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प्लेन क्रैश पर बाबा रामदेव ने साजिश की आशंका भी जाहिर की, जांच की मांग की है कि कहीं तुर्की में तो इसकी साजिश नहीं रची

नई दिल्ली अहमदाबाद में प्लेन क्यों और कैसे क्रैश हुआ इसको लेकर जांच शुरू कर दी गई है। इस बीच योग गुरु बाबा रामदेव ने साजिश की आशंका भी जाहिर की है। उन्होंने इस बात की जांच की मांग की है कि कहीं तुर्की में तो इसकी साजिश नहीं रची गई और ऐसा करके दुश्मनी तो नहीं निकाली गई है। गौरतलब है कि हाल ही में पाकिस्तान में भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद तुर्की के साथ तल्खी बढ़ गई थी। तुर्की इन दिनों पाकिस्तान का पक्का यार है। रामदेव ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, ‘विमान हादसे के पीछे इस बात की भी दृष्टि होनी चाहिए कि मुझे पता लगा है कि तुर्की की कोई एजेंसी मेंटिनेंस का काम करती है। एविएशन सेक्टर पर भारत को और नजर रखनी पड़ेगी। तुर्की ने कहीं दुश्मनी तो नहीं निकाली है इस माध्यम से। क्योंकि वहां की एजेंसी सर्विसे मेंटिनेंस का काम करती थी कहीं उसने तो साजिश नहीं रच दी है।’ यह कहे जाने पर कि उसका कांट्रैक्ट दो महीने पहले खत्म कर दिया गया था, इस बाबा रामदेव ने कहा कि इसलिए भारत को 100 फीसदी ऐसे संवेदनशील मामलों में विदेशी लोगों के हस्तक्षेप को खत्म करना पड़ेगा।  

‘शरबत जिहाद’ वाले बयान पर बाबा रामदेव को हाई कोर्ट ने लगाई फटकार

नई दिल्ली योग गुरु बाबा रामदेव की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि पतंजलि आयुर्वेद के संस्थापक की लोकप्रिय स्क्वैश ड्रिंक रूह अफजा पर ‘शरबत जिहाद’ वाली टिप्पणी “अस्वीकार्य” है और इसने अदालत की “अंतरात्मा” को झकझोर दिया है.  न्यायमूर्ति अमित बंसल ने रूह अफजा निर्माता हमदर्द के मुकदमे की सुनवाई करते हुए कहा, “इससे अदालत की अंतरात्मा को झटका लगा है. यह अस्वीकार्य है. हमदर्द की ओर से पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि बाबा रामदेव हमदर्द के खिलाफ लगातार बयानबाजी कर रहे हैं. कंपनी के मालिकों के धर्म पर भी हमला कर रहे हैं. रोहतगी ने यह भी कहा कि यह एक ऐसा मामला है जो हर किसी को चौंकाने वाला है, और यह अपमान से परे है. यह सांप्रदायिक विभाजन पैदा करने से जुड़ा मामला है, यह नफरत फैलाने वाले भाषण जैसा है. अदालत ने क्या कहा? रामदेव की ‘पतंजलि फूड्स लिमिटेड’ के खिलाफ ‘हमदर्द नेशनल फाउंडेशन इंडिया’ की याचिका पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति अमित बंसल ने कहा, ‘‘इसने अदालत की अंतरात्मा को झकझोर दिया है. यह उचित नहीं है. आप (रामदेव के वकील) अपने मुवक्किल से निर्देश लें, अन्यथा सख्त आदेश दिया जाएगा.” बाद में रामदेव ने अपनी टिप्पणी का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने किसी ब्रांड या समुदाय का नाम नहीं लिया. बाबा रामदेव ने क्या कहा था? बताते चलें कि हाल ही में बाबा रामदेव का एक वीडियो सामने आया था जिसमें वो कहते हुए सुने गए थे कि लोग गर्मी में प्यास बुझाने के लिए कोल्ड ड्रिंक पीते हैं. ये असल में टॉयलेट क्लीनर की तरह होते हैं. उन्होंने आगे कहा कि एक तरफ टॉयलेट क्लीनर जैसे जहर का हमला है और दूसरी तरफ एक कंपनी है जो शरबत बेचती है. उससे कमाए गए पैसे से मस्जिदें और मदरसे बनवाती है. बाबा रामदेव ने किसी का नाम तो नहीं लिया था लेकिन, माना जा रहा है कि उनका निशाना ‘रूह अफजा’ पर था. बाबा रामदेव ने आगे कहा था कि अगर आप शरबत पीते हैं तो इससे मस्जिदों और मदरसों के निर्माण को सपोर्ट मिलेगा. लेकिन, पतंजलि का गुलाब शरबत पीते हैं तो इससे गुरुकुल, आचार्यकुलम, पतंजलि विश्वविद्यालय और भारतीय शिक्षा बोर्ड आगे बढ़ेगा. हाईकोर्ट ने बयान पर जताई नाराजगी इससे पहले हाईकोर्ट ने बाबा रामदेव द्वारा दिए गए ‘शरबत जिहाद’ संबंधी बयान पर सख्त नाराजगी जताई और इसे अक्षम्य और अदालत की चेतना को झकझोरने वाला करार दिया है. क्या कहा हाईकोर्ट ने… हाईकोर्ट ने कहा, यह बयान अक्षम्य है और अदालत की चेतना को झकझोर देने वाला है. यह टिप्पणी उस याचिका की सुनवाई के दौरान दी गई, जिसे हमदर्द लैबोरेटरीज ने रामदेव के एक बयान के खिलाफ दायर किया है. यह बयान हमदर्द के प्रसिद्ध उत्पाद ‘रूह अफ़ज़ा’ को लेकर दिया गया था. हाई कोर्ट ने कहा कि इस बयान को किसी भी तरह से ठीक नहीं ठहराया जा सकता है. हमदर्द की ओर से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी पेश हुए. रोहतगी ने दलील दी कि बाबा रामदेव का बयान हेट स्पीच के दायरे में आता है. यह बयान धार्मिक आधार पर समाज को बांटने वाला है. हमदर्द ने हाई कोर्ट में क्या कहा… हमदर्द की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि यह मामला सिर्फ ‘रूह अफ़ज़ा’ की छवि को धूमिल करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे कहीं आगे जाकर यह एक साम्प्रदायिक विभाजन पैदा करने वाला मामला भी बनता है. वकील ने दलील दी कि बाबा रामदेव का यह बयान सामाजिक सौहार्द और सांप्रदायिक सद्भाव को प्रभावित करने वाला है, जिसे हल्के में नहीं लिया जा सकता. कोर्ट ने रामदेव के वकील को दोपहर 12 बजे पेश होने के लिए कहा था. दोपहर 12 बजे कोर्ट ने फिर इस मसले पर सुनवाई की.  

न करें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर अभद्र टिप्पणी, बाबा रामदेव ने साधु संतों से खास अपील की

महाकुंभनगर योग गुरु के नाम से प्रसिद्ध बाबा रामदेव ने साधु संतों से खास अपील की है कि वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर अभद्र टिप्पणी न करें। योग गुरु स्वामी रामदेव ने शनिवार को यहां पत्रकारों से बातचीत में कहा कि बहुत दुख होता है। अंतर्मन को बहुत वेदना होती है। हमारे कुछ साधु संत योगी जी पर अभद्र टिप्पणी कर रहे हैं। एक साधु अपने राजधर्म के साथ अपने सनातन धर्म के गौरव को प्रस्थापित करने के लिए बहुत पुरुषार्थ कर रहे हैं। वह पिछले कई महीनों से तीन-चार घंटे से ज्यादा सोए नहीं होंग। ऐसे तपस्वी साधु जो हमारे सनातन के गौरव हैं। नाथ परंपरा के साथ वे राष्ट्र के भी गौरव हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन शासन और व्यवस्था में जीरो टॉलरेंस के साथ काम कर रहा है। ऐसे महापुरुष ने अच्छी व्यवस्था की, करोड़ों लोगों का स्नान सबका ध्यान रखा। भूल किसी से भी हो सकती है। इतनी बड़ी व्यवस्था में भूल-चूक हो सकती है। उन्होंने तुरंत एक्शन भी लिया। पारदर्शिता के साथ जांच भी करा रहे हैं। ऐसे में साधु-संत महात्मा के द्वारा योगी जी पर ओछी टिप्पणी अशोभनीय है। उन्होंने कहा कि इस मामले में जांच हो रही है। जो दोषी हैं, उन पर कार्रवाई भी होगी। कुछ लोग कहेंगे स्वामी रामदेव योगी जी के गीत गा रहे हैं। हमने किसी से कोई बजट नहीं लिया है। हम साधु हैं, संत को संत का साथ देना चाहिए। ऐसे में हम कम से कम संतों से कहेंगे कि वे योगी जी पर टिप्पणी न करें। बाकी राजनेता और पक्ष-विपक्ष टिप्पणी करते रहें। इससे फर्क नहीं पड़ता है। बजट के सवाल पर स्वामी रामदेव ने कहा कि मोदी जी की नीति, नियत और नेतृत्व देश के लिए मंगलकारी और शुभ है। उनका जो विकसित भारत का सपना है, उसके लिए समग्र विकास का बजट चाहिए। उस तरह के प्रावधान इस बजट में हैं, उसके लिए बधाई। इसके पहले एक कार्यक्रम में जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी ने कहा कि जब से गोरक्ष पीठाधीश्वर योगी जी ने उत्तर प्रदेश में शासन अपने हाथों में लिया है, तब से सनातन का सूर्य पूरे विश्व को आलोकित कर रहा है। आज पूरे विश्व में सनातन मूल्यों के प्रति, योग आयुर्वेद के प्रति, आध्यात्मिक मूल्यों के प्रति जो स्वीकृति और मान्यता पैदा हुई है, इससे पहले वह कदाचित नहीं थी। विश्व में सभी लोग हतप्रभ हैं, चकित हैं और पूरा सनातन जगत इस महाकुंभ को लेकर उल्लासित है।

पतंजलि का लाखों करोड़ का यह जो पूरा साम्राज्य है, यह सब जनता का है और वही इसकी लाभार्थी है: बाबा रामदेव

हरिद्वार योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा है पतंजलि के स्वामित्व को लेकर बड़ी बात कही है। बाबा रामदेव ने साफ किया है कि लाखों करोड़ रुपए की संपत्ति के मालिक ना तो वह हैं और ना ही आचार्य बालकृष्ण। हरिद्वार स्थित पतंजलि योगपीठ में साइकलिंग करते हुए बाबा रामदेव ने कंपनी के मालिकाना हक को लेकर पूरी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि यह पूरा साम्राज्य देश की जनता का है और वही इसकी लाभार्थी है। उन्होंने यह भी कहा कि पंतजलि की संपत्ति पर कुछ लोगों की बुरी नजरें हैं। उन्होंने स्वदेशी कंपनी की यात्रा और इसके साम्राज्य को लेकर भी विस्तार से बात की। रामदेव ने कहा कि पतंजलि का लाखों करोड़ का यह जो पूरा साम्राज्य है, लोगों की बुरी नजर है कि ये इतना बड़ा अनुष्ठान कैसे खड़ो हो गया और इसका मालिक कौन है। निरामयम, योग ग्राम, पतंजलि योगपीठ, पतंजलि गुरुकुलम, पतंजलि वेलनेस, विश्वद्यालय तक हमारे सैकड़ों सेवा के संस्थान हैं। इन कार्यों के साथ साथ बहुत दूर तक हम इस अभियान को लेकर ले गए। आज हालात यह है कि पूरे देश में 100 से बड़ी संस्थाएं हमने खड़ी कर दी। हमने योग को बहुत ऊंचाई प्रदान की है। इसका कुल मूल्यांकन है तो कैपिटल मार्केट एक लाख करोड़ से ज्यादा कर रहे हैं।’ बाबा रामदेव ने कहा कि एक लाख से अधिक जगहों पर हमारे योग शिक्षक भाई बहन योग के काम को आगे बढ़ा रहे हैं। इसमें कम से कम 10 लाख से ज्यादा को यहां हमने ट्रेनिंग दी और 20-25 लाख को जिला स्तर पर दी गई। आज हमारे साथ कम से कम 25 लाख से ज्यादा वरिष्ठ योग शिक्षक सेवा दे रहे हैं। हमने शिक्षा की गुलामी, आर्थिक वैचारिक गुलामी से मुक्ति दिलाने के लिए पुरुषार्थ किया है। यह जो लाखों करोड़ का साम्राज्य है, यह ऐसे ही खड़ा नहीं हुआ है। इसमें बहुत पुरुषार्थ लगा है। रामदेव ने इस बात से इनकार किया कि पंतजलि के मालिक वह या आचार्य बालकृष्ण हैं। पतंजलि के साम्राज्य की विस्तार से जानकारी देते हुए उन्होंने कहा, ‘लोगों की दृष्टि है कि इसका असली लाभार्थी कौन है। हमारा विश्वास है समृद्धि, सेवा के लिए है, समाज की भलाई के लिए है। स्वामी रामदेव इसका मालिक नहीं है, आचार्य बालकृष्ण इसका मालिक नहीं है। इसका मालिक है पूरा देश और देश के लोग। आज हमने हेल्थ, एजुकेशन, पुअर रिलीफ, नेचर, रिसर्च, चैरिटी के जो काम किए हैं उसका कुल्य मूल्यांकन किया जाए तो हमने लाखों करोड़ रुपया खर्च किया है, एक ही ध्येय है कि यह यात्रा ऐसी ही बढ़ती रही। 200 करोड़ रुपए तो इसकी रनिंग कॉस्ट है।’

खाने में थूकना, पेशाब करना यह सभ्य मानव समाज के लिए कलंक है, मुस्लिम धर्मगुरुओं को कट्टरता से इनका का विरोध करना चाहिए- योगगुरु

 हरिद्वार योगगुरु स्वामी रामदेव ने मुस्लिम धर्मगुरुओं से मुस्लिम युवकों के खाने में थूकने, पेशाब आदि करने की घटनाओं का पुरजोर विरोध करने का आह्वान किया है. योगगुरु ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं पर मुस्लिम धर्मगुरु चुप्पी साधे हुए है. उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं से मुस्लिम धर्म और कुरान पाक का प्रचार नहीं होता है. मुसलमान और कुरान ऐसी घटनाओं से बदनाम हो रहे है. शनिवार को कनखल के दिव्य योग मंदिर में योगगुरु स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने कन्या पूजन किया. इस दौरान योगगुरु और आचार्य ने लोगों को दशहरा की शुभकामनाएं दी. हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर वायरल थूकने, पेशाब करने और गंदगी फैलाने की वीडियो पर बोलते हुए योगगुरु ने कहा कि ऐसी घटनाओं का मुस्लिम मुल्लों, मौलवियों और धर्मगुरु को आगे आकर बोलना चाहिए. स्वामी रामदेव ने कहा कि ऐसी घटनाओं से इस्लाम का प्रचार नहीं होता है. कई दफा घटनाएं हो गई है. मुस्लिम धर्मगुरु ऐसी घटनाओं पर मौन हो जाते है. ऐसी घटनाएं रोकने के लिए मुस्लिम धर्मगुरुओं को बोलना चाहिए. कट्टरता से घटनाओं का विरोध करना चाहिए. यह सभ्य मानव समाज के लिए कलंक जैसी घटनाएं है. वायरल हो रहे वीडियो गौरतलब है कि बीते कुछ दिनों में गाजियाबाद और नोएडा समेत तमाम जगहों पर खाना बनाते समय उसमें थूकने और पेशाब करने के वीडियो वायरल हो रहे हैं. ये तमाम वीडियो सोशल मीडिया पर छाए हुए हैं. हालांकि योगी सरकार ने इस वीडियो के सामने आने के बाद अधिकारियों को निर्देश दिया है. सीएम योगी आदित्यनाथ ने होटल्स और रेस्टोरेंट में जांच करने के साथ ही सीसीटीवी लगाने का निर्देश दिया है. साथ ही पुलिस और प्रशासन से ऐसी घटनाओं पर कड़ा एक्शन लेने के लिए कहा गया है. जबकि अन्य राज्यों में भी ऐसी घटनाओं पर एक्शन की मांग हो रही है.  बढ़ रहा है गैर-मुस्लिमों से दुश्मनी का भाव मुसलमान जहां हैं, वहां बस दो ही मानसिकता के साथ काम कर रहे हैं। पहली- गैर-मुस्लिमों को जैसे भी हो सके, प्रताड़ित करो, उनका धर्म भ्रष्ट करो और दूसरी- तरह-तरह के जिहाद से उनका धर्म परिवर्तन करवाओ। अब तो लगातार मिल रहे प्रमाणों से यह साबित सा हो गया है कि मुसलमान न हिंदुओं के साथ सामंजस्य चाहते हैं और ना हिंदुस्तान को अपना मानते हैं। लेकिन उनकी मांग यह है कि हिंदू समावेशी विचारों से तनिक भी नहीं भटकें, धर्मनिरपेक्षता का दामन न छोड़ें। फिर पारदर्शिता से परहेज क्यों? किसकी दुकान है, यह बताने में क्या हर्ज? क्यों बात-बात में इस्लाम को खतरे में देखने वाला मुसलमान अपने होटलों, ढाबों के नाम हिंदू देवी-देवताओं पर रखेगा? उत्तर प्रदेश और कांवड़ यात्रा के मार्ग ही नहीं, पूरे देश में अगर कोई कुछ छिपाकर कारोबार कर रहा है तो क्या वह गुनाह नहीं है? इतना दोहरपान लाते कहां से हैं, जनाब? मुसलमानों और कथित मुस्लिम हितैषी राजनीति के ठेकेदारों के दोहरेपेन की पराकाष्ठा देखें। जो आज हिंदुओं को कांवड़ यात्रा के अनुष्ठान में भी मुसलमानों के थूक, पेशाब वाली खाने-पीने की चीजें स्वीकार करने को कह रहे हैं, वही मुसलमानों की हलाल कॉस्मेटिक्स, हलाल दवाई और यहां तक कि हलाल होटल, हलाल यात्रा तक की तरफदारी करते हैं।  मुख्तार अब्बास नकवी, जावेद अख्तर, असदुद्दीन ओवैसी, एसटी हसन समेत उन तमाम मुसलमानों की गैरत कैसे मर गई जब मुसलमानों ने हलाल इकॉनमी खड़ी कर ली? इनमें से किसकी हिम्मत है जो मुसलमानों से पूछ ले कि आखिर चौबीसों घंटे, हर जगह, हर चीज में हलाल, हलाल की रट लगाने की क्या जरूरत है?  बल्कि उलटा ये हलाल के लिए मुसलमानों को उकसाएंगे, उनका साथ देंगे, हजार तरह के तर्क देंगे। लेकिन हिंदुओं को समावेशी होना चाहिए। हिंदुओं को तो मंदिरों में भी गंगाजल नहीं मुसलमानों का पेशाब पीकर जाना चाहिए। क्या ये यही चाहते हैं? इनमें है कोई माई का लाल जो दावा करे कि मुसलमान खाने-पीने के सामानों में थूक नहीं रहे, पेशाब नहीं कर रहे, उसे हर तरह से अपवित्र और गंदा नहीं कर रहे? है इनमें हिम्मत कि सोशल मीडिया और मुख्य धारा के मीडिया में आ रही थूक, पेशाब वाली खबरों और प्रमाण के रूप में पेश किए जा रहे वीडियोज को नकार दें?

योग गुरु रामदेव ने कहा-पीएम मोदी का नेतृत्व, नीतियां, चरित्र और व्यक्तित्व इतना बड़ा है और यह वर्षों की तपस्या के कारण है

नई दिल्ली लोकसभा चुनाव नतीजों पर आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार के बयान पर योग गुरु रामदेव ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने शुक्रवार को हरिद्वार के हरी सेवा आश्रम में चल रहे संत सम्मेलन में मीडिया से बातचीत में कहा कि पीएम मोदी ने ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका प्रयास’ के अपने आदर्श वाक्य के साथ देश को आगे बढ़ाया है. रामदेव ने कहा, ‘राजनीतिक टिप्पणियां अक्सर होती रहती हैं. भगवान राम सभी के हैं; यह राष्ट्र सभी का है और हम सभी एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं. जाति, संप्रदाय और विचारधाराओं के आधार पर विभाजन पैदा करना राष्ट्रीय एकता के लिए ठीक नहीं है.’ रामदेव ने आगे कहा, ‘पिछले एक दशक में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक रूप से आगे बढ़ाया है. चुनौतियों के बावजूद, मेरा दृढ़ विश्वास है वह देश को आगे ले जाना जारी रखेंगे.’ लोकसभा चुनाव के नतीजों पर टिप्पणी करते हुए आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार ने एक बयान में कहा था, ‘2024 में राम राज्य का विधान देखिए, जिनमें राम की भक्ति थी और धीरे-धीरे अहंकार आ गया, उन्हें 240 सीटों पर रोक दिया. जिनकी राम के प्रति आस्था नहीं थी, उन सबको 234 पर रोक दिया. यही प्रभु का न्याय है.’ पीएम मोदी का व्यक्तित्व हिमालय जैसा: रामदेव इंद्रेश कुमार की इस टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर रामदेव ने ने कहा, ‘पीएम नरेंद्र मोदी का नेतृत्व, नीतियां, चरित्र और व्यक्तित्व इतना बड़ा है और यह वर्षों की तपस्या के कारण है. पीएम मोदी के सामने कोई नहीं टिक सकता; उनका व्यक्तित्व हिमालय जैसा है.’ हालांकि, एक दिन बाद ही इंद्रेश कुमार ने बाद में अपने बयान पर यू-टर्न ले लिया. उन्होंने एक बयान में कहा, ‘देश का वातावरण इस समय में बहुत स्पष्ट है- जिन्होंने राम का विरोध किया वो सब सत्ता से बाहर हैं, जिन्होंने राम की भक्ति का संकल्प लिया आज वो सत्ता में हैं और नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में तीसरी बार सरकार बन गई है. उनके नेतृत्व में देश प्रगति करेगा- यह विश्वास लोगों में है. हमें उम्मीद है कि यह भरोसा कायम रहेगा.’ नरेंद्र मोदी ने 9 जून को राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक भव्य समारोह में भारत के प्रधानमंत्री के रूप में अपने लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए शपथ ली थी. उनके शपथ ग्रहण समारोह में भारत के पड़ोसी और हिंद महासागर क्षेत्र के देशों के राष्ट्राध्यक्षों और नेताओं ने भाग लिया. 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए ने 293 सीटें जीतकर तीसरी बार बहुमत हासिल किया. वहीं भाजपा ने 543 सदस्यीय निचले सदन में अपने दम पर 240 सीटें जीतीं, जहां बहुमत का आंकड़ा 272 है. गौरतलब है कि नरेंद्र मोदी देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के बाद लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए पीएम पद की शपथ लेने वाले दूसरे नेता हैं.    

30 अप्रैल को SC में फिर पेश होंगे बाबा रामदेव

Baba Ramdev will appear again in SC on April 30 अदालत ने पतंजलि के माफीनामे पर कही ये बात सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड के एमडी रामदेव से दो दिन के भीतर अखबारों में प्रकाशित माफी को रिकॉर्ड पर पेश करने का आदेश दिया है। वहीं अदालत ने बाबा रामदेव और बालकृष्ण को 30 अप्रैल को फिर से पेश होने का आदेश दिया है। हालांकि कोर्ट में बाबा रामदेव के वकील मुकुल रोहतगी ने दलील दी हमने कल कई अखबारों में माफीनामा छपवाया है। नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि आयुर्वेद, बाबा रामदेव और बालकृष्ण के खिलाफ अवमानना ​​मामले में आज सुनवाई की। सुनवाई के दौरान बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण खुद अदालत में मौजूद थे। कोर्ट ने कोर्ट ने पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड के एमडी रामदेव से दो दिन के भीतर अखबारों में प्रकाशित माफी को रिकॉर्ड पर पेश करने का आदेश दिया है। वहीं, अदालत ने बाबा रामदेव और बालकृष्ण को 30 अप्रैल को फिर से पेश होने का आदेश दिया है। माफीनामे पर सुप्रीम कोर्ट ने उठाए सवालहालांकि, कोर्ट में बाबा रामदेव के वकील मुकुल रोहतगी ने दलील दी, हमने कल कई अखबारों में माफीनामा छपवाया है। इस पर कोर्ट ने कहा कि आखिर माफीनामा कल ही क्यों प्रकाशित किया गया। इसके अलावा बेंच ने ये भी सवाल उठाया कि आखिर माफीनामा उतना ही बड़ा छपा है, जितना बड़ा पतंजलि का विज्ञापन छपता है। केंद्र सरकार पर भी कोर्ट सख्तसुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान ये भी कहा कि सह-प्रतिवादी के रूप में उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय, सूचना और प्रसारण मंत्रालय से सवाल पूछ रहा है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि देश भर के राज्य लाइसेंसिंग अधिकारियों को भी पार्टियों के रूप में जोड़ा जाएगा और उन्हें भी कुछ सवालों के जवाब देने होंगे।

पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा ,योग शिविर के लिए सर्विस टैक्स चुकाने का आदेश

Baba Ramdev got a big blow, Supreme Court ordered to pay service tax for yoga camp कोर्ट ने पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट के जरिए आयोजित किए जाने वाले योग कैंपों में लगने वाली फीस पर सर्विस टैक्स लगाने का फैसला किया गया है. नई दिल्ली ! बाबा रामदेव के पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा. कोर्ट ने अपीलीय न्यायाधिकरण के उस फैसले को बरकरार रखा जिसमें ट्रस्ट को योग शिविरों के आयोजन के लिए प्रवेश शुल्क लेने पर सेवा कर का भुगतान करने को कहा गया था. जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क और सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण (सीईएसटीएटी) की इलाहाबाद पीठ के पांच अक्टूबर, 2023 को आए फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया. पीठ ने ट्रस्ट की अपील खारिज करते हुए कहा, “न्यायाधिकरण ने ठीक ही कहा है कि शुल्क वाले शिविरों में योग करना एक सेवा है. हमें इस आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं मिला. अपील खारिज की जाती है.” सीईएसटीएटी ने अपने आदेश में कहा था कि पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट की तरफ से आयोजित आवासीय एवं गैर-आवासीय योग शिविरों में शामिल होने के लिए शुल्क लिया जाता है, लिहाजा यह ‘स्वास्थ्य और फिटनेस सेवा’ की श्रेणी में आता है और इस पर सेवा कर लगेगा. योग कैंप के लिए ली गई फीस, जो सर्विस के दायरे में आती है: न्यायाधिकरण योग गुरु रामदेव और उनके सहयोगी आचार्य बालकृष्ण के अधीन काम करने वाला यह ट्रस्ट विभिन्न शिविरों में योग प्रशिक्षण प्रदान करने में लगा हुआ था. न्यायाधिकरण ने अपने आदेश में कहा था कि प्रतिभागियों से दान के रूप में योग शिविरों के लिए शुल्क एकत्र किया गया था. हालांकि यह राशि दान के रूप में एकत्र की गई थी, लेकिन यह उक्त सेवाएं प्रदान करने के लिए शुल्क ही था. इसलिए यह शुल्क की परिभाषा के तहत आता है. 4.5 करोड़ रुपये का भरना होगा टैक्स सीमा शुल्क और केंद्रीय उत्पाद शुल्क, मेरठ रेंज के आयुक्त ने अक्टूबर, 2006 से मार्च, 2011 के लिए जुर्माना और ब्याज सहित लगभग 4.5 करोड़ रुपये के सेवा कर की मांग की थी. इसके जवाब में ट्रस्ट ने दलील दी थी कि वह ऐसी सेवाएं प्रदान कर रहा है जो बीमारियों के इलाज के लिए हैं. इसमें कहा गया था कि ये सेवाएं ‘स्वास्थ्य और फिटनेस सेवा’ के तहत कर-योग्य नहीं हैं. अब पतंजलि को ये 4.5 करोड़ रुपये भरने होंगे.

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