LATEST NEWS

महंगाई, गैस संकट और बढ़ती बिजली दरों के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन

Congress protests against inflation, gas crisis and rising electricity rates खंडवा ! जिले के पुनासा में बढ़ती महंगाई और मूलभूत सुविधाओं पर पड़ रहे आर्थिक बोझ के विरोध में जिला ग्रामीण कांग्रेस ने जोरदार प्रदर्शन किया। भाजपा सरकार की नीतियों को जनविरोधी बताते हुए कार्यकर्ताओं ने एलपीजी गैस की किल्लत, पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों और 1 अप्रैल से लागू नई बिजली दरों के खिलाफ आवाज उठाई। जिला ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष उत्तमपाल सिंह के नेतृत्व में आयोजित इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर आम जनता को महंगाई के बोझ तले दबाने का आरोप लगाते हुए कहा कि लगातार बढ़ती कीमतों से आम आदमी का बजट पूरी तरह बिगड़ गया है। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर मांग की कि बिजली दरों में की गई वृद्धि को तुरंत वापस लिया जाए, साथ ही पेट्रोल-डीजल और गैस सिलेंडर के दामों में राहत दी जाए। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ही जनता को राहत नहीं दी, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। इस प्रदर्शन के माध्यम से कांग्रेस ने साफ संदेश दिया कि वह जनहित के मुद्दों को लेकर लगातार संघर्ष करती रहेगी।

BJP नेता की हत्या के मुख्य आरोपी को गोरखपुर में किया गिरफ्तार, गोली के बाद चाकुओं से वार

गोरखपुर गोरखपुर में पूर्व पार्षद और भाजपा नेता राजकुमार चौहान के हत्यारों को पुलिस ने महज़ कुछ ही घंटों में ढूंढ लिया है. पूछताछ में खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने भतीजे से हुई लड़ाई का बदला लेने के लिए उनकी हत्या की थी. मॉर्निंग वॉक पर निकले राजकुमार चौहान को आरोपियों ने पहले गोली मारी और फिर चाकू से गोद डाला. यह घटना मंगलवार सुबह 5 बजे के आसपास हुई. जिससे इलाके में दहशत फैल गई थी। राजकुमार के भतीजे से हुई लड़ाई से क्षुब्ध होकर 18 वर्षीय राज चौहान ने अपने दोस्त विपिन यादव के साथ मिलकर चाचा राजकुमार चौहान की बेरहमी से हत्या कर दी. पुलिस ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में राजकुमार के शरीर पर कुल 11 जगह घाव मिले हैं. हत्याकांड को लेकर राजकुमार के परिवार ने 8 लोगों को नामजद किया था. लेकिन पुलिस का कहना है कि घटना के पीछे गिरफ्तार दो आरोपियों की ही संलिप्तता पाई गई है। प्रशासन करेगा बच्चों की पढ़ाई की व्यवस्था कड़ाई से पूछताछ करने पर दोनों ने सच उगल दिया. वहीं भाजपा नेता की मौत के बाद गोरखपुर जिला प्रशासन ने उदारता दिखाते हुए परिवार की मदद को आगे हाथ बढ़ाया है. जिलाधिकारी दीपक मीणा ने बताया कि मृतक के परिवार ने सुरक्षा की मांग थी. जिसे तत्काल मुहैया कराया गया है. कुछ आर्थिक मदद की बात की गई थी, जिसे प्रशासन को अवगत करा दिया गया है। मृतक की दो छोटी बेटी और एक बेटे की पढ़ाई की व्यवस्था भी कराई जाएगी. साथ ही कोई योग्य परिवार का सदस्य जो नौकरी करना चाहता हो उसकी भी व्यवस्था की जाएगी।

बीजेपी को मिली 13 सीटों की बढ़त, राज्यसभा में बहुमत के लक्ष्य के करीब, जानें अगला कदम

 नई दिल्ली देश के 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों पर चुनाव के फाइनल नतीजे घोषित हो गए हैं, जिसमें 26 निर्विरोध चुने गए तो 11 सीटों पर मतदान के जरिए फैसला हो सका है. बीजेपी के अगुवाई वाले एनडीए को 22 सीटों पर जीत हासिल हुई है तो विपक्ष के खाते में 15 सीटें आईं है. राज्यसभा के इस चुनाव से बीजेपी की संसद के उच्च सदन में ताकत काफी बढ़ गई है, लेकिन बहुमत के आंकड़े से अभी भी वह दूर है। हालांकि, बीजेपी के अगुवाई वाला एनडीए गठबंधन बहुमत का आंकड़ा 2024 में ही हासिल कर चुका. अब राज्यों में बीजेपी की ताकत बढ़ने के बाद उसकी ताकत संसद के उच्च सदन यानि राज्यसभा में भी बढ़ी है. इसकी का नतीजा है कि 10 राज्यों की 37  राज्यसभा चुनाव में बीजेपी ही नहीं एनडीए की सीटें बढ़ गई है। राज्यसभा में सदस्यों की संख्या 245 है, जिसके लिहाज से बहुमत के लिए किसी भी दल को 123 सदस्यों की जरूरत होती है. ऐसे में सवाल यह उठता है कि 37 राज्यसभा सीटों पर चुनाव के बाद बीजेपी का नंबर कितना हो गया है और बहुमत से कितनी दूर है. इसके अलावा 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों से सदन के गणित पर क्या असर पड़ेंगे?  राज्यसभा में बीजेपी बहुमत से कितनी दूर देश के 10 राज्यों की जिन 37 राज्यसभा सीटों पर चुनाव हुए हैं, वो सीटें अप्रैल में खाली हो जाएंगी. चुनाव आयोग राज्यसभा सदस्यों के 6 साल के कार्यकाल पूरे होने से एक महीने पहले उनकी सीटों पर चुनाव करा लेता है. इसकी कड़ी में 37 राज्यसभा सीटों पर चुनाव हुए हैं.चुनाव से पूर्व बीजेपी के राज्यसभा में कुल 103 सांसद हैं, जिसमें से पार्टी के 9 सांसदों का कार्यकाल खत्म हो रहा है। 9 राज्यसभा सदस्यों के कार्यकाल खत्म होने से बीजेपी की सीटें उच्च सदन में कम होकर 94 पर हो रही है, लेकिन बीजेपी ने 37 राज्यसभा सीटों पर हुए चुनाव में  13 राज्यसभा जीतने में कामयाब रही है. इस तरह बीजेपी की सीटें बढ़कर 107 हो गई हैं. बीजेपी की राज्यसभा सीटें पहले से चार ज्यादा हो रही हैं, लेकिन उसके बाद भी बहुमत से दूर है। बीजेपी को राज्यसभा में अपने दम पर बहुमत का आंकड़ा हासिल करने के लिए 16 राज्यसभा सीट की जरूरत है. बीजेपी को 16 राज्यसभा की सीटों को जिताने के लिए 2026 के जून और नवंबर के चुनाव का ही नहीं बल्कि 2028 तक इंतजार करना पड़ सकता है, क्योंकि इसके बाद पार्टी राज्यसभा में अपनी ताकत बढ़ा सकती है। 37 राज्यसभा सीटें के चुनाव से क्या बदलेगा? देश के 10 राज्यों की कुल 37 राज्यसभा सीटों पर चुनाव हुए हैं, जिसमें सात राज्यों के 26 राज्यसभा सदस्य पहले निर्विरोध निर्वाचित चुन लिए गए थे. तीन राज्यों की 11 सीटों पर सोमवार को चुनाव हुए और उसके बाद नतीजे आए हैं.इस तरह 37 राज्यसभा सीटों के चुनाव का फाइनल नतीजे देखें तो बीजेपी के अगुवाई वाले एनडीए ने 22 सीटें जीती हैं तो विपक्ष के खाते में 15 सीटें आईं हैं। हरियाणा, बिहार और ओडिशा की 11 राज्यसभा सीटों में से एनडीए ने 9 सीटों पर जीत दर्ज की है जबकि विपक्ष को सिर्फ दो राज्यसभा सीटें ही मिल सकी है. बीजेपी ने 5 सीटें जीती हैं और उसके सहयोगियों को 4 सीट मिली है. कांग्रेस और बीजेडी एक-एक राज्यसभा सीटें ही मिल सकी हैं. राज्यसभा की जिन 26 सीटें पर पहले ही निर्विरोध सदस्य चुने गए हैं, उसमें एनडीए और विपक्ष को 13-13 सीटें मिली थी। राज्यसभा चुनाव का फाइनल नतीजे देखें तो 37 सीटों में एनडीए को 22 सीटें मिली है जबकि विपक्ष के हिस्सा में 15 सीट ही आ सकी हैं. इसमें बीजेपी को 13 सीटें मिली तो जबकि 9 सीटें उसके सहयोगी ने जीती हैं. विपक्ष को मिली 15 राज्यसभा सीटों में कांग्रेस ने 6 सीटें, टीएमसी ने 4 सीटें, डीएमके ने 3 सीटें, शरद पवार की एनसीपी को एक सीटें और एक सीट बीजेडी को मिली है। चुनाव पहले और नतीजे आने के समीकरण को देखते हैं तो एनडीए को 10 सीटों का फायदा तो विपक्ष को 10 सीटों का नुकसान हुआ. चुनाव से पहले एनडीए के पास 12 राज्यसभा सीटें थी, लेकिन अब बढ़कर 22 हो गई हैं जबकि विपक्ष के पास 25 राज्यसभा सीटें थी, जो अब घटकर के 15 रह गई हैं। राज्यसभा में एनडीए की कुल ताकत क्या है?  राज्यसभा में एनडीए की चुनाव से पहले बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए का आंकड़ा 131 सदस्यों का था, लेकिन 37 सीटों पर नतीजे के बाद अब एनडीए गठबंधन के सदस्यों की संख्या 141 हो गई है. बीजेपी के 107, AIADMK के पांच, जेडीयू के 4, एनसीपी के 4, टीडीपी के 2, UPPL के दो, शिवसेना के 2, जेडीएस के 1, आरएलडी के एक, एजीपी के 1,आरएलएसएम के एक, एनपीप के एक, PMK के एक और निर्दलीय तीन राज्यसभा सदस्य हैं. इसके अलावा 6 मनोनीत राज्यसभा सदस्यों का समर्थन भी बीजेपी को है। राज्यसभा चुनाव में विपक्ष को झटका लगा है, उसकी सीटें घट गई हैं. विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया ब्लाक’ की सीटें राज्यसभा में 74 पर पहुंच गई हैं, उसमें कांग्रेस के पास 28 सीटें, टीएमसी की 13, डीएमके की 8, सपा की 4, सीपीआई (एम) की तीन, नेशनल कॉफ्रेंस की 3, आरजेडी की 3, सीपीआई की 2, मुस्लिम लीग की 2, जेएमएम, शरद पवार की एनसीपी की एक, शिवसेना (य़ूबीटी) की एक, डीएमडीके की एक और तीन अन्य दल के सदस्य हैं.    एनडीए और इंडिया ब्लॉक से अलग रहने वाले दलों की संख्या राज्यसभा में देखें तो वह 28 है, उसमें आम आदमी पार्टी की 10, वाईएसआर कांग्रेस की 7, बीजेडी की 6, बीआरएस की 3, बसपा की एक की एमएनएफ की एक सीट है. इसके अलावा दो राज्यसभा खाली हैं. साथ ही यह भी बता दें कि राज्यसभा की 12 सीटों पर सदस्यों को राष्ट्रपति के द्वारा मनोनीत किया जाता है. ऐसे में बीजेपी के अगुवाई वाले एनडीए का नंबर उच्च सदन में बहुमत से ज्यादा है। राज्यसभा में बहुमत से क्या हासिल करेगी राज्यसभा में बहुमत से बीजेपी भले ही दूर है, लेकिन एनडीए के नंबर काफी मजबूत है. मोदी सरकार के लिए … Read more

असम में किसकी बनेगी सरकार? चुनाव ऐलान के साथ ओपिनियन पोल ने खोले पत्ते

गुवाहाटी पांच राज्यों में चुनावी तारीखों के ऐलान के साथ ही पहला ओपिनियन पोल भी आ चुका है। असम के लिए जो ओपिनियन पोल जारी हुआ है, उसमें भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिलता नजर आ रहा है। मार्टिज-आईएनएस के ओपिनियन पोल में भाजपा को 96 से 98 सीटें मिलने की उम्मीद जताई गई है। वहीं, दूसरे नंबर पर कांग्रेस को दिखाया गया है। अनुमान के मुताबिक कांग्रेस को 26 से 28 सीटें मिल सकती हैं। किस पार्टी को कितनी सीटों का अनुमान चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही आए मार्टिज-आईएएनएस के ओपिनियन पोल में भाजपा को 96 से 98, कांग्रेस को 26 से 28, एआईयूडडीएफ को 1 से 5 और अन्य को 1 से 3 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है। असम की सभी 126 विधानसभा सीटों के लिए एक चरण में नौ अप्रैल को वोट डाले जायेंगे और मतगणना चार मई को होगी और उसी दिन परिणाम घोषित कर दिया जायेगा। चुनाव आयोग ने यहां रविवार को संवाददाता सम्मेलन में राज्य के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की। चुनाव कार्यक्रम के अनुसार, अधिसूचना 16 मार्च 2026 को जारी होगी और इसी के साथ नामांकन दाखिल करने का कार्य शुरू हो जाएगा। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 23 मार्च है और 24 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। नाम वापसी के लिए 26 मार्च तक का समय दिया गया है। आदर्श आचार संहिता लागू इसके साथ ही राज्य में आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू हो गई है। कुल 126 सीटों में से 09 सीटें अनुसूचित जाति के लिए और 19 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। राज्य की वर्तमान विधानसभा का पांच वर्षीय कार्यकाल 21 मई 2021 को प्रारंभ हुआ था, जो आगामी 20 मई 2026 को समाप्त होने जा रहा है। राज्य में कुल 2,35,01,164 पंजीकृत मतदाता हैं। इनमें सामान्य मतदाताओं की संख्या 2,34,40,296 दर्ज की गई है, जबकि सर्विस वोटर्स की संख्या 60,868 है। चुनाव आयोग द्वारा 11 फरवरी 2026 को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची के अनुसार, मतदान प्रक्रिया में 476 थर्ड जेंडर मतदाता भी अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। कितने युवा मतदाता असम में इस बार 3,82,341 युवा मतदाता (18-19 वर्ष) पहली बार लोकतंत्र के इस पर्व में शामिल होकर अपना पहला वोट डालेंगे। इसके अतिरिक्त, राज्य में 1,59,335 दिव्यांग मतदाता और 85 वर्ष से अधिक आयु के 1,20,538 वरिष्ठ नागरिक पंजीकृत हैं। इन सभी वरिष्ठ मतदाताओं के लिए आयोग ने घर से मतदान करने हेतु वैकल्पिक डाक मतपत्र की विशेष सुविधा सुनिश्चित की है। मतदान की सुगमता के लिए बुनियादी ढांचे में विस्तार करते हुए आयोग ने असम में कुल 28,205 मतदान केंद्र स्थापित किए हैं। आयोग ने प्रत्येक केंद्र पर मतदाताओं की औसत संख्या लगभग 831 रखी है, ताकि मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्ण और सुविधाजनक तरीके से संपन्न हो सके।  

BJP की बंगाल चुनाव रणनीति: सभी बड़े नेताओं को चुनावी मैदान में उतारने की तैयारी, CM उम्मीदवार कौन?

कलकत्ता  भाजपा पश्चिम बंगाल और केरल में मुख्यमंत्री पद के लिए घोषित चेहरे के बगैर चुनाव लड़ेगी। पश्चिम बंगाल में सभी 294 सीटों पर और केरल में एनडीए के दलों के साथ सभी 140 सीटों पर लड़ेगी। पश्चिम बंगाल में पार्टी पूर्व सांसदों के साथ ही लोकसभा में मौजूदा सांसदों को भी विधानसभा चुनाव मैदान में उतार सकती है। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने दोनों राज्यों के विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों के नामों के साथ चुनावी रणनीति पर भी चर्चा की है। सूत्रों के अनुसार, भाजपा पश्चिम बंगाल में इस बार पूरी ताकत से चुनाव मैदान में उतरेगी और वह अपने अधिकांश मौजूदा विधायकों के साथ पूर्व सांसदों को भी चुनाव मैदान में उतार रही है। पार्टी रणनीति के तहत मौजूदा सांसदों को भी चुनाव मैदान में उतारने पर विचार कर रही है। हालांकि, पार्टी इस बार भी किसी को बतौर मुख्यमंत्री पेश नहीं करेगी। सीएम कैंडिडेट कौन? केरल को लेकर पार्टी सूत्रों का कहना है कि भाजपा एनडीए के दो सहयोगी दलों ट्वेंटी 20 और भारतीय जन धर्म सेना के साथ सभी 140 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। भाजपा खुद 90 से 100 सीटों पर लड़ेगी और बाकी 40 सीट दोनों सहयोगियों को लगभग आधी-आधी बांटेगी। भाजपा ने पिछली बार 115 सीट पर और भारतीय जन धर्म सेना ने 21 सीट पर चुनाव लड़ा था। भाजपा इस बार बिना मुख्यमंत्री के चेहरे के चुनाव लड़ेगी। उसने पिछली बार मेट्रो मैन ई. श्रीधरन को मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाया था, लेकिन उसका खाता भी नहीं खुला था। सूत्रों का कहना है कि इस बार चुनावी पोस्टर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे के साथ केंद्र सरकार का नाम और काम रहेगा। राज्य के नेताओं में केरल भाजपा के प्रमुख राजीव चंद्रखेशर, ट्वेंटी 20 के प्रमुख साबू एम. जैकब और भारतीय जन धर्म सेना के प्रमुक टी. वेल्लापेल्ली का चेहरा भी रहेगा। केरल में भाजपा स्थानीय निकायों के नतीजों से काफी उत्साहित है। खासकर राजधानी तिरुवनंतपुरम में पार्टी ने पहली बार अपना मेयर बनाया है।

कार्यकर्ताओं में जोश भरने पहुंचे जीतू पटवारी, संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की अपील

Jitu Patwari reached to energize the workers, appealed to strengthen the organization till the booth level. इंदौर । प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने देपालपुर विधानसभा के बेटमा ब्लॉक में आयोजित ‘ब्लॉक स्तरीय पंचायत समिति कार्यकर्ता सम्मेलन’ में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ आगामी राजनीतिक कार्ययोजना और संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने को लेकर विस्तृत चर्चा की। सम्मेलन में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे। इस दौरान पटवारी ने कार्यकर्ताओं से कहा कि आने वाले समय में संगठन को और ज्यादा सक्रिय और मजबूत बनाना जरूरी है, ताकि जनता के मुद्दों को मजबूती से उठाया जा सके और पार्टी की नीतियों को घर-घर तक पहुंचाया जा सके। कार्यक्रम में कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव सत्यनारायण पटेल, इंदौर जिला (ग्रामीण) अध्यक्ष विपिन वानखेड़े, विधानसभा प्रभारी मनोज सिंह गौतम, किसान कांग्रेस जिला अध्यक्ष जीतू ठाकुर, मनीष पटेल सहित कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी नेताओं ने संगठन को मजबूत करने और आगामी चुनावी रणनीति पर अपने विचार रखे। सम्मेलन के दौरान कार्यकर्ताओं में उत्साह दिखाई दिया और संगठन को जमीनी स्तर पर सक्रिय करने के लिए विभिन्न सुझाव भी सामने आए।

MP निगम-मंडल की नियुक्तियों में देरी क्यों? लिस्ट जल्द होने वाली है जारी

भोपाल  मध्य प्रदेश में निगम-मंडल की नियुक्तियों की सूची लंबे समय से प्रतीक्षित है, लेकिन अभी तक इसे अंतिम रूप नहीं दिया गया है। जानकारी के अनुसार, केंद्रीय नेतृत्व से हरी झंडी न मिलने के कारण फैसला टला हुआ है। प्रदेश के कई भाजपा नेता और कार्यकर्ता इस सूची का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। प्रदेश नेतृत्व ने संभावित नामों की सूची तैयार करके केंद्रीय स्तर पर भेज दी थी, लेकिन दिल्ली में अंतिम स्वीकृति अभी तक नहीं मिली है। सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय गृहमंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की बैठक के जरिए अंतिम निर्णय होना था, लेकिन वैश्विक और राष्ट्रीय घटनाओं के चलते यह बैठक स्थगित हो गई। इससे एमपी निगम-मंडल की सूची जारी करने में और देरी हुई। इस देरी से प्रदेश के नेताओं और कार्यकर्ताओं में बेचैनी बढ़ गई है। अब सभी की निगाहें केंद्रीय नेतृत्व द्वारा जल्द सूची जारी करने पर टिकी हैं।

BJP का नया चुनावी प्लान, बंगाल में 140 कैंडिडेट्स और पिछली गलतियों का सबक

कलकत्ता पश्चिम बंगाल लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा ने तैयारियां तेज कर दी हैं। गुरुवार को दिल्ली में भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक हुई। खबर है कि इस मीटिंग में बंगाल चुनाव के लिए करीब 140 उम्मीदवारों के नाम तय कर लिए गए हैं। संभावना है कि अप्रैल के आखिर में ही बंगाल में चुनाव कराए जा सकते हैं। भाजपा के नए अध्यक्ष नितिन नवीन के पदभार संभालने के बाद चुनाव समिति की यह पहली बैठक थी। यह बैठक पीएम नरेंद्र मोदी के आधिकारिक आवास 7 लोक कल्याण मार्ग पर ही थी। आमतौर पर भाजपा मुख्यालय में ही ऐसी बैठकें होती थीं, लेकिन इस बार पीएम मोदी के आवास पर यह बैठक हुई। राज्य में 294 विधानसभा सीटें हैं और भाजपा लगभग आधी सीटों पर सहमति बना चुकी है। माना जा रहा है कि इस संबंध में जल्दी ही ऐलान हो सकता है। भाजपा का फोकस है कि पहली लिस्ट जारी करने में बढ़त हासिल कर ली जाए। इसके अलावा कई पूर्व सांसदों को विधानसभा में उतारने का भी प्लान है। पहली लिस्ट में जिन लोगों के नाम आ सकते हैं, उनमें पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष और पूर्व केंद्रीय मंत्री निसिथ प्रमाणिक और शुभेंदु अधिकारी शामिल हैं। हालांकि एक बदलाव पिछली बार के मुकाबले यह है कि मौजूदा सांसदों को नहीं उतारा जाएगा। 2021 के चुनाव में भाजपा 77 सीटों पर जीत हासिल करके मुख्य विपक्षी दल बन गई थी। हालांकि कई विधायकों के पार्टी छोड़ने के चलते फिलहाल राज्य में उसके पास 65 की ही संख्या है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि ज्यादातर विधायकों को फिर से टिकट मिल सकता है। एक रणनीति यह भी बदली है कि इस बार सिलेब्रिटी या फिर टीएमसी छोड़कर आने वाले लोगों को मौके नहीं दिए जाएंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि दलबदलुओं के फिर से दूसरे खेमे में जाने की संभावना अधिक रहती है। इसके अलावा सिलेब्रिटी स्टेटस रखने वाले लोग भी कुछ समय बाद राजनीतिक सक्रियता कम कर देते हैं। ऐसी स्थिति में पार्टी के पुराने नेताओं और वफादारों को ही मौका दिया जाएगा। ऐसा इसलिए ताकि कैडर उत्साहित रहे और जनता के बीच यह छवि भी बने कि भाजपा में आम कार्यकर्ताओं का सम्मान किया जाता है। क्यों भाजपा ने इस बार बदल दी 2021 वाली रणनीति 2021 के चुनाव में भाजपा के टिकट पर उतरे कई नेताओं ने बाद में पाला बदल लिया था। ऐसे में भाजपा ने शायद सबक सीखा है। तब भाजपा ने टीएमसी से आए कई नेताओं और फिल्मी कलाकारों को खूब मौके दिए थे। उम्मीदवारों के चयन में जिताऊ फैक्टर को ध्यान में रखा गया है। इसके अलावा संगठन क्षमता, जाति समीकरण और संगठन के लिए प्रतिबद्धता जैसे फैक्टरों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। गौरतलब है कि भाजपा ने राज्य में चुनाव प्रचार भी शुरू कर दिया है। हाल ही में अमित शाह ने एक रैली में वादा किया था कि भाजपा के सत्ता में आते ही सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू कर दिया जाएगा।

मुकेश मल्होत्रा को मिला राहत, HC ने विजयपुर विधायक पद पर अपने फैसले पर लगाया स्टे

श्योपुर  मध्य प्रदेश का श्योपुर विधानसभा क्षेत्र में बीते 2-3 दिनों से चर्चाओं में बना हुआ है. इसकी वजह है, सोमवार यानि 9 मार्च को हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ का सुनाया गया फैसला. जहां कोर्ट ने विजयपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर फैसला सुनाते हुए बीजेपी के हारे हुए प्रत्याशी रामनिवास रावत को विधायक घोषित किया था, जबकि कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा की विधायकी शून्य की थी. वहीं हाईकोर्ट ने राज्यसभा सांसद विवेक तंखा की याचिका पर संज्ञान लेते हुए अपने ही फैसले पर 15 दिन का स्टे लगा दिया है. जिसके बाद कांग्रेस अब सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगी। अपने ही फैसले पर हाईकोर्ट ने लगाया स्टे विजयपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर ग्वालियर हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद विवेक तंखा ने तुरंत कोर्ट का रूख किया. जहां विवेक तंखा की याचिका पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने अपने ही फैसले को 15 दिन के लिए स्थगित कर दिया है. जिसका मतलब है कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट में अपील करके स्थगन आदेश प्राप्त करने का मौका दिया गया है. यह स्थगन RP एक्ट के प्रावधान अनुसार दिया गया है. यानि तब तक मुकेश मल्होत्रा विजयपुर से कांग्रेस विधायक रहेंगे. जस्टिस एसजी अहलूवालिया ने मुकेश मल्होत्रा ​​की इस दलील पर सहमति जताई कि अगर फैसले के असर और अमल पर रोक नहीं लगाई गई तो उन्हें भारी नुकसान होगा. उन्होंने कहा कि “फैसले के असर और अमल पर 15 दिनों के लिए रोक लगाने की अर्ज़ी न्याय के हित में है, ताकि प्रतिवादी मुकेश मल्होत्रा ​​सुप्रीम कोर्ट से रोक का आदेश ले सकें। जीतू पटवारी ने बताया लोकतांत्रिक लड़ाई जीतू पटवारी ने कहा कि हम लोकतांत्रिक तरीके से फिर से कांग्रेस का विधायक बनवाएंगे. कांग्रेस अध्यक्ष ने इसे लोकतंत्र बचाने की इस लड़ाई बताया है. उन्होंने कहा कि हम राज्यसभा सांसद के साथ मजबूती से लगे हुए हैं. साथ ही कहा कि बीजेपी दलित, आदिवासी और आरक्षण विरोधी है. बताया जा रहा है कि आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट में विवेक तंखा और अभिषेक मनु संघवी मामले की पैरवी करेंगे। क्या है मुकेश मल्होत्रा और रामनिवास का पूरा मामला दरअसल, विजयपुर विधानसभा सीट पर कांग्रेस के मुकेश मल्होत्रा को जीत मिली थी, जबकि बीजेपी रामनिवास रावत को हार का सामना करना पड़ा था. हार के बाद रामनिवास रावत ने हाईकोर्ट में मुकेश मल्होत्रा के खिलाफ याचिका लगाई थी, जिसमें दावा किया गया था कि कांग्रेस विधायक ने आपराधिक जानकारी छिपाई है. मामले में सोमवार को ग्वालियर हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए मुकेश मल्होत्रा द्वारा आपराधिक जानकारी छिपाने की बात सही पाई गई, जिसके बाद कोर्ट ने मुकेश मल्होत्रा की विधायकी शून्य कर दी और रामनिवास रावत को विधायक घोषित किया।

केजरीवाल मामले की जज स्वर्ण कांता शर्मा पर AAP का निशाना, BJP से संबंधों को लेकर उठे सवाल

नई दिल्ली कथित शराब घोटाले से जुड़े केस की सुनवाई कर रहीं हाई कोर्ट की जज जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा पर आम आदमी पार्टी ने सवाल खड़े कर दिए हैं। ‘आप’ ने सवाल किया है कि भाजपा और जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के बीच क्या रिश्ता है? कथित शराब घोटाले से जुड़े केस की सुनवाई कर रहीं हाई कोर्ट की जज जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा पर आम आदमी पार्टी ने सवाल खड़े कर दिए हैं। ‘आप’ ने सवाल किया है कि जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा का भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से क्या रिश्ता है? आप के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने भाजपा नेताओं के बयानों के मायने तलाशते हुए जज को लेकर यह सवाल उठाया है। कथित शराब घोटाले के केस में ट्रायल कोर्ट ने 27 फरवरी को अरविंद केजरीवाल समेत सभी 23 आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया था। सीबीआई ने इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी है और जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच इसकी सुनवाई कर रही है। सोमवार को जस्टिस स्वर्ण कांता ने फौरी तौर पर सीबीआई को राहत दी तो भाजपा नेताओं ने उम्मीद जाहिर की कि ‘पिक्चर अभी बाकी’ है। अब इसी को आधार बनाकर ‘आप’ ने जज की निष्पक्षता पर सवाल उठा दिए हैं। पूर्व मंत्री और आप के प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस वीरेंद्र सचदेवा का एक बयान सुनाया और दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा का ट्वीट दिखाया। उन्होंने कहा, ‘जिस तरीके से दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा कह रहे हैं कि निश्चित सजा मिलेगी, इनके मंत्री कपिल मिश्रा कह रहे हैं कि पिक्चर अभी बाकी है। इन्हें कैसे पता कि पिक्चर अभी बाकी है। पिक्चर में क्या बाकी है, यह कपिल मिश्रा को कैसे पता, यह तो अभी हाई कोर्ट की जज साहिबा को भी नहीं पता होगा। अभी वह केस पढ़ेंगी तब पता चलेगा।’ कपिल मिश्रा की वजह से हो गया था जज का ट्रांसफर: भारद्वाज भारद्वाज ने कहा कि वीरेंद्र सचदेवा कैसे कह सकते हैं कि निश्चित तौर पर सजा मिलेगी। क्या ये सीधे तौर पर यह कहने की कोशिश कर रहे हैं कि इन्हें मालूम है कि इस मुकदमे में क्या होगा। इन्हें पता है कि पिक्चर आगे क्या है? क्या ये कहना चाह रहे हैं कि हम जो फैसला चाहेंगे वह जस्टिस स्वर्ण कांता से करा लेंगे? ‘आप’ नेता ने कपिल मिश्रा का प्रभाव बताते हुए आरोप लगाया कि हाई कोर्ट के एक जज ने उनके खिलाफ एफआईआर का आदेश दिया और अगले दिन अदालत में तलब किया तो रात को ही उनका ट्रांसफर हो गया। जज का पूछ लिया भाजपा से रिश्ता सौरभ भारद्वाज ने कई सवालों के बीच जस्टिस का भाजपा से रिश्ता भी पूछ लिया। उन्होंने कहा, ‘कपिल मिश्रा का यह कहना कि पिक्चर अभी बाकी है, यह कुछ सवाल पैदा करता है। क्या जस्टिस क्या करेंगी यह इनको मालूम है? इनका क्या सवाल आता है। जस्टिस स्वर्ण कांता का भाजपा से क्या रिश्ता है,यह इन लोगों को बताना चाहिए। वीरेंद्र सचदेवा और कपिल मिश्रा कैसे कह सकते हैं कि पिक्चर अभी बाकी है। मैं आपके सामने गंभीर सवाल रख रहा हूं।’

आदिवासी विधायक को हटाना पूरे समाज का अपमान” — जीतू पटवारी का भाजपा पर बड़ा हमला

“Removing the tribal MLA is an insult to the entire society” – Jitu Patwari’s big attack on the BJP भोपाल। मध्यप्रदेश की सियासत में एक बार फिर आदिवासी मुद्दा गरमा गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भाजपा सरकार पर दलित और आदिवासी विरोधी राजनीति करने का आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला है। पटवारी ने कहा कि आज मध्यप्रदेश में दलित और आदिवासियों के खिलाफ पूरी भाजपा एकजुट होकर खड़ी दिखाई दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता द्वारा चुने गए एक आदिवासी विधायक को पद से हटाने की कार्रवाई केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे आदिवासी समाज का अपमान है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता के फैसले का सम्मान होना चाहिए, लेकिन भाजपा सरकार सत्ता के अहंकार में आदिवासी समाज की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है। पटवारी ने चेतावनी देते हुए कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर चुप नहीं बैठेगी और आदिवासी समाज के सम्मान की लड़ाई सड़क से लेकर सदन तक लड़ी जाएगी। पटवारी के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी टकराव और तेज होने के आसार हैं।

कर्ज के पहाड़ तले मध्यप्रदेश! मोहन सरकार फिर ले रही 5800 करोड़ का नया कर्ज, कांग्रेस ने घेरा”

Madhya Pradesh under a mountain of debt! The Mohan government is taking on another 5,800 crore rupees in new loans, and Congress is attacking it. भोपाल। वित्तीय वर्ष के अंतिम चरण में मध्यप्रदेश सरकार एक बार फिर बड़ा कर्ज लेने जा रही है। प्रदेश सरकार भारतीय रिजर्व बैंक के माध्यम से तीन किस्तों में 5,800 करोड़ रुपये का कर्ज उठाने की तैयारी में है। इससे पहले होली से ठीक पहले सरकार 6,300 करोड़ रुपये का कर्ज ले चुकी है। लगातार लिए जा रहे कर्ज को लेकर अब सियासत भी तेज हो गई है और विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। वित्त विभाग के अधिकारियों के अनुसार 10 मार्च (मंगलवार) को सरकार तीन अलग-अलग किस्तों में यह कर्ज लेगी। इसमें 1,900 करोड़, 1,700 करोड़ और 2,200 करोड़ रुपये शामिल हैं। सरकार का कहना है कि यह राशि प्रदेश में विकास परियोजनाओं और आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए ली जा रही है। खासतौर पर इस धनराशि का उपयोग पूंजीगत कार्यों और अधोसंरचना विकास में किया जाएगा। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अगर हाल ही में लिए गए कर्ज को भी जोड़ लिया जाए तो वित्तीय वर्ष 2025-26 में मध्यप्रदेश द्वारा लिए गए कुल कर्ज की राशि लगभग 85,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी। वहीं प्रदेश पर कुल कर्ज का बोझ बढ़कर करीब 5.66 लाख करोड़ रुपये के आसपास पहुंचने का अनुमान है। इधर इस मुद्दे को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। पटवारी ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार लगातार कर्ज लेकर मध्यप्रदेश को कर्ज के दलदल में धकेल रही है और आने वाली पीढ़ियों पर आर्थिक बोझ बढ़ा रही है। हालांकि सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि लिया जा रहा कर्ज राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (FRBM) अधिनियम के दायरे में है और इसका उपयोग केवल विकास कार्यों के लिए किया जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा के बजट सत्र के दौरान कर्ज का यह मुद्दा सियासी बहस का बड़ा केंद्र बन सकता है, जहां विपक्ष सरकार की आर्थिक नीति पर सवाल उठाएगा।

भाजपा की मांग: बंगाल चुनाव के लिए चुनाव आयोग से चरणबद्ध योजना

कोलकाता भारतीय जनता पार्टी की पश्चिम बंगाल इकाई ने राज्य में निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करने के लिए भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) की पूर्ण पीठ के समक्ष विस्तृत प्रस्तुति दी। पार्टी ने चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और निष्पक्ष बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव आयोग के सामने रखे। भाजपा ने कहा कि पश्चिम बंगाल में लंबे समय तक चलने वाली चुनाव प्रक्रिया से हिंसा और प्रशासनिक दखल की आशंका बढ़ जाती है। पार्टी ने आयोग से मांग की कि छह सप्ताह तक 7–8 चरणों में मतदान कराने के बजाय कम समय में अधिकतम एक या दो चरणों में मतदान कराया जाए। साथ ही, पिछले तीन चुनावों 2019 व 2024 के लोकसभा चुनाव और 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान निर्वाचन आयोग के आदेश से स्थानांतरित किए गए सभी अधिकारियों को फिर से ट्रांसफर करने की मांग की। भाजपा ने “संवेदनशील बूथ” के बारे में बताते हुए कहा कि जहां पिछले तीन चुनावों के दौरान मतदान के समय या उसके बाद हिंसा हुई हो, या जहां 85 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ है और अशांति फैलाई जा सकती है। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भाजपा ने पश्चिम बंगाल पुलिस पर निर्भरता कम करने की बात कही। पार्टी ने मांग की कि पर्याप्त संख्या में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल की अग्रिम तैनाती की जाए और उनके लिए क्षेत्र से परिचित कराने हेतु हैंडबुक उपलब्ध कराई जाए। साथ ही सीएपीएफ के नोडल अधिकारियों को निर्देश दिया जाए कि बल की तैनाती व आवाजाही पूरी तरह पारदर्शी हो और जवान स्थानीय लोगों से किसी प्रकार की मेहमाननवाजी स्वीकार न करें। भाजपा ने यह भी सुझाव दिया कि सामान्य पर्यवेक्षकों और पुलिस पर्यवेक्षकों को काफी पहले से तैनात किया जाए ताकि वे स्वतंत्र आकलन कर सकें। वहीं, सीएपीएफ की ओर से एरिया डॉमिनेशन, रूट मार्च और कॉन्फिडेंस बिल्डिंग उपाय स्थानीय पुलिस के बजाय ऑब्जर्वरों की पहचान के आधार पर किए जाएं। भाजपा ने वोटरों की पहचान के लिए दो चरणों की व्यवस्था, हर पोलिंग स्टेशन पर वेबकैम और राज्य व केंद्र सरकार के अधिकारियों की 50-50 फीसदी भागीदारी की भी मांग की। पार्टी का कहना है कि इन उपायों से चुनाव प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बन सकेगी।

पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर BJP सक्रिय, CEC से 3 चरणों में चुनाव कराने की मांग

बंगाल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अगुवाई में आयोग की फुल बेंच अभी बंगाल के दौरे पर है और चुनाव से जुड़ी तैयारियों का जायजा ले रही है. पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर कभी भी चुनाव तारीखों का ऐलान हो सकता है. इस बीच राज्य में मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने चुनाव आयोग से मुलाकात कर चुनाव को 3 चरणों में ही कराए जाने की मांग की है. बीजेपी के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज सोमवार को कोलकाता में चुनाव आयोग की फुल बेंच से मुलाकात की और यह मांग की कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 3 चरणों से ज्यादा चरणों में नहीं कराया जाना चाहिए. पार्टी की ओर से यह भी कहा गया कि आयोग को पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान किसी तरह की हिंसा नहीं होने, इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए. BJP ने चुनाव आयोग से चुनावी प्रक्रिया को बहुत ही कम समय में खत्म कराने की अपील की. पार्टी ने कहा, “हमारी पहली मांग है कि चुनाव एक, दो या ज्यादा से ज्यादा 3 चरणों में कराई जाए. 7 या 8 चरणों में चुनाव कराने की कोई जरूरत नहीं है.” विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में सुरक्षा माहौल को लेकर गहरी चिंता जताते हुए BJP प्रतिनिधिमंडल ने आयोग को अपनी 16 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा. मामले से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ-साथ अन्य चुनाव आयुक्त एसएस संधू और विवेक जोशी के साथ आज सोमवार को मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय स्तर और राज्य स्तर की पार्टियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर रहे हैं ताकि चुनाव कराने को लेकर उनकी चिंताओं और सुझावों को सुना जा सके. BJP नेता जगन्नाथ चट्टोपाध्याय, जो मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त से मिलने वाले 3 सदस्यीय पार्टी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे, ने बताया कि पार्टी ने आयोग से विधानसभा चुनाव अधिक से अधिक 3 चरणों में कराने की अपील की है. उन्होंने कहा, “हमने एक, 2 या 3 चरणों में चुनाव की मांग की थी, लेकिन इससे ज्यादा चरणों में नहीं हो.” BJP के नेता शिशिर बाजोरिया, जो प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा भी थे, ने कहा, “मैंने अपनी आंखों से देखा कि रूट मार्च पूरी तरह से शांतिपूर्ण इलाकों कराए जा रहे हैं. ये मुख्य सड़कों पर किए जा रहे हैं जहां कोई लोग नहीं रहते, सिर्फ गाड़ियां गुजरती हैं. इस तरह राज्य पुलिस सेंट्रल फ़ोर्स को काम करने के लिए मजबूर कर रही है.”

असम में सीट शेयरिंग ने BJP की मुश्किलें बढ़ाईं, NDA के साथी अब फ्रेंडली फाइट के मूड में

गुवाहाटी असम में 2026 की चुनावी बिसात बिछ चुकी है, लेकिन सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ही खेमों के भीतर सीटों के गणित को लेकर तनातनी कम होने का नाम नहीं ले रही है। गठबंधन की राजनीति के इस दौर में सहयोगी दलों की बढ़ती महत्वाकांक्षाओं ने रणनीतिकारों की नींद उड़ा दी है। हालात यह हैं कि कई निर्वाचन क्षेत्रों में गठबंधन के सहयोगियों के बीच ही ‘मैत्रीपूर्ण मुकाबला’ होने की संभावना प्रबल हो गई है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार एक तरफ विकास के दावों के साथ मैदान में है, वहीं दूसरी ओर उसे अपने सहयोगियों असम गण परिषद (AGP) और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) को संतुष्ट रखने की बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। असम गण परिषद (AGP) 2014 से भाजपा की वफादार साथी रही है। इस बार अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए दबाव बना रही है। पिछले 2021 के चुनावों में एजीपी ने 29 सीटों पर दांव आजमाया था, जिनमें से 26 पर उसने अकेले चुनाव लड़ा और 3 सीटों पर भाजपा के साथ दोस्ताना मुकाबला किया था। अंततः पार्टी 9 सीटें जीतने में सफल रही थी। इस बार एजीपी के जमीनी कार्यकर्ताओं की मांग है कि पार्टी को अधिक सीटों पर मौका मिलना चाहिए, जिससे भाजपा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने संकेत दिया है कि एजीपी के साथ शुरुआती दौर की चर्चा शुरू हो चुकी है और 9 या 10 मार्च तक सीटों का अंतिम खाका तैयार हो सकता है। हालांकि, जब उनसे सहयोगियों की बढ़ती मांगों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी औपचारिक मांग से अवगत नहीं हैं, लेकिन उन्होंने ‘फ्रेंडली फाइट’ की संभावना से इनकार भी नहीं किया। बोडोलैंड का पेच गठबंधन की सबसे पेचीदा स्थिति बोडोलैंड क्षेत्र में देखने को मिल रही है। यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (UPPL) ने अपनी आक्रामक रणनीति का ऐलान करते हुए 21 सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है। इनमें से 15 सीटें बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल (BTC) क्षेत्र की हैं और 6 सीटें उससे बाहर की हैं। सबसे बड़ी बाधा यह है कि बीपीएफ (BPF) और यूपीपीएल (UPPL) के बीच की कड़वाहट खत्म होने का नाम नहीं ले रही। दोनों दलों ने साफ कर दिया है कि वे न तो साथ चुनाव लड़ सकते हैं और न ही किसी सीट-शेयरिंग फॉर्मूले पर सहमत होंगे। यह स्थिति भाजपा के लिए सिरदर्द बन गई है, क्योंकि उसे इन दोनों क्षेत्रीय ताकतों के बीच संतुलन बनाना है। विपक्ष की एकजुटता दूसरी ओर सत्ता से बाहर कांग्रेस के नेतृत्व वाला विपक्षी गठबंधन खुद को एक मजबूत विकल्प के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है। विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर चार प्रमुख विपक्षी दलों ने हाथ मिलाया है और संयुक्त अभियान शुरू करने की योजना बनाई है। असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गौरव गोगोई ने गठबंधन की एकजुटता पर जोर देते हुए कहा कि सभी सहयोगी दल जल्द ही पूरे राज्य में समन्वयित अभियान बैठकें करेंगे। गोगोई ने कहा, “हमारे पास केवल 30 दिन बचे हैं और ये 30 दिन असम के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। हमें एकजुट होकर जनता के बीच जाना होगा।” विपक्ष के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे कितनी जल्दी अपनी सीटों का बंटवारा कर पाते हैं, ताकि प्रचार के आखिरी दिनों में कोई आंतरिक कलह सामने न आए। जैसे-जैसे नामांकन की तारीखें नजदीक आ रही हैं, असम की राजनीति में गठबंधन धर्म और क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं के बीच का संघर्ष गहराता जा रहा है। जहां भाजपा के लिए अपने सहयोगियों की नाराजगी को दूर करना एक बड़ी परीक्षा है, वहीं विपक्ष के लिए 30 दिनों के भीतर एक साझा और प्रभावी नैरेटिव तैयार करना आसान नहीं होगा।

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live

Ceriabet Login

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

casino online

clickbet88