LATEST NEWS

छठ पूजा पर वाहनों की पार्किंग को पर्ची काटी जा रही, पार्किंग वसूली अपनी मनमर्जी कर रहे, गरमाया माहौल

लुधियाना लुधियाना में सतलुज दरिया पर छठ पूजा पर अवैध वसूली का मामला सामने आया है जिसकी एक वीडियो भी वायरल हो रही है। जानकारी के अनुसार छठ पूजा पर वाहनों की पार्किंग को लेकर सतलुज दरिया पर पर्ची काटी जा रही है।  इस दौरान पार्किंग वसूली करने वाले अपनी मनमर्जी कर रहे हैं जिसे लेकर लोगों में माहौल गरमा गया है। वाहन पार्क करने वाले मनोज कुमार यादव का कहना है कि पार्किंग पर्ची पर 10 रुपये लिखे हैं और उसे काटकर 50 रुपये की पर्ची थमा दी गई है। पार्किंग वसूली करने वाले अपनी मनमर्जी कर रहे हैं जो सरासर अन्याय है। यह सारा मामला कैमरे में कैद हो गया है। 

नहाय खाय के साथ आज से शुरू हुआ आस्था का महापर्व छठ, ज्योतिषाचार्य से जानिए शुभ मुहूर्त और विधि -विधान

भोपाल देश के कई राज्यों में धूमधाम से छठ महापर्व मनाया जा रहा है। मध्य प्रदेश में भी त्योहार की धूम है। भोपाल में रहने वाले पूर्वांचलियों के लिए खास इंतजाम किए गए हैं। उनके लिए 50 से ज्यादा घाटों का निर्माण किया गया है। जहां श्रद्धालुओं की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए तमाम व्यवस्थाएं की गई हैं। छठ के तीसरे दिन व्रती अस्तालगामी सूर्य को अर्घ्य देते हैं। व्रतधारी भगवान को जल या दूध से अर्घ्य देते हैं और फल अर्पित करते हैं। अर्घ्य का क्या टाइम छठ के तीसरे दिन व्रतधारी घाट या तालाब में जाकर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देंगे। मध्य प्रदेश में शाम को 5.39 बजे सूर्य अस्त होगा। इसी समय सूर्य भगवाम को श्रद्धालु जल अर्पित करेंगे। क्यों मनाया जाता है छठ ऐसा माना जाता है कि सबसे पहले माता सीता ने बिहार के मुंगेर में गंगा तट पर छठ पूजन किया था। तभी से बिहार में इसकी शुरुआत हुई। माता सीता जब श्री रामचंद्र के साथ वनवास पर गई थीं, कब उन्होंने मुंगेर में छठ पर्व मनाया था। आज के समय में बिहार के अलावा कई राज्यों और यहां तक की विदेश में भी यह त्योहार मनाया जाता है। पांच नवंबर को नहाय खाय से शुरू हुए पर्व के दूसरे दिन खरना होता है। तीसरे दिन अस्तालगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। चौथे दिन उदयमान सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत समाप्त हो जाता है। मोहन यादव ने दी शुभकामनाएं राज्य के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने लोगों को छठ पूजा की बधाई दी है। उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘जय हो छठी मैया… लोक आस्था एवं सूर्य उपासना के महापर्व ‘छठ पूजा’ के द्वितीय दिन ‘खरना’ की समस्त प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। छठी मैया आप सभी के जीवन में आरोग्य, सुख-समृद्धि एवं प्रगति प्रदान करें, यही कामना करता हूं।’

लोक गायिका कल्पना-गायत्री-परिणीता और दुकालू देंगे प्रस्तुति, छत्तीसगढ़-रायपुर में छठ पूजा पर सांस्कृतिक कार्यक्रम

रायपुर. छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में चार दिवसीय छठ महापर्व की आज यानी मंगलवार से शुरुआत हो गई है। पहले दिन मंगलवार को व्रती नहाय-खाय के साथ 72 घंटे का निर्जला व्रत शुरू कर चुके हैं। इस बार महादेवघाट स्थित खारून नदी तट और 60 तालाबों पर व्रती अर्घ्य देंगे। महादेवघाट में छठ पूजा को लेकर पूरी तैयारी कर ली गई है। इस बार सात नवंबर को महादेवघाट पर भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम होगा। इसमें अंतर्राष्ट्रीय लोक गायिका कल्पना पटवारी (मुंबई), अंतर्राष्ट्रीय लोक गायिका गायत्री यादव (लखनऊ), लोक गायिका परिणीता राव पटनायक, मशहूर छत्तीसगढ़ी लोक गायक दुकालू यादव और अन्य स्थानीय कलाकार छठ गीतों से समां बांधेंगे। सभी व्रतियों और श्रद्धालुओं को छठी मइया की भक्ति में डूबोयेंगे। छठ महापर्व आयोजन समिति के अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने बताया कि समिति के सदस्यों ने महादेव घाट रायपुर में पहुंचकर श्रमदान किया । रायपुर नगर निगम की ओर से भी महादेव घाट की सफाई की जा रही है। महादेव घाट को पूरी तरह से सजाया संवारा गया है। आयोजन प्रमुख राजेश सिंह, संरक्षक मंडल के सलाहकार परमानंद सिंह, रविंद्र सिंह, सत्येंद्र सिंह गौतम, आयोजन उप प्रमुख कन्हैया सिंह, संतोष सिंह, कोषाध्यक्ष सुनील कुमार सिंह, सचिव प्रचार प्रसार महादेव घाट बृजेश कुमार सिंह, राकेश सिंह, विधि व्यवस्था प्रमुख अजय शर्मा, घाट व्यवस्था प्रमुख वेद नारायण एवं रविंद्र शर्मा, अनिल कुमार सिंह, मनोज सिंह, संजय सिंह, जयप्रकाश सिंह, रणजीत मिश्रा, संजीव सिंह, जयंत सिंह, सरोज सिंह, संतोष सिंह एवं अन्य सदस्य ने आज महादेव घाट पर अपना श्रम दान किया। महादेवघाट और 60 तालाबों पर अर्घ्य देंगे व्रती इस बार महादेवघाट स्थित खारून नदी तट और 60 तालाबों पर व्रती अर्घ्य देंगे। महादेवघाट में छठ पूजा को लेकर पूरी तैयारी कर ली गई है। चार दिवसीय छठ महापर्व की शुरुआत पांच नवंबर से नहाय खाय के साथ शुरू हो गई है। इस बार महादेव घाट रायपुर में छठ महापर्व बड़े ही धूमधाम और भव्यता के साथ मनाया जा रहा है। इसे लेकर छठ महापर्व आयोजन समिति महादेव घाट के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने कमर कस ली है। नहाय खाय के साथ छठ महापर्व शुरू पहले दिन पांच नवंबर को नहाय खाय के साथ छठ महापर्व की शुरुआत हुई। इसके बाद 6 नवंबर को खरना, 7 नवंबर को डूबते सूर्य को अर्घ्य और 8 नवंबर को उगते सूर्य को अर्घ्य देकर छठ महापर्व का समापन होगा। छठ पर्व को शक्ति पूजा और सूर्य सष्टी व्रत के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व मुख्य रूप से पूर्वी भारत के बिहार, झारखंड, पूर्वांचल, पश्चिम बंगाल और नेपाल के तराई क्षेत्रों में मनाया जाता है। छठ पूजा सूर्य और उनकी बहन छठी मैया को समर्पित है। त्योहार और व्रत के अनुष्ठान कठोर है। चार दिनों तक मनाए जाने वाले इस व्रत में महिलायें पवित्र स्नान, उपवास और निर्जल, लंबे समय तक पानी में खड़े रहना, प्रसाद, प्रार्थना और सूर्य देवता को अर्घ्य देना शामिल है। बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोग जिस देश और राज्यों में बसे हैं। वहां अपनी संस्कृतियों को आज भी संजोये हुए हैं।

छठ पूजा की शुरुआत 7 नवंबर 2024 से, भूल कर भी ना करें ये चीजें

छठ पूजा की शुरुआत इस साल 7 नवंबर 2024 से हो रही है. ये बिहार और झारखंड का सबसे बड़ा पर्व  है जो पूरे देश में बेहद धूम धाम के साथ मनाया जाता है. हिन्दू धर्म में इसका विशेष महत्व है. यह पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को शुरू होता है और सप्तमी तिथि तक चलता है. चार दिनों तक चलने वाला ये पर्व सभी के लिए बहुत खास और एहम  होता है. इसकी शुरुआत नहाय-खाय के साथ होती है. छठ पूजा में सूर्य देव के साथ उनकी बहन छठ मैया की भी पूजा की जाती है. छठ पूजा को लेकर कई मान्यताए है जो इस के व्रत को और भी खास बनाती है. छठ पूजा पर रखे जाने वाला व्रत सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है. यह व्रत संतान के लिए रखा जाता है उनकी लंबी उम्र ,अच्छी सेहत और सुख-समृद्धि  के लिया 36 घंटे का निर्जला व्रत रखते है. यह व्रत महिलायें रखती है और इसके कुछ कड़े नियम भी है जिनका पालन भी करना पड़ता है. इन बातों का रखें ध्यान व्रती महिलाएं सूर्य  देव को अर्घ्य दिए बिना कुछ भी ना खाएं. पहले और दूसरे दिन सूर्य को जल देने के बाद ही भोजन करें और व्रत रखने वाली महिलाएं जमीन पर ही सोएं. पूजा में किसी भी तरह का चांदी, स्टील और प्लास्टिक के बर्तनो का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. इस पूजा में केवल मिट्टी के चूल्हे और बर्तनो का ही इस्तेमाल करें. पूजा के प्रसाद को गलती से भी बनाते हुए जूठा ना करें और प्रसाद बनाने से पहले कुछ भी न खाए. पूजा में साफ-सफाई का खास ख्याल रखें. 36 घंटो के व्रत और पूजा करने के दौरान साफ कपड़े पहने और इस बात पर ध्यान रखें की पूजा की चीज़ो को साफ हाथ से ही छुएं. छठ पूजा के दौरान बिकुल भी मांसाहारी भोजन, लहसुन और प्याज़ का सेवन ना करें. प्रसाद बनाने की जगह पर भोजन न करें. छठ का व्रत रखने वाले अपनी वाणी पर संयम रखें किसी को भी अपशब्द न कहे अन्यथा आपको पूजा का फल नहीं मिलेगा.

छठ त्योहार पर सूर्य देवता और छठी मईया की आराधना की जाती है

नई दिल्ली  यूपी-बिहार में मनाया जाने वाला छठ पूजा एक महत्वपूर्ण त्योहार है। छठ में सूर्य देवता और छठी मईया की आराधना की जाती है। यह पूजा चार दिनों तक चलती है और इसमें श्रद्धालु सूर्य को अर्घ्य देते हैं। आइए आज हम आपको छठ पूजा में सूर्य को अर्घ्य देने की प्रथा के पीछे की पौराणिक कहानी के बारे में बताते हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार सूर्य देवता जीवन और ऊर्जा के स्रोत माने जाते हैं। उनकी आराधना से मनुष्य को स्वास्थ्य, समृद्धि और सुख-शांति की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि सूर्य देवता ने अपने तेज से संसार को प्रकाश दिया और अंधकार को मिटाया। इसलिए, सूर्य को अर्घ्य देकर श्रद्धालु अपनी इच्छाओं और आकांक्षाओं की पूर्ति की कामना करते हैं। छठी मईया को गौरी, उषा या छठ देवी भी कहा जाता है और वह सूर्य देवता की बहन मानी जाती हैं। उनका विशेष रूप से आदिवासी और ग्रामीण समुदायों में बहुत सम्मान है। छठ पूजा के दौरान, श्रद्धालु विशेष रूप से छठी मईया की आराधना करते हैं, जिनसे उन्हें संतान सुख और परिवार में सुख-शांति की प्राप्ति की उम्मीद होती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जो लोग सच्चे मन से छठी मईया की पूजा करते हैं, उनको परिवार में कभी भी दुख और दरिद्रता का सामना नहीं करना पड़ता। छठी मईया के प्रति श्रद्धा और भक्ति से मनुष्य के जीवन में सुख और समृद्धि का आगमन होता है। छठ पूजा का आयोजन मुख्य रूप से कार्तिक महीने में, शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से लेकर सप्तमी तक किया जाता है। इस पूजा में विशेष रूप से उपवास किया जाता है। इस अवसर पर लोग नदी, तालाब या किसी जल स्रोत के किनारे जाकर पूजा करते हैं। छठ पूजा की शुरुआत नहाय-खाय से होती है, इस दिन श्रद्धालु स्नान करके विशेष पकवान बनाते हैं, जिसमें चावल, चना का दाल और कद्दू की सब्जी शामिल है। दूसरे दिन, जिसे ‘खरना’ कहा जाता है, उपवास रखकर शाम को खीर का प्रसाद बनाया जाता है। इसी प्रसाद को खाने के बाद शुरू होता है निर्जला व्रत। तीसरे दिन, श्रद्धालु नदियों के किनारे जाकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं और फिर चौथे दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के पश्चात परिवार के सभी सदस्य प्रसाद ग्रहण करते हैं। बिहारी समाज के अनुसार छठ पूजा सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और परंपरा की एक अमूल्य धरोहर है। बिहार के लोग छठ पूजा को सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक उत्सव के रूप में मनाते हैं, जो भारतीय संस्कृति की गहराई को दर्शाता है।    

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live

Ceriabet Login

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet