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विष्णु सरकार ने गोतस्करी जैसे संगठित अपराध पर लगाम कसने के लिए बड़ा फैसला लिया, गोतस्करी में लिप्त वाहनों की होगी निलामी

रायपुर  राज्य सरकार ने गोतस्करी जैसे संगठित अपराध पर लगाम कसने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब इस अपराध में लिप्त आदतन आरोपितों पर सफेमा के तहत कार्रवाई की जाएगी। ऐसे आरोपितों की संपत्ति को जब्त कर नीलाम किया जाएगा और प्राप्त राशि को गोसेवा में लगाया जाएगा। गृहमंत्री एवं उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा की अध्यक्षता में गुरुवार को मंत्रालय महानदी भवन में उच्चस्तरीय बैठक हुई, जिसमें सभी जिलों के एडिशनल एसपी स्तर के नोडल अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में जिलेवार समीक्षा की गई और 15 जुलाई 2024 को लागू की गई एसओपी के तहत अब तक हुई कार्रवाई पर चर्चा की गई। गोतस्करी में लिप्त वाहनों की होगी निलामी उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि गोतस्करी में लिप्त पाए गए पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों को तत्काल बर्खास्त किया जाएगा। इसके अलावा तस्करी में इस्तेमाल किए गए वाहनों को राजसात कर उनकी नीलामी की जाएगी। इस धन का उपयोग गोसेवा के लिए किया जाएगा। गोसेवा आयोग को गोसेवकों के लिए पहचान पत्र जारी करने का भी आग्रह किया जाएगा। जिन जिलों में अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है, वहां के अधिकारियों को कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। गोतस्करी केवल अपराध नहीं, संगठित नेटवर्क है: डिप्टी सीएम उपमुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि पुलिस को सफेमा और रासुका जैसे कानूनों को प्रभावी हथियार के रूप में इस्तेमाल करना चाहिए। उन्होंने सभी नोडल अधिकारियों से ठोस कार्रवाई के प्रमाण और आगामी बैठक में पूर्ण रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा। साथ ही उन्होंने कहा कि गोतस्करी केवल अपराध नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क है। डिप्टी सीएम ने यह दिए सुझाव उन्होंने हाईवे पर कमजोर बैरिकेडिंग और तस्करों द्वारा पैदल रास्तों के इस्तेमाल पर चिंता जताई। उन्होंने गोसेवकों व एनसीसी से जुड़े युवाओं को चिन्हित कर निगरानी तंत्र में शामिल करने का सुझाव दिया। साथ ही युवाओं और पुलिस के बीच संवाद स्थापित करने विशेष पास जारी करने पर जोर दिया। टेक्नोलाजी के माध्यम से सूचना तंत्र मजबूत करने की बात भी कही।

खरगोन में आधी रात को मचा हड़कंप, गौ तस्करों की गाड़ी ने गौ सेवकों को रौंदा, चार लोग हुए घायल

खरगोन  खरगोन जिले के गोगांवा थाने के बिलाली और दसनावल गांव के बीच गो तस्करों के चार पहिया वाहन ने गो सेवकों को सामने से टक्कर मारी। इसमें दो गौ सेवक गंभीर रूप से घायल हो गए है। वहीं दो गो सेवकों को चोट आई है। घटना गुरुवार रात डेढ से 2 बजे की है। खरगोन में गो सेवकों को सूचना मिली थी कि गोवंश को महाराष्ट्र भेजा जा रहा है। खंडवा-बड़ौदा मार्ग पर गो सेवक पहुंच गए। इस दौरान गौ तस्करी के लिए जा रहे वाहनों को रोकने के दौरान तस्करों ने सामने से ही गो सेवकों को जानलेवा टक्कर मार दी। सिर में आई गंभीर चोट घटना में दो गो सेवक सतीश राठौर और राजा चौहान के सिर में गंभीर चोट के बाद खरगोन के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। दो गो सेवक को मामूली चोट आई है जिनका उपचार जिला अस्पताल में चल रहा है। 6-7 पिकअप वाहनों से महाराष्ट्र भेजे जा रहे थे गोवंश अवैध गो वंश परिवहन की सूचना के बाद करीब एक दर्जन से अधिक गो सेवक गाड़ी पकड़ने पहुंचे थे। करीब 6 से 7 पिकअप वाहन से महाराष्ट्र जाने के लिए गोवंश का परिवहन हो रहा था। बताया जा रहा है छह वाहन भाग निकले। एक वाहन को पुलिस ने जब्त किया है। खबर लगते ही देर रात को ही अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नरेंद्र रावत पहुंचे थे। पुलिस ने सूचना कर नाकेबंदी भी करा दी थी। गोगांवा पुलिस विवेचना कर रही है। उधर, हिंदू संगठन के पदाधिकारी का आरोप है कि इतने थानों और चौकी क्रास होकर गो तस्करी के वाहन महाराष्ट्र कैसे पहुंच रहे हैं। पिछले दिनों ही गो सेवकों ने प्रभारी मंत्री विश्वास सारंग को शिकायत की थी। उसके बावजूद तस्करी जारी है।

राज्यपाल ने मनोहर गौशाला में पहुंचकर विधिवत पूजा-अर्चना की और गौ माता की आराधना में भाग लिया

रायपुर खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले में आज गौ सेवा रत्न अलंकरण महोत्सव का भव्य आयोजन हुआ, जिसमें राज्यपाल रमेन डेका  विशेष रूप से उपस्थित हुए। राज्यपाल ने मनोहर गौशाला में पहुंचकर विधिवत पूजा-अर्चना की और गौ माता की आराधना में भाग लिया। राज्यपाल रमेन डेका ने मंदिर में गौ आरती में हिस्सा लिया और गौ माता की पूजा की। उन्होंने इस अवसर पर गौ सेवा के महत्व पर भी अपने विचार रखे और गौ रक्षा और संवर्धन की दिशा में निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया। पूजा-अर्चना और आरती के पश्चात, राज्यपाल ने गौशाला परिसर का भ्रमण किया और गौवंश की देखरेख और सेवा के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि गौ सेवा न केवल हमारी संस्कृति का हिस्सा है, बल्कि यह पर्यावरण और ग्रामीण जीवन के संतुलन को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस अवसर पर गौशाला प्रबंधन के सदस्य और ग्रामीणजन भी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

गायों ने दौड़ाकर गाड़ी को रोका, छत्तीसगढ़-रायगढ़ में कार चालक ने बछड़े को टक्कर मारकर घसीटा

रायगढ़। मां आखरी मां होती है और एक मां अपने बच्चे से कितना प्यार करती है, इसकी कई मिसालें अब तक देखी जा चुकी हैं। रायगढ़ जिले में बेजुबान मवेशियों का दिल छू लेने वाला एक सीसीटीवी फुटेज सामने आया है, जो मां की ममता का एक बेहतर उदाहरण है। स्टेशन चौक पर एक बछड़े को टक्कर मारने के बाद उसे घसीटते हुए ले जा रही कार को मौके पर मौजूद अन्य गायों ने दौड़ा लिया। गायों ने कार के आगे पहुंचकर उसे रोक लिया। इसके बाद स्थानीय लोगों की मदद से कार के नीचे से बछड़े को निकालकर उसका उपचार किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि स्टेशन की तरफ से आ रही एक कार ने सड़क किनारे खड़े बछड़े को टक्कर मार दी। बछड़ा कार में फंस गया और चालक उसे घसीटते हुए ले जा रहा था। इस दौरान वहां मौजूद गायों ने कार को दौड़ा लिया। गायें कार के आगे पहुंच गईं और कार को रोक लिया। इसके बाद मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों ने कार को एक तरफ से उठाया और कार के नीचे फंसे बछड़े को निकालकर उसे उपचार के लिए भेजा। जानकारी के अनुसार, बछड़े के पेट में चोट आई है और उसका एक पैर टूट गया है। लोग घायल बछड़े को जिस जगह उपचार के लिए ले गए बाकी गाय भी वहां जा पहुंचीं और घायल बछड़े को चाटने के अलावा उसका उपचार करने वालों को भी सूंघते चाटते देखा गया। मानो वो अपनी भाषा में बछड़े की जान बचाने वालों का धन्यवाद कहती हों। विश्व हिंदु संगठन के सदस्य जगजोत सिंह भल्ला ने बताया, ‘हमें आज सवा दो बजे के आसपास सूचना मिली कि सुभाष चौक के पास एक कार को रोका गया और उस कार के नीचे एक बछड़ा फंसा हुआ है, जिसे कार चालक बहुत दूर से घसीटते हुए लेकर पहुंचा है। कार चालक का नाम सलीम अंसारी बताया जा रहा है। इस घटना में बछड़े को बहुत गंभीर चोट आई है। हम इस मामले में कार चालक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हैं। गाड़ी चालक के द्वारा बड़ी लापरवाही बरती गई है।’

MP में बेची जाएंगी IVF से पैदा हुईं गाय, देंगी 10 लीटर दूध रोजाना, कीमत बस इतनी

भोपाल मप्र की मोहन सरकार अब गो-पालन को बढ़ावा देने के लिए अच्छी नस्ल की गाय की बछिया बेचेगी। सीएम के निर्देश पर पशुपालन विभाग ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। गो पालकों को भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीक और आईवीएफ से पैदा हुई उन्नत नस्ल की बछिया उपलब्ध कराई जाएंगी। मप्र के पशु प्रजनन प्रक्षेत्रों में करीब 300 बछिया बिक्री के लिए चिह्नित की गई हैं। देश का दूसरा ब्रीडिंग सेंटर एमपी में नेशनल कामधेनु ब्रीडिंग सेंटर के देश में दो सेंटर हैं। इसमें से एक मध्यप्रदेश में हैं, जहां 13 नस्ल की गायों और 4 नस्ल की भैंसों का संरक्षण होता है।  वहीं, देसी गायों की नस्ल में सुधार के लिए अच्छी नस्ल के बच्चे, भ्रूण और सीमन पशुपालकों को उपलब्ध कराए जाते हैं। अभी साल में सिर्फ एक बार होती है नीलामी पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बेसहारा गौवंश सरकार और समाज दोनों के लिए बड़ी चुनौती है। सबसे जरूरी है कि गौपालक के लिए गाय लाभकारी हो। यानी गाय ज्यादा दूध देगी, तो लोग उसे बेसहारा नहीं छोड़ेंगे। अब तक पशु प्रजनन प्रक्षेत्रों से साल में एक बार बछिया और बछड़ों की नीलामी होती थी। अब इसे बड़े पैमाने पर आयोजित किया जाएगा। दो तकनीक से पैदा हो रही बछिया भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीक: देसी नस्ल की गाय की बच्चेदानी में अच्छी नस्ल का भ्रूण तैयार किया जाता है। आईवीएफ तकनीक: कृत्रिम तरीके से भ्रूण तैयार कर उसका देसी गाय की बच्चेदानी में प्रत्यारोपण किया जाता है। देश का दूसरा ब्रीडिंग सेंटर एमपी में नेशनल कामधेनु ब्रीडिंग सेंटर के देश में दो सेंटर हैं। इसमें से एक मध्यप्रदेश में हैं, जहां 13 नस्ल की गायों और 4 नस्ल की भैंसों का संरक्षण होता है। वहीं, देसी गायों की नस्ल में सुधार के लिए अच्छी नस्ल के बच्चे, भ्रूण और सीमन पशुपालकों को उपलब्ध कराए जाते हैं। अभी साल में सिर्फ एक बार होती है नीलामी पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बेसहारा गौवंश सरकार और समाज दोनों के लिए बड़ी चुनौती है। सबसे जरूरी है कि गौपालक के लिए गाय लाभकारी हो। यानी गाय ज्यादा दूध देगी, तो लोग उसे बेसहारा नहीं छोड़ेंगे। अब तक पशु प्रजनन प्रक्षेत्रों से साल में एक बार बछिया और बछड़ों की नीलामी होती थी। अब इसे बड़े पैमाने पर आयोजित किया जाएगा। दो तकनीक से पैदा हो रही बछिया भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीक: देसी नस्ल की गाय की बच्चेदानी में अच्छी नस्ल का भ्रूण तैयार किया जाता है। आईवीएफ तकनीक: कृत्रिम तरीके से भ्रूण तैयार कर उसका देसी गाय की बच्चेदानी में प्रत्यारोपण किया जाता है। तकनीक का इस्तेमाल बता दें कि, प्रदेश में मौजूद नेशनल कामधेनु ब्रीडिंग सेंटर में एक दर्जन से ज्यादा नस्ल की गायों और 4 नस्ल की भैंसों को पाला जा रहा है। यहां देशी गायों की नस्ल में सुधार के लिए भ्रूण ट्रांसफर तकनीक और आईवीएफ तकनीक(IVF Technology) का इस्तेमाल किया जाता है। भ्रूण ट्रांसफर तकनीक में देसी नस्ल की गायों के बच्चेदानी में उन्नत नस्ल(Advanced Breed Cow) का भ्रूण तैयार किया जाता है। जबकि आईवीएफ तकनीक के अंतर्गत, आर्टिफिशियल भ्रूण तैयार करके उसे गाय की बच्चेदानी में ट्रांसफर किया जाता हैं। इतनें में खरीद सकेंगे पशुपालक यहां गिर, साहिवाल, थारपारकर, कांकरेज, मालवी, निमाडी जैसी नस्लों को संरक्षण मिला हुआ है। बता दें कि ये गाय रोजाना 6 से 10 लीटर दूध देती है। 6 से 12 महीने की बछिया को सिर्फ 6 से12 हजार रुपए देकर पशुपालक खरीद सकेंगे। वहीं 2 से 3 साल की बछिया को 15 से 20 हजार रुपए में खरीद सकेंगे। यहां होती है नीलामी जानकारी के मुताबिक राजधानी भोपाल के भदभदा, टीकमगढ के मिनौरा, पन्ना के पवई, सागर के रतौना, छिंदवाड़ा के इमलीखेडा, बालाघाट के गढ़ी, आगर मालवा और खरगोन के रोडिया में इन बछियों की नीलामी होती है।

देवेंद्र परमार को बेस्ट डेयरी फार्मर वर्ग में देशी पशु नस्ल सुधार के लिए द्वितीय पुरस्कार

भोपाल पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में उपलब्धि के लिए प्रदेश के शाजापुर जिले के किसान देवेंद्र परमार का केंद्रीय पशुपालन एवं डेयरी विभाग के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय गोपाल-रत्न पुरस्कार 2024 के लिए चयन हुआ है। उन्हें बेस्ट डेयरी फार्मर वर्ग में देशी पशु नस्ल सुधार के लिए द्वितीय पुरस्कार केंद्रीय पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन द्वारा राष्ट्रीय दुग्ध दिवस 26 नवंबर के अवसर पर नई दिल्ली में प्रदान किया जाएगा। दुग्ध उद्यमी किसान देवेंद्र परमार शाजापुर जिले के पटलावदा के हैं, जो भोपाल दुग्ध संघ के अंतर्गत शुजालपुर दुग्ध उत्पादन समिति के सदस्य हैं। वह बड़ी संख्या में दुधारू पशुओं का पालन करते है। उन्होंने देशी गायों की नस्ल सुधार में उल्लेखनीय कार्य किया है। वह देव डेयरी के नाम से पैकेज्ड दूध बेचते हैं। उन्होंने अपने खेत में गोबर गैस संयंत्र भी लगया है, जिससे बड़ी मात्रा में गोबर गैस का उत्पादन करते हैं, साथ ही जैविक खाद बेचकर भी अच्छी आमदनी लेते हैं। राष्ट्रीय गोपाल-रत्न पुरस्कार राष्ट्रीय गोपाल-रत्न पुरस्कारों का उद्देश्य पशुपालन और डेयरी के क्षेत्र में काम करने वाले स्वदेशी जानवरों को पालन कर रहे किसान, एआई तकनीशियन और डेयरी सहकारी समितियां / दूध उत्पादक कंपनियां/ डेयरी किसान उत्पादक संगठन की पहचान कर उन्हें प्रोत्साहित करना है। यह पुरस्कार तीन श्रेणियों में स्वदेशी गाय/भैंस नस्लों का पालन करने वाले सर्वश्रेष्ठ डेयरी किसान, सर्वश्रेष्ठ कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियन (एआईटी) और सर्वश्रेष्ठ डेयरी सहकारी/ दुग्ध उत्पादक कंपनी/ डेयरी किसान उत्पादक संगठन को प्रदान किए जाते हैं। पुरस्कार में प्रथम श्रेणी के लिए 5 लाख रुपये का नकद पुरस्कार, द्वितीय श्रेणी के लिए 3 लाख रुपये, तृतीय श्रेणी के लिए 2 लाख रुपये और पूर्वोत्तर क्षेत्र में विशेष पुरस्कार के लिए 2 लाख रुपये शामिल हैं। साथ ही एक प्रमाण-पत्र और एक स्मृति चिन्ह भी दिया जाता है। इस वर्ष विजेताओं का चयन कुल प्राप्त 2574 आवेदनों में से किया गया था, जिन्हें एक ऑनलाइन आवेदन पोर्टल यानी https://awards.gov.in के माध्यम से आमंत्रित किया गया। राष्ट्रीय गोकुल मिशन पशुपालन क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है जो कृषि और संबद्ध क्षेत्र के जीवीए का एक तिहाई हिस्सा है और इसकी वार्षिक वृद्धि दर 8% से ज्यादा है। साथ ही पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन गतिविधियाँ किसानों की आय उत्पन्न करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, विशेष रूप से भूमिहीन, छोटे और सीमांत किसानों और महिलाओं के लिए, इसके अलावा यह लाखों लोगों को सस्ती और पौष्टिक भोजन प्रदान करती है। भारत की स्वदेशी गायों की नस्लें मजबूत हैं और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की आनुवांशिक क्षमता रखती हैं। स्वदेशी नस्लों के विकास एवं संरक्षण पर एक विशेष कार्यक्रम के न होने से उनकी जनसंख्या कम हो रही थी और उनका प्रदर्शन उनकी क्षमता से कम है। इसलिए केन्द्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने दिसंबर 2014 में “राष्ट्रीय गोकुल मिशन” की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य स्वदेशी पशु नस्लों को संरक्षित और विकसित करना है।  

पुलिस ने बुरहानपुर में कसाई खाने पर दबिश, 400 किलो गोवंशी मांस जब्त, बैलों के अवशेष मिले

बुरहानपुर  तीन थानों की पुलिस ने शुक्रवार सुबह शहर के आजाद नगर क्षेत्र स्थित एक कसाई खाने में छापा मार कर 400 किलो गोवंश का मांस जब्त किया है। सीएसपी गौरव पाटिल के नेतृत्व में तड़के गणपति थाना, लालबाग और कोतवाली के करीब 25 अधिकारियों व जवानों ने कसाई खाने दबिश दी। छापे की खबर पहले ही गोवंशी का वध करने वालों की लग गई थी, जिसके चलते वे फरार हो गए थे। यह कसाई खाना अफजल कुरैशी का बताया जा रहा है। पुलिस को मौके से काटे गए दो बैलों के अवशेष भी मिले हैं। पशु चिकित्सा विभाग ने जब्त मांस के सैंपल लिए हैं। इसे जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा। लगाई जाएगी रासुआ पुलिस अधीक्षक देवेंद्र पाटीदार ने बताया कि काफी समय से आजाद नगर में गोवंश को मारने कर, मांस बेचे जाने की सूचना मिल रही थी। गुरुवार रात मुखबिर से सूचना मिलने पर तड़के कार्रवाई की योजना बनाई गई थी। उन्होंने बताया कि आरोपितों के खिलाफ अन्य धाराओं में प्रकरण दर्ज करने के साथ ही रासुआ भी लगाई जाएगी। पशु बाजारों बाजारों से करते हैं खरीदी शहर के कसाई बोरगांव व सनावद में लगने वाले पशु बाजारों से कृषि के नाम पर गोवंशी की खरीदी करते हैं। बाद में उन्हें आजाद नगर के कसाई खानों में लाकर मार दिया जाता है। पशु बाजारों में गाय-बैल बेचने वाले व्यापारी और किसान क्रेता के किसान होने की पुष्टि तक नहीं करते। वहां से रात के अंधेरे में इन गोवंशों को कत्लखाने पहुंचाया जाता है।

सिवनी में दो स्थानों पर गौवंश के गर्दन कटे शव मिलने पर क्षेत्र में सनसनी फैल गई

 सिवनी मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में दो स्थानों पर गौवंश के गर्दन कटे शव मिलने पर क्षेत्र में सनसनी फैल गई। मामला बुधवार देर शाम का बताया जा रहा है। पिंडरई के पास वैनगंगा नदी में 19 गौवंश के शव मिले हैं। वहीं धूमा क्षेत्र में लगभग 32 गौवंश की गर्दन कटी मिली। सूचना पर मौके पर पहुंचे पुलिस जांच पड़ताल में जुटी हुई है। पुलिस ने जानवरों के डॉक्टर को मौके पर बुलाकर मृत गायों के शवों का परीक्षण करवाया है। मौके पर ही शव दफना दिए गए। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि किन लोगों ने ऐसा किया है। सिवनी जिले के धनोरा थाना क्षेत्र के गांव पिंडरई के पास वैनगंगा नदी में बुधवार की शाम लगभग 19 गौवंश के गर्दन कटे शव मिलने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई। इस घटना की जानकारी मिलते ही धनौरा व पलारी पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच कर रही है। धूमा थाना क्षेत्र लगभग 32 गायों की गर्दन का कुछ भाग काट कर जंगल मे फेंक दी गई थी। पुलिस ने समस्त गायों को दफनाकर जांच कार्यवाही शुरू कर दी है। वैनगंगा नदी में गायों के शव को निकालने के लिए नदी में जेसीबी उतारने का प्रयास किया गया, लेकिन नदी में जेसीबी मशीन नीचे नहीं आ सकी। इसके बाद गांव के लोगों की मदद से नदी में मृत मिले मवेशियों के शव को रस्सी से बांध कर बाहर निकालने का काम देर शाम तक जारी रहा। अंधेरा होने तक मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस के साथ गांव के लोग मौजूद रहे। वहीं पशु डॉक्टर को भी मौके पर बुलाकर नदी से निकाले गए मवेशियों के शव को पोस्टमार्टम करने के बाद उन्हें दफना दिया गया। इस मामले में क्षेत्र के लोगों ने बताया कि इस तरह की घटना उनके क्षेत्र में पहली बार हुई है। गांव के लोगों के अनुसार आसपास के गांव से मवेशियों के शव नदी में बहकर आए हैं। गांव के लोगों का कहना है कि इस मामले में पुलिस प्रशासन को जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। इस मामले में पुलिस ने बताया कि पुलिस मवेशी तस्करों पर लगातार कार्रवाई कर रही है। पूरे जिले में मवेशी तस्करों पर नजर रखने के साथ मवेशियों का अवैध रूप से परिवहन करने वालों को पकड़ा जा रहा है। संभावना है कि मवेशी तस्करी करने वाले तस्करों ने पकड़े जाने के डर से मवेशियों को नदी में बहाया हो। इस मामले में हर पहलू पर नजर रख सूक्ष्मता से जांच की जा रही है। जल्द ही घटना में शामिल आरोपितों का पता लगाकर उन्हें पकड़ा जाएगा।

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