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दुर्ग में एक महिला से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 54 लाख 90 हजार रुपये की ठगी का मामला सामने आया

भिलाई  छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के नेवई थाना क्षेत्र में एक महिला से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 54 लाख 90 हजार रुपये की ठगी का मामला सामने आया है. खुद को CBI अधिकारी बताकर ठगों ने महिला और उसके परिवार को एक महीने तक डरा-धमकाकर बड़ी रकम अपने खातों में ट्रांसफर करवा ली. पीड़िता नम्रता चंद्राकर ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई कि 29 अप्रैल से 29 मई 2025 के बीच अलग-अलग मोबाइल नंबरों से कॉल कर उसके बुजुर्ग पिता को फर्जी मनी लॉन्ड्रिंग के केस में फंसाने की धमकी दी गई. आरोपियों ने कहा कि उनके बैंक खाते से दो करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग हुई है. इस डर से महिला ने अपनी संपत्ति की जानकारी भी दे दी और 54.90 लाख रुपये आरोपियों के बताए खातों में ट्रांसफर कर दिए. 54 लाख 90 हजार रुपये की ठगी पुलिस जांच में आरोपियों के मोबाइल नंबर और बैंक खातों की जानकारी निकाली गई. सभी आरोपी लखनऊ के रहने वाले निकले. दुर्ग पुलिस की टीम ने लखनऊ पहुंचकर दीपक गुप्ता, राजेश विश्वकर्मा, कृष्ण कुमार और शुभम श्रीवास्तव को गिरफ्तार किया. इनमें से राजेश ने यूनियन बैंक का खाता उपलब्ध कराया था, जिसमें ठगी की रकम जमा हुई. महिला को आरोपियों ने किया डिजिटल अरेस्ट पुलिस ने आरोपियों के पास से मोबाइल और आधार कार्ड जब्त कर लिए हैं. चारों को रिमांड पर लेकर आगे की पूछताछ की जा रही है. पुलिस अन्य आरोपियों की भी तलाश में जुटी है.  

डिजिटल अरेस्ट मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली, थोक व्यापारी के खाते में मिले ठगी के 1 करोड़ 66 लाख रुपये

इंदौर इंदौर की शेयर कारोबारी वंदना गुप्ता को डिजिटल अरेस्ट कर 1 करोड़ 60 लाख रुपये की ठगी के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने दो और आरोपियों को उत्तर प्रदेश से पकड़ लिया है। एक आरोपी थोक कारोबारी है। वह साइबर ठगों के गिरोह के लिए कमीशन पर करंट बैंक खाते उपलब्ध कराता था। उसके खाते में 12 राज्यों से 1 करोड़ 66 लाख रुपये जमा हुए हैं। आरोपी को कमीशन के बदले मिले 3 लाख इंदौर के एडिशनल डीसीपी (अपराध) राजेश दंडोतिया ने बताया कि उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती निवासी मनोज श्रीवास्तव और लखनऊ के आगम साहनी को गिरफ्तार किया है। मनोज परचून का थोक कारोबारी है। उसने आगम के कहने पर करंट खाता ठगों को उपलब्ध कराया था। इसके बदले मनोज को 3 लाख रुपये कमीशन मिला था। 12 राज्यों की पुलिस कर रही इन आरोपियों की तलाश कारोबारी वंदना गुप्ता से ठगी करने वाले साइबर ठगों के गिरोह ने मनोज के खाते में 25 लाख रुपये जमा करवाए थे। पुलिस ने खाते की जांच की तो 1 करोड़ 66 लाख रुपये का ट्रांजेक्शन मिला। यह रकम 12 राज्यों से 23 लोगों के साथ हुई ठगी की है। इन मामलों की बिहार, गुजरात, हरियाणा, मेघालय, तमिलनाडु, बंगाल, असम, केरल, ओडिशा, महाराष्ट्र, तेलंगाना और मध्य प्रदेश पुलिस जांच कर रही है। इंदौर पुलिस ने अब तक गिरफ्तार किए 13 आरोपी बता दें कि महिला कारोबारी को डिजिटल अरेस्ट करके ठगी के इस मामले में इंदौर पुलिस अब तक 13 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। पुलिस के मुताबिक, लखनऊ से गिरफ्तार आरोपित आगम साहनी ने पूछताछ में बताया कि वह टेलीग्राम ग्रुप के माध्यम से ठग गिरोह से जुड़ा था। उसने मनोज से खाता लेकर गिरोह को उपलब्ध कराया था।

ग्वालियर में आयुर्वेदिक डॉक्टर से 21 लाख की ठगी, 29 घंटे डिजिटल अरेस्ट रखा

 ग्वालियर ग्वालियर में आयुर्वेदिक डॉक्टर को ठगों ने 29 घंटे तक डिजिटल अरेस्ट रखा गया। इसके बाद मनी लॉन्ड्रिंग में गिरफ्तारी का डर दिखाकर उनसे 21 लाख रुपए ऐंठ लिए। डॉक्टर को ठगों का कॉल आया था। डॉक्टर को बदमाशों ने उनके आधार नंबर पर महालक्ष्मी ट्रांसपोर्टेशन कंपनी बनाकर करोड़ों रुपए मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए इधर-उधर करने की बात कहकर डराया। ठगों ने कहा गया कि आपको और आपके परिवार को उम्रकैद तक हो सकती है। बाद में एक बदमाश ने खुद को सीबीआई का अधिकारी बताकर उनसे बात की। मदद का कहकर अपने अकाउंट में 21 लाख रुपए आरटीजीएस के जरिए डलवा लिए। जब डॉक्टर को एहसास हुआ कि वे ठग लिए गए, तो उन्होंने पुलिस के पास पहुंचकर शिकायत की। बता दें शहर के गोला का मंदिर इलाके में हनुमान नगर निवासी मुकेश शुक्ला आयुर्वेदिक डॉक्टर हैं। वे घर से ही प्रैक्टिस करते हैं। उनके मोबाइल पर कॉल आया। कॉल करने वाला उनसे बोला कि वह आईटी कंपनी से बोल रह है। उनके नाम पर चल रही महालक्ष्मी ट्रांस्पोर्टेशन कंपनी पर 9 लाख 40 हजार 44 रुपए की रिकवरी निकली है। इसके बाद कहा कि लगता है कि आपके आधारकार्ड का गलत यूज किया गया है। उसने पुलिस मुख्यालय दिल्ली में दो घंटे में शिकायत करने के लिए कहा। ऐसा नहीं करने पर उनकी गिरफ्तारी की बात कही। इस पर बुजुर्ग डॉक्टर घबरा गए। डॉक्टर ने कहा कि वे ग्वालियर में हैं और दो घंटे में दिल्ली कैसे पहुंच सकते हैं। इस पर कॉल करने वाले ने दिल्ली पुलिस में ऑनलाइन एफआईआर कराने में मदद करने का वादा किया। ऐसे समझिए पूरा मामला शहर के गोला का मंदिर स्थित हनुमान नगर निवासी 63 वर्षीय मुकेश पुत्र केके शुक्ला आयुर्वेदिक डॉक्टर हैं। वह घर पर ही प्रैक्टिस करते हैं। 29 नवंबर की सुबह 10.13 बजे उनके मोबाइल पर एक कॉल आया। कॉल करने वाले ने उनसे बातचीत करते हुए बताया कि वह इनकम टैक्स से बोल रह है और उनके नाम पर चल रही महालक्ष्मी ट्रांसपोर्ट कंपनी पर 9 लाख 40 हजार 44 रुपए की रिकवरी निकली है। जब उन्होंने महालक्ष्मी ट्रांसपोर्ट कंपनी उनकी नहीं होने की बात कही तो कॉल करने वाले ने बताया कि कंपनी तो आपके आधार नंबर पर ही बनी है। इस पर कॉल करने वाले ने कहा कि लगता है कि आपका आधार कार्ड का गलत उपयोग किया गया है। इसके बाद उसने पुलिस मुख्यालय दिल्ली में दो घंटे में शिकायत करने के लिए कहा। ऐसा नहीं करने पर उनकी गिरफ्तारी की बात कही। इस पर बुजुर्ग डॉक्टर घबरा गया। डॉक्टर ने कहा कि वह ग्वालियर में हूं और दो घंटे में दिल्ली कैसे पहुंच सकता हूं। इस पर कॉल करने वाले ने दिल्ली पुलिस में ऑनलाइन एफआईआर में मदद करने का वादा किया। कॉल करते ही आरोपी ने मनी लॉन्ड्रिंग का जाल बिछाया इसके बाद डॉक्टर को कॉल करने वाले ने दिल्ली पुलिस मुख्यालय में पदस्थ सब इंस्पेक्टर अजय शर्मा का मोबाइल नंबर दिया और कहा कि आप इनको कॉल कीजिए। मैं भी उनको आपकी मदद के लिए बोलता हूं। जब उन्होंने अजय शर्मा से कॉल लगाकर बातचीत की तो अजय शर्मा ने उनके दस्तावेज मांगे और बताया कि उनके आधार कार्ड पर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज है। कुछ दिन पहले मनीष चौधरी के यहां पर CBI (सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन) की रेड हुई थी। वहां आपका यह आधार कार्ड मिला था। जिस पर करोड़ों रुपए का लेनदेन हुआ है। इसके बाद अजय ने डॉक्टर का फोटो लगा गोल्डन कार्ड दिखाया। साथ ही गिरफ्तारी वारंट भी दिखाया। जिसे देखने के बाद उनके पैरों तले जमीन निकल गई, क्योंकि कार्ड पर उनका नाम और फोटो लगा हुआ था। ठगों ने अगले दिन डॉक्टर से 21 लाख रुपए अकाउंट में आरटीजीएस करा लिए। डॉक्टर बोले-डरा दिया था किसी से जिक्र तक नहीं कर सका डॉक्टर मुकेश कुमार शुक्ला का कहना है कि ठगी करने वाले अपने शिकार के दिमाग से खेलते हैं। ठगों ने उनको जमकर डराया। कहा कि किसी से इस बात का जिक्र करने पर पूरे परिवार को 10 मिनट में ग्वालियर पुलिस से अरेस्ट करा देंगे। साथ ही बदनामी भी होगी। इसी कारण डॉक्टर शुक्ला अपनी दूसरी पत्नी को भी कुछ नहीं बता पा रहे थे। पत्नी को उन्होंने एहसास भी नहीं होने दिया कि वह किस मुसीबत से गुजर रहे हैं। वह मन में सोच रहे थे कि वह परिवार को बचा रहे हैं, जबकि वह ठगी के शिकार हो रहे थे। पत्नी-बेटे को खोने की बात बताते हुए भावुक हो गया फरियादी डॉक्टर मुकेश कुमार शुक्ला से जब उनके पत्नी और बेटे के कोविड में जान गंवाने के सवाल पर ठगों का क्या रवैया था यह पूछा गया तो कुछ कहने से पहले ही वह भावुक हो गए थे। उनका कहना है कि मैं सामने आकर इसलिए सारी बात बता रहा हूं जिससे मेरी तरह और कोई इन ठगों के शिकार न हों। मेरे जीवन भर की जमा पूंजी को ठगों ने मुझे डराकर ठग लिया है। इस मामले में टीआई क्राइम ब्रांच अजय पवार ने बताया कि- कॉल करने वाले ने डॉक्टर को एक नंबर यह कहते हुए दिया कि यह दिल्ली पुलिस मुख्यालय में पदस्थ सब इंस्पेक्टर अजय शर्मा का मोबाइल नंबर है। इन्हें कॉल कर लीजिए, मैं भी उनसे आपकी मदद के लिए बोल देता हूं। डॉक्टर ने जब दिए गए नंबर पर बात की, तो खुद को सब इंस्पेक्टर अजय बताने वाले ने उनसे डॉक्यूमेंट्स मांगे, फिर बोला कि आपके आधारकार्ड पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज है। आपका आधारकार्ड मिला था। इसके जरिए करोड़ों रुपए का लेनदेन हुआ है। इसके बाद ठग ने डॉक्टर का फोटो लगा गोल्डन कार्ड दिखाया। साथ ही गिरफ्तारी वारंट भी दिखाया। इसमें भी उनका फोटो था। इसे देखने के बाद वह और भी घबरा गए। खुद को अजय बताने वाले ने डॉक्टर को निगरानी में रहने की बात कही। आरोपी वीडियो कॉलिंग के जरिए नजर रखे हुए था। इसके बाद उसने डॉक्टर को मदद करने का कहकर किसी तीसरे से बात कराई। इसे सीबीआई अधिकारी प्रवीण सूद बताया। सीबीआई अधिकारी बने तीसरे बदमाश ने भी उन्हें गिरफ्तारी का डर दिखाया। कहा कि फ्रॉड आपके पीछे पड़े हुए हैं, … Read more

साइबर फ्रॉड होने पर टोल-फ्री नंबर 1930 पर तुरंत करें संपर्क, पैसे जल्द मिल सकते हैं वापस

 जबलपुर यदि आप डिजिटल अरेस्ट और साइबर फ्राड के शिकार होते हैं तो सर्वप्रथम हेल्पलाइन टोल-फ्री नंबर 1930 पर डायल करें। स्टेट साइबर सेल आपकी शिकायत को गंभीरता से लेकर अविलंब कार्रवाई सुनिश्चित करेगी। समय रहते शिकायत अपराधियों के पकड़े जाने का आधार बन सकती है समय रहते शिकायत करने की सावधानी और जागरूकता डिजिटल अरेस्ट और साइबर फ्राड करने वालों के पकड़े जाने का आधार बन सकती है। एकदम से काल उठाने पर साइबर ठगों की बातों के शिकार इंटरनेशनल काल भी नहीं उठाने चाहिए। इनके जरिए साइबर ठगी हो सकती है। मोबाइल पर जब भी कोई काल आए सबसे पहले जांच-परख कर लें। एकदम से काल उठाने से आप साइबर ठगों की बातों के शिकार हो सकते हैं।

भोपाल में 4 दिन में दूसरा डिजिटल अरेस्ट का मामला, टेलीकॉम इंजीनियर को 6 घंटे रखा Digital arrest

भोपाल  राजधानी भोपाल (Bhopal) में चार दिन में डिजिटल अरेस्ट (Digital arrest) का दूसरा मामला सामने आया है. इस बार ठगों ने एक टेलीकॉम कंपनी के इंजीनियर (Telecom company engineer) को 6 घंटे तक बंधक बनाकर रखा. मंगलवार शाम को हुई इस घटना में ठगों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर इंजीनियर प्रमोद कुमार (Engineer Pramod Kumar) से 3.5 लाख रुपये की मांग की. समय रहते क्राइम ब्रांच ने रेस्क्यू (Crime branch rescue) कर उन्हें इस ठगी से बचाया। पुलिस कमिश्नर हरिनारायणचारी मिश्रा ने बताया कि बजरिया थाना क्षेत्र के गायत्री नगर में रहने वाले प्रमोद कुमार को मंगलवार शाम साढ़े चार बजे एक कॉल आया. कॉल करने वाले शख्स ने खुद को ईओडब्लू का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके फोन नंबर से बड़े पैमाने पर बैंक ट्रांजेक्शन हुए हैं. थोड़ी देर बाद वीडियो कॉल पर 3 लोग पुलिस की वर्दी में दिखाई दिए और धमकी दी कि उनके नंबर से फिरौती के पैसे ट्रांसफर हुए हैं. यह सुनकर प्रमोद घबरा गए, और ठगों की धमकी के आगे चुप्पी साध ली। ठगों ने प्रमोद को धमकाया कि वो 3.5 लाख रुपये तुरंत भेजें और 24 घंटे तक एक कमरे में बंद रहें, किसी से बात न करें. डरे सहमे प्रमोद ने खुद को परिवार से अलग कर लिया और सबसे संपर्क बंद कर दिया. जब देर रात तक वो कमरे से बाहर नहीं निकले, तो उनकी पत्नी ने दफ्तर के सहकर्मियों को सूचना दी। सुबह सहकर्मियों के माध्यम से क्राइम ब्रांच को जानकारी मिली. एडिशनल डीसीपी शैलेन्द्र सिंह चौहान अपनी टीम के साथ वहां पहुंचे और प्रमोद की काउंसलिंग की. इसके बाद प्रमोद ने दरवाजा खोला और ठगों के पूरे खेल का खुलासा किया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की पुलिस ने उन्हें समझाया कि यह पूरी तरह से ठगी थी. एक हफ्ते में यह डिजिटल अरेस्ट की दूसरी घटना है. क्राइम ब्रांच ने ठगी के इस मामले की जांच शुरू कर दी है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

भोपाल में 6 घंटे ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखे गए व्यापारी को साइबर पुलिस ने किया रेस्क्यू

भोपाल  एक व्यापारी की सूझबूझ और पुलिस की तत्काल मदद ने साइबर ठगों के इरादों पर पानी फेर दिया। मध्य प्रदेश पुलिस ने रविवार को एक व्यापारी को साइबर अपराधियों द्वारा लूटे जाने से बचा लिया। ठग व्यापारी को डिजिटल अरेस्ट करने वाले थे। क्या है मामला एमपी पुलिस साइबर सेल ने एक विज्ञप्ति जारी कर मामले के बारे में विस्तार से बताया है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि शहर के अरेरा कॉलोनी निवासी विवेक ओबेरॉय को शनिवार दोपहर करीब 1 बजे एक व्यक्ति का कॉल आया। उस व्यक्ति ने खुद को भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) का अधिकारी बताकर फोन किया। सीबीआई और क्राइम ब्रांच का दिया हवाला विज्ञप्ति में बताया गया है कि घोटालेबाजों ने ओबेरॉय को ऐसे लोगों से कनेक्ट कराया, जो खुद को सीबीआई और मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बता रहे थे। ठग दावा कर रहे थे कि ओबेरॉय के आधार कार्ड का उपयोग करके कई फर्जी बैंक खाते खोले गए हैं। ठगों ने ओबेरॉय को कहा कि उनके आधार से ट्रांजैक्शन के लिए कई सिम कार्ड भी खरीदे गए हैं। स्काइप एप डाउनलोड करने का कहा साइबर बदमाशों ने ओबेरॉय को स्काइप वीडियो ऐप डाउनलोड करने को कहा और एक कमरे में रुकने को कहा। इसी बीच मौके का फायदा उठाते हुए व्यवसायी ने सूझबूझ से काम लिया। उसने एमपी साइबर पुलिस को कॉल कर सतर्क कर दिया और पुलिस उसकी ‘डिजिटल गिरफ्तारी’ के बीच उसके घर पहुंच गई। जब पहुंची असली पुलिस जब असली पुलिस ने फर्जी कानून-प्रवर्तन अधिकारियों के आईडी वेरिफिकेशन की मांग की, तो जालसाजों ने वीडियो कॉल काट दिया। ठग को व्यवसायी की ‘डिजिटल गिरफ्तारी’ के दौरान उसके बैंक डिटेल तो मिल गए थे, लेकिन उसने पैसे का कोई लेनदेन नहीं किया। ओबेरॉय की आधार डिटेल और मार्केटिंग कनेक्शन के साथ खोले गए फर्जी बैंक खातों के दावों का उपयोग करते हुए, उन्होंने उन्हें स्काइप ऐप डाउनलोड करने के लिए मजबूर किया, जहां उनसे घंटों पूछताछ की गई। इस दौरान, जालसाजों ने उनसे संवेदनशील व्यक्तिगत और बैंकिंग जानकारी इकट्ठा करने की कोशिश करते हुए एक फर्जी पूछताछ भी की। उन्होंने उन्हें चेतावनी दी कि वे अपने परिवार को इस स्थिति के बारे में न बताएं, और ऐसा न करने पर उन्हें गिरफ्तार करने और नुकसान पहुंचाने की धमकी दी। जैसे-जैसे स्कैम आगे बढ़ा, साइबर पुलिस की टीम उनके घर पहुंची और वीडियो कॉल में हस्तक्षेप किया। पुलिस ने अपना परिचय दिया और धोखेबाजों से उनकी पहचान का सबूत दिखाने को कहा। धोखेबाजों ने तुरंत कॉल काट दिया, जिससे डिजिटल अरेस्ट खत्म हो गई। इसके बाद, पुलिस ने ओबेरॉय को बताया कि घोटालेबाजों द्वारा दिखाए गए सभी नोटिस और आरोप पूरी तरह से मनगढ़ंत थे। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते पुलिस नहीं आती तो उनसे करोड़ों रुपए की ठगी हो जाती। क्या होता है डिजिटल अरेस्ट डिजिटल अरेस्ट के मामले में साइबर ठग आपको अनजान नंबर से कॉल करते हैं। अगर आप कॉल उठाते हैं, तो सामने वाला शख्स अपना परिचय किसी उच्च अधिकारी के रूप में दे सकता है। उदाहरण के लिए वह कह सकता है कि आपके नाम से पार्सल विदेश जा रहा था जिसमें ड्रग्स था। ऐसे में जाहिर सी बात है कि इंसान घबरा जाता है। इसके बाद ये फर्जी अधिकारी आपके नाम का फेक अरेस्ट वॉरेंट तक दिखाते हैं। आपको कैमरे के सामने रहने की हिदायत दी जाती है। यही डिजिटल अरेस्ट होता है।

इंदौर में वैज्ञानिक बना डिजिटल अरेस्ट का शिकार, ठग ने लूटे 71 लाख रुपए

इंदौर देश में ऑनलाइन फ्रॉड के मामले बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं. पढ़े लिखे और बड़ी नौकरियां करने वाले लोग भी इसके जाल में फंसकर लाखों लुटा दे रहे हैं. बड़ी- बड़ी ठगी करने वालों के लिए इतना ही काफी नहीं था कि अब नया चल पड़ा है ‘डिजिटल अरेस्ट’. इसमें ठग शख्स को फोन पर भी धमकाकर कंट्रोल कर ले रहे हैं. बीते दिनों इसके कई मामले आए. हालिया मामला मध्यप्रदेश के इंदौर का है. यहां एक इंस्टीट्यूट में एटोमिक एनर्जी विभाग के वैज्ञानिक को डिजिटल अरेस्ट कर 71 लाख का चूना लगाया गया. डिजिटल गिरफ्तारी साइबर धोखाधड़ी का एक नया तरीका है जिसमें फ्रॉड ऑडियो या वीडियो कॉल करता है. वह खुद को कानून प्रवर्तन अधिकारी के रूप में दिखाते हुए पीड़ित को उनके घरों तक सीमित कर देता है. अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त राजेश दंडोतिया ने बताया कि ‘गिरोह के एक सदस्य ने राजा रमन्ना एडवांस्ड टेक्नोलॉजी सेंटर (आरआरसीएटी) में वैज्ञानिक सहायक के रूप में काम करने वाले पीड़ित को 1 सितंबर को फोन किया और खुद को भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) का अधिकारी बताया.’ उसने कहा कि- ‘दिल्ली में एक फोन से महिला उत्पीड़न वाले टेक्स्ट मैसेज भेजे गए हैं और वह सिम आपके नाम पर रजिस्टर है.’ इसके अलावा उसने पीड़ित से कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग और मानव तस्करी से जुड़े एक मामले में भी उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है. गिरोह के एक अन्य सदस्य ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताया और वीडियो कॉल के जरिए साइंटिस्ट और उसकी पत्नी से फर्जी पूछताछ की. डर के मारे वैज्ञानिक ने उस फ्रॉड के कई अलग- अलग अकॉउंट में 71.33 लाख रुपये जमा करा दिए. इस ठगी को समझने में वैज्ञानिक को इतना समय लग गया कि बहुत कुछ लुट चुका था. मामला दर्ज होने के बाद से पुलिस आरोपियों का तालाश कर रही है.    

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