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मप्र में भाजपा का जलवा : विदिशा में श‍िवराज 4 लाख से ज्यादा मतों से आगे

BJP's dominance in MP: Shivraj ahead by more than 4 lakh votes in Vidisha

BJP’s dominance in MP: Shivraj ahead by more than 4 lakh votes in Vidisha मध्‍य प्रदेश में लोकसभा की 29 सीटों में से भोपाल, गुना, सागर, विदिशा, राजगढ़, होशंगाबाद, बैतूल, सागर की सीटें भी शामिल हैं। इन सीटों पर मुख्‍य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस का है। इन सीटों में से भी गुना, राजगढ़ और विदिशा सबसे हॉट सीट हैं। गुना से केंद्रीय मंत्री ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया, राजगढ़ से दिग्विजय सिंह और विदिशा सीट से पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान जैसे दिग्‍गज चुनाव मैदान में हैं। अब तक के रुझानों के मुताबिक विदिशा सीट पर शिवराज बड़ी जीत की ओर बढ़ रहे हैं। सिंधिया भी गुना में भाजपा का परचम लहराने जा रहे हैं। दूसरी तरफ, दिग्‍विजय सिंह अपने गढ़ में पिछड़ गए हैं। उनके राजनीतिक करियर के लिए यह परिणाम एक प्रकार से निर्णायक हो सकता है। यहां देखें भोपाल, गुना, सागर, विदिशा, राजगढ़, होशंगाबाद, बैतूल सीटों के परिणाम का हर लेटेस्‍ट अपडेट।

विदिशा संसदीय क्षेत्र में 3 दशक में बहुत कुछ कबाड़ा हो चुका है, उसे ठीक करना है

A lot of junk has happened in Vidisha parliamentary constituency in last 3 decades, it has to be rectified. विदिशा-रायसेन लोकसभा से कांग्रेस प्रत्याशी प्रतापभानु शर्मा से ‘पुष्पेन्द्र अहिरवार’ का ‘चुनावी साक्षात्कार’ ये भी बोले शर्मा? पुष्पेन्द्र अहिरवार.भोपाल/विदिशा। विदिशा-रायसेन संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस पार्टी ने दो बार सांसद रहे प्रतापभानु शर्मा को फिर से प्रत्याशी बनाकर उतारा है। यह सीट आजादी के बाद से ही कांग्रेस के लिए मुश्किल भरी रही है। यहां कुल 15 लोकसभा चुनाव में से कांग्रेस दो बार जीतने में कामयाब रही। यह सीट पर अटल विहारी वाजपेयी और रामनाथ गोयनका, जैसी शंखसियत को संसद भेज चुकी है। इस सीट से शिवराज सिंह चौहान भी जननेता के रूप में अपनी पहचान बनाने में कामयाब रहे हैं। हालही में तथाकथित राजनैतिक वनवास खत्म कर शिवराज सिंह चौहान फिर से मैदान में हैं। उनके मुकाबले के लिए कांग्रेस से पूर्व सांसद प्रतापभानु शर्मा हैं। शर्मा इस सीट पर 33 साल बाद चुनावी मैदान में उतरे हैं। वे 1980 और 1984 में सांसद चुने गए थे। अब वादाखिलाफी बहुत हो चुकी है। इसके चलते बदलाव बेहद जरूरी है। विदिशा संसदीय क्षेत्र में 3 दशक में बहुत कुछ कबाड़ा हो चुका है। उसको ठीक करने के लिए प्रताप भानू को फिर हथियार उठाने पड़ंेगे। वे हरिभूमि और आईएनएच चैनल के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी से ‘चुनावी संवाद’ कार्यक्रम में अपनी बात रख रहे थे। उनसे सीधी बात सवाल: आप लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं, आपकी क्या है चुनावी रणनीति?जवाब: मैं कांग्रेस पार्टी का अिधकृत प्रत्याशी हूं। पूरी दमखम से चुनाव लड़ रहा हूं और जीतूंगा भी। भाजपा ने जिस प्रत्याशी को मेरे सामने उतारा है, उन्होंने अपने संसदीय और मुख्यमंत्रित्व काल में ऐसा कुछ भी नहीं किया, जिसका उल्लेख किया जाए। उनकी कथनी और करनी में कितना अंतर है, यह जनता समझ चुकी है। लोकल मुद्दे इतने हो गए हैं कि उसका कोई सही प्रतिनिधित्व नहीं कर रहा है। बेतवा नदी की शुद्धि के लिए शिवराज ने 20 साल पहले कहा था, जो आज तक नहीं हुआ। उद्योग आएंगे, वे भी नहीं आए। मनमोहन सिंह के कार्यकाल में यहां की सांसद सुषमा स्वराज को रेल कारखाना दिया था, जिसका अिस्तत्व नहीं दिख रहा। रोजगार का मुद्दा वहीं का वहीं है। किसानों को फसल के दाम नहीं मिल रहे। महंगाई का मुद्दा तो बना ही हुआ है। ये सब स्थानीय मुद्दे हैं जिनसे लोग परेशान हैं। सवाल: जब शिवराज के प्यादे चुनाव जीत जाते हैं तो अब वजीर खुद मैदान में हैं, कैसे आप जीतेंगे?जवाब: क्षेत्र की जनता जनार्दन को समझने की जरूरत है। 30 साल के सांसद या मुख्यमंत्री के रूप में शिवराज ने हमारे क्षेत्र को क्या दिया। नौजवाब को रोजगार के लिए कितने उद्योग लगाए। नेता तो आते-जाते रहते हैं, लेकिन जनता तो वहीं की वहीं खड़ी है। जनता के आशीर्वाद से हम जीतेंगे। नेता तो स्वार्थ की सौदेबाजी करते रहते हैं। भाजपा ने तो ‘दलबदल सेल’ खोल दिया है, यह कितना शर्मनाक है। भ्रष्टाचार के आवरण में भाजपा ढकी हुई है। लोगों को लालच देकर खरीद रही है। हो सकता है कि शशांक भार्गव हारने के बाद टेंशन आए हों तो वे भाजपा में फोटो खिंचाने चले गए। 50 साल के अनुभव से कह सकता हूं कि जिस तरह की गंदी राजनीति चल रही है, ऐसी कभी नहीं हुई। जब जनता ने ही तय कर लिया कि हमें बदलाव लाना है तो नेताओं के आने-जाने से कुछ नहीं होगा। सवाल: विधानसभा चुनाव के दौरान भी उतना ही आत्मविश्वास था, जितना आज है, इतना आत्मविश्वास कहां से लाते हैं?जवाब: हम वक्त की कसौटी पर खरे उतरे हैं। क्षेत्र की कसौटी पर खरे उतरे हैं। मप्र में हमारी सरकार रही है। अभी हमारा प्रयास सरकार बनाने का था, लेकिन किसी कारणवश नहीं बना पाए। इसके कई कारण रहे हैं। प्रत्याशियों ने कई शिकायतें की। सबसे ज्यादा ईवीएम की शिकायतें की, जिनपर चुनाव आयोग मौन रहा है। परिणामों में हेराफेरी की शिकायतें भी आई हैं। यह सब आपने भी देखा है। ईवीएम पर नजर रखना बहुत जरूरी है। क्योंकि पूरा खेल और हेराफेरी इसी से संभव है। ईवीएम का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर उठ रहा है, यह हमें कहने की जरूरत नहीं है। सवाल: उसी ईवीएम से ही चुनाव हो रहे हैं तो आपके लिए गुंजाइश कहां बची है?जवाब: ईवीएम पर कड़ी निगाह रखेंगे। अब ईवीएम में हेराफेरी बिल्कुल नहीं होने देंगे। यदि हुआ तो उसके लिए कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी। अब हाथ पर हाथ धरे कांग्रेस नहीं बैठे रहेगी। क्योंकि अब नेता और जनता इस बात को अच्छी से समझ चुकी है। पार्टी ने चुनाव आयोग से लेकर सुप्रीम कोर्ट में मुद्दे उठाए हैं। आगे भी लड़ाई लड़ंेगे। हमने चुनाव आयोग से कहा है कि ईवीएम से परिणाम दे रहे हैं, उसके साथ वीवीपेट की पर्ची की भी काउंटिंग की जाए, भले ही दो दिन लग जाएं, तभी परिणाम आएं। इससे डिजीटल टेक्नोलॉजी के दुरुपयोग को लेकर लोगों में जो शंका है, वह दूर हो जाएगी। अगर मैं कांग्रेस को वोट दे रहा हूं, वो हमें नहीं मिल रहा है तो यह हमारे मताधिकार का हनन है। सवाल: आपके नेता तो पार्टी छोड़ रहे हैं, फिर कैसे जीत रहे हैं आप?जवाब: देखिए, भाजपा सारे साम-दाम-दंड अपनाकर हमारे नेताओं को तोड़ रही है। ईडी, सीबीआई का डर दिखाया जा रहा है। यह भाजपा का छलकपट जनता देख रही है, वही इसका इस बार जवाब देगी। मेरा मानना है कि इस चुनाव के बाद दलबदलुओं की कोई औकात नहीं रहेगी। कोई 17 हजार कार्यकर्ता या नेता भाजपा में नहीं गए। मेरा दावा है कि भाजपा इन 17 हजार लोगों की लिस्ट प्रकाशित करे, तभी सच्चाई सामने आएगी। कुछ लोग पद या कमाने के लालच से सौदेबाजी करके गए हैं। यदि इस बार दिल्ली में सरकार बदली तो यही जाने वाले नेता उल्टी नाक से पांव रगड़ेंगे, ये मेरा दावा है। सवाल: शिवराज 10 लाख वोटों से जीतने का दावा कर रहे हैं तो आपका क्या होगा?जवाब: उनकी हवाहवाई बात करने की, घोषणावीर होने की पुरानी आदत है। मेरा दावा है कि वे 1 लाख से ज्यादा वोटों से हारेंगे। मप्र का इतिहास देख लीजिए कोई 10 लाख मतों से नहीं जीता। इसी से अंदाजा लगा लीजिए यह कितनी फर्जी … Read more

धान उपार्जन में लापरवाही एक और अफसर पर पड़ी भारी: जबलपुर के प्रभारी फूड कंट्रोलर के बाद अब प्रबंधक व जिला विपणन अधिकारी भी सस्पेंड

Negligence in paddy procurement fell heavily on another officer: After the food controller in-charge of Jabalpur, now the manager and district marketing officer are also suspended. सहाकारिता उपायुक्त डॉ. अखिलेश निगम पिक्चर से ही गायब हैं जबकि उपार्जन समिति में वे जिम्मेदार पद पर हैं। उदित नारायण भोपाल ! राज्य शासन ने जिला विपणन अधिकारी और मंडल प्रबंधक जबलपुर रोहित सिंह बघेल को भी सस्पेंड कर दिया है। यह कार्यवाही मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ के प्रबंध संचालक आलोक कुमार सिंह ने की है। प्रबंध संचालक द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि विपणन वर्ष 2023-24 में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए जारी नीति के अनुसार धान उपार्जन का कार्य नहीं कराया गया है। अधिकारी की लापरवाही के चलते शासन के समक्ष संघ की छवि धूमिल हुई है। इसलिए बघेल को जिम्मेदार मानते हुए उन्हें सस्पेंड किया गया है। निलंबन अवधि में बघेल का मुख्यालय विपणन संघ भोपाल तय किया गया है। मंगलवार को प्रभारी फूड कंट्रोलर हुए थे सस्पेंड इससे पहले मंगलवार को खाद्य, नागरिक और उपभोक्ता संरक्षण विभाग के प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव ने जबलपुर में पदस्थ प्रभारी जिला आपूर्ति नियंत्रक कमलेश टांडेकर को धान उपार्जन केंद्रों के मामले में गंभीर लापरवाही पर सस्पेंड किया था। निलंबन अवधि में टांडेकर का मुख्यालय खाद्य विभाग संचालनालय भोपाल तय किया है। आदेश में कहा था कि जबलपुर जिले में कुल 121 केंद्रों के विरुद्ध 85 उपार्जन केंद्र स्थापित किए हैं। बाकी 36 उपार्जन केंद्र महिला स्व सहायता समूहों को देने का प्रस्ताव 21 दिसंबर को भेजा गया जो काफी देरी से भेजा गया। इन उपार्जन केंद्रों के तय न होने से किसानों भेजा गया। इन उपार्जन केंद्रों के तय न होने से किसानों को उपज बेचने में परेशानी हुई है। साथ ही महिला स्व सहायता समूह उपार्जन केंद्र के लिए तय गोदामों का सत्यापन प्रक्रिया का पालन किए बगैर किया गया। सहकारी सेवा समितियों को दो-दो उपार्जन केंद्रों की जिम्मेदारी दिए जाने के विपरीत उपार्जन नीति का पालन नहीं करते हुए 27 सहकारी समितियों को केवल एक-एक उपार्जन केंद्र का जिम्मा सौंपा है। इसलिए जिले में आवश्यक उपार्जन केंद्र स्थापित नहीं किए जा सके। इसे व्यापक लापरवाही मानते हुए विभाग ने टांडेकर को सस्पेंड कर दिया है। राज्य शासन ने जबलपुर के फूड कंट्रोलर को सस्पेंड कर दिया है। मोहन यादव कैबिनेट के गठन के बाद शासकीय काम में लापरवाही के मामले में की गई यह पहली कार्रवाई है। खाद्य, नागरिक और उपभोक्ता संरक्षण विभाग के प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव ने जबलपुर में पदस्थ प्रभारी जिला आपूर्ति नियंत्रक कमलेश टांडेकर को धान उपार्जन केंद्रों के मामले में गंभीर लापरवाही पर सस्पेंड किया है। निलंबन अवधि में टांडेकर का मुख्यालय खाद्य विभाग संचालनालय भोपाल तय किया है।विभाग के अनुसार खरीफ सीजन में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी करने के लिए जारी की गई नीति के मुताबिक ई-उपार्जन पोर्टल पर रजिस्टर्ड किसानों से एक दिसंबर 2023 तक उपार्जन कार्य कराया जाना था। इसके लिए सहकारी समितियों के साथ एनआरएलएम में रजिस्टर्ड महिला स्व सहायता समूहों को भी उपार्जन केंद्र के संचालन का काम देने के निर्देश 29 नवंबर को जारी किए गए थे। इसमें जिला उपार्जन समिति के माध्यम से महिला स्व सहायता समूहों को उपार्जन केंद्र की अनुमति का प्रस्ताव खाद्य संचालनालय को भेजा जाना था। जबलपुर जिले में कुल 121 केंद्रों के विरुद्ध 85 उपार्जन केंद्र स्थापित किए गए हैं। बाकी 36 उपार्जन केंद्र महिला स्व सहायता समूहों को देने का प्रस्ताव 21 दिसंबर को भेजा गया जो काफी देरी से भेजा गया। इन उपार्जन केंद्रों के तय न होने से किसानों को उपज बेचने में परेशानी हुई है। साथ ही महिला स्व सहायता समूह उपार्जन केंद्र के लिए तय गोदामों का सत्यापन प्रक्रिया का पालन किए बगैर किया गया। इस संबंध में न तो प्रभारी फूड कंट्रोलर द्वारा संचालनालय को जानकारी दी गई और न ही स्थानीय स्तर पर जनहित का काम किया गया। सहकारी सेवा समितियों को दो-दो उपार्जन केंद्रों की जिम्मेदारी दिए जाने के विपरीत उपार्जन नीति का पालन नहीं करते हुए 27 सहकारी समितियों को केवल एक-एक उपार्जन केंद्र का जिम्मा सौंपा है। इसलिए जिले में आवश्यक उपार्जन केंद्र स्थापित नहीं किए जा सके। इसे व्यापक लापरवाही मानते हुए विभाग ने टांडेकर को सस्पेंड कर दिया है। आजीविका समिति की जाँच कराने की माँग कांग्रेस सहकारिता प्रकोष्ठ के अध्यक्ष शित्रकुमार चौबे ने जिले में कुछ आजीविका समितियों का फर्जी तरह से कार्य करने का आरोप लगाया है। इनका कहना है कि पंजीयन के 6 माह के अंदर समितियों के निर्वाचन के प्रस्ताव चले जाने चाहिए मगर पिछले 2 साल से किसी भी एक समिति का चुनाव प्रस्ताव कार्यालय उपायुक्त सहकारिता से नहीं गया है। नियम तो यह भी है कि यदि निर्वाचन नहीं होता है तो तत्काल विभाग को किसी शासकीय कर्मचारी को प्रशासक बना देना चाहिए, मगर कार्यालय के स्तर पर इस तरह की भी कार्रवाई नहीं हो रही है। इन्हें क्यों छोड़ा गया धान खरीदी की जाँच का जिम्मा तमाम एसडीएम को दिया गया था, खाद्य विभाग के अधिकारी भी इसमें शामिल थे, वहीं वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन और मार्कफेड के अधिकारियों का कहीं जिक्र तक नहीं किया जा रहा है। डिप्टी कलेक्टर, अपर कलेक्टर और सीईओ जिला पंचायत भी खरीदी केन्द्र की जाँच के लिए जिम्मेदार हैं लेकिन 1 दिसम्बर से अभी तक केवल लोकायुक्त ने ईमानदारी से कार्य किया और रिश्वत लेते कम्प्यूटर ऑपरेटर को पकड़ा, बाकी किसी ने भी किसी केन्द्र में कोई जाँच नहीं की। सहाकारिता उपायुक्त डॉ. अखिलेश निगम पिक्चर से ही गायब हैं जबकि उपार्जन समिति में वे जिम्मेदार पद पर हैं। रातों-रात गायब हुई धान जानकारों का कहना है कि जैसे ही वेयरहाउस संचालकों को यह पता चला कि जाँच दल आ रहा है तत्काल ही बिना अनुमति खरीदी करने वाले वेयरहाउसों से धान को गायब करवाया गया। यहाँ तक की कई वेयरहाउसों में जाँच दल पहुँच भी गया था लेकिन एप्रोच लगाकर जाँच दल को रोका गया और उनकी मौजूदगी में ही धान गायब करवाई गई। सबसे चौंकाने वाली बात तो यह है कि सरकारी बारदानों यानी बोरों में बिना अनुमति खरीदी हुई, यह कैसे हुआ कोई बताने तैयार नहीं। रातभर बाहर किया धान, फिर भी अंदर रखा मिला 30 हजार क्विंटल प्रमुख सचिव … Read more

श‍िवराज सिंह चौहान ने सीएम आवास खाली किया, खाली करने से पहले पूजा अर्चना की

Shivraj Singh Chouhan vacated the Chief Minister’s residence, performing a puja and ritual before the evacuation. सीएम आवास खाली करने से पहले श‍िवराज ने किए गौ माता के दर्शन, सुरक्षाकर्मियों ने दी विदाई श‍िवराज सिंह चौहान ने परिवार सहित सीएम हाउस स्थित मंदिर में की पूजा .भोपाल। मध्‍य प्रदेश के पूर्व मुख्‍यमंत्री श‍िवराज सिंह चौहान सीएम आवास खाली कर रहे हैं। पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान कुछ देर में सीएम हाउस छोड़कर B8 74 बंगले में शिफ्ट हो गए।इससे पहले श‍िवराज सिंह चौहान ने परिवार सहित सीएम हाउस स्थित मंदिर में पूजा अर्चना की और गौशाला में गौ माता के दर्शन किए । इस अवसर पर सीएम हाउस में पदस्थ सुरक्षा कर्मियों ने उन्हे विदाई भी दी। धर्मपत्‍नी साधना सिंह ने भी श‍िवराज को तिलक कर और आरती उतारकर स्‍वागत किया।इस दौरान श‍िवराज ने मीडिया के सवालों के जवाब भी दिए। उन्‍होंने नए दायित्‍व के बारे में पूछे गए सवाल पर कहा कि पार्टी उन्‍हें जो भी जिम्‍मेदारी देगी वे उसे निभाएंगे।उल्‍लेखनीय है कि दिल्‍ली में श‍िवराज भाजपा के वरिष्‍ठ नेताओं से मुलाकात के बाद यह स्‍पष्‍ट हो गया है कि पार्टी उन्‍हें लोकसभा चुनाव के मद्देनजर राष्‍ट्रीय स्‍तर पर कोई महत्‍वपूर्ण दायित्‍व सौंपेगी। श‍िवराज ने भी यह कहा है कि वे फ‍िलहाल दक्षिण के राज्‍यों का दौरा करेंगे।

सड़क हादसे में घायल हुए युवक की पूर्व सीएम शिवराज ने मदद की और उसे अस्‍पताल पहुंचाया।

Former Chief Minister Shivraj extended help to the youth injured in the road accident and ensured that he was taken to the hospital. भोपाल। शहर के रवींद्र भवन क्षेत्र में शुक्रवार को सड़क हादसे में घायल हुए युवक को पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अस्पताल भिजवाया। जानकारी के अनुसार एक बाइक सवार युवक शनिवार रात को 11 बजे रवींद्र भवन के सामने से गुजर रहा था। इस दौरान उसकी बाइक अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई और वह हादसे में घायल हो गया। इसी बीच वहां से पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का काफिला गुजर रहा था। युवक को अस्पताल पहुंचाया पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने घायल युवक को देखकर अपना काफिला रुकवाया। इसके बाद घायल युवक को लोगों की मदद से काफिले के वाहन द्वारा एक निजी अस्पताल पहुंचाया। साथ ही युवक को आश्वासन दिया कि उसका अच्छा उपचार होगा, चिंता करने की बात नहीं है, मामा उसके साथ है।

भाजपा: अचर्चित चेहरों के हाथ कमान सौंपने में जोखिम मे नि:संदेह.

BJP: Taking the risk in entrusting key responsibilities to lesser-known faces without hesitation. उदित नारायण इन अप्रत्याशित फैसलों के भीतर कई राजनीतिक संदेश छुपे हैं, जो भाजपा के स्वयंभू नेताओं के लिए तो हैं ही, उन विपक्षी नेताओं के लिए भी हैं, जो मात्र सीट बंटवारे और वोटों के कागजी गणित के भरोसे आगामी लोकसभा चुनाव में मोदी को पटखनी देने का अरमान पाले हुए हैं। भारतीय जनता पार्टी और उसके शीर्ष नेतृत्व ने हिंदी भाषी तीन राज्यों में भारी जीत के बाद जिन अचर्चित चेहरों के हाथों में सत्ता की कमान सौंपी है, उससे ‘चौंकना’ शब्द भी फीका लगने लगा है। यह कुछ वैसा ही था कि कोई जादूगर अपनी जेब में हाथ डाले और नोट किसी भीड़ में छिपे शख्स की जेब से निकले।मोदी- शाह ने मीडिया के तमाम अटकलों को बेकार साबित कर दिया है। लेकिन इन अप्रत्याशित फैसलों के भीतर कई राजनीतिक संदेश छुपे हैं, जो भाजपा के स्वयंभू नेताओं के लिए तो हैं ही, उन विपक्षी नेताओं के लिए भी हैं, जो मात्र सीट बंटवारे और वोटों के कागजी गणित के भरोसे आगामी लोकसभा चुनाव में मोदी को पटखनी देने का अरमान पाले हुए हैं। विधानसभा चुनावों में भाजपा के जीते हुए मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ राज्यों में ‘कौन बनेगा मुख्यमंत्री’ की रेस असली हार्स रेस से भी ज्यादा रोमांचक होने लगी थी। दावेदारी और राजयोग में अदृश्य मुकाबला चल रहा था। मीडिया की आंखें और राजनीतिक भविष्यवाणियां उन्हीं चंद चेहरों के आसपास मंडरा रही थीं, जिन्हें परंपरागत रूप से कुर्सी की दौड़ में प्रथम पंक्ति में माना जाता रहा था। ऐसे कुछ नाम जो सीएम या फिर वो भी नहीं तो कम से कम डिप्टी सीएम पद की शपथ लेने के लिए नए सूट सिलवा चुके थे। लेकिन हाय री किस्मत!भाजपा आलाकमान ने इन फैसलों से छह संदेश दिए हैं। पहला तो कोई खुद को पार्टी से ऊपर न समझे, दूसरा भाजपा में संघ अभी भी पूरी तरह ताकतवर है, तीसरा भाजपा में कोई साधारण कार्यकर्ता भी शीर्ष पद तक पहुंच सकता है, चौथा भाजपा ने आने वाले 15 साल तक राजनीति करने वाले नए खून की फौज तैयार कर दी है, पांचवां सोशल इंजीनियरिंग में भाजपा सभी राजनीतिक दलो से मीलों आगे है और छठा, इस बदलाव के जरिए भाजपा ने आगामी लोकसभा चुनाव की जमीन भी तैयार कर दी है और तकरीबन मुद्दे भी तय कर दिए हैं। मप्र में डा. मोहन यादव, छग में विष्णुदेव साय और राजस्थान में भजनलाल शर्मा बाकी दुनिया के लिए भले ही अचर्चित चेहरे रहे हों, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा को उनकी कार्यक्षमता पर भरोसा है। अब यह इन तीनो पर है कि मिले हुए अवसर को कामयाबी में वो कितना बदल पाते हैं। खुद को कितना साबित कर पाते हैं। हालांकि यह जोखिम तो हर उस प्रयोग में रहता है, जो राजनीति की प्रयोगशाला में पहली बार किया जाता है। मप्र में जब पहली बार शिवराज को मुख्यमंत्री पद की कमान सौंपी गई थी तब कई लोगों ने उनकी नेतृत्व क्षमता और देसी छवि पर तंज कसा था, लेकिन वक्त के साथ शिवराज ने खुद को न सिर्फ साबित किया बल्कि अपरिहार्य बन गए। उन्होंने अपनी राजनीति की नई इबारत लिखी। इमोशनल पॉलिटिक्स का नया सिलेबस तय किया और पूरे 18 साल तक सीएम पद पर जमे रहे।हालांकि, पहली पारी के सीएम शिवराज और चौथी पारी के सीएम शिवराज में काफी अंतर था । उनका अपना आभा मंडल और काकस तैयार हो गया था। इस दौरान उन्होंने अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को भी यथासंभव किनारे लगाया और शायद इसकी इंतिहा हो चुकी थी। यही स्थिति राजस्थान में वसुंधरा राजे की थी। राजे तो पहले से राज परिवार से हैं। लिहाजा कुर्सी पर विराजना उनके लिए नैसर्गिक अधिकार था। उन्होंने खुद को पार्टी और राज्य का भाग्य विधाता मान लिया था। अलबत्ता छग के 15 साल सीएम रहे और बाद में भाजपा में ही हाशिए पर डाल दिए गए डॉ रमनसिंह ने खुली बगावत के रास्ते पर जाने से खुद को बचाया और कुछ बेहतर पाने की आस जिंदा रखी।कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा में इस तरह क्षत्रप संस्कृति को समाप्त पर ‘ एक हाईकमान कल्चर’ को लागू कर भाजपा ने बहुत बड़ा जोखिम लिया है, जो भविष्य में आत्मघाती भी हो सकता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के चेहरे पर ही पार्टी का पूरी तरह आश्रित हो जाना संगठन की आंतरिक कमजोरी को दर्शाता है। यानी जब मोदी भी नहीं रहेंगे, तब क्या होगा? इसके अलावा इन तीन राज्यों में बिल्कुल ताजा चेहरों की ताजपोशी के साथ राजनीतिक और जातीय समीकरण भी साधने की कोशिश है। छग में आदिवासी चेहरे विष्णुदेव साय को सीएम बनाकर समूचे आदिवासी समुदाय को यह संदेश दिया गया है कि आदिवासी भी हिंदू ही हैं और वो हमारे लिए उतने ही महत्वपूर्ण हैं। इसी तरह मप्र में बिल्कुल अप्रत्याशित चेहरे डॉ. मोहन यादव को सीएम बनाकर यूपी और बिहार के यादवों को भी संदेश दिया गया है कि वो क्षेत्रीय पार्टियों के मोह से उबरें और भाजपा से जुड़ें। मप्र और राजस्थान में दलित डिप्टी सीएम बनाकर बहनजी मायावती और उनकी पार्टी के समर्थकों को संदेश है कि भाजपा में दलितों के लिए भी पूरी जगह है। दिलचस्प बात यह है कि विस चुनाव के दौरान तीनों राज्यों में कांग्रेस पूरे समय ओबीसी जातिजनगणना का मुद्दा उठाती रही, लेकिन जिस तेलंगाना में वह स्पष्ट बहुमत के साथ चुनाव जीती, वहां उसने किसी ओबीसी के बजाए रेवंत रेड्डी के रूप में एक अगड़े को ही मुख्यमंत्री बनाया। 26 विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन की आगामी बैठक 19 दिसंबर को होनी है। उसमें लोकसभा सीटों के बंटवारे के किसी फार्मूले पर बात होती है या नहीं, यह देखने की बात है। लेकिन हो भी गया तो थके चेहरों और सतही जोश से लोकसभा चुनाव की जंग कैसे जीती जाएगी, यह देखने की बात है। बहरहाल चुनाव रणविजय शास्त्र की क्लास में भाजपा से कुछ तो सबक लेने ही चाहिए।

शपथ के दौरान स्टेडियम के बाहर Shivraj के चाहने वालों ने काफिला रोका, मामा मामा के नारे लगाए.

During the swearing-in ceremony, supporters of Shivraj outside the stadium stopped the procession, chanting slogans in favor of Mama (referring to Shivraj Singh Chouhan).

मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष चुने गए केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर।

Narendra Singh Tomar, the Union Minister, has been elected as the Speaker of the Madhya Pradesh Legislative Assembly. संतोष सिंह तोमर भोपाल। मध्य प्रदेश में सरकार गठन को लेकर भोपाल में सोमवार को चली कई घंटों की बैठक के बाद पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष बनाने पर सहमति बनी है। ऐसे में अब पूर्व केंद्रीय मंत्री नए विधानसभा अध्यक्ष का पद संभालेंगे। भाजपा विधायक दल की बैठक में उनके नाम पर मुहर लगी है। हालांकि इससे पहले नरेंद्र सिंह तोमर को मुख्यमंत्री की रेस में गिना जा रहा था, लेकिन अब पूरी तरह से मध्य प्रदेश की सियासी तस्वीर साफ हो चुकी है। नरेंद्र सिंह तोमर को बीजेपी ने इस बार दिमनी विधानसभा सीट से टिकट दिया था। जहां उन्होंने 24 हजार से अधिक वोटों के अंतर से बड़ी जीत दर्ज की है। विधानसभा के अध्यक्ष होंगे पूर्व केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह पूर्व केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को भाजपा ने विधानसभा का अध्यक्ष बनाने का फैसला किया है। श्री तोमर दिमनी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर आए हैं। उन्होंने अपने सबसे निकटतम प्रतिद्वंदी बसपा के प्रत्याशी को 24461 वोटों के अंतर से मात दी है। नरेंद्र सिंह तोमर को 79137 वोट मिले हैं। श्री तोमर केंद्र की मोदी सरकार में कृषि मंत्रालय समेत कई अन्य मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। साफ-सुथरी छवि वाले नेता होने के नाते नरेंद्र सिंह तोमर को इस विधानसभा का स्पीकर चुना गया है।   छात्र जीवन से शुरू किया राजनीतिक सफर मध्य प्रदेश के नए स्पीकर चुने गए पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता नरेंद्र सिंह तोमर का जन्म मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के ओरेठी गांव में 12 जून 1957 को हुआ। श्री तोमर एक राजपूत क्षत्रीय परिवार से आते हैं। उन्होंने जीवाजी यूनिवर्सिटी से स्नातक तक की शिक्षा हासिल की हुई है। स्नातक की पढ़ाई के दौरान तोमर महाविद्यालय में छात्र संघ के अध्यक्ष भी रहे। इसके साथ ही वो ग्वालियर नगर निगम के पार्षद पद पर भी चुने गए, जिसके बाद वह पूरी तरह से राजनीति में सक्रिय हो गए। वर्ष 1977 में भाजपा ने उन्हें युवा मोर्चा का मंडल अध्यक्ष बना दिया। इसके बाद वर्ष 1984 में युवा मोर्चा के प्रदेश मंत्री बने और वर्ष 1991 में प्रदेश अध्यक्ष बने। वर्ष 2006 में नरेंद्र सिंह तोमर को फिर एक बार मध्य प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष चुना गया। इस राजनेतिक सफर के दौरान वे राज्यसभा सांसद भी रहे हैं। ग्वालियर से लड़ा था पहला विधानसभा चुनाव नरेंद्र सिंह तोमर ने अपना पहला विधानसभा चुनाव वर्ष 1993 ग्वालियर सीट से लड़ा था। इस चुनाव में उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था। इसके बाद वर्ष 1998 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी अशोक कुमार शर्मा को 26 हजार से अधिक वोटों के अंतर मात देकर विधानसभा में पहला कदम रखा था। इस दौरान उनको 50 हजार वोट मिले थे। उन्होंने अपना दूसरा विधानसभा का चुनाव वर्ष 2003 में लड़ा था, जिसमें उनको 63 हजार 592 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी बालेन्दु शुक्ला को 29 हजार 452 वोट मिले। तोमर ने यह चुनाव 34 हजार 140 वोटों के अंतर से जीता था। वर्ष 2003 से लेकर वर्ष 2007 तक श्री तोमर मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री के पद पर रहे। 2009 से लगातार चुने गए लोकसभा के सांसद साल 2009 में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर पहली बार मुरैना से लोकसभा सदस्य निर्वाचित हुए थे। मुरैना संसदीय क्षेत्र से लोकसभा सदस्य निर्वाचित होने से पहले वो राज्यसभा के सदस्य थे। इस चुनाव में उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी रामनिवास रावत को 1 लाख 97 वोटों से हराया था। वहीं, साल 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें ग्वालियर से टिकट दिया। इस दौरान उन्होंने 26 हजार से अधिक वोटों से जीत हासिल की। नरेंद्र सिंह तोमर केंद्र सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री, पंचायती राज मंत्री, खान मंत्री और संसदीय मामलों के मंत्री रहे हैं। इसके बाद वर्ष 2019 में उन्हें फिर एक बार मुरैना लोकसभा क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतारा गया और इस बार भी वोटों के बड़े अंतर से चुनाव जीतकर लगातार तीसरी बार लोकसभा में पहुंचे। जिसके बाद वो ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्रालय में रहे और उन्हें कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय का प्रभार दिया गया।

नतीजे के आठवें दिन मिला प्रदेश को नया मुख्यमंत्री, मोहन यादव के नाम पर लगी मुहर.

On the eighth day of the results, the state got a new Chief Minister, with the seal of approval on the name of Mohan Yadav. भोपाल। भारतीय जनता पार्टी ने आठ दिन मंथन करने के बाद सबको चौंका दिया है। बीजेपी के प्रदेश कार्यालय में सोमवार को नवनिर्वाचित विधायकों ने नए मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव के नाम पर मोहर लगाई। यादव उज्जैन दक्षिण से विधायक हैं। इसके अलावा जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ला उपमुख्यमंत्री होंगे। केंद्र में कृषि मंत्री रहे नरेंद्र सिंह तोमर स्पीकर होंगे। हालांकि उप मुख्यमंत्री और स्पीकर के नाम की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है। विधायक दल की बैठक में पर्यवेक्षक मनोहर लाल खट्टर, डॉ. के. लक्ष्मण और आशा लकड़ा मौजूद रहे। सीएम शिवराज सिंह ने उनके नाम का प्रस्ताव रखा, जिसका सभी विधायकों ने समर्थन किया। मोहन यादव को भरोसा नहीं हुआ तो पहले खड़े नहीं हुए। बाद में खड़े होकर हाथ जोड़े। मोहन यादव उज्जैन दक्षिण से विधायक हैं और ओबीसी वर्ग से आते हैं। जगदीश देवड़ा मंदसौर जिले के मल्हारगढ़ से विधायक हैं। देवड़ा एससी वर्ग से आते हैं। जबकि राजेन्द्र शुक्ला रीवा सीट से विधायक हैं और ब्राह्मण वर्ग से आते हैं। आठ दिन की कवायत, 15 मिनट में तय हुआ सीएमभाजपा प्रदेश कार्यालय पर शाम 4.11 बजे विधायक दल की बैठक शुरू हुई थी। मात्र 15 मिनट में नए मुख्यमंत्री बनाने की सारी प्रक्रिया पूरी कर ली गई। प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने विधायक दल की बैठक की जानकारी दी। पर्यवेक्षक और हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर खट्टर ने 6 मिनट के भाषण में सिर्फ इतना कहा कि भाजपा एक अनुशासित पार्टी है। केंद्रीय नेतृत्व के फैसले को सभी को स्वीकार करना चाहिए। यह परंपरा है। जिसके बाद सीएम के नाम का ऐलान कर दिया गया। शिवराज ने दिया इस्तीफा, मोहन ने पेश किया सरकार का प्रस्तावनए सीएम के नाम का ऐलान होने के बाद शिवराज सिंह चौहान राजभवन पहुंचे। जहां उन्होंने राज्यपाल मंगुभाई पटेल को सीएम पद से अपना इस्तीफा सौंपा। उनका इस्तीफा तत्काल मंजूर भी हो गया। शिवराज सिंह ने नए सीएम को बधाई भी दी। उन्होंने कहा मध्यप्रदेश को नया मुख्यमंत्री मिल गया है। उन्हें बहुत बहुत बधाई, उनका अभिनंदन। इधर कुछ देर बाद मोहन यादव राजभवन पहुंचे। यहां उन्होंने राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया। इस दौरान उनके साथ शिवराज सिंह चौहान, नरेंद्र सिंह तोमर, कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल और वीडी शर्मा मौजूद रहे। साथ ही तीनों पर्यवेक्षक मनोहर लाल कट्टर, डॉ के. लक्ष्मण और आशा लकड़ा भी साथ रहे। विधायकों का फोटो सेशन हुआ, रेस में थे कई नामबीजेपी विधायक दल की बैठक से पहले सभी नवनिर्वाचित विधायकों का फोटो सेशन हुआ। जिसमें मोहन यादव आगे से तीसरी पंक्ति में बैठे थे। फोटो सेशन के बाद बैठक शुरू हुई। जिसमें सीएम के रूप में मोहन यादव के नाम का ऐलान हो गया। एमपी सीएम पद की रेस में कई दिग्गज नाम शामिल थे। जिसमें प्रह्लाद पटेल, नरेंद्र सिंह तोमर, वीडी शर्मा, ज्योतिरादित्य सिंधिया, कैलाश विजयवर्गीय जैसे कई नाम शामिल थे। जिसमें केंद्रीय मंत्रियों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। बीजेपी ने सबको चौंकाते हुए मोहन यादव को नया मुख्यमंत्री बनाया है। भाजपा का तंत्र ऐसा, छोटे से छोटे कार्यकर्ता को बड़ी जवाबदारी : यादवनए सीएम मोहन यादव ने कहा कि भाजपा का तंत्र ही ऐसा है कि छोटे से छोटे कार्यकर्ता को बड़ी जवाबदारी मिलती है। हमारी ट्रेनिंग भी ऐसी होती है कि पार्टी जो काम दे दे उसको बहुत सहजता से लेते हैं। मैं तो पीछे की पंक्ति में बैठकर अपना काम कर रहा था। अचानक घोषणा हुई। मैं सबका आभार मानता हूं। विकास के काम को आगे बढ़ाना ही मेरी प्राथमिकता होगी। यादव ने कहा कि मैं पार्टी का एक छोटा सा कार्यकर्ता हूं। प्यार और सहयोग के लिए पार्टी की स्टेट लीडरशिप और केंद्रीय लीडरशिप का बहुत बहुत धन्यवाद। मैं अपनी जिम्मेदारी पूरी तरह से निभाऊंगा। 6 दिसंबर को रात 11 बजे 15 मिनट में तय हो गया था नामबताया जा रहा है कि यादव का मुख्यमंत्री के लिए नाम राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्‌डा के नई दिल्ली स्थित निवास पर 6 दिसंबर को रात 11 बजे ही तय हो गया था। इस दौरान केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव भी वहां मौजूद थे। भूपेंद्र यादव ने ही डॉ. मोहन यादव की रिपोर्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को दी थी। इसके बाद तीन दौर की बैठक में डॉ. यादव का नाम तय किया गया। वे संघ के करीबी माने जाते हैं। बीजेपी ने ओबीसी चेहरे के तौर पर मोहन यादव को आगे किया है।भाजपा के एक नेता ने बताया कि 6 दिसंबर को मोहन यादव सड़क मार्ग से भोपाल से उज्जैन जा रहे थे। शाम करीब 7 बजे जब वे आष्टा पहुंचे, तब उन्हें तत्काल दिल्ली आने के लिए गया। डॉ. यादव वापस भोपाल आए और रात 9 बजे की फ्लाइट से दिल्ली पहुंचे। उनकी नड्डा से केवल 15 मिनट की मुलाकात हुई। वे अगले दिन यानी 7 दिसंबर को सुबह भोपाल लौट आए। तब यह कयास लगाए जा रहे थे कि डॉ. यादव को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा सकता है।

नए मुख्यमंत्री के साथ मंत्रिमंडल में शामिल होंगे नए चेहरे, कई पुराने मंत्रियों का घटेगा कद.

New cabinet will include new faces along with the new Chief Minister, and several old ministers will see a reduction in their stature. मंत्रिमंडल में शामिल नेताओं में से 15 से ज्यादा नामों में फेरबदल होने की संभावना उदित नारायण भोपाल। प्रदेश के नए मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान होेने के बाद अब नए मंत्रियों के नामों को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है। सीएम की घोषणा के साथ ही मंत्रीमंडल को लेकर भी कवायत तेज हो गई है। लोगों में उत्सुकता है कि इस बार प्रदेश के कौन-कौन विधायक होंगे, जिन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा। ऐसे में इस बार मंत्रीमंडल में कुछ नए और कुछ पुराने चेहरों के शामिल होने की संभावना ज्यादा है। बताया जा रहा है कि वर्तमान में मंत्रीमंडल में शामिल नेताओं में से 15 से ज्यादा नामों में फेरबदल होने की संभावना जताई जा रही है। 13 दिसंबर को होने वाले संभावित शपथग्रहण के एक दो दिन बाद ही मंत्रीमंडल का गठन होने के संकेत हैं। यह हैं संभावित नामसंभावित नामों की बात करें तो इसमें सुमावली विधायक एंदलसिंह कंसाना, ग्वालियर विधायक प्रद्युम्न सिंह तोमर, गुना विधायक पन्नालाल शाक्य, खुरई विधायक भूपेंद्र सिंह, सुरखी विधायक गोविंद राजपूत, जतारा विधायक हरीशकंर खटीक, छतरपुर विधायक ललिता यादव, जबेरा विधायक धर्मेंद्र लोधी, पन्ना विधायक ब्रजेंद्र प्रताप सिंह, सिरमौर विधायक दिव्यराज सिंह, विधायक रीति पाठक, मनीषा सिंह, अनूपपुर विधायक बिसाहूलाल सिंह, विजयराघवगढ़ विधायक संजय पाठक, अजय विश्नोई, जबलपुर विधायक राकेश सिंह, संपतिया उइके, योगेश पंडाग्रे, प्रभुराम चैधरी, नारायण सिंह पंवार, अरुण भीमावद, राजेश सोनकर, आशीष शर्मा, विजय शाह, अर्चना चिटनीस, निर्मला भूरिया, रमेश मेंदोला, उषा ठाकुर, तुलसी सिलावट, चेतन कश्यप, हरदीप डंग, इंदरसिंह परमार, भोपाल से विधायक रामेश्वर शर्मा और कृष्णा गौर के नाम शामिल हो सकते हैं। इनकी जगह हुई खालीइस बार विधानसभा चुनाव में शिवराज सिंह चैहान के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल के दस से अधिक मौजूदा मंत्री पराजित हुए हैं। राज्य के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को भी हार का सामना करना पड़ा है। इसके अलावा जिन अन्य प्रमुख मंत्रियों को हार का सामना करना पड़ा उनमें अटेर से अरविंद भदोरिया, हरदा से कमल पटेल और बालाघाट से गौरीशंकर बिसेन शामिल हैं। इनके अलावा हारने वाले मंत्रियों में बड़वानी से प्रेम सिंह पटेल, बमोरी से महेंद्र सिंह सिसोदिया, बदनावर से राजवर्धन सिंह दत्तीगांव, ग्वालियर ग्रामीण से भारत सिंह कुशवाह, अमरपाटन से रामखेलावन पटेल, पोहरी से सुरेश धाकड़ और परसवाड़ा से रामकिशोर कावरे शामिल हैं। एक अन्य मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के भतीजे राहुल सिंह लोधी को खरगापुर से हार का सामना करना पड़ा।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने डॉ. मोहन यादव, राजेंद्र शुक्ला और जगदीश देवड़ा बने उप मुख्यमंत्री।

संतोष सिंह तोमर भोपाल। मध्य प्रदेश में आठ दिन से मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रहा सस्पेंस खत्म हो गया है। सभी अनुमानों को धता बताते हुए डॉ. मोहन यादव मध्य प्रदेश के नए सीएम चुने गए हैं। राजधानी भोपाल के भारतीय जनता पार्टी कार्यालय में तीनों पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में हुई भाजपा के विधायक दल की पहली बैठक में डॉ. मोहन यादव के नाम का ऐलान किया गया। श्री यादव उज्जैन दक्षिण सीट से विधायक हैं। इसके साथ ही मध्य प्रदेश में दो उप मुख्यमंत्रियों के नाम का भी ऐलान किया गया है। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव 2023 में भाजपा को 163 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत मिला है। कांग्रेस को 66 सीटें और 1 सीट भारतीय आदिवासी पार्टी को मिली है। विधायक दल की बैठक में मोहन यादव के नाम का ऐलान मध्य प्रदेश में आज विधायक दल की बैठक में दल का नेता चुना गया। इस बैठक के बाद मध्य प्रदेश के अगले मुख्यमंत्री पद को लेकर सस्पेंस खत्म हो गया है। इस बैठक में नए मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा की गई। मध्य प्रदेश का नया मुख्यमंत्री उज्जैन दक्षिण से निर्वाचित विधायक डॉ. मोहन यादव को बनाया गया है। यहां गौरतलब है कि बीजेपी ने इस बार का विधानसभा चुनाव अपने मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के बिना ही लड़ा था। जिसके कारण मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद को लेकर तमामबात अटकलें लगाई जा रही हैं कि अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। मुख्यमंत्री पद की रेस में थे कई नाम, 9 दिन तक चला मंथन एमपी सीएम पद की रेस में कई दिग्गज नाम शामिल थे। जिसमें प्रह्लाद पटेल, नरेंद्र सिंह तोमर, वीडी शर्मा, ज्योतिरादित्य सिंधिया, कैलाश विजयवर्गीय जैसे कई नाम शामिल थे। जिसमें केंद्रिय मंत्रियों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। बीजेपी ने सबको चौंकाते हुए मोहन यादव को नया मुख्यमंत्री बनाया गया है। उज्जैन के दक्षिण सीट से मोहन यादव ने जीत हासिल की है। बता दें कि मोहन यादव शिवराज सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री रह चुके हैं। ये लगातार तीसरी बार चुनाव जीतकर उज्जैन दक्षिण सीट पर कब्जा किया है। बता दें कि बीजेपी ने 9 दिन मंथन करने के बाद सबको चौंका दिया है। बीजेपी के भोपाल दफ्तर में नवनिर्वाचित विधायकों ने नए मुख्यमंत्री के नाम पर मोहर लगा दी। उत्तर प्रदेश की तर्ज पर मध्य प्रदेश को भी मिले दो उप मुख्यमंत्री राज्य के नए मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान होने के साथ ही मध्य प्रदेश सरकार का काम काज संभालने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की तर्ज पर दो उप मुख्यमंत्रियों के नाम की भी घोषणा की गई है। घोषणा के अनुसार विधायक राजेंद्र शुक्ला और जगदीश देवड़ा को मध्य प्रदेश का उपमुख्यमंत्री बनाया गया है। जगदीश देवड़ा मंदसौर जिले की मल्हारगढ़ सीट से विधायक हैं। वह एससी वर्ग से आते हैं वहीं ब्राह्मण वर्ग से आने वाले राजेन्द्र शुक्ला रीवा सीट से विधायक हैं और विंध्य क्षेत्र का बड़ा ब्राह्मण चेहरा होकर कद्दावर नेता माने जाते हैं। 2013 में पहली बार बने विधायक, शिवराज सरकार में रहे उच्च शिक्षा मंत्री 58 साल के डॉक्टर मोहन यादव पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान की सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री रह चुके हैं। साल 2013 में वह पहली बार उज्जैन दक्षिण सीट से विधायक चुने गए थे। इसके बाद साल 2018 में वह एक भार फिर दक्षिण उज्जैन की सीट से विधायक चुने गए थे। साल 2023 मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में मोहन यादव ने उज्जैन दक्षिण विधानसभा सीट से कांग्रेस के चेतन प्रेमनारायण यादव को 12941 वोटों से हराकरलगातार तीसरी बार विजयश्री प्राप्त की है। विधायक दल की बैठक में हरियाणा के सीएम और मध्य प्रदेश के पर्यवेक्षक मनोहर लाल खट्टर ने प्रदेश के नए मुख्यमंत्री के रूप में डॉ. मोहन यादव के नाम का ऐलान किया जबकि श्री यादव के नाम का प्रस्ताव वर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रखा था।

जानिए मुख्यमंत्री मोहन यादव के बारे में.

Learn about Chief Minister Mohan Yadav. भोपाल! मोहन यादव उज्जैन दक्षिण से विधायक हैं। वे एमपी के सीएम होंगे। मध्यप्रदेश के अगले मुख्यमंत्री मोहन यादव होंगे। मोहन यादव उज्जैन दक्षिण से विधायक हैं। भोपाल स्थित ‌BJP के प्रदेश कार्यालय में पार्टी के विधायक दल की बैठक में उनके नाम पर मुहर लगी है। मोहन यादव ओबीसी वर्ग से आते हैं। बैठक में पर्यवेक्षक मनोहर लाल खट्‌टर (CM हरियाणा), डॉ. के. लक्ष्मण (राष्ट्रीय अध्यक्ष, BJP OBC मोर्चा) और आशा लकड़ा (राष्ट्रीय सचिव भाजपा) मौजूद रहे। विधायक दल की बैठक से पहले भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई। मध्यप्रदेश के अगले मुख्यमंत्री मोहन यादव होंगे उज्जैन दक्षिण सीट से विधायक हैं मोहन यादव उम्र – 58 वर्ष, शैक्षणिक योग्यता – बी.एस.सी., एल-एल.बी., एम.ए.(राज.विज्ञान), एम.बी.ए., पी.एच.डी. व्यवसाय – अभिभाषक, व्‍यापार, कृषिस्थायी पता – 180, रविन्‍द्रनाथ टैगोर मार्ग, अब्‍दालपुरा, जिला-उज्‍जैन राजनीतिक कॅरियर – सन 1982 में माधव विज्ञान महाविद्यालय छात्र संघ के सह-सचिव, 1984 में अध्‍यक्ष

मोहन यादव होंगे मध्‍य प्रदेश के नए मुख्‍यमंत्री, भाजपा विधायक दल का निर्णय.

Mohan Yadav will be the new Chief Minister of Madhya Pradesh, as decided by the BJP legislative party. राजधानी में भाजपा विधायक दल की बैठक में नया सीएम चुना गया। मप्र भाजपा विधायक दल की बैठक से पहले हलचल रही। In the capital, a new Chief Minister was elected during the BJP legislative party meeting. There was anticipation and excitement before the meeting of the Madhya Pradesh BJP legislative party. भोपाल। मध्‍य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 में भाजपा की शानदार जीत के बाद पार्टी ने मुख्‍यमंत्री भी चुन लि‍या है। इसके लिए आज राजधानी में भाजपा विधायक दल की बैठक बुलाई गई थी। मप्र भाजपा विधायक दल की बैठक से पहले खासी हलचल रही। मोहन यादव मप्र के मुख्‍यमंत्री होंगे।इससे पहले विधायक प्रहलाद पटेल के बंगले पर उनके समर्थकों का जमावड़ा होने की सूचना है। खबर मिली है कि पटेल के बंंगले पर पुलिस सुरक्षा भी बढ़ा दी गई थी। श‍िवराज के समर्थकों ने भी खूब नारेबाजी की।

भाजपा विधायक दल की बैठक से पहले हलचल तेज, क्‍या आज घोषित होगा मप्र का मुख्‍यमंत्री या आलाकमान करेगा तय.

Excitement is high before the BJP legislative party meeting; will Madhya Pradesh’s Chief Minister be announced today, or will a consensus be reached. आज राजधानी में भाजपा विधायक दल की बैठक बुलाई गई है। मप्र भाजपा विधायक दल की बैठक से पहले हलचल तेज हो गई है। Today, a meeting of the BJP legislative party has been called in the capital. There is a flurry of activity ahead of the Madhya Pradesh BJP legislative party meeting. भोपाल। मध्‍य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 में भाजपा की शानदार जीत के बाद अब मुख्‍यमंत्री चुनने की बारी है। इसके लिए आज राजधानी में भाजपा विधायक दल की बैठक बुलाई गई है। मप्र भाजपा विधायक दल की बैठक से पहले हलचल तेज हो गई है। दिल्ली: मध्य प्रदेश के नए मुख्यमंत्री के चयन पर राज्य के लिए भाजपा के केंद्रीय पर्यवेक्षक के लक्ष्मण ने कहा, “आज शाम विधायक दल की बैठक होगी। मनोहर लाल खट्टर की 3 सदस्यीय कमेटी विधायकों से चर्चा करेगी। बाद में आलाकमान उस पर निर्णय लेंगे। राजनीतिक हलकों में यह सवाल तैर रहा है कि क्‍या आज घोषित होगा मध्‍य प्रदेश का मुख्‍यमंत्री या बैठक के बाद आलाकमान इस बारे में कोई निर्णय लेगा।केंद्रीय पर्यवेक्षक ये बोले हालांकि भोपाल पहुंंचने से पहले भाजपा के केंद्रीय पर्यवेक्षक के लक्ष्‍मण ने एएनआइ से कहा है कि 3 सदस्‍यीय कमेटी विधायकों से चर्चा करेगी। बाद में आलाकमान उस पर निर्णय लेंगे। भाजपा विधायक दल की बैठक पार्टी के कार्यालय में दोपहर बाद होनी है। भाजपा विधायक दल की बैठक के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में हरियाणा के मुख्‍यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, भाजपा ओबीसी मोर्चा के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष डा के लक्ष्‍मण और भाजपा की राष्‍ट्रीय सचिव आशा लकड़ा भोपाल पहुंच चुकी हैं। मप्र भाजपा अध्‍यक्ष वीडी शर्मा ने विमानतल पर पर्यवेक्षकों का स्‍वागत किया। वीडी शर्मा ने कही ये बात भोपाल आगमन के बाद केंद्रीय पर्यवेक्षक शिवराज सिंह चौहान से मिलने सीएम हाउस पहुंचे। वहीं मीडिया से बातचीत में वीडी शर्मा ने कहा कि हम राज्‍य के लिए मुख्‍यमंत्री चुनेंगे। भाजपा विधायक दल की बैठक के लिए विधायकों के पहुंचने का सिलसिला आरंभ हो गया है। बैठक से पहले विधायकों को किसी तरह की प्रतिक्रिया देने से रोका गया है। 3 दिसंबर से ही चल रही अटकलें उल्‍लेखनीय है कि 3 दिसंबर को मध्‍य प्रदेश विधानसभा चुनाव के परिणाम घोषित होने के साथ ही मध्‍य प्रदेश में मुख्‍यमंत्री पद के लिए चर्चाओं का दौर आरंभ हो गया था।चल रही ये अटकलें , मप्र के मुख्‍यमंत्री के नाम को लेकर अनेक अटकलों का दौर जारी है। इनमें श‍िवराज सिंह चौहान के साथ ही नरेंद्र सिंह तोमर, प्रहलाद पटेल, कैलाश विजयवर्गीय, विष्‍णुदत्‍त शर्मा और ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया का नाम प्रमुख है। इसके साथ ही भूपेंद्र सिंह, राकेश सिंह और सुमेर सिंह सोलंकी का नाम भी सामने आया है।

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