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भारत अपने एयर डिफेंस सिस्टम को तीन स्तरों की मजबूती दे रहा, DRDO का प्रोजेक्ट भारत के लिए गेमचेंजर साबित होगा

नई दिल्ली  ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारत ने जिस तरह से पाकिस्तान के मिसाइलों और ड्रोन को हवा में ही खत्म कर दिया, उससे यह साबित हो गया कि भारत का एयर डिफेंस सिस्टम कितना मजबूत है. लेकिन भारत अब और भी खतरनाक तरीके से इसकी ताकत बढ़ाने में लगा है. दरअसल, पाकिस्तान के साथ ही भारत को चीन से भी मुकाबला करना पड़ सकता है और इसीलिए उसे अपने एयर डिफेंस को इतना पावरफुल बनाना होगा, जिससे कि दुश्मनों की कोई भी मिसाइल हमारी सीमा में घुसते ही तबाह हो जाए. इस पर काम भी शुरू हो गया है.  भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के प्रमुख ने घोषणा की कि प्रोजेक्ट कुशा रूस के S-500 के बराबर है और ताकत में S-400 से आगे है. यह इसे भारत के एयर डिफेंस के लिए एक ‘गेम-चेंजर’ के रूप में स्थापित करता है. इसे 80-90% इंटरसेप्शन सक्सेस रेट के साथ स्टील्थ जेट, ड्रोन, विमान और मैक 7 एंटी-शिप बैलिस्टिक मिसाइलों का मुकाबला करने के लिए डिज़ाइन किया गया है. प्रोजेक्ट कुशा डीआरडीओ द्वारा विकसित की जा रही एक महत्वाकांक्षी स्वदेशी लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणाली (एयर डिफेंस सिस्टम) है. इसे विस्तारित रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (ERADS) या प्रेसिजन-गाइडेड लॉन्ग-रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल (PGLRSAM) के रूप में भी जाना जाता है. प्रोजेक्ट कुशा 80 किलोमीटर एमआर-एसएएम और 400 किलोमीटर एस-400 के बीच की खाई को पाटता है, जो आकाश और बराक-8 जैसे सिस्टम के साथ इंटीग्रेटेड है. यह भारत की आत्मनिर्भरता पहल, ‘आत्मनिर्भर भारत’ का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. घरेलू समाधान का उद्देश्य क्षेत्रीय खतरों, विशेष रूप से पाकिस्तान और चीन से सुरक्षा को मजबूत करके भारत के हवाई क्षेत्र को हवाई खतरों से बचाना है. मई 2025 के भारत-पाकिस्तान संघर्ष के बाद इस प्रोजेक्ट ने सबका ध्यान खींचा है, जहां एयर डिफेंस सिस्टम ड्रोन और मिसाइलों के खिलाफ महत्वपूर्ण साबित हुई, जिसने कुशा जैसी स्वदेशी क्षमताओं की जरूरत को नोटिस में लाने का काम किया. यूरेशियन टाइम्स में प्रकाशित खबर के मुताबिक, अनुमान लगाया जा रहा है कि 2028-2029 तक यह डिफेंस सिस्टम तैयार हो जाएगा, जिसके बाद यह भारतीय वायु सेना (आईएएफ) और भारतीय नौसेना की ताकत को कई गुना बढ़ा देगा. सिस्टम स्पेसिफिकेशन: इंटरसेप्टर मिसाइल: प्रोजेक्ट कुशा की मुख्य ताकत इसके तीन-लेवल वाली इंटरसेप्टर मिसाइल सिस्टम में छिपा है, जिसे अलग-अलग दूरी पर विभिन्न हवाई खतरों को बेअसर करने के लिए डिज़ाइन किया गया है. M1 इंटरसेप्टर (150 किमी) मिसाइल कम दूरी पर लड़ाकू जेट, ड्रोन और क्रूज मिसाइलों जैसे खतरों को टारगेट करेगी. इसका कॉम्पैक्ट 250 मिमी व्यास वाला किल व्हीकल, दोहरे पल्स सॉलिड रॉकेट मोटर और थ्रस्ट वेक्टर कंट्रोल से लैस है, जो हाई स्पीड और सटीकता को तय करता है, जो इसे जंग के हालात में और भी खतरनाक बना देता है. और ज्यादा रेंज वाली M2 इंटरसेप्टर (250 किमी) मिसाइल एडवांस टारगेट्स को शामिल कर सकती है, जिसमें एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (AEW&CS) और एंटी-शिप बैलिस्टिक मिसाइल (ASBM) शामिल हैं. यह M1 के 250 मिमी किल व्हीकल को साझा करता है, जो मध्यम दूरी के खतरों के खिलाफ चालाकी और सटीकता के लिए अनुकूल है. एम3 इंटरसेप्टर (350-400 किमी), सिस्टम में सबसे लंबी दूरी की मिसाइल है, जिसे बड़े विमानों और संभावित रूप से छोटी और मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों (एसआरबीएम और आईआरबीएम) का मुकाबला करने के लिए डिज़ाइन किया गया है. इसकी विस्तारित सीमा और बढ़ी हुई मारक क्षमता को हासिल करने के लिए इसमें 450 मिमी व्यास का बड़ा किलिंग व्हीकल हो सकता है. कैपेबिलिटी: इन इंटरसेप्टर में 85% की असरदार सिंगल-शॉट किल संभावना है, जो पांच सेकंड के अंतराल पर साल्वो मोड में दो मिसाइलों को लॉन्च करने पर 98.5% तक बढ़ जाती है. मिसाइलों में संभवतः हिट-टू-किल (HTK) तकनीक का उपयोग किया जाता है, जो विस्फोटक वारहेड्स के बजाय काइनेटिक एनर्जी पर निर्भर करती है, जो US THAAD या SM-3 जैसे एडवांस सिस्टम के समान है. रडार और इंफ्रारेड गाइडेंस को मिलाकर ड्यूअल-सीकर टेक्नोलॉजी, लो-रडार-सिग्नेचर टारगेट्स, जैसे कि स्टील्थ एयरक्राफ्ट और क्रूज मिसाइलों को ट्रैक करने और नष्ट करने की उनकी क्षमता को बढ़ाती है. एडवांस रडार सिस्टम: प्रोजेक्ट कुशा का असरदार होना इसकी स्टेट-ऑफ-द-आर्ट रडार सिस्टम्स, विशेष रूप से लॉन्ग रेंज बैटल मैनेजमेंट रडार (LRBMR), एक S-बैंड रडार पर निर्भर करती है, जिसकी डिटेक्शन रेंज 500 किमी से अधिक है. यह रडार दुश्मन के इलाके में 500-600 किमी तक स्कैन कर सकता है, जो स्टील्थ एयरक्राफ्ट, ड्रोन, सटीक-गाइडेड युद्ध सामग्री और बैलिस्टिक मिसाइलों के खिलाफ शुरुआती चेतावनी देता है. यह सिस्टम भारत के इंटीग्रेटेड एयर कमांड और कंट्रोल सिस्टम (IACCS) के साथ बड़ी आसानी से इंटीग्रेट होती है, जिससे आकाश, MRSAM और S-400 सहित अन्य एयर डिफेंस सिस्टम्स के साथ रियल टाइम तालमेल संभव होता है. इसी तरह से, भारतीय नौसेना अपने अगली पीढ़ी के विध्वंसक के लिए 6×6 मीटर का रडार विकसित कर रही है, जो विशाखापत्तनम कैटेगरी के विध्वंसक के रडार से चार गुना बड़ा है, ताकि 1,000 किलोमीटर तक की दूरी तक मार करने वाली समुद्री मिसाइलों और ASBM का पता लगाया जा सके.

Air defense system : दुश्मन को खोज कर मारने में कामयाब है क्यूआर-एसएएम सिस्टम

नई दिल्ली: भारतीय सेना को जल्द ही एक नया स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम मिलने वाला है। इसपर लगभग 30,000 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसके तहत क्यूआर-एसएएम (QR-SAM:Quick Reaction Surface to Air Missile) सिस्टम खरीदे जाएंगे। रक्षा मंत्रालय जल्द ही इस प्रस्ताव पर विचार करने वाला है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अगुवाई वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद इस महीने के अंत तक इस प्रस्ताव को मंजूरी दे सकती है। इस मंजूरी को ‘आवश्यकता की स्वीकृति’ (Acceptance of Necessity) यानी एओएन कहा जाता है। QR-SAM सिस्टम बहुत तेजी से काम करने वाला स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम है। इसे दुश्मन के लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों और ड्रोन को 25-30 किलोमीटर की दूरी तक अचूक तरीके से मार गिराने के लिए बनाया गया है। हर तरह की कसौटी पर खरा उतरा है क्यूआर-एसएएम सिस्टम यह कदम भारत के मौजूदा एयर डिफेंस सिस्टम की कामयाबी पर विचार के बाद उठाया जा रहा है। हाल ही में इस सिस्टम ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान की ओर से भेजे गए तुर्की मूल के ड्रोन और चीनी मिसाइलों को मार गिराने में बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यह ऑपरेशन 7 से 10 मई को हुआ था। डीआरडीओ (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) और भारतीय सेना ने पिछले तीन-चार सालों में QR-SAM सिस्टम का सफल परीक्षण किया है। उन्होंने इसे अलग-अलग तरह के खतरों का सामना करने के लिए जांचा और परखा है। यह परीक्षण दिन और रात दोनों समय किया गया है। भारत इलेक्ट्रोनिक्स (Bharat Electronics) और भारत डिनामिक्स (Bharat Dynamics) नाम की सरकारी कंपनियां मिलकर QR-SAM सिस्टम बनाएंगी। दुश्मन को खोज कर मारने में कामयाब है क्यूआर-एसएएम सिस्टम एक अधिकारी के मुताबिक,यह ‘QR-SAM सिस्टम चलते-फिरते भी काम कर सकता है। यह दुश्मन को खोज और ट्रैक कर सकता है और थोड़े समय के लिए रुककर भी हमला कर सकता है। इसे टैंकों और पैदल सेना के वाहनों के साथ चलने के लिए बनाया गया है, ताकि युद्ध के मैदान में उन्हें हवाई हमलों से बचाया जा सके। सेना की वायु रक्षा (AAD) ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया था। उन्हें QR-SAM की 11 रेजिमेंट चाहिए। इसके साथ ही, वे स्वदेशी आकाश सिस्टम को भी शामिल कर रहे हैं, जिसकी मारक क्षमता लगभग 25 किलोमीटर है। और मजबूत होगी वायु सेना और थल सेना की रक्षा प्रणाली QR-SAM सिस्टम के आने से IAF (भारतीय वायु सेना) और सेना की मौजूदा वायु रक्षा प्रणाली और मजबूत हो जाएगी। इस प्रणाली में लंबी दूरी की रूसी एस-400 ट्रिम्फ ‘S-400 Triumf’ मिसाइलें (380 किलोमीटर की मारक क्षमता) और बराक-8 (Barak-8) मध्यम दूरी की एसएएम(Surface to Air Missile) सिस्टम (70 किलोमीटर) शामिल हैं, जिसे इजराइल के साथ मिलकर बनाया गया है। इसके अलावा, इसमें रूसी इगला-एस (Igla-S) मिसाइलें (6 किलोमीटर), एल-70 एंटी-एयरक्राफ्ट गन (3.5 किलोमीटर) और स्वदेशी ड्रोन का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने वाले सिस्टम (1 किलोमीटर-2 किलोमीटर) भी शामिल हैं। स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम में आगे और बड़ी योजना पर काम डीआरडीओ बहुत कम दूरी की वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली (VSHORADS) भी तैयार कर रहा है, जिसकी मारक क्षमता 6 किलोमीटर है। लेकिन, असली गेम-चेंजर ‘प्रोजेक्ट कुशा’ के तहत विकसित की जा रही 350 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली वायु रक्षा प्रणाली होगी। भारत इस लंबी दूरी की प्रणाली को 2028-2029 तक तैनात करने की योजना बना रहा है। रक्षा मंत्रालय ने सितंबर 2023 में भारतीय वायु सेना (IAF) के लिए इसके पांच स्क्वाड्रन खरीदने के लिए 21,700 करोड़ रुपये की एओएन को मंजूरी दी थी।  

एस-400 मिसाइल सिस्टम को भारतीय वायुसेना के बेड़े में सबसे ताकतवर हथियार

नई दिल्ली भारत लगातार अपनी वायु रक्षा प्रणाली को मजबूत कर रहा है ताकि पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों से उत्पन्न होने वाले हवाई खतरों का प्रभावी ढंग से मुकाबला कर सके. भारतीय वायु रक्षा प्रणाली में उन्नत मिसाइल सिस्टम, रडार और कमांड सेंटर शामिल हैं, जो दुश्मन के विमानों, ड्रोन और मिसाइलों को नष्ट करने में सक्षम हैं. भारत के दो तरफ उसके दुश्मन हैं. दोनों के पास खतरनाक मिसाइलों का जखीरा है. ड्रोन्स हैं. अटैक हेलिकॉप्टर्स हैं. फाइटर जेट्स हैं. भारत की सुरक्षा का लेवल बहुत जटिल है. सीमाओं और जरूरी स्थानों की सुरक्षा के लिए सटीक एयर डिफेंस सिस्टम की जरूरत है, ताकि चीन या PAK के हवाई हमले को करारा जवाब दिया जा सके. इजरायल के आयरन डोम जैसी हथियार प्रणाली की जरूरत है. क्या भारत में ऐसी प्रणाली है. या नहीं. दोनों तरफ दुश्मन, दोनों के पास खतरनाक हथियार पाकिस्तान और चीन के पास के पास कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें हैं. लंबी दूरी के रॉकेट्स हैं. कुछ तो 300 किलोमीटर की रेंज से भी ज्यादा के हैं. ये भारतीय सीमा के पास के शहरों, कस्बों और गांवों के लिए खतरा है. इजरायल का आयरन डोम कम दूरी के रॉकेट्स, आर्टिलरी गोले और बैलिस्टिक मिसाइलों को आसमान में ही खत्म कर देता है. इसलिए भारत को भी ऐसे ही रक्षाकवच की जरूरत है. भारत की जो भौगोलिक स्थिति है. जिस तरह से उसके दुश्मन दो अलग-अलग लोकेशन पर मौजूद हैं, उसके हिसाब से भारत को बहुत बड़े पैमाने पर खतरों का सामना करना है. इन खतरों में बैलिस्टिक, क्रूज और हाइपरसोनिक मिसाइलों और हथियारों का खतरा है. इसलिए भारत को ज्यादा सटीक बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) सिस्टम चाहिए. जिसमें कई तरह के लेयर हों. कम दूरी से लेकर अंतरिक्ष तक हमला करने लायक मिसाइलें. कैसे-कैसे एयर डिफेंस सिस्टम हैं भारत के पास? भारत को अपने एयर डिफेंस सिस्टम को विदेशी डिफेंस सिस्टम के साथ मिलाकर तैनात करने होंगे. भारत के एयर डिफेंस सिस्टम को मल्टी लेयर बनाना होगा. जैसे- पृथ्वी एयर डिफेंस (PAD), एडवांस्ड एयर डिफेंस (AAD) और तीसरा लॉन्ग रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल (LRSAM). रूस से लिए गए S-400 एयर डिफेंस सिस्टम से खाली काम नहीं चलेगा. इसके अलावा भारत को अपने छोटे से लेकर बड़े एयर डिफेंस सिस्टम को आपस में जोड़कर रखना होगा. ताकि वो बेहतर तरीके और सामंजस्य के साथ काम कर सके. एक्स-राड और स्वाति रडार डीआरडीओ द्वारा विकसित उन्नत रडार सिस्टम. 300 किमी तक लक्ष्य का पता लगाना, स्टील्थ विमानों को ट्रैक करने की क्षमता. ये रडार पाकिस्तानी विमानों और मिसाइलों की गतिविधियों को शुरुआती चेतावनी के साथ ट्रैक कर सकते हैं, जिससे जवाबी कार्रवाई तुरंत हो सकती है. आइए जानते हैं कि भारत के पास कौन-कौन से एयर डिफेंस सिस्टम हैं… इंडियन बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस प्रोग्राम इस प्रोग्राम के तहत कई रेंज की बैलिस्टिक मिसाइलों से बचाव के लिए डिफेंस सिस्टम बनाया गया है. इसके लिए दो लेयर वाली इंटरसेप्टर मिसाइलें बनाई गईं. ये हैं- पृथ्वी एयर डिफेंस (PAD), जिसकी मिसाइलें बेहद अधिक ऊंचाई पर जाकर दुश्मन टारगेट को बर्बाद कर सकती हैं. दूसरा है एडवांस्ड एयर डिफेंस (AAD), इसकी मिसाइलें कम ऊंचाई वाले टारगेट्स को मार गिराने के लिए बनाई गई हैं. ये मिसाइल सिस्टम 5 हजार किलोमीटर या उससे ज्यादा दूरी से आने वाली हवाई खतरों को हवा में ही खत्म कर देती हैं. क्योंकि भारत को हमेशा से पाकिस्तान और चीन की बैलिस्टिक मिसाइलों को खतरा बना हुआ है. PAD सिस्टम की मिसाइलों की रेंज 300 से 2000 किलोमीटर है. ये जमीन से 80 किलोमीटर ऊपर दुश्मन टारगेट को नष्ट कर सकते हैं. ये मिसाइलें 6174 km/hr की स्पीड से दुश्मन की तरफ बढ़ती हैं. इसमें पृथ्वी सीरीज की सभी मिसाइलें शामिल हैं. अगर एडवांस्ड एयर डिफेंस यानी AAD की बात करें तो इसकी मिसाइलें वायुमंडल के नीचे अधिकतम 30 किलोमीटर की ऊंचाई तक टारगेट को ध्वस्त कर सकती हैं. इनकी ऑपरेशनल रेंज 150 से 200 किलोमीटर है. ये मिसाइलें 5556 km/hr की स्पीड से दुश्मन की तरफ बढ़ती हैं. इंटरमीडिएट इंटरसेप्शन यानी S-400 एयर डिफेंस सिस्टम S-400 एक बार में एक साथ 72 मिसाइल छोड़ सकती है. इस एयर डिफेंस सिस्टम को कहीं मूव करना बहुत आसान है क्योंकि इसे 8X8 के ट्रक पर माउंट किया जा सकता है. माइनस 50 डिग्री से लेकर माइनस 70 डिग्री तक तापमान में काम करने में सक्षम इस मिसाइल को नष्ट कर पाना दुश्मन के लिए बहुत मुश्किल है. क्योंकि इसकी कोई फिक्स पोजिशन नहीं होती. इसलिए इसे आसानी से डिटेक्ट नहीं कर सकते.   S-400 मिसाइल सिस्टम में चार तरह की मिसाइलें होती हैं जिनकी रेंज 40, 100, 200, और 400 km तक होती है. यह सिस्टम 100 से लेकर 40 हजार फीट तक उड़ने वाले हर टारगेट को पहचान कर नष्ट कर सकता है.  एस-400 मिसाइल सिस्टम का राडार बहुत अत्याधुनिक और ताकतवर है. इसका रडार 600 km तक की रेंज में करीब 300 टारगेट ट्रैक कर सकता है. यह सिस्टम मिसाइल, एयरक्राफ्ट या फिर ड्रोन से हुए किसी भी तरह के हवाई हमले से निपटने में सक्षम है. शॉर्ट रेंज इंटरसेप्शन… आकाश, पिछोरा जैसी मिसाइलें पेचोरा मिसाइल सिस्टम सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल है पेचोरा (Pechora). भारत के पास इसके 30 स्क्वॉड्रन्स हैं. जो अलग-अलग सीमाओं पर सुरक्षा के लिए तैनात हैं. इसके 12 वैरिएंट्स हैं, जिनका इस्तेमाल दुनियाभर के 31 देश कर रहे हैं. इसमें लगी मिसाइल 953 kg वजनी होती है. इसकी नाक पर 60 kg का फ्रैगमेंटेड हाई एक्सप्लोसिव हथियार लगाते हैं. इसके ऑपरेशनल रेंज 3.5 से 35 km है. अधिकतम 59 हजार फीट की ऊंचाई तक जा सकती है. इसकी स्पीड 3704 से 4322 km/hr की गति से उड़ती है. पेचोरा मिसाइल की सबसे खास बात है कम ऊंचाई पर उड़ते हुए टारगेट को खत्म करने की ताकत. इसका राडार 32 से 250 किलोमीटर तक की रेंज में दुश्मन पर नजर रखता है. मिसाइल थोड़ा पुराने टेक्नीक पर काम करती है, यानी रेडियो कमांड गाइडेंस सिस्टम पर. कोई भी अत्याधुनिक विमान सबकुछ बंद कर सकता है लेकिन वह अपना रेडियो बंद नहीं कर सकता. अगर दुश्मन का विमान, हेलिकॉप्टर रेडियो बंद नहीं कर पाएगा तो यह मिसाइल उसे ध्वस्त कर देगी. यहां तक कि छोटे-मोटे ड्रोन्स का भी … Read more

पाक का एयर डिफेंस सिस्टम तबाह, कई शहरों में जोरदार ड्रोन अटैक, लाहौर और कराची में हड़कंप

लाहौर / कराची/ सियालकोट पाकिस्तान में एयर डिफेंस सिस्टम पूरी तरह तबाह हो गई है. इसका नजारा गुरुवार को देखने को मिला, जब लाहौर से लेकर कराची तक कई बड़े शहरों में धड़ाधड़ ड्रोन के अटैक हुए. पाकिस्तान सरकार के मुताबिक अब तक 25 ड्रोन अटैक हो चुके हैं. लाहौर, कराची और रावलपिंडी में 3 बड़े ड्रोन अटैक हुए हैं.भारत और पाकिस्तान के बीच लगातार तनातनी की खबरें आ रही हैं. इंडियन आर्मी के द्वारा पाकिस्तान पर एयरस्ट्राइक करते हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ लॉन्च किए जाने के बाद पाकिस्तान लगातार बदले की कार्रवाई की बात कर रहा है. इसी बीच खबर आ रही है कि पाकिस्तान के सियालकोट, लाहौर और एक अन्य शहर में पाकिस्तानी सेना की एयर डिफेंस यूनिट को भारी नुकसान हुआ है.सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तानी सेना के हेडक्वार्टर 9 मिसाइल डिफेंस सिस्टम यूनिट्स को ड्रोन हमलों में भारी नुकसान हुआ है इन तीनों ही शहरों में ड्रोन अटैक से पाकिस्तान में हड़कंप मच गया है. रावलपिंडी, लाहौर और कराची में आर्मी का कैंप है. रावलपिंडी में तो आर्मी कैंप को ही उड़ा दिया गया है. पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक कराची में ड्रोन ब्लास्ट हुआ है. ड्रोन ब्लास्ट के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल है. सेना ने इलाके को अपने कब्जे में ले लिया है. कराची में ही पाकिस्तान का सभी परमाणु बम स्टोर है. ऐसे में जिस तरह से कराची में ड्रोन ब्लास्ट हुआ है, उसने पाकिस्तान के सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठा दिया है. कराची ब्लास्ट को सुरक्षा में बड़ी सेंध बताया जा रहा है. खबरों में कहा गया है कि लाहौर में नेवी बेस के पास और कराची में आर्मी बेस पर धमाके हुए हैं. अब तक 12 शहरों में ड्रोन अटैक पाकिस्तान के कराची, गुंजरावाला, लाहौर, चकवाल और घोटकी समेत 12 में ड्रोन अटैक हुआ है. ड्रोन अटैक की वजह से इन इलाकों में इमरजेंसी के हालात हैं. यह ड्रोन कहां से आया है, अब तक पाकिस्तान ने इस पर कुछ नहीं कहा है. न ही ड्रोन अटैक को लेकर किसी ने जिम्मेदारी ली है. सबसे ज्यादा 3 ड्रोन ब्लास्ट लाहौर में हुआ है. पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक कुल 12 धमाके अब तक पाकिस्तान में हो चुके हैं. लाहौर में सैन्य ठिकाने के पास ही ड्रोन ब्लास्ट की खबर है. एयर डिफेंस सिस्टम पूरी तरह से फेल ड्रोन धमाके को रोकने में पाकिस्तान का एयर डिफेंस सिस्टम पूरी तरह फेल नजर आ रहा है. दिलचस्प बात है कि बुधवार को भरी सदन में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पाकिस्तान के वायुसेना की जमकर तारीफ की थी. शहबाज का कहना था कि पाकिस्तान की वायुसेना मजबूती से मैदान में डटी है. पीएम की तारीफ के तुरंत बाद पाक के वायुसेना चीफ से असीम मुनीर ने मुलाकात की थी. पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने दावा किया कि हमने 12 हैरप ड्रोन्स को मार गिराया है। इन्हें लाहौर और कराची में मार गिराया गया। उन्होंने अपने दावे के समर्थन में ड्रोन्स की कुछ तस्वीरें भी दिखाईं। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं की जा सकती। इस तरह पाकिस्तान ने खुद स्वीकार किया है कि एक दिन पहले ही उसके यहां ऐक्टिव 9 आतंकी ठिकाने नेस्तनाबूद करने के बाद भारत ने 9 शहरों पर ड्रोन अटैक किए हैं। पाक सेना ने कहा कि भारत का यह ऐक्शन गंभीर है और हमें उकसाने वाली कार्रवाई है। जनरल चौधरी ने कहा कि यह खुले तौर पर हमें उकसाने वाली कार्रवाई है। उन्होंने कहा कि हमारी सेना पूरी तरह से अलर्ट पर है। दरअसल हैरप ड्रोन्स को इजरायल की कंपनी MBT मिसाइल डिविजन ने तैयार किया है। यह कंपनी इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज की एक ब्रांच है। इजरायली कंपनी की वेबसाइट के मुताबिक ये ड्रोन्स युद्ध के दौरान टारगेट अटैक करने में माहिर हैं। इन्हें ऑपरेटर्स की कमांड के साथ कहीं भी भेजा जा सकता है। इन ड्रोन्स को दुश्मन के एयर डिफेंस को मार गिराने और अन्य टारगेट्स को निपटाने में सक्षम है। दरअसल इन ड्रोन्स की खासियत यह है कि इसमें एक तरह की छोटी मिसाइल भी होती है। इसके अलावा इन ड्रोन्स को पूरी तरह ऑटोमेटिक या फिर सेमी-मैनुअल तरीके से भी संचालित किया जा सकता है। इजरायल के इन ड्रोन्स की भारत और अजरबैजान ने बड़े पैमाने पर खरीद की है। बता दें कि पाकिस्तान ने खुद ही पंजाब के अमृतसर और उसके आसपास के इलाकों में ड्रोन और मिसाइलों से हमले की कोशिश की थी, जिसे भारत ने नाकाम कर दिया। अमृतसर के कई इलाकों में खेतों में पाकिस्तानी ड्रोन्स और मिसाइलों के टुकड़े पाए गए हैं। इनका निरीक्षण करने के लिए सेना के भी कई अधिकारी आज मौके पर पहुंचे।  

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