LATEST NEWS

अमेरिका में अवैध प्रवासियों को खदेड़ने के लिए ट्रंप ने की तैयार, हजारों भारतीयों पर गिरेगी गाज

वाशिंगटन अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शपथ लेते ही अवैध प्रवासियों पर सख्त एक्शन लेने की तैयारी में हैं। अपने चुनावी अभियान में बार-बार अमेरिका को प्रवासी मुक्त बनाने की बात करने वाले ट्रंप ने इसके लिए युद्ध स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। डोनाल्ड ट्रंप का यह कदम अमेरिकी इतिहास में सबसे बड़े निर्वासन को अंजाम देने की योजना का हिस्सा है। ट्रंप की इस योजना को अंजाम देने के लिए US इमिग्रेशन एंड कस्टम इंफोर्समेंट (ICE) ने देश से बाहर खदेड़ने के लिए लगभग 15 लाख लोगों की लिस्ट तैयार कर ली है। खबरों के मुताबिक इस लिस्ट में लगभग 18,000 अवैध भारतीय भी शामिल हैं। पिछले महीने जारी ICE डेटा के मुताबिक अमेरिका में देश छोड़ने के आदेश वाले डॉकेट के 15 लाख लोगों में 17,940 भारतीय शामिल हैं। इन्हें जल्द ही भारत लौटना पड़ सकता है। इंडिया टुडे ने एक रिपोर्ट के बताया है कि अमेरिका में फिलहाल भारत से गए लगभग 7, 25,000 अवैध प्रवासी हैं। मैक्सिको और अल सल्वाडोर के बाद अमेरिका में सबसे ज्यादा अवैध प्रवासी भारत से ही हैं। वहीं होमलैंड सिक्योरिटी विभाग की रिपोर्ट के अनुसार जनवरी 2022 में अमेरिका में लगभग 11 मिलियन अवैध प्रवासी रह रहे थे। इस बीच डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर कहा है कि वह अवैध प्रवासियों को देश से बाहर निकालने के लिए कुछ भी करेंगे। उन्होंने कहा है कि जरूरत पड़ी तो वह इसके लिए अमेरिकी सेना का भी प्रयोग करेंगे। उन्होंने गुरुवार को प्रकाशित एक इंटरव्यू में बताया में यह बात दोहराई है। ट्रंप ने कहा है कि किसी देश में अवैध रूप से घुसना आक्रमण के बराबर है जिसे रोकने की जरूरत है। ट्रंप ने खुद के टाइम ‘पर्सन ऑफ द ईयर’ बनने की घोषणा के बाद कहा, “मैं इसे हमारे देश पर आक्रमण मानता हूं।” ट्रंप ने आगे कहा, “मैं नहीं चाहता कि वे अगले 20 सालों तक शिविर में बैठे रहें। मैं चाहता हूं कि वे बाहर निकलें और उन्हें अपने देशों में वापस जाना होगा।”

अमेरिका में भारतीयों को लगेगा बड़ा झटका, डोनाल्ड ट्रंप आते ही बदलना चाहते हैं 150 साल पुराना कानून

वॉशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति चुने गए डोनाल्ड ट्रंप सत्ता संभालते ही जन्मजात नागरिकता वाले 150 साल पुराने कानून को बदलना चाहते हैं। वह 20 जनवरी को वाइट हाउस पहुंचेंगे और आते ही इस कानून को खत्म करने की तैयारी है। उनका कहना है कि यह कानून गलत है और इससे अमेरिका की समस्याएं बढ़ रही हैं। इससे अवैध रूप से अमेरिका में एंट्री करने वाले लोगों के बच्चों को भी नागरिक बनने का अवसर मिल रहा है और वे यहां के संसाधनों का लाभ उठा रहे हैं। अमेरिका के नागरिक कानून के मुताबिक किसी भी देश के रहने वाले लोग यदि वहां जाते हैं और उधर बच्चे का जन्म होता है तो वह बच्चा अमेरिकी नागरिकता का हकदार हो जाता है। इसी पर डोनाल्ड ट्रंप और उनके सलाहकारों को आपत्ति है। एक इंटरव्यू में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, ‘हम इस कानून को बदलने जा रहे हैं। हमें लोगों के बीच जाना होगा, लेकिन कानून तो बदलेंगे।’ डोनाल्ड ट्रंप के एक सलाहकार ने कहा कि हर देश में इस तरह का कानून नहीं है। अमेरिका में ही ऐसा है और लोग इसका बेजा इस्तेमाल करते हुए फायदा उठा रहे हैं। इसलिए हमें सिस्टम में ही बदलाव करना होगा। अमेरिका संविधान के 14वें संशोधन के तहत जन्म के साथ नागरिकता के अधिकार का कानून बनाया गया था। यह कानून कहता है, ‘अमेरिका में पैदा हुए सभी लोग नागरिकता के हकदार हैं। वह यहां की न्यायिक व्यवस्था के तहत भी आते हैं। भले ही अमेरिका के किसी भी राज्य में पैदा हुए हों।’ ट्रंप समेत इस कानून के आलोचकों का कहना है कि इससे अमेरिका में बर्थ टूरिज्म बढ़ा है। रिसर्च फॉर नंबर्स संस्थान के डायरेक्टर एरिक रुआर्क कहते हैं कि बड़े पैमाने पर ऐसा होता है कि गर्भवती महिलाएं अमेरिका में आ जाती हैं और यहां बच्चे को जन्म दिया जाता है। ऐसा इसलिए लोग करते हैं ताकि उनके बच्चे को अमेरिका की नागरिकता मिल जाए। अब ऐसा कानून बनाना होगा कि कोई अमेरिका में आकर बच्चे को जन्म दे तो इतने भर से ही नागरिकता न मिल जाए। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हम परिवारों को तोड़ना नहीं चाहते। इसलिए एक ही तरीका है कि पूरा परिवार साथ रहे और अमेरिका से चला ही जाए। इसका अर्थ हुआ कि जिन लोगों को जन्म के आधार पर अमेरिका की नागरिकता मिली है, उन्हें भी बाहर किया जाएगा। यदि ऐसा कानून आया तो फिर भारतीयों पर भी बड़ा असर होगा। प्यू रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार 48 लाख भारतीय मूल के लोग अमेरिका में बसे हैं। इनमें से 16 लाख को जन्म के आधार पर ही नागरिकता मिली है। यदि इस कानून के वापस किया गया तो फिर जन्म के प्रमाण पत्र को लोग नागरिकता के प्रमाण के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।

राष्ट्रपति ट्रंप ने बताया एजेंडा?, अमेरिका के दुश्मनों को जेल और समर्थकों को माफी

वॉशिंगटन. अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चुनाव जीतने के बाद पहली बार अपने दूसरे कार्यकाल की प्राथमिकताओं पर खुलकर बात की है। इस दौरान उन्होंने आव्रजन को लेकर नियम सख्त करने, कानूनों को बदलने, कैपिटल हिल पर अपने समर्थकों के प्रदर्शन से लेकर आलोचकों को सजा दिलाने तक पर बात की। ट्रंप ने एनबीसी न्यूज को दिए इंटरव्यू में साफ किया कि अगले महीने राष्ट्रपति पद ग्रहण करने के दिन ही वे 2020 में कैपिटल हिल हिंसा में शामिल रहे अपने समर्थकों को माफी दे देंगे। गौरतलब है कि डोनाल्ड ट्रंप के बाइडन के खिलाफ चुनाव हारने के बाद उनके समर्थकों ने अमेरिकी संसद पर धावा बोल दिया था। ट्रंप समर्थक इस दौरान संसद में घुस आए थे और जमकर बवाल काटा था। इस दौरान कैपिटल हिल पर हिंसा की भी कई घटनाएं सामने आई थीं। तब अमेरिकी पुलिस और एजेंसियों ने कई लोगों को गिरफ्तार किया था और कुछ पर केस भी चलाए गए। ट्रंप ने साफ किया कि वह हिंसा में शामिल हर किसी को माफी नहीं देंगे, खासकर बेवकूफ और कट्टरपंथियों को। हालांकि, उन्होंने पुलिस-प्रवर्तन अधिकारियों के उत्पीड़न में शामिल प्रदर्शनकारियों का बचाव करते हुए कहा कि उनके पास कोई चारा नहीं था।

डोनाल्ड ट्रंप ने दिया मजाकिया अंदाज में ऑफर, कहा-अगर दिक्कत है तो कनाडा को अमेरिका में मिला दो, 51वां राज्य बना देंगे

वाशिंगटन कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हाल ही में हुई मुलाकात एक बार फिर सुर्खियों में है। इस मुलाकात के दौरान ट्रंप ने मजाकिया अंदाज में ट्रूडो को कनाडा को अमेरिका का हिस्सा बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि अगर कनाडा पर टैरिफ का खतरा है, तो वह अमेरिका का 51वां राज्य बन सकता है। डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कनाडा पर 25% टैरिफ लगाने की धमकी दी थी, जिससे कनाडा की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता था। इस मामले पर चर्चा के लिए ट्रूडो ने ट्रंप से मार-ए-लागो (फ्लोरिडा) में मुलाकात की। ट्रूडो का मकसद टैरिफ के इस खतरे को टालना और दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत रखना था।   क्या हुआ बातचीत में? ट्रूडो ने ट्रंप से कहा कि 25% टैरिफ लगने से कनाडा की अर्थव्यवस्था पूरी तरह बर्बाद हो सकती है।   ट्रंप ने पलटकर कहा, “कनाडा की अर्थव्यवस्था तब तक जिंदा नहीं रह सकती, जब तक वह अमेरिका को 100 बिलियन डॉलर का नुकसान पहुंचा रहा है।”   ट्रंप ने कनाडा पर आरोप लगाया कि उसने 70 से अधिक देशों के अवैध अप्रवासियों को सीमा पार करने की अनुमति दी है।   उन्होंने यह भी कहा कि ड्रग्स और मानव तस्करी रोकने में कनाडा नाकाम रहा है, जिससे अमेरिकी सीमाएं असुरक्षित हो गई हैं।   ट्रंप ने कहा कि कनाडा और अमेरिका के बीच व्यापार घाटा 100 बिलियन डॉलर से भी अधिक है।   उन्होंने यह चेतावनी दी कि अगर ये मुद्दे हल नहीं हुए, तो वह राष्ट्रपति पद ग्रहण करने के पहले दिन से ही कनाडा के सभी उत्पादों पर 25% टैरिफ लागू कर देंगे।   ट्रंप का विवादित सुझाव बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि अगर कनाडा इन समस्याओं को हल नहीं कर सकता, तो बेहतर होगा कि वह अमेरिका का हिस्सा बन जाए। उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा, *”कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बन जाना चाहिए। आप (जस्टिन ट्रूडो) गवर्नर बन सकते हैं।” ट्रंप ने यह भी जोड़ा कि प्रधानमंत्री का पद गवर्नर से बेहतर है, लेकिन यह भी बुरा विकल्प नहीं होगा।     ट्रूडो की प्रतिक्रिया ट्रंप की इस बात पर जस्टिन ट्रूडो और उनके साथ मौजूद अन्य लोग पहले चौंक गए, लेकिन बाद में उन्होंने इसे मजाक मानकर टाल दिया। हालांकि, ट्रूडो ने जोर देकर कहा कि कनाडा की अर्थव्यवस्था पर 25% टैरिफ का असर बहुत गंभीर होगा।   मामले पर लोगों का रिएक्शन ट्रंप का यह बयान भले ही मजाक में दिया गया हो, लेकिन सोशल मीडिया और विशेषज्ञ इसे हल्के में नहीं ले रहे हैं। – कई लोगों ने इसे कनाडा-अमेरिका संबंधों पर ट्रंप की रणनीतिक सोच का संकेत माना है। वहीं, कुछ ने इसे ट्रंप के अप्रत्याशित बयानबाजी का हिस्सा बताया।   यह मुलाकात न सिर्फ टैरिफ और व्यापार घाटे जैसे मुद्दों को उजागर करती है, बल्कि कनाडा-अमेरिका संबंधों की नाजुक स्थिति को भी दिखाती है। ट्रंप की तरफ से दिया गया सुझाव भले ही मजाकिया हो, लेकिन इसके पीछे की गंभीरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। 

डोनाल्ड ट्रंप के आने से घबराया है व्यापार जगत? जयशंकर बोले- लेन-देन होता रहेगा

नई दिल्ली डोनाल्ड ट्रंप अगले महीने अमेरिकी राष्ट्रपति का पदभार संभालने वाले हैं। उससे पहले भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर संभावित ट्रंप प्रशासन के प्रभाव को लेकर चिंताएं उठ रही हैं। अब इन चिंताओं को दूर करते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच हमेशा कुछ न कुछ लेन-देन होता रहेगा। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक मेलजोल में हाल के वर्षों में गहराई आई है। इससे आपसी सहयोग को और बढ़ाने के लिए अनुकूल माहौल बना है। विदेश मंत्री ने सीआईआई पार्टनरशिप समिट में बोलते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे प्रशासन का आगमन व्यापारिक क्षेत्रों के लिए एक बड़ा बदलाव है। उन्होंने कहा, “एकमात्र सुरक्षित भविष्यवाणी यह है कि इसमें अनिश्चितता का कुछ स्तर रहेगा। विभिन्न देशों ने पहली ट्रंप सरकार से अनुभव लिए हैं और संभवतः इससे सीखकर दूसरे कार्यकाल के लिए अपनी रणनीतियां बनाएंगे।” जयशंकर ने कहा, “जहां तक भारत का संबंध है, मैं यकीन से कह सकता हूं कि अमेरिका के साथ रणनीतिक मेलजोल समय के साथ केवल गहरा हुआ है। इससे सहयोग के लिए अधिक संभावनाएं बनी हैं। निश्चित रूप से, दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच हमेशा कुछ लेन-देन होते रहेंगे। लेकिन आर्थिक और तकनीकी क्षेत्रों में भरोसेमंद साझेदारी का मामला हाल के वर्षों में और मजबूत हुआ है।” जयशंकर ने अमेरिक के राष्ट्रपति के रूप में डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल और भारत के लिए इससे जुड़े निहितार्थों पर कहा कि अमेरिका के साथ भारत का रणनीतिक तालमेल समय के साथ और गहरा हुआ है जो कई सहयोगी अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कहा, ‘‘दूसरे ट्रंप प्रशासन का आगमन भी स्पष्ट रूप से व्यापारिक हलकों में एक प्रमुख विचारणीय विषय है। जाहिर है, एकमात्र सुरक्षित भविष्यवाणी एक हद तक अप्रत्याशित ही है।’’ सुरक्षा और निवेश को लेकर सतर्कता जरूरी उन्होंने कहा कि आने वाले समय में दोनों देशों के बीच ऐसे साझेदारी के ढांचे तैयार करने होंगे जो परस्पर लाभकारी माने जाएं। बिना चीन का नाम लिए जयशंकर ने कहा कि आर्थिक निर्णयों और निवेश को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी है। विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने चीन द्वारा अपनाई जा रही आक्रामक व्यापार प्रथाओं को लेकर बढ़ती वैश्विक चिंताओं के बीच सोमवार को कहा कि निवेश समेत आर्थिक निर्णयों के दौरान “राष्ट्रीय सुरक्षा की शर्त” को भी ध्यान में रखने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, “यह पसंद हो या नहीं, हम तेजी से शस्त्रीकरण के युग में नहीं बल्कि (सुविज्ञ निर्णयों का) लाभ उठाने के युग में हैं। इसलिए, नीति निर्माताओं को निवेश सहित आर्थिक निर्णयों के मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखना होगा।’’ वैश्विक दक्षिण पर आर्थिक दबाव और भारत की भूमिका जयशंकर ने अमेरिका-चीन विवाद और यूक्रेन संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि ग्लोबल साउथ महंगाई, कर्ज, मुद्रा की कमी और व्यापार में अस्थिरता का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा, “दुनिया कठिन दौर से गुजर रही है और ऐसे समय में अधिक मित्र और साझेदारों की जरूरत होती है।” पड़ोस में हाल में हुए बदलावों का जिक्र करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि आज के समय में अर्थव्यवस्थाएं और समाज पहले से कहीं अधिक जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा, “कोविड, यूक्रेन संघर्ष या वित्तीय संकट के दौरान हमने साथ मिलकर काम किया और इसका सामूहिक लाभ उठाया। हालांकि, आतंकवाद जैसी चुनौतियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सहयोग से हटने की लागत चुकानी पड़ती है।” जयशंकर ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि चुनौतियों के बावजूद भारत और अमेरिका के बीच मजबूत रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी के लिए अभी भी व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।

ब्रिक्स देशों को नई मुद्रा विकसित करने या ‘शक्तिशाली डॉलर’ की जगह पर कोई अन्य करेंसी अपनाने को लेकर कड़ी चेतावनी दी: ट्रंप

न्यूयॉर्क अमेरिका के नव-निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिक्स देशों को नई मुद्रा विकसित करने या ‘शक्तिशाली डॉलर’ की जगह पर कोई अन्य करेंसी अपनाने को लेकर कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने धमकी दी है कि अगर ऐसा कोई कदम उठाया जाता है तो ब्रिक्स देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाया जाएगा और उन्हें अमेरिकी बाजारों से प्रभावी रूप से प्रतिबंधित किया जाएगा। ब्रिक्स में दुनिया की दो सबसे बड़ी उभरती शक्तियां चीन और भारत भी शामिल हैं। ट्रंप ने शनिवार को ट्रुथ सोशल पर लिखा, “इस बात की कोई संभावना नहीं है कि ब्रिक्स इंटरनेशनल ट्रेड में अमेरिकी डॉलर की जगह ले लेगा, और जो भी देश ऐसा करने की कोशिश करेगा, उसे अमेरिका को अलविदा कह देना चाहिए।” भारत और ब्रिक्स के अन्य आठ सदस्यों के लिए अमेरिकी बाजार को बंद करने की धमकी देते हुए उन्होंने कहा, “हमें इन देशों से यह प्रतिबद्धता चाहिए कि वे न तो नई ब्रिक्स मुद्रा बनाएंगे, न ही शक्तिशाली अमेरिकी डॉलर की जगह किसी अन्य मुद्रा का समर्थन करेंगे, अन्यथा उन्हें 100 प्रतिशत टैरिफ का सामना करना पड़ेगा और उन्हें अद्भुत अमेरिकी अर्थव्यवस्था में अपने उत्पाद बेचने को विदा कहना होगा।” चीन, मैक्सिको और कनाडा से आयात पर उच्च टैरिफ की धमकी देने के बाद ट्रंप ने अब ब्रिक्स को यह चेतावनी दी है। विदेश मंत्री (ईएएम) एस. जयशंकर पहले ही ब्रिक्स देशों की साझा मुद्रा के विचार को स्पष्ट रूप से खारिज कर चुके हैं। उन्होंने पिछले साल जोहान्सबर्ग में समूह के शिखर सम्मेलन से पहले कहा था, “ब्रिक्स देशों की मुद्रा जैसा कोई विचार नहीं है।” भारत ब्रिक्स देशों की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। हालांकि ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने फिर भी जोहान्सबर्ग शिखर सम्मेलन में एक आम मुद्रा का प्रस्ताव रखा, लेकिन इस पर कोई प्रगति नहीं हुई। अपने अभियान के दौरान, ट्रंप ने जोर देकर कहा कि दुनिया की प्रमुख व्यापारिक मुद्रा के रूप में डॉलर के भविष्य को ख़तरा है। उन्होंने दावा किया कि राष्ट्रपति जो बाइडेन इसे अनदेखा कर रहे हैं। उन्होंने ट्रुथ सोशल पोस्ट में कहा, “यह सोच कि ब्रिक्स देश डॉलर से दूर जाने की कोशिश कर रहे हैं और हम खड़े होकर देखते रहें, खत्म हो चुकी है।” ब्रिक्स देशों को दी गई ट्रंप की चेतावनी एक तरह से टेस्टिंग है। इसमें यह देखा जाएगा कि कौन से देश सार्वजनिक रूप से भारत जैसा रुख अपनाएंगे। यह बीजिंग के लिए एक पूर्व चेतावनी है। ब्रिक्स, अपने पहले सदस्यों – ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के नामों से बना एक संक्षिप्त नाम है। इस साल इसका विस्तार करके इसमें ईरान, मिस्र, इथियोपिया और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) को शामिल किया गया। कई अन्य देशों ने ब्रिक्स में शामिल होने के लिए आवेदन किया है।

ट्रंप के शपथ लेते ही साथ ही चीन, मेक्सिको और कनाडा जैसे देशों पर गिर सकती गाज

वाशिंगटन अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 20 जनवरी 2025 को नए कार्यकाल के लिए पदभार संभालेंगे। ट्रंप के शपथ लेते ही साथ ही चीन, मेक्सिको और कनाडा जैसे देशों पर गाज गिर सकती है। डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को अवैध प्रवासियों और ड्रग्स पर नकेल कसने की कोशिशों के तहत शपथ लेते ही मेक्सिको, कनाडा और चीन जैसे देशों पर नए टैरिफ लगाने की धमकी दी है। उन्होंने कहा है कि वह कनाडा और मेक्सिको से अमेरिका आने वाले सभी उत्पादों पर 25% टैक्स लगाएंगे और चीन से आने वाले सामानों पर अतिरिक्त 10% टैरिफ लगाएंगे। अगर यह टैरिफ नियम लागू किए जाते हैं तो अमेरिकियों के लिए गैस और ऑटोमोबाइल जैसी चीजों की कीमतें असाधारण तरीके से बढ़ सकती हैं। गौरतलब है कि अमेरिका के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अमेरिका दुनिया में वस्तुओं का सबसे ज्यादा आयात करने वाला देश है और मेक्सिको, चीन और कनाडा अमेरिका के लिए तीन सबसे बड़े सप्लायर्स हैं। ट्रम्प ने अपनी ट्रुथ सोशल साइट पर एक पोस्ट में लिखा, “20 जनवरी को पहले एग्जीक्यूटिव ऑडर में से एक के रूप में मैं मेक्सिको और कनाडा से अमेरिका में आने वाले सभी उत्पादों पर 25% टैरिफ लगाऊंगा।” उन्होंने लिखा, “हजारों लोग मेक्सिको और कनाडा से होकर आ रहे हैं जिससे अपराध और ड्रग्स भयानक स्तर पर पहुंच गए हैं। नए टैरिफ तब तक लागू रहेंगे जब तक ड्रग्स और सभी अवैध प्रवासी हमारे देश पर इस आक्रमण को रोक नहीं देते!” चीन को सुनाया ट्रम्प ने चीन पर भी अपना गुस्सा निकाला। उन्होंने कहा कि उन्होंने कई बार चीन के साथ अमेरिका में भारी मात्रा में भेजे जा रहे ड्रग्स, खास कर फेंटेनाइल के बारे में बातचीत की है लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। उन्होंने लिखा, “जब तक वे ऐसा करना बंद नहीं करते, हम चीन से अमेरिका आने वाले उनके सभी उत्पादों पर किसी भी टैरिफ से ऊपर अतिरिक्त 10% टैरिफ लगाएंगे।” क्या है वजह? ट्रम्प ने यह चेतावनी ऐसे समय में दी है जब मैक्सिको से अवैध रूप से सीमा पार करने के लिए गिरफ्तारियों की संख्या कम हो रही हैं। हालांकि इस दौरान पिछले दो सालों में कनाडा से अवैध रूप से सीमा पार करने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही हैं। अक्टूबर 2023 और सितंबर 2024 के बीच बॉर्डर पुलिस ने 23,721 लोगों को पकड़ा था। कनाडाई सीमा पर गिरफ्तार किए गए लोगों में से 14,000 से अधिक भारतीय थे। यह दो साल पहले की संख्या से 10 गुना अधिक है। ऐसे में इन मामलों पर सख्ती से निपटने की तैयारी चल रही है। क्या होगा असर? अगर ट्रंप नए नियमों को लागू करते हैं तो नए टैक्स कनाडा और मैक्सिको की अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करेंगे। कनाडा दुनिया के सबसे ज्यादा व्यापार-निर्भर देशों में से एक है और कनाडा का 75% निर्यात अमेरिका को जाता है। वहीं पिछले हफ्ते एक वरिष्ठ चीनी वाणिज्य अधिकारी ने कहा कि चीनी निर्यात पर उच्च टैरिफ अमेरिका के लोगों के लिए कीमतें बढ़ाकर उल्टा असर डालेगा। अधिकारी ने कहा कि चीन ऐसे बाहरी झटकों से खुद को संभाल सकता है।

ईरान का अमेरिका को संदेश, डोनाल्ड ट्रंप की हत्या का कोई इरादा नहीं, क्या कम होगा तनाव?

ईरान ईरान ने अमेरिका को संदेश भेजा है कि उसका अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या करने का कोई इरादा नहीं है। यह संदेश इस साल अक्टूबर में वॉशिंगटन को भेजा गया था, जब अमेरिका में निवर्तमान जो बाइडन प्रशासन ने सितंबर में कहा था कि वह ट्रंप की हत्या के किसी भी प्रयास को ‘युद्ध की कार्रवाई’ मानेगा, जो उस समय 5 नवंबर के राष्ट्रपति चुनावों के लिए रिपब्लिकन उम्मीदवार थे। अमेरिका को ईरान का संदेश पश्चिमी देश के साथ तनाव कम करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। अमेरिका ने सैन्य कमांडर मेजर जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या के लिए तेहरान द्वारा संभावित जवाबी कार्रवाई पर गंभीर चिंता व्यक्त की थी, जिन्होंने 2020 में तत्कालीन राष्ट्रपति ट्रम्प के आदेश पर ईरान के मिलिशिया और प्रॉक्सी बलों को निर्देशित किया था। चुनावों में ट्रंप की जीत के बाद से कई पूर्व ईरानी अधिकारी और मीडिया आउटलेट तेहरान से ट्रंप के साथ बातचीत करने और सुलह का प्रयास करने के लिए कह रहे हैं, जबकि ट्रंप ने ईरान पर और दबाव डालने का वादा किया है। अधिकारियों के अनुसार, न्याय विभाग ने दो अभियोग जारी किए हैं जो ट्रंप के खिलाफ ईरान की साजिश से संबंधित थे। अमेरिकियों ने ईरान पर ट्रंप प्रशासन के तहत अन्य हस्तियों की हत्या की साजिश रचने का भी आरोप लगाया है। ईरान ने बाइडन प्रशासन को भेजे अपने संदेश में दोहराया कि सुलेमानी की हत्या एक आपराधिक कृत्य था। हालांकि, संदेश में यह भी कहा गया कि ईरान ट्रंप की हत्या नहीं करना चाहता और अंतरराष्ट्रीय कानूनी तरीकों से सुलेमानी की हत्या का बदला लेना चाहता था। ईरान ने सीरिया पर घातक इजरायली हमलों की निंदा की वहीं, ईरानी विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को इजरायल द्वारा सीरिया के आवासीय इलाकों में किए गए हालिया घातक हमलों की कड़ी निंदा की। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माईल बघई ने मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान में यह टिप्पणी की। एक दिन पहले इजरायली बलों ने दमिश्क के पश्चिम में अल-मजेह में तीन आवासीय इमारतों और होम्स के मध्य प्रांत में सीरियाई-लेबनानी सीमा पर तीन आवासीय इमारतों पर हमला किया, जिसमें कम से कम 15 लोग मारे गए और 16 अन्य घायल हो गए। बाघेई ने कहा कि इजरायल द्वारा सीरिया की क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय संप्रभुता के लगातार और प्रमुख उल्लंघनों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अंतर्गत आक्रामकता का विशिष्ट कार्य माना गया है।

राष्ट्रपति चुनावों में डेमोक्रेट उम्मीदवार कमला हैरिस को एक बड़े अंतर से हराने वाले ट्रंप तीसरे कार्यकाल के लिए तैयार

वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में ऐतिहासिक जीत हासिल करने वाले डोनाल्ड ट्रंप तीसरे कार्यकाल के लिए भी तैयार हैं। राष्ट्रपति चुनावों में डेमोक्रेट उम्मीदवार कमला हैरिस को एक बड़े अंतर से हराने वाले ट्रंप ने बुधवार को अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि वह अपने तीसरे कार्यकाल के लिए भी तैयार हो सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि कहा कि मैं तीसरे कार्यकाल के लिए भी तैयार हूं लेकिन मैं शायद तब तक चुनावी मैदान में नहीं उतरूंगा जब तक की आप लोग मुझे यह नहीं कहते कि वह (ट्रंप) अच्छा है, हमें उसके लिए कुछ सोचना होगा। क्या है अमेरिका के राष्ट्रपति बनने का नियम? ट्रंप ने अपने तीसरी बार राष्ट्रपति के रूप में चुने जाने की मंशा पर एक संकेत जरूर दिया है लेकिन संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान के मुताबिक कोई भी व्यक्ति दो बार से अधिक अमेरिका का राष्ट्रपति नहीं चुना जा सकता। इसलिए कानूनी तौर पर ट्रंप के तीसरी बार राष्ट्रपति चुने जाने के रास्ते में बहुत सारी रुकावटें हैं। अमेरिका में किसी व्यक्ति का राष्ट्रपति के रूप में केवल दो बार चुने जाने का नियम संविधान के 22 वे संशोधन के बाद आया। दरअसल, 1951 तक अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति फ्रैंक्लिन डी रुजवेल्ट अपने चार कार्यकाल पूरे कर चुके थे। अमेरिका में इसके बाद संविधान संशोधन करके नियम बना दिया गया कि कोई भी दो बार ही राष्ट्रपति बन सकता है। ऐसे में ट्रंप अगर एक और कार्यकाल के लिए जाना चाहे तो उन्हें संविधान में परिवर्तन करना होगा। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए यह मुश्किल लगता है। कैसे तीसरा कार्यकाल पा सकते हैं ट्रंप? संविधान को संशोधित करने के लिए ट्रंप को एक लंबी प्रक्रिया से गुजरना होगा। अमेरिकी संविधान के 22वें संशोधन को निष्क्रिय करने के लिए उन्हें एक नए संशोधन को अमेरिकी सदन और सीनेट दोनों में दो तिहाई बहुमत के साथ पारित और अनुमोदित करना होगा। इसके बाद 50 में से तीन चौथाई राज्यों से समर्थन लेना होगा। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान ट्रंप को रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स दोनों ही पार्टियों से समर्थन लेना होगा। लेकिन वर्तमान की अमेरिकी राजनीति की परिस्थितयों को देखते हुए ट्रंप के लिए यह करना आसान नहीं होगा। नतीजन, ट्रंप का 2025 से 2029 तक का कार्यकाल ही उनका आखिरी कार्यकाल होने की संभावना है।

समर्थकों से की विपक्षी पार्टी की मदद की अपील, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को डेमोक्रेटिक पार्टी पर आया तरस

वॉशिंगटन. डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति चुनाव में कमला हैरिस को हरा दिया है, लेकिन अभी भी उनका डेमोक्रेटिक पार्टी पर निशाना साधना जारी है। अब अपने ताजा बयान में भी ट्रंप ने डेमोक्रेटिक पार्टी पर तंज कसा है और दावा किया है कि चुनाव में डेमोक्रेट पार्टी ने इतना पैसा खर्च किया कि अब उनके पास वेंडर्स का भुगतान करने के भी पैसे नहीं बचे हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में लिखा कि ‘मुझे बेहद हैरानी हो रही है कि डेमोक्रेटिक पार्टी, जिन्होंने बहुत मेहनत और बहादुरी से 2020 में राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ा था और रिकॉर्ड संख्या में पैसा इकट्ठा किया था, अब उनके पास एक भी डॉलर नहीं बचा है। अब वेंडर्स और अन्य के द्वारा उन्हें निचोड़ा जा रहा है। डेमोक्रेटिक पार्टी के मुश्किल वक्त में हमें भी उनकी मदद करनी चाहिए। मैं अपील करता हूं कि एक पार्टी के तौर पर हमें एकजुट रहना चाहिए। हमारे पास अभी भी बहुत सारा पैसा बचा हुआ है क्योंकि प्रचार अभियान के दौरान हमारी सबसे बड़ी पूंजी हमारे खुद के द्वारा ‘कमाया गया मीडिया’ था और हमें उसके लिए बहुत सारा पैसा नहीं खर्च करना पड़ा।’ सातों स्विंग स्टेट में जीते ट्रंप ट्रंप ने अपने इस पोस्ट के जरिए डेमोक्रेटिक पार्टी पर मीडिया को प्रभावित करने का अप्रत्यक्ष आरोप लगाया। गौरतलब है कि हालिया राष्ट्रपति चुनाव में दोनों ही पार्टियों ने जमकर पैसा खर्च किया और इस चुनाव को अमेरिकी इतिहास के सबसे महंगे चुनाव में एक बताया गया। चुनाव अभियान के दौरान चुनाव में कांटे की टक्कर दिखाई गई थी, लेकिन नतीजों ने सभी को हैरान किया और ट्रंप ने प्रचंड जीत हासिल की। ट्रंप की ऐतिहासिक जीत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सातों स्विंग स्टेट में ट्रंप को जीत मिली। 

अमेरिका थिंक टैंक प्यू रिसर्च सेंटर के अनुसा वैध आप्रवासियों की संख्या 2000 में 24.1 मिलियन से बढ़कर 2022 में 36.9 मिलियन हो गई

वाशिंगटन डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति के रूप में जनवरी 2025 में शपथ लेंगे। ट्रंप को जीत तो मिल गई लेकिन उनके सामने अब चुनौतियां मुंह बाए खड़ी हैं। इसमें सबसे बड़ी समस्या अवैध प्रवासियों की अमेरिका में एंट्री है। नए आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में हर चौथा प्रवासी अवैध है। भारतीयों सहित अधिक से अधिक लोग अमेरिका में घुसने की कोशिश कर रहे हैं। आइए इसे आंकड़ों के साथ विस्तार से समझते हैं। अवैध अप्रवासियों की संख्या बढ़ी है अवैध आप्रवासन को लेकर राष्ट्रपति जो बिडेन पर हमला करते हुए, ट्रम्प ने अक्टूबर में कहा था कि उनके राष्ट्रपति रहते पिछले तीन वर्षों में 2 करोड़ 10 लाख लोग आए। यूएस डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी के आंकड़ों से पता चलता है कि 2020 के बाद से देश में अवैध प्रवासियों की संख्या में वृद्धि हुई है, लेकिन यह आंकड़ा ट्रम्प के विचार के करीब नहीं है। हर चौथा प्रवासी अवैध है अमेरिका स्थित थिंक टैंक प्यू रिसर्च सेंटर के अनुसार, पूर्ण संख्या में, वैध आप्रवासियों की संख्या 2000 में 24.1 मिलियन से बढ़कर 2022 में 36.9 मिलियन हो गई। सीमाओं पर बड़ा ढेर प्यू ने जुलाई 2024 की एक रिपोर्ट में कहा कि अवैध अप्रवासी आबादी संभवतः पिछले दो वर्षों में बढ़ी है। उस दृष्टिकोण के लिए उद्धृत कारकों में से एक 2022-23 में अमेरिकी सीमाओं पर प्रवासियों के साथ मुठभेड़ों का रिकॉर्ड स्तर है। अधिक भारतीय छिपने की कोशिश कर रहे हैं अक्टूबर 2023 और सितंबर 2024 के बीच, 90,000 से अधिक भारतीय मेक्सिको या कनाडा के साथ इसकी भूमि सीमाओं के पार अमेरिका में घुसने की कोशिश करते हुए पकड़े गए थे। तथाकथित डंकी रूट, जिसमें भूमि सीमा का उपयोग करके अवैध रूप से टार्गेट के उद्देश्य से कई देशों से गुजरना शामिल है। यह भारतीयों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। अमेरिकी सीमा अधिकारियों की ओर से गिरफ्तार किए गए भारतीयों की संख्या 2021 और 2024 के बीच तीन गुना बढ़ गई है।  

ट्रंप की हत्या करने की कोशिश के पीछे ईरान, अमेरिकी न्याय विभाग ने किया बड़ा दावा

मैनहट्टन अमेरिका के न्याय विभाग ने राष्ट्रपति चुनाव से पहले डोनाल्ड ट्रंप को मारने की साजिश के पीछे ईरान को बताया है. मैनहट्टन में संघीय अदालत में दायर एक आपराधिक शिकायत में आरोप लगाया गया कि ईरान के अर्धसैनिक क्रांतिकारी गार्ड के एक अधिकारी ने सितंबर में एक भाड़े के शूटर को ट्रंप की निगरानी करने और उन्हें मारने की योजना बनाने का निर्देश दिया था. शिकायत में बताया गया है कि फरहाद शकेरी नाम के शख्स को ट्रंप की हत्या का जिम्मा सौंपा गया था, जो कि ईरान का सरकारी कर्मचारी था. शिकायत में कहा गया है कि शकेरी ने ईरान में रहते हुए FBI एजेंटों के साथ रिकॉर्ड की गई फोन पर बातचीत में कथित साजिशों के कुछ डिटेल्स का खुलासा किया. उसने जांचकर्ताओं को बताया कि उसके सहयोग का कथित कारण अमेरिका में सलाखों के पीछे एक सहयोगी की सजा कम कराना है. अफगानी नागरिक को दी गई थी हत्या की सुपारी शकेरी अफगानी नागरिक है, जो बचपन में अमेरिका में आकर बस गया था, लेकिन डकैती के लिए 14 साल जेल में बिताने के बाद उसे निर्वासित कर दिया गया था. अब वह भाड़े पर हत्या की साजिश के लिए तेहरान द्वारा भर्ती किए गए बदमाशों का एक नेटवर्क चलाता है. मैनहट्टन में संघीय अदालत में खोली गई एक आपराधिक शिकायत के अनुसार, शकेरी ने जांचकर्ताओं को फोन पर बताया था कि ईरान के अर्धसैनिक क्रांतिकारी गार्ड में एक संपर्क ने उसे पिछले सितंबर में निर्देश दिया था कि वह अपने अन्य कामों को अलग रखे और सात दिनों के भीतर ट्रंप की निगरानी करने और उन्हें मारने की योजना बनाए. इसके लिए उसे मोटी रकम की पेशकश की गी थी. चुनाव बाद फिर वारदात को अंजाम देने का था प्लान शकेरी ने बताया कि उन्होंने बहुत सारा पैसा खर्च किया है इस पर. ईरानी अधिकारी ने उससे कहा था कि पैसे की दिक्कत नहीं है. लेकिन अगर वह सात दिन के भीतर कोई योजना नहीं बना पाया तो चुनाव के बाद तक साजिश को रोक दिया जाएगा क्योंकि अधिकारी ने मान लिया था कि ट्रंप हार जाएंगे और तब उन्हें मारना आसान होगा. शिकायत के अनुसार, हालांकि अधिकारियों ने पाया कि उसके द्वारा दी गई कुछ जानकारी झूठी थी, लेकिन ट्रंप की हत्या की साजिश और ईरान द्वारा बड़ी रकम देने की इच्छा के संबंध में उनके बयान सही पाए गए. ईरानी-अमेरिकी पत्रकार को भी मारने की थी साजिश शकेरी फरार है और ईरान में ही है. दो अन्य लोगों को इस आरोप में गिरफ्तार किया गया था. जिन्होंने आरोप लगाया था कि शकेरी ने उन्हें प्रमुख ईरानी-अमेरिकी पत्रकार मसीह अलीनेजाद का पीछा करने और उनकी हत्या करने के लिए भर्ती किया था. हालांकि साजिश नाकाम कर दी गई. बर्लिन से एसोसिएटेड प्रेस से फोन पर बात करते हुए अलीनेजाद ने कहा, “मैं बहुत हैरान हूं, यह मेरे खिलाफ तीसरा प्रयास है और यह चौंकाने वाला है.” सोशल मीडिया प्लैटफ़ॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा, “मैं अभिव्यक्ति की आजादी के अपने पहले संशोधन के अधिकार का अभ्यास करने के लिए अमेरिका आई हूं – मैं मरना नहीं चाहती. मैं अत्याचार के खिलाफ़ लड़ना चाहती हूं, और मैं सुरक्षित रहने की हकदार हूं. मेरी सुरक्षा के लिए कानून लागू करने वालों का शुक्रिया, लेकिन मैं अमेरिकी सरकार से अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करने का आग्रह करती हूं.” 13 जुलाई को भी ट्रंप की रैली के दौरान हुई थी फायरिंग बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अमेरिका के राष्ट्रपति बन गए हैं. उन्होंने कमला हैरिस को हराकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की है. ऐसे में न्याय विभाग द्वारा उन पर हमले की साजिश का खुलासा चौंकाने वाला है. हालांकि ऐसा पहली बार नहीं है जब उनक पर हमले की साजिश रची गई. इसी साल चुनाव प्रचार के दौरान 13 जुलाई को पेंसिल्वेनिया के बटलर शहर में उन पर चुनावी रैली के दौरान फायरिंग हुई थी, इसमें एक गोली उनके कान को छूते हुए निकल गई थी. इस घटना के करीब 64 दिन बाद एक बार फिर उन पर जानलेवा हमले की कोशिश हुई थी. उस वक्त ट्रंप फ्लोरिडा में पाम बीच काउंटी के इंटरनेशनल गोल्फ क्लब में मौजूद थे.  

डोनाल्ड ट्रंप के एक कदम से चीन की इकॉनमी जापान की तरह भंवर में फंस सकती है

नई दिल्ली चीन की इकॉनमी कई मोर्चों पर संघर्ष कर रही है। इसमें जान फूंकने के लिए सरकार ने हाल में कई घोषणाएं की थीं। आने वाले दिनों में भी कई और उपायों की घोषणा की जा सकती है। लेकिन इस बीच अमेरिका में राष्ट्रपति के रूप में डोनाल्ड ट्रंप की वापसी हो गई है जो चीनी इकॉनमी की हवा निकालने की फिराक में हैं। ट्रंप ने अपने चुनावी भाषणों में चीनी सामान पर 60 फीसदी तक आयात शुल्क लगाने का वादा किया था। दुनिया के दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं वाले देश अमेरिका और चीन के बीच पहले से ही काफी तनाव चल रहा है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अपने देश को टेक्नोलॉजी का पावरहाउस बनाना चाहते हैं लेकिन ट्रंप की जीत से उनकी योजना को पलीता लग सकता है। चीन में रियल एस्टेट सेक्टर कई साल से संकट में है। सरकार का कर्ज बढ़ रहा है और बेरोजगारी चरम पर है। खपत में सुस्ती ने चीन की ग्रोथ पर ब्रेक लगा रखा है। ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में चीनी सामान पर 25% तक इम्पोर्ट ड्यूटी लगाई थी। जानकारों का कहना है कि उनके दूसरे कार्यकाल में चीन के लिए परेशानी बढ़ सकती है। आईएमएफ ने पहले ही चीन की इकॉनमी के लिए अपने अनुमान को कम कर दिया है। इस साल देश की इकॉनमी के 4.8% की रफ्तार से बढ़ने का अनुमान है जबकि सरकार ने 5% का लक्ष्य तय कर रखा है। अगले साल इसके 4.5% रहने का अनुमान है। चीन की समस्या जानकारों का कहना है कि चीन में भी उसी तरह का ठहराव आ सकता है जिसमें जापान कई दशक से फंसा था। जापान में 1990 के दशक में स्टॉक और प्रॉपर्टी का बुलबुला फूटने के ठहराव आ गया था और वह अब तक इससे उबर नहीं पाया है। जानकारों का कहना है कि इस स्थिति से बचने के लिए चीन को कंज्यूमर डिमांड बढ़ाने पर काम करना चाहिए और एक्सपोर्ट और निवेश आधारित ग्रोथ से हटना चाहिए। इससे चीन में सतत विकास को बढ़ावा मिलेगा और देश बाहरी झटकों से बचने से बच सकेगा। चीन कई साल से दुनिया के फैक्ट्री बना हुआ है। वहां बने सस्ते सामान से दुनियाभर के बाजार भरे पड़े हैं। चीन उसी सफलता को हाई-टेक एक्सपोर्ट में भी दोहराना चाहता है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वीकल्स और लीथियम आयन बैटरी के मामले में चीन वर्ल्ड लीडर है। लेकिन इसके साथ ही पश्चिमी देशों के साथ चीन का तनाव बढ़ता जा रहा है। पिछले महीने यूरोपीय यूनियन ने चीन में बने ईवी पर टैरिफ बढ़ाकर 45 फीसदी कर दिया था। अब वाइट हाउस में ट्रंप की वापसी से चीन की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ सकती हैं।

PM Modi ने Donald Trump को जीत की दी बधाई, कहा- ‘मित्र को ऐतिहासिक जीत की बधाई..

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप की ‘ऐतिहासिक’ जीत सुनिश्चित होने पर बुधवार को उन्हें बधाई दी और वैश्विक शांति, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए साथ मिलकर काम करने का आह्वान किया। मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘मेरे दोस्त डोनाल्ड ट्रंप को उनकी ऐतिहासिक चुनावी जीत पर हार्दिक बधाई। आपके अपने पिछले कार्यकाल की सफलताओं के क्रम में, मैं भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए हमारे सहयोग को नए सिरे से आगे बढ़ाने की आशा करता हूं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘आइए एक साथ मिलकर अपने लोगों की बेहतरी के लिए और वैश्विक शांति, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए काम करें।’’ अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप शुरुआती मतगणना में डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार कमला हैरिस से आगे हैं। एसोसिएटेड प्रेस द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, रिपब्लिकन उम्मीदवार ट्रंप ने 230 निर्वाचक मंडल वोट जबकि हैरिस ने 205 निर्वाचक मंडल वोट हासिल कर लिए हैं। 270 या उससे अधिक निर्वाचक मंडल वोट जीतने वाला उम्मीदवार राष्ट्रपति चुना जाता है।  

अमेरिकी मीडिया ने कर दिया ऐलान, डोनाल्ड ट्रंप ने कमला हैरिस को हराकर जीता चुनाव

वाशिंगटन अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के अंतिम नतीजे अभी घोषित होने बाकी हैं। इससे पहले ही अमेरिकी मीडिया ने रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप को विजेता घोषित कर दिया है। मीडिया हाउस का कहना है कि ट्रंप इस चुनाव में हैरिस के खिलाफ बड़ी जीत दर्ज करने जा रहे हैं। इससे पहले ट्रंप ने साल 2016 में हिलेरी क्लिंटन के खिलाफ चुनाव जीता था। फॉक्स न्यूज डिसीजन डेस्क का अनुमान है कि ट्रंप ने हैरिस को हरा दिया है। चैनल के अनुसार, नव निर्वाचित राष्ट्रपति ने नॉर्थ कैरोलाइना, विस्कॉन्सिन, पेन्सिलवेनिया और जॉर्जिया जैसे अहम राज्यों में जीत के बाद 270 इलेक्टोरल वोट का जादुई आंकडा़ छू लिया है। फॉक्स न्यूज की तरफ से विस्कॉन्सिन को ट्रंप में बताए जाने के बाद रिपब्लिकन उम्मीदवार की वापसी तय हो गई थी।

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live

Ceriabet Login

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

casino online

clickbet88

login kudahoki88

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet