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वर्ल्ड डायबिटिक डे: सावधान.. कही ये डायबिटीज आपकी आँखों की रोशनी ना छीन ले

बदलती दिनचर्या व जीवन शैली, बढ़ते तनाव, आनुवंशिक और खानपान में बदलाव आदि कारणों से विश्व में डायबिटीज के मरीजो की संख्या बढ़ती जा रही है। विभिन्न रिसर्च के अनुसार भारत वर्ष में डायबिटीज के मरीजो की संख्या लगभग 77 लाख अनुमानित है जो की 20 वर्षों में बढ़कर लगभग 1 करोड़ 35 लाख से अधिक होने की संभावना है। भारत को विश्व की डायबिटीज कैपिटल के रूप में जाना जाता है । डायबिटीज का दुष्प्रभाव शरीर के विभिन्न अंगों पर पड़ता है , आँखें भी इसका अपवाद नहीं है। आँखों के पर्दे या रेटिना पर इसके दुष्प्रभाव से रोशनी प्रभावित होने का ख़तरा होता है इस बीमारी को डायबिटिक रेटिनोपैथी का नाम दिया गया है । प्रारंभिक अवस्था में इसके कोई लक्षण नहीं होते और एडवांस स्टेज में ही मरीज़ को इसके बारे में पता चलता है । डायबिटीज से होने वाली ब्लाइंडनेस को कम करने हेतु 14 नवंबर वर्ल्ड डायबिटिक डे से मध्य प्रदेश स्टेट ऑफ़ल्थैमिक सोसाइटी द्वारा विशेष जन जागरूकता अभियान की शुरुआत की जा रही है ।संस्था के नव निर्वाचित अध्यक्ष एवम् रेटिना रोग विशेषज्ञ डा गजेंद्र चावला के अनुसार  15 दिवसीय इस आयोजन में प्रदेश भर में विभिन्न गतिविधिया का आयोजन किया जायेगा। डायबिटीज के मरीजो के रेटिना की जाँच, सेमिनार व कार्यशाला का आयोजन, पैम्पलेट्स का वितरण, सोशल मीडिया , प्रिंट मीडिया , इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का उपयोग कर जन सामान्य तक डायबिटिक रेटिनोपैथी के बारे में जानकारी पहुँचाना आदि शामिल है । जिससे इस बीमारी को प्रारभिक अवस्था में पहचान कर उचित उपचार के द्वारा डायबिटीज से होने वाली ब्लाइंडनेस को रोका जा सके । डा चावला से डायबिटीज के सभी मरीजो को सलाह दी है कि वे साल में कम से कम एक बार अपनी आँखों की जाँच , जिसमे रेटिना अथवा पर्दे की जाँच शामिल हो , अवश्य कराये चाहे उनको नज़र से संबंधित कोई लक्षण हो या ना हो और अपनी रोशनी को बचाये।

बैठने वाली जॉब करने वाले जरूर करें ये योगासन, नहीं होंगी रीढ़ की हड्डी की समस्याएं

जैसे-जैसे तकनीक विकसित होती जा रही है, बहुत सारे काम अब एक ही जगह बैठकर किए जाने लगे हैं। इसी तरह पढ़ने वाले स्टूडेंट्स, दुकानदार और डेस्क डेस्क जॉब वाले लोगों को दिनभर एक ही जगह बैठे-बैठे काम करना पड़ता है। काम के दबाव के कारण न तो अपनी फिटनेस के बारे में सोचने का वक्त होता है और न ही जिम जाकर एक्सरसाइज करने का समय होता है। ऐसे में देखा गया है कि थोड़े समय बाद इन लोगों में पीठ दर्द, कमर दर्द, कंधा दर्द या कोहनी और उंगलियों का दर्द शुरू हो जाता है। इसका कारण यह है कि आप मानसिक रूप से तो एक्टिव होते हैं मगर शारीरिक रूप से बिल्कुल निष्क्रिय होते हैं। फिट रहने के लिए आपके शरीर को थोड़ी मेहनत या एक्सरसाइज करनी बहुत जरूरी है। अगर आपको अपने काम से ज्यादा समय नहीं मिलता है, तो आप घर पर या ऑफिस में ही 10 मिनट समय निकालकर कुछ आसान योगासन कर सकते हैं, जिससे आप शरीर में होने वाली इन समस्याओं से बचे रहें। इसके अलावा ये योगासन आपको शारीरिक रूप से फिट भी रखेंगे। हस्तोत्तासन करें : हस्तोत्तासन को आप कहीं भी और कभी भी कर सकते हैं। इसे करने के लिए सबसे पहले सीधे खड़े हो जाएं और हाथों को ऊपर आकाश की तरफ उठा लें। अह दोनों हाथों के पंजों को मिलाते हुए एड़ियों को ऊंचा करें और हाथों को और ऊपर की तरफ खींचें। इसके बाद एड़ियों को जमीन पर रख दें। अब हाथों को ऊपर उठाए हुए ही दाईं तरफ क्षमतानुसार घूम कर स्ट्रेच करें। फिर इसी तरह बाईं तरफ क्षमतानुसार स्ट्रेच करें। हर 3 घंटे के अंतराल पर ऐसा 2-3 बार कर लें, तो आपको कभी भी कमर और पीठ की समस्या नहीं होगी। सुप्त पवनमुक्तासन : चटाई बिछाकर सीधे लेट जाएं। अपने घुटनों से टांगें मोड़ लें और उन्हें अपनी छाती के करीब लाएं। अपनी टांगों के आसपास अपनी बाहें लपेटें। चाहें तो अब आंखें भी बंद कर सकती हैं। गहरी सांस लें। इसी मुद्रा में 1 मिनट के लिए रहें। अब सांस छोड़ें और अपना सिर इतना उठाएं कि आपकी नाक घुटनों को छू सके। इस मुद्रा में 5 सेकंड तक रहें। सांस लेते हुए अब अपना सिर पीछे ले जा सकती हैं। इसे 5 बार दोहराएं। इस आसन से पेट, छोटी और बड़ी इंटेस्टाइन, लिवर, पेन्क्रियाज़, गॉलब्लैडर और पेल्विक की मांसपेशियों की खुद-ब- खुद मालिश हो जाती है। पदसंचालनासन : यह आसन मोटापे के इलाज में बहुत कारगर है। इसके अभ्यास से पीठ, हिप्स, टांगें, होठ, पेट और पेल्विस मजबूत होते हैं। चटाई बिछा लें और उस पर सीधी लेट जाएं। हथेलियां नीचे की तरफ हों। सामान्य रूप से सांस लें और अपनी दोनों टांगों को ऐसे हवा में चलाएं, मानो लेटे हुए साइकिल चला रही हों। इसके 10-12 राउंड्स करें। अब शवासन में आएं, यानी लेट जाएं और दो मिनट तक धीरे-धीरे सांस लें। अब उलटी दिशा में टांगों को चलाएं। इसके 10-12 राउंड्स करें। स्ट्रेचिंग करें : उल्टी। टांग को सीधी टांग के ऊपर रखें और आगे की तरफ झुक जाएं फिर महसूस करें कि कहां-कहां स्ट्रेटच आ रहा है। फिर वापस उसी अवस्थां में आ जाएं। फिर दूसरी तरफ से भी इस आसन को करें। अब अपनी उंगलियों को आपस में फंसाकर ऊपर ले जाइए और खींचकर रखिए। सांस भरते रहिए और वापस आ जाइए। फिर अपना उल्टां हाथ ऊपर ले जाइए और दूसरी साइड में झुक जाइए। ऐसा ही दूसरी साइड से भी करें। उल्टा पैर आगे ले जाइए फिर हाथ से पैरों की उंगालियों को पकड़ने की कोशिश करें। अगर नहीं पकड़ पा रहे तो पैर को पकड़ लें। फिर वापस आ जाइए। दूसरी तरफ से भी ऐसे ही करें। घंटों तक न बैठे रहें : ऑफिस में बैठने का काम हो तो भी एक जगह चेयर पर घंटों तक न बैठे रहें, बल्कि बीच-बीच में टहलते रहें। हर एक-डेढ़ घंटे बाद अपनी कुर्सी से उठें और 20 कदम चलकर शरीर को थोड़ा स्ट्रेच करें और फिर बैठ जाएं। अपना सामान स्वयं ही उठाकर रखें या फिर लंच टाइम में अपने केबिन में ही टहल लें। कैसे भी 15-20 मिनट तो अवश्य निकालें अपने लिए जिसमें आप चल सकें, ताकि शरीर की कसरत हो जाए।  

चेहरे के बाल हटाने के लिए वैक्सिंग क्यों नुकसानदायक है

मुंहासें, दाग-धब्बे और झुर्रियां जैसी कई चीजें आपके चेहरे की सुंदरता को कम कर देती हैं। जिन्हें दूर करने के लिए आप कई तरीके अपनाते हैं। इन सभी चीजों की तरह चेहरे पर मौजूद अनचाहे बाल भी आपकी चेहरे की सुंदरता को कम कर देती हैं। चेहरे से बाल हटाने के लिए महिलाएं कई तरीके अपनाती हैं। इनमें से कुछ घरेलू उपाय होते हैं। मगर कुछ महिलाएं चेहरे से अनचाहे बालों को हटाने के लिए वैक्सिंग भी करवाती हैं। हाथ, पैर और अंडरआर्म्स से बालों को हटाने के लिए आपने वैक्सिंग के बारे में तो सुना ही होगा। अब चेहरे से बाल हटाने के लिए भी वैक्सिंग कराई जाती है। चेहरे पर वैक्सिंग करने के होने वाले नुकसानों के बारे में बताते हैं। चेहरे पर वैक्सिंग कराने के नुकसान- रैशेज : चेहरे पर वैक्सिंग करने से कुछ समय के लिए रैशेज और जलन होना सामान्य होता है। हालांकि यह रैशेज साइड इफेक्ट होते हैं। यह रैशेज एक दिन तक रहते हैं। अगर यह रैशेज ज्यादा समय तक रहते हैं तो उस प्रोडक्ट का इस्तेमाल करना बंद कर दें। सन सेंसिटिविटी : अगर आपको सन बर्न हुआ है तो उस दौरान चेहरे पर वैक्स नहीं करनी चाहिए। उस दौरान आपको अपनी त्वचा का खास ध्यान रखना चाहिए। साथ ही अगप आपने अगर चेहरे पर वैक्स कराई है तो धूप में निकलने से बचना चाहिए। चेहरे पर वैक्सिंग के दौरान बालों के साथ त्वचा की ऊपरी परत एपिडर्मिस भी हट जाती है। जिसकी वजह से आपकी त्वचा सूरज की रोशनी में ज्यादा संवेदनशील हो जाती है। इनग्नोन हेयर : शेविंग के साथ वैक्सिंग की वजह से भी इनग्रोन हेयर की समस्या हो जाती है। वैक्सिंग के दौरान इनग्रोन हेयर से बचने के लिए बालों के विपरीत तरफ स्ट्रिप खीचें। कई बार बालों की जड़ें मजबूत होने की वजह से यह वैक्सिंग की मदद से पूरी तरह निकल नहीं पाते हैं जिससे इनग्रोन हेयर रह जाते हैं। दर्द : वैक्सिंग की वजह से दर्द बहुत होता है। ऐसा तब होता है जब बहुत जल्दी वैक्स स्ट्रिप को हटा दिया जाता है। इस दौरान संवेदनशील त्वचा पर सबसे ज्यादा दर्द होता है। इंफेक्शन : कुछ लोगों को वैक्सिंग की वजह से इंफेक्शन हो जाता है। कई बार वैक्सिंग के दौरान त्वचा से खून आने लगता है या त्वचा खराब हो जाती है। अगर किसी जगह पर पहले से कट है तो वहां वैक्स लगाने से इंफेक्शन होने की संभावना बढ़ जाती है।  

ऐसे बनाएं ब्रांड इमेज…

मैं कौन हूं। यह आत्ममंथन का मूल सवाल है। मूल रूप से यह पहचान से जुड़ा हुआ सवाल है। दूसरे शब्दों में इस सवाल के जरिए यह मंथन किया जाता है कि मैं क्या करता हूं और मेरे होने का मतलब क्या है। मैं खुद को एक चिकित्सक या एक बेहतरीन चिकित्सक के रूप में देख सकता हूं। मैं खुद को एक सरकारी अधिकारी के रूप में या एक भ्रष्ट या निकम्मे बाबू के रूप में या एक कर्मचारी या एक भरोसेमंद कर्मचारी के रूप में खुद को देख सकता हूं। इन सबके बीच स्पष्ट अंतर है। इसलिए मैं कौन हूं यह सवाल हमें परिभाषित करना है। यह सवाल एक व्यक्ति, संगठन, संस्थान और कंपनी के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण है। इसलिए एक कंपनी या कारोबार के लिए यह जानना जरूरी है कि वह कौन है, उसके होने का अर्थ क्या है, उसे किस प्रकार परिभाषित किया जा सकता है और इसलिए उसे दूसरों से अलग कैसे किया जा सकता है। यही है यूनीक सेलिंग प्रोपोजिशन (यूएसपी) या ब्रांडिंग। यदि कंपनी अपनी यूएसपी को स्पष्ट तरीके से परिभाषित नहीं करे, तो उसकी दूसरों से अलग कोई पहचान नहीं बनेगी। एक बार ब्रांड का निर्माण करने के बाद कंपनी को लगातार ग्राहकों को संतुष्ट करते हुए उसकी रक्षा करनी होती है। ब्रांड का निर्माण करने में लंबा समय लगता है, लेकिन उसे नष्ट करने में मिनट भी नहीं लगता। ब्रांड निर्माण में प्रभावी संवाद बहुत महत्वपूर्ण है। इस तथ्य को नजरंदाज नहीं करना चाहिए कि धारणा कितनी मजबूत होती है। लेकिन यह धारणा झूठ पर आधारित नहीं हो सकती है। अगर यह झूठ पर आधारित है, तो इसे जल्द से जल्द सही किया जाना चाहिए, वरना इसका प्रभाव गहरी जड़े जमा लेता है। इसका परिणाम यह होता है कि ब्रांड नष्ट हो जाता है। संवाद का काम आपके उत्पाद की सही बातों को बताना होता है। लेकिन यदि आपके द्वारा रची जा रही बातें झूठी लगेंगी, तो यह ग्राहकों को धोखा देने के समान होगा। प्रभावी संवाद स्थापित करने के नौ सिद्धांत हैं। 1. सिर्फ सच्चाई ही बिकती है: ग्राहकों से कभी झूठे वादे मत कीजिए। यदि उत्पाद खराब है, तो कितनी भी अच्छी तरह पैकेजिंग करने से यह बेहतर नहीं हो जाएगा। संवाद से भरोसे का निर्माण होना चाहिए। 2. खराब साबित हो चुके सामान को अच्छा मत बताते रहिए: यदि ग्राहक किसी उत्पाद को खराब बताकर अस्वीकार कर देता है, तो उसे दुकान से हटा दीजिए। यदि आप इससे जबरदस्ती बेचते रहेंगे, तो आपकी साख घट जाएगी। 3. अपने उत्पाद पर भरोसा रखिए: आपको अपने उत्पाद पर भरोसा होगा, तभी आप उसे लक्षित ग्राहकों को बेच पाएंगे। यदि आप किसी कार कंपनी के लिए काम करते हैं, तो आपको दूसरी कंपनियों की कारें नहीं इस्तेमाल करनी चाहिए, वरना ग्राहकों को आपकी कार पर भरोसा नहीं होगा। 4. ग्राहकों को समझिए: एक ही सामान सभी ग्राहकों को नहीं बेचा जा सकता। आपको अपने ग्राहकों को समझना होगा, ताकि आप अलग-अलग ग्राहकों के लिए अलग-अलग बिक्री योजना बना सकें। 5. पुराने ग्राहकों को सहेजिए: बाजार में ग्राहक तभी बढ़ते हैं, जब आप पुराने ग्राहकों को सहेजते हुए नए ग्राहकों का निर्माण करते हैं। नए दोस्त बनाने का मतलब यह नहीं है कि आप पुराने दोस्त भूल जाएं। 6. बाजार पर नजर टिकाए रखिए: बाजार में प्रभाव बनाए रखने के लिए आपको इसे समझना होगा। जमाना जब लैपटॉप, आईपैड और मोबाइल का है, तब आप टाइपराइटर का निर्माण करेंगे, तब लोग आपको पिछड़ा हुआ समझेंगे। और यदि आप फिर भी टाइपराइटर बेच रहे हैं, तो आपको प्रभावकारी तरीके से बताना होगा कि आप टाइपराइटर क्यों बेच रहे हैं। 7. अपने संवाद को स्पष्ट तरीके से रखिए: ग्राहकों को यह स्पष्ट तरीके से समझ में आना चाहिए कि एक उत्पाद क्या कर सकता है और क्या नहीं कर सकता है। उत्पाद एक रहस्य पर आधारित उपन्यास की तरह नहीं होता। उत्पाद में वे बातें मिलनी चाहिए, जिसके लिए ग्राहकों ने कीमत का भुगतान किया है। 8. अपने प्रतियोगी को कम नहीं समझें: उत्पादों के बीच प्रतियोगिता होती है और स्वस्थ्य प्रतियोगिता से बाजार चलता है। लेकिन जब प्रतियोगिता आक्रामक और ओछेपन पर उतर आती है, तो बाजार से ग्राहक हटने लगते हैं। 9. सदा जागरूक रहिए: बेहतर बिक्री योजना और बेहतर उत्पाद के बारे में हमेशा प्रयास करते रहना चाहिए। वे खुद-ब-खुद बेहतर बने हुए नहीं रहते। बाजार का विश्लेषण और उपभोक्ताओं के व्यवहार के प्रति हमेशा जागरूक रहना चाहिए और जरूरत होने पर उपयुक्त कदम उठाने चाहिए। संवाद का प्रभावी रूप से किया जाना बहुत जरूरी है। इससे ब्रांड बनता है और उसकी रक्षा करनी होती है। लेकिन ऐसा करने के लिए यह जानना जरूरी है कि हम बेच क्या रहे हैं। दूसरे शब्दों में यह जानना जरूरी है कि हम कौन हैं और किन बातों के पक्ष में खड़े हैं।  

प्राणघातक हो सकती है कैल्शियम की कमी

कैल्शियम को सदा से ही मजबूत हड्डियों और दांतों के लिए आवश्यक माना जाता रहा है किन्तु नए शोधों के अनुसार इसके अतिरिक्त भी कैल्शियम हमारे शरीर के लिए कई बीमारियों को दूर रखने में सहायता करता है। हड्डियां हमारे शरीर के लिए कैल्शियम के स्टोर का कार्य करती हैं जहां से आवश्यकतानुसार शरीर कैल्शियम लेता रहता है। हमारे भोजन से हड्डियों को कैल्शियम मिलने और हड्डियों से शरीर को कैल्शियम मिलने की प्रक्रिया हेतु विटामिन डी की उपस्थिति अनिवार्य है। विशेषज्ञों के अनुसार हर वयस्क को न्यूनतम 1000 मिलीग्राम कैल्शियम की दैनिक आपूर्ति होनी आवश्यक है। यदि भोजन से इतना कैल्शियम नहीं मिल पाता तो हमारे शरीर को पैराथायराइड हार्मोन विटामिन डी के सहयोग से हड्डियों से रक्त का कैल्शियम स्थानांतरित कर देता है। यदि व्यक्ति के भोजन में लगातार कैल्शियम या विटामिन डी की कमी चलती रहे तो उसकी हड्डियां कमजोर हो जाएंगी। नवीन शोधों के अनुसार कैल्शियम की कमी का निम्र रोगों पर भी प्रभाव पड़ता है। उच्च रक्तचाप मनुष्य के रक्तचाप पर कई चीजों का प्रभाव पड़ता है। शरीर का वजन, शारीरिक गतिविधि, नमक व पारिवारिक पृष्ठभूमि का रक्तचाप पर प्रायः प्रभाव पड़ता है किन्तु अब शोधों से पता चला है कि शरीर में कैल्शियम की कमी से आयु के साथ रक्तचाप में भी प्रभाव पड़ता है। 1997 में अमरीका में पाया गया है कि कम वसा वाले दूध, फल और सब्जियों के नियमित प्रयोग से (जिसमें लगभग 1200 मिलीग्राम कैल्शियम हो) रक्तचाप को नियंत्रित किया जा सकता है। यह नहीं कि कैल्शियम के साथ नमक अधिक लिया जाए किन्तु अधिक नमक और कम कैल्शियम खाने वाले व्यक्ति में उच्च रक्तचाप की संभावना बढ़ जाती है। डा. डेविड मैकरोन के अनुसार कम नमक वाले भोजन के स्थान पर दूध से बने पदार्थ उच्च रक्तचाप को काबू करने में अधिक प्रभावशाली हैं। उनके अनुसार अधिकतर बच्चे कैल्शियम की सही मात्रा नहीं लेते क्योंकि वे दूध, फल और सब्जी का सही मात्रा में सेवन नहीं करते। कैंसर: हमारे शरीर में बहुत से सैल बनते रहते हैं और समाप्त होते रहते हैं। पेट के अंदर ऐसे सैल प्रायः 3 से 10 दिन में बदल जाते हैं पर कभी-कभी ये सैल तीव्र गति से बढने लगते हैं, जिससे पेट के कैंसर की संभावना हो सकती है। अमरीकन मैडीकल एसोसिएशन जर्नल में प्रकाशित एक लेख के अनुसार जिन लोगों में पेट के कैंसर की संभावना थी, उन्हें 1500 मिलीग्राम कैल्शियम प्रतिदिन दिए जाने पर सैलों में बढ़ौतरी ठीक हो गई। मासिक धर्म: प्रायः महिलाओं को मासिक धर्म प्रारंभ होने से पूर्व कई तकलीफें होती हैं। सूसन थाई जैकब के अनुसार इसके लिए भी कैल्शियम की कमी ही उत्तरदायी है। उन्होंने 466 महिलाओं को 1200 मिलीग्राम कैल्शियम प्रतिदिन दिया और पाया कि अधिकतर महिलाओं की तकलीफें 48 प्रतिशत कम हो गईं। उनको होने वाली दर्द में भी कमी हुई। यह महत्वपूर्ण है कि हम अपने आहार को इस प्रकार संयोजित करें कि हमें लगभग 1200 मिलीग्राम कैल्शियम प्रतिदिन मिलता रहे। 240 मिलीलीटर गाय के दूध में 288 मिलीग्राम कैल्शियम होता है जबकि 200 ग्राम दही में 268 मिलीग्राम कैल्शियम होता है। 100 ग्राम सूखे नारियल में 400 मिलीग्राम कैल्शियम होता है जबकि 100 ग्राम खजूर में 120 मिलीग्राम कैल्शियम होता है। इसके अतिरिक्त गूड़, पनीर, सोयाबीन, फूलगोभी और मछलियों में भी कैल्शियम पाया जाता है।  

सर्दी-खांसी ने जकड़ लिया है, तो बिना दवाई के इन 5 उपायों से होगा ठीक

ठंड का मौसम आने वाला है ऐसे में सर्दी-खांसी और जुकाम होना आम बात है। सर्दियों के दौरान एक बार तो वातावरण में मौजूद ठंडक, हवा में नमी और वायु प्रदूषण के कारण खांसी, सर्दी, जुकाम, कफ और गले में खराश में होने की समस्या आम बात है। आती हुई सर्दी में खांसी-जुकाम जरुर होता है। वैसे तो दवाईयो के खाने से छुटकारा मिल जाता है, लेकिन ज्यादा दवाई के सेवन से शरीर को नुकसान होता है। इसके जगह आप घरेलू उपाय के जरिए सर्दी-खांसी और जुकाम से छटुकारा पा सकते हैं। अगर आप भी सर्दी-खांसी से परेशान हैं तो इन 5 उपायों के करने से निजात पा सकते हैं। अदरक और शहद अदरक में एंटीवायरल और एंटीबायोटिक गुण होते हैं, जो वायरल इंफेक्शन से लड़ने में मदद करती है। इसके साथ ही शहद गले की सूजन को दूर करने के लिए काम करता है। इस उपाय को करने के लिए आप एक कप गुनगुने पानी में आध चम्मच अदरक का रस और एक चम्मच शहद मिलाकर पिएं। इस उपाय को आप दिन में दो-तीन बार कर सकते हैं। आपको काफी राहत मिलेगी। तुलसी और काली मिर्ची तुलसी में एंटीबायोटिक गुण मौजूद होते हैं। इसके साथ ही काली मिर्च खांसी को कम करने में मदद करता है। एक कप गुनगुने पानी में कुछ तुलसी के पत्ते और 2-3 काली मिर्च डालकर उबालें। अब आप इसे छानकर पिएं। यह जिद्दी से जिद्दी खांसी और गले की खराश में राहत देगा। गर्म पानी से भाप लें यदि आपको सर्दी और खांसी के साथ ही नाक बंद है, तो आप इस समस्या से बचने के लिए भाप लें सकते हैं। इसके लिए आप एक कटोरे में गर्म पानी लें और फिर उसमें सिर को झुका कर तौलिया से ढक लें। भाप को आपको 1 या 2 मिनट तक जरुर लें। ऐसा करने से आपकी नाक खुल सकती है और साथ ही गले की सूजन दूर होती है और खांसी में भी आराम मिलेगा। हल्दी वाला दूध सर्दी-खांसी की समस्या से बचने के लिए हल्दी वाला दूध सबसे फायदेमंद होता है। एक गिलास गर्म दूध में आधा चम्मच हल्दी डालकर अच्छे से मिला लें और सोने से पहले इसे पिएं। इससे आपको काफी राहत मिलेगी और साथ ही इम्यून सिस्टम भी मजबूत होगा। नींबू और गर्म पानी शरीर को इम्यून करने के लिए नींबू सबसे बढ़िया है क्योंकि इसमें विटामिन सी होता है। गर्म पानी में नींबू का रस डालें। इससे आपके गले की खराश दूर होगी। साथ ही सर्दी और खांसी की समस्या दूर होगी।  

ऐप को डिलीट करने के बाद भी रह जाती है आपकी पर्सनल इनफार्मेशन

आजकल सभी के स्मार्टफोन में तमाम तरीके के ऐप भरे रहते हैं, कुछ तो उन्होंने अपने काम करने के लिए इंस्टॉल किया होता है लेकिन बहुत सारे ऐसे ऐप होते हैं जो बेवजह ही आपके फोन में रहते हैं और आपको इसका पता भी नहीं रहता है। इसके अलावा बहुत सारे ऐसे ऐप होते हैं जिन्हें आप वन टाइम इस्तेमाल के लिए इंस्टॉल करते हैं और उसको अनइनस्टॉल भी कर दिए होते हैं, लेकिन यहां इस लेख में हम इस बात का जिक्र करने जा रहे हैं कि आपने जिन वन टाइम इस्तेमाल वाले ऐप को अनइनस्टॉल कर दिया है, उनके पास आपकी कुछ जरूरी इंफॉर्मेशन जैसे आपकी लोकेशन, आपका एड्रेस, आपका मोबाइल नंबर, आपका जीमेल, नंबर सोशल मीडिया फाइल एक्सेस की परमिशन आदि इनफॉरमेशन उसे अप में सेफ रहती है। तो अनइनस्टॉल होने के बाद भी उस ऐप में आपके इंफॉर्मेशन सेफ है और किस तरीके से आप इस ऐप से अपने इनफॉरमेशन को लॉगआउट कर पाएंगे यही इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको बताने की कोशिश कर रहे हैं। आईए जानते हैं क्या है वह स्टेप जिससे आप किसी भी अननोन ऐप से अपनी इंफॉर्मेशन को हटा सकते हैं। – सबसे पहले आपको अपने फोन की सेटिंग में जाना है और इसे ओपन करना है। – इसके बाद आपको गूगल सर्विसेज का ऑप्शन दिखाई देगा, वहां पर क्लिक करके आपको मैनेज योर अकाउंट पर जाना है। – यहां से आपको डाटा एंड प्राइवेसी का ऑप्शन दिखाई देगा और इसी के नीचे आपको हिस्ट्री सेटिंग दिखाई देगी। – हिस्ट्री सेटिंग का ऑप्शन क्लिक करते ही आपको वेब एंड एक्टिविटी का ऑप्शन दिखाई देगा। – इस पर क्लिक करते ही आपके सामने उन सभी ऐप्स की पूरी लिस्ट आ जाएगी जिनके पास आपका लोकेशन समेत अन्य इनफॉरमेशन को एक्सेस है। – ऐसे में आप जिन भी वेबसाइट से अपनी इनफॉरमेशन हटाना चाहते हैं आप उस पर क्लिक करें और वहां से अपनी इंफॉर्मेशन को आसानी से डिलीट कर सकते हैं।  

आसमां में उड़ने का रखते हैं ख्वाब तो पायलट बन चमकाएं कॅरियर, मिलेगी अच्छी सैलरी

अक्सर आसमान में उड़ते हवाई जहाज को देखकर लोगों के मन में आसमान मापने का सपना होता है। अधिकतर लोग पायलट बनकर आसमान में ऊंची उड़ान भरने का सपना देखते हैं। हालांकि आज के समय में कॅरियर के लिहाज से युवाओं के पास कई तरह के ऑप्शन होते हैं। जिसमें वह डिग्री, डिप्लोमा या सर्टिफिकेट कोर्स कर आगे बढ़ सकते हैं। तो वहीं कई युवा ऐसे में हैं, जो पायलट बनने का ख्वाब देखते हैं। अगर आपका लक्ष्य क्लियर होता है, तो आपको सिर्फ इस ओर बढ़ने की जरूरत होती है। ऐसे में अगर आप भी पायलट बनकर अपना भविष्य चमकाना चाहते हैं, तो यह आर्टिकल आपके लिए है। आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको इस फील्ड में बारे में जानकारी देने जा रहे हैं। वर्तमान समय में एविएशन इंडस्ट्री में तेजी से ग्रोथ हो रही है। साथ ही इस फील्ड में अवसरों की भरमार है। ऐसे करें पायलट बनने की तैयारी पायलट बनने के लिए आपको 12वीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्य के साथ कम से कम 50 फीसदी अंको से पास होना चाहिए। जिसके बाद आपको किसी एविएशन संस्थान में एडमिशन के लिए एंट्रेंस एग्जाम पास करना होगा। फिर आपको इंटरव्यू औऱ मेडिकल टेस्ट में पास होना होता है। सभी प्रोसेस में सफल होने के बाद संस्थान में एडमिशन मिलता है। जहां पर आपको प्लेन से जुड़ी बारीकियां सिखाने के साथ प्लेन उड़ाने की पूरी ट्रेनिंग दी जाएगी। एयरफोर्स में बनें पायलट अगर आप इंडियन एयरफोर्स में पायलट बनने का ख्वाब देख रहे हैं, तो आपको 12वीं पास करने के बाद एयरफोर्स कॉमन एडमिशन टेस्ट, एनसीसी स्पेशल एंट्री स्कीम एग्जाम और यूपीएससी एनडीए एग्जाम क्लियर करना होगा। जिसके बाद इंडियन एयरफोर्स कैंडिडेट्स को ट्रेनिंग देती है। वहीं इंडियन एयरफोर्स में पायलट बनने के लिए आप कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज एग्जाम भी दे सकते हैं। हालांकि इस एग्जाम के लिए आपको साइंस स्ट्रीम से 12वीं या फिर बीई/बीटेक की डिग्री होनी चाहिए। कमर्शियल पायलट बता दें कि 12वीं की पढ़ाई के बाद आप एविएशन संस्थान से ट्रेनिंग लेकर बतौर कॉमर्शियल पायलट अपना कॅरियर बना सकते हैं। इसके लिए ट्रेनिंग पीरियड 18-24 महीने का होता है। फिर कमर्शियल पायलट के लिए आपको रिटेन एग्जाम और फिटनेस टेस्ट देना होता है। इन दोनों चीजों को क्लीयर करने के बाद आपको कमर्शियल पायलट बनने की योग्यता हासिल हो जाती है।  

हाथों का कालापन दूर करेगा ये घरेलू नुस्खा

हम अपने चेहरे को चाहे कितना भी साफ कर लें और फेस पैकया फेस मास्क लगा लें, लेकिन हाथों का कालापन दूर नहीं कर पाते हैं। इसके दो बड़े कारण है, एक तो ये की हम अपनी स्किन केयर सही नहीं नहीं करते हैं और दूसरा की ये की हम सब जानते हुए भी ना ही अपनी स्किन को ढककर रखते हैं और ना ही सूरज की किरणों में जाना कम करते हैं। लेकिन अब आपको अपने हाथों से टैनिंगके लिए परेशान होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि आज हम आपको एक ऐसे नुस्खा बताने वाले हैं। जो हाथों का कालापन दूर करने में तो मदद करेगा ही, साथ स्किन को ब्राइट और रिंकल फ्री भी बनाएगा। आइए जानते हैं इस नुस्खे को बनाने का तरीका। डी टैन पैक के फायदे इस नुस्खे में उन सभी चीजों का इस्तेमाल किया गया है जो हमारी स्किन के लिए फायदेमंद साबित होंगे। ये डी टैन पैक आपके हाथ-पैरों का कालापन हटाने के साथ-साथ सन टैन को हल्का करने, सॉफ्ट और स्मूथ बनाने और झुर्रियों, फाइन लाइंस को कम करने में मदद करता है। आइए जानते हैं कई फायदे देने वाले इस नुस्खे को बनाने का तरीका। डी टैन पैक बनाने के लिए क्या चाहिए?     कपूर- 1     कॉफी पाउडर- 1-2 चम्मच     नींबू- 1/2     नारियल का तेल- 1 चम्मच     शैम्पू- 1 चम्मच     चीनी- 1/2 चम्मच​​ ऐसे तैयार करें नुस्खा     सबसे पहले आप एक कटोरी लें और उसमें कपूर,चीनी और कॉफी पाउडर डाल दें।     कटोरी मरण साथ ही आधा नींबू निचोड़े, नारियल तेल डालें और 1 चम्मच शैम्पू डालकर अच्छे से मिक्स कर दें।     कपूर और चीनी को पिघलाकर सभी चीजों को अच्छे से मिलाएं और गिला पेस्ट तैयार कर लें।     लीजिये तैयार है आपका डी टैन पैक, अब आप इसे अपने हाथों और पैरों पर लगा लें।     इस पैक को 10 मिनट तक लगाकर रखें और धोने से पहले हाथों को गिला करके स्क्रब करें।     5 मिनट तक स्क्रब करने के बाद पानी से साफ कर लें।     देखिए पहले इस्तेमाल के बाद ही आपके हाथों से टैनिंग हल्की हो गई है और रंग साफ हो गया है।     आप हफ्ते में दो बार इस्तेमाल कर सकते हैं और इसका फायदा उठा सकते हैं।​ कपूर के स्किन बेनिफिट्स आपने पूजा में तो कपूर का इस्तेमाल किया होगा, लेकिन आज हम आपको इस लेख में कपूर को स्किन पर इस्तेमाल करने के फायदे के बारे में बताने वाले हैं। इसमें एंटीसेप्टिक और एंटीबायोटिक गुण होते हैं, जो खुजली, घाव और स्किन से जुड़ी कई समस्याओं को हल करने में मदद करते हैं। साथ ही कपूर हमारी स्किन पर होने वाले कील-मुंहासों को कम करने और रंगत को निखारने का काम करता है। त्वचा पर नारियल तेल लगाने के फायदे नारियल का तेल एक ऐसा तेल है जो हमारी सेहत, बाल और त्वचा, तीनों के लिए ही फायदेमंद होता है। ये हमारी स्किन को लंबे समय तक मॉइस्चराइज रखने, कोलेजन को बढ़ाने, दाग-धब्बों को हल्का करने और स्किन की इलास्टिसिटी को बनाए रखने में मदद करता है। आप चाहें तो इसे अपने होंठों पर लिप बाम की तरह भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

पेट गैस-एसिडिटी निकालने के लिए घर पर बनाएं चूर्ण

गैस, ब्लोटिंग, एसिडिटी की समस्या सुनने में काफी आम लगती हैं। मगर जिन लोगों को इनका गंभीर सामना करना पड़ता है, उनके लिए यह काफी कष्टदायक होती हैं। अक्सर खाना खाने के बाद इन समस्याओं को बहुत झेलना पड़ता है। शादी का सीजन आ रहा है और दावत खाने के बाद तो यह समस्या होना आम है। क्योंकि शादी का खाना मसालेदार और भारी होता है। पेट में गैस, एसिडिटी और ब्लोटिंग से अब आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। सर्टिफाइड न्यूट्रिशनिस्ट तन्वी तुतलानी ने पेट फूलने का घरेलू उपाय बताया है। आप घर पर एक डिब्लोट पाउडर बनाकर रख सकते हैं। जब भी ब्लोटिंग की परेशानी हो, इसे पानी में घोलकर पी लें। कुछ ही मिनटों में आपको आराम मिलने लगेगा। ​​ घरेलू चूर्ण बनाने के लिए चाहिए 5 मसाले 2 चम्मच जीरा 2 चम्मच मेथीदाना 2 चम्मच सौंफ 2 चम्मच अजवाइन 1 चम्मच कलौंजी ऐसे बनाएं ब्लोटिंग खत्म करने वाला चूर्ण सभी मसालों को 5 मिनट तक एक पैन में अच्छी तरह भूनें। फिर इसे प्लेट में डालकर ठंडा कर लें। ठंडा होने पर इन मसालों को ब्लेंडर में डालें। साथ में थोड़ा काला नमक डालकर अच्छी तरह पीसकर पाउडर बना लें। कैसे करना है उपाय? तन्वी तुतलानी के मुताबिक इस चूर्ण की 1 चम्मच मात्रा लेकर 1 गिलास गुनगुने पानी में घोलकर पी लें। इस बात का ध्यान रखें कि आपको खाना खाने के 30 मिनट बाद इसका सेवन करना है। इसे पीने से ब्लोटिंग, एसिडिटी की प्रॉब्लम कम होगी। साथ ही सारी गट प्रॉब्लम में राहत मिलेगी। डिब्लोटिंग पाउडर के फायदे डायजेस्टिव हेल्थ सुधरेगी वेट कंट्रोल रहेगा हार्ट हेल्थ के लिए अच्छा ब्लड शुगर कंट्रोल करने में मददगार कोलेस्ट्रॉल लेवल मैनेजमेंट में मददगार हॉर्मोनल बैलेंस में मदद करेगा

एंड्रॉइड 16 का लोगों को बेसब्री से इंतजार, साल की दूसरी तिमाही में होगा लॉन्च

नई दिल्ली पूरी दुनिया को गूगल के अगले अपडेट में एंड्रॉइड 16 का बेसब्री से इंतजार है और इसमें बहुत कुछ ऐसा देखने को मिल सकता है, जिसके बारे में लोगों को अंदाजा भी नहीं है। गूगल अगले महीने एंड्रॉइड 16 का डेवलपर प्रीव्यू रिलीज कर सकती है। एंड्रॉयड 16 के नए वर्जन में सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट किट और API में बदलाव जैसी बातें शामिल हो सकती हैं। यूजर एक्सपीरियंस को बेहतर बनाने के लिए फीचर्स में सुधार किया जाएगा। नए अपडेट्स से स्मार्टफोन यूजर्स को लाभ मिलेगा। गूगल ब्लॉग में मिली जानकारी गूगल के एंड्रॉइड 16 लॉन्च को लेकर हाल ही में नया ब्लॉग सामने आया है। इसमें गूगल ने बताया है कि एंड्रॉयड का नया वर्जन लाया जा सकता है। इसमें सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट किट की भी बात कही गई है। इसकी मदद से यूजर एक्सपीरियंस भी बेहतर करने की बात कही गई है। गूगल की तरफ से बहुत सारे प्रोजेक्ट पर काम किया जा रहा है। अगले साल आएगा Techopedia की रिपोर्ट की मानें तो एंड्रॉइड 16 को 2025 की दूसरी तिमाही में लॉन्च किया जा सकता है और कहा जा रहा है कि अप्रैल, मई या जून में गूगल के अगले अपडेट्स का यूजर लाभ उठा सकेंगे। एंड्रॉइड 16 एओएसपी (एंड्रॉइड ओपन सोर्स प्रोजेक्ट) पर आएगा और 3 जून 2025 को पिक्सल डिवाइसेज पर ओवर-द-एयर (OTA) होगा। डेवलपमेंट ब्लॉग पर बोलते हुए गूगल ने पुष्टि की है कि आगामी एंड्रॉइड ऑपरेटिंग सिस्टम तय समय से पहले आ सकता है। नए डेवलपर एपीआई शामिल होंगे साल 2025 की दूसरी तिमाही में एक मेजर एंड्रॉइड वर्जन और चौथी तिमाही में एक छोटे अपडेट्स आ सकते हैं और खास बात यह है कि दोनों में नए डेवलपर एपीआई शामिल होंगे। गूगल की मानें तो इस नए अपडेट से मूल उपकरण निर्माताओं (ओईएम) को भी लाभ हो सकता है, जो साल के शुरुआती महीनों में अपने डिवाइस लॉन्च करने की तैयारी में हैं। ज्यादा बदलाव और अपडेट की संभावना आपको बता दें कि एंड्रॉइड 16 में ज्यादा बदलाव और अपडेट की सुविधा मिलने की उम्मीद है। नए फीचर्स में सैमसंग के वन यूआई की तरह ही 2-फिंगर जेस्चर के साथ ही कस्टमाइजेबल, रीसाइजेबल और रीवैंप्ड क्विक सेटिंग पैनल देखने को मिल सकते हैं। कार्यक्षमता और ऐक्सेसिबिलिटी में सुधार के लिए नए विजेट के साथ लॉक स्क्रीन में संभावित अपडेट की भी उम्मीद है।

मसाले, दूध, तेल में मिलावट पर कानून का शिकंजा: जानें सजा और प्रावधान

Now you will get 10 years imprisonment for selling adulterated milk and ghee, know what the law says भोपाल। भारत में मिलावटी चीजों की भरमार है.। खासतौर से जब आप खाद्य पदार्थों की बात करते हैं तो उसमें सबसे ज्यादा मिलावट देखने को मिलती है। मसाले, दूध, घी, तेल हर चीज में मिलावट होती है. चलिए आज इस खबर में जानते हैं कि अगर कोई मिलावट खोर खाने की चीजों में मिलावट करता पकड़ा गया तो उसे भारतीय कानून के तहत कितनी सजा होगी। क्या कहता है नियम-कानून भारत में मिलावटखोरी और खाद्य सुरक्षा से संबंधित मामलों को देखने के लिए, फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 (Food Safety and Standards Act, 2006) बनाया गया है. इसके अलावा इसके तहत बनाए गए फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स ऑथोरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) के नियमों का भी पालन किया जाता है। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 को भारतीय खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, स्वच्छता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लागू किया गया है। इस कानून के तहत खाद्य पदार्थों में मिलावट को प्रतिबंधित किया गया है और अगर कोई व्यक्ति मिलावटी सामान बेचता पाया जाता है, तो उस पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई होती है। कितनी मिलती है सजा फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति मिलावटी खाद्य पदार्थों का उत्पादन, बिक्री या वितरण करते पाया गया तो इसे गंभीर अपराध माना जाता है। दोषी पाए जाने पर जुर्माना, सजा या दोनों का प्रावधान है. जुर्माने की बात करें तो मिलावटी खाद्य पदार्थों को बनाने और बेचने पर 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। जबकि, अपराध के गंभीरता को देखते हुए, इस तरह के मामलों में 6 महीने से लेकर 7 साल तक की सजा भी हो सकती है। वहीं अगर मिलावटी खाद्य पदार्थ खाने से किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो मिलावटखोर को आजीवन कारावास या 10 साल तक की सजा हो सकती है। धारा 272 और 273 के तहत भी मिलती है सजा फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के अलावा भारतीय दंड संहिता (IPC) में भी मिलावटखोरी से संबंधित अपराधों के लिए दंडात्मक प्रावधान हैं। खासतौर से धोखाधड़ी और आम जनता के जीवन को खतरे में डालने के मामले में है। दरअसल, अगर किसी व्यक्ति द्वारा मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री की जाती है, जिससे किसी जान जाने का खतरा ना हो तो यह धोखाधड़ी के अंतर्गत आता है। भारतीय दंड संहिता की धारा 272 और 273 के तहत इसमें, मिलावटी खाद्य पदार्थों को बेचने वाले को 6 महीने से लेकर 2 साल तक की सजा हो सकती है और जुर्माना भी लगाया जा सकता है। जबकि, अगर मिलावटी खाद्य पदार्थ से किसी व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति गंभीर हो जाती है या कोई बीमारी फैल जाती है या किसी के जान पर बन आती है तो यह एक गंभीर अपराध माना जाता है। ऐसे मामलों में, संबंधित व्यक्ति को 3 से 7 साल तक की सजा हो सकती है और उस पर भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

रिसर्च : रात की शिफ्ट में काम करने से सर्कैडियन लय बाधित होती है, जो प्रजनन सहित कई शारीरिक प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक

मुंबई आजकल की लाइफस्टाइल कॉर्पोरेट के हिसाब से हो गई है. क्या दिन क्या रात लोग हर वक्त अपने काम में बिजी हैं. अगर आपको पता नहीं है तो जानकारी के लिए बता दें कि इसका सीधा असर आपकी सेहत पर पड़ रहा है. सबसे हैरान करने वाला रिसर्च सामने आया है कि इसका असर आपकी फर्टिलिटी पर पड़ता है. रिपोर्ट के मुताबिक रात की शिफ्ट में काम करने से फर्टिलिटी पर इसका बुरा असर होता है. रात की शिफ्ट और प्रजनन क्षमता के बीच संबंध इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि रात की शिफ्ट पुरुषों और महिलाओं दोनों में प्रजनन क्षमता में कमी के साथ संबंधित है. रिसर्च से पता चला है कि रात की शिफ्ट में काम करने से सर्कैडियन लय बाधित हो सकती है. जो प्रजनन कार्य सहित विभिन्न शारीरिक प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक है. नींद हमारी सेहत (Health) के लिए उतना ही जरूरी है, जितना पौष्टिक आहार और वर्कआउट… आजकल लोग देर रात तक ऑफिस में काम करते हैं. जिसके कारण उनकी नींद पूरी नहीं होती है. इसकी वजह से कई तरह की फिजिकली और मेंटली प्रॉब्लम्स हो सकती हैं. स्ट्रेस-डिप्रेशन जैसी समस्याएं भी होने लगती है. इनकी वजह से ब्लड प्रेशर, हार्ट डिजीज का जोखिम भी बढ़ सकता है. यही वजह है कि हर किसी को 6 से 8 घंटे की पर्याप्त नींद लेने की सलाह दी जाती है. नींद की कमी से कई तरह की समस्याएं होती हैं, जिनमें फर्टिलिटी (sleep affects fertility) पर पड़ने वाला नकारात्मक असर भी शामिल है. नींद की कमी से फर्टिलिटी की समस्या सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के मुताबिक, अगर आप पर्याप्त नींद नहीं लेते हैं तो यह आपकी प्रजनन (reproductive hormones) से संबंधित हार्मोन को प्रभावित कर सकती है. दिमाग को जो हिस्सा ‘स्लीप वेक हार्मोन’ को कंट्रोल करता है. वह नींद पूरी न होने पर महिलाओं में ओव्यूलेशन और पुरुषों में शुक्राणुओं (sperms) पर नकारात्मक असर छोड़ता है. स्टडी के मुताबिक, अगर महिलाएं ज्यादा लंबे समय तक नींद पूरी नहीं करती हैं तो एस्ट्रोजेन, प्रोजेस्टेरोन, प्रोलैक्टिन और ल्यूटिनाइजिंग जैसे प्रजनन हार्मोन्स पर सीधा असर पड़ता है और इससे बांझपन (infertility) की समस्या हो सकती है. एक्सपर्ट से जानिए साइंटिस्ट बताते हैं कि पुरुषों में स्वस्थ शुक्राणु के उत्पादन के लिए टेस्टोस्टेरोन हार्मोन सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. जब आप सोते हैं, तब नींद के दौरान ही यह हार्मोन रिलीज होता है. बोस्टन यूनिवर्सिटी की रिसर्च टीम और महामारी विज्ञान (epidemiology) के प्रोफेसर लॉरेन वाइज के मुताबिक, कई स्टडी में पता चला है कि ऐसे लोग जो पर्याप्त नींद लेते हैं, उनमें टेस्टोस्टेरोन का स्तर प्रजनन के लिए सही बना रहता है. वहीं, कम नींद लेने से प्रजनन की समस्याओं का जोखिम ज्यादा रहता है. क्या कहता है रिसर्च बोस्टन यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ ने एक स्टडी में 790 कपल पर रिसर्च किया. कई लेवल पर रिसर्च के बाद पाया गया कि ऐसे लोग जो हर दिन 6 घंटे की नींद लेते हैं, उनमें गर्भधारण से संबंधित समस्याओं का खतरा ज्यादा रहा है. ऐसे पुरुष जो बहुत कम या बहुत देर तक सोते थे, उनमें प्रजनन समस्याएं 42% ज्यादा पाया गया. पर्याप्त नींद लेने के लिए क्या करें हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, अपनी दिनचर्या ऐसे बनाए, जिसमें पर्याप्ट नींद मिल सके. यह भी पढ़ें : हफ्ते में सिर्फ दो दिन एक्सरसाइज से एक्टिव होगा ब्रेन, बीमारियां भी होंगी कोसो दूर रोजाना एक्सरसाइज-वर्कआउट करें सोने-जागने का समय तय करें और रोजाना इसे फॉलो करें. बेडरूम को शांत और कम रोशनी वाला ही रखने की कोशिश करें, जिससे अच्छी नींद मिले. शराब से जितना हो सके दूरी बनाएं. यह नींद को प्रभावित करता है.

जान लें आधार कार्ड अपडेट करने के नियम और शर्तें

नई दिल्ली आधार कार्ड को यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी UIDAI की तरफ से जारी किया जाता है। आधार कार्ड एक जरूरी दस्तावेज है। इसका इस्तेमाल कई तरह की सर्विस के लिए किया जाता है। आधार कार्ड की मदद से नया सिम कार्ड खरीदने से लेकर, बैंक अकाउंट खोलने और सरकारी सब्सिडी के लिए आवेदन किया जा सकता है। साथ ही आधार कार्ड की मदद से पासपोर्ट हासिल किया जा सकता है। ऐसे में आधार पर दर्ज जानकारी सही होनी चाहिए। अगर आपके आधार पर दर्ज जानकारी गलत है, तो उसे तुरंत अपडेट कर लेना चाहिए। आधार कार्ड पर डेट ऑफ बर्थ, मोबाइल नंबर और एड्रेस को अपडेट किया जा सकता है। आधार को UIDAI वेबसाइट की मदद से myAadhaar पोर्टल से ऑनलाइन अपडेट किया जा सकता है। मौजूदा वक्त में यूजर बिना किसी फीस की मदद से आधार को अपडेट कर सकते हैं। कितनी बार आधार में कर सकते हैं बदलाव आधार कार्ड पर कई सारे अपडेट को किया जा सकता है। हालांकि आधार अपडेट की कुछ लिमिटेशन भी हैं। जैसे आधार कार्ड पर नाम को बदला जा सकता है। आधार कार्ड पर दर्ज नाम को पूरे जीवन में दो बार बदला जा सकता है। इसके बाद नाम बदलने के लिए UIDAI के अप्रूवल की जरूरत होगी। साथ ही आपको सपोर्टिव डॉक्यूमेंट देने होंगे कि आखिर आपकी तरफ से नाम क्यों बदला जा रहा है। आधार पर नाम के अलावा ऐड्रेस को बदलने के लेकर कोई नियम नहीं है। इसे लाइफटाइम में कितनी भी बार बदला जा सकता है। समय पर न हो आधार अपडेट तो क्या करें? UIDAI की तरफ से ज्यादातर आधार कार्ड की रिक्वेस्ट को 30 दिनों के भीतर अप्रूव कर दी जाती है। अगर आपके आधार कार्ड को पूरा करने में 90 दिनों का वक्त लगता है, तो आपको 1947 पर कॉल करना चाहिए या फिर UIDAI से संपर्क करना चाहिए। फ्री में अपडेट करें आधार UIDAI की तरफ से सभी आधार यूजर्स को आधार कार्ड अपडेट को कहा गया है। केंद्र सरकार की मानें, तो 10 साल पुराने आधार कार्ड को अपडेट कर लेना चाहिए। अगर आप 14 दिसंबर 2024 से पहले ऑनलाइन आधार कार्ड अपडेट कराते हैं, तो आपसे कोई चार्ज नहीं लिया जाएगा, क्योंकि 14 दिसंबर 2024 तक सरकार फ्री में आधार कार्ड अपडेट की सुविधा दे रही है।

हायपर कोलेस्ट्रॉल से प्रभावित हृदय

विज्ञान के नित-नये अविष्कारों ने इंसान को चकाचैंध कर दिया है। चिकित्सा जगत में तो अजूबे अविष्कार हुए हैं। अलग-अलग यंत्र, मशीनें, अनेक औषधियां और न जाने कितनी सुविधाएं पर फिर भी रोगों का ताड़व कम नहीं हुआ है बल्कि अनेक व्याधियों ने इंसान को अपने पंजे में जकड़ रखा है। हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, डायबिटिज आज के संघर्षशील युग की देन हैं। इसके अलावा आज हमें हायपरकोलेस्ट्राल के भी अधिकांश रोगी मिलते हैं। इसका कारण है हमारे आहार-विहार में विषमता, क्योंकि हमें ऐशोआराम की जिन्दगी पसन्द है। हम श्रम से कतराते हैं, ऐसी जिन्दगी का ही परिणाम है-हायपरकोलेस्ट्राल। हृदय रोग को बढ़ानेवाला यह कोलेस्ट्राल है जिसे नियंत्रण में रखना शरीर के लिए अत्यावश्यक है। इसकी अधिक मात्रा हृदय व मस्तिष्क धमनियों को जितना नुकसान पहुंचाती है, वैसे ही इसकी प्राकृत मात्रा शरीर को स्वस्थ रखने में सक्षम रहती है। कोलेस्ट्राल का अंतर्भाव लिपिड में होता है। ये लिपिड 5 प्रकार के होते हैं और मनुष्य शरीर के महत्वपूर्ण घटक हैं। सभी प्राणियों के कोषों में कोलेस्ट्राल होता है व अधिकांशतः यह नाड़ी संस्थान में रहता है। इसका स्राव पित्तरस में होता है व यकृतीय संवहन में यह सहभागी होता है। चिकित्सीय दृष्टि से इसका अत्यन्त महत्व है। शरीर में निर्मित सभी प्रकार के स्टेराइड हार्मोन का भी आवश्यक अंग है। लिपिड के एकत्रीकरण, संवहन, ट्रांसपोर्ट व उत्सर्जन में विकृति होने पर अनेक व्याधियां उत्पन्न होती हैं जैसे मोटापा, यकृतप्लीहा का बढ़ना, एथेरोस्क्लेकोसिस, अग्न्याशय में सूजन, पित्तामशरी इत्यादि। इन सब में एथोरोस्क्लेरोसिस सबसे महत्वपूर्ण है जो कि लिपिड के एकत्रीकरण से होता है। धमनियों में कोलेस्ट्राल जमा होने से कड़कपन आ जाता है फलस्वरूप धमनियों का मार्ग संकरा हो जाता है जिससे धमनियों का मार्ग संकरा हो जाता है जिससे धमनियों में स्थित रक्त हृदय, मस्तिष्क व शरीर के अन्य भागों में कम पहुंचता है। यह रूकावट हृदय की धमनियों में होने से छाती में दर्द (एन्जाइना) या कभी-कभी हार्ट अटैक भी होता है। यह रूकावट नाड़ीवह संस्थान यानी मस्तिष्क में होने पर स्मरणशक्ति का नाश, मस्तिष्क के उच्चतम कार्यों में विकृति, लकवा व वृद्धावस्था में व्यवहार, स्वभावादि में अंतर आता है। इसके अलावा अन्य अंगों की धमनियों में यह कोलेस्ट्राल जमा होकर गैंगरीन उत्पन्न करता है। इस कोलेस्ट्राल से लेरिक सिंड्रोम नामक व्याधि भी होती है जिसमें मुख्यतः पेट व पैरों की धमनी में रूकावट होता है। उच्च रक्तचाप, मधुमेह के रोगी में कोलेस्ट्राल की मात्रा बढ़ने से रक्तवाहिनी में जमा होने की आशंका ज्यादा रहती है, अतः उच्च रक्तचाप व मधुमेह रोगी को कोलेस्ट्राल निवारक आहार लेना आवश्यक है जिसमें सलाद, हरी सब्जी, अंकुरित आहार, फल, छाछ की प्रचुर मात्रा हो। कोलेस्ट्राल की मात्रा सामान्य करने में सबसे महत्वपूर्ण है-आहार, विहार पर नियंत्रण होना। आहार में चर्बीयुक्त पदार्थ जैसे तेल, घी, मांसाहार, शराब, आलू, चावल इत्यादि का सेवन कम करें। विहार में मानसिक तनाव से बचें। हायपर कोलेस्ट्राल के रूग्णों को अक्सर मोटापा अधिक रहता है अतएव उन्हें वजन पर नियंत्रण रखना अनिवार्य है। कोलेस्ट्राल कम करने के लिए आयुर्वेद संहिताओं में मेदोहर औषधियां वर्णित है। इनमें मुख्यतया त्रिकटु, कुटकी, लहसुन, पुनर्नवा, विडंग इत्यादि चिकित्सक के परामर्शानुसार लेना चाहिए। इसके अलावा आरोग्यवर्घिनी व त्रिफला गुग्गुल 2 चम्मच सुबस-शाम लेना चाहिए। साथ में मोटापा होने पर चिकित्सक के परामर्शानुसार ही औषधि लेनी चाहिए। हायपरकोलेस्ट्राल के कारण अधिकतर हृदयगत धमनियां (कोरोनरी आर्टरीस) प्रभावित होती हैं जिससे हृदयगत विकार जैसे छाती में दर्द (एन्जाइना) जैसी (व्याधियां) होती हैं। आधुनिक चिकित्सानुसार इसमें एंजियोप्लास्टी करके धमनियों में से कोलेस्ट्राल को साफ करते हैं परन्तु फिर भी इन रूग्णों को सावधानियां रखनी पड़ती हैं जिससे फिर न एंजियोप्लास्टी करवानी पड़े। आयुर्वेद शास्त्र में कोलेस्ट्राल को कम करने व धमनियों का संकरापन दूर करने के लिए अनेक औषधियां हैं जिससे एंजियोप्लास्टी करने की संभावना कम होती है। अतएव योग्य चिकित्सक के मार्गदर्शन में मेदोहर व हृदय औषधि लेकर एंजियोप्लास्टी से बचा जा सकता है।  

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