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MP में सफर होगा आसान जल्द शुरू होगी सरकारी बस सेवा, इंदौर व उज्जैन जिलों में सर्वे हुआ पूरा

इंदौर / उज्जैन लोक परिवहन सेवाओं को जमीन पर उतारने से जुड़े पहले चरण के सर्वे का काम परिवहन विभाग ने इंदौर व उज्जैन संभाग में लगभग पूरा कर लिया है। अब यहां चिह्नित किए गए मार्गों को फाइनल किया जा रहा है। उधर आठ परिवहन कंपनियों के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मार्गों पर रिहर्सल पूरी होते व कंपनियों के अस्तित्व में आते ही टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। प्रयास है कि बारिश से पहले इंदौर व उज्जैन जिले की सड़कों पर लोक परिवहन सेवाओं से अनुबंधित यात्री बसें दौड़ने लगें। बसों(MP Government bus) के रूट को चिह्नित करने के लिए अगले चरण के सर्वे का काम जबलपुर व सागर संभागों के जिलों में शुरू होगा। यह मई के अंत तक शुरू हो जाएगा। इसके लिए एजेंसी तय कर दी है। इन संभागों में सर्वे का फोकस सबसे पहले परिवहन सेवा विहीन क्षेत्रों पर होगा। अलग-अलग चरणों में किए जा रहे काम 1. परिवहन विभाग अब तक सीमित क्षेत्रों में ही सर्वे करा रहा था, अब इसका दायरा बढ़ा दिया है। 2. कंपनी एक्ट के तहत कंपनियों के गठन की प्रक्रिया का जिम्मा अलग अफसरों को सौंपा है। 3. निष्क्रिय पड़े सड़क परिवहन निगम की संपत्तियों को नए सिरे से खंगाला जा रहा है, ताकि मुख्यमंत्री सुगम लोक परिवहन सेवाओं के तहत उपयोगी बनाया जा सके। 4. कंपनियों के लिए ऑर्गनाइजेशन स्ट्रक्चर का खाका तैयार करेंगे। 5. सुझाव लेने संबंधी प्रक्रिया लगातार जारी है, ताकि नई व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सके। 6. सर्वे में बस ऑपरेटरों से फीडबैक लिया जा रहा है, यात्रियों से उनकी राय पूछी जा रही है ताकि जिन मार्गों को चिह्नित किया जा रहा है या किया जाना है उन पर वस्तु स्थिति साफ हो सके। 7. इसी पूरी व्यवस्था में जिला स्तरीय समितियों का गठन होना है, इसकी तैयारी शुरू कर दी है। 8. सिटी ट्रांसपोर्ट कंपनियों की चल-अचल संपति, नई गठित की जाने वाली कंपनियों को दी जाएगी। इस दिशा में भी काम शुरू किया है। 9. मौजूदा सिटी बस कंपनियों के कार्यालय भवन का उपयोग नवीन सहायक कंपनियां करेंगी। जिला स्तर पर समितियां होंगी, समन्वयक कलेक्टर होंगे, सांसद, विधायकगण, महापौर, नगर पालिका, जिला पंचायत, नगर परिषद, जनपद पंचायत के अध्यक्ष, आयुक्त नगर निगम, जिला व जनपद पंचायतों के सीईओ, नपा के सीएमओ, पीडब्ल्यूडी के कार्यपालन यंत्री, जिला परियोजना अधिकारी, जिला शहरी विकास अभिकरण व कार्यपालन यंत्री, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा रह सकेंगे। समितियों का गठन इसलिए पहले असल में जिला स्तरीय निगरानी समितियों को यात्रियों की सुविधाओं का ध्यान रखना होगा। जिसमें मुख्य काम अभी मार्गों को फाइनल करने से जुड़ा है। इन मार्गों में बदलाव भी संभव है, लेकिन यह बात का विषय है। इसके अलावा स्टापेज, बस फ्रीक्वेंसी, आईटी प्लेटफार्म का सुचारु संचालन, साधारण एवं ग्रामीण मार्गों पर बस स्टॉप, चार्जिंग स्टेशन के निर्माण संबंधी सुझाव। 6 शहरों में दौड़ेगी ई-बस, हर किलोमीटर पर इतना देना होगा किराया  प्रदेश के 6 शहरों में जल्द ईलेक्ट्रिक बस चलने वाली है. बस सर्विस की शुरुआत सितंबर-अक्टूबर में हो सकती है. दरअसल, ये केंद्र सरकार की योजना है. इस प्रोजेक्ट में देश के 88 शहरों में ई बसें चलाई जानी है. इसमें से 582 बसें मध्य प्रदेश के खाते में आई है. अब जल्द इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन और सागर में इलेक्ट्रिक बसें चलेंगी. ये बस पॉल्यूशन को काफी कंट्रोल करेगी. इसकी साथ ही ग्रीन परिवहन को भी बढ़ावा देगी. मिली जानकारी के मुताबिक इस योजना में 10 नए डिपो, चार्जिंग स्टेशन और नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड जैसी मॉर्डन सुविधाएं मिलेंगी. इसमें 472 मिडी बसें होंगी. इनमें से 26 यात्री सफर कर सकेंगे, तो वहीं 110 मिनी बसें 21 सीटर होंगी. यात्रियों को 2 रुपये प्रति किलोमीटर का किराया देना होगा. केंद्र सरकार से मिलेगी सब्सिडी ई बसों के संचालन के लिए केंद्र सरकार से भी सब्सिडी मिलेगी. इसके लिए सरकार 58.14 रुपये प्रति किलोमीटर का खर्च करेगी, जिसमें से 22 रुपये केंद्र सरकार देगी. ई बसों का संचालन ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर मॉडल पर होगा. ऐसे में यात्रियों को 2 रुपये प्रति किमी का किराया देना होगा, जो सिटी बस सर्विस की तुलना में काफी सस्ती है.

राजधानी भोपाल में 100 इलेक्ट्रिक बसें चलाने की तैयारी, मैनिट के एक्सपर्ट ने तैयार किया रूट प्लान

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 100 इलेक्ट्रिक बसें चलाने की तैयारी है। भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड और मैनिट के एक्सपर्ट हैदराबाद की तर्ज पर भोपाल में पब्लिक ट्रांसपोर्ट का मॉडल तैयार कर रहे हैं। पिछले दिनों हैदराबाद से लाकर कुछ बसों को ट्रॉयल किया गया।   24 लाख आबादी के बीच 200 बसें करीब 24 लाख की आबादी वाले भोपाल शहर में अभी 200 लो लोर बसें संचालित हैं। इनके अलावा कुछ बसें स्थानीय ऑपरेटर्स संचालित करते हैं, इन बसों में क्षमता से 3 गुना ज्यादा यात्री सफर करते हैं। इलेक्ट्रिक बसों के सीमित संख्या में चलते यह समस्या और बढ़ सकती है। अरेरा हिल्स, राज भवन और न्यू मार्केट मैनिट के विशेषज्ञ यह भी सुनिश्चित कर रहे हैं कि भोपाल के पहाड़ी इलाकों में ओवरलोडेड बसों के संचालन में कोई समस्या न हो। खासकर, अरेरा हिल्स, राज भवन और न्यू मार्केट जैसे चढ़ाई वाले रूट पर इलेक्ट्रिक बसों को आने जाने में परेशनी न हो।    मैनिट के विशेषज्ञों की टीम शहर के पहाड़ी इलाकों के हिसाब से इलेक्ट्रिक बसों में यात्रियों की पूरी संख्या भरने के बाद लोडेड व्हीकल को पहाड़ी की ऊंचाई पर चलने योग्य रूट का चयन करेगी। अरेरा हिल्स, राज भवन, न्यू मार्केट जैसे घाट क्षेत्र में इलेक्ट्रिक बसों ने बेहतर प्रदर्शन किया था। भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड अब इस बात को सुनिश्चित करना चाह रहा है की दोगुनी संख्या में यात्रियों को लेकर चलने के दौरान इन बसों के संचालन में किसी प्रकार की कोई असुविधा नहीं हो। इसलिए परीक्षण जरूरी भोपाल शहर 24 लाख की आबादी वाला शहर है। इसके मुकाबले भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड एकमात्र ऐसी संस्था है जो सस्ता पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम उपलब्ध कराती है। शहर में बीसीएलएल के अलग-अलग ठेकेदार 200 लो लोर बसों को संचालित करते हैं जिनमें क्षमता से तीन गुना तक ज्यादा यात्री सफर करते हैं। इलेक्ट्रिक बसों के सीमित संख्या में चलने के बाद भी यही हश्र हो सकता है। बीसीएलएल चला रही लो फ्लोर बसें भोपाल में लो फ्लोर बसों के संचालन की जिम्मेदारी संभाल रही कंपनी बीसीएलएल के डायरेक्टर मनोज राठौर ने ई-बसों के संचालन की तैयारियां की जा रही हैं। विषय विशेषज्ञों से भी इसके लिए सलाह ली जा रही है। EV हब बनेंगे इंदौर-भोपाल मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भोपाल और इंदौर को ईवी (इलेक्ट्रिक वाहन) हब के रूप में विकासित करने का ऐलान किया है। इन शहरों में ई-रिक्शा और ई-बसों के संचालन पर जोर दिया जा रहा है। आम नागरिकों को भी ई-कार और ई-बाइक खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इनके लिए चार्जिंग स्टेशन सहित अन्य सुविधाएं मुहैया कराए जाने का प्रयास जारी है।

पीएम ई-बस योजना के तहत प्रदेश के 6 शहरों इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन और सागर में ई-बसें चलाई जाएंगी

भोपाल  मध्यप्रदेश के छह शहरों में 582 ई-बसों(E-Bus) का संचालन जल्द शुरू करने की तैयारी चल रही है। लेकिन इन बसों का संचालन नगरीय निकायों को महंगा पड़ सकता है क्योंकि इनके संचालन के लिए जीसीसी यानी ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रेक्ट मॉडल अपनाया गया है। इसमें इलेक्ट्रिक बस, ड्राइवर, कंडक्टर और मेंटेनेंस की जिम्मेदारी संबंधित कंपनी की ही रहेगी। सरकार केवल प्रति किलोमीटर के हिसाब से उसे भुगतान करेगी। प्रतिदिन न्यूनतम 180 किलोमीटर का भुगतान किया जाएगा। इंदौर में अभी एक एजेंसी 65 रुपए प्रति किलोमीटर की दर से ई-बसें संचालित कर रही है।  भोपाल की सड़कों पर अगले छह महीनों में दो बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। पहला बदलाव जुलाई तक भोपाल मेट्रो की शुरुआत है। दूसरा बदलाव शहर की बसों के बेड़े में इलेक्ट्रिक बसों का जुड़ना है। पीएम ई-बस योजना के तहत राज्य के 6 शहरों (भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन और सागर) में पीपीपी मॉडल पर 552 शहरी ई-बसें चलाई जाएंगी। इसे पिछले फरवरी में मंजूरी मिली थी। शहरी विकास और आवास विभाग के अतिरिक्त आयुक्त डॉ. परीक्षित जाडे ने हमारे सहयोगी टीओआई को बताया कि हम उम्मीद करते हैं कि पीएम ई-बस योजना के तहत ये इंट्रासिटी बसें 2025 के मध्य या अंत तक शुरू हो जाएंगी। इस बदलाव का उद्देश्य हजारों छात्रों और अन्य सार्वजनिक परिवहन उपयोगकर्ताओं के लिए सार्वजनिक परिवहन के वित्तीय बोझ को कम करना है। महामारी की समाप्ति के बाद से ये लोग सब्सिडी वाले बस पास का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं।  यदि नई ई-बसों का कॉन्ट्रेक्ट 60 रुपए प्रति किलोमीटर में होता है तो एक बस को 180 किमी का प्रतिदिन 10800 रुपए का भुगतान होगा, चाहे उसमें सवारियां बैठे या नहीं। इस प्रकार बसों का संचालन करने वाली एजेंसी को 582 बसों का प्रतिदिन 62 लाख 85 हजार 600 रुपए मिलेगा। एक महीने में यह राशि 18 करोड़ 85 लाख 68 हजार रुपए होगी। टेंडर जारी पीएम ई-बस योजना के तहत प्रदेश के 6 शहरों इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन और सागर में ई-बसें चलाई जाएंगी। इसके लिए कंपनी की तलाश शुरू हो गई है। रेट तय करने के लिए सरकार ने टेंडर जारी किया है। जो कंपनी सबसे कम रेट देगी उसे संचालन का काम मिलेगा। यह सुविधा तीन माह के अंदर शुरू करने की तैयारी की जा रही है। कुल 582 ई-बसें चलेंगी। इनमें से 472 बसें नौ मीटर वाली होंगी जिनमें लगभग 32 सीट होंगी। जबकि 110 बसें सात मीटर वाली होंगी जो 21 सीटर होंगी। कहां कितनी ई-बसें चलेंगी     भोपाल – 100     इंदौर – 150     जबलपुर – 100     उज्जैन – 100     ग्वालियर – 100     सागर – 32 टिकट एजेंसी का जिम्मा निकाय का इन बसों के चार्जिंग की व्यवस्था भी मिलजुलकर की जा रही है। चार्जिंग स्टेशन और डिपो राज्य सरकार बनवाएगी। इसकी 60 फीसदी राशि केन्द्र और 40 प्रतिशत राशि राज्य को देना होगी। सरकार सिर्फ जमीन और इंफ्रा विकसित करेगी। चार्जिंग गन बसों का संचालन करने वाली कंपनी ही लगाएगी और बिजली का बिल भी कंपनी ही चुकाएगी। ऐसे 11 चार्जिंग स्टेशन बनाए जा रहे हैं। जबकि टिकटिंग एजेंसी संबंधित निकाय द्वारा तय की जाएगी। टिकट का पैसा निकाय के पास जाएगा, इसी से बसों का भुगतान होगा। केंद्र 12 साल तक राशि देगी बसों के संचालन के लिए प्रति किलोमीटर के अनुसार भुगतान होगा। इसके लिए केंद्र सरकार प्रति किलोमीटर के अनुसार 22 रुपए देगी। केंद्र यह राशि 2037 तक यानी 12 साल तक देगी। जो राशि बचेगी वह किराए से कवर होगी। जहां किराए से कवर नहीं हो पाएगी उसका भुगतान संबंधित नगरीय निकाय को करना होगा। तीन महीने का अग्रिम भुगतान केंद्र ने इसकी भी पुख्ता व्यवस्था की है कि ई-बसों को नियमित भुगतान होता रहे। इसके लिए बैंक में एक एस्क्रो अकाउंट खुलवाया जाएगा। इसमें राज्य सरकार को कम से कम तीन माह का एडवांस पेमेंट जमा कराना होगा। यदि निकाय भुगतान करने में विफल रहते हैं तो इस अकाउंट में से संचालनकर्ता कंपनी को भुगतान हो जाएगा। बीसीएलएल को मिलेंगी 100 ई-बसें सूत्रों के अनुसार एमपी यूएडीडी यात्रियों की यात्रा लागत को सब्सिडी देने के लिए एक स्थिरता मॉडल पर काम कर रहा है। इसके साथ ही बेड़े की व्यवहार्यता को भी बनाए रखा जाएगा। भोपाल नगर निगम की सहायक कंपनी भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड आर्थिक रूप से संघर्ष कर रही है। यह राज्य सरकार के समर्थन और वायबिलिटी गैप फंडिंग पर निर्भर है। बीसीएलएल को इस योजना के तहत 100 ई-बसें मिलेंगी। एमपी नगर में 5000 से ज्यादा छात्रों का आना जाना महामारी से पहले भोपाल में 35,000 से अधिक बस यात्री मेयर के बस पास से असीमित यात्रा का लाभ उठाते थे। मिसरोद से एमपी नगर आने-जाने वाले जेईई कोचिंग के छात्र सार्थक और हर्षित ने इस लाभ का अनुभव कभी नहीं किया। एमपी नगर में लगभग 5,000 छात्र 5 किमी के दायरे में कोचिंग क्लासेस आते-जाते हैं। ये छात्र प्रति माह यात्रा पर अनुमानित 35 लाख रुपए खर्च करते हैं। प्रति छात्र औसतन 25 रुपये प्रतिदिन खर्च होता है। महामारी से पहले इस्तेमाल किए जाने वाले मेयर पास के समान एक स्टूडेंट बस पास इन यात्रा लागतों को आधे से भी कम कर सकता है। स्टूडेंट्स के लिए बड़ी सौगात हर्षित ने कहा कि अगर स्टूडेंट पास लागू होता है, तो केवल कोचिंग क्लासेस के लिए छात्रों की बचत 50% से अधिक हो जाएगी। जिन छात्राओं की कोचिंग क्लासेस देर शाम को खत्म होती हैं, उन्हें परिवहन पर अधिक खर्च करना पड़ता है। जल्दी आने-जाने के लिए ई-रिक्शा लेने से खर्च तीन गुना बढ़ जाता है। इससे आर्थिक तंगी बढ़ जाती है। भोपाल की मेयर मालती राय से संपर्क करने पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

मध्य प्रदेश में शहर से लेकर गांव तक चलेंगी बसें, पीपीपी मॉडल पर होगा संचालन

भोपाल  एमपी में 20 साल बाद आखिरकार सरकारी लोक परिवहन सेवा को जमीन पर उतारने का निर्णय हो ही गया। 6 से 8 महीने में यह सेवा शुरू हो जाएगी। मॉडल बदला हुआ होगा। बाबूलाल गौर के मुख्यमंत्री रहते समय राज्य परिवहन निगम की सरकारी बसें दौड़ती थी। अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यकाल में सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) के तहत निजी ऑपरेटरों की बसें दौड़ेंगी, पर इन पर पूरा नियंत्रण सरकार का होगा।ये बसें प्रदेश में शहर से लेकर गांव तक पीपीपी मॉडल पर चलाई जाएंगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री सुगम लोक परिवहन सेवा के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। लोक परिवहन सेवा फिर शुरू करने का निर्णय जनता के लिए पत्रिका महाअभियान की बड़ी जीत है। पत्रिका ने लोक परिवहन सेवा नहीं होने से आमजन को नुकसान का मामला प्रमुखता से उठाया था। बनाई जाएगी योजना होल्डिंग कंपनी रूट व बस चलाने के लिए सर्वे, योजना बनाएगी। इसके साथ ऑपरेटर्स को परमिट दिलाना, आइटी प्लेटफॉर्म, कंट्रोल कमांड सेंटर तैयार करना, ई-टिकट, मोबाइल एप से बसों की ट्रेकिंग, कैशलेस, टेपऑन-टेपऑफ सुविधा देना, ऐप से पैसेंजर इन्फोर्मेशन सिस्टम विकसित कराना भी होल्डिंग कंपनी का कार्य होगा। अनुबंधित ऑपरेटर के लिए एप, वीडियो ऑडिट सॉफ्टवेयर, फील्ड ऑडिट एप, एमआईएस व डैशबोर्ड की सुविधा देना, ऑपरेटर स्टॉफ का प्रशिक्षण दिलवाना। इसके साथ वे राज्य एवं क्षेत्रीय सहायक कंपनी के लिए कंट्रोल एवं कमांड सेंटर सॉफ्टवेयर, बस, ऑटो, टैक्सी, मेट्रो के लिए बुकिंग प्लेटफॉर्म की सुविधा ऑनलाइन यात्री बुकिंग सुविधा, यात्री हेल्प डेस्क, कार्यालयों में ऑपरेशन डेशबोर्ड, स्टाफ की ट्रेनिंग की सुविधा देंगी। 101.20 करोड़ दिए, कंपनी गठन को मंजूरी 8 कंपनियां मिलकर सेवा शुरू करेंगी। एक होल्डिंग और 7 संभागीय कंपनियों होंगी। सेवा शुरू करने को 101.20 करोड़ रुपए और राज्य स्तरीय होल्डिंग कंपनी गठन की स्वीकृति दी। सार्वजनिक परिवहन के लिए 20 शहरों में पंजीकृत 16 कंपनियां कार्यरत हैं। इन्हें 7 संभागीय कंपनियों में मर्ज करने और इनमें राज्य स्तरीय कंपनी बनाने की मंजूरी दी। रीवा एवं ग्वालियर की वर्तमान कंपनी बंद कर नई बनाने, संभागीय मुख्यालयों में सिटी बस ट्रांसपोर्ट कंपनी में संशोधन और जिला स्तरीय यात्री परिवहन समिति गठन के प्रस्तावों को भी स्वीकृति दी। मोटरयान नियम 1994 में भी संशोधन और नए प्रावधान की स्वीकृति दी। माल ढोने की सुविधा भी मिलेगी सरकार बसें नहीं खरीदेगी: नई लोक परिवहन सेवा के लिए सरकार एक भी नई बसें नहीं खरीदेंगी। पीपीपी मॉडल: हर स्तर पर लागू होगा स्तर पर पीपीपी मॉडल होगा, जो समय पर बस चलाने, उन्हें डिपो की सुविधा देने, ऑनलाइन व्यवस्था में भ्रष्टाचार व गड़बड़ी रोकने और टिकटिंग व्यवस्था जैसे कामों पर लागू होगा। किराए पर नियंत्रणः निजी ऑपरेटर्स की बसों की तुलना में कम किराया लगेगा। यह सरकार तय करेगी। माल लेकर चल सकेंगे यात्री: बसों का एक हिस्सा यात्रियों के माल अर्थात सामग्री और डाक परिवहन के लिए आरक्षित रहेगा। ताकि किसी रूट पर यात्री कम मिले तो माल परिवहन कर उसकी भरपाई की जा सके। 5.बस चलाने वाले टिकट नहीं काटेंगे: बस ऑपरेटर टिकट नहीं काट सकेंगे, इसके लिए ऑनलाइन व्यवस्था होगी। इसके लिए अलग कंपनियों से अनुबंध किया जाएगा। इसके लिए अलग से डैशबोर्ड बनाया जाएगा। 2005 में सड़क परिवहन निगम में की गई थी तालाबंदी गौरतलब है कि भाजपा की बाबूलाल गौर सरकार ने ही वर्ष 2005 में साढ़े चार सौ करोड़ के घाटे में चल रहे राज्य सड़क परिवहन निगम में तालाबंदी की थी, तब से प्रदेश में परिवहन सेवाएं ठप हैं। केवल मुनाफे के मार्ग पर ही निजी बसें चलाई जा रही हैं। नई सेवाएं पहले आदिवासी अंचलों से आरंभ होगी। इस बार मॉडल बदला है परिवहन सेवा को पिछली सरकारों ने बंद कर दिया था, हमने परिवहन नीति बनाई है और इस बार मॉडल बदला है। हम पीपीपी मॉडल पर बसें चलवाएंगे। इसके लिए जिला स्तरीय समिति गठित की जाएगी। इसके समन्वयक कलेक्टर रहेंगे। समिति में जिले के सांसद, समस्त विधायकगण, महापौर, अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारी रहेंगे। यह समिति बसों के संचालन की मॉनिटरिंग, संचालन, साधारण एवं ग्रामीण मार्गों पर बस स्टाप, चार्जिंग स्टेशन के निर्माण संबंधी सुझाव के साथ जिले के बस ऑपरेटर्स के मध्य आवश्यक समन्वय का कार्य करेगी। बस का उपयोग कार्गो सेवा के लिए भी किया जाएगा, नीति में इसका प्रविधान किया जाएगा। राज्य परिवहन निगम की संपत्तियां कंपनी के आधिपत्य में रहेगी। यात्रियों एवं बस ऑपरेटर्स के लिए एप और कंपनी की मॉनीटरिंग के लिए होगा डैशबोर्ड बसों पर प्रभावी नियंत्रण सरकार का होगा। यात्रियों एवं बस ऑपरेटर्स के लिए एप और कंपनी की मॉनीटरिंग के लिए एक डैशबोर्ड भी होगा। कंपनी के कार्यालयों में कंट्रोल एवं कमांड सेंटर बनाए जाएंगे। यात्रियों को मोबाइल एप से ई-टिकिट, सुविधा मिलेगी। इससे बसों की ट्रेकिंग, आक्युपेंसी तथा यात्रा प्लानिंग की जा सकेगी। पैसेंजर इन्फोर्मेशन सिस्टम की स्थापना भी बस स्टैंड, यात्री बसों पर रीयल टाइम बेसिस पर की जा सकती है। यह जानकारी मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से सीधे यात्रियों को मोबाइल पर मुहैया कराई जाएगी। यात्री बसों के संचालन की त्रि-स्तरीय होगी मॉनीटरिंग प्रदेश में यात्री बसों के संचालन की त्रि-स्तरीय मॉनीटरिंग की जाएगी। इसके लिए प्रदेश मुख्यालय स्तर पर एक राज्यस्तरीय होल्डिंग कंपनी गठित की जाएगी। प्रदेश के सात बड़े संभागों (भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, सागर एवं रीवा) में सात क्षेत्रीय सहायक कंपनियां भी गठित की जाएगी। इसी उद्देश्य से प्रदेश के सभी जिलों में जिला स्तरीय यात्री परिवहन समिति गठित भी की जाएंगी। रीवा एवं ग्वालियर के लिए वर्तमान प्रचलित कंपनी को बंद कर नई क्षेत्रीय कंपनी गठित की जाएगी। सिटी ट्रांसपोर्ट कंपनियों की संपत्ति ट्रांसफर -सिटी ट्रांसपोर्ट कंपनियों की चल-अचल संपति नई कंपनियों को देंगे। निगम, प्राधिकरण की निधि से तैयार बस टर्मिनल, बस स्टैंड, बस स्टॉप होल्डिंग कंपनी के अधीन होंगे। -मौजूदा सिटी बस कंपनियों के कार्यालय भवन का उपयोग नवीन सहायक कंपनियां करेंगी। -इनके कार्यालय की अचल सपंतियां का मूल्यांकन अलग से होगा, राशि की प्रतिपूर्ति परिवहन विभाग करेगा। -होल्डिंग कंपनी आइटी प्लेटफॉर्म स्थापित कर अधिसूचित रुट अनुसार निजी बस ऑपरेटरों से अनुबंधित करेगा। जिले में बनेगी समिति, कलेक्टर समन्वयक जिला स्तर पर समितियां होंगी, समन्वयक कलेक्टर होंगे। इनमें सांसद, विधायक, महापौर, नगर पालिका, जिपं, नप, जपं के अध्यक्ष, आयुक्त नगर निगम, जिला व जपं सीईओ, नपा … Read more

मध्य प्रदेश के पांच तीर्थयात्रियों की मौत, गुजरात में बस खाई में गिरी

अहमदाबाद/डांग। गुजरात में एक बड़ा हादसा हुआ है। दरअसल श्रद्धालुओं को लेकर जा रही एक बस खाई में गिर गई, जिसमें पांच श्रद्धालुओं की मौत हो गई। हादसे में कई लोग घायल हुए हैं। घटना गुजरात के डांग की है। पुलिस ने बताया कि मरने वाले लोग मध्य प्रदेश के निवासी थे। बचाव और राहत कार्य पूरा हो चुका है। पुलिस ने बताया कि गुजरात के डांग जिले में रविवार सुबह तीर्थयात्रियों को ले जा रही एक निजी बस के गहरी खाई में गिर जाने से पांच लोगों की मौत हो गई और 17 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। प्रभारी पुलिस अधीक्षक एसजी पाटिल ने बताया कि दुर्घटना सुबह करीब 4.15 बजे हुई, जब सापुतारा हिल स्टेशन के पास बस के चालक ने बस पर से नियंत्रण खो दिया। उन्होंने बताया कि बस में 48 तीर्थयात्री सवार थे और हादसे में बस क्रैश बैरियर को तोड़ते हुए करीब 35 फीट गहरी खाई में गिर गई। पुलिस ने बताया कि बस महाराष्ट्र के त्र्यंबकेश्वर से श्रद्धालुओं को लेकर गुजरात के द्वारका जा रही थी। पुलिस ने बताया कि बस में श्रद्धालु मध्य प्रदेश के गुना, शिवपुरी और अशोक नगर जिलों के थे। अधिकारी ने बताया कि हादसे में मरने वाले पांच लोगों में से दो महिलाएं और तीन पुरुष हैं। इन पांचों की मौके पर ही मौत हो गई। घायलों को आहवा के एक सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

प्रयागराज से सूरत जा रही बस की पुल से टकराई, हादसे में 2 की मौत, 5 घायल

 रीवा प्रशासन की तमाम सख्तियों और ट्रैफिक डिपार्टमेंट द्वारा लगातार चलाए जा रहे सड़क सुरक्षा अभियानों के बावजूद मध्य प्रदेश में रफ्तार का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। हालात ये हैं कि, राज्य में हर रोज लगभग सैकड़ों लोग हादसों का शिकार होकर घायल हो रहे हैं तो वहीं दर्जनों अपनी जान गवा रहे हैं। हालिया रफ्तार के कहर में जान जाने का मामला प्रदेश के रीवा शहर से सामने आया है। यहां एक तेज रफ्तार बस की ओवर ब्रिज के पुल से जोरदार टक्कर हो गई। हादसे में दो लोगों की मौत हो गई है, जबकि कई गंभीर रूप से घायल होने की खबर है।  बता दें कि, ये भीषण सड़क हादसा शहर के समान थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बस स्टेंड ओवर ब्रिज का है। यहां रात 01 बजे अजय एयरलाइंस नाम की बस ओवर ब्रिंज के पुल से जा टकराई। बताया जा रहा है कि बस उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से चलकर गुजरात के सूरत की ओर जा रही थी। मामले की जांच में जुटी पुलिस इस भीषण हादसे में बस सवार दो लोगों की मौत हो गई, जबकि 5 से अधिक घायल हुए हैं। घायलों को रीवा के संजय गांधी अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। वहीं, हादसे के बाद बस चालक मौके से फरार हो गया है। फिलहाल, समान थाना पुलिस ने बस जब्त कर मामले की जांच शुरु कर दी है। जानकारी के अनुसार उत्तरप्रदेश के प्रयागराज से सूरत होते हुए अहमदाबाद जाने वाली बस (AR20C0928) देर रात करीब 2 बजे समान ओवर ब्रिज पर ड्राइवर को नींद लगने से बेकाबू होकर डिवाइडर से टकरा गई। हादसे में बस में सवार दो लोगों की मौत हो गई, वहीं 6 यात्री घायल हाे गए है। इसके स्थानीय लोगों की मदद से पुलिस ने घायलों को रीवा के संजय गांधी अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया। टक्कर के बाद रुकी बस स्थानीय लोगों ने बताया कि डिवाइडर से टकराने के बाद बस रुक गई, नहीं तो कोई बड़ा हादसा, हो सकता था। वहीं समान थाना प्रभारी ने विकास कपीस ने बताया कि, हादसे में दो लोगों की मौत हुई है। मृतकों की पहचान की जा रही है। 6 लोग घायल हैं, जिनका इलाज किया जा रहा है। फिलहाल सभी की हालत स्थिर बनी हुई है।

इंदौर में ट्रैफिक सुधार के लिए प्रशासन ने चार बसें की जब्त

 इंदौर इंदौर शहर में यातायात सुगम बनाने के लिए मूसाखेड़ी के पास रिंग रोड पर ट्रैवल एजेंसियों द्वारा अवैध रूप से खड़ी की जा रहीं बसों पर जिला प्रशासन ने कार्रवाई की। मुख्य मार्ग पर खड़ी चार बसों को जब्त किया गया और अवैध रूप से संचालित सात ट्रैवल एजेंसियों के कार्यालय सील किए गए। सात बसों और ट्रैवल एजेंसियों पर चालानी कार्रवाई कर एक लाख से अधिक रुपये जुर्माना वसूला गया। शहर में यातायात सुगम बनाने के लिए फुटपाथ और सड़कों से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई जारी है। जिला प्रशासन, नगर निगम, पुलिस और परिवहन विभाग के द्वारा संयुक्त रूप से शनिवार को मूसाखेडी क्षेत्र में कार्रवाई की गई। एसडीएम ओमनारायण सिंह बड़कुल ने बताया कि सात ट्रैवल एजेंसियों के अवैध रूप से संचालित होना पाए जाने पर कार्यालय सील किया गया, वहीं 18 ट्रैवल एजेंसियों को चेतावनी दी गई हैं। चार बसों को जब्त कर थाने में खड़ा कराया गया और सात बसों पर चालानी कार्रवाई की। 25 बसों को चेतावनी दी गई। इस दौरान सड़क पर अवैध रूप से रखा एक ट्रक सामान जब्त किया गया। कार्रवाई के दौरान एसीपी हिंदू सिंह मुवेल, एआरटीओ राजेश गुप्ता, सूबेदार काजिम हुसैन, यातायात पुलिस की टीम, नगर निगम टीम मौजूद रही। ट्रैवल एजेंसी से वसूला 85 हजार रुपये जुर्माना कार्रवाई के दौरान 85 हजार रुपये जुर्माना ट्रैवल एजेंसियों से वसूला गया। वहीं 22500 रुपये की अन्य चालानी कार्रवाई की गई। कुल एक लाख सात हजार 500 रुपये जुर्माना वसूला गया। कार्रवाई के दौरान अमर ज्योति ट्रैवल्स, बाबा ट्रैवल्स, जय भवानी ट्रैवल्स, ओम साइन ट्रैवल्स, एमआर ट्रैवल्स, चौहान ट्रैवल्स सहित अन्य अवैध रूप से संचालित ट्रैवल्स को सील किया गया है। पार्किंग स्थल से हटाए अवैध निर्माण इंदौर शहर में यातायात मुहिम के तहत सत्यसाईं चौराहा से न्याय नगर तक भी कार्रवाई जारी रही। एसडीएम कल्याणी पाड़े के नेतृत्व में पार्किंग स्थल पर किए गए अवैध निर्माण को हटाया गया। लोगों को पार्किंग को व्यवस्थित करने के लिए समझाइश भी दी गई, ताकि सड़क पर यातायात सुगम हो सके। कार्यवाही के दौरान अपर कलेक्टर ज्योति शर्मा भी मौके पर पहुंची।

दौड़ती बस में ड्राइवर को आया हार्ट अटैक, कंडक्टर ने दिखाई सूझबूझ, चालक को नहीं बचा पाया लेकिन बचाई कई जान

बेंगलुरु कर्नाटक के बेंगलुरु में बीएमटीसी के बस ड्राइवर की हार्ट अटैक से मौत हो गई। बुधवार को करीब 11 बजे ये घटना घटी। ड्राइवर अपने आखिरी रूट पर नेलमंगला से दसनपुरा जा रहा था। 40 वर्षीय ड्राइवर का नाम किरण कुमार था। ये घटना बस के अंदर लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। सीसीटीवी फुटेज में साफ दिख रहा है कि कुमार अचानक आगे की ओर झुके और दिल का दौरा पड़ने से गिर गए। बस का नियंत्रण खो गया और एक और बीएमटीसी बस से टकरा गई। चालक ने बचाई कई यात्रियों की जान बस कंडक्टर ओबलेश ने तुरंत बस पर कंट्रोल कर लिया। उसने बस को सुरक्षित रूप से रोका और सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला। ओबलेश ने कुमार को पास के अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। अधिकारियों ने बताया कि बस सड़क के एक तरफ झुकी हुई थी। टक्कर की चपेट में एक अन्य BMTC बस भी आ गई। ओबलेश ने किसी बड़ी दुर्घटना से पहले बस को तुरंत रोक दिया। बस कंडक्टर की समय की समझ के कारण एक बड़ी दुर्घटना से बच गई। बीएमटीसी ने कही ये बात बीएमटीसी ने एक बयान में कहा कि हमें बहुत दुख है कि 6 नवंबर को डिपो 40 के ड्राइवर किरण कुमार का अचानक दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। बीएमटीसी किरण कुमार के परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता है। निगम उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करता है। वरिष्ठ बीएमटीसी अधिकारियों ने कुमार के परिवार से मुलाकात की और उन्हें समर्थन और मुआवजे का आश्वासन दिया। यह घटना दुखद है और बीएमटीसी परिवार के साथ खड़ा है।

दर्जनभर यात्री घायल और 12 नाजुक, छत्तीसगढ़-बालोद में रेलिंग से टकराकर बस पलटी

बालोद. बालोद जिले के डौंडीलोहारा नगर में यात्रियो से भरी बस पलट गई घटना डौंडीलोहारा नगर अंडी मोड़ के पास हुआ जहा बस  लोहे के रेलिंग से टकराते हुए 5 फ़ीट नीचे पलटी बस में 35 से अधिक यात्री सवार थे सभी यात्रीयों को आई चोट आई जिसमे 12 से अधिक यात्री गंभीर रूप से घायल हुए घटना में कंडक्टर और बस मालिक जो बस में मौजूद था उसे भी गंभीर चोट लगी सभी घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में इलाज के लिए लाया गया। आपको बता दे कि बस दुर्ग से डौंडीलोहारा की ओर आ रही थी जो मुस्कान कंपनी की बस है। पूरी घटना के मौके पर एसडीएम, तहसीलदार और पुलिस की टीम पहुँची बताया जा रहा है कि बस चालक की लापरवाही पूर्ण बस चलाने की वजह से यह दुर्घटना हुई। बस चालक मौके से फरार हो गया, मामले में डौंडीलोहारा पुलिस जांच कर रही है। रेलिंग से टकराते हुए हुआ हादसा यात्रियों से जब हमने बात की तब पता चला कि पहले बस अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बने लोहे की रोलिंग से जा टकराई इसके बाद बस और अनियंत्रित होगा और देखते ही देखते बस पलट गई बस पलटने के साथ ही बस में सवाद यात्रियों की चीज पुकार मछली लगी कुछ लोगों द्वारा और आसपास के लोगों द्वारा आपातकालीन वहां को बुलाया गया जिसके बाद सभी को बड़ी-बड़ी अस्पताल ले जाया गया है घटना इतनी भयानक थी कि पलक झपकते ही बस हादसे का शिकार हो गई हम सब अपने अपने गंतव्य को जा रहे थे और कई लोग इतने गंभीर हैं कि उन्हें शायद अस्पताल से कुछ दिन छुट्टी की ना मिल पाए।

बैंकॉक के स्कूली बस में लगी आग, छात्रों समेत 25 लोगों के जलकर मारे जाने की खबर

बैंकॉक  थाईलैंड के एक स्कूली बस में आग लग जाने से छात्रों समेत कम से कम 25 लोगों के मारे जाने की आशंका है। दमकल और बचाव दल मौके पर हैं। अधिकारियों और बचावकर्मियों ने ही यह जानकारी दी है। हादसे के दौरान झुलसने से कई लोग घायल भी हुए हैं, जिन्हें नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मरने वालों की संख्या बढ़ने की आशंका जाहिर की जा रही है। हादसा किस वजह से हुआ, इस बारे में अभी कोई सटीक जानकारी सामने नहीं आई है। स्थानीय लोग भी बचाव और राहत दलों के साथ आग बुझाने और पीड़ितों की मदद करने में जुटे थे। बैंकॉक पोस्ट के अनुसार यह बस उथाई थानी में एक स्कूल से छात्रों को ले जा रही थी। इसी दौरान इसमें आग लग गई। बचावकर्मियों ने कहा कि आग की लपटों में कई युवा यात्रियों की मौत हो गई या वे घायल हो गए। जोर सोर 100 ट्रैफिक रेडियो नेटवर्क ने दोपहर 12.30 बजे ज़ीर रंगसिट शॉपिंग मॉल के पास इनबाउंड फाहोन योथिन रोड पर बस में आग लगने की सूचना दी। फायर एंड रेस्क्यू थाईलैंड और थाई पीबीएस ने कहा कि बस 38 छात्रों और छह शिक्षकों को शैक्षिक यात्रा के लिए उथाई थानी के लैन सक जिले के वाट खाओ प्रया संगखारम से ले गई थी। उनका गंतव्य ज्ञात नहीं था। ट्रैफिक पुलिस रेडियो ने कहा कि कई यात्रियों की मौत हो गई या वे घायल हो गए। ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर बोले- CNG से चल रही थी बस थाइलैंड की प्रधानमंत्री पाइतोंग्तार्न शिनावात्रा ने हादसे में जाने गंवाने वाले बच्चों के परिजनों के प्रति शोक व्यक्त किया है। उन्होंने ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर को घटनास्थल पर जाकर हालात का जायजा लेने का आदेश दिया है। वहीं देश के गृह मंत्री अनुतिन चर्नविराकुल ने कहा कि बचावकर्मियों के पहुंचने के बाद भी बस इतनी ज्यादा गर्म थी कि उसके अंदर जाना बेहद मुश्किल था। इस वजह से हादसे के काफी देर बाद तक शव बस में ही थे। मरने वालों की अब तक पहचान नहीं हो पाई है। थाइलैंड के ट्रांसपोर्ट मंत्री ने कहा कि बस कॉम्प्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) से चल रही थी। यह बेहद दुखद घटना है। मैंने मंत्रालय से इस तरह के पैसेंजर व्हीकल्स के लिए CNG जैसे फ्यूल का इस्तेमाल बैन कर कोई और विकल्प तलाशने को कहा है। उन्होंने कहा कि जीवित बचे लोगों की संख्या के आधार पर 25 लोगों के मारे जाने की आशंका है। उन्होंने यह भी कहा कि बस अभी भी इतनी गर्म थी कि वे सुरक्षित रूप से अंदर नहीं जा सके। सोशल मीडिया पर आए इस घटना के वीडियो में नजर आ रहा है कि बस जल रही है है और इससे काले धुएं का गुबार निकल रहा है। छात्रों की उम्र और इस घटना के संबंध में अन्य विवरण की जानकारी नहीं है। घटनास्थल पर मौजूद एक बचावकर्मी ने सूरिया को बताया कि संभवतः बस का एक टायर फटने और फिर सड़क अवरोधक से उसके टकरा जाने के कारण आग लगी। बचाव समूह ‘होंगसाकुल खलोंग लुआंग 21’ ने सोशल मीडिया मंच ‘फेसबुक’ पर बताया कि बस से कम से कम दस शव बरामद किए गए हैं।

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