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चैत्र नवरात्र की चतुर्थी तिथि पर चौथे दिन ‘आयुष्मान’ योग समेत बन रहे हैं 6 अद्भुत संयोग

नई दिल्ली वैदिक पंचांग के अनुसार, आज चैत्र नवरात्र की चतुर्थी एवं पंचमी तिथि है। चैत्र नवरात्र की चतुर्थी तिथि पर मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा एवं साधना की जाती है। साथ ही मां कूष्मांडा के निमित्त नवरात्र के चौथे दिन का व्रत रखा जाता है। ज्योतिषियों की मानें तो चैत्र नवरात्र के चतुर्थी और पंचमी तिथि पर दुर्लभ आयुष्मान योग समेत कई मंगलकारी योग बन रहे हैं। इन योग में मां कूष्मांडा (Navratri 2025 Day 4 Ayushman Yoga) की पूजा करने से साधक को मनोवांछित फल की प्राप्ति होगी। आइए, शुभ योग और मुहूर्त जानते हैं-   शुभ मुहूर्त चैत्र नवरात्र की पंचमी तिथि रात 11 बजकर 49 मिनट है। इसके बाद षष्ठी तिथि शुरू होगी। चैत्र नवरात्र की पंचमी तिथि पर जगत जननी आदिशक्ति देवी मां दुर्गा के पंचम स्वरूप मां स्कंदमाता की भक्ति भाव से पूजा की जाती है। रवि योग चैत्र नवरात्र के चौथे दिन रवि योग (Navratri Ravi Yoga) का भी संयोग बन रहा है। रवि योग सुबह 06 बजकर 10 मिनट से लेकर 08 बजकर 49 मिनट तक है। इस योग में देवी मां कूष्मांडा की पूजा-भक्ति करने से सभी प्रकार के शारीरिक एवं मानसिक कष्टों से मुक्ति मिलेगी। साथ ही आरोग्य जीवन का वरदान मिलेगा। आयुष्मान योग   चैत्र नवरात्र के चौथे और पांचवें दिन दुर्लभ आयुष्मान योग (Navratri Ayushman Yoga) का संयोग बन रहा है। इस योग का संयोग देर रात 02 बजकर 50 मिनट तक है। आयुष्मान योग में मां कूष्मांडा और मां स्कंदमाता की पूजा करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होगी। सर्वार्थ सिद्धि योग चैत्र नवरात्र के पांचवें दिन सर्वार्थ सिद्धि योग (Navratri Yoga) का भी निर्माण हो रहा है। सर्वार्थ सिद्धि योग दिन भर है। इस दौरान मां स्कंदमाता की पूजा करने से सभी प्रकार के शुभ कामों में सिद्धि मिलती है। नक्षत्र एवं करण चैत्र नवरात्र की चतुर्थी तिथि यानी चौथे दिन कृत्तिका और रोहिणी नक्षत्र का संयोग है। इसके साथ ही बव, बालव और कौलव करण के योग बन रहे हैं। ज्योतिष बव, बालव और कौलव करण को शुभ मानते हैं। इन योग में जगत जननी देवी मां दुर्गा और उनके रूपों की पूजा करने से सुख और सौभाग्य में वृ्द्धि होगी। पंचांग     सूर्योदय – सुबह 06 बजकर 10 मिनट पर     सूर्यास्त – शाम 06 बजकर 40 मिनट पर     चन्द्रोदय- सुबह 08 बजकर 42 मिनट पर     चंद्रास्त- शाम 10 बजकर 25 मिनट पर     ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 04 बजकर 38 मिनट से 05 बजकर 24 मिनट तक     विजय मुहूर्त – दोपहर 02 बजकर 30 मिनट से 03 बजकर 20 मिनट तक     गोधूलि मुहूर्त – शाम 06 बजकर 38 मिनट से 07 बजकर 01 मिनट तक     निशिता मुहूर्त – रात्रि 12 बजकर 01 मिनट से 12 बजकर 47 मिनट तक  

चैत्र नवरात्र में कर लें ये आसान उपाय, घर को खुशहाली से भर देंगी मां भगवती

चैत्र नवरात्र की शुरुआत होने जा रही है. चैत्र नवरात्र के नौ दिनों में मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा की जाती है. काफी संख्या में लोग चैत्र नवरात्र में व्रत भी करते हैं. कुछ उपाय ऐसे बताए गए हैं जिन्हें अगर नवरात्र में करते हैं तो देवी मां की असीम कृपा अपने भक्त पर बरसती है. इन उपायों के जरिए घर में सुख-शांति का वास होता है. परिवार में खुशहाली बनी रहती है. आर्थिक समेत सभी तरह की परेशानियां दूर हो जाती हैं. चैत्र नवरात्र में लौंग से जुड़ा एक उपाय आपके लिए काफी मददगार साबित हो सकता है.  इस उपाय को करने के लिए ज्योतिषविद के अनुसार,  अपनी उम्र के बराबर लौंग लें यानी जितने साल के आप हैं, उतनी ही लौंग लें. फिर इसे काले धागे में बांधकर माला बना लें. इस माला को नवरात्र में किसी भी दिन देवी को अर्पित करें और मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करें. मनोकामना पूरी होने पर माला को जल प्रवाह कर दें. धन की बढ़ोतरी का उपाय अगर घर में आर्थिक तंगी चल रही है या परिवार पर कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है तो शुक्रवार के दिन 5 लौंग और 5 कौड़ियां लेकर लाल कपड़े में बांध लें. इसके बाद इस पोटली को तिजोरी या धन के स्थान पर रख दें. यह उपाय धन लाभ को बढ़ा सकता है. नवरात्र के शुभ अवसर पर 21 लौंग जलाकर मां लक्ष्मी का ध्यान करें. कहते हैं कि ऐसा करने से रुका हुआ धन वापस मिल जाता है. नवरात्र में क्या ध्यान रखना है जरूरी दुर्गा मां के सभी 9 स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए. और जो नियम बताए गए हैं उनका पालन करना चाहिए. घर में साफ-सफाई का ध्यान रखना चाहिए. खासतौर पर पूजा घर के आसपास बिल्कुल भी गंदगी नहीं होनी चाहिए. चैत्र नवरात्र के शुरू होते ही सबसे पहले घर के मंदिर में पूजा का स्थान बनाएं. मंदिर को स्वच्छ करके एक चौकी बनाएं और उसमें मां को विराजमान कराएं. मंदिर की थोड़ी सजावट भी करें. रोज ताजे फूल से देवी मां की पूजा करें. हमेशा स्नान के बाद ही पूजा करने के लिए बैठें. पूजा और व्रत के नियम अगर आप नौ दिनों तक उपवास कर रहे हैं तो अच्छी बात है, लेकिन आप किसी कारण नौ दिनों तक उपवास नहीं कर पा रहे हैं तो आप पहले दिन और अष्टमी को उपवास कर सकते हैं. जो लोग नौ दिनों तक व्रत करते हैं इन्हें नमक, अनाज, लहसुन, प्याज, मांसाहारी खाने से दूर रहना चाहिए. हमेशा शुद्ध चीजें ही खाएं. अखंड ज्योत प्रज्वलित के नियम अगर आप अखंड ज्योति जलाते हैं तो इस बात का आपको ध्यान रखना जरूरी है कि वह ज्योत बीच में बुझ न जाए. अखंड ज्योति जलाना बहुत शुभ माना गया है. यह देवी के शक्ति के सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है. अगर आप अखंड ज्योत नहीं जलाते हैं तो मां की कृपा पाने के लिए आप रोज सुबह और शाम में मां के सामने घी का दीया जला सकते हैं. मंत्रों का जाप अगर आप मां के नौ अक्षर यानी नवार्ण मंत्र का जाप कर रहे हैं तो इसका उचित उच्चारण करना जरूरी है. यह मंत्र इस प्रकार है ‘ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै’. इस मंत्र  के जाप से मां दुर्गा की असीम कृपा प्राप्त होती है. दुर्गा सप्तशती पाठ नवरात्र के दौरान दुर्गा सप्तशती का पाठ करने या सप्तशती पाठ को सुनने से कष्ट दूर होते हैं. जीवन से नकारात्मकता दूर होती है और सकारात्मकता का वास होता है. आपके सभी काम बनने लग जाते हैं. घर में सुख-समृद्धि का का वास होता है.  

चैत्र नवरात्रि में बनने जा रहा दुर्लभ संयोग, इन राशियों की चमकेगी किस्मत

वैदिक पंचांग के अनुसार, 30 मार्च से चैत्र नवरात्र की शुरुआत होगी। यह पर्व हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से लेकर नवमी तिथि तक मनाया जाता है। इस दौरान जगत जननी आदिशक्ति मां दुर्गा और उनके नौ रूपों की पूजा की जाती है। साथ ही चैत्र नवरात्र (Chaitra Navratri 2025) पर नौ दिनों तक व्रत रखा जाता है। धर्मिक मत है कि जगत की देवी मां दुर्गा की पूजा करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है। साथ ही जीवन में व्याप्त सभी प्रकार के संकटों से मुक्ति मिलती है। ज्योतिषियों की मानें तो चैत्र नवरात्र से कई राशि (Chaitra Navratri Lucky Zodiac Signs) के जातकों के जीवन में उजाला होने वाला है। इन लोगों को आर्थिक तंगी से मुक्ति मिलेगी। साथ ही बिगड़े काम बन जाएंगे। आइए, इन राशियों के बारे में जानते हैं- शनि गोचर 2025 न्याय के देवता शनिदेव 29 मार्च को राशि परिवर्तन करेंगे। इस दिन शनिदेव कुंभ राशि से निकलकर मीन राशि में गोचर करेंगे। शनिदेव की चाल बदलने से कई राशि के जातकों को लाभ मिलेगा। कर्क, वृश्चिक और मकर राशि के जातकों को शनि की बाधा से मुक्ति मिलेगी। वहीं, मिथुन और तुला राशि के जातकों पर चैत्र नवरात्र की प्रतिपदा तिथि से शनिदेव की विशेष कृपा बरसेगी। मिथुन राशि शनिदेव की विशेष कृपा मिथुन राशि के जातकों पर बरसेगी। उनकी कृपा से धर्म-कर्म में रूचि बढ़ेगी। लोगों के मध्य में आपका मान-सम्मान बढ़ेगा। स्वभाव में विनम्रता आएगी। शनिदेव की मेहरबानी से राजनीति क्षेत्र में आपको कामयाबी मिल सकती है। आप अपने पराक्रम से स्वयं का भविष्य लिखेंगे। आपके जीवन में जल्द ही बदलाव होगा। गुरु की मेहरबानी भी मई महीने से मिथुन राशि पर बरसेगी। गुरु और शनिदेव के आशीर्वाद से करियर संबंधी परेशानी दूर होगी। आप शत्रु पर विजय प्राप्त करने में सफल होंगे। सरकारी नौकरी मिलने के योग हैं। तुला राशि शनिदेव के राशि परिवर्तन करने से तुला राशि के जातकों को शुभ फल मिलेगा। आपकी तार्किक क्षमता बढ़ेगी। आप अपनी सेहत पर विशेष ध्यान देंगे। नाना प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजन खाने का अवसर मिलेगा। किसी योग्य व्यक्ति से मुलाकात होगी। मीन का शनि गोचर आपको धन लाभ दिलाएगा। धन-सम्पत्ति में वृद्धि होगी। गाड़ी, बंगला, नौकर और चाकर भी आपके पास होंगे। आपके बढ़ते कद से शत्रुओं में भय का माहौल रहेगा। विषय में रत होने से बचें। धार्मिक कार्यों में रूचि बढ़ेगी। करियर को नया आयाम मिलेगा। धर्म-कर्म में रूचि बढ़ेगी। प्रतियोगी परीक्षा में आपको सफलता मिलेगी। मकर राशि मीन राशि में शनिदेव के गोचर से मकर राशि के जातकों को साढ़ेसाती से मुक्ति मिलेगी। वर्तमान समय में मकर राशि के जातकों पर साढ़ेसाती का अंतिम चरण चल रहा है। शनिदेव की कृपा से चतुर सुजान बनेंगे। सेहत अच्छी रहेगी। धर्मवान और कर्मवान बनेंगे। स्वभाव से आप चंचल हो सकते हैं। ऐसा भी हो सकता है कि आपके स्वभाव में चंचलता आएगी। बिना किसी मतभेद के आप सभी की मदद करेंगे। सरकार की तरफ से राजकीय सम्मान मिलेगा। राजनीति क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल होगी।

30 मार्च से सर्वार्थसिद्धि योग में चैत्र नवरात्र की होगी शुरुआत, आठ दिन का रहेगा पर्वकाल

 चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर 30 मार्च को देवी आराधना का पर्व चैत्र नवरात्र का आरंभ होगा। तिथि मतांतर से इस बार नवरात्र आठ दिन के रहेंगे। खास बात यह है कि महापर्व के दौरान चार दिन रवियोग तथा तीन दिन सर्वार्थसिद्धि योग का संयोग रहेगा। साधना, आराधना की दृष्टि से यह योग बेहद महत्वपूर्ण है। इन योगों में की गई साधना साधक, आराधक को शुभ व मनोवांछित फल प्रदान करती है। ज्योतिषाचार्य पं. अमर डब्बावाला ने बताया चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर 30 मार्च को रविवार के दिन वासंती नवरात्र का आरंभ होगा। सर्वार्थसिद्धि योग होने से इसकी शुभता और बढ़ी इस दिन रेवती नक्षत्र, बव करण तथा मनी राशि उपरांत मेष राशि का चंद्रमा रहेगा। पंचांग के इन पांच अंगों की मौजूदगी में घट स्थापना का अनुक्रम रहेगा। रेवती पंचक का नक्षत्र है, ऐसे में नवरात्र में की गई देवी की साधना, आराधना पांच गुना शुभफल प्रदान करेगी। इस दिन सर्वार्थसिद्धि योग होने से इसकी शुभता और भी बढ़ गई है। क्योंकि सर्वार्थसिद्धि योग सभी प्रकार की सिद्धि प्रदान करने वाला मना गया है। रेवती नक्षत्र से आरंभ साधना 5 गुना शुभ फल प्रदान करेगी इस बार नवरात्र का आरंभ और रेवती नक्षत्र में होने से यह विशेष फल प्रदान करेगी क्योंकि रेवती नक्षत्र पंचक का पांचवां नक्षत्र माना जाता है। पांचवां नक्षत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से आरंभ होता है, तो विशेष कल्याणकारी माना गया है। अलग-अलग प्रकार के धर्म ग्रंथो में विशेष कर मुहूर्त चिंतामणि में इसका उल्लेख दिया गया है। इस दृष्टि से भी नवरात्र के दौरान की गई साधना विशेष फल प्रदान करेगी। तिथि का क्षय होने से 8 दिन की नवरात्रि इस बार नवरात्र आठ दिनों के रहेंगे। अलग-अलग पंचांगों में तिथि को लेकर के अलग-अलग प्रकार की गणना में बताया गया है। कुछ पंचांगों में तृतीया, कुछ पंचांग में द्वितीया तथा कुछ पंचांग में तृतीया व चतुर्थी संयुक्त दी गई है। इस दृष्टि से गणना का अलग-अलग प्रभाव दिया गया है। वर्षभर में चार नवरात्र विशेष पं.डब्बावाला ने बताया देवी की साधना, आराधना के लिए वर्षभर में चार नवरात्र विशेष माने गए हैं। इनमें दो प्राकट्य व दो गुप्त नवरात्र बताए हैं। चैत्र व शारदीय नवरात्र को प्राकट्य नवरात्र कहा जाता है। वहीं माद्य व आषाढ़ मास के नवरात्र गुप्त नवरात्र कहे गए हैं। लोकमान्यता में चैत्र नवरात्र बड़ी नवरात्र है, क्योंकि यह सृष्टि के आरंभ का दिन है। उज्जैन के लिए यह नवरात्र विशेष है, क्योंकि इसी दिन नगर दिवस भी मनाया जाता है। हरसिद्धि में प्रज्वलित होगी दीपमालिका देश के 52 शक्तिपीठों में से एक शक्तिपीठ हरसिद्धि मंदिर में चैत्र नवरात्र में देवी का नित नया श्रृंगार होगा। शाम को गोधूलि वेला में दीपमालिका प्रज्वलित की जाएगी। सिद्धपीठ गढ़कालिका माता मंदिर में भी दीपमालिका प्रज्वलित होगी। भक्त माता गढ़कालिका की कुमकुम पूजा करेंगे। शहर के अन्य देवी मंदिरों में दर्शनार्थियों का तांता लगा रहेगा।

चैत्र नवरात्रि शक्ति की उपासना का महोत्सव है , मां दुर्गा के किन रुपों की होती है पूजा

मां भवानी की पूजा का पर्व चैत्र नवरात्रि इस साल 30 मार्च 2025 से शुरू होने वाला है. माता की आराधना के लिए 9 दिन बहुत पवित्र और पुण्यदायी होते हैं. मां दुर्गा को तीनों लोकों की मां के रूप में पूजा जाता है. मान्यता है मां दुर्गा की पूजा करने वाले का कभी कोई अमंगल नहीं होता. अगर कुंडली में ग्रह दोष है और बार बार मेहनत करने के बाद भी काम में सफलता नहीं मिल रही है तो चैत्र नवरात्रि के नौ दिन माता के 9 स्वरूपों की पूजा करें, माता के 9 शक्तियां कौन है, इनकी उपासना का महत्व क्या है. मां दुर्गा के किन रुपों की होती है पूजा मां शैलपुत्री (प्रतिपदा तिथि) – देवी पुराण के अनुसार मां शैलपुत्री की पूजा करने से जीवन में स्थिरता आती है. दांपत्य सुख का लाभ मिलता है. मां ब्रह्मचारिणी (द्वितीया तिथि) – ब्रह्मचारिणी इस लोक के समस्त चर और अचर जगत की विद्याओं की ज्ञाता हैं. कहते हैं इनकी आराधना से व्यक्तिव में निखार आता है, बुद्धि तीव्र होती है. मां चंद्रघंटा (तृतीया तिथि) – आत्म कल्याण और शांति की तलाश जिसे हो, उसे नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की आराधना करनी चाहिए.  मां चंद्रघंटा को नकारात्मक ऊर्जा और बुरी नजर से बचानी वाली देवी माना जाता है. मां कूष्मांडा (चतुर्थी तिथि) – चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा सकी पूजा से व्यक्ति को यश, बल और धन की प्राप्ति होती है, ऐसी मान्यता है. मां स्कंदमाता (पंचमी तिथि) – स्कंदमाता के साथ पुत्र कार्तिकेय की पूजा भी की जाती है. संतान प्राप्ति के लिए नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की उपासना नवरात्रि कसबसे फलदायी मानी गई हैं. मां कात्यायनी (षष्ठी तिथि) – चैत्र नवरात्रि में मां कात्यायनी की पूजा उन लोगों को जरुर करना चाहिए जिनकी शादी में बाधा आ रही है. रोग, शोक, संताप से मुक्ति चाहिए उन्हें देवी कात्यायिनी को मनाना चाहिए. मां कालरात्री (महासप्तमी तिथि)- मां कालरात्रि की पूजा करने से हमारे मन का हर प्रकार का भय नष्ट होता है। जीवन की हर समस्या को पलभर में हल करने की शक्ति प्राप्त होती है. तंत्र साधना में मां कालरात्री की पूजा सबसे अचूक मानी गई है. मां महागौरी (महाअष्टमी तिथि) – अपने पाप कर्मों के काले आवरण से मुक्ति पाने और आत्मा को फिर से पवित्र और स्वच्छ बनाने के लिए महागौरी की पूजा और तप किया जाता है। मां सिद्धिदात्री (महानवमी तिथि)- भगवान शिव ने देवी के इसी स्वरूप से कई सिद्धियां प्राप्त की. शिव के अर्द्धनारीश्वर स्वरूप में जो आधी देवी हैं वो ये सिद्धिदात्री माता ही हैं. इनकी उपासना से हर काम में सफलता मिलती है.

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