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पांच-पांच का था इनाम, छत्तीसगढ़-नारायणपुर में एक महिला समेत दो नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण

नारायणपुर। नारायणपुर एसपी के समक्ष एक महिला व एक पुरुष नक्सली ने आत्मसमर्पण किया है। ये दोनों नक्सली भोरमदेव एरिया कमेटी में सक्रिय थे, दोनों नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। जिन पर पांच-पांच लाख रुपये का इनाम था। आत्मसमर्पण के पीछे सरकार की पुनर्वास नीति, माड़ बचाओ अभियान और सुरक्षा बलों का बढ़ता प्रभाव मुख्य कारण है। बीते कुछ वर्षों में अबूझमाड़ के अंदरूनी इलाकों में तेजी से विकास कार्य, सड़क निर्माण और विभिन्न सरकारी योजनाओं के प्रभाव से नक्सलियों का संगठन से मोहभंग हो रहा है। सुरक्षाबलों ने आत्मसमर्पित माओवादियों को 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी और उन्हें पुनर्वास नीति के तहत घर, नौकरी और अन्य सुविधाएं दिलाने का आश्वासन दिया है। इस दौरान बीएसएफ और जिला पुलिस के निरंतर ऑपरेशन से नक्सलियों के आत्मसमर्पण की संख्या बढ़ रही है, जिससे शीर्ष माओवादी नेतृत्व को बड़ा झटका लगा है। पुलिस के मुताबिक, आने वाले दिनों में और भी नक्सली आत्मसमर्पण कर सकते हैं।

सड़क निर्माण कार्य की सुरक्षा में लगे थे, छत्तीसगढ़-नारायणपुर में आईईडी ब्लास्ट में दो जवान घायल

नारायणपुर. नारायणपुर में नक्सलियों द्वारा लगाई आईईडी ब्लास्ट में दो जवान घायल होने की खबर है। बताया जा रहा है कि जवान कच्चपाल से तोके सड़क निर्माण कार्य की सुरक्षा में लगे थे। घायलों को इलाज के लिए जिला अस्पताल नारायणपुर लाया गया है। कोहकामेटा थाना इलाके की घटना है। एसपी प्रभात कुमार ने इसकी पुष्टी की है। जानकारी के मुताबिक, नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ के कच्चापाल में पुलिस ने बेस कैंप दो दिन पूर्व खोला था और कैंप तक पहुंच मार्ग बनाने में डीआरजी के जवान लगे हुए थे। इसी बीच नक्सलियों ने आईईडी बम लगा दिया, सड़क निर्माण की सुरक्षा में लगे जवान इसकी चपेट में आ गए। जिसमें दो जवान घायल हो गए। एक जवान के पैर में गंभीर चोट आई है। जिन्हें कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच नारायणपुर जिला अस्पताल में लाया गया। जहां जवानों को प्राथमिक उपचार दिया जा रहा है, जिसके बाद बेहतर इलाज के लिए बाहर भेजा जाएगा । घटना की पुष्टि एसपी प्रभात कुमार ने की है। घायल जवानों के नाम घासीराम और जनक पटेल है।

रुक-रुककर कई बार हुई फायरिंग, छत्तीसगढ़-नारायणपुर में नक्सली मुठभेड़ में हेड कांस्टेबल शहीद

नारायणपुर. छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में सुरक्षाबलों के जवानों और माओवादियों के बीच मुठभेड़ मुठभेड़ में डीआरजी नारायणपुर के प्रधान आरक्षक बिरेंद्र कुमार सोरी शहीद हो गए हैं। शहीद जवान बिरेंद्र कुमार सोरी 2010 में नारायणपुर जिला बल में आरक्षक के पद में भर्ती हुए थे और साल 2018 में नक्सल ऑपरेशन में वीरतापूर्ण कार्य के लिए प्रधान आरक्षक के पद पर उनका प्रमोशन हुआ था। जिला नारायणपुर व कोंडागांव से डीआरजी और बीएसएफ की संयुक्त टीम अबूझमाड़ क्षेत्र के लिए रवाना हुई थी। आज दोपहर से संयुक्त सुरक्षाबलों की टीम और नक्सलियों के बीच रुक-रुककर फायरिंग हो रही बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने मुठभेड़ की जानकारी दी।

अब 21 साल बाद वापस अबूझमाड़ लौटेंगे 25 परिवार, छत्तीसगढ़-नारायणपुर में नक्सलियों के डर से छोड़े गांव

रायपुर. नक्सलियों के डर से अपना गांव छोड़ने के दो दशक से अधिक समय बाद लगभग 25 आदिवासी परिवार छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में अपने मूल स्थान पर लौटने की योजना बना रहे हैं। इन परिवारों के लगभग 100 सदस्यों ने 2003 में अबूझमाड़ स्थित गारपा गांव में घर छोड़ दिया था। 2003 में अबूझमाड़ स्थित गारपा गांव छोड़ने के बाद इन 25 परिवारों को नारायणपुर शहर के बाहरी इलाके में सरकारी भूमि पर बसाया गया। यहां उन्होंने आजीविका के लिए खेती करना शुरू कर दिया। अब 21 साल बाद ये परिवार हाल ही में अपने मूल स्थान को देखने गए। विकास कार्यों और स्थानीय आबादी के लिए पुलिस द्वारा वहां एक शिविर स्थापित करने के बाद अब ये परिवार वहां पुनर्वास की योजना बना रहे हैं। महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले की सीमा से लगा अबूझमाड़ हाल तक नक्सलियों का गढ़ माना जाता था। 4 अक्टूबर को सुरक्षाबलों ने इलाके में एक मुठभेड़ के दौरान 31 नक्सलियों को मार गिराया था। नक्सलियों की धमकी के बाद गांव छोड़ने वाले 60 साल के सुक्कुराम नुरेटी ने पीटीआई को बताया कि पैतृक जमीन छोड़ना कभी आसान नहीं था। हमारे पास अपनी जान बचाने के लिए भागने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। नुरेटी का परिवार उन 25 परिवारों में से एक था, जिन्होंने अप्रैल 2003 में गारपा छोड़ दिया था। नुरेटी अबूझमारिया समुदाय से हैं, जो विशेष रूप से कमजोर एक आदिवासी समूह है। उन्होंने कहा कि गांव के 80 परिवारों में से लगभग 25 लोग ‘गायत्री परिवार’ के अनुयायी थे। नक्सलियों ने इस पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने हमें धमकी दी कि अगर हमने ‘गायत्री परिवार’ का अनुसरण नहीं छोड़ा तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इसलिए हमने गांव छोड़ने का फैसला किया। नुरेटी ने कहा कि वे हमेशा वापस लौटना चाहते थे। पूर्व में जनपद पंचायत के सदस्य रह चुके नुरेटी ने कहा कि अब ऐसा लगता है कि हमारा सपना सच हो जाएगा। वहां एक पुलिस शिविर स्थापित किया गया है और चीजें बेहतर होने लगी हैं। नुरेटी और गांव छोड़ने वाले अन्य लोगों ने पिछले सप्ताह गारपा का दौरा किया। इन लोगों ने भगवान शिव का मंदिर खोला जो 2003 से बंद था। उन्होंने कहा कि हम गांव में फिर से बसने की योजना बना रहे हैं क्योंकि वहां हमारे खेत और घर हैं। छत्तीसगढ़ पुलिस ने पिछले आठ महीनों में गारपा, कस्तूरमेटा, मस्तूर, इरकभट्टी, मोहंती और होराडी गांवों में सुरक्षा शिविर स्थापित किए हैं। पुलिस के अनुसार, इन शिविरों की स्थापना ने नक्सलियों को क्षेत्र में बहुत सीमित एरिया में धकेल दिया है। नारायणपुर के पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार ने कहा कि दूरदराज और नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा शिविर हजारों ग्रामीणों को नियाद नेल्लानार योजनाओं के माध्यम से विकास कार्यों और कल्याणकारी उपायों का लाभ उठाने में मदद करेंगे। नियाद नेल्लानार के तहत राज्य सरकार सुरक्षा शिविरों के 5 किलोमीटर के दायरे में आंतरिक गांवों में विकास कार्य कर रही है। एसपी ने कहा कि नव स्थापित शिविरों के आसपास के गांवों से नक्सलियों द्वारा बेदखल किए गए आदिवासी अपने घरों को लौटने लगे हैं। ग्रामीणों पर पहले विकास परियोजनाओं का विरोध करने के लिए नक्सलियों का दबाव था। लेकिन, वे अब सड़क, मोबाइल टावर, स्वास्थ्य सुविधा और स्कूलों की मांग कर रहे हैं। पुलिस और प्रशासन के प्रयासों से आने वाले दिनों में सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे। बता दें कि लगभग 4,000 वर्ग किमी में फैला अबूझमाड़ प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) का गढ़ रहा है। इसके घने जंगल इस संगठन के नेताओं के लिए छिपने का ठिकाना थे। अधिकारियों ने कहा कि सुरक्षा बलों की बढ़ती उपस्थिति और क्षेत्र में किए जा रहे विकास कार्यों के कारण हाल के वर्षों में अबूझमाड़ में नक्सलियों की गतिविधियों में कमी आई है।

सुरक्षाबलों के दो जवान भी घायल, छत्तीसगढ़-नारायणपुर में मुठभेड़ में 4 नक्सली ढेर

नारायणपुर. छत्तीसगढ़ के नारायणपुर के अबुझमाड़ में नक्सलियों से जवानों की जबरदस्त मुठभेड़ जारी है। इस मुठभेड़ में अब तक 5 नक्सलियों को जवानों द्वारा मार गिराने की खबर सामने आई है। इस एनकाउंटर में सुरक्षाबलों के दो जवान भी घायल हुए हैं। जवान घायल हुए है जिनकी स्थिति सामान्य व खतरे से बाहर है। दोनों घायल जवानों को बेहतर ईलाज के लिए आवश्यक व्यवस्था की जा रही है। छत्तीसगढ़ में 2026 तक नक्सलवाद को समाप्त करने की दिशा में सरकार ने अपने कदम तेज़ी से बढ़ाना शुरू कर दिया है। दक्षिण बस्तर जो नक्सलियों का अब तक का सबसे मजबूत इलाका माना जाता है। यहाँ दो कैम्प लगा सुरक्षाबलों ने नक्सलवाद के समापन का बिगुल फूंक दिया है। वहीं बस्तर के दूसरे छोर पर कांकेर, नारायणपुर के अबुझमाड़ में जवानों का नक्सलियों के खिलाफ बड़ा ऑपरेशन जारी है। इस मामले की जानकारी देते हुए बताया गया है कि मुठभेड़ अब भी जारी है। अबूझमाड़ में चल रही इस मुठभेड़ के पूरे मामले पर बस्तर आईजी पी. सुंदरराज खुद ऑपरेशन में अधिकारियों से सम्पर्क साधे हुए हैं। नक्सलियों के बटालियन के इलाके में दो नए कैम्प छत्तीसगढ़ के बस्तर में नक्सलियों के सबसे मजबूत माने जाने वाले सुकमा के तुमलपाड़ और बीजापुर के कोंडापल्ली में सुरक्षाबलों ने दो नए कैम्प खोला है। यहां कई बार नक्सलियों और जवानों के बीच मुठभेड़ हो चुकी है। कैम्प खोलने से पहले जवानों ने पूरे इलाके को अपने कब्जे में लिया। इसी बीच 14 नवम्बर की पूरी रात साम साढ़े 6 बजे से लेकर सुबह तक नक्सलियों और जवानों के बीच मुठभेड़ चलती रही। इधर मुठभेड़ के बाद से हालात सामान्य जवानों के काबू में हैं। इस घटना से पहले 9 नवंबर को बीजापुर में जवानों ने 8 लाख के इनामी प्लाटून कमांडर समेत तीन नक्सलियों का शव बरामद किया था। बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक पी सुंदरराज ने बताया कि जवानों ने इलाके से भारी मात्रा में हथियार भी बरामद किए हैं। बीते दिनों सीआरपीएफ, एसटीेफ और डीआरजी के जवानों के बीच मुठभेड़ हुई थी। मुठभेड़ में मारे गए नक्सलियों का शव बरामद कर लिया गया है।

जवानों ने शुरू किया सर्च ऑपरेशन, छत्तीसगढ़-नारायणपुर में मुठभेड़में 4 नक्सली ढेर

नारायणपुर. छत्तीसगढ़ के नारायणपुर के अबुझमाड़ में नक्सलियों से जवानों की जबरदस्त मुठभेड़ जारी है। इस मुठभेड़ में अब तक 3 से 4 नक्सलियों को जवानों द्वारा मार गिराने की खबर सामने आई है। छत्तीसगढ़ में 2026 तक नक्सलवाद को समाप्त करने की दिशा में सरकार ने कदम तेज़ी से बढ़ाना शुरू कर दिया है। दक्षिण बस्तर जो नक्सलियों का अब तक का सबसे मजबूत इलाका माना जाता है। यहाँ दो कैम्प लगा सुरक्षाबलों ने नक्सलवाद के समापन का बिगुल फूंक दिया है। वहीं बस्तर के दूसरे छोर पर कांकेर, नारायणपुर के अबुझमाड़ में जवानों का नक्सलियों के खिलाफ बड़ा ऑपरेशन जारी है। इस मामले की जानकारी देते हुए बताया गया है कि मुठभेड़ अब भी जारी है। अबूझमाड़ में चल रही इस मुठभेड़ के पूरे मामले पर बस्तर आईजी पी. सुंदरराज खुद ऑपरेशन में अधिकारियों से सम्पर्क साधे हुए हैं। नक्सलियों के बटालियन के इलाके में दो नए कैम्प छत्तीसगढ़ के बस्तर में नक्सलियों के सबसे मजबूत माने जाने वाले सुकमा के तुमलपाड़ और बीजापुर के कोंडापल्ली में सुरक्षाबलों ने दो नए कैम्प खोला है। यहां कई बार नक्सलियों और जवानों के बीच मुठभेड़ हो चुकी है। कैम्प खोलने से पहले जवानों ने पूरे इलाके को अपने कब्जे में लिया। इसी बीच 14 नवम्बर की पूरी रात साम साढ़े 6 बजे से लेकर सुबह तक नक्सलियों और जवानों के बीच मुठभेड़ चलती रही। इधर मुठभेड़ के बाद से हालात सामान्य जवानों के काबू में हैं। इस घटना से पहले 9 नवंबर को बीजापुर में जवानों ने 8 लाख के इनामी प्लाटून कमांडर समेत तीन नक्सलियों का शव बरामद किया था। बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक पी सुंदरराज ने बताया कि जवानों ने इलाके से भारी मात्रा में हथियार भी बरामद किए हैं। बीते दिनों सीआरपीएफ, एसटीेफ और डीआरजी के जवानों के बीच मुठभेड़ हुई थी। मुठभेड़ में मारे गए नक्सलियों का शव बरामद कर लिया गया है।

गश्त से लौटते समय नक्सलियों ने किया हमला, छत्तीसगढ़-नारायणपुर में आईईडी ब्लास्ट में आईटीबीपी के दो जवान घायल

नारायणपुर. नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ के मोहंदी में नक्सलियों ने आईईडी ब्लास्ट किया है। इस ब्लास्ट में आईटीबीपी यानी इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस के दो जवान घायल हुए हैं। घायलों को प्राथमिक इलाज के लिए रायपुर एयर लिफ्ट किया गया है। एंबुलेंस जिला अस्पताल से मौके पर रवाना हो गई है। नारायणपुर के पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार ने दो जवानों के घायल होने की पुष्टि की है। बताया जा रहा है कि घटना उस समय हुई जब सुरक्षाबलों की एक टीम नक्सल सर्च अभियान से लौट रही थी। एसपी प्रभात कुमार ने बताया कि इस अभियान में गये जवान अभी लौटे नहीं हैं। उनके आने पर पूरे घटनाक्रम विस्तृत जानकारी अलग से दी जाएगी।

18 डीएसपी को मिला एएसपी के पद पर प्रमोशन, छत्तीसगढ़-नारायणपुर के ऐश्वर्य चंद्राकर बने एएसपी

जगदलपुर. राज्य सरकार ने डीएसपी से एडिश्नल एसपी के पद पर प्रमोशन का आदेश जारी कर दिया है। डीएसपी (उप पुलिस अधीक्षक) व सहायक सेनानी के पद से एडिश्नल एसपी व उप सेनानी के पद पर प्रमोशन आदेश जारी करते हुए नयी जगह पोस्टिंग दी है। गृह विभाग की तरफ से जारी आदेश के मुताबिक 18 डीएसपी को एडिश्नल एसपी के पद पर प्रमोशन दिया गया है। छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग में पदस्थ 18 डीएसपी व सहायक सेनानियों को एडिशनल एसपी के पद पर पदोन्नति दी गई है। पदोन्नत पुलिस अफसरों को नई पदस्थापना भी दी गई हैं। लिस्ट में महासमुंद में पदस्थ डीएसपी कृष्णा कुमार पटेल को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राज्य इन्वेस्टीगेशन एजेंसी पुलिस मुख्यालय में पदस्थ किया गया है। विश्व दीपक त्रिपाठी को अनु, अधिकारी केशलूर जिला बस्तर से बलरामपुर रामानुजगंज का एएसपी बनाया गया है। उदयन बेहार को उप पुलिस अधीक्षक बिलासपुर से एएसपी आसूचना शाखा, कांकेर कैम्प पुलिस उप महानिरीक्षक कांकेर। कु. नवनीत कौर एसडीओपी बालोद से मुंगेली का एएसपी बनाया गया है। अमित पटेल सरगुजा डीएसपी को आसूचना शाखा कैम्प बस्तर का एएसपी बनाया गया है। गंगा उपाध्याय सहायक सेनानी प्रथम वाहिनी छसबल भिलाई से उप सेनानी 8वीं वाहिनी छसबल जिला राजनांदगांव भेजा गया है। ऐश्वर्य कुमार चंद्राकर अनु. अधिकारी बलौदाबाजार भाटापारा से एएसपी आॅप्स नारायणपुर बनाया गया है। नितेश कुमार गौतम उप पुलिस अधीक्षक गैर कानूनी चिटफण्ड एवं वित्तीय कंपनियों के नियंत्रण प्रकोष्ठ बस्तर संभाग से एसपी खैरागढ़-छुईखदान-गंडई बनाया गया है।

वायर देखकर जवानों को हुआ शक, छत्तीसगढ़-नारायणपुर में नक्सलियों ने सड़क के बीच में लगाया कुकर बम

नारायणपुर. नारायणपुर जिले के कस्तूरमेटा और मोहंदी के बीच नक्सलियों के द्वारा जवानों को नुकसान पहुंचाने के लिए सड़क के बीचोबीच कुकर बम लगाया गया था, लेकिन जवानों ने सड़क पर वायर देखा। इससे उन्हें शक हुआ, जिसके बाद जवानों ने सड़क खोदकर बम को बाहर निकाल कर उसे डिफ्यूज कर दिया। आला अधिकारियों ने बताया कि रोजाना की तरह आज सुबह भी जवानों की एक टुकड़ी सर्चिंग पर निकली थी, जहां नक्सलियों के द्वारा जवानों को नुकसान पहुंचाने के लिए कस्तूरमेटा और मोहंदी के बीच में पांच-पांच किलो के तीन कुकर बम को दबा कर रखे थे। अचानक से जवानों की नजर तार पर गई, जहां जवानों ने बीडीएस की टीम को बुलाया गया। टीम ने तीनों बम को बाहर निकालकर उसे नष्ट कर दिया। इसके पहले भी हुई वारदातें — 25 नवंबर 2019 : बारसूर-पल्ली मार्ग पर पुसपाल के आगे नक्सलियों ने आईईडी बिछा रखी है। सर्चिंग के दौरान जवानों को 3 फीट गहरे गड्ढे में प्रेशर कुकर में 3 किलो आईईडी दबी मिली। जिसे पत्थरों व पत्तों से दबाकर रखा गया था। 22 नवंबर 2019 : इसी इलाके में नक्सलियों की लगाई आईडी की चपेट में आकर सड़क निर्माण में लगे 2 मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए थे। 6 अगस्त 2019 : नक्सली सप्ताह के चौथे दिन पुसपाल सीआरपीएफ कैम्प से करीब 700 मीटर की दूरी विस्फोट हुआ। सीआरपीएफ के जवान रात करीब 11 बजे गश्त से लौट रहे थे। वहीं 3 किमी दूर बोदली की सड़क के किनारे गिट्टी का ढेर रखा हुआ था। इसी के नीचे दो बम को जोड़कर प्रेशर कूकर में नक्सलियों ने आईईडी दबाकर रखी थी। इसी गिट्टी पर जवान रोशन कुमार का पैर आते ही ब्लास्ट हो गया और उनकी मौत हो गई।

जवानों ने अस्पताल में कराया भर्ती, छत्तीसगढ़-नारायणपुर में दो ग्रामीणों को अचानक लगी गोली

नारायणपुर. नारायणपुर जिले के ग्राम सोनपुर और घमंडी में रहने वाले दो ग्रामीण फल खाने के लिए घर से दूर नाला के पास जंगल में गए थे। अचानक से ग्रामीणों के पैर और कमर के पास गोली आ लगी, जिसके बाद घायलों को उपचार के लिए नारायणपुर जिला अस्पताल ले जाया गया था। वहां से हालत गंभीर को देखते हुए उन्हें मेकाज रेफर किया गया, जहां उनका इलाज जारी है। घायल बुधु (45) निवासी सोनपुर ने बताया कि मंगलवार की सुबह रिश्ते में भाई लगने वाले गोरा को फल खाने के लिए जंगल चलने की बात कही। जंगल जाने के बाद अचानक फल खाने के दौरान बुधु के पैर ने एक गोली आ लगी, जिसने पैर को चीर दिया। बुधु की आवाज को सुन पास में खड़े गोरा को भी कमर के पास गोली आ लगी। इसके बाद दोनों ग्रामीण वहीं गिर पड़े। ग्रामीणों का कहना है कि गोली किधर से चली, किसने चलाई उसे नहीं मालूम, लेकिन घटना के कुछ घंटे बाद जंगल आये जवानों ने घायल ग्रामीणों को देखकर उसे बेहतर उपचार के लिए नारायणपुर के जिला अस्पताल ले गए, जहां घायलों की स्थिति को देखते हुए उन्हें बेहतर उपचार के लिए मेकाज रेफर किया गया। ग्रामीणों की हालत को देखते हुए एक पुलिस टीम भी घायलों के साथ रवाना की गई है।

पांच माओवादियों के मारे जाने की खबर, छत्तीसगढ़-नारायणपुर में जवानों और नक्सलियों में मुठभेड़

नारायणपुर. छत्तीसगढ़ के नारायणपुर प्रभावित नारायणपुर जिले में मंगलवार को सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में पांच नक्सली मारे गए। पुलिस अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मुठभेड़ अबूझमाड़ में कोहकामेटा थाना क्षेत्र के जंगलों में उस समय हुई जब सुरक्षाबलों का एक संयुक्त दल नक्सल विरोधी अभियान पर था। नाम नहीं छापने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया, ”कार्रवाई में अब तक पांच नक्सली मारे गए हैं। इलाके में तलाशी अभियान अब भी जारी है और विस्तृत जानकारी का इंतजार है।” उन्होंने बताया कि मुठभेड़ में सुरक्षाकर्मियों के सुरक्षित होने की जानकारी मिली है। अधिकारी ने बताया कि जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी), विशेष कार्य बल (एसटीएफ), सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवानों ने रविवार को यह अभियान शुरू किया था। इस घटना के साथ ही राज्य में सुरक्षा बलों के साथ अलग-अलग मुठभेड़ों में इस साल अब तक 138 नक्सली मारे जा चुके हैं। बस्तर में सबसे ज्यादा कार्रवाई इनमें से 136 माओवादी बस्तर संभाग में मारे गए, जिसमें नारायणपुर समेत सात जिले शामिल हैं। वहीं दो अन्य नक्सलियों को रायपुर संभाग के धमतरी जिले में मार गिराया गया। पंद्रह जून को नारायणपुर जिले में मुठभेड़ में आठ नक्सली मारे गए थे तथा इस घटना में स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) का एक जवान शहीद हो गया था। पांच जून को नारायणपुर में मुठभेड़ में छह नक्सली मारे गए थे जबकि 23 मई को नारायणपुर-बीजापुर सीमा पर मुठभेड़ में सात नक्सलियों को मार गिराया गया था। इन जिलों में भी हुई कार्रवाई इससे पहले 10 मई को बीजापुर में मुठभेड़ में 12 नक्सली मारे गए थे और 30 अप्रैल को नारायणपुर और कांकेर जिलों की सीमा पर मुठभेड़ में तीन महिलाओं समेत 10 नक्सली मारे गए थे। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक 16 अप्रैल को कांकेर जिले में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में 29 नक्सली मारे गए थे। नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ इलाके में पुलिस-नक्सली मुठभेड़ में 5 नक्सलियों के शव बरामद किए गए हैं. वहीं कई नक्सलियों के घायल होने का दावा बस्तर के आईजी सुंदरराज पी ने किया है. माओवादियों के अस्थाई कैंप से बड़ी मात्रा में नक्सलियों का विस्फोटक सामान, हथियार और नक्सली साहित्य बरामद किए गए हैं. बताया जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों से माओवादी संगठन के बड़े कैडर के नक्सली इस इलाके में डेरा जमाए हुए थे. इसके बाद जवानों ने सूचना मिलने पर घेराबंदी किया. इस घेराबंदी के दौरान जवानों और नक्सलियों के बीच जबरदस्त मुठभेड़ हुई. पुलिस चला रही ‘माड़ बचाओ अभियान’ इसी इलाके में जवानों ने कुछ महीने पहले मुठभेड़ में 16 नक्सलियों को ढेर किया था. गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों से इन पांच जिलों में पुलिस के जरिय ‘माड़ बचाओ अभियान’ चलाया जा रहा है. दरअसल, पिछले 30 जून को बस्तर संभाग के  नारायणपुर, दंतेवाड़ा, बस्तर, कोंडागांव और कांकेर जिले में DRG, STF, BSF और आईटीबीपी के लगभग 1400 जवान नक्सलियों के कोर इलाके अबूझमाड़ में सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं.  इसी दौरान जंगलों में जवानों और नक्सलियों का आमना- सामना हुआ है. 2 जुलाई सुबह   नक्सली और जवानों के बीच हो रही मुठभेड़ हुई.

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