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साइबर अपराध पर पुलिस एक्शन: 11 थानों में 29 ठगी के मामले, शिकायत के बाद कार्रवाई तेज

भोपाल  पुलिस प्रशासन और स्वयंसेवी संगठनों द्वारा लगातार चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों के बावजूद सायबर ठगी की घटनाओं पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। राजधानी के 11 थानों में चौबीस घंटों के भीतर ठगी के कुल 29 अपराध दर्ज किए गए हैं, जिनमें सायबर जालसाजों ने लोगों को करोड़ों रुपये की चपत लगाई है। ज्यादातर ठगी शेयर मार्केट में निवेश, नौकरी और मुनाफा कमाने का लालच, बिजली बिल कनेक्शन काटने के नाम पर की गई है। राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर पर की गई शिकायतों के बाद अब थानों में प्रकरण दर्ज होना शुरू हो गया है।  दरअसल सायबर ठगी की शिकायतों के लिए राष्ट्रीय हेल्प लाइन नंबर 1930 जारी किया गया था। इस नंबर पर प्रदेशभर से सैकड़ों शिकायतें की गई थीं, जो काफी समय से संबित थीं। पिछले दिनों यह जानकारी केंद्रीय गृहमंत्रालय तक पहुंची तो मंत्रालय ने संबंधित थानों में केस रजिस्टर्ड कराकर जांच कराने के निर्देश दिए। राज्य सायबर सेल के पास इस प्रकार की शिकायतें भेजी गई थी, जिसमें अकेले भोपाल में ही सवा सौ से ज्यादा शिकायतें सामने आई। इन्हीं शिकायतों को थानों में भेजा गया, जहां असल कायमी जांच शुरू की गई है। बीते चौबीस घंटे के दौरान बागसेवनिया और अशोका गार्डन थाने में 5-5 और मिसरोद तथा अवधपुरी में 4-4 शिकायतें पहुंची। इसके अलावा ऐशबाग, हबीबगंज, निशातपुरा और गांधी नगर में एक-एक शिकायत दर्ज हुई। इसी प्रकार कमला नगर, पिपलानी में दो-दो और कोलार में तीन अपराध दर्ज किए गए हैं। टॉस्क देकर लगाई 50.98 लाख की चपत बागसेवनिया थानांतर्गत साकेत नगर में रहने वाले राजेश जैन को अज्ञात व्यक्ति ने वांट्सएफ ग्रुप पर जोड़ा, जहां लोग पैसों का निवेश कर होने वाले मुनाफे का स्क्रीन शॉट डालते थे। कई दिनों तक नज़र अंदाज़ करने के बाद उन्हें लगा कि यह फायदे का सौदा है, इसलिए वह भी निवेश करने लगे। पहले तो उन्हें मुनाफा दिखाई दिया, लेकिन जब पैसे निकालने का प्रयास किया तो 35 लाख रुपए का टैक्स मांगा जाने लगा। इस प्रकार राजेश ने जालसाजों के बताए एकाउंट में 50 लाख 98 लाख रुपये से अधिक की राशि जमा कर दी, लेकिन यह रुपये वापस नहीं मिले। ऐप डाउनलोड कराकर निकाले 2.12 लाख बागसेवनिया थानांतर्गत नारायण नगर में रहने वाले प्रेमचंद जैन के मोबाइल पर एक व्यक्ति ने फोन किया और बताया कि आपका कंज्यूमर नंबर चेंज हो रहा है। इसके लिए जालसाज ने उन्हें एमपीईबी इलेक्ट्रीसिटी हेड आफिस भोपाल का एप डाउनलोड करके उसमें 12 रुपए का भुगतान करने का बोला। प्रेमचंद ने जैसे ही ऐप डाउनलोज किया, वैसे ही उनके एकाउंट से 1 लाख 13 हजार रुपये कट गए। उन्होंने फोन करने वाले से इसकी शिकायत की तो बताया कि साफ्टवेयर अपडेट हो रहा, कुछ देर बाद पैसे वापस लौट आएंगे। उसके बाद उनके दूसरे एकाउंट से भी पैसे कट गए। इस पर जालसाजों ने कुल 2 लाख 12 हजार रुपये चपत लगा दी। दूसरे व्यक्ति को लगाई 3.66 लाख की चपत मूलत: औबेदुल्लागंज निवासी नंद किशोर यादव यहां रजत विहार कालोनी के पास मोहिनी मुस्कान गार्डन में रहते हैं। दिसंबर महीने में एक व्यक्ति ने उन्हें वीडियो काल किया और बताया कि वह गोविंदपुरा बिजली कार्यालय से बोल रहा है। उसने मकान नंबर बताते के साथ ही कहा कि उनका कंज्यूमर नंबर अपडेट होने का आज आखिरी दिन है। उसने यह भी बताया कि शाम तक आईडी अपडेट नहीं हुई तो बिजली का कनेक्शन काट दिया जाएगा। नंद किसोर ने बताया कि वह शहर से बाहर हैं, इसलिए उसने 12 रुपये आनलाइन ट्रांसफर करने का बोला। नंद किशोर ने जैसे ही उसे रुपये ट्रांसफर किए, वैसे ही अलग-अलग समय में कुल 3.66 लाख रुपए कट गए। क्रेडिट कार्ड से निकाले एक लाख रुपये बागसेवनिया पुलिस ने अगली रिपोर्ट राकेश कुशवाहा की शिकायत पर दर्ज की है। पिपलिया पेंदे खां में रहने वाले राकेश कुशवाहा के पास एक व्यक्ति ने क्रेडिट कार्ड कंपनी का अधिकारी बनकर फोन किया और कार्ड से जुड़ी जानकारी हासिल कर ली। उसके जालसाज ने एक ऐप डाउनलोड करवाया और क्रेडिट कार्ड से 1 लाख 3 हजार रुपये निकाल लिए। इसी प्रकार भाजपा कार्यालय के पास एनसीसी कंपनी में काम करने वाले राजा गोपाल रेड्डी के क्रेडिट कार्ड की जानकारी लेकर जालसाज ने दो बार में 1 लाख 21 हजार रुपये निकाल लिए। पुलिस ने सभी मामलों में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इसी प्रकार के शहर के दस अन्य थानों में दर्ज धोखाधड़ी के मामलों में जालसाजों ने लाखों रुपये की चपत लोगों को लगाई है। 

साइबर ठगी पर करारा प्रहार: फर्जी RTO ई-चालान लिंक भेजकर लाखों की ठगी, दो ठग गिरफ्तार

रायपुर रायपुर रेंज पुलिस ने ऑपरेशन साइबर शील्ड के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए फर्जी लिंक के माध्यम से ऑनलाइन ठगी करने वाले दो साइबर आरोपियों को राजस्थान से गिरफ्तार किया है। आरोपी Winmate और Wingo जैसे संदिग्ध ऐप के जरिए एंड्रॉइड यूजर्स को निशाना बनाते थे और उनके मोबाइल से फर्जी एसएमएस भेजकर बैंक खातों से रकम पार कर देते थे। पुलिस महानिरीक्षक रायपुर रेंज अमरेश मिश्रा के निर्देशन में की गई इस कार्रवाई में पृथ्वी कुमार बिश्नोई उर्फ राहुल (20) निवासी ग्राम डोलीकला, थाना कल्याणपुर, बाड़मेर (राजस्थान) और नरसिंह सिंह (24) निवासी भोपालगढ़, जोधपुर (राजस्थान) को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों के पास से घटना में प्रयुक्त मोबाइल फोन, सिम कार्ड और बैंक खाते से जुड़े दस्तावेज जब्त किए गए हैं। ऐसे हुआ पर्दाफाश प्रार्थी धर्मेंद्र सिंह ने थाना विधानसभा में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके मोबाइल पर RTOechallan नाम से एक एसएमएस आया। उसमें दिए गए लिंक पर क्लिक करते ही उनके बैंक खाते से 4.52 लाख रुपये कट गए। इस पर अपराध क्रमांक 8/26 के तहत धारा 318(4), 3(5) भारतीय न्याय संहिता और 66(D) आईटी एक्ट में मामला दर्ज कर रेंज साइबर थाना ने जांच शुरू की। जांच के दौरान गूगल, बैंकिंग ट्रांजेक्शन, मोबाइल सेवा प्रदाता, यूट्यूब और टेलीग्राम से मिले तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया गया, जिससे आरोपियों की पहचान कर राजस्थान में दबिश देकर गिरफ्तारी की गई। सोशल मीडिया पर लालच देकर फंसाते थे पुलिस के अनुसार आरोपी यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर “Task Complete”, “Instant Bonus”, “Referral Bonus” और गेम खेलकर कमाई जैसे प्रलोभन देकर Winmate और Wingo जैसे ऐप डाउनलोड करवाते थे। ये ऐप प्ले स्टोर या ऐप स्टोर पर उपलब्ध नहीं होते थे। ऐप इंस्टॉल करते ही यूजर को बोनस राशि दिखती थी और “SMS Task” के नाम पर उसके मोबाइल से बड़ी संख्या में फर्जी ई-चालान और संदिग्ध लिंक भेजे जाते थे। लिंक पर क्लिक करते ही मोबाइल हैक हो जाता था और बैंक खाते या ई-वॉलेट से रकम निकाल ली जाती थी। Swiggy-Instamart से खपाते थे ठगी की रकम जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ठगी की रकम को छिपाने के लिए Swiggy और Instamart जैसे क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म से महंगे सामान की ऑनलाइन खरीदारी कर उसे अलग-अलग राज्यों में डिलीवर कराते थे, जिससे पैसों का ट्रैक करना मुश्किल हो जाए। इससे पहले भी इसी तरह के मामले में WinGo ऐप के जरिए ठगी करने वाले तीन आरोपियों को महाराष्ट्र, ओडिशा और उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि—     केवल Play Store या App Store से ही ऐप डाउनलोड करें।     “गारंटीड मुनाफा” या “आसान कमाई” के झांसे में न आएं।     अनावश्यक रूप से SMS, कॉन्टैक्ट या बैंक संबंधी अनुमति मांगने वाले ऐप इंस्टॉल न करें।     किसी भी अज्ञात लिंक या APK फाइल पर क्लिक न करें।     साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।  

बैंकों और टेलीकॉम कंपनियों की ढील कड़ी से पंप रहा साइबर ठगी का मकड़ जाल

भोपाल  साइबर ठगी के जाल में लोग हर पल फंस रहे हैं। ऑनलाइन बिजली का बिल भरने से लेकर होटल की बुकिंग तक में साइबर ठगों का जाल फैला हुआ है। जांच में सामने आया है कि ठगी का यह जाल बैंकों और टेलीकॉम कंपनियों की ढील से फैल रहा है, क्योंकि बैंक नियमों को ताक में रखकर बिना सत्यापन किए ही खाते खोल रहे हैं। साथ ही एसटीआर की जांच भी नहीं हो रही है। टेलीकॉम कंपनियां भी बिना संपूर्ण सत्यापन के सिम जारी कर रही हैं। खाते और नंबर के इन्हीं हथियारों का फायदा उठाकर ठग वारदात करते हैं। वहीं लोगों को ठगी का शिकार बनाने वाले अपराधियों को पकड़ने के लिए पुलिस भी संख्या बल की कमी से जूझ रही है। बीते एक साल में ऐसे केस में 93 गिरफ्तारियां हुईं बीते एक वर्ष में भोपाल साइबर क्राइम सेल में साढ़े पांच हजार से अधिक शिकायतें पहुंची हैं। इनमें महज 61 एफआईआर ही दर्ज की गई हैं और इन मामलों में 93 गिरफ्तारियां हुई हैं। जिस सेल में रोजाना करीब 30 शिकायतें पहुंच रही हैं, वहां तीन महीने से एक भी इंस्पेक्टर नहीं है। जिन चुनिंदा मामलों में पुलिस हस्तक्षेप कर अपराधियों को पकड़ने का प्रयास करती है, उनमें क्राइम ब्रांच के ही इंस्पेक्टरों को कमान सौंप दी जाती है। बैंक और टेलीकॉम कंपनियों की चूक बैंक : कई निजी बैंकों के कर्मचारी लक्ष्य पूरा करने के लिए बिना केवाईसी और फिजिकल वेरीफिकेशन के खाते खुलवा देते हैं, जबकि आरबीआई की एडवाइजरी के अनुसार ई-केवाईसी आवश्यक है। ठगी के लिए उपयोग किए जाने वाले फर्जी बैंक खातों के लेनदेन के लिए आरबीआई ने एसटीआर (सस्पीशियस ट्रांजेक्शन रिपोर्ट) की व्यवस्था शुरू की है। यदि बैंक खातों में अचानक बढ़ते हुए लेन-देन की जानकारी पुलिस से साझा की जाए तो इस पर भी लगाम लगाई जा सकती है। फर्जी दस्तावेजों पर बैंक खाते खुलवाने का एक बड़ा मामला हाल ही में भोपाल में सामने आया था, जहां एक गिरोह दो साल से देशभर में 1800 से अधिक खाते खुलवा चुका था। उसे भोपाल पुलिस ने पकड़ा था। टेलीकॉम कंपनी : साइबर अपराध की पहली कड़ी फोन काल से ही जुड़ी है। टेलीकॉम कंपनियां बिना पुख्ता सत्यापन के सिमें उपलब्ध कराती हैं। इन्हीं सिमों का उपयोग कर लोग ठगी को अंजाम देते हैं। फर्जी तरीके से सिमों की खरीदी बंद होने से अपराध में आएगी कमी     साइबर अपराध रोकने के लिए बैंकों और टेलीकॉम कंपनियों को भी अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता है। यदि फर्जी तरीके से सिमों की खरीदी बंद हो और बैंक भी लेनदेन की जानकारी उपलब्ध कराएं तो अपराध में निश्चित ही कमी आएगी। हमारे पास पुलिस बल सीमित हैं। एक दिसंबर से थानों में साइबर डेस्क शुरू होगी तो साइबर क्राइम सेल का भार कम हो सकेगा। हरिनारायणाचारी मिश्र, पुलिस आयुक्त  

इंदौर में महिला कारोबारी से ₹1.60 करोड़ की ठगी, मनी लांड्रिग में फंसाने का झांसा देकर दिया लूट को अंजाम

इंदौर देशभर में साइबर ठगों ने जाल बिछा दिया है। रोज नए तरीकों से लोगों की मेहनत के कमाई लूट रहे हैं। इंदौर में महिला कारोबारी Cyber ​​Fraud का शिकार हो गईं। जालसाजों ने महिला को ऑनलाइन फोन कर ED और CBI अफसर बनकर डराया। मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने का झांसा देकर तीन दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा। बैंक अकाउंट्स की जानकारी ली। रुपयों के वैरिफिकेशन के नाम पर धमकाकर 1.60 करोड़ रुपए खाते से पार कर दिए। ठगी होने के बाद महिला ने साइबर सेल में शिकायत दर्ज करवाई है। ठगों ने कैसे महिला कारोबारी को बनाया निशाना जानकारी के मुताबिक, शेयर एंड कमोडिटी का कारोबार करने वालीं वंदना (40) पति राजीव गुप्ता के पास 9, 10 और 11 नवंबर को वीडियो कॉल आया। फोन करने वाले ने ईडी अफसर बनकर बात की और कहा कि तुम्हारे खातों में अवैध ट्रांजेक्शन हुए हैं। उनके खाते में काले धन की जानकारी मिली है। उनके विरुद्ध मनी लॉन्ड्रिंग का प्रकरण दर्ज हुआ है। CBI ने प्रकरण की जांच शुरू कर दी गई है। एफडी तुड़वाकर खातों में ट्रांसफर किए पैसे ठगों ने इसके बाद वंदना से वैरिफिकेशन के नाम पर बैंक खातों, कारोबार और आईडी कार्ड की जानकारी ली। ठगों ने जेल भेजने की धमकी देकर वंदना से एफडी तुड़वाकर एक करोड़ 60 लाख रुपए अपने खातों में ट्रांसफर करवा लिए। इसके लिए ठगों ने तीन दिन वंदना को डिजिटल अरेस्ट रखा। बाद में वंदना से गोल्ड लोन के नाम पर संपर्क कर रुपए देने का दबाव बनाते रहे। ठगी की शंका होने पर वंदना ने नेशनल साइबर क्राइम हेल्प लाइन पर शिकायत की तो मामले का खुलासा हुआ। जागरूक नहीं थीं वंदना टीआई सुरेंद्र वास्कले ने महिला से पूछा कि डिजिटल अरेस्ट के मामले मीडिया में इतने आ रहे, फिर कैसे फंस गए? इस पर महिला वंदना ने कहा कि वे जागरूक नहीं थीं। फिलहाल साइबर पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। बता दें कि तीन महीने में डिजिटल अरेस्ट का यह 65वां मामला है।

Cyber धोखाधड़ी का सबसे अधिक झांसा निवेश पर मोटे मुनाफे के नाम पर, नौकरी प्रस्ताव और आसान लोन के नाम पर भी फंस रहे

भोपाल साइबर ठगों ने इंटरनेट मीडिया का दुरुपयोग कर जालसाजी का ऐसा ताना-बाना बुना है कि बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट कंपनियां और पुलिस एजेंसियां उलझ कर रह गई हैं। साइबर क्राइम सेल में दर्ज अपराधों के विश्लेषण से सामने आया है कि ठगी का हर पांचवा मामला यूपीआई से जुड़ा है। यानी ऑनलाइन पेमेंट एप से ठगों के खातों में रकम पहुंची है। इस धोखाधड़ी का सबसे अधिक झांसा निवेश पर मोटे मुनाफे के नाम पर दिया गया है। बढ़ रहा यूपीआई का चलन कैशलेस अर्थव्यवस्था की तरफ बढ़ रही दुनिया में डिजिटल पेमेंट अथवा यूपीआई बड़ा जरिया है। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) के आंकड़े बताते हैं कि एक नवंबर से 21 नवंबर तक 15 लाख 32 हजार 344 करोड़ रुपये का भुगतान यूपीआई के जरिये हुआ है। लेन-देन के इस बेहद लोकप्रिय तरीके को साइबर अपराधियों ने ठगी के लिए इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। इसमें हर रोज कोई नया तरीका निकालकर लोगों को लूटा जा रहा है। ऐसे करते हैं ठगी नामी संस्थाओं की ओर से यूपीआई पेमेंट की रिक्वेस्ट डालकर रकम निकलवाने से लेकर यूपीआई ऑटो-पे रिक्वेस्ट जैसे तरीकों से लोगों के खातों में सेंध लगाई जा रही है। इसमें ऑटो पे रिक्वेस्ट सबसे खतरनाक है। इसमें फोन, बिजली, बीमा अथवा फाइनेंस कंपनी के नाम पर ऑटो पे रिक्वेस्ट भेजी जाती है। ठग उस संस्थान का प्रतिनिधि बनकर फोन करके वह रिक्वेस्ट स्वीकार करने को कहता है। वह बताता है कि ऐसा करने से आपको बार-बार भुगतान की तिथि याद करने की जरूरत नही पड़ेगी। आपके खाते से प्रीमियम की रकम अपने आप कट जाएगी और आप विलंब शुल्क से बच जाएंगे। लेकिन इसको स्वीकार करते ही आपके खाते की रकम ठग के खाते में ट्रांसफर हो जाती है। ये ठग इसी तरह शेयर बाजार में निवेश, आसान लोन और सस्ती दरों पर खरीद-फरोख्त जैसे लुभावने प्रस्ताव देते हुए लिंक भेजकर खाते खाली कर रहे हैं। भोपाल साइबर क्राइम सेल में इस वर्ष 42 प्रकार की कुल पांच हजार 463 शिकायतें पहुंची हैं। इनमें से 80 प्रतिशत मामले सिर्फ साइबर ठगी से जुड़े हैं। इसमें भी हर पांचवां मामला यूपीआई से संबंधित है। यानि ठगी के लिए डिजिटल भुगतान के किसी न किसी एप का उपयोग किया गया है। इन दस तरीकों से ठगी के सर्वाधिक मामले   इंटरनेट मीडिया उत्पीड़न 1186 21 प्रतिशत यूपीआई 1067 19.5 प्रतिशत डेबिट/क्रेडिट कार्ड 572 10.47 प्रतिशत ऑनलाइन खरीदफरोख्त 361 6.6 प्रतिशत टास्क 287 5.5 प्रतिशत लोन एप 242 4.43 प्रतिशत निवेश प्रस्ताव 238 4.37 प्रतिशत नौकरी प्रस्ताव 175 3.20 प्रतिशत ऑनलाइन लिंक 138 2.53 प्रतिशत मिरर एप 104 1.90 प्रतिशत   बचाव के लिए यह करें साइबर एक्सपर्ट प्रथमेश कापड़े के मुताबिक यूपीआई से ठगी केवल उपभोक्ताओं में जागरूकता की कमी के चलते होती है। इससे बचने के लिए यूपीआई पर भेजी गई ऐसी किसी भी रिक्वेस्ट को स्वीकार न करें। बिल पेमेंट के लिए ऑटो-पे की सुविधा शुरू करना है तो उसके लिए यूपीआई एप्स में अलग से व्यवस्था दी गई है। कंपनियों के प्रतिनिधि कभी भी फोन कर इस सुविधा को शुरू करने का दबाव नहीं बनाते हैं।

30 हजार भारतीय को नौकरी को झांसा देकर और पासपोर्ट जब्त कर जबरदस्ती साइबर ठगी के काम में लगाया गया -रिपोर्ट्स

नईदिल्ली साइबर ठग को लेकर एक बड़ी जानकारी सामने आई है, जहां दूरिस्ट वीजा पर गए करीब 30 हजार भारतीय वापस नहीं लौटे हैं. आशंका जताई जा रही है कि इन लोगों से साइबर गुलाम बनाया है और इन पर दबाव बनाकर साइबर क्राइम को अंजाम दिया जा रहा है. गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाली आप्रवासन ब्यूरो (BoI) ने एक डेटा तैयार किया और उसमें इसकी जानकारी मिली है कि कंबोडिया, थाइलैंड, म्यांमार और वियतनाम में विजिटर वीजा पर जनवरी 2022 से मई 2024 के बीच 73,138 यात्री भारत से यात्रा पर गए थे. इतने हजार लोग वापस लौटे नहीं इसमें से 29,466 भारतीय अभी तक वापस लौटे नहीं हैं. इसमें 20-39 आयु वर्ग के लोगों की संख्या करीब आधी यानी 17,115 है. ये जानकारी इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट से मिली. इसमें 90 परसेंट लोग पुरुष हैं. सबसे ज्यादा इन राज्य से गए लोग भारत वापस ना लौटने वालों में सबसे ज्यादा लोग पंजाब (3,667), महाराष्ट्र (3,233), तमिलनाडु राज्य (3,124) से हैं. अन्य राज्यों से जाने वाले लोगों की संख्या काफी कम है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, आशंका जताई जा रही है कि इन लोगों पर दबाव बनाया जा रहा है और भारत में रह रहे लोगों के साथ साइबर ठगी करने का दवाब बनाया जा रहा है. इन लोगों को नौकरी का लालच देकर साइबर गुलाम बनाया है.  साइबर गुलामी क्या है? साइबर गुलामी के तहत काम करने वाले लोगों पर दवाब बनाया जाता है. इसमें इंटरनेट पर मौजूद प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को टारगेट किया जाता है. भारतीय होने की वजह से कई लोग हिंदी और स्थानीय भाषा बोल सकते हैं. इस तरह के झांसे में कई लोग फंस जाते हैं, उसके बाद वे अपने लाखों रुपये गंवा देते हैं. राज्यों को वेरिफिरेशन करने का कहा इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में सूत्रों का हवाला देते हुए बताया है कि केंद्र सरकार की एक उच्च स्तरीय समिति ने अब सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों सत्यापन करने और इन लोगों की डिटेल्स लेने का निर्देश दिया है. बताते चलें कि हाल ही भारत में साइबर ठग के कई केस सामने आए हैं, जहां लोगों को अलग-अलग झांसे देकर लूटा जा रहा है.  

सोशल मीडिया पर फर्जी आईडी बनाकर साइबर ठगी, राजस्थान-अलवर में दो बदमाश गिरफ्तार

अलवर. साइबर ठगी के खिलाफ एसपी आनंद शर्मा के निर्देशन में चलाए जा रहे ऑपरेशन एंटी वायरस के तहत अलवर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो बदमाशों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बताया कि एनईबी थाने के ट्रांसपोर्ट नगर से पुलिस ने 2 साइबर ठगों आरिफ व वसीम को गिरफ्तार किया है। आरोपी सोशल मीडिया पर फर्जी आईडी बनाकर अनजान नंबरों पर ठगी को अंजाम देते थे। आरोपी सोशल मीडिया पर फर्जी आईडी बनाकर पुलिस अधिकारियों की फोटो लगाकर, ओएलएक्स और सेक्सटोरशन कर ठगी की वारदात को अंजाम देते थे। पुलिस ने आरोपी के पास से 4 एन्ड्रॉयड मोबाइल बरामद किए हैं। पुलिस को जब्त मोबाइल में पुलिस अधिकारियों की फोटो और ठगी की चैट सहित अन्य कई सामग्रियां मिली हैं। आरोपियों से पुलिस पूछताछ की जा रही है, जिसमें और अधिक साइबर ठगी की वारदातें खुलने की पूरी संभावना है।

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