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सैटेलाइट तस्वीरों में खुलासा: ईरान पर हमले की तैयारी कर रहा है अमेरिका

न्यूयॉर्क मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर चरम पर पहुंच गया है. सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि अमेरिकी सैन्य अड्डों पर लड़ाकू विमानों, टैंकरों और मिसाइल डिफेंस सिस्टम की संख्या तेजी से बढ़ रही है. प्लैनेट लैब्स और रॉयटर्स की तस्वीरों में कतर, जॉर्डन और सऊदी अरब के अड्डों पर बदलाव साफ दिख रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि यह ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम पर हमले की तैयारी या जवाबी कार्रवाई से बचाव का संकेत हो सकता है.   अमेरिका-ईरान के बीच तनाव  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान से न्यूक्लियर डील चाहते हैं, लेकिन बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम पर भी रोक की मांग कर रहे हैं. ईरान ने साफ मना कर दिया है. ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर डील नहीं हुई तो अगला हमला बहुत बुरा होगा. पिछले साल अमेरिका ने ईरान के न्यूक्लियर साइट्स पर हमले किए थे. अब फिर तनाव बढ़ रहा है. ईरान अपनी न्यूक्लियर साइट्स को मिट्टी से ढक रहा है. टनल बंद कर रहा है, जो हमले की आशंका दिखाता है. सैटेलाइट तस्वीरों में क्या दिख रहा है? अल उदेद एयर बेस, कतर: अमेरिकी सेंट्रल कमांड का मुख्यालय. 17 जनवरी से 1 फरवरी के बीच विमानों की संख्या बढ़ी है. मोबाइल पैट्रियट मिसाइल लॉन्चर्स तैनात किए गए है, जो ईरान की मिसाइलों से बचाव के लिए हैं.  मुवाफक साल्टी एयर बेस, जॉर्डन: 25 जनवरी से 2 फरवरी के बीच दर्जनों F-15E फाइटर जेट्स, A-10 ग्राउंड अटैक विमान और MQ-9 ड्रोन आए. यह ईरान के करीब है.  प्रिंस सुल्तान एयर बेस, सऊदी अरब: C-5 गैलेक्सी और C-17 ट्रांसपोर्ट विमान दिखे, जो भारी सामान ले जाते हैं. अन्य जगहों जैसे ओमान और डिएगो गार्सिया में भी विमान बढ़े हैं. कुल मिलाकर फाइटर जेट्स, टैंकर और डिफेंस सिस्टम की तैनाती बढ़ी है. इसका मतलब क्या है?     ट्रंप प्रशासन साफ संदेश दे रहा है कि वह तैयार है.     यह हमले की तैयारी हो सकती है, क्योंकि इतनी तैनाती महंगी है.     या ईरान की जवाबी मिसाइलों से बचाव, क्योंकि ईरान ने पहले अल उदेद पर हमला किया था.     ईरान भी अपनी न्यूक्लियर साइट्स (जैसे इस्फहान) को मजबूत कर रहा है, टनल मिट्टी से भर रहा है. आगे क्या? बातचीत चल रही है, लेकिन दोनों तरफ तैयारी जोरों पर है. अगर हमला हुआ तो क्षेत्रीय युद्ध हो सकता है. एक्सपर्ट कहते हैं कि यह डिप्लोमेसी को मजबूत करने का दबाव भी हो सकता है. 

अमेरिका और इजरायल के दृष्टिकोण में अब दरार, क्षेत्रीय संतुलन खतरे में

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में वैश्विक मंच पर ‘शांति पुरुष’ बनने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा था। लेकिन उनके इस मिशन को उनके करीबी सहयोगी इजरायल और उससे पहले रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने तगड़ा झटका दिया है। इजरायल ने ट्रंप की सलाह को नजरअंदाज कर ईरान पर सैन्य हमला किया, जबकि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन युद्धविराम प्रस्ताव को ठुकराकर ट्रंप की कूटनीतिक कोशिशों को चुनौती दी। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से इजरायल से ईरान पर हमला न करने की अपील की थी। ट्रंप ने कहा था कि उनका लक्ष्य “शांति स्थापित करना” है। लेकिन इसी अपील के कुछ घंटों बाद, ट्रंप के करीबी दोस्त इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भीषण हमले की घोषणा कर दी। यह हमला ट्रंप के उस उद्देश्य को एक और झटका है, जिसमें वह खुद को “शांति पुरुष” बता रहे थे। इससे पहले, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी ट्रंप की यूक्रेन में युद्धविराम की अपील को खारिज कर दिया था। इसके साथ ही, इजरायल ने गाजा पट्टी में भी एक और बड़ा सैन्य अभियान जारी रखा है। यहां भी ट्रंप प्रशासन की देखरेख में हुआ संघर्षविराम अब टूट चुका है। ओमान में बातचीत से पहले हमला ट्रंप के मित्र और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ यूक्रेन-रूस, इजरायल-गाजा और इजरायल-ईरान इन तीनों संकटों में मध्यस्थता कर रहे हैं। वह रविवार को ओमान में ईरानी अधिकारियों से मुलाकात करने वाले थे। ऐसे में इजरायल का हमला न केवल चौंकाने वाला प्रतीत हो रहा है, बल्कि अमेरिकी कूटनीति को भी कमजोर करता है। हालांकि ट्रंप ने बाद में खुद को इजरायल से पूरी तरह अलग नहीं किया। कुछ सूत्रों ने कहा कि अमेरिका के सार्वजनिक बयानों का उद्देश्य ईरान को चौंकाना था। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरान ने उनकी शर्तें मानने से इनकार कर दिया और हमला 60-दिवसीय अल्टीमेटम के एक दिन बाद हुआ, हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया कि इसके बावजूद विटकॉफ की बातचीत क्यों तय थी। ट्रंप बोले: “मैं नहीं चाहता कि वो हमला करें” इजरायली हमले से पहले ट्रंप ने कहा था, “मैं नहीं चाहता कि वो अंदर जाएं, क्योंकि इससे सब कुछ बिगड़ जाएगा।” लेकिन नेतन्याहू ईरान की सरकार को इजरायल के लिए अस्तित्वगत खतरा बताते हैं और पहले भी ईरान के हवाई रक्षा तंत्र पर हमले कर चुके हैं। अमेरिका-इजरायल के रुख में दरार पूर्व पेंटागन अधिकारी और वॉशिंगटन इंस्टीट्यूट की वरिष्ठ फेलो डैना स्ट्रौल ने कहा, “हम स्पष्ट रूप से देख रहे हैं कि अमेरिका और इजरायल के दृष्टिकोण में अब एक मोड़ आ गया है।” उन्होंने कहा कि ये हमले ईरान के परमाणु कार्यक्रम को कुछ समय के लिए बाधित करेंगे, लेकिन सवाल यह है कि अमेरिका और इजरायल अब एक साथ मिलकर आगे क्या करेंगे। स्ट्रौल ने यह भी कहा कि ट्रंप और इजरायल के बीच पहले से ही मतभेद उभर रहे थे, खासकर जब ट्रंप ने सीरिया पर लगे प्रतिबंध हटा दिए थे और पूर्व इस्लामी लड़ाका अहमद अल-शराआ को सत्ता में आने के बाद स्वीकार कर लिया। क्षेत्रीय संतुलन खतरे में पिछले महीने कतर में ट्रंप ने कहा था कि उन्हें लगता है कि ईरान के साथ समझौता जल्द होगा और “परमाणु धूल” का खतरा नहीं रहेगा। लेकिन अब इजरायल की सैन्य कार्रवाई ने हालात पलट दिए हैं। सीटो संस्थान के रक्षा नीति निदेशक जस्टिन लोगन ने कहा कि इजरायली हमला अमेरिका की कूटनीतिक कोशिशों को “नष्ट कर देगा” और ट्रंप को अमेरिका की सैन्य भागीदारी से अलग रहना चाहिए। उन्होंने कहा, “इजरायल को अपनी विदेश नीति चुनने का अधिकार है, लेकिन उसे उसकी कीमत भी खुद चुकानी चाहिए।” पुतिन का यूक्रेन युद्धविराम पर इनकार दूसरी ओर, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी ट्रंप की शांति पहल को करारा जवाब दिया था। ट्रंप ने यूक्रेन-रूस युद्ध को खत्म करने के लिए 30 दिन के युद्धविराम का प्रस्ताव रखा था। इसके लिए उन्होंने पुतिन के साथ कई दौर की बातचीत की, जिसमें घिरे हुए यूक्रेनी सैनिकों की सुरक्षा का मुद्दा भी शामिल था। हालांकि, पुतिन ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। रूसी सरकारी समाचार एजेंसी TASS के अनुसार, पुतिन ने कहा कि वह यूक्रेन के साथ सीधी बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन उनकी शर्तें वही रहेंगी, जिनमें यूक्रेन को रूस के कब्जे वाले क्षेत्रों को छोड़ना होगा। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने साफ कहा कि रूस किसी दबाव में नहीं आएगा। भारत ने भी किया था खारिज डोनाल्ड ट्रंप की ‘शांति पुरुष’ बनने की कोशिशों को भारत-पाकिस्तान तनाव को लेकर उनके हालिया विवादित दावों ने भी झटका दिया है। ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता की पेशकश की थी और दोनों देशों ने इसे स्वीकार किया था। हालांकि, भारत ने तुरंत इस दावे का खंडन करते हुए कहा कि कश्मीर एक द्विपक्षीय मुद्दा है और इसमें किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की कोई गुंजाइश नहीं है। ट्रंप ने यहां तक दावा किया कि उन्होंने व्यापार का हवाला देकर भारत-पाकिस्तान की लड़ाई रुकवा दी। भारत ने इस दावे को भी खारिज किया है। ट्रंप की कूटनीति पर सवाल ट्रंप ने अपने चुनावी अभियान में बार-बार दावा किया था कि वह वैश्विक युद्धों को खत्म कर शांति स्थापित करेंगे। लेकिन इजरायल और रूस के ताजा कदमों ने उनकी इस छवि को धक्का पहुंचाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की ‘शांति पुरुष’ की छवि तब तक अधूरी रहेगी, जब तक उनके सहयोगी उनकी सलाह को गंभीरता से नहीं लेंगे। ट्रंप और पुतिन की शख्सियत में समानता है, लेकिन पुतिन अपनी रणनीति पर अडिग हैं। इजरायल भी अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है, जिससे ट्रंप की कूटनीति कमजोर पड़ रही है। अमेरिकी राजनीति में विभाजन ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के सांसद इजरायल के साथ खुलकर खड़े हैं। सीनेटर टॉम कॉटन ने कहा, “अमेरिका को इजरायल का पूरा समर्थन करना चाहिए और अगर ईरान अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाता है तो उसकी सरकार को गिरा देना चाहिए।” वहीं ट्रंप के डेमोक्रेट प्रतिद्वंद्वियों ने इजरायली हमले की आलोचना की है। सीनेट सशस्त्र बल समिति के शीर्ष डेमोक्रेट जैक रीड ने कहा, “ईरान पर इजरायल का … Read more

एलन मस्क के खिलाफ अमेरिका में फूंक दी टेस्ला की कई कारें

वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खास एलन मस्क की मुसीबतें इन दिनों जा रही है। अमेरिका की सरकार में दक्षता विभाग के प्रमुख का पद संभाल रहे मस्क के खिलाफ दुनियाभर में प्रदर्शन तेज हो गए हैं। शनिवार को हजारों लोगों ने सड़क कर उतरकर मस्क के खिलाफ नारे लगाए। इस दौरान लोगों ने टेस्ला की कारों की भी निशाना बनाया। लोगों ने टेस्ला की कई कारें को आग के हवाले कर दिया। वहीं अमेरिका के अलावा ब्रिटेन और जर्मनी जैसे देशों में भी लोग मस्क के प्रति नाराजगी कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक लोग DOGE प्रमुख के रूप में मस्क की नीतियों का विरोध करने के लिए यह कदम उठा रहे हैं। लोगों का कहना है कि मस्क ने इस विभाग के तहत काम कर लोगों की संवेदनशील जानकारी हासिल की है और सरकारी खर्च में कटौती करने का हवाला देते हुए एजेंसियों को बंद करने कर दिया है। इससे हजारों लोगों की नौकरी एक झटके में छीन गई है और लाखों लोग प्रभावित हुए हैं। टेस्ला के शोरूम को बनाया निशाना एलन मस्क के इन कदमों को लेकर लोग बेहद नाराज हैं और इसीलिए वे मस्क की संपत्ति को निशाना बना रहे हैं। दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क की अनुमानित 340 बिलियन डॉलर की संपत्ति में सबसे बड़ा हिस्सा टेस्ला कंपनी के शेयर हैं। शनिवार को अमेरिका मेंटेस्ला के सभी 277 शोरूम और सेंटर पर लोगों की भीड़ टूट पड़ी। टेक्सास, न्यूजर्सी, मैसाचुसेट्स, कनेक्टिकट, न्यूयॉर्क, मिनेसोटा और अमेरिका के कई अन्य हिस्सों में टेस्ला डीलरशिप के बाहर सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने प्रदर्शन किया। नारे लगाते दिखे लोग प्रदर्शन से जुड़े कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिनमें लोग ‘टेस्ला को जलाओ, लोकतंत्र बचाओ’, ‘अमेरिका को मस्क से मुक्त करो’, ‘नाजी कारें न खरीदें’ जैसे पोस्टर लिए नजर आ रहे हैं। शिकागो के एक शोरूम के बाहर कई दर्जन लोगों ने “एलन मस्क को जाना होगा!” जैसे नारे लगाए हैं। वहीं ब्रिटेन में भी प्रदर्शनकारियों ने मस्क के फैसले के विरोध में ‘नाजी कार न खरीदें’, ‘दिवालिया एलन’ जैसे नारे लगाए। कुछ प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर टेस्ला की कारों को आग लगा दी। मस्क को मिला है राष्ट्रपति का साथ बता दें कि अमेरिका में इससे पहले भी टेस्ला की गाड़ियों को निशाना बनाया गया है। मस्क ने कहा है कि वे हमलों से स्तब्ध हैं और यह पागलपन तुरंत रुकना चाहिए। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी एलन मस्क का साथ देते दिखे हैं। उन्होंने कहा है कि टेस्ला की गाड़ियों पर हमले करने वालों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा और उन्हें 20 साल तक के लिए जेल भेज दिया जाएगा।

‘दोनों देशों को मिलकर काम करने की जरूरत’, अमेरिका : राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक और डोभाल की भेंट

वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से मुलाकात की। इस मुलाकात को लेकर व्हाइट हाउस ने कहा कि दोनों देशों को पहले से ज्यादा विश्वसनीय और लचीला आधार बनाने के लिए अपने साझेदारों के साथ मिलकर काम करने की जरूरत है। दोनों देशों ने तकनीकी और रक्षा आपूर्ति शृंखला को एकीकृत करने के लिए कदम उठाए हैं। व्हाइट हाउस ने कहा कि बैठक के दौरान सुलिवन और डोभाल ने तकनीक के संयुक्त उत्पादन और विकास के प्रयास के महत्व को लेकर चर्चा की। यह हमें दुनिया के लिए सुरक्षित, विश्वसनीय और लागत-प्रतिस्पर्धी तकनीकी समाधान प्रदान करने में सक्षम बनाएगा। संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत अंतरिक्ष से लेकर सेमी कंडक्टर, जैव प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा, उन्नत दूरसंचार और स्वच्छ ऊर्जा को लेकर साझेदारी के साथ काम कर रहे हैं। इसके परिणाम भी सामने आए हैं। व्हाइट हाउस के मुताबिक हमारी साझेदारी ने हिंद-प्रशांत और यूरोप के समान विचारधारा वाले देशों के साथ बहुपक्षीय कार्य को भी बढ़ावा दिया है। इसमें बायो-5 बायोफार्मास्युटिकल सप्लाई चेन कंसोर्टियम, यूएस-इंडिया-आरओके टेक्नोलॉजी त्रिपक्षीय और क्वाड के माध्यम से ऑस्ट्रेलिया और जापान के साथ चल रहे सहयोग शामिल हैं। बैठक में सुलिवन और डोभाल ने तकनीकी संरक्षण को मजबूत करने के अपने साझा संकल्प को लेकर प्रतिबद्धता जताई। साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं को दूर करने के प्रयासों पर चर्चा की। इन मुद्दों पर भी हुई चर्चा व्हाइट हाउस ने कहा कि दोनों देशों के सुरक्षा सलाहकारों ने द्विपक्षीय रणनीतिक व्यापार, प्रौद्योगिकी और औद्योगिक सहयोग में दीर्घकालिक बाधाओं को दूर करने की प्रगति की सराहना की। दोनों ने विश्वास व्यक्त किया कि सरकारों, उद्योग और शिक्षा जगत के बीच उन्होंने जो सेतु बनाए हैं, वे कायम रहेंगे और तकनीकी उद्यम के हर आयाम में उनकी महत्वपूर्ण उपलब्धियों को प्रतिबिंबित करेंगे। दोनों एनएसए नियमित रूप से व्यापक द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक एजेंडे पर गहन चर्चा के माध्यम से उच्च स्तरीय वार्ता में शामिल रहे हैं। मिसाइल निर्यात नियंत्रण नीतियों की दी जानकारी डोभाल-सुलिवन बैठक के बाद, अमेरिकी एनएसए सुलिवन ने भारत को मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था (एमटीसीआर) के तहत अमेरिकी मिसाइल निर्यात नियंत्रण नीतियों में बाइडन प्रशासन द्वारा लाए गए अपडेट के बारे में जानकारी दी, जिससे भारत के साथ अमेरिकी वाणिज्यिक अंतरिक्ष सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। दो दिवसीय यात्रा पर एनएसए अमेरिका के निवर्तमान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) जेक सुलिवन पांच और छह जनवरी को भारत की यात्रा पर थे। उन्होंने यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर से भी मुलाकात की। 20 जनवरी को डोनाल्ड ट्रंप के 47वें अमेरिकी राष्ट्रपति बनने के बाद एनएसए का पद माइकल वाल्ट्ज संभालेंगे।

‘सत्ता हस्तांतरण को मुश्किल बनाने की हरसंभव कोशिश’, अमेरिका: डोनाल्ड ट्रंप का बाइडन पर बड़ा आरोप

वाशिंगटन। अमेरिका के नव-निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 20 जनवरी को शपथ लेंगे। इससे पहले, रिपब्लिकन नेता ने मौजूदा राष्ट्रपति जो बाइडन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ट्रंप का कहना है कि डेमोक्रेटिक नेता सत्ता के हस्तांतरण को मुश्किल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने हाल के दिनों में जलवायु और अन्य प्रशासनिक मुद्दों पर बाइडन के कार्यकारी आदेशों का उदाहरण देते हुए यह आरोप लगाया। डोनाल्ड ट्रंप 20 जनवरी को अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेंगे। इसी के साथ वह अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय ‘व्हाइट हाउस’ में बाइडन की जगह ले लेंगे। रिपब्लिकन नेता ने सोशल मीडिया मंच ‘ट्रुथ सोशल’ पर कहा, ‘बाइडन सत्ता हस्तांतरण को मुश्किल बनाने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं। इसलिए इस तरह के फैसले लिए जा रहे हैं जो पहले कभी नहीं देखे गए। ‘ग्रीन न्यू स्कैम’, धन की बर्बादी के फैसले और हास्यास्पद कार्यकारी आदेश इसके उदाहरण हैं।’ डरो मत…. उन्होंने कहा, ‘डरो मत, ये सभी आदेश जल्द ही समाप्त हो जाएंगे हम सामान्य समझ तथा ताकत वाला देश बन जाएंगे।’ अमेरिकी संसद द्वारा ट्रंप की जीत की पुष्टि किए जाने से कुछ पहले और बाइडन के अमेरिका के अधिकांश तटरेखा पर तेल तथा प्राकृतिक गैस के लिए खोदाई पर प्रतिबंध लगाने के आदेश के बाद उनका यह बयान आया।

FBI की जांच में खुलासा, अमेरिका न्यू ऑर्लियंस में जब्बार ने हमले से पहले दो बार फ्रेंच क्वार्टर का दौरा कर बनाया वीडियो

न्यू ऑर्लियंस। अमेरिका के न्यू ऑर्लियंस में हुए आतंकी हमले में संघीय जांच एजेंसी (एफबीआई) ने नया खुलासा किया है। एफबीआई ने बताया कि ट्रक हमले के लिए जिम्मेदार आतंकी शम्सुद्दीन जब्बार ने पहले भी दो बार न्यू ऑर्लियंस का दौरा किया था। उसने हैंड्स-फ्री चश्मे से फ्रेंच क्वार्टर का वीडियो रिकॉर्ड किया था। इसके अलावा, एफबीआई की जांच में यह भी पता चला है कि जब्बार ने हमले से पहले मिस्र के काहिरा और कनाडा के ओंटारियो की यात्रा भी की थी। हालांकि, एफबीआई ने इस बात की पुष्टि नहीं की है कि जब्बार की विदेश यात्राएं न्यू ऑर्लियंस में हुए हमले से संबंधित थी या नहीं। बता दें कि जब्बार अमेरिका के ह्यूस्टन शहर का रहने वाला है, उसके पास वहां की नागरिकता भी है। 13 जुलाई 2023 को अमेरिका लौटा था जब्बार न्यू ऑर्लियंस फील्ड ऑफिस के प्रभारी एफबीआई के विशेष एजेंट लियोनेल मायर्थिल ने एक प्रेस ब्रीफिंग की, जिसमें उन्होंने बताया कि हमारी जांच में पता लगा है कि जब्बार ने 22 जून से 3 जुलाई 2023 तक काहिरा, मिस्र की यात्रा की थी। कुछ दिनों बाद, उसने 10 जुलाई को ओंटारियो, कनाडा के लिए उड़ान भरी और 13 जुलाई 2023 को वह अमेरिका लौट आया। जब्बार की गतिविधियों के बारे में पता लगा रहे अधिकारी मायर्थिल ने कहा कि हमारे एजेंट इस बारे में पता लगा रहे हैं कि वह कहां गया था और किन लोगों से मुलाकात की थी। यह भी जानकारी ली जा रही है कि जब्बार की ये यात्राएं न्यू ऑर्लियंस में उसकी गतिविधियों से जुड़ी हुई हैं या नहीं। न्यू ऑर्लियंस में हुए हमले में 15 लोगों की हुई थी मौत एफबीआई के अनुसार, जब्बार ने इस्लामिक स्टेट जिहादी समूह के प्रति अपनी वफादारी का वादा किया था। उसने न्यू ऑर्लियंस के भीड़भाड़ वाले फ्रेंच क्वार्टर में नए साल के दिन लोगों को मारने और घायल करने के लिए पिकअप ट्रक का इस्तेमाल किया था। इसके बाद पुलिस ने उसे मार गिराया। इस हमले में 15 लोगों की मौत हो गई थी और करीब 30 अन्य लोग घायल हो गए थे। लास वेगास घटना के कुछ घंटे बाद हुआ न्यू ऑर्लियंस में हमला एफबीआई ने बताया कि न्यू ऑर्लियंस हमला लास वेगास में ट्रंप टावर के बाहर टेस्ला के साइबर ट्रक में हुए विस्फोट के कुछ घंटों बाद हुआ। इस घटना में ड्राइवर की मौत हो गई थी। हमले से पहले जब्बार ने ऑनलाइन वीडियो पोस्ट किया था जब्बार ने हमले से कुछ घंटे पहले ऑनलाइन वीडियो पोस्ट करके इस्लामिक स्टेट के प्रति अपने समर्थन की घोषणा की थी। यह अमेरिका में वर्षों में सबसे घातक आईएस-प्रेरित हमला था, जिसने संघीय अधिकारियों द्वारा चेतावनी दिए गए अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के खतरे को उजागर किया।

छह छात्र अभी भी घायल, अमेरिका के स्कॉन्सिन स्कूल में गोलीबारी से मरने वालों की संख्या दो हुई

न्यूयॉर्क। विस्कॉन्सिन के मैडिसन स्थित एबंडैंट लाइफ क्रिश्चियन स्कूल में सोमवार को हुई गोलीबारी में एक शिक्षक और एक किशोर छात्र की मौत हो गई, जबकि छह छात्र घायल हो गए। पुलिस ने पहले मृतकों की संख्या अधिक बताई थी, लेकिन बाद में इसे सही करार दिया। पुलिस ने बताया कि स्कूल का संदिग्ध किशोर छात्र अब मर चुका है। सिन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार, संदिग्ध ने हैंडगन का इस्तेमाल किया था। मैडिसन के पुलिस प्रमुख शॉन बार्न्स ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि हमले का मकसद अभी तक साफ नहीं है। उन्होंने बताया कि छह घायल छात्रों में से दो की हालत गंभीर है और उन्हें गंभीर चोट आई है, जबकि बाकी चार छात्रों को हल्की चोट आई हैं। अधिकारी छात्रों को उनके माता-पिता से मिलाने की कोशिश कर रहे हैं। एबीसी न्यूज के अनुसार, इस स्कूल में किंडरगार्टन से 12वीं कक्षा तक लगभग 390 छात्र पढ़ाई करते हैं। विस्कॉन्सिन के सार्वजनिक निर्देश अधीक्षक जिल अंडरली ने एक बयान में कहा, “यह घटना हमें याद दिलाती है कि हमें अपने बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा के लिए और मेहनत करनी चाहिए, ताकि ऐसी दुखद घटनाएं फिर से न हों। हम तब तक आराम नहीं करेंगे जब तक हम ऐसे उपाय नहीं ढूंढ लेते, जो हमारे स्कूलों को सुरक्षित बना सकें।” विस्कॉन्सिन के गवर्नर टोनी एवर्स ने लिखा, “मैं मैडिसन के एबंडैंट लाइफ क्रिश्चियन स्कूल में हुई घटना पर नजर बनाए हुए हूं। हम बच्चों, शिक्षकों और पूरे स्कूल के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। हम और जानकारी का इंतजार कर रहे हैं और पहले उत्तरदाताओं के लिए आभारी हैं, जिन्होंने त्वरित प्रतिक्रिया दी।” मैडिसन पुलिस विभाग ने कहा कि वे पीड़ितों के परिवारों से संपर्क करने के बाद ही जानकारी देंगे, इसलिये सोमवार सुबह एक ईसाई स्कूल में गोलीबारी में मारे गए दो लोगों के बारे में जानकारी नहीं दी। संघीय जांच ब्यूरो और शराब, तंबाकू, फायर आर्म्स और विस्फोटक ब्यूरो के अधिकारी मौके पर पहुंचे हैं और स्थिति की जांच कर रहे हैं। सीनेटर रॉन जॉनसन ने सोशल मीडिया पर लिखा, “एबंडैंट लाइफ क्रिश्चियन स्कूल में हुई इस दुखद घटना के सभी पीड़ितों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं और प्रार्थनाएं। मैं स्थिति पर नजर रखे हुए हूं।” विस्कॉन्सिन के गवर्नर टोनी एवर्स ने लिखा, “मैं मैडिसन के एबंडैंट लाइफ क्रिश्चियन स्कूल में हुई घटना पर नजर बनाए हुए हूं। हम बच्चों, शिक्षकों और पूरे स्कूल के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। हम और जानकारी का इंतजार कर रहे हैं और पहले उत्तरदाताओं के लिए आभारी हैं, जिन्होंने जल्दी से प्रतिक्रिया दी।” अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन को मैडिसन के स्कूल में हुई गोलीबारी के बारे में जानकारी दी गई है। वरिष्ठ उप प्रेस सचिव एमिली सिमंस ने कहा, “राष्ट्रपति को विस्कॉन्सिन के मैडिसन स्कूल में हुई गोलीबारी के बारे में जानकारी दी गई है। व्हाइट हाउस के अधिकारी जरूरत के अनुसार मदद करने के लिए मैडिसन में स्थानीय अधिकारियों के साथ संपर्क में हैं।” के-12 स्कूल शूटिंग डेटाबेस के अनुसार, इस साल अमेरिका में 322 स्कूलों में गोलीबारी हुई हैं, जो 1966 के बाद से किसी भी साल में दूसरी सबसे बड़ी संख्या है। यह संख्या पिछले साल की 349 गोलीबारी से कम है।

समर्थकों से की विपक्षी पार्टी की मदद की अपील, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को डेमोक्रेटिक पार्टी पर आया तरस

वॉशिंगटन. डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति चुनाव में कमला हैरिस को हरा दिया है, लेकिन अभी भी उनका डेमोक्रेटिक पार्टी पर निशाना साधना जारी है। अब अपने ताजा बयान में भी ट्रंप ने डेमोक्रेटिक पार्टी पर तंज कसा है और दावा किया है कि चुनाव में डेमोक्रेट पार्टी ने इतना पैसा खर्च किया कि अब उनके पास वेंडर्स का भुगतान करने के भी पैसे नहीं बचे हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में लिखा कि ‘मुझे बेहद हैरानी हो रही है कि डेमोक्रेटिक पार्टी, जिन्होंने बहुत मेहनत और बहादुरी से 2020 में राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ा था और रिकॉर्ड संख्या में पैसा इकट्ठा किया था, अब उनके पास एक भी डॉलर नहीं बचा है। अब वेंडर्स और अन्य के द्वारा उन्हें निचोड़ा जा रहा है। डेमोक्रेटिक पार्टी के मुश्किल वक्त में हमें भी उनकी मदद करनी चाहिए। मैं अपील करता हूं कि एक पार्टी के तौर पर हमें एकजुट रहना चाहिए। हमारे पास अभी भी बहुत सारा पैसा बचा हुआ है क्योंकि प्रचार अभियान के दौरान हमारी सबसे बड़ी पूंजी हमारे खुद के द्वारा ‘कमाया गया मीडिया’ था और हमें उसके लिए बहुत सारा पैसा नहीं खर्च करना पड़ा।’ सातों स्विंग स्टेट में जीते ट्रंप ट्रंप ने अपने इस पोस्ट के जरिए डेमोक्रेटिक पार्टी पर मीडिया को प्रभावित करने का अप्रत्यक्ष आरोप लगाया। गौरतलब है कि हालिया राष्ट्रपति चुनाव में दोनों ही पार्टियों ने जमकर पैसा खर्च किया और इस चुनाव को अमेरिकी इतिहास के सबसे महंगे चुनाव में एक बताया गया। चुनाव अभियान के दौरान चुनाव में कांटे की टक्कर दिखाई गई थी, लेकिन नतीजों ने सभी को हैरान किया और ट्रंप ने प्रचंड जीत हासिल की। ट्रंप की ऐतिहासिक जीत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सातों स्विंग स्टेट में ट्रंप को जीत मिली। 

लड़कों ने पुलिस को बुलाया, अमेरिका में दिखा बड़े पैर और चमकती आंखों वाला जीव

लुईसियाना/यूएसए. अमेरिका के दक्षिणी लुइसियाना के हाउमा में हाल ही में एक घटना सामने आई है, जिसमें हाल में हाईस्कूल पास किए बैटन रूज से कुछ बच्चे लगभग 100 मील दूर घूमने के लिए पहुंचे थे। वहां पर जब वह कैंप लगा रहे थे तभी उनका सामना एक भयावह बड़े पैरों वाला और चमकती हुई आंखों वाला एक जीव दिखाई दिया, जिससे डरकर वह छिप गए और पुलिस को फोन लगा दिया। पुलिस के अनुसार,  28 जून को शाम करीब 9:20 पर उस ग्रुप के एक लड़के ने फोन लगाया और कहा कि हमने एक गुर्राने वाला, नीली तेज चमकीली आंखों और लंबा चौड़ा जीव देखा जो कि करीब 8 फुट का होगा। पुलिस ने फोन के बाद वहां पर एक टीम को भेजा और किसी भी पौराणिक जीव के प्रति सतर्क रहने को कहा। उन्होंने पूरा आसपास का एरिया छान मारा और लड़कों को पास ही रखा। पुलिस के अनुसार, गहन जांच के बाद भी वहां पर कोई चमकीली आंखों वाला या बड़े पैर वाला जानवर नहीं मिला। फिर जब पूरा इलाका देख लिया गया तो पूरी टीम लड़को को साथ लेकर जंगल से बाहर आ गई। दक्षिणी लुईसियाना के किसाची राष्ट्रीय वन में इस तरह के जीव दिखने का यह पहला मामला नहीं है। दो स्व- घोषित बड़े पैर वाले जीवों के शोधकर्ताओं ने 2019 में दावा किया था कि उनके 6लाख एकड़ के घने जंगल में क्रिप्टिड के अस्तित्व के दृश्य और ऑडियो सबूत है। स्थानीय अखबार टाउन टॉक के अनुसार इन लोगों ने रिकॉर्डिंग करने के लिए पेड़ों में ऐसे कैमरे और ऑडियो डिवाइस छोड़ दिए थे, फिर बाद में उनकी रिकॉर्डिंग करके उनका अध्ययन किया। अक्टूबर में भी एक व्यक्ति अपनी पत्नी के साथ कोलोराडो में छुट्टी पर थे और वहां उन्होंने उजाले में एक बड़े से प्राणी के घूमने का वीडियो बनाया था। विशाल, वानर जैसा जीव जिसे अमेरिका और यूरोप में सासक्वाच के नाम से भी जाना जाता है। उसकी जड़ें अमेरिकी लोककथाओं में हैं और 1800 के दशक में यूरोपीय निवासियों द्वारा इसकी सूचना दी गई है। भारत में भी हिमालय में हिम मानव या येति मिलने की खबरें सामने आती ही रहती हैं।

दानदाताओं ने दी धमकी, अमेरिकी राष्ट्रपति के बाइडन उम्मीदवार बने रहे तो फंडिंग बंद

वॉशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में चार महीने का ही समय बाकी है, लेकिन डेमोक्रेट पार्टी अपने उम्मीदवार को लेकर दुविधा में है। दरअसल पार्टी में जो बाइडन को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाने के खिलाफ उठे स्वर थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। हालांकि बाइडन ने साफ किया है कि वही रेस में हैं, लेकिन अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट्स की मानें तो पार्टी के भीतर जो बाइडन के विकल्पों पर विचार शुरू हो गया है। खासकर बीते दिनों अटलांटा में हुई पहली बहस के बाद तो बाइडन की बढ़ती उम्र की चर्चा फिर से तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, डेमोक्रेट पार्टी के कई प्रमुख दानदाताओं ने धमकी दी है कि अगर जो बाइडन राष्ट्रपति पद की रेस में बने रहे तो वे फंडिंग रोक देंगे। डेमोक्रेट पार्टी के एक नेता एंजी क्रेग ने कहा है कि मुझे नहीं लगता कि राष्ट्रपति प्रभावी ढंग से चुनाव प्रचार कर सकते हैं और डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ जीत सकते हैं। सदन के अल्पसंख्यक नेता हकीम जेफ्रीज ने रविवार को डेमोक्रेट प्रतिनिधियों की एक वर्चुअल बैठक निर्धारित की है। वहीं डेमोक्रेट सीनेटर मार्क वार्नर ने ऊपरी सदन में भी इसी तरह की एक बैठक आयोजित की है। इन बैठकों में जो बाइडन की उम्मीदवार पर कोई फैसला हो सकता है। कमला हैरिस के नाम की चर्चा शुरू उपराष्ट्रपति कमला हैरिस के नाम की भी चर्चा है कि वह जो बाइडन की जगह राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी पेश कर सकती हैं। डेमोक्रेट पार्टी के भीतर ही एक वर्ग इसका समर्थन कर रहा है। हालांकि खुद कमला हैरिस और उनकी प्रचार टीम ने सार्वजनिक रूप से बाइडन का समर्थन किया है। जो बाइडन ने भी एक हालिया इंटरव्यू में कहा कि पहली बहस के दौरान उनके खराब प्रदर्शन की वजह उनकी तबीयत की खराबी थी और साथ ही उन्होंने कहा कि वह एक बुरी रात थी। उन्होंने कहा कि ‘अगर सर्वशक्तिमान भगवान नीचे आकर कहें कि राष्ट्रपति पद की दौड़ से बाहर हो जाओ, तो मैं दौड़ से बाहर हो जाऊंगा, लेकिन भगवान नीचे नहीं आ रहे हैं।’ बाइडन की उम्मीदवारी के खिलाफ उठ रहे स्वर के बावजूद बाइडन और उनकी प्रचार टीम लगातार चुनाव प्रचार में जुटी हैं। शुक्रवार को विस्कॉन्सिन में एक रैली में बाइडन ने जोरदार भाषण दिया और कहा कि वह दौड़ में बने रहेंगे और ट्रंप को हराएंगे।

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