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दुबई में मस्जिदों को विज्ञान से जोड़ने की कोशिश, अग्रेजी में होगी जुमे की नमाज

दुबई  रमजान की शुरूआत से ठीक पहले दुबई ने एक साथ 55 नई मस्जिदों के निर्माण का ऐलान किया है। दुबई प्रशासन की तरफ से कहा गया है कि एक साथ 55 नई मस्जिदों के निर्माण के साथ अमीरात की 70 प्रतिशत से ज्यादा मस्जिदों में शुक्रवार के उपदेश का अंग्रेजी में अनुवाद किया जाएगा। यानि अंग्रेजी में भी इस्लाम को लेकर प्रवचन दिए जाएंगे। इस्लामिक अफेयर्स एंड चैरिटेबल एक्टिविटीज डिपार्टमेंट (IACAD) ने नई मस्जिदों के निर्माण को लेकर कई घोषणाएं की हैं। जिसमें कहा गया है की ये मस्जिदें भव्य होंगी और इनमें आधुनिकता को समाहित किया जाएगा। इसके अलावा मस्जिदों में वास्तुकला का शानदार परिचय दिया जाएगा, जिसमें इस्लामी वास्तुकला की विरासत से दुनिया को वाकिफ करवाया जाएगा। आपको बता दें कि पिछले साल भी 174 मिलियन दिरहम की लागत से 24 मस्जिदों का उद्घाटन किया गया था, जिसमें एक साथ 13 हजार 911 इस्लामिक उपासकों के रहने की व्यवस्था की गई थी। अब 55 नई मस्जिदों का निर्माण किया जाएगा, जिसके लिए 475 मिलियन दिरहम जारी किए गये हैं। इसमें एक साथ 40 हजार 961 इस्लामिक उपासक रह सकेंगे। इसके अलावा भविष्य में नई मस्जिदों के निर्माण के लिए 54 नये भूखंडों की भी पहचान की गई है। सात सितारे मस्जिदों का निर्माण IACAD ने कहा है कि ये मस्जिदें सात सितारा सुविधाएं वाली होंगी। इसके अलावा विभाग एक मस्जिद गाइड भी तैयार कर रहा है, जिसका मकसद मस्जिदों में स्थिरता के लिए 7-सितारा रेटिंग हासिल करना है। विभाग ने कगा है कि मस्जिदों का निर्माण इस तरह से किया जा रहा है, ताकि दुबई के पर्यावरण पर कोई निगेटिव असर ना पड़े। पिछले साल दुबई में एक आत्मनिर्भर मस्जिद का भी उद्घाटन किया गया था, जिसे 18.15 मिलियन दिरहम की लागत से बनाया गया था। इस मस्जिद में 500 उपासक रह सकते हैं। इस मस्जिद ने दुबई में मस्जिदों के कार्बन फुटप्रिंट को 5% तक कम करने में मदद की, जो शुरुआती लक्ष्यों के मुकाबले अच्छा है। इसके अलावा दुबई में 3D-प्रिंटेड मस्जिदों के निर्माण के लिए भी काम शुरू कर दिए हैं, जिसे 2026 में खोला जाना है। इस मस्जिद के जरिए मुसलमानों को टेक्नोलॉजी से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। हालांकि फिलहाल पानी में तैरने वाली मस्जिद को लेकर कोई नई जानकारी नहीं दी गई है। फ्लोटिंग मस्जिद की घोषणा साल 2023 में की गई थी, जिसकी अनुमानित लागत 55 मिलियन दिरहम है। रमज़ान से पहले, दुबई पहले ही दो नई मस्जिदों का उद्घाटन कर चुका है। मिर्डिफ़ में इब्राहिम अली अल गरगावी मस्जिद करीब 2,226 वर्ग मीटर में फैली हुई है। इसमें 544 उपासक बैठ सकते हैं। इसी तरह, अल बरशा (अर्जन) में अता अल-रहमान मस्जिद का उद्घाटन किया गया है, जो 1,275 वर्ग मीटर में बनी है। IACAD ने कहा है कि अमेरिकी विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर इन मस्जिदों के लिए डिजाइन कर रहा है।

सऊदी अरब ने इस साल 100 से ज्यादा विदेशियों को मौत की सजा दी, सबसे ज्यादा पाकिस्तानी

दुबई  सऊदी अरब ने इस साल 100 से ज्यादा विदेशियों को मौत की सजा दी है। इसे सऊदी अरब में दिए जाने वाले मृत्युदंड के आंकड़ों में अभूतपूर्व वृद्धि के तौर पर देखा जा रहा है। आधिकारिक सऊदी प्रेस एजेंसी ने बताया कि शनिवार को दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र नज़रान में एक यमनी नागरिक को मौत की सजा दी गई, जो देश में ड्रग्स की तस्करी करने का दोषी था। राज्य मीडिया रिपोर्टों से जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार, 2024 में अब तक मारे गए विदेशियों की संख्या 101 हो गई है। एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार, यह 2023 और 2022 के आंकड़ों से लगभग तिगुना है, जब सऊदी अधिकारियों ने हर साल 34 विदेशियों को मौत की सजा दी थी। सऊदी अरब ने तोड़े रिकॉर्ड बर्लिन स्थित यूरोपीय-सऊदी मानवाधिकार संगठन (ईएसओएचआर) ने कहा कि इस साल की सजाओं ने पहले ही रिकॉर्ड तोड़ दिया है। समूह के कानूनी निदेशक ताहा अल-हज्जी ने कहा, “यह एक साल में विदेशियों को दी गई सबसे बड़ी संख्या है। सऊदी अरब ने कभी भी एक साल में 100 विदेशियों को फांसी नहीं दी है।” सऊदी अरब को मृत्युदंड के अपने इस्तेमाल को लेकर लगातार आलोचना का सामना करना पड़ा है, जिसकी मानवाधिकार समूहों ने अत्यधिक और अपनी छवि को नरम करने तथा अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों और निवेशकों का स्वागत करने के प्रयासों के साथ तालमेल न रखने के रूप में निंदा की है। मौत की सजा देने वाले टॉप 3 देशों में शामिल एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार, तेल समृद्ध सऊदी अरब 2023 में चीन और ईरान के बाद दुनिया में तीसरे सबसे अधिक संख्या में कैदियों को फांसी देने वाले देशों में शामिल है। सितंबर में, एएफपी ने बताया कि सऊदी अरब ने तीन दशकों से अधिक समय में सबसे अधिक संख्या में फांसी दी है। यह आंकड़ा 2022 में 196 और 1995 में 192 के अपने पिछले उच्चतम स्तर को पार कर गया है। तब से फांसी की सजाएं तेजी से जारी हैं। रिपोर्ट के अनुसार,  इस साल कुल 274 लोगों को फांसी दी गई। इन देशों के नागरिकों को दी गई फांसी की सजा   फांसी पाने वाले विदेशी नागरिकों में पाकिस्तान, यमन, सीरिया, नाइजीरिया, मिस्र, जॉर्डन और इथियोपिया के नागरिक शामिल हैं।  पाकिस्तान से 21, यमन से 20, सीरिया से 14, नाइजीरिया से 10, मिस्र से नौ, जॉर्डन से आठ और इथियोपिया से सात शामिल हैं। सूडान, भारत और अफगानिस्तान से तीन-तीन और श्रीलंका, इरिट्रिया और फिलीपींस से एक-एक व्यक्ति को फांसी दी गई। राजनयिकों और कार्यकर्ताओं का कहना है कि विदेशी प्रतिवादियों की निष्पक्ष सुनवाई नहीं हो पाती। सजा पाने वाले विदेशी नागरिक बड़े ड्रग डीलरों के शिकार बन जाते हैं। गिरफ्तारी के समय से लेकर फांसी तक आरोपियों को अपनी बात कोर्ट के सामने रखने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

पैदल चलने पर दुबई में कई लोगों पर लगा हजारों का जुर्माना, पढ़िए आखिर गलती क्या थी?

दुबई दुबई एक ऐसा शहर है जो अपनी चकाचौंध, लग्जरी लाइफस्टाइल, ऊंची-ऊंची इमारतों और बेशुमार दौलत के लिए दुनिया भर में मशहूर है. लेकिन इन सबके अलावा, यह शहर अपने सख्त कानूनों के लिए भी जाना जाता है. कई बार इसके कानून इतने सख्त होते हैं कि जब दूसरे देशों के लोग इसके बारे में सुनते हैं, तो वे हैरान रह जाते हैं. ऐसा ही एक मामला दुबई में ट्रैफिक कानून की सख्ती को लेकर सामने आया है. हैरानी की बात यह है कि जहां आमतौर पर लोग गलत ड्राइविंग या ट्रैफिक नियमों की अनदेखी पर चालान और जुर्माने का सामना करते हैं, वहीं दुबई में पैदल चलने वालों पर भी ट्रैफिक नियमों का सख्त पालन करने का दबाव होता है. गल्फ न्यूज के मुताबिक, दुबई पुलिस स्टेशन ने 37 लोगों को खतरनाक तरीके से सड़क पार करने और ट्रैफिक सिग्नल की अनदेखी करने पर जुर्माना लगाया है. उनके ऊपर 400 यूएई दिरहम का जुर्माना लगाया गया है. ध्यान रखें, नहीं तो लगेगा भारी जुर्माना! इस साल की शुरुआत से अब तक, दुबई के ट्रैफिक कानून के तहत, बिना अनुमति वाली जगह से सड़क पार करने या ट्रैफिक सिग्नल तोड़ने पर 400 यूएई दिरहम का जुर्माना लगता है. दुबई का कानून जे-वॉकिंगपर सख्त है. जयवॉकिंग यानी बिना अनुमति या निर्धारित स्थान के सड़क पार करना. जब कोई शख्स ट्रैफिक सिग्नल या जेबरा क्रॉसिंग की अनदेखी करके सड़क के बीच से या ऐसी जगह से सड़क पार करता है जहां से क्रॉसिंग की अनुमति नहीं है, तो इसे जयवॉकिंग कहा जाता है. पिछले साल के आंकड़े डराने वाले! दुबई पुलिस ने बार-बार चेतावनी दी है कि जयवॉकिंग के घातक नतीजे हो सकते हैं. पिछले साल, जे-वॉकिंग की वजह से आठ लोगों की मौत हो गई और 339 लोग घायल हुए. गल्फ न्यूज के मुताबिक, 2023 में 44,000 से ज्यादा लोगों पर जे-वॉकिंग का जुर्माना लगा है. दुबई पुलिस ने साफ कहा है कि सड़क पार करते समय यातायात नियमों का पालन करना जरूरी है.उन्होंने लोगों से अपील की है कि वो क्रॉसिंग का सही तरीका अपनाएं और सड़क पर गाड़ियां न होने पर ही सड़क पार करें. बता दें, दुबई ट्रैफिक कोर्ट ने अरब ड्राइवर को ट्रैफिक नियम न मानने पर 2000 यूएई दिरहम का जुर्माना लगाया, जबकि एशियाई पैदल चलने वालों पर बिना अनुमति वाली जगह से सड़क पार करने के लिए 400 यूएई दिरहम  का जुर्माना लगाया है.    

IPL 2020 : क्यों मिली चेन्नै को दिल्ली से हार, 5 सवाल कर रहे धोनी को परेशान

दुबई। चेन्नै सुपर किंग्स को इंडियन प्रीमियर लीग 2020 में लगातार दूसरे मैच में हार का सामना करना पड़ा है। दिल्ली कैपिटल्स ने उन्हें 44 रन से हरा दिया। दिल्ली ने पहले बल्लेबाजी का न्योता मिलने पर 3 विकेट पर 175 का स्कोर बनाया। मैच की पहली पारी के बाद बढ़त चेन्नै को लग रही थी लेकिन उसके बल्लेबाज लगातार दबाव में आते गए और आखिर में टीम 7 विकेट पर सिर्फ 131 रन ही बना सकी। अभी हालांकि आईपीएल 2020 का शुरुआती चरण है लेकिन तीन बार की चैंपियन टीम की कुछ खामियां सामने नजर आने लगी हैं। टीम के सामने कुछ सवाल हैं जिनका जवाब उन्हें जल्दी ही तलाशना होगा। ओपनर्स का लचर प्रदर्शन धोनी ने मैच के बाद प्रजेंटेशन में कहा कि टीम को पारी की शुरुआत में दम दिखाने की जरूरत है। शेन वॉटसन और मुरली विजय की जोड़ी ने 4.2 ओवरों में सिर्फ 23 रन जोड़े। दोनों ही बल्लेबाज विकेट पर गेंद की रफ्तार के साथ तालमेल नहीं बैठा पाए। उनकी टाइमिंग नहीं बैठ रही थी। न तो दोनों बल्लेबाज बड़े शॉट खेल पा रहे थे और न ही आसानी से छोर ही बदल रहे थे। टीम की निर्भरता फाफ डु प्लेसिस पर बहुत ज्यादा हो गई है और उसे इस बारे में सोचना होगा। पावरप्ले में जहां दिल्ली ने 36 रन बनाए वहीं चेन्नै ने उन्हीं शुरुआती छह ओवरों में 34 रन के स्कोर पर दो विकेट खो दिए थे। स्पिनर्स को नहीं भुना पाए चेन्नै और दिल्ली के स्पिनर्स को देखें तो लगता है कि उन्होंने सबसे ज्यादा अंतर डाला। दिल्ली के दोनों स्पिनर्स अक्षर पटेल और अमित मिश्रा ने कसी हुई गेंदबाजी की और चेन्नै के बल्लेबाजों पर लगाम लगाए रखी। उन्होंने चेन्नै के बल्लेबाजों को हिट करने के लिए लेंथ और लाइन नहीं दी। पटेल ने चार ओवरों में 18 और मिश्रा ने 23 रन दिए। धोनी जो एक ट्रिक मिस कर गए कि बीच के ओवरों में जहां रुतुराज गायकवाड़ को बल्लेबाजी करने भेजा था उसके स्थान पर वह किसी बाएं हाथ के बल्लेबाज को भेज सकते थे। बाएं हाथ के स्पिनर पटेल और लेग स्पिनर मिश्रा के खिलाफ बाएं हाथ का बल्लेबाज अधिक प्रभावी साबित हो सकता था। धोनी के पास सैम करन और रविंद्र जडेजा जैसे बल्लेबाज थे। अंत के लिए बहुत ज्यादा छोड़ना चेन्नै को आखिरी 5 ओवर में करीब 80 रन चाहिए थे। चेन्नै की टीम कई बार ऐसा कमाल कर चुकी है और शायद दिल्ली का टीम प्रबंधन इस बात को अच्छी तरह जानता था कि धोनी इसे दोहरा सकते हैं। ऐसे में उन्होंने दुनिया के सर्वश्रेष्ठ तेज गेंदबाजों में शुमार कगिसो रबाडा को बचाकर रखा। रबाडा ने धोनी को पहले भी परेशान किया है और इस मैच में उन्होंने दिखाया कि उनकी बोलिंग पर रन बनाने आसान नहीं हैं। वह सटीक लाइन और लेंथ के साथ रफ्तार का कॉम्बिनेशन लेकर उतरते हैं जो उन्हें काफी घातक बना देता है। धोनी का बल्लेबाजी क्रम में नीचे आना धोनी लगातार सातवें स्थान पर बल्लेबाजी करने आ रहे हैं। हालांकि उनका कहना है कि वह अभी एक्सपेरीमेंट कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने काफी समय से बल्लेबाजी नहीं की है। इन्हीं सब कारणों के चलते वह नीचे आ रहे हैं। पर धोनी जैसे बल्लेबाज के लिए इतना नीचे बैटिंग करना ठीक नहीं हैं। किसी भी लड़ाई को पीछे से लड़कर नहीं जीता जा सकता। धोनी ने कहा भी मिडल ऑर्डर में दम कम है तो ऐसे में उन्हें चाहिए कि खुद ऊपर आएं और जिम्मेदारी लें। रनों का पीछा करते हुए खास तौर पर चेन्नै को ऐसे खिलाड़ियों की दरकार है जो रनगति को बनाए रख सकें। पहले गेंदबाजी चुनना चेन्नै सुपर किंग्स ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी चुनी। हालांकि धोनी का तर्क था कि बाद में ओस पड़ती है और ऐसे में बल्लेबाजी आसान हो जाती है। गेंद बल्ले पर अच्छी तरह आती है। इसके अलावा सामने वाली टीम के स्पिनर्स के लिए गेंद को ग्रिप करना भी मुश्किल होता है। लेकिन दोनों मौकों पर यह दांव काम करता नजर नहीं आया। दिल्ली के स्पिनर्स ने न सिर्फ सटीक गेंदबाजी की बल्कि इतनी ओस भी नहीं पड़ी जो चेन्नै के बल्लेबाजों को मदद करे। बाकी उनकी टीम ने शुरुआत में ही इतना दबाव ले लिया कि रन बनाने उन्हें मुश्किल नजर आने लगे। इसके अलावा अगर आप अभी तक हुए सात मैचों को देखें तो सिर्फ पहले मैच (मुंबई इंडियंस बनाम चेन्नै सुपर किंग्स) को छोड़ दें तो बाकी सभी मैचों में पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम को ही जीत मिली है। यूएई में पिचें धीमी हैं और एक पारी के बाद उन पर स्ट्रोक खेलना और ज्यादा मुश्किल हो जाता है। ऐसे में अभी तक के हालात से पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम ही फायदे में नजर आ रही है।

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