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जानिए कॉफी कैसे रखे आपको रोगों से दूर

एक नई रिसर्च का कहना है कि प्रतिदिन तीन कप कॉफी पीने से कुछ बीमारियों के कारण समयपूर्व मौत का खतरा कम हो सकता है। हावर्ड युनिवर्सिटी के टीएच. चान स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के शोधकर्ताओं के अध्ययन में पता चला है कि कैफीन युक्त या कैफीन रहित दोनों तरह की कॉफी पीने के कई फायदे हैं। इससे होने वाले फायदों में दिल के रोगों, मस्तिष्क संबंधी रोगों और टाइप टू डायबिटीज से रक्षा शामिल है। इतना ही नहीं इस नए शोध में यह बात भी कही गई है कि कॉफी के इतनी मात्रा में सेवन से आत्महत्या का खतरा भी कम हो सकता है। हर चार साल पर जांच के साथ 30 साल तक चला शोध इस शोध से जुड़े मिंग डिंग ने बताया कि कॉफी में मौजूद बायोएक्टिव यौगिक इंसुलिन प्रतिरोध और प्रणालीगत सूजन को कम करते हैं। कॉफी पीने के प्रभाव को स्वीकृत भोजन पर आधरित प्रश्नों की सूची के आधार पर हर चार वर्ष के अंतराल में 30 वर्षों की अवधि तक जांचा गया है। इस जांच में प्रमाणित हुआ कि संयत कॉफी सेवन से दिल के रोगों, पर्किंसन्स जैसे मस्तिष्क संबंधी रोगों, टाइप टू डायबिटीज सहित आत्महत्या से मौत का खतरा कम हो सकता है। जाने कॉफी के फायदे… -कुछ लोग सोचते हैं कि कॉफी पीने से बच्चों का विकास रुक जाता है। जबकि हकीकत में शोधों में इस बात को खारिज किया जा चुका है कि कॉफी की वजह से बच्चों का वजन या लंबाई नहीं बढ़ती है। -रोजाना कॉफी पीने से सेहत खराब होती है, जबकि इसके उलट हर दिन कॉफी पीना आपको तरोताजा रखने में मदद देता है और आपकी सेहत भी अच्छी रहती है। -अगर रोजाना दो से चार कप कॉफी पी जाए तो ऐसे लोगों में स्ट्रोक का खतरा काफी कम हो जाता है। जबकि जो लोग बिल्कुल भी कॉफी नहीं पीते, उनमें यह खतरा बरकरार रहता है। -काफी पीने से लिवर कैंसर का खतरा भी कम हो जाता है। स्तन कैंसर और फेफड़ों के कैंसर में थोड़ी मात्रा में कॉफी पीना मददगार साबित हो सकता है।   -पार्किंसन और अल्जाइमर की बीमारियों में भी कॉफी काफी फायदेमंद पाई गई।  

स्मार्टफोन से डिलीट हुए ऐप्स से इस तरह डिसेबल करें एप ट्रैकर

ऐप डेवलपर्स आपके स्मार्टफोन्स में अनइंस्टॉल या डिलीट किए गए ऐप्स के बारे में जानकारी प्राप्त कर लेते हैं। ऐसा डेवलपर्स इन ऐप्स के साथ इंस्टॉल हुए एप ट्रैकर की मदद से करते हैं। अगर, आपको कोई ऐप पसंद नहीं आया और आपने उस ऐप को अपने फोन से डिलीट कर दिया तो ऐप डेवलपर्स को पता लग जाता है कि आपने अपने फोन से ऐप को डिलीट कर दिया है। इसके बाद ऐप डेवलपर्स आपको ट्रैक करके नोटिफाई करता है कि आप उस ऐप को फिर से इंस्टॉल करें। यह बात ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में सामने आई है। दोनों ही एंड्रॉइड और आईओएस ऑपरेटिंग सिस्टम के यूजर्स को ये ऐप ट्रैकर्स बार-बार इन ऐप्स को रिइंस्टॉल करने को कहती है। इन ऐप ट्रैकर्स के जरिए यूजर्स के डाटा लीक का खतरा बना रहता है क्योंकि ऐप डेवलपर्स के पास आपकी निजी जानकारियां पहुंच सकती हैं। इन एप ट्रैकर  को अपने स्मार्टफोन से हटाने के लिए आप नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो कर सकते हैं। आईफोन यूजर्स इस तरह से हटा सकते हैं एप ट्रैकर…. सबसे पहले होम स्क्रीन पर मौजूद सेटिंग्स पर टैप करें। इसके बाद प्राइवेसी पर टैप करें। इसके बाद लोकेशन सर्विस पर टैप करें। इसके बाद सिस्टम सर्विसेज पर टैप। इसके बाद आप सिग्निफिकेंट लोकेशन्स पर टैप करें। अपने फोन का पासकोड, फेस आईडी या फिर फिंगरप्रिंट दर्ज करें। इसके बाद आप सिग्निफिकेंट लोकेशन्स ऑन या ऑफ स्विच पर टैप करें। जब स्विच का रंग ग्रे हो जाएगा तो समझ लिजिए की आप एप ट्रैकर  को डिसेबल हो गया है। एंड्रॉइड यूजर्स इस तरह डिसेबल करें एप ट्रैकर… सबसे पहले होम स्क्रीन पर मौजूद सेटिंग्स पर टैप करें। दिए गए विकल्पों में से लोकेशन पर टैप करें। यहां आपको रिसेंट लोकेशन रिक्वेस्ट्स मे गूगल का ऑप्शन दिखाई देगा, उस पर टैप करें। यहां परमिशन्स पर टैप करें।    

कौन सा वाई-फाई राउटर है आपके लिए बेहतर, इन टिप्स से करें सिलेक्ट

इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले यूजर्स की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। कई यूजर्स तो ऑफिस के बाद घर में भी इंटरनेट की मदद से काम करते हैं। इतना ही नहीं, लैपटॉप के साथ स्मार्टफोन पर भी इंटरनेट की जरूरत होती है। ऐसे में वाई-फाई नेटवर्क बेस्ट ऑप्शन होता है। वाई-फाई की मदद से यूजर्स कई डिवाइस एक साथ कनेक्ट कर सकता है। साथ ही, इससे बेहतर स्पीड भी मिलती है। वाई-फाई नेटवर्क के लिए राउटर की जरूरत होती है। ऐसे में यदि आप मार्केट से नया वाई-फाई राउटर लेने जा रहे हैं, तो कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखें। इन बातों की मदद से आप बेहतर वाई-फाई राउटर का चयन कर पाएंगे। टिप्स नंबर-1 आपके पास है कौन-सा कनेक्शन वाई-फाई राउटर लगाने से पहले इस बात का ध्यान जरूर रखें कि आपको पास कौन-सा कनेक्शन हैं। यानी क्या आप राउटर की सर्विस अपनी फोन लाइन के जरिए लेना चाहते हैं। भारत में कई यूजर्स जो फोन के जरिए वाई-फाई राउटर का इस्तेमाल करते हैं उनके घरों में एमटीएनएल या बीएसएनएल का कनेक्शन होता है। ऐसे में आपको ऐसे हार्डवेयर का इस्तेमाल करना है जो आपके कनेक्शन के साथ ठीक रहे। ऐसे में आपके लिए एडीएसएल राउटर ठीक रहेगा। हालांकि, इस तरह के राउटर से आपको किसी फिक्स जगह पर पीसी का इस्तेमाल करना होगा, लेकिन आपका राउटर वायरलैस है तो इसकी जरूरत नहीं होगी। एडीएसएल में कई एडवांस राउटर भी आते हैं, जिससे आप स्टोरेज और प्रिंटर भी कनेक्ट कर सकते हैं। टिप्स नंबर-2 स्टैंडर्ड कैसा हो? जो राउटर 802.11एसी स्टैंडर्ड को सपोर्ट करते हैं, वो बेहतर होते हैं। इनकी डाटा ट्रांसफर स्पीड 802.11एन से तीन गुना ज्यादा होती है। ये 5गीगा हटर्ज फ्रिक्वेंसी बैंड पर इस्तेमाल किए जाते हैं, जो रेग्युलर 2.4गीगा हटर्ज बैंड से कम होते हैं। हालांकि, इनका नेटवर्क परफॉर्मेंस बेहतर होता है। खासकर, स्ट्रीमिंग मीडिया कंटेंट के लिए ये बेस्ट हैं। इन राउटर का बेस्ट पार्ट है कि ये ‘एन’ स्टैंडर्ड के साथ कम्फर्टेबल हैं। यानी आपका पुराना डिवाइस भी बिना किसी प्रॉब्लम के बेहतर काम करेगा। इतना ही नहीं, आप इससे पैसे भी बचा सकते हैं। टिप्स नंबर-3 डुअल-बैंड आपको बता दें कि ‘एन’स्टैंडर्ड वाले राउटर 2.4गीगा हटर्ज फ्रिक्वेंसी बैंड पर काम करते हैं। इतना ही नहीं, माइक्रोवेव ओवन, कोर्डलैस फोन और ब्लूटूथ डिवाइस भी इसी स्पैक्ट्रम पर ऑपरेट किए जाते हैं। इसके चलते ये सिग्नल और पावर को कम करत सकते हैं। ऐसे केस में बेहतर होगा कि आप डुअल-बैंड राउटर का इस्तेमाल करें, जो 5गीगा हटर्ज बैंड को भी सपोर्ट करेगा। ऐसे में आप अपना स्मार्टफोन और लैपटॉप 5गीगा हटर्ज बैंड के साथ कनेक्ट कर पाएंगे, जो 2.4गीगा हटर्ज से ज्यादा स्पीड देगा। टिप्स नंबर-4 यूएसबी पोर्ट्स यूएसबी पोर्ट वाले राउटर में आप फ्लैश ड्राइव के साथ प्रिंटर भी नेटवर्क पर शेयर कर सकते हैं। ये किसी छोटे ऑफिस या जगह के लिए सबसे बेस्ट और कामयाब फंक्शन होता है। इनका इस्तेमाल वायरलेस नेटवर्क के तौर पर भी किया जा सकता है। इनमें कुछ राउटर 3जी डाटा डोंगल को सपोर्ट करते हैं, लेकिन ये स्पेशिफिक बैंड के होना चाहिए। ऐसे में राउटर खरीदने से पहले इस बात को जरूर चेक करें कि वो आपके डोंगल को सपोर्ट करेगा या नहीं। टिप्स नंबर-5 मल्टीपल एंटीना राउटर में मल्टीपल एंटीना लगाकर उसकी रेंज को बढ़ाया जा सकता है, लेकिन इसकी रेंज घर या ऑफिस की दीवारों और विंडो से भी बाहर हो जाती है। ऐसे में कोई आपके वाई-फाई का इस्तेमाल कर सकता है।  

सीधे बालों को कर्ल करने के आसान तरीके

लड़कियो कि असली खूबसूरती का राज उनके बाल होते हैं। अपने बालों को नया लुक देकर जब आप खुद को एक नये अंदाज में देखते हैं तो इस खुशी का अंदाजा लगाना भी मुश्किल होने लगता है। लेकिन बाल जब एक ही तरह के दिखते हैं तब आप खुद में बोरियत पन का अहसास करने लगते हैं। और फिर बाल अगर सिल्की स्ट्रेट हो तब तो कोई भी स्टाइल बना पाना और भी मुश्किल हो जाता है। इससे ज्यादा बोरिंग और क्या होगा कि आप कहीं भी जाए बस एक ही हेयर स्टाइल हो। कई बार तो ऐसा भी होता है कि पार्टी में जाने के लिए बालों को एक नया लुक देने के लिए आप पार्लर में न जाने कितना पैसे खर्च करते हैं लेकिन जैसे ही आप सैलून से बाहर निकलती हैं ये लॉक्स फिर से फ्लैट हो जाते हैं। इसीलिए हम आपको बताते हैं कुछ ऐसे टिप्स, जिन्हें फॉलो कर आप अपने घर पर ही इन कर्ल्स को ज्यादा टाइम तक टिका सकती हैं। सावधानियां:- बालों में ज्यादा कंडीशनर उन्हें और फिर सिल्की बनाता है और इससे बालों में कर्ल्स टिक नहीं पाते। इसीलिए कंडीशनर कम लगाएं। साथ ही हमेशा हेयर वॉश करने के अगले दिन ही बालों को कर्ल करें। क्योंकि ऐसे में बालों में नैचुरल ऑयल होगा, यदि आप बालों में कर्लिंग आयरन लगा रहे है तो ध्यान दे कि इससे पहले बालों में मूस लगा लें। एक बेसबॉल साइज जितना मूस लें और बालों की जड़ों से लेकर एंड्स तक लगाएं। ये आपके बालों के ऊपर एक कवच बनाएगा, जिससे कर्ल्स अच्छे से टीके रहेंगे। आप नारियल या आर्गन तेल भी लगा सकती हैं। बाल कर्ल बनाए रखने के तरीके… कर्ल और क्लिप-कुछ सेकेंड्स में कर्ली बाल पाने के लिए कई कर्लिंग रॉड्स और फ्लैट आइरन्स आती हैं। लेकिन कर्ल करने के बाद आपका अगला स्टेप होना चाहिए क्लिप। अगर आपके बाल बहुत कर्ल हैं तब तो ये बहुत जरूरी है। इसीलिए बालों को कर्ल करने के 5 सेकेंड बाद बालों से रॉड हटाएं और डकबिल क्लिप या बॉबी पिन लगा लें। 5 से 10 मिनट रूकें। अगर आप हीट डैमेज से बालों में होने वाले नुकसान के बारे में परेशान हैं तो रात भर सॉफ्ट स्पॉंज रोलर्स लगा कर सोएं। इससे आपको बिना बालों को डैमेज किए वही रिजल्ट मिलेगा। बालों से क्लिप खोलने के बाद बालों को उंगलियों से बिखेरें। आप कैसे भी कर्ल करें, हर बार उन्हें उंगलियों से ही बिखेरे, इससे कर्ल्स बालों में ज्यादा टाइम तक बने रहेंगे। आखिर में हेयर स्प्रे लगाएं, बस आप तैयार हैं।  

किचन को रीडिजाइन कर देते हैं कैबिनेट्स

कौन-सी हाऊसवाइफ नही चाहेगी कि उसका किचन सबसे अच्छा दिखे। यदि आप अपनी किचन को अलग लुक देना चाहती हैं तो जरूरी है कि उस में लगाई जाने वाली सभी चीजों पर खास ध्यान दिया जाए। यदि बात किचन कैबिनेट्स की करी जाए तो वे न सिर्फ चीजों को स्टोर करने के लिए जगह देते हैं, बल्कि किचन को स्टाइलिश लुक भी देते हैं। आज मार्केट में किचन कैबिनेट्स की ढेरों वैराइटीज उपलब्ध हैं। फिर चाहे बात कलर्स की हो या साइज की, आप इन्हें अपनी किचन के अकौर्डिंग सैट करा सकती हैं।   स्टेनलैस स्टील कैबिनेट्स यदि आप लकड़ी के कैबिनेट्स नहीं लगाना चाहतीं, क्योंकि आप के घर में दीमक जल्दी लग जाती है, तो आप स्टेनलैस स्टील कैबिनेट्स लगवा सकती हैं। ये आजकल काफी ट्रैंड में हैं। इन में न तो दीमक लगने का डर रहता है और न ही ये जल्दी गलते हैं। साथ ही स्टाइलिश लुक भी देते हैं।   स्टोरेज कैबिनेट्स आप की किचन के साथ कोई स्टोर नहीं है और आप को किचन का सामान रखने में दिक्कत होती है, तो आप किचन के लिए स्टोरेज कैबिनेट्स खरीदें। इस में दराजें और अलमारियां काफी बनी होती हैं, जिन में आप आराम से सामान रख सकती हैं। आप महीने भर का सामान भी इन में स्टोर कर सकती हैं, बस इन्हें खरीदते समय यह देख लें कि ये आप की जरूरत के अकौर्डिंग हैं या नहीं। आप इन्हें अपनी जरूरत के अनुसार डिजाइन भी करवा सकती हैं।   ग्लास कैबिनेट्स यदि आप अपनी किचन को अलग लुक देना चाहती हैं तो ग्लास कैबिनेट्स अपनी किचन में शामिल करें। इन की खासीयत यह होती है कि इन में बनी अलमारियों के दरवाजे ग्लास के होते हैं, जिस से आप को उन में रखा सामान आसानी से नजर आ जाता है। साथ ही यदि आप की क्रौकरी काफी स्टाइलिश है तो आप अलमारी में उन्हें लगवा कर किचन को अट्रैक्टिव लुक दे सकती हैं। इन की आप को ढेरों वैराइटियां और डिजाइन मार्केट में मिल जाएंगे। ग्लासेज को स्टाइलिश लुक देने के लिए इन पर डिजाइनिंग भी की जाती है।   मौडर्न कैबिनेट्स आज जमाना मौडर्न किचन का है। किचन में लगी हर चीज मौडर्न लुक में मार्केट में मिल रही है। यदि आप चाहती हैं कि आप के लिविंग और बैडरूम की तरह किचन भी मौडर्न लुक दे तो इस के लिए मार्केट में कैबिनेट्स के ढेरों डिजाइन और कलर उपलब्ध हैं। कैबिनेट्स की डिजाइनिंग में अलमारियों की शेप्स व कलर्स का वर्क काफी मौडर्न तरीके से किया जाता है। कुछ शैल्फ सामने की तरफ बनाई जाती हैं, जिन में आप कुछ डैकोरेटिव आइटम्स भी सजा सकती हैं। साथ ही इन में दराजों को इस तरह से डिजाइन किया जाता है कि आप कंफर्टेबल हो कर उन को यूज कर सकें। इन में लाइट भी कुछ अलग तरह की यूज की जाती है जिस से आप की किचन काफी अट्रैक्टिव नजर आती है। किचन के हर सामान के लिए प्रौपर अलमारियां और दराजें डिजाइन की जाती हैं।   सिंपल कैबिनेट्स आप को अपनी किचन सिंपल ऐंड सोबर पसंद है तो सिंपल ऐंड सोबर लुक देते कैबिनेट्स मार्केट में आराम से मिल जाएंगे। ये जगह भी कम घेरते हैं और साथ ही इन में दराजें और अलमारियां भी कम बनी होती हैं। इस से आप को सामान ढूंढ़ने की जरूरत नहीं पड़ती है। इन में ज्यादातर 1-2 कलर यूज किए जाते हैं ताकि किचन सिंपल नजर आए। इन के हैंडल भी बिलकुल सिंपल लुक में होते हैं।   खरीदते समय रखें ध्यान…. टाइप ऐंड स्टाइलः मार्केट में आप को कैबिनेट्स की ढेरों किस्में और स्टाइल मिल जाएंगे। लेकिन जरूरी है कि आप अपनी किचन के अकौर्डिंग कैबिनेट्स खरीदें। आप को सामान को रखने के लिए कितनी स्पेस चाहिए इस को ध्यान में रखते हुए भी आप इन्हें डिजाइन करवा सकती हैं। कैबिनेट्स फ्रेम्ड या फ्रेमलैस दोनों तरह के मिलते हैं। यह आप पर निर्भर करता है कि आप किस तरह के कैबिनेट्स लगवाना पसंद करती हैं।   मैटीरियलः किचन कैबिनेट्स में आप को कई तरह का मैटीरियल मार्केट में मिलेगा। यह देखना जरूरी है कि आप को किस मैटीरियल से अपनी किचन को अलग लुक देना है।अपने कंफर्ट और रेंज को देखते हुए आप इन्हें खरीद सकती हैं।   कलर्सः घर का कोई भी कोना हो, उस में कलर बहुत माने रखते हैं। किचन कैबिनेट्स आप अपनी किचन के कलर के अकौर्डिंग ले सकती हैं। कैबिनेट्स में कुछ कलर्स कौमन हैं जैसे व्हाइट, सिलवर, ब्राउन, ब्लैक जिन्हें आप बिना मैचिंग के भी लगवा सकती हैं। वैसे आजकल कलर कौंबिनेशन का भी काफी ट्रैंड है. 2 या 3 कलर का प्रयोग कर के कैबिनेट्स को अट्रैक्टिव बनाया जाता है।   टिकाऊः कैबिनेट्स खरीदते समय ध्यान रखें कि उन का मैटीरियल टिकाऊ हो। यदि लकड़ी का कैबिनेट है तो उस की लकड़ी अच्छी क्वालिटी की हो। यदि कैबिनेट स्टेनलैस स्टील का है तो वह भी बढ़िया क्वालिटी में हो। मार्केट में लाइट से ले कर हैवी सभी तरह की क्वालिटी आप को मिल जाएगी।  

सेफ मोबाइल बैंकिंग के लिए अपनाएं ये 5 तरीके

आज ट्रांजेक्शन के लिए लगभग हर व्यक्ति मोबाइल बैंकिंग का यूज करता है,लेकिन यह बात परेशानी का कारण तब बन जाती है अगर आपका मोबाइल खो जाएं या चोरी हो जाएं। इसलिए थोड़ी सी लापरवाही आपके लिए खतरे का अलार्म लेकर आ सकती है और ऐसे में जरूरत पड़ती है कि आप सोच-समझकर मोबाइल बैंकिंग का उपयोग करेंः प्राइवेट इंफॉर्मेंशन का रखें ख्याल: मोबाइल बैंकिंग का यूज करते समय प्राइवेट इंफॉर्मेशन जैसे- अकाउंट नंबर, डेट ऑफ बर्थ, पासवर्ड, डेबिटध्क्रेडिट कार्ड और पैन कार्ड जैसी निजी जानकारियां गोपनीय रखें अन्यथा हैकर्स आपका बैंक अकाउंट हैक करके आसानी से आपको नुकसान पहुंचा देंगे, इसलिए जरूरत है फोन को सिक्योरिटी सॉफ्टवेयर से सुरक्षित किया जाएं। पब्लिक वाइ-फाइध्ब्लूटूथ से बचें: अगर मोबाइल बैंकिंग का यूज कर रहे हैं तो ध्यान रखें कि गलती से भी पब्लिक वाइ-फाइ व मोबाइल ब्लूटूथ का उपयोग न करें, क्योंकि इनके द्वारा वायरस आपके मोबाइल पर अटैक कर सकता है। इस खतरे से बचने के लिए आप मोबाइल में एंटी वायरस फायरबॉल और सेफ्टी सॉफ्टवेयर टाइम-टाइम पर अपडेट करते रहें। ब्राउजिंग हिस्ट्री का रखें ध्यान: जब भी आप मोबाइल बैंकिंग का यूज करते हैं तो तभी अपने स्मार्टफोन से ब्राउजिंग हिस्ट्री डिलीट करते जाएं, इससे अगर फोन खो जाएं या हैक हो भी हो जाएं तो आपको नुकसान नहीं होगा। स्ट्रांग पासवर्ड लगाएं: जब भी आप मोबाइल बैंकिंग का इस्तेमाल करते हैं क्या उसमें ऑटोलॉक लगाकर रखते हैं? सेफ मोबाइल बैंकिंग के लिए अपने मोबाइल में ऑटोलॉक जरूर लगाएं। इसके लिए आप कैरेक्टर, न्यूमैरिक और स्पेशल कैरेक्टर्स का 8 डिजीट वाला या उससे ज्यादा के कैरेक्टर का एक स्ट्रांग पासवर्ड चुनें। ट्रस्टेड साइट पर ब्राउजिंग करें: जब भी मोबाइल में ब्राउजिंग करें तो ध्यान रखें कि साइट विश्वसनीय हो, विशेषकर अगर आप गेम्स, एप्स, गाने और वीडियो डाउनलोड कर रहे हैं। बहुत बार देखा गया है कि किसी भी साइट से डाउनलोड करना महंगा साबित हो जाता है चूंकि डाउनलोडिंग के साथ-साथ वायरस अटैक का खतरा और बढ़ जाता है।  

एसिडिटी में जरूर अपनाएं ये घरेलू नुस्खे

एसिडिटी एक बहुत ही आम समस्या है जो हर दिन किसी ना किसी को होती ही है। जब एसीडिटी होती है तब सीने और छाती में जलन होने लगती है। खाने का सही तरीके से पाचन नही होता है जिससे बाद में घबराहट, खट्टी डकारों के साथ गले में जलन सी महसूस होती है। अगर आपको एसिडिटी, पेट दर्द और गैस जैसी समस्या है तो जरूर आजमांए ये घरेलू नुस्खे और पाएं एसिडिटी से राहत। खाली पेट रोज सुबह नींबू पानी पियें। इससे आपके पेट में कभी भी एसिडिटी नहीं होगी। आप इसको पी कर अपना वजन भी घटा सकते हैं। ग्रीन टी चाय पीने की जगह पर ग्रीन टी पियें क्योंकि इसमें एंटीऑक्सीटडेंट होता है जो इंफेक्शडन और एसिडिटी को जल्दग ठीक करता है। आप चाहें तो ग्रीन टी में नींबू का रस भी मिक्सह कर सकती हैं। एसिडिटी का पेट दर्द दूर करने के लिये फ्रिज में रखा ठंडा दूध बडे़ काम आ सकता है। अगर रात में एसिडिटी बनें तो ठंडा दूध पियें। एप्प ल साइडर वेनिगर एक गिलास ठंडे पानी में 1 छोटा चम्मठच एप्पबल साइडर वेनिगर मिक्सो करें और धीरे धीरे कर के पियें। इससे आपके पेट को राहत मिलेगी और इंफेक्शडन भी दूर होगा। छाछ या मठ्ठा छाछ में एक चुटकी नमक डाल कर पियें। आपको 5 मिनट में ही राहत मिल जाएगी। इसको बिना काली मिर्च डाले ही पियें। चावल का पानी चावल को खुले भगौने में पका कर उसका पानी निकाल कर उसमें नींबू का रस मिक्स। करें। इसे पियें और एसिडिटी से राहत पाएं।  

सॉफ्टवेयर के बगैर पेन ड्राइव पर लगाएं पासवर्ड

स्मार्टफोन गुम होने या चोरी होने पर उसका डाटा एंड्रॉयड डिवाइस मैनेजर का इस्तेमाल कर रिमोट एक्सेस से डिलीट कर सकते हैं मगर पेन ड्राइव खो जाए तब क्या करेंगे। ऐसी समस्या से बचने के लिए आप सॉफ्टवेयर डाउनलोड कर पेन ड्राइव पर पासवर्ड सेट कर देते हैं। मगर क्या आपको पता है कि पेन ड्राइव पर बिना सॉफ्टवेयर के भी पासवर्ड लगाया जा सकता है। वहीं स्मार्टफोन में भी बिना एप के अपने निजी फोल्डर ओर फोटो को छिपा सकते हैं। आइए जानते हैं इसके बारे में… पेन ड्राइव पर पासवर्ड सेट करना बहुत ही आसान है। पासवर्ड सेट करने के लिए कंप्यूटर या लैपटॉप में दिए गए ‘स्टार्ट’ पर क्लिक करें। इसके बाद  ‘कंप्यूटर पैनल’ में जाएं। यहां दाईं तरफ ऊपर की ओर ‘व्यू बाई’ लिखा मिलेगा, उस पर क्लिक करके  ‘लार्ज आइकन’ का चुनाव करें। इसके बाद बिटलाकर ड्राइव एनएन्क्रिप्सन पर क्लिक करें। नई स्क्रीन खुलने के बाद उसमें कंप्यूटर से जुड़ी हुई ड्राइव दिखाई देंगी। इसमें ‘पेन ड्राइव’ का विकल्प भी होगा जिसके सामने बिटलाकर लिखा मिलेगा, उस पर क्लिक करें। ऐसा करने से नई विंडो स्क्रीन खुलेगी, जिसमें पेन ड्राइव के लिए पासवर्ड टाइप करना होगा। इसके बाद उस स्क्रीन पर ‘नेक्स्ट’ का विकल्प दिखाई देगा, उस पर क्लिक कर दें और आगे बढ़ें। अब स्क्रीन पर दो विकल्प आएंगे जिसमें से ऊपर की ओर सेव द पासवर्ड लिखा मिलेगा उसे चुनें। इस प्रक्रिया के बाद यूजर की पेन ड्राइव आसानी से सुरक्षित हो जाएगी। बिना सॉफ्टवेयर के छिपाएं फोन के फोल्डर स्मार्टफोन में जितने एप होते हैं, उनकी संख्या शायद ही किसी यूजर को पता हो। फोन हैंग होने की असली वजह ज्यादा एप होना भी है। अगर आपके फोन में भी ऐसा ही है तो अपने फोन में से एक एप्लीकेशन एप लॉकर या फोल्डर लॉकर  डिलीट कर दें क्योंकि यूजर बिना ‘एप लॉकर’ से भी निजी फोल्डर फोन में छिपा सकते हैं। इसके लिए फोन के एप मेन्यू में जाएं। वहां दिए गए ‘फाइल मैनेजर’ पर क्लिक करके उसके अंदर जाएं। यहां आप एसडी कार्ड और इंटरनल मेमोरी का भी चयन कर सकते हैं, जहां पर अपनी फाइलों को छिपाना चाहते हैं। मेमोरी का चयन करने के बाद फोल्डर बनाएं। फोल्डर बनाने के लिए ऊपर दाईं ओर दिए गए तीन बिन्दुओं वाले ‘सेटिंग’ के आइकन पर क्लिक करें। इसके बाद एक नई विंडो खुलेगी जिस पर ‘न्यू फोल्डर’ लिखा होगा उस पर क्लिक करते ही नया फोल्डर बन जाएगा और उस पर नाम देने का विकल्प आएगा। ध्यान रहे कि फोल्डर का नाम देने से पहले पहले डॉट (.) अवश्य लगा दें। इसके बाद ‘ओके’ का विकल्प दबाएं। फोल्डर बनाते ही वह छिप जाएगा। फोल्डर को दोबारा देखने के लिए फोल्डर बनाने वाली जगह पर जाएं और वहां ऊपर की तरफ दिए गए ‘सेटिंग’ में जाकर शो हिडन फाइल का चुनाव करें। काम होने के बाद फोल्डर को दोबारा छिपाने के लिए सेटिंग में दिए गए हाईड हिडेन फाइल पर क्लिक करना होगा।    

इस तरीकों से घर बैठे करें फोन के स्पीकर को आसानी से क्लीन

जब भी आप स्मार्टफोन खरीदने का सोचते हैं तो आपके दिल दिमाग में यह सवाल जरूर आता है कि, स्मार्टफोन की लाइफ कम ही होती है, बहुत से बहुत 2 साल के बाद आपको अपना फोन बदलना ही पड़ेगा, लेकिन कई बार ऐसा होता है कि आपका फोन नया ही रहता है बिल्कुल अच्छे से चल रहा होता है और फोन में छोटी-मोटी प्रॉब्लम आने लग जाती है, जो कि आपको काफी हद तक इरिटेट करने लग जाती है। इनमें से जो सबसे मेजर प्रॉब्लम देखने को मिलती है वह यह होती है कि फोन के सारे फंक्शन ठीक से काम कर रहे होते हैं, लेकिन फोन का वॉल्यूम आगे चलकर काम हो जाता है या आपके फोन से आवाज बहुत कम आती है। इसका नतीजा यह होता है कि किसी से फोन पर बात करने या फोन की स्पीकर में प्रॉब्लम होने से गाना सुनने में आपको बहुत समस्या देखने को मिलती है। कई बार लोग इस प्रॉब्लम को लेकर सर्विस सेंटर पहुंच जाते हैं और फोन को ठीक करने के चक्कर में काफी पैसा भी खर्च करते हैं, और कई बार ऐसा होता है कि एक प्रॉब्लम तो ठीक हो जाती है लेकिन जब सर्विस सेंटर से फोन वापस आता है तो कोई और प्रॉब्लम उसमें शुरू हो जाती है। ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि किस तरीके से फोन में आने स्पीकर सम्बंधित परेशानियों को आप घर बैठे और अपने आप से ही ठीक कर सकते हैं। फोन की करें प्रॉपर सफाई कई बार ऐसा होता है कि फोन के स्पीकर के पास बहुत ज्यादा गंदगी जमा हो जाने के कारण स्पीकर से आवाज कम आता है, तो ऐसे में अगर आप स्पीकर की सफाई कर देते हैं तो काफी हद तक आपको ही समस्या से छुटकारा मिल जाएगा। इसको करने के लिए आपको कोई भी सूखा हुआ टूथब्रश इस्तेमाल करना है और आप टूथब्रश की सहायता से स्पीकर के अंदर धीरे-धीरे करके साफ करते हैं तो काफी हद तक आप देखेंगे की गंदगी बाहर निकल रही है और ऐसा आपको हल्के हाथों से करना चाहिए। टूथब्रश के अलावा आप देखेंगे कि कई बार डिवाइस को क्लीन करने के लिए भी एक ब्रश आता है जो की काफी सॉफ्ट होता है, उस ब्रश की सहायता से भी अगर आप बाहर से ही फोन के स्पीकर को क्लीन करते हैं तो भी काफी हद तक आपको कम आवाज आने की समस्या में राहत मिलेगी और आपका फोन का स्पीकर पहले की मुकाबला काफी बेहतर परफॉर्म करता हुआ नजर आएगा। इसके अलावा आप कॉटन के कपड़े का भी इस्तेमाल कर सकते हैं और इसका इस्तेमाल करने के लिए आप थिनर या पेट्रोल में हल्का सा डीप कर लें और इससे धीरे-धीरे अगर आप फोन के स्पीकर को क्लीन करते हैं तो आसानी से क्लीन हो जाएगा। आप चाहे तो कॉटन बड से भी सफाई कर सकते हैं और इसे भी बड़ी ही आसानी से फोन का स्पीकर क्लीन किया जा सकता है। यह भी फोन के स्पीकर के अंदर से धूल और डस्ट को खींच निकालता है, इसके अलावा आप फोन के कवर को भी हटाकर क्लीन करते हैं, तो काफी हद तक आपकी साउंड की प्रॉब्लम सॉल्व हो जाती है, क्योंकि फोन के कवर के अंदर भी काफी मात्रा में धूल मिट्टी इकट्ठा हुई रहती है। इन सब के बावजूद भी अगर आपका स्पीकर अभी भी बढ़िया परफॉर्म नहीं कर रहा है, तो आपको अपने फोन को एक बार रीस्टार्ट करके देख लेना चाहिए, इससे क्या होता है कि कई बार सेटिंग में कोई गड़बड़ी हुई रहती है तो फोन जब रीस्टार्ट होता है तो कई बार यह प्रॉब्लम अपने आप सही हो जाती है।   ध्यान रहे आपको किसी भी तरीके का कोई भी स्प्रे फोन के अंदर स्पीकर पर नहीं स्प्रे करना है। आपको ड्राई ब्रश से ही इसे क्लीन करना है अगर ज्यादा दिक्कत है तो ही आप सर्विस सेंटर जाएं और अपने फोन को सही कराएं।  

डिप्रैशन से बचने के लिए खाएं ये 11 चीजें

काम में तनाव, पैसे की परेशानी, चिंता की वजह से कई बार लोग डिप्रैशन के शिकार हो जाते हैं। इस बीमारी से कुछ लक्षण होते हैं जैसे अचानक वजन बढ़ना या वजन घटना अनिद्रा या ज्यादा नींद आना, सैक्स इच्छा में कमी, मन में बार-बार खुदकुशी का ख्याल आना और रोजाना के काम न कर पाना आदि। जिस शख्स के अंदर ये लक्षण होते हैं वह काफी दर्दनाक और बुरे समय से गुजर रहा होता है लेकिन ऐसे समय में घबराने की जरूरत नहीं है। सब्र से हर मुश्किल का हर निकलता है। आज हम आपको कुछ ऐसे ही खाद्य पदार्थों के बारे में बताने जा रहे हैं जो डिप्रेशन से लड़ने में मदद करते हैं। पालकः पालक भी डिप्रैशन से लड़ने के लिए फायदेमंद होती है क्योंकि इसमें आयरन और मैग्नीशियम होता है जो दिमाग को शांत और पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। ओमेगा-3 फैटी एसिडः जब भी आपको लगे कि आपको अवसाद हो रहा है तो ओमेगा-3 फैटी एसिड की मात्रा अपने खाने में बढ़ा दीजिए जैसे मछली और वोलनट्स। मछली में आप सलमन, हेरिंग, लेक ट्राउट, सार्डिन, मैकेरल या टूना खा सकते हैं। बादामः बादाम में काफी मात्रा में मैग्नीशियम का सबसे अच्छा स्त्रोत होता हैं। सिर्फ 100 ग्राम बादाम के पैक में 238 ग्राम मैग्नीशियम होता है, जो हमारी रोज की 67 प्रतिशत मैग्नीशियम की जरुरत को पूरा करता है। टमाटरः टमाटर खाने से आपका मूड बहुत अच्छा रहता है क्योंकि इसमें लइकोपीन नाम का एंटीऑक्सिडेंट पाया जाता है जो अवसाद से लड़ने में काफी मददगार साबित होता है। एक स्टडी में यह पाया गया है कि जो लोग सप्ताह में 2 से 6 बार टमाटर खाते हैं वे 46 प्रतिशत तक कम अवसादग्रस्त होते हैं। एवोकाडोः एवोकाडो में ओमेगा-3 और फोलेट पाया जाता है जो अवसाद से लड़ने में मदद करता है। यही नहीं इसमें पोटेशियम और मोनोअनसैचुरेटेड फैट भी पाया जाता है। जो भावनाओं को काबू करने में मदद करते हैं। ग्रीन टीः ग्रीन टी में एंटीऑक्सीडेंट और एमिनो एसिड पाया जाता है जो अवसाद से बचाती, इलाज करती और उसे बहार आने में भी मदद करती है इसलिए ग्रीन टी उन लोगों को जरूर पीनी चाहिए जो जल्दी मुसीबतों से घबराने लगते हैं। ब्लूबेरीः ब्लूबेरी में विटामिन सी पाया जाता है। 100 ग्राम ब्लूबेरी में 9.7 मिलीग्राम विटामिन सी होता है जो रोज का 15 प्रतिशत के बराबर है। साथ ही इसमें अधिक मात्रा में पाये जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट आपके शरीर को अवसाद से दूर रखते हैं। साबुत अनाजः यह तो हम सभी जानते हैं कि साबुत अनाज हम सबके लिए कितने फायदेमंद होते हैं। लेकिन क्या आप यह जानते हैं कि यह अवसाद में बहुत लाभदायक सिद्ध होते है। इनमें कार्बोहाइड्रेट होता है जो मूड स्विंग्स की परेशानी को रोकता है। नारियलः नारियल में शक्तिशाली इलेक्ट्रोलाइट्स होते हैं जो अवसाद से लड़ने में मदद करते हैं। रोज एक गिलास ताजा नारियल का रस पीएं या इसके तेल में बना हुआ भोजन खाएं। अंडेः अगर आपके शरीर में पोषक तत्वों की कमी हैं तो आपको थकान और काम करने की शक्ति कम हो जाती है। अंडे में प्रोटीन, विटामिन डी, विटामिन बी 12, विटामिन ए, कैल्शियम, विटामिन बी-6, पोटेशियम और मैग्नीशियम होता है जो आपके एनर्जी के लेवल को बनाये रखता है।  

महिलाओं में कमर दर्द की ज्यादा शिकायत

सामान्य सर्दी के बाद, पीठ दर्द सभी उम्र के लोगों में होने वाली दूसरी सबसे प्रचलित समस्या है। सेवानिवृत्त शिक्षिका 60 वर्षीय आशा शर्मा सक्रिय जीवन जीती थीं जब तक कि उनके पीठ दर्द ने उन्हें व्यावहारिक रूप से निष्क्रिय नहीं कर दिया। उन्होंने एक डॉक्टर से दिखाया जिन्होंने उन्हें सर्जरी की सलाह दी। लेकिन श्रीमती शर्मा सर्जरी कराना नहीं चाहती थीं और उन्होंने वेंकटेश्वर अस्पताल में एक विशेषज्ञ से एक और राय लेने का विचार किया। उन्होंने वेंकटेश्वर हॉस्पिटल के न्यूरो सर्जरी बिभाग से संपर्क किया जहां उन्हें सर्जरी के निर्णय लेने से पहले ट्रायल के तौर पर सेल्फ केयर की सलाह दी क्योंकि यह देखा गया है कि सेल्फ केयर से लगभग 50 प्रतिशत रोगियों को पीठ दर्द से राहत मिल जाती है। आज, वह अपने पैरों पर वापस खड़ी हो गई हैं। वेंकटेश्वर अस्पताल के न्यूरोसर्जरी के निदेशक और विभागाध्यक्ष डॉ. पुष्पिंदर कुमार सचदेव कहते हैं, “सर्जरी उन लोगों के लिए सर्जरी आवश्यक हो जाती है, जिनमें नर्व रूट पर दबाव पड़ रहा हो या रीढ़ की हड्डी अस्थिर हो गई हो।“ पुरुषों की तुलना में अधिक महिलाएं न केवल कमर और रीढ़ की हड्डी की समस्याओं से ग्रस्त होती हैं, बल्कि उनकी समस्याएं भी गंभीर होती हैं। महिला की शारीरिक संरचना का एक दुर्भाग्यपूर्ण पहलू यह है कि उम्र बढ़ने के साथ प्राकृतिक रूप से तेजी से उनकी हड्डी का नुकसान होने लगता है और इसका खतरनाक भाग उम्र का बढ़ना है। आमतौर पर 30 वर्ष की आयु और रजोनिवृत्ति की शुरुआत के बीच, महिलाओं में हड्डी का घनत्व का और अधिक तेज़ी से कम होता है। “महिलाओं की उम्र जैसे-जैसे बढ़ती जाती है, वे डीजेनेरेटिव डिस्क रोग के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाती हैं। यह एक सामान्य बीमारी है जिसे रप्चर्ड डिस्क कहा जाता है जो रीढ़ की हड्डी को धक्का देता है, तंत्रिका पर दबाव डालता है, जिससे हर्निएटेड या स्ल्पि्ड डिस्क हो जाती है।“ रीढ़ एक स्तंभ के रूप में कार्य करता है जो आपके शरीर के वजन को वहन करता है। यही कारण है कि रीढ़ को स्वस्थ और मजबूत रखना बहुत महत्वपूर्ण है। अस्वस्थ जीवनशैली रीढ़ की हड्डी में दर्द, कमर दर्द, इत्यादि का खतरा पैदा करती है। इस तरह के परेशान करने वाले दर्द और पीड़ा से बचने के लिए, यहां कुछ बुनियादी सलाह दी गई हैं जिन पर अमल करने पर आपको फिट रहने में मदद मिलेगी। अपने शरीर की सुनो : आपका शरीर आपको संकेत भेजता रहता है कि चीजें अस्वस्थ हैं। लेकिन अधिकतर बार हम इन संकेतों को तब तक अनदेखा करते रहते हैं, जब कि बहुत देर न हो जाए। अपनी रीढ़ की हड्डी सीधे रखें : हमेशा सीधे खड़े हों और सीधे बैठें। ऐसा इसलिए क्योंकि जब आप बैठे होते हैं, तो यह आपकी रीढ़ की हड्डी पर अतिरिक्त दबाव डालता है क्योंकि यह झुकती है। जब आप बैठे होते हैं तो आपके घुटने सही स्थिति में हो और आपके पैर फ्लैट हों। अपनी शारीरिक गतिविधियां जारी रखें : जब मांसपेशियां थक जाती हैं तो स्लचिंग (आगे झुक कर बैठना या चलना), स्लंपिंग (अचानक गिरना) और अन्य खराब मुद्राएं होने की अधिक संभावना होती हैं। इसके कारण, गर्दन और कमर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। रिलैक्स्ड लेकिन समर्थित मुद्रा को बनाए रखने के लिए, अक्सर अपनी पॉजिशन बदलें। व्यायाम : रीढ़ की हड्डी को मजबूत और स्वस्थ रखने के लिए उन मांसपेषियों को मजबूत करना महत्वपूर्ण है जो रीढ़ की हड्डी को स्थिर करती हैं और आपको कुशलतापूर्वक चलने-फिरने में मदद करती हैं।  

अंकुरित अन्नों में निहित पोषण शक्ति

आहार से जीवन सरल बनता है। अन्न एवं वनस्पतियां हमारे काय-कलेवर का प्राण हैं। भोजन में प्राणशक्ति न हो, हमारी मूल ईधन ही अपमिश्रित हो तो कलेवर में गति कहां से उत्पन्न हो? आवश्यकता इस बात की है कि अन्न प्राणवान बने, संस्कार दे, शरीर शोधन एवं नव-निर्माण की दोहरी भूमिका सम्पन्न करे। अंकुरित अन्नों का आहार इस प्रयोजन की पूर्ति सरलतापूर्वक करता है। अपने प्राकृतिक रूप में किया गया आहार पोषण की दृष्टि से तो उत्तम होता ही है, साथ ही औषधि का भी काम करता है। इस दृष्टि से आहार विज्ञानियों ने अंकुरित अन्नों को बहुत उपयोगी पाया है। वे जब अंकुरित स्थिति में फूटते हैं,तब अभिनव एवं अतिरिक्त गुण सम्पन्न होते हैं। स्वास्थ्य संरक्षण के लिए विटामिन, खनिज लवण, चिकनाई, प्रोटीन एवं कार्बोहाइड्रेट जैसे पोषक तत्वों की संतुलित मात्रा का होना अनिवार्य माना गया है जो अंकुरित खाद्यान्नों में भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। इनका सेवन करने से वानस्पतिक औषधियों के सेवन की तरह रक्त एवं धातुओं का शोधन होकर कायाकल्प का प्रतिफल सामने आता है। अंकुरित अन्न अतिरिक्त रसायनों से भरपूर होने के कारण जीवन-शक्ति के अभिवर्ध्दन एवं दीर्घायुष्य का लाभ साथ-साथ प्रस्तुत करते हैं। चूंकि अंकुरित अन्न-धान्य बिना आंच के प्राकृतिक रूप से तैयार होते हैं। अतः उनमें स्थित प्रोटीन, वशा, विटामिन, कार्बोहाइड्रेट को हमारी आंतें सरलतापूवर्क अवशोषित कर लेती हैं और रक्त तथा शक्ति में उसका शीघ्र परिवर्तन हो जाता है। प्रायः सभी प्रकार के अन्नों को अंकुरित करके आहार के रूप में प्रयुक्त किया जा सकता है। गेहूं, चना, मूंग एवं मूंगफली जैसे अन्न खाने में स्वादिष्ट लगने के साथ ही पोषण एवं पाचन में उपयुक्त पाये गये हैं। जिनकी आंतें कमजोर हों, उनके लिए अंकुरण के पश्चात् थोड़ा उबला हुआ या उन्हें पीसकर देने से हितकारी सिध्द होता है पर जिनका पाचनतंत्र सबल हो, व्यायाम के अभ्यासी हों, उनके लिए चना और मूंगफली के अंकुरित दाने बहुत उपयोगी रहते हैं। साफ-स्वच्छ दानों को आवश्यकतानुसार पानी में भिगोकर लगभग 12 घंटे पश्चात् सूती कपड़े में बांधकर रख देने भर से अंकुरित भोजन तैयार हो जाता है। प्रयोगों में गेहूं के अंकुरों को सर्वाधिक उपयोगी पाया गया है। विख्यात आहार विज्ञानी डा. टामस ने इसे मनुष्य के लिए पूर्ण आहार बताया है। उनके अनुसार सभी आयु-वर्ग के लोगों के लिए यह एक उत्तम टॉनिक का कार्य करता है। बढ़े हुए अंकुरों को चबाकर या पीसकर छान लेने से पर्याप्त मात्रा में उपयुक्त विटामिन जैसे-राइबोफुलैफिन, थाइमिन, निकोटिनिक एसिड एवं आयरन, कैल्शियम आदि पोषण तत्व पर्याप्त मात्रा में मिल जाते हैं। हरी पत्तीदार सब्जियों एवं दूध से भी अधिक स्वास्थ्यवर्ध्दक एवं रक्तशोधक इसे पाया गया है। ताजे अंकुरों में क्लोरोफिल की मात्रा अधिक होती है। फलो ंएवं सब्जियों की तुलना में इनसे 12 गुना अधिक पोषक-तत्व शरीर को प्राप्त होते हैं। द अमेरिकन जनरल आफ सर्जरी नामक प्रसिध्द पत्रिका में प्रकाशित शोधपूर्ण विवरण केअनुसार अंकुरित गेहूं कार्यक्षमता बढ़ाकर शरीर में रक्त-संचार की प्रािया को संतुलित करता है। रक्ताल्पता, अल्सर और पायरिया जैसे रोगों की अचूक दवा तो यह है ही, गर्भाशय, पाचन प्रणाली और त्वचा रोग भी इससे ठीक हो जाते हैं। पाश्चात्य चिकित्सा एवं औषधि विज्ञान के जन्मजाता हिप्पाोटीज के अनुसार धान्यों का अंकुरण काल की ताजी हरी पत्तियां एक ऐसा पूर्ण आहार है, जिनसे उदरपूर्ति और चिकित्सा संबंधी उभयपक्षीय प्रयोजनों की पूर्ति होती है। पोषण के साथ-साथ शरीरशोधन का लाभ भी इससे मिलता है। इस संदर्भ में अमेरिका की सुप्रसिध्द महिला चिकित्सा विज्ञआन डा. एन. विग्मोर ने गहन अनुसंधान किया है। लम्बी अवधि तक किये गये विविध प्रयोग-परीक्षणों के आधार पर प्राप्त निष्कर्षों को उन्होंने अपनी कृति हवाई सफर, इ आन्सर तथा व्हीट ग्रास मेन्ना में प्रकाशित किया है। उनके अनुसार गेहूं का छोटा पौधा प्रकति का ऐसा अनुपम उपहार है, जो पोषक होने के सात ही उत्तम औषधि का काम करता है। गेहूं के छोटे-छोटे पौधों का जीवनदायी रस सेवन कराकर उन्होंने कितने ही रोगियों की सफल उपचार किया है। इसे ग्रीन ब्लड भी कहा गया है। जब इतना सुन्दर विकल्प हमारे समक्ष है तो हम क्यों अभक्ष्य खाते व दूसरों को खिलाते हैं। प्रत्येक बीज के अन्दर पोषक तत्व सघनता के साथ संग्रहित रहते हैं। जल, वायु और उचित ताप का सान्निध्य पाकर बीज जाग्रत हो उठता है। अब तक वह प्रसुप्त अवस्था में था। प्रसुप्त अवस्था में उसमें प्राणतत्व की मात्रा कम थी, जाग्रत-जीवंत ही उसमें प्राणतत्व की मात्रा में आशातीत वृध्दि होती है, इसीलिए अंकुरित अन्न सेवन करने वाले को प्राणतत्व अधिक मात्रा में प्राप्त होता है। तला-भुना अन्य मृत होने के कारण पोषक तत्वों से हीन होता है और अधिक मात्रा में सेवन किया जाता है, जबकि अंकुरित जीवित अन्न थोड़ी मात्रा में सेवन करने से ही पोषक तत्वों की पूर्ति करने में सक्षम होता है। इससे भोजन की बचत होतीहै। कम भोजन से अधिक व्यक्तियों के आहार की पूर्ति हो सकती है। प्रसुप्त बीज जब अनुकूल परिस्थितियां पाकर अंकुरित होता है तो मूलांकुर की वृध्दि होने लगती है। वृध्दि के लिए आहार की आवश्यकता होता है। इसी प्रयोजन की पूर्ति के लिए बीज के अन्दर भोजन एकत्रित रहता है। इस भोजन का पाचन होकर ही मूलांकुर को मिलता हैस जिससे उसकी वृध्दि होती है। एकत्रित भोजन को पचाने के लिए एंजाइम्स की आवश्यकता होती है। बीज के अंकुरण के समय बीज के अन्दर एकत्रित भोजन को पचाने वाले एंजाइम्स का निर्माण होता है। ये एंजाइम्स अंकुरित अन्न के सेवनकर्ता को भी प्राप्त होते हैं, जिससे ऐसे भोजन का पाचन आसानी से हो जाता है। वृक्ष पर ही पके ताजा फलों को मनुष्य का प्रथम श्रेणी का आहार माना जा सकता है, लेकिन इसके अभाव में हर प्रकार के उपयोगी द्वितीय श्रेणी का भोजन अंकुरित अन्न ही है, जो सहजता से गरीब, अमीर सभी के लिए प्राप्त हो सकता है। आवश्यकता है सकी उपयोगिता समझकर इसे अत्यन्त रुचिपूर्ण ग्रहण करने की और इसमें स्वाद अनुभव करने की।  

ऐसे जीतें सबका दिल

लाइफ चाहे प्रोफेशनल हो या पर्सनल, दोनों ही जगह आपका इंप्रेशन बेहद खास होना चाहिए। सुंदर व शालीन दिखना सिर्फ स्त्रियों का ही हक नहीं है। आज के पुरुष भी अपनी स्मार्ट पर्सनैलिटी को मेंटेन रखने के लिए बहुत मेहनत करते हैं। 1. कभी भी मील्स स्किप न करें। टाइम पर बैलेंस्ड डाइट लें। वीकली डाइट प्लान बनाना भी सही रहेगा। नियमित सैलेड व दही जरूर लें। 2. आप चाहे कितना भी व्यस्त क्यों न हों, िफजिकल एक्सरसाइज के लिए समय जरूर निकालें। ज्यादा नहीं तो वॉक की आदत ही डाल लें। 3. सिगरेट व ड्रिंक्स से दूर ही रहें। इन्हें अपनी आदत न बनाएं। दोस्तों या कलीग्स के दबाव में आकर ज्यादा न पीएं। जितना मैनेज कर सकते हैं, उतना ही लें। 4. प्रतिदिन कम से कम 3-4 लीटर पानी पीएं। इससे आपकी स्किन फ्रेश और ग्लोइंग रहेगी। साथ ही यह आपकी सेहत के लिए भी अच्छा होगा। 5. समय पर सोने और जगने की आदत डालें। लेट नाइट पार्टीज या मूवीज के लिए अपनी नींद से समझौता न करें। हर चीज के लिए टाइम फिक्स करें। 6. समय पर शेविंग करवाएं। अगर आप हलकी दाढी या मूंछ रखते हों, तो उसे ट्रिम करवाते रहें। इसके लिए दिन निश्चित कर लें तो आसानी से याद रख सकेेंगे। 7. हलका लिप बाम लगाने से आपके होंठ मॉयस्चराइज रहेंगे। बाम बहुत ज्यादा न लगाएं, वर्ना ग्लॉस जैसा लुक आ जाएगा, जो कि अच्छा नहीं लगेगा। 8. जिम, ऑफिस, पार्टी से लौटे हों या सोकर उठे हों, शॉवर लेना न भूलें। इससे आप ताजगी और थकान से राहत महसूस करेंगे। 9. नाखूनों को नियमित कट व फाइल करते रहें। अपने पास फाइल र व क्लिपर रखें। गंदे नाखून नुकसानदेह हैं ही, सामने वाला भी गंदगी देखकर इरिटेट हो जाएगा। 10. अपना स्टाइल सेंस जरूर बनाएं। जो हाथ में आ जाए, बस उसे ही उठा कर न पहन लें। अवसर और समय के हिसाब से ड्रेसअप हों। 11. आपके कपडे सही फिटिंग के होने के साथ ही साफ और प्रेस किए हुए होने चाहिए। ढीले-ढाले या बहुत टाइट कपडे न पहनें। 12. पुरुषों को हमेशा उनके शूज से जज किया जाता है। उन्हें साफ व पॉलिश करके रखें। हर मौके के लिए अलग फुटवेयर रखें। 13. बहुत ज्यादा स्ट्रॉन्ग स्मेलिंग परफ्यूम लगाने से बचें। सस्ते परफ्यूम का इस्तेमाल न करें। वह आपकी त्वचा को नुकसान पहुंचा सकता है। 14. अपने पोस्चर पर ध्यान दें। हमेशा सीधे होकर बैठें और काम करें। सही पोस्चर से न सिर्फ गर्दन, पीठ और कमर की सेहत ठीक रहती है, बल्कि इससे आपका आत्मविश्वास भी झलकता है। चाहें तो पोस्चर एक्सरसाइज कर सकते हैं। 15. आपके हैंडशेक करने के तरीके से भी आपका व्यक्तित्व पता चलता है। किसी से मिलते समय गर्मजोशी से हैंडशेक करें व मुस्कुराते हुए सामने वाले की आंखों में देखते रहें। 16. अगर आपको बहुत ज्यादा पसीना आता हो तो कॉटन की अंडरशर्ट पहनें। पैरों में पसीना आने की स्थिति में फुट पाउडर डालें। 17. चाहे दिन में काम कर रहे हों या रात में नाइट आउट, आपके कपडे थोडा-बहुत अस्तव्यस्त हो जाते हैं। बीच-बीच में उन्हें एडजस्ट करते रहें। 18. खाना खाने के बाद अपने दांतों का विशेष ध्यान रखें। हमेशा ब्रश करना संभव नहीं होता, इसलिए अपने पास माउथवॉश रखें। खाने के बाद मिंट माउथवॉश यूज कर सकते हैं। 19. किसी से बात करते वक्त हिचकिचाएं नहीं। अपनी बात स्मार्ट ढंग से रखें। मीटिंग में जाने से पहले तय कर लें कि क्या बोलना है। पॉइंट्स तैयार रखें, ताकि भूलने पर उन्हें देखा जा सके। 20. प्रेजेंटेशन देते समय ऑडियंस की आंखों में भी झांकेें। अपने पेपर्स और अन्य कागजों को एक फोल्डर में करीने से लेकर जाएं।  

वसीयत लिखते समय न करें ये गलतियां, वरना आ सकती हैं दिक्कतें

उम्र के एक पड़ाव पर आने के बाद अक्सर लोगों को अपनी संपत्ति का वारिश ढूंढना पड़ता है। हालांकि, अपनी संपत्ति का मालिकाना हक किसी दूसरे के हाथों में सौंपने के लिए व्यक्ति को वसीयत लिखनी जरूरी होती है। वसीयत एक कानूनी साक्ष्य होता है जो इस बात की पुष्टि करता है कि आपने अपनी संपत्ति का उत्तराधिकार किसे चुना है? अगर वसीयत न लिखी जाए तो उत्तराधिकारियों के बीच संपत्ति को लेकर विवाद हो सकता है। हालांकि, वसीयत लिखते समय आपको कई जरूरी बातों का ध्यान रखना होता है। अगर आप इन बातों का ध्यान नहीं रखते हैं तो भविष्य में कई तरह की दिक्कतें आ सकती हैं। इसी कड़ी में आज इस खबर के माध्यम से हम आपको उन जरूरी बातों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनका विशेष ध्यान वसीयत लिखते समय रखना चाहिए। आइए जानते हैं वसीयत लिखते समय आपको अपने चल और अचल संपत्ति की जानकारी विस्तार ढंग से देनी चाहिए। इसके अलावा आपको अपने बैंक खाते, प्रॉपर्टी की डिटेल्स, लॉकर नंबर आदि जानकारी वसीयत में ठीक से देनी चाहिए। इससे कंफ्यूजन पैदा नहीं होगी। वसीयत बनाते समय आपको एक काबिल एग्जीक्यूटर की जरूरत होती है। इससे यह स्पष्ट होता है कि आपकी वसीयत ठीक तरह से बंटी है। एग्जीक्यूटर को वसीयतकर्ता द्वारा नियुक्त किया जाता है। वसीयतकर्ता की मृत्यु के बाद एग्जीक्यूटर उसकी जगह लेता है। इस दौरान एग्जीक्यूटर यह सुनिश्चित करता है कि संपत्ति को वसीयतकर्ता की अंतिम इच्छा के अनुसार इम्प्लीमेंट किया जाए। वसीयत लिखते समय आपको हर पेज के नीचे अपने हस्ताक्षर करने चाहिए। हस्ताक्षर करने के बाद उसके नीचे ब्रैकेट में अपना नाम जरूर लिखें। आप जिस भाषा में हस्ताक्षर कर रहे हैं उसी भाषा में आपको साफ और स्पष्ट ढंग से अपना नाम नीचे लिखना चाहिए।

ज्यादातर भारतीय खा रहे हैं तय मात्रा से दोगुना नमक, जानिए इसके नुकसान

हाई सोडियम (नमक) वाली चीजों को सेहत के लिए कई प्रकार से नुकसानदायक माना जाता रहा है। अध्ययनों से पता चलता है कि नमक वाली चीजों के अधिक सेवन के कारण ब्लड प्रेशर बढ़ने का खतरा रहता है जिसे हृदय रोगों का प्रमुख कारण माना जाता है। पर इसके नुकसान सिर्फ हृदय रोगों तक ही सीमित नहीं हैं, ये आदत आपमें किडनी की बीमारी, हड्डियों की कमजोरी को भी बढ़ाने वाली हो सकती है। यानी शरीर को स्वस्थ और फिट रखना है तो आहार में नमक की मात्रा कम करना बहुत जरूरी है। ज्यादा नमक खाने के कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं और इससे बचाव के लिए सबसे पहले ये जानना जरूरी है कि हमें कितनी मात्रा में नमक खाना चाहिए? और कितना नमक नुकसानदायक हो सकता है। एक रिपोर्ट से पता चलता है कि भारत में ज्यादातर लोग विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा अनुशंसित मात्रा से दो-तीन गुना अधिक नमक खाते हैं। कहीं आप भी तो बहुत अधिक नमक का सेवन नहीं कर रहे हैं? कितना नमक खाना सेहत के लिए ठीक है? डब्ल्यूएचओ के विशेषज्ञ कहते हैं, अच्छी सेहत के लिए वयस्कों को दिनभर में 4-5 ग्राम से अधिक नमक का सेवन नहीं करना चाहिए। ये मात्रा एक चम्मच नमक के बराबर है।यहां समझना जरूरी है कि नमक के सेवन का मतलब सिर्फ भोजन में डालने वाले नमक से नहीं है। चिप्स, नमकीन, पैक्ड फूड्स, जंक फूड आदि में भी नमक की अधिक मात्रा होती है। इन सभी चीजों को मिलाकर एक दिन में एक टेबलस्पून से अधिक नमक नहीं खाना चाहिए। भारत में नमक की खपत अधिक इसी साल मई में प्रकाशित डब्ल्यूएचओ की  वैश्विक रिपोर्ट में चिंता जताते हुए विशेषज्ञों ने कहा था कि भारतीय लोग तय मात्रा से बहुत अधिक नमक का सेवन करते हैं। रिपोर्ट में भारत को अत्यधिक नमक की खपत वाले शीर्ष 50 देशों में रखा गया है। स्वस्थ शरीर के लिए आदर्श मात्रा प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 5 ग्राम तक है, जबकि ज्यादातर लोग प्रतिदिन 11 ग्राम से अधिक नमक खाते हैं। बढ़ता जा रहा है हाई ब्लड प्रेशर का खतरा नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट कहती है, हर चार में से एक व्यक्ति हाइपरटेंशन का शिकार हो सकता है। हाइपरटेंशन या हाई ब्लड प्रेशर को हृदय रोगों के लिए प्रमुख जोखिम कारक माना जाता है। डॉक्टर कहते हैं, आहार में नमक की मात्रा कम करके ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखा जा सकता है। इस एक आदत में सुधार करके आप हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी जानलेवा स्वास्थ्य समस्याओं से भी बचे रह सकते हैं। कैसे जानें कहीं आप भी तो नहीं खा रहे हैं ज्यादा नमक? स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, बहुत ज्यादा नमक खाने के कारण आपको फौरी तौर पर कुछ लक्षणों का अनुभव हो सकता है, जिसपर ध्यान देना आवश्यक हो जाता है। ज्यादा नमक वाली चीजों के सेवन के कारण आपको पेट फूलने, ब्लड प्रेशर बढ़े रहने, पैरों में सूजन, बहुत अधिक प्यास लगने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। अगर आपको भी इस तरह की दिक्कतों का अनुभव होता है तो नमक या वो चीजें खाना कम कर दें जिनमें नमक की अधिकता हो सकती है।

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