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साइबर क्राइम का नया गढ़ बना भोपाल, पुलिस ने खोली खौफनाक साजिश की परतें

भोपाल झारखंड का जामताड़ा और हरियाणा का नूंह जैसे शहर साइबर अपराध के लिए बदनाम हैं। अब भोपाल भी उसी राह पर चल रहा है। भोपाल अब साइबर अपराध का अड्डा बनता जा रहा है। यहां जामताड़ा और नूंह की तरह ही साइबर अपराधी सक्रिय हैं। वे लोगों को ठगने के लिए फर्जी बैंक खातों और सिम कार्ड का इस्तेमाल कर रहे हैं। पुलिस ने ऐसे कई गिरोहों को पकड़ा है जो साइबर अपराधियों को मदद करते हैं। ये गिरोह उन्हें फर्जी खाते और सिम कार्ड देते हैं। पुलिस इन गिरोहों को खत्म करने के लिए एक खास पोर्टल का इस्तेमाल कर रही है। इस पोर्टल पर कई शिकायतें दर्ज हैं और पुलिस उनकी जांच कर रही है। समन्वय पोर्टल का इस्तेमाल कर रही पुलिस भोपाल पुलिस साइबर अपराध को रोकने के लिए ‘समन्वय पोर्टल’ (NCCRP JMIS) का इस्तेमाल कर रही है। इस पोर्टल पर भोपाल के फर्जी बैंक खातों के खिलाफ 550 शिकायतें दर्ज हैं। इन खातों से 2.5 करोड़ रुपये से ज्यादा के फर्जी लेनदेन किए गए हैं। पुलिस अब इन गिरोहों को खत्म करने और ऑनलाइन अपराधों को रोकने के लिए काम कर रही है। शहर में संगठित गिरोह चला रहे अपराधी पहले भोपाल के लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल करके देश भर के लोगों से पैसे ठगे जाते थे। लेकिन अब पुलिस को पता चला है कि शहर में ही संगठित गिरोह चल रहे हैं। ये गिरोह ‘म्यूल’ बैंक खाते और पहले से चालू सिम कार्ड साइबर अपराधियों को देते हैं। शहर में कॉल सेंटर का किया भंडाफोड़ साइबर पुलिस अब इन संगठित साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क को खत्म करने की कोशिश कर रही है। वे ऑनलाइन वित्तीय अपराधों को रोकने के लिए डिजिटल सुरक्षा उपायों को भी मजबूत कर रहे हैं। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने प्रभात स्क्वायर, ऐशबाग के पास चल रहे एक साइबर-धोखाधड़ी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। कॉल सेंटर के मालिक का बैंक खाता महाराष्ट्र के एक साइबर-अपराध पीड़ित से ठगे गए पैसे को ठिकाने लगाने के लिए इस्तेमाल किया गया था। टीकमगढ़ और महाराष्ट्र से निकला कनेक्शन कॉल सेंटर से बरामद एक सिम कार्ड का इस्तेमाल उत्तर प्रदेश के एक व्यक्ति के साथ साइबर अपराध करने में किया गया था। ये दोनों बातें समन्वय पोर्टल के जरिए सामने आईं। कॉल सेंटर का मालिक अपने टीकमगढ़ के एक रिश्तेदार की मदद से सेंटर चला रहा था। टीकमगढ़ पहले से ही साइबर अपराध का एक बड़ा अड्डा बन चुका है। देश के कई राज्यों में ठगी DCP (क्राइम ब्रांच) अखिल पटेल ने बताया कि भोपाल साइबर-क्राइम ब्रांच ने खुद ही फर्जी बैंक खातों को खत्म करने के लिए यह कदम उठाया है। ये खाते साइबर अपराधियों को दिए जा रहे थे। इन खातों का इस्तेमाल देश के कई राज्यों में लोगों को ठगने के लिए किया जा रहा था। DCP पटेल ने बताया कि पुलिस ने समन्वय पोर्टल की मदद से इन संदिग्ध बैंक खातों की पहचान की है। शिकायतों का विश्लेषण करता है पोर्टल यह पोर्टल नेशनल साइबर-क्राइम हेल्पलाइन (1930) के जरिए मिली शिकायतों का विश्लेषण करता है। यह साइबर धोखाधड़ी से जुड़े संदिग्ध बैंक खातों को दिखाता है, जिससे पुलिस को उनके इस्तेमाल का पता लगाने में मदद मिलती है। भोपाल साइबर-क्राइम ब्रांच ने इन खातों की जांच करने के लिए बैंकों को नोटिस भेजे और आगे की जांच की। ऐसे चल रह सिंडिकेट DCP ने आगे बताया कि साइबर अपराधी दूसरे राज्यों में धोखाधड़ी करने के लिए भोपाल से फर्जी खाते खरीदते हैं। दूसरे राज्यों की पुलिस ऐसे खातों पर रोक लगा देती है, लेकिन वे अक्सर क्षेत्राधिकार या दूरी की वजह से FIR दर्ज नहीं करते हैं। अब भोपाल साइबर-क्राइम ब्रांच ने न केवल फर्जी खाताधारकों के खिलाफ FIR दर्ज करने का फैसला किया है, बल्कि यह भी जांच करने का फैसला किया है कि क्या बैंकों ने खाते खोलते समय KYC के नियमों का पालन किया था। पुलिस खुद इन मामलों में शिकायतकर्ता बनती है। बैंक अधिकारियों की भूमिका की भी जांच उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में पुलिस को पता चला कि बैंकों में चालू खाते बिना आवेदक या उसकी दुकान के फिजिकल वेरिफिकेशन के ही खोल दिए गए थे। इसलिए, अगर एक ही ब्रांच से कई फर्जी खाते खोले गए हैं, तो बैंक अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। बैंक अकाउंट के बाद फर्जी सिम कार्ड वालों पर कसेगी नकेल DCP पटेल ने कहा कि यह कार्रवाई साइबर अपराधियों को बैंक खाते देने वालों पर लगाम लगाने की एक बड़ी योजना का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि अगर इसी तरह की कार्रवाई सभी जिलों और राज्यों में की जाए, तो साइबर अपराध को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि फर्जी बैंक खातों से निपटने के बाद, अगला निशाना साइबर अपराधियों को पहले से चालू सिम कार्ड देने वाले धोखेबाज होंगे।

झारखंड के ‘प्रतिबिंब’ एप से साइबर अपराध पर बड़ी सफलता, 1100 अपराधी गिरफ्तार

Big success on cyber crime through Jharkhand's 'Pratibimba' app, 1100 criminals arrested

Big success on cyber crime through Jharkhand’s ‘Pratibimba’ app, 1100 criminals arrested रमेश अग्रवालरांची ! झारखंड पुलिस द्वारा विकसित ‘प्रतिबिंब’ एप ने देशभर में साइबर अपराध की रोकथाम में बड़ी सफलता हासिल की है। पिछले दस महीनों में इस एप की मदद से 1100 से अधिक साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है। प्रतिदिन लगभग 5000 लोकेशनों की पहचान की जा रही है, जिससे अपराधियों की गतिविधियों पर नजर रखने में काफी मदद मिल रही है। पिछले हफ्ते, नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में गृह मंत्री अमित शाह ने झारखंड पुलिस के डीजीपी अनुराग गुप्ता और एप के डेवलपर गुंजन कुमार को इस एप के लिए विशेष सम्मान से नवाजा। यह एप साइबर अपराध के खिलाफ पुलिस की कारगर पहल साबित हो रहा है और इससे कई अपराधों को रोकने में मदद मिली है। प्रतिबिंब एप के जरिए पुलिस को अपराधियों की लोकेशन और उनकी गतिविधियों की जानकारी मिल रही है, जिससे साइबर अपराधों की जांच और आरोपियों की गिरफ्तारी में तेजी आई है। झारखंड पुलिस की यह पहल देशभर में साइबर सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है। एप के सफल उपयोग से यह साबित होता है कि तकनीक का सही उपयोग पुलिसिंग में बड़ा बदलाव ला सकता है और अपराधियों पर नियंत्रण करने में मददगार साबित हो सकता है।।

केंद्र सर्कार द्वारा फर्जी दस्तावेज लगाकर चल रहे 5.5 मिलियन से अधिक अवैध मोबाइल कनेक्शन बंद -अश्विनी वैष्णव.

Govt blocked over 1.32L mobile phones for financial fraud, cybercrime: Vaishnaw केंद्रीय संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि मोबाइल धोखाधड़ी से निपटने के लिए केंद्र सरकार द्वारा की गई पहल के तहत “फर्जी दस्तावेज लगाकर चल रहे ” 5.5 मिलियन से अधिक अवैध मोबाइल कनेक्शन भी बंद कर दिए गए हैं। भारत सरकार ने साइबर अपराधियों से 400,000 नागरिकों के 1,000 करोड़ रुपये से अधिक जब्त और बरामद किए हैं, केंद्र ने शुक्रवार को राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी द्वारा धोखाधड़ी वाले मोबाइल फोन के उपयोग और साइबर अपराध पर उठाए गए सवालों की एक श्रृंखला पर संसद को सूचित किया।केंद्रीय संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सरकार द्वारा साइबर अपराध और वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े 132,000 मोबाइल कनेक्शन की सेवाएं बंद कर दी गयी हैं, और इसके अतिरिक्त 278,000 कनेक्शन काट दिए गए हैं। वैष्णव ने कहा कि मोबाइल धोखाधड़ी से निपटने के लिए केंद्र सरकार द्वारा की गई पहल के तहत “फर्जी दस्तावेजों पर प्राप्त” 5.5 मिलियन से अधिक अवैध मोबाइल कनेक्शन भी बंद कर दिए गए हैं।उन्होंने जवाब दिया कि सरकार ने धोखाधड़ी वाले मोबाइल कनेक्शन का पता लगाने के लिए एक प्रणाली विकसित की है। उन्होंने संसद में एक लिखित उत्तर में कहा, “एक बार पता चलने पर, दूरसंचार सेवा प्रदाताओं (टीएसपी) को ऐसे मोबाइल कनेक्शनों का पुन: सत्यापन करने का निर्देश दिया जाता है… पुन: सत्यापन में विफल रहने पर, ऐसे मोबाइल कनेक्शन काट दिए जाते हैं।” सरकार ने एक पोर्टल भी विकसित किया है – संचार साथी जो उपयोगकर्ताओं को उनके नाम पर जारी मोबाइल कनेक्शन की जांच करने और अवैध कनेक्शन की रिपोर्ट करने की अनुमति देता है। वैष्णव ने लिखा, यह उपयोगकर्ताओं को अपने चोरी हुए या खोए हुए फोन की रिपोर्ट करने की भी अनुमति देता है, जिसके बाद नंबर सभी टीएसपी पर ब्लॉक कर दिए जाते हैं।उन्होंने कहा कि नागरिक मोबाइल या लैंडलाइन नंबर से प्राप्त अंतरराष्ट्रीय कॉल की भी रिपोर्ट कर सकते हैं।केंद्रीय मंत्री ने बताया कि टेक्स्ट-आधारित साइबर धोखाधड़ी को रोकने के लिए, टेक्स्ट संदेशों के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) विश्लेषण के परिणामस्वरूप फरवरी 2023 और नवंबर 2023 के बीच टेक्स्ट-आधारित साइबर अपराध में 36% की कमी आई है। सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, अवैध मोबाइल कनेक्शन से जुड़े 220,000 व्हाट्सएप खातों को बंद कर दिया गया है, और 2021 से 162 अवैध दूरसंचार सेट-अप का भंडाफोड़ किया गया है।वैष्णव ने कहा कि गलत बिक्री केंद्रों के खिलाफ 365 से अधिक मामले दर्ज किए गए और 70,313 को काली सूची में डाल दिया गया है। इसके अलावा, सरकार ने कहा कि डिस्कनेक्ट किए गए मोबाइल फोन से जुड़े ‘बैंक और पेमेंट्स’ वॉलेट द्वारा भी 983,000 खाते फ्रीज कर दिए गए हैं। सरकार सभी को 1963/1800110420 पर धोखाधड़ी और संदिग्ध कॉल की रिपोर्ट करने की सलाह देती है।

सिंगापुर स्थित साइबर सुरक्षा फर्म साइफर्मा की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत विश्व स्तर पर सबसे अधिक लक्षित देश.

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According to a report by the cybersecurity firm Cyfirma located in Singapore, India is the most targeted country on a global scale. Manish Trivedi इकोनॉमिक टाइम्स और द वायर हिंदी की रिपोर्ट के अनुसार, सिंगापुर स्थित साइबर सुरक्षा फर्म साइफर्मा (Cyfirma) की ‘2023 इंडिया थ्रेट लैंडस्केप रिपोर्ट’ के अनुसार, भारत विश्व स्तर पर सबसे अधिक लक्षित देश है, जो सभी साइबर हमलों में से 13.7% का सामना करता है. 9.6% हमलों के साथ अमेरिका दूसरा सबसे अधिक लक्षित देश है. इसके बाद इंडोनेशिया और चीन ने क्रमश: 9.3% और 4.5% हमलों का सामना किया. साइफर्मा के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी कुमार रितेश ने इकोनॉमिक टाइम्स को बताया कि वैश्विक औसत की तुलना में भारत में विदेशी सरकार-प्रायोजित साइबर हमलों का अनुपात भी अधिक है.उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर पिछले तीन वर्षों में लगभग 68 प्रतिशत साइबर हमले सरकार प्रायोजित थे. उन्होंने कहा, ‘अगर आप भारत की संख्या को देखें, तो यह थोड़ा अधिक 72% है.’ कमजोर साइबर सुरक्षाजहां डिजिटलीकरण ने साइबर सुरक्षा की आवश्यकता को तेज कर दिया है, वहीं भारत के साइबर सुरक्षा नियम कमजोर और अपर्याप्त हैं. पिछले साल 30 नवंबर को इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की वेबसाइट को 24 घंटे में हैकिंग के लगभग 6,000 प्रयासों का सामना करना पड़ा था. यह अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के पांच सर्वरों को रैनसमवेयर द्वारा हैक किए जाने के एक सप्ताह बाद हुआ था. अनुमानित 1.3 टेराबाइट डेटा एन्क्रिप्ट किया गया था. हैकर्स ने एम्स के लिए अपने ही डेटा तक पहुंच को असंभव बना दिया था. 31 अक्टूबर 2023 को बड़े पैमाने पर हुए एक डेटा उल्लंघन में आईसीएमआर के पास मौजूद 81.5 करोड़ से अधिक भारतीयों की जानकारी डार्क वेब पर बेच दी गई थी.

12 महीनों में भारत में लगभग 60% स्वास्थ्य सेवा (हेल्थकेयर) संगठनों को साइबर अटैक का सामना करना पड़ा.

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In the last 12 months, nearly 60% of healthcare organizations in India had to face cyberattacks. Manish Trivedi नई दिल्ली: पिछले 12 महीनों में भारत में लगभग 60% स्वास्थ्य सेवा (हेल्थकेयर) संगठनों को साइबर अटैक का सामना करना पड़ा है. इकोनॉमिक टाइम्स ने यूके स्थित साइबर सुरक्षा फर्म सोफोस के एक नए अध्ययन का हवाला देते हुए बताया है कि इनमें से, साइबर अपराधी लगभग 75% रैंसमवेयर अटैक में डेटा को सफलतापूर्वक एन्क्रिप्ट करने में सक्षम थे, जो पिछले तीन वर्षों में एन्क्रिप्शन की सबसे ऊंची दर है. अख़बार ने साइबर सुरक्षा फर्म के अध्ययन का हवाला देते हुए बताया कि यह पिछले साल किए गए 61% डेटा एन्क्रिप्शन के मुकाबले बड़ी वृद्धि है. बताय गया है कि केवल 24% स्वास्थ्य सेवा संगठन साइबर अपराधियों द्वारा उनके डेटा को एन्क्रिप्ट करने से पहले रैंसमवेयर के अटैक को रोकने में सक्षम थे. रिपोर्ट के अनुसार, यह आंकड़ा 2022 में 34% था. पिछले साल 30 नवंबर को इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की वेबसाइट पर 24 घंटे में करीब 6,000 हैकिंग प्रयास हुए थे. यह अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के पांच सर्वरों को रैंसमवेयर द्वारा हैक किए जाने के हफ्तेभर बाद हुआ था. अनुमान ही कि इसमें 1.3 टेराबाइट डेटा एन्क्रिप्ट किया गया था. हैकर्स ने एम्स के लिए अपने ही डेटा तक पहुंच को असंभव बना दिया था. 31 अक्टूबर, 2023 को बड़े पैमाने पर हुए डेटा ब्रीच (सेंधमारी) में आईसीएमआर के साथ 81.5 करोड़ से अधिक भारतीयों की जानकारी डार्क वेब पर बेची गई. लेकिन हेल्थकेयर क्षेत्र डेटा ब्रीच का नया निशाना क्यों बन रहा है? साइबर जोखिम प्रबंधन फर्म एरेटे के अध्यक्ष एपीएसी राज शिवाराजू ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया कि पुराने सॉफ्टवेयर, पुराने सिस्टम और साइबर सुरक्षा में अपर्याप्त निवेश ने स्थिति खराब कर दी है. जैसे-जैसे भारत स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र को डिजिटल बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, ऑनलाइन सिस्टम को सुरक्षित करना तेजी से महत्वपूर्ण हो गया है. ट्रेंड माइक्रो की 2023 रिपोर्ट के अनुसार, 2023 की पहली छमाही में साइबर सुरक्षा जोखिम की घटनाओं के लिए भारत को अमेरिका और ब्राजील के बाद तीसरा सबसे खराब देश बताया गया. साइबर ख़तरे का हाल कोलंबिया स्थित साइबर सुरक्षा कंपनी टेनेबल की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे भी अधिक चिंता की बात यह है कि भारतीय कंपनियां लगभग आधे साइबर अटैक को नहीं रोक सकती हैं. यह रिपोर्ट 825 आईटी और साइबर सुरक्षा पेशेवरों के ऑनलाइन अध्ययन पर आधारित है, जिनमें से 69 भारतीय थे. टेनेबल इंडिया के कंट्री मैनेजर कार्तिक शाहनी ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया, ‘आज के खतरे के माहौल में जब तक संगठन साइबर अटैक पर प्रतिक्रिया देते हैं, तब तक बाजी आधी हारी जा चुकी होती है.’ रिपोर्ट के अनुसार, इसका कारण आईटी और साइबर सुरक्षा टीमों के बीच समन्वय की कमी है, जिसे 43% भारतीय संगठनों ने स्वीकार किया है. शाहानी ने कहा कि संगठनों में आईटी और सुरक्षा टीमों के बीच लक्ष्यों के अलग होने के परिणामस्वरूप तालमेल की स्पष्ट कमी होती है, जिससे साझा लक्ष्य की दिशा में एकजुट होकर काम करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है. अध्ययन में उत्तर देने वाले कम से कम 78% भारतीयों का मानना है कि उनके संगठन प्रिवेंटिव साइबर सुरक्षा के लिए समर्पित ज़्यादा संसाधनों के साथ साइबर अटैक से बेहतर बचाव कर सकते हैं. हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि 10 में से केवल सात (71%) संगठनों का कहना है कि उनकी आईटी टीमें पैचिंग और सुधार की तुलना में अपटाइम के बारे में अधिक चिंतित हैं. बेहतर साइबर सुरक्षा के लिए कौशल की कमी इसके अलावा, भारत के साइबर सुरक्षा उद्योग में मांग और आपूर्ति के बीच गहरी खाई है. चीन के बाद सक्रिय इंटरनेट यूजर्स की दूसरी सबसे बड़ी संख्या होने के बावजूद भारत में वैश्विक साइबर सुरक्षा नौकरियों का केवल 6% है. बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, मई 2023 तक इस उद्योग में केवल 40,000 नौकरियां थीं. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में साइबर सुरक्षा पेशेवरों की मांग बढ़ रही है, लेकिन उद्योग को जरूरी कौशल को लेकर बड़ी चुनौती का सामना कर रहा है, जहां मांग-आपूर्ति के बीच का अंतर 30% है. रिपोर्ट के अनुसार, भारत का साइबर सुरक्षा कार्यबल 2023 में लगभग 0.3 मिलियन था, जो 2022 में 0.21 मिलियन और 2021 में 0.1 मिलियन था. इसकी तुलना में, साइबर सुरक्षा पेशेवरों का वैश्विक कार्यबल लगभग 4.7 मिलियन था. इसमें यह भी कहा गया है कि साइबर सुरक्षा राजस्व के मामले में भारत 222 बिलियन डॉलर के वैश्विक राजस्व में से 2.50 बिलियन डॉलर का अनुमानित राजस्व पैदा कर रहा है. यह रिपोर्ट द वायर हिंदी की एक रिपोर्ट पर आधारित है 

क्या है कपल चैलेंज ? पुलिस की समझाइश बढ़ सकते हैं साइबर क्राइम के मामले

मुंबई. सोशल मीडिया पर इस समय #CoupleChallenge बहुत वायरल हो रहा है। भले ही यह चैलेंज बहुत क्यूट नजर आता हो, देशभर में साइबर एक्सपर्ट और पुलिस ने सावधान रहने की अपील की है। इस संबंध में कई शिकायतें भी आई हैं। कपल चैलेंज के हैशटेग के साथ हजारों लोग इंस्टाग्राम, फेसबुक और ट्विटर पर कपल्स के फोटो डाल रहे हैं। अब तक इंस्टाग्राम पर ही करीब 40 हजार तस्वीरों या छोटे वीडियो को इस हैशटेग के साथ पोस्ट किया जा चुका है। इस ट्रेंड को लेकर सैकड़ों मीम भी आ गए हैं, जहां सिंगल लोग किसी सेलिब्रिटी की तस्वीर को फोटोशॉप के जरिए अपनी तस्वीर में जोड़ पोस्ट कर रहे हैं। इतना ही नहीं, कुछ सिंगल्स ने तो इस ट्रेंड का इस्तेमाल अपने अकेलेपन को मजाकिया अंदाज में दिखाने में किया है। पुलिस क्यों इस ट्रेंड से दूर रहने को कह रही है? इस इंटरनेट चैलेंज ने पुलिस का भी ध्यान खींचा है और कई तरह की शिकायतें उन्हें मिल रही है। पुलिस ने कहा कि कई तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ की जा रही है। पोर्नोग्राफी, डीपफेक या अन्य साइबर क्राइम के लिए इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। पुणे पुलिस ने ट्वीट कर कहा कि अपने पार्टनर के साथ फोटो पोस्ट करने से पहले दो बार सोचें। कुछ लोगों ने पुलिस के सामने दावा किया है कि अश्लील वेबसाइट्स पर तस्वीरें पोस्ट करने के मामले भी सामने आ रहे हैं। पुणे के बाद यूपी पुलिस भी इस कैम्पेन को लेकर सक्रिय हो गई है। आगरा पुलिस ने कपल्स को सावधानी बरतने को कहा है। प्रेस ब्रीफिंग में पुणे में साइबर पुलिस स्टेशन में इंस्पेक्टर जयराम पाइगुडे ने कहा कि लोगों को इस तरह की तस्वीरें पोस्ट करने से पहले सजग रहने की जरूरत है।

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