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भारत में कनाडा का ट्रेड मिशन, कारोबार और निवेश के नए अवसरों की खोज में

नई दिल्ली   कनाडा के न्यू ब्रंसविक प्रांत से एक ट्रेड मिशन  6 फरवरी, 2026 तक भारत आएगा। इसका मकसद दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते मार्केट में से एक में कमर्शियल संबंधों को मजबूत करना और साझेदारी के नए मौके तलाशना है। बता दें, कनाडा के पूर्व पीएम जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल में भारत के साथ इसके तनाव में कड़वाहट देखने को मिली थी। हालांकि, वर्तमान पीएम मार्क कार्नी के शासन में भारत-कनाडा के संबंधों में सुधार देखने को मिल रहा है। कनाडा भारत के साथ अपने बिगड़े हुए संबंधों को सुधारने की पहल कर रहा है। कनाडाई ट्रेड मिशन का भारत आना उन्हीं पहलों में से एक है। इस मिशन को अपॉर्चुनिटीज न्यू ब्रंसविक (ओएनबी) का समर्थन है और यह उस व्यापार पर फोकस करेगा जो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विविधता लाना चाहते हैं, भारत में विस्तार करना चाहते हैं और नई कमर्शियल और सप्लाई-चेन साझेदारी विकसित करना चाहते हैं। लक्षित बिजनेस-टू-बिजनेस मीटिंग, मार्केट ब्रीफिंग और ऑन-द-ग्राउंड समर्थन के जरिए हिस्सा लेने वाली कंपनियों को संभावित खरीदारों, साझेदारों और निर्णय लेने वालों तक सीधी पहुंच मिलेगी। यह मिशन भारतीय बाजार के लिए न्यू ब्रंसविक की लंबे समय की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है और प्रांत की इन-मार्केट उपस्थिति को बढ़ाता है। इससे कंपनियों को स्थानीय व्यापार के माहौल में आगे बढ़ने और विकास के अवसर पहचानने में मदद मिलती है। यह ओएनबी के मार्च 2025 के भारत के व्यापार मिशन की सफलता पर भी आधारित है। इसमें व्यापार संबंधों को गहरा करने, निर्यात बढ़ोतरी को समर्थन करने और न्यू ब्रंसविक को व्यापार और निवेश के लिए एक कॉम्पिटिटिव और भरोसेमंद साझेदार के तौर पर स्थापित करने पर लगातार केंद्रित किया गया है। ल्यूक रैंडल, अपॉर्चुनिटीज एनबी और आर्थिक विकास और छोटे बिजनेस के लिए जिम्मेदार मंत्री हैं। वह इस मिशन को लीड करेंगे। रैंडल ने कहा, “वैश्विक व्यापार ऑर्डर तेजी से बदल रहे हैं, और न्यू ब्रंसविक भारत जैसे खास मार्केट के साथ अपने जुड़ाव को और मजबूत कर रहा है। हमारा प्रांत भारत में आर्थिक अवसरों को पहचानने वाला अकेला नहीं है, बल्कि हम इन-मार्केट टीम वाला अकेला अटलांटिक प्रांत हैं और इसके नतीजे में हमने मजबूत साझेदारी बनाई हैं जो नए अवसरों के दरवाजे खोल रही हैं जो लंबे समय की विकास, विविधता और रेसिलिएंस का समर्थन करती हैं।” इस मिशन में चार न्यू ब्रंसविक कंपनियां और एक एकेडमिक इंस्टिट्यूशन शामिल हैं, जो एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, एग्री-फूड, एडटेक, एजुकेशनल और प्रोफेशनल सेवाएं और एकेडमिक रिसर्च जैसे खास सेक्टर का प्रतिनिधित्व करते हैं। अपॉर्चुनिटीज एनबी, कनाडा के न्यू ब्रंसविक प्रांत के लिए लीड बिजनेस डेवलपमेंट एजेंसी है। यह स्थानीय व्यापार का समर्थन करता है और आर्थिक और जॉब ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए दुनिया भर से नया निवेश आकर्षित करता है।

कनाडा के पूर्व PM ट्रूडो के जाने के बाद अब दोनों पक्ष एक बार फिर से संबंधों को सुधारते दिख रहे

नई दिल्ली/ ओट्टावा  कनाडा में जस्टिन ट्रूडो के प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद अब नई भारत-कनाडा संबंध में सुधार के संकेत दिखाई देने लगे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियों के बीच फिर से संपर्क शुरू हो गया है और नए उच्चायुक्तों की नियुक्ति की संभावना पर नजर गड़ाए हुए हैं। इसके पहले खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की जून 2023 में हत्या के बाद राजनयिक तनाव पैदा हो गया था, जिसने दोनों देशों के संबंधों को निचले स्तर पर पहुंचा दिया था। कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत पर हत्या में शामिल होने का बेबुनियाद आरोप लगाया था। दोनों देशों के बीच शुरू हुई चर्चा रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों के बीच राजनयिक और सुरक्षा चैनलों के माध्यम से दिसम्बर के आसपास चर्चा फिर से शुरू हुई। इसके पहले अक्टूबर में दोनों पक्षों के बीच रिश्तों में तनाव आ गया। भारत ने अपने उच्चायुक्त और 5 अन्य राजनियकों को वापस बुला दिया था, जिन्हें निज्जर की हत्या में पर्सन ऑफ इंटरेस्ट घोषित किया गया था। बदले में भारत ने 6 कनाडाई राजनियकों को निष्कासित कर दिया था। राजनयिक तैनाती पर हो रहा विचार अब एक बार फिर दोनों देश राजनयिकों की तैनाती पर विचार कर रहे हैं। ओट्टावा में राजदूत पद के लिए नई दिल्ली ने कुछ नामों पर विचार किया है। HT की रिपोर्ट के अनुसार, नियुक्ति के लिए स्पेन में भारत के राजदूत दिनेश के पटनायक का नाम इस पद के लिए सबसे आगे हैं। पटनायक 1990 बैच के भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी हैं और भारत के वरिष्ठ राजनयिकों में से एक हैं। वे 2016-18 के दौरान ब्रिटेन में उप-राजदूत के रूप में काम कर चुके हैं। ब्रिटेन में काम करने के चलते उनके पास खालिस्तान मामले को लेकर भी समझ का अनुभव है, जो कनाडा में नियुक्ति के लिए अहम है। मामले से परिचित लोगों ने बताया है कि नई दिल्ली में उच्चायुक्त पद के लिए कनाडा की तरफ से क्रिस्टोफर कूटर का नाम है, जो हाल तक दक्षिण अफ्रीका में राजदूत थे। कूटर का नाम कनाडा ने पहले ही प्रस्तावित किया था। इसे साल 2024 के मध्य में भारत की तरफ से भी सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई थी। यह नियुक्तियां कब तक होंगी, इस बारे में अभी साफ नहीं है। कुछ हलकों का यह मानना है कि दूतों की नियुक्ति से पहले दोनों पक्षों के शीर्ष नेतृत्व की बैठक होनी चाहिए ताकि संबंधों को फिर से स्थापित करने का संकेत दिया जा सके।

मैक्सिको ने भी ट्रंप को दिया जवाब, कनाडा का एलान- अमेरिकी सामान पर लगाएंगे 25 फीसदी टैरिफ

वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एलान के बाद 25 फीसदी टैरिफ लगने पर कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो ने जवाब दिया है। पीएम ट्रूडो ने कहा कि हम भी अमेरिका को जवाब देंगे। हम 155 बिलियन डॉलर मूल्य के अमेरिकी सामान पर 25 फीसदी टैरिफ लगाएंगे। मंगलवार से  30 बिलियन डॉलर मूल्य के सामान पर यह टैरिफ लागू किया जाएगा। जबकि आने वाले 21 दिन में 125 बिलियन डॉलर मूल्य के सामानों पर और टैरिफ लगाए जाएंगे। वहीं, मैक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम ने भी डोनाल्ड ट्रंप को जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि टैरिफ लगाने से समस्याएं हल नहीं होती हैं। मैक्सिको टकराव नहीं चाहता है। हम पड़ोसी देशों के बीच सहयोग से शुरुआत करते हैं। जस्टिन ट्रूडो ने यह एलान किया कनाडाई पीएम जस्टिन ट्रूडो ने कहा कि मैं सीधे अमेरिकियों हमारे सबसे करीबी दोस्तों और पड़ोसियों से बात करना चाहता हूं। यह ऐसा विकल्प है जो कनाडाई लोगों को नुकसान पहुंचाएगा, लेकिन इस फैसले के अमेरिकी लोगों के लिए वास्तविक परिणाम होंगे। जैसा कि मैंने लगातार कहा है कि कनाडा के खिलाफ टैरिफ आपकी नौकरियों को खतरे में डाल देगा। पीएम ट्रूडो ने कहा कि राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी ने कई वर्ष पहले कहा था कि भूगोल ने हमें पड़ोसी बनाया है। इतिहास ने हमें मित्र बनाया है। अर्थशास्त्र ने हमें साझेदार बनाया है और आवश्यकता ने हमें मित्र बनाया है। यदि राष्ट्रपति ट्रंप संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए एक नए स्वर्ण युग की शुरुआत करना चाहते हैं, तो बेहतर रास्ता कनाडा के साथ साझेदारी करना है, न कि हम पर टैरिफ लगाना। इससे पहले ट्रूडो ने एक्स पर लिखा कि कनाडाई लोग ऐसा नहीं चाहते थे, लेकिन वे इसके लिए तैयार हैं। ट्रूडो ने इस मामले को लेकर पहले मंत्रिमंडल से चर्चा की थी। अब वे मैक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम से बात करेंगे। अमेरिका ने 4 फरवरी से अधिकांश कनाडाई वस्तुओं पर 25 प्रतिशत टैरिफ और ऊर्जा पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने की बात कही है। मैंने आज शीर्ष नेताओं और हमारे मंत्रिमंडल से मुलाकात की है। मैं जल्द ही मैक्सिको की राष्ट्रपति शीनबाम से बात करूंगा। यह बोलीं मैक्सिको की राष्ट्रपति शीनबाम मैक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम ने कहा कि नशीली दवाओं की तस्करी में शामिल आपराधिक संगठनों से मैक्सिको का कोई संबंध नहीं है। अगर अमेरिका इन संगठनों से निपटना चाहता है तो हमें मिलकर काम करना चाहिए। लेकिन हमेशा साझा जिम्मेदारी, आपसी विश्वास, सहयोग और सबसे बढ़कर संप्रभुता के सम्मान के सिद्धांतों से समझौता नहीं किया जा सकता। मैं समन्वय को हां कहती हूं और अधीनता को ना कहती हूं। उन्होंने साझा चिंताओं को दूर करने के लिए दोनों देशों की शीर्ष सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा टीमों के साथ समूह बनाने का प्रस्ताव रखा। शीनबाम ने एक्स पर लिखा कि मैं राष्ट्रपति ट्रंप को प्रस्ताव देती हूं कि हम अपनी सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा टीमों के साथ कार्य समूह स्थापित करें। समस्याएं टैरिफ लगाने से हल नहीं होती हैं बल्कि बातचीत और संवाद से हल नहीं होती हैं। जैसा कि हमने हाल ही में अमेरिकी विदेश विभाग के साथ मिलकर अप्रवासियों के मुद्दे पर काम किया। मैक्सिको की टीम प्रवासियों से संबंधित मामलों में अमेरिका के साथ लगातार संपर्क में थी। राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रवासियों की गिरावट में का जो ग्राफ सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है, वह मेरी ही टीम ने बनाया था। टीम लगातार उनके साथ संवाद में थी। उन्होंने कहा कि मैं अर्थव्यवस्था सचिव को प्लान बी बनाने का निर्देश देती हूं, जिस पर हम काम कर रहे हैं। इसमें मैक्सिको के हितों की रक्षा के लिए टैरिफ और गैर टैरिफ उपाय शामिल हैं। बलपूर्वक नहीं सब कुछ तर्क और सही तरीके से होगा। मैक्सिको की राष्ट्रपति शीनबाम ने अमेरिका की ओर से लगाए गए आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने मैक्सिको के आपराधिक संगठनों के साथ संबंध के आरोप लगाए हैं। हम इसे खारिज करते हैं। चार महीनों में हमारी सरकार ने 40 टन से अधिक ड्रग्स जब्त किए हैं। 10 हजार से अधिक लोगों को पकड़ा है।

ताजा पोस्ट से भड़की सरकार और बढ़ा तनाव, कनाडा को अमेरिका का हिस्सा बनाने पर तुले ट्रंप

वाशिंगटन। अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हाथ धोकर कनाडा के पीछे पड़ गए हैं। ट्रंप, कनाडा को आर्थिक ताकत के बल पर अमेरिका का हिस्सा बनाने की इच्छा व्यक्त कर चुके हैं। अब एक ताजा सोशल मीडिया पोस्ट में कनाडा और अमेरिका का साझा नक्शा पोस्ट किया और उसे संयुक्त राज्य अमेरिका लिखा। ट्रंप के इस पोस्ट पर कई कनाडाई नेताओं ने कड़ी नाराजगी जाहिर की। गौरतलब है कि ट्रंप ने फ्लोरिडा स्थित अपने आवास में मीडिया से बात करते हुए कनाडा को अमेरिका में मिलाने और उसे अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की इच्छा व्यक्त की थी। कनाडा के पीएम ने जताई नाराजगी अब कनाडा और अमेरिका का साझा नक्शा पोस्ट कर उसे संयुक्त राज्य अमेरिका बताने वाली ट्रंप की पोस्ट पर कनाडा के नेताओं ने नाराजगी जताई। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने ट्रंप के बयान पर कहा कि कनाडा के अमेरिका का हिस्सा बनने की कोई संभावना नहीं है। कनाडा की विदेश मंत्री मेलानी जॉली ने कहा कि ट्रंप का बयान ‘कनाडा को एक मजबूत देश बनाने वाली चीजों के बारे में समझ की कमी को दिखाती है। हमारी अर्थव्यवस्था मजबूत है। हमारे लोग मजबूत हैं।’ उन्होंने कहा, ‘हम खतरों के सामने कभी पीछे नहीं हटेंगे।’ ट्रंप के बयानों से बढ़ा तनाव उल्लेखनीय है कि ट्रंप ने पनामा नहर और ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के लिए सैन्य बल के इस्तेमाल की संभावना से भी इनकार नहीं किया। उन्होंने दोनों पर अमेरिका के नियंत्रण को अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया। ट्रंप ने कहा कि पनामा नहर हमारे देश के लिए महत्वपूर्ण है। हमें राष्ट्रीय सुरक्षा उद्देश्यों के लिए ग्रीनलैंड की भी जरूरत है।’ गौरतलब है कि ग्रीनलैंड डेनमार्क का एक स्वायत्त क्षेत्र है, जो लंबे समय से अमेरिका का सहयोगी और नाटो का संस्थापक सदस्य है। ट्रम्प ने डेनमार्क पर टैरिफ लगाने का भी प्रस्ताव दिया है कि अगर डेनमार्क, ग्रीनलैंड को खरीदने के उनके प्रस्ताव को अस्वीकार करता है तो वे डेनमार्क पर टैरिफ लगा सकते हैं। डोनाल्ड ट्रंप के बयानों पर पनामा और डेनमार्क ने दी प्रतिक्रिया पनामा के विदेश मंत्री जेवियर मार्टिनेज-आचा ने ट्रम्प की धमकी को दृढ़ता से खारिज करते हुए कहा, ‘नहर पनामा के नियंत्रण में है, और यह हमारे ही नियंत्रण में रहेगी।’ वहीं डेनमार्क ने भी दृढ़ता से कहा कि ग्रीनलैंड ‘बिक्री के लिए नहीं है।’ डेनमार्क के प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन ने मंगलवार रात कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि जब हम करीबी सहयोगी और साझेदार हैं, तो वित्तीय मुद्दों पर एक दूसरे पर टकराना अच्छी बात नहीं है।’

अनीता आनंद और जॉर्ज चहल के नाम छाए, कनाडा में ट्रूडो के इस्तीफे के बाद दो भारतवंशी भी पीएम की दौड़ में

ओटावा। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के इस्तीफे के बाद नए दावेदारों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। पीएम पद की रेस में कनाडा मूल के नेताओं के साथ ही दो भारतवंशी भी शामिल हैं। इन भारतवंशी सांसदों में पहला नाम ट्रूडो मंत्रिमंडल में शामिल पूर्व रक्षा मंत्री और मौजूदा परिवहन और आतंरिक व्यापार मंत्री अनीता आनंद का है। जबकि दूसरा नाम भारतवंशी लिबरल पार्टी के सांसद जॉर्ज चहल का है। आइए जानते हैं कौन हैं भारतवंशी सांसद। कनाडा में पीएम पद की रेस में भारतवंशी सांसद अनीता आनंद का भी चर्चा में है। अनीता आनंद ट्रूडो मंत्रिमंडल में शामिल हैं। वह कनाडा की रक्षा मंत्री रह चुकी हैं। साथ ही मौजूदा समय में परिवहन और आंतरिक व्यापार मंत्री हैं। अनीता का जन्म 1967 में नोवा स्कोटिया में भारतीय माता-पिता के घर हुआ था, जो दोनों चिकित्सा पेशेवर थे। उनकी मां सरोज पंजाब से और पिता एस.वी. आनंद तमिलनाडु से थे। अनीता टोरंटो विश्वविद्यालय में कानून की प्रोफेसर रह चुकी हैं। उन्होंने टोरंटो के पास ओकविले से 2019 में सांसद का चुनाव लड़ा और जीत गईं। इसके बाद उनको सार्वजनिक सेवा और खरीद मंत्री के रूप में चुना गया था। कोविड महामारी के दौरान उन्होंने टीके खरीदने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रक्षा मंत्री रहते हुए उन्होंने यूक्रेन की भी मदद की। साथ ही अनीता ने व्यापक शोध के साथ एयर इंडिया जांच आयोग की सहायता की। आयोग ने 23 जून 1985 को एयर इंडिया कनिष्क उड़ान 182 की बमबारी की जांच की, जिसमें सभी 329 लोग मारे गए थे। ये मामला खालिस्तानियों से जुड़ा था। जॉर्ज चहल भी पीएम पद की रेस में कनाडा पीएम पद की रेस में दूसरे भारतवंशी के तौर पर लिबरल सांसद जॉर्ज चहल का नाम भी शामिल है। हालांकि कई सांसदों ने उनको अंतरिम नेता नियुक्त करने की सिफारिश की है। अगर चहल को अंतरिम नेता चुना जाता है, तो वे पीएम की दौड़ से बाहर हो जाएंगे। क्योंकि कनाडा के नियमों के मुताबिक अंतरिम नेता प्रधानमंत्री पद का चुनाव नहीं लड़ सकते। जॉर्ज चहल ने पिछले सप्ताह कॉकस सहयोगियों को पीएम पद के लिए अनुरोध के साथ एक पत्र लिखा था। चहल ने ट्रूडो से पीएम पद छोड़ने और पार्टी से चुनाव कराने की मांग की थी। पेशे से वकील चहल ने कैलगरी सिटी काउंसलर के रूप में विभिन्न समितियों में काम किया है। चहल प्राकृतिक संसाधनों पर स्थायी समिति के अध्यक्ष और सिख कॉकस के अध्यक्ष भी हैं। इन नेताओं के नाम भी पीएम पद की दौड़ में क्रिस्टिया फ्रीलैंड कनाडा की पूर्व वित्त मंत्री और उप प्रधानमंत्री रहीं क्रिस्टिया फ्रीलैंड को लंबे समय तक जस्टिन ट्रूडो के समर्थक के तौर पर देखा गया है। हालांकि, अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप सरकार के आने के बाद वित्तीय मामलों और कई योजनाओं को लेकर उनकी जस्टिस ट्रूडो से अनबन की खबरें सामने आईं। इसी के चलते उन्होंने अपने पद छोड़ दिए। माना जा रहा है कि ट्रूडो के इस्तीफा देने की स्थिति में लिबरल पार्टी उन्हें पीएम पद के लिए आगे कर सकती है। भारतीय मूल के कनाडाई सांसद चंद्रा आर्या ने भी फ्रीलैंड को ट्रूडो का उत्तराधिकारी करार दिया है। डॉमिनिक लीब्लांक लिबरल सरकार में ही कैबिनेट मंत्री डॉमिनिक लीब्लांक उन चुनिंदा नेताओं में से हैं, जो कि मुश्किलों के बावजूद डटकर उनके साथ खड़े हैं। ऐसे में ट्रूडो के समर्थन में खड़े लिबरल पार्टी के नेता अगले प्रधानमंत्री के लिए लीब्लांक का समर्थन कर सकते हैं। एक वकील और नेता लीब्लांक फिलहाल मौजूदा सरकार में वित्त और अंतरविभागीय मंत्रालय की कमान संभाल रहे हैं। फ्रीलैंड के इस्तीफा देने के बाद उन्हें वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई। उन्हें पिछले एक दशक में ट्रूडो सरकार में कई मंत्रीपद सौंपे जा चुके हैं। मार्क कार्नी कनाडा के पीएम पद के लिए नेताओं से इतर एक नाम ऐसा भी है, जिसका राजनीति से अब तक नाता नहीं रहा है। यह नाम है मार्क कार्नी का, जो कि पहले बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक ऑफ कनाडा के गवर्नर रह चुके हैं। मार्क कार्नी ने बीते दिनों में राजनीति में आने की इच्छा जताई है और इसके लिए वह लिबरल पार्टी के नेताओं के संपर्क में भी हैं। ट्रूडो के पीएम पद छोड़ने पर लिबरल नेता उनका नाम आगे बढ़ा सकते हैं। क्रिस्टी क्लार्क राष्ट्रीय स्तर पर लिबरल पार्टी की नेता और कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत की पूर्व प्रीमियर (मुख्यमंत्री के बराबर का पद) क्रिस्टी क्लार्क का नाम भी पीएम पद के उम्मीदवारों में शामिल है। वे 2011 से 2017 तक ब्रिटिश कोलंबिया की प्रीमियर रहीं। 58 वर्षीय क्लार्क प्रांतीय स्तर पर बीसी यूनाइटेड पार्टी का नेतृत्व भी करती हैं। ट्रूडो ने दिया इस्तीफा जस्टिस ट्रूडो 2015 में प्रधानमंत्री बने थे। उससे पहले दस साल तक कनाडा में कंजर्वेटिव पार्टी का शासन था। शुरुआत में उनकी नीतियों को सराहा गया था। लेकिन हाल के वर्षों में बढ़ती खाद्य और आवास की कीमतों और बढ़ते आप्रवासन के कारण उनका समर्थन घट गया। ट्रूडो की सहयोगी पार्टी और जगमीत सिंह के नेतृत्व वाली एनडीपी ने बीते दिनों ट्रूडो सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया था। एक हालिया सर्वे में दावा किया गया कि 73 प्रतिशत कनाडा के नागरिक चाहते हैं कि ट्रूडो प्रधानमंत्री और लिबरल पार्टी के नेता के पद से इस्तीफा दें। इनमें 43 प्रतिशत लिबरल मतदाता भी शामिल हैं। इसके बाद ट्रूडो ने सोमवार रात को प्रधानमंत्री पद से अपने इस्तीफे का एलान कर दिया। अभी यह साफ नहीं है कि ट्रूडो प्रधानमंत्र

पार्टी के भीतर ही बढ़ रहा विरोध, कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो जल्द दे सकते हैं इस्तीफा

ओटावा। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो जल्द ही लिबरल पार्टी के नेता पद से इस्तीफा दे सकते हैं। कनाडा के समाचारपत्र द ग्लोब एंड मेल ने रविवार को अपनी रिपोर्ट्स में ऐसा दावा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिन ट्रूडो अगले एक या दो दिनों के भीतर पद छोड़ सकते हैं। दरअसल ट्रूडो की लोकप्रियता में हाल के समय में भारी गिरावट आई है और उन्हें पार्टी के भीतर भी विरोध झेलना पड़ रहा है। विभिन्न सर्वे में दावा किया गया है कि आगामी चुनाव में पिएरे पोलिएवरे के नेतृत्व वाली कंजर्वेटिव पार्टी सत्ता में आ सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अभी ये तय नहीं है कि ट्रूडो कब इस्तीफा देंगे, लेकिन माना जा रहा है कि बुधवार को होने वाली राष्ट्रीय कॉकस बैठक से पहले ट्रूडो अपना पद छोड़ सकते हैं। सहयोगी पार्टी एनडीपी ने भी छोड़ दिया था साथ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जस्टिस ट्रूडो को सत्ताधारी लिबरल पार्टी के नेता के पद से भी हटाने पर विचार किया जा रहा है। अभी ये साफ नहीं है कि ट्रूडो इस्तीफे के बाद तुरंत पद छोड़ देंगे या फिर नए नेता की नियुक्ति तक पद पर बने रहेंगे। जस्टिस ट्रूडो बीते एक दशक से कनाडा की सत्ता पर काबिज हैं, लेकिन बीते कुछ समय में उनकी लोकप्रियता में भारी गिरावट आई है। ट्रूडो की सहयोगी पार्टी और जगमीत सिंह के नेतृत्व वाली एनडीपी ने बीते दिनों ट्रूडो सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया था। एक हालिया सर्वे में दावा किया गया कि 73 प्रतिशत कनाडा के नागरिक चाहते हैं कि ट्रूडो प्रधानमंत्री और लिबरल पार्टी के नेता के पद से इस्तीफा दें। इनमें 43 प्रतिशत लिबरल मतदाता भी शामिल हैं। इन वजहों से ट्रूडो से नाराज हैं कनाडा के लोग कनाडा में जस्टिन ट्रूडो की सरकार की लोकप्रियता में गिरावट की कई वजह हैं। इनमें प्रमुख वजहों में अर्थव्यवस्था, कनाडा में घरों की कीमतों में जबरदस्त उछाल, अप्रवासी मुद्दा आदि शामिल हैं। कोरोना महामारी के बाद कनाडा में महंगाई 8 फीसदी तक बढ़ गई थी। हालांकि फिलहाल यह दो प्रतिशत से नीचे है। कनाडा में बेरोजगारी भी बड़ा मुद्दा है, जो फिलहाल छह फीसदी के आसपास है। ट्रूडो सरकार के कार्बन टैक्स कार्यक्रम की भी विपक्ष द्वारा आलोचना की जा रही है। कनाडा में महंगे घर एक बड़ी समस्या है। कनाडा के अधिकतर बड़े शहरों में घर खरीदना आम लोगों के बजट के बाहर हो गया है। लंबे समय से यह समस्या बनी हुई है और सरकार इसे नियंत्रित कर पाने में नाकाम रही है। ये भी एक बड़ी वजह है कि लोगों में ट्रूडो सरकार के प्रति गहरी नाराजगी है। कनाडा में अप्रवासन भी बड़ा मुद्दा है। हालांकि ट्रूडो सरकार ने हाल के समय में अप्रवासन को लेकर नई नीतियां बनाई हैं, जिससे अप्रवासियों की संख्या को नियंत्रित किया जा सके। हालांकि अभी भी लोगों की नाराजगी कम नहीं हुई है। अप्रवासियों की बढ़ती संख्या की वजह से कनाडा की स्वास्थ्य व्यवस्था और अन्य सेवाओं पर भारी दबाव पड़ा है। कनाडा में खालिस्तानियों के बढ़ते प्रभाव को लेकर भी कई कनाडाई नागरिक नाराज हैं। हाल ही में कनाडा की डिप्टी पीएम और वित्त मंत्री ने भी इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद ट्रूडो पर भी इस्तीफा देने का दबाव बढ़ा है।

जीवनयापन की लागत कम करना है प्राथमिकता, कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने डोमिनिक को बनाया नया वित्त मंत्री

ओटावा। कनाडा के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री डोमिनिक रहे लेब्लांक ने सोमवार को ओटावा के रिड्यू हॉल में वित्त मंत्री पद की शपथ ली। नए वित्त मंत्री ने समारोह के बाद कहा कि उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता कनाडाई लोगों के लिए जीवनयापन की लागत कम करना और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ संबंधों को मजबूत करना होगा। प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के खास सहयोगी लेब्लांक हाल ही में अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ट्रूडो संग रात्रिभोज में शामिल हुए थे। 57 वर्षीय न्यू ब्रंसविक पहली बार 2000 में चुने सांसद गए, वह पूर्व गवर्नर-जनरल रोमियो लेब्लांक के बेटे हैं। लेब्लांक ने कहा कि वह अंतर-सरकारी मामलों के मंत्री का पद अपने पास रखेंगे। इससे पहले क्रिस्टिया फ़्रीलैंड ने ट्रूडो को लिखे एक पत्र में सोमवार सुबह अचानक वित्त मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने कहा था कि वे देश के लिए सर्वोत्तम रास्ते को लेकर असमंजस में हैं। लिबरल सरकार का आर्थिक अपडेट सोमवार दोपहर जारी किया गया, जिससे पता चला कि घाटा 31 मार्च को समाप्त वित्तीय वर्ष के लक्ष्य से बहुत बड़ा था। अपने त्याग पत्र में फ्रीलैंड ने खुलासा किया कि ट्रूडो ने उन्हें पिछले सप्ताह सूचित किया था कि वह अब उन्हें इस भूमिका में नहीं देखना चाहते हैं और इसके बजाय उन्हें एक और कैबिनेट पद की पेशकश की थी। ट्रूडो ने इस्तीफे पर तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। ट्रूडो सरकार कथित तौर पर प्रतिक्रिया में बढ़ी हुई सीमा सुरक्षा और निगरानी में निवेश करने की योजना विकसित कर रही है, लेकिन ट्रंप के सख्त रुख का दबाव भी महसूस कर रही है। फ्रीलैंड द्वारा दिए जाने वाले आर्थिक अपडेट में सरकार सोमवार को कनाडा की संसद में सीमा योजना का विवरण पेश करने वाली थी। फ्रीलैंड का भी सरकारी खर्च को लेकर ट्रूडो के साथ मतभेद था और उनके इस्तीफा देने के बाद अपडेट का विवरण सामने आया। ये अपडेट तब आए हैं, जब ट्रूडो की लिबरल पार्टी चुनाव की तैयारी कर रही है जो अगले साल अक्टूबर के अंत से पहले होना चाहिए। ट्रूडो ने कहा है कि उनकी योजना पार्टी के शीर्ष पर बने रहने की है। उदारवादियों के पास पूर्ण बहुमत नहीं है, यदि सहयोगी न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी अपना समर्थन खींच लेती है तो इससे किसी भी समय एक नया चुनाव हो सकता है। इस बीच ट्रंप की जीत ने घरेलू चिंताओं को जन्म दिया है कि कनाडा वैश्विक सत्ता-विरोधी रुझानों के अधीन हो सकता है, जो लोकलुभावन पियरे पोइलिव्रे के नेतृत्व वाली कंजर्वेटिव पार्टी को 2015 के बाद पहली बार सत्ता में देख सकता है। लगभग एक दशक तक सत्ता में रहने के बाद सितंबर में ट्रूडो की अनुमोदन रेटिंग घटकर केवल 33 प्रतिशत रह गई।

सीमा पर बढ़ाई सुरक्षा, ट्रंप की राष्ट्रपति चुनाव में जीत के बाद हाई अलर्ट पर कनाडा

वाशिंगटन/ओटावा. अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की जीत के बाद कनाडा की सरकार हाई अलर्ट पर है। दरअसल ट्रंप की जीत के बाद कनाडा को डर है कि बड़ी संख्या में शरणार्थी अमेरिका छोड़कर कनाडा आ सकते हैं। यही वजह है कि कनाडा की सरकार ने अपनी सीमाओं की निगरानी बढ़ा दी है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है। गौरतलब है कि डोनाल्ड ट्रंप ने अपने चुनाव अभियान के दौरान अमेरिका में अवैध अप्रवासियों का मुद्दा जोर-शोर से उठाया था और उन्होंने राष्ट्रपति चुने जाने पर अवैध अप्रवासियों को देश से बाहर करने का वादा भी किया था। अमेरिका से कनाडा जा सकते हैं अप्रवासी अब चूंकि राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप ने जीत दर्ज की है तो कनाडा को डर है कि बड़ी संख्या में अवैध अप्रवासी ट्रंप के डर से अमेरिका छोड़कर कनाडा आ सकते हैं। कनाडा की सरकार को आशंका है कि अमेरिका में अप्रवासियों के खिलाफ माहौल के चलते उनके देश में शरण मांगने वाले शरणार्थियों की संख्या में तेजी आ सकती है। कनाडा की पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि ‘हम हाई अलर्ट पर हैं। हम सभी की निगाहें सीमा पर टिकी हैं कि क्या होने वाला है…क्योंकि हम जानते हैं कि आव्रजन पर ट्रंप के सख्त रुख के चलते कनाडा में अवैध और अनियमित प्रवास बढ़ सकता है।’ कनाडा की ये हैं मुश्किलें कनाडा की मुश्किल ये है कि अमेरिका और कनाडा की सीमाएं काफी बड़े इलाके में लगती हैं। ऐसे में पूरी सीमा की निगरानी और अवैध रूप से सीमा पार करने वाले अप्रवासियों को गिरफ्तार करना कनाडा की सरकार के लिए बेहद मुश्किल काम होने जा रहा है। कनाडा की उप-प्रधानमंत्री क्रिस्टिया फ्रीलैंड ने इस मुद्दे पर शुक्रवार को मंत्रियों के साथ एक बैठक भी की। मंत्रियों के इस समूह को अमेरिका में ट्रंप प्रशासन के साथ तालमेल बिठाने और दोनों देशों के बीच के विभिन्न मुद्दों पर सहमति की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अप्रवासियों के सीमा पार से आने पर कनाडा की उप-प्रधानमंत्री ने कहा कि स्थिति का सामना करने के लिए कनाडा तैयार है। 

कनाडा में भारतीय लड़की की मौत, वॉक-इन ओवन में धधकते हुए मिले शरीर के टुकड़े

ओटावा  कनाडा के हैलिफैक्स में वॉलमार्ट में भारतीय लड़की गुरसिमरन कौर की मौत का मामला उलझता जा रहा है। 19 साल की गुरसिमरन की मौत की स्थानीय पुलिस सभी एंगल से जांच कर रही है लेकिन अभी तक इस नतीजे पर नहीं पहुंची है कि 19 साल की लड़की उस ओवन के अंदर कैसे गई, जिससे उसकी जलकर दर्दनाक मौत हुई। इस बात ने भी जांच को उलझा दिया है कि इस बड़े ओवन को बाहर से बंद नहीं किया जा सकता है। 19 साल की कर्मचारी गुरसिमरन की जली हुई लाश सुपरस्टोर वॉलमार्ट के वॉक-इन ओवन के अंदर जली हुई पाई गई थी। पुलिस की जांच के अनुसार गुरसिमरन कौर के जले हुए अवशेष शनिवार शाम को पूर्वी कनाडा में नोवा स्कोटिया के हैलिफैक्स में वॉलमार्ट के बेकरी विभाग में एक ओवन के अंदर पाए गए। इस दर्दनाक हादसे की काफी चर्चा है। ओवन से रिसाव देख चला पता गुरसिमरन अपनी मां के साथ ही वॉलमार्ट में कर रही थी। शनिवार को उसे देर तक सुपरस्टोर में ना देखकर मां ने उसे तलाशना शुरू किया और कर्मचारियों से पूछा। कर्मचारियों ने लगा कि गुरसिमरन सुपरस्टोर के किसी हिस्से में काम कर रही होगी। उसने अपनी बेटी को फोन करने की किया लेकिन उसका फोन भी नहीं लग पाया। गुरसिमरन का फोन ना लगने पर उसकी मां ऑनसाइट एडमिन के पास पहुंची। इसके कुछ घंटे बाद उसके जले हुए अवशेष बेकरी में वॉक-इन ओवन के अंदर मिले। गुरसिमरन की मां ने वॉक-इन ओवन तब खोला, जब किसी ने उसे ओवन से हो रहे अजीब रिसाव के बारे में बताया। गोफंड मी ने गुरसिमरन के परिवार की मदद के लिए अभियान चलाते हुए करीब 67,000 डॉलर की राशि जुटाई है। गोफंड मी ने बताया है कि गुरसिमरन के पिता और भाई भारत में हैं, उन्हें लाने की कोशिश हो रही है। पुलिस ने घटना पर क्या बताया हैलिफैक्स पुलिस के मुताबिक, शनिवार रात करीब साढ़े नौ बजे वॉलमार्ट में लड़की के बेकरी में ओवन के अंदर बंद होने की रिपोर्ट मिलने के बाद वहां पुलिस को भेजा गया। हैलिफैक्स पुलिस के पहुंचने तक गुरसिमरन को ओवन से निकाल लिया गया था। सीबीसी न्यूज के मुताबिक, यह स्पष्ट नहीं है कि गुरसिमरन ओवन में कैसे फंस गई क्योंकि इस ओवन को बाहर से बंद नहीं किया जा सकता। हैलिफैक्स पुलिस घटना की जांच कर रही है। अभी यह नहीं बताया है कि गुरसिमरन की मौत में कोई आपराधिक एंगल है या नहीं। कांस्टेबल मार्टिन क्रॉमवेल ने सीबीसी न्यूज से बातचीत में कहा कि जांच जटिल है और हम बस जनता को हमारी जांच में धैर्य रखने की अपील करते हैं। काफी बड़ा है स्टोर का ओवन वॉलमार्ट के सूत्रों ने बताया है कि उनके बेकरी विभाग का ओवन इतना बड़ा है कि एक व्यक्ति अंदर जा सकता है। वॉलमार्ट कनाडा के प्रवक्ता ने कहा है कि कर्मचारी की दुखद मौत से कंपनी को दुख हुआ है। फिलहाल स्टोर अस्थायी रूप से बंद है और हम जांच के दौरान अधिकारियों के साथ सहयोग कर रहे हैं।

भारत खालिस्तान समर्थक भारतीय मूल केकानाडाई नागरिकों के OCI रद्द कर, संपत्ति के अधिकार को खत्म कर सकता है

नई दिल्ली भारत और कनाडा के बीच तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। अब कनाडा ने भारत के खिलाफ संभावित प्रतिबंधों के संकेत दिए हैं। इधर, भारत ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। हाल ही में कनाडा ने एक मामले की जांच में कनाडा में भारतीय उच्चायुक्त रहे संजय कुमार वर्मा को ‘पर्सन ऑफ इंटरेस्ट’ बनाया था। इसका मतलब ऐसे व्यक्ति से होता है, जो संदिग्ध है, लेकिन अब तक गिरफ्तार नहीं किया गया है। दोनों ही देशों ने 6-6 राजनयिकों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। दोनों देशों में तनाव बढ़ने के बीच कनाडा की विदेश मंत्री मेलानी जोली ने भारत के खिलाफ पाबंदी लगाने की संभावना को खारिज नहीं किया और कहा कि ‘सभी विकल्प विचाराधीन हैं’। भारत ऐसे दे सकता है जवाब  रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल, कनाडा में लाखों भारतीय छात्र हैं। अगर भारत ने छात्रों पर कनाडा में शिक्षा लेने पर रोक लगा दी, तो इसका गहरा असर हो सकता है। यह फैसला कनाडा के शिक्षा से जुड़ी आर्थिक व्यवस्था पर गहरी चोट दे सकता है। इसके अलावा भारत खालिस्तान समर्थक भारतीय मूल के सभी कानाडाई नागरिकों के OCI यानी ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया कार्ड रद्द कर सकता है। इनके साथ भारत खालिस्तान समर्थकों के संपत्ति के अधिकार को खत्म कर सकता है। साथ ही वह नए वीजा में देरी और गहनता से जांच करना बढ़ा सकता है। ऐसे में खालिस्तान समर्थकों पर दबाव पड़ सकता है। भारत भारतीय मूल के ऐसे कनाडाई नागरिकों के मल्टिपल एंट्री वीजा पर भी रोक लगा सकता है। अगर यह फैसला लिया जाता है, तो असर भारतीय कनाडाई समुदाय पर पड़ सकता है। इससे कनाडा की स्थानीय राजनीति पर भी असर हो सकता है। कनाडा को जवाब में भारत भी व्यापार स्तर पर प्रतिबंध लगा सकता है। टॉप 10 ट्रेडिंग पार्टनर होने के नाते भारत कनाडा की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। साथ ही भारत में निवेश वाले कनाडा के आर्थिक संस्थानों और पेंशन फंड को फ्रीज कर सकता है। कनाडा की पुलिस ने लगाए थे ये आरोप कनाडा की सार्वजनिक प्रसारणकर्ता कनाडियन ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (सीबीसी) की रिपोर्ट के अनुसार, देश के राष्ट्रीय पुलिस बल रॉयल कनाडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) के प्रमुख ने भारत के संदर्भ में चौंकाने वाले आरोप लगाए कि भारत सरकार के एजेंट कनाडा में हत्याओं सहित ‘व्यापक हिंसा’ में भूमिका निभा रहे हैं और चेतावनी दी थी कि इससे ‘देश की सार्वजनिक सुरक्षा को गंभीर खतरा’ है। उन्होंने आरोप लगाया, ‘इनमें गोपनीय सूचना जुटाने की तकनीक, दक्षिण एशियाई कनाडाई लोगों को निशाना बनाकर उनके साथ दंडात्मक व्यवहार करना और हत्या सहित एक दर्जन से अधिक धमकी भरे और हिंसक कृत्यों में संलिप्तता शामिल है।’ कनाडा के प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के साथ काम करने के उनकी सरकार के प्रयास के कोई परिणाम नहीं निकले। उन्होंने कहा, ‘इसलिए, इस सप्ताहांत, कनाडाई अधिकारियों ने एक असाधारण कदम उठाया। उन्होंने आरसीएमपी के उन साक्ष्यों को साझा करने के लिए भारतीय अधिकारियों से मुलाकात की, जिनके आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया कि भारत सरकार के छह एजेंट आपराधिक गतिविधियों में शामिल व्यक्ति हैं।’ RCMP ने आरोप लगाया है कि बिश्नोई गिरोह के तार भारत सरकार के उन ‘एजेंटों’ से जुड़े हैं, जो देश में दक्षिण एशियाई समुदाय, विशेष रूप से ‘खालिस्तान समर्थक तत्वों’ को निशाना बना रहे हैं। भारत सरकार के सूत्रों ने कहा कि कनाडाई अधिकारियों का यह दावा सच नहीं है कि कनाडा ने निज्जर मामले में भारत को प्रामाणिक सबूत दिए हैं।

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