LATEST NEWS

गर्मी में कूनो नेशनल पार्क में चीता शावकों के लिए एक नई जीवन रेखा मिली, लगाया सौर ऊर्जा से चलने वाला वाटर लिफ्ट सिस्टम

श्योपुर  इस गर्मी में कूनो नेशनल पार्क में चीता शावकों के लिए एक नई जीवन रेखा मिली है। यह है सौर ऊर्जा से चलने वाला वाटर लिफ्ट सिस्टम। इसने उन्हें भीषण गर्मी और कठोर परिस्थितियों से बचने में मदद की है। जून में उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला गया था। इससे पानी के स्रोतों पर बहुत दबाव पड़ा। मई 2023 में, नामीबियाई चीता ज्वाला के तीन शावकों की अत्यधिक गर्मी के कारण राष्ट्रीय उद्यान, मध्य प्रदेश में मौत हो गई थी। उस अनुभव से सीख लेकर, अधिकारियों ने एक सौर ऊर्जा से चलने वाला सिस्टम लगाया है। यह सिस्टम कूनो नदी से पानी पंप करता है और इसे 8.6 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के माध्यम से पार्क के अंदर 15 से अधिक स्थानों पर स्प्रिंकलर और पानी की तश्तरियों तक पहुंचाता है। कूनो नदी से पानी निकालकर जंगल में ला रहे अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक और चीता परियोजना निदेशक, उत्तम कुमार शर्मा ने X पर एक वीडियो पोस्ट किया। उन्होंने कहा कि कूनो नदी से पानी निकालकर, इसे किलोमीटर दूर ले जाकर, स्प्रिंकलर का उपयोग करके हरे-भरे स्थान बनाना, और पानी की उपलब्धता में सुधार करना, खासकर मां और नवजात शावकों के लिए, एक नियोजित तरीके से, काफी सफल रहा है। उन्होंने आगे कहा कि पानी का महत्व केवल इसकी अनुपस्थिति में महसूस होता है और यह कूनो में गर्मी के मौसम में सबसे ज्यादा महसूस होता है… ‘लू’ नामक गर्म हवाओं और 48 डिग्री सेल्सियस के आसपास के तापमान में, वन्यजीवों, विशेष रूप से युवाओं के लिए जीवन बहुत कठिन हो जाता है। 17 शावक हैं जीवित 2022-23 में, 20 अफ्रीकी चीतों को कूनो लाया गया था। तब से, भारत में 26 शावक पैदा हुए हैं। इनमें से 17 जीवित बचे हैं। दक्षिण अफ्रीकी चीता वीरा ने फरवरी 2025 में दो शावकों को जन्म दिया। एक अन्य दक्षिण अफ्रीकी चीता, निर्वा ने अप्रैल में पांच शावकों को जन्म दिया। निर्वा के दो शावकों की मौत हो गई, लेकिन अधिकारियों ने कहा कि बाकी ठीक हैं। उन्होंने कहा कि शावक पहली बार ऐसी कठोर परिस्थितियों का सामना कर रहे थे। मां और उनके बच्चे दोनों नियमित रूप से पानी के बिंदुओं का उपयोग कर रहे थे, जो इस पहल की सफलता का संकेत है। शावकों को गर्मी से राहत पहले, गर्मी के कारण शावकों की मौत हो जाती थी। इसलिए, इस बार अधिकारियों ने पहले से ही तैयारी कर ली थी। उन्होंने कूनो नदी से पानी निकालने के लिए सोलर पंप लगाए। फिर पाइपलाइन से पानी को जंगल में अलग-अलग जगहों पर पहुंचाया गया। इससे शावकों और उनकी मां को गर्मी से राहत मिली। उत्तम कुमार शर्मा ने कहा कि पानी की कमी होने पर ही इसका महत्व पता चलता है। कूनो में गर्मी के मौसम में यह बात सच साबित होती है। लू चलने और तापमान 48 डिग्री तक पहुंचने पर जानवरों के लिए जीना मुश्किल हो जाता है। खासकर छोटे शावकों के लिए। अधिकारियों ने बताया कि वीरा और निर्वा के शावक पहली बार इतनी गर्मी देख रहे हैं। लेकिन वे पानी के लिए बनाए गए पॉइंट्स पर जा रहे हैं। इससे पता चलता है कि यह योजना सफल हो रही है।

कूनो नेशनल पार्क में एक और मादा चीता धीरा गर्भवती, वर्तमान में 10 वयस्क चीते और 19 शावक

शिवपुरी  मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में बसाए गए चीतों ने एक बार फिर अभयारण्य की सीमा से बाहर चले गए हैं। कल रात पांच चीतों का समूह पार्क से बाहर निकल गया था। इसे बाद आज सुबह ये शिवपुरी जिले के पोहरी तक पहुंच गए हैं। चीतों को देखने के लिए ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई है। चीता धीरा गर्भवती, पखवाड़े भीतर कुनबा बढ़ने की संभावना कूनो नेशनल पार्क में एक और मादा चीता धीरा गर्भवती है। अगले एक पखवाड़े में उसके संभावित प्रसव से यहां शावकों की संख्या में और इजाफा हो सकता है। वर्तमान में 10 वयस्क चीते और 19 शावक हैं। इन्हीं में से दो चीता प्रभाष व पावक को मंदसौर के गांधीसागर अभयारण्य भेजा गया है। नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से लाए गए 20 चीतों में 10 मादा चीता थीं। इनमें से जीवित सात मादा चीतों में से अब केवल नाभा चीता ही शेष है, जो गर्भवती नही हुई है। भारत में पैदा हो रहे शावकों की बढ़ती संख्या से चीता पुनर्वास परियोजना को मजबूती मिली है। दो साल की हो चुकी है मुखी सबसे पहले ज्वाला चीता ने चार शावकों को जन्म दिया था, जिसमें से तीन की मौत हो गई थी, जबकि एक मादा शावक मुखी जिंदा बची थी, जो अब दो साल की हो चुकी है। ज्वाला इसके अलावा चार और शावकों को भी जन्म दे चुकी है। विशेष निगरानी की जा रही है आशा के तीन, गामिनी के चार, वीरा के दो, निर्वा के पांच शावक हैं। अब मादा चीता धीरा के गर्भवती होने की खुशखबरी से पार्क प्रबंधन ने उसे खुले जंगल से पकड़कर बाड़े में छोड़ा है। सिंह परियोजना के मुख्य वन संरक्षक उत्तम कुमार शर्मा के अनुसार मादा चीता धीरा को बाड़े में रखकर विशेष निगरानी की जा रही है। बाड़े में 13 चीता हो गए बाड़े में अब 13 चीता हो गए हैं। धीरा कुछ दिन पहले कूनो की सीमा से बाहर निकलकर कराहल के वन क्षेत्र तक पहुंच गई थी। इसलिए भी एहतियातन यह कदम उठाया गया है। खुले जंगल में ज्वाला के शावकों सहित कुल 16 चीता हैं। दस दिन पहले ही कूनो में निर्वा चीता ने पांच शावकों को जन्म दिया है, जो पूरी तरह स्वस्थ हैं। पहले भी निकले थे सीमा से बाहर दरअसल, ज्वाला और उसके चार बच्चे शनिवार शाम को पहली बार कूनो नेशनल पार्क की सीमा से बाहर निकले थे। रविवार दोपहर तक वे वापस जंगल में चले गए थे। लेकिन, रविवार रात को वे फिर से वीरपुर तहसील के श्यामपुर गांव के पास दिखाई दिए। वे श्योपुर-ग्वालियर ब्रॉडगेज रेल ट्रैक से लगभग 1 किलोमीटर दूर थे। लाठी-डंडे और पत्थर लेकर टूट पड़े गांव वाले ग्रामीणों ने चीतों को भगाने के लिए लाठियां उठाई। जब चीतों ने गाय पर हमला किया, तो लोगों ने उन्हें पत्थर मारे। सोमवार सुबह, ये पांचों चीते कूनो सायफन के पास से होते हुए कूनो नदी में पहुंचे। वे निर्माणाधीन रेलवे पुल के नीचे काफी देर तक बैठे रहे। इस दौरान, वहां से गुजरने वाले लोग चीतों को देखने के लिए जमा हो गए। गाय पर हमले से गुस्से में आए ग्रामीण मादा चीता और उसके बच्चे एक-एक करके रास्ता पार कर रहे थे। तभी उन्होंने एक गाय पर झपट्टा मारा। गाय पर हमला होते देख ग्रामीण गुस्से में आ गए। वे लाठी लेकर दौड़े और चीतों को पत्थर मारने लगे। चीता ज्वाला ने काफी देर तक गाय का गला पकड़ रखा था। लेकिन, जैसे ही उसे पत्थर लगा, उसने गाय को छोड़ दिया और अपने बच्चों के साथ भाग गई। रेल ट्रैक के पास लगी लोगों की भीड़ घटना के बाद, सुबह लगभग 10 बजे, चीतों का दल कूनो पुल क्षेत्र से निकल वीरपुर के तिललिडेररा क्षेत्र में पहुंच गया। निर्माणाधीन श्योपुर-ग्वालियर ब्रॉडगेज रेल ट्रैक के पास चीतों को देखने के लिए भीड़ जमा हो गई। एक महीने पहले ही छोड़ा गया था ज्वाला और उसके शावकों को 21 फरवरी को खजूरी क्षेत्र के जंगल में छोड़ा गया था। एक महीने तक वे पार्क की सीमा में ही रहे। चीतों के बाहर निकलने पर, क्षेत्र के चीता मित्रों और उनकी टीम ने आसपास के लोगों को जागरूक किया। उन्होंने लोगों को बताया कि चीते लोगों पर हमला नहीं करते हैं। उन्होंने लोगों से चीतों को न भगाने और उनकी सुरक्षा का ध्यान रखने की अपील की। बीते दो दिन से चीतों का समूह इस इलाके में डेरा डाले हुए है।

चीता परियोजना संचालन समिति ने कुनो नेशनल पार्क से गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में कुछ चीतों को स्थानांतरित करने की अनुमति दी

मंदसौर  मध्य प्रदेश में चीतों को बसाने की योजना में एक नया मोड़ आया है। केंद्र सरकार केन्या, दक्षिण अफ्रीका और बोत्सवाना से और चीते लाने की बात कर रही है। वहीं, कुछ चीतों को कूनो नेशनल पार्क से गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में भेजने की मंजूरी मिल गई है। समिति ने यह भी कहा है कि चीतों को सड़क मार्ग से ले जाते समय गर्मी जैसे तनाव देने वाले कारकों का ध्यान रखा जाए। 300 किलोमीटर है दोनों जगह के बीच की दूरी गांधी सागर, कुनो से लगभग 300 किलोमीटर दूर है। यह फैसला पिछले हफ्ते हुई एक बैठक में लिया गया। अभी भी यह चिंता बनी हुई है कि गांधी सागर में चीतों के लिए पर्याप्त शिकार है या नहीं और वहां तेंदुए जैसे शिकारी जानवर भी हैं। गांधी सागर को चीतों के दीर्घकालिक संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण जगह माना जा रहा है। इसका लक्ष्य कूनो-गांधी सागर क्षेत्र में 60-70 चीतों की आबादी बनाना है। एक साल से चीतों के लिए तैयार हो रहा गांधी सागर मध्य प्रदेश का वन विभाग एक साल से गांधी सागर को चीतों के लिए तैयार कर रहा है। पहले यह योजना थी कि अफ्रीका से आने वाले चीतों को यहां रखा जाएगा, लेकिन अभी तक भारत और अफ्रीकी देशों के बीच बात नहीं बन पाई है। पहले चरण में, चार-पांच चीतों को अभयारण्य के पश्चिमी भाग में एक बाड़े में छोड़ा जाएगा। 64 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र को घेर लिया गया है और तेंदुओं को वहां से हटा दिया गया है ताकि चीतों और तेंदुओं के बीच लड़ाई न हो। अभी यह तय नहीं हुआ है कि गांधी सागर में कूनो से लाए गए चीतों को छोड़ा जाएगा या उन चीतों को जो अभी भी बड़े बाड़ों में हैं। कूनो के जंगल में घूम रहे 17 चीते कूनो में 26 चीतों में से 17 जंगल में हैं और नौ बाड़ों में हैं। गांधी सागर में शिकार की कमी एक चिंता का विषय है। समिति ने मध्य प्रदेश के अन्य जंगलों से चीतल लाकर शिकार बढ़ाने के प्रयासों पर भी चर्चा की। गांधी सागर में शाकाहारी जानवरों के बाड़े भी हैं ताकि शिकार वहीं पर पैदा हो सके। मध्य प्रदेश वन विभाग के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) सुभारंजन सेन ने कहा कि गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में शिकार बढ़ाने का काम चल रहा है। हमारे पास शिकार के तौर पर फिलहाल चिंकारा, चौसिंघा, नीलगाय और चीतल हैं। चीता परियोजना संचालन समिति देख रही मामला इस पूरे मामले को चीता परियोजना संचालन समिति देख रही है। समिति ने हाल ही में एक वीडियो पर भी बात की। इस वीडियो में वन विभाग द्वारा काम पर रखे गए एक ड्राइवर को चीता फैमिली को पानी पिलाते हुए दिखाया गया था। सदस्यों ने इस पर नाराजगी जताई और वन विभाग को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी कि चीतों के साथ बातचीत के लिए बने नियमों का पालन किया जाए। क्या है चीता परियोजना संचालन समिति का काम चीता परियोजना संचालन समिति का गठन राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने मई 2023 में किया था। इसका काम परियोजना की समीक्षा और निगरानी करना और एक सलाहकार निकाय के रूप में कार्य करना है। प्रोजेक्ट चीता 2022 में शुरू हुआ था। इसके तहत नामीबिया से आठ और दक्षिण अफ्रीका से 12 चीतों को कूनो नेशनल पार्क में लाया गया था। इस परियोजना को उस समय झटका लगा जब इनमें से आठ चीतों और कूनो में पैदा हुए पांच शावकों की मौत हो गई।

कूनो में ज्वाला अपने शावकों के साथ 6 बकरियों शिकार किया, युवक का चीता के झुंड को पानी पिलाने का वीडियो अब जमकर वायरल

श्योपुर  अगर आपका सामना शेर, तेंदुआ या फिर चीते से हो जाए तो क्या होगा. सुनकर ही शरीर में सिहरन दौड़ जाती है. लेकिन अगर कोई व्यक्ति इस भीषण गर्मी में चीतों के झुंड को पानी पिलाए तो इसे पशुओं से बेइंतहा प्रेम कहें या फिर दुस्साहस. ये कहानी कोई काल्पनिक नहीं है. बल्कि सच है. कूनो नेशनल पार्क के चीते शिकार करने के बाद छांव में बैठे हुए थे. इन्हें भीषण गर्मी में पानी की सख्त जरूरत थी. लेकिन आसपास पानी नहीं था. पेड़ की छांव में बैठे 6 चीतों की प्यास बुझाई ऐसे में एक ग्रामीण ने प्लास्टिक का बर्तन पानी से भरा और चीतों के झुंड के पास ले जाकर इसे रख दिया. चीतों ने छककर पानी पीया और फिर पेड़ की छांव में विश्राम करने लगे. दरअसल, कई दिनों से कूनो नेशनल पार्क से चीतों का झुंड बाहर घूम रहा है. इनकी संख्या 6 है. इन चीतों ने उमरी गांव में 6 बकरियों शिकार किया और फिर जमकर दावत उड़ाई. मादा चीता ज्वाला और उसके शावकों के दो वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहे हैं. इनमें ज्वाला चीता अपने शावकों के साथ बकरियों का शिकार करती नजर आ रही है. बकरियों का शिकार के बाद चीते प्यासे थे वहीं, एक वीडियो जमकर वायरल हो रहा है. इसमें एक ग्रामीण चीता और उसके शावकों को पानी पिलाते नजर आ रहा है. ये वही चीते हैं, जिन्होंने बकरियों का शिकार करके पेट भरा था. ये चीते पानी नहीं मिलने से परेशान थे, क्योंकि शिकार का भोजन करने के बाद चीतों को पानी की सख्त जरूरत थी. प्यास से परेशान चीते पेड़ के नीचे छांव में बैठकर हांफ रहे थे. उमरी कलां गांव के पास खेतों में जब ग्रामीण सत्यनारायण गुर्जर ने देखा कि चीते प्यास से परेशान हैं तो प्लास्टिक के बर्तन में पानी भरा और चीतों के झुंड के पास ले जाकर रख दिया. चीतों ने छककर पानी पीया. इस घटना से ये बात फिर साबित हो गई कि चीता इंसानों के लिए खतरा नहीं, बल्कि उनके मित्र हैं. हालांकि वन विभाग की टीम चीतों की मॉनिटरिंग भी कर रही हैं. कूनो नेशनल पार्क में 120 चीता मित्र भी हैं कूनो नेशनल पार्क के अधिकारी बताते है “चीतों से इंसानों को कोई खतरा नहीं है. चीते इंसानों को देखकर अपना रास्ता मोड़ लेते हैं. चीतो की निगरानी के लिए कूनो नेशनल पार्क की मॉनिटरिंग टीम सहित वन विभाग की टीम लगातार नजर बनाए हुए है.” बता दें कि कूनो नेशनल पार्क में 120 चीता मित्रों को प्रशिक्षण देकर तैयार किया गया है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इन चीता मित्रों के साथ संवाद किया था. चीता मित्रों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है. खासकर ऐसे समय जब चीते पार्क की सीमा लांघते हैं. चीता मित्रों की अहम जिम्मेदारी ग्रामीणों को जागरूक कर मानव-चीता द्वंद्व रोकने की है.

कूनो नेशनल पार्क से निकलकर रिहायशी इलाके में पहुंची अग्नि चीता, किया कुत्ते का शिकार

 श्योपुर कूनो नेशनल पार्क के खुले जंगल से निकलकर 90 किलोमीटर दूर श्योपुर के नजदीक पहुंचे चीते ने चार दिनों बाद शहर के रास्ते वापस जंगल की ओर रवानगी ले ली है. खास बात यह है कि चीता जंगल लौटते समय आधी रात को शहर की सड़कों पर दौड़ लगाता कैमरे में कैद हुआ है. अब चीता वापस जंगल की ओर रुख कर गया है. बताया जा रहा है कि वह अब कूनो के बफर जोन में जा पहुंचा है. पिछले शनिवार को कूनो की हद छोड़ 90 किलोमोटर की दूरी तय कर चीता अग्नि श्योपुर शहर से सटे ढेंगदा गांव और शहरी सीमा में पॉलिटेक्निक कॉलेज के पास अमराल नदी के किनारे लगी क्रेशर के कुछ दूर आया और बीते 4 दिन तक आसपास ही चहल कदमी करता रहा. चीते की निगरानी में ट्रेकिंग टीमें 24 घंटे लगी थी. वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक अग्नि चीता गोरस कलमी के बीच भीमलत गांव के पास है। उधर अग्नि साथ छोड़ा गया वायु चीता मुरैना की ओर घूम रहा है। अभी दो ही चीते बाहर हैं, बाकी 10 चीते और 12 शावक बाड़े में हैं। इसके पहले भी चीता अग्नि श्योपुर में सीएम राइज स्कूल के करीब देखी गई थी। इसका वीडियो तब भी वायरल हो रहा था। इसी बीच, मंगलवार-बुधवार की दरम्यानी रात चीता शहर के वीर सावरकर स्टेडियम के पास देखा गया. फिर आधी रात को ही श्योपुर शिवपुरी हाइवे पर निकल पड़ा. और चीता स्टेडियम, कलेक्ट्रेट और ईको सैंटर होते हुए बावंदा नाले तक सड़क पर दौड़ लगाता कैमरे के कैद हुआ. चीता के पीछे ट्रेकिंग टीम की गाड़ी लगी रही. बुधवार को चीता अग्नि को लोकेशन भेला भीम लत गांव के पास बताई जा रही है. इस इलाके से सामान्य और कूनो वन मंडल का बफर जोन का जंगल लगा हुआ है. कयास लगाए जा रहे हैं कि चीता अब कूनो वापस लौट जाएगा. पता हो कि कूनो नेशनल पार्क के खुले जंगल में अग्नि और वायु नाम के दो चीतों को छोड़ा गया था. यह दोनों चीते साउथ अफ्रीका से कूनो लाए गए थे जिन्हें पिछले 4 दिसम्बर को खुले जंगल में छोड़ा गया था. दोनों चीते रिश्ते में सगे भाई हैं, जो हमेशा एक साथ रहते हैं और एक साथ शिकार करते हैं और मिल बांटकर उस शिकार को खाकर अपना पेट भरते हैं. पहली दफा यह दोनों अलग हुए थे. दोनों अलग-अलग दिशा में कूनो के रिज़र्व जोन से बाहर निकल गए थे. अब उम्मीद जताई जा रही है कि दोनों एक दूसरे को तलाशते हुए कूनो वापस पहुंच जाएंगे.

मप्र और राजस्थान के बीच चीता संरक्षण परियोजना को सुचारू रूप से संचालित करने एक संयुक्त प्रबंधन समिति का गठन किया

भोपाल मध्यप्रदेश और राजस्थान के बीच चीता संरक्षण परियोजना को सुचारू रूप से संचालित करने और चीता कॉरिडोर के विकास के लिए दोनों राज्यों ने एक संयुक्त प्रबंधन समिति का गठन किया है। यह समिति चीता के संरक्षण, पर्यटन संभावनाओं और क्षेत्रों के विकास के लिए विस्तृत योजना बनाएगी। साथ ही, यह हर तीन माह में अपनी रिपोर्ट दोनों राज्यों की सरकारों को सौंपेगी। इस समिति के संयुक्त अध्यक्ष मध्यप्रदेश और राजस्थान के प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्य-जीव अभिरक्षक होंगे। अन्य सदस्य के रूप में चीता प्रोजेक्ट के निदेशक, क्षेत्र संचालक/संचालक, वन्य-प्राणी विशेषज्ञ, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के प्रतिनिधि और भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून द्वारा नामांकित प्रतिनिधि होंगे। समिति मध्यप्रदेश और राजस्थान के बीच चीता परियोजना कॉरिडोर के लिए एमओयू का मसौदा तैयार करेगी। यह कॉरिडोर चीतों के सुरक्षित भ्रमण और उनके संरक्षण के लिए विकसित किया जाएगा। समिति कूनो और रणथंबौर क्षेत्रों को जोड़ने वाले राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य क्षेत्र में पर्यटन के लिए नए मार्गों का मूल्यांकन करेगी। यह पर्यटन के अवसरों को बढ़ावा देने के साथ-साथ चीतों के संरक्षण में भी सहायक होगा। समिति उन अधिकारियों और फ्रंट-लाइन कर्मचारियों के क्षमता निर्माण पर भी ध्यान देगी, जो कूनो से राजस्थान तक मौजूदा कॉरिडोर में चीतों की निगरानी और गश्त में शामिल हैं। इससे चीतों की सुरक्षा और संरक्षण में सुधार आएगा। कूनो और गांधी सागर अभ्यारण्य क्षेत्रों से चीतों के भविष्य के माइग्रेशन के लिए उपयुक्त क्षेत्रों का विकास भी समिति के कार्यक्षेत्र में शामिल रहेगा। इसके लिए प्रि-औगमेंटेशन बेस तैयार कर सुधारात्मक उपाय किए जाएंगे।

देश में चीतों की धरती कूनो नेशनल पार्क में अब चीते खुलकर जिएंगे, दो-दो की संख्या में नेशनल पार्क में छोड़ा जाएगा

शिवपुरी देश में चीतों की धरती कूनो नेशनल पार्क में अब चीते खुलकर जिएंगे। उन्हें बड़े बाड़े से खुले जंगल में छोड़े जाने की स्वीकृति चीता स्टीयरिंग (संचालन) कमेटी से मिल गई है। दो-दो की संख्या में चीतों को छोड़ा जाएगा। इसके बाद स्थिति को देखते हुए अन्य चीतों और शावकों को भी खुले जंगल में छोड़ा जाएगा। चीतों को छोड़ने की तैयारी शुरू कर दी गई है। खास बात यह है कि चीते समीपस्थ राज्यों में भी स्वच्छंद विचरण कर सकेंगे। इनके भोजन, सुरक्षा और निगरानी की जिम्मेदारी संबंधित राज्य के वन मंडल की होगी। इस आशय का निर्णय पिछले दिनों कूनो नेशनल पार्क में मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के 22 वन मंडलाधिकारियों की कार्यशाला में लिया गया। 12 वयस्क और 12 चीता शावक बता दें, कूनो नेशनल पार्क में वर्तमान में 12 वयस्क और 12 चीता शावक हैं। सभी को बड़े बाड़े में रखा गया है। भारत में पहली बार चीते 17 सितंबर, 2022 को लाए गए थे। 11 मार्च, 2023 को पहली बार चीता पवन व आशा को खुले जंगल में छोड़ा गया था। इसके कुछ ही दिन बाद चीता गौरव (एल्टन) और शौर्य (फ्रेडी) को छोड़ा गया था। राजस्थान और यूपी की सीमा तक पहुंच गए थे चीते कूनो से राजस्थान और उत्तर प्रदेश की सीमा नजदीक है। जब चीतों को खुले जंगल में छोड़ा गया था तब कुछ कूनो से बाहर निकलकर नजदीकी जिले मुरैना, शिवपुरी के अलावा उत्तर प्रदेश के झांसी-ललितपुर, राजस्थान के करौली व बारां तक पहुंच गए थे। बारिश के दौरान रेडियो कालर की बेल्ट की वजह से गर्दन में संक्रमण के बाद एक चीते की मौत हो गई तो सभी चीतों को कूनो लाकर बड़े बाड़े में रखा गया। यहां शावकों का जन्म भी हुआ। चीतों को वापस नहीं लाया जाएगा अब खुले जंगल में चीतों को दोबारा छोड़ने के निर्णय के साथ यह भी तय किया गया है कि उन्हें वापस नहीं लाया जाएगा। संबंधित वन मंडल उनकी निगरानी करेगा। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार चीता प्राकृतिक रहवास वाला प्राणी है इसलिए इनके स्वच्छंद विचरण में बाधा नहीं होनी चाहिए। इस बीच, कूनो में चीता सफारी की तैयारी भी शुरू कर दी गई है। वाहनों को तैयार किया जा रहा है। टूरिस्ट गाइडों की भर्ती प्रक्रिया भी चल रही है। एक चीते को चाहिए होता है 100 वर्ग किमी का क्षेत्र वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार एक चीते के लिए करीब 100 वर्ग किमी क्षेत्र की जरूरत होती है। कूनो के जंगल का क्षेत्र करीब 1200 वर्ग किमी है। इसमें 748 वर्ग किमी मुख्य जोन में और 487 किमी बफर जोन में है। कूनो में शावकों सहित 24 चीते हैं इस लिहाज से कूनो के जंगल का क्षेत्र चीतों के लिए कम ही होगा।

कूनो नेशनल पार्क में जल्द ही चीतों को जंगल में छोड़ा जाएगा, अब कुल 24 है सख्यां

श्योपुर  कूनो नेशनल पार्क में रह रहे चीतों के साम्राज्य में अब विस्तार होगा। उन्हें जल्द ही खुले जंगल में छोड़ा जाएगा। इसके बाद वह मध्य प्रदेश ही नहीं, यूपी और राजस्थान में भी छुट्टा घूमेंगे। वो जब चाहे तब जंगल में खुद से लौंटेगे लेकिन उन्हें ट्रैंकुलाइज नहीं किया जाएगा। यह निर्णय तीन राज्यों के वन विभाग के अधिकारियों की हुई मीटिंग में लिया गया है। एमपी, यूपी और राजस्थान के 27 जिलों में चीते घूम सकेंगे। तीन राज्य के अधिकारियों ने की प्लानिंग कूनो नेशनल पार्क में अभी बड़े और छोटे मिलाकर चीतों की संख्या 24 है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के वन अधिकारियों ने इस बारे में योजना बनाई है। चीतों को ट्रेंकुलाइज करके वापस नहीं लाया जाएगा, केवल जान का खतरा होने पर ही उन्हें रेस्क्यू किया जाएगा। विस्तृत योजना की जाएगी तैयार इससे पहले, लगभग दो साल का एक विस्तृत कार्य योजना तैयार किया जाएगा। इस योजना में चीतों के लिए शिकार की व्यवस्था, सुरक्षा इंतजाम और वन कर्मचारियों को चीतों की देखभाल का प्रशिक्षण शामिल होगा। पूरी योजना बनने के बाद ही साफ होंगी चीजें कूनो नेशनल पार्क के सीसीएफ उत्तम कुमार शर्मा ने कहा कि पूरी योजना बनने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। सबसे पहले, कूनो से सटे जिलों में चीतों के लिए भोजन की उपलब्धता की जांच की जाएगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि इन जिलों के जंगलों में चीतों के लिए पर्याप्त शिकार उपलब्ध हो। खुले जंगल में पहले छोड़े जाएंगे चीते वहीं, कूनो नेशनल पार्क के 24 चीते जल्द खुले जंगल में छोड़े जाएंगे। खास बात यह है कि इस बार चीतों के विचरण का दायरा बड़ा होगा। ये बाघों की तरह 3 राज्यों के 27 जिलों में घूम सकेंगे। इन्हें ट्रेंकुलाइज कर वापस नहीं लाया जाएगा। जान का खतरा होने पर ही रेस्क्यू किया जाएगा। कूनो से सटे जिलों को किया जाएगा शामिल इस योजना में कूनो से सटे जिलों को भी शामिल किया जाएगा, जहां चीतों के लिए शिकार की व्यवस्था की जाएगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि चीतों को जंगल में पर्याप्त भोजन मिले और उन्हें किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। चीतों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम यह कदम चीतों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। चीतों को खुले जंगल में छोड़ने से पहले यह सुनिश्चित करना ज़रूरी है कि उनके लिए सुरक्षित और अनुकूल वातावरण तैयार हो। इसके लिए वन विभाग द्वारा कई ज़रूरी कदम उठाए जा रहे हैं, जैसे कि शिकार की व्यवस्था, सुरक्षा इंतजाम और वन कर्मचारियों को प्रशिक्षण देना। इससे चीतों की आबादी को बढ़ाने में मदद मिलेगी।  

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live