LATEST NEWS

जंगी माहौल में ईरान को भूकंप का सामना, 5.5 तीव्रता और सुरक्षा सवाल उठाए

तेहरान  दक्षिणी ईरान में गुरुवार को 5.5 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया है, जिससे स्थानीय स्तर पर चिंता का माहौल बन गया. जर्मनी के भू-विज्ञान अनुसंधान केंद्र ने बताया कि भूकंप की गहराई लगभग 10 किलोमीटर थी. कम गहराई पर आए झटकों के कारण सतह पर असर अधिक महसूस किया गया. ईरान जंग के मुहाने पर है और लंबे समय से परमाणु पर काम करने के आरोप लगते रहे हैं. ऐसे में किसी भी भूकंपीय झटके के बाद दुनिया आशंकित हो जाती है कि कहीं ईरान ने न्यूक्लियर टेस्ट तो नहीं किया? भूकंप के बाद प्रभावित क्षेत्रों में लोगों में दहशत देखी गई और आपातकालीन सेवाओं को सतर्क कर दिया गया. राहत और आपदा प्रतिक्रिया दल संभावित नुकसान और आफ्टरशॉक की आशंका को देखते हुए हाई अलर्ट पर हैं. अधिकारियों ने कहा है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयारियां की गई हैं. हालांकि यह भूकंपीय गतिविधि प्राकृतिक मानी जा रही है, लेकिन क्षेत्र में मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव के कारण कुछ हलकों में अटकलें भी सामने आई हैं. हाल के दिनों में ईरान द्वारा रॉकेट टेस्टिंग और सैन्य गतिविधियों की खबरों के बीच हर भूकंपीय घटना को अतिरिक्त सावधानी से देखा जा रहा है. ईरान में जब भी भूकंप आते हैं तो अक्सर लोग सोशल मीडिया पर सवाल उठाते हैं कहीं यह किसी गुप्त परमाणु परीक्षण से जुड़ा तो नहीं है. विशेषज्ञों का कहना है कि 10 किलोमीटर की गहराई पर आया 5.5 तीव्रता का भूकंप सामान्य भूकंपीय गतिविधि के दायरे में आता है और ऐसे झटके इस क्षेत्र में पहले भी दर्ज होते रहे हैं. दक्षिणी ईरान भूकंपीय रूप से सक्रिय क्षेत्र माना जाता है, जहां टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल के कारण समय समय पर झटके महसूस किए जाते हैं. फिलहाल किसी भी तरह के परमाणु परीक्षण या असामान्य गतिविधि की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. जर्मन भू-विज्ञान अनुसंधान केंद्र सहित अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां स्थिति की निगरानी कर रही हैं. तनावपूर्ण क्षेत्रीय हालात के बीच आए इस भूकंप ने सुरक्षा एजेंसियों और आम नागरिकों दोनों की चिंता बढ़ा दी है. हालांकि अब तक किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं मिली है, लेकिन प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है.

नेपाल में महसूस किए गए भूकंप के झटके, प्रशासन मुस्तैद

ताप्लेजंग, नेपाल पूर्वी नेपाल के ताप्लेजंग जिले में मंगलवार तड़के चार तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। राष्ट्रीय भूकंप निगरानी एवं अनुसंधान केंद्र (NEMRC) के अनुसार, भूकंप मंगलवार सुबह 2 बजकर 47 मिनट पर आया।भूकंप का केंद्र ताप्लेजंग जिले के कंचनजंगा क्षेत्र में स्थित था। झटकों के बाद स्थानीय लोगों में कुछ देर के लिए दहशत फैल गई और कई लोग घरों से बाहर निकल आए। अधिकारियों के मुताबिक, भूकंप के झटके ताप्लेजंग के अलावा पूर्वी नेपाल के अन्य जिलों में भी महसूस किए गए। हालांकि, अब तक किसी भी तरह के जानमाल के नुकसान या संपत्ति क्षति की कोई सूचना नहीं मिली है। प्रशासन ने स्थिति पर नजर बनाए रखने की बात कही है और स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। नेपाल भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र में आता है, जहां समय-समय पर इस तरह की गतिविधियां दर्ज की जाती रही हैं।

MP में भूकंप से कांपी धरती, घरों से बाहर निकले लोग, महाराष्ट्र का अमरावती रहा केंद्र

earthquake 70 4

खंडवा  मध्य प्रदेश के खंडवा, खरगोन और बुरहानपुर के इलाकों में बुधवार रात भूकंप के झटके महसूस किए गए। भूकंप की ज्यादा तीव्रता खंडवा में महसूस की गई है। यहां जिला मुख्यालय से 66 किलोमीटर दूर पंधाना तहसील में तीव्रता 3.8 रिक्टर बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि बुधवार रात करीब 9 बजकर 57 मिनट पर धरती कांपने से सोने की तैयार कर रहे लोग डर के मारे घरों से बाहर निकल आए। घरों की दीवारों में जोरदार कंपन महसूस हुआ और कई इलाकों में लोग बुरी तरह घबरा गए। रात में आए भूकंप की वजह से खंडवा के किशोर नगर में नरेंद्र कुशवाह के मकान का छज्जा गिर गया। नरेंद्र ने मीडिया को बताया कि वह घर में टीवी देख रहे थे। उनका परिवार भी साथ में था, तभी जमीन में अचानक कंपन हुआ और कुछ जोर से गिरने की आवाज आई। उन्होंने बाहर आकर देखा तो मकान का छज्जा गिरा हुआ था। ग्रामीण क्षेत्रो में भी भूकंप के झटके महसुस हुए हैं। खिराला, कोहदड, दीवाल, पंधाना, आनंदपुर और बोरगांव में भी लोगों ने भूकंप के झटके महसूस किए। इधर जिले से लगे बुरहानपुर, खरगोन में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए है। हालांकि, यहां भूकंप की तीव्रता कम महसूस की गई है। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 3.8 मापी गई है। वहीं, इसका केंद्र महाराष्ट्र का अमरावती रहा था, जो जमीन से 10 किमी अंदर था। मौसम विशेषज्ञ सौरभ गुप्ता के अनुसार, भूकंप का केंद्र मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बॉर्डर पर था, जो खंडवा जिला मुख्यालय से 66 किलोमीटर दूर है। इस वजह से दोनों राज्यों में झटके महसूस हुए थे।  

बैतूल की धरती आधी रात में हिली, भूकंप से घबरा के उठे लोग, इतनी थी तीव्रता

बैतूल मध्यप्रदेश के बैतूल में बुधवार तड़के 2:59 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए. एनसीएस के अनुसार, भूकंप की तीव्रता 2.8 मापी गई और इसका केंद्र जमीन से पांच किलोमीटर की गहराई में था. आधी रात को आए इस भूकंप से अब तक कीसी प्रकार के जान-माल के नुकसान या किसी के हताहत होने की कोई सूचना नहीं मिली है. लोगों को नहीं हुआ भूकंप का अहसास रात का समय होने और तीव्रता कम होने के कारण अधिकतर लोगों को इस भूकंप का अहसास भी नहीं हुआ. हालांकि कुछ स्थानों पर हल्की कंपन महसूस की गई, लेकिन कहीं से भी जान-माल के नुकसान की कोई सूचना नहीं है. जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन दल ने पुष्टि की है कि स्थिति पूरी तरह सामान्य है. गौरतलब है कि बैतूल क्षेत्र में यह पहला मामला नहीं है. इससे पहले 3 मई को जिले के मुलताई क्षेत्र में भी रिक्टर स्केल पर 2.8 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था. लगातार दूसरी बार आई इस हल्की भूकंपीय हलचल से विशेषज्ञों का ध्यान एक बार फिर इस क्षेत्र की भूगर्भीय सक्रियता की ओर गया है. भूकंप की तीव्रता 2.8 रही एनसीएस ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी साझा करते हुए कहा, “भूकंप की तीव्रता 2.8, समय 21/05/2025 को 02:59:44 IST, अक्षांश 21.73°N, देशांतर 78.35°E, गहराई 5 किमी रही. इससे पहले मंगलवार को बंगाल की खाड़ी में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे. रिक्टर पैमाने पर 4.4 तीव्रता का भूकंप आया था. वहीं रविवार को अरुणाचल प्रदेश में भूकंप के झटके महसूस किए गए. नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार, 18 मई को सुबह 5:06 बजे अरुणाचल में रिक्टर पैमाने पर 3.8 तीव्रता का भूकंप आया. विशेषज्ञों की राय भूवैज्ञानिकों के अनुसार, इस तरह के हल्के झटके आमतौर पर किसी बड़े भूकंप का संकेत नहीं होते, लेकिन यदि बार-बार भूकंपीय गतिविधि दर्ज की जाए, तो गहन निगरानी की आवश्यकता होती है. एनसीएस लगातार क्षेत्र की निगरानी कर रहा है और समय-समय पर जानकारी साझा कर रहा है. प्रशासन की जनता से अपील जिला खनिज अधिकारी मनीष पालेवाल ने नागरिकों से अपील की है कि, ”घबराएं नहीं, लेकिन आपात स्थिति से निपटने के लिए जरूरी एहतियात बरतें. सुरक्षित स्थानों की जानकारी रखें और भूकंप के समय क्या करना चाहिए, इसके बारे में जागरूक रहें. राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र और स्थानीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण स्थिति पर नजर बनाए हुए है.”  

घाटी में मध्यम तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस हुए, लोग दफ्तरों से बाहर निकल आए और खुले मैदान में जाकर खड़े हो गए

श्रीनगर कश्मीर में शनिवार दोपहर भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं. जिसके बाद लोग डर गए और अपने दफ्तर-घर छोड़कर बाहर निकल आए. शुरुआती जानकारी के मुताबिक, घाटी में मध्यम तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस हुए हैं. लोग दफ्तरों से बाहर निकल आए और खुले मैदान में जाकर खड़े हो गए.अफगानिस्तान-ताजिकिस्तान सीमा क्षेत्र में भूकंप का केंद्र रहा. भूकंप की गहराई धरती से 86 किलोमीटर पर थी. एक दिन पहले उत्तरी चिली में 5.7 तीव्रता का भूकंप आया था. 15 अप्रैल को अमेरिका में कैलिफोर्निया के सैन डिएगो काउंटी में भूकंप आया था. इसकी तीव्रता 5.2 रही थी. भूकंप के कारण होने वाले कंपन को कैमरा में कैद किया गया था. दक्षिणी कैलिफोर्निया में भूकंप से किसी के घायल होने या कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ था. 13 अप्रैल को हिमाचल प्रदेश के मंडी में भूकंप आया था. इसकी धरती से 5 किमी गहराई थी. इसकी तीव्रता 3.4 रही थी. 12 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पुंछ और राजौरी जिले के कुछ हिस्सों में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे. भूकंप की तीव्रता 5.8 रही थी. इसकी धरती से गहराई 10 किमी थी. भूकंप का केंद्र पाकिस्तान रहा था.

म्यांमार जैसे भूकंप का खतरा भारत में भी नकारा नहीं जा सकता: IIT कानपुर

earthquake 70 4

कानपुर  म्यांमार और बैंकॉक में जबर्दस्त नुकसान पहुंचाने वाले भूकंप की जड़ सगाइन फॉल्ट है। इस फॉल्ट को इंटरनेट पर मैप के जरिए आसानी से देखा जा सकता है। आईआईटी कानपुर के अर्थ साइंसेज विभाग के प्रोफेसर जावेद मलिक ने कहा कि सागइन फॉल्ट बेहद खतरनाक है। सिलिगुड़ी में गंगा-बंगाल फॉल्ट है। इन दोनों फॉल्ट के बीच कई अन्य फॉल्टलाइंस हैं। ऐसे में इस आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है कि एक फॉल्ट की सक्रियता किसी दूसरे फॉल्ट को ट्रिगर न कर दे। जिससे भारत को भी खतरा है। लंबे समय से भूकंपों पर शोध कर रहे प्रो. जावेद मलिक के अनुसार, यह फॉल्ट अराकान से अंडमान और सुमात्रा तक फैले शियर जोन का हिस्सा है। इसकी भूकंपीय आवृत्ति 150-200 साल है और इसकी सक्रियता दूसरी फॉल्टलाइनों को ट्रिगर कर सकती है। हमें बड़े भूकंपों की प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए। हिमालय में कई सक्रिय फॉल्टलाइंस हैं। सभी लोगों ने फ्रंटल हिस्सों पर काम किया है। फॉल्टलाइन ऊपर भी हैं। भारत की तरफ भी इशारा प्रो. मलिक ने कहा कि हम सिर्फ प्लेटबाउंड्री के आसपास ही भूकंप न देखें। ऊपर भी सेस्मिक गतिविधियां जारी हैं। पूर्वोत्तर और कश्मीर सेस्मिक जोन-5 में हैं। इस जोन में हमें ज्यादा रिसर्च की जरूरत है। गंगा-बंगाल फॉल्ट बेहद महत्वपूर्ण है। इसमें भी सगाइन फॉल्ट जैसी हलचल है। शायद म्यांमार का भूकंप भारत के लिए इशारा हैं। गंगा बंगाल और सगाइन फॉल्ट के बीच डॉकी, कोपली, डिबरूचौतांग फॉल्ट जोन भी हैं। गंगा-बंगाल फॉल्ट भी सतह पर दिखता है। पूरा हिस्सा दबाव में प्रो. मलिक ने कहा कि आप ये नहीं कह सकते हैं कि सगाइन और गंगा बंगाल के बीच कुछ नहीं चल रहा। एक पूरा हिस्सा दबाव में है। वहां लगातार ऊर्जा एकत्रित हो रही है। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि एक भूकंप दूसरे भूकंप को ट्रिगर नहीं करेगा। इसे ‘ट्रिगर स्ट्रेस’ कहते हैं। यहां ये देखना होगा कि क्या ऐसी गतिविधियां उत्तर से दक्षिण की तरफ बढ़ी हैं। आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिक ने कहा कि 2004 में सुमात्रा, अंडमान में एक भूकंप आया था। इस क्षेत्र के दक्षिण में 2005 में भूकंप आया था। अब ऊपर की तरफ भूकंप आने लगे हैं। ट्रिगर होने की आशंका हमेशा बनी रहती है।  

म्‍यांमार और थाइलैंड में विनाशकारी भूकंप में मरने वालों का आंकड़ा 1000 के पार, भारत ने भेजी राहत सामग्री

नेपीडा  म्यांमार और पड़ोसी देश थाईलैंड में शुक्रवार आए शक्तिशाली भूकंप में मरने वालों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक दोनों देशों को मिलकर 1000 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि अमेरिकी भूगर्भ एजेंसी ने 10 हजार से ज्यादा मौतों की आशंका जताई है। समाचार एजेंसी AFP की रिपोर्ट के मुताबिक म्यांमार के अधिकारियों ने बताया है कि विनाशकारी भूकंप में मरने वालों की संख्या शनिवार सुबह बढ़कर 1000 हो गई है, जबकि 2300 लोग घायल हुए हैं। हालांकि बैंकॉक के अधिकारियों ने शुक्रवार को थाईलैंड में आए भूकंप में मरने वालों की संख्या अब कम कर दी है। थाईलैंड ने मरने वालों की संख्या को लेकर अपडेट रिपोर्ट दी है, जिसमें 6 लोगों की मौत की रिपोर्ट दी गई है। वहीं 22 लोगों को घायल और 101 लोगों को लापता बताया गया है। इससे पहले शुक्रवार को मरने वालों का आंकड़ा 10 था। हालांकि थाईलैंड की राजधानी को आपदा क्षेत्र घोषित किया गया है। जबकि म्यांमार की तानाशाह सेना ने भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में आपातकाल लागू कर दिया है। म्यांमार की सैन्य सरकार के प्रमुख जनरल मिन आंग ह्लाइंग ने देश की सरकारी टेलीविजन पर कहा है कि उन्होंने “किसी भी देश” को मदद और दान देने के लिए आमंत्रित किया है। इसके अलावा उन्होंने भी आशंका जताई है की भूकंप की वजह से भारी संख्या में लोगों की जान गई होगी। यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) ने बताया कि भूकंप की गहराई 10 किमी थी। USGS ने आज सुबह अपनी ताजा रिपोर्ट में 10 हजार से ज्यादा लोगों की मौत की आशंका जताई है। मुश्किल वक्त में भारत ने ऑपरेशन ब्रह्मा शुरू किया है। इसके तहत भारत सरकार ने भीषण भूकंप से प्रभावित म्यांमार के लोगों की सहायता के लिए तुरंत ही कदम उठाए हैं। टेंट, कंबल, स्लीपिंग बैग, खाद्य पैकेट, स्वच्छता किट, जनरेटर और आवश्यक दवाओं सहित 15 टन राहत सामग्री लेकर हमारा हेलीकॉप्टर यांगून पहुंचा है। 15 टन राहत सामग्री भेजी गई यांगून विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने ये जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि भारत से भेजी मदद की पहली खेप यांगून पहुंच गई है। इससे पहले AFS हिंडन से भारतीय वायुसेना का सी 130 जे विमान राहत सामग्री के साथ म्यांमार के लिए उड़ान भरा था। इस विमान में लगभग 15 टन राहत सामग्री म्यांमार भेजी गई। जिसमें टेंट, स्लीपिंग बैग, कंबल, खाने के लिए तैयार भोजन, वाटर प्यूरीफायर, हाइजीन किट, सोलर लैंप, जनरेटर सेट, आवश्यक दवाएं (पैरासिटामोल, एंटीबायोटिक्स, कैनुला, सीरिंज, दस्ताने, कॉटन बैंडेज, मूत्र बैग आदि) शामिल हैं। म्यांमार भूकंप: जुंटा की सूचना टीम के एक बयान में कहा गया है कि शुक्रवार के उथले 7.7 तीव्रता के भूकंप में 1,002 लोगों की मौत हो गई है, और 2,376 घायल हुए हैं। बैंकॉक मेट्रो और लाइट रेल का अधिकांश हिस्सा सामान्य रूप से फिर से शुरू हो गया है। बैंकॉक मेट्रो और लाइट रेल के ऑपरेटरों के अनुसार, शनिवार की सुबह ज़्यादातर मेट्रो और लाइट रेल सेवाएं सामान्य रूप से चलने लगी थीं। हालाँकि, दो लाइट रेल लाइनें अभी भी बंद हैं और उनकी जाँच चल रही है। शुक्रवार को म्यांमार में एक ज़ोरदार भूकंप आया। इससे काफ़ी नुकसान हुआ है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है। अभी तक 140 से ज़्यादा लोगों की मौत की खबर है। पड़ोसी देश थाईलैंड में कम से कम छह लोगों की मौत हो गई। बैंकॉक में एक निर्माणाधीन ऊँची इमारत गिर गई थी। म्यांमार में भूकंप से भारी तबाही म्यांमार में शुक्रवार को आए भूकंप ने भयानक तबाही मचाई है। कई जगह पर बड़ी-बड़ी बिल्डिंगों को नुकसान पहुंचा है। पूरे देश में हालात बेहद गंभीर नजर आ रहे हैं। ऐसे में भूकंप पीड़ितों की मदद के लिए भारत आगे आया है। भारत ने 15 टन से ज्यादा राहत सामग्री यांगून भेज दी है। यह मदद IAF के C-130J विमान से भेजी गई। इस विमान ने एयर फोर्स स्टेशन हिंडन से उड़ान भरा। चश्मदीदों ने भयानक भूकंप को लेकर क्या बताया? भूकंप को लेकर चश्मदीदों ने बताया है कि अचानकर इमारतें जोर-जोर से हिलने लगी और अफरा-तफरी मच गई। हजारों लोग सड़क पर आ गये। सभी लोग बदहवाश थे। बैंकॉक में लोग अपने अपने दफ्तरों, घरों और मॉल से बाहर निकल आए। छतों पर बने पूल से पानी बह रहा था और लोग बुरी तरह से डरे हुए थे। उस वक्त भूकंप के झटके लगातार आ रहे थे। बैंकॉक में एक स्कॉटिश पर्यटक ने कहा कि “अचानक पूरी इमारत हिलने लगी। लोग चीख-चिल्ला रहे थे और इधर-उधर भाग रहे थे।” सोशल मीडिया पर म्यांमार के मांडले से कई तस्वीरें और वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिसमें टूटे घर और टूटी इमारतें देखी जा सकती हैं। म्यांमार में चल रहे गृहयुद्ध के कारण मौतों का असली आंकड़ा शायद पूरी तरह से कभी सामने नहीं आ पाए। इसके अलावा गृहयुद्ध ने राहत-बचाव कार्यों को और भी मुश्किल बना दिया है। इसके अलावा बीबीसी की रिपोर्ट में जेल अधिकारियों के एक करीबी सूत्र के बताया है कि म्यांमार की जेल में बंद नेता आंग सान सू पूरी तरह से सुरक्षित हैं। भूकंप का उनपर कोई असर नहीं पड़ा है और वे राजधानी नेपीडा की जेल में ही हैं। आपको बता दें कि 2021 में सैन्य तख्तापलट के बाद से आंग सान सू को गिरफ्तार कर लिया गया था और अलग अलग मामलों में उन्हें 50 सालों से ज्यादा की जेल की सजा सुनाई गई है। इसके अलावा चीन ने कहा है कि उसने 37 लोगों की एक आपदा प्रतिक्रिया टीम को म्यांमार में राहत और बचाव कार्य में सहायता करने के लिए म्यांमार में भेज दिया है। चीनी शहर युन्नान से भेजी गई यह टीम भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली, ड्रोन और पोर्टेबल सैटेलाइट सहित आपातकालीन बचाव उपकरणों के 112 सेट लेकर आई है। भारत ने भेजीं ये जरूरी चीजें राहत सामग्री में कई जरूरी चीजें शामिल हैं। टेंट और स्लीपिंग बैग लोगों को रहने के लिए जगह देंगे। कंबल उन्हें ठंड से बचाएंगे। तैयार भोजन और पानी शुद्ध करने वाले उपकरण खाने-पीने की समस्या दूर करेंगे। स्वच्छता किट लोगों को साफ रहने में मदद करेंगे। सोलर लैंप और जेनरेटर सेट रोशनी … Read more

म्यांमार और थाईलैंड में भूकंप के झटकों से कांपी धरती, 7.7 रही तीव्रता, फ्लाईओवर ढहा, 43 लोग लापता

बैंकॉक  म्यांमार और थाईलैंड में आए खतरनाक भूकंप से भारी तबाही मचने की आशंका है। थाईलैंड से खतरनाक तस्वीरें सामने आ रहे हैं। थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक से एक वीडियो सामने आया है, जिसमें एक बहुमंजिला इमारत को धड़ाम से जमीन पर गिरते हुए देखा गया है। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी ने बताया है कि शुक्रवार को म्यांमार और थाईलैंड में रिक्टर पैमाने पर 7.2 तीव्रता का खतरनाक भूकंप आया है। भूकंप पूरे देश में झटके महसूस किए गए। दिल्ली एनसीआर तक भूकंप के झटके महूसक किए गये हैं। सबसे खतरनाक बात ये है कि भूकंप का केन्द्र जमीन से सिर्फ 10 किलोमीटर अंदर था, जिससे भारी तबाही की आशंका है। म्यांमार में भूकंप से भारी तबाही, कई इमारतें जमींदोज, इमरजेंसी घोषित .म्यांमार-थाईलैंड भूकंप: भारत हर संभव मदद देने के लिए तैयार- पीएम मोदी. कोलकाता, इंफाल में हल्के झटके महसूस किए गए समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, बैंकॉक में 7.7 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आने के बाद कोलकाता और इंफाल में हल्के झटके महसूस किए गए। भूकंप का केंद्र मध्य म्यांमार में था, जो मोनीवा शहर से लगभग 50 किलोमीटर पूर्व में है। हालांकि, अभी तक किसी नुकसान की खबर नहीं है। यूएसजीएस ने एक बयान में कहा कि भूकंप स्थानीय समयानुसार दोपहर 12:50 बजे के आसपास म्यांमार के सागाइंग शहर के उत्तर-पश्चिम में 16 किलोमीटर की दूरी पर 10 किलोमीटर की गहराई पर आया था। बैंकॉक में भी भूकंप से तबाही की आशंका है। लोग अपने घरों से बाहर भागते हुए देखे गए हैं और कुछ वीडियो में खाना खाते समय लोगों को हिलते हुए दिखाया गया। सबसे खतरनाक वीडियो थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक है, जिसमें एक बहुमंजिला इमारत को ताश के पत्तों की तरह धड़ाम से गिरते हुए देखा गया है। पहला झटका सुबह 11.50 बजे आया 12 मिनट बाद दूसरा झटका महसूस हुआ भूकंप में कई इमारतों को नुकसान पहुंचा कुछ समाचार एजेंसियों ने रिपोर्ट किया है कि शुक्रवार को म्यांमार में 7.7 और 6.4 तीव्रता के दो लगातार भूकंप आए। दावा किया जा रहा है कि म्यांमार के मांडले में इरावदी नदी पर बना सुप्रसिद्ध अवा ब्रिज गिर गया है। भूकंप में कई इमारतों को भी नुकसान पहुंचा है। भूकंप इतना तेज था कि करीब 900 किलोमीटर दूर बैंकॉक में भी इसके झटके महसूस किए गए। बैंकॉक में निर्माणाधीन इमारत ढह गई: पुलिस बैंकॉक पुलिस का कहना है कि दोपहर में थाई राजधानी में आए 7.7 तीव्रता के भूकंप में निर्माणाधीन ऊंची इमारत ढह गई। संभावित हताहतों की संख्या अभी तक पता नहीं चल पाई है। पुलिस के मुताबिक, बैंकॉक के लोकप्रिय चतुचक मार्केट के पास घटना हुई। इस बारे में तत्काल कोई जानकारी नहीं है कि ढहने के समय साइट पर कितने श्रमिक थे? एक मिनट तक हिलती रही धरती सोशल मीडिया वेबसाइट X पर बैंकॉक में आए भूकंप से जुड़ी कई तस्वीरें और वीडियो वायरल हो रहे हैं। लोगों ने कहा कि भूकंप के दौरान जमीन करीब एक मिनट तक हिलती रही, जिससे पूरे शहर में अफरातफरी का माहौल देखने को मिला। भूकंप में पूरी तरह नष्ट हो गया पुल म्यांमार में एतिहासिक शाही महल मांडले पैलेस के कुछ हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए हैं। वहीं, सागाइंग क्षेत्र के सागाइंग टाउनशिप में एक पुल भूकंप में पूरी तरह नष्ट हो गया। राजधानी नेपीता के अलावा क्यौकसे, प्यिन ऊ ल्विन और श्वेबो में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। इन शहरों की आबादी 50 हजार से ज्यादा है। भूकंप से म्यांमार और थाईलैंड में तबाही म्यांमार से भी एक वीडियो सामने आया है, जिसमें एक तीन मंजिला मकान को धाराशाई देखा जा रहा है। लोगों को भूकंप के बाद अपनी जान बचाने के लिए भागते देखा जा रहा है। बैंकॉक में ऊंची इमारत ढहने पर धूल के बादल से भागते लोग दिखाई दे रहे हैं। इसके अलावा म्यांमार की सीमा से लगे युन्नान और गुआंग्शी प्रांतों में चीनी सोशल मीडिया यूजर्स ने कहा है कि उन्होंने भूकंप को तीव्रता से महसूस किया। सोशल मीडिया पर शेयर किए गए वीडियो के मुताबिक म्यांमार के अवा और सागाइंग क्षेत्रों को जोड़ने वाला एक पुल शुक्रवार को देश के मध्य भाग में आए शक्तिशाली भूकंप के बाद ढह गया है। फुटेज में देश के उत्तर से दक्षिण तक बहने वाली इरावदी नदी में गिरने के बाद पुराने सागाइंग पुल के कुछ हिस्से दिखाई दे रहे हैं। पहला झटका सुबह 11.50 बजे आया 12 मिनट बाद दूसरा झटका महसूस हुआ भूकंप में कई इमारतों को नुकसान पहुंचा कुछ समाचार एजेंसियों ने रिपोर्ट किया है कि शुक्रवार को म्यांमार में 7.7 और 6.4 तीव्रता के दो लगातार भूकंप आए। दावा किया जा रहा है कि म्यांमार के मांडले में इरावदी नदी पर बना सुप्रसिद्ध अवा ब्रिज गिर गया है। भूकंप में कई इमारतों को भी नुकसान पहुंचा है। भूकंप इतना तेज था कि करीब 900 किलोमीटर दूर बैंकॉक में भी इसके झटके महसूस किए गए। बैंकॉक में निर्माणाधीन इमारत ढह गई: पुलिस बैंकॉक पुलिस का कहना है कि दोपहर में थाई राजधानी में आए 7.7 तीव्रता के भूकंप में निर्माणाधीन ऊंची इमारत ढह गई। संभावित हताहतों की संख्या अभी तक पता नहीं चल पाई है। पुलिस के मुताबिक, बैंकॉक के लोकप्रिय चतुचक मार्केट के पास घटना हुई। इस बारे में तत्काल कोई जानकारी नहीं है कि ढहने के समय साइट पर कितने श्रमिक थे? भूकंप से जुड़े अपडेट यहां पढ़ें:- – थाईलैंड और म्यांमार के कई शहरों में इमारतें ढह गई हैं. – बैंकॉक में टावर जमींदोज हो गया है जबकि दर्जनों लोग लापता हैं. – USGS का कहना है कि हजारों लोगों के मरने की आशंका है. – मेघालय के गारो हिल्स में भी 4.0 तीव्रता का भूकंप का झटका महसूस किया गया. – सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें गगनचुंबी इमारतों को भूकंप के झटकों की वजह से हिलते देखा जा सकता है. कई इमारतें झुक गई हैं. धरती के अंदर सात टेक्टोनिक प्लेट्स हैं. ये प्लेट्स लगातार घूमती रहती हैं. जब ये प्लेट आपस में टकराती हैं, रगड़ती हैं. एक-दूसरे के ऊपर चढ़ती या उनसे दूर जाती हैं, तब जमीन हिलने लगती है. इसे ही भूकंप कहते हैं. भूकंप को नापने के लिए रिक्टर पैमाने का इस्तेमाल करते हैं. जिसे रिक्टर मैग्नीट्यूड … Read more

सिंगरौली में भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए, रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 3.5 मापी गई

 सिंगरौली  मध्य प्रदेश में गुरुवार को सिंगरौली जिले में भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 3.5 मापी गई। झटके इतने हल्के थे कि कई लोगों को यह महसूस नहीं हुए, हालांकि कुछ लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। भूकंप 10 किलोमीटर की गहराई पर था।हालांकि कई स्थानों पर लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने बताया कि भूकंप का केंद्र जमीन से 10 किलोमीटर की गहराई में था। सिंगरौली और आसपास के जिलों में काफी लोगों ने भूकंप के झटके को महसूस किया तो कुछ को धरती की कंपन का अहसास नहीं हुआ। जिन लोगों को भूकंप महसूस हुआ वे तुरंत घरों से बाहर निकल आए। लोग एक दूसरे से भूकंप की चर्चा करने लगे। प्रशासन को कहीं से किसी तरह के नुकसान की सूचना नहीं मिली है। रिक्टर स्केल पर 3.5 तीव्रता वाले भूकंपों को हल्के दर्जे में गिना जाता है। इतनी तीव्रता के भूकंप में नुकसान की आशंका ना के बराबर होती है। हालांकि, हल्के से हल्का भूकंप भी लोगों को डरा जरूर देता है। क्यों आता है भूकंप? दरअसल, पृथ्वी की चार प्रमुख परतें हैं, जिसे इनर कोर, आउटर कोर, मेंटल और क्रस्ट कहते हैं। जानकारी के अनुसार, पृथ्वी के नीचे मौजूद प्लेट्स घूमती रहती हैं, जिसके आपस में टकराने पर पृथ्वी की सतह के नीचे कंपन शुरू होता है। जब ये प्लेट्स अपनी जगह से खिसकती हैं तो भूकंप के झटके महसूस किए जाते हैं। इस जगह पर सबसे ज्यादा भूकंप का असर रहता है। हालांकि, भूकंप की तीव्रता अगर ज्यादा होती है तो इसके झटके काफी दूर तक महसूस किए जाते हैं। भूकंप के दौरान क्या करें?     भूकंप के दौरान जितना संभव हो उतना सुरक्षित रहें। इस बात को लेकर सावधान रहे कि भूकंप कितनी तीव्रता के साथ आ सकता है। इसकी पूर्व-चेतावनी देने वाले भूकंप के झटके होते हैं और बाद में बड़ा भूकंप भी आ सकता है।     धीरे-धीरे कुछ कदमों तक की हलचल करें, जिससे पास में किसी सुरक्षित स्थान पर पहुंच सकें और भूकंप के झटकों के रुकने पर घर में तब तक रहें जब तक कि आपको यह सुनिश्चित हो जाएं कि बाहर निकलना सुरक्षित है।  

इंडोनेशिया में सुबह-सुबह डोली धरती, 6.1 तीव्रता के साथ कांपी धरती, दहशत में लोग, सुनामी का अलर्ट नहीं!

सुलावेसी इंडोनेशिया में आज बुधवार सुबह भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 6.1 मापी गई। यह भूकंप उत्तरी सुलावेसी प्रांत के पास समुद्र में आया और इसकी गहराई करीब 10 किलोमीटर थी। संयुक्त राज्य भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) के मुताबिक भूकंप सुबह 6:55 बजे (स्थानीय समय) आया। राहत कि बात यह है कि इंडोनेशियाई मौसम विज्ञान एजेंसी ने सुनामी की संभावना से इनकार किया है और अब तक किसी बड़े नुकसान या किसी के घायल होने की खबर नहीं है। इंडोनेशिया एक ऐसी जगह पर स्थित है जहां धरती की टेक्टोनिक प्लेटें मिलती हैं। इसे ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है, जिससे यहां अक्सर भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट होते रहते हैं। इसी कारण, यह इलाका भूकंपीय दृष्टि से बहुत संवेदनशील माना जाता है। पिछले वर्षों में, इस देश में कई खतरनाक भूकंप आ चुके हैं। जनवरी 2021 में, 6.2 तीव्रता के भूकंप से 100 से ज्यादा लोगों की मौत हुई और हजारों लोग बेघर हो गए थे। 2018 में, 7.5 तीव्रता के भूकंप और सुनामी ने 2,200 से ज्यादा लोगों की जान ले ली थी। वहीं, 2004 में आए 9.1 तीव्रता के भूकंप और सुनामी में 1,70,000 से अधिक लोग मारे गए थे। इंडोनेशियाई सरकार और राहत एजेंसियां हमेशा सतर्क रहती हैं और किसी भी आपदा से निपटने के लिए तैयार रहती हैं। सुनामी  का खतरा नहीं यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के अनुसार, फिलहाल इस भूकंप से हुए नुकसान की कोई जानकारी सामने नहीं आई है.  वहीं USGS  की तरफ से दी जानकारी के अनुसार भूकंप से सुनामी आने का खतरा नहीं है. जो इंडोनेशिया के लिए बड़ी राहत वाली बात है.  इंडोनेशिया में अक्सर आते रहते हैं भूकंप यह पहली बार नहीं है जब इंडोनेशिया में भूकंप आया हो. इंडोनेशिया एक विशाल द्वीपसमूह है, जो प्रशांत महासागर के “फायर रिंग” पर स्थित है. यह क्षेत्र अत्यधिक भूकंपीय गतिविधियों के लिए प्रसिद्ध है, क्योंकि यहां टेक्टोनिक प्लेटें नियमित रूप से टकराती रहती हैं, जिससे भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट होते हैं. भूकंप से बचने के उपाय     शांत रहें और जल्दी से नीचे झुकें: भूकंप के दौरान खुद को शांत रखकर, जमीन पर झुककर अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करें.     सुरक्षित स्थान पर शरण लें: मजबूत टेबल या डेस्क के नीचे छिपें, ताकि गिरते मलबे से बच सकें.     दरवाजों और खिड़कियों से दूर रहें: इनसे दूर रहें क्योंकि ये आपको चोटिल कर सकते हैं.     अगर बाहर हैं, तो खुले स्थान पर जाएं: इमारतों, पेड़ों और बिजली के तारों से दूर रहें.     आफ्टरशॉक्स से सतर्क रहें: भूकंप के बाद आने वाले आफ्टरशॉक्स से बचने के लिए सतर्क रहें.  

सीसीटीवी में कैद हुए फुटेज, राजस्थान-बीकानेर में भूकंप के झटकों से घबराए लोग

Rajasthan 01 2 1

बीकानेर। बीकानेर में ठीक एक बजे भूकंप का तगड़ा झटका महसूस हुआ। भूकंप के कारण जमीन हिलने का अहसास होते ही लोग घरों से बाहर निकल आए। नोखा और लूणकरनसर में भी भूकंप का एहसास हुआ। घरों में लगे सीसीटीवी में भूकंप के झटकों के कारण हिलते हुए वाहनों के फुटेज दर्ज हुए हैं। मौसम विभाग ने बीकानेर में आए इस भूकंप की पुष्टि की है। राहत की बात यह है कि भूकंप के कारण किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है। स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन दल स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सतर्क हैं। भूकंप की तीव्रता और इसका केंद्र बिंदु अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। विशेषज्ञों का कहना है कि भूकंप के झटकों के बाद लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए। अगर दोबारा झटके महसूस हों, तो तुरंत खुले स्थानों पर चले जाएं और इमारतों, पेड़ों तथा बिजली के खंभों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें। जिला प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और धैर्य बनाए रखने की अपील की है। किसी भी अप्रत्याशित स्थिति में स्थानीय अधिकारियों से संपर्क करने और सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।

Earthquake: तिब्बत में 7.1 तीव्रता के भूकंप, 53 लोगों की मौत

तिब्बत नेपाल की सीमा से सटे तिब्बत के पहाड़ी क्षेत्र शिजांग में मंगलवार को भूकंप ने तबाही मचा दी। 7.1 तीव्रता वाले भूकंप से भारी जानमाल का नुकसान हुआ है। अब तक 53 लोगों के मरने और 38 लोगों के घायल होने की सूचना मिल रही है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार भूकंप का असर तिब्बत के शिगात्से शहर पर सबसे ज्यादा हुआ है। यहां बड़ी-बड़ी इमारतें भूकंप के कारण गिर गई हैं, जिससे काफी जानमाल का नुकसान हुआ है। चीन की सरकारी न्यूज एजेंसी ने जानकारी दी कि शिजांग स्वायत्त क्षेत्र के डिंगरी काउंटी में 7.1 तीव्रता का भूकंप आया। इसका असर भारत, नेपाल, बांग्लादेश और भूटान के कई इलाकों में देखने को मिला। यहां भी भूकंप के झटके महसूस किए गए। भारत में बिहार, पश्चिम बंगाल व उत्तर भारत के कई हिस्सों और सिक्किम सहित पूर्वोत्तर के राज्यों में मंगलवार की सुबह भूकंप के झटकों लोग सहम गए। नेपाल में दिखा असर नेपाल की राजधानी में मंगलवार सुबह भूकंप के झटके लगे, तो लोग घरों से बाहर जान बचाने के लिए भागे। वह सड़कों व खुले स्थानों पर जाकर खड़े हो गए। काठमांडू की रहने वाली मीरा अधिकारी ने एएनआई को बताया कि मैं उस समय सो रही थी (जब भूकंप आया)। बिस्तर हिल रहा था और मुझे लगा कि मेरा बच्चा बिस्तर हिला रहा है। उन्होंने कहा कि मैंने उतना ध्यान नहीं दिया, लेकिन खिड़की हिल रही थी। मुझे एहसास हुआ कि यह भूकंप है। मैंने फिर जल्दी से अपने बच्चे को बुलाया और घर खाली कर दिया। हम भागकर खुले मैदान में आ गए।  

फिलहाल नुकसान नहीं, गुजरात के कच्छ में 3.2 तीव्रता के भूकंप के झटके

कच्छ/नई दिल्ली. गुजरात के कच्छ जिले में रविवार सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए। भूकंपीय अनुसंधान संस्थान (आईएसआर) के मुताबिक, भूकंप की तीव्रता 3.2 मापी गई। गांधीनगर स्थित आईएसआर ने बताया कि भूकंप सुबह 10.06 बजे आया और इसका केंद्र भचाऊ से 18 किलोमीटर उत्तर-उत्तर पूर्व में स्थित था। जिला प्रशासन ने बताया कि किसी के हताहत होने या संपत्ति के नुकसान की कोई खबर नहीं है।  इस महीने जिले में तीन से अधिक तीव्रता वाला यह तीसरा भूकंप है। 23 दिसंबर को कच्छ में 3.7 तीव्रता का भूकंप आया था। आईएसआर के मुताबिक, सात दिसंबर को जिले में 3.2 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था।

जम्मू-कश्मीर में 5.8 तीव्रता का भूकंप आया, अभी तक कश्मीर घाटी में कहीं भी जान-माल के नुकसान नहीं

श्रीनगर जम्मू-कश्मीर में गुरुवार को रिक्टर पैमाने पर 5.8 तीव्रता का भूकंप आया, लेकिन किसी तरह के जान-माल के नुकसान की कोई खबर नहीं है। अधिकारियों ने बताया कि भूकंप शाम 4.19 बजे दर्ज किया गया। अधिकारियों ने बताया कि भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान में 36.49 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 71.27 डिग्री पूर्वी देशांतर पर 165 किलोमीटर की गहराई पर था। उन्होंने बताया कि अभी तक कश्मीर घाटी में कहीं भी जान-माल के नुकसान की कोई खबर नहीं है। 13 नवंबर को भी आया था भूकंप इससे पहले 13 नवंबर को जम्मू कश्मीर में 5.2 तीव्रता का भूकंप महसूस किया गया था। हालांकि इस दौरान जान-माल के किसी नुकसान की कोई खबर नहीं थी। अधिकारियों ने बताया था कि भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान में था और यह सुबह दस बज कर 43 मिनट के आसपास महसूस किया गया था। कश्मीर घाटी में भूकंप के झटके महसूस होने के बाद लोगों में दहशत फैल गई थी और वे घरों से बाहर निकल आए थे। दो दिन पहले भिवंडी में महसू किए गए झटकेमहाराष्ट्र के ठाणे जिले के भिवंडी तालुका में बीते मंगलवार शाम को भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए। इससे स्थानीय निवासियों में दहशत फैल गई और वे अपने घरों से बाहर निकल आए। एक सरकारी अधिकारी ने यह जानकारी दी कि मुंबई के बाहरी इलाके में स्थित तालुका के किसी भी हिस्से में किसी के हताहत होने या संपत्ति के नुकसान की कोई सूचना नहीं है। भिवंडी के तहसीलदार अभिजीत कोल्हे ने बताया कि भूकंप के झटके कुछ सेकंड तक ही रहे और ये तालुका के विभिन्न हिस्सों में महसूस किए गए।

पिछले 29 घंटों में यह दूसरी बार है, जब लोगों को झटके महसूस हुए

श्रीनगर जम्मू-कश्मीर के डोडा में रविवार को भूकंप के झटके महसूस किए गए। पिछले 29 घंटों में यह दूसरी बार है, जब लोगों को झटके महसूस हुए हैं। रविवार सुबह 11 बजकर 21 मिनट पर भूकंप के झटकों से डोडा दहल गया। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के मुताबिक रिक्टर पैमाने पर तीव्रता 3.7 मापी गई है। भूकंप का केंद्र धरती के नीचे 5 किलोमीटर की गहराई में अक्षांश 33.00 डिग्री उत्तर और देशांतर 75.94 डिग्री पूर्व में मिला है। भूकंप से किसी भी तरह के नुकसान की खबर नहीं आई है। 29 घंटों के भीतर दूसरी बार धरती डोली। इससे पहले शनिवार को डोडा में 4.3 तीव्रता का भूकंप आया था। करीब सवा 6 बजे जम्मू कश्मीर में डोडा की चिनाबा घाटी में जोरदार झटके लगे थे। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, चिनाब घाटी में 4.3 की तीव्रता वाले भूकंप के झटके लगे, जिसका केंद्र डोडा जिले का गुंडोह क्षेत्र था। 13 अक्टूबर को भी डोडा में भूकंप के झटके लोगों ने महसूस किए थे। वहीं , इसी दिन असम के गुवाहाटी जिले में भी 4.6 की तीव्रता वाला भूकंप आया था। 12 अक्टूबर को हिमाचल प्रदेश में भी दोपहर तीन बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए थे।  

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live

Ceriabet Login

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet