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जहां सनातन का विरोध, वहां नहीं जा रही नई जनरेशन: योगी आदित्यनाथ

अयोध्या राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिवस पर गुरुवार को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रीराम यंत्र की प्रतिष्ठापना की। इस अवसर पर राष्ट्रपति की उपस्थिति में गोरक्षपीठाधीश्वर व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने सबसे पहले प्रदेशवासियों को भारतीय नवसंवत्सर की शुभकामना दी। सीएम योगी ने कहा कि सरयू मैया अयोध्या धाम को पवित्र करते हुए अपने निर्मल जल से पूरे क्षेत्र को पवित्र करती हैं। उन्होंने रामराज्य की अनुभूति का जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया में युद्ध चल रहे हैं और हम श्रीराम यंत्र की प्रतिष्ठापना कार्यक्रम में सहभागी बन रहे हैं। उन्होंने वर्तमान पीढ़ी की प्रशंसा की और कहा कि यह पीढ़ी नववर्ष पर ऐसे किसी टूरिस्ट डेस्टिनेशन पर नहीं जाती, जहां सनातन के विरोध में कोई कार्य हो रहा है। वह नए वर्ष पर परिवार के साथ मंदिर जाती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व-मार्गदर्शन में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन, श्रीरामलला की प्राण-प्रतिष्ठा, रामदरबार के पवित्र विग्रह की स्थापना, ध्वजा आरोहण और आज श्रीराम यंत्र की स्थापना का कार्यक्रम हर सनातन धर्मावलंबी व सच्चे भारतीय को आनंद से विभोर कर देता है और यही भारत की आस्था है। उन्होंने विपक्षी दलों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि आस्था को अंधविश्वास कहकर अपमानित किया गया था। इसे अपमानित करने वाले वही लोग हैं, जो सत्ता बचाने के लिए नोएडा नहीं जाते थे। नोएडा न जाना उनके लिए अंधविश्वास नहीं था, लेकिन राम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम, कृष्ण-कन्हैया के मथुरा-वृंदावन की बात करना अंधविश्वास का पर्याय था। लेकिन जो आस्था 500 वर्ष तक निरंतर बनी रही, संघर्षों का मुकाबला करती रही, वह न रुकी, न डिगी और न झुकी। आस्था को अपमानित करने वाली सत्ता के खिलाफ संघर्ष निरंतर जारी रहा। अंततः वह दिन आया, जब अयोध्या इस रूप में सबके सामने है। सीएम योगी ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर भारत के राष्ट्र मंदिर का प्रतीक बन गया है। यह रामराज्य की आधारशिला भी है। दुनिया में तमाम युद्ध चल रहे हैं, अव्यवस्था, आर्थिक अराजकता, भय-आतंक है और अयोध्याधाम में हजारों की संख्या में उपस्थित हम लोग भयमुक्त होकर राष्ट्रपति के अभिवादन और श्रीराम यंत्र की स्थापना कार्यक्रम में सहभागी बनकर रामराज्य की अनुभूति कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत इसलिए भारत बना है, क्योंकि इसे ऋषि-मुनियों की तपस्या, अन्नदाता किसानों के परिश्रम, कारीगरों की उद्यमिता और भारत की आस्था ने सदैव ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के रूप में बनाए रखा। श्रीराम जन्मभूमि यज्ञ की पूर्णाहुति कार्यक्रम के साथ जुड़कर न केवल प्रदेशवासी, बल्कि देश-दुनिया के सनातन धर्मावलंबी के मन में भी आनंद की अनुभूति हो रही है। सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 2025 में 156 करोड़ श्रद्धालु-पर्यटक धार्मिक व आध्यात्मिक स्थलों की यात्रा करने उत्तर प्रदेश आए। अयोध्या, काशी, प्रयागराज महाकुम्भ, मथुरा-वृंदावन में दर्शन करने जितने लोग आए, उतनी आबादी कई देशों की नहीं है। यह नया और बदलता भारत है। वर्तमान पीढ़ी अब दिग्भ्रमित नहीं है, वह सही दिशा में जा रही है। वह नए वर्ष पर परिवार के साथ मंदिर जाती है। लोग किसी ऐसे टूरिस्ट डेस्टिनेशन पर नहीं जाते, जहां सनातन के विरोध में कोई कार्य हो रहा है। सीएम ने राम मंदिर निर्माण यज्ञ में योगदान देने वाले संतों, रामभक्तों, कारीगरों/श्रमिकों का अभिनंदन किया। उन्होंने आंदोलन के दौरान बलिदान देने वाले रामभक्तों के साथ ही संतों व दिवंगत विहिप नेता अशोक सिंहल आदि को नमन किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को स्मृति चिह्न प्रदान किया। कार्यक्रम का संचालन श्रीराम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने किया।

जापान, सिंगापुर व जर्मनी के मंत्री व निवेशक कहते हैं कि यूपी में है जीरो टॉलरेंस व जीरो करप्शन की नीतिः मुख्यमंत्री

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में ‘नव निर्माण के 9 वर्ष’ पुस्तक के विमोचन पर अपने संबोधन में कहा कि यूपी अब इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदेश बना है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के तेजी से बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर से अवगत कराते हुए कहा कि देश का सबसे बड़ा रेल नेटवर्क यूपी के पास है। सर्वाधिक सात शहरों (लखनऊ, कानपुर, आगरा, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ) में मेट्रो चल रही है। देश की पहली रैपिड रेल मेरठ से दिल्ली के बीच प्रारंभ हो चुकी है। देश का पहला रोपवे वाराणसी में बन रहा है। देश में पहला इनलैंड वाटर वे यूपी (वाराणसी से हल्दिया) में बना है। सीएम ने एयर कनेक्टिविटी का जिक्र करते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश में 16 एयरपोर्ट संचालित हैं, जिनमें चार अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट हैं। यूपी का पांचवां अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट जेवर में तैयार है। यह देश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट होगा। हमने 28 मार्च को इसके लोकार्पण के लिए प्रधानमंत्री जी से अनुरोध किया है, उन्हें आमंत्रित किया है। जेवर एयरपोर्ट से अर्थव्यस्था में ग्रोथ होगी और उप्र सरकार को एक लाख करोड़ रुपये की आय होगी।  इसी महीने पूरा हो रहा गंगा एक्सप्रेसवे का कार्य  सीएम योगी ने 2017 के पहले राज्य में इंफ्रास्ट्रक्चर की दुर्दशा का जिक्र किया, फिर अपनी सरकार के कार्यों को गिनाया। उन्होंने कहा कि देश का 55 फीसदी एक्सप्रेसवे यूपी के पास है। गंगा एक्सप्रेसवे इसी महीने पूरा हो रहा है। इसके पश्चात यूपी का शेयर 60 फीसदी हो जाएगा। यूपी ने इंटरस्टेट, इंटरनेशनल, फोरलेन कनेक्टिविटी को बेहतर किया है। मैत्रीद्वार बनाए गए हैं। सीएम ने यूपी में आए परिवर्तनों को भी इंगित किया और कहा कि हर जिला मुख्यालय फोरलेन, ब्लॉक-तहसील मुख्यालय टू लेन-फोर लेन कनेक्टिविटी से जुड़ा है।  सिंगापुर, जापान व जर्मनी से बड़े पैमाने पर आने वाले हैं निवेशक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अभी हम लोग जापान और सिंगापुर की यात्रा पर गए थे। मेरे साथ वित्त व औद्योगिक विकास मंत्री भी थे। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व आईटी मंत्री जर्मनी की यात्रा पर गए थे। उन देशों में सभी वरिष्ठ मंत्री व इंडस्ट्री लीडर्स कहते थे कि हम यूपी में इसलिए आ रहे हैं, क्योंकि वहां जीरो टॉलरेंस व जीरो करप्शन की नीति है। सीएम योगी ने कहा कि यूपी निवेश का बेहतरीन डेस्टिनेशन बनकर उभरा है। सिंगापुर, जापान और जर्मनी से बड़े निवेशक यूपी आने वाले हैं। अभी से पत्र आने प्रारंभ हो गए हैं। सरकार ने इस पर कार्य भी शुरू कर दिया है। जिस प्रदेश में कोई निवेशक नहीं आता था, वहां अब तक 15 लाख करोड़ के निवेश की ग्राउंड ब्रेकिंग हो चुकी हैं। छह लाख करोड़ रुपये का निवेश ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के लिए तैयार है। हर जिले में निवेश हो रहा है। हमारे पास व्यापक लैंडबैंक है। 34 सेक्टोरल पॉलिसीज, निवेश मित्र व निवेश सारथी जैसी उद्यम सर्मथित व्यवस्थाएं है। प्रदेश इस दिशा में आगे बढ़ा है।  सुरक्षा, पॉलिसी, लैंडबैंक और सरकार की नीयत नहीं होने से 2017 के पहले नहीं आते थे निवेशक सीएम योगी ने कहा कि यूपी में 2017 से पहले निवेशक नहीं आता था, क्योंकि यहां सुरक्षा, पॉलिसी, लैंडबैंक और सरकार की नीयत भी नहीं थी। 1947 से 2017 तक बमुश्किल 14 हजार से कम उद्योग थे, आज राज्य में अब तक 31 हजार बड़े उद्योग लग चुके हैं। यूपी में 96 लाख एमएसएमई यूनिट कार्यरत हैं, जिसमें 3.11 करोड़ लोग कार्यरत हैं। 31 हजार से अधिक उद्योगों में 65 लाख से अधिक लोग कार्य कर रहे हैं। निवेश तब आता है, जब सरकार की नीयत अच्छी होती है।  नोएडा जाने के अपशकुन को हमने उखाड़ फेंका सीएम ने पिछली सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि जो लोग हमारी आस्था को अंधविश्वास बोलते थे, वे नोएडा नहीं जाते थे। उन्हें लगता था नोएडा जाएंगे तो कुर्सी चली जाएगी। मुझे दायित्व मिला तो मैंने कहा कि नोएडा जाएंगे। लोगों ने कहा कि जो मुख्यमंत्री नोएडा जाते हैं, उनकी कुर्सी चली जाती है। मैंने कहा कि कुर्सी आज चली जाए, लेकिन प्रदेश का भला होगा तो नोएडा जाएंगे और विकास पर लगे बैरियर को हटाएंगे। नोएडा, ग्रेटर नोएडा आज देश के विकास में योगदान दे रहे हैं। यदि हम लोग नोएडा नहीं जाते तो देश में 55 फीसदी मोबाइल की मैन्युफेक्चरिंग और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट का 60 फीसदी निर्माण यूपी में नहीं हो पाता। नोएडा जाना यूपी के लिए अपशकुन बना दिया गया था, तब के मुख्यमंत्री उसका माध्यम बने थे। हमने कहा कि अपशकुन को उखाड़ फेकेंगे और इसे विकास में बाधा नहीं बनने देंगे।

इंतजार खत्म! जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट का 28 को उद्घाटन, सीएम योगी ने दी जानकारी

लखनऊ देश के सबसे बड़े इंटरनेशनल एयरपोर्ट का इंतजार खत्म हो गया है। इसी महीने 28 मार्च को एयरपोर्ट का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को अपनी सरकार के नौ वर्ष के सफल कार्यकाल पूरे होने पर आयोजित समारोह में इसका ऐलान किया। यूपी में फिलहाल16 डोमेस्टिक और 4 इंटरनेशनल एयरपोर्ट हैं। जेवर में बना एयरपोर्ट प्रदेश का 5वां और देश का सबसे बड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट है। इस अवसर पर सरकार के नौ साल के कार्यकाल के दौरान की उपलब्धियों वाली एक किताब का भी विमोचन किया गया। योगी ने कल से शुरू हो रहे नवरात्र के नौ दिनों तक सरकार के नौ साल की उपलब्धियों को लोगों तक पहुंचाने की अपील भी की। सुशासन और सुरक्षा का नया मॉडल मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश में जो भी परिवर्तन हुआ है, वह प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन और कार्यकर्ताओं के परिश्रम का परिणाम है। उन्होंने कानून-व्यवस्था पर जोर देते हुए कहा, “आज रमजान का महीना है, जल्द ही ईद आने वाली है, लेकिन कहीं कोई हलचल या दंगे का भय नहीं है। यही सुशासन है।” उन्होंने बताया कि २०१७ से पहले पुलिस भर्तियां रुकी हुई थीं, लेकिन उनकी सरकार ने 2.19 लाख पुलिसकर्मियों की पारदर्शी भर्ती की है और वर्तमान में 60,240 जवान ट्रेनिंग ले रहे हैं। जेवर एयरपोर्ट: एक लाख करोड़ की कमाई की उम्मीद जेवर एयरपोर्ट को उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था का गेम-चेंजर बताते हुए सीएम योगी ने कहा कि इससे भविष्य में एक लाख करोड़ रुपये की कमाई होने की उम्मीद है। उन्होंने पिछली सरकारों पर चुटकी लेते हुए कहा कि कुछ लोग ‘नोएडा’ जाने से डरते थे, लेकिन हमारी सरकार ने वहां जाकर निवेश का माहौल बनाया। आज देश के 55 फीसदी मोबाइल फोन नोएडा में बन रहे हैं। यूपी में अब 16 डोमेस्टिक और 5 इंटरनेशनल एयरपोर्ट्स का जाल बिछ चुका है, जिसमें जेवर पांचवां और सबसे बड़ा एयरपोर्ट होगा। विकास के आंकड़े: कृषि से लेकर रोजगार तक मुख्यमंत्री ने प्रदेश की प्रगति के महत्वपूर्ण आंकड़े साझा किए। बताया कि प्रदेश की कृषि विकास दर 8.5% से बढ़कर 18% हो गई है। किसानों को अब तक 3 लाख 16 हजार करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। एमएसएमई (MSME) सेक्टर में लगभग 3 करोड़ रोजगार के अवसर पैदा किए गए हैं। हर जिले में दो-दो कंपोजिट विद्यालय बनाए जाएंगे और संस्कृत पढ़ने वाले छात्रों के लिए रहने-खाने की मुफ्त व्यवस्था जल्द शुरू होगी। नौ दिन तक चलेगा जश्न, जनता से मांगे सुझाव सीएम ने घोषणा की कि नौ वर्ष पूरे होने का यह उत्सव नवरात्रि तक अनवरत चलेगा। उन्होंने जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे गांवों में जाएं और गरीब परिवारों, कारीगरों व महिलाओं को सरकार की लाभकारी योजनाओं के बारे में बताएं। उन्होंने कहा, “हमने प्रदेश को परिवार या जाति के चश्मे से नहीं देखा, बल्कि सबको समान अवसर और सुरक्षा दी है।”  

लोकप्रिय राजनेता व कुशल प्रशासक थे हेमवती नंदन बहुगुणाः मुख्यमंत्री

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार को पूर्व सीएम हेमवती नंदन बहुगुणा की पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर अपनी श्रद्धा निवेदित की। सीएम योगी ने स्व. हेमवती नंदन बहुगुणा को लोकप्रिय राजनेता, कुशल प्रशासक व स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बताया। सीएम ने कहा कि बहुगुणा जी ने उत्तर प्रदेश के विकास को नई ऊंचाइयां प्रदान कीं। सामाजिक जन-जागरूकता व राष्ट्रीय चेतना को प्रखर रूप से बढ़ाने के निरंतर प्रयास किए बहुगुणा जी ने सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा का जन्म तत्कालीन उत्तर प्रदेश (वर्तमान उत्तराखंड) के जनपद पौढ़ी के एक छोटे से गांव में हुआ था। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा गांव में ही अर्जित की। आगे की शिक्षा के लिए उन्होंने प्रयागराज की भूमि को चुना। वहीं उच्च शिक्षा ग्रहण करने के दौरान वह छात्रनेता के रूप में देश के स्वाधीनता आंदोलन से जुड़े। उन्होंने देश की स्वतंत्रता के साथ ही सामाजिक जन-जागरूकता व राष्ट्रीय चेतना को प्रखर रूप से बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए।  समाज के प्रत्येक तबके, देश की समृद्धि व आमजन के कल्याण के लिए किए अनेक कार्य मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रयागराज में 1942 में छात्रनेता के रूप में उनकी गिरफ्तारी हुई। स्वतंत्र भारत में जनप्रतिनिधि, प्रदेश सरकार के मंत्री, मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री के रूप में उन्होंने अनेक उल्लेखनीय कार्य किए। उत्तर प्रदेश के विकास को नई ऊंचाइयां प्रदान कीं। उन्होंने प्रयागराज को नई पहचान दी। हेमवती नंदन बहुगुणा द्वारा जनप्रतिनिधि के रूप में जो भी कार्य किए गए, वे समाज के प्रत्येक तबके, देश की समृद्धि व आमजन के कल्याण के लिए थे।  इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, विधायक जय देवी, विधान परिषद सदस्य रामचंद्र प्रधान, डॉ. अम्मार रिजवी, पूर्व सांसद रीता बहुगुणा जोशी, पूर्व महापौर संयुक्ता भाटिया आदि ने भी स्व. हेमवती नंदन बहुगुणा को श्रद्धासुमन अर्पित किए।

जालोर में योगी का संबोधन: जौहर को आत्मसम्मान का तेज बताया, बंदरों की मिसाल देकर लोभ छोड़ने की सीख

जालोर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को जालोर के प्रसिद्ध सिरे मंदिर में रत्नेश्वर महादेव मंदिर की 375वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित महायज्ञ में शिरकत की। कड़े सुरक्षा घेरे और संतों के भारी जमावड़े के बीच योगी का यह दौरा आध्यात्मिक होने के साथ-साथ राजस्थान की वीरता को नमन करने वाला रहा। राजस्थान की परंपरा : ‘जौहर’ केवल बलिदान नहीं, स्वाभिमान है योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में राजस्थान की वीरांगनाओं को नमन करते हुए ‘जौहर’ को परंपरा का ‘तेज’ बताया। उन्होंने चित्तौड़गढ़ की महारानी पद्मिनी और जालोर के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि यह वह शक्ति है जिसने शत्रुओं के सामर्थ्य को भस्म कर दिया। उन्होंने महाराजा मानसिंह द्वारा शिलालेखों के माध्यम से इतिहास सहेजने के कार्य को भी अद्भुत बताया। बंदरों से सीखा ‘साधना’ का पाठ: “लोभ से बचना ही योग है” मंदिर जाते समय ‘बंदरों के चौराहे’ पर योगी ने एक दिलचस्प वाकया साझा किया। उन्होंने लंगूरों को फल और रोटियां खिलाईं और गौर किया कि एक बंदर ने तब तक दूसरी रोटी नहीं ली जब तक उसने पहली खा नहीं ली। सीख : योगी ने कहा कि मनुष्य में ‘संचय’ करने की प्रवृत्ति ही अशांति की जड़ है। अगर इंसान भी बंदरों की तरह लोभ छोड़ दे और केवल जरूरत भर का रखे, तो समाज से अराजकता खत्म हो सकती है। युवाओं को चेतावनी : “स्मार्टफोन और नशा, सोचने की शक्ति के दुश्मन” योगी आदित्यनाथ ने आज के दौर की सबसे बड़ी समस्याओं— नशा और स्मार्टफोन पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा: स्मार्टफोन का अधिक उपयोग सोचने की शक्ति को खत्म कर रहा है। लोग डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं और ऑनलाइन गेम्स जीवन बर्बाद कर रहे हैं। उन्होंने सलाह दी कि भोजन और पूजा के समय फोन को खुद से दूर रखें और परिवार को समय दें। भव्य स्वागत और संतों का सानिध्य मंच पर योगी के साथ तिजारा विधायक बाबा बालकनाथ और मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग समेत राजस्थान भर के बड़े साधु-संत मौजूद रहे। मंदिर समिति ने 5 किलो फूलों का हार पहनाकर उनका भव्य स्वागत किया। करीब 40 मिनट के भाषण में उन्होंने योग और व्यायाम को जीवन का हिस्सा बनाने पर जोर दिया। सत्ता और साधना का संगम योगी आदित्यनाथ का यह दौरा धार्मिक कम और ‘संस्कार निर्माण’ का कार्यक्रम अधिक लगा। उन्होंने जालोर के प्राचीन वैभव (सिरे मंदिर की कारीगरी) की तुलना आज के आधुनिक मूल्यों से की और यह संदेश दिया कि तकनीक के युग में भी हमारे मूल्य और परंपराएं ही हमें सुरक्षित रख सकती हैं।

भू-माफियाओं की अब खैर नहीं! रजिस्ट्री से पहले जमीन के मालिकाना हक की होगी पूरी जांच

लखनऊ उत्तर प्रदेश में जमीन और संपत्ति से जुड़े विवादों, धोखाधड़ी और जालसाजी की घटनाओं को रोकने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार का हालिया कैबिनेट फैसला आने वाले समय में बड़ा बदलाव ला सकता है। रजिस्ट्री से पहले भू-संपत्ति के मालिकाना हक और उससे जुड़े दस्तावेजों की अनिवार्य जांच की व्यवस्था लागू होने से जमीन के लेनदेन को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में नई शुरुआत मानी जा रही है। यह फैसला भू-माफियाओं की कमर तोड़ने का भी काम करेगा साथ ही लोगों की मेहनत की कमाई लुटने से बचेगी। जमीन की खरीद-फरोख्त के मामलों में अक्सर कोई न कोई समस्या सामने आती रहती है। रजिस्ट्री होने के बाद खरीदार को पता चलता है कि जमीन विवादित है, उस पर किसी और का दावा है या फिर दस्तावेजों में गड़बड़ी है। ऐसे मामलों में कई बार लोगों को लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ती है और उनकी मेहनत की कमाई दांव पर लग जाती है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद रजिस्ट्री से पहले ही कागजात और मालिकाना हक की जांच होने से ऐसे जोखिम काफी हद तक कम हो सकते हैं। प्रॉपर्टी विशेषज्ञ प्रदीप मिश्रा का कहना है कि यह कदम भविष्य में संपत्ति विवादों की संख्या कम करने में अहम भूमिका निभा सकता है। जब रजिस्ट्री से पहले जमीन की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी और दस्तावेजों की पुष्टि हो जाएगी, तब फर्जी सौदे, डुप्लीकेट कागजात और धोखाधड़ी की संभावनाएं स्वतः कम हो जाएंगी। इससे जमीन खरीदने वाले लोगों को भरोसे के साथ निवेश करने का माहौल मिलेगा। यह फैसला भू-माफियाओं और अवैध जमीन कारोबार पर भी प्रभावी चोट साबित होगा। लंबे समय से फर्जी दस्तावेजों और कानूनी खामियों का फायदा उठाकर कुछ लोग जमीनों की अवैध खरीद-बिक्री करते रहे हैं। यदि रजिस्ट्री प्रक्रिया में ही कड़ी जांच की व्यवस्था लागू होती है, तो ऐसे तत्वों के लिए जमीन से जुड़े फर्जी सौदे करना बेहद मुश्किल हो जाएगा। इसके साथ ही प्रदेश में रियल एस्टेट सेक्टर के लिए भी यह कदम सकारात्मक माना जा रहा है। जब जमीन से जुड़े लेनदेन अधिक पारदर्शी और सुरक्षित होंगे, तो निवेशकों और खरीदारों का भरोसा बढ़ेगा। इससे शहरी और औद्योगिक विकास की योजनाओं को भी गति मिलने की संभावना है। योगी सरकार पहले से ही भू-माफियाओं के विरुद्ध सख्त कार्रवाई और अवैध कब्जों को हटाने के अभियान पर जोर दे रही है। ऐसे में रजिस्ट्री से पहले दस्तावेजों की जांच की नई व्यवस्था इस अभियान को और मजबूत आधार देने में सक्षम होगी। आने वाले समय में यह पहल आम लोगों को जमीन से जुड़े जोखिमों से बचाने और संपत्ति बाजार को अधिक विश्वसनीय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

मुख्यमंत्री ने लखनऊ वासियों को दी बधाई, कहा- 45 मिनट का सफर अब 10-15 मिनट में होगा पूरा

लखनऊ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को लखनऊ में 1,519 करोड़ की लागत से निर्मित ग्रीन कॉरिडोर परियोजना के कार्यों का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ वासियों को बधाई देते हुए कहा कि लखनऊ अब वाकई ‘मुस्कुराइए कि आप लखनऊ में हैं’ का प्रतीक बन चुका है। आज लखनऊ वास्तव में नए भारत के आधुनिक शहर की पहचान के रूप में तेजी से उभर रहा है। किसी भी राज्य की राजधानी ऐसी होनी चाहिए, जहां नागरिकों का जीवन सुगम हो और वे आसानी से अपने गंतव्य तक पहुंच सकें। इसी उद्देश्य से लखनऊ में आधुनिक कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी से विकसित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि जब लखनऊ की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने का विचार सामने आया, तब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसका विजन प्रस्तुत किया। उसी विजन को आगे बढ़ाते हुए लखनऊ डेवलपमेंट अथॉरिटी ने इस परियोजना को मूर्त रूप दिया। सीएम योगी ने कहा कि यह पहल राजधानी लखनऊ में यातायात व्यवस्था को और अधिक सुगम, व्यवस्थित एवं आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे शहरवासियों को बेहतर आवागमन की सुविधा प्राप्त होगी। बिना सरकारी बजट के तैयार हुआ बड़ा प्रोजेक्ट मुख्यमंत्री ने बताया कि इस परियोजना के लिए राज्य सरकार ने अलग से बजट नहीं दिया। लखनऊ विकास प्राधिकरण ने शहर में सरकारी भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कर उसका समुचित उपयोग किया और उसी से संसाधन जुटाकर करीब 1,519 करोड़ रुपये की लागत से इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पूरा किया। उन्होंने कहा कि शहरी विकास के क्षेत्र में यह मॉडल एक प्रेरणादायक उदाहरण है कि किस प्रकार संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करके बड़े प्रोजेक्ट पूरे किए जा सकते हैं। 28 किलोमीटर लंबा ग्रीन कॉरिडोर मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रीन कॉरिडोर परियोजना के अंतर्गत आईआईएम रोड से पक्का पुल तथा पक्का पुल  (डालीगंज) से समता मूलक चौराहा तक के दो चरणों का निर्माण पूरा हो चुका है, जिनका लोकार्पण किया गया। इसके साथ ही समता मूलक चौराहा से शहीद पथ और शहीद पथ से किसान पथ तक के तीसरे व चौथे चरण का शिलान्यास भी किया गया है। पूरी परियोजना लगभग 28 किलोमीटर लंबी है, जो राजधानी के विभिन्न हिस्सों को जोड़ते हुए यातायात को सुगम बनाएगी। 45 मिनट का सफर अब 10-15 मिनट में सीएम योगी ने कहा कि ग्रीन कॉरिडोर के बनने से राजधानी में यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव आएगा। पहले जिन मार्गों पर लोगों को गंतव्य तक पहुंचने में 45 मिनट से एक घंटा लग जाता था, अब वही दूरी सिर्फ 10 से 15 मिनट में तय हो सकेगी। इससे समय की बचत होगी और शहर में जाम की समस्या भी कम होगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि लखनऊ में बुनियादी ढांचे के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों का भी विकास किया जा रहा है। भूमि को कब्जामुक्त कराया जा रहा है और इस पर करोड़ों की लागत से विकास कार्य कराए जा रहे हैं। इससे शहर में नई सुविधाएं विकसित हो रही हैं। लखनऊ बना आधुनिक राजधानी का मॉडल मुख्यमंत्री ने कहा कि आज देश और दुनिया से आने वाले लोग लखनऊ की स्वच्छता, बेहतर सड़कों और आधुनिक व्यवस्थाओं की सराहना करते हैं। वे लखनऊ से प्रभावित होते हैं। अटल सरकार के समय राजनाथ सिंह ही थे, जिन्होंने लखनऊ को शहीद पथ की सौगात दी थी। बाद में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के सहयोग से किसान पथ का निर्माण किया गया, जिसने राजधानी की बाहरी रिंग रोड के रूप में लखनऊ को नई पहचान दी। आज ये मार्ग शहर के भविष्य के विस्तार और विकास का आधार बन रहे हैं। रक्षा उत्पादन और टेक्नोलॉजी का नया केंद्र बन रहा लखनऊ मुख्यमंत्री ने कहा कि लखनऊ केवल इंफ्रास्ट्रक्चर में ही नहीं, बल्कि इमर्जिंग टेक्नोलॉजी और रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के प्रयासों से लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल परियोजना स्थापित हुई है, जहां प्रदेश के युवा इंजीनियर और तकनीकी विशेषज्ञ कार्य कर रहे हैं। एकेटीयू, इंजीनियरिंग कॉलेज, पॉलिटेक्निक और आईटीआई से पढ़े युवाओं को अपने ही प्रदेश में रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। स्टेट कैपिटल रीजन के रूप में हो रहा विकास मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार लखनऊ को स्टेट कैपिटल रीजन (एससीआर) के रूप में विकसित करने की दिशा में भी कार्य कर रही है। इससे राजधानी और आसपास के क्षेत्रों का समग्र विकास तेजी से होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कार्यक्रम का आयोजन झूलेलाल वाटिका में हो रहा है। कभी इस स्थान पर अवैध कब्जा हो गया था, जिसे हटाकर इसे फिर से सार्वजनिक उपयोग के लिए विकसित किया गया। आने वाले 19 मार्च से नव संवत्सर (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा) के अवसर पर यहां झूलेलाल महोत्सव के कार्यक्रम भी आयोजित होंगे। मुख्यमंत्री ने यह भी याद दिलाया कि इस स्थान पर कभी भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैच भी आयोजित हुए थे। उत्तर प्रदेश बन रहा देश का ग्रोथ इंजन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज गल्फ में वॉर छिड़ी हुई है। इसके अतिरिक्त वैश्विक स्तर पर आर्थिक चुनौतियां हैं, लेकिन मजबूत नेतृत्व के कारण भारत तेजी से विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि उत्तर प्रदेश भी इस विकास यात्रा में पीछे नहीं रहेगा और देश के “ग्रोथ इंजन” के रूप में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। लखनऊ को कनेक्टिविटी, निवेश, टेक्नोलॉजी और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करती रहेगी। सीएम और रक्षामंत्री ने निर्माण कर्मियों का किया सम्मान कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्माण कार्य में लगे कर्मियों पर पुष्प वर्षा की और उन्हें पुरस्कृत भी किया। रक्षा मंत्री व मुख्यमंत्री ने इन कर्मियों के साथ ग्रुप फोटो भी कराया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा, संजय सेठ, लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल, विधायक नीरज बोरा, ओपी श्रीवास्तव, योगेश शुक्ल, जय देवी, अमरेश कुमार, सदस्य विधानपरिषद डॉ. महेंद्र सिंह, मुकेश शर्मा, लालजी प्रसाद निर्मल व अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। लखनऊ को मिला ग्रीन … Read more

सभी मॉडिफाई वैनशॉप को रेहड़ी-पटरी संचालकों को स्थायी रोजगार के लिये कराया गया उपलब्ध

लखनऊ योगी सरकार ने पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश को विश्व पटल पर पहचान दिलाने के लिए कई कीर्तिमान स्थापित किये हैं। इस दौरान योगी सरकार ने हमेशा नवाचार को प्राथमिकता दी है, ताकि प्रदेश का समग्र विकास हो। इसके नतीजे आज सभी के सामने हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन को मिशन के रूप में धरातल पर उतारने के लिए रामपुर जिला प्रशासन ने “जीरो वेस्ट मॉडल” की अनूठी पहल शुरू की है। इसके तहत रामपुर जिलाधिकारी द्वारा जिले में खराब व निष्क्रिय एंबुलेंस को नया रूप देकर गरीब रेहड़ी पटरी संचालकों को रोजगार के लिए उपलब्ध कराया गया है।   रामपुर जिला प्रशासन ने कचरे को संसाधन में बदला रामपुर जिलाधिकरी अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वेस्ट मैनेजमेंट को लेकर काफी गंभीर हैं। उनका स्पष्ट संदेश है कि “कचरे को समस्या नहीं, बल्कि संसाधन के रूप में देखा जाए।” सीएम योगी के इसी विजन को मिशन के रूप में धरातल पर उतारने को जीरो वेस्ट मॉडल की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। उन्होंने बताया कि रामपुर जिलाधिकारी कार्यालय में करीब 8 एंबुलेंस अपनी उम्र पूरी करने के बाद काफी दिनों से खड़ी थीं, जो पूरी तरह से निष्क्रिय हो चुकी थीं। ऐसे में इन एंबुलेंस को नया रूप देने की योजना बनायी गयी। इसके बाद इन सभी निष्प्रयोज्य शासकीय वाहनों को मॉडिफाई कर वैनशॉप में बदला गया। वेस्ट मैनजमेंट पहल के तहत पुराने और अनुपयोगी सरकारी वाहनों को संशोधित कर आकर्षक मोबाइल दुकानों के रूप में तैयार किया गया। इन मॉडिफाई वैनशॉप को रेहड़ी-पटरी संचालकों को स्थायी रोजगार के लिये उपलब्ध कराया गया। रामपुर नगर क्षेत्र के फोटो चुंगी के समीप प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत विकसित वेंडिंग जोन में 8 वैनशॉप को रेहड़ी पटरी संचालकों को सौंपा गया है।                                                                                                      वेंडिंग जोन विकसित कर, रेहड़ी पटरी संचालकों को सौंपी गईं मॉडिफाई वैनशॉप जिलाधिकारी ने बताया कि नगर क्षेत्र में लंबे समय से अव्यवस्थित ढंग से फैले ठेलों और रेहड़ी-पटरी के कारण अतिक्रमण और जाम की समस्या उत्पन्न हो जाती थी। नगर पालिका द्वारा समय-समय पर अभियान चलाकर इन्हें हटाया जाता था, जिससे इन छोटे कारोबारियों के सामने अपने रोजगार को लेकर असमंजस की स्थिति बन जाती थी। इसी समस्या के समाधान के उद्देश्य से यह अभिनव पहल की गई है। नगर पालिका परिषद रामपुर द्वारा निष्प्रयोज्य शासकीय वाहनों को मॉडिफाई कर उन्हें वैनशॉप के रूप में परिवर्तित किया गया है और फोटो चुंगी के पास एक सुव्यवस्थित वेंडिंग जोन विकसित किया गया है। यहां रेहड़ी-पटरी संचालकों को चिन्हित कर उन्हें स्थायी रूप से व्यवसाय करने का स्थान दिया गया है। इससे न केवल उनके रोजगार को स्थिरता मिली है बल्कि शहर की यातायात व्यवस्था को भी व्यवस्थित बनाने में मदद मिल रही है। आमजन को एक ही जगह मिलेंगे कपड़े, खाने-पीने की वस्तुएं और फास्ट फूड वेंडिंग जोन में मोबाइल शॉप के माध्यम से कपड़े, खाने-पीने की वस्तुएं, फास्ट फूड, बच्चों के खिलौने और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी। स्थानीय लोगों के लिए यह स्थान एक छोटे बाजार के रूप में विकसित हो रहा है, जहां उन्हें विभिन्न प्रकार की चीजें आसानी से मिल सकेंगी। जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने प्रत्येक वैनशॉप पर जाकर दुकानदारों से बातचीत की और वहां बेचे जा रहे सामान के बारे में जानकारी प्राप्त की। दुकानदारों ने इस पहल के लिए प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब उन्हें अपने व्यवसाय के लिए एक सुरक्षित और स्थायी स्थान मिल गया है। जिलाधिकारी ने कहा कि शहर में ऐसे और भी वेंडिंग जोन विकसित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक रेहड़ी-पटरी संचालकों को व्यवस्थित तरीके से रोजगार उपलब्ध कराया जा सके। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के माध्यम से छोटे व्यापारियों को सशक्त बनाते हुए उन्हें सम्मानजनक स्वरोजगार उपलब्ध कराने का कार्य किया जा रहा है।

नोबेल विजेता कॉन्स्टेंटिन नोवोसेलोव ने की सीएम योगी से भेंट, रिसर्च और टेक्नोलॉजी पर बातचीत

लखनऊ नोबेल पुरस्कार विजेता कॉन्स्टेंटिन नोवोसेलोव ने बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। इस दौरान लोहम कंपनी के सीईओ रजत वर्मा और कंपनी के चीफ ऑफ स्टॉफ आयुष सबात भी मौजूद रहे। तीनों अतिथियों ने निवेश के लिए उत्तर प्रदेश के सकारात्मक माहौल की सराहना की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नोबेल पुरस्कार विजेता कॉन्स्टेंटिन नोवोसेलोव, लोहम के सीईओ रजत वर्मा और चीफ ऑफ स्टाफ आयुष सबात का उत्तर प्रदेश में स्वागत किया। बैठक में उत्तर प्रदेश को देश में एडवांस्ड मटेरियल रिसर्च और इंजीनियरिंग का प्रमुख हब बनाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। इस क्रम में लोहम द्वारा प्रदेश में भारत की पहली ‘रेयर अर्थ टू मैग्नेट’ इंटीग्रेटेड फैसिलिटी स्थापित करने की योजना पर भी विस्तार से चर्चा हुई। इस फैसिलिटी के स्थापित होने से देश में उच्च तकनीक आधारित मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा। नोबेल पुरस्कार विजेता कोंस्टेंटिन नोवोसेलोव, जो ग्रैफीन की खोज के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं, लोहम कंपनी के साथ स्ट्रैटेजिक एडवाइजर और सहयोगी के रूप में कार्य कर रहे हैं। उनका उद्देश्य उन्नत मटेरियल साइंस को औद्योगिक स्तर पर बैटरी तकनीक और ऊर्जा क्षेत्र में लागू करना है। लोहम और नोवोसेलोव के सहयोग का मुख्य फोकस दो महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर है। पहला, 2डी मटेरियल (जैसे ग्रैफीन) का उपयोग कर अगली पीढ़ी की लिथियम-आयन बैटरियों की क्षमता, सुरक्षा व लाइफ को बढ़ाना। दूसरा- बैटरियों और परमानेंट मैग्नेट का उन्नत रीसाइक्लिंग सिस्टम विकसित कर महत्वपूर्ण खनिजों की बेहतर रिकवरी सुनिश्चित करना, जिससे सर्कुलर इकॉनमी को मजबूती मिलेगी। यह सहयोग भारत के ‘मेक इन इंडिया’ और ग्रीन एनर्जी विजन के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे पहले केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने नई दिल्ली में नोबेल पुरस्कार विजेता कॉन्स्टेंटिन नोवोसेलोव और लोहम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रजत वर्मा से मुलाकात की।

आम जनता के लिए राहत: विवादित जमीन की रजिस्ट्री पर रोक, मुकदमेबाजी कम करने का योगी सरकार का फैसला

लखनऊ यूपी में जमीन की खरीद-फरोख्त से जुड़े विवाद लंबे समय से आम लोगों के लिए बड़ी परेशानी बने हुए हैं. कई मामलों में यह सामने आता रहा है कि किसी जमीन की रजिस्ट्री ऐसा व्यक्ति अपने नाम से कर देता है जो उसका वास्तविक मालिक ही नहीं होता. कभी प्रतिबंधित जमीन की बिक्री हो जाती है, तो कहीं सरकारी या कुर्क संपत्ति भी रजिस्ट्री के जरिए दूसरे के नाम दर्ज हो जाती है. ऐसे मामलों का नतीजा अक्सर वर्षों तक चलने वाले कोर्ट केस और आर्थिक-मानसिक परेशानियों के रूप में सामने आता है। इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए अब योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाने का फैसला किया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में संपत्ति की रजिस्ट्री प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने से जुड़ा अहम प्रस्ताव मंजूर किया गया है. सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद फर्जी और विवादित जमीन की रजिस्ट्री पर प्रभावी रोक लग सकेगी और आम लोगों को अनावश्यक मुकदमेबाजी से राहत मिलेगी। रजिस्ट्री से पहले होगी दस्तावेजों की सख्त जांच नई व्यवस्था के तहत अब जमीन की रजिस्ट्री कराने से पहले उससे जुड़े दस्तावेजों की विस्तृत जांच अनिवार्य होगी. विशेष रूप से खतौनी, स्वामित्व से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य जरूरी दस्तावेजों का परीक्षण किया जाएगा. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि जो व्यक्ति जमीन बेच रहा है, वही उसका वास्तविक मालिक हो और संपत्ति पर किसी तरह का कानूनी विवाद या प्रतिबंध न हो. राज्य सरकार का मानना है कि यदि रजिस्ट्री से पहले ही दस्तावेजों की सख्ती से जांच कर ली जाए तो बाद में पैदा होने वाले कई विवादों को रोका जा सकता है। क्यों जरूरी हुआ यह फैसला राज्य के स्टाम्प एवं पंजीयन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविंद्र जयसवाल ने बताया कि हाल के वर्षों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें संपत्ति का वास्तविक मालिक कोई और होता है लेकिन रजिस्ट्री किसी दूसरे व्यक्ति के नाम हो जाती है. कई बार ऐसा भी होता है कि प्रतिबंधित या विवादित जमीन को भी बेच दिया जाता है. कुछ मामलों में तो कुर्क की गई संपत्ति या सरकारी जमीन का भी विक्रय विलेख तैयार कराकर उसका पंजीकरण करा लिया जाता है. ऐसे मामलों का पता तब चलता है जब बाद में कोई पक्ष अदालत का दरवाजा खटखटाता है. तब तक जमीन की खरीद-फरोख्त कई हाथों में जा चुकी होती है और विवाद और जटिल हो जाता है. सीमित अधिकार के कारण हो जाती थी रजिस्ट्री वर्तमान में जमीन की रजिस्ट्री की प्रक्रिया रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1908 के तहत संचालित होती है. इस कानून के अनुसार उप-निबंधक के पास किसी दस्तावेज के पंजीकरण से इनकार करने के अधिकार बहुत सीमित हैं. कानून की धारा 35 के तहत उप-निबंधक केवल कुछ परिस्थितियों में ही रजिस्ट्री रोक सकता है. यही वजह है कि कई बार संदिग्ध मामलों में भी रजिस्ट्री हो जाती है और बाद में विवाद खड़ा हो जाता है. सरकार का कहना है कि इसी खामी को दूर करने के लिए कानून में संशोधन की आवश्यकता महसूस की गई। कानून में जोड़ी जाएंगी नई धाराएं सरकार द्वारा प्रस्तावित संशोधन के तहत रजिस्ट्रेशन अधिनियम में नई धाराएं जोड़ी जाएंगी. इनमें प्रमुख रूप से धारा 22-A, 22-B और 35-A शामिल होंगी. धारा 22-A के तहत कुछ श्रेणियों की संपत्तियों के दस्तावेजों के पंजीकरण पर रोक लगाने का प्रावधान होगा. धारा 22-B के तहत पंजीकरण से पहले अचल संपत्ति की पहचान सुनिश्चित करने की व्यवस्था की जाएगी. धारा 35-A के अंतर्गत यदि रजिस्ट्री के लिए प्रस्तुत दस्तावेजों के साथ स्वामित्व, अधिकार, कब्जा या हस्तांतरण से जुड़े आवश्यक कागजात संलग्न नहीं होंगे, तो पंजीकरण अधिकारी को रजिस्ट्री से इनकार करने का अधिकार होगा. सरकार इन दस्तावेजों की सूची राजपत्र में अधिसूचना जारी कर तय करेगी। विवादित जमीन की बिक्री पर लगेगी रोक सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था के लागू होने से कई तरह की समस्याओं पर रोक लग सकेगी. उदाहरण के तौर पर- प्रतिबंधित जमीन की बिक्री, सरकारी भूमि की रजिस्ट्री, कुर्क संपत्ति का विक्रय, वास्तविक स्वामी के अलावा किसी और द्वारा जमीन बेच देना जैसे मामलों को शुरुआत में ही रोका जा सकेगा. इससे जमीन से जुड़े विवादों में कमी आने की उम्मीद है। आम लोगों को मिलेगी बड़ी राहत राज्य सरकार का कहना है कि इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा आम लोगों को मिलेगा. अक्सर देखा जाता है कि लोग अपनी जीवन भर की जमा पूंजी लगाकर जमीन या मकान खरीदते हैं. बाद में यदि पता चलता है कि संपत्ति विवादित है या किसी और की है, तो उन्हें वर्षों तक अदालतों के चक्कर लगाने पड़ते हैं. नई व्यवस्था लागू होने से ऐसे मामलों की संभावना काफी कम हो सकती है। अन्य राज्यों में भी लागू हैं ऐसे प्रावधान सरकारी अधिकारियों के मुताबिक देश के कई राज्यों में इसी तरह के प्रावधान पहले से लागू हैं, जहां संदिग्ध या विवादित संपत्तियों की रजिस्ट्री पर रोक लगाने की व्यवस्था की गई है. उत्तर प्रदेश में भी अब इसी दिशा में कदम उठाया गया है, ताकि जमीन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बढ़ाई जा सके. यह प्रस्ताव भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची की समवर्ती सूची की प्रविष्टि-6 के अंतर्गत लाया गया है. इसका मतलब यह है कि जमीन और संपत्ति के पंजीकरण से जुड़े मामलों में राज्य सरकार को कानून बनाने का अधिकार है, बशर्ते वह संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप हो। आगे क्या होगा कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब इस प्रस्ताव से संबंधित विधेयक को राज्य विधानमंडल में पेश किया जाएगा. विधानमंडल से स्वीकृति मिलने के बाद इसे कानून का रूप दिया जाएगा और फिर पूरे प्रदेश में नई व्यवस्था लागू की जाएगी. सरकार का मानना है कि यह कदम जमीन से जुड़े विवादों को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रजिस्ट्री से पहले स्वामित्व और दस्तावेजों की जांच अनिवार्य हो जाती है, तो इससे संपत्ति लेन-देन की प्रक्रिया अधिक सुरक्षित हो जाएगी. इससे न केवल धोखाधड़ी के मामलों में कमी आएगी बल्कि जमीन खरीदने वाले लोगों का भरोसा भी बढ़ेगा।

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट शुरू होने की ओर एक और कदम, एयरोड्रम लाइसेंस सीएम योगी को सौंपा गया

लखनऊ नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर भारत सरकार की ओर से जारी एयरोड्रम लाइसेंस प्रस्तुत किया। इसके साथ ही जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के संचालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम पूरा हो गया है। इस लाइसेंस के बाद अब एयरपोर्ट के उद्घाटन और वाणिज्यिक उड़ानों की शुरुआत की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। एयरपोर्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रिस्टोफ श्नेलमैन समेत वरिष्ठ अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने इस मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री को परियोजना की प्रगति और आगामी चरणों की जानकारी भी दी। अधिकारियों के अनुसार एयरोड्रम लाइसेंस मिलने के बाद अब नियामकीय स्वीकृतियों की अंतिम प्रक्रिया जारी है। एयरपोर्ट का एयरोड्रम सिक्योरिटी प्रोग्राम इस समय ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी के पास समीक्षा के लिए लंबित है। सुरक्षा से जुड़ी यह मंजूरी मिलते ही एयरपोर्ट प्रबंधन सभी संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय कर औपचारिक उद्घाटन और वाणिज्यिक संचालन की तिथि तय करेगा। गौतमबुद्ध नगर के जेवर में विकसित हो रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को देश और दुनिया के प्रमुख शहरों से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा है। इस एयरपोर्ट को विश्वस्तरीय सुविधाओं के साथ विकसित किया जा रहा है, जहां स्विस दक्षता और भारतीय आतिथ्य का समन्वय देखने को मिलेगा। एयरपोर्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रिस्टोफ श्नेलमैन हैं। एयरपोर्ट का विकास चार चरणों में किया जा रहा है। पहले चरण में एक रनवे और एक यात्री टर्मिनल भवन बनाया गया है, जिसकी क्षमता प्रतिवर्ष लगभग 1 करोड़ 20 लाख यात्रियों की होगी। दूसरे चरण में क्षमता बढ़ाकर 3 करोड़ यात्रियों तक पहुंचाई जाएगी। तीसरे और चौथे चरण में विस्तार के बाद कुल क्षमता 7 करोड़ यात्रियों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। पहले चरण में टर्मिनल भवन का क्षेत्रफल लगभग 1.38 लाख वर्गमीटर है, जिसमें 48 चेक इन काउंटर, 9 सुरक्षा जांच लेन और 9 इमिग्रेशन काउंटर बनाए गए हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय लाउंज भी विकसित किए जा रहे हैं। इसके अलावा यहां 10 एयरोब्रिज और 28 विमान पार्किंग स्टैंड की व्यवस्था की गई है। रनवे पर प्रति घंटे लगभग 30 उड़ानों के संचालन की क्षमता विकसित की गई है। एयरपोर्ट परिसर में आधुनिक कार्गो और लॉजिस्टिक्स हब भी तैयार किया जा रहा है। प्रारंभिक चरण में इसकी क्षमता लगभग 2.5 लाख टन कार्गो प्रतिवर्ष होगी, जिसे आगे चलकर 15 लाख टन तक बढ़ाया जाएगा। तकनीकी दृष्टि से भी यह एयरपोर्ट अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा। यहां डिजीयात्रा आधारित बायोमेट्रिक प्रणाली, सेल्फ बैगेज ड्रॉप और डिजिटल पैसेंजर प्रोसेसिंग सिस्टम जैसी व्यवस्थाएं लागू की जा रहीं हैं ताकि यात्रियों को तेज और सहज यात्रा का अनुभव मिल सके। सतत विकास को ध्यान में रखते हुए एयरपोर्ट को नेट जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य के साथ विकसित किया जा रहा है। परिसर में सौर ऊर्जा, वर्षा जल संचयन और इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग जैसी सुविधाएं भी विकसित की जा रहीं हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुरू होने से दिल्ली-एनसीआर में हवाई यातायात का दबाव कम होगा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में निवेश, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को लेकर बड़ी उपलब्धि, एयरोड्रम लाइसेंस सीएम योगी को दिया गया

इस लाइसेंस के बाद अब एयरपोर्ट के उद्घाटन और वाणिज्यिक उड़ानों की शुरुआत की प्रक्रिया बढ़ेगी आगे सुरक्षा मंजूरी के बाद जल्द तय होगी उद्घाटन तिथि, पहले चरण में 1.2 करोड़ यात्रियों की क्षमता लखनऊ, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर भारत सरकार की ओर से जारी एयरोड्रम लाइसेंस प्रस्तुत किया । इसके साथ ही जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के संचालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम पूरा हो गया है। इस लाइसेंस के बाद अब एयरपोर्ट के उद्घाटन और वाणिज्यिक उड़ानों की शुरुआत की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। एयरपोर्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रिस्टोफ श्नेलमैन समेत वरिष्ठ अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने इस मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री को परियोजना की प्रगति और आगामी चरणों की जानकारी भी दी। अधिकारियों के अनुसार एयरोड्रम लाइसेंस मिलने के बाद अब नियामकीय स्वीकृतियों की अंतिम प्रक्रिया जारी है। एयरपोर्ट का एयरोड्रम सिक्योरिटी प्रोग्राम इस समय ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी के पास समीक्षा के लिए लंबित है। सुरक्षा से जुड़ी यह मंजूरी मिलते ही एयरपोर्ट प्रबंधन सभी संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय कर औपचारिक उद्घाटन और वाणिज्यिक संचालन की तिथि तय करेगा। गौतमबुद्ध नगर के जेवर में विकसित हो रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को देश और दुनिया के प्रमुख शहरों से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा है। इस एयरपोर्ट को विश्वस्तरीय सुविधाओं के साथ विकसित किया जा रहा है, जहां स्विस दक्षता और भारतीय आतिथ्य का समन्वय देखने को मिलेगा। एयरपोर्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रिस्टोफ श्नेलमैन हैं। एयरपोर्ट का विकास चार चरणों में किया जा रहा है। पहले चरण में एक रनवे और एक यात्री टर्मिनल भवन बनाया गया है, जिसकी क्षमता प्रतिवर्ष लगभग 1 करोड़ 20 लाख यात्रियों की होगी। दूसरे चरण में क्षमता बढ़ाकर 3 करोड़ यात्रियों तक पहुंचाई जाएगी। तीसरे और चौथे चरण में विस्तार के बाद कुल क्षमता 7 करोड़ यात्रियों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। पहले चरण में टर्मिनल भवन का क्षेत्रफल लगभग 1.38 लाख वर्गमीटर है, जिसमें 48 चेक इन काउंटर, 9 सुरक्षा जांच लेन और 9 इमिग्रेशन काउंटर बनाए गए हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय लाउंज भी विकसित किए जा रहे हैं। इसके अलावा यहां 10 एयरोब्रिज और 28 विमान पार्किंग स्टैंड की व्यवस्था की गई है। रनवे पर प्रति घंटे लगभग 30 उड़ानों के संचालन की क्षमता विकसित की गई है। एयरपोर्ट परिसर में आधुनिक कार्गो और लॉजिस्टिक्स हब भी तैयार किया जा रहा है। प्रारंभिक चरण में इसकी क्षमता लगभग 2.5 लाख टन कार्गो प्रतिवर्ष होगी, जिसे आगे चलकर 15 लाख टन तक बढ़ाया जाएगा। तकनीकी दृष्टि से भी यह एयरपोर्ट अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा। यहां डिजीयात्रा आधारित बायोमेट्रिक प्रणाली, सेल्फ बैगेज ड्रॉप और डिजिटल पैसेंजर प्रोसेसिंग सिस्टम जैसी व्यवस्थाएं लागू की जा रहीं हैं ताकि यात्रियों को तेज और सहज यात्रा का अनुभव मिल सके। सतत विकास को ध्यान में रखते हुए एयरपोर्ट को नेट जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य के साथ विकसित किया जा रहा है। परिसर में सौर ऊर्जा, वर्षा जल संचयन और इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग जैसी सुविधाएं भी विकसित की जा रहीं हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुरू होने से दिल्ली-एनसीआर में हवाई यातायात का दबाव कम होगा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में निवेश, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

यूपी में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मिलेगा यूनिफॉर्म और आयुष्मान कार्ड, सीएम योगी की घोषणा

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को साड़ी-यूनिफॉर्म, बीमा और आयुष्मान कार्ड की सौगात दी। डीबीटी के जरिये कुल 38.49 करोड़ रुपये की धनराशि सीधे उनके खातों में भेजी गई। सीएम ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाने का वादा भी किया। सीएम ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को साड़ी-यूनिफॉर्म के लिए डीबीटी के माध्यम से 29.59 करोड़ रुपये की धनराशि स्थानांतरित की। उन्होंने मंच पर नेहा दुबे, मानसी साहू, पूनम तिवारी, मनोरमा मिश्रा को साड़ी भेंट की तो सेवा मित्र आकांक्षा (ब्यूटीशियन) और रत्ना भारती को यूनिफॉर्म सौंपी। इसके अलावा बीमा प्रीमियम की 8.90 करोड़ रुपये की धनराशि भी स्थानांतरित की। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मिनी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को सामाजिक सुरक्षा देने के लिए उन्हें प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना से जोड़ा। इसके तहत 18 से 50 वर्ष आयु वर्ग की पात्र कार्यकर्ताओं की मृत्यु होने पर परिजनों को 2 लाख रुपये मिला है, जिसका वार्षिक प्रीमियम 436 रुपये है। वहीं 18 से 59 वर्ष आयु वर्ग की पात्र कार्यकर्ताओं को प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के अंतर्गत दुर्घटना में मृत्यु या पूर्ण स्थायी विकलांगता होने पर 2 लाख रुपये तथा आंशिक स्थायी विकलांगता पर 1 लाख रुपये का बीमा कवर मिलता है, जिसका वार्षिक प्रीमियम 20 रुपये है। इसके अलावा सीएम ने पांच आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं गुड़िया सिंह, प्रियंका सिंह, सुधा अवस्थी, उमा सिंह और लालावती को मंच पर बुलाकर आयुष्मान कार्ड प्रदान किए। सफल महिला उद्यमियों से किया संवाद सीएम ने कार्यक्रम के दौरान वाराणसी, चंदौली, गाजीपुर और जौनपुर की 600 से अधिक महिलाओं के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये संवाद भी किया। वाराणसी की सीता देवी ने बताया कि मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना से उन्होंने ई-रिक्शा चलाकर और क्षेत्र की 250 महिलाओं को ई-रिक्शा चलाने का प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाया। गाजीपुर की प्रमिला देवी ने बताया कि वे प्राथमिक विद्यालय में रसोइया हैं। चंदौली जिले की सोनी कुमारी ने बताया कि वे फूलों की खेती करती हैं और महिला समूहों के माध्यम से क्षेत्र की अन्य महिलाओं को भी इस कार्य से जोड़कर स्वावलंबन की ओर प्रेरित करती हैं। जौनपुर की दुर्गा मौर्य ने बताया कि उन्होंने वह ड्रोन दीदी के रूप में भी कार्य करती हैं। उद्योग विभाग से ऋण लेकर नमकीन बनाने की फैक्ट्री स्थापित की है, जिससे अन्य महिलाओं को भी रोजगार मिल रहा है।  

सीएम योगी ने 5 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को प्रदान किए आयुष्मान कार्ड

लखनऊ उत्तर प्रदेश में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर नारी शक्ति की सुरक्षा और सम्मान के लिए आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को आयुष्मान कार्ड का उपहार दिया। उन्होंने पांच आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को मंच पर आयुष्मान कार्ड प्रदान किए। प्रदेश में अब तक कुल 3 लाख 684 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं सहित उनके परिवारजनों को आयुष्मान कार्ड योजना का लाभ प्रदान किया जा चुका है।  आयुष्मान कार्ड का सुरक्षा कवच महिलाओं का सशक्तीकरण और स्वावलंबन योगी सरकार के प्रमुख एजेंडे में है। सीएम योगी ने आज मंच पर लखनऊ की आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों गुड़िया सिंह, प्रियंका सिंह, सुधा अवस्थी,  उमा सिंह और लालावती को आयुष्मान कार्ड प्रदान किए। इस पहल के माध्यम से प्रदेश सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और उनके परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा का मजबूत सुरक्षा कवच प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। आंगनबाड़ी कार्यकत्री गुड़िया सिंह ने कहा- ‘आयुष्मान कार्ड मिलने से हमारा आत्मविश्वास और बढ़ गया है। योगी सरकार का यह तोहफा हमारे लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इसके माध्यम से हमारे परिवार को इलाज के लिए 5 लाख रुपये तक सुरक्षा गारंटी मिली है जिसके लिए हम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार व्यक्त करते हैं।’ प्रदेश सरकार की इस योजना के अंतर्गत अद्यतन 75 प्रतिशत आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों एवं सहायिकाओं को आयुष्मान कार्ड प्रदान किए जा चुके हैं। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का इलाज हुआ आसान आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को अपनी सेवा के दौरान कई मोर्चों पर लड़ना पड़ता है। ऐसे में आयुष्मान कार्ड उनको इलाज और सुरक्षा की गारंटी देता है। आयुष्मान कार्ड मिलने से आंगनबाड़ी कार्यकत्री प्रियंका सिंह की खुशी का ठिकाना नहीं रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की महिलाओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य को सदैव प्राथमिकता दी है। आज हम भयमुक्त होकर कहीं भी आ-जा सकते हैं। सरकार हमारे इलाज के लिए भी व्यवस्था कर रही है। गंभीर बीमारी होने पर इलाज में काफी खर्च हो जाता है। ऐसे में पांच लाख रुपये इलाज के लिए मिलना हम लोगों के लिए संजीवनी से कम नहीं है।  महिला सशक्तीकरण को मिला बल प्रदेश की समस्त आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को आयुष्मान कार्ड के अंतर्गत प्रति वर्ष पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस योजना के तहत आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं के साथ उनके परिवारजन भी सूचीबद्ध अस्पतालों में पांच लाख रुपये तक का निःशुल्क उपचार प्राप्त कर सकते हैं। प्रदेश सरकार इस योजना को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। इससे इन महिलाओं को गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए आर्थिक सुरक्षा मिली है और स्वास्थ्य सेवाओं तक उनकी पहुंच मजबूत हुई है। यह कदम महिला सशक्तीकरण और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। महिला दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में सरकार ने यह संदेश भी दिया कि प्रदेश की आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां केवल पोषण और बाल विकास की जिम्मेदारी नहीं निभा रहीं, बल्कि समाज में बदलाव की मजबूत कड़ी भी हैं। उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा को सुनिश्चित कर सरकार ने नारी शक्ति के सम्मान और सशक्तीकरण के अपने संकल्प को और मजबूत किया है।

राष्ट्रपति मुद्दे पर योगी का TMC पर निशाना: यह ओछी मानसिकता का प्रमाण

लखनऊ पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के प्रवास के दौरान प्रोटोकॉल का उल्लंघन और कार्यक्रम स्थल में अचानक बदलाव का विवाद बढ़ता जा रहा है. इसे लेकर भाजपा नेता लगातार ममता सरकार को घेर रहे हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे लेकर बंगाल सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने राष्ट्रपति के साथ किए गए व्यवहार को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है. उन्होंने इसकी निंदा की है. योगी ने एक्स पर लिखा है कि ‘राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के प्रति पश्चिम बंगाल में हुआ व्यवहार अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, निंदनीय और अक्षम्य है. यह केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र, मातृशक्ति और जनजातीय समाज की अस्मिता का अपमान है. राष्ट्रपति का पद भारतीय गणतंत्र की सर्वोच्च संवैधानिक गरिमा का प्रतीक है. इस पद के सम्मान के साथ किसी भी प्रकार की असंवेदनशीलता अस्वीकार्य है.’ इसे भी पढ़ें : अब ‘धर्मयुद्ध’ की जरूरत है…शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने हिंदुओं को दिया बड़ा मैसेज, 11 मार्च को करने जा रहे कुछ बड़ा योगी ने आगे लिखा कि ‘संथाल संस्कृति और मा. राष्ट्रपति जी के प्रति TMC का यह दुराग्रह उनके राजनीतिक अहंकार और ओछी मानसिकता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है. संपूर्ण देश इस कृत्य से आहत है. पश्चिम बंगाल सरकार को अपने इस अमर्यादित आचरण के लिए देश से अविलंब सार्वजनिक क्षमा मांगनी चाहिए.’ ये है पूरा मामला दरअसल, पूरा विवाद राष्ट्रपति मुर्मू के उत्तर बंगाल दौरे के दौरान सामने आया. राष्ट्रपति दार्जिलिंग जिले में 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं थीं. पहले कार्यक्रम बिधाननगर (फांसीदेवा ब्लॉक) में प्रस्तावित था, जहां बड़ी संख्या में संथाल आदिवासी समुदाय के लोग पहुंच सकते थे. लेकिन राज्य प्रशासन ने सुरक्षा, भीड़भाड़ और अन्य कारणों का हवाला देकर कार्यक्रम को बागडोगरा एयरपोर्ट के पास गोशाईपुर (या गोसाईंपुर) में स्थानांतरित कर दिया. राष्ट्रपति ने खुद इस बदलाव पर नाराजगी जताई और कहा कि नया स्थान छोटा था, जिससे कई लोग पहुंच नहीं पाए.

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