कनैल या ईयरड्रम क्षतिग्रत हो सकता है। -ईयर वैक्स स्वयं ही कान की सफाई करता है। अगर यह अधिक मात्रा में एकत्र हो जाए और सुनने में दिक्कत हो तो डॉक्टर से संपर्क करें। -कान के संक्रमण से बचने के लिए गले और नाक के संक्रमण को गंभीरता से लें और तुरंत इलाज कराएं। -कई बीमारियां भी सुनने की क्षमता को प्रभावित करती हैं, इसलिए अगर कोई ऐसा लक्षण दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। -अगर कानों से मवाद बह रहा है तो इसे गंभीरता से लें और जितनी जल्दी हो सके डॉक्टर को दिखाएं। -कई दवाएं भी सुनने की क्षमता को प्रभावित करती हैं। अगर कानों में घंटी बजे या दूसरी आवाजें आएं तो इसे गंभीरता से लें। -अत्यधिक तेज आवाज में संगीत न सुनें। -बारिश में भी कई बार नमी के कारण कान की नली में संक्रमण हो जाता है, इससे बचने के लिए कान को सूखा रखें। -कान का मैल साफ करने के लिए नुकीली चीजों या ईयर बड का उपयोग न करें। -नहाने के तुरंत बाद कानों को अच्छी तरह साफ करके सुखाना चाहिए। -कान में कभी कोई तेल न डालें।  

बर्तन में छुपा सेहत का खजाना

सेहतमंद खाना पकाने के लिए आप तेल-मसालों पर तो पूरा ध्यान देती हैं, पर क्या आप खाना पकाने के लिए बर्तनों के चुनाव पर भी ध्यान देती हैं? अगर आपका जवाब न है तो आज से ही इस बात पर भी ध्यान देना शुरू कर दें। बर्तन कैसे आपको सेहतमंद बना सकते हैं… खाना पौष्टिक और सेहतमंद हो इसके लिए हम न जाने कितने जतन करते हैं। कम तेल इस्तेमाल से लेकर सब्जियों और दालों को सफाई से धोना, आटा साफ हाथ से गुनना, घर और किचन में साफ-सफाई का खास ख्याल रखना, भोजन की गुणवत्ता, ताजापन, सही मसालों का उपयोग और भी बहुत कुछ हमारी आदत में शुमार हो चुका है। लेकिन एक अहम चीज हम अकसर भूल जाते हैं और वह है हमारे बर्तन। जी हां, भोजन की पौष्टिकता में यह बात भी मायने रखती है कि आखिर उन्हें किस बर्तन में बनाया जा रहा है। आपको शायद मालूम न हो, लेकिन आप जिस धातु के बर्तन में खाना पकाते हैं उसके गुण भोजन में स्वतः ही आ जाते हैं। डाइटीशियन ईशी खोसला के मुताबिक भोजन पकाते समय बर्तनों का मैटीरियल भी खाने के साथ मिक्स हो जाता है। एल्यूमीनियम, तांबा, लोहा, स्टेनलेस स्टील और टेफलोन बर्तन में इस्तेमाल होने वाली आम सामग्री हैं। बेहतर है कि आप अपने घर के लिए कुकिंग मटेरियल चुनते समय कुछ जरूरी बातों का ख्याल रखें और इसके लिए आपको उन बर्तनों के फायदे नुकसान के बारे में जानकारी होना जरूरी है। कास्ट लोहे के बर्तन:- देखने और उठाने में भारी, महंगे और आसानी से न घिसने वाले ये बर्तन खाना पकाने के लिए सबसे सही पात्र माने जाते हैं। शोधकर्ताओं की माने तो लोहे के बर्तन में खाना बनाने से भोजन में आयरन जैसे जरूरी पोषक तत्व बढ़ जाते है। एल्यूमीनियम के बर्तन:- एल्यूमीनियम के बर्तन हल्के, मजबूत और गुड हीट कंडक्टर होते हैं। साथ ही इनकी कीमत भी ज्यादा नहीं होती। भारतीय रसोई में एल्यूमीनियम के बर्तन सबसे ज्यादा होते हैं। कुकर से लेकर कड़ाहियां आमतौर पर एल्यूमीनियम की ही बनी होती हैं। एल्यूमीनियम बहुत ही मुलायम और प्रतिक्रियाशील धातु होता है। इसलिए नमक या अम्लीय तत्वों के संपर्क में आते ही उसमें घुलने लगता है। खासकर टमाटर उबालने, इमली, सिरका या किसी अम्लीय भोजन के बनाने जैसे कि सांभर आदि के मामले में यह ज्यादा होता है। इससे खाने का स्वाद भी प्रभावित होता है। खाने में एल्यूमीनियम होना गंभीर चिंता का विषय है। यह खाने से आयरन और कैल्शियम तत्वों को सोख लेता है। यानी यदि पेट में गया तो शरीर से आयरन और कैल्शियम सोखना शुरू कर देता है। इससे हड्डियां कमजोर हो सकती हैं। कुछ अल्जाइमर (याद्दाश्त की बीमारी) के मामलों में मस्तिष्क के उत्तकों में भी एल्यूमीनियम के अर्क पाए गए हैं। जिससे यह तो स्पष्ट है कि एल्यूमीनियम के तत्व मानसिक बीमारियों के संभावित कारण भी हो सकते हैं। शरीर में एल्यूमीनियम की मात्रा अधिक हो जाए, तो टीबी और किडनी फेल होने का सबब बन सकता है। यह हमारे लिवर और नर्वस सिस्टम के लिए भी फायदेमंद नहीं होता। शोधकर्ताओं की मानें तो एल्यूमीनियम के बर्तन में चाय, टमाटर प्यूरी, सांभर और चटनी आदि बनाने से बचना चाहिए। इन बर्तनों में खाना जितनी देर तक रहेगा, उसके रसायन भोजन में उतने ही ज्यादा घुलेंगे। तांबा और पीतल के बर्तन:- कॉपर और पीतल के बर्तन हीट के गुड कंडक्टर होते हैं। इनका इस्तेमाल पुराने जमाने में ज्यादा होता था। ये एसिड और सॉल्ट के साथ प्रक्रिया करते हैं। नेशनल इंस्टीटय़ूट आफ हेल्थ के अनुसार खाने में मौजूद ऑर्गेनिक एसिड, बर्तनों के साथ प्रतिक्रिया करके ज्यादा कॉपर पैदा कर सकता है, जो शरीर के लिए नुकसानदेह होता है। इससे फूड प्वॉयजनिंग भी हो सकती है। इसलिए इनकी टिन से कोटिंग जरूरी है। जिसे कलई भी कहते हैं। स्टेनलेस स्टील बर्तन:- स्टेनलेस स्टील के बर्तन अच्छे, सुरक्षित और किफायती विकल्प हैं। इन्हें साफ करना भी बहुत आसान है। स्टेनलेस स्टील एक मिश्रित धातु है, जो लोहे में कार्बन, क्रोमियम और निकल मिलाकर बनाई जाती है। इस धातु में न तो लोहे की तरह जंग लगता है और न ही पीतल की तरह यह अम्ल आदि से प्रतिक्रिया करती है। इसकी सिर्फ एक कमी है कि इससे बने बर्तन जल्द गर्म हो जाते हैं। इसलिए इन्हें खरीदते वक्त ऐसे बर्तन चुनें जिनके नीचे कॉपर की लेयर लगी हो। लेकिन इसे साफ करते समय सावधानी बरती जानी चाहिए क्योंकि इसकी सतह पर खरोंच आने से क्रोमियम और निकल निकलता है। नॉन-स्टिक बर्तन:- नॉन-स्टिक बर्तनों की सबसे खास बात यह है कि इनमें तेल की बहुत कम मात्रा या न डालो तो भी खाना पढिया पकता है। नॉन-स्टिकी होने की वजह से इनमें खाना चिपकता भी नहीं। लेकिन नॉन-स्टिक बर्तनों को बहुत ज्यादा गर्म करने या इनकी सतह पर खरोंच आने से कुछ खतरनाक रसायन निकलते हैं। इसलिए विशेषज्ञ हमेशा इन बर्तनों को बहुत ज्यादा गर्म करने या जलते गैस पर छोड़ने की सलाह नहीं देते हैं।  

पुराने डिवाइस और ऑपरेटिंग सिस्टम में सपोर्ट करना कर देगा बंद

नई दिल्ली वाट्सऐप अक्सर पुराने डिवाइस और ऑपरेटिंग सिस्टम को एक समय के बाद सपोर्ट करना बंद कर देता है. ऐसा इसलिए ताकि नए फीचर्स, एडवांस आर्किटेक्चर और सिक्योरिटी फीचर के साथ प्लेटफॉर्म को डेवलप किया जा सके. वॉट्सऐप अपने कस्टमर्स की सुविधा के लिए हर किसी ना किसी अपडेट पर काम करता ही रहता है. एडवांस फीचर्स और सिक्योरिटी कंसर्न के चलते अब वाट्सऐप साल 2025 से कुछ पुराने आईफोन मॉडल में सपोर्ट बंद करने वाला है. वॉट्सऐप ने पुराने iOS वर्जन को यूज करने वाले यूजर्स को सपोर्ट बंद करने का नोटिफिकेशन भेजना शुरू कर दिया है. जिन आईफोन में पुराना ऑपरेटिंग सिस्टम है, उसमें आने वाले साल में वाट्सऐप का सपोर्ट बंद हो जाएगा. लिस्ट में ये फोन हैं शामिल अगर हम बात करें कि आखिर वो कौन से आईफोन मॉडल्स हैं जिनमें वॉट्सऐप सपोर्ट बंद हो जाएगा तो उस लिस्ट में ये फोन शामिल हैं. नोटिफिकेशन के हिसाब से, इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप वॉट्सऐप आईओएस 15 से पहले के वर्जन के लिए सपोर्ट बंद कर देगा. इसका मतलब है कि जिन लोगों के पास आईओएस 15 या उससे पुराने वर्जन के आईफोन मॉडल है तो वो वॉट्सऐप का इस्तेमाल नहीं कर पाएगा. ध्यान दें कि ये लोग इस साल तो वॉट्सऐप को चला सकते हैं लेकिन आने वाले साल 5 मई, 2025 के बाद ये सपोर्ट बंद हो जाएगा. 5 मई से छिन जाएगा वॉट्सऐप वॉट्सऐप केवल आईओएस 12 या इससे नए वर्जन को सपोर्ट करता है. लेकिन अगले साल 5 मई से प्लेटफॉर्म केवल आईओएस 15.1 या इससे नए वर्जन वाले आईफोन को ही सपोर्ट करेगा. क्या कर सकते हैं? वैसे तो पुराने सॉफ्टवेयर वाले आईफोन मॉडल्स का कुछ नहीं किया जा सकता है, लेकिन अगर आपका फोन को सॉफ्टवेयर अपेडट मिली हुई है तो आप उसे अपडेट जरूर करें. इसे आप ऐसे समझें- अगर आपका फोन iOS 15.1 को सपोर्ट करता है और अब भी आप पुराने iOS 15 या उससे पुराने वर्जन को यूज कर रहे हैं, तो इसे तुरंत अपडेट कर लें. ये करने के बाद आप 5 मई 2025 के बाद भी वॉट्सऐप की सर्विसेज यूज कर सकेंगे.  

चेहरे से दाग-धब्बे और पिंपल्स गायब करेगी ये रेमेडी

हर लड़की चाहती है कि उसके चेहरे से दाग-धब्बे और पिंपल्स गायब हो जाएं और त्वचा बहुत ही साफ और खूबसूरत हो जाए। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके लिए महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट का इस्तेमाल करना जरूरी नहीं है, बल्कि आप अपने घर पर ही मौजूद कुछ चीजों से हर तरह की स्किन प्रॉब्लम को दूर कर सकते हैं। आइए जानते हैं इन दोनों घरेलु नुस्खों को बनाने का तरीका कई उपायों को आजमाने के बाद इन दो आसान और नेचुरल DIY मास्क ने मेरी स्किन के लिए बेहतरीन काम किया है। दोनों ही उन सामग्रियों से बने हैं जो आप अपनी रसोई में मिल सकते हैं और मुंहासों को शांत करने, लालिमा को कम करने और निशानों को कम करने के लिए बिल्कुल सही हैं। एलोवेरा को चम्मच से घिसकर बनाया फेस मास्क पहली रेमेडी एलोवेरा की है जिसे बनाना तो आसान है ही साथ ही इस्तेमाल करना भी आसान है। वहीं अगर हम फायदों की बात करें तो ये आपके चेहरे से दाग-धब्बों और एक्ने की समस्या को कम करने में मदद करेगी। इस नुस्खे को बनाने के लिए आपको इन चीजों की जरूरत है-     एलोवेरा जेल- 2 चम्मच     चावल का आटा- 1 चम्मच ऐसे तैयार करें फेस पैक     सबसे पहले सिमोन ने एलोवेरा का एक पत्ता लिया है और उसे चम्मच की मदद से घिस कर जेल निकाला है।     आप भी इसी तरह फ्रेश एलोवेरा जेल बना लें। अगर आपके घर में एलोवेरा का पौधा नहीं है तो मार्केट से एलोवेरा जेल खरीद लें।     इसके बाद 2 चम्मच एलोवेरा में 1 चम्मच चावल का आटा डालकर अच्छे से फेंट लें और फिर चेहरे पर लगा लें।     फेस मास्क को 10-15 मिनट तक चेहरे पर सूखने के लिए छोड़ दें और जब समय पूरा हो जाए तो नॉर्मल पानी से फेस वॉश कर लें।     ये नुस्खा आपके चेहरे से एक्ने को दूर करने का काम करेगा और स्किन को क्लीयर बनाएगा।​ पीसी हुए असली से बनाएं फेस मास्क वैसे तो अलसी के बीजों का इस्तेमाल खाने के लिए किया जाता है, लेकिन हाल ही में इसे चेहरे पर लगाने का ट्रेंड बढ़ा है और तरह-तरह के फेस पैक और मास्क की रेमेडी पॉपुलर हुई हैं। सिमोन कथुरिया ने भी फ्लैक्स सीड्स से फेस पैक बनाने का तरीका बताया है, जिसके लिए इन चीजों की जरूरत है-     पानी- 1 गिलास     अलसी के बीज- 2-3 चम्मच     चावल का आटा- 2 चम्मच     दही- 1 चम्मच ऐसे तैयार करें अलसी फेस पैक     सबसे पहले आप एक पैन लें और उसमें पानी डालकर हल्की आंच में उबाल लें।     अब अलसी के बीज को मिक्सी में पीसकर पाउडर तैयार कर लें और फिर इसे पानी में डाल दें।     इसे अच्छे से पकाने के बाद पैन में चावल का आटा मिक्स कर लें और इसे तब तक पकाए जब तक की गायब हो जाए।     जब पेस्ट गाढ़ा हो जाए तो इसे एक कटोरी में डाल दें और ठंडा होने के लिए रख दें।     पेस्ट में एक चम्मच दही डालकर अच्छे से मिक्स कर लें। लीजिए तैयार है आपके चेहरे से एक्ने दूर भगाने वाला फेस मास्क।     अब आप इसे अपने चेहरे पर 15 मिनट तक लगाए रखने के बाद नॉर्मल पानी से फेस वॉश कर लें।​

ये 3 सेटिंग करें ऑन नहीं होगा डेटा लीक

नई दिल्ली जब भी नया फोन लेते हैं तो उसमें पुराने फोन का डेटा डाल लेते हैं. लेकिन डेटा ट्रांसफर करने के प्रोसेस में एक टेंशन हमेशा रहती है कि कहीं डेटा लीक तो नहीं हो जाएगा? इस प्रोसेस में थर्ड पार्टी ऐप्लिकेशन की मदद ली जाती है जिसमें डेटा लीक के चांस हमेशा बने रहते हैं. ऐसे में हम आपको 3 ऐसी सेटिंग के बारे में बताएंग जिन्हें फॉलो करके डेटा लीक के चांस कम हो जाते हैं. इससे आपका पर्सनल डेटा भी सेफ रहता है और आपका काम भी हो जाता है. इसमें नए फोन में फाइल, फोटो, वीडियो शेयरिंग से लेकर नए ऐप्लिकेशन इंस्टॉल करने और सिस्टम अपडेट करने से पहले की सेटिंग बताई गई हैं. इन सेटिंग को पहले ही करले ताकि आप डेटा लीक की टेंशन से बच जाएं. ये तीन सेटिंग हैं जरूरी इसके लिए जब भी कोई फाइल, फोटो या वीडियो शेयर या रिसीव करें तो क्विक शेयर में जाना है, इसमें बाई डिफॉल्ट कॉन्टैक्ट्स सलेक्ट होता है, इसे हटाकर योर डिवाइस का ऑप्शन सलेक्ट करें. अगर कोई फाइल रिसीव करनी है तो एव्रीवन पर टिक करें. नए फोन में ऐप इंस्टॉल करने से पहले करें सेटिंग अब नया फोन लिया है तो उसमें ऐप्स की भी जरूरत पड़ेगी, तो नए ऐप्स इंस्टॉल कपने से पहले सेटिंग में जाएं. सेटिंग में सर्चबार में अननोन लिख कर सर्च करें, अननोन पर क्लिक करने के बाद नीचे स्क्रॉल करें और इंस्टॉल अननोन ऐप्स पर जाएं. यहां पर लिस्ट में आपको क्रोम, ड्राइव, फाइल्स, जीमेल और वॉट्सऐप शो होंगे इन सब को नॉट अलाउड करें. टाइम टू टाइम सिस्टम अपडेट ऊपर बताए गए स्टेप्स के बाद आपका फोन सेटअप हो जाएगा. आखिरी में आपको फोन की सेटिंग में जाना है और अपडेट लिख कर सर्च करना है. आपके सामने सिस्टम अपडेट का ऑप्शन दिख जाएगा इस पर क्लिक करें. इससे टाइम टू टाइम सिस्टम अपेडट होता रहेगा.  

जानिए अक्सर क्यों महसूस होती है उदासी और डिप्रेशन

ज्यादातर लोगों को अक्सर डिप्रेशन या उदासी महसूस होती है। लेकिन क्या आपको पता है कि आखिर ऐसा क्यों होता है? अगर नहीं, तो आइए जानते हैं ऐसा महसूस होने की वजह। कई बार बेवजह उदासी और डिप्रेशन महसूस हो सकता है। जब भी किसी व्यक्ति को ये भावना आती है तो कई तरह की चीजें आपको महसूस हो सकती हैं। इस स्थिति में अपसेट रहने के साथ-साथ भूख में कमी और थकान भी हो सकती है। जब भी कभी ऐसा महसूस होता है तो सबसे पहले यही बात ध्यान में आती है कि आखिए ऐसा क्यों महसूस हो रहा है। अगर आपको भी अक्सर उदास और डिप्रेस महसूस होता है तो जानिए आखिर ऐसा होने की वजह। नींद की कमी अच्छा महसूस करने के लिए नींद जरूरी है और नींद की कमी से चिंता, हताशा और गुस्से की भावनाओं का अनुभव हो सकता है। लगातार नींद की कमी दिमाग की एक्टिविटीज को बदल सकता है। जिसकी वजह से फीलिंग्स को नियंत्रित करने और समस्याओं से निपटना मुश्किल हो सकता है। ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव गलत खान-पान और मीठे या पैकेज खाने को खाने से ज्यादा कैलोरी के कारण अस्थिर ब्लड शुगर का लेवल मूड को प्रभावित कर सकता है। इसलिए मिक्स कार्बोहाइड्रेट, लीन प्रोटीन और हेल्दी फैट वाले बेलेंस खाने और स्नैक्स को खाना चाहिए। ऐसा करे आप ब्लड शुगर के लेवल को स्थिर बनाए रखने में मदद करता है। साथ ही एनर्जी लेवल को नुकसान पहुंचाने से रोकता है। जिससे चिड़चिड़ापन, खराब मूड और यहां तक ​​कि डिप्रेशन की फीलिंग हो सकती है। मौसमी बदलाव जैसे-जैसे दिन छोटे होते जाते हैं, तापमान गिरता जाता है और ठंड हो जाती है तो मौसम में बदलाव से उदासी, चिड़चिड़ापन और सुस्ती की भावनाएं हो सकती हैं। बदलते मौसम में इस तरह का डिप्रेशन महसूस हो सकता है, जो सर्दी के मौसम में अक्सर लोगों को महसूस हो सकता है। फैमिली और सोशल वातावरण कुछ लोगों के लिए निगेटिव, तनावपूर्ण या दुखी पारिवारिक जीवन डिप्रेशन का कारण बन सकता है। अपनों के साथ खाना शेयर करना, समय बिताना, पॉजिटिव रिलेशन रखने की प्रेक्टिस करने से जुड़ाव और भावनात्मक संतुष्टि की भावना महसूस हो सकती है।

Apple का नया OS Update आने के बाद यूजर्स को आ रही बैटरी की शिकायत

नई दिल्ली Apple का नया OS Update आने के बाद कई फैसले लिए जा रहे हैं। iOS 18 अपडेट के बाद बैटरी-ड्रेनिंग की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। iPhone 16 और iPhone 16 Pro यूजर्स को इस समस्या का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें बैटरी लाइफ कम मिल रही है। इसको लेकर ऑनलाइन शिकायत आ रही है। iPhone 16 यूजर्स के साथ बैटरी ड्रेन की समस्या आ रही है। iOS 18 अपडेट करने के बाद ये समस्या देखी जा रही है। Beta फेज़ में ये समस्या देखी गई है। सॉफ्टवेयर के पब्लिक रिलीज के बाद ऐसा देखा गया है। कम यूज़ के बाद भी कमजोरी हो रही बैटरी यूजर्स ने देखा कि यूजर्स को बैटरी की समस्या हो रही है। कई मौकों पर देखा गया कि कम यूज के बाद भी बैटरी तेजी से कम हो रही है। Reddit पर लोगों ने इस समस्या की शिकायत की है। एक यूजर ने बताया, ’45 मिनट से कम स्क्रीन टाइम और ढाई घंटे म्यूजिक सुनने के बाद बैटरी 68 प्रतिशत तक नीचे गिर गई।’ एक अन्य यूजर का कहना है, ‘iPhone 14 के मुकाबले iPhone 16 की बैटरी तेजी से गिर रही है। इस दौरान iPhone 14 की बैटरी 78 प्रतिशत थी जबकि iPhone 16 की कम होकर 45 प्रतिशत हो गई है।’ हर कोई इस समस्या का सामना नहीं कर रहा है। कई यूजर्स ने कहा कि उनका स्मार्टफोन ठीक काम कर रहा है और अच्छे तरीके से चल रहा है। इन यूजर्स को कहना है कि iOS 18.1 beta अपडेट करने के बाद उन्हें कोई समस्या नहीं हो रही है। बैटरी ड्रेन एक नॉर्मल समस्या है जो यूजर्स फेस कर रहे हैं। ऐपल की तरफ से पहले भी इन समस्याओं का निपटारा किया गया है। कंपनी का कहना है कि वह इस समस्या से निपटने के लिए काम कर रही है। परफॉर्मेंस को बेहतर बनाने के लिए नया अपडेट जारी किया जा सकता है। कैसे करें बैटरी चेक iPhone में Battery Health चेक करने का ऑप्शन भी दिया जाता है। इसमें आप ये देख सकते हैं कि फोन की बैटरी हेल्थ कितनी है। आपको सबसे पहले सेटिंग्स में जाना होता है। उसके बाद आपको बैटरी का ऑप्शन नजर आएगा, इसमें जाने के बाद आपको बैटरी हेल्थ में जाना होगा। यहां जाने के बाद आपको बैटरी हेल्थ नजर आएगी। इसकी मदद से आप iPhone की बैटरी का अंदाजा लगा सकते हैं।

बच्चों से चाहते हैं बुढ़ापे में प्यार और सम्मान तो छोड़ दें ये आदतें

बच्चों की परवरिश में कई बार पैरेंट्स ऐसी गलतियां करते हैं। जिनका पता उन्हें तब होता है जब वो बिल्कुल बूढ़े और असहाय हो जाते हैं। यानि बच्चा जब बड़ा हो जाता है। बच्चे के मन में खुद के लिए हमेशा रिस्पेक्ट और प्यार बनाकर रखना चाहते हैं तो अपनी इन आदतों को आज से ही अलविदा कह दें। जिससे बच्चे बड़े होने के बाद भी आप से प्यार करते रहें और सम्मान दें। ना दें हमेशा लेक्चर काफी सारे पैरेंट्स की आदत होती है कि अपने बच्चों को हर छोटी-बड़ी बात पर लेक्चर देना शुरू कर देते हैं। बच्चों को कभी भी समझने की कोशिश नहीं करते और ना ही बच्चों की बातों को समझना जरूरी समझते हैं। पैरेंट्स की ऐसी हरकतें बच्चों के मन पर बुरा असर डालती हैं और वो पैरेंट्स से हमेशा दूरी बनाकर रखते हैं। जिससे बुढ़ापे में भी उनका साथ नहीं देते। खुद की गलती को ना मानना पैरेंट्स भी इंसान होते हैं और उनसे भी गलती हो सकती है। लेकिन अपने बच्चों के सामने अगर आप कभी भी अपनी गलती को एक्सेप्ट नहीं करते। अगर आप बच्चों के सामने अपनी गलती को एक्सेप्ट करते हैं तो इससे बच्चों के मन में पैरेंट्स के लिए प्यार और सम्मान का अलग लेवल देखने को मिलता है। दूसरों के साथ कंपेयर पैरेंटिंग में ये बात हमेशा सिखाई जाती है कि बच्चों की तुलना दूसरे बच्चे फिर चाहे खुद के हो या फिर पड़ोसी के, कभी ना करें। हर बच्चा यूनिक होता है और उसके पास अलग खूबी होती है। बच्चे की तुलना दूसरे से करना ना केवल कॉन्फिडेंस लेवल को हिला देता है बल्कि इससे बच्चे पैरेंट्स के प्रति निगेटिव सोचना शुरू कर देते हैं। रूल्स ना तोड़े बच्चों के लिए रूल्स तो सभी बनाते हैं लेकिन उन रूल्स को फॉलो करवाना टास्क होता है। अपने बच्चों से सेट बाउंड्री के आगे बढ़ना और रूल्स ना तोड़ने का एक्जाम्पल सेट करें। जिससे वो अपने रूल्स को फॉलो करने के लिए ज्यादा सीरियस हों। आपकी ये कुछ आदतें बच्चों के मन में पैरेंट्स के लिए रिस्पेक्ट लाती हैं। बच्चों से जो कहें वो खुद भी करें अगर आप बच्चों को अच्छी बातें, आदतें सिखा रहे हैं तो उन्हें वो करके दिखाएं। बच्चे वहीं सीखते हैं जो पैरेंट्स को करते देखते हैं। अगर आप खुद हेल्दी फूड नहीं खाते और एक्सरसाइज नहीं करते तो बच्चे को हेल्दी रहने के लिए नहीं बोल पाएंगे। ठीक यहीं बात लाइफ के रूल्स पर भी लागू होती है। बच्चों से रिस्पेक्ट चाहिए तो केवल बोलें नहीं बल्कि करके दिखाएं।

जल्द भारत में लॉन्च होगा वनप्लस का नया स्मार्टफोन OnePlus 13R

नई दिल्ली वनप्लस का नया स्मार्टफोन OnePlus 13R जल्द भारत में लॉन्च हो सकता है। यह अपकमिंग स्मार्टफोन OnePlus 12R का अपडेटेड मॉडल होगा, जिसे इस साल भारत में लॉन्च किया जा सकता है। हालांकि फोन को कब लॉन्च किया जाएगा? इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। फोन को लॉन्च से पहले कई बेंचमार्क वेबसाइट पर स्पॉट किया गया है। कंपनी ने फ्लैगशिप OnePlus 13 स्मार्टफोन को पहले ही चीन में लॉन्च कर दिया गया है। हैंडसेट को ग्लोबल मार्केट में अपकमिंग माह में पेश किया जा सकता है। OnePlus 13R के संभावित स्पेसिफिकेशन्स वनप्लस के नए हैंडसेट को मॉडल नंबर OnePlus CPH2645 के साथ लिस्ट किया गया है। स्मार्टफोन को भारत में वनप्लस 13R के नाम से पेश किया जा सकता है। हालांकि फोन के नाम को लेकर कोई कंफर्मेशन मौजूद नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में दो स्मार्टफोन को लॉन्च किया जा सकता है। इसमें एक फ्लैगशिप और दूसरा अफोर्डेबल मॉडल हो सकता है। अगर स्पेसिफिकेशन्स की बात करें, तो OnePlus 13R स्मार्टफोन को Snapdragon 8 Gen 3 चिपसेट के साथ पेश किया जा सकता है। यह वही चिपसेट है, जिसे मौजूदा वक्त में OnePlus 12 मॉडल में दिया जा रहा है। 12 जीबी रैम सपोर्ट के साथ आएगा फोन Geekbench लिस्टिंग के मुताबिक OnePlus 13R स्मार्टफोन में 12GB रैम सपोर्ट दिया जा सकता है। फोन को एंड्रॉइड 15 सपोर्ट OxygenOS 15 स्किन सपोर्ट दिया जा सकता है। अगर परफॉर्मेंस की बात की जाए, तो OnePlus 13R स्मार्टफोन सिंगल-कोर टेस्ट में 2,238 प्वाइंट और मल्टीकोर टेस्ट में 6,761 प्वाइंट स्कोर दिया जा सकता है। OnePlus 12R के स्पेसिफिकेशन्स OnePlus 12R स्मार्टफोन में 6.78 इंच की डिस्प्ले दी गई है। फोन 2780×1264 पिक्सल रेजोल्यूशन के साथ आता है। अगर प्रोसेसर की बात करें, तो फोन में स्नैपड्रैगन 8 जेन 2 चिपसेट दिया गया है। फोन में 16MP का फ्रंट कैमरा मिलता है। साथ ही फोन में ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप दिया गया है। इसका प्राइमरी कैमरा 50MP का होगा। साथ ही 8MP और 2MP कैमरा सेंसर मिलता है। फोन 8 जीबी रैम और 128 जीबी स्टोरेज दिया गया है। फोन में पावर बैकअप के लिए 5500mAh बैटरी दी गई है। फोन एंड्रॉइड 14 बेस्ड ऑपरेटिंग सिस्टम पर काम करता है।

प्रोफेशनल मेकअप आर्टिस्ट बन सकते हैं आप, अच्छे है करियर स्कोप

दुनिया में शायद ही ऐसी कोई महिला हो जो बिना मेकअप के घर से बाहर जाना पसंद करती हो, फिर चाहे बात ऑफिस की हो, गेट टू गेदर या फिर किसी पार्टी की। इतना ही नहीं, टेलीविजन से लेकर फिल्म इंडस्ट्री, एड वर्ल्ड व फैशन इंडस्ट्री में भी बिना मेकअप के आपको कोई चेहरा नजर नहीं आता। जहां पिछले कुछ समय तक सिर्फ महिलाएं ही मेकअप किया करती थीं, वहीं अब पुरूष भी मेकअप करने में पीछे नहीं हैं। इन सभी स्टार्स को खूबसूरत बनाने का काम करते हैं मेकअप आर्टिस्ट। मेकअप आर्टिस्ट ही वह व्यक्ति होता है जो किसी भी आर्टिस्ट को उसके किरदार में ढालने में एक अहम भूमिका निभाता है। अगर आप भी खुद को और दूसरों को खूबसूरत बनाने में रूचि रखते हैं तो बतौर मेकअप आर्टिस्ट अपना भविष्य देख सकते हैं… कार्यक्षेत्र एक मेकअप आर्टिस्ट का कार्यक्षेत्र काफी विस्तृत होता है। अगर आप समझते हैं कि मेकअप आर्टिस्ट का काम सिर्फ मेकअप करने तक सीमित है तो आप गलत हैं। एक मेकअप आर्टिस्ट के काम की शुरूआत सबसे पहले अपनी क्लाइंट की स्किन को समझने से शुरू होती है ताकि वह उसे सही और बेस्ट सर्विसेज दे सके। इसके बाद आपको क्लाइंट की डिमांड को ध्यान में रखकर उनकी खूबसूरती में इजाफा करना होता है। अगर आप टीवी या फिल्म इंडस्ट्री में किसी कलाकार का मेकअप कर रहे हैं तो आपको पहले किरदार को ध्यान में रखना होता है। इतना ही नहीं, एक मेकअप आर्टिस्ट को तय समय में अपना काम पूरा करना होता है। जो आर्टिस्ट डेडलाइन्स पूरी नहीं कर पाते, उनसे कोई भी सर्विस लेना पसंद नहीं करता।   स्किल्स इस क्षेत्र में आपका क्रिएटिव माइंड होना बेहद आवश्यक है ताकि आप अपने क्लाइंट की पर्सनैलिटी के अनुरूप मेकअप कर पाएं। हर चेहरा एक जैसा नहीं होता। इतना ही नहीं, जो व्यक्ति क्लाइंट की डिमांड और मौके के हिसाब से परफेक्ट मेकअप कर पाने में सक्षम होता है, उसे इस क्षेत्र में सफल होने से कोई नहीं रोक सकता। साथ ही एक मेकअप आर्टिस्ट को हर स्टाइल और गेटअप के बारे में भी जानकारी होनी चाहिए। इसके लिए आपको लेटेस्ट मेकअप ट्रेंड के बारे में हमेशा रिसर्च करती रहनी चाहिए। साथ ही मेकअप को लेकर हो रहे प्रयोगों पर भी आपको पैनी नजर रखनी चाहिए ताकि आप अपने काम में भी उसे शामिल कर सकें। इतना ही नहीं, उसे अपने टूल्स, प्रॉडक्टस व उन्हें इस्तेमाल करने के बारे में भी सही तरह से पता होना चाहिए। एक मेकअप आर्टिस्ट को पब्लिक डील भी करना होता है, इसलिए आपका कम्यूनिकेशन लेवल भी बढ़िया होना चाहिए। आपकी रचनात्मकता के साथ−साथ आपके कम्युनिकेशन स्किल आपको आगे ले जाने में अहम भूमिका निभाते हैं। वहीं आपको लंबे समय तक बिना थके काम करना, धैर्य व टीम के साथ काम करना भी आना चाहिए।   योग्यता इस क्षेत्र में कदम रखने के लिए आपको मेकअप की बारीकियों के बारे में पता होना चाहिए। जिसके लिए आप इस विषय में डिप्लोमा या सर्टिफिकेट कोर्स कर सकते हैं। इस क्षेत्र में डिप्लोमा कोर्स करने के लिए आपका दसवीं या बारहवीं पास होना ही पर्याप्त है।   यहां मिलेंगे मौके एक मेकअप आर्टिस्ट के पास काम की कभी भी कमी नहीं होती। आप चाहें तो किसी मेकअप स्टूडियो में जॉब कर सकते हैं या फिर खुद का पार्लर भी चला सकते हैं। अगर आप खुद का बिजनेस शुरू नहीं कर सकते तो बतौर फ्रीलासंर भी विभिन्न क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे सकते है। इसके अतिरिक्त टीवी इंडस्ट्री से लेकर फिल्म, एड कंपनियों आदि में संपर्क करके वहां पर भी काम की तलाश कर सकते हैं। इस क्षेत्र में काम और कमाई की कोई सीमा नहीं है, बशर्ते आप अपने काम में माहिर हों।   मिलेगी इतनी आमदनी इस इंडस्ट्री में आपकी आमदनी आपके अनुभव और वर्कप्लेस पर निर्भर करती है। उदाहरण के तौर पर अगर आप किसी बड़े कलाकार के पर्सनल मेकअप आर्टिस्ट के रूप में काम करते हैं, तो फिर आपकी सैलरी लाखों में हो सकती है। वहीं जो लोग खुद का मेकअप स्टूडियो खोलते हैं, उनकी आमदनी भी उस स्टूडियो के चलने के ऊपर निर्भर करती है। फिर भी अनुभव और लोगों की तारीफ बटोरने के बाद आप इस क्षेत्र में काफी अच्छी कमाई कर सकते हैं।   प्रमुख संस्थान पर्ल अकादमी, विभिन्न केन्द्र लैक्मे ट्रेनिंग अकादमी, दिल्ली ओरेन ब्यूटी अकादमी, विभिन्न केन्द्र ऑरा ब्यूटी अकादमी, पंजाब हेजल इंटरनेशनल इंस्टीटयूट ऑफ ब्यूटी एंड वेलनेस, पंजाब  

वॉट्सऐप की तरफ से जल्द आ रहा QR कोड स्कैनर फीचर

नई दिल्ली वॉट्सऐप की तरफ से एक नए फीचर की टेस्टिंग की जा रही है। यह एक क्यूआर कोड बेस्ड फीचर है, जिसे स्कैन करके सीधे किसी चैनल को देखा जा सकेगा। साथ ही उसे ज्वाइन किया जा सकेगा। मतलब आपको किसी चैनल को सर्च करने की जरूरत नहीं है। फिलहाल यह फीचर टेस्टिंग फेज में है। सीधे ज्वाइन कर पाएंगे वॉट्सऐप चैनल वॉट्सऐप के इस अपकमिंग फीचर की मदद से यूजर आसानी से चैनल सर्च कर पाएंगे। साथ ही नए चैनल को फॉलो कर पाएंगे। मौजूदा वक्त में किसी चैनल को ज्वाइन करने के लिए उसे सर्च करना पड़ता है। बीटा वर्जन में मौजूद है फीचर WABetaInfo की हालिया रिपोर्ट की मानें, तो नया फीचर उन यूजर के लिए उपलब्ध है, जो एंड्रॉइड और आईओएस का लेटेस्ट वॉट्सऐप बीटा वर्जन इस्तेमाल कर रहे हैं। कैसे काम करेगा नया फीचर इस नए फीचर में क्यूआर कोड इमेज फॉर्मेट में होगा, जिसे फोन के कैमरे से स्कैन किया जा सकेगा। इसके बाद फोन का कैमरा यूजर को वॉट्सऐप चैनल पर रिडायरेक्ट कर देगा। इसकी मदद से चैनल को देख पाएंगे। साथ ही उसे ज्वाइन भी कर पाएंगे। कैसे एक्सेस कर पाएंगे क्यूआर कोड चैनल क्यूआर कोड चैनल को एक्सेस करने के लिए यूजर को चैनल पर नेविगेट करना होगा। इसके बाद चैनल के टॉप राइट कॉर्नर में थ्री वर्टिकल डॉट बटन दिखेंगे। यहां आपको क्यूआर कोड डिस्प्ले और जनरेट का ऑप्शन दिखेगा, जो आपके लिए चैनल शार्टकट का काम करेगा। इससे पहले तक चैनल को शेयर करना होता था। इसके लिए चैट पर लिंक को कॉपी पेस्ट करना होता था। बिजनेस के लिए होगा फायदेमंद नया क्यूआर कोड बेस्ड फीचर खासतौर पर बिजनेस यूजर के लिए बेहद फायदेमंद रहने वाला है, क्योंकि बिजनेस यूजर यूपीआई क्यूआर कोड की तरह अपने चैलन का क्यूआर कोड लगाकर सीधे चैनल तक एक्सेस हासिल कर लेंगे। इसके लिए क्यूआर कोड को प्रिंट करने लगाना होगा। वॉट्सऐप की ओर से लगातार नए-नए फीचर को यूजर्स की सुविधा के लिए रोलआउट किया जाता है, जिससे रोलआउट करने से पहले बीटा वर्जन में कुछ यूजर्स को उपलब्ध कराकर टेस्ट किया जाता है, जिसके बाद इसे बाकी यूजर के लिए रोलआउट कर दिया जाता है।

अक्टूबर के फेस्टिवल सीजन के दौरान भारत में जमकर हुई UPI पमेंट

नई दिल्ली भारत में अक्टूबर के फेस्टिवल सीजन के दौरान जमकर ऑलाइन पेमेंट किया गया है। यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस यानी UPI ने अक्टूबर 2024 में 10 बिलियन से ज्यादा लेनदेन का आंकड़ा पार कर लिया है। इस माह में पिछले साल के मुकाबले 53 फीसद ज्यादा ऑनलाइन पेमेंट किया गया है। इसमें कार्ड और मोबाइल वॉलेट से किया जाने वाला पेमेंट शामिल है। अगर अक्टूबर के ओवरऑल यूपीआई पेमेंट की बात करें, तो इस दौरान 16.5 बिलियन लेनदेन हुये हैं। इस डेटा को नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी NPCI की तरफ से रिलीज किया गया है। दिवाली में बने UPI पेमेंट के नए रिकॉर्ड TOI की रिपोर्ट की मानें, तो 4 नवंबर से 31 दिसंबर 2024 के दिवाली सीजन के दौरान 644 मिलियन लेनदेन किये गये हैं। इस दौरान एक सिंगल दिन में सबसे ज्यादा ऑनलाइन पेमेंट किया गया है, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। यूपीआई तेजी से बढ़ने वाला यूपीआई पेमेंट प्लेटफॉर्म है। इसमें क्रेडिट कार्ड से किये जाने वाले पेमेंट में 35 फीसद का उछाल दर्ज किया गया है। इस साल अक्टूबर में 433 मिलियन लेनदेन किये गये हैं, जो पिछले तक 320 मिलियन हुआ करते थे। यह जानकारी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी RBI की तरफ से दी गई है। डेबिट कार्ड से पेमेंट में गिरावट हालांकि डेबिट कार्ड से पेमेंट का दौर पुराना हो चुका है। इसके इस्तेमाल में 24 फीसद की गिरावट दर्ज की गई है। डेबिट कार्ड से ऑनलाइन पेमेंट 144 मिलियन हो गया है, जो एक साल पहले तक 190 मिलियन हुआ करता था। इस दौरान क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल में 35 से 50 फीसद का उछाल दर्ज किया गया है। मतलब आज के वक्त में लोग कैश की बजाय ईएमआई पर तेजी से चीजें खरीद रहे हैं। मोबाइल वॉलेट से पेमेंट में कमी डेबिट कार्ड की तरह ही मोबाइल वॉलेट से पेमेंट में गिरावट दर्ज की गई है। एक साल पहले तक जहां 533 मिलियन मोबाइल वॉलेट पेमेंट हुआ करते थे, जिसमें 17 फीसद की गिरावट दर्ज की गई है। ऐसे में यह आंकड़ा 442 मिलियन रह गया है। इससे पहले साल 2022 से साल 2023 के बीच मोबाइल वॉलेट से पेमेंट में 9.4 फीसद की ग्रोथ दर्ज की गई थी। यह वो वक्त था, जब पेटीएम पेमेंट बैंक पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया था।

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