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10 दिन चला रेस्क्यू ऑपरेशन, राजस्थान-जयपुर में बोरवेल में फंसी चेतना बाहर निकली लेकिन नहीं बची जान

जयपुर। राजस्थान के कोतपूतली में बोरवेल में गिरी तीन साल की चेतना को बाहर निकाल लिया गया है। लेकिन, चेतना में कोई चेतना नहीं बची है। बुधवार को 10वें दिन बोरवेल से उसकी लाश बाहर निकली है। बेटी की मौत से मां और परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। मासूम की मौत से किरतपुरा के बड़ियाली की ढाणी में मातम छाया हुआ है। परिवार के साथ गांव वाले भी मायूस हैं। दरअसल, तीन साल की चेतना 23 दिसंबर को खेलते समय 700 फीट गहरे बोरवेल में गिरी थी। वह 150 फीट की गहराई पर अटक गई थी। देसी जुगाड़ के जरिए उसे तीस फीट ऊपर खींच लिया गया था। लेकिन, फिर उसे देसी जुगाड़ से और ऊपर नहीं लाया जा सका। इसके बाद बोरवेल के पास एक 170 फीट गहरा गड्ढा किया और फिर बोरवेल तक सीधी सुरंग बनाकर एनडीआरएफ के जवान चेतना तक पहुंचे। जिसके बाद उसे बाहर निकाला गया। लेकिन, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। चेतना सबको छोड़कर जा चुकी थी। परिवार लगातार रेस्क्यू अभियान में लापरवाही बरतने के आरोप लगा रहा था।      अब जानिए, किस दिन क्या हुआ? 23 दिसंबर: कोटपूतली के किरतपुरा क्षेत्र के बड़ीयाली ढाणी में दोपहर करीब 1:50 बजे तीन साल की बच्ची चेतना बोरवेल में गिरी थी। करीब 10 मिनट बाद परिजनों को बच्ची के राने की आवाज सुनाई दी, तब उन्हें पता चला कि वह बोरवेल में गिर गई है। तत्काल परिजनों ने प्रशासन को सूचना दी। दोपहर 2:30 बजे एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के साथ प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। 3:20 बजे मेडिकल टीम घटनास्थल पर पहुंची। 3:45 पर पाइप के जरिए बच्ची को ऑक्सीजन पहुंचाई गई। 5:15 पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। रात 8:45 पर देसी जुगाड़ के एक्सपर्ट जगराम अपनी टीम के साथ बच्ची को रेस्क्यू करने पहुंचे। इसी दिन रात तीन बजे तक अंब्रेला और रिंग रॉड से बच्ची को रेस्क्यू करने के दो प्रयास किए गए, लेकिन दोनों ही असफल रहे। 24 दिसंबर: सुबह 5:30 बजे से प्रशासन फिर सक्रिय हुआ। अधिकारियों ने परिजनों से चेतना को हुक में फंसाकर बाहर निकालने की अनुमति ली। 9:30 बजे तक बच्ची को 15 फीट ऊपर खींचा गया। लगातार अफसल होने के बाद प्रशासन ने हरियाणा के गुरुग्राम से पैरलल गड्डा खोदने के लिए पाइलिंग मशीन मंगवाई। रात करीब 11 बजे मशीन मौके पर पहुंची। 25 दिसंबर: 8:00 बजे से पाइलिंग मशीन से गड्ढा खोदने का काम शुरू किया गया। दोपहर एक बजे तक 40 फीट सुरंग करने के बाद पाइलिंग मशीन बंद की गई। शाम पांच पाइलिंग मशीन के साथ 4 फीट मोटा बिट असेंबल किया गया है। 5:30 बजे रेस्क्यू अभियान एक बार फिर से शुरू किया गया। शाम छह बजे 200 फीट क्षमता की एक और पाइलिंग मशीन मौके पर पहुंची। इसे चलाने के लिए गुजरात से एक और टीम भी पहुंची। आठ बजे रेट माइनर की टीम पहुंची। नौ बजे बच्ची की माता घोली देवी की तबीयत बिगड़ी। रात 11 बजे कोटपूतली-बहरोड़ कलेक्टर कल्पना अग्रवाल घटनास्थल पर पहुंची। 26 दिसंबर: सुबह 10 बजे पत्थर आने के कारण पाइलिंग मशीन को रोका गया। छह घंटे में मशीन से पत्थर को काटा गया। शाम करीब छह बजे गड्ढे की गहराई चेक की गई, इसके बाद पाइलिंग मशीन को हटाया गया। 6:30 बजे से क्रेन से गड्ढे में सेफ्टी पाइप लगाना शुरू किए गए। 27 दिसंबर: दोपहर करीब 12  बजे तक 170 फीट गहरे खोदे गए गड्ढे में लोहे के पाइप फिट किए गए। 12:40  बजे इन पाइप का वजन उठाने के लिए 100 टन क्षमता की मशीन मौके पर बुलाई गई। करीब एक बजे मौसम बदलने के कारण हुई बारिश से पाइप वेल्डिंग का काम रुक गया। शाम पांच बजे वेल्डिंग का काम दोबारा शुरू किया गया, जो देर रात तक चलता रहा। 28 दिसंबर: एनडीआरएफ के 6 जवानों की टीम बनाई गई। दो-दो जवानों को सुरंग खोदने के लिए 170 गहरे गड्ढे में उतारा गया। इन जवानों ने चार फीट सुरंग खोदी।       29 दिसंबर: सुरंग की खोदाई जारी रही, बीच में आ रहे पत्थरों को तोड़ने के लिए कंप्रेसर मशीन मंगवाई गई। मांइस एक्सपर्ट को बुलाकर पत्थर काटने की तकनीक समझी।   30 दिसंबर: प्रशासन और एनडीआरएफ के अधिकारियों ने दावा किया कि चेतना को आज (सोमवार को) बाहर निकाल लेंगे। लेकिन, पत्थरों और अन्य कारणों से इसमें फिर देरी हो गई। सुरंग खोद रहे जवानों को अंदर सांस लेने में भी परेशानी हुई। 31 दिसंबर: एनडीआरएफ के जवानों ने 10 फीट गहरी सुरंग की खोदाई पूरी की। लेकिन, सुरंग की खोदाई गलत दिशा में हो गई। जवानों को बोरवेल नहीं मिला। इसके बादा जीपीआर मशीन की मदद से बोरवेल की लोकेशन को ट्रेस कर फिर सुरंग खोदी गई। 01 जनवरी 2025: 10 दिन बाद चेतना को बाहर निकाला गया। लेकिन, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। चेतना की मौत हो चुकी थी।

जल्द आ सकती है बाहर, पुलिस सतर्क, राजस्थान-जयपुर में बोरवेल में फंसी चेतना के पास पहुंची रेस्क्यू टीम

जयपुर। बोरवेल में गिरी बच्ची को 10वें दिन ट्रेस कर लिया गया है। रेस्क्यू टीम द्वारा किसी भी समय बच्ची को बाहर निकाल लिया जाएगा। तेज बदबू के चलते बच्ची के जीवित नहीं होने की आशंका नजर आ रही है। रेस्क्यू टीम सुरंग में फिनाइल ले जा रही है। जिला कलेक्टर कल्पना अग्रवाल ने बताया कि कुछ देर में चेतना को बोरवेल से निकाल लिया जाएगा। मौके पर एम्बुलेंस और पुलिस जाप्ता तैनात कर दिया गया है। साथ ही बीडीएम अस्पताल में अलग से सुरक्षा लगा दी गई है। मौके पर जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक सहित प्रशासन के आला अधिकारी मौजूद हैं। गौरतलब है कि किरतपुरा के बड़ियाली की ढाणी में 23 दिसंबर को खेलते वक्त चेतना 700 फीट गहरे बोरवेल में गिर गई थी और करीब 120 फीट की गहराई में फंस गई। पिछले 10 दिनों से चल रहे इस रेस्क्यू ऑपरेशन में अब तक कोई ठोस सफलता नहीं मिल पाने से परिवार और ग्रामीणों की नाराजगी बढ़ती जा रही थी। अब जानकारी मिली है कि रेस्क्यू टीम चेतना लगभग करीब पहुंच चुकी है और किसी भी समय मासूम को बाहर निकाला जा सकता है। घटनास्थल से अस्पताल के रास्ते में पुलिस तैनात की गई है ताकि मासूम को तुरंत अस्पताल ले जाया जा सके। दिशा भटकने से रेस्क्यू में देरी – रेस्क्यू टीमों ने सुरंग के जरिए चेतना तक पहुंचने का प्रयास किया था, लेकिन तकनीकी खामियों और दिशा भटकने के कारण यह प्रयास सफल नहीं हो सका। बुधवार सुबह अधिकारियों ने बोरवेल की लोकेशन ट्रेस करने का दावा किया है। ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार (GPR) मशीन की मदद से बोरवेल की स्थिति को ट्रेस किया गया है। बहरहाल रेस्क्यू टीम के रास्ता भटकने को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं कि आखिर सुरंग की दिशा गलत कैसे हुई? बहरहाल सभी को मासूम के निकलने का इंतजार है। अब तक के घटनाक्रम पर एक नजर –     23 दिसंबर : दोपहर 2 बजे किरतपुरा के बड़ीयाली ढाणी में गिरी चेतना। सूचना मिलने पर पहुंची रेस्क्यू टीमें। रात 9 बजे एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमों ने रेस्क्यू शुरू किया     24 दिसंबर : देसी जुगाड़ लगाकर 15 फीट ऊपर तक खींचा लेकिन फिर अटका ऑपरेशन।     25 दिसंबर : हरियाणा से आई पाइलिंग मशीन से बोरवेल के पास 40 फीट गहरा गड्ढा खोदने के बाद बंद पड़ी मशीन। गुजरात से नई मशीन बुलाई गई। रात में उत्तराखंड से रैट माइनर्स टीम पहुंची।     26 दिसंबर :  रैट माइनर्स टीम ने 170 फीट गहरा गड्ढा खोदकर सेफ्टी पाइप डाले।     27 दिसंबर : बारिश के कारण काम रुका।     28 दिसंबर : ऑक्सीजन लेवल चेक करने पाइप में उतरे दो जवान। एल आकार में सुरंग की खुदाई की।     29 दिसंबर :  4 फीट तक सुरंग खोदकर बोरवेल में उतरी रेस्क्यू टीम। सुरंग बनाने में पत्थर बने सबसे बड़ी बाधा। पत्थर तोड़ने के लिए मशीन मंगाई।     30 दिसंबर : एसडीआरएफ के कमांडेंट ने रेस्पिरेशन चेक किया। लेजर अलाइनमेंट डिवाइस से जांच की।     31 दिसंबर : दोपहर बाद पता चला कि गलत दिशा में हो रही थी खुदाई। लोकेशन ट्रेक करने के लिए जीपीआर मशीन मंगाई।

कलेक्टर बोलीं- ट्रेस नहीं हो रहा बोरवेल, राजस्थान-जयपुर में गलत दिशा में खोद दी सुरंग

जयपुर। राजस्थान के कोटपूतली में 700 फीट गहरे बोरवेल में तीन साल की चेतना 9वें दिन भी फंसी हुई है। चेतना को रेस्क्यू करने के लिए खोदे गए 170 फीट गड्ढे में उतरकर एनडीआरएफ के जवान सुरंग खोद रहे थे। लेकिन, अब इसमें बहुत बड़ी गड़बड़ हो गई। 10 फीट लंबी सुरंग की खोदाई पूरी हो चुकी है, लेकिन उसकी दिशा ही गलत निकली। सुरंग बोरवेल तक नहीं पहुंची है। कलेक्टर कल्पना अग्रवाल ने कहा कि सुरंग के जरिए अब तक बोरवेल को ट्रेस नहीं किया जा सका है। हमारी कोशिश लगातार जारी है, रेस्क्यू अभियान में जुटी टीमों ने हिम्मत नहीं हारी है। बता दें कि आज मंगलवार को रेस्क्यू अभियान को 9वां दिन है, लेकिन चेतना को बाहर नहीं निकाला जा सका है। भूखी-प्यासी मासूम बच्ची की हालत कैसी है, इसका भी कुछ पता नहीं चल पा रहा है। कई दिन से वह मूवमेंट नहीं कर रही है। चेतना 120 फीट की गहराई पर एक हुक से लटकी हुई है। 30 दिसंबर को  प्रशासन और एनडीआरएफ ने दावा किया था कि बच्ची को सोमवार को बाहर निकाल लिया जाएगा। दावे के बाद से बच्ची की मां और परिजन उसके बाहर आने का बेसब्री से इंतजार करते रहे, लेकिन उन्हें निराश होना पड़ा। वहीं, अब गलत दिशा में हुई सुरंग की खोदाई के कारण यह सवाल अब भी बना हुआ है कि आखिर चेतना को कब बाहर निकाला जा सकेगा। परिवार का आरोप, परिजनों से मिलीं कलेक्टर उधर, बच्ची को निकालने में हो रही देरी के कारण परिवार और ग्रामीण प्रशासन पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि अगर, समय पर सही कदम उठाए गए होते तो चेतना को पहले ही बाहर निकाल लिया गया होता। हालांकि, प्रशासन किसी तरह की लापरवाही से इनकार कर रहा है। परिजनों की नाराजगी सामने आने के बाद सोमवार देर शाम कलेक्टर कल्पना अग्रवाल ने परिजनों से दोबारा मुलाकात की और उन्हें रेस्क्यू अभियान में आ रही परेशानियों के बारे में बताया। कलेक्टर का कहना है कि हम हर स्तर पर बेहतर काम कर रहे हैं, लेकिन यह रेस्क्यू अभियान काफी मुश्किल है। इसलिए इसे पूरा करने में समय लग रहा है। बता दें कि कलेक्टर कल्पना अग्रवाल इसे राजस्थान का सबसे मुश्किल रेस्क्यू ऑपरेशन बता चुकी हैं।  अंदर सांस लेने में हो रही परेशानी मासूम चेतना तक पहुंचने के लिए एनडीआरएफ के 6 जवानों की तीन टीमें बनाई गई हैं। एक बार में दो जवान को 170 फीट गहरे गड्ढे में उतरकर बोरवेल तक सीधी सुरंग खोद रहे हैं। दो जवानों की एक टीम करीब 20-25 मिनट अंदर रहकर खोदाई कर रही है, फिर उन्हें बाहर निकालकर दूसरी टीम को नीचे भेजा जा रहा है। इसी तरह सुरंग बनाने का सिलसिला जारी है। जवानों के लिए ऑक्सीजन की व्यवस्था की गई है, लेकिन अधिक गहराई में होने के कारण उन्हें सांस लेने में परेशानी हो रही है। नौ दिन से चेतना को निकालने के प्रयास जारी     तीन साल की चेतना 23 दिसंबर (सोमवार) की दोपहर दो बजे खेलते समय 700 फीट गहरे बोरवेल में गिर गई थी। चेतना करीब 150 फीट की गहराई में फंस गई थी, देसी जुगाड़ से उसे तीस फीट ऊपर खींच लिया गया। अब वह 120 फीट पर एक हुक से लटकी हुई है। 23 दिसंबर से चेतना को खाना पानी कुछ भी नहीं मिला है। 24 दिसंबर की शाम से वह कोई मूवमेंट भी नहीं कर रही है। उसकी हालत को लेकर अधिकारी भी कुछ नहीं बोल रहे हैं।

रेस्क्यू टीम कमांडर बोले- जल्द पहुंचेगी टीम, राजस्थान-जयपुर में बोरवेल में अब डेढ़ फीट दूर है बच्ची

जयपुर। बीते 8 दिन से लगातार जिस मासूम चेतना को बोरवेल से निकालने लिए कोशिशें की जा रही है, वह आज लगभग पूरी होती नजर आ रही है। रेस्क्यू टीमें चेतना के करीब पहुंच चुकी है। करीब 170 फीट गहराई में मौजूद टीम के कमांडर का दावा है कि आज दोपहर तक चेतना तक हम पहुंच जाएंगे। एनडीआरएफ की टीम सोमवार सुबह 6:30 बजे तक करीब 7 फीट टनल की खुदाई कर चुकी है। अब सिर्फ 1.5 फीट चौड़े चट्टान को ड्रिल करना बाकी है। हालांकि चेतना किस स्थिति में है, इस पर अभी प्रशासन की तरफ से कोई अपडेट नहीं आया है। कलेक्टर कल्पना अग्रवाल ने दावा किया है कि ये राजस्थान का सबसे मुश्किल ऑपरेशन है। 23 दिसंबर को हुआ था हादसा बता दें कि 23 दिसंबर की दोपहर चेतना खेलते हुए बोरवेल में गिर गई थी। वह करीब 170 फीट की गहराई में फंसी थी। बोरवेल में गिरने के बाद से उसे पानी तक नहीं पहुंचाया जा सका है। इसके बाद बारिश के चलते रेस्क्यू ऑपरेशन में कुछ दिक्कतें और आईं। मंगलवार (24 दिसंबर) शाम से वह कोई मूवमेंट भी नहीं कर रही है। अधिकारी बीते कई दिनों से उसके कैमरे की इमेज या विजुअल को भी नहीं दिखा रहे हैं।

अस्पताल में मौत से छाया मातम, गुना में 16 घंटे तक रेस्क्यू के बाद बोरवेल से बहार निकला बच्चा

गुना। मध्य प्रदेश के गुना जिले की राघौगढ़ तहसील के पिपलिया गांव में शनिवार शाम 9 साल का बच्चा सुमित खेत में बने बोरवेल में गिर गया था। भोपाल से पहुंची एनडीआरएफ की टीम ने रातभर रेस्क्यू अभियान चलाकर रविवार सुबह करीब 10 बजे उसे बाहर निकाला। बच्चे को गुना जिला अस्पताल के आईसीयू में ले जाया गया है। जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद वहां मौजूद सभी लोगों की आंखे नम हो गई। बच्चे के माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है। रातभर 45 फीट खुदाई के बाद एनडीआरएफ की टीम ने 10 फीट टनल बनाने के बाद बच्चे तक पहुंची। बच्चा 39 फीट पर फंसा था और गड्ढे में पानी भी था। विधायक और कलेक्टर सहित कई अधिकारी रातभर मौके पर ही रहे। बच्चे में अभी कोई हलचल नहीं देखी जा रही है। खेलते समय गिरा बच्चा शनिवार शाम करीब 6.30 बजे दशरथ मीना का नौ वर्षीय पुत्र सुमित खेलते हुए गांव के फूलसिंह मीना के खेत में पहुंच गया, वहां बोरवेल का गड्ढा खुला हुआ था। बच्चा उस बोरवेल में गिर गया। काफी देर तक बालक नहीं दिखा तो स्वजनों ने तलाशी शुरू की और गड्ढे मे उसके गिरने की जानकारी हुई। 100 फीट गहरा बोरवेल रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए दो जेसीबी, स्वास्थ्य, पुलिस, एमपीईबी और जनरेटर सहित सभी आवश्यक संसाधन जुटाए गए थे। कलेक्टर डॉक्टर सत्येंद्र सिंह भी मौके पर पहुंच गए थे। गुना के कलेक्टर डॉ. सतेंद्र सिंह ने बताया कि रेस्क्यू के माध्यम से सबसे पहले गड्ढे में बच्चे को ऑक्सीजन पहुंचाई जा रही थी। बोरवेल एक साल पहले ही कराया गया था। यह 100 फीट गहरा बताया गया। कलेक्टर डॉ. सत्येंद्र सिंह ने बताया कि फूलसिंह के खेत में बने बोरवेल में बच्चा गिरा था। प्रशासन और स्थानीय टीम बच्चा बचाने के लिए सभी उपायों का उपयोग कर रही थी। राघौगढ़ विधायक जयवर्धन सिंह भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने कलेक्टर से घटना की जानकारी भी ली।

मां बोली-तड़प रही मेरी बच्ची, राजस्थान-जयपुर में बोरवेल में चेतना को बचाने सुंरग खोदने नीचे उतरे जवान

जयपुर। राजस्थान के कोटपूतली में 700 फीट गहरे बोरवेल में फंसी तीन साल की चेतना को आज छठवां दिन है। मासूम बच्ची 120 फीट की गहराई पर एक हुक से लटकी हुई है। इतने दिन से न तो उसने कुछ खाया और न ही पिया है। हालांकि, राहत की बात यह है कि चेतना को रेस्क्यू करने के लिए बोरवेल के पास खोदे गए गड्ढे में रेस्क्यू टीम के जवानों को नीचे उतारा गया है। यह जवान बोरवेल तक सुरंग खोदेंगे। हालांकि, यह अधिकारी भी नहीं बता रहे हैं कि चेतना कब तक निकल आएगी। उधर, चेतना की मां धोली देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। वे बार-बार हाथ जोड़कर एक ही विनती कर ही हैं कि मेरी बेटी को बाहर निकाल दो। मासूम बच्ची चेतना को बाहर निकालने में हो रही देरी पर परिवार प्रशासन और कलेक्टर पर गंभीर आरोप लगा रहा है। परिवार का कहना है कि पहले तो कलेक्टर छुट्टी पर थी। लेकिन, आने के बाद भी वे एक बार भी परिवार से मिलने तक नहीं आई हैं।  मीडिया को दिए बयान में चेतना के ताऊ शुभराम ने कहा कि अधिकारियों से कुछ पूछो तो वे जवाब नहीं देते हैं। अधिक सवाल करने पर कहते है- जो भी बताएंगी कलेक्टर मैडम ही बताएंगी। अब क्या है बच्ची को निकालने का प्लान? जानकारी के अनुसार बच्ची को निकालने के लिए एनडीआरएफ के 6 जवानों की तीन टीमें में बनाई गई हैं। एक बार में दो जवान को 170 फीट गहरे गड्ढे में उतरेंगे और बोरवेल तक सीधी खुदाई करेंगे। दो जवानों की एक टीम करीब 20-25 मिनट अंदर रहेगी, फिर उन्हें बाहर निकालकर दूसरी टीम को नीचे भेजा जाएगा। इसी तरह सुरंग बनाने का सिलसिला जारी रहेगा। अगर, नीचे खुदाई में पत्थर मिलता है तो ड्रिल मशीन समेत अन्य उपकरणों का प्रयोग किया जाएगा।

फरीदाबाद से आई खास मशीन, राजस्थान-जयपुर में 40 घंटे बाद भी 700 फिट गहरे बोरवेल में चेतना

जयपुर। कोटपूतली की बढ़ियाली ढाणी में बोरवेल में फंसी चेतना को निकालने के लिए पूरा अमला मौके पर है। कई अफसर तो ऐसे हैं जो दो दिन से मौके पर ही हैं, लेकिन चिंता की बात यह है कि अब तक चेतना को निकाला नहीं जा सका है। लभगग 40 से ज्यादा घंटे बीत चुके हैं ऑपरेशन चलते हुए। ऐसे में अब प्रशासन ने नए प्लान पर काम शुरू कर दिया है। बता दें कि एनडीआरएफ-एसडीआरएफ की टीमें मौके पर जुटी हुई हैं। वहीं दूसरी ओर फरीदाबाद से पाइलिंग मशीन बुलाई गई है। जेसीबी से बोरवेल से 15 फीट की दूरी पर मिट्टी खोदने का काम भी शुरू हो गया है। मौके पर हाइड्रो क्रेन भी बुलाई गई है। मंगलवार को चेतना को बचाने के लिए ‘जे’ हुक काम में लिया गया। कुछ सफलता मिली थी और बच्ची को थोड़ी ऊंचाई तक खींचा भी गया था, लेकिन कैमरे के बार-बार खराब हो जाने के चलते रेस्क्यू ऑपरेशन में कठिनाई आई। घटनास्थल पर तेज धुंध के कारण विजिबिलिटी बहुत कम देर रात लगातार जेसीबी मशीनों द्वारा पीइलिंग मशीन के लिए प्लेटफार्म बनाने का कार्य जारी था। NDRF व SDRF सिविल डिफेंस के जवान लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे हुए हैं। घटनास्थल से कुछ दूरी पर जेसीबी मशीन के द्वारा लगभग 15-20 फुट गहरा खड्डा खोदा मशीन को लगाने के लिए प्लेटफार्म बनाया गया है, हालांकि सुबह से घटनास्थल पर तेज धुंध के कारण विजिबिलिटी बहुत कम हो गई है, लेकिन पुलिस प्रशासन और बचाव दल का हौसला बरकरार है। बता दें कि मशीन देर रात घटनास्थल पर पहुंची थी। मशीन पहुंचने के बाद लगातार खुदाई का कार्य जारी है।  

एक और कैमरा NDRF की टीम ने डाला, राजस्थान-जयपुर में 18 घंटे से बोरवेल में मौत के गड्ढे में चेतना

जयपुर। 18 घंटे से बोरवेल में भूखी प्यासी 3 साल की चेतना को बाहर निकलने के प्रयास और तेज हो गया है। बता दें बोरवेल 700 फीट है और चेतना 150 फीट पर फंसी हुई है। जल्द ही दूसरा प्रयास शुरू होगा। जगह कम होने के कारण खाद्य सामग्री नीचे भेजने में प्रशासन फेल हो गया। रिंग रोड और अंब्रेला टेक्नोलॉजी से बच्ची को निकालने का प्रयास किया जा रहा है। देर रात करीब 1 बजे पहला प्रयास असफल रहा। रिंग बच्ची के कपड़ों में फंसने के बाद बच्ची को बाहर निकाला जाएगा। एनडीआरएफ के सीनियर कमांडेंट योगेश मीणा ने बताया कि रिंग बच्ची को फंसाने के लिए बोरवेल में डाली गई थी। बच्ची के कपड़ों में रिंग उलझ गया था। उस रिंग से बच्ची की बॉडी पर पकड़ नहीं बन पाई। ऐसे में आदि दूरी में पकड़ छूटने के डर से रिंग को दोबारा बाहर निकाल लिया गया। ग्रामीणों को उम्मीद सही-सलामत निकलेगी चेतना घटनास्थल पर काफी संख्या में ग्रामीणों की भीड़ है। सभी लोग बच्ची के सकुशल बाहर आने का इंतजार कर रहे हैं। रेस्क्यू टीम लगातार बच्ची को बाहर निकालने का प्रयास कर रही है। वहीं जिला प्रशासन और पुलिस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। सरियों की सहायता से बोरवेल में उतारी गई रिंग बांदीकुई व दौसा में बोरवेल में गिरने वालों को बाहर निकालने का रेस्क्यू ऑपरेशन करने वाले तीन युवकों को भी एसडीआरएफ की टीम अपने साथ लेकर पहुंची है। टीम में शामिल जगमाल, नाथूराम व बलराम को बोरवेल में गिरी मोटर बाहर निकालने का अनुभव है। इन्होंने लोहे की रिंग बनाकर सरियों की सहायता से रिंग को नीचे बोरवेल में उतारा है। दो कोशिश नाकाम, अब तीसरी से उम्मीद सोमवार रात करीब 1 बजे रिंग रॉड और अंब्रेला टेक्नीक से बच्ची को निकालने का पहला प्रयास असफल रहा। एनडीआरएफ के सीनियर कमांडेंट योगेश मीणा ने बताया- जो रिंग बच्ची को फंसाने के लिए बोरवेल में फंसाने के लिए अंदर डाला था। वो बच्ची के कपड़ों मे उलझ गया था। उस रिंग से बच्ची की बॉडी पर पकड़ नहीं बन पाई। ऐसे में आधी दूरी में पकड़ छूटने के डर से रिंग को दोबारा बाहर निकाला गया है। अब रिंग को सही कर दोबारा डालेंगे। मंगलवार सुबह प्रशासनिक अधिकारियों ने बच्ची के दादा व परिवार के अन्य लोगों को रेस्क्यू से जुड़ी जानकारी दी। राजस्थान पुलिस की एडवायजरी प्रदेश में जगह जगह खुले पड़े सूखे बोरवेल, सूखे कुंए लोगों के लिए खतरे का सबब बने हुए हैं। इन गड्ढों में गिरकर बच्चे ही नहीं बड़े भी गंभीर दुर्घटना का शिकार हो सकते हैं। कहीं भी खुला बोरवेल या सूखा कुंआ दिखाई दे तो एसडीआरएफ हेल्पलाइन 0141-2759903 या 8764873114 पर सूचित करें।… pic.twitter.com/LmktYeSkEt — Rajasthan Police (@PoliceRajasthan) December 23, 2024

18 घंटे से लड़ रहा मौत से जंग, राजस्थान-दौसा में 150 फीट गहरे बोरवेल में गिरा मासूम आर्यन

दौसा. 5 साल का छोटा सा आर्यन इस वक्त जिंदगी और मौत के बीच की लड़ाई लड़ रहा है, 150 फीट गहराई में आर्यन जिस तरह डरा सहमा बैठा है, उसका अंदाजा आप लगा सकते होंगे की कैसे घुटन भरी छोटी सी जगह में वह हिम्मत दिखा रहा है और सांसे ले रहा है। परिजनों को पल पल भारी हो रहा है वो पूछ रहे हैं हमारा बच्चा कब बाहर आएगा। बच्चे पर लगातार रखी जा रही है नजर जिला परिषद के सीओ नरेंद्र कुमार मीणा का कहना है कि कल दोपहर बाद बच्चे के बोरवेल में गिरने की खबर मिलने के बाद तुरंत बचाव कार्य शुरू कर दिए गए हैं। सीओ का कहना है कि बच्चे पर कैमरे से लगातार नजर रखी जा रही है। सीओ का कहना है कि रेस्क्यू के लिए टीमें लगातार प्रयास कर रही हैं लेकिन बच्चा बीच में फंसा हुआ है और उसके नीचे पानी है, इसलिए रेस्क्यू टीमों ने बच्चे के नीचे जाल लगाया है ताकि किसी भी दुर्घटना से बचा जा सके।  सीओ का कहना है कि एनडीआरएफ की टीमें लगातार लगी हुई हैं और बच्चे को जल्द से जल्द बाहर लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। मौके पर हैं एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें जिले के कालीखाड़ गांव में चल रहे इस ऑपरेशन में जयपुर से एसडीआरएफ, अजमेर से पहुंची एनडीआरएफ की टीमों के साथ दूसरे एक्सपर्ट भी मौके पर हैं। सोमवार शाम करीब 4 बजे शुरू हुए इस ऑपरेशन में टीमों को दो सफलता हाथ लगी हैं। इनमें एक तो यह कि बच्चे की मूवमेंट कैमरे पर देख पाने में वे सफल रही हैं। दूसरा बच्चे ने रस्सी पकड़ने की भी कोशिश की है। एनडीआरएफ देसी जुगाड़ से भी बच्चे को निकालने में जुटी है। जानकारी के अनुसार 5 साल का आर्यन अपनी मां के सामने ही घर से करीब 100 फीट दूर बोरवेल में गिर गया था। ये बोरवेल परिवार ने करीब 3 साल पहले खुदवाया था, लेकिन काम नहीं आ रहा था। रेस्क्यू ऑपरेशन जारी दौसा जिले के कालीखाड गांव में एक दर्दनाक हादसा हुआ है। सोमवार दोपहर करीब साढ़े तीन बजे आर्यन नाम का एक बच्चा बोरवेल में गिर गया। तब से रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। NDRF की टीम समेत कई लोग बच्चे को बचाने में जुटे हैं। बोरवेल के पास एक गड्ढा भी खोदा जा रहा है। बच्चे को सीधे बोरवेल से निकालने की भी कोशिश हो रही है।

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