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बांग्लादेश में सत्ता पर BNP का कब्जा, जमात हाशिये पर; प्रधानमंत्री मोदी ने तारिक रहमान की जीत को बताया ऐतिहासिक

ढाका  सत्ता के लिए 20 साल का इंतज़ार खत्म करते हुए, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) 13वें आम चुनावों में बहुमत का आंकड़ा पार करने के बाद अगली सरकार बनाने के लिए तैयार है. यह एक अहम जनादेश है, जो उथल-पुथल से जूझ रहे देश की सियासी दिशा में एक बड़ी तब्दीली की तरफ इशारा करता है.  तारिक रहमान के नेतृत्व वाली पार्टी ने आखिरी बार 2001 में चुनाव जीता था. आज पार्टी ने जीत का ऐलान कर दिया है क्योंकि गिनती के ट्रेंड्स में भारी जीत का इशारा मिल रहा था, जिससे दो दशकों के बाद सत्ता में उसकी वापसी पक्की हो गई. इस बीच, जमात-ए-इस्लामी को बड़ा झटका लगा है, जो नतीजों के धीरे-धीरे आने के बावजूद डबल-डिजिट सीटों तक ही सीमित रही. स्थानीय मीडिया ने बताया कि सुबह-सुबह हुई वोटिंग में BNP गठबंधन ने 209 सीटें जीतीं. कैसा रहा जमात-ए-इस्लामी का प्रदर्शन? BNP के प्रदर्शन ने उसे सिंपल मेजॉरिटी के लिए ज़रूरी 151 सीटों की लिमिट से आगे पहुंचा दिया, जिससे पार्टी अगली सरकार बनाने के लिए मज़बूत स्थिति में आ गई. कई चुनाव क्षेत्रों में वोटों की गिनती जारी रही, लेकिन कुल मिलाकर ट्रेंड्स से पता चला कि फ़ाइनल टैली में बड़े बदलाव की गुंजाइश कम है. सुबह करीब 4 बजे तक, जमात-ए-इस्लामी ने 56 सीटें जीत ली थीं. बांग्लादेश के रेफरेंडम के अनऑफिशियल नतीजों से जुलाई चार्टर के लिए लोगों के मज़बूत सपोर्ट का भी पता चलता है, जो 2024 के विद्रोह से बना एक सुधार डॉक्यूमेंट है जिसमें बड़े संवैधानिक बदलावों का प्रस्ताव है. The Daily Star के मुताबिक, गिने गए वोटों में से करीब 72.9 फीसदी चार्टर को अपनाने के पक्ष में थे, जबकि 27.1 परसेंट इसके खिलाफ थे.  जगह-जगह से हिंसा की खबरें लोकल मीडिया के मुताबिक, बांग्लादेश के कई हिस्सों में चुनाव के दौरान हिंसा की भी घटनाएं सामने आईं. वोटिंग से जुड़ी झड़पों में 70 से ज़्यादा लोग घायल बताए गए हैं. बांग्लादेशी अखबार द डेली स्टार ने कहा कि 14 अलग-अलग घटनाओं में करीब 72 लोग घायल हुए, जिनमें से कई पोलिंग स्टेशन के पास या अंदर हुए. पुलिस ने इस हंगामे के सिलसिले में कम से कम नौ लोगों को हिरासत में लिया. सबसे बुरी हिंसा नोआखली जिले के हटिया में हुई, जहां BNP और नेशनल सिटीजन पार्टी के समर्थकों के बीच हुई झड़प में 31 लोग घायल हो गए. वोटिंग सुबह 7:30 बजे शुरू हुई और नौ घंटे तक बिना रुके चलती रही. वोटरों ने दो अलग-अलग बैलेट पेपर इस्तेमाल किए- एक पार्लियामेंट्री चुनाव के लिए और दूसरा रेफरेंडम के लिए, जिन्हें देश भर के 42,659 पोलिंग स्टेशनों पर ट्रांसपेरेंट बैलेट बॉक्स में रखा गया था. देश के 300 में से 299 चुनाव क्षेत्रों में चुनाव हुए. शेरपुर-3 में एक पार्लियामेंट्री उम्मीदवार की मौत के बाद वोटिंग टाल दी गई. बांग्लादेश इलेक्शन कमीशन (EC) के मुताबिक, देश भर में 60.69 फीसदी वोटिंग हुई, जिसमें पोस्टल बैलेट का इस्तेमाल 80.11 परसेंट और कुल वैलिड वोट रेट 70.25 परसेंट रहा. कई वोटरों ने कहा कि 2008 के पार्लियामेंट्री चुनावों के बाद यह पहला शांतिपूर्ण और खुशी वाला चुनाव था जो उन्होंने देखा. वोटों की गिनती के बीच, जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश के चीफ, शफीकुर रहमान ने कहा कि उनकी पार्टी अपने फायदे के लिए ‘विपक्ष की राजनीति’ नहीं करेगी, जिससे गिनती जारी रहने पर चुनाव के नतीजों को मानने का संकेत मिला. उन्होंने रिपोर्टर्स से कहा, “हम पॉजिटिव पॉलिटिक्स करेंगे.” PM मोदी ने तारिक रहमान को दी बधाई विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के नेता तारिक रहमान को बांग्लादेश चुनावों में उनकी पार्टी की बड़ी जीत के बाद बधाई देते हुए PM मोदी का बयान दोबारा पोस्ट किया. PM मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “भारत एक लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और सबको साथ लेकर चलने वाले बांग्लादेश के समर्थन में खड़ा रहेगा. मैं हमारे कई तरह के रिश्तों को मजबूत करने और हमारे साझा विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए आपके साथ काम करने का इंतजार कर रहा हूं.” बांग्लादेश में हुए 13वें संसदीय चुनावों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की प्रचंड जीत के बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान को गर्मजोशी से बधाई दी है. पीएम मोदी ने सोशल मीडिया (X) पर साझा किए अपने संदेश में इस जीत को बांग्लादेश की जनता का उनके नेतृत्व पर अटूट विश्वास बताया. प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा, “संसदीय चुनावों में बीएनपी को निर्णायक जीत दिलाने के लिए मैं तारिक रहमान को हार्दिक बधाई देता हूं. यह जीत आपके नेतृत्व में बांग्लादेशी लोगों के भरोसे को दर्शाती है.” उन्होंने आगे कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश के समर्थन में खड़ा रहेगा और दोनों देशों के साझा विकास लक्ष्यों को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करने को उत्सुक है. शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद यह बांग्लादेश में पहला बड़ा चुनाव था. 17 साल के वनवास के बाद तारिक रहमान की पार्टी की सत्ता में वापसी दक्षिण एशिया की राजनीति के लिए एक बड़ा ‘टर्निंग पॉइंट’ है. भारत ने इस बधाई संदेश के जरिए स्पष्ट संकेत दिया है कि वह नई सरकार के साथ भी मजबूत द्विपक्षीय संबंधों को प्राथमिकता देगा. आपको बता दें कि बांग्लादेश में गुरुवार को आम चुनाव के लिए वोट डाले गए थे और शाम को ही मतगणना शुरू हो गई है. अभी तक जो नतीजे सामने आए हैं उसमें रहमान की पार्टी वाले गठबंधन ने 209 सीटें जीतकर 300 सदस्यों वाले जातीय संसद या देश के सदन में दो-तिहाई बहुमत हासिल कर लिया है.  बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने चुनाव में जीत का दावा करते हुए देशवासियों को बधाई दी है लेकिन समर्थकों से जश्न न मनाने की अपील की है.पार्टी ने कहा कि विजय उत्सव के बजाय कार्यकर्ता और समर्थक पूरे देश में शुक्रवार की नमाज़ अदा करें और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया को याद करें.  तारिक रहमान को ऐतिहासिक जीत पर US ने दी बधाई बांग्लादेश के 13वें आम चुनाव में ऐतिहासिक जीत के लिए तारिक रहमान और BNP को बधाई देने वाला यूनाइटेड स्टेट्स पहला देश बन गया. बांग्लादेश में US के राजदूत ने सोशल मीडिया पर लिखा, “बांग्लादेश के लोगों को सफल चुनाव के लिए और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी और तारिक रहमान … Read more

सजा की जगह इनाम! ICC ने बांग्लादेश मामले में लिया विवादित निर्णय

 नई दिल्ली जब किसी बड़े टूर्नामेंट से कोई देश आखिरी वक्त पर खुद हटता है तो आमतौर पर उम्मीद यही होती है कि उस देश को इसके नतीजे भुगतने पड़ेंगे. लेकिन ICC पुरुष टी20 वर्ल्ड कप  के मामले में ऐसा नहीं हुआ. बांग्लादेश को इस टूर्नामेंट से हटने पर सज़ा नहीं, बल्कि फायदा मिला. ऐसा क्यों हुआ आज इसी के बारे में हम आपको बताएंगे… पहले एक नजर पूरे विवाद पर वर्ल्ड कप के पूरे विवाद के केंद्र में बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) था. बोर्ड ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए भारत में होने वाले टी20 वर्ल्ड कप के मैचों के लिए अपनी राष्ट्रीय टीम भेजने से इनकार कर दिया था. जब आईसीसी ने उसकी ये बात नहीं मानी तो बीसीबी ने वर्ल्ड कप के बहिष्कार का ऐलान कर दिया. बांग्लादेश के इस एक्शन के बाद पाकिस्तान ने ड्रामेबाजी शुरू की और भारत के साथ होने वाले मैच का बहिष्कार करने की बात कही.  इस पूरे नाटक के बाद माना जा रहा था की आईसीसी बांग्लादेश पर तगड़ा एक्शन लेगा.  लेकिन जुर्माना या किसी तरह की कार्रवाई झेलने के बजाय, BCB को भविष्य की मेज़बानी का आश्वासन मिला और उसके खिलाफ कोई एक्शन भी नहीं लिया गया. ICC का ये नरम रुख क्यों? अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) का यह रुख, जो दंडात्मक होने के बजाय सहयोगी दिखता है, कई लोगों को विरोधाभासी और चिंता पैदा करने वाला लगा. यहां समझते हैं कि आखिर बांग्लादेश को टी20 वर्ल्ड कप से हटने पर सज़ा क्यों नहीं दी गई. ICC ने पुष्टि की कि टी20 वर्ल्ड कप से हटने के बावजूद बांग्लादेश पर किसी तरह का वित्तीय, खेल या प्रशासनिक प्रतिबंध नहीं लगाया जाएगा. यह फैसला पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) और BCB के साथ हुई गहन बातचीत के बाद लिया गया. इतना ही नहीं, बांग्लादेश को 2031 पुरुष वनडे वर्ल्ड कप से पहले एक और ICC टूर्नामेंट की मेज़बानी का भरोसा भी दिया गया है. ICC ने कहा कि बांग्लादेश वैश्विक क्रिकेट के विकास में एक अहम और प्राथमिक देश बना हुआ है. BCB अध्यक्ष अमिनुल इस्लाम बुलबुल ने इस फैसले का स्वागत किया और ICC व अन्य क्रिकेट बोर्डों के साथ सहयोग जारी रहने की बात कही.  बांग्लादेश को सज़ा क्यों नहीं मिली? लाहौर की बैठक को सिर्फ मध्यस्थता नहीं, बल्कि कड़ी सौदेबाज़ी के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें पाकिस्तान की भूमिका और ICC की मजबूरियां साफ दिखीं. पाकिस्तान का शुरुआती बहिष्कार बांग्लादेश के लिए दबाव बनाने का ज़रिया था. लेकिन जैसा कि पहले ही अनुमान लगाया गया था, पाकिस्तान का रुख बदला जा सकता था. ICC के लिए भारत-पाकिस्तान मैच का होना बेहद ज़रूरी था. यह मुकाबला कई अन्य मैचों से ज़्यादा कमाई करता है. इसके अलावा, ICC को उन छोटे बोर्डों की भी चिंता थी जो उसकी केंद्रीय फंडिंग पर निर्भर हैं. बांग्लादेश ने इस स्थिति को समझते हुए, पाकिस्तान के समर्थन के साथ हालात को अपने पक्ष में मोड़ लिया. नतीजा यह हुआ कि ICC ने अपना सबसे बड़ा मैच बचा लिया, पाकिस्तान ने यू-टर्न ले लिया और बांग्लादेश को बिना किसी सज़ा के भविष्य की गारंटी मिल गई. अगर बांग्लादेश को सज़ा मिलती तो? अगर ICC ने बांग्लादेश को दंडित किया होता, तो इसके गंभीर असर होते. आर्थिक जुर्माना BCB की हालत और खराब कर देता, फैंस में नाराज़गी बढ़ती और क्रिकेट ढांचे पर असर पड़ता. बांग्लादेश दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट बाज़ारों में से एक है, जहां 20 करोड़ से ज़्यादा क्रिकेट प्रेमी हैं. ICC इस बाज़ार को नाराज़ करने का जोखिम नहीं उठा सकता. PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, टी20 वर्ल्ड कप से हटने के कारण BCB को लगभग 325 करोड़ टका (करीब 27 मिलियन डॉलर) का नुकसान हो सकता है. कुल मिलाकर 2025-26 में उसकी आय 60 प्रतिशत तक गिर सकती थी. पूर्व कप्तान तमीम इक़बाल ने भी चेताया था कि भावनाओं में लिया गया फैसला आने वाले 10 साल तक असर डाल सकता है. बांग्लादेश को दी गई राहत सिर्फ निष्पक्षता का मामला नहीं थी, बल्कि आर्थिक नुकसान को सीमित करने की कोशिश भी थी. इसी वजह से टी20 वर्ल्ड कप से हटने के बावजूद बांग्लादेश को सज़ा नहीं, बल्कि फायदे मिले.

बांग्लादेश प्रधानमंत्री चुनाव से पहले सर्वे का खुलासा: भारत विरोधी जमात की हालत और भविष्य

ढाका  बांग्लादेश में आम चुनाव से पहले माहौल काफी गर्म हैं। इस बार बांग्लादेश में भारत विरोधी ताकतें भी चुनाव में पूरा जोर लगा रही हैं। वहीं अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की आवामी लीग को बैन कर दिया गया है। अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद से नोबेल विजेता मोहम्मद यूनुस की अगुआई में अंतरिम सरकार चल रही है। वहीं अब उम्मीद है कि बांग्लादेश को पूर्णकालिक प्रधानमंत्री मिल जाएगा। किसके बीच है मुकाबला इस बार बांग्लादेश में मुख्य मुकाबला पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान की अगुआई वाली बीएनपी और कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी के बीच है। जमात-ए-इस्लामी का प्रमुख मुद्दा ही अल्पसंख्यकों और भारत के विरोध में रहता है। वहीं बीएनपी का अजेंडा भी भारत के समर्थन में कभी नहीं रहा है। क्या कहता है चुनाव पूर्व का सर्वे बांग्लादेश के अखबार प्रथोमोलो ने इस चुनाव को लेकर सर्वे करवाया है। इसके मुताबिक बीएनपी को 200 से ज्यादा सीटें मिल सकती हैं और तारिक रहमान बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री हो सकते हैं। तारिक रहमान लंबे समय के बाद ब्रिटेन से बांग्लादेश लौटे है। सर्वे के मुताबिक बांग्लादेश नेशलिस्ट पार्टी (BNP) पूर्ण बहुतम मिल सकता है। वहीं भारत विरोधी जमात की हालत बहुत अच्छी नहीं है। हालांकि वह विपक्ष की भूमिका अदा कर सकता है। जमात-ए-इस्लामी शफीकुर्रहमान के नेतृत्व में चुनाव लड़ रहा है। सर्वे में बताया गया है कि बीएनपी 200 से ज्यादा सीटें जीत सकती है वहीं, जमात-ए-इस्लामी 50 के आसपास सीटें जीत सकता है। बांग्लादेश की जातीय पार्टी के खाते में 3 सीटें जा सकती हैं। बाकी सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में जाने का अनुमान है। बता दें कि बांग्लादेश की संसद निर्वाचिन के लिए कुल सीटों की संख्या 350 है। 300 सदस्यों को जनता चुनती है और 50 सदस्यों का सीधा निर्वाचन होता है। भारत की तरह बांग्लादेश में भी सांसदों का कार्यकाल पांच साल का होता है। बांग्लादेश में बनेगी किसकी सरकार? सर्वे ने किया इशारा बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले आम चुनाव के लिए चुनाव प्रचार थम चुका है. इसके बाद अब कोई भी राजनीतिक दल या उम्मीदवार प्रचार नहीं कर सकेगा. मतदान संसद की कुल 300 में से 299 सीटों पर होगा. एक सीट पर चुनाव नहीं हो रहा है. इसके साथ ही मतदाता जुलाई चार्टर पर एक जनमत संग्रह में भी हिस्सा लेंगे. इस चुनाव के लिए भारत ने कोई चुनाव पर्यवेक्षक नहीं भेजा है. वहीं अवामी लीग को चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दी गई है, जिसका विरोध शेख हसीना कर रही हैं. बांग्लादेश में चुनाव प्रचार 22 जनवरी से शुरू हुआ था. इस दौरान 299 सीटों के लिए 1,981 उम्मीदवार मैदान में हैं और करीब 12.7 करोड़ पंजीकृत मतदाता वोट डालेंगे. चुनावी मुकाबला मुख्य रूप से दो बड़े गठबंधनों के बीच माना जा रहा है. एक तरफ तारिक रहमान के नेतृत्व वाला बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) गठबंधन है, जिसे 33 से 35 फीसदी समर्थन अकेले ही मिलने का अनुमान है. दूसरी तरफ जमात-ए-इस्लामी और नेशनल सिटीजन पार्टी (एनसीपी) के नेतृत्व वाला 11 दलों का गठबंधन है, जिसे 30 से 34 फीसदी समर्थन मिलने की संभावना जताई जा रही है. सबसे बुरी खबर तो जमात-ए-इस्लामी के लिए है. निकल गई जमात-ए-इस्लामी की अकड़ अन्य सर्वे क्या कहते हैं? हालांकि एक अन्य सर्वे में मुकाबला काफी करीबी बताया गया है. इस सर्वे के मुताबिक बीएनपी गठबंधन को 44.1 फीसदी और जमात गठबंधन को 43.9 फीसदी वोट मिल सकते हैं. इसमें कहा गया है कि जमात गठबंधन 105 सीटों और बीएनपी गठबंधन 101 सीटों पर जीत दर्ज कर सकता है. चुनाव के नतीजे 13 फरवरी को घोषित किए जाएंगे. चुनाव के साथ ही जनमत संग्रह भी बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने अपने देश के लोगों से 12 फरवरी को आम चुनावों के साथ-साथ होने वाले जनमत संग्रह में ‘हां’ में वोट देने और उनके प्रस्तावित सुधार पैकेज का समर्थन करने की जोरदार अपील की। यूनुस ने सोमवार देर रात वरिष्ठ सचिवों और शीर्ष नौकरशाहों को संबोधित करते हुए कहा, ”यदि जनमत संग्रह के दौरान ‘हां’ में अधिक वोट मिलते हैं तो बांग्लादेश के भविष्य का निर्माण अधिक सकारात्मक तरीके से होगा।” यूनुस ने कहा कि जनमत संग्रह के दौरान यदि लोग ‘हां’ में वोट करते है तो इससे ”कुशासन” दूर करने में मदद मिलेगी। यूनुस का प्रशासन जटिल 84-सूत्रीय सुधार पैकेज को लेकर जनता का समर्थन हासिल करने के लिए पिछले कई हफ्तों से सक्रिय अभियान चला रहा है।

बड़ी डील: US ने बांग्लादेश से किया समझौता, ट्रंप ने घटाए टैरिफ और यूनुस को किया सलाम

ढाका  भारत के बाद अमेरिका ने बांग्लादेश से भी डील कर ली है। खबर है कि अमेरिका सरकार ने बांग्लादेश पर लगाए टैरिफ को कम किया है। साथ ही कुछ कपड़ा उत्पादों पर शुल्क शून्य करने का भी फैसला किया है। खास बात है कि यह डील ऐसे समय पर हुई है, जब खबरें थीं कि अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस डील जल्द ही अमेरिका के साथ सीक्रेट डील करने वाले हैं। अमेरिका ने बांग्लादेश पर लगाए 20 फीसदी टैरिफ को घटाकर 19 प्रतिशत कर दिया है। साथ ही कुछ ऐसे कपड़ों पर जवाबी टैरिफ शून्य कर दिया है, जिन्हें बनाने का सामान अमेरिका से आयात किया जाता है। सोमवार को दोनों देशों के बीच एक द्विपक्षीय समझौता हुआ। दोनों देशों की तरफ से औपचारिक अधिसूचना जारी किए जाने के बाद यह समझौता प्रभाव में आ जाएगा। खबर है कि बांग्लादेश की तरफ से कॉमर्स एडवाइजर शेख बशीरुद्दीन और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार खलील उर रहमान की तरफ से दस्तखत किए गए। जबकि, अमेरिकी पक्ष की तरफ से राजदूत जेमीसन ग्रीर मौजूद रहे। ग्रीर ने इस समझौते के लिए यूनुस और उनकी वार्ताकार टीम की तारीफ भी की है। उन्होंने कहा है कि यह समझौता अमेरिकी व्यापार नीति में बांग्लादेश की स्थिति को मजबूत करेगा। गारमेंट सेक्टर को बड़ी राहत दरअसल, गारमेंट सेक्टर बांग्लादेशी अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है। बांग्लादेश को निर्यात से करीब 80 प्रतिशत आय इसी से होती है। इसमें 40 लाख से ज्यादा लोग काम करते हैं और इनमें मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग शामिल हैं। जानकारों का कहना है कि कम टैरिफ रेट बांग्लादेशी निर्माताओं को अमेरिका बाजार में टिके रहने का मौका देंगे। पहले कितना था टैरिफ बीते साल अप्रैल में अमेरिका ने जवाबी शुल्क का ऐलान किया था। उस दौरान बांग्लादेश पर 37 फीसदी टैरिफ लगाया गया था। बाद में अगस्त में इसे घटाकर 20 प्रतिशत किया गया था। अब ताजा समझौते के बाद यह घटकर 19 फीसदी पर आ गया है।

वर्ल्ड कप से बाहर बांग्लादेश को लाहौर का न्योता, जानिए 5 घंटे की मीटिंग का राज

 ढाका शनिवार-रविवार की दरमियानी रात करीब 1 बजे (8 फरवरी) बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) के अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम ‘बुलबुल’ ढाका के हज़रत शाहजलाल इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर एक फ्लाइट पकड़ने की तैयारी में थे. उस वक्त बीसीबी के कुछ अधिकारी सो रहे थे, तो कई को यह भी पता नहीं था कि उनके अध्यक्ष कहां जा रहे हैं. बुलबुल की इस अचानक यात्रा की जानकारी बीसीबी के डायरेक्टर्स को तब मिली, जब उनके व्हाट्सऐप ग्रुप पर एक मैसेज आया. मैसेज में बताया गया कि अमीनुल इस्लाम बुलबुल लाहौर के लिए रवाना हो चुके हैं. बांग्लादेशी अखबार प्रथम आलो के मुताबिक, बुलबुल ने मैसेज में लिखा, ‘इस यात्रा की पुष्टि सिर्फ 90 मिनट पहले हुई है. मैं अभी एयरपोर्ट पर हूं. इतने कम समय में किसी को फोन नहीं कर पाया. बैठक 8 फरवरी को लाहौर समय के अनुसार शाम 4 बजे होगी. मैं 9 फरवरी की शाम तक लौट आऊंगा.’ हालांकि इस मैसेज से यह तो साफ हो गया कि बुलबुल लाहौर जा रहे हैं, लेकिन उनके अपने बोर्ड के सदस्य भी यह नहीं जान पाए कि आखिर इस दौरे का मकसद क्या है. टी20 वर्ल्ड कप विवाद से जुड़ी थी यह यात्रा अमीनुल इस्लाम बुलबुल की यह आधी रात की उड़ान आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 के बड़े विवाद से जुड़ी थी. बांग्लादेश पहले ही टूर्नामेंट से बाहर हो चुका है, जबकि पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ कोलंबो में होने वाला मैच खेलने से इनकार कर दिया था. पाकिस्तान ने यह फैसला बांग्लादेश के समर्थन में लिया था. इसी बीच खबरें आईं कि पाकिस्तान अपने फैसले पर यू-टर्न ले सकता है. ऐसे में लाहौर में होने वाली आईसीसी और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) की बैठक काफी अहम हो गई. इसी बैठक में अमीनुल इस्लाम बुलबुल की मौजूदगी ने कई सवाल खड़े कर दिए. सवाल यह था कि क्या बुलबुल पाकिस्तान के समर्थन में वहां पहुंचे थे? या यह किसी तरह की सौदेबाजी का संकेत था? और अगर सौदा हो रहा था, तो किस बात पर? यह भी हैरानी की बात रही कि जब कई लोग ज़ूम के जरिए बैठक में शामिल हुए, तो फिर बीसीबी प्रमुख को खुद लाहौर जाकर मौजूद रहने की जरूरत क्यों पड़ी, जबकि बैठक का एजेंडा बांग्लादेश से ज्यादा पाकिस्तान से जुड़ा हुआ था. खासकर तब, जब बांग्लादेश की जगह स्कॉटलैंड को वर्ल्ड कप में शामिल कर लिया गया है. बांग्लादेश के क्रिकेट अध्यक्ष क्यों पहुंचे पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमीनुल इस्लाम बुलबुल रविवार को लाहौर पहुंचे, जहां उन्हें पीसीबी के सीईओ सलमान नसीर ने रिसीव किया. पीसीबी ने सोशल मीडिया पर उनका स्वागत करते हुए एक वीडियो भी साझा किया. दरअसल, पाकिस्तान ने 15 फरवरी को भारत के खिलाफ होने वाला टी20 वर्ल्ड कप मैच खेलने से इनकार तब किया था, जब बांग्लादेश ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए भारत आने से मना कर दिया था. मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के समर्थन से बांग्लादेश ने आईसीसी से अपने मैच भारत से श्रीलंका शिफ्ट करने की मांग की थी. आईसीसी ने यह मांग ठुकरा दी और बांग्लादेश को टूर्नामेंट से बाहर कर स्कॉटलैंड को शामिल कर लिया. इसके बाद यह पूरा विवाद और गहरा गया.  5 घंटे की बैठक, लेकिन फैसला अधूरा लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में आईसीसी, पीसीबी और बीसीबी के बीच करीब 5 घंटे तक चली बैठक के बाद भी कोई ठोस नतीजा नहीं निकला. पाकिस्तान ने आईसीसी को बताया कि वह भारत के खिलाफ मैच खेलने पर अंतिम फैसला प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ की अगुवाई वाली केंद्र सरकार से सलाह के बाद ही करेगा. बैठक में पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ मैच खेलने के बदले तीन शर्तें रखीं— 1. आईसीसी रेवेन्यू में ज्यादा हिस्सा 2. भारत-पाक द्विपक्षीय क्रिकेट की बहाली 3. खिलाड़ियों के बीच अनिवार्य हैंडशेक प्रोटोकॉल खबरों के मुताबिक, बुलबुल और पीसीबी प्रमुख नक़वी के बीच अलग से वन-ऑन-वन बैठक भी हुई. तो आखिर बैठक में बांग्लादेश क्यों था? भले ही बांग्लादेश अब वर्ल्ड कप से बाहर हो चुका है, लेकिन लाहौर बैठक में उसकी मौजूदगी अहम मानी जा रही है. बीसीबी लगातार पाकिस्तान के रुख के साथ खड़ा रहा है और यह मौजूदगी पाकिस्तान की मोलभाव की ताकत बढ़ाने वाली मानी जा रही है. भारत-पाकिस्तान मैच दुनिया के सबसे ज्यादा कमाई करने वाले मुकाबलों में से एक है. इससे आईसीसी को ब्रॉडकास्ट, स्पॉन्सरशिप और विज्ञापन से करोड़ों की कमाई होती है. इसका असर बाकी छोटे बोर्ड्स, जैसे बांग्लादेश, की सालाना कमाई पर भी पड़ता है. बांग्लादेशी खेल पत्रकार देब चौधरी के मुताबिक, आईसीसी बांग्लादेश के जरिए पाकिस्तान को भारत के खिलाफ मैच खेलने के लिए मनाने की कोशिश कर रहा है. अगर यह मैच होता है, तो बांग्लादेश को भी आईसीसी की कमाई में हिस्सा मिल सकता है, जिससे वर्ल्ड कप से बाहर होने का आर्थिक नुकसान कुछ हद तक कम हो जाएगा. खेल और राजनीति की जटिल कहानी अमीनुल इस्लाम बुलबुल की रात 1 बजे की यह अचानक उड़ान भले ही उनके अपने बोर्ड के लिए रहस्य रही हो, लेकिन इससे यह साफ हो गया कि बांग्लादेश क्रिकेट किस तरह पाकिस्तान के फैसलों और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़ गया है. यह पूरा मामला एक बार फिर दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खेल और राजनीति को अलग करना आसान नहीं है.

बांग्लादेश को नुकसान, भारत के साथ डील से 15 हजार करोड़ का कारोबार होगा भारत के पक्ष में, निर्यात बढ़ेगा दोगुना

नई दिल्‍ली  अमेरिका के साथ मुक्‍त व्‍यापार समझौता होने से भारत के कपड़ा निर्यात को सबसे ज्‍यादा लाभ मिलने की उम्‍मीद है. कपड़ा निर्यात संगठनों ने अनुमान लगाया है कि महज तीन साल में परिधान निर्यात बढ़कर दोगुना होने की पूरी उम्‍मीद है. अभी भारत से अमेरिका को होने वाला कपड़ा निर्यात करीब 15 हजार करोड़ रुपये सालाना का है, जो तीन साल के भीतर बढ़कर 30 हजार करोड़ रुपये से भी ज्‍यादा पहुंच सकता है. देश में कपड़ा निर्यात का हब माने जाने वाले तिरुप्‍पुर के कपड़ा उद्योग निर्यातकों का कहना है कि भारत और अमेरिका के बीच हुए हालिया समझौते के बाद अगले तीन वर्षों में अमेरिका को कपड़ों का निर्यात दोगुना होकर 30,000 करोड़ रुपये तक पहुचने की उम्मीद है. तिरुप्पुर निर्यातक संघ के अध्यक्ष के एम सुब्रमणियन ने कहा कि चेन्नई से लगभग 450 किलोमीटर पश्चिम में स्थित तिरुप्पुर में भी इस अवधि के दौरान रोजगार सृजन में लगभग पांच लाख की वृद्धि होने की उम्मीद है. इसका मतलब है कि इस डील ने 5 लाख नौकरियों के भी अवसर बनाए हैं. 5 साल में जबरदस्‍त बढ़ोतरी भारत और अमेरिका ने शनिवार को घोषणा की कि उन्होंने द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण के ढांचे को अंतिम रूप दे दिया है, जिसके तहत दोनों पक्ष दोतरफा व्यापार को बढ़ावा देने के लिए कई वस्तुओं पर आयात शुल्क कम करेंगे. इस समझौते पर टिप्पणी करते हुए सुब्रमणियन ने कहा कि हम इस कदम का स्वागत करते हैं. यह समझौता महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे तिरुप्पुर को अगले 5 वर्षों में जबरदस्त वृद्धि मिलेगी. अभी 15 हजार करोड़ का है निर्यात उन्होंने बताया कि वर्तमान में तमिलनाडु से कपड़ों का निर्यात 15,000 करोड़ रुपये का है और इस समझौते के बाद इसके अगले तीन वर्षों में 30,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है. सुब्रमणियन ने कहा कि भारत-अमेरिका समझौते के कारण पांच लाख और नए रोजगार पैदा होंगे. तिरुप्पुर के एक अन्य उद्यमी और स्टारलाइट एक्सपोर्टर्स के संस्थापक एम. रथिनसामी ने कहा कि इस सौदे से तमिलनाडु को अमेरिका से और अधिक ऑर्डर मिलेंगे. बांग्‍लादेश को पीछे छोड़ देंगे तिरुप्पुर निर्यातक संघ के कार्यकारी समिति सदस्य रथिनासामी ने कहा कि पहले कुछ ऑर्डर बांग्लादेश और अन्य देशों को जाते थे. इस समझौते के बाद हमें (अमेरिका से) और अधिक ऑर्डर मिलेंगे. यह समझौता सीधे तौर पर बांग्‍लादेश के लिए भी बड़ा झटका है. बांग्‍लादेश पर इससे पहले कम टैरिफ होने की वजह से अमेरिका के कई ऑर्डर वहां से जाते थे, जबकि अब भारत पर टैरिफ बांग्‍लादेश से भी कम हो गया है. लिहाजा आने वाले समय में अमेरिका से ज्‍यादा ऑर्डर मिलने का अनुमान है.

क्या बांग्लादेश को अमेरिका का गुलाम बनाएंगे यूनुस? चुनाव से पहले सीक्रेट डील ने बढ़ाई चिंताएं

ढाका  जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ ट्रेड डील की घोषणा की तब पड़ोसी बांग्लादेश में चिंताएं बढ़ गईं क्योंकि बांग्लादेश भी अमेरिका के साथ एक समझौता करने जा रहा है. ये चिंता इसलिए है क्योंकि बांग्लादेश-अमेरिका व्यापार समझौता पूरी तरह सीक्रेट रखा गया है. प्रस्तावित समझौते को लेकर सवाल ऐसे भी उठ रहे हैं कि क्या गैर-निर्वाचित मोहम्मद यूनुस प्रशासन के पास ऐसा समझौता करने का जनादेश भी है या नहीं. यह घटनाक्रम उन रिपोर्टों के बाद सामने आया है, जिनमें दावा किया गया है कि 2024 में प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार को गिराने वाली इस्लामी साजिश के साथ-साथ यूनुस प्रशासन को अमेरिकी डीप स्टेट का समर्थन मिला था. अमेरिका के साथ समझौता सीक्रेट रखा गया है जिसे लेकर बांग्लादेश के निर्यातक संगठनों और खासकर उसके अहम टेक्सटाइल सेक्टर के हितधारकों में चिंता बढ़ गई है. उनका कहना है कि समझौते की शर्तें बांग्लादेशी निर्यात को और नुकसान पहुंचा सकती हैं. बांग्लादेश के कुल निर्यात का 90 फीसदी से ज्यादा रेडीमेड गारमेंट्स और टेक्सटाइल्स का है. ट्रंप के टैरिफ की वजह से बांग्लादेश के वस्त्र उद्योग को पहले ही भारी नुकसान पहुंचा है और अगर अमेरिका के साथ कोई सीक्रेट समझौता हो जाता है तो बड़े पैमाने पर रोजगार देने वाले क्षेत्रों को यह प्रभावित कर सकता है. इससे बांग्लादेश की पूरी अर्थव्यवस्था को झटका लग सकता है. समझौते की वैधता पर उठ रहे सवाल समझौते की वैधता पर भी सवाल उठ रहे हैं. अमेरिका-बांग्लादेश ट्रेड डील बांग्लादेश में चुनाव से महज तीन दिन पहले 9 फरवरी को हो सकता है. ऐसे में सवाल यह है कि चुनाव से ठीक पहले और अपने कार्यकाल के अंतिम दिनों में यूनुस प्रशासन यह समझौता क्यों कर रहा है. बांग्लादेशी अखबार ‘प्रथम आलो’ की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में यूनुस प्रशासन ने अमेरिका के साथ एक नॉन-डिस्क्लोजर एग्रीमेंट पर दस्तखत किए थे, जिसके चलते समझौते के ड्राफ्ट की जानकारी सार्वजनिक नहीं है. बांग्लादेशी अर्थशास्त्री और बुद्धिजीवी अनु मुहम्मद ने कहा है कि यूनुस प्रशासन की यह जल्दबाजी और झोल-झाल सिर्फ अमेरिका के साथ व्यापार समझौते तक सीमित नहीं है. उन्होंने एक फेसबुक पोस्ट कर उन्होंने सवाल उठाए हैं कि आम चुनाव से ठीक पहले जल्दबाजी में बंदरगाह लीज पर दिया जा रहा, हथियार आयात किए जा रहे और अमेरिका के साथ ‘अधीनता’ वाले समझौते साइन किए जा रहे हैं. अनु मुहम्मद ने सवाल किया कि 9 फरवरी के बांग्लादेश-अमेरिका व्यापार समझौते से आखिर किसके हित सध रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि ये समझौते पूरी तरह गैर-पारदर्शी, अव्यावहारिक और अनियमित तरीके से आगे बढ़ाए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि विदेशी ‘लॉबिस्ट’ सलाहकार बनकर यूनुस प्रशासन के भीतर बैठाए गए हैं, जो इन समझौतों को किसी भी कीमत पर कराना चाहते हैं. यह भी आरोप हैं कि नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस को इस्लामिस्ट जमात-ए-इस्लामी के समर्थन से ही अंतरिम सरकार का मुखिया बनाया गया. ट्रेड डील को लेकर चर्चा ऐसे समय में हो रही है, जब रिपोर्टें हैं कि अमेरिकी डिप्लोमैट्स जमात के साथ बातचीत कर रहे हैं. 12 फरवरी को होने वाले चुनाव में जमात को एक बड़े राजनीतिक खिलाड़ी के तौर पर देखा जा रहा है. कोलकाता में एक वर्चुअल प्रोग्राम को संबोधित करते हुए 2 फरवरी को शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद ने कहा कि बांग्लादेश एक ‘फर्जी’ चुनाव की ओर बढ़ रहा है, जिसका मकसद विदेशी हितों के प्रति वफादार कमजोर सरकार बनाना है. उन्होंने यूनुस शासन पर इस्लामवादियों के समर्थन से चलने और अपारदर्शी तरीके से फैसले लेने का आरोप लगाया. रोचक बात ये हैं कि 12 फरवरी को बांग्लादेश सिर्फ नई सरकार के लिए वोटिंग नहीं करेगा, बल्कि जुलाई चार्टर पर भी मुहर लगाएगा या उसे खारिज करेगा. इस चार्टर को खुद मोहम्मद यूनुस और उनकी सरकार आगे बढ़ा रही है और ‘यस वोट’ के पक्ष में कैंपेन चला रही है. 2024 के हसीना-विरोधी प्रदर्शनों के बाद तैयार किया गया यह चार्टर संविधान में संशोधन करेगा. माना जा रहा है कि यह संशोधन अंतरिम शासन की तरफ से की गई कथित गड़बड़ियों का भी बचाव करेगा. जल्दबाजी में समझौता क्यों कराना चाहती है यूनुस सरकार? अप्रैल 2025 में जब ट्रंप ने 100 देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ का ऐलान किया, तो बांग्लादेश पर 37 फीसदी का भारी टैरिफ लगा. जून 2025 में बांग्लादेश ने अमेरिका के साथ नॉन-डिस्क्लोजर एग्रीमेंट साइन किया, जिससे टैरिफ पर बातचीत सीक्रेट हो गई. जुलाई में अमेरिका ने अचानक टैरिफ घटाकर 35 फीसदी और अगस्त में 20 फीसदी कर दिया. ढाका स्थित ‘डेली सन’ के मुताबिक, बांग्लादेश के वाणिज्य सचिव महबूबुर रहमान ने कहा है कि अमेरिका से 9 फरवरी की तारीख मिली है और उसी दिन समझौते पर दस्तखत होंगे. सबसे ज्यादा चिंता निर्यातकों, खासकर गारमेंट सेक्टर में है. बांग्लादेश गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट इनामुल हक खान ने कहा कि बिना किसी परामर्श के यह प्रक्रिया बेहद परेशान करने वाली है. उनका कहना है कि चुनाव से ठीक पहले समझौते पर दस्तखत करना ठीक नहीं है, क्योंकि इसके दूरगामी असर होंगे. यूनुस प्रशासन के जाने के कुछ ही दिनों बाद यह समझौता लागू कराने की जिम्मेदारी एक निर्वाचित सरकार पर आ जाएगी, जिसका इस समझौते की बातचीत में कोई रोल नहीं रहा. सेंटर फॉर पॉलिसी डायलॉग के वरिष्ठ फेलो देबप्रिया भट्टाचार्य ने कहा कि सवाल यह भी है कि क्या आने वाली सरकार के हाथ पहले से ही बांधे जा रहे हैं. डर क्यों फैला रहा है यह समझौता? समझौते की शर्तें किसी को नहीं पता. नॉन-डिस्क्लोजर एग्रीमेंट के चलते समझौते के बाद प्रभावित होने वाले पक्ष पूरी तरह अंधेरे में हैं. चिंता सिर्फ निर्यातकों तक सीमित नहीं है, घरेलू बाजार पर निर्भर कारोबारी भी डरे हुए हैं. ढाका चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष तस्कीन अहमद ने कहा कि ड्राफ्ट की जानकारी न होने से इसके असर का आकलन करना मुश्किल है और इसे चुनाव से पहले साइन करने से बचा जा सकता था. ये चिंताएं जायज भी हैं क्योंकि शेख हसीना की सरकार को हटाने और यूनुस को सत्ता में लाने में अमेरिका पर संलिप्तता के आरोप लगे थे. बांग्लादेशी पत्रकार साहिदुल हसन खोकन के मुताबिक, हसीना को हटाने में अमेरिका सीधे तौर पर भले ही शामिल … Read more

कानून बेबस या भीड़ बेलगाम? बांग्लादेश में लिंचिंग से 21 की जान गई, 257 मासूमों पर जुल्म

ढाका बांग्लादेश में जनवरी महीने के दौरान भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या और जेल हिरासत में मौतों की घटनाओं में खतरनाक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मानवाधिकार संगठन मानबाधिकार शोंग्स्कृति फाउंडेशन (MSF) की मासिक रिपोर्ट ने देश की कानून-व्यवस्था और मानवाधिकार हालात को “खतरनाक और जटिल” करार दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी में भीड़ हिंसा में कम से कम 21 लोगों की मौत हुई, जबकि दिसंबर 2025 में यह संख्या 10 थी। एमएसएफ ने कहा कि भीड़ हिंसा पर राज्य की ओर से ठोस और सख्त कार्रवाई न होने से दंडहीनता की संस्कृति को बढ़ावा मिला है, जिससे आम जनता का न्याय व्यवस्था पर भरोसा कमजोर हुआ है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि अज्ञात शवों की बरामदगी में इजाफा हुआ है। जनवरी में 57 अज्ञात शव मिले, जबकि दिसंबर में यह संख्या 48 थी।जेल हिरासत में मौतें भी गंभीर चिंता का विषय बनी हुई हैं। जनवरी में 15 कैदियों की जेल में मौत हुई, जबकि दिसंबर में यह आंकड़ा 9 था। इसके अलावा, कानून प्रवर्तन एजेंसियों की हिरासत में दो लोगों की मौत की भी रिपोर्ट सामने आई। एमएसएफ ने इन मौतों के लिए चिकित्सकीय लापरवाही, अमानवीय हालात और जेल प्रशासन की खामियों को जिम्मेदार ठहराया। आगामी 13वें राष्ट्रीय चुनाव से पहले राजनीतिक हिंसा में भी तेजी देखी गई। जनवरी में चुनावी झड़पों में चार लोगों की मौत और 509 लोग घायल हुए, जबकि दिसंबर में सिर्फ एक मौत दर्ज की गई थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि राजनीतिक मामलों में अज्ञात व्यक्तियों को आरोपी बनाए जाने की प्रवृत्ति खतरनाक रूप से बढ़ी है। दिसंबर में जहां 110 अज्ञात आरोपी दर्ज किए गए थे, वहीं जनवरी में यह संख्या बढ़कर 320 हो गई। इसके साथ ही महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हिंसा की स्थिति भी बेहद चिंताजनक रही। जनवरी में 257 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 34 बलात्कार और 11 सामूहिक बलात्कार के मामले शामिल हैं। अल्पसंख्यक समुदायों पर हमले भी बढ़े हैं। मंदिरों और मूर्तियों में चोरी, तोड़फोड़ और नुकसान की 21 घटनाएं दर्ज की गईं, जबकि दिसंबर में यह संख्या सिर्फ छह थी। एमएसएफ ने सरकार से सभी मानवाधिकार उल्लंघनों की तत्काल और निष्पक्ष जांच कराने तथा नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि न्याय व्यवस्था पर भरोसा बहाल हो सके।

सरकारी खर्च पर प्रतिबंध का दिया हवाला, बांगलादेश नहीं होगा IMD के 150 साल के जश्न में शामिल

नई दिल्ली/बांगलादेश। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) देशभर में विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से अपनी स्थापना के 150वें वर्ष का जश्न मनाएगा। ऐसे में, भारत ने पाकिस्तान और बांग्लादेश समेत अन्य पड़ोसी देशों को ‘अविभाजित भारत’ सेमिनार में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है। हालांकि, अब जानकारी सामने आ रही है कि बांग्लादेश से कोई अधिकारी इस सेमिनार में भाग नहीं लेगा। उसने सरकारी खर्च पर गैर-जरूरी विदेश यात्रा पर प्रतिबंध का हवाला दिया है। बांगलादेश मौसम विभाग (बीएमडी) के कार्यवाहक निदेशक मोमिनुल इस्लाम ने कहा कि उन्हें भारतीय मौसम विभाग से 150वीं वर्षगांठ समारोह का आमंत्रण करीब एक महीने पहले मिला था। उन्होंने कहा कि हमारे बीच अच्छे रिश्ते हैं और हम उनके साथ लगातार सहयोग करते हैं। हालांकि, हम इस समारोह में शामिल नहीं हो रहे हैं क्योंकि सरकार द्वारा वित्तपोषित अनावश्यक विदेशी यात्राओं को सीमित करने का दायित्व है। पिछले साल हुई थी मुलाकात इस्लाम ने बताया कि नियमित रूप से दोनों एजेंसियों के बीच संपर्क रहता है। हाल ही में हम 20 दिसंबर 2024 को एक बैठक के दौरान भारतीय मौसम विज्ञानी से मिले थे। आईएमडी ने कई पड़ोसी देशों पाकिस्तान, अफगानिस्तान, म्यांमार, भूटान, नेपाल, श्रीलंका और मालदीव के साथ-साथ मध्य पूर्व और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों को भी इस समारोह में आमंत्रित किया था। आईएमडी के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया, पाकिस्तान ने अपनी भागीदारी की पुष्टि कर दी है। वह कार्यक्रम में भाग लेगा। 1875 में हुई भारत मौसम विज्ञान विभाग की स्थापना भारत मौसम विज्ञान विभाग की स्थापना 15 जनवरी, 1875 को हुई थी। हालांकि इसके पहले भी ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी मौसम विभाग की स्थापना की गई थी। कोलकाता मौसम विज्ञान विभाग 1785 में शुरू हुआ था। मद्रास (आधुनिक चेन्नई) 1796 में और बॉम्बे (आधुनिक मुंबई) में 1826 में मौसम विभाग की स्थापना हुई थी। IMD की जिम्मेदारी भारत मौसम विज्ञान विभाग की जिम्मेदारी आम जीवन और संपत्ति की सुरक्षा के लिए मौसम और जलवायु संबंधित डेटा, जानकारी व पूर्वानुमान को आम लोगों और संबंधित एजेंसियों के साथ नियमित तौर पर जानकारी साझा करना है। एक तरह से कहें तो इस संस्था का राष्ट्र के विकास में अमूल्य योगदान है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के प्रभाग भारत मौसम विज्ञान विभाग के काम का दायरा काफी विस्तृत है। बेहतर कार्य संचालन और समन्वय के लिए के लिए इसे कई प्रभागों में बांटा गया है। सभी प्रभागों की अपनी-अपनी जिम्मेदारी है। इन प्रभागों के अलावा किसी बड़े आयोजन या मौसम संबंधी बदलाव या समस्याओं को ध्यान में रखकर विशेष प्रभागों को स्थापित किया जाता है।

Bangladesh में फिर हिंदू मंदिरों को निशाना बना रहे उपद्रवी, 8 मूर्तियों को तोड़ा

दिनाजपुर बांग्लादेश के मैमनसिंह और दिनाजपुर में बदमाशों ने दो दिनों में तीन हिंदू मंदिरों में आठ मूर्तियों को तोड़ दिया. एक मीडिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया. पुलिस ने एक मंदिर में तोड़फोड़ के सिलसिले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है. बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ घटनाओं की श्रृंखला में यह नई घटना है. पहले दो मंदिरों की तीन मूर्तियों को तोड़ा मैमनसिंह के हलुआघाट उप-जिले में  शुक्रवार की सुबह दो मंदिरों की तीन मूर्तियों को तोड़ दिया गया. मंदिर के सूत्रों और स्थानीय लोगों के हवाले से हलुआघाट पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी (ओसी) अबुल खैर ने कहा कि बदमाशों ने शुक्रवार की सुबह हलुआघाट के शाकुई संघ में बोंडेरपारा मंदिर की दो मूर्तियों को तोड़ दिया. उन्होंने कहा कि इस घटना में अभी तक कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है और कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है. एक आरोपी जेल भेजा गया एक अन्य घटना में अपराधियों ने गुरुवार की सुबह हलुआघाट के बीलडोरा संघ में पोलाशकंडा काली मंदिर में एक मूर्ति को तोड़ दिया. पुलिस ने शुक्रवार को पोलाशकांडा गांव के 27 वर्षीय एक व्यक्ति को घटना में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया. पूछताछ के दौरान, अलल उद्दीन नामक व्यक्ति ने अपराध कबूल कर लिया. उन्होंने बताया कि उसे मैमनसिंह की अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. इससे पहले  पोलाशकांडा काली मंदिर समिति के अध्यक्ष सुवाश चंद्र सरकार ने अज्ञात व्यक्तियों पर आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया था. दिनाजपुर के बीरगंज उप-जिले में, मंगलवार को झारबारी शासन काली मंदिर में पांच मूर्तियों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया. रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना गुरुवार को सामने आई. मंदिर समिति के अध्यक्ष जनार्दन रॉय ने कहा, ‘हमने यहां ऐसा गलत काम कभी नहीं देखा.’ प्रभारी अधिकारी अब्दुल गफूर ने कहा कि वे घटना की जांच कर रहे हैं. लगातार हो रहे हमले पिछले सप्ताह, कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने उत्तरी बांग्लादेश के सुनामगंज जिले में एक हिंदू मंदिर और समुदाय के घरों और दुकानों में तोड़फोड़ और क्षति पहुंचाने के आरोप में चार लोगों को गिरफ्तार किया था. इससे पहले 29 नवंबर को बांग्लादेश के चटगांव में नारे लगाने वाली भीड़ ने तीन हिंदू मंदिरों में तोड़फोड़ की थी, जहां इस्कॉन के एक पूर्व सदस्य पर देशद्रोह के आरोप लगाए जाने के बाद से विरोध प्रदर्शन और हिंसा देखी गई. 5 अगस्त को छात्रों के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शन के बाद अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के देश छोड़कर भाग जाने के बाद मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के सत्ता में आने के बाद भारत और बांग्लादेश के बीच संबंध तनावपूर्ण हो गए थे. हाल के हफ्तों में हिंदुओं पर लगातार हमले हुए. हिंदू विरोधी घटनाओं की बढ़ती संख्या ने भारत और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक विवाद को जन्म दिया है. भारत सरकार ने चिंता जाहिर की बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा के संबंध में लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने सदन को बताया, ‘8 दिसंबर 2024 तक बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा के 2,200 मामले और अक्टूबर 2024 तक 112 मामले दर्ज किए गए. अन्य पड़ोसी देशों (पाकिस्तान और बांग्लादेश को छोड़कर) में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा का कोई मामला नहीं है. सरकार ने इन घटनाओं को गंभीरता से लिया है और बांग्लादेश सरकार के साथ अपनी चिंताओं को शेयर किया है. भारत को उम्मीद है कि बांग्लादेश सरकार हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगी.’  

बांग्लादेशी पर्यटकों के लिए Tripura में न कमरे मिलेंगे, न भोजन

गुवाहाटी  बांग्लादेश से आने वाले पर्यटकों को कमरे नहीं देने का ऐलान ऑल त्रिपुरा होटल एंड रेस्टोरेंट्स एसोसिएशन (ATHROA) ने किया है। एसोसिएशन के महासचिव ने बताया कि भारतीय ध्वज का अपमान और हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमलों के बाद कल हुई आपात बैठक में यह फैसला लिया गया। उन्होंने कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है और सभी धर्मों का सम्मान करता है। “कुछ कट्टरपंथियों ने हमारे देश के झंडे का अपमान किया और अल्पसंख्यकों पर हमला किया।” उन्होंने यह भी कहा कि पहले भी ऐसी घटनाएं हुई हैं, लेकिन अब स्थिति हद से ज्यादा बिगड़ गई है। इससे पहले अगरतला में सैकड़ों लोगों ने बांग्लादेश सरकार के खिलाफ विरोध रैली निकाली थी।  कुछ निजी अस्पतालों ने भी बांग्लादेशी नागरिकों को इलाज नहीं देने की घोषणा की थी। त्रिपुरा सरकार भी इस मामले में बांग्लादेश के खिलाफ सख्त रुख अपना रही है। त्रिपुरा सरकार ने बांग्लादेश को 135 करोड़ रुपये का बिजली बकाया जल्द चुकाने को कहा है। बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की स्थिति चिंताजनक बंद्योपाध्याय ने कहा कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ कट्टरपंथियों के अत्याचार बढ़ते जा रहे हैं। उन्होंने इसे गंभीर समस्या बताते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं अब बर्दाश्त से बाहर हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि त्रिपुरा हमेशा सभी धर्मों और समुदायों का सम्मान करता है, लेकिन यह कदम बांग्लादेश में हो रही घटनाओं के खिलाफ उठाया गया है। अस्पतालों का भी विरोध इससे पहले त्रिपुरा के आईएलएस मल्टी-स्पेशलिटी हॉस्पिटल ने बांग्लादेशी मरीजों का इलाज करने से इनकार कर दिया था। यह अस्पताल बांग्लादेशी नागरिकों के बीच काफी लोकप्रिय है, लेकिन अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ यह फैसला लिया गया। कोलकाता के जेएन रे अस्पताल ने भी इसी तरह का कदम उठाते हुए बांग्लादेशी मरीजों का इलाज बंद करने का फैसला किया। अस्पताल के अधिकारी ने कहा कि भारत ने बांग्लादेश की स्वतंत्रता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। लेकिन इसके बावजूद वहां से भारत-विरोधी गतिविधियां हो रही हैं। प्रदर्शनकारियों ने घेरा बांग्लादेश उच्चायोग इस बीच, त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में प्रदर्शनकारियों का एक समूह बांग्लादेश उच्चायोग परिसर में घुस गया। इस घटना पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने खेद जताया है। बांग्लादेश के खिलाफ यह विरोध लगातार तेज होता जा रहा है, और “बांग्लादेश बॉयकॉट मूवमेंट” राज्य में जोर पकड़ता दिख रहा है।

दूसरे टेस्ट के दूसरे दिन बांग्लादेश 164 पर सिमटा, सील्स ने 4-5 विकेट झटके

किंग्स्टन (जमैका). वेस्टइंडीज के तेज गेंदबाज शमर जोसेफ ने अपने साथी तेज गेंदबाज जेडन सील्स को श्रेय दिया और कहा कि वह टीम में काफी आक्रामकता लेकर आए हैं, क्योंकि सील्स ने किंग्स्टन के सबीना पार्क में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच के दूसरे दिन बांग्लादेश को 164 रनों पर समेटने के लिए 15.5 ओवर ने 10 मैडन रखते हुए 4-5 की सनसनीखेज गेंदबाजी की। जोसेफ और सील्स ने मिलकर सात विकेट लिए, जबकि केमार रोच ने दो विकेट लिए, जिससे वेस्टइंडीज ने मैच के पहले दिन खेल पर अपना दबदबा बनाए रखा। स्टंप्स तक विंडीज का स्कोर 37 ओवर में 70/1 था, जिसमें कीसी कार्टी और क्रेग ब्रैथवेट क्रमश: 19 और 33 रनों पर नाबाद थे। जोसेफ ने दिन का खेल खत्म होने के बाद कहा, “वह बहुत आक्रामकता के साथ गेंदबाजी करता है। मैंने उसे अब तक की सबसे अच्छी गेंदबाजी करते हुए देखा है। मुझे आज उसका स्पैल देखने में मजा आया। चीजें हमेशा आपके अनुकूल नहीं होती हैं, लेकिन आज तीन विकेट लेना मेरे लिए सुखद रहा।” उन्होंने कहा, “हम हमेशा यहां आकर अपना सर्वश्रेष्ठ देना चाहते थे। हमने गेंदबाजी कोच से कुछ बातचीत की। उन्होंने हमें जितना संभव हो सके, अपने बेसिक्स पर टिके रहने के लिए कहा। मेरे लिए, मैं बस अपनी योजनाओं पर टिका रहता हूं। मैं यथासंभव तेज और सटीक गेंदबाजी करने की कोशिश करता हूं। मैं हमेशा अच्छी लाइन और लेंथ पर गेंदबाजी करने की कोशिश करता हूं।” बांग्लादेश के लिए सलामी बल्लेबाज शादमान इस्लाम 64 रन बनाकर क्रीज पर टिके रहने वाले एकमात्र बल्लेबाज थे, जबकि कप्तान मेहदी हसन मिराज ने सील्स द्वारा आउट होने से पहले 36 रन की पारी खेली। यह ओवर में उनका दूसरा विकेट था, इससे पहले उन्होंने तस्कीन अहमद को 8 रन पर पवेलियन भेजा था। अगले ओवर में सील्स ने नाहिद राणा को शून्य पर आउट कर बांग्लादेश की पहली पारी 71.5 ओवर में 164/10 पर समाप्त कर दी।

चटगांव के 70 ‘अल्पसंख्यक’ वकीलों-पत्रकारों पर केस दर्ज, बांग्लादेश में दो हिंदू भिक्षु गिरफ्तार

ढाका। बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद ने चटगांव के 70 अल्पसंख्यक वकीलों और दो पत्रकारों के खिलाफ ‘झूठा और परेशान करने वाला केस’ दर्ज होने पर हैरानी और चिंता जाहिर की है। इस बीच इस्कॉन कोलकाता ने दो हिंदू भिक्षुओं और एक अन्य की गिरफ्तारी व इस्कॉन सेंटर पर हमले का भी दावा किया। ‘अल्पसंख्यक’ पत्रकारों और वकीलों के खिलाफ 30 नवंबर को कोतवाली पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था। जिसमें इन पर देशी बम विस्फोट और वाहनों में तोड़फोड़ करने में शामिल होने का आरोप लगाया गया। मानवाधिकारों और कानून के शासन का उल्लंघन परिषद ने कहा कि यह केस पुजारी चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी के खिलाफ दर्ज राजद्रोह मामले को बाधित करने और इससे जुड़े समाचारों के प्रकाशन-प्रसार को जबरन रोकने के गुप्त इरादे से दायर किया गया। परिषद ने यह भी मांग की कि बांग्लादेशी सरकार और कानून प्रवर्तन अधिकारी तुरंत झूठे मामले को वापस लें, वकीलों और पत्रकारों को रिहा करने के लिए तत्काल कदम उठाएं। इस बीच, शनिवार को इस्कॉन कोलकाता ने आरोप लगाया कि बांग्लादेशी अधिकारियों ने दो भिक्षुओं, आदिपुरुष श्याम दास और रंगनाथ दास ब्रह्मचारी, के साथ-साथ चिन्मय कृष्ण दास के सचिव को भी गिरफ्तार किया है। इस्कॉन कोलकाता के उपाध्यक्ष राधा रमन ने कहा कि भिक्षुओं को शुक्रवार को पुलिस ने उस समय गिरफ्तार किया जब वे चिन्मय कृष्ण दास से मिलने के बाद घर जा रहे थे। चिन्मय कृष्ण दास को 25 नवंबर को देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। राधा रमन ने खुद के बनाए गए एक वीडियो में कहा, “29 नवंबर को जब आदिपुरुष श्याम दास और रंगनाथ दास ब्रह्मचारी चिन्मय कृष्ण प्रभु से मिलकर लौट रहे थे, तो उन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। हमें यह भी जानकारी मिल रही है कि चिन्मय कृष्ण दास के सचिव को भी गिरफ्तार किया गया है।” उन्होंने यह दावा भी किया कि दंगाइयों ने बांग्लादेश में इस्कॉन केंद्र में तोड़फोड़ की। बांग्लादेश में स्थिति तब से तनावपूर्ण है जब आध्यात्मिक उपदेशक चिन्मय कृष्ण दास पर 25 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया। उन पर चटगांव में बांग्लादेश के राष्ट्रीय ध्वज के ऊपर भगवा झंडा फहराने के आरोप में देशद्रोह का आरोप लगाया गया। दास की गिरफ्तारी के बाद, 27 नवंबर को चटगांव कोर्ट बिल्डिंग क्षेत्र में पुलिस और आध्यात्मिक गुरु के कथित अनुयायियों के बीच झड़प के दौरान एक वकील की मौत हो गई थी। शुक्रवार को, भारत ने बांग्लादेश में ‘चरमपंथी बयानबाजी, हिंसा और उकसावे की बढ़ती घटनाओं’ पर चिंता व्यक्त की। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ने बांग्लादेशी सरकार के साथ हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों पर लक्षित हमलों का मुद्दा लगातार मजबूती के साथ उठाया है।

बांग्लादेश : इस्कॉन पर बैन के लिए सड़कों पर कट्टरपंथी, चिन्मय की रिहाई के लिए दुनियाभर में इस्कॉन की प्रार्थना सभाएं

ढाका पश्चिम बंगाल की राजधानी ढाका में हिंदू पुजारी चिन्मय कृष्ण दास प्रभु की गिरफ्तारी को लेकर बढ़ते विवाद के बीच बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस के प्रेस सचिव शफीकुल इस्लाम ने आश्वासन दिया है कि देश में हिंदू समुदाय सुरक्षित है और वहां अल्पसंख्यकों को कोई खतरा नहीं है। सीएनएन न्यूज-18 को दिए एक इंटरव्यू में इस्लाम ने स्पष्ट किया कि बांग्लादेश सरकार का इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शसनेस (ISKCON) पर प्रतिबंध लगाने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने कहा, “मैं मामले की सुनवाई के बारे में नहीं जानता, लेकिन ISKCON पर बांग्लादेश में प्रतिबंध नहीं लगेगा।” यह बयान ऐसे समय में आया है जब पूर्व ISKCON पुजारी चिन्मय कृष्ण दास की राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तारी के बाद इस हिंदू संगठन पर प्रतिबंध लगाने की मांग तेज हो गई है। बांग्लादेश हाईकोर्ट ने भी गुरुवार को ISKCON की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने की याचिका को खारिज कर दिया। हिंदू समुदाय सुरक्षित हाल ही में बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों के बीच हिंसा की घटनाओं पर बोलते हुए इस्लाम ने कहा, “हिंदू समुदाय बांग्लादेश में सुरक्षित है। एक व्यवस्थित स्तर पर गलत सूचनाएं फैलाई जा रही हैं। मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि आकर जमीनी स्थिति देखें। शुरुआती कुछ दिनों में हिंसा हुई थी, लेकिन अब स्थिति नियंत्रण में है।” इस्लाम ने कहा कि चिन्मय कृष्ण दास को निष्पक्ष न्याय मिलेगा और सरकार इस दिशा में पूरी तरह प्रतिबद्ध है। भारत के बयान पर प्रतिक्रिया भारत के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए इस्लाम ने इसे आंतरिक मामला बताया और कहा कि नई दिल्ली को इस मामले पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए थी। उन्होंने कहा, “भारत सरकार को बयान नहीं देना चाहिए था। यह हमारा आंतरिक मामला है। हम कभी भारत में होने वाली घटनाओं पर टिप्पणी नहीं करते।” भारत ने मंगलवार को चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी की निंदा की थी और बांग्लादेश में हिंदू समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की थी। विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा, “हमें चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी और उन्हें जमानत से इनकार किए जाने पर गहरी चिंता है।” इस घटनाक्रम ने बांग्लादेश में धार्मिक और राजनैतिक तनाव को बढ़ा दिया है, लेकिन सरकार ने स्थिति पर कड़ा रुख अपनाते हुए आश्वासन दिया है कि सभी समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। बांग्लादेश में ढाका हाईकोर्ट के इस्कॉन पर बैन लगाने से इनकार करने के बाद कट्टरपंथी समूहों ने शुक्रवार को भारी हंगामा किया। जुम्मे की नमाज के बाद देशभर की मस्जिदों में लाखों मुसलमानों ने प्रदर्शन किया। सबसे बड़े प्रदर्शन राजधानी ढाका और चटगांव में हुए। प्रदर्शनकारियों ने इस्कॉन को ‘हिंदू उग्रवादी संगठन’ और ‘कट्टरपंथी व राष्ट्र-विरोधी समूह’ बताते हुए इस संगठन पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग की। इन रैलियों में कट्टरपंथी संगठन हिफाजत-ए-इस्लाम, खिलाफत मजलिस और इस्लामिक आंदोलन सहित कई धार्मिक-आधारित संगठनों और राजनीतिक दलों ने हिस्सा लिया। हिफाजत ने कहा कि देश की पराजित ताकतें हिंदुओं का इस्तेमाल अराजकता फैलाने के लिए कर रही हैं। पिछले मंगलवार को चटगांव कोर्ट परिसर में जिस तरह से वकील सैफुल इस्लाम अलिफ की हत्या की गई, वह गृहयुद्ध भड़काने की कोशिश थी। वहीं, चिन्मय कृष्ण दास की रिहाई के लिए इस्कॉन ने कोलकाता में विरोध कीर्तन आयोजित किया। इस्कॉन ने घोषणा की है कि रविवार को दुनिया भर के सभी इस्कॉन मंदिरों में वैश्विक प्रार्थना सभा का आयोजन किया जाएगा। इसमें बांग्लादेश में हिंदू भक्तों और धार्मिक अल्पसंख्यकों की रक्षा के लिए प्रार्थना की जाएगी। चिन्मय दास की गिरफ्तारी के बाद भड़की हिंसा पर भी बोले मुहम्मद यूनुस के प्रेस सचिव   बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों के बीच भड़की हालिया हिंसा को लेकर इस्लाम ने कहा कि बांग्लादेश के खिलाफ दुष्प्रचार अभियान चलाया जा रहा है। यहां  हिंदू सुरक्षित हैं। मीडिया संस्थानों से अपील करते हुए शफीकुल इस्लाम ने कहा कि मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि आप आएं और यहां हकीकत कवर करें। बांग्लादेश में शुरुआती कुछ दिनों में हिंसा देखी गई और स्थिति अब नियंत्रण में है। उन्होंने चिन्मय दास के मामले में भी निष्पक्ष सुनवाई की बात कही।         इस्कॉन से जुड़े 17 लोगों के बैंक खातों पर लगी रोक   इससे पहले, बांग्लादेश के वित्तीय अधिकारियों ने एक आदेश के बाद इस्कॉन से जुड़े सत्रह लोगों के बैंक खातों पर एक महीने तक की रोक लगाई। इन लोगों से तीन कामकाजी दिनों के भीतर अपने लेन-देन की जानकारी संबंधित बैंकों को सौंपने को कहा गया है।        भारत लगातार जता रहा विरोध   भारत बांग्लादेश सरकार के सामने लगातार मजबूती से यह मुद्दा उठा रहा है कि वहां के हिंदू और अन्य अल्पसंख्यकों को धमकियों और लक्षित हमलों का सामना करना पड़ रहा है। शुक्रवार को विदेश मंत्रालय ने कहा कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार को अपने सभी अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभानी चाहिए। मंत्रालय ने कहा, हम बांग्लादेश में कट्टरपंथी भाषा के बढ़ते इस्तेमाल, हिंसा की बढ़ती घटनाओं और उकसावे के मामलों पर चिंता व्यक्त करते हैं। इन घटनाओं को सिर्फ यह नहीं माना जा सकता कि मीडिया बढ़ा-चढ़ाकर बता रहा है। मंत्रालय ने बांग्लादेश सरकार से फिर अपील की कि वह अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए।      चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी पर मंत्रालय ने क्या कहा   बांग्लादेश में प्रमुख हिंदू चेहरे चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी पर मंत्रालय ने कहा, जहां तक व्यक्तियों के खिलाफ मामलों का सवाल है, हम जानते हैं कि कानूनी प्रक्रियाएं जारी हैं। हम उम्मीद करते हैं कि यह प्रक्रियाएं मामले को न्यायसंगत, निष्पक्ष और  पारदर्शी तरीके निपटाएंगी और सभी आरोपियों के कानूनी अधिकारों का पूरा सम्मान सुनिश्चित करेंगी। बांग्लादेश सम्मिलित सनातनी जागरण जोत संगठन के प्रवक्ता चिन्मय कृष्ण दास को सोमवार को ढाका के हजरत शाहजलाल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया गया था और उन पर देशद्रोह का आरोप लगाया गया। मंगलवार को चटगांव की एक अदालत ने उन्हें जमानत देने से इनकार किया और जेल भेज दिया। दास समर्थकों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़प में एक वकील की मौत हुई। चिन्मय बांग्लादेश में पहले अंतरराष्ट्रीय कृष्ण चेतना सोसायटी (इस्कॉन) के प्रवक्ता रह चुके हैं। 

पाकिस्तान के बाद बांग्लादेश भी IPL से हो रहा ‘साइड लाइन’, किसी ने नहीं खरीदा एक भी खिलाडी

 मुंबई इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2025 सीजन का मेगा ऑक्शन सोमवार (25 नवंबर) को सऊदी अरब के जेद्दा में खत्म हुआ. दो दिन तक चले इस मेगा ऑक्शन में 10 टीमों ने 639.15 करोड़ रुपये खर्च कर कुल 182 खिलाड़ी खरीदे. इस बार जहां ऋषभ पंत और श्रेयस अय्यर ने इतिहास रच दिया है. लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) ने 27 करोड़ में खरीदा. इस तरह वो IPL इतिहास के सबसे मंहगे क्रिकेटर बन गए हैं. दूसरे सबसे मंहगे क्रिकेटर श्रेयस बने, जिन्हें पंजाब किंग्स ने 26.75 करोड़ में खरीदा. वहीं दूसरी ओर एक देश ऐसा भी रहा है, जिसका कोई खिलाड़ी नहीं बिका. बड़ी बात तो यह रही कि इस देश के 12 प्लेयर नीलामी में उतरे थे, लेकिन 2 खिलाड़ियों को छोड़कर किसी और का नाम भी बोली के लिए नहीं लिया गया. पाकिस्तान के बाद बांग्लादेश भी हो रहा ‘साइड लाइन’ इस तरह कह सकते हैं कि इस देश को ‘चुपचाप’ साइड लाइन कर दिया गया. हम बात कर रहे हैं बांग्लादेश की, जहां तख्तापलट के बाद हिंदुओं पर अत्याचार का मामला काफी गहराता जा रहा है. हाल ही में बांग्लादेश में हिंदू पुजारी और इस्कॉन के पूर्व प्रमुख चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी को गिरफ्तार किया गया है, जिस पर हंगामा मचा हुआ है. इसी बीच IPL का मेगा ऑक्शन आ गया, जिसमें 12 बांग्लादेशी क्रिकेटर्स को शॉर्टलिस्ट किया गया था. इनमें मुस्ताफिजुर रहमान और रिशाद हुसैन का नाम ही बोली के लिए आया था, लेकिन उन्हें किसी ने नहीं खरीदा. बाकी 10 खिलाड़ियों में लिटन दास, तस्कीन अहमद, शाकिब अल हसन, मेहदी हसन मिराज, शोरिफुल इस्लाम और तंजीम हसन साकिब जैसे स्टार भी शामिल रहे. मगर इनमें से किसी का भी नाम बोली तक नहीं पहुंचा. किसी ने भी इनको नहीं खरीदा. इस तरह कह सकते हैं कि पाकिस्तान के बाद अब बांग्लादेश भी IPL से साइड लाइन होता जा रहा है. यदि ऐसा ही चलता रहा तो भविष्य में बांग्लादेशी क्रिकेटर्स पर भी IPL में बाहर रहने का खतरा मंडरा सकता है. इस लिस्ट के जरिए जानिए कौन सा बांग्लादेशी प्लेयर किस बेस प्राइस के साथ IPL नीलामी में उतरा था. IPL मेगा ऑक्शन में उतरने वाले बांग्लादेशी क्रिकेटर बांग्लादेशी प्लेयर बेस प्राइस (INR) मुस्ताफिजुर रहमान (अनसोल्ड) 2 करोड़ तस्कीन अहमद 1 करोड़ शाकिब अल हसन 1 करोड़ मेहदी हसन मिराज 1 करोड़ शोरिफुल इस्लाम 75 लाख तंजीम हसन साकिब 75 लाख मेहदी हसन 75 लाख नाहिद राणा 75 लाख रिशाद हुसैन (अनसोल्ड) 75 लाख लिटन दास 75 लाख तौहीद हृदोय 75 लाख हसन महमूद 75 लाख एक ही IPL सीजन खेल सके पाकिस्तानी क्रिकेटर बता दें कि IPL का पहला सीजन 2008 में खेला गया था. तब पाकिस्तान के कुल 11 खिलाड़ी आईपीएल में खेले थे. 2008 आईपीएल सीजन के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते अच्छे नहीं रहे और राजनीतिक तनाव के चलते पाकिस्तानी प्लेयर्स को आईपीएल में मौका नहीं दिया गया है. इस तरह पाकिस्तानी खिलाड़ियों को आईपीएल के पहले यानी 2008 सीजन में पहली और आखिरी बार मौका मिला था. IPL के पहले सीजन में 11 पाकिस्तानी खिलाड़ियों ने धमाल मचाया था. यह प्लेयर सलमान बट, शोएब अख्तर, मोहम्मद हफीज, उमर गुल, कामरान अकमल, यूनुस खान, सोहेल तनवीर, मोहम्मद आसिफ, शोएब मलिक, शाहिद आफरीदी और मिस्बाह उल हक हैं. तो क्या बांग्लादेशी क्रिकेटर्स को जान-बूझकर अनदेखा किया गया है, क्योंकि ऑक्शन के बाद उनकी बोली तक नहीं लगाई गई। शाकिब अल हसन जैसे क्रिकेटर, जो पहले आईपीएल में बांग्लादेश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं, उन्हें इस बार खरीदार नहीं मिल पाए, जिससे निराशा और बढ़ गई। हालांकि, कई प्रशंसकों का कहना है, कि बांग्लादेशी क्रिकेटर्स ने पिछले दिनों काफी खराब खेल दिखाया है और ना बिकने की वजह उनका प्रदर्शन है, ना की बांग्लादेश की मौजूदा हालात से कोई लेना देना है। बांग्लादेश ने पिछले दिनों जब भारत के साथ तीन टी-20 मैच खेले थे, उस दौरान उनका काफी खराब प्रदर्शन रहा था और ना ही बल्लेबाज अपना कोई प्रभाव छोड़ पाए थे और ना ही गेंदबाज। बांग्लादेश में हिंदुओं पर लगातार हो रहे हैं हमले विवाद को और हवा देने वाली बात यह है कि ढाका में हिंदू नेता चिन्मय कृष्ण दास प्रभु की हाल ही में हुई गिरफ़्तारी ने बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ हो रहे व्यवहार को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। पिछले कुछ सालों में बांग्लादेश में हिंदू समुदाय को हमलों, उनकी संपत्ति के विनाश और व्यवस्थागत भेदभाव का सामना करना पड़ा है, जिससे अशांति बढ़ रही है।     भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। कई लोग आईपीएल फ्रैंचाइजी से अल्पसंख्यकों पर हमलों में कथित मिलीभगत के कारण बांग्लादेशी खिलाड़ियों का बहिष्कार करने का आग्रह कर रहे हैं। एक यूजर ने कहा, “अगर आतंकवाद के कारण पाकिस्तान को आईपीएल से बाहर रखा जाता है, तो बांग्लादेश को हिंदुओं पर अत्याचार करने के लिए इसी तरह के परिणाम भुगतने चाहिए।” बांग्लादेशी खिलाड़ियों को बाहर रखने से खेल और राजनीति के बीच के संबंध की ओर ध्यान खिंचा है। आईपीएल ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए पाकिस्तानी खिलाड़ियों को बाहर रखा है, लेकिन यह घटना इस बात पर प्रकाश डालती है, कि किस तरह व्यापक सामाजिक-राजनीतिक मुद्दे खिलाड़ियों के चयन को प्रभावित कर सकते हैं।  

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