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मप्र में भाजपा का जलवा : विदिशा में श‍िवराज 4 लाख से ज्यादा मतों से आगे

BJP's dominance in MP: Shivraj ahead by more than 4 lakh votes in Vidisha

BJP’s dominance in MP: Shivraj ahead by more than 4 lakh votes in Vidisha मध्‍य प्रदेश में लोकसभा की 29 सीटों में से भोपाल, गुना, सागर, विदिशा, राजगढ़, होशंगाबाद, बैतूल, सागर की सीटें भी शामिल हैं। इन सीटों पर मुख्‍य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस का है। इन सीटों में से भी गुना, राजगढ़ और विदिशा सबसे हॉट सीट हैं। गुना से केंद्रीय मंत्री ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया, राजगढ़ से दिग्विजय सिंह और विदिशा सीट से पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान जैसे दिग्‍गज चुनाव मैदान में हैं। अब तक के रुझानों के मुताबिक विदिशा सीट पर शिवराज बड़ी जीत की ओर बढ़ रहे हैं। सिंधिया भी गुना में भाजपा का परचम लहराने जा रहे हैं। दूसरी तरफ, दिग्‍विजय सिंह अपने गढ़ में पिछड़ गए हैं। उनके राजनीतिक करियर के लिए यह परिणाम एक प्रकार से निर्णायक हो सकता है। यहां देखें भोपाल, गुना, सागर, विदिशा, राजगढ़, होशंगाबाद, बैतूल सीटों के परिणाम का हर लेटेस्‍ट अपडेट।

विदिशा संसदीय क्षेत्र में 3 दशक में बहुत कुछ कबाड़ा हो चुका है, उसे ठीक करना है

A lot of junk has happened in Vidisha parliamentary constituency in last 3 decades, it has to be rectified. विदिशा-रायसेन लोकसभा से कांग्रेस प्रत्याशी प्रतापभानु शर्मा से ‘पुष्पेन्द्र अहिरवार’ का ‘चुनावी साक्षात्कार’ ये भी बोले शर्मा? पुष्पेन्द्र अहिरवार.भोपाल/विदिशा। विदिशा-रायसेन संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस पार्टी ने दो बार सांसद रहे प्रतापभानु शर्मा को फिर से प्रत्याशी बनाकर उतारा है। यह सीट आजादी के बाद से ही कांग्रेस के लिए मुश्किल भरी रही है। यहां कुल 15 लोकसभा चुनाव में से कांग्रेस दो बार जीतने में कामयाब रही। यह सीट पर अटल विहारी वाजपेयी और रामनाथ गोयनका, जैसी शंखसियत को संसद भेज चुकी है। इस सीट से शिवराज सिंह चौहान भी जननेता के रूप में अपनी पहचान बनाने में कामयाब रहे हैं। हालही में तथाकथित राजनैतिक वनवास खत्म कर शिवराज सिंह चौहान फिर से मैदान में हैं। उनके मुकाबले के लिए कांग्रेस से पूर्व सांसद प्रतापभानु शर्मा हैं। शर्मा इस सीट पर 33 साल बाद चुनावी मैदान में उतरे हैं। वे 1980 और 1984 में सांसद चुने गए थे। अब वादाखिलाफी बहुत हो चुकी है। इसके चलते बदलाव बेहद जरूरी है। विदिशा संसदीय क्षेत्र में 3 दशक में बहुत कुछ कबाड़ा हो चुका है। उसको ठीक करने के लिए प्रताप भानू को फिर हथियार उठाने पड़ंेगे। वे हरिभूमि और आईएनएच चैनल के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी से ‘चुनावी संवाद’ कार्यक्रम में अपनी बात रख रहे थे। उनसे सीधी बात सवाल: आप लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं, आपकी क्या है चुनावी रणनीति?जवाब: मैं कांग्रेस पार्टी का अिधकृत प्रत्याशी हूं। पूरी दमखम से चुनाव लड़ रहा हूं और जीतूंगा भी। भाजपा ने जिस प्रत्याशी को मेरे सामने उतारा है, उन्होंने अपने संसदीय और मुख्यमंत्रित्व काल में ऐसा कुछ भी नहीं किया, जिसका उल्लेख किया जाए। उनकी कथनी और करनी में कितना अंतर है, यह जनता समझ चुकी है। लोकल मुद्दे इतने हो गए हैं कि उसका कोई सही प्रतिनिधित्व नहीं कर रहा है। बेतवा नदी की शुद्धि के लिए शिवराज ने 20 साल पहले कहा था, जो आज तक नहीं हुआ। उद्योग आएंगे, वे भी नहीं आए। मनमोहन सिंह के कार्यकाल में यहां की सांसद सुषमा स्वराज को रेल कारखाना दिया था, जिसका अिस्तत्व नहीं दिख रहा। रोजगार का मुद्दा वहीं का वहीं है। किसानों को फसल के दाम नहीं मिल रहे। महंगाई का मुद्दा तो बना ही हुआ है। ये सब स्थानीय मुद्दे हैं जिनसे लोग परेशान हैं। सवाल: जब शिवराज के प्यादे चुनाव जीत जाते हैं तो अब वजीर खुद मैदान में हैं, कैसे आप जीतेंगे?जवाब: क्षेत्र की जनता जनार्दन को समझने की जरूरत है। 30 साल के सांसद या मुख्यमंत्री के रूप में शिवराज ने हमारे क्षेत्र को क्या दिया। नौजवाब को रोजगार के लिए कितने उद्योग लगाए। नेता तो आते-जाते रहते हैं, लेकिन जनता तो वहीं की वहीं खड़ी है। जनता के आशीर्वाद से हम जीतेंगे। नेता तो स्वार्थ की सौदेबाजी करते रहते हैं। भाजपा ने तो ‘दलबदल सेल’ खोल दिया है, यह कितना शर्मनाक है। भ्रष्टाचार के आवरण में भाजपा ढकी हुई है। लोगों को लालच देकर खरीद रही है। हो सकता है कि शशांक भार्गव हारने के बाद टेंशन आए हों तो वे भाजपा में फोटो खिंचाने चले गए। 50 साल के अनुभव से कह सकता हूं कि जिस तरह की गंदी राजनीति चल रही है, ऐसी कभी नहीं हुई। जब जनता ने ही तय कर लिया कि हमें बदलाव लाना है तो नेताओं के आने-जाने से कुछ नहीं होगा। सवाल: विधानसभा चुनाव के दौरान भी उतना ही आत्मविश्वास था, जितना आज है, इतना आत्मविश्वास कहां से लाते हैं?जवाब: हम वक्त की कसौटी पर खरे उतरे हैं। क्षेत्र की कसौटी पर खरे उतरे हैं। मप्र में हमारी सरकार रही है। अभी हमारा प्रयास सरकार बनाने का था, लेकिन किसी कारणवश नहीं बना पाए। इसके कई कारण रहे हैं। प्रत्याशियों ने कई शिकायतें की। सबसे ज्यादा ईवीएम की शिकायतें की, जिनपर चुनाव आयोग मौन रहा है। परिणामों में हेराफेरी की शिकायतें भी आई हैं। यह सब आपने भी देखा है। ईवीएम पर नजर रखना बहुत जरूरी है। क्योंकि पूरा खेल और हेराफेरी इसी से संभव है। ईवीएम का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर उठ रहा है, यह हमें कहने की जरूरत नहीं है। सवाल: उसी ईवीएम से ही चुनाव हो रहे हैं तो आपके लिए गुंजाइश कहां बची है?जवाब: ईवीएम पर कड़ी निगाह रखेंगे। अब ईवीएम में हेराफेरी बिल्कुल नहीं होने देंगे। यदि हुआ तो उसके लिए कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी। अब हाथ पर हाथ धरे कांग्रेस नहीं बैठे रहेगी। क्योंकि अब नेता और जनता इस बात को अच्छी से समझ चुकी है। पार्टी ने चुनाव आयोग से लेकर सुप्रीम कोर्ट में मुद्दे उठाए हैं। आगे भी लड़ाई लड़ंेगे। हमने चुनाव आयोग से कहा है कि ईवीएम से परिणाम दे रहे हैं, उसके साथ वीवीपेट की पर्ची की भी काउंटिंग की जाए, भले ही दो दिन लग जाएं, तभी परिणाम आएं। इससे डिजीटल टेक्नोलॉजी के दुरुपयोग को लेकर लोगों में जो शंका है, वह दूर हो जाएगी। अगर मैं कांग्रेस को वोट दे रहा हूं, वो हमें नहीं मिल रहा है तो यह हमारे मताधिकार का हनन है। सवाल: आपके नेता तो पार्टी छोड़ रहे हैं, फिर कैसे जीत रहे हैं आप?जवाब: देखिए, भाजपा सारे साम-दाम-दंड अपनाकर हमारे नेताओं को तोड़ रही है। ईडी, सीबीआई का डर दिखाया जा रहा है। यह भाजपा का छलकपट जनता देख रही है, वही इसका इस बार जवाब देगी। मेरा मानना है कि इस चुनाव के बाद दलबदलुओं की कोई औकात नहीं रहेगी। कोई 17 हजार कार्यकर्ता या नेता भाजपा में नहीं गए। मेरा दावा है कि भाजपा इन 17 हजार लोगों की लिस्ट प्रकाशित करे, तभी सच्चाई सामने आएगी। कुछ लोग पद या कमाने के लालच से सौदेबाजी करके गए हैं। यदि इस बार दिल्ली में सरकार बदली तो यही जाने वाले नेता उल्टी नाक से पांव रगड़ेंगे, ये मेरा दावा है। सवाल: शिवराज 10 लाख वोटों से जीतने का दावा कर रहे हैं तो आपका क्या होगा?जवाब: उनकी हवाहवाई बात करने की, घोषणावीर होने की पुरानी आदत है। मेरा दावा है कि वे 1 लाख से ज्यादा वोटों से हारेंगे। मप्र का इतिहास देख लीजिए कोई 10 लाख मतों से नहीं जीता। इसी से अंदाजा लगा लीजिए यह कितनी फर्जी … Read more

धान उपार्जन में लापरवाही एक और अफसर पर पड़ी भारी: जबलपुर के प्रभारी फूड कंट्रोलर के बाद अब प्रबंधक व जिला विपणन अधिकारी भी सस्पेंड

Negligence in paddy procurement fell heavily on another officer: After the food controller in-charge of Jabalpur, now the manager and district marketing officer are also suspended. सहाकारिता उपायुक्त डॉ. अखिलेश निगम पिक्चर से ही गायब हैं जबकि उपार्जन समिति में वे जिम्मेदार पद पर हैं। उदित नारायण भोपाल ! राज्य शासन ने जिला विपणन अधिकारी और मंडल प्रबंधक जबलपुर रोहित सिंह बघेल को भी सस्पेंड कर दिया है। यह कार्यवाही मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ के प्रबंध संचालक आलोक कुमार सिंह ने की है। प्रबंध संचालक द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि विपणन वर्ष 2023-24 में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए जारी नीति के अनुसार धान उपार्जन का कार्य नहीं कराया गया है। अधिकारी की लापरवाही के चलते शासन के समक्ष संघ की छवि धूमिल हुई है। इसलिए बघेल को जिम्मेदार मानते हुए उन्हें सस्पेंड किया गया है। निलंबन अवधि में बघेल का मुख्यालय विपणन संघ भोपाल तय किया गया है। मंगलवार को प्रभारी फूड कंट्रोलर हुए थे सस्पेंड इससे पहले मंगलवार को खाद्य, नागरिक और उपभोक्ता संरक्षण विभाग के प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव ने जबलपुर में पदस्थ प्रभारी जिला आपूर्ति नियंत्रक कमलेश टांडेकर को धान उपार्जन केंद्रों के मामले में गंभीर लापरवाही पर सस्पेंड किया था। निलंबन अवधि में टांडेकर का मुख्यालय खाद्य विभाग संचालनालय भोपाल तय किया है। आदेश में कहा था कि जबलपुर जिले में कुल 121 केंद्रों के विरुद्ध 85 उपार्जन केंद्र स्थापित किए हैं। बाकी 36 उपार्जन केंद्र महिला स्व सहायता समूहों को देने का प्रस्ताव 21 दिसंबर को भेजा गया जो काफी देरी से भेजा गया। इन उपार्जन केंद्रों के तय न होने से किसानों भेजा गया। इन उपार्जन केंद्रों के तय न होने से किसानों को उपज बेचने में परेशानी हुई है। साथ ही महिला स्व सहायता समूह उपार्जन केंद्र के लिए तय गोदामों का सत्यापन प्रक्रिया का पालन किए बगैर किया गया। सहकारी सेवा समितियों को दो-दो उपार्जन केंद्रों की जिम्मेदारी दिए जाने के विपरीत उपार्जन नीति का पालन नहीं करते हुए 27 सहकारी समितियों को केवल एक-एक उपार्जन केंद्र का जिम्मा सौंपा है। इसलिए जिले में आवश्यक उपार्जन केंद्र स्थापित नहीं किए जा सके। इसे व्यापक लापरवाही मानते हुए विभाग ने टांडेकर को सस्पेंड कर दिया है। राज्य शासन ने जबलपुर के फूड कंट्रोलर को सस्पेंड कर दिया है। मोहन यादव कैबिनेट के गठन के बाद शासकीय काम में लापरवाही के मामले में की गई यह पहली कार्रवाई है। खाद्य, नागरिक और उपभोक्ता संरक्षण विभाग के प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव ने जबलपुर में पदस्थ प्रभारी जिला आपूर्ति नियंत्रक कमलेश टांडेकर को धान उपार्जन केंद्रों के मामले में गंभीर लापरवाही पर सस्पेंड किया है। निलंबन अवधि में टांडेकर का मुख्यालय खाद्य विभाग संचालनालय भोपाल तय किया है।विभाग के अनुसार खरीफ सीजन में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी करने के लिए जारी की गई नीति के मुताबिक ई-उपार्जन पोर्टल पर रजिस्टर्ड किसानों से एक दिसंबर 2023 तक उपार्जन कार्य कराया जाना था। इसके लिए सहकारी समितियों के साथ एनआरएलएम में रजिस्टर्ड महिला स्व सहायता समूहों को भी उपार्जन केंद्र के संचालन का काम देने के निर्देश 29 नवंबर को जारी किए गए थे। इसमें जिला उपार्जन समिति के माध्यम से महिला स्व सहायता समूहों को उपार्जन केंद्र की अनुमति का प्रस्ताव खाद्य संचालनालय को भेजा जाना था। जबलपुर जिले में कुल 121 केंद्रों के विरुद्ध 85 उपार्जन केंद्र स्थापित किए गए हैं। बाकी 36 उपार्जन केंद्र महिला स्व सहायता समूहों को देने का प्रस्ताव 21 दिसंबर को भेजा गया जो काफी देरी से भेजा गया। इन उपार्जन केंद्रों के तय न होने से किसानों को उपज बेचने में परेशानी हुई है। साथ ही महिला स्व सहायता समूह उपार्जन केंद्र के लिए तय गोदामों का सत्यापन प्रक्रिया का पालन किए बगैर किया गया। इस संबंध में न तो प्रभारी फूड कंट्रोलर द्वारा संचालनालय को जानकारी दी गई और न ही स्थानीय स्तर पर जनहित का काम किया गया। सहकारी सेवा समितियों को दो-दो उपार्जन केंद्रों की जिम्मेदारी दिए जाने के विपरीत उपार्जन नीति का पालन नहीं करते हुए 27 सहकारी समितियों को केवल एक-एक उपार्जन केंद्र का जिम्मा सौंपा है। इसलिए जिले में आवश्यक उपार्जन केंद्र स्थापित नहीं किए जा सके। इसे व्यापक लापरवाही मानते हुए विभाग ने टांडेकर को सस्पेंड कर दिया है। आजीविका समिति की जाँच कराने की माँग कांग्रेस सहकारिता प्रकोष्ठ के अध्यक्ष शित्रकुमार चौबे ने जिले में कुछ आजीविका समितियों का फर्जी तरह से कार्य करने का आरोप लगाया है। इनका कहना है कि पंजीयन के 6 माह के अंदर समितियों के निर्वाचन के प्रस्ताव चले जाने चाहिए मगर पिछले 2 साल से किसी भी एक समिति का चुनाव प्रस्ताव कार्यालय उपायुक्त सहकारिता से नहीं गया है। नियम तो यह भी है कि यदि निर्वाचन नहीं होता है तो तत्काल विभाग को किसी शासकीय कर्मचारी को प्रशासक बना देना चाहिए, मगर कार्यालय के स्तर पर इस तरह की भी कार्रवाई नहीं हो रही है। इन्हें क्यों छोड़ा गया धान खरीदी की जाँच का जिम्मा तमाम एसडीएम को दिया गया था, खाद्य विभाग के अधिकारी भी इसमें शामिल थे, वहीं वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन और मार्कफेड के अधिकारियों का कहीं जिक्र तक नहीं किया जा रहा है। डिप्टी कलेक्टर, अपर कलेक्टर और सीईओ जिला पंचायत भी खरीदी केन्द्र की जाँच के लिए जिम्मेदार हैं लेकिन 1 दिसम्बर से अभी तक केवल लोकायुक्त ने ईमानदारी से कार्य किया और रिश्वत लेते कम्प्यूटर ऑपरेटर को पकड़ा, बाकी किसी ने भी किसी केन्द्र में कोई जाँच नहीं की। सहाकारिता उपायुक्त डॉ. अखिलेश निगम पिक्चर से ही गायब हैं जबकि उपार्जन समिति में वे जिम्मेदार पद पर हैं। रातों-रात गायब हुई धान जानकारों का कहना है कि जैसे ही वेयरहाउस संचालकों को यह पता चला कि जाँच दल आ रहा है तत्काल ही बिना अनुमति खरीदी करने वाले वेयरहाउसों से धान को गायब करवाया गया। यहाँ तक की कई वेयरहाउसों में जाँच दल पहुँच भी गया था लेकिन एप्रोच लगाकर जाँच दल को रोका गया और उनकी मौजूदगी में ही धान गायब करवाई गई। सबसे चौंकाने वाली बात तो यह है कि सरकारी बारदानों यानी बोरों में बिना अनुमति खरीदी हुई, यह कैसे हुआ कोई बताने तैयार नहीं। रातभर बाहर किया धान, फिर भी अंदर रखा मिला 30 हजार क्विंटल प्रमुख सचिव … Read more

श‍िवराज सिंह चौहान ने सीएम आवास खाली किया, खाली करने से पहले पूजा अर्चना की

Shivraj Singh Chouhan vacated the Chief Minister’s residence, performing a puja and ritual before the evacuation. सीएम आवास खाली करने से पहले श‍िवराज ने किए गौ माता के दर्शन, सुरक्षाकर्मियों ने दी विदाई श‍िवराज सिंह चौहान ने परिवार सहित सीएम हाउस स्थित मंदिर में की पूजा .भोपाल। मध्‍य प्रदेश के पूर्व मुख्‍यमंत्री श‍िवराज सिंह चौहान सीएम आवास खाली कर रहे हैं। पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान कुछ देर में सीएम हाउस छोड़कर B8 74 बंगले में शिफ्ट हो गए।इससे पहले श‍िवराज सिंह चौहान ने परिवार सहित सीएम हाउस स्थित मंदिर में पूजा अर्चना की और गौशाला में गौ माता के दर्शन किए । इस अवसर पर सीएम हाउस में पदस्थ सुरक्षा कर्मियों ने उन्हे विदाई भी दी। धर्मपत्‍नी साधना सिंह ने भी श‍िवराज को तिलक कर और आरती उतारकर स्‍वागत किया।इस दौरान श‍िवराज ने मीडिया के सवालों के जवाब भी दिए। उन्‍होंने नए दायित्‍व के बारे में पूछे गए सवाल पर कहा कि पार्टी उन्‍हें जो भी जिम्‍मेदारी देगी वे उसे निभाएंगे।उल्‍लेखनीय है कि दिल्‍ली में श‍िवराज भाजपा के वरिष्‍ठ नेताओं से मुलाकात के बाद यह स्‍पष्‍ट हो गया है कि पार्टी उन्‍हें लोकसभा चुनाव के मद्देनजर राष्‍ट्रीय स्‍तर पर कोई महत्‍वपूर्ण दायित्‍व सौंपेगी। श‍िवराज ने भी यह कहा है कि वे फ‍िलहाल दक्षिण के राज्‍यों का दौरा करेंगे।

सड़क हादसे में घायल हुए युवक की पूर्व सीएम शिवराज ने मदद की और उसे अस्‍पताल पहुंचाया।

Former Chief Minister Shivraj extended help to the youth injured in the road accident and ensured that he was taken to the hospital. भोपाल। शहर के रवींद्र भवन क्षेत्र में शुक्रवार को सड़क हादसे में घायल हुए युवक को पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अस्पताल भिजवाया। जानकारी के अनुसार एक बाइक सवार युवक शनिवार रात को 11 बजे रवींद्र भवन के सामने से गुजर रहा था। इस दौरान उसकी बाइक अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई और वह हादसे में घायल हो गया। इसी बीच वहां से पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का काफिला गुजर रहा था। युवक को अस्पताल पहुंचाया पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने घायल युवक को देखकर अपना काफिला रुकवाया। इसके बाद घायल युवक को लोगों की मदद से काफिले के वाहन द्वारा एक निजी अस्पताल पहुंचाया। साथ ही युवक को आश्वासन दिया कि उसका अच्छा उपचार होगा, चिंता करने की बात नहीं है, मामा उसके साथ है।

भाजपा: अचर्चित चेहरों के हाथ कमान सौंपने में जोखिम मे नि:संदेह.

BJP: Taking the risk in entrusting key responsibilities to lesser-known faces without hesitation. उदित नारायण इन अप्रत्याशित फैसलों के भीतर कई राजनीतिक संदेश छुपे हैं, जो भाजपा के स्वयंभू नेताओं के लिए तो हैं ही, उन विपक्षी नेताओं के लिए भी हैं, जो मात्र सीट बंटवारे और वोटों के कागजी गणित के भरोसे आगामी लोकसभा चुनाव में मोदी को पटखनी देने का अरमान पाले हुए हैं। भारतीय जनता पार्टी और उसके शीर्ष नेतृत्व ने हिंदी भाषी तीन राज्यों में भारी जीत के बाद जिन अचर्चित चेहरों के हाथों में सत्ता की कमान सौंपी है, उससे ‘चौंकना’ शब्द भी फीका लगने लगा है। यह कुछ वैसा ही था कि कोई जादूगर अपनी जेब में हाथ डाले और नोट किसी भीड़ में छिपे शख्स की जेब से निकले।मोदी- शाह ने मीडिया के तमाम अटकलों को बेकार साबित कर दिया है। लेकिन इन अप्रत्याशित फैसलों के भीतर कई राजनीतिक संदेश छुपे हैं, जो भाजपा के स्वयंभू नेताओं के लिए तो हैं ही, उन विपक्षी नेताओं के लिए भी हैं, जो मात्र सीट बंटवारे और वोटों के कागजी गणित के भरोसे आगामी लोकसभा चुनाव में मोदी को पटखनी देने का अरमान पाले हुए हैं। विधानसभा चुनावों में भाजपा के जीते हुए मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ राज्यों में ‘कौन बनेगा मुख्यमंत्री’ की रेस असली हार्स रेस से भी ज्यादा रोमांचक होने लगी थी। दावेदारी और राजयोग में अदृश्य मुकाबला चल रहा था। मीडिया की आंखें और राजनीतिक भविष्यवाणियां उन्हीं चंद चेहरों के आसपास मंडरा रही थीं, जिन्हें परंपरागत रूप से कुर्सी की दौड़ में प्रथम पंक्ति में माना जाता रहा था। ऐसे कुछ नाम जो सीएम या फिर वो भी नहीं तो कम से कम डिप्टी सीएम पद की शपथ लेने के लिए नए सूट सिलवा चुके थे। लेकिन हाय री किस्मत!भाजपा आलाकमान ने इन फैसलों से छह संदेश दिए हैं। पहला तो कोई खुद को पार्टी से ऊपर न समझे, दूसरा भाजपा में संघ अभी भी पूरी तरह ताकतवर है, तीसरा भाजपा में कोई साधारण कार्यकर्ता भी शीर्ष पद तक पहुंच सकता है, चौथा भाजपा ने आने वाले 15 साल तक राजनीति करने वाले नए खून की फौज तैयार कर दी है, पांचवां सोशल इंजीनियरिंग में भाजपा सभी राजनीतिक दलो से मीलों आगे है और छठा, इस बदलाव के जरिए भाजपा ने आगामी लोकसभा चुनाव की जमीन भी तैयार कर दी है और तकरीबन मुद्दे भी तय कर दिए हैं। मप्र में डा. मोहन यादव, छग में विष्णुदेव साय और राजस्थान में भजनलाल शर्मा बाकी दुनिया के लिए भले ही अचर्चित चेहरे रहे हों, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा को उनकी कार्यक्षमता पर भरोसा है। अब यह इन तीनो पर है कि मिले हुए अवसर को कामयाबी में वो कितना बदल पाते हैं। खुद को कितना साबित कर पाते हैं। हालांकि यह जोखिम तो हर उस प्रयोग में रहता है, जो राजनीति की प्रयोगशाला में पहली बार किया जाता है। मप्र में जब पहली बार शिवराज को मुख्यमंत्री पद की कमान सौंपी गई थी तब कई लोगों ने उनकी नेतृत्व क्षमता और देसी छवि पर तंज कसा था, लेकिन वक्त के साथ शिवराज ने खुद को न सिर्फ साबित किया बल्कि अपरिहार्य बन गए। उन्होंने अपनी राजनीति की नई इबारत लिखी। इमोशनल पॉलिटिक्स का नया सिलेबस तय किया और पूरे 18 साल तक सीएम पद पर जमे रहे।हालांकि, पहली पारी के सीएम शिवराज और चौथी पारी के सीएम शिवराज में काफी अंतर था । उनका अपना आभा मंडल और काकस तैयार हो गया था। इस दौरान उन्होंने अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को भी यथासंभव किनारे लगाया और शायद इसकी इंतिहा हो चुकी थी। यही स्थिति राजस्थान में वसुंधरा राजे की थी। राजे तो पहले से राज परिवार से हैं। लिहाजा कुर्सी पर विराजना उनके लिए नैसर्गिक अधिकार था। उन्होंने खुद को पार्टी और राज्य का भाग्य विधाता मान लिया था। अलबत्ता छग के 15 साल सीएम रहे और बाद में भाजपा में ही हाशिए पर डाल दिए गए डॉ रमनसिंह ने खुली बगावत के रास्ते पर जाने से खुद को बचाया और कुछ बेहतर पाने की आस जिंदा रखी।कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा में इस तरह क्षत्रप संस्कृति को समाप्त पर ‘ एक हाईकमान कल्चर’ को लागू कर भाजपा ने बहुत बड़ा जोखिम लिया है, जो भविष्य में आत्मघाती भी हो सकता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के चेहरे पर ही पार्टी का पूरी तरह आश्रित हो जाना संगठन की आंतरिक कमजोरी को दर्शाता है। यानी जब मोदी भी नहीं रहेंगे, तब क्या होगा? इसके अलावा इन तीन राज्यों में बिल्कुल ताजा चेहरों की ताजपोशी के साथ राजनीतिक और जातीय समीकरण भी साधने की कोशिश है। छग में आदिवासी चेहरे विष्णुदेव साय को सीएम बनाकर समूचे आदिवासी समुदाय को यह संदेश दिया गया है कि आदिवासी भी हिंदू ही हैं और वो हमारे लिए उतने ही महत्वपूर्ण हैं। इसी तरह मप्र में बिल्कुल अप्रत्याशित चेहरे डॉ. मोहन यादव को सीएम बनाकर यूपी और बिहार के यादवों को भी संदेश दिया गया है कि वो क्षेत्रीय पार्टियों के मोह से उबरें और भाजपा से जुड़ें। मप्र और राजस्थान में दलित डिप्टी सीएम बनाकर बहनजी मायावती और उनकी पार्टी के समर्थकों को संदेश है कि भाजपा में दलितों के लिए भी पूरी जगह है। दिलचस्प बात यह है कि विस चुनाव के दौरान तीनों राज्यों में कांग्रेस पूरे समय ओबीसी जातिजनगणना का मुद्दा उठाती रही, लेकिन जिस तेलंगाना में वह स्पष्ट बहुमत के साथ चुनाव जीती, वहां उसने किसी ओबीसी के बजाए रेवंत रेड्डी के रूप में एक अगड़े को ही मुख्यमंत्री बनाया। 26 विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन की आगामी बैठक 19 दिसंबर को होनी है। उसमें लोकसभा सीटों के बंटवारे के किसी फार्मूले पर बात होती है या नहीं, यह देखने की बात है। लेकिन हो भी गया तो थके चेहरों और सतही जोश से लोकसभा चुनाव की जंग कैसे जीती जाएगी, यह देखने की बात है। बहरहाल चुनाव रणविजय शास्त्र की क्लास में भाजपा से कुछ तो सबक लेने ही चाहिए।

शपथ के दौरान स्टेडियम के बाहर Shivraj के चाहने वालों ने काफिला रोका, मामा मामा के नारे लगाए.

During the swearing-in ceremony, supporters of Shivraj outside the stadium stopped the procession, chanting slogans in favor of Mama (referring to Shivraj Singh Chouhan).

मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष चुने गए केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर।

Narendra Singh Tomar, the Union Minister, has been elected as the Speaker of the Madhya Pradesh Legislative Assembly. संतोष सिंह तोमर भोपाल। मध्य प्रदेश में सरकार गठन को लेकर भोपाल में सोमवार को चली कई घंटों की बैठक के बाद पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष बनाने पर सहमति बनी है। ऐसे में अब पूर्व केंद्रीय मंत्री नए विधानसभा अध्यक्ष का पद संभालेंगे। भाजपा विधायक दल की बैठक में उनके नाम पर मुहर लगी है। हालांकि इससे पहले नरेंद्र सिंह तोमर को मुख्यमंत्री की रेस में गिना जा रहा था, लेकिन अब पूरी तरह से मध्य प्रदेश की सियासी तस्वीर साफ हो चुकी है। नरेंद्र सिंह तोमर को बीजेपी ने इस बार दिमनी विधानसभा सीट से टिकट दिया था। जहां उन्होंने 24 हजार से अधिक वोटों के अंतर से बड़ी जीत दर्ज की है। विधानसभा के अध्यक्ष होंगे पूर्व केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह पूर्व केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को भाजपा ने विधानसभा का अध्यक्ष बनाने का फैसला किया है। श्री तोमर दिमनी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर आए हैं। उन्होंने अपने सबसे निकटतम प्रतिद्वंदी बसपा के प्रत्याशी को 24461 वोटों के अंतर से मात दी है। नरेंद्र सिंह तोमर को 79137 वोट मिले हैं। श्री तोमर केंद्र की मोदी सरकार में कृषि मंत्रालय समेत कई अन्य मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। साफ-सुथरी छवि वाले नेता होने के नाते नरेंद्र सिंह तोमर को इस विधानसभा का स्पीकर चुना गया है।   छात्र जीवन से शुरू किया राजनीतिक सफर मध्य प्रदेश के नए स्पीकर चुने गए पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता नरेंद्र सिंह तोमर का जन्म मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के ओरेठी गांव में 12 जून 1957 को हुआ। श्री तोमर एक राजपूत क्षत्रीय परिवार से आते हैं। उन्होंने जीवाजी यूनिवर्सिटी से स्नातक तक की शिक्षा हासिल की हुई है। स्नातक की पढ़ाई के दौरान तोमर महाविद्यालय में छात्र संघ के अध्यक्ष भी रहे। इसके साथ ही वो ग्वालियर नगर निगम के पार्षद पद पर भी चुने गए, जिसके बाद वह पूरी तरह से राजनीति में सक्रिय हो गए। वर्ष 1977 में भाजपा ने उन्हें युवा मोर्चा का मंडल अध्यक्ष बना दिया। इसके बाद वर्ष 1984 में युवा मोर्चा के प्रदेश मंत्री बने और वर्ष 1991 में प्रदेश अध्यक्ष बने। वर्ष 2006 में नरेंद्र सिंह तोमर को फिर एक बार मध्य प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष चुना गया। इस राजनेतिक सफर के दौरान वे राज्यसभा सांसद भी रहे हैं। ग्वालियर से लड़ा था पहला विधानसभा चुनाव नरेंद्र सिंह तोमर ने अपना पहला विधानसभा चुनाव वर्ष 1993 ग्वालियर सीट से लड़ा था। इस चुनाव में उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था। इसके बाद वर्ष 1998 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी अशोक कुमार शर्मा को 26 हजार से अधिक वोटों के अंतर मात देकर विधानसभा में पहला कदम रखा था। इस दौरान उनको 50 हजार वोट मिले थे। उन्होंने अपना दूसरा विधानसभा का चुनाव वर्ष 2003 में लड़ा था, जिसमें उनको 63 हजार 592 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी बालेन्दु शुक्ला को 29 हजार 452 वोट मिले। तोमर ने यह चुनाव 34 हजार 140 वोटों के अंतर से जीता था। वर्ष 2003 से लेकर वर्ष 2007 तक श्री तोमर मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री के पद पर रहे। 2009 से लगातार चुने गए लोकसभा के सांसद साल 2009 में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर पहली बार मुरैना से लोकसभा सदस्य निर्वाचित हुए थे। मुरैना संसदीय क्षेत्र से लोकसभा सदस्य निर्वाचित होने से पहले वो राज्यसभा के सदस्य थे। इस चुनाव में उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी रामनिवास रावत को 1 लाख 97 वोटों से हराया था। वहीं, साल 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें ग्वालियर से टिकट दिया। इस दौरान उन्होंने 26 हजार से अधिक वोटों से जीत हासिल की। नरेंद्र सिंह तोमर केंद्र सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री, पंचायती राज मंत्री, खान मंत्री और संसदीय मामलों के मंत्री रहे हैं। इसके बाद वर्ष 2019 में उन्हें फिर एक बार मुरैना लोकसभा क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतारा गया और इस बार भी वोटों के बड़े अंतर से चुनाव जीतकर लगातार तीसरी बार लोकसभा में पहुंचे। जिसके बाद वो ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्रालय में रहे और उन्हें कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय का प्रभार दिया गया।

नतीजे के आठवें दिन मिला प्रदेश को नया मुख्यमंत्री, मोहन यादव के नाम पर लगी मुहर.

On the eighth day of the results, the state got a new Chief Minister, with the seal of approval on the name of Mohan Yadav. भोपाल। भारतीय जनता पार्टी ने आठ दिन मंथन करने के बाद सबको चौंका दिया है। बीजेपी के प्रदेश कार्यालय में सोमवार को नवनिर्वाचित विधायकों ने नए मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव के नाम पर मोहर लगाई। यादव उज्जैन दक्षिण से विधायक हैं। इसके अलावा जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ला उपमुख्यमंत्री होंगे। केंद्र में कृषि मंत्री रहे नरेंद्र सिंह तोमर स्पीकर होंगे। हालांकि उप मुख्यमंत्री और स्पीकर के नाम की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है। विधायक दल की बैठक में पर्यवेक्षक मनोहर लाल खट्टर, डॉ. के. लक्ष्मण और आशा लकड़ा मौजूद रहे। सीएम शिवराज सिंह ने उनके नाम का प्रस्ताव रखा, जिसका सभी विधायकों ने समर्थन किया। मोहन यादव को भरोसा नहीं हुआ तो पहले खड़े नहीं हुए। बाद में खड़े होकर हाथ जोड़े। मोहन यादव उज्जैन दक्षिण से विधायक हैं और ओबीसी वर्ग से आते हैं। जगदीश देवड़ा मंदसौर जिले के मल्हारगढ़ से विधायक हैं। देवड़ा एससी वर्ग से आते हैं। जबकि राजेन्द्र शुक्ला रीवा सीट से विधायक हैं और ब्राह्मण वर्ग से आते हैं। आठ दिन की कवायत, 15 मिनट में तय हुआ सीएमभाजपा प्रदेश कार्यालय पर शाम 4.11 बजे विधायक दल की बैठक शुरू हुई थी। मात्र 15 मिनट में नए मुख्यमंत्री बनाने की सारी प्रक्रिया पूरी कर ली गई। प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने विधायक दल की बैठक की जानकारी दी। पर्यवेक्षक और हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर खट्टर ने 6 मिनट के भाषण में सिर्फ इतना कहा कि भाजपा एक अनुशासित पार्टी है। केंद्रीय नेतृत्व के फैसले को सभी को स्वीकार करना चाहिए। यह परंपरा है। जिसके बाद सीएम के नाम का ऐलान कर दिया गया। शिवराज ने दिया इस्तीफा, मोहन ने पेश किया सरकार का प्रस्तावनए सीएम के नाम का ऐलान होने के बाद शिवराज सिंह चौहान राजभवन पहुंचे। जहां उन्होंने राज्यपाल मंगुभाई पटेल को सीएम पद से अपना इस्तीफा सौंपा। उनका इस्तीफा तत्काल मंजूर भी हो गया। शिवराज सिंह ने नए सीएम को बधाई भी दी। उन्होंने कहा मध्यप्रदेश को नया मुख्यमंत्री मिल गया है। उन्हें बहुत बहुत बधाई, उनका अभिनंदन। इधर कुछ देर बाद मोहन यादव राजभवन पहुंचे। यहां उन्होंने राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया। इस दौरान उनके साथ शिवराज सिंह चौहान, नरेंद्र सिंह तोमर, कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल और वीडी शर्मा मौजूद रहे। साथ ही तीनों पर्यवेक्षक मनोहर लाल कट्टर, डॉ के. लक्ष्मण और आशा लकड़ा भी साथ रहे। विधायकों का फोटो सेशन हुआ, रेस में थे कई नामबीजेपी विधायक दल की बैठक से पहले सभी नवनिर्वाचित विधायकों का फोटो सेशन हुआ। जिसमें मोहन यादव आगे से तीसरी पंक्ति में बैठे थे। फोटो सेशन के बाद बैठक शुरू हुई। जिसमें सीएम के रूप में मोहन यादव के नाम का ऐलान हो गया। एमपी सीएम पद की रेस में कई दिग्गज नाम शामिल थे। जिसमें प्रह्लाद पटेल, नरेंद्र सिंह तोमर, वीडी शर्मा, ज्योतिरादित्य सिंधिया, कैलाश विजयवर्गीय जैसे कई नाम शामिल थे। जिसमें केंद्रीय मंत्रियों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। बीजेपी ने सबको चौंकाते हुए मोहन यादव को नया मुख्यमंत्री बनाया है। भाजपा का तंत्र ऐसा, छोटे से छोटे कार्यकर्ता को बड़ी जवाबदारी : यादवनए सीएम मोहन यादव ने कहा कि भाजपा का तंत्र ही ऐसा है कि छोटे से छोटे कार्यकर्ता को बड़ी जवाबदारी मिलती है। हमारी ट्रेनिंग भी ऐसी होती है कि पार्टी जो काम दे दे उसको बहुत सहजता से लेते हैं। मैं तो पीछे की पंक्ति में बैठकर अपना काम कर रहा था। अचानक घोषणा हुई। मैं सबका आभार मानता हूं। विकास के काम को आगे बढ़ाना ही मेरी प्राथमिकता होगी। यादव ने कहा कि मैं पार्टी का एक छोटा सा कार्यकर्ता हूं। प्यार और सहयोग के लिए पार्टी की स्टेट लीडरशिप और केंद्रीय लीडरशिप का बहुत बहुत धन्यवाद। मैं अपनी जिम्मेदारी पूरी तरह से निभाऊंगा। 6 दिसंबर को रात 11 बजे 15 मिनट में तय हो गया था नामबताया जा रहा है कि यादव का मुख्यमंत्री के लिए नाम राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्‌डा के नई दिल्ली स्थित निवास पर 6 दिसंबर को रात 11 बजे ही तय हो गया था। इस दौरान केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव भी वहां मौजूद थे। भूपेंद्र यादव ने ही डॉ. मोहन यादव की रिपोर्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को दी थी। इसके बाद तीन दौर की बैठक में डॉ. यादव का नाम तय किया गया। वे संघ के करीबी माने जाते हैं। बीजेपी ने ओबीसी चेहरे के तौर पर मोहन यादव को आगे किया है।भाजपा के एक नेता ने बताया कि 6 दिसंबर को मोहन यादव सड़क मार्ग से भोपाल से उज्जैन जा रहे थे। शाम करीब 7 बजे जब वे आष्टा पहुंचे, तब उन्हें तत्काल दिल्ली आने के लिए गया। डॉ. यादव वापस भोपाल आए और रात 9 बजे की फ्लाइट से दिल्ली पहुंचे। उनकी नड्डा से केवल 15 मिनट की मुलाकात हुई। वे अगले दिन यानी 7 दिसंबर को सुबह भोपाल लौट आए। तब यह कयास लगाए जा रहे थे कि डॉ. यादव को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा सकता है।

नए मुख्यमंत्री के साथ मंत्रिमंडल में शामिल होंगे नए चेहरे, कई पुराने मंत्रियों का घटेगा कद.

New cabinet will include new faces along with the new Chief Minister, and several old ministers will see a reduction in their stature. मंत्रिमंडल में शामिल नेताओं में से 15 से ज्यादा नामों में फेरबदल होने की संभावना उदित नारायण भोपाल। प्रदेश के नए मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान होेने के बाद अब नए मंत्रियों के नामों को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है। सीएम की घोषणा के साथ ही मंत्रीमंडल को लेकर भी कवायत तेज हो गई है। लोगों में उत्सुकता है कि इस बार प्रदेश के कौन-कौन विधायक होंगे, जिन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा। ऐसे में इस बार मंत्रीमंडल में कुछ नए और कुछ पुराने चेहरों के शामिल होने की संभावना ज्यादा है। बताया जा रहा है कि वर्तमान में मंत्रीमंडल में शामिल नेताओं में से 15 से ज्यादा नामों में फेरबदल होने की संभावना जताई जा रही है। 13 दिसंबर को होने वाले संभावित शपथग्रहण के एक दो दिन बाद ही मंत्रीमंडल का गठन होने के संकेत हैं। यह हैं संभावित नामसंभावित नामों की बात करें तो इसमें सुमावली विधायक एंदलसिंह कंसाना, ग्वालियर विधायक प्रद्युम्न सिंह तोमर, गुना विधायक पन्नालाल शाक्य, खुरई विधायक भूपेंद्र सिंह, सुरखी विधायक गोविंद राजपूत, जतारा विधायक हरीशकंर खटीक, छतरपुर विधायक ललिता यादव, जबेरा विधायक धर्मेंद्र लोधी, पन्ना विधायक ब्रजेंद्र प्रताप सिंह, सिरमौर विधायक दिव्यराज सिंह, विधायक रीति पाठक, मनीषा सिंह, अनूपपुर विधायक बिसाहूलाल सिंह, विजयराघवगढ़ विधायक संजय पाठक, अजय विश्नोई, जबलपुर विधायक राकेश सिंह, संपतिया उइके, योगेश पंडाग्रे, प्रभुराम चैधरी, नारायण सिंह पंवार, अरुण भीमावद, राजेश सोनकर, आशीष शर्मा, विजय शाह, अर्चना चिटनीस, निर्मला भूरिया, रमेश मेंदोला, उषा ठाकुर, तुलसी सिलावट, चेतन कश्यप, हरदीप डंग, इंदरसिंह परमार, भोपाल से विधायक रामेश्वर शर्मा और कृष्णा गौर के नाम शामिल हो सकते हैं। इनकी जगह हुई खालीइस बार विधानसभा चुनाव में शिवराज सिंह चैहान के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल के दस से अधिक मौजूदा मंत्री पराजित हुए हैं। राज्य के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को भी हार का सामना करना पड़ा है। इसके अलावा जिन अन्य प्रमुख मंत्रियों को हार का सामना करना पड़ा उनमें अटेर से अरविंद भदोरिया, हरदा से कमल पटेल और बालाघाट से गौरीशंकर बिसेन शामिल हैं। इनके अलावा हारने वाले मंत्रियों में बड़वानी से प्रेम सिंह पटेल, बमोरी से महेंद्र सिंह सिसोदिया, बदनावर से राजवर्धन सिंह दत्तीगांव, ग्वालियर ग्रामीण से भारत सिंह कुशवाह, अमरपाटन से रामखेलावन पटेल, पोहरी से सुरेश धाकड़ और परसवाड़ा से रामकिशोर कावरे शामिल हैं। एक अन्य मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के भतीजे राहुल सिंह लोधी को खरगापुर से हार का सामना करना पड़ा।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने डॉ. मोहन यादव, राजेंद्र शुक्ला और जगदीश देवड़ा बने उप मुख्यमंत्री।

संतोष सिंह तोमर भोपाल। मध्य प्रदेश में आठ दिन से मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रहा सस्पेंस खत्म हो गया है। सभी अनुमानों को धता बताते हुए डॉ. मोहन यादव मध्य प्रदेश के नए सीएम चुने गए हैं। राजधानी भोपाल के भारतीय जनता पार्टी कार्यालय में तीनों पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में हुई भाजपा के विधायक दल की पहली बैठक में डॉ. मोहन यादव के नाम का ऐलान किया गया। श्री यादव उज्जैन दक्षिण सीट से विधायक हैं। इसके साथ ही मध्य प्रदेश में दो उप मुख्यमंत्रियों के नाम का भी ऐलान किया गया है। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव 2023 में भाजपा को 163 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत मिला है। कांग्रेस को 66 सीटें और 1 सीट भारतीय आदिवासी पार्टी को मिली है। विधायक दल की बैठक में मोहन यादव के नाम का ऐलान मध्य प्रदेश में आज विधायक दल की बैठक में दल का नेता चुना गया। इस बैठक के बाद मध्य प्रदेश के अगले मुख्यमंत्री पद को लेकर सस्पेंस खत्म हो गया है। इस बैठक में नए मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा की गई। मध्य प्रदेश का नया मुख्यमंत्री उज्जैन दक्षिण से निर्वाचित विधायक डॉ. मोहन यादव को बनाया गया है। यहां गौरतलब है कि बीजेपी ने इस बार का विधानसभा चुनाव अपने मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के बिना ही लड़ा था। जिसके कारण मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद को लेकर तमामबात अटकलें लगाई जा रही हैं कि अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। मुख्यमंत्री पद की रेस में थे कई नाम, 9 दिन तक चला मंथन एमपी सीएम पद की रेस में कई दिग्गज नाम शामिल थे। जिसमें प्रह्लाद पटेल, नरेंद्र सिंह तोमर, वीडी शर्मा, ज्योतिरादित्य सिंधिया, कैलाश विजयवर्गीय जैसे कई नाम शामिल थे। जिसमें केंद्रिय मंत्रियों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। बीजेपी ने सबको चौंकाते हुए मोहन यादव को नया मुख्यमंत्री बनाया गया है। उज्जैन के दक्षिण सीट से मोहन यादव ने जीत हासिल की है। बता दें कि मोहन यादव शिवराज सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री रह चुके हैं। ये लगातार तीसरी बार चुनाव जीतकर उज्जैन दक्षिण सीट पर कब्जा किया है। बता दें कि बीजेपी ने 9 दिन मंथन करने के बाद सबको चौंका दिया है। बीजेपी के भोपाल दफ्तर में नवनिर्वाचित विधायकों ने नए मुख्यमंत्री के नाम पर मोहर लगा दी। उत्तर प्रदेश की तर्ज पर मध्य प्रदेश को भी मिले दो उप मुख्यमंत्री राज्य के नए मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान होने के साथ ही मध्य प्रदेश सरकार का काम काज संभालने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की तर्ज पर दो उप मुख्यमंत्रियों के नाम की भी घोषणा की गई है। घोषणा के अनुसार विधायक राजेंद्र शुक्ला और जगदीश देवड़ा को मध्य प्रदेश का उपमुख्यमंत्री बनाया गया है। जगदीश देवड़ा मंदसौर जिले की मल्हारगढ़ सीट से विधायक हैं। वह एससी वर्ग से आते हैं वहीं ब्राह्मण वर्ग से आने वाले राजेन्द्र शुक्ला रीवा सीट से विधायक हैं और विंध्य क्षेत्र का बड़ा ब्राह्मण चेहरा होकर कद्दावर नेता माने जाते हैं। 2013 में पहली बार बने विधायक, शिवराज सरकार में रहे उच्च शिक्षा मंत्री 58 साल के डॉक्टर मोहन यादव पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान की सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री रह चुके हैं। साल 2013 में वह पहली बार उज्जैन दक्षिण सीट से विधायक चुने गए थे। इसके बाद साल 2018 में वह एक भार फिर दक्षिण उज्जैन की सीट से विधायक चुने गए थे। साल 2023 मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में मोहन यादव ने उज्जैन दक्षिण विधानसभा सीट से कांग्रेस के चेतन प्रेमनारायण यादव को 12941 वोटों से हराकरलगातार तीसरी बार विजयश्री प्राप्त की है। विधायक दल की बैठक में हरियाणा के सीएम और मध्य प्रदेश के पर्यवेक्षक मनोहर लाल खट्टर ने प्रदेश के नए मुख्यमंत्री के रूप में डॉ. मोहन यादव के नाम का ऐलान किया जबकि श्री यादव के नाम का प्रस्ताव वर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रखा था।

जानिए मुख्यमंत्री मोहन यादव के बारे में.

Learn about Chief Minister Mohan Yadav. भोपाल! मोहन यादव उज्जैन दक्षिण से विधायक हैं। वे एमपी के सीएम होंगे। मध्यप्रदेश के अगले मुख्यमंत्री मोहन यादव होंगे। मोहन यादव उज्जैन दक्षिण से विधायक हैं। भोपाल स्थित ‌BJP के प्रदेश कार्यालय में पार्टी के विधायक दल की बैठक में उनके नाम पर मुहर लगी है। मोहन यादव ओबीसी वर्ग से आते हैं। बैठक में पर्यवेक्षक मनोहर लाल खट्‌टर (CM हरियाणा), डॉ. के. लक्ष्मण (राष्ट्रीय अध्यक्ष, BJP OBC मोर्चा) और आशा लकड़ा (राष्ट्रीय सचिव भाजपा) मौजूद रहे। विधायक दल की बैठक से पहले भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई। मध्यप्रदेश के अगले मुख्यमंत्री मोहन यादव होंगे उज्जैन दक्षिण सीट से विधायक हैं मोहन यादव उम्र – 58 वर्ष, शैक्षणिक योग्यता – बी.एस.सी., एल-एल.बी., एम.ए.(राज.विज्ञान), एम.बी.ए., पी.एच.डी. व्यवसाय – अभिभाषक, व्‍यापार, कृषिस्थायी पता – 180, रविन्‍द्रनाथ टैगोर मार्ग, अब्‍दालपुरा, जिला-उज्‍जैन राजनीतिक कॅरियर – सन 1982 में माधव विज्ञान महाविद्यालय छात्र संघ के सह-सचिव, 1984 में अध्‍यक्ष

मोहन यादव होंगे मध्‍य प्रदेश के नए मुख्‍यमंत्री, भाजपा विधायक दल का निर्णय.

Mohan Yadav will be the new Chief Minister of Madhya Pradesh, as decided by the BJP legislative party. राजधानी में भाजपा विधायक दल की बैठक में नया सीएम चुना गया। मप्र भाजपा विधायक दल की बैठक से पहले हलचल रही। In the capital, a new Chief Minister was elected during the BJP legislative party meeting. There was anticipation and excitement before the meeting of the Madhya Pradesh BJP legislative party. भोपाल। मध्‍य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 में भाजपा की शानदार जीत के बाद पार्टी ने मुख्‍यमंत्री भी चुन लि‍या है। इसके लिए आज राजधानी में भाजपा विधायक दल की बैठक बुलाई गई थी। मप्र भाजपा विधायक दल की बैठक से पहले खासी हलचल रही। मोहन यादव मप्र के मुख्‍यमंत्री होंगे।इससे पहले विधायक प्रहलाद पटेल के बंगले पर उनके समर्थकों का जमावड़ा होने की सूचना है। खबर मिली है कि पटेल के बंंगले पर पुलिस सुरक्षा भी बढ़ा दी गई थी। श‍िवराज के समर्थकों ने भी खूब नारेबाजी की।

भाजपा विधायक दल की बैठक से पहले हलचल तेज, क्‍या आज घोषित होगा मप्र का मुख्‍यमंत्री या आलाकमान करेगा तय.

Excitement is high before the BJP legislative party meeting; will Madhya Pradesh’s Chief Minister be announced today, or will a consensus be reached. आज राजधानी में भाजपा विधायक दल की बैठक बुलाई गई है। मप्र भाजपा विधायक दल की बैठक से पहले हलचल तेज हो गई है। Today, a meeting of the BJP legislative party has been called in the capital. There is a flurry of activity ahead of the Madhya Pradesh BJP legislative party meeting. भोपाल। मध्‍य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 में भाजपा की शानदार जीत के बाद अब मुख्‍यमंत्री चुनने की बारी है। इसके लिए आज राजधानी में भाजपा विधायक दल की बैठक बुलाई गई है। मप्र भाजपा विधायक दल की बैठक से पहले हलचल तेज हो गई है। दिल्ली: मध्य प्रदेश के नए मुख्यमंत्री के चयन पर राज्य के लिए भाजपा के केंद्रीय पर्यवेक्षक के लक्ष्मण ने कहा, “आज शाम विधायक दल की बैठक होगी। मनोहर लाल खट्टर की 3 सदस्यीय कमेटी विधायकों से चर्चा करेगी। बाद में आलाकमान उस पर निर्णय लेंगे। राजनीतिक हलकों में यह सवाल तैर रहा है कि क्‍या आज घोषित होगा मध्‍य प्रदेश का मुख्‍यमंत्री या बैठक के बाद आलाकमान इस बारे में कोई निर्णय लेगा।केंद्रीय पर्यवेक्षक ये बोले हालांकि भोपाल पहुंंचने से पहले भाजपा के केंद्रीय पर्यवेक्षक के लक्ष्‍मण ने एएनआइ से कहा है कि 3 सदस्‍यीय कमेटी विधायकों से चर्चा करेगी। बाद में आलाकमान उस पर निर्णय लेंगे। भाजपा विधायक दल की बैठक पार्टी के कार्यालय में दोपहर बाद होनी है। भाजपा विधायक दल की बैठक के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में हरियाणा के मुख्‍यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, भाजपा ओबीसी मोर्चा के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष डा के लक्ष्‍मण और भाजपा की राष्‍ट्रीय सचिव आशा लकड़ा भोपाल पहुंच चुकी हैं। मप्र भाजपा अध्‍यक्ष वीडी शर्मा ने विमानतल पर पर्यवेक्षकों का स्‍वागत किया। वीडी शर्मा ने कही ये बात भोपाल आगमन के बाद केंद्रीय पर्यवेक्षक शिवराज सिंह चौहान से मिलने सीएम हाउस पहुंचे। वहीं मीडिया से बातचीत में वीडी शर्मा ने कहा कि हम राज्‍य के लिए मुख्‍यमंत्री चुनेंगे। भाजपा विधायक दल की बैठक के लिए विधायकों के पहुंचने का सिलसिला आरंभ हो गया है। बैठक से पहले विधायकों को किसी तरह की प्रतिक्रिया देने से रोका गया है। 3 दिसंबर से ही चल रही अटकलें उल्‍लेखनीय है कि 3 दिसंबर को मध्‍य प्रदेश विधानसभा चुनाव के परिणाम घोषित होने के साथ ही मध्‍य प्रदेश में मुख्‍यमंत्री पद के लिए चर्चाओं का दौर आरंभ हो गया था।चल रही ये अटकलें , मप्र के मुख्‍यमंत्री के नाम को लेकर अनेक अटकलों का दौर जारी है। इनमें श‍िवराज सिंह चौहान के साथ ही नरेंद्र सिंह तोमर, प्रहलाद पटेल, कैलाश विजयवर्गीय, विष्‍णुदत्‍त शर्मा और ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया का नाम प्रमुख है। इसके साथ ही भूपेंद्र सिंह, राकेश सिंह और सुमेर सिंह सोलंकी का नाम भी सामने आया है।

मध्य प्रदेश को नया आयम देने मोदी की गारंटी”

Modi’s guarantee to give Madhya Pradesh a new dimension. संपादकीय, उदित नारायण, Sahara Samachaarभोपाल। मध्य प्रदेश में चुनाव से पहले कांग्रेस का अहम मुद्दा भ्रष्ट सरकार ,भाजपा की छवि को सुधारने हेतु प्रधानमंत्री और अमित शाह ने मिलकर जो रणनीति बनाई उससे कांग्रेस के पास आती प्रतीत हो रही सत्ता हाथ से फिसल गई और आगामी लोकसभा चुनाव से पूर्व मध्य प्रदेश मे केंद्रीय नेतृत्व ने एक साफ सुथरी छवि का मुख्य मंत्री बनाने की कवायद तेज कर दी है, कल विधायक दल की बैठक के बाद निर्णय हो जायेगा कि जाएगा कि मोदी के विकसित भारत बनाने की गारंटी का जिम्मा मध्य प्रदेश मे किसके हाथ होगा, राजनैतिक विश्लेषकों की राय में तो मध्य प्रदेश में भाजपा की प्रचंड बहुमत से जीत के बाद मुख्य मंत्री तय करना कठिन हो गया है। लेकिन प्रधानमंत्री, अमित शाह और पार्टी अध्यक्ष ने शायद अपना निर्णय मध्य प्रदेश इकाई को बता दिया है अब कुछ औपचारिकता ही शेष बची है !शिवराज और उनकी “मैनेजमैंट पॉलिटिक्स” लाख इस तथ्य को छुपाने ,दबाने का प्रयास करती रही पर इस कटु सत्य को नरेन्द्र मोदी और अमित शाह से छुपने का कोई प्रश्न ही नही था ,और इसलिए मध्य प्रदेश का चुनाव “मोदी“ के चेहरे पर लड़े जाने का निर्णय लिया गया और तभी यह तय हो गया था कि मध्य प्रदेश में “शिवराज सरकार “का अंत समीप है ! शिवराज सिंह चौहान और उनके चाटुकार नौकरशाह और मीडिया मैनेजर गर्व से “लाड़ली बहना” का नाम लेते है ! सब जानते है यदि मोदी का चेहरा और “ ब्रॉड मोदी “की गॉरंटी नही होती तो मध्य प्रदेश की “लाडली बहनाये ““कमलनाथ से इस योजना का लाभ लेना पसंद करती ! महिला वोटर को 1250 रुपये के लिए शिवराज के वादों को भुलाने का कड़वा घूँट पीना पडा. यथार्थ यह है कि 18 साल में मध्य प्रदेश गरीबी के उस पड़ाव पर पहुंच गया जहाँ महिला वोटर को 1250 रुपये के लिए शिवराज के वादों को भुलाने का कड़वा घूँट पीना पडा. ! यदि मोदी की गॉरंटी नही होती तो शिवराज सिंह की भाजपा मध्य प्रदेश मे 80 सीटों पर सिमट जाती !मध्यप्रदेश के जानकार जानते है “लाडली बहना “ शिवराज की “मनी मैनेजमैंट “का उदाहरण है ! मध्य प्रदेश 3.85 लाख करोड के कर्जे मे है ! अपने भृष्टाचार और घोटालो को दबाने के लिए कर्जे उठाकर चुनाव के पहले गरीब लाचार बेरोजगार महिलाओ को 1200 रूपये प्रतिमाह की रिश्वत दी गई है ! नोट के बदले लाचार बेरोजगार कराह रही “बहनाओ “के वोट खरीदने के लिए यह योजना लाई गई थी ! यदि मोदी ने गॉरंटी न दी होती तो बहनाये सरकार के बहकावे में आने वाली नही थी ! देखा जाए तो भाजपा की नई सरकार को मध्यप्रदेश के कर्ज चुकाने हेतु 3.85 लाख करोड़ के “ मोदी पैकेज “की जरूरत पडेगी नही तो प्रदेश के दीवालिया होने का खतरा है !मजे की बात यह है शिवराज सिंह अभी भी खुद को “हीरो “बताकर मुख्य मंत्री बनने के सपने देख रहे थे ! वे चाहते थे कि लोग उन्हे मध्यप्रदेश की जीत का श्रेय दें। इसीलिए वो दिल्ली ना आकर मध्य प्रदेश से भावनात्मक बयान दे जनता और प्रधानमंत्री को सन्देश दे रहे है, बेशक संघ और संगठन के कृपापात्र शिवराज अब भी संगठन पर निगाहें जमाये है लेकिन भ्रष्टाचार और भावना मे चुनावी नुकसान मोल लेने मे संगठन भी साथ नहीं आएगा!तीन राज्यो की “जीत के शिल्पकार “अमित शाह को हर अंधकार को समाप्त करने की मोदी की गॉरंटी याद है इसलिए शिवराज का पुनःमुख्यमंत्री बनना सिर्फ उनकी खुली ऑखो का सपना है क्योकि अमित शाह इतने भोले नही हैं कि शिवराज सिंह पुनः मुख्य मंत्री बनाए। मध्यप्रदेश के 3.85 लाख करोड़ के शिवराज काल के कर्जो को चुकाने केन्द्र से पैकेज देते रहें और शिवराज सिंह को बीजेपी का राजनीतिक शिखर सौप दें ! इसलिए शिवराज सिंह को जाना होगा ! यकीन मानिए जो भी मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री होगा उसका कद और किरदार इतना ऊंचा और उज्जवल होगा मध्य प्रदेश मोदी की पसंद पर नाज कर सकेगा ! सोमवार को 18 साल के तिमिर के छंटने और नए सूर्योदय का इंतजार कीजिए !

सीएम पद पाने दावेदार टस से मस नहीं, एमपी-राजस्थान और छत्तीसगढ़ में फंसा पेंच.

The aspirant claiming the Chief Minister position is not making headway despite efforts; caught in a deadlock between Tussle in Madhya Pradesh, Rajasthan, and Chhattisgarh. भाजपा को सीएम चुनने में जब भी 5 दिन से ज्यादा वक्त लगा, हो गया यह खेला, भाजपा को सीएम चुनने में आ रहा पसीना उदित नारायणभोपाल। विधानसभा चुनाव परिणाम 2023 के 5 दिन बीत चुके हैं, लेकिन भारतीय जनता पार्टी मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री नहीं चुन पाई है। बड़े से लेकर छोटे नेता तक एक ही बात कह रहे हैं- सबकुछ हाईकमान तय करेंगे। हाईकमान मतलब नरेंद्र मोदी, अमित शाह और जेपी नड्डा। हालांकि, मुख्यमंत्री चुनने में हो रही देरी के गणित ने बड़े नेताओं की धड़कनें बढ़ा दी है। बीजेपी ने जब भी मुख्यमंत्री चुनने में 5 दिन से ज्यादा का वक्त लगाया, तब पार्टी ने पुराने के बदले नए चेहरे को तरजीह दी।मसलन, 2017 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री चुनने में बीजेपी ने 9 दिन का समय लगाया था। उस वक्त राजनाथ सिंह, मनोज सिन्हा जैसे बड़े नेता मुख्यमंत्री की रेस में शामिल थे, लेकिन बीजेपी ने नए चेहरे महंथ योगी आदित्यनाथ को सीएम की कुर्सी सौंपी।उसी साल उत्तराखंड के चुनाव में भी बीजेपी को जीत मिली थी। पार्टी को यहां भी मुख्यमंत्री चुनने में 8 दिन का वक्त लग गया था। पार्टी ने त्रिवेंद्र सिंह रावत को मुख्यमंत्री बनाया था, जबकि बीएस खंडूरी, रमेश पोखरियाल निशंक जैसे पुराने नेता यहां मजबूत दावेदार थे।इसी तरह सीएम सिलेक्शन के लिए हिमाचल (2017) और महाराष्ट्र (2014) में पार्टी को 7 दिन का वक्त लगा था। दोनों जगहों पर बीजेपी ने पुराने चेहरे को नकार कर नए चेहरे को कमान सौंपी थी।हिमाचल में धूमल और महाराष्ट्र में नितिन गडकरी मुख्यमंत्री पद के बड़े दावेदार थे। हरियाणा (2014) में भी बीजेपी को मुख्यमंत्री चुनने में 6 दिन का वक्त लगा था। यहां पार्टी ने नए चेहरे मनोहर लाल खट्टर को मुख्यमंत्री बनाया था। 2013 में लगे थे 3 दिन का वक्त2013 में भी भारतीय जनता पार्टी को मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में बंपर जीत मिली थी। उस समय राजनाथ सिंह बीजेपी के अध्यक्ष थे। 2013 में पार्टी को मुख्यमंत्री चुनने में 3 दिन का वक्त लगा था। 8 दिसंबर को चुनावी नतीजे आए थे और 11 दिसंबर को पार्टी ने मध्य प्रदेश में शिवराज और छत्तीसगढ़ में रमन सिंह को कमान देने की घोषणा कर दी थी। 12 दिसंबर को वसुंधरा राजे के नाम का ऐलान किया गया था। 2013 में चुनाव परिणाम आते ही बीजेपी ने इन राज्यों के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त कर दिया था। उस वक्त मध्य प्रदेश के लिए सुषमा स्वराज, राजीव प्रताप रूडी और अनंत कुमार को पर्यवेक्षक बनाकर भेजा गया था। वेंकैया नायडू, जेपी नड्डा और धर्मेंद्र प्रधान छत्तीसगढ़ के पर्यवेक्षक थे, जबकि अरुण जेटली, अमित शाह और कप्तान सोलंकी बतौर पर्यवेक्षक बनकर राजस्थान गए थे। 5 दिन से कम का वक्त लगा यानी चेहरा रिपीट2019 में हरियाणा चुनाव के रिजल्ट के 3 दिन बाद ही बीजेपी ने मुख्यमंत्री नाम की घोषणा कर दी। पार्टी ने मनोहर लाल खट्टर को ही दूसरी बार राज्य की बागडोर संभालने की जिम्मेदारी सौंपी।गुजरात में भी 8 दिसंबर 2022 को चुनाव परिणाम आया, जिसमें बीजेपी को एकतरफा जीत मिली। पार्टी ने 3 दिन के भीतर ही मुख्यमंत्री का नाम ऐलान कर दिया। भूपेंद्र पटेल को ही पार्टी ने सीएम की जिम्मेदारी सौंपी। 2019 में महाराष्ट्र चुनाव परिणाम के 5 दिन बाद ही देवेंद्र फडणवीस को बीजेपी ने विधायक दल का नेता चुन लिया था। हालांकि, शिवसेना की वजह से फडणवीस उस वक्त सरकार नहीं बना पाए थे। शिवसेना ने पावर शेयरिंग के मुद्दे पर बीजेपी से समर्थन वापस ले लिया था। सीएम हर बार रिपीट, एक अपवाद शिवराज के लिए खतरा2014 के बाद सत्ता में रहते हुए बीजेपी ने जिस भी राज्य में चुनाव जीती है, वहां के मुख्यमंत्री नहीं बदला है। हालांकि, 2021 का असम चुनाव इसका अपवाद है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि यही डर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को सता रहा है। 2017 में गुजरात विधानसभा चुनाव में जीत के बाद विजय रुपाणी को ही फिर से मुख्यमंत्री बनाया गया था। 2019 में हरियाणा में भी यही हुआा। जीत के बाद पार्टी ने खट्टर पर ही भरोसा जताया। 2022 में यूपी, गोवा और उत्तराखंड में भी जीत के बाद बीजेपी ने मुख्यमंत्री नहीं बदला। उत्तराखंड में तो मुख्यमंत्री धामी विधानसभा का चुनाव भी हार गए थे। इसी तरह अरुणाचल में जीत के बाद पेमा खांडू और त्रिपुरा में जीत के बाद माणिक साहा की सत्ता बरकरार रही। दोनों चुनाव से पहले भी राज्य के मुख्यमंत्री थे। मुख्यमंत्री को लेकर क्यों फंसा है पेंच?पहला- राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में पिछले 20 साल में पहली बार मुख्यमंत्री चेहरे के बिना बीजेपी चुनाव मैदान में उतरी थी। तीनों ही राज्य में बीजेपी का यह प्लान काम कर गया है। इसी वजह से मुख्यमंत्री तय करने में पार्टी को मशक्कत करनी पड़ रही है।दूसरा- पिछले 2 दशक राजस्थान में वसुंधरा राजे, छत्तीसगढ़ में रमन सिंह और मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के इर्द-गिर्द बीजेपी की राजनीति घूम रही है। कहा जा रहा है कि हाईकमान अब इसे खत्म करना चाहती है।तीसरा- राजस्थान में वसुंधरा राजे और मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान काफी मजबूत स्थिति में हैं। लोकसभा चुनाव के नजदीक होने की वजह से बीजेपी कोई भी फैसला जल्दबाजी में नहीं लेना चाहती है। कहां कितने दावेदार, एक नजर इस पर भी बीजेपी कैसे चुनती है राज्यों में मुख्यमंत्री?भारतीय जनता पार्टी में भी मुख्यमंत्री चयन की प्रक्रिया कांग्रेस की तरह ही है। चुनाव में जीत के बाद दिल्ली से पर्यवेक्षक भेजे जाते हैं। पर्यवेक्षक सभी विधायकों से राय लेते हैं और आलाकमान को बताते हैं। इसके बाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अपना फैसला सुनाते हैं, जो विधायक दल की मीटिंग में बताया जाता है। कई बार पेंच फंसने पर सभी बड़े नेताओं को दिल्ली बुलाया जाता है और उसके बाद फैसला सुनाया जाता है। इस बार बीजेपी ने राजस्थान के लिए राजनाथ सिंह, सरोज पांडे और विनोद तावड़े, मध्य प्रदेश के लिए मनोहर लाल खट्टर, के लक्ष्मण और आशा लकड़ा को पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री चयन के लिए बीजेपी ने अर्जुन … Read more

विधायक दल तय करेगा मध्य प्रदेश का अगला सीएम- वीडी. शर्मा.

The Group of legislative will decide the next Chief Minister of Madhya Pradesh – V.D. Sharma. भोपाल! मध्यप्रदेश का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इसका जवाब अब सोमवार (11 दिसंबर) को मिलेगा। इस दिन शाम 4 बजे भोपाल में बीजेपी विधायक दल की बैठक होगी, जिसमें सीएम का नाम तय होगा। विधायकों से रायशुमारी के लिए नियुक्त तीनों पर्यवेक्षक भी बैठक में मौजूद रहेंगे। इससे पहले शनिवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा-शिवराज सिंह चौहान ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा- ‘सभी को राम-राम…’ सीएम आज दोपहर साढ़े तीन बजे भोपाल उत्तर विधानसभा क्षेत्र में लाड़ली बहनों से संवाद करेंगे। वीडी बोले- हम कैडर बेस ऑर्गेनाइजेशन के कार्यकर्ता मप्र मुख्यमंत्री पद के सवाल पर वीडी शर्मा ने कहा कि हम कैडर बेस ऑर्गेनाइजेशन के कार्यकर्ता हैं। मुख्यमंत्री कौन होगा, उप मुख्यमंत्री कौन होंगे, होंगे, नहीं होंगे? इसका निर्णय नेतृत्व करेगा। सीएम विधायक दल ही चुनेगा। 11 दिसंबर की शाम 4 बजे विधायक दल की मीटिंग होगी। तीनों पर्यवेक्षक वन टू वन चर्चा कर सकते हैं पर्यवेक्षक बीजेपी ने मुख्यमंत्री चयन को लेकर शुक्रवार को तीन पर्यवेक्षक नियुक्त कर दिए हैं। इनमें हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, ओबीसी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. के. लक्ष्मण और पार्टी की राष्ट्रीय सचिव आशा लकड़ा शामिल हैं। ऐसा माना जा रहा है कि खट्टर और डॉ. के. लक्ष्मण विधायकों से वन टू वन चर्चा कर सकते हैं।

नया जोश भरने की कवायद – नमो के जरिए 100 दिनों में पीएम से मिल सकेंगे भाजपा कार्यकर्ता

In the first 100 days, BJP workers can meet the Prime Minister through a renewed vigor strategy. क्यू आर कोड को स्कैन करके चैलेंज को एक्सेप्ट कर सकते हैं, भाजपा के कार्यकर्ता फील्ड पर उतरेंगे  उदित नारायण, ग्रुप एडिटर सहारा समाचार   भोपाल। विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा लोकसभा चुनाव में जुट गई है। अपने कार्यकतार्ओं को हमेशा काम में लगाए रखने वाली भाजपा ने अब पार्टी वर्कर्स को लोकसभा के लिए 100 दिन का चैलेंज दिया है। इस चैलेंज के तहत कार्यकतार्ओं को भारतीय जनता पार्टी की योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाना है। इसके साथ ही जिन्हें योजनाओं का लाभ नहीं मिला है, उन्हें इनका लाभ दिलवाना है।इसकी मॉनिटरिंग के लिए नमो एप का भी उपयोग किया जाएगा। इसके लिए पोस्टर्स भी हर भाजपा कार्यालय में लगवा दिए गए हैं।  कार्यकतार्ओं में नया जोश भरने के लिए भाजपा उन्हें प्रधानमंत्री मोदी से मिलने का मौका देने जा रही है। इसके लिए पार्टी ने 100 डे का एक चैलेंज तैयार किया है। इस चैलेंज को पूरा करने पर हर हफ्ते और महीने में पांच विजेताओं को चुना जाएगा। इन्हें आकर्षक पुरस्कार भी दिया जाएगा। इसके लिए कार्यकर्ता क्यू आर कोड को स्कैन करके इस चैलेंज को एक्सेप्ट कर सकते हैं। माना जा रहा है कि इससे भाजपा के कार्यकर्ता फील्ड पर उतरेंगे। खास बात है कि बेहतर काम करने वाले कार्यकर्ता को पीएम मोदी से भी मिलवाया जाएगा।  प्रदेश की 29 सीटों पर नजर – भारतीय जनता पार्टी की अब मध्यप्रदेश की 29 सीटों पर नजर है। हालांकि, अभी भाजपा के पास इनमे से 28 सीटें हैं। सिर्फ एक सीट छिंदवाड़ा ही कांग्रेस के हाथ में हैं। छिंदवाड़ा को कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ का गढ़ माना जाता है। वर्तमान में नाथ के बेटे नकुल यहां से सांसद हैं। इस बार के विधानसभा के चुनाव में भी कांग्रेस ने छिंदवाड़ा जिले की सभी सातों सीटों पर कब्जा किया है। इधर, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खुद यहां पर मोर्चा संभालने की बात कह रहे हैं।

दिल्ली मे सरकार बनाने की गहमागहमी के बीच भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बी डी शर्मा के साथ रात भोपाल पहुंचे प्रहलाद पटेल.

Amidst intense efforts to form a government in Delhi, Pralhad Patel arrived in Bhopal with BJP State President B.D. Sharma late at night. *उदित नारायण* नई दिल्ली।तीन राज्यों मे मिली बम्पर जीत के बाद से ही भाजपा मे नई सरकार के गठन को लेकर बैठकों एवं मंथनों का दौर जारी हैँ मध्यप्रदेश राजस्थान और छत्तीसगढ़ मे मुख्यमंत्री पद के कई नाम चर्चा मे हैँ, एक तरफ जहाँ शिवराज भोपाल मे बैठकर सियासी गुणागणित लगा रहे हैँ वही देर रात प्रहलाद पटेल राज्य इकाई के प्रमुख बी डी शर्मा के साथ भोपाल पहुचे, दरअसल, मध्‍य प्रदेश की नरसिंहपुर विधानसभा सीट से निर्वाचित विधायक प्रहलाद सिंह पटेल चुनाव परिणाम आने के बाद पहली बार भोपाल पहुंचे। पटेल के साथ बीजेपी प्रदेश अध्‍यक्ष वी‍डी शर्मा भी थे, दोनों एक साथ दिल्‍ली से भोपाल आए। इसके बाद से अटकलें तेज हो गई हैं कि क्‍या प्रहलाद सिंह पटेल ही प्रदेश के अगले मुख्‍यमंत्री होंगे। प्रहलाद पटेल का नाम मुख्‍यमंत्री चहरे में सबसे आगे चल रहा है। पटले ने दिल्‍ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की है। वहीं, भोपाल आने के पहले प्रहलाद पटेल वरिष्‍ठ नेता मुरली मनोहर जोशी का आशीर्वाद लेने भी पहुंचे थे। वही इंदौर-1 विधानसभा से नवनिर्वाचित विधायक कैलाश विजयवर्गीय ने गुरुवार को प्रदेश के अगले मुख्‍यमंत्री को लेकर कहा कि सीएम के नाम की घोषणा रविवार तक हो जाएगी, साथ ही प्रदेश में बीजेपी की बड़ी जीत के लिए श्रेय शिवराज सिंह चौहान की योजनाओं को देने से इंकार कर दिया ,*ग्‍वालियर में तोमर के समर्थन के ग्‍वालियर में तोमर के पोस्‍टर लगे *वहीं, प्रदेश के मुख्‍यमंत्री को लेकर कई तरह की अटकलें चल रही हैं। ग्‍वालियर में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के बड़े-बड़े पोस्टर लग गए हैं, जिन पर उन्हें ‘बॉस‘ लिखा गया है।पोस्‍टर लगे* वहीं, प्रदेश के मुख्‍यमंत्री को लेकर कई तरह की अटकलें चल रही हैं। ग्‍वालियर में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के बड़े-बड़े पोस्टर लग गए हैं, जिन पर उन्हें ‘बॉस‘ लिखा गया है।

सनरूफ खुली कार उमाकांत शर्मा का जलवा बरकरार अपने कार्यकर्ता समर्थकों का किया आभार

जो मनाऐ मनाऐ नहीं आए डीजे की धुन पर सबसे आगे थिरक्ते दिखाई दिए अलताफ खान सिरोंज ! जीत के बाद धन्यवाद कहने निकले उमाकांत शर्मा सिरोंज लटेरी विधानसभा से दोबारा विधायक बनने के बाद प्रचंड बहुमत से जीत हासिल करने के बाद उमाकांत शर्मा सिरोंज नगर में अपने कार्यकर्ताओं समर्थकों के साथ जनता का आभार व्यक्त करने निकले बासौदा नाका बलेजा पेट्रोल पंप के पास से जुलूस की शुरुआत की भारतीय जनता पार्टी के झंडे एवं भगवा लहराते हुऐ झंडे कार्यकर्ताओं के हाथ में नजर आए कार्यकर्ताओं और समर्थकों की खुशी का इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि कार्यकर्ता डीजे की धुन पर झूमते नाचते नजर आए एवं कार्यकर्ताओं ने आतिशबाजी भी की जगह-जगह उमाकांत शर्मा के विधायक बनने के बाद हार फूल मालाओं से स्वागत किया गया मुख्य रूप से नगर पालिका सिरोंज जनपद पंचायत सिरोंज के समक्ष भव्य स्वागत किया गया विशेष तौर पर जो कार्यकरता भारतीय जनता पार्टी के चुनाव प्रचार के दौरान नहीं दिखे उन कार्यकर्ताओं का जमावड़ा भी अच्छा खासा देखने में आया है वहीं अगर हम बात करें भारतीय जनता पार्टी के उन कार्यकर्ताओं की जिनको कई बार वरिष्ठ नेतृत्व मनाने गया फिर भी वह पार्टी का काम करने नहीं आए और क्षेत्र में यह माहौल बन गया कि इस बार यह किसी भी हाल में पार्टी का काम नहीं करेंगे वह कार्यकर्ता भी डीजे की धुन पर सबसे आगे थिरक्ते हुए नजर आए कहीं ना कहीं क्षेत्र में यह भी चर्चा का विषय बना रहा सबाबहार में हुआ समापन जुलूस निकालने के बाद उमाकांत शर्मा कार्यकर्ताओं के बीच छतरी नाके पर स्थित सभागार मैं मौजूद रहकर अपने कार्यकर्ताओं को संबोधित किया एवं कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया कार्यकर्ताओं की जमकर तारीफ की और क्षेत्र कश जनता को विश्वास और भरोसा दिलाया कि क्षेत्र की जनता ने जिस तरह मुझ पर विश्वास भरोसा किया है मैं भी जनता से वादा करता हूं के मैं उनके विश्वास भरोसे पर खड़ा उतारूंगा हां जो गलत है या गलत करेगा उसके विरुद्ध में हमेशा खड़ा रहा हूं और खड़ा रहूंगा उमाकांत का जीवन भारतीय जनता पार्टी पर समर्पित क्षेत्रवासियों पर समर्पित

मध्य प्रदेश सियासत में अकेले खड़े होने का साहस, बिसात कहीं और है… पांसे कहीं शतरंज यहां से खेल रहे हैं सीएम शिवराज ?

*उदित नारायण* भोपाल।मध्य प्रदेश में 18 सालों की राजनीति में परिपक्वता, स्थिरता, सोच और समझ के शिखर पर जा पहुंचे सीएम शिवराज सिंह चौहान इस बार बेहद ही अनोखे अंदाज में अपनी कुर्सी पर आई चुनौती का जवाब न केवल प्रतिद्वंद्वियों को दे रहे हैं, बल्कि नेतृत्व तक भी अपनी सहजता और सामर्थ्य को पहुंचा रहे है । मध्य प्रदेश के नेतृत्व को बदलने का मन बना चुके नेतृत्व की मंशा को भांपते शिवराज ने जनमानस को अपनी मुट्ठी में कैद करने के लिए भावुकता के ऐसे-ऐसे तीर छोड़े थे कि प्रदेशभर की जनता को लगा कि उनका खैरख्वाह उन्हें छोडक़र जा रहा है । इसी भावुकता को लूटते शिवराज ने प्रदेश की जनता के भरपूर वोट बटोरकर पार्टी को ऐतिहासिक विजय दिलाते हुए नेतृत्व को भी वही संदेश और सवाल पहुंचा दिया, जो उन्होंने जनता से कहा था कि मैं नहीं रहूंगा तो क्या होगा ? मैं चला जाऊंगा तो बहुत याद आऊंगा, यह संदेश पहले जनता के लिए थे । अब नेतृत्व के लिए नजर आ रहे हैं। अपनी शतरंज का दूसरा पांसा फेंकते शिवराज ने कल फिर एक साथ दो तीर छोड़े। पहला यह कि मैं न मुख्यमंत्री पद का दावेदार था और न हूं, पार्टी का कार्यकर्त्ता हूँ और प्रधानमंत्री की 2024 की जीत की माला मे 29 कमल पुष्प लगाने हेतु कार्य करने मैं छिंदवाड़ा जाऊंगा, पिछली बार हारी लोकसभा सीट भी दिलवाऊंगा । शिवराज का यह बयान जहां मोदी के प्रति निष्ठा का संदेश है, वहीं इस बात का भी संदेश है कि मुझे नजरअंदाज करना आसान नहीं , वो भोपाल बैठकर दिल्ली मे चल रहे सियासी रंगमंच का आनंद लेते हुए उन्होंने बेफिक्री जताते हुए दो दिन पहले परिवार के साथ रेस्टोरेंट में भोजन किया और ऐलान भी किया कि मैं दिल्ली नहीं जाऊंगा और हकीकत यह है कि शिवराज दिल्ली इसलिए नहीं जा रहे हैं, क्योंकि उनकी बिसात कहीं और जमी है… गोटियां कहीं और फिट हैं और शतरंज वो यहां से खेल रहे हैं। सब कुछ एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है, सहजता का संदेश… सत्ता की अनदेखी…मोदी के प्रति आस्था की भावना का प्रदर्शन और दावेदारों से दूरी एक साथ चले गए वो मोहरे हैं, जिसमें शतरंज की बिसात में उनकी शह और विरोधियों की मात होगी ।

मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान मे सरकार बनाने की कवायद तेज़, प्रहलाद पटेल, नरेंद्र सिंह तोमर सहित विधानसभा लड़े 10 सांसदों का संसद और मंत्रिमंडल से इस्तीफ़ा

दिल्ली । मध्यप्रदेश समेत सभी 3 राज्यों मे सरकार बनाने की कवायद तेज़ हो गयी है राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश मे चुनाव लड़कर विधायक बनने वाले 10 सांसदों ने संसद की सदस्यता से इस्तीफ़ा दे दिया है, इस्तीफ़ा देने वालो मे मध्यप्रदेश से केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल, नरेन्द सिंह तोमर सांसद रीति पाठक, राकेश सिंह उदयप्रताप सिंह राजस्थान से राज्यवर्धन सिंह राठौर, दिया कुमारी, किरोड़ी लाल मीणा छत्तीसगढ़ से गोमती साईं और अरुण साव अभी कुछ और इस्तीफे दिए जा सकते हैँ गौरतलब है कि चार राज्यों मे भाजपा ने अपने 21 सांसदों को विधानसभा लड़ाया था अब भाजपा आलाकमान ने चुनाव जीते हुए सांसदों से मुलाक़ात की और और उन्हें संसद की सदस्यता छोड़ने का फैसला लिया गया पार्टी अध्यक्ष जे पी नड्ढा के साथ सभी इस्तीफ़ा देने स्पीकर के पास पहुंचे,इस्तीफ़ा देने के बाद केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल से मुख्य्मंत्री बनने के सवाल पर चुप्पी साधते हुए उन्होंने मुसुकराते हुए मंत्रिमंडल से इस्तीफ़ा देने की बात कह कर चले गए, जल्द ही भाजपा की तरफ से कुछ चौकाने वाले नामों की घोषणा हो सकती है

राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ मे सीएम और डिप्टी सीएम के फॉर्मूले पर भा ज पा मे विचार.. सूत्र.

In Rajasthan, Madhya Pradesh, and Chhattisgarh, discussions are underway on the formula for the Chief Minister and Deputy Chief Minister, according to sources. *उदित नारायण* हाल मे सम्पन चुनावों मे तीन बड़े राज्यों मे भारी बहुमत हासिल कर भा ज पा अब 2024 के लोकसभा पर निगाहें जमा चुकी है, उसी के मद्देनज़र सामाजिक, जातिगत और क्षेत्रीय समीकरण के अनुरूप ही राज्यों मे मुख़्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री का चयन करने की मैराथन बैठक चल रही है, बात करें अगर मध्य प्रदेश की तो शिवराज सिंह चौहान अभी रेस मे सबसे आगे नजर आ रहे हैँ उनके अलावा बड़े ओ बी सी नेता प्रहलाद पटेल, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र तोमर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कैलास विजयवर्गी, वी डी शर्मा के साथ कांग्रेस से भाजपा मे आये केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के नामो का बाजार गर्म है, सूत्रों की माने तो मुख्यमंत्री के साथ इस बार मध्य प्रदेश मे 2 उप मुख्यमंत्री भी बनाये जा सकते हैँ, चर्चा है की मुख्यमंत्री ओ बी सी समाज से ही होगा शिवराज अपनी दावेदारी को लेकर कह चुके कह चुके हैँ की पार्टी जो जिम्मेदारी देगी वह उसे पूरी जिम्मेदारी से निभाएंगे,बात राजस्थान की है तो राजस्थान मे अभी भी वसुंधरा राजे सबसे मजबूत दावेदार मानी जा रही हैँ लेकिन सूत्र बताते हैँ कि भाजपा नेतृत्व कोई चौकाने वाले निर्णय ले सकती है कई दावेदारों मे मजबूती से एक नाम पार्टी के मजबूत, संगठन मे मजबूत पकड़ वाले ओम माथुर का चर्चा मे आ रहा है मगर क्या लगभग 60 सीटों पर मजबूत पकड़ रखने वाली वसुंधरा राजे को मनाना आसान होगा चर्चा यहाँ भी मुख्यमंत्री के साथ एक उप मुख़्यमंत्री बनाने की भी है ,वही छत्तीसगढ़ मे पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह की मजबूत दावेदारी के बीच छत्तीसगढ़ को पहली महिला मुख्यमंत्री मिलने की उम्मीद है इनमे रेणुका सिंह और डॉ सरोज पाण्डेय का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है पार्टी की राज्य इकाई के अध्यक्ष साव भी दावेदारों मे एक है उम्मीद यहाँ भी मुख्यमंत्री के साथ एक उपमुख्यमंत्री बनाने की है.भाजपा नेतृत्व हर आगामी चुनाव का गुणा गणित पहले ही लगा कर फैसला लेता है इन सरकारों के गठन मे भी उसकी झलक दिखने की पूरी उम्मीद है भाजपा ने पूरा चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे और गृहमंत्री अमित शाह के प्रवंधन मे लड़ा है तो जाहिर है सरकार बनाने के फैसले मे प्रधानमंत्री की भूमिका अहम होंगी अब इंतजार भाजपा के संसदीय बोर्ड की बैठक का है

मोदी-शाह के समीकरण में फिट बैठते हैं ये नेता, CM के लिए प्रहलाद सिंह पटेल की चर्चा तेज़.

Leaders align well with the Modi-Shah equation; discussions about Prahlad Singh Patel for the Chief Minister position are gaining momentum. उदित नारायण भोपाल। मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के बाद अब मुख्यमंत्री के नाम पर चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि यहां भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर ही चुनाव लड़ा. अगले सीएम फेस के रूप में शिवराज सिंह चौहान पीछे ही रहे. बहरहाल अगले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ही होंगे या नहीं होंगे इस बात की चर्चा सियासी गलियारों मे तेज़ हो गयी है, क्योंकि यहां भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर ही चुनाव लड़ा. अगले सीएम फेस के रूप में शिवराज सिंह चौहान पीछे ही रहे. बहरहाल अगले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ही होंगे या नहीं होंगे, यह तो आने वाले एक दो दिनों में पता चल जाएगा, लेकिन इससे पहले सियासी गलियारों में नए चेहरों पर काफी चर्चा हो रही है. आगामी मुख्यमंत्री के रूप में जिन नामों पर चर्चा हो रही है, उनमें एक नाम प्रहलाद सिंह पटेल का भी है. पटेल को मध्य प्रदेश के अगले मुख्यमंत्री का प्रबल दावेदार माना जा रहा है. उनके नाम की चर्चा उस वक्त ही शुरू हो गई थी, जब उन्हें भाजपा ने नरसिंहपुर विधानसभा सीट से प्रत्याशी बनाया था. अब प्रहलाद सिंह पटेल चुनाव जीत गए हैं. उन्होंने कांग्रेस के लखन सिंह पटेल को 31310 वोटों से हराया है प्रहलाद पटेल की गिनती मध्य प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं में होती है. वे केंद्रीय नेतृत्व के खास माने जाते हैं. इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि जब से दिल्ली में नरेंद्र मोदी की सरकार आई है प्रहलाद पटेल के पास कोई ना कोई मंत्रालय रहा है. साथ ही साथ अगर जातिगत समीकरण की बात करें तो वह ओबीसी वर्ग से आते हैं. ओबीसी में भी लोधी जाति से आते हैं,  पटेल की गिनती मध्य प्रदेश भाजपा के सीनियर नेताओं में होती है. पटेल ने पहले लोकसभा चुनाव 1989 में जीता था. उसके बाद 1996, 1999, 2014 और 2019 को मिलाकर कुल 5 लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं. मजे की बात यह है कि पटेल 2023 में पहली बार विधानसभा चुनाव जीते है. पटेल के पास सियासत का लंबा अनुभव है और उनकी साफ सुथरी छवि, संगठन मे मजबूत पकड़ तथा उमा भारती के बाद प्रदेश के सबसे बड़े लोधी नेता और केंद्रीय नेतृत्व मे मजबूत पकड़ उनको अग्रिम पंक्ति मे खड़ा करती है सूत्रों की माने तो ओ बी सी मे शिवराज सिंह के बाद पटेल एकमात्र सर्वमान्य नेता है, अपने समाज के अतिरिक्त पटेल की आदिवासियों और पिछडो मे मजबूत पकड़ मानी जाती है आगामी 2024 के लिए पटेल की ताजपोसी मध्य प्रदेश के साथ साथ पडोसी राज्यों मे भी भा ज पा को मजबूती दे सकती है

लोकसभा चुनाव से पहले चलाएगी अभियान ‘हर बूथ पर मोदी’

The campaign ‘Modi at Every Booth’ will be launched before the Lok Sabha elections. 29 की 29 लोकसभा सीटें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की झोली में डालने का प्रयास करेंगे उदित नारायण भोपाल। भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनाव के लिए हर बूथ पर मोदी अभियान चलाने की दिशा में काम करना शुरू कर दिया है। अब हमारा संकल्प है कि लोकसभा चुनावों में टास्क को पूरा करने के लिए बेहतर काम किया जाएगा। लोकसभा चुनाव में हम सब मेहनत परिश्रम से सभी बूथों को जीतेंगे। प्रदेश के 64 हजार 523 बूथ पर मोदी अभियान चलेगा और इसकी शुरुआत कर दी गई है। यह बात भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद विष्णुदत्त शर्मा ने सोमवार को प्रदेश कार्यालय में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कही। प्रदेश अध्यक्ष शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अमित शाह की कुशल रणनीति का आशीर्वाद के साथ संपूर्ण भारतीय जनता पार्टी का मप्र का हमारा नेतृत्व हम सब मिलकर के टीम स्पीड के साथ 29 की 29 लोकसभा सीटें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की झोली में डालने का प्रयास करेंगे। हारने वाले बूथों की होगी समीक्षा: प्रदेश अध्यक्ष शर्मा ने कहा कि हम समीक्षा करने के बाद जिन बूथों पर भारतीय जनता पार्टी चुनाव हारी है, उन बूथों पर हम कैसे चुनाव जीतेंगे और जिन बूथों पर हम कम मतों से जीते हैं उनमें 10 प्रतिशत वोट शेयर कैसे बढ़ेगा, इस पर काम किया जाएगा। जनता ने हमें आशीर्वाद दिया प्रदेश अध्यक्ष शर्मा ने कहा कि डबल इंजन की सरकार ने जो विकास और गरीब कल्याण का काम किया। उस विकास और गरीब कल्याण की गति को सुचारू बनाए रखने और विकसित मध्य प्रदेश को स्वर्णिम मध्य प्रदेश बनाने के हमारे संकल्प को पूरा करने के लिए जनता ने हमें आशीर्वाद दिया है। भारतीय जनता पार्टी की सरकार विकास और गरीब कल्याण का काम करती आई है और आगे भी करती रहेगी। कार्यकर्ताओं ने आदर्श कार्यकर्ता के तौर पर काम कियाविष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि कार्यकर्ताओं ने आदर्श कार्यकर्ता के तौर पर अपनी भूमिका निभाकर शानदार काम किया है। पन्ना प्रमुख से लेकर के पन्ना समिति, बूथ समिति लेकर करके मंडल के कार्यकर्ता और जिले से लेकर प्रांत की टीम मिलकर एक साथ जुड़कर काम किया है। जो चुनाव किसी कारणवश बहुत कम अंतर से हार गए हैं पार्टी उनके साथ खड़ी है। शर्मा ने कहा कि असफलता यह साबित करती है की सफलता के प्रयास हमें और करने की जरूरत है।

लाड़ली बहनों ने कर दी शिवराज भइया की राह आसान।

भाजपा का 150 प्लस का दावा सच साबित होता हुआ नजर आ रहा है।कांग्रेस पार्टी और कमलनाथ के वादों पर जनता ने नहीं किया भरोसा। उदित नारायण भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव की मतगणना जैसे जैसे आगे बढ़ रही है। वैसे ही प्रदेश के चुनाव परिणामों की तस्वीर साफ होती जा रही है। हालांकि अभी पूरी तरह किसी ठोस निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी लेकिन अभी तक की मतगढना के दौरान मिल रहे रुझानों ने भाजपा नेताओं के 150 से अधिक सीटों पर चुनाव जीतने के दावे को सच कर दिया है और मध्य प्रदेश की जनता ने स्पष्ट कर दिया है की मध्य प्रदेश की आम जनता भाजपा के साथ है। इसके साथ ही सीएम शिवराज सिंह चौहान की लाड़ली बहनों ने भी अपने भाई की जीत के लिए मतदान में हिस्सा लिया और चुनाव परिणाम को भाजपा के पक्ष में लाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। मतदान के समय से लेकर बीती रात तक सभी राजनेतिक पार्टियों के नेताओं और कार्यकर्ताओं के अपनी अपनी पार्टी की जीत और सरकार बनाने को लेकर बड़े बड़े दावे किए जा रहे थे। इस चुनाव प्रक्रिया के दौरान नेता अपने समर्थकों का मन समझने में ही मात खा रहे थे, तो जनता का मन पढ़ना तो वैसे भी आसान नहीं था और इसी का परिणाम है कि सभी के दावे रखे रह गए। जनता ने यह साफ कर दिया है कि किसी के भी कहने से कुछ नहीं होता जो कुछ होता है वह आम जनता की इच्छा से होता है और जनता ने भाजपा को अपना मत रूपी आशीर्वाद और समर्थन देकर इस बात को स्पष्ट कर दिया है। अभी तक की मतगणना में यह तो साफ हो गया है कि मध्य प्रदेश में फिर से भाजपा सरकार बनाने के लिए तैयार है बस अब देखना यह है की कुल कितनी सीटें स्पष्ट बहुमत के साथ भाजपा के खाते में आती हैं, वहीं दूसरी बात यह भी ध्यान देने योग्य है की मध्य प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस के दिग्गज नेता जो चुनाव मैदान में उतरे थे उनमें से किसे जनता का आशीर्वाद मिलेगा और कौन क्लीन बोल्ड होगा। हम आपको याद दिला दें की सहारा समाचार ने मतदान के पूर्व ही स्पष्ट रूप से दावा किया था कि इस बार के चुनाव में दोनों ही दलों के द्वारा मैदान में उतारे गए दिग्गज नेताओं को लेने के देने पड़ेंगे। साथ ही कई परंपरागत सीटों पर चौंकाने वाले ऐसे परिणाम सामने आएंगे जिनका किसी ने भी अनुमान नहीं लगाया होगा। दूसरे दावे के अनुसार मध्य प्रदेश में फिर से भाजपा की सरकार बनने के चांस 65% और कांग्रेस पार्टी के सत्ता में आने के चांस 35% हैं। सहारा समाचार के यह दोनों ही दावे सत्य होते नजर आ रहे हैं। चुनाव परिणाम की तस्वीर साफ हो चुकी है परिणाम भी सामने आने लगे हैं। कुछ सीटों पर हार जीत भी डीक्लियर हो चुकी है। कुछ देर की बात है बहुत जल्द पूर्ण चुनाव परिणाम सामने आ जायेंगे।

CG .सीटों पर आए रुझान में भारतीय जनता पार्टी 24 सीटों पर तो कांग्रेस 22 सीटों पर लीड कर रही है।

In the trend of seats in Chhattisgarh, the Bharatiya Janata Party (BJP) is leading on 24 seats, while the Congress is leading on 22 seats. बीजेपी : 24 आगे, कांग्रेस : 22 आगे

पार्टी कार्यकर्ता कांग्रेसियों की बेईमानी से सतर्क रहकर मतगणना की प्रक्रिया में सूक्षमता से नजर रखें.

Stay vigilant against the dishonesty of party workers and ensure efficiency in the electoral process. भोपाल की सभी 6 विधानसभा के पोलिंग एजेंट का प्रशिक्षण वर्ग प्रदेश कार्यालय में संपन्न भोपाल। भारतीय जनता पार्टी की जिले की इकाई ने भोपाल जिले के मतगणना पोलिंग एजेंटों को मतगणना के दौरान बरती जाने वाली सतर्कता आदि को लेकर मतगणना एजेंटों को प्रशिक्षित किया। यह प्रशिक्षण शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी प्रदेश कार्यालय में संपन्न हुआ। इस मौके पर प्रदेश उपाध्यक्ष व उत्तर विधानसभा के प्रत्याशी आलोक शर्मा, पार्टी प्रदेश महामंत्री व दक्षिण पश्चिम के प्रत्याशी भगवानदास सबनानी, कैबिनेट मंत्री नरेला विधानसभा के प्रत्याशी विश्वास सारंग, प्रदेश मंत्री रजनीश अग्रवाल, पार्टी के जिला अध्यक्ष सुमित पचौरी, एसएस उप्पल एवं महापौर श्रीमती मालती राय ने आवश्यक दिशा निर्देश दिए। जिला अध्यक्ष पचौरी ने प्रशिक्षण वर्ग को संबोधित करते हुए कहा हमें मतगणना की टेबल पर विशेष तौर पर ध्यान रखना है। खासतौर पर बैलेट पेपर सरकारी कर्मचारियों की ओर से दिया गया वोट उसको अच्छी तरह देखना है। उन्होंने कहा कि आप सभी ने चुनाव में जो निरंतर परिश्रम किया है। उसका प्रतिफल प्राप्त करने का समय आ गया है। आप सभी मतगणना अभिकर्ता तय समय और मानकों के साथ मतगणना स्थल पर अपनी निर्धारित टेबल पर उपस्थित रहें। हम सभी को मतगणना की प्रक्रिया में सूक्षमता से नजर रखेंगे तथा मतगणना समाप्त होने की प्रक्रिया के बाद ही अपनी नियत जगह से उठेंगे। विधानसभा चुनाव में भारी विजय के रास्ते पर चल पड़ेनेताओं ने कहा कि आप सभी के अथक परिश्रम, हमारी सरकारों के काम और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विश्वसनीयता के कारण विधानसभा चुनाव में भारी विजय के रास्ते पर चल पड़े हैं। मतगणना के दौरान की आवश्यक कार्यों की विस्तृत जानकारी भी दी। उन्होंने कहा कि हमारे कार्यकर्ताओं ने पूरे चुनाव अभियान में काफी परिश्रम किया है। हमारी सरकारों के काम को भी व्यापक समर्थन मिला है। इसी कारण से कांग्रेस के लोग बौखलाए हुए हैं। वे मतगणना के दौरान बेईमानी करने के भी प्रयास करेंगे, लेकिन हमारा कार्यकर्ता सक्षम, निर्भय और सतर्क है। हम कांग्रेसियों की हर चाल का मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम हैं। कांग्रेस के कुत्सित प्रयासों के बावजूद हम मतगणना की पारदर्शिता को प्रभावित नहीं होने देंगे। हमारे कार्यकर्ता कुछ भी गड़बड़ होने पर चुप नहीं बैठेंगे, बल्कि हर बात को चुनाव आयोग के संज्ञान में लाएंगे।

जेपी नड्डा ने शिवराज-सिंधिया के साथ चुनाव नतीजों पर की घंटों मंत्रणा.

JP Nadda deliberated for hours with Shivraj Singh Chouhan and Jyotiraditya Scindia on the election results. राजनीतिक गलियारों में तेज हुई चर्चाएं मतगणना से पूर्व भाजपा अध्यक्ष के मप्र पहुंचने पर राजनीतिक गलियारे में चर्चाएं तेज ग्वालियर। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा मतगणना से पहले शुक्रवार को मध्य प्रदेश के ग्वालियर-चंबल अंचल में पहुंचे हैं। यहां उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के साथ होटल में घंटों चर्चा की। बताया गया है कि राज्य के चुनाव नतीजों को लेकर मंत्रणा की गई है। राजनीतिक गलियारों में तेज हुई चर्चाएं मध्य प्रदेश सहित चार राज्यों के तीन दिसंबर को आने वाले विधानसभा चुनाव के नतीजों से पहले भाजपा अध्यक्ष की ग्वालियर में मौजूदगी को लेकर राजनीतिक गलियारे में चर्चाएं तेज हैं। यहां सिंध विहार स्थित होटल उषा किरण पैलेस में तीन घंटे से ज्यादा चली बैठक में बड़े नेताओं की लंबी चर्चा हुई। सिंधिया के आमंत्रण पर शाही महल जयविलास पैलेस पहुंचे नड्डा नड्डा ने सिंधिया के आमंत्रण पर उनके शाही महल जयविलास पैलेस में पहुंचकर भोज भी किया और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह और सिंधिया के साथ दतिया जाकर पीतांबरा पीठ के दर्शन भी किए। नड्डा रात्रि विश्राम ग्वालियर में ही करेंगे। पार्टी की ओर से उनके अगले दिन के कार्यक्रम की जानकारी नहीं दी गई है।भाजपा जिंदाबादः सीएम शिवराजमुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ग्वालियर में एक्जिट पोल को लेकर किए सवाल पर कहा- भाजपा जिंदाबाद। एयरपोर्ट पर शिवराज ने मीडिया से कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के नेतृत्व में भाजपा आगे बढ़ रही है, मोदीजी जन-जन के मन में हैं, उनका स्नेह सदैव प्रदेश को मिलता रहा है। डबल इंजन की सरकार ने प्रदेश में प्रगति और विकास किया है। वहीं, सिंधिया ने कहा कि 48 घंटे का इंतजार है, जनता ने भाजपा को आशीर्वाद दिया है। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने जा रही है।

मध्य प्रदेश के एग्जिट पोल पर बरसे कमलनाथ…झूठ फैला रहे एग्जिट पोल.

Kamal Nath lashes out at the exit polls in Madhya Pradesh, claiming that false information is being spread. एग्जिट पोल एजेंसियां चुनाव अधिकारियों पर दबाव बनाना चाहती TV भाजपा मध्य प्रदेश में चुनाव हारेगी *उदित नारायण* भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता कमलनाथ ने शुक्रवार को भाजपा की जीत की भविष्यवाणी करने वाली एजेंसियों के एग्जिट पोल के नतीजों पर सवाल उठाया। कमलनाथ ने कहा कि एग्जिट पोल एजेंसियां झूठा माहौल बना रही हैं। भाजपा मध्य प्रदेश में चुनाव हारेगी। उन्होंने कहा कि कुछ एग्जिट पोल एजेंसियां चुनाव अधिकारियों पर दबाव बनाना चाहती हैं। अपने एक्स हैंडल पर एक वीडियो में उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं को 3 दिसंबर को निष्पक्ष मतगणना सुनिश्चित करनी चाहिए। तीन दिसंबर को भाजपा की सािजश सफल नहीं होगीकमलनाथ ने कहा कि सभी कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरना चाहिए। भारतीय जनता पार्टी चुनाव हार गई है। कुछ एग्जिट पोल जानबूझकर बनाए गए हैं, ताकि कांग्रेस कार्यकर्ता निराश हो जाएं और गलत माहौल बनाकर अधिकारियों पर दबाव बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि यह साजिश सफल नहीं होगी। उन्होंने कहा कि सभी कांग्रेस पदाधिकारियों को मतगणना के दिन के लिए तैयार रहना चाहिए। हम सभी जीतने के लिए तैयार हैं और सभी एकजुट हैं। यदि आपको (पार्टी कार्यकर्ताओं को) कोई समस्या महसूस होती है तो कृपया सीधे मुझसे बात करें या तीन दिसंबर को प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) कार्यालय को सूचित करें। कांग्रेस पार्टी सत्ता में आने वाली है। क्या कहते हैं एग्जिट पोल?बता दें, कई एग्जिट पोल में बीजेपी की जीत की भविष्यवाणी की गई है। दैनिक भास्कर ने बीजेपी को 95-115 सीटें और कांग्रेस को 105-120 सीटें मिलने का अनुमान लगाया है। इंडिया टुडे-एक्सिस माई इंडिया ने बीजेपी को 140-162 सीटें और कांग्रेस को 70-89 सीटें दीं। टुडेज़ चाणक्य ने कहा कि बीजेपी को 151 सीटें मिलेंगी और कांग्रेस को 74 सीटें मिलेंगी, जन की बात एग्जिट पोल ने भविष्यवाणी की थी कि बीजेपी को 100-123 सीटें मिलेंगी और कांग्रेस को 102-125 सीटें मिलेंगी, रिपब्लिक टीवी-मैट्रिज ने बीजेपी को 118-130 सीटें दी हैं और कांग्रेस 97-107 सीटें दी हैं। अन्य एग्जिट पोल ने भी इसी तरह के नतीजों की भविष्यवाणी की है। इस बीच, सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बीजेपी राज्य में सत्ता बरकरार रखेगी। नतीजे ती दिसंबर को घोषित किए जाएंगे।

एग्जिट पोल में बीजेपी को भारी बहुमत, केंद्रीय मंत्री पटेल ने कहा- 2003 जैसी रिकॉर्ड जीत दोहराई जा सकती है.

Exit polls, BJP is projected to win by a significant margin; Union Minister Patel said – a record victory like 2003 can be repeated. इस बार चुनाव आयोग की गाइडलाइंस की वजह से एग्जिट पोल पांचों राज्यों की चुनावी प्रक्रिया पूरी होने के बाद जारी किए गए । 30 नवंबर को वोटिंग की प्रक्रिया संपन्नहोने के बाद जो एग्जिट पोल्स जारी हुए, जिसमें भाजपा को बंपर बहुमत मिलते दिख रहा है। देश की प्रमुख 8 न्यूज एजेंसियों ने सर्वे कर एग्जिट पोल जारी किए और पतालगाया कि मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना व मिजोरम में किसकी सरकार बन सकती है। वहीं सर्वे पर केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि मध्यप्रदेश में 2003 जैसे परिणाम दोहराते हुए दिखते हैं। एग्जिट पोल में बीजेपी को बंपर सीटें ज्यादातर न्यूज एजेंसियों के एग्जिट पोल में बीजेपी के पक्ष में परिणाम आते नजर आ रहे हैं। अगर ये सच साबित हुए तो मध्यप्रदेश व राजस्थान में बीजेपी औरछत्तीसगढ़ व तेलंगाना में कांग्रेस की सरकार बनती दिख रही है। इसके साथ ही मिजोरम में हंग असेंबली के आसार हैं। बात करें मध्यप्रदेश की तो एक दो एग्जिटपोल छोड़कर ज्यादातर बीजेपी को काफी बढ़त के साथ बहुमत में आता दिखा रहे है मप्र में भाजपा की फिर वापसी? Exit Polls 2023 में लगभग सभी न्यूज एजेंसियों ने मध्यप्रदेश में भाजपा सरकार बनने के आसार जताए हैं।बात करें इंडिया टुडे एक्सिस सर्वे की तो मध्यप्रदेश में भाजपा को 140 से 162, कांग्रेस को 68-90 और अन्य को 3 सीट मिलते दिख रही हैं।यानी कांग्रेस को यहां भारी नुकसान होने की संभावना है। टुडेज चाणक्य न्यूज 24 के सर्वे में भाजपा को 151, कांग्रेस को 74 व अन्य को 0 सीटेंमिलने के आसार बताए जा रहे हैं। वहीं जन की बात सर्वे में भाजपा को 100 से 123, कांग्रेस को 102 से 125 व अन्य को 5 सीटें मिलती दिख रही हैं।वहीं टाइम्स नाउ ईटीजी के सर्वे में भाजपा को 106 से 116, कांग्रेस को 110 से 124 और अन्य को 10 सीटें मिलती दिख रहे हैं। इसी प्रकार रपब्लिकटीवी के सर्वे में भाजपा को 118 से 130, कांग्रेस को 97 से 107 और अन्य को 0 से 2 सीटें मिलने की संभावना बताई जा रही है। मप्र में सरकार बनाने के लिए कितनी सीटें चाहिए? मध्यप्रदेश में कुल 230 विधानसभा सीटें हैं, ऐसे में यहां सरकार बनाने के लिए कम से कम 116 सीटें किसी भी पार्टी को चाहिए। बात करें एग्जिटपोल्स की तो ज्यादातर एग्जिट पोल्स बीजेपी को बहुमत के आंकड़े के करीब या उससे ज्यादा दिखा रहे हैं। कुछ अन्य सर्वे कांग्रेस को भी इस आंकड़ेके करीब दिखा रहे हैं। बात करें पिछले चुनाव की तो बीजेपी को 2018 में 109 सीटें मिली थीं और कांग्रेस को 114, इसके बाद कांग्रेस की सरकार गिर गई थी और बीजेपी सत्ता में आई। मप्र में 2003 जैसा प्रदर्शन करेगी बीजेपी? एग्जिट पोल्स पर पार्टियों की मिली जुली प्रतिक्रिया आ रही हैं, एक ओर बीजेपी के पक्ष में पोल्स आते देख वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंहनाखुश नजर आए। उन्होंने पोल्स पर टिप्पणी करते हुए कहा कि टेलीविजन से नहीं प्रदेश-विजन से देश चलता है। उन्होंने दावा किया किमप्र में कांग्रेस 130 सीटों के साथ सरकार बनाएगी। वहीं सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रदेश में कोई कांटे की टक्कर नहीं है,भाजपा भारी बहुमत से जीत रही है। इसी बीच बीजेपी के कद्दावर नेता केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि बीजेपी 2003 के चुनाव जैसाप्रदर्शन करती नजर आ रही है। उन्होंने कहा कि मैंने 2003 के चुनाव को बेहद करीब से देखा है और मैं साफ देखता हूं कि 2003 के परिणाम 2023 में आते दिखते हैं।बता दें कि 2003 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी 173 सीटों के बंपर बहुमत के साथ सत्ता में आई थी, वहीं कांग्रेस को केवल 38 सीटें ही मिली थीं। बता दें कि 3 दिसंबरको मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के परिणाम आने हैं।

पीएम मोदी के स्वागत में ‘भारत माता की जय’ के नारों से गूंजा दुबई एयरपोर्ट.

Bharat Mata Ki Jai’ slogans echoed at Dubai Airport during the welcome of Prime Minister Modi. पीएम मोदी संयुक्त अरब अमीरात में वर्ल्ड क्लाइमेट एक्शन शिखर सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करेंगे और तीन उच्च स्तरीय कार्यक्रमों में भाग लेंगे जिनमें से दो की सह-मेजबानी भारत द्वारा की जाएगी. दुबई: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28वें कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज (COP28) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए गुरुवार रात दुबई पहुंचे. वह 1 दिसंबर को होने वाले COP28के वर्ल्ड क्लाइमेट एक्शन शिखर सम्मेलन में भाग लेंगेजैसे ही पीएम मोदी दुबई हवाई अड्डे पर उतरे, एक होटल के बाहर इंतजार कर रहे भारतीय प्रवासियों ने ‘सारे जहां से अच्छा’ गाया और ‘भारत माता की जय’ के साथ-साथ ‘वंदे मातरम’ के नारे लगाए. दुबई पहुंचने के बाद, पीएम मोदी ने अपने सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि वो शिखर सम्मेलन की कार्यवाही की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य एक बेहतर प्लैनेट बनाना है.उन्होंने कहा, “सीओपी-28 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए दुबई में उतरा हूं. शिखर सम्मेलन की कार्यवाही का इंतजार कर रहा हूं, जिसका उद्देश्य एक बेहतर प्लैनेट बनाना है.” पीएम मोदी संयुक्त अरब अमीरात में वर्ल्ड क्लाइमेट एक्शन शिखर सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करेंगे और तीन उच्च स्तरीय कार्यक्रमों में भाग लेंगे, जिनमें से दो की सह-मेजबानी भारत द्वारा की जाएगी. इसके अलावा, विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता ने एक्स पर एक वीडियो मैसेज शेयर किया, जिसमें कल के उनके एक्शन-पैक कार्यक्रम का ओवरव्यू दिया गया. उन्होंने कहा कि वर्ल्ड क्लाइमेट एक्शन समिट COP28 का उच्च-स्तरीय खंड है, यह कहते हुए कि यह सुबह इस उच्च-स्तरीय जलवायु कार्यक्रम के उद्घाटन कार्यक्रमों के साथ शुरू होगा. उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री अपना संबोधन देंगे. लेकिन जलवायु वित्त में परिवर्तन पर संयुक्त अरब अमीरात द्वारा आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में भाग लेने के बाद, प्रधानमंत्री संयुक्त अरब अमीरात केसाथ एक कार्यक्रम की मेजबानी करेंगे, जो हरित क्रेडिट पर ध्यान देगा, ये एक वो पहल है, जिसमें प्रधानमंत्री की व्यक्तिगत रुचि है. बागची ने आगे कहा कि इस दौरान दिन में बड़ी संख्या में द्विपक्षीय कार्यक्रम होंगे. दुबई में COP28 जलवायु वार्ता से पहले अपने डिपार्चर नोट में, पीएम मोदी ने ये भी कहा कि G20 नई दिल्लीनेताओं की घोषणा में जलवायु कार्रवाई और सतत विकास पर ठोस कदम भी शामिल थे.

अधिकतर चैनल्स जमीनी हकीकत से कोसों दूर हैं.

Most channels are far away from ground reality. आइए आपको उन सीटों की जानकारी देते है जहाँ मुकाबला त्रिकोणीय है या चतुष्कोणीय है,यह सीटें कोई नहीं बता सकता कि कौन जीतेगा,जहाँ प्रत्याशी की हार जीत तीसरे चौथे प्रत्याशी को मिले वोट पर निर्भर होगी,कई जगह यह गैर भाजपा गैर कांग्रेस उम्मीदवार जीतने की ताकत भी रखते हैं । *उदित नारायण* भोपाल।पहले हम बसपा की Top performing सीट्स से शुरुआत करते हैं 1-दिमनी2-मुरैना3-रेगांव4-नागौद5-सतना6-गुढ़7-सिमरिया8-राजनगर9-पथरिया10-गोहद11-लहार12-भिंड13-बारासिवनी-अजाबशास्त्री(लोधी)14-सेंवढ़ा-दामोदर यादव-भीम आर्मी आदिवासी बहुल सीटे जो GGP के असर की हैं15-परसवाड़ा-कंकर मुंजारे16-बिछिया-कमलेश टेकाम17-जबेरा-विनोद राय18-शाहपुरा-अमानसिंह पोर्ते19-मानपुर-राधेश्याम काकोड़िया20-अमरवाड़ा-देव रावेन भलावी21-लखनादौन-सन्तर भलावी22-सिवनी-रंजीत वासनिकऐसी सीटें जहाँ जयस से जुड़े युवकों ने अच्छी चुनोती देकर मुकाबला त्रिकोणीय बनाया है23-सैलाना-कमलेश्वर डोडियार24-महू-प्रदीप मावी25-रतलाम ग्रामीण-डॉ अभय ओहरी26-पेटलावद- इंजीवालूसिंह गामड़27-नेपानगर-बिल्लोरसिंह जमरा28-भगवानपुरा-मोहन किराड़े29-मनावर-लालसिंह बर्मन(आप/जयस)30-सरदारपुर-राजेन्द्र गामड़आप पार्टी जिन सीटो पर प्रभावी है31-सिंगरौली-रानी अग्रवाल32-बंडा सुधीर यादव33-चाचौड़ा-ममता मीणाइसके अलावा कुछ निर्दलीय है जिन्होंने मुकाबले को त्रिकोणीय बनाया है34-कटंगी-केसर बिसेन/प्रशांत मेश्राम35-भीकनगांव-मोहन पटेल36-पानसेमल-रमेश चौहान37-जोबट-माधोसिंह डाबर/रिंकुबाला डाबर(जयस)38-बुरहानपुर से हर्ष चौहान/AIMIM उम्मीदबार नफीस मंशा खान39-होशंगाबाद-चौरे40-सिवनी मालवा-ओम रघुवंशी/सुनील गौरहीरा अलावा के नेशनल जयस ने भी 4 प्रत्याशी उतारे है41-भैंसदेही-संदीप धुर्वे42-घोड़ाडोंगरी-स्मिता राजा धुर्वे43-टिमरनी-रमेश मर्सकोले44-बड़वाणी-संदीप नरगावे45-राजपुर सुनील सोलंकीइसके अलावा लगभग 2/3सीटों पर समाजवादी पार्टी प्रत्याशी निर्णायक वोट लाएंगे46-निवाड़ी-मीरा दीपक यादव47-टीकमगढ़ से सपा प्रत्याशी48-बहोरीबंद से शंकर महतो

बरगी अनुभाग के सीएसपी सुनील नेमा का नहीं छूट रहा थानेदारी से मोह.

Bargi subdivision CSP Sunil Nema is not relieved from the police station due to attachment. थाने के स्टाफ से करवा रहे खुलेआम वसूली, नहीं मिलने पर थाने में कर देते हैं बंद होटल संचालकों, ठेकेदारों और चरगंवा सड़क बनी उनके लिए कमाऊपूत, साहब की मनमानी से तिलवारा थाना का स्टाफ परेशान संतोष तोमर भोपाल। सीएसपी नेमा अपराध पर कंट्रोल करने की बजाय तिलवारा थाने की थानेदारी में खर्च कर रहे ज्यादा ऊर्जा भोपाल। पुलिस विभाग में जमावट से जबलपुर क्षेत्र के बरगी अनुभाग में पदस्थापना पाने में सफल रहे एक सीएसपी सुनील नेमा की मनमानी के खूब चर्चे हैं। उनका कार्यालय के नीचे तल में स्थित तिलवारा थाना से मोह नहीं छूट रहा है। इन दिनों वे थाना से पर्याप्त वसूली नहीं मिलने से वे खासे परेशान हैं। यही वजह है कि वसूली को लेकर वे पुलिस वालों पर अप्रत्यक्ष रूप से रोब झाड़ रहे हैं। दबाव में आकर कुछ पुलिस कर्मी उनके इस विशेष वसूली अभियान को अंजाम देने में लगे हैं। उनके इस कारनामे से पूरा स्टाफ परेशान होना बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार थानांतर्गत क्षेत्र में जब से सीएसपी पदस्थ हुए हैं, तभी से यहां उनकी तानाशाही और मनमानी के नए नए रिकॉर्ड बन रहे हैं। कहा तो ये जा रहा है कि वे क्षेत्र के कई होटल संचालकों को बुलाकर उनसे खूब शुभ-लाभ कर रहे हैं। उन्हें दक्षिणा पर ही भरोसा है। बताया जा रहा है कि बरगी क्षेत्र में लंबे समय से पदस्थ सीएसपी सुनील नेमा अपराध पर कंट्रोल और लोगों को न्याय दिलाने की अपने वे तिलवारा थाने की थानेदारी करने में ज्यादा ऊर्जा खर्च कर रहे हैं। वे अपनी कुर्सी का रोब दिखाते हुए रेत, गिट्टी और मुरूम खदान खोदने में लगे हैं। इसके अलावा ठेकेदारों को खुलेआम धमकी भी दे रहे हैं कि यदि उनका हिस्सा नहीं दिया तो ठेकेदारी निकल जाएगी। उनकी जेसीबी जब्त कर कई गुना वसूली करने में लगे हैं। सूत्रों के अनुसार, सीएसपी सुनील नेमा की हरकतों से टीआई भी ठीक तरीके से काम नहीं कर पा रहे हैं। उनकी ही जी हुजूरी में उनका दिन निकल रहा है। साहब के रोब के कारण स्टाफ में काना-फूसी चलती रहती है, हालांकि वे अपने दर्द किसी को बंया नहीं करते हैं। सबसे बड़ा कमाई का उनका अड्डा चरगंवा रोड बना हुआ है। वे कभी भी इस रोड पर ट्रकों की लाइन लगाकर चेकिंग के नाम पर वसूली करने पहुंच जाते हैं। पांच सितारा होटल में करते हैं नाश्तासीएसपी सुनील नेमा को महंगे से महंगे होटलों में खाना और नाश्ता करने का शौंक है। वे प्रतिदिन अपने बेटे के साथ पास के ही एक पांच सितारा होटल में जिम करने जाते हैं। वहीं बेटे के साथ वेज-नॉनवेज खाना का भी आनंद उठाते हैं। वहीं उनके ऑफिस के सामने एक ढाबा संचालित है। जिसको वसूली में देरी होने पर कभी भी थाने में बुलाकर बैठा िलया जाता है। बता दें, यह खबर अपुष्ट सूत्रों पर आधारित है।

30 साल से जीतते आ रहे केपी सिंह की शिवपुरी में परीक्षा, क्या रहेगा रिजल्ट.

The examination in Shivpuri, which has been won by K.P. Singh for the past 30 years, what will be the result? Special Correspondent- Sahara Samachaar, Shivpuri भोपाल। शिवपुरी जिले की पांच विधानसभा सीटों के लिए 3 दिसंबर को मतगणना का काम होगा। इसको लेकर सभी आवश्यक तैयारियां जिला प्रशासन के द्वारा पूरी कर ली गई हैं लेकिन इसी बीच शिवपुरी विधानसभा सीट पर सबकी निगाहें लगी हुई हैं क्योंकि यहां से कांग्रेस के नेता और पिछले 30 साल से पिछोर विधानसभा सीट से जीतते हुए आ रहे केपी सिंह चुनाव लड़ रहे हैं। इस बार कांग्रेस ने केपी सिंह को पिछोर की बजाय शिवपुरी से टिकट दिया है। पिछोर विधानसभा सीट से पिछले 30 साल से 6 बार से केपी सिंह विधायक बनते हुए आ रहे हैं लेकिन इस बार उनका टिकट बदला गया और उन्हें शिवपुरी विधानसभा में मैदान में उतारा गया है। शिवपुरी विधानसभा क्षेत्र से भाजपा ने उनके खिलाफ देवेंद्र जैन को टिकट दिया है क्योंकिभाजपा की वरिष्ठ नेता यशोधरा राजे सिंधिया अपने स्वास्थ्य कारणों के चलते चुनाव नहीं लड़ रही हैं। यशोधरा राजे सिंधिया द्वारा चुनाव नहीं लड़ने के कारण भाजपा ने भी यहां पर टिकट बदलकर उनकी जगह देवेंद्र जैन को मौका दिया है।भाजपा के गढ़ के रूप में जाना जाती है शिवपुरी सीट-शिवपुरी विधानसभा सीट को भाजपा के गढ़ के रूप में जाना जाता है क्योंकि यहां से पिछले चार बार से विधानसभा चुनाव में भाजपा जीतते हुए आ रही हैं। यशोधरा राजे सिंधिया यहां से चार बार विधायक निर्वाचित हो चुकी हैं इसलिए इस सीट को भाजपा का गढ़ कहा जाता है लेकिन इस बार कांग्रेस के केपी सिंह ने यहां से चुनाव मैदान में उतरकर भाजपा को टक्कर दी है।केपी सिंह हार गए तो टूट जाएगा रिकॉर्ड-पिछोर विधानसभा सीट से 6 बार से विधायक बनते हुए आ रहे केपी सिंह इस बार शिवपुरी में अपना भाग्य आजमा रहे हैं अगर वह यहां से चुनाव हार गए तो उनका लगातार चुनाव जीतने का रिकॉर्ड टूट जाएगा। अगर जीतते हैं तो वह इस रिकार्ड को कायम कर पाएंगे और सातवीं बार वह वह निर्वाचित होंगे। वैसे अभी तक जो अनुमान लगाया जा रहा है उसके अनुसार यहां पर भाजपा के देवेंद्र जैन केपी सिंह पर भारी पड़े क्योंकि देवेंद्र जैन यहां पर केपी सिंह की दबंगई छवि को मुद्दा बनाकर चुनाव लड़ा। इसके अलावा शिवराज सरकार की योजना और लाडली बहना योजना का असर यहां पर देखा जा रहा है। हालांकि 3 दिसंबर को परिणाम सामने आएंगे तब तक सबकी निगाहें इस परिणाम पर ही टिकी हैं।कांग्रेस में टिकट को लेकर चली माथापच्ची-शिवपुरी विधानसभा सीट की टिकट को लेकर कांग्रेस में अंतिम दौर तक माथापच्ची चली। नाम निर्देशन पत्र भरने के अंतिम दौर तक तमाम कयासों के दौर चलते रहे कि यहां से कौन चुनाव लड़ेगा। पहले ऐसा अनुमान लगाया जा रहा था कि भाजपा छोड़कर आए कोलारस विधायक वीरेंद्र रघुवंशी को कांग्रेस टिकट देगी लेकिन उनको टिकट न देकर केपी सिंह को टिकट दिया गया। केपी सिंह को पिछोर की वजह शिवपुरी मैदान में उतारा गया। इसको लेकर कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के बीच कुछ दिनों के लिए बयानबाजी का दौर भी चला लेकिन बाद में मामला साफ हो गया कि उन्हें एक रणनीति के तहत शिवपुरी से उतारा गया है। पिछोर विधानसभा सीट पर भी कांग्रेस में टिकट को लेकर माथापच्ची चली। पूर्व में यहां से केपी सिंह की बजाय कांग्रेस ने शैलेंद्र सिंह को टिकट दिया लेकिन उनका नाम भी बदलकर फिर बाद में अरविंद लोधी को टिकट दिया गया। कांग्रेस की बार-बार टिकट बदला-बदली की रणनीति के कारण भी पार्टी की फजीयत हुई।

एग्जिट पोल भाजपा और कांग्रेस में कांटे की टक्कर.

Exit poll” indicates a tough competition between the BJP and Congress एग्जिट पोल भाजपा और कांग्रेस में कांटे की टक्कर* एमपी विधानसभा चुनाव एग्जिट पोल रिजल्ट, अब आखिरी वक्त का इंतजार उदित नारायण भोपाल-ग्वालियर। एमपी एग्जिट पोल के नतीजे आने लगे हैं। ऐसे में सबकी निगाहें ग्वालियर-चंबल क्षेत्र पर टिकी है। ग्वालियर-चंबल की वजह से ही 2020 में कमलनाथ की सरकार गिर गई थी। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने समर्थकों के साथ बीजेपी का दामन दाम लिया था। एबीपी और सी वोटर्स के एग्जिट पोल के अनुसार ग्वालियर-चंबल में बीजेपी की स्थिति ठीक नहीं है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के गढ़ में बीजेपी को बड़ा नुकसान हो रहा है।दरअसल, मध्य प्रदेश में एबीपी और सी-वोटर्स के एग्जिट पोल के अनुसार एमपी में बीजेपी को 88-112 और कांग्रेस को 113-137 सीटें मिल रही हैं। वहीं, अन्य को 02-08 सीटें मिल रही है। बीजेपी को सबसे ज्यादा नुकसान ग्वालियर-चंबल के क्षेत्र में हो रही है। यह ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए असहज करने वाले नतीजे हैं।एबीपी-सी वोटर्स के अनुसार ग्वालियर चंबल की 34 में से बीजेपी को 4-8 और कांग्रेस को 25-29 सीटें मिल रही हैं। अगर यह अनुमान सही साबित हुए तो ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए बड़ा झटका माना जाएगा। ग्वालियर-चंबल की सीटों पर ही उनका प्रदर्शन टिका हुआ है। पार्टी में आगे की स्थिति उनकी तभी मजबूत रहेगी, जब ज्यादा से ज्यादा उनके वफादार चुनाव जीतेंगे।निकाय चुनाव में लग चुका है झटकावहीं, ज्योतिरादित्य सिंधिया के गढ़ में बीजेपी को निकाय चुनाव में झटका लगा चुका है। कई सालों बाद पार्टी ग्वालियर और मुरैना में मेयर चुनाव हार गई थी। ऐसे में इस बार ज्योतिरादित्य सिंधिया के सामने बड़ा चैलेंज है।एक्सिस माय इंडिया में बीजेपी को बढ़तइसके साथ आजतक और एक्सिस माय इंडिया के सर्वे में सिंधिया के गढ़ में कांग्रेस को झटका लग रहा है। इस सर्वे के अनुसार ग्वालियर चंबल की 34 में से 19 सीटों पर बीजेपी और कांग्रेस को 14 सीटें मिल रही है।एग्जिट पोल के नतीजे कुछ भी बता रहे है यदि कुल मिलाकर देखा जाय तो मध्यप्रदेश में बीएसपी एसपी एवं गोंडवाना पार्टी की कुल मिलाकर 32 सीटो में त्रिकोणीय मुकाबला होने से एवम लाडली बहना योजना का लाभ यदि बीजेपी को मिलता है तो मध्य प्रदेश में बीजेपी की सरकार पुनः बनने की संभावना प्रबल है कुल मिलाकर बीजेपी 118 से 122 सीट, कांग्रेस 108 से 110, बीएसपी अन्य की 5 सीटे आने की संभावना दिख रही है। बीएसपी एसपी गोंडवाना के आने ज्यादा फायदा भाजपा को मिल सकता है ।मध्य प्रदेश में इस बार भी भाजपा की सरकार बनती दिख रही है।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री राजन ने सीहोर के मतगणना स्थल और स्ट्रांग रूम का किया निरीक्षण

मतगणना की तैयारियों का मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने लिया जायजा

मंत्री सुरेश राठखेड़ा की मुश्किलें बढ़ी, शिवपुरी की घटना पर मानव अधिकार आयोग ने लिया संज्ञान

मंत्री सुरेश राठखेड़ा की मुश्किलें बढ़ी

पार्टियों ने काटा टिकट, तो विधानसभा सचिवालय ने कहा, बंगला खाली करो

Parties have issued tickets, so the Legislative Assembly Secretariat has said, Vacate the bungalow. छिनेगा यशोधरा राजे से बंगला, चुनाव नहीं लड़ने वाले विधायकों को नोटिस, विधानसभा सचिवालय ने 30 बेटिकट विधायकों को भेजा पत्र भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में दोनों बड़ी पािर्टयों भाजपा और कांग्रेस ने इनकमवेंशी के कारण लगभग ढाई दर्जन के क्या टिकट काट दिए कि अब उनका बंगला भी छिनने वाला है। यानि इधर पार्टियों ने टिकट काटा, तो उधर, जैसे लोकसभा में राहुल गांधी का बंगला िछनने की जल्दबाजी की गई, उसी तरह विधानसभा सचिवालय ने भी बेटिकट वाले माननीयों को बंगला खाली करने का नोटिस थमा दिया है। इससे इन माननीयों की भोपाल में रहने को लेकर बेचैनी बढ़ गई है। नई विधानसभा के गठन तक आवास में रह सकते मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए मतदान पूरा हो चुका है। अब तीन दिसंबर को मतगणना होनी है। जिसमें 16वीं विधानसभा के सदस्यों के नाम सामने आ जाएंगे। नई विधानसभा सदस्यों को आवास उपलब्ध कराने के लिए विधानसभा सचिवालय ने भी अपनी तैयारी तेज कर दी है। इसके लिए सचिवालय ने उन विधानसभा सदस्यों को नोटिस जारी कर दिया है, जो चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। ऐसे भाजपा और कांग्रेस के 30 वर्तमान विधायकों को नोटिस देकर आवास खाली करने को कहा गया है। हालांकि वर्तमान विधायक नई विधानसभा के गठन तक आवास में रह सकते हैं। नए विधायकों को लेकर टेंशन में विधानसभा सचिवालय नए विधायकों के जीतने के बाद उन्हें भोपाल में सरकार द्वारा आवास मुहैया कराया जाता है। इसको लेकर विधानसभा सचिवालय ने राज्य सरकार को भी पत्र लिखा है। इसमें नए विधायकों के चुन कर आने पर उनके लिए गेस्ट हाउस और रेस्ट खाली रखने को कहा गया है। इस संबंध में राज्य सरकार की तरफ से भी विभिन्न विभागों को लिखा गया है।

कर्ज में डूबा मध्यप्रदेश, जो सत्ता में आएगा, करोड़ों का कर्ज मिलेगा विरासत में।

Madhya Pradesh will inherit debts in the millions when it comes to power. मनीष त्रिवेदीभोपाल, मध्यप्रदेश में इस बार तीन दिसंबर को जिसकी भी सरकार बनती है, उसे करोड़ों का कर्ज विरासत में मिलेगा। क्योंकि प्रदेश सरकार पर करोड़ों के कर्ज हैं। ऐसे में यह सवाल लाजमी है कि जिसकी भी सरकार बनती है उसने जो जनता से वादे किए हैं वह कैसे पुरे होंगे? फिलहाल सरकार के ऊपर 3.85 लाख करोड़ रुपए का कर्ज है. प्रदेश के हर नागरिक पर 47 हजार रुपए का कर्ज है. सरकारी खजाने से साल का 20 हजार करोड़ रुपये तो सिर्फ ब्याज चुकाने में जा रहा है. मध्यप्रदेश शासन का वित्तीय वर्ष 2023-24 का बजट 3.14 लाख करोड़ रुपए का है. इसका तकरीबन 26.2% हिस्सा वेतन, भत्ते और ब्याज की अदायगी में ही चला जाता है. अकेले वेतन-भत्ते को देखें तो वित्तीय वर्ष खत्म होने तक 56 हजार 314 हजार करोड़ रुपये से अधिक इस पर खर्च होंगे. यह बजट का 18.64% होता है. वहीं, पेंशन पर बजट का 18 हजार 636 करोड़ रुपए यानी 6.17% और ब्याज पर 22 हजार 850 करोड़ रुपये यानी 7.56% खर्च होगा. मौजूदा फाइनेंसियल बजट के मुताबिक सरकार की आमदनी 2.25 लाख करोड़ है और खर्च इससे 54 हजार करोड़ है. अब नई सरकार को वर्तमान बजट से अधिक राशि की आवश्यकता होगी. मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनाव के परिणाम 3 दिसंबर को आने हैं. मतदान के बाद सत्तारूढ़ बीजेपी और विपक्षी कांग्रेस की ओर से सरकार बनाने का दावा किया जा रहा हैं. हालांकि,वोटर का फैसला 3 दिसम्बर को आएगा लेकिन सूबे में सरकार किसी भी पार्टी की बने, उसे विरासत में खाली खजाना मिलेगा. फिलहाल सरकार के ऊपर 3.85 लाख करोड़ रुपए का कर्ज है. साफ है कि नई सरकार के लिए खस्ताहाल खजाने से अपनी लोक-लुभावन चुनावी घोषणाओं को पूरा करने के लिए बड़ी चुनौती सामने आने वाली है. जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश सरकार सालाना 20 हजार करोड़ रुपए ब्याज देती है. जीएसटी लागू होने के बाद से राज्य के पास नए टैक्स लगाने की गुंजाइश बेहद सीमित रह गई है. ऐसे में सरकार किसी भी बने, उसके लिए अर्थव्यवस्था को गतिमान बनाए रखने के साथ वित्तीय प्रबंधन बड़ी चुनौती होगी. अभी मध्यप्रदेश सरकार पर जितना कर्ज है, उस लिहाज से देखा जाए तो हर नागरिक पर 47 हजार रुपए का कर्ज है. वित्तीय जानकार बताते है कि पिछले 23 सालों में प्रति व्यक्ति कर्ज 42000 बढ़ गया है. साल 2001-02 में प्रदेश पर 23 हजार करोड़ रुपए का कुल कर्ज था. जनसंख्या के हिसाब से प्रतिव्यक्ति बमुश्किल 3,500 हजार रुपए का कर्ज था. दरअसल, 31 मार्च 2023 को खत्म वित्तीय वर्ष में सरकार पर 3.31 लाख करोड़ का कर्ज था, जो 2023-24 के अंत तक 3.85 लाख करोड़ रुपए हो गया.

सिर्फ वेबसाइट तक ही सिमटा कामकाज, शिवराज सरकार का आनंद विभाग.

Work of the Anand Department of the Shivraj government is confined only to the website. Manish Trivedi भोपाल: वर्ष 2016 में शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली मध्य प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी सरकार ने आनंद विभाग (Ministry of Happiness) के गठन को मंजूरी दी थी. मोटे तौर पर इसका मूल मकसद राज्य की जनता में खुशहाली का स्तर मापकर उनका जीवन खुशहाल बनाने का प्रयास करना था. इसकी प्रेरणा मुख्यमंत्री चौहान को भूटान के राष्ट्रीय खुशहाली सूचकांक से मिली थी. इसलिए मध्य प्रदेश का एक ‘हैप्पीनेस इंडेक्स’ जारी करने की भी बात कही गई थी, जो राज्य की जनता में खुशहाली का स्तर बताता. मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाले उनके इस विभाग के कामकाज की गंभीरता का पता इससे भी चलता है कि संस्थान के कार्यों के निष्पादन हेतु 28 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 13 रिक्त हैं. वहीं, वेबसाइट पर जिन 17 पदाधिकारियों का उल्लेख है, उनमें सामान्य सभा के अध्यक्ष के तौर पर मुख्यमंत्री, कार्यपालन समिति के अध्यक्ष के तौर पर राज्य के प्रमुख सचिव और सीईओ के अलावा बाकी 14 पदों में से 7 रिक्त हैं. द वायर में आनंद विभाग के ऊपर एक रिपोर्ट के अनुसार आनंद विभाग पर एक रिपोर्ट के अनुसार  संस्थान की ओर से आनंद के विषय पर शोध/अनुसंधान के लिए ‘आनंद रिसर्च फेलोशिप’ भी जारी की जाती है, लेकिन आज तक कोई शोध प्रकाशित नहीं हुआ है. लोगों के जीवन में आनंद घोलने का बजट 10 पैसा प्रति व्यक्ति है आनंद विभाग का गठन एक स्वतंत्र विभाग के रूप में हुआ था. वर्ष 2018 में सरकार बदलने पर इसका विलय अध्यात्म विभाग में कर दिया गया. वापस भाजपा की सरकार आने पर इसे फिर से स्वतंत्र कर दिया गया. वर्ष 2022-23 में इसको 5 करोड़ का बजट आवंटित हुआ था, जिसमें 2 करोड़ वेतन भुगतान, कार्यालय किराया, बिजली-पानी व्यय, प्रकाशन एवं प्रचार-प्रसार के लिए थे. 3 करोड़ का पोषण अनुदान था, जिससे विभाग को आनंद के प्रसार के कार्यक्रमों का संचालन करना था. विभाग केवल 4.22 करोड़ की राशि खर्च कर सका. वित्तीय वर्ष 2021-22 के उपलब्ध दस्तावेज बताते हैं मुख्यमंत्री के इस महत्वाकांक्षी विभाग द्वारा आनंद के प्रसार के लिए चलाए जाने वाले सभी कार्यक्रमों पर केवल 79 लाख रुपये खर्च किए गए, जो राज्य की लगभग 8 करोड़ आबादी के लिहाज से लगभग 0.10 पैसा प्रति व्यक्ति होता है. हालांकि, इस बजट को पर्याप्त मानते हैं. उनका कहना है, ‘हम वालंटियर (स्वयंसेवी) के जरिये काम करते हैं. यह एक नई अवधारणा लाने की शुरुआत है, समय तो निश्चित तौर पर लगेगा. बजट हमारे लिए पर्याप्त है, कोई समस्या नहीं है.’ ‘आनंद विभाग’ या ‘सरकारी अधिकारी/कर्मचारी आनंद विभाग?’ स्वयंसेवी आनंदकों (84 हजार से अधिक) में बड़ी संख्या में शासकीय सेवक शामिल हैं (दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के मुताबिक 40 फीसदी से अधिक), उनमें भी शिक्षा विभाग के कर्मियों की संख्या इनमें अधिक है. अशासकीय व्यक्तियों में समाजसेवी, पत्रकार जैसे ज़मीनी सक्रियता वाले पेशों के लोग शामिल हैं. वहीं, वेबसाइट पर उपलब्ध 268 आनंदम सहयोगियों की सूची में 60 फीसदी से अधिक शासकीय कर्मचारी हैं. भले ही पूरी योजना को वॉलंटियर रूप से सफल बनाने का ख्वाब देखते हों लेकिन द वायर से बातचीत में ‘अशासकीय आनंदम सहयोगी’ कहते हैं कि हम काम-धाम छोड़कर अपने मन की संतुष्टि के लिए लोगों में खुशियों बांटने के प्रयास करते हैं, तो कम से कम विभाग को हमारे पानी-पेट्रोल का खर्च तो देना ही चाहिए. विभाग के गठन के समय राज्य का हैप्पीनेस इंडेक्स जारी करने को इसका सबसे महत्वपूर्ण कार्य बताया गया था. आईआईटी खड़गपुर के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर करने के अलावा तत्कालीन अधिकारियों ने सरकारी खर्च पर भूटान के दौरे भी किए थे. लेकिन, तब से अब तक नतीजा सिफर ही रहा है. कभी कोरोना, तो कभी किसी अन्य कारण से बार-बार राज्य आनंद संस्थान की ओर से इंडेक्स जल्द ही जारी करने का आश्वासन दिया जाता है. वेबसाइट पर उपलब्ध विभागीय कामकाज की उपरोक्त जानकारी किसी को भी बेहद आकर्षक लग सकती है लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त कुछ और है. ‘द वायर’ ने इस दौरान कई ‘आनंदम सहयोगी’ से बात की. इनमें एक डॉ. सत्य प्रकाश शर्मा भी थे. उनका नाम वेबसाइट पर ग्वालियर के ‘आनंदम सहयोगी’ के रूप में दर्ज है. द वायर से बातचीत में उन्होंने बताया, ‘जो भी दिख रहा है वो केवल कागजों में है, धरातल पर शून्य है. आपको केवल संस्थान के ईमेल मिलेंगे, वेबसाइट पर सब कुछ मिलेगा, ज़मीन पर कुछ भी नहीं है. विभाग की सक्रियता केवल फोटो खिंचवाकर अपलोड करने तक है. थोड़ी-बहुत गतिविधियां कर देते हैं, जिससे फोटो बन जाते हैं और वेबसाइट पर अपलोड हो जाते हैं. कुल मिलाकर यह केवल एक वेबसाइट के अलावा और कुछ नहीं है. डॉ. शर्मा के दावों की ज़मीनी पड़ताल की और राज्य के विभिन्न तबकों से जुड़े लोगों से बात करके जाना कि वह ‘आनंद विभाग ’ या ‘राज्य आनंद संस्थान’ के कामकाज को किस तरह देखते हैं या उसके कामकाज के बारे में कितना जानते हैं. शिवपुरी और श्योपुर ज़िलों में आदिवासी समुदाय के बीच पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार आदि समस्यों पर सक्रियता से काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता अजय यादव को तो पता ही नहीं है कि ऐसा कोई विभाग भी है जो लोगों का जीवन खुशहाल बनाने के लिए कार्य करता है. ‘मैं करीब दशकभर से वंचित तबकों के बीच काम कर रहा हूं, लेकिन मैंने आज तक आनंद विभाग या राज्य आनंद संस्थान का नाम ही नहीं सुना और न ही कभी इसके द्वारा किया गया कोई आयोजन देखा.’ सिवनी ज़िले के केवलारी खेड़ा गांव के किसान सतीश राय, जो किसान संबंधी समस्याओं पर भी मुखर रहते हैं, को भी नहीं पता कि लोगों के जीवन में आनंद का प्रसार करने के लिए भी कोई विभाग काम कर रहा है. वे आगे कहते हैं, मेरे जैसे सक्रिय किसान को भी ऐसे किसी विभाग या उसके कार्यक्रमों और आयोजनों की जानकारी नहीं है. कोई भी ग्रामीण इस विभाग की गतिविधियों के बारे में नहीं बता पाएगा कि इसके कार्यक्रम कब और कहां होते हैं.’ पूरे राज्य में पोषण, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल अधिकार और नागरिक अधिकारों पर काम करने वाली भोपाल की एनजीओ विकास संवाद के राकेश मालवीय को विभाग के गठन … Read more

पुरानी घोषणा को लेकर बीजेपी मोन, मोदी जी के नाम मांग रहे वोट.

Sahara Samachaar; Mandla; MP Elections;

People are seeking votes in the name of the old announcement, asking for votes in the name of BJP, Modi. Special Correspondent मंडला, नैनपुर – जैसे जैसे मतदान की तारीख पास आती जा रही हे दोनों पार्टियों ने अपनी ताकत झोंक दी हे। काम को और विकास को लेकर एक दूसरे पर आरोप प्रत्या रोप का सिलसिला शुरू हो गया हे एक तरफ कांग्रेस पार्टी किसानों,बहनों ,बेरोजगार युवाओं, गैस जैसे मुद्दों को लेकर जनता के सामने प्रचार प्रसार कर रही हे।तो दूसरी तरफ बीजेपी माननीय मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान के द्वारा किए गए कार्यों ,घोषडाओ के साथ माननीय प्रधान मंत्री मोदी जी को सामने कर चुनाव प्रचार कर रही हे।लेकिन बीजेपी मंडला विधान सभा में पिछले बीस सालों को उपलब्धि गिनवाने में बगले झांकती नजर आ रही हे। पूर्व विधायक के द्वारा जनता से जुड़े ऐसे कोई काम नहीं की जिसको मद्दे नजर रखते हुए जनता सबक सिखाने तैयार हे।इसी प्रकार जिला पंचायत सदस्य चुन कर मंडला जिले में जिला पंचायत अध्यक्ष रही हे और राज्य सभा सांसद रही हैं अब मंडला विधान सभा से बीजेपी की टिकट पर विधायक का चुनाव लड़ रही हैं श्रीमति संपतिया उईके ।पद में रहते हुए सिर्फ घोषणा के अलावा कुछ नही फिर चाहे वो नैनपुर में केंद्रीय विद्यालय को बात हो या अन्य ऑफिस की बात हो विकास के नाम पर नैनपुर के साथ सौतेला व्यवहार ही किया बीजेपी सरकार ने।उसी कड़ी में सबसे अहम मुद्दा नैनपुर को जिला बनाओ को लेकर गर्म हे जो इस चुनाव के परिणाम को बदलने में काफी हद तक कारगार होगा। इन मुद्दों को अभी भी ठंडे बस्ते में रखी हुई हे बीजेपी ने।जनता पूछती हे इन वादों का क्या हुआ सिर्फ नैनपुर के साथ छलावा और सिर्फ छलावा।

कमलनाथ ने किया संकल्प पत्र पर प्रहार, पूछे शिवराज से 5 सवाल.

Kamal Nath has launched an attack on the manifesto, posing 5 questions to Shivraj. कमलनाथ ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से ये पांच सवाल भी पूछे हैं. मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने BJP के संकल्प पत्र को लेकर कहा “पूरे प्रदेश में बेटियों को 3000 रुपये देने की घोषणा करने के बाद भाजपा ने पलटी मारी है, उनके संकल्प पत्र से यह घोषणा गायब है” उन्होंने आगे कहा “नौजवानों को नौकरी नहीं, बहनों को सम्मान नहीं, किसानों की कर्जमाफी नहीं, कर्मचारियों को पेंशन नहीं, ओबीसी को आरक्षण नहीं, यही है भाजपा का संकल्प है. कांग्रेस के वचन पत्र में जनहितैषी वादे हैं, जबकि भाजपा के संकल्प पत्र में जनता की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश.” कमलनाथ ने कहा कि 18 साल से झूठ की बुनियाद पर खड़े शिवराज जी इन सवालों का जबाव नहीं देंगे. लेकिन मप्र की जनता आगामी 17 नवम्बर को वोट की मशीन पर उंगली दबाकर झूठ की मशीन को नष्ट कर देगी. शिवराज सिंह चौहान ने 4 महीने पहले घोषणा की थी कि प्रदेश में एक लाख सरकारी नौकरियों पर भर्ती की जायेगी. लेकिन आज तक भाजपा ने नहीं बताया कि कितनी नौकरी दी गयी. जनता को यह सच्चाई पता होना चाहिये कि पिछले चार घोषणा पत्र से भाजपा, सरकारी नौकरी देने का वादा करती आयी है लेकिन कभी पूरा नहीं किया. पिछले चार घोषणा पत्र की तरह इस बार भी नौकरी और रोजगार का वादा तो भाजपा करेगी, लेकिन देगी किसी को भी नहीं. कमलनाथ ने कहा “भारतीय जनता पार्टी झूठ बोलो और भाग जाओ और फिर नया झूठ लेके आओ की रणनीति पर चलती है. बीजेपी ने मध्यप्रदेश को महिला अत्याचार में नंबर 1 बना दिया है. मध्यप्रदेश की बहन-बेटियां और माताएं अब बीजेपी के दुःशासन को समाप्त करेंगी.” कमलनाथ ने कहा कि भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में किसानों को वादे नहीं, झांसे दिये हैं. आपको पता होगा कि भाजपा ने कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर को मध्यप्रदेष का प्रभारी बनाया है जो किसानों के खिलाफ काले कानून बनाने और 700 किसानों की शहादत के लिये जिम्मेदार हैं. पूर्व सीएम ने कहा अगर समग्रता में देखें तो 100 यूनिट तक बिजली माफ 200 यूनिट तक बिजली हाफ, स्कूली छात्रों को 500 से 1500 रुपये तक छात्रवृत्ति, ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण, जातिगत जनगणना, गेंहू और धान पर बढ़ा हुआ समर्थन मूल्य, तेंदूपत्ता बोरी की कीमत 4000 रुपये जैसे वादे कांग्रेस पार्टी के वचन की तुलना में सिर्फ झुनझुना हैं. अब जनता भाजपा का बाजा बजा देगी.

मध्य प्रदेश में किसानो के सामने खाद का संकट खड़ा हुआ. किसानों को नहीं मिल रहा खाद.

Farmers in Madhya Pradesh are facing a crisis as they are unable to obtain fertilizers. मध्यप्रदेश में अफसरों की लापरवाही प्रदेश के कई जिलों में किसानों पर भारी पड़ रही है. उनके सामने खाद का संकट खड़ा हो गया है. किसान परेशान रहे हैं उन्हें खाद नहीं मिल रही है.NDTV की एक रिपोर्ट के अनुसार, मध्यप्रदेश में 9 अक्तूबर को आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) लागू हुई थी. जिसके बाद किसी भी सरकारी सामान पर किसी भी राजनीतिक दल या नेता की तस्वीरें या प्रतीकों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है. किसानों को मिलने वाला खाद भी आ गया. शिकायत मिलने पर चुनाव आयोग ने रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय (Ministry of Chemicals and Fertilizers) को बोरों से पीएम नरेन्द्र मोदी की तस्वीर हटाने का आदेश दिया है. किसानों की मुश्किल, रबी के मौसम में बुआई का समय निकल रहा है. बुआई में देरी के डर से चिंतित किसान बढ़ी हुई कीमतों पर उर्वरक की बोरियां खरीद रहे हैं.भोपाल के पास ईंटखेड़ी गांव के किसान हरि सिंह सैनी अपनी 12 एकड़ जमीन के लिए फॉस्फेट आधारित उर्वरक डीएपी के केवल 15 बोरियां खरीदने में कामयाब रहे हैं. कुछ ऐसा ही हाल भोपाल के निपानिया जाट गांव का है. यहां एक किसान को एक बोरी डीएपी और दो बोरी यूरिया दी जा रही है.नये पैकेजिंग के साथ उर्वरक उपलब्ध होने के बावजूद,किसान बढ़ती कीमतों की शिकायत करते हैं. यहीं के किसान लोकेंद्र जाट का कहना है कि यूरिया का एक बैग जो पहले 50 किलोग्राम का होता था, अब उसे 45 किलोग्राम के बैग में पैक किया जाता है, जबकि कीमत वही रहती है. उन्होंने कहा, “डीएपी की एक बोरी की कीमत पहले 1,200 रुपये थी, लेकिन अब इसकी कीमत 1,365 रुपये है। दानेदार उर्वरक की कीमत भी 310 रुपये से बढ़कर 468 रुपये हो गई है. इससे पैदावार पर असर पड़ेगा. लेकिन कुछ जगहों पर नए पैकेजिंग में यूरिया के बैग आए हैं, लेकिन वहां भी इसकी भारी कमी है. रीवा और देवास जैसे जिलों में नई बोरियां आ गई हैं लेकिन वहां किसान पांच-छह घंटे से अधिक समय तक कतारों में इंतजार करने की शिकायत कर रहे हैं. यहां किसानों को कुछ बैग उर्वरक प्राप्त करने के लिए दो से तीन चक्कर लगाने पड़ते हैं. तहसीलदार रमेश मसारे ने एनडीटीवी को बताया कि लंबी कतारें अन्य जिलों के किसानों द्वारा उर्वरक खरीदने के लिए वहां आने के कारण होती हैं, लेकिन कमी की किसी भी खबर से इनकार किया। हालांकि ये भी कह गये कि कतारों की वजह आचार संहिता और पुरानी पैकेजिंग है. इस बीच बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने राज्य में अपना चुनाव अभियान तेज कर दिया है, यह मुद्दा पार्टी नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों के भाषणों में भी उठ रहा है. खुद केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने दावा कर रही हैं कि राज्य में उर्वरक की कोई कमी नहीं है और वितरण केंद्रों के बाहर आसानी से खाद मिल रही है. दूसरी ओर, कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने एमपी में एक रैली को संबोधित करते हुए बीजेपी पर ‘किसानों को धोखा देने और उनके लिए कुछ नहीं करने’ का आरोप लगाया.दूसरे कांग्रेस दिग्गज मसलन- कमलनाथ और दिग्विजय भी हर चुनावी मंच से खाद की कमी का मुद्दा उठा रहे हैं. अधिकारियों के अनुसार राज्य में लगभग 6.42 लाख मीट्रिक टन यूरिया आया, 2.86 लाख मीट्रिक टन बेचा गया है और 3.56 लाख मीट्रिक टन बचा हुआ है। कुल 4.31 लाख मीट्रिक टन डीएपी में से 2.03 लाख मीट्रिक टन का वितरण किया जा चुका है.

प्रदेश की 62 सीटों पर कांग्रेस और भाजपा में कांटे की टक्कर.

Congress; BJP; Kamalnath; Sahara Samachaar;

Congress and BJP are in a tough competition on 62 seats in the state उदित नारायणभोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। Un प्रदेश में इस बार चुनावी बिसात पर किसकी होगी जीत और कौन रहेगा खाली हाथ.?, यह सवाल प्रदेश ही नहीं देश भर के जेहन में हैं। प्रदेश की 230 सीटों पर हो रहे चुनाव में भाजपा अभी कांग्रेस की तुलना में ज्यादा मजबूत नजर आ रही है। दोनों की मजबूत सीटों की बात की जाए तो भाजपा में यह संख्या 98 है। वहीं, कांग्रेस 70 सीटों पर बढ़त बनाए दिख रही है। दोनों में अभी 28 सीटों का अंतर है। बड़ी बात यह है कि फिलहाल 62 सीटें ऐसी हैं जहां भाजपा और कांग्रेस दोनों ही कांटे के मुकाबले में है। निश्चित रूप ये इन्ही सीटों पर जीत और हार से ही सत्ता का निर्धारण होगा।कुल सीट- 230भाजपा- 98कांग्रेस- 70कांटे की टक्कर वाली सीट- 62 कांटे की लड़ाई वाली इन सीटों पर दोनों ही दलों के बागी प्रत्याशियों के साथ बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी भी निर्णायक भूमिका में हैं। बसपा और सपा तो इनमें से कुछ सीटों पर सिर्फ खेल बिगाडने की नहीं बल्कि जीतने की भी स्थिति में आ सकती हैं। हालांकि, दोनों दलों के बागी जीतने की स्थिति में न होकर सिर्फ पार्टी को नुकसान पहुंचाते दिखाई दे रहे हैं। हमारी टीम के आंकड़ों के अनुसार, भाजपा की इन सीटों पर जीत दर्ज करने की स्थिति में हैइंदौर 1, इंदौर 2, इंदौर 4, महू, सांवेर, उज्जैन दक्षिण, पंधाना, बागली, रतलाम शहर, जावरा, आलोट, मंदसौर, मल्हारगढ, सुवासरा, गरोठ, मनासा, सुसनेर, खंडवा, हरसूद, मन्धाता, नेपानगर, खरगोन, पानसैमल, राजपुर, जोबट, पेटलावद, धरमपुरी, देवास, मनावर, सतना, नागौद, रामपुर बाघेलान, रीवा, सिरमौर, मनगंवा, पुष्पराजगढ, धौहनी, जैतपुर, देवसर, मानपुर, अनूपपुर, सागर, खुरई, नरियावली, रहली, जतारा, एक ओर भाजपा जहां सत्ता में वापसी के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। वहीं, कांग्रेस भी मैदानी मोर्चें पर सब कुछ दांव पर लगाए है। कुल मिलाकर सियासी दल ही नहीं सियासी पंडित भी यह मानकर चल रहे हैं कि इस बार प्रदेश में लड़ाई कांटे की है। बीजेपी की बढ़त वाली सीटेमलहरा, महाराजपुर, दमोह, पथरिया, हटा, पन्ना, गुनौर, पवई, ग्वालियर ग्रामीण, ग्वालियर, बमौरी, पिछोर, करैरा, दतिया, भांडेर, सेवढा, भिंड, मेहगांव, सुमावली, दिमनी, अंबाह, विजयराघवगढ बहोरीबंद शाहपुर देवास बालाघाट लांजी परसवाडा वारासिवनी कटंगी बरघाट गोटेगांव जबलपुर कैंट बरगी, पाटन नरसिंहपुर नरेला हुजूर, गोविंदपुरा बैरसिया सिलवानी सांची कुरवाई सिरोंज शमसाबाद सारंगपुर बुधनी सोहागपुर पिपरिया सिवनी मालवा बैतूल भैंसदेही आमला।वहीं, इन सीटों पर जनता जर्नादन कांग्रेस का हाथ मजबूत करती नजर आ रही है- कांग्रेस की जीत की संभावना वाली सीटराउ, देपालपुर, तराना, नागदा खाचरौद, सैलाना, नीमच शाजापुर, कालापीपल, भगवानपुरा, कसरावद, भीकनगांव, बडवानी, सेंधवा, झाबुआ, थांदला, कुक्षी, गंधवानी, सोनकच्छ, रैगांव, अमरपाटन, मउगंज, चुरहट, सिंगरौली, चितरंगी, ब्यौहारी, बांधवगढ, कोतमा, बंडा, टीकमगढ़, पृथ्वीपुर, खरगापुर, चंदली, राजनगर, जबेरा, ग्वालियर पूर्व, भितरवार, चाचौड़ा, राघौगढ़, मुंगावली, चंदेरी, पोहरी, विजयपुर, अटेर, लहार, जौरा, डबरा, बड़वारा, डिंडोरी, बिछिया, मंडला, बैहर, सिवनी, केवलारी, तेंदुखेडा, गाडरवाडा, छिंदवाडा, पांर्ढुना, परासिया, सौंसर, जबलपुर पूर्व, जबलपुर पश्चिम, पनागर,लखनादौन, उदयपुरा, राजगढ, खिलचीपुर, ब्यावरा, आष्टा, मुलताई, घोडाडोंगरी। इन सीटों पर फाइटइंदौर- 3, इंदौर -5, उज्जैन उत्तर, बडनगर, घट्टिया, महिदपुर, रतलाम ग्रामीण, जावद, शुजालपुर, आगर, खातेगांव, बुरहानपुर, महेश्वर, बड़वाह, राजपुर, अलीराजपुर, धार, बदनावर, हाटपिपल्या, चित्रकूट, मैहरसेमरिया, त्योंथर, देवतालाब, गुढ़, सीधी, सिंहावल, देवरी, बीना, सुरखी, निवाडी, छतरपुर, बिजावर, ग्वालियर दक्षिण, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, कोलारस, गोहद, मुरैना, सबलगढ, श्योपुर, बड़वारा, चौरई, जबलपुर उत्तर, सिहोरा, अमरवाडा, भोपाल उत्तर, भोपाल दक्षिण पश्चिम, भोपाल मध्य, भोजपुर, विदिशा, गंजबासौदा, नरसिंहगढ, सीहोर, इछावर, होशंगाबाद, हरदा, टिमरनी।

मुख्यमंत्री की सभा में नहीं दिखी ज्यादा भीड़, नागरिकों में दिखी निराश काफी देर से पहुंचे थे “मामा”

Shivraj Singh Chouhaan; Katni; Elections; Sahara Samachaar;

Chief Minister’s meeting did not witness a large crowd; disappointment was evident among the citizens as they had been waiting for a long time. कटनी। चुनाव प्रचार जोड़ों पर है सभी पार्टियों अपनी-अपनी ताकत झोंक रही हैं इसी कड़ी में मुखिया शिवराज सिंह चौहान की चुनावी सभा का आयोजन एनकेजे स्थित मैदान में होना था। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की चुनावी सभा को सफल बनाने के लिए वैसे तो भारतीय जनता पार्टी कटनी के पदाधिकारियों ने खासा जोर लगाया, लेकिन सभा स्थल पर मौजूद लोगों की भीड़ कम ही नजर आई। मामा शिवराज सिंह चौहान के प्रति लोगों की बेरुखी सभा स्थल पर साफ नजर आई। भाजपा ने सभा के पूर्व यह कयास लगाया था कि मुख्यमंत्री की सभा जिले के भाजपा प्रत्याशियों के पक्ष में क्रांति ला देगी, लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं। सभा स्थल पर जहां सामने की कुछ कतारों में पार्टी के पदाधिकारी एवं कॉलेज के छात्र नजर आ रहे थे वहीं पंडाल के पिछले हिस्से में बड़ी संख्या में कुर्सियां खाली पड़ी हुई थी। इसका एक कारण यह भी कहा जा सकता है कि मुख्यमंत्री अपने निर्धारित समय से चार घंटे लेट कटनी पहुंचे। जिसके कारण कई लोग तो ऐसे भी रहे जो सभा स्थल से वापस घर चले गए। नहीं दिखा लोगों में उत्साहमुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सभा को लेकर लोगों में उत्साह नजर नहीं आ रहा था। लोगों की आखिर ऐसी नाराजगी क्यों है यह बात ना तो भाजपा पदाधिकारियों को समझ में आ रही है और ना ही प्रत्याशी इसे समझ पा रहे हैं। भाजपा सरकार ने वैसे तो जिले के विकास के लिए काफी सारी घोषणाएं कर रखी हैं यहां तक की मेडिकल कॉलेज बनवाने तक की घोषणा आचार संहिता लागू होने के कुछ देर पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कर दी है। इतना सब होने के बावजूद आखिर मतदाता खुश क्यों नहीं है यह बात समझ से परे है। तो क्या परिवर्तन करने का मनमुख्यमंत्री की सभा स्थल पर मौजूद कई भाजपा कार्यकर्ता इस संबंध में आज चर्चा करते हुए नजर आए। इस दौरान पार्टी के कार्यकर्ता यह भी कहते दिखाई दिए कि भारतीय जनता पार्टी ने कटनी जिले में टिकट के बंटवारे में जो गलतियां की हैं वह जनता को पसंद नहीं आ रही। पार्टी कार्यकर्ताओं एवं आमजन के रूखेपन से यह कहना गलत नहीं होगा कि कहीं यह किसी बड़े परिवर्तन की शुरुआत तो नहीं। परिणाम चाहे जो भी आए लेकिन जब तक परिणाम सामने नहीं आ जाते तब तक इस तरह की चर्चाएं चलती ही रहेगी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की सभा में भाजपा पदाधिकारी की मौजूदगी रही

आटे को लीटर में तोलने वाले कांग्रेसी, जमीनी वास्तविकता से परिचित नहीं : शिवराज सिंह चौहान

Shivraj Singh; Kamalnath; Digvijay Singh; Sahara Samachaar;

Those who measure flour by the liter are not familiar with ground realities,” said Shivraj Singh Chouhan, criticizing the Congress. बोले मुख्यमंत्री : गुटों में बटी कांग्रेस- दिग्गी गुट, कमलनाथ गुट, भगवान जाने कितने गुटChief Minister said: Congress is divided into groups – Diggi Group, Kamal Nath Group, God knows how many other groups Udit Narayanभोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को अपने गृह ग्राम जैत में हनुमान मंदिर, कुल देवी-देवता,नर्मदा मैया और सलकनपुर में माता विजयासन की पूजा-अर्चना कर बुधनी विधानसभा से अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी का नाम लिए बिना तंज कसते हुए कहा कि, आप ही देखिए उनमें और हम में अंतर क्या है। वो लोग आटे को लीटर में तोलते हैं। धान का खेत काटने पहुँच जाते हैं लेकिन यह पता ही नहीं है कि धान जमीन के नीचे होती है या जमीन के उपर। जमीनी वास्तविकता से परिचित नहीं हैं। हमनें तो बक्खर हांके हैं और ढुली टांग कर उराई भी की है। उन्होंने कहा कि, कांग्रेस के मित्र बहुत परेशान रहते हैं। कहते हैं कहां से आ गया ढे़ड मुट्ठी का। एक बार तो मेरा श्राध्द ही कर दिया। तो मैंने कहा राख के ढेर से भी उठकर खड़ा हो जाऊंगा। अभी तो बहुत काम करना है। यहां का हर नागरिक शिवराज है,मैं तो केवल वोट डालने आऊंगा : मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, मैं अपनी जन्मभूमि, कर्मभूमि, मातृभूमि, पुण्यभूमि और वो माटी जिसके आशीर्वाद से प्रदेश की जनता की सेवा कर इतना काम कर पाया हूं, वहां प्रणाम करने आया हूँ। अपने ग्रामवासियों की शुभकामनाएं और बुजुर्गों का आशीर्वाद लेकर आज मैंने नामांकन फ़ॉर्म भरा है। इसके बाद यहां का चुनाव यहां की जनता लड़ेगी, यहां का हर नागरिक शिवराज है,मैं तो केवल वोट डालने आऊंगा। लोगों ने कब्जा करके कांग्रेस को निष्प्राण बना दिया : मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस और इंडी गठबंधन पर हमला बोलते हुए कहा कि, एक दिल के टुकड़े हजार हुए कोई इधर गिरा कोई उधर गिरा। सपा, आप, कांग्रेस और कांग्रेस में भी दिग्गी गुट, सेठ कमलनाथ गुट, अरुण यादव और अजय सिंह गुट और न जाने कितने गुट हैं ये तो भगवान ही जाने। उन्होंने कहा कि, मल्लिकार्जुन खड़गे तो नाममात्र के अध्यक्ष हैं। असल में तो भैया-बहन फसल काटते हैं। मध्यप्रदेश में भी कमलनाथ और दिग्विजय सिंह ने पूरी पार्टी पर कब्जा जमा कर रखा है और आगे की संभावनाएं भी कांग्रेसियों की समाप्त कर दी हैं। उनके आगे की पीढ़ी भी तैयार है और वो टिकट भी बाँट देती है। इन लोगों ने कब्जा करके कांग्रेस को निष्प्राण बना दिया है।कांग्रेस में कुछ नेता जेल में और कुछ नेता बेल पर हैं : मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि, कांग्रेस जनता का भल नहीं कर सकती। अब नेताओं की पहचान भी छुपा रहें हैं। उन्होंने कहा कि, कांग्रेस के एक नेता कमलनाथ और दिग्विजय सिंह को जय-वीरू कहकर बुला रहें हैं, लेकिन जय और वीरू तो जेल से छूट कर आए थे। उन्होंने कहा कि, कुछ नेता जेल में हैं और कुछ कांग्रेस के नेता बेल पर हैं। कांग्रेस के जमाने में नेताओं को कभी जेल नहीं होती थी, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कह दिया कि, ना खाउंगा ना खाने दूंगा। इसके बाद सभी कांग्रेसी घबराए हुए हैं। अब जमाना बदल गया है। नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं गड़बड़ की तो नेता भी जेल जाएगा।

सीएम शिवराज की पांच साल में चल संपत्ति एवं नगदी बढ़े, लेकिन अचल संपत्ति हुई कम.

Shivraj Singh; BJP; Sahara Samachaar; sahara; samachaar;

In five years Chief Minister Shivraj’s, his assets and cash increased, but his non-liquid assets decreased. सीएम की पत्नी साधना सिंह की चल-अचल संपत्ति के साथ नकदी, गहने भी बढ़े. Udit Narayanभोपाल/सीहोर। प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पिछले पांच सालों में चल संपत्ति सहित नगदी तो बढ़े हैं, लेकिन उनकी अचल संपत्ति में गिरावट आई है। इसी तरह उनकी धर्मपत्नी साधना सिंह की चल-अचल संपत्ति, नकदी सहित सोने के जेबरात भी बढ़े हैं। इसका ब्यौरा उन्होंने खुद चुनाव के लिए भरे नामांकन के साथ दिए गए एफिड-डेविड में दिया है। मुख्यमंत्री ने 2018 के चुनाव में अपनी कुल चल संपत्ति 43,20,274 रूपए की बताई थी, जो कि वर्ष 2023 में बढ़कर 1,11,20,282 हो गई है। इसी तरह उनके पास 2018 में कैश राशि कुल 45 हजार रूपए थी, जो कि 2023 में बढ़कर 1,15000 हो गई है। 2018 में उनके बैंक खातोें में 20,26,874 रूपए जमा थे, जो कि 2023 में बढ़कर 92,79,104 रूपए हो गए हैं। सोने के गहने 2018 में 96 ग्राम थेे, जो कि 2023 में भी इतने ही हैैं। मुख्यमंत्री की 2018 में अचल संपत्ति जमीन, बिल्डिंग सहित अन्य 2.83 करोड़ की थी, जो कि वर्ष 2023 में घटकर 2.10 करोड़ की रह गई है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की कुल संपत्ति की बात करें तो वर्ष 2018 के चुनाव के समय उनके पास कुल संपत्ति 3.26 करोड़ थी, जो कि वर्ष 2023 में घटकर 3.21 करोड़ की हो गई है।मुख्यमंत्री नेे एमए फिलासफी तक की पढ़ाई की है। उन पर कोई अपराध कायम नहीं हैं। हालांकि उनके पास रिवाल्वर है। मुख्यमंत्री की वर्ष 2018 में देनदारी कुल 63.18 लाख रूपए की थी, जो कि वर्ष 2023 में घटकर 2,14000 की रह गई है। मुख्यमंत्री के पास अपने पिताजी की पैतृक जमीन कुल 4.67 एकड़ का छटवा हिस्सा है। हालांकि उनकेे नाम विदिशा में भी कृषि भूमि 7 एकड़ 70 डिस्मिल के करीब है।सीएम की धर्मपत्नी साधना सिंह की बढ़ गई संपत्ति-मुख्यमंत्री ने नामांकन पत्र के साथ दिए एफिड-डेविड में बताया है कि उनकी धर्मपत्नी साधना सिंह की चल संपत्ति वर्ष 2023 में 1,09,14,644 है। जबकि 2018 में उनके पास 88,11,866 रूपए की चल संपत्ति थी। इसी प्रकार वर्ष 2018 में साधना सिंह के पास कैश 40 हजार रूपए थे, जबकि 2023 में 1,10,000 रूपए है। वर्ष 2018 में गहने 492 ग्राम थे, जोे कि 2023 में बढ़कर 535 ग्राम हो गए हैं। साधना सिंह के पास बैंकों में जमा राशि वर्ष 2018 में 11,20,766 रूपए थी, जोे कि वर्ष 2023 में 71,87,544 हो गई है। वर्ष 2018 में उनके नाम 18 हजार रूपए का बीमा था, लेकिन वर्ष 2023 में नहीं है। साधना सिंह के पास कुल अचल संपत्ति जमीन-बिल्डिंग सहित अन्य वर्ष 2018 में 3.32 करोड़ की थी, जो कि वर्ष 2023 में बढ़कर 4.32 करोड़ की हो गई है। साधना सिंह के पास कुल संपत्ति वर्ष 2018 में 4.52 करोड़ की थी, जो कि वर्ष 2023 में बढ़कर 5.41 करोड़ की हो गई है। हालांकि उनके उपर देनदारी भी है। वर्ष 2023 में साधना सिंह कोे 66,58,251 रूपए चुकाने हैं, जो कि वर्ष 2018 में 47.55 लाख की थी।सीएम एवं उनकी पत्नी के नाम बैंक खातोें में जमा राशि– मुख्यमंत्री के पास हाथ में नगदी 1,10000 रूपए है।- एसबीआई विदिशा मेें 54,63,757 रूपए जमा हैं।- एसबीआई वल्लभ भवन भोपाल में 33,35,674 रूपए जमा है।- जिला सहकारी बैंक विदिशा मेें 4,79,673 रूपए जमा है।साधना सिंह के नाम बैंकोें में जमा राशि– हाथ में नगदी 1,15000 रूपए है।- एसबीआई विदिशा में 15,84,525 रूपए जमा है।- पीएनबी जुमेराती भोपाल में 4,48,016 रूपए जमा है।- सावधि जमा आईसीआईसीआई बैंक एमपी नगर भोपाल में 50 लाख रूपए है।- आईसीआईसीआई एमपी नगर भोपाल में 1,55,003 रूपए जमा है।यह जानकारी नामांकन फार्म के साथ दिए गए एफिड-डेविड के आधार पर है।.

‘भाजपा में इन दिनों गुटबाजी हावी, इसे ढकने कांग्रेस नेताओं के बीच झूठी खबरों का कर रही प्रचार-प्रसार

Digvijay Singh; Kamalnath; MP Elections; Sahara Samachaar;

These days, there is factionalism prevalent in the BJP, which Congress leaders are promoting as false news among themselves,” said Digvijaya Singh. कांग्रेस के प्रत्येक नेता दृढ़ निश्चय वाले हैं, यूनाइटेड हैं औऱ वो बीजेपी को हराने के लिए कर रहे हैं काम Udit Narayan भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 को लेकर राज्य में हलचल बढ़ी हुई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ के साथ किसी तरह की मतभेद की बातों से इनकार किया है। इसके साथ ही दिग्विजय सिंह ने यह भी कहा है कि ऐसी बातें बीजेपी फैला रही है। दिग्विजय सिंह ने अपने बयान में कहा कि कई अखबारों ने यह दावा किया है कि नाराजगी की वजह से वो झाबुआ और खातेगांव नहीं गए। दिग्विजय सिंह ने कहा, ‘बीजेपी में इन दिनों गुटबाजी काफी बढ़ी हुई है। इसे ढकने के लिए बीजेपी, कांग्रेस नेताओं के बीच झूठी खबरों का प्रचार-प्रसार कर रही है। खासकर मेरे और कमलनाथ के बीच। कांग्रेस के प्रत्येक नेता दृढ़ निश्चय वाले हैं, यूनाइटेड हैं औऱ वो बीजेपी को हराने के लिए काम कर रहे हैं।’राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह ने आगे कहा कि झाबुआ और खातेगांव का दौरा उन्होंने इसलिए रद्द किया क्योंकि कांग्रेस महासचिव उनसे संगठन और चुनाव को लेकर कुछ अहम चर्चा करना चाहते थे। कांग्रेस में कोई गुटबाजी नहीं है। हालांकि, बीजेपी सचिव रजनीश अग्रवाल ने कहा कि कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के बीच खुलेआम मतभेद है। इस सबूत है उनके बीच में हुई बातचीत का वीडियो। अग्रवाल ने कहा कि हाल के विवाद से यह साफ है कि कमलनाथ और समर्थक चुनावी कैंपेन से दिग्विजय सिंह को दूर रखना चाहते हैं और उन्हें साइडलाइन करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में टिकट बंटवारे के बाद जब पार्टी नेताओं की नाराजगी सामने आने लगी तब कमलनाथ ने खुलेआम दिग्विजय के कपड़े फाड़ने के बारे में कहा था। इसके बाद दिग्विजय सिंह ने टिकट बंटवारे के लिए कमलनाथ को जिम्मेदार बताते हुए कहा था कि इलेक्ट्रॉल फॉर्म पर कमलनाथ ने हस्ताक्षर किए थे जो कि राज्य में पार्टी के चीफ हैं। बीजेपी नेता ने आगे कहा कि दोनों नेताओं के बीच बढ़ी दूरियों को बताने के लिए इससे बड़ी बात क्या हो सकती है। सुरजेवाला के इस बयान प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा के प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी ने कहा उनके बयान से यह साबित होता है कि दिग्विजय सिंह औऱ कमलनाथ जय और वीरू के उस छलिया कैरेक्टर जैसे हैं जो जेल से भाग गए थे। इससे पहले इसी महीने कमलनाथ का एक वीडियो सामने आया था उसमें उन्होंने शिवपुरी में किसी पार्टी नेता को टिकट नहीं दिए जाने पर पार्टी के लोगों से कहा था कि वो दिग्विजय सिंह के कपड़े फाड़े।

भाजपा ने खत्म किया सस्पेंस, विदिशा से मुकेश टंडन व गुना से शाक्य को मैदान में उतारा।

BJP has ended the suspense and fielded Mukesh Tandon from Vidisha and Shaky from Guna,” is what the statement translates to in English. उदित नारायण भोपाल। मप्र में सोमवार को नामांकन का आखिरी दिन है। इसके ठीक एक दिन पहले भाजपा ने विदिशा व गुना सीट पर अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए। भाजपा ने पांचवी सूची तक में 228 सीटों पर प्रत्याशी घोषित कर दिए थे, किंतु विदिशा व गुना को होल्ड पर रख दिया गया है। शनिवार को भाजपा के प्रदेश कार्यालय में करीब तीन घंटे तक चली केंद्रीय मंत्री अमित शाह की संभागीय बैठक से पहले उक्त दोनों सीटों को लेकर भी काफी देर तक चर्चा हुई। अंतत: दोनों सीटों पर प्रत्याशी के नामों का ऐलान कर दिया गया। टंडन के मामले में शाह ने लगाई थी फटकार। विदिशा से टंडन के साथ गुना से इस बार पन्नालाल शाक्य को टिकट मिला है। विदिशा क्षेत्र मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का गढ़ है। वे सीहोर जिले के बुधनी से भले ही चुनाव लड़ते हैं, किंतु विदिशा से उनका दसकों पुराना नाता है। परंतु, इस बार विधानसभा चुनाव में कई दावेंदार सामने आ गए। बताते हैं कि मुख्यमंत्री अपने करीबी मुकेश टंडन को ही टिकट देना चाह रहे थे, किंतु दावेदारों की संख्या देखकर वे भी कोई निर्णय नहीं ले पाए। अंतत: इसे हाईकमान पर छोड़ दिया गया। शनिवार को केंद्रीय मंत्री शाह ने रात 10 से लेकर एक बजे तक संभागीय बैठक लिए। उन्होंने एक-एक सीट की जानकारी ली और नेताओं को अपना सुझाव भी दिया। सूत्रों ने बताया कि शाह ने कुछ मुद्दों को लेकर काफी खरी खोटी भी सुनाई। इस बैठक से पहले दोनों सीटों को लेकर माथापच्ची हुई। इसके बाद निर्णय ले लिया गया। भाजपा के गढ़ से कांग्रेस की जीत भी रही वजह। 2018 के चुनाव में विदिशा से कांग्रेस के शशांक भार्गव जीते थे। इससे समूची भाजपा परेशान हो गई थी। इस बार ऐसी कोई गलती नहीं हो, इसलिए टिकट देने से पहले काफी माथापच्ची हुई। यहां पर भाजपा में तीन दावेदारों के बीच पेंच फंस गया था। यहां से पूर्व वित्तमंत्री राघव की बेटी ज्योति शाह के अलावा पिछला चुनाव हार चुके मुकेश टंडन भी दावेदारी कर रहे थे। इसके अलावा संगठन ने श्याम सुंदर शर्मा का नाम बढ़ाया था। जबकि गुना सीट को संघ की मजबूत सीट मानी जाती है। यह सीट संघ और भाजपा दोनों के कारण फंसी रही। इस सीट पर सिंधिया परिवार का भी प्रभाव है। इसके चलते यहां पर प्रत्याशी चयन को लेकर मामला अटका रहा। अभी इस सीट पर भाजपा के गोपीलाल जाटव विधायक हैं। इस बार गुना से पन्नालाल शाक्य को भाजपा ने मैदान में उतारा है।

मैं अच्छा हिंदू, राम मंदिर निर्माण के लिए दिए ₹1.11 लाख दान दिया : दिग्विजय सिंह

I am a devout Hindu, donated ₹1.11 lakh for the construction of the Ram Temple,” said Digvijaya Singh पीएम मोदी को चेक भेजा, लेकिन उन्होंने वापस भेज दिया, फिर मैंने…स्वयं जमा किए कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने रविवार को कहा कि उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए ₹1.11 लाख का दान दिया क्योंकि वह एक ‘अच्छे हिंदू’ हैं। Udit Narayan भोपाल। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने रविवार को कहा कि उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए ₹1.11 लाख का दान दिया क्योंकि वह एक ‘अच्छे हिंदू’ हैं। चुनावी राज्य मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पत्रकारों से बातचीत के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं सनातन धर्म का पालन करता हूं। मैं एक अच्छा हिंदू हूं। दिग्विजय सिंह का यह बयान ऐसे वक्त में सामने आया है जब अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की तारीख तय हो गई है। बता दें कि राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024 को होगी जिसमें प्रधानमंत्री मोदी के मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे। ऐसे में जब चुनावी राज्य मध्य प्रदेश में आदर्श आचार संहिता लागू है और कानूनी लिहाज से चुनाव में धर्म का इस्तेमाल प्रतिबंधित है, सूबे में राम मंदिर का मुद्दा भी गर्म है। राम हमारे इष्टदेव हैं… चुनाव में धर्म का उपयोग करना प्रतिबंधितमध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि मैं सनातन धर्म का पालन करने वाला व्यक्ति हूं और एक अच्छा हिंदू हूं। राम हमारे इष्टदेव हैं, हम सनातन धर्म का पालन करते हैं लेकिन चुनाव में धर्म का उपयोग करना प्रतिबंधित है… राम मंदिर के निर्माण के लिए शिवराज सिंह चौहान ने 1 लाख रुपए का दान दिया और मैंने 1 लाख 11 हजार रुपए का दान दिया। दिग्विजय सिंह ने कहा कि मैंने अपने योगदान का चेक प्रधानमंत्री मोदी को भेजा कि जाकर जमा करवा दीजिए… मैंने वह चेक ट्रस्ट को सौंपने के लिए प्रधानमंत्री मोदी को भेजा। उन्होंने इसे वापस भेज दिया और मुझसे इसे स्वयं जमा करने के लिए कहा। मैंने इसे जमा कर दिया। हाल ही में मध्य प्रदेश में राममंदिर के निर्माण का श्रेय लेने वाले होर्डिंग नजर आए थे। इस पर कांग्रेस की ओर से आपत्ति जताई गई थी। वहीं भाजपा ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा था कि कांग्रेस राममंदिर निर्माण को लेकर दुखी है। वहीं कांग्रेस ने उस पर भगवान राम की भक्ति से भटकने का आरोप लगाया था। कांग्रेस की इंदौर इकाई ने निर्वाचन आयोग से शिकायत की थी कि भाजपा ने चुनाव प्रचार के दौरान अयोध्या में राममंदिर और उज्जैन में महाकाल लोक का प्रदर्शन करके धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल किया। यह आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन है। वहीं भाजपा नेताओं ने कांग्रेस की शिकायत को एक्स पर साझा करते हुए उस पर राम विरोधी होने का आरोप लगाया। मध्य प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा ने शनिवार को कहा था कि कांग्रेस का मूल चरित्र भगवान श्रीराम, हिंदुत्व और सनातन धर्म के खिलाफ रहा है। कांग्रेस राम मंदिर के होर्डिंग के खिलाफ निर्वाचन आयोग से शिकायत कर रही है, जो दुनिया की आस्था का केंद्र है। कांग्रेस के नेता कह रहे हैं कि ऐसे होर्डिंग हटाए जाने चाहिए। कांग्रेस को दुख है कि राम मंदिर के होर्डिंग्स क्यों लगाए गए हैं… कांग्रेस को राम मंदिर बनने से दुख है।

25 चुनाव प्रत्याशियों के साथ विंध्य से नारायण त्रिपाठी ने खोला चुनावी मोर्चा।

Narayan Tripathi from Vindhya opened an electoral front with 25 election candidates. विंध्य क्षेत्र में ब्राह्मण समाज का बड़ा चेहरा माने जाते हैं। नारायण त्रिपाठी। 5 से 7 विधानसभा सीटों पर जीत के आसार, और भी कई सीटें होंगी प्रभावित। उदित नारायण सतना। विंध्य की राजनीति में एक नया मोड़ सामने आया है, जहां भाजपा से इस्तीफा दे चुके विधायक नारायण त्रिपाठी ने भाजपा और कांग्रेस दोनों को ही झटका देते हुए विंध्य जनता पार्टी का गठन कर दिया। विधायक नारायण त्रिपाठी ने अब अपने पत्ते खोलते हुए विंध्य जनता पार्टी के 25 प्रत्याशियों की पहली सूची भी जारी कर दी है। नवगठित मैहर जिले की सीट से खुद नारायण त्रिपाठी चुनाव लड़ेंगे। इस सीट को नारायण त्रिपाठी का मजबूत गढ़ माना जाता है। इसके साथ ही आज शाम तक विंध्य जनता पार्टी चुनाव प्रत्याशियों की दूसरी लिस्ट भी जारी कर सकती है। जानकारी मिली है की पार्टी नेतृत्व द्वारा दूसरी लिस्ट में करीब 15 प्रत्याशियों के नामों पर सहमति बन चुकी है। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में प्रदेश की सभी 230 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। हम आपको बता दें कि नारायण त्रिपाठी ने विंध्य के अलावा मध्य भारत और महाकौशल में भी अपने प्रत्याशी मैदान में उतार दिए हैं। भारतीय जनता पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देने के बाद तरह तरह के कयास नारायण त्रिपाठी के लिए लगाए जा रहे थे, लेकिन इन सभी पर विराम लगाते हुए नारायण ने अब अपनी विंध्य जनता पार्टी से चुनाव मैदान पर उतरने का आगाज कर दिया है, जिसका चुनाव चिन्ह गन्ना और किसान है। विंध्य में मुकाबला हुआ त्रिकोणीय। यहां ध्यान देने योग्य बात यह भी है कि विंध्य में कुल 30 विधानसभा सीट हैं। साल 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने इन 30 में से 24 सीटों पर जीत दर्ज की थी। विधायक नारायण त्रिपाठी ब्राह्मण समाज का बड़ा चेहरा माने जाते हैं और विंध्य क्षेत्र की अधिकांश सीटों पर हार जीत का निर्णय ब्राह्मण मतदाता करते हैं। विधायक नारायण त्रिपाठी की यहां की राजनीति में तगड़ी पकड़ है। राजनीति के जानकारों के हिसाब से विंध्य क्षेत्र का चुनाव परिणाम इस बार बहुत ही चौंकाने वाला रहेगा। नारायण त्रिपाठी की पार्टी के चुनाव मैदान में उतरने से अब यहां मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। जिसके चलते यहां कांग्रेस और भाजपा दोनों ही पार्टी के समीकरण गड़बड़ा रहे हैं और क्षेत्र की करीबन पांच से सात सीटों पर नारायण त्रिपाठी की पार्टी की जीत सुनिश्चित दिखाई दे रही है। जिसे रोक पाना अब दोनों ही पार्टियों के लिए असंभव नजर आ रहा है। जिसके चलते भाजपा और कांग्रेस दोनों ही खेमों में खलबली मची हुई है। इस चुनाव में विंध्य क्षेत्र से तीनों पार्टियों में से किसका पलड़ा भारी रहेगा यह तो चुनाव परिणाम ही बताएगा। मैहर विधानसभा में बजा चुनावी बिगुल। मध्य प्रदेश के मैहर विधानसभा क्षेत्र के विधायक नारायण त्रिपाठी ने अपने पत्ते खोलते हुए आगामी 2023 के चुनाव में अपनी विंध्य जनता पार्टी से चुनाव मैदान पर उतरने का आगाज कर दिया है। यदि हम बात करें मैहर विधानसभा क्षेत्र की तो यह विधानसभा क्षेत्र नारायण त्रिपाठी का गढ़ माना जाता है, जहां नारायण त्रिपाठी अलग-अलग दलों से चार बार विधायक चुने जा चुके हैं। अभी तक नारायण त्रिपाठी समाजवादी पार्टी, कांग्रेस पार्टी और भारतीय जनता पार्टी से मैहर विधानसभा क्षेत्र के विधायक चुने जा चुके हैं, लेकिन आगामी 2023 के चुनाव को लेकर नारायण त्रिपाठी ने भारतीय जनता पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था, ऐसे में कयास लगाए जा रहे थे कि नारायण त्रिपाठी कांग्रेस पार्टी का दामन थाम कर एक बार फिर कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे, लेकिन सभी पार्टियों को दरकिनार करते हुए नारायण त्रिपाठी ने अब अपने द्वारा गठन की गई विंध्य जनता पार्टी से मैहर विधानसभा क्षेत्र के चुनावी मैदान पर ताल ठोक कर सभी कयासों पर विराम लगा दिया है। वीजेपी की सूची ने बढ़ाई भाजपा-कांग्रेस की धड़कनें। नारायण त्रिपाठी ने विंध्य जनता पार्टी के उम्मीदवारों की पहली सूची जारी करते हुए चुनावी बिगुल बजा दिया है। पहली सूची में नारायण त्रिपाठी ने सतना जिले की 7 विधानसभा में से 4 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार घोषित किए हैं, जिसमें मैहर से खुद नारायण त्रिपाठी, सतना विधानसभा से हरिओम गुप्ता, रैगांव विधानसभा क्षेत्र से आरती वर्मा और अमरपाटन विधानसभा क्षेत्र से शशि सतेंद्र शर्मा उम्मीदवार घोषित किए हैं। फिलहाल नारायण त्रिपाठी ने विंध्य जनता पार्टी की सूची जारी करने के बाद भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस पार्टी दोनों की ही धड़कने बढ़ा दी हैं। वीजेपी ने 25 प्रत्याशियों की पहली सूची जारी की। विंध्य जनता पार्टी द्वारा जारी पहली चुनाव प्रत्याशी लिस्ट में रैगांव से आरती वर्मा, सतना से हरिओम गुप्ता, अमरपाटन     से शशि सत्येंद्र शर्मा, सेमरिया से हासिफ मोहम्मद अली, त्यौथर से कमांडो अरुण गौतम, देवतालाब से कुंजबिहारी तिवारी, गगुढ़ से शिवमोहन शर्मा, चुरहट से अरुण द्विवेदी और सीधी से वाल्मिीक तिवारी को प्रत्याशी घोषित किया है। जबकि सिंहावल से आशीष मिश्रा, चितरंगी से रामकृष्ण कोल, सिंगरौली से कुंदन पांडेय, ब्यौहारी से लेखन सिंह, जयसिंह नगर से फूलमती सिंह, जैतपुर से हीरालाल पनिका और अनूपपुर से प्यारेलाल पनिका को टिकट दिया है। इसके साथ ही पुष्पराजगढ़ से अमृतलाल सोनवानी, बांधवगढ़ से धूप सिंह, मानपुर से राजकुमार बैगा, शहपुरा से मदन सिंह परस्ते, डिंडौरी से सितार मरकाम, भोपाल दक्षिण पश्चिम से मनीष पांडेय, अंबेडकर नगर से वैघनाथ मिश्रा और बड़ामलहरा से दिनेश यादव को चुनाव प्रत्याशी घोषित कर मैदान में उतारा है। विंध्य प्रदेश की मांग करते रहे हैं नारायण त्रिपाठी। नारायण त्रिपाठी हमेशा विंध्य प्रदेश की मांग को लेकर मीडिया के सुर्खियों में रहते हैं और वे भाजपा सरकार में रहकर भी विंध्य प्रदेश की मांग को लेकर अपनी ही सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करते थे। वर्ष 2018 के चुनाव में नारायण त्रिपाठी ने भारतीय जनता पार्टी से चुनाव में जीत दर्ज की थी, जहां उनके सामने उनके प्रतिद्वंदी श्रीकांत चतुर्वेदी चुनाव मैदान में थे। श्रीकांत चतुर्वेदी को मात देते हुए नारायण त्रिपाठी ने जीत दर्ज की थी। मैहर विधानसभा चुनाव 2023। मैहर विधानसभा सीट पर अगले महीने चुनाव होना है। कांग्रेस ने जहां इस सीट से धर्मेश घई को अपना उम्मीदवार बनाया … Read more

कांग्रेस में कई चक्कियां चल रही हैं और आपस में ही एक-दूसरे को पीस रही हैं।- शिवराज सिंह चौहान.

Shivraj Singh Chouhaan; Digvijay Singh; Kamalnath; Sahara Samachaar;

In Congress, there are many factions and they are grinding each other.” – Shivraj Singh Chouhan. उदित नारायणभोपाल। मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव का चुनावी समर अब तेज हो गया है। कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के नेता अब एक-दूसरे पर जबरदस्त हमला बोल रहे हैं। दोनों पार्टियों के नेता जमकर जुबानी हमले बोल रहे हैं। इसी बीच प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस पार्टी के नेताओं पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में कई चक्कियां चल रही हैं और आपस में ही एक-दूसरे को पीस रही हैं। शिवराज सिंह ने कहा, “कांग्रेस में इस समय चक्कियां चल रही हैं। कमलनाथ कहते हैं कि मेरी चक्की बहुत बारीक पीसती है लेकिन इस बार दिग्विजय की चक्की ने कमलनाथ को ही पीस दिया। कमलनाथ, दिग्विजय और जयवर्धन के कुर्ते फाड़ने की बात करते थे लेकिन सभी कमलनाथ समर्थकों के टिकट कटवाकर अब दिग्विजय सिंह ने कमलनाथ का कुर्ता फाड़ दिया।” उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह की चक्की ने अब कमलनाथ को पीस दिया है। बता दें कि बीते 17 अक्टूबर को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय भोपाल में चुनावी घोषणा पत्र जारी हो रहा था। इस दौरान हंसी ठिठोली करते हुए कमलनाथ ने दिग्विजय सिंह से कहा कि आपको गाली खानी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि मेरे पास कुछ लोग आये और उन्होंने कहा कि उनका टिकट कट गया है। उनसे मैंने कहा कि आप लोग दिग्विजय और जयवर्धन सिंह के कपडे फाड़ो। इस पर दिग्विजय सिंह ने हल्के-फुल्के अंदाज में कमलनाथ से कहा कि ए फॉर्म और बी फॉर्म में दस्तखत किसके होते हैं, पीसीसी अध्यक्ष के तो कपड़े किसके फटने चाहिए, बताओ? दोनों नेताओं की इस बातचीत का वीडियो जमकर वायरल हुआ था। इस वीडियो को कई बीजेपी नेताओं ने इन दो नेताओं की आपसी कलह बताकर पोस्ट किया था। अब शिवराज सिंह चौहान ने एक बार फिर से इसी वीडियो के आधार पर कांग्रेस पार्टी पर तंज कसा है।

हनुमानजी को साष्टांग प्रणाम कर रामेश्वर शर्मा ने दाखिल किया नामांकन.

Rameshwar Sharam; Nomination; Bhopal; Huzur; Electons; Sahara Samachaar;

Rameshwar Sharma paid his respects to Lord Hanuman and filled his nomination. उदित नारायणभोपाल । #हुजूर विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी विधायक रामेश्वर शर्मा ने गुरुवार की दोपहर अपना नामांकन पत्र रिटर्निंग ऑफिसर के समक्ष दाखिल किया। इसके पूर्व वे सुबह घर से निकलकर सीधे #चारइमली हनुमान मंदिर पहुंचे और वहां हनुमानजी को साष्टांग प्रणाम कर पूजा अर्चना की। तत्पश्चात बंगले से रवाना होने के पूर्व श्री शर्मा की धर्मपत्नी श्रीमती संगीता शर्मा ने उन्हें विजय तिलक किया और दही खिलाकर शुभकामनाएं व्यक्त की। इसके बाद वह क्षेत्र के वरिष्ठ नेताओं के साथ नामांकन दाखिल करने हुजूर तहसील कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने शुभ मुहूर्त में हुजूर विधानसभा के रिटर्निंग ऑफिसर #आशुतोषशर्मा के समक्ष अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। उन्होंने आज नामांकन पत्र के दो अलग अलग सेट दाखिल किए। इस दौरान तहसील कार्यालय में उनके साथ भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील वासवानी, रमेश वर्मा, भागीरथ पाटीदार, बालाराम मीणा, रमेश जनयानी, ओमप्रकाश मेवाड़ा, हरिनारायण पटेल, प्रकाश अहिरवार, रघुनाथ सिसोदिया, श्रीमती चंद्रेश सुरेश राजपूत, धन्नालाल बघेल, सुमारैया जामोद, सरदार बारमेया मौजूद रहे। जनसेवा का सनातन संकल्प सदैव निभाऊंगा : रामेश्वर शर्मा नामांकन के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए भाजपा प्रत्याशी रामेश्वर शर्मा ने कहा किजब से राजनीति में आया मैंने जन सेवा का सनातन संकल्प लिया है। सनातन संकल्प कभी खाली नहीं जाता। इसे सदैव निभाऊंगा। पिछले 10 वर्षों में भी विधायक रहते हुए मैंने क्षेत्र की सेवा और जनकल्याण में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। इस बार पुनः विधायक बनकर हुजूर विधानसभा क्षेत्र के घर-घर में खुशहाली आए, सबको रोजगार मिले और हुजूर विधानसभा सिर्फ भोपाल में ही नहीं अपितु पूरे मध्य प्रदेश में नंबर वन बनकर उभरे इस हेतु कार्य करूंगा।

विदिशा जिले की ये मंडी ए ग्रेड मंडी में शुमार पर व्यवस्थाओ के नाम पर सिफर.

Vidisha; Ganjbasoda; Wheat Market; Sahara Samachaar;

Ganjbasoda in Vidisha district is considered an “A-grade” market but falls short in terms of facilities. विदिशा विशेष संवाददाता विदिशा, जिले की गंजबासौदा तहसील में स्थित कृषि उपज मंडी में किसान व्यवस्थाओं के अभाव में अपनी उपज बेचने में जद्दो जहद करते हैं. गंजबासौदा मंडी ए ग्रेड की मंडियों में शामिल है, लेकिन आज भी कृषि मंडी व्यवस्थाओं का जाल है. किसान परेशान होकर मंडी व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह लगा रहे हैं और मंडी के सचिव किसानो के आरोपों से अपने आप को पाक साफ़ बता कर मंडी सिस्टम का हवाला दे रहे है. गंजबासोड़ा मंडी का ए ग्रेड की मंडियों में शुमार है पर मंडी में किसानो के लिए भोजन का कोई इंतज़ाम तक नहीं है. मंडी में किसानो को बैठने की व्यवस्था के भी आभाव है. कई माह से कैंटीन बंद है. मंडी में नहीं है भोजन का इंतजाम परिसर में मवेशी घूमते नजर आते हैं. किसानों के अनुसार, वे अपनी फसल बेचने के इंतज़ार की दिनों से कर रहे है तुलाई की ख़ास व्यवस्था के आभाव है. मंडी में सड़को की हालत दयनीय है.

मध्य प्रदेश के परिवहन एवं राजस्व मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के खिलाफ आचार संहिता के उल्लंघन के ममाले में सागर ज़िले के राहतगढ़ थाने में दर्ज़ हुई FIR.

Govind Singh Rajput; Sagar; Rahatgarh; FIR; Code of Conduct; BJP;

FIR filed against Madhya Pradesh’s Transport and Revenue Minister Govind Singh Rajput

हरदा नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष ने भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी व भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र दिया.

Harda; MP Elections; Kamal Patel; BJP; Surendra Jain;

The former president of Harda Municipal Council has resigned from the BJP’s state executive and primary membership of the BJP. हरदा, नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष और मप्र के कृषि मंत्री कमल पटेल के बचपन के मित्र  सुरेंद्र जैन ने आज मप्र भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य व भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया है। कमल पटेल और सुरेन्द्र जैन ने साथ साथ राजनीति शुरु की। दोनों मित्र होने के साथ साथ एक दूसरे के गहरे राजदार भी हैं। कमल पटेल को विधायक व मंत्री बनाने सुरेन्द्र जैन ने दिन रात एक किया है। सुरेन्द्र जैन और उनकी पत्नि को अनेक बार नगर पालिका अध्यक्ष बनवाने में कमल पटेल ने हरसंभव मदद की है। हरदा की राजनीति में यह दोनों नेता दो शरीर एक जान माने जाते थे। दोनों सगे भाइयों से ज्यादा खास बनकर रहने वाले यह दोनों नेता अब एक दूसरे की शक्ल भी देखना पसंद नहीं कर रहे हैं। दरअसल इस झगड़े की शुरुआत कमल पटेल के बेटे की सोशल मीडिया पर की गई बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी है। सुरेन्द्र जैन ने हरदा से विधानसभा टिकट की दावेदारी की तो कमल पटेल के बेटे ने उन्हें गद्दार और उनके खून में गद्दारी जैसे शब्द लिख दिए। यह बात सुरेन्द्र जैन से ज्यादा उनके बेटे को चुभ गई। यहीं से विवाद की शुरुआत हुई। मेरी जानकारी के अनुसार सुरेन्द्र जैन ने बड़ा दिल रखकर प्रयास किया कि टिकट मिलने के बाद कमल पटेल फोन करेंगे तो वे सभी शिकवे शिकायत भुलाकर हमेशा की तरह उन्हें जिताने में जुट जाएंगे। लेकिन कमल पटेल ने न तो फोन किया और न ही किसी माध्यम के जरिए संपर्क किया। बल्कि संदेश आते रहे कि सुरेन्द्र जैन के बिना चुनाव जीतकर दिखाऊंगा। सुरेन्द्र जैन ने अपने स्वाभिमान के खातिर आखिर भारी मन से भाजपा से इस्तीफा दे दिया है। मुझे लगता है कि सुरेन्द्र जैन का भाजपा छोड़ना कमल पटेल को भारी पड़ सकता है।

भारतीय जनता पार्टी के पूर्व गृह मंत्री के समर्थकों ने प्रदेश अध्यक्ष को घेरा.

Sahara Samachaar; BJP; Bhartiya Janta Party; Jabalpur; Indore; Chhindwara; Gwalior; Neemuch; Elections; VD Sharma;

Supporters of the former Home Minister of the Bharatiya Janata Party surrounded the state president.

पुष्पराज बागरी ने भारतीय जनता पार्टी से दिया इस्तीफा.

Pushparaj Bagri; Sahara Samachaar; BJP; MP Politics; MPElections;

पुष्पराज बागरी ने भारतीय जनता पार्टी से दिया इस्तीफा.

Manish Trivedi

Pushpraj Bagri 2

पूर्व मंत्री स्वर्गीय जुगल किशोर बागरी के बेटे पुष्पराज बागरी ने भारतीय जनता पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने फेसबुक में पोस्ट करते हुए कहा कि पिछले चुनाव में मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष ने जो मुझसे वादा किय था उसमें भी प्रदेश नेतृत्व झूठा निकला।

कटनी जिले के चारों विधानसभा क्षेत्र में चुनावी हलचल तेज, उठे बगावत के स्वर.

MP Elections; BJP; Congress; INC; Bhartiya Janta Party; Katni; Vidhaansabha Elections;

Election fervor is running high in all four assembly constituencies of Katni district, with a growing clamor for change.

पूर्व मंत्री दीपक जोशी को कांग्रेस प्रत्याशी बनाए जाने के बाद कई कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने छोड़ी पार्टी बीजेपी ने ली चुटकी

पुष्पेंद्र सारदिया, खातेगांव खातेगांव विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस से प्रत्याशी बनाए गए दीपक जोशी को लेकर स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं में आक्रोश स्थानीय उम्मीदवार को टिकट नहीं देने से कई कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने दिए इस्तीफे कांग्रेस से ओबीसी वर्ग का चेहरा लक्ष्मीनारायण बंदावाला ने भी इस्तीफा दिया स्थानीय कार्यकर्ताओं ने अपनी पार्टी पर उपेक्षा के आरोप लगाकर दिए इस्तीफे इस कड़ी में विनोद चावड़ा जो कि जिला महामंत्री है कांग्रेस से उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है साथ ही कांग्रेस से टिकट मांगने वाले लक्ष्मीनारायण अध्यक्ष ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ने भी पार्टी का दामन छोड़ दिया है साथ ही एक और बड़े चेहरे मुकेश पटेल ब्लॉक कांग्रेस के पिछड़ा वर्ग अध्यक्ष उन्होंने भी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है खातेगांव से भाजपा विधायक और तीसरी बार प्रत्याशी बनाए गए आशीष शर्मा का बयान – पूर्व मंत्री दीपक जोशी का कांग्रेस से टिकट होने पर बोले विधायक आशीष शर्मा…कांग्रेस का टिकट,कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की आकांक्षाओं पर ही खरा नहीं उतरेगा,बहुत सारे कांग्रेस के स्थानीय दावेदार यहाँ से प्रत्याशी बनने की मांग कर रहे थे।कांग्रेस नेतृत्व ने पूरे प्रदेश में सर्वे के आधार पर नहीं बल्कि नेताओं के चहेतों को टिकट देकर उपकृत किया है।ये क्षेत्र भाजपा का परम्परागत गढ़,इस बार भी प्रचंड बहुमत से भाजपा खातेगांव से जीतेगी।पूर्व मंत्री जोशी का पार्टी में विरोध पर बोले आशीष शर्मा-जब कुठाराघात होता है तो विरोध स्वभाविक। दीपक जोशी बाहरी प्रत्याशी है,यहाँ के स्थानीय नहीं। इसलिए जनता भलीभांति जानती है कि कौन उनके सुख दुःख में काम करता है…जीत को लेकर 100 प्रतिशत आश्वत हूँ।साथ ही कहा-2025 तक क्षेत्र के समस्त गाँव के किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने का काम हम करेंगे।

कमलनाथ सरकार में लाखों नर्सिंग छात्र छात्राओं के साथ होगा न्याय फर्जी नर्सिंग कॉलेजों होंगे बंद – रवि परमार

Nursing Students; Fake Nursing Colleges; Ravi Parmar; NSUI; Jabalpur; INC; MP Congress; Kamalnath;

“In the Kamal Nath government, justice will be done with lakhs of nursing students; fake nursing colleges will be shut down – Ravi Parmar.”

टीकमगढ़ में दिग्विजय सिंह के खास एवं कांग्रेस के उम्मीदवार के यहां पुलिस की छापेमारी

गुरुवार सुबह असम पुलिस की चार सदस्यीय टीम पूर्व मंत्री यादवेंद्र सिंह के घर पर जांच करने के लिए पहुंच गई। असम पुलिस किसी फ्राड के मामले में पूर्व मंत्री से पूछताछ करने के लिए आई है। टीकमगढ़. देवेंद्र साहू । गुरुवार सुबह असम पुलिस की चार सदस्यीय टीम पूर्व मंत्री और टीकमगढ़ सीट से कांग्रेस उम्मीदवार यादवेंद्र सिंह के घर पर जांच करने के लिए पहुंच गई। असम पुलिस किसी फ्राड के मामले में पूर्व मंत्री से पूछताछ करने के लिए आई है। हालांकि इससे अधिक जानकारी अभी असम पुलिस की टीम ने नहीं दी है। स्थानीय पुलिस ने पूर्व मंत्री के घर के आसपास कड़े सुरक्षा के बंदोबस्त किए हैं। जिससे कोई अप्रिय स्थति न बने। जानकारी के मुताबिक गुरुवार सुबह असम पुलिस की चार सदस्यीय टीम टीकमगढ़ पहुंची। टीकमगढ़ पहुंचने के साथ ही टीम ने स्थानीय पुलिस को साथ लिया और पूर्व मंत्री यादवेंद्र सिंह बुंदेला के घर पहुंची। टीम पूर्व मंत्री यादवेंद्र सिंह सहित उनके स्वजनों से पूछताछ कर रही है।कोतवाली थाना प्रभारी आनंद राज का कहना है कि पूर्व मंत्री व उनके स्वजनों से पूछताछ असम पुलिस कोर्ट के एक फ्राड के मामले की जांच के आदेश के बाद कर रही है। पुलिस ने यादवेंद्र सिंह के मकान को छावनी में बदल दिया है। जिससे कोई अप्रिय स्थति न बने। देखे पूरी खबर : https://youtu.be/PmJx8FatA6c https://saharasamachaar.com/wp-content/uploads/2023/10/टीकमगढ़-में-दिग्विजय-सिंह-के-खास-एवं-कांग्रेस-के-उम्मीदवार-के-यहां-पुलिस-की-छापेमारी.mp4

चुनाव प्रचार के दौरान नेताओं की सभा में नहीं जुट पा रही भीड़,

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव (Madhya Pradesh Assembly Elections)में प्रचार के दौरान प्रत्याशियों (candidates)को खासी मुसीबत (Trouble)का सामना करना पड़ रहा है. ग्रामीण इलाकों (localities)में राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों (candidates)को सुनने के लिए लोग इकट्ठा नहीं हो पा रहे हैं. सभाओं में खाली कुर्सियां नेताओं के लिए बड़ी मुसीबत बनी हुई हैं. राघोगढ़ के भाजपा प्रत्याशी हीरेंद्र सिंह के एक कार्यकर्ता सम्मेलन में ग्रामीण इकट्ठा नहीं हो पाए. नतीजतन कुर्सियां खाली पड़ी रहीं. धरनावदा में आयोजित अपनी सभा में खाली कुर्सियों को देखकर बीजेपी प्रत्याशी हीरेंद्र सिंह ने मंच से कहा, मैं 100 टंच किसान हूं. पार्टी ने मुझे टिकट दिया इसलिए कुर्ता पजामा पहनकर घूम रहा हूं. फसल कटाई चल रही है, इसलिए लोग खेतीबाड़ी में व्यस्त हैं. युवा वर्ग भी काम पर निकल जाता है इसलिए लोग नहीं आ पाए. मैं किसानों की परेशानी समझता हूं. कार्यकर्ता सम्मेलन में भाजपा प्रत्याशी ने खुद को कट्टर सनातनी बताते हुए कहा कि चुनाव तो हम जीत चुके हैं. विपक्षियों की बौखलाहट दिखाई दे रही है. कांग्रेस के ठेकेदार डराने धमकाने का काम कर रहे हैं. भाजपा में कोई ठेकेदार नहीं है बल्कि संगठन सर्वोपरी है. हीरेन्द्र सिंह ने कांग्रेसी नेता वीरेंद्र रघुवंशी का भी जिक्र किया. कहा कि वीरेंद्र भैया के साथ बहुत बुरा हुआ. पार्टी में वापस लौटेंगे तो मान सम्मान के साथ उनका स्वागत किया जाएगा. हीरेन्द्र सिंह ने दिग्विजय सिंह पर कटाक्ष करते हुए कहा कि कमलनाथ उनके कपड़े फाड़ने की बात कर रहे हैं. बड़े लोगों की बड़ी बातें होती हैं. बीजेपी प्रत्याशी ने कार्यकर्ताओं को नसीहत देते हुए कहा कि अब बैठकों का दौर खत्म हो चुका है. समय कम है. चुनाव में जुट जाएं. चुनाव बेटी की शादी की तरह होता है. डेढ़ महीने पहले से जुटना पड़ता है . वहीं, राघोगढ़ से कांग्रेस के प्रत्याशी विधायक जयवर्धन सिंह भी विधानसभा क्षेत्र में प्रचार प्रसार करने में जुटे हैं. जयवर्धन ने मंच से बयान देते हुए कहा बीजेपी के राज में किसान बदहाल है. सहकारी बैंकों में करोड़ों के घोटाले हो रहे हैं. 2003 से पहले जब कांग्रेस सरकार थी तो हर पांच साल में कृषि मंडी, सहकारी बैंक और सोसाइटी में चुनाव होते थे. लेकिन अब भाजपा के दलाल इन संस्थाओं में बैठ गए हैं. हाल ही में दिग्विजय सिंह के विधायक पुत्र का वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें वे एक मासूम बच्चे को गोद में लेकर भाषण देते दिखाई दिए थे. बता दें कि मध्य प्रदेश की 230 सदस्यीय विधानसभा के आगामी चुनाव के लिए 17 नवंबर को मतदान होगा और मतों की गिनती 3 दिसंबर को होगी.

पूर्व मंत्री इमरती देवी की सिंधिया से मांग, बोलीं-डबरा को जिला बनवा दें, मैं राजनीति छोड़ दूंगी

संतोष सिंह तोमर,ग्‍वालियर । डबरा विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी और पूर्व मंत्री इमरती देवी (Imarti Devi) का एक वीडियो सामने आया है जिसमें उन्होंने डबरा (Dabra) को जिला बनाने की मांग उठाई है। उन्होंने एक कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) के सामने ऐलान कर दिया कि इस बार डबरा को जिला बनवा दीजिए। भले ही आगे मुझे टिकट मत देना, लेकिन डबरा को जिला बनवा दें। मैं अपनी राजनीति खत्म कर दूंगी। पूर्व मंत्री इमरती देवी भाजपा के बूथ कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित कर रही थीं। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी शामिल हुए। मध्य प्रदेश की राजनीति में अपने बयानों में हमेशा में हमेशा चर्चा में रहने वाली पूर्व मंत्री और भाजपा नेता इमरती देवी में आज डबरा तहसील को जिला बनाने की मांग की। बीजेपी के बूथ कार्यकर्ता सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से उन्होंने मंच से मांग उठाई कि महाराज डबरा को जिला बनवा दीजिए मुझे अब कोई और काम नहीं चाहिए। यदि मैं मर गई तो डबरा के लोग कहेंगे कि डबरा को जिला ज्योतिरादित्य सिंधिया और इमरती देवी ने बनवाया था। इमरती देवी ने कहा- महाराज इस बार डबरा को जिला बनवा दीजिए भले ही आगे मुझे टिकट देना या ना देना, जिला बनते ही मैं अपनी राजनीति खत्म कर दूंगी। भाजपा ने डबरा विधानसभा से पूर्व मंत्री इमरती देवी को अपना प्रत्याशी बनाया है। वहीं कांग्रेस ने मौजूदा विधायक सुरेश राजे को फिर से मैदान में उतारा है। डबरा विधानसभा में समधि और समधन के बीच कड़ी टक्कर मानी जा रही है। पिछले 2020 के उपचुनाव में उनके समधी सुरेश राजे ने इमरती देवी को शिकस्त दी थी।

कांग्रेस नेता सिद्धार्थ तिवारी एवं पन्ना जिले से पूर्व विधायक फुंदर लाल चौधरी ने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की.

Siddhart Tiwari; Shivraj Singh Chouhaan; VD Sharma; BJP; MPCongress;

Congress leader Siddharth Tiwari and former MLA from Panna district, Fundar Lal Choudhary, have joined the Bharatiya Janata Party as members.

प्रियदर्शनी राजे और महाआर्यमन ने किया राजमाता का पुण्य स्मरण।

Priyadarshni Raje; Gwalior News; Gwalior

Priyadarshini Raje and Maharyaman performed the holy remembrance of the queen mother. विजयाराजे सिंधिया की 104वीं जयंती पर अम्मा महाराज की छत्री में श्रद्धासुमन अर्पित करने पहुंचे सैकड़ों नेता।प्रियदर्शनी राजे और महाआर्यमन ने किया राजमाता का पुण्य स्मरण” संतोष सिंह तोमरग्वालियर। जनसेवा के लिए राजपथ से लोकपथ का मार्ग चुनने वाली राजमाता विजयाराजे सिंधिया की 104वीं जयंती गुरुवार को मनाई गई।राजमाता विजयाराजे सिंधिया की जयंती के अवसर पर सिंधिया परिवार की ओर से प्रियदर्शनी राजे और महाआर्यमन सिंधिया ने कटोराताल थीम रोड स्थित छत्री परिसर में पहुंचकर करुणा की मूर्ति राजमाता विजयराजे सिंधिया की प्रतिमा पर पुष्पांजलि के साथ श्रद्धा सुमन अर्पित कर उनका पुण्य स्मरण किया।वहीं मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों के चलते भागदौड़ में व्यस्त केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दिन की शुरुआत अपनी दादी राजमाता विजयाराजे सिंधिया को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए की। श्री सिंधिया ने अपने बचपन की एक फोटो ‘जिसमें उनकी दादी विजयाराजे सिंधिया उन्हें अपनी गोद में लिए हुए हैं।’ सोशल मीडिया X (एक्स) पर शेयर करते हुए लिखा “अपने सीधे-सरल स्वभाव और लोकसेवा के प्रति समर्पण के कारण मेरी आजीअम्मा आज भी मध्य प्रदेश और देश के कण-कण और जन-जन के दिलों में बसती हैं। राष्ट्र सेवा को अपनी प्राथमिकता मानने वाली राजमाता विजयाराजे सिंधिया जी भारतीय जनसंघ एवं भाजपा की आधार स्तंभ थी, जिन्होंने भारतीय राजनीति को एक नई पहचान देने का कार्य किया। वह आज भी हर घड़ी प्रकाशपुंज की भांति मेरा मार्गदर्शन करती हैं। उनकी जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। उनका आशीर्वाद सदैव मेरे मध्य प्रदेश पर बना रहे, यही प्रार्थना है।”छत्री परिसर में सुबह से आदरांजलि अर्पित करने वालों की भीड़ जुटना शुरू हो गई। दोपहर तक ग्वालियर-चंबल अंचल के अनेक नेताओं व पार्टी कार्यकर्ताओं ने प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उनके आदर्शां को जीवन में अपनाकर राजमाता के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

MP : तीसरी लहर की आशंका खत्म होने तक नहीं खुलेंगे स्कूल; स्कूल सिर्फ ट्यूशन फीस लेंगे

cm shivraj

भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है, कोरोना की तीसरी लहर से इनकार नहीं किया जा सकता। बच्चों की जिंदगी दांव पर नहीं लगा सकते, इसलिए तीसरी लहर की आशंका समाप्त होने के बाद ही स्कूल खुलेंगे। केवल पूर्व निर्धारित ट्यूशन फीस ली जा सकेगी। इसमें कोई वृद्धि नहीं होगी और न ही इसके अतिरिक्त कोई शुल्क वसूला जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा, कोरोना के चलते स्कूल नहीं खुल पाने के कारण शिक्षकों की सैलरी खासकर प्राइवेट सकूलों में दिक्कत आ रही है। इसके साथ ही बच्चों के अभिभावकाें की अपनी समस्याएं हैं। उन्होंने कहा कि मुझे कई अभिभावकों ने बताया कि स्कूल बंद होने पर पढ़ाई नहीं हो रही है, लेकिन फीस बढ़ाई जा रही है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि कोई भी स्कूल टयूशन फीस के अतिरिक्त कोई शुल्क नहीं लेगा। शिवराज ने कहा, चिंता इस बात की है कि लोग अब बिना मास्क के ही घूम रहे हैं। जनता भूल जाती है, कोरोना की दूसरी लहर में कितने कष्ट उठाना पड़े। उन्होंने कहा कि मंत्रालय के सामने बाजार में एक साथ 600 से ज्यादा लोग देखे गए। इसमें से 70% ने मास्क नहीं लगाया था। यह तीसरी लहर को न्योता है। मुख्यमंत्री ने सोमवार देर शाम प्रदेश के सभी कोविड प्रभारी मंत्री, अधिकारी, कर्मचारी व क्राइसिस मैनेजमेंट समूहों के सदस्यों को टीकाकरण और कोविड-19 की संभावित तीसरी लहर के नियंत्रण को लेकर बैठक की। इसमें उन्होंने कहा, क्राइसिस मैनेजमेंट कमेटियों की जिम्मेदारी खत्म नहीं हुई है। सरकार जरूरी दवाइयाें का स्टॉक करके रख रही है। ऑक्सीजन प्लांट क्रियाशील हो रहे हैं। ऑक्सीजन टैंकर्स की व्यवस्था भी की जा रही है। उन्होंने बताया, अस्पतालों में 75 हजार बैड तैयार कर लिए गए हैं। बच्चों के लिए अलग से वार्ड बनाए जा रहे हैं।

क्या भ्रष्टाचार का विरोध और जी-हुजूरी नहीं करना बगावत है?

Ias lokesh jangid

— विशेष टिपण्णी : गोपाल स्वरूप वाजपेयी, पत्रकार व लेखक ईमानदारी तेरा किरदार है तो खुदकुशी कर ले, सियासी दौर को तो जी हुजूरी की जरूरत है। भ्रष्टाचार का विरोध करने पर एडीएम पद से हटाए गए मध्यप्रदेश के युवा आईएएस लोकेश कुमार जांगिड़ ने इस शायरी से अपना दर्द बयां किया। 2014 बैच का ये आईएएस अफसर एक सप्ताह तक देशभर में सुर्खियों में रहा और अब यह मुद्दा शांत हो गया है। बिना हल निकले इतने गंभीर मामले की इतनी जल्दी हवा निकलना वर्तमान माहौल में कोई आश्चर्य पैदा नहीं करता। ये मामला इसलिए और गंभीर और संवेदनशील है, क्योंकि मख्यमंत्री शिवराज सिंह के करीब 15 साल के कार्यकाल में पहली बार किसी आईएएस अफसर ने निशाने पर लिया और वह भी भ्रष्टाचार के मामले में। गजब यह है कि भ्रष्टाचार का आरोप लगाने वाले अपर कलेक्टर को 24 घंटे के अंदर पद से हटा दिया गया लेकिन जिस पर आरोप लगे, यानी जिले के कलेक्टर का बाल बांका नहीं हुआ। ये मुद्दा भले ही शांत हो गया हो, लेकिन कई सवाल भी खड़े कर गया। क्या भ्रष्टाचार का विरोध करना बगावत है? क्या भ्रष्टाचार का विरोध कर आईएएस लोकेश जांगिड़ ने भारतीय प्रशासनिक सेवा की आचार संहिता का उल्लंघन किया? क्या जिले में तैनात कलेक्टर व पुलिस अधीक्षक सूबे के मुख्यमंत्री के वसूली एजेंट होते हैं? आईएएस और आईपीएस को जिले में कलेक्टर व एसपी के रूप में तैनात करने के क्या मानक हैं? क्या इन दोनों अफसरों की तैनाती सियासी रसूख के दम पर होती है? क्या कलेक्टर व एसपी बनने के लिए सियासी गलियों में बोली लगती है? क्या कलेक्टर व एसपी का भ्रष्टाचार के नाले में डुबकी लगाना मजबूरी है? कलेक्टर व एसपी को जिले से हटाने का क्या पैमाना है? सरकार को डायरेक्ट आईएएस की तुलना में प्रमोटी आईएएस क्यों प्रिय हैं? और सबसे गंभीर सवाल यह है कि क्या भ्रष्टाचार को लोगों ने रीति-नीति में गुप्त रूप से शिष्टाचार का दर्जा दे दिया है? क्या भ्रष्टाचार व अनैतिकता का विरोध करने वाले का बहिष्कार नहीं किया जा रहा? दरअसल, आईएएस अफसर लोकेश कुमार जांगिड़ को शिवराज सरकार हरियाणा के आईएएस अफसर खेमका की तर्ज पर फुटबाल बना रही है। 2014 बैच के मध्यप्रदेश कैडर के आईएएस अफसर लोकेश जांगिड़ की फील्ड पोस्टिंग के अभी साढ़े 4 साल हुए हैं, लेकिन उनके 8 बार ट्रांसफर हो चुके हैं। यानी औसतन हर 6 माह में उन्हें हटाया गया। 42 दिन पहले राज्य शिक्षा केंद्र के अपर संचालक से बड़वानी अपर कलेक्टर बनाया गया था, लेकिन अब उन्हें वापस राज्य शिक्षा केंद्र भेज दिया गया है। बड़वानी में पदस्थ होने के बाद उन्हें जिले का कोविड प्रभारी बनाया गया था। इस दौरान जांगिड़ ने पूरे जिले का तूफानी दौरा किया और कोरोना की रफ्तार को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाई। बड़वानी कलेक्टोरेट के अधिकारी बताते हैं कि अप्रैल और मई में वह शायद ही अपने दफ्तर में बैठे। वे हमेशा फील्ड में रहते थे। इसी दौरान जांगिड़ ने आॅक्सीजन कंसट्रेटर की खरीदी में हुए भ्रष्टाचार को उजागर कर दिया। बड़वानी में कोरोना महामारी में उपकरणों की खरीदी में भारी हेरफेर हुआ था। 39 हजार के आॅक्सीजन कंसंट्रेटर 60 हजार रुपए में खरीदे गए। भ्रष्टाचार के इस खेल में जांगिड़ शामिल नहीं हुए और उन्होंने इसका विरोध किया। यह खरीदी कलेक्टर शिवराज सिंह वर्मा के माध्यम से हुई। इसके साथ ही अन्य उपकरणों की खरीदी में करोड़ों का भ्रष्टाचार हुआ था। जांगिड़ ने चार्ज लेते ही भ्रष्टाचारियों पर लगाम लगा दी थी। इसकी कीमत जांगिड़ को देनी पड़ी। जांगिड़ को अपर कलेक्टर के पद से हटा दिया गया। बड़वानी से तबादले के बाद लोकेश जांगिड़ ने बड़वानी कलेक्टर शिवराज सिंह वर्मा पर गंभीर आरोप लगाते हुए आईएएस एसोसिएशन के सोशल मीडिया ग्रुप में लिखा कि कलेक्टर पैसा नहीं खा पा रहे हैं। इसलिए वर्मा ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कान भर दिए। वे एक ही किरार समुदाय से हैं और कलेक्टर की पत्नी किरार महासभा की सचिव हैं, मुख्यमंत्री की पत्नी अध्यक्ष हैं। नैतिकता का तकाजा कहता है कि इतना गंभीर आरोप लगने के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय से इस बारे में स्पष्टीकरण जारी होना चाहिए था। लेकिन एक शब्द नहीं कहा गया। चूंकि, बड़वानी कलेक्टर पर सीधेतौर पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे तो उन्हें भी पद से हटाया जाना चाहिए था और जांच होनी चाहिए थी। लेकिन ये सब तो बहुत दूर, कलेक्टर को एक नोटिस तक जारी नहीं किया गया। भ्रष्टाचार का विरोध करने वालों के लिए यह हतप्रभ व हताश करने वाली घटना है। दरअसल, ऐसा माहौल बनता जा रहा है कि भ्रष्टाचार व अनैतिकता पर बहस करना अब समय की बर्बादी है। घोटालों व भ्रष्टाचार के आरोपों को शिवराज सरकार गंभीरता से नहीं लेती। कुछ माह पहले प्रदेश कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि शिवराज सरकार ने सात माह में 17 घोटाले किए। ग्वालियर में आटा घोटाले में गरीब-मजदूरों को 10 किलो आटे के पैकेट में महज छह किलो से लेकर आठ किलो आटा दिया गया। कोरोना काल में बांटे गए त्रिकूट चूर्ण में भी घोटाले का आरोप लगा। शिवराज सरकार ने इन आरोपों पर ध्यान नहीं दिया। कांग्रेस विपक्षी दल है। इसलिए मान लेते हैं उनका काम ही आरोप लगाना है। लेकिन जब केंद्र की मोदी सरकार की एजेंसियां ही शिवराज सरकार को घोटाले को लेकर एलर्ट करें तो मामला बेहद संगीन हो जाता है। प्रदेश में उपचुनाव से ठीक पहले केंद्र सरकार ने बालाघाट व मंडला में हुए चावल घोटाले पर शिवराज सरकार को पत्र लिखकर जांच के निर्देश दिए थे। केंद्रीय एजेंसी ने माना था कि प्रदेश में बालाघाट और मंडला में पोल्ट्री ग्रेड का चावल गरीबों को बांटा गया है। केंद्र सरकार ने यूरिया घोटाले को लेकर भी शिवराज सरकार को पत्र लिखकर आगाह किया था। केंद्र सरकार ने यूरिया घोटाले में बड़े पैमाने पर कालाबाजारी की जानकारी भी शिवराज सरकार को दी। मध्यप्रदेश में सहकारी समितियों ने किसानों को यूरिया देने के नाम पर बड़ा फजीर्वाड़ा किया। इसकी रिपोर्ट केंद्र सरकार ने शिवराज सरकार को दी थी। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत शिवपुरी जिले में कटनी और रीवा से दो रैक में 51 हजार क्विंटल चावल पिछले साल जुलाई में आया था। घटिया चावल … Read more

MP : राजपूत समाज के शस्त्र पूजन कार्यक्रम में पहुंचे सीएम शिवराज का विरोध, हंगामा

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भोपाल। भोपाल में राजपूत समाज के शस्त्र पूजन कार्यक्रम में शामिल होने गए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को विरोध का सामना करना पड़ा। कार्यक्रम के दौरान एक व्यक्ति सीएम से बात करने के लिए मंच की ओर जाने लगा तो पुलिस और वहां मौजूद लोगों ने उसे रोक लिया। युवक का कहना है कि उपचुनाव में सीएम को हमारे वोट की चिंता सताने लगी है। मैंने अपनी बात रखनी चाही तो उन लोगों ने बाहर कर मुझे बाथरूम में बंद कर दिया। कार्यक्रम लगातार विरोध को देखते हुए शिवराज ने सभा को संबोधित किया और यहां से निकल गए। हालांकि उन्होंने मंच से कहा कि उनका आज यहां आने का कार्यक्रम नहीं था, लेकिन आपके बुलावे पर आया हूं, उन्हें और भी कई जगह पर जाना है। मनोहर रघुवंशी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने 2018 के चुनाव में कहा था कि उन्हें सामान्य वर्ग का वोट नहीं चाहिए। अब उपचुनाव में स्मारक बनाने की बात कह रहे हैं। अब इन्हें चुनाव में हार का डर सता रहा है। इसलिए वोट मांगने आए हैं। मैंने इसका विरोध किया तो पुलिस और अन्य लोगों ने मेरे साथ झूमाझटकी की। वे पकड़कर मुझे साइड में ले गए और बाथरूम में बंद कर दिया। सीएम ने रानी पद्मावती स्मारक बनाने का वादा किया मुख्यमंत्री ने मंच से कहा कि पद्मावती पर बनी विवादास्पद फिल्म पर बैन लगने वाला एमपी पहला राज्य था। 2018 में हमने तय किया था कि भोपाल में रानी पद्मावती का एक स्मारक बनाया जाएगा। मनुआभान टेकरी पर इसके लिए जमीन आरक्षित कर दी थी। लेकिन उसके बाद चुनाव आ गए और चुनाव के बाद मैं मुख्यमंत्री नहीं रहा। अब पांच दिन पहले मैंने उस जमीन को फिर से दिखवाया है। वहां पद्मावती का भव्य स्मारक बनेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि पद्मावती फिल्म के विरोध के दौरान क्षत्रिय समाज के लोगों पर लगे सभी केस वापस लिए जाएंगे। अगले साल से रानी पद्मावती को पाठ्यक्रम में सम्मिलित किया जायगा। महाराणा प्रताप शौर्य पुरस्कार और रानी पद्मावती के नाम पर भी 2 लाख रुपए का पुरस्कार दिया जाएगा।

MP : उपचुनाव वाले क्षेत्रों में 4 हजार करोड़ के शिलान्यास, 1 हजार करोड़ के लोकार्पण

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भोपाल। शिवराज सरकार उपचुनाव वाले क्षेत्रों में फिलहाल इन क्षेत्रों में करीब 4000 करोड़ के कार्यों का शिलान्यास और 1000 करोड़ के विकास कार्यों का लोकार्पण किया गया है । इसमें सांवेर में 2600 करोड़ रुपए की नर्मदा जल योजना भी शामिल है। सीएम शिवराज ने उपचुनाव वाले क्षेत्रों में जितने भी भूमि पूजन और शिलान्यास कार्यक्रम किए हैं, उन पर चुनाव आचार संहिता लगते ही रोक लग जाएगी। ये काम चुनाव के बाद ही चालू हो जाएंगे। प्रदेश की 28 सीटों में होने वाले उपचुनाव को लेकर चुनाव आयोग भी सक्रिय हो गया है। सभी कलेक्टर्स से जिलों में होने वाले कार्यों, हाल में हुए भूमिपूजन और शिलान्यास का डेटा कलेक्ट किया जा रहा है। मध्य प्रदेश की 28 सीटों पर होने वाले उपचुनाव की तारीखों की घोषणा हो गई है। इसके साथ प्रदेश के 19 जिलों में आचार संहिता लागू हो गई है। अब जिन सीटों पर चुनाव हैं, वहां सभी तरह के सरकारी निर्माण कार्यों के भूमिपूजन, लोकार्पण और शिलान्यास पर रोक लग जाएगी। उपचुनाव के दौरान कोई नई घोषणा नहीं हो पाएगी। हालांकि, जो काम पहले से चल रहे हैं, उनमें कोई रुकावट नहीं आएगी।

MP : एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंची, अस्पताल के रास्ते में ही निकली महिला की जान

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बैतूल। मध्य प्रदेश के बैतूल में एम्बुलेंस समय पर नहीं पहुंचने से एक महिला की मौत हो गई। बैतूल के भंडारपानी गांव में सड़क नहीं है और ग्रामीण बांस के झोले में महिला को लादकर अस्पताल के लिए निकले, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है और मामले की जांच की मांग की है। बैतूल के घोड़ाडोंगरी ब्लॉक का भंडारपानी गांव 1800 फीट ऊपर पहाड़ी पर बसा है। यहां जाने के लिए रास्ता नहीं है। भंडारपानी की जग्गोबाई पति इंदर (28) की डिलीवरी पिछले महीने अगस्त में हुई थी जब उसने बेटी को जन्म दिया था लेकिन एक महीने बाद पेट मे दर्द और ब्लीडिंग के कारण उसकी मौत हो गई। परिवार वालों का आरोप है कि एम्बुलेंस और सरकारी सुविधाएं मिल जाती तो उसकी जान बच सकती थी। जग्गो बाई को 9 सितंबर की रात में अचानक दर्द और ब्लीडिंग होनी लगी। 10 सितंबर की सुबह ग्रामीणों ने बांस में कपड़ा बांधकर झोला बनाया और उसे कंधों पर 1800 फीट नीचे इमलीखेड़ा (सड़क तक) ले आए। ग्रामीणों का दावा है कि उन्होंने बुधवार दोपहर 12.46 बजे 108 पर एंबुलेंस के लिए फोन किया। भोपाल से सूचना मिली कि घोड़ाडोंगरी की एंबुलेंस ढाई घंटे बाद मिल पाएगी। इसके बाद नूतन डंगा गांव के सरपंच साबू लाल, सचिव मालेकार सरकार ने प्राइवेट वाहन की व्यवस्था की और घोड़ाडोंगरी अस्पताल के लिए महिला व परिजनों को रवाना किया। गांव से 10 किमी दूर तबियत बिगड़ने पर रास्ते में आमढाना उप स्वास्थ्य केंद्र में इलाज के लिए दिखाया गया लेकिन महिला की मौत पहले ही हो चुकी थी। श्रमिक आदिवासी संगठन के राजेंद्र गढ़वाल ने कहा उन्होंने 108 पर एंबुलेंस के लिए फोन किया था, लेकिन एंबुलेंस नहीं आई। पीड़िता एंबुलेंस का इंतजार करती रही। अगर एंबुलेंस समय पर आ जाती तो शायद महिला की मौत नहीं होती। उन्होंने सरकार से पीड़ित परिवार के लिए राहत की मांग भी की है।

सीएम शिवराज कर रहे दनादन घोषणाएं, भारत सरकार का बजट भी कम पड़ जायेगा

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भोपाल। मध्य प्रदेश में उपचुनाव के माहौल में घोषणाओं और आरोप-प्रत्यारोपों का सिलसिला भी तेज हो गया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जहां राज्य के अलग-अलग हिस्सों में विकास परियोजनाओं के शिलान्यास और भूमिपूजन कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस इन्हें चुनावी घोषणाएं बता कर खारिज कर रही है। शुक्रवार को पूर्व सीएम कमलनाथ ने तंज कसा कि शिवराज जितनी घोषणाएं कर रहे हैं, उन्हें पूरा करने के लिए भारत सरकार का केंद्रीय बजट भी कम पड़ जाएगा। कमलनाथ ने एक बयान जारी कर कहा कि शुक्रवार को भी शिवराज प्रदेश के सागर, गुना व साँची के दौरे पर थे। वे पिटी हुई पिक्चर से झूठ का ट्रेलर दिखाते रहे, लेकिन जनता इनकी झूठ की पूरी पिक्चर पहले ही देख चुकी है। इसीलिये जनता ने उन्हें घर बैठाया था। अपने भाषणों में वे इतना झूठ बोल रहे हैं और इतनी झूठी घोषणाएं कर रहे हैं कि झूठ भी शर्मा रहा है। शिवराज की यदि रोज की करोड़ों रुपये की घोषणाओं का हिसाब लगाया जाए तो भारत सरकार का बजट भी कम पड़ जाए। कमलनाथ ने बताया कि किसान हर दौरे में अपनी खराब फसलें दिखाकर मुख्यमंत्री को आइना दिखा रहे हैं। इसका मुआवजा उन्हें आज तक नहीं मिला, जबकि शिवराज ने बड़े-बड़े दावे किए थे। प्रदेश की स्थिति यह है कि कर्मचारियों का डीए, एरियर, वेतनवृद्धि से लेकर सब कुछ आर्थिक संकट का हवाला देकर रोका जा चुका है। आज किसान राहत की मांग कर रहा है, युवा रोज़गार मांग रहा है, भोपाल में रोज हर वर्ग अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहा है, लेकिन आर्थिक संकट का हवाला देकर उन्हें अनसुना किया जा रहा है। दूसरी ओर, शिवराज रोज करोड़ों रुपए की झूठी घोषणाएं कर रहे हैं। कमलनाथ ने कहा है कि बीजेपी के लोग ही शिवराज को घोषणावीर बताते हैं। प्रदेश की जनता रोज उनकी झूठी घोषणाओं को देख रही है। एक तरफ वे अपने भाषणों में बार-बार कह रहे हैं कि प्रदेश का खजाना खाली है तो दूसरी तरफ करोड़ों रुपए की झूठी घोषणाए सिर्फ़ जनता को चुनाव में गुमराह करने के लिए कर रहे हैं। जनता समझती है कि ये सब चुनावी घोषणाएं है जो कभी पूरी नहीं होंगी। जनता उनकी 15 वर्ष की आज तक पूरी नहीं हुई हज़ारों झूठी घोषणाओं की हक़ीक़त भी जानती है। कमलनाथ ने अपनी सरकार का बचाव करते हुए यह भी कहा कि कांग्रेस सरकार ने किसानों का कर्जा माफ किया। इसे खुद बीजेपी सरकार ने विधानसभा में लिखित रूप में स्वीकार किया, लेकिन इसको लेकर आज भी शिवराज- सिंधिया की जोड़ी झूठ परोस रही है। हमने कभी संबल योजना बंद नहीं की, उल्टा हमने शिवराज सरकार से ज्यादा हितग्राहियों को लाभ दिया। हमने कन्या विवाह योजना की बढ़ी हुई राशि हितग्राहियों को प्रदान की। अतिवृष्टि व बाढ़ में किसानों को तत्काल मुआवजा प्रदान किया। मैंने शिवराज की तरह बाढ़ पर्यटन नहीं किया और खराब फसलों को हाथ में लेकर खेतों में फोटो नहीं खिंचाये। मैंने तो किसानों को वास्तविक मुआवजा व सहायता प्रदान कर राहत प्रदान की लेकिन शिवराज और उनके साथ सिंधिया इन योजनाओं को लेकर झूठ परोस रहे हैं।

शिवराज -सिंधिया की जोड़ी सागर में, वहां जय कमलनाथ तो यहां जय श्रीराम

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सागर। सुरखी विधानसभा के जैसीनगर में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान , सिंधिया के साथ पहुंचे। यहां दोनों की जोड़ी ने सिंधिया-समर्थक और प्रदेश शासन में परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत को जिताने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी। शिवराज ने कई विकास योजनाओं का ऐलान किया तो सिंधिया ने कांग्रेस और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की पोल खोली। खास बात यह रही कि सिंधिया ने भी राम के नाम पर वोट मांगे। आगामी उपचुनावों की चर्चा करते हुए सिंधिया ने कहा, वहां जय कमलनाथ है तो यहां जय श्रीराम। हालांकि, कोरोना का कहर झेल रहे सागर जिले की जैसीनगर में जनता को अपने नेताओं का घंटों इन्तज़ार करना पड़ा। प्रोटोकॉल के मुताबिक दो से ढाई बजे के बीच पहुंचने की सूचना के चलते लोग इंतज़ार करते रहे। वहीं मुख्यमंत्री करीब पौने चार बजे सभा स्थल पर पहुंचे। सभा में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कम दिखा, लेकिन शिवराज सिंह चौहान ने जमकर घोषणाएं ज़रूर की। इससे पहले तीन बार सुरखी विधानसभा क्षेत्र में उनका कार्यक्रम बारिश के चलते रद्द हो चुका था। मुख्यमंत्री ने पानी, बिजली, नगर पंचायत, सड़कों के निर्माण और कॉलेज खोलने की घोषणाएं की। शिवराज ने लोगों से कहा कि कमलनाथ सरकार में आपने पैसों का रोना देखा है लेकिन बीजेपी सरकार कर्ज लेकर भी जनता की जरूरतों को पूरा करेगी। उन्होंने कहा- कहीं से भी लाऊंगा चाहे, उधार लूंगा लेकिन किसानों को परेशानी नहीं होने दूंगा। सिंधिया ने अपने संबोधन में लोगों से कहा कि 2018 में भी मैं गोविंद सिंह राजपूत की जीत के लिए आपके पास आया था। आपने इन्हें जिताया और ये मंत्री भी बने, लेकिन जो सरकार बनी, उसने विकास की जगह भ्रष्टाचार की नई लकीर खींच दी। परिवहन मंत्री को गोविंद संबोधित करते हुए सिंधिया ने लोगों से उन्हें फिर से जिताने की अपील की। सिंधिया ने मंच पर मौजूद सीएम शिवराज की जमकर तारीफ की तो पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को जमकर कोसा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के सीएम हमेशा खजाना खाली होने का रोना रोते थे, लेकिन शिवराज सिंह चौहान ने गरीबों और किसानों के लिए खजाना खोल दिया है। कमलनाथ की सरकार पर अपने वादे पूरे नहीं करने का आरोप भी उन्होंने लगाया।

CM शिवराज की सभा में सिंधिया के खिलाफ जबर्दस्त नारेबाजी, स्वयंसेवकों ने किया हंगामा

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भोपाल. मध्य प्रदेश में 28 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव से पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ सभाएं कर रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया को जगह-जगह विरोध का सामना करना पड़ रहा है. आज अशोक नगर की सभा में सिंधिया के खिलाफ RSS स्वयंसेवकों ने हंगामा किया. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और ज्योतिरादित्य सिंधिया अशोक नगर, मुंगावली और डबरा के दौरे पर गए. चौहान और सिंधिया अशोक नगर के राजपुर की सभा में पहुंचे. इसी दौरान मुख्यमंत्री की सभा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघके कार्यकर्ताओं ने हंगामा कर दिया. ये लोग संघ प्रचारक चेतन भार्गव पर पिछले दिनों हुई FIR का विरोध कर रहे थे. सभा में इन लोगों ने संघ प्रचारक के खिलाफ FIR वापस लेने की मांग की और जमकर नारेबाजी की. पुलिस ने इन कार्यकर्ताओं को खदेड़ दिया. हालांकि इस दौरान दोनों पक्षों के बीच काफी धक्का-मुक्की भी हुई. वहीं, अशोक नगर में सिंधिया का विरोध भी देखने मिला. यहां बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता जमा हुए और गद्दार सिंधिया वापस जाओ के नारे लगाए. बाद में पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया

शिवराज बोले- कमलनाथ नालायक थे, अपनी जोड़ी को शिव-ज्योति एक्सप्रेस का नाम दिया

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भोपाल. शिवपुरी जिले में पहली बार प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया एक साथ मंच पर दिखे। मुंगावली विधानसभा क्षेत्र में पिपरई और अशोकनगर विधानसभा क्षेत्र के राजपुर गांव में दोनों नेताओं ने अपनी इस जोड़ी तो शिव-ज्योति एक्सप्रेस का नाम दिया। करोड़ों रुपए के विकास कार्यो का लोकार्पण व शिलान्यास करने के बाद दोनों की नेताओं ने कांग्रेस और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ व दिग्विजय सिंह पर जुबानी हमले किए। मुख्यमंत्री चौहान ने अशोकनगर को स्मार्ट सिटी बनाने का ऐलान किया। अगले साल अशोकनगर में कृषि महाविद्यालय खोलने का आश्वासन भी दिया। राजपुर में सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कमलनाथ जैसे मुख्यमंत्री का आचार डालेंगे क्या, जो अपने विधायकों की नहीं सुन रहे थे। इसलिए महाराज ने सरकार को सड़क पर लाकर खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा ग्वालियर में कमलनाथ ने बोला- शिवराज सिंह नालायक है, जबकि फसल बीमा का पैसा खाने वाले, कर्जामाफी की वादाखिलाफी, कई योजनाओं को बंद करने वाले कमलनाथ ही नालायक थे। मुख्यमंत्री चौहान ने पूर्व कांग्रेस सरकार से मिले खाली खजाने पर कहा कांग्रेस की नीति, नीयत और नेता ठीक नहीं हैं, इसलिए लक्ष्मीजी उनसे रूठीं थीं। मैं रोने वाला मुख्यमंत्री नहीं हूं, इसलिए खुलेआम बोल रहा हूं प्रदेश की खराब हालत को सुधारने कर्जा लूंगा और जब स्थिति सुधर जाएगी तो वापस कर दूंगा। मेरी जनता के साथ वादाखिलाफी करने वाले कमलनाथ और दिग्विजय सिंह गद्दार : राज्यसभा सांसद बनने के बाद पहली बार जिले में आए ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा दिग्विजय सिंह और कमलनाथजी बोल रहे हैं कि जजपाल सिंह गद्दार है, ज्योतिरादित्य गद्दार है, लेकिन मैं कहता हूं कि जो नेता और जो सरकार मेरी जनता के साथ वादा खिलाफी और गद्दारी करेगी, उसके खिलाफ सिंधिया परिवार काम रखेगा। सिंधिया ने कहा कांग्रेस सरकार ने जनता के साथ वादाखिलाफी की तो प्रदेश की जनता के मान-सम्मान और विकास के लिए ज्योतिरादित्य ढाल बन गया। मोती-माधव एक्सप्रेस की तरह चलेगी शिव-ज्योति एक्सप्रेस मंच से दोनों की नेताओं ने अपनी इस नई जोड़ी को शिव-ज्योति एक्सप्रेस का नाम दिया। सिंधिया ने कहा कि जिस तरह 1980 में मोतीलाल वोरा जी और उनके पिताजी की जोड़ी को मोती-माधव एक्सप्रेस नाम दिया था, इसी तरह प्रदेश के विकास और प्रगति के लिए शिव-ज्योति एक्सप्रेस चलेगी। इस एक्सप्रेस के साथ चलने पर हर घर में खुशहाली आएगी।

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