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MP उपचुनाव बुधनी विधानसभा का पहले आएगा रिजल्ट, विजयपुर में करना होगा इंतजार

भोपाल मध्य प्रदेश की विजयपुर और बुधनी विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव की मतगणना के लिए अब तैयारियां पूरी हो चुकी है. सबकी नजरें दोनों सीटों के नतीजों पर टिकी हैं. निर्वाचन आयोग ने दोनों जिलों का दौरा कर यहां की तैयारियों का जायजा लिया है. बताया जा रहा है कि राउंडवार गणना के आधार पर बुधनी विधानसभा सीट का नतीजा सबसे पहले आएगा, वहीं विजयपुर के नतीजे के लिए थोड़ा इंतजार करना होगा. 23 नवंबर को सुबह 8 बजे से मतगणना की तैयारियां शुरू हो जाएगी. बुधनी में 14 और विजयपुर में 16 टेबल लगेगी विजयपुर विधानसभा सीट की मतगणना के लिए 16 टेबल लगाई जाएगी जबकि बुधनी विधानसभा सीट के लिए 14 टेबल्स लगेगी. दरअसल, विजयपुर विधानसभा सीट पर 327 मतदान केंद्रों की मतगणना होगी जो 21 राउंड में पूरी की जाएगी. वहीं बुधनी विधानसभा सीट पर शासकीय महिला पॉलिटेक्निक महाविद्यालय सीहोर में मतगणना की जाएगी. यहां के 363 मतदान केंद्रों में 14-14 टेबल लगाई जाएंगी. इस तरह दोनों राउंड की मतगणना यहां पर पूरी होगी. सुरक्षा व्यवस्था पूरी विजयपुर विधानसभा सीट पर वोटिंग के दौरान उपद्रव की खबरें भी सामने आई थी. ऐसे में दोनों सीटों पर मतगणना के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से टाइट रहेगी. मतगणना स्थल पर त्रि-स्तरीय सुरक्षा होगी. जबकि किसी भी तरह के व्यक्ति को अंदर जाने की अनुमति नहीं रहेगी. इसके अलावा मतगणना कर्मियों का तीन लेवल पर रेंडमाईजेशन होगा. हर राउंड के बाद केवल माइक्रो ऑर्ब्जवर जानकारी देगा. मतगणना एजेंट को भी टेबल के पास कुछ भी अंदर नहीं ले जाने की अनुमति रहेगी. बीजेपी कांग्रेस की प्रतिष्ठा दांव पर दरअसल, दोनों विधानसभा सीटों पर बीजेपी और कांग्रेस ने पूरी ताकत लगाई है. क्योंकि दोनों सीटों पर बीजेपी कांग्रेस की प्रतिष्ठा दांव पर है. विजयपुर में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते रामनिवास रावत बीजेपी में चले गए थे, वह बीजेपी के टिकट पर उपचुनाव लड़े हैं, रावत मोहन सरकार में मंत्री भी हैं. ऐसे में बीजेपी ने यहां पूरा जोर लगाया है. वहीं विजयपुर में कांग्रेस ने मुकेश मल्होत्रा को उतारा था, बुधनी में पूर्व सीएम के सांसद बनने के बाद यहां बीजेपी ने पूर्व सांसद रमाकांत भार्गव को चुनाव लड़ाया था. कांग्रेस ने उनके सामने पूर्व मंत्री राजकुमार पटेल को चुनाव लड़वाया था. जिससे यहां भी मुकाबला दिलचस्प दिखा है.   वहीं रिजल्ट से पहले कांग्रेस एक बार फिर से चुनाव आयोग पहुंची है. पार्टी ने बीजेपी की शिकायत करते हुए 11 सूत्रीय मांगों का पत्र मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को सौंपा है. कांग्रेस का आरोप है कि मतगणना के दौरान बीजेपी असामाजिक तत्वों को काउंटिंग स्थल ले जाएगी और कांग्रेस के एजेंट्स पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने का काम करती है. जबकि मौके पर मौजूद अधिकारी भी बीजेपी का पक्ष लेते नजर आते हैं, ऐसे में चुनाव आयोग को तुरंत ही इस तरह की स्थिति को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए. कांग्रेस प्रत्याशियों को दिखाया जाए स्ट्रांग रूम कांग्रेस के चुनाव आयोग प्रदेश प्रभारी जेपी धनोपिया ने चुनाव आयोग ने पूरे मामले की शिकायत की है. उन्होंने बुधनी और विजयपुर विधानसभा सीटों पर मतगणना के दौरान गड़बड़ी करने की आशंका भी जताई है. कांग्रेस का कहना है कि मतगणना से पहले कांग्रेस के प्रत्याशियों को स्ट्रांग रूम से लेकर ईवीएम काउंटिंग तक की पूरी व्यवस्था को दिखाया जाना चाहिए. जबकि कांग्रेस प्रत्याशियों को पूरी स्थिति का जायजा लिया जाने देना चाहिए. जबकि ईवीएम ले जाने की पूरी प्रक्रिया को भी दिखाया जाए और इसकी वीडियोग्राफी भी कराई जानी चाहिए. ताकि मतगणना पूरी तरह से निष्पक्ष हो सके. हर राउंड के बाद प्रमाण पत्र मिले कांग्रेस ने चुनाव आयोग से मांग की है कि हर राउंड की काउंटिंग के बाद प्रत्याशियों को प्रमाण पत्र मिलना चाहिए. जब तक दोनों तरफ से प्रमाण पत्र पर सहमति न हो तब तक दूसरे राउंड की काउंटिंग शुरू नहीं होनी चाहिए. ईवीएम काउंटिंग में आने वाली वीवीपैट स्लिप की काउंटिंग भी हर हाल में कराई जानी चाहिए. जबकि मतगणना स्थल पर इंटरनेट का उपयोग पूरी तरह से प्रतिबंध रहना चाहिए. कांग्रेस ने ऐसी ही कुछ 11 मांगों का पत्र चुनाव आयोग को सौंपा है. इससे पहले भी कांग्रेस ने चुनाव आयोग में लगातार बीजेपी की शिकायतें की हैं. 23 नवंबर को आएंगे नतीजे बता दें कि बीजेपी और कांग्रेस विजयपुर और बुधनी उपचुनाव से पहले एक दूसरे पर जमकर आरोप लगा रहे हैं. दोनों विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजे 23 नवंबर यानि कल आने वाले हैं. बुधनी में बीजेपी ने रमाकांत भार्गव तो कांग्रेस ने राजकुमार पटेल को प्रत्याशी बनाया था. वहीं विजयपुर में बीजेपी ने रामनिवास रावत तो कांग्रेस ने मुकेश मल्होत्रा को प्रत्याशी बनाया था.

जातिगत समीकरणों से तय होगी जीत या बदलेगी परंपरा?, राजस्थान की सातों सीटों के उपचुनावों में लग रहे कयास

अलवर/नागौर. इस बार प्रदेश की सातों सीटों पर चुनाव अलग-अलग दिशाओं में हैं। शायद यही कारण है कि कांग्रेस और भाजपा ही नहीं बल्कि क्षेत्रीय दल भी परिवारवाद और सहानुभूति कार्ड जैसे दांव आजमा रहे हैं। प्रदेश की जिन सात सीटों पर उपचुनाव होने जा रहा है, उनमें से दो दक्षिणी राजस्थान में, दो पूर्वी राजस्थान में और एक-एक उत्तरी, मध्य और पश्चिमी राजस्थान में है। अलवर जिले की यह सीट सांप्रदायिक ध्रुवीकरण वाली सीट रही है। यहां के कुल वोटरों में मुस्लिम वोटर्स की संख्या 30 प्रतिशत से ज्यादा है और कांग्रेस को इसी बडे़ वोट बैंक के सहारे जीत की उम्मीद है। पार्टी के प्रत्याशी आर्यन जुबैर यहां से कांग्रेस के परंपरागत उम्मीदवार और दिवगंत विधायक जुबैर खान के पुत्र हैं। बीजेपी के सुखवंत सिंह की छवि यहां सॉफ्ट मानी जाती है। इसलिए बीजेपी के खिलाफ मेवों का ध्रुवीकरण कम रह सकता है। दौसा में चुनाव की दिशा सामान्य वर्ग करेगा तय इस सीट के उपचुनाव पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हैं। इसका एक बड़ा कारण तो यह है कि सरकार से इस्तीफा देकर बैठे मंत्री किरोड़ीलाल मीणा यहां से अपने भाई जगमोहन मीणा को टिकट दिलाने में सफल रहे हैं, वहीं दूसरा बड़ा कारण है कि एक सामान्य वर्ग की सीट पर भाजपा ने जगमोहन मीणा के रूप में जहां अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवार को टिकट दिया है, वहीं कांग्रेस डीडी बैरवा के रूप में अनुसूचित जाति के उम्मीदवार को मैदान में उतारा है। इस सीट के कुल वोटों में से करीब पचास प्रतिशत एससी-एसटी के वोट हैं और शेष पचास प्रतिशत में सामान्य, मुस्लिम और ओबीसी के वोटर आते हैं। अब चूंकि दोनों ही प्रमुख दलों ने सामान्य या ओबीसी वर्ग से किसी को टिकट नहीं दिया है, इसलिए यह देखना दिलचस्प होगा कि ये वोट कांग्रेस या भाजपा में से किसे चुनते हैं। हालांकि भाजपा को उम्मीद है कि सामान्य और मूल ओबीसी वोट परंपरागत रूप से भाजपा के साथ रहे हैं, इसलिए मीणा वोटों के साथ इन वोटों का जुड़ाव उसकी जीत को आसान बना देगा। देवली-उनियारा में कांग्रेस को मीणा वोट कटने का डर टोंक जिले की इस सीट पर मीणा, गुर्जर और मुस्लिम वोटों का बाहुल्य है। कांग्रेस ने मीणा और मुस्लिम वोटों की गोलबंदी की उम्मीद में यहां से कस्तूरचंद मीणा को टिकट दिया है। चूंकि सचिन पायलट टोंक से विधायक हैं और यह उन्हीं के खेमे के हरीश मीणा की सीट रही है, इसलिए पार्टी को गुर्जर वोटों की उम्मीद भी है, लेकिन कांग्रेस के इन दोनों ही वोट बैंकों में सेंध पड़ गई है। कांग्रेस के बागी के रूप में पूर्व छात्र नेता नरेश मीणा मैदान में हैं, जो मीणा वोटों को बंटवारा कर सकते हैं, वहीं भाजपा ने अपने पुराने कार्यकर्ता राजेन्द्र गुर्जर को टिकट देकर कांग्रेस की एकमुश्त गुर्जर वोट मिलने की उम्मीद को भी झटका दिया है। ऐसे में कांग्रेस की बड़ी उम्मीद यहां मुस्लिम वोट हैं, वहीं भाजपा सामान्य और मूल ओबीसी वोटों के सहारे दिखाई दे रही है। राजेंद्र गुढ़ा हैं झुंझुनू में एक्स फैक्टर शेखावटी क्षेत्र की इस सीट पर कांग्रेस के ओला परिवार का वर्चस्व रहा है और इस बार भी पार्टी ने इसी परिवार के अमित ओला को टिकट देकर जाट और मुस्लिम वोटों के सहारे जीत की उम्मीद की है, क्योंकि इस सीट पर यही दो वोट सबसे ज्यादा हैं। भाजपा ने भी हालांकि राजेन्द्र भांभू के रूप में जाट उम्मीदवार को ही टिकट दिया है, ऐसे में जाट वोटों के बंटवारे के साथ ही पार्टी को सामान्य और मूल ओबीसी के वोटों की उम्मीद भी है, लेकिन इस सीट के एक्स फैक्टर राजेन्द्र गुढ़ा माने जा रहे हैं जो कांग्रेस के एससी और मुस्लिम वोटों में सेंधमारी करते दिख रहे हैं और ऐसा होता है तो इसका सीधा फायदा भाजपा के उम्मीदवार हो सकता है। खींवसर के त्रिकोणीय संघर्ष में बटेंगे जाट वोट नागौर जिले की खींवसर सीट पर जाट मुस्लिम और एससी मतदाता सबसे ज्यादा हैं। यहां हनुमान बेनीवाल की पार्टी आरएलपी, भाजपा और कांग्रेस के बीच त्रिकोणीय संघर्ष है और चूंकि तीनों के उम्मीदवार जाट हैं, इसलिए जाट वोट तीन जगह बंटेंगे। किसी भी प्रत्याशी का जीत का दारोमदार एससी और मुस्लिम वोटों पर रहेगा, जो वैसे तो कांग्रेस के वोट बैंक माने जाते हैं, लेकिन इस सीट पर आरएलपी के साथ जाते रहे हैं। विधानसभा चुनाव में आरएलपी से भाजपा में गए रेवतराम डांगा ने आरएलपी के वोट बैंक में अच्छी सेंधमारी की थी और हनुमान बेनीवाल सिर्फ दो हजार वोटों से जीत पाए थे। इस बार भी भाजपा ने फिर से डांगा पर दांव खेला है। वहीं हनुमान बेनीवाल ने अपनी पत्नी कनिका बेनीवाल को और कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी रहे सवाईसिंह की पत्नी रतन चौधरी को टिकट दिया है। चौरासी आरक्षित सीट पर सब कुछ एसटी वोटों के हाथ बांसवाड़ा जिले की इस आदिवासी बहुल सीट पर करीब 85 प्रतिशत आबादी अनुसूचित जनजाति की है। ऐसे में यहां अन्य जातियों या सामान्य वर्ग के लिए बहुत गुंजाइश बचती नहीं है। आदिवासियों की बीच सक्रिय भारतीय आदिवासी पार्टी और भाजपा व कांग्रेस के बीच यहां त्रिकोणीय मुकाबला है तो सही, लेकिन जातिगत समीकरण आदिवासियों की ही उपजातियों के बीच के हैं। सलूंबर में आदिवासियों के साथ ही अन्य वोट बैंक भी प्रभावी अब तक उदयपुर का हिस्सा रही सलूंबर सीट अब खुद अपने आप में जिला हो गई है। आदिवासियों की संख्या अधिक होने के कारण यह भी आरक्षित सीट है, लेकिन यहां सामान्य वर्ग की अन्य जातियां जैसे जैन, ब्राह्मण, राजपूत और मूल ओबीसी की जातियां भी ठीकठाक संख्या में हैं। यही कारण है कि इस सीट पर आदिवासी पार्टियों के बजाए कांग्रेस और भाजपा के बीच ही मुकाबला होता आया है। दिवंगत विधायक अमृतलाल  मीणा यहां से लगातार तीसरी बार विधायक बने थे। इस बार भाजपा ने उनकी पत्नी शांतादेवी को टिकट देकर अनूसूचित जनजाति के साथ ही सामान्य वर्ग के अपने परंपरागत वोट बैंक के सहारे जीत की उम्मीद की है। उनके सामने कांग्रेस की रेशम मीणा हैं, वहीं बीएपी ने भी रमेशचंद मीणा को मैदान में उतारा है।

परिवारवाद को टिकट में मिलेगा महत्व, राजस्थान विधानसभा उपचुनावों में कांग्रेस की 23 तक आएगी लिस्ट

जयपुर. विधानसभा चुनावों को लेकर कांग्रेस की सूचियां भी आनी शुरू हो चुकी हैं। एआईसीसी ने झारखंड के 21 टिकट घोषित कर दिए हैं। राजस्थान का पैनल लेकर प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा दिल्ली रवाना हो चुके हैं। राजस्थान में विधानसभा चुनावों को लेकर सरगर्मियां तेज हो रही हैं। बीजेपी 6 सीटों पर अपने प्रत्याशी घोषित कर चुकी है अब कांग्रेस की सूची का इंतजार है। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी सुखजिंद सिंह रंधावा टिकट दावेदारों के पैनल पर कल जयपुर स्थित कांग्रेस वॉर रूम में बैठक कर दिल्ली रवाना हो गए। अपने साथ वे नामों की सूची भी लेकर गए हैं और दिल्ली में हाईकमान के साथ बैठक करके सूची जारी करने की बात कहकर गए हैं। जानकारी के मुताबिक बुधवार 23 अक्टूबर को राजस्थान के लिए कांग्रेस की सूची जारी हो सकती है। इनको मिल सकता है मौका कांग्रेस की सूची में ज्यादातर टिकट परिवार से जुड़े हो सकते हैं। प्रभारी सुखजिंदर रंधावा का कहना है कि परिवारवाद में कोई परेशानी नहीं है, जिन सीटों के टिकट परिवार को जा सकते हैं उनमें रामगढ़, झुंझुनू और देवली उनियारा सीट शामिल हैं। दौसा में मुरारीलाल मीणा कह चुके हैं कि उपचुनावों में उनके परिवार से कोई दावेदारी नहीं कर रहा है। जानकारी के मुतबिक कांग्रेस किसी एससी चेहरे पर यहां दांव लगा सकती है। खींवसर में कांग्रेस-आरएलपी में अंदरखाने बातचीत हालांकि कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंदसिंह डोटासरा ने प्रदेश की सभी सातों सीटों पर प्रत्याशी उतारने और बिना गठबंधन के चुनाव लड़ने की घोषणा की है लेकिन जानकारी के मुताबिक अब भी कांग्रेस और आरएलपी के बीच खींवसर को लेकर बातचीत बंद नहीं हुई है। यदि यह गठबंधन नहीं होता है तो आरएलपी एक से ज्यादा सीटों पर अपने प्रत्याशी उतार सकती है, जिसका सीधा असर कांग्रेस पर होगा। बीएपी ने चौरासी-सलूंबर में प्रत्याशी उतारे इधर लोकसभा चुनावों में कांग्रेस की सहयोगी पार्टी रही बीएपी ने उपचुनावों के लिए चौरासी और सलूंबर पर अपना दावा ठोंक दिया है। इन दोनों सीटों पर पार्टी ने मजबूती से चुनाव लड़ने का ऐलान किया है।

मध्यप्रदेश में होने वाले उपचुनाव के लिए दोनों दलों के प्रत्याशियों के नाम आए सामने

भोपाल मध्यप्रदेश में दो विधानसभा क्षेत्रों बुधनी और विजयपुर में होने वाले उपचुनाव के लिए दोनों प्रमुख दलों भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस की ओर से अपने-अपने प्रत्याशियों के नाम घोषित किए जाने के साथ ही अब सभी की नजरें बुधनी विधानसभा पर टिक गई हैं। सीहोर जिले की बुधनी विधानसभा क्षेत्र से अब तक राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चाैहान विधायक थे। लोकसभा चुनाव में उनके विदिशा संसदीय क्षेत्र से सांसद चुने जाने के बाद श्री चौहान ने विधानसभा से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद ही इस सीट के रिक्त होने के कारण यहां उपचुनाव हो रहा है। बुधनी से भाजपा ने इस बार श्री चौहान के कट्टर समर्थक माने जाने वाले विदिशा के पूर्व सांसद रमाकांत भार्गव को प्रत्याशी बनाया है। वे पिछले लोकसभा चुनाव में विदिशा सांसद थे। इस लोकसभा चुनाव में उनके स्थान पर पार्टी ने विदिशा से श्री चौहान को प्रत्याशी बनाया। इसके बाद अब उन्हें श्री चौहान की परंपरागत सीट से विधानसभा का टिकट दे दिया गया है। वहीं कांग्रेस ने कल देर रात इस सीट से अपने प्रत्याशी का नाम सार्वजनिक किया। पार्टी ने यहां से पूर्व मंत्री राजकुमार पटेल को चुनावी मैदान में उतारा है। श्री पटेल इसके पहले भी इस सीट से विधायक रह चुके हैं। समझा जा रहा है कि भाजपा की ओर से श्री भार्गव को चुनावी मैदान में उतारने के बाद श्री पटेल की यहां से दावेदारी मजबूत हुई क्योंकि ये श्री चौहान के दबदबे वाला क्षेत्र है। श्री चौहान किरार समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं और श्री पटेल भी इसी समाज के सदस्य हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि कांग्रेस ने जातिगत समीकरणों को ध्यान में रखते हुए यहां से श्री पटेल पर दांव खेला है। वहीं श्योपुर जिले की विजयपुर सीट से भाजपा की ओर से रामनिवास रावत का मुकाबला कांग्रेस के मुकेश मल्होत्रा से होगा। श्री रावत इस सीट से लंबे समय से कांग्रेस के विधायक रहे हैं, लेकिन लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कांग्रेस का हाथ छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया। इसके बाद उन्हें डॉ मोहन यादव सरकार मे कैबिनेट मंत्री बनाया गया। उनके विधानसभा से त्यागपत्र देने के कारण ही यहां उपचुनाव हो रहा है। कांग्रेस अब इस पूरे आदिवासीबहुल क्षेत्र में श्री रावत पर कांग्रेस को धोखा देने का आरोप लगाते हुए आक्रामक चुनाव प्रचार में जुटी हुई है। इसी के चलते कांग्रेस ने अपने आदिवासी चेहरे मुकेश मल्होत्रा को यहां से चुनावी मैदान में उतारा है, जिनका सामना श्री रावत से हो रहा है। श्री मल्होत्रा की आदिवासियों की बीच खासी पैठ मानी जाती है और वे वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर चुनाव मैदान में थे और तीसरे नंबर पर रहे थे। इन दोनों ही क्षेत्रों में नामांकनपत्र दाखिले का कार्य प्रारंभ हो गया है। मतदान 13 नवंबर को होगा और नतीजे 23 नवंबर को घोषित होंगे।  

आज नड्डा लगाएंगे प्रत्याशियों के नाम पर अंतिम मुहर, राजस्थान में उपचुनाव की भाजपा ने कसी कमर

जयपुर. राजस्थान में सात विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी तैयारी लगभग पूरी कर ली है। भाजपा की प्रदेश कोर कमेटी ने इन सात सीटों के लिए प्रत्याशियों के नामों के पैनल को अंतिम रूप दे दिया है। आज रात भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में इन नामों पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। राज्य में इन सात सीटों के लिए उपचुनाव की तारीखों की घोषणा कभी भी हो सकती है, और भाजपा ने इसके लिए अपनी तैयारियों को पूरी तरह से अंतिम रूप देने का काम शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री आवास पर हुई कोर कमेटी की लगभग दो घंटे लंबी बैठक में प्रत्याशियों के पैनल पर गहन विचार-विमर्श किया गया। इसके बाद, भाजपा के वरिष्ठ नेता दिल्ली के लिए रवाना हुए, जहां आज रात राष्ट्रीय अध्यक्ष नड्डा के नेतृत्व में बैठक होगी और पैनल पर अंतिम मुहर लगेगी। इससे पहले, भाजपा के प्रदेश प्रभारी राधा मोहन दास अग्रवाल ने मीडिया से कहा कि उपचुनाव को लेकर गांव से लेकर शहर तक, हर स्तर पर चर्चा की गई है और प्रत्याशियों के नाम जल्द ही सार्वजनिक किए जाएंगे। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने महाराष्ट्र में एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या पर चिंता जताई और कहा कि ऐसी घटनाएं निंदनीय हैं। वहीं, पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने बताया कि कोर कमेटी में प्रत्याशियों के नामों पर व्यापक चर्चा हुई है और अब दिल्ली में इन नामों को अंतिम रूप दिया जाएगा। कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए राठौड़ ने कहा कि ब्यूरोक्रेसी पर कांग्रेस का नियंत्रण उनके भ्रष्टाचार को छिपाने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि भाजपा पारदर्शी प्रशासन देने के लिए प्रतिबद्ध है और कांग्रेस की ओर से लगाए जा रहे आरोप बेबुनियाद हैं। एसआई भर्ती मामले पर राठौड़ ने कहा कि इस मामले में दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए, और जिन्हें अनुचित तरीके से पद मिले हैं, उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। वहीं, जिन्हें अन्याय का सामना करना पड़ा है, उन्हें न्याय दिलाया जाएगा। भाजपा उपचुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंकते हुए प्रत्याशियों के चयन के बाद तेजी से चुनाव प्रचार में जुटने के लिए तैयार है।

MP में फिर उपचुनाव, विजयपुर से रावत का नाम तो शिवराज की सीट पर रमाकांत लड़ाने की तैयारी

भोपाल प्रदेश की खाली हुई विधानसभा सीटों के लिए भाजपा ने अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। इन सीटों पर चुनाव की तारीखों का ऐलान जल्दी ही हो सकता है। कांग्रेस फिलहाल यहां प्रत्याशियों के नामों पर मंथन में जुटी हुई है। जानकारी के मुताबिक भाजपा ने विजयपुर सीट के लिए रामनिवास रावत को अपना अधिकृत प्रत्याशी घोषित कर दिया है। रावत पूर्व में इसी सीट से कांग्रेस विधायक रहे हैं। लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने कांग्रेस का दामन छोड़कर भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली थी। भाजपा में शामिल हुए रावत को प्रदेश सरकार के कैबिनेट में भी शामिल कर लिया गया है। इसके बाद उन्होंने मंगलवार को विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। शिव की जगह रमाकांत पूर्व सीएम शिवराज सिंह के केंद्रीय मंत्री बन जाने के बाद खाली हुई बुदनी विधानसभा सीट के लिए भी उप चुनाव होना है। इस सीट पर भाजपा ने रमाकांत को अपना उम्मीदवार बनाया है। हालांकि इस विधानसभा क्षेत्र से शिवराज पुत्र कार्तिकेय का नाम भी लिया जा रहा था। अभी बिना पर असमंजस कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने वालों में बीना विधानसभा भी शामिल है। लेकिन इस सीट से अभी तक इस्तीफा न होने के कारण फिलहाल असमंजस की स्थिति बनी हुई है। दो माह में होंगे चुनाव प्रदेश की अमरवाड़ा विधानसभा सीट के बुधवार को उप चुनाव के लिए मतदान हो रहा है। इसके परिणाम 13 जुलाई को घोषित होंगे। सूत्रों का कहना है कि अब विजयपुर और बुदनी विधानसभा सीटों के लिए उप चुनाव अगले दो महीनों में होने की संभावना है। इसके लिए निर्वाचन आयोग तारीखों का ऐलान जल्दी कर सकता है। विजयपुर सीट से मंत्री रामनिवास रावत के सामने कौन? कैबिनेट मंत्री रामनिवास रावत का विजयपुर से चुनाव लड़ना तय है। विजयपुर में कांग्रेस के ज्यादातर पदाधिकारी रामनिवास के साथ कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो चुके हैं, जिससे पार्टी को यहां नई लीडरशिप खड़ी करने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। कांग्रेस, 2023 में निर्दलीय चुनाव लड़कर तीसरे स्थान पर रहे युवा आदिवासी नेता मुकेश मल्होत्रा को टिकट देने पर विचार कर रही है। मल्होत्रा ने पहली बार निर्दलीय चुनाव लड़ते हुए 44,128 (21.31%) वोट हासिल किए थे, जो दूसरे स्थान पर रहे भाजपा के बाबूलाल मेवरा से मात्र 6 हजार वोट कम थे। विजयपुर में सहरिया आदिवासी और रावत-मीणा समाज की सबसे अधिक संख्या है। पूर्व विधायक बृजराज रीछी और सबलगढ़ से विधायक रहे बैजनाथ कुशवाह के नाम भी यहां आगे चल रहे हैं। इसके लिए कांग्रेस ने 6 नेताओं की एक कमेटी बनाई है। इसमें पूर्व मंत्री डॉ. गोविंद सिंह, सांसद अशोक सिंह जैसे बड़े नाम हैं।   बीना विधायक भी देंगी इस्तीफा निर्मला सप्रे ने भाजपा में शामिल होने के बदले बीना को जिला बनाने की मांग पार्टी के सामने रखी है। वह लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुईं थीं। सागर जिले में कांग्रेस का परचम लहराने वाली वह एकमात्र विधायक थीं। अब उसी कांग्रेस ने निर्मला सप्रे को कांग्रेस विधायक के रूप में सदस्यता से अयोग्य ठहराने के लिए 5 जुलाई को विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष डिस्क्वालिफिकेशन पिटीशन दायर की है। विधानसभा एक सप्ताह के भीतर उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी कर सकती है। सूत्रों के अनुसार वह पार्टी के निर्देशों का इंतजार कर रही हैं ताकि वह अपना इस्तीफा दे सकें। अगर ऐसा होता है तो बीना में भी उपचुनाव होना लगभग तय है।

निर्मला सप्रे ने कहा विधायक निधि से क्षेत्र को सौगातें दे दूं, फिर इस्तीफा तो देना ही है

भोपाल अमरवाड़ा में उपचुनाव की घोषणा के बाद विजयपुर, बीना और बुधनी में उपचुनाव कब होंगे इसके कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि इन तीनों ही विधानसभा क्षेत्रों के वर्तमान विधायकों ने अभी इस्तीफा नहीं दिया है। लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के तीन विधायकों ने बीजेपी जॉइन की थी। इनमें से अमरवाड़ा विधायक कमलेश शाह ने बीजेपी की सदस्यता लेने से पहले ही कांग्रेस छोड़ विधायक पद से भी इस्तीफा दे दिया था। यहां 10 जुलाई को उपचुनाव होना है। लेकिन, बीना की विधायक निर्मला सप्रे और विजयपुर विधायक रामनिवास रावत ने बीजेपी की सदस्यता लेने के बाद भी अभी तक इस्तीफा नहीं दिया है।  विधायकों के इस्तीफे को लेकर बातचीत की तो वजह पता चली। सागर जिले की बीना से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे ने पिछले महीने 5 मई को बीजेपी जॉइन कर ली थी। लोकसभा चुनाव के दौरान निर्मला ने कांग्रेस को करारा झटका दिया था। दलबदल के बाद भी उन्होंने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा नहीं दिया। दरअसल, विधायक विकास निधि जारी होने के इंतजार में हैं। विधायकों को सालाना ढाई करोड़ रुपए विधायक निधि की राशि विकास कार्यों के लिए मिलती है। हालांकि विजयपुर विधायक ने इस्तीफा नहीं देने का ऐसा कोई कारण नहीं बताया। आचार संहिता के कारण नहीं मिल पाई राशि कांग्रेस के एक विधायक ने बताया कि विधायक निर्वाचित होने के बाद लोकसभा के चुनाव की आचार संहिता लागू हो गई। इस वजह से विधायक निधि जारी नहीं हो पाई। अभी दो दिन पहले ये सूचना आई है कि करीब 80 -90 लाख रुपए जारी हो गए हैं। इस राशि से क्षेत्र में विकास के काम हो सकेंगे।

राजस्थान सरकार के सामने अभ 5 विधानसभा के उपचुनावों की नई चुनौती

दौसा. लोकसभा चुनावों के बाद राजस्थान की नई भजनलाल सरकार को इसी साल 3 चुनावों का सामना और करना है। इनमें एक राज्यसभा सीट, विधानसभा उपचुनाव और स्थानीय निकाय चुनाव इसी साल होने की संभावना है। कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल के लोकसभा सांसद चुने जाने के बाद अब राजस्थान में उनकी राज्यसभा सीट खाली हो रही है। हालांकि बहुमत के आधार पर अब यह सीट बीजेपी के खाते में जाती दिख रही है। वहीं राजस्थान में राज्यसभा चुनाव के अलावा विधानसभा उपचुनाव और लोकल बॉडी चुनाव भी इसी साल होने हैं। लोकसभा चुनावों में 11 सीटें हार चुकी प्रदेश की नई भजनलाल सरकार के लिए अब इन चुनावों में बेहतर प्रदर्शन करने का भारी दबाव रहेगा। इन 5 सीटों पर होने हैं उपचुनाव राजस्थान में खींवसर, दौसा, चौरासी, झुंझुनू और देवली उनियारा में विधानसभा उपचुनाव होने हैं क्योंकि यहां के विधायक अब लोकसभा सांसद बन चुके हैं। इनमें से कोई भी सीट बीजेपी के पास नहीं है। यहां तक कि जिन लोकसभा सीटों में ये विधानसभाएं आती हैं, वहां भी बीजेपी इस चुनाव में हार गई। खींवसर से आरएलपी के हनुमान बेनीवाल, दौसा से कांग्रेस के मुरारी मीणा, चौरासी से बीएपी के राजकुमार रोत, झुंझुनू से कांग्रेस के बृजेंद्र ओला और देवली उनियारा से कांग्रेस के हरीश मीणा विधायक थे। अब ये पांचों सांसद बन चुके हैं। इसलिए इन सीटों पर उपचुनाव होने हैं। लोकल बॉडी चुनाव सबसे बड़ी चुनौती विधानसभा उपचुनाव और लोकल बॉडी चुनाव लगभग आसपास ही होंगे। उपुचनावों के नतीजे भले ही सरकार पर कोई असर नहीं डालने वाले लेकिन इससे सरकार के पक्ष में या खिलाफ माहौल जरूरत बनता है। वहीं यदि उपचुनाव पहले होते हैं तो इसका असर लोकल बॉडी इलेक्शन पर भी पड़ना तय है।

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