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फडणवीस सरकार में उपमुख्यमंत्री शिंदे कद बढ़ा, हर फाइल भी शिंदे के पास जाएगी!

मुंबई महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस तीन प्रमुख दलों के गठबंधन के बीच “शक्ति राजनीति” में संतुलन बनाए रखने के लिए अधिकारों का समान वितरण सुनिश्चित किया है. आजतक के जिस सरकारी आदेश की कॉपी है उसे 18 मार्च, 2025 को मुख्य सचिव सुजाता सौनिक ने जारी किया है. इस आदेश में कहा गया है कि वित्त और योजना विभाग, जो वर्तमान में अजित पवार के अधीन है, उसकी हर फाइल अब अंतिम मंजूरी के लिए सीएम देवेंद्र फडणवीस तक पहुंचने से पहले उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से होकर गुजरेगी. इसे सियासी संतुलन बनाए रखने के लिए एक रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है. महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार के दौरान जब उद्धव ठाकरे सीएम थे और अजित पवार के पास वित्त विभाग था. तब शिंदे के शिवसेना गुट ने पवार पर पक्षपात का आरोप लगाया था. उन्होंने दावा किया कि पहले एनसीपी, फिर कांग्रेस और अंत में शिवसेना को पैसा आवंटित किया गया, जो एमवीए के पतन का एक प्रमुख कारण बन गया. शिंदे के सीएम रहने के दौरान भी ऐसा ही था नियम राजनीतिक बदलाव के बाद एकनाथ शिंदे सीएम बने और फडणवीस डिप्टी सीएम बने और एक साल के भीतर ही शिंदे के नेतृत्व में अजित पवार भी डिप्टी सीएम बन गए. हालांकि पवार ने वित्त विभाग अपने पास रखा, लेकिन अंतिम फैसले का अधिकार शिंदे के पास ही रहा.तब भी 2023 में आदेश जारी किया गया था कि फाइलें तत्कालीन डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस के माध्यम से अंतिम मंजूरी के लिए सीएम एकनाथ शिंदे के पास भेजी जाएंगी. हालांकि, अब वित्त विभाग को सत्ता संतुलन को बाधित होने से रोकने के लिए फडणवीस ने फाइल अनुमोदन प्रक्रिया को पहले ही बदल दिया और उनके पास फाइल पहुंचने से पहले दोनों उप मुख्यमंत्रियों के पास जाएगी. राजनीतिक हलकों में इसे सीएम फडणवीस का “मास्टरस्ट्रोक” बताया जा रहा है. महायुति में हुआ था विवाद तीनों महायुति दलों के नेता पहले भी लगातार कहते रहे हैं कि उनके बीच “कभी कोई विवाद नहीं था”. हालांकि, अजित पवार को अब अपनी फाइलों के लिए शिंदे की मंजूरी की जरूरत होगी. इससे शिंदे की शिवसेना को एनसीपी पर बढ़त मिल गई है, जो पहले टकराव का कारण बनी थी. इस निर्णय के माध्यम से एकनाथ शिंदे को सशक्त बनाकर, फडणवीस ने सुनिश्चित किया है कि शिंदे का गुट फंड आवंटन और निर्णय लेने से संतुष्ट रहे. वहीं इस कदम के जरिए अजित पवार को भी नियंत्रण में रखा जा सके. इस कदम को महायुति के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक मजबूत कदम के रूप में देखा जा रहा है.  

मंत्रियों के कहने पर किसी भ्रष्ट निजी सहायकों और विशेष कार्य अधिकारी की नियुक्तियों को मंजूरी नहीं देंगे: फडणवीस

मुंबई महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक बड़ा फैसला लेते हुए साफ कर दिया है कि वह मंत्रियों के कहने पर किसी भ्रष्ट निजी सहायकों (पीएस) और विशेष कार्य अधिकारी की नियुक्तियों को मंजूरी नहीं देंगे। कृषि मंत्री और अजित पवार गुट के वरिष्ठ नेता माणिकराव कोकाटे के बयान पर पलटवार करते हुए फडणवीस ने कहा कि चाहे कोई नाराज हो, लेकिन जिन अफसरों पर भ्रष्टाचार या गलत कामों के आरोप हैं, उन्हें वह अपनी मंजूरी नहीं देंगे। फडणवीस का साफ संदेश गौरतलब है कि माणिकराव कोकाटे ने सोमवार को एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि अब मंत्रियों के पीए और ओएसडी की नियुक्ति भी मुख्यमंत्री तय कर रहे हैं, जिससे उनके पास खुद के फैसले लेने की गुंजाइश नहीं बची है। इस बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी। इसके जवाब में फडणवीस ने कहा, “राज्य में मंत्रियों के पीए और विशेष कार्य अधिकारियों की नियुक्ति का अधिकार मुख्यमंत्री के पास होता है। कोकाटे साहब को शायद यह जानकारी नहीं है कि यह कोई नई परंपरा नहीं है। मैंने कैबिनेट बैठक में स्पष्ट किया था कि मंत्री अपने सुझाव भेज सकते हैं, लेकिन अगर उन पर गलत कामों का ठप्पा लगा है, तो मैं मंजूरी नहीं दूंगा।” सीएम फडणवीस ने बताया कि मंत्रियों की ओर से कुल 125 नाम भेजे गए थे, जिनमें से 109 को हरी झंडी दी गई, लेकिन जिन पर संदेह था, उन्हें मंजूरी नहीं दी गई। उन्होंने साफ कहा, “मैंने बाकी नामों को क्लीयर नहीं किया क्योंकि उन पर आरोप हैं और कुछ मामलों में जांच भी चल रही है। चाहे कोई नाराज हो या खुश, मैं ऐसे नामों को पास नहीं करूंगा।” साहित्य सम्मेलन पर भी बोले फडणवीस इस बीच, महाराष्ट्र विधान परिषद की उपाध्यक्ष और शिंदे गुट की शिवसेना नेता नीलम गोऱ्हे द्वारा उद्धव ठाकरे पर की गई टिप्पणी और फिर संजय राऊत के पलटवार से राजनीति गरमा गई। इस पर मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि ऐसे राजनीतिक बयानों से बचना चाहिए। उन्होंने कहा, “साहित्य सम्मेलन में भी नफरत झलक रही है। वहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर उद्धव ठाकरे तक पर कटाक्ष किए गए। लेकिन क्या ऐसे मंच का इस्तेमाल राजनीति के लिए करना सही है?” फडणवीस ने यह भी कहा कि साहित्य मंचों पर सभी को संयम बरतना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि अगर राजनीतिक नेता साहित्य सम्मेलनों में जाते हैं, तो उन्हें अपनी राजनीतिक बयानबाजी पर भी रोक लगानी चाहिए। इस बीच, राज्य के मुख्यमंत्री ने किसानों के लिए राहत की घोषणा करते हुए बताया कि केंद्र सरकार की किसान संमान निधि योजना के तहत अब राज्य सरकार अपनी तरफ से 6,000 रुपये की जगह 9,000 रुपये देगी। इससे किसानों को कुल 15,000 रुपये सालाना मिलेंगे, जिससे उनकी आर्थिक मदद हो सकेगी।

राहुल गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस पार्टी ‘भारत जोड़ो यात्रा’ में अर्बन नक्सल संगठन शामिल थे: देवेंद्र फडणवीस

मुंबई महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आरोप लगाया है कि राहुल गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस पार्टी ‘भारत जोड़ो यात्रा’ में “अर्बन नक्सल” संगठन शामिल थे। फडणवीस के मुताबिक, इन संगठनों ने नेपाल में एक बैठक आयोजित की थी, जिसका उद्देश्य भाजपा शासित सरकारों को अस्थिर करना था। फडणवीस ने विधानसभा में कहा कि यह बैठक महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से ठीक पहले 15 नवंबर को काठमांडू में हुई थी। इसका उद्देश्य मुंबई जैसे वित्तीय राजधानी में अशांति पैदा करना था। फडणवीस ने यह भी कहा कि एंटी-टेररिज्म स्क्वाड (ATS) ने चुनावों में “आतंकी धन” के इस्तेमाल की जांच शुरू की है। उन्होंने यह दावा किया कि विदेशी हस्तक्षेप के सबूत मिले हैं। मुख्यमंत्री ने विधानसभा में कहा, “15 नवंबर को काठमांडू में एक बैठक हुई थी, जिसमें उन संगठनों ने भाग लिया था जो भारत जोड़ो यात्रा में शामिल थे। इस बैठक में ईवीएम का विरोध और महाराष्ट्र के साथ-साथ भाजपा शासित राज्यों की सरकार को अस्थिर करने और बैलट पेपर की वापसी जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई थी।” फडणवीस ने आगे दावा किया कि राहुल गांधी की यात्रा में शामिल 180 संगठनों में से 40 को पूर्व गृह मंत्री आरआर पटिल ने कांग्रेस-एनसीपी सरकार के दौरान ‘फ्रंटल संगठन’ के रूप में नामित किया था। फडणवीस ने कहा, “18 फरवरी 2014 को मनमोहन सिंह सरकार के दौरान केंद्र ने लोकसभा में 72 फ्रंटल संगठनों का उल्लेख किया था, जिनमें से 7 भारत जोड़ो यात्रा का हिस्सा थे।” मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इन संगठनों ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में महा विकास आघाड़ी (MVA) के लिए प्रचार किया था। उन्होंने कहा, “भारत में चुनावों में विदेशी हस्तक्षेप के सबूत मिले हैं।” फडणवीस का यह दावा उस समय आया है जब सरकार ने विधानसभा में “महाराष्ट्र विशेष सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम, 2024” प्रस्तुत किया है, जो “शहरी नक्सलवाद” से निपटने के लिए कदम उठाने का प्रस्ताव करता है। यह कानून शहरी केंद्रों में नक्सलवाद की बढ़ती उपस्थिति से निपटने के लिए कदम उठाने का दावा करता है।

आज देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार का होगा विस्तार

मुंबई महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महायुती सरकार में नए मंत्रियों का शपथग्रहण आज होने जा रहा है। यह शपथग्रहण समारोह शाम 4 बजे के आसपास होने की संभावना है। राजभवन में मंत्रियों की शपथ लेने के लिए पर्याप्त क्षमता वाला सभागृह नहीं है, इसलिए इस कार्यक्रम को राजभवन के लॉन में आयोजित किया जाएगा। शपथग्रहण के इस कार्यक्रम के लिए जोरदार तैयारियां चल रही हैं। महायुती सरकार में भाजपा के 21, शिवसेना के 12 और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के 10 मंत्री शामिल होंगे। तीनों ही पार्टियों के वरिष्ठ नेताओं ने संभावित मंत्रियों को शपथ ग्रहण के लिए फोन करना शुरू कर दिया है। इसी बीच भाजपा, शिवसेना (शिंदे गुट) और अजित पवार की एनसीपी से मंत्री पद के लिए संभावित नामों की सूची भी सामने आई है। भाजपा के संभावित मंत्रियों की लिस्ट 1) मंगलप्रभात लोढा, मुंबई 6) शिवेंद्रसिंहराजे भोसले, पश्चिम महाराष्ट्र 7) गोपीचंद पडळकर, पश्चिम महाराष्ट्र 8) माधुरी मिसाल, पश्चिम महाराष्ट्र 9) राधाकृष्ण विखे पाटील, पश्चिम महाराष्ट्र 10) चंद्रशेखर बावनकुले, विदर्भ 12) गिरीश महाजन, उत्तर महाराष्ट्र 13) जयकुमार रावल, उत्तर महाराष्ट्र 14) पंकजा मुंडे, मराठवाड़ा शिवसेना से इन्हें बनाया जा सकता है मंत्री 1) उदय सामंत, कोकण 2) शंभुराजे देसाई, पश्चिम महाराष्ट्र 3) गुलाबराव पाटील, उत्तर महाराष्ट्र 4) दादा भुसे, उत्तर महाराष्ट्र 6) संजय शिरसाट, मराठवाड़ा 8) प्रकाश अबिटकर, पश्चिम महाराष्ट्र अजित पवार गुट के संभावित मंत्री 1) छगन भुजबल महायुती सरकार के मंत्रिमंडल में भाजपा से 21, शिवसेना के 12 और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के 10 विधायक शामिल होंगे। इनमें से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और अजित पवार ने पहले ही शपथ ले ली है। ऐसे में आज भाजपा के 20, शिवसेना के 11 और राष्ट्रवादी कांग्रेस के 9 विधायक मंत्री पद की शपथ लेंगे। यह शपथग्रहण समारोह नागपुर के राजभवन में चार बजे के बाद आयोजित होगा। इसके लिए राजभवन के लॉन में विशेष तैयारी की गई है। 1991 में शिवसेना के विभाजन के बाद नागपुर में शपथग्रहण समारोह हुआ था। 33 साल बाद आज फिर नागपुर में मंत्रिमंडल का शपथग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा। इस शपथग्रहण कार्यक्रम को लेकर राज्य भर से नेताओं और कार्यकर्ताओं की नजरें इस पर लगी हुई हैं।

मंत्रालयों के बंटवारे की फडणवीस ने बताई तारीख, एकनाथ शिंदे की तारीफ, उन्होंने इशारों में ही चिंता भी बढ़ा दी

मुंबई महाराष्ट्र के नए सीएम बने देवेंद्र फडणवीस ने डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि वह धैर्य से फैसले लेने वाले नेता हैं और अकसर सोच-समझकर ही कोई निर्णय लेते हैं। इसके अलावा उन्होंने लड़की बहिन योजना शुरू करने का क्रेडिट भी एकनाथ शिंदे को दिया। हालांकि होम मिनिस्ट्री की डिमांड कर रहे एकनाथ शिंदे की उन्होंने इशारों में ही चिंता भी बढ़ा दी। शपथ लेने के बाद दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय तो हमेशा ही हमारे पास रहा है। इस तरह देवेंद्र फडणवीस ने यह संकेत भी एकनाथ शिंदे को दे दिया कि भाजपा होम मिनिस्ट्री पर अपना दावा नहीं छोड़ेगी। बता दें कि एकनाथ शिंदे अब भी होम मिनिस्ट्री के लिए लॉबिंग में जुटे हैं। उन्होंने शपथ ग्रहण समारोह के बाद भी अमित शाह से मुलाकात की थी। कहा जा रहा है कि इस दौरान उन्होंने मंत्रालयों के बंटवारे में शिवसेना को महत्व देने की मांग की थी। ऐसे में फडणवीस की यह टिप्पणी अहम है कि गृह मंत्रालय हमेशा से भाजपा के पास ही रहा है। वह खुद एकनाथ शिंदे की सरकार में डिप्टी सीएम रहते हुए होम मिनिस्ट्री संभाल रहे थे। अब एकनाथ शिंदे का कहना है कि उसी फॉर्मूले के तहत यदि अब वह डिप्टी सीएम बन रहे हैं तो फिर होम मिनिस्ट्री उन्हें दे दी जाए। इसके साथ ही देवेंद्र फडणवीस ने मंत्रालयों के बंटवारे की भी आखिरी तारीख बता दी है। उन्होंने कहा कि 16 दिसंबर तक मंत्रालयों का बंटवारा कर लिया जाएगा। फडणवीस ने कहा कि एकनाथ शिंदे, अजित पवार के साथ मिलकर हम लोग काफी चीजें तय कर चुके हैं। कोई मतभेद नहीं है और जल्दी ही फैसला ले लिया जाएगा। यही नहीं उन्होंने बीते ढाई साल चली सरकार के मंत्रियों को रिपीट करने के सवाल पर कहा कि पहले मूल्यांकन किया जाएगा। हम मूल्यांकन करने के बाद ही मंत्रियों को लेकर फैसला लेंगे। देवेंद्र फडणवीस ने दिए इंटरव्यू में अजित पवार की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि पश्चिम महाराष्ट्र ने साबित किया है कि वह शरद पवार की बजाय अजित पवार के साथ हैं। ईवीएम में गड़बड़ी के सवालों और कांग्रेस की ओर से यात्रा निकालने पर भी फडणवीस ने जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि ये लोग झारखंड और लोकसभा इलेक्शन में जीतते हैं तो ऐसा नहीं कहते, लेकिन महाराष्ट्र में ऐसा सवाल उठा रहे हैं। ऐसा तो नहीं चलेगा कि हारने पर सवाल उठाएं और जीतने पर चुप्पी साध लें। वहीं ब्राह्मण होते हुए भी सीएम बनाए जाने के सवाल पर फडणवीस ने कहा कि जनता जाति की बात नहीं करती। यह तो नेताओं के दिमाग की उपज है। उन्होंने कहा कि हमें तो मराठा और ओबीसी सभी ने समर्थन दिया है। जाति की राजनीति लोग तभी शुरू करते हैं, जब कुछ और सफल नहीं होता।

देवेंद्र फडणवीस तीसरी बार बने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, एकनाथ शिंदे और अजित पवार बने डिप्टी सीएम

मुंबई महाराष्ट्र के नए मुख्यमंत्री के रूप में दिग्गज भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को शपथ ली। मुंबई के ऐतिहासिक आजाद मैदान में राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन ने उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत भाजपा और एनडीए के कई दिग्गज नेता मौजूद रहे। देवेंद्र फडणवीस के साथ शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष अजित पवार ने उपमुख्यमंत्री के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री के अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा समेत कई प्रदेशों के मुख्यमंत्री मौजूद थे। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान समेत कई केंद्रीय मंत्री भी समारोह में मौजूद थे। बॉलीवुड हस्तियों में शाहरुख खान, सलमान खान, संजय दत्त, रणबीर कपूर, रणवीर सिंह और माधुरी दीक्षित भी शपथ ग्रहण कार्यक्रम के लिए पहुंचे थे। दिग्गज क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर भी समारोह में शामिल हुए। महाराष्ट्र भाजपा विधायक दल के नेता के रूप में फडणवीस के नाम पर बुधवार को मुहर लगाई गई थी। इसके बाद, फडणवीस, शिंदे और पवार ने 4 दिसंबर को राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन से मिलकर महायुति सरकार बनाने का दावा पेश किया था। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन ने शानदार जीत दर्ज की थी। उसने 288 में से 235 सीटों पर विजय हासिल की थी। यह परिणाम भाजपा के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ, जो 132 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। वहीं, विपक्षी महा विकास अघाड़ी (एमवीए) को बड़ा झटका लगा, जिसमें कांग्रेस को सिर्फ 16 सीटें मिली थीं। गठबंधन सहयोगी शिवसेना (यूबीटी) ने 20 सीटें जीतीं, जबकि एनसीपी (शरद पवार गुट) को सिर्फ 10 सीटें मिली थीं।

फडणवीश की एक बार फिर ताजपोशी पीएम नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में, इस बीच कई बड़े नेता भी समारोह में शामिल होंगे.

मुंबई मुंबई के आजाद मैदान में आज देवेंद्र फडणवीस महाराष्ट्र के नए सीएम के तौर पर शपथ लेंगे. फडणवीस तीसरी बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं. शाम 5.30 बजे उनका शपथ ग्रहण कार्यक्रम होगा, जिसमें बिहार के सीएम नीतीश कुमार और आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू भी मौजूद रहेंगे. CM: सिद्धी विनायक मंदिर पहुंचे फडणवीस महाराष्ट्र के सीएम पद की शपथ लेने से पहले देवेंद्र फडणवीस सिद्धि विनायक मंदिर पहुंचे. यहां उन्होंने भगवान गणेश के दर्शन किए. बता दें कि आज शाम फडणवीस महाराष्ट्र के सीएम पद की शपथ लेने जा रहे हैं.  फडणवीस की ताजपोशी में शामिल होंगे NDA के कई दिग्गज आज मुंबई में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण समारोह होने वाला है. फडणवीस की ताजपोशी में एनडीए के इन दिग्गजों के शामिल होने की उम्मीद है.     रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह     गृह मंत्री अमित शाह     आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू     यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ     बिहार के सीएम नीतीश कुमार     बीजेपी अध्यक्ष जे पी नड्डा     केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी     शिवराज सिंह चौहान     वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण     वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल     विदेश मंत्री एस जयशंकर     संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया     बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव बी एल संतोष, संयुक्त सचिव शिव प्रकाश     राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े पीएम की मौजूदगी में शाम को इस समय होगा शपथ ग्रहण राज्यपाल से मुलाकात के बाद फडणवीस ने कहा कि ‘नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह गुरुवार शाम 5:30 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में होगा. मैंने एकनाथ शिंदे से मुलाकात की और उनसे इस सरकार में शामिल होने का अनुरोध किया, क्योंकि यह महायुति कार्यकर्ताओं की इच्छा है.हम महाराष्ट्र की जनता से किए गए वादों को पूरा करेंगे.’ फडणवीस ने कहा, ‘हम तीनों नेता एक हैं. डिप्टी सीएम और सीएम सिर्फ तकनीकी पद हैं. कौन-कौन शपथ लेगा, ये शाम तक बता दिया जाएगा.’ कई बड़े नेता होंगे समारोह में शामिल सूत्रों की मानें तो शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे और एनसीपी के अजित पवार नए मंत्रिमंडल में उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. शपथ ग्रहण समारोह को भव्‍य बनाने के लिए कई दिनों से तैयारियां चल रही हैं. इस समारोह में प्रधानमंत्री के अलावा में एनडीए के कई मुख्यमंत्री और नेताओं के भी शामिल होने की उम्‍मीद है. बता दें क‍ि फडणवीस का शीर्ष पद पर यह तीसरा कार्यकाल होगा. शपथ समारोह से पहले ये बोले शिंदे फडणवीस के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने से पहले एकनाथ शिंदे ने कहा कि ‘हमारी सरकार- महायुति सरकार, हम तीनों और हमारी टीम ने पिछले ढाई साल में जो काम किया है, वह उल्लेखनीय है. इसे इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा. हमें खुशी है कि हमने इतने बड़े फैसले लिए.’ शिंदे के साथ फडणवीस और एनसीपी प्रमुख अजित पवार भी इस बीच मौजूद थे. उन्‍होंने कहा कि ‘हम सरकार चलाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे. पार्टी की गतिविधियों का प्रबंधन भाजपा प्रमुख चंद्रशेखर बावनकुले और एनसीपी के सुनील तटकरे करेंगे.’ महायुति गठबंधन चुनाव में शानदार जीत हासिल की 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन ने शानदार जीत दर्ज की, जिसने 288 में से 235 सीटों के साथ शानदार जीत हासिल की. ​​यह परिणाम भाजपा के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ, जो 132 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. जबकि, महा विकास अघाड़ी (एमवीए) को बड़ा झटका लगा, जिसमें कांग्रेस को सिर्फ़ 16 सीटें मिलीं. इसके गठबंधन सहयोगी शिवसेना (यूबीटी) ने 20 सीटें जीतीं, जबकि एनसीपी (शरद पवार गुट) को सिर्फ 10 सीटें मिलीं. महाराष्ट्र में कौन है संभावित मंत्री बीजेपी की तरफ से देवेंद्र फडणवीस (मुख्यमंत्री), राधाकृष्ण विखे-पाटिल, सुधीर मुनगंटीवार, चंद्रकांत पाटिल, गिरीश महाजन, सुरेश खाडे, रवींद्र चव्हाण, अतुल सावे, मंगल प्रभात लोढ़ा, राहुल नार्वेकर, जयकुमार रावल, चंद्रशेखर बावनकुले, बबनराव लोणीकर, पंकजा मुंडे, देवयानी फरांदे, किसन कथोरे, नितेश राणे, आशीष शेलार, संभाजी निलंगेकर, राहुल कुल.

हमें विश्वास है कि एकनाथ शिंदे सरकार में शामिल होंगे. सीएम, डिप्टी सीएम सिर्फ तकनीकी शब्द हैं: देवेंद्र फडणवीस

मुंबई शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे, भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस, एनसीपी प्रमुख अजित पवार ने राज्य में सरकार बनाने का दावा पेश किया। देवेंद्र फडणवीस कल, 5 दिसंबर को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। महाराष्ट्र के भावी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “हमने राज्यपाल से मुलाकात की है और राज्य में सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए समर्थन पत्र सौंपा है। राज्यपाल ने हमें कल शाम 5.30 बजे शपथ समारोह के लिए आमंत्रित किया है। महाराष्ट्र के मनोनीत मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “आज हमने राज्यपाल से भेंट की है…और शिवसेना के अध्यक्ष और शिवसेना विधायक दल के नेता के तौर पर एकनाथ शिंदे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद के लिए मेरे नाम की सिफारिश करते हुए एक पत्र दिया है…राज्यपाल ने हमें सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया है। शपथ ग्रहण समारोह 5 दिसंबर(कल) शाम 5.30 बजे प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति में होगा…हमने महाराष्ट्र की जनता से जो वादे किए हैं उनको पूरा करने के लिए यह सरकार काम करेगी। . हमें विश्वास है कि एकनाथ शिंदे सरकार में शामिल होंगे. सीएम, डिप्टी सीएम सिर्फ तकनीकी शब्द हैं. एनसीपी प्रमुख अजित पवार ने कहा, “…हम राज्य में सरकार चलाने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ देंगे। पार्टी से संबंधित गतिविधियों को (भाजपा प्रमुख) चंद्रशेखर बावनकुले और एनसीपी के सुनील तटकरे संभालेंगे। शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने कहा, “मुझे बहुत खुशी है कि हमारी सरकार, महायुति सरकार, हमारी टीम ने ढाई साल में जो काम किया है वह उल्लेखनीय है और इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा।

कल सुबह 10 बजे विधायक दल की बैठक में पर्यवेक्षक की मौजूदगी में देवेंद्र फडणवीस के नाम पर मुहर लग जाएगी!

मुंबई  पांच साल के सीएम, फिर 72 घंटे के मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और फिर ढाई साल के डिप्टी सीएम। पिछले 10 साल तक अलग-अलग रोल में देवेंद्र फडणवीस महाराष्ट्र की राजनीति की राजनीति के हीरो बने रहे। अब पांच दिसंबर को वह तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने की तैयारी कर रहे हैं। महाराष्ट्र में अब पांच साल के मराठा राज के बाद ‘पेशवा’ की ‘पेशवाई’ की चलेगी। बीजेपी ने फडणवीस के नाम को सीएम पद के लिए फाइनल कर लिया है। चार दिसंबर को सुबह 10 बजे विधायक दल की बैठक में पर्यवेक्षक निर्मला सीतारमन और विजय रूपाणी की मौजूदगी में उनके नाम पर मुहर लग जाएगी। महाराष्ट्र के पहले ब्राह्मण नेता, जो दूसरी बार सीएम बनेंगे मराठा इतिहास में पंतप्रधान यानी ‘पेशवा’ अपने कूटनीति और युद्धनीति के लिए जाने जाते थे। देवेंद्र फडणवीस के प्रशंसक भी उन्हें ‘पेशवा’ और देवा भाऊ ही कहते हैं। देवेंद्र फडणवीस पहले भी दो बार महाराष्ट्र के सीएम रह चुके हैं, मगर उनके लिए यह कुर्सी ‘लॉलीपॉप’ की तरह नहीं मिली। हर बार उन्होंने बड़े चैलेंज को स्वीकार किया और हर दांव से पार्टी को जीत दिलाई। उनकी खासियत यह है कि उन्होंने युवा पार्षद के तौर पर राजनीति में एंट्री ली है, इसलिए वह जनता और कार्यकर्ताओं के नब्ज को पहचानते हैं। देवेंद्र फडणवीस संघ के ‘लाडले’ हैं और शाह-मोदी के प्रिय भी। काबिलियत के कारण ही वह मराठा राजनीति वाले राज्य में दूसरे ब्राह्मण सीएम बने। महाराष्ट्र के पहले ब्राह्मण सीएम शिवसेना के नेता मनोहर जोशी थे, मगर वह पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर सके थे। कांग्रेस-एनसीपी के 15 साल के शासन का किया था अंत 2014 में पहली बार देवेंद्र फडणवीस जब सीएम बने थे, तब उन्होंने एनसीपी-कांग्रेस के 15 साल के शासन का अंत किया था। फडणवीस ने विधानसभा से सड़क तक कांग्रेस-एनसीपी शासन में हुए सिंचाई घोटाले को लेकर आवाज बुलंद की। मोदी लहर के बीच प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र ने चुनाव का ताना-बाना बुना और जीत हासिल की। दूसरी बार भी एंटी इम्कबेंसी को दरकिनार कर गठबंधन के साथ बहुमत हासिल किया, मगर सत्ता हासिल नहीं कर सके। 72 घंटे की सरकार बनाई, तब उन्होंने शरद पवार से बातचीत की थी। जब सरकार गिरी, तब फडणवीस ने विधानसभा में चेतावनी के लहजे में पवार और ठाकरे को एक शेर सुनाया था। ‘मेरा पानी उतरता देख, मेरे किनारे पर घर मत बसा लेना। मैं समंदर हूं…लौटकर आऊंगा।’ ढाई साल बाद ही शिवसेना दो हिस्सों में टूट गई। एनसीपी के दो टुकड़े हो गए। बीजेपी को फडणवीस सत्ता में ले आए। 2024 में एक बार फिर अपनी रणनीति से एंटी इम्कबेंसी की हवा बदल दी। बीजेपी सर्वाधिक 132 सीटें जीती ही, महायुति ने भी इतिहास रच दिया। नरेंद्र मोदी क्यों हुए देवेंद्र फडणवीस के मुरीद ? रिपोर्टस के मुताबिक 2014 के लोकसभा चुनाव में रैली के दौरान नरेंद्र मोदी एयरपोर्ट पर बीजेपी के बड़े नेताओं से बातचीत कर रहे थे। वहां नितिन गडकरी, गोपीनाथ मुंडे और देवेंद्र फडणवीस भी थे। नरेंद्र मोदी ने पूछा कि महाराष्ट्र में बीजेपी को कितनी सीटें मिलेंगी? गडकरी और मुंडे 17-18 के आंकड़े तक पहुंच सके। तब देवेंद्र फडणवीस ने 40 सीटें जीतने की भविष्यवाणी की और यह सच साबित हुई। फिर विधानसभा चुनाव के दौरान फडणवीस ने शिवसेना से अलग चुनाव लड़ने के लिए केंद्रीय नेतृत्व को राजी किया। यह प्रयोग भी सफल हुआ। 2014 में पहली बार शिवसेना से अलग प्रदेश में बीजेपी अकेले चुनाव लड़ी और 125 सीटें हासिल कीं। उनकी इस रणनीति का बीजेपी के बड़े नेताओं ने विरोध किया था, मगर फडणवीस की रणनीति कामयाब रही और बीजेपी को महाराष्ट्र की पहली बार सत्ता मिली। उद्धव ठाकरे के घमंड को तोड़ने वाले ‘पेशवा’! यह कहानी महाराष्ट्र की सियासी गलियारों में सुनाई जाती है। सच या झूठ, इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है। 2014 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी के केंद्रीय नेताओं ने उद्धव ठाकरे को बातचीत का निमंत्रण दिया था। बताया जाता है कि उद्धव ठाकरे ने संदेश दिया कि बीजेपी नेता मातोश्री में आकर उनसे चर्चा करे। यह बात बीजेपी को पसंद नहीं आई। तब देवेंद्र फडणवीस ने इसे चुनौती के तौर पर लिया। पहले बीजेपी अकेले चुनाव लड़कर बड़ी पार्टी बनी। 44 साल की उम्र में जब पहली बार सीएम बने, तब फडणवीस ने पहली बार शिवसेना को गठबंधन का जूनियर पार्टनर बनाया। पांच साल तक सरकार चलाई। दूसरी बार बीजेपी और शिवसेना साथ में उतरी। महायुति को बहुमत मिला, मगर उद्धव ठाकरे सीएम पोस्ट पर अड़ गए। देवेंद्र फडणवीस ने एनसीपी के क्षणिक बागी अजित पवार के साथ 80 घंटे के लिए सरकार बनाई, मगर चल नहीं सकी। फडणवीस विपक्ष में बैठे और उद्धव ठाकरे की शिवसेना ढाई साल में ही दो हिस्सों में बंट गई। जब चुनाव में उतरे तो ठाकरे की सेना को 20 पर समेट दिया। धीरे-धीरे देवेंद्र बनते गए मराठा राजनीति के सूरमा देवेंद्र फडणवीस के पिता गंगाधर फडणवीस जनसंघ और बीजेपी के नेता रहे। नागपुर के गंगाधर फडणवीस को नितिन गडकरी भी अपना राजनीतिक गुरु बताते रहे हैं। 22 साल की उम्र में फडणवीस ने नागपुर के पार्षद से राजनीति शुरूआत की, फिर 27 साल की आयु में युवा मेयर बनने का रेकॉर्ड बनाया। 1999 में दक्षिण पश्चिम नागपुर सीट से विधानसभा चुनाव लड़े और लगातार जीतते रहे। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बने। 2014 के विधानसभा चुनाव से पहले गोपीनाथ मुंडे के आकस्मिक निधन के बाद नेतृत्व की चर्चा चल रही थी। नितिन गडकरी और एकनाथ खडसे जैसे दिग्गज कतार में थे। चुनाव के दौरान दिल्ली में नरेंद्र, महाराष्ट्र में देवेंद्र का नारा काफी लोकप्रिय हुआ। देखते ही देखते वह बीजेपी के पोस्टर बॉय बन गए। अपनी बेदाग छवि और लोकप्रियता के कारण आरएसएस ने भी उन्हें नेक्स्ट जेनरेशन के नेता के तौर पर चुना, जिसमें वह खरे साबित हुए। उन्होंने गठबंधन की सरकार चलाकर अपने नेतृत्व क्षमता को भी साबित कर दिया।

देश और प्रदेश की जनता प्रधानमंत्री मोदी के साथ हैं, मतदाताओं के ध्रुवीकरण के प्रयासों को जनता ने नाकाम कर दिया: देवेंद्र फडणवीस

मुंबई महाराष्ट्र चुनाव के नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि प्रदेश की जनता ने हमें अभूतपूर्व जीत दी है। उन्होंने आगे कहा कि देश और प्रदेश की जनता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हैं। उनके दिए नारे ‘एक हैं तो सुरक्षित हैं’ के अनुरूप सभी वर्गों और समुदायों के लोगों ने एकजुट होकर हमें वोट दिया। यह महायुति, सीएम एकनाथ शिंदे, डिप्टी सीएम अजित पवार और रामदास अठावले की जीत है, यह एकता की जीत है। विपक्ष की ओर से धर्म के आधार पर मतदाताओं के ध्रुवीकरण के प्रयासों को जनता ने नाकाम कर दिया। प्रदेश की जनता को हमारी सरकार की ओर से चलाई जा रही योजनाओं का लाभ बड़े पैमाने पर मिला है। जिसका परिणाम यह है कि जनता ने हमें बड़े बहुमत के साथ सेवा करने का एक और अवसर दिया है। महाराष्ट्र के अगले सीएम के सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के चेहरे पर कोई विवाद नहीं होगा। यह पहले दिन से तय था कि चुनाव के बाद तीनों पार्टियों के नेता एक साथ बैठेंगे और इस पर फैसला करें। फैसला सभी को मान्य होगा, इस पर कोई विवाद नहीं है। जो होगा उचित निर्णय होगा। देवेंद्र फडणवीस ने आगे कहा कि मैंने पहले कहा था कि मैं आधुनिक अभिमन्यु हूं और चक्रव्यूह तोड़ना जानता हूं। मुझे लगता है कि इस जीत में मेरा योगदान छोटा है, यह हमारी टीम की जीत है। लोगों ने एकनाथ शिंदे को असली शिवसेना के रूप में स्वीकार कर लिया है। वहीं जनता ने अपने जनादेश से अजित पवार की एनसीपी को असली माना है। हम इस जीत के लिए प्रदेश की जनता का आभार जताते हैं। संजय राउत के बयान पर प्रतिक्रिया करते हुए उन्होंने तंज कसा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा ने झारखंड में जीत हासिल की है। वहां चुनाव पूरी तरह से निष्पक्ष हुआ। वहां चुनाव आयोग ने अच्छा काम किया। वहां ईवीएम इतनी मजबूत थी कि उसे हैक नहीं किया जा सका और महाराष्ट्र में हमें बहुत बड़ी जीत मिली है। यहां ईवीएम पक्षपाती हो गई। यहां लोकतंत्र की हत्या कर दी गई है। कभी-कभी आत्मनिरीक्षण करने की जरूरत होती है। उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) भारी बहुमत की ओर अग्रसर है। वहीं झारखंड में जेएमएम-कांग्रेस गठबंधन ने बहुमत का आंकड़ा पार किया है और सत्ता में लगातार दूसरी बार लौटने में कामयाब रही है। महाराष्ट्र में महायुति गठबंधन 226 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं विपक्ष महाविकास अघाड़ी (एमवीए) 288 सदस्यीय विधानसभा में 54 सीटों पर आगे है। झारखंड में शुरू में काफी कड़ी टक्कर देखने को मिली लेकिन हेमंत सोरेन की झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 41 के बहुमत के आंकड़े को पार कर लिया है और 55 सीटों पर बढ़त बना ली। वहीं एनडीए 25 सीटों पर आगे चल रहा है।

महाराष्ट्र में बंपर जीत के बाद तेवर में देवेंद्र फडणवीस, जनता ने महायुति को आशीर्वाद दिया, तोड़ा चक्रव्यूह

मुंबई महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजों से भाजपा गदगद है। सूबे के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कई बड़े नेताओं के साथ मिलकर मीडिया से बात की है। उन्होंने कहा कि यह जीत एकता की है। हम सभी ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा और जनता ने महायुति को आशीर्वाद दिया है। उन्होंने इस दौरान खुद को आधुनिक अभिमन्यु बताते हुए कहा कि हमने फेक नैरेटिव को तोड़ दिया है। फडणवीस ने कहा कि मैं आधुनिक युग का अभिमन्यु हूं और चक्रव्यूह को तोड़ना जानता हूं। डिप्टी सीएम ने कहा, ‘महाराष्ट्र के सभी लोगों ने मिलकर जीत दिलाई है। लाडली बहनों और लाडले भाइयों का हमें समर्थन मिला है। लोकसभा चुनाव में जिस फेक नैरेटिव को तैयार किया गया था, उसे हमने तोड़ दिया है।’ भाजपा लीडर ने कहा कि हमने उस चक्रव्यूह को खत्म कर दिया है, जिसे हमारे खिलाफ रचा गया था। इस चुनाव में एक धर्म विशेष के ध्रुवीकरण का प्रयास किया गया था, लेकिन वह कामयाब नहीं हुआ। हमें सभी साधु-संतों का भी आशीर्वाद मिला और उन्होंने एक रहने का संदेश दिया। हमारे मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, डिप्टी सीएम अजित पवार और सभी छोटे दलों ने भी मिलकर काम किया। महायुति की यह जीत है। मैं पीएम नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करता हूं, जिनके कारण यह जीत मिली है। इसके अलावा होम मिनिस्टर अमित शाह जी का भी आभार व्यक्त करता हूं। उन्होंने यहां समय दिया और जीत दिलाई। अमित शाह और गडकरी को भी दिया फडणवीस ने धन्यवाद फडणवीस ने इस दौरान राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी जैसे नेताओं को भी धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी के नेताओं ने अपनी सीटों पर ही नहीं बल्कि वहां भी काम किया, जहां हमारे दोस्त लड़ रहे थे। इस चुनाव ने साफ कर दिया कि एक हैं तो सेफ हैं। फडणवीस ने कहा कि मैंने पहले ही कहा था कि मैं आधुनिक अभिमन्यु हूं और मैं चक्रव्यूह को तोड़ना जानता हूं। कैसे होगा सीएम का फैसला, फडणवीस ने बताया पूरा प्लान डिप्टी सीएम ने कहा कि राज्य में लोगों को धार्मिक आधार पर बांटने की कोशिश सफल नहीं हुई। इस दौरान सीएम पद को लेकर पूछा गया तो देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि अमित शाह जी ने पहले ही क्लियर कर दिया था कि तीनों दल बैठकर फैसला लेंगे। पहले दिन से ही यह बात तय थी। एकनाथ शिंदे की पार्टी को असली शिवसेना के रूप में लोगों ने स्वीकार कर लिया है। इसी तरह एनसीपी पर अजित पवार का दावा मजबूत हुआ है।

उलेमा काउंसिल ने एमवीए के सामने 15 मांगें रखी थीं, जिसे विपक्षी गठबंधन ने आसानी से मान लिया: देवेंद्र फडणवीस

मुंबई महाराष्ट्र में अगले हफ्ते विधानसभा चुनाव होने वाला है। इससे पहले भाजपा नेता और राज्य के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुस्लिम धर्मगुरुओं की संस्था उलेमा कांउसिल की मांगों को मानने के लिए महाविकास अघाड़ी (एमवीए) की आलोचना की। एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि उलेमा काउंसिल ने एमवीए के सामने 15 मांगें रखी थीं, जिसे विपक्षी गठबंधन ने आसानी से मान लिया। एमवीएम पर जमकर निशाना साधते हुए फडणवीस ने कहा कि यह भूमि पूर्वजों की है न कि रजाकारों की। उलेमा कउंसिल की मांग मानने पर फडणवीस ने एमवीए को घेरा साक्षात्कार में एमवीए की आलोचना करते हुए महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “उलेमा काउंसिल ने उन्हें (एमवीए को) समर्थन देने की घोषणा की और अपनी 14 मांगों को उनके सामने रख दिया। उन्होंने (एमवीए) एक साधारण चिट्ठी के जरिए उनकी मांगों को मान लिया। अगर कोई अपनी मांग सामने रखता है, मुझे इससे कोई परेशानी नहीं है। मैं केवल यह सवाल करता हूं कि इनमें से कौन सी मांग स्वीकार्य है। यह मैं आपको बताऊंगा।” उन्होंने आगे कहा, “एक मांग यह है कि 2012 से लेकर 2024 तक दंगों में मुस्लिम समुदाय के खिलाफ सभी मामले खारिज किए जाएं और वापस लिए जाएं। मैं यह पूछना चाहता हूं कि यह किस तरह की राजनीति है? अगर कोई भी पार्टी ऐसे दंगाइयों को साथ लेकर चुनाव लड़ना चाहती है तो हम बंटे रहेंगे और हमें मार दिया जाएगा।” एमवीए पर लगाए आरोप धर्मिक एकता पर भाजपा के रुख पर प्रकाश डालते हुए फडणवीस ने सीएम योगी के नारे को याद किया। उन्होंने कहा, “जब मुख्यमंत्री योगी ने कहा, बंटेंगे तो कटेंगे। वे हमें इतिहास की याद दिला रहे हैं। यह जमीन छत्रपति शिवाजी महाराज जैसे हमारे पूर्वजों की है न कि रजाकाकों की।” विपक्षी एमवीए के उलेमा काउंसिल जैसे समूहों के साथ कथित गठबंधन के जवाब में फडणवीस ने कहा, “अगर 1920 में कांग्रेस ने वंदे मातरम् का आधा भाग गाने की मांग न मानी होती तो आजादी का बीज न बोया गया होता।” महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम ने महाविकास अघाड़ी पर राजनीति के लिए धर्म का विभाजन करने का आरोप लगाया। उन्होंने चेतावनी दी कि कांग्रेस की नीतियां का उद्देश्य ओबीसी समुदाय को विभाजित करना है। जब उनसे महायुति के सत्ता में आने के बाद सीएम चेहरे के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अभी तक कोई योजना नहीं बनाई गई है। उन्होंने महायुति की सरकार बनने पर जोर दिया और बताया कि तीनों पार्टियां (भाजपा, राकांपा और शिवसेना) एकसाथ बैठकर इसपर चर्चा करेगी।  

देवेंद्र फडणवीस ने कहा- रिजल्ट के बाद ही पता चलेगा कौन किसके साथ

मुंबई महाराष्ट्र में कभी 4 राजनीतिक दल हुआ करते थे, लेकिन शिवसेना और एनसीपी में बंटवारे के चलते 6 पार्टियां चुनावी मैदान में हैं। इस बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या चुनाव के बाद भी यही तस्वीर बनी रहेगी या कुछ दल पालाबदल भी कर सकते हैं। अजित पवार की पार्टी ने इसके संकेत भी दिए हैं और कहा है कि असली तस्वीर चुनाव के बाद ही सामने आएगी। इस बीच डिप्टी सीएम और भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने भी स्वीकार किया है कि चुनाव के बाद कुछ भी हो सकता है। उन्होंने गुरुवार को कहा कि विधानसभा चुनाव ‘अजब’ है और 23 नवंबर को परिणाम घोषित होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि कौन गुट किसका समर्थन कर रहा है। फडणवीस ने कहा कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना, अजित पवार के नेतृत्व वाली राकांपा और भाजपा के गठबंधन ‘महायुति’ को कांग्रेस, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) और शरद पवार के नेतृत्व वाली राकांपा (एसपी) पर बढ़त हासिल है। फडणवीस ने कहा, ‘ये चुनाव अजीब हैं। हमें नतीजों के बाद ही पता चलेगा कि कौन किसके साथ है। महायुति के भीतर भी आंतरिक विरोधाभास है।’ उन्होंने दावा किया कि एमवीए को भी इसी तरह की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। फडणवीस ने कहा कि उनकी पार्टी का नारा ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ एमवीए के चुनाव प्रचार अभियान के जवाब में गढ़ा गया है। भाजपा नेता ने दावा किया कि उनके सहयोगियों अशोक चव्हाण और पंकजा मुंडे के साथ-साथ उप मुख्यमंत्री अजित पवार इसके ‘मूल’ अर्थ को समझने में विफल रहे। महाराष्ट्र में 20 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव के प्रचार अभियान में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा बार-बार इस्तेमाल किए जाने वाले इस नारे ने विपक्ष को इसकी निंदा करने के लिए एकजुट कर दिया है। विपक्ष का दावा है कि इस नारे के सांप्रदायिक निहितार्थ हैं, जबकि सत्तारूढ़ गठबंधन के कुछ नेताओं ने भी इस पर आपत्ति जताई है। फडणवीस ने कहा कि ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ कांग्रेस नीत महाविकास आघाडी के विभाजनकारी चुनाव प्रचार अभियान के जवाब में गढ़ा गया नारा है। इस नारे का मूल संदेश यह है कि ‘सभी को एक साथ रहना होगा।’ फडणवीस ने कहा, ‘इस नारे का मतलब यह नहीं है कि हम मुस्लिमों के खिलाफ हैं। हमने यह नहीं कहा कि लाडकी बहिन योजना का लाभ मुस्लिम महिलाओं को नहीं दिया जाएगा।’ उन्होंने दावा किया, ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ भी कांग्रेस और एमवीए के तुष्टिकरण का जवाब है। उन्होंने लोकसभा चुनाव के दौरान ‘वोट जिहाद’ का प्रयोग किया और मस्जिदों में पोस्टर लगाए गए, जिसमें लोगों से एक विशेष पार्टी को वोट देने का आग्रह किया गया। यह किस तरह की धर्मनिरपेक्षता है। सीएम बनने के सवाल पर बोले- जीना यहां, मरना यहां इस दौरान देवेंद्र फडणवीस ने चुनाव बाद खुद के सीएम बनने की संभावनाओं पर भी बात की। उनसे पूछा गया कि क्या आपका प्रमोशन होगा? इस सवाल को वह हंसकर टाल गए। लेकिन यह भी कहा, ‘भाजपा मुझसे जो भी करने को कहेगी, मैं वह करूंगा। ‘जीना यहां, मरना यहां, इसके सिवा जाना कहां।’ भाजपा जहां भी जाने को कहेगी, मैं वहां जाऊंगा।’

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