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8th Pay Commission: इस दिन से बढ़ जाएगी केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी! सैलरी-पेंशन का स्ट्रक्चर, NPS और CGHS योगदान पर क्या होगा असर

नई दिल्ली सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बड़ी खुशखबरी है. इस साल की शुरुआत में ही केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को हरी झंडी दे दी , जो 1 जनवरी 2026 से लागू हो सकता है. इससे देश के 1 करोड़ से ज्यादा केंद्रीय कर्मचारियों (Central Government Employees) और पेंशनर्स की सैलरी और पेंशन में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा.  8वें वेतन आयोग से सैलरी और पेंशन में कितनी होगी बढ़ोतरी? 8वें वेतन आयोग से सरकारी कर्मचारियों के वेतन और पेंशन में भारी बढ़ोतरी की उम्मीद की जा रही है. ऐसे में सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स जानना चाहते हैं कि उनकी सैलरी और पेंशन में कितना इजाफा होगा.आइए जानते हैं कि नए वेतन आयोग में सरकारी कर्मचारियों के लिए क्या-क्या बदलाव होने जा रहे हैं. इसके साथ ही ये भी जानेंगे कि केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को लिए ये बदलाव क्यों खास माना जा रहा है. बेसिक सैलरी और पेंशन में भारी इजाफा इस आयोग में सबसे अहम बात फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) को लेकर है, जिसकी मदद से नई बेसिक सैलरी  और पेंशन  (Salary and Pension Hike)  तय होती है. 7वें वेतन आयोग में ये फैक्टर 2.57 था, लेकिन अब इसे 2.86 तक बढ़ाया जा सकता है. अगर ऐसा होता है, तो 18,000 रुपये की न्यूनतम बेसिक सैलरी बढ़कर लगभग 51,480 रुपये हो सकती है. वहीं, पेंशन 9,000 से बढ़कर करीब 25,740 रुपये हो सकती है.इस तरह सरकारी कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन में बंपर बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. 8वें वेतन आयोग में क्या होगा बदलाव? 8वां वेतन आयोग सरकारी कर्मचारियों के सैलरी स्ट्रक्चर में कई बड़े बदलाव ला सकता है। बेसिक सैलरी के अलावा, हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और ट्रैवल अलाउंस (TA) जैसे भत्तों में भी बदलाव की उम्मीद है। यह इस पर निर्भर करेगा कि कर्मचारी की पोस्टिंग किस शहर में है और उसका काम किस तरह का है। मतलब कि उन्हें दफ्तर में काम करना रहता है, या काम के सिलसिले में भागदौड़ करनी रहती है। इस वजह से, एक ही वेतन ग्रेड के दो कर्मचारी भी अलग-अलग कुल वेतन (Total Salary) पा सकते हैं, क्योंकि उनके भत्ते अलग-अलग होंगे। NPS और CGHS योगदान पर असर नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS): अभी केंद्र सरकार के कर्मचारी अपनी बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते (DA) का 10 प्रतिशत योगदान करते हैं, जबकि सरकार 14 प्रतिशत योगदान देती है। 8वें वेतन आयोग में सैलरी बढ़ने के बाद, ये दोनों योगदान राशि भी बढ़ेंगी। केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना (CGHS): CGHS की सदस्यता शुल्क सैलरी स्लैब पर आधारित होती है। जैसे ही बेसिक सैलरी बढ़ेगी, CGHS के शुल्क भी नए सैलरी स्ट्रक्चरके अनुसार रिवाइज होंगे। किस ग्रेड में कितनी बढ़ेगी सैलरी? प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर 2.86 के आधार पर ग्रेड के हिसाब से सैलरी में इजाफा भी अलग-अलग हो सकता है। आइए समझते हैं कि रिवाइज्ड सैलरी स्ट्रक्चर कैसा दिख सकता है: ग्रेड 2000 (लेवल 3): इस ग्रेड में बेसिक सैलरी ₹57,456 तक बढ़ सकती है। HRA और ट्रैवल अलाउंस (TA) जैसे भत्तों को मिलाकर, कुल मासिक वेतन (ग्रॉस सैलरी) करीब ₹74,845 हो सकता है। स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद अनुमानित इन-हैंड सैलरी लगभग ₹68,849 रहने की संभावना है। ग्रेड 4200 (लेवल 6): इस ग्रेड में संशोधित बेसिक वेतन ₹93,708 तक हो सकता है। कुल ग्रॉस सैलरी, भत्तों सहित, ₹1,19,798 के आसपास हो सकती है। डिडक्शन के बाद अनुमानित नेट मासिक सैलरी करीब ₹1,09,977 हो सकती है। ग्रेड 5400 (लेवल 9): इस वेतन ग्रेड में बेसिक वेतन ₹1,40,220 तक बढ़ सकता है। भत्तों को जोड़ने पर कुल वेतन ₹1,81,073 तक जा सकता है। कटौतियों के बाद इन-हैंड वेतन करीब ₹1,66,401 होने की संभावना है। ग्रेड 6600 (लेवल 11): इस ग्रेड में संशोधित बेसिक वेतन ₹1,84,452 हो सकता है। सभी भत्तों को मिलाकर, मासिक कुल आय ₹2,35,920 तक हो सकती है। स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद इन-हैंड सैलरी करीब ₹2,16,825 हो सकती है। अलग-अलग लेवल पर कितनी बढ़ेगी सैलरी? 8वें वेतन आयोग में अलग-अलग पे लेवल पर कितनी सैलरी मिल सकती है. आइए आसान भाषा में समझते हैं:     लेवल 3 (ग्रेड पे 2000): बेसिक सैलरी लगभग 57,456 रुपये, कुल सैलरी 74,845 रुपये, डिडक्शन के बाद इनहैंड सैलरी करीब 68,849 रुपये     लेवल 6 (ग्रेड पे 4200): बेसिक सैलरी करीब 93,708 रुपये, कुल सैलरी 1,19,798 रुपये, इनहैंड सैलरी लगभग 1,09,977 रुपये     लेवल 9 (ग्रेड पे 5400): बेसिक सैलरी 1,40,220 रुपये, कुल सैलरी 1,81,073 रुपये, इनहैंड करीब 1,66,401 रुपये     लेवल 11 (ग्रेड पे 6600): बेसिक 1,84,452 रुपये, कुल सैलरी 2,35,920 रुपये, इनहैंड सैलरी करीब 2,16,825 रुपये अलाउंस में भी होगा बदलाव बेसिक सैलरी बढ़ने के साथ-साथ हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और ट्रैवल अलाउंस (TA) जैसे भत्तों में भी इजाफा होगा. ये इस पर निर्भर करेगा कि कर्मचारी किस लोकेशन में पोस्टेड हैं और उनका ट्रैवल कितना होता है. इसी वजह से एक ही ग्रेड के दो कर्मचारियों की कुल सैलरी अलग-अलग हो सकती है. NPS और CGHS में कितना बढ़ेगा कॉन्ट्रीब्यूशन? नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में अभी कर्मचारी अपनी बेसिक सैलरी और डीए का 10% योगदान करते हैं, जबकि सरकार 14% देती है. बेसिक सैलरी बढ़ने से ये योगदान भी बढ़ेगा. सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (CGHS) की फीस भी सैलरी के स्लैब से जुड़ी होती है. ऐसे में बेसिक सैलरी में इजाफा होने से CGHS की मासिक कटौती भी बढ़ सकती है. क्यों खास है ये बदलाव? 8वां वेतन आयोग सिर्फ सैलरी बढ़ाने का काम नहीं करेगा, बल्कि इससे जुड़े सभी खर्चों, सुविधाओं और कर्मचारियों की आर्थिक प्लानिंग पर भी असर पड़ेगा. खासकर रिटायरमेंट प्लानिंग, होम लोन EMI, टैक्स सेविंग और इंश्योरेंस जैसे मामलों में ये बढ़ी हुई सैलरी लोगों को नई राहत दे सकती है.

मोदी सरकार CGHS के बदले लाएगी नई हेल्थकेयर योजना, अब निगाहें 8वें वेतन आयोग पर टिकी

नई दिल्ली  8वें वेतन आयोग की घोषणा के बाद एक बार फिर केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की उम्मीदें बढ़ गई हैं. इस साल जनवरी में सरकार ने आधिकारिक तौर पर 8वें वेतन आयोग के गठन की घोषणा की थी. इस आयोग का उद्देश्य मौजूदा आर्थिक हालातों को देखते हुए केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन और पेंशन में जरूरी बदलावों की सिफारिश करना है. 8वें वेतन आयोग की घोषणा के बाद से केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स की उम्मीदें एक बार फिर से बढ़ गई हैं। इस साल जनवरी में सरकार ने आधिकारिक रूप से 8वें वेतन आयोग के गठन की घोषणा की थी। इस आयोग का का मकसद मौजूदा आर्थिक हालातों को देखते हुए केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के वेतन और पेंशन में जरूरी बदलावों की सिफारिश करना है। आमतौर पर लोग मानते हैं कि वेतन आयोग केवल वेतन बढ़ोतरी के फार्मूले तय करता है, लेकिन इसकी जिम्मेदारियां इससे कहीं ज्यादा होती हैं। वेतन आयोग भत्तों, सुविधाओं और खासतौर पर हेल्थ इंश्योरेंस योजनाओं की समीक्षा भी करता है। ऐसे ही एक सुधार की सालों से चर्चा हो रही है, जो है – केंद्रीय सरकार हेल्थ योजना (CGHS)। यह योजना केंद्र सरकार के कर्मचारियों, पेंशनर्स और उनके आश्रितों को किफायती दरों पर हेल्थ सर्विस उपलब्ध कराती है। क्या है CGHS? CGHS भारत सरकार की एक हेल्थ योजना है, जो कर्मचारियों और उनके परिवारों को डॉक्टर की सलाह, इलाज, जांच और दवाएं जैसी सर्विस कम लागत पर देती है। यह योजना मुख्य रूप से शहरी एरिया में केंद्रित है, जिससे इसकी पहुंच सीमित हो जाती है। CGHS को बदलने की सिफारिश पहले भी हुई है 6वें और 7वें वेतन आयोग ने भी CGHS की लिमिट को देखते हुए एक नई हेल्थ इंश्योरेंस योजना लाने की सिफारिश की थी। 6वें वेतन आयोग ने सुझाव दिया था कि एक वैकल्पिक योजना लाई जाए, जिसमें कर्मचारी अपनी इच्छा से योगदान देकर शामिल हो सकें। यह योजना भविष्य में नियुक्त होने वाले नए कर्मचारियों के लिए अनिवार्य होनी चाहिए। 7वें वेतन आयोग ने तो और आगे बढ़ते हुए कहा था कि हेल्थ इंश्योरेंस सभी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए दीर्घकालिक और बेहतर समाधान हो सकता है। उन्होंने CGHS के बाहर रहने वाले पेंशनरों के लिए यह भी सुझाव दिया था कि CGHS निकटवर्ती अस्पतालों को CS(MA) और ECHS जैसी योजनाओं के तहत सूचीबद्ध करे ताकि उन्हें भी कैशलेस इलाज मिल सके। क्या अब CGHS की जगह नई योजना आएगी? जनवरी 2025 में खबरें सामने आईं कि हेल्थ मंत्रालय CGHS को हटाकर एक इंश्योरेंस आधारित योजना लाने पर विचार कर रहा है। इसका नाम Central Government Employees and Pensioners Health Insurance Scheme (CGEPHIS) हो सकता है। यह योजना IRDAI से रजिस्टर इंश्योरेंस कंपनियों के माध्यम से लागू की जा सकती है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। CGHS स्कीम हो सकता है बदलाव! केंद्र सरकार ने 2025 के शुरुआत में 8वां वेतन आयोग बनाने का ऐलान किया है। वेतन आयोग सिर्फ वेतन और पेंशन बढ़ाने वाली समिति नहीं बल्कि इसका दायरा बहुत बड़ा है। यह भत्तों, सुविधाओं और स्वास्थ्य बीमा जैसी विषयों की समीक्षा भी करता है। सालों से चली आ रही CGHS स्कीम में कुछ बदलाव होने वाला है। क्या होगा नई हेल्थकेयर स्कीम का नया नाम बीते कुछ महीने से मीडिया में खबरे चल रही है कि स्वास्थ्य मंत्रालय CGHS को एक नई इंश्योरेंस आधारित योजना में बदल सकता है। इसका नाम CGEPHIS (Central Government Employees and Pensioners Health Insurance Scheme) हो सकता है। बताया जा रहा है कि इसको IRDAI द्वारा रजिस्टर्ड इंश्योरेंस कंपनियों के माध्यम से लागू किया जाएगा। हालांकि अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। 8वें वेतन आयोग पर टिकी है सभी की नजरें इस प्रकार से सभी की नजर 8वां वेतन आयोग पर टिकी हुई है। सभी के मन में एक ही सवाल है क्या यह आयोग की सालों पुरानी CGHS बदल जाएगी। क्या CGEPHIS जैसे हेल्थ इंश्योरेंस मॉडल को लागू किया जाएगा। आने वाले समय में इस पर फैसला लिया जा सकता है। माना जा रहा है कि ये बदलाव 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का हिस्सा हो सकते हैं। अब निगाहें 8वें वेतन आयोग पर टिकी हैं अब जबकि 8वें वेतन आयोग का गठन हो चुका है और जल्द ही यह अपना काम शुरू करेगा, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह आयोग CGHS से जुड़ी सालों पुरानी समस्या का समाधान कर पाता है या नहीं।

8वें वेतन आयोग के गठन की तैयारियां तेज, 42 अहम पदों पर चयन शुरू, 7वें पे पेनल मुकाबले कम होंगे सदस्य

नई दिल्ली सरकार ने 8वें वेतन आयोग के गठन की तैयारियों को गति देते हुए 42 पदों पर नियुक्तियों की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग (DoE) ने 21 अप्रैल को दो अलग-अलग सर्कुलर जारी किए, जिनमें 40 पदों के लिए भर्ती की बात कही गई है। इनमें सलाहकारों के साथ-साथ सचिवालय के कई पद शामिल हैं। इसके अलावा आयोग के अध्यक्ष और दो अन्य प्रमुख सदस्यों की नियुक्ति भी की जाएगी। 8th Pay Commission: जल्द होगी चेयमैन की घोषणा फाइनेंशियल एक्सप्रेस के मुताबिक 8वें वेतन आयोग के लिए चेयरमैन और दो अन्य प्रमुख सदस्यों के नाम करीब-करीब तय हो चुके हैं और जल्द ही इसकी आधिकारिक घोषणा की जाएगी। नियुक्त किए जाने वाले सदस्यों में दो निदेशक/उप सचिव, तीन अवर सचिव और 37 अन्य कर्मचारी शामिल होंगे। ये सभी सदस्य आयोग की शर्तें (Terms of Reference – ToR) तय होने के बाद प्रारंभिक कार्य करेंगे। 8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग में होंगे कम सदस्य फाइनेंशियल एक्सप्रेस ने सूत्रों के अनुसार लिखा कि 8वें वेतन आयोग में पिछली बार की तुलना में कम सदस्य होंगे। उदाहरण के लिए, 7वें वेतन आयोग में कुल 45 सदस्य थे, जिसमें अध्यक्ष, 18 सचिवालय कर्मी, 16 सलाहकार और 7 अन्य कर्मचारी शामिल थे। यह आयोग न्यायमूर्ति अशोक कुमार माथुर की अध्यक्षता में काम कर रहा था। 6वें वेतन आयोग में कुल चार सदस्य और 17 सचिवालय कर्मी थे। वहीं, 5वें वेतन आयोग में केवल तीन सदस्य थे। शुरुआती दौर में पहले वेतन आयोग में 9 सदस्य, दूसरे में 6 और तीसरे व चौथे में 5-5 सदस्य होते थे। 8th Pay Commission: राष्ट्रीय परिषद (JCM) ने तैयारियां तेज कीं इसी बीच, नेशनल काउंसिल (JCM) के स्टाफ साइड ने 8वें वेतन आयोग को सौंपे जाने वाले ज्ञापन की तैयारी शुरू कर दी है। 22 अप्रैल को आयोजित विस्तारित बैठक में न्यूनतम वेतन, पे स्केल, फिटमेंट फैक्टर, भत्ते, पदोन्नति नीति और पेंशन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। एक ड्राफ्टिंग कमेटी बनाई गई है जिसमें प्रमुख कर्मचारी संघों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। सभी संगठनों को 20 मई 2025 तक अपने सुझाव PDF और Word फॉर्मेट में भेजने को कहा गया है। 8वें वेतन आयोग में 7वें वेतन आयोग से कम सदस्य होंगे अगर हम पिछला स्ट्रक्चर को देखें तो 7वें वेतन आयोग में कुल 45 लोग शामिल थे. इसमें अध्यक्ष, सचिवालय में 18 लोग, 16 सलाहकार और 7 अन्य कर्मचारी शामिल थे. इस आयोग की अध्यक्षता जस्टिस अशोक कुमार माथुर कर रहे थे. वहीं, अगर बात करें छठे वेतन आयोग की तो इसमें भी अध्यक्ष समेत चार सदस्य थे, लेकिन सचिवालय में सिर्फ 17 लोग ही काम कर रहे थे. छठे वेतन आयोग की अध्यक्षता जस्टिस बीएन श्रीकृष्ण कर रहे थे. मजे की बात यह है कि 5वें वेतन आयोग में सदस्यों की संख्या और भी कम थी. इसमें केवल तीन सदस्य शामिल थे. अगर शुरुआती चरण की बात करें तो पहले पे कमीशन में नौ सदस्य थे, दूसरे में छह, जबकि तीसरे और चौथे वेतन आयोग में पांच-पांच सदस्य थे. 8th Pay Commission: 48 लाख कर्मचारियों और 57 लाख पेंशनभोगियों को लाभ की उम्मीद हालांकि सरकार ने अभी तक आयोग के औपचारिक गठन या ToR की घोषणा नहीं की है, लेकिन लगातार जारी हो रहे सर्कुलर और आंतरिक बैठकों से स्पष्ट है कि आयोग के गठन की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। एक बार आयोग सक्रिय हो जाने के बाद यह 48 लाख केंद्र सरकार कर्मचारियों और 57 लाख पेंशनरों के वेतन, भत्तों और सेवा शर्तों में सुधार के लिए अहम भूमिका निभाएगा। केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बीच चर्चा इस बीच राष्ट्रीय परिषद (NC-JCM) के कर्मचारी पक्ष ने 22 अप्रैल को अपनी स्थायी समिति की विस्तारित बैठक के बाद 8वें वेतन आयोग को सौंपे जाने वाले व्यापक ज्ञापन की तैयारी शुरू कर दी हैं. इस बैठक में केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों से संबंधित कई प्रमुख मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई, जिसमें मिनिमम सैलरी, वेतनमान, फिटमेंट फैक्टर, भत्ते, पदोन्नति नीति और पेंशन लाभ शामिल हैं. ज्ञापन तैयार करने के लिए एक मसौदा समिति का गठन किया गया है. इस समिति में प्रमुख कर्मचारी महासंघों के प्रतिनिधि शामिल होंगे. ये महासंघ 30 अप्रैल 2025 तक अपने प्रतिनिधियों के नाम भेजेंगे.व्यय विभाग ने सर्कुलर में कहा, “इन पदों पर 8वें वेतन आयोग के गठन की डेट से लेकर कमीशन के बंद होने तक कर्मचारियों की नियुक्ति की जाएगी. इसमें यह भी कहा गया है कि रिक्त पदों के लिए आवेदनों की समीक्षा तब तक जारी रहेगी, जब तक सभी पद भर नहीं जाते.” कितने कर्मचारियों को मिलेगा लाभ? हालांकि, सरकार ने अभी तक 8वें वेतन आयोग के औपचारिक गठन या इसके टर्म ऑफ रिफ्रेंस को लेकर कोई की घोषणा नहीं की है, लेकिन लगातार सामने आ रहे सर्कुलर और मीटिंग्स से संकेत मिलता है कि तैयारियां तेजी से चल रही हैं और कमीशन अगले कुछ महीनों में काम करना शुरू कर देगा. एक बार 8वां वेतन आयोग एक्टिव हो जाने के बाद यह लगभग 48 लाख केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और 57 लाख से अधिक पेंशनर्स के सैलरी स्ट्रक्चर और सर्विस कंडीशन को रिवाइज करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.

केंद्र सरकार बजट 2025-26 में 8वें वेतन आयोग को लेकर बड़ा फैसला लेगी! न्यूनतम वेतन 34 हजार और पेंशन 17 हजार

नई दिल्ली फरवरी में पेश होने वाले बजट 2025-26 से पहले 8वें वेतन आयोग की चर्चा तेज हो चली है।चुंकी सरकारी कर्मचारियों के वेतन में संशोधन करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा हर 10 साल में नए वेतन आयोग का गठन किया जाता है। 7वें वेतन आयोग का गठन फरवरी 2014 में किया गया था, लेकिन इसकी सिफारिशें 1 जनवरी 2016 से लागू की गई, जिसका समय 31 दिसंबर 2025 को खत्म होगा, इस आधार पर अब अगले वेतन आयोग की मांग उठने लगी है। कयास लगाए जा रहे है कि केंद्र सरकार बजट 2025-26 में 8वें वेतन आयोग को लेकर कोई बड़ा फैसला ले सकती है।अगर 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होती हैं तो न्यूनतम वेतन 34 हजार और पेंशन 17 हजार तक पहुंच सकती है।हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई अधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।बता दे कि नए वेतन आयोग में सरकारी कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन को अलग-अलग आर्थिक मापदंडों खासतौर पर महंगाई के हिसाब से रिवाइज किया जाता है। 8th Pay Commission लागू हुआ तो बढ़ेगा फिटमेंट फैक्टर ?     मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो साल 2025-26 में अगर 8वां वेतन आयोग लागू होता है तो फिटमेंट फैक्टर में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। फिटमेंट फैक्टर 2.57 से बढ़कर 2.86 फीसदी हो सकता है, जिससे न्यूनतम सैलरी में 186 फीसदी की वृद्धि होगी।     वर्तमान में 7वें वेतन आयोग के तहत केन्द्रीय कर्मचारियों का फिटमेंट फैक्टर 2.57 है और बेसिक सैलरी 18000 है। माना जा रहा है कि 8वें वेतन आयोग में मोदी सरकार फिटमेंट फैक्टर को 2.57 से बढ़ाकर 2.86% कर सकती है।इससे सरकारी कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन 186 प्रतिशत बढ़कर 51,480 रुपए हो जाएगा और पेंशन में भी 186 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है, जो मौजूदा पेंशन 9,000 रुपए से बढ़कर 25,740 रुपये हो जाएगी।हालांकि अभी अधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।     इससे पहले आखिरी बार केन्द्र सरकार ने 2016 में फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाया था और इसी साल से 7th pay commission को भी लागू किया गया था।इससे करीब 48.62 लाख कर्मचारियों और 67.85 लाख पेंशनभोगियों को लाभ मिलेगा। Fitment Factor वृद्धि की मांग क्यों?     फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक है, जिसके जरिए सैलरी (Salary) और पेंशन (Pension) में संशोधन किया जाता है।फिटमेंट फैक्टर का केन्द्रीय कर्मचारियों की बेसिक सैलरी तय करने में अहम रोल माना जाता है।     इस फैक्टर के कारण ही केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन में ढाई गुना से अधिक की बढ़ोतरी होती है। फिटमेंट फैक्टर के आधार पर ही पुरानी बेसिक पे से रिवाइज्ड बेसिक पे की कैलकुलेशन की जाती है।पिछली वेतन आयोग की रिपोर्ट में फिटमेंट फैक्टर एक महत्वपूर्ण सिफारिश है, इसी आधार पर वेतन वृद्धि तय होगी।     यदि 7वें वेतन आयोग के तहत केंद्रीय कर्मचारी की बेसिक सैलरी 20,000 रुपए है, तो भत्तों को छोड़कर उसकी सैलरी 20,000 X 2.57= 51,400 रुपए होगी। अगर इसे 8वें वेतन आयोग में बढ़ाकर 2.86 कर दिया जाता है, तो यही सैलरी 20,000 x 2.86 = 57,200 रुपये हो जाएगी।

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