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स्कूल छोड़ने के बहाने अतिथि शिक्षक ने नाबालिग के साथ किया दुष्कर्म, पुलिस ने आरोपी को लिया रिमांड पर

Guest teacher rapes minor on pretext of dropping her off at school, police remands accused चंदा कुशवाह (संवाददाता) नलखेड़ा। नलखेड़ा नगर की एक शर्मनाक घटना में एक अतिथि शिक्षक द्वारा नाबालिग छात्रा के साथ दुष्कर्म किए जाने का मामला सामने आया है। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है और शिक्षा संस्थानों की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। शुक्रवार सुबह 9 बजे नलखेड़ा नगर की 15 वर्षीय छात्रा स्कूल जाने के लिए घर से निकली थी। रास्ते में उसे उसके पूर्व शिक्षक कृष्ण प्रजापति उर्फ कन्हैयालाल मिला, जो ग्राम धरोला तहसील नलखेड़ा का निवासी है। उसने छात्रा को स्कूल छोड़ने की बात कहकर अपनी मोटरसाइकिल पर बैठा लिया। लेकिन, स्कूल ले जाने की बजाय वह छात्रा को अपने गांव, घर ले गया। वहां कमरे में ले जाकर दरवाजा बंद कर दिया और छात्रा के साथ बलात्कार किया। इस घिनौनी हरकत के बाद आरोपी ने छात्रा को धमका कर स्कूल की छुट्टी के समय उसके घर से कुछ दूर छोड़ दिया और किसी को घटना की जानकारी देने पर जान से मारने की धमकी दी।छात्रा ने अपने परिजनों को सारा वाकया बताया। परिजनों ने उस दिन ही थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी अतिथि शिक्षक कृष्ण प्रजापति को गिरफ्तार किया। आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 64, 65(1), 87, 127(2), 351(3), लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा 5, 6 और एससी/एसटी अधिनियम की धारा 3(2)(v) के तहत मामला दर्ज हुआ है। पुलिस द्वारा आरोपी को शनिवार को न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ रिमांड पर भेज दिया गया।आरोपी का स्कूल एवं पदप्राप्त जानकारी के अनुसार आरोपी पहले नगर के एक निजी स्कूल में शिक्षक था। वर्तमान में वह आगर तहसील के ग्राम मथुराखेड़ी में अतिथि शिक्षक के पद पर कार्यरत है। अभिभावकों एवं समाज से सहारा समाचार की मार्मिक अपील— अपने बच्चों से हमेशा खुलकर बातें करें, उनकी गतिविधियों पर रोज ध्यान दें। बच्चों को यह विश्वास दिलाएं कि किसी भी असामान्य घटना, डर या धमकी की तुरंत जानकारी अपने परिवारवालों या विश्वसनीय व्यक्तियों को दें। ऐसी जागरूकता बच्चों की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। समाज की सुरक्षा बच्चों की सुरक्षा से ही संभव है। आइए, मिलकर ऐसे अपराधों के खिलाफ शिक्षा संस्थानों को सुरक्षित और भरोसेमंद बनाएं.यदि आपके बच्चे को कोई परेशानी या डर महसूस हो तो तुरंत कार्रवाई करें। सहारा समाचार आपसे आग्रह करता है— बच्चों को हमेशा सुरक्षित रखिए और समाज में सकारात्मक जागरूकता फैलाइए।

स्कूल शिक्षा विभाग ने नये शिक्षा सत्र में तैयार किया है एजुकेशन पोर्टल

भोपाल स्कूल शिक्षा विभाग ने नये शिक्षा सत्र एक अप्रैल, 2025 से एजुकेशन पोर्टल 3.0 तैयार किया है। इस पोर्टल में विभाग से जुड़ी मानव संसाधन की व्यापक जानकारी का समावेश किया गया है। इस पोर्टल से विभाग के कर्मचारियों का डाटाबेस तैयार किया गया है। पोर्टल में मानव संसाधन से संबंधित जानकारी को कर्मचारी और विकासखण्ड स्तर पर वेरीफाई किया गया है। इसमें विभाग के करीब 2 लाख 75 हजार कर्मचारियों की समस्त जानकारी पारदर्शी रूप से पोर्टल पर प्रदर्शित की गयी है। विभाग के पौने तीन लाख कर्मचारियों के स्‍थानांतरण को भी पारदर्शी माध्यम से स्थानांतरण नीति-2022 के आधार पर ऑनलाइन ट्रांसफर मॉड्यूल तैयार किया गया है। उच्च पद प्रभार एवं अतिथि शिक्षक प्रक्रिया को भी पोर्टल पर ऑनलाइन किया जा रहा है। विभाग के सभी कर्मचारियों को वेतन पर्ची उनके मोबाइल पर प्राप्त हो सके, ऐसी व्यवस्था विभाग द्वारा की गयी है। परिवेदना प्रणाली विभाग के कर्मचारी छोटी-छोटी समस्याओं के लिये जिला या मुख्यालय स्तर पर चक्कर न लगायें। इसके लिये उनकी शिकायतों निराकरण के लिये परिवेदना प्रणाली को ऑनलाइन किया गया है। पोर्टल में इंटीग्रेटेड डेशबोर्ड से मुख्यालय, जिला और विकासखण्ड स्तर पर समस्त गतिविधियों की मॉनीटरिंग किये जाने की व्यवस्था की गयी है। एजुकेशन पोर्टल 3.0 में एकीकृत डाटाबेस के आधार पर जानकारी तैयार की जा रही है। यह जानकारी सुरक्षित रहे, इसके लिये ब्लॉक चेन बेस्ड टेक्नोलॉजी का उपयोग किया गया है। विभाग में विभिन्न जानकारियों के लिये अलग-अलग पोर्टल का उपयोग अब तक किया जा रहा था। अब विभाग में एकीकृत पोर्टल के माध्यम से सभी योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा सकेगा। मॉनीटरिंग सहित एआई तकनीक का उपयोग एजुकेशन पोर्टल 3.0 में ऑर्टीफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग किया जा रहा है। पोर्टल पर दी गई सुविधा से स्कूल स्तर पर विद्यार्थी एआई जैसी तकनीक का उपयोग कर सकेंगे। सीएम राइज योजना के अंतर्गत संचालित विद्यालयों में सिलेबस, कैलेण्डर, टाइम-टेबल, टीचर एण्ड क्लॉस और स्कूल ट्रांसपोर्ट जैसी गतिविधियों को ऑनलाइन किया गया है। प्रदेश के सरकारी स्कूल की बसों में भी जीपीएस एवं कैमरों के माध्यम से मॉनीटरिंग की व्यवस्था एजुकेशन पोर्टल 3.0 में की गयी है। सभी सरकारी स्कूलों में उपलब्ध इन्फ्रा-स्ट्रक्चर और प्रोक्योरमेंट को भी ऑनलाइन किया गया है। अभिभावकों की सुविधा के लिये पोर्टल के माध्यम से बच्चे की डायरी को भी ऑनलाइन किया जा रहा है, जिससे अभिभावक अपने बच्चों के टेस्ट, मार्क्स एवं होमवर्क ऑनलाइन देख सकेंगे। विद्यार्थियों के लिये व्होकेशनल और कैरियर गाइडेंस को ऑनलाइन किया गया है, जिससे विद्यार्थी प्रगति की ओर अग्रसर हो सकें। पहली बार प्रदेश में सरकारी स्कूल की केश-बुक ऑनलाइन लिखने की सुविधा प्रदान की जा रही है, जिससे विभाग के बजट की पूर्णत: मॉनीटरिंग किया जा सकेगा। विभाग के सभी छोटे-बड़े निर्माण कार्यों की मॉनीटरिंग भी ऑनलाइन करने की सुविधा पोर्टल में दी गयी है।  

उत्तर प्रदेश शिक्षा विभाग ने परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों को नए साल का तोहफा, 31 दिसंबर से शुरू होंगे म्यूचुअल ट्रांसफर

  लखनऊ उत्तर प्रदेश शिक्षा विभाग ने परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों को नए साल का तोहफा दिया है! छह महीने में दूसरी बार म्यूचुअल ट्रांसफर की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है. बेसिक शिक्षा परिषद ने सर्दी की छुट्टियों में एक से दूसरे जिले में पारस्परिक स्थानान्तरण की तैयारियां शुरू कर दी हैं. यह छह महीने में दूसरी बार होगा जब शिक्षकों को अंतरजनपदीय म्यूचुअल ट्रांसफर का अवसर मिलेगा. 31 दिसंबर से शुरू होगा म्यूचुअल ट्रांसफर शिक्षक सेवा नियमावली के अनुसार, गर्मी और सर्दी की छुट्टियों में तबादले का प्रावधान है. इस बार भी जिले से जिले की बजाय स्कूल से स्कूल में स्थानान्तरण की योजना है. यह प्रक्रिया 31 दिसंबर से 14 जनवरी तक शीतकालीन अवकाश में पूरी की जाएगी. जून में हुआ था 2700 से ज्यादा शिक्षकों का ट्रांसफर इससे पहले इसी साल गर्मी की छुट्टियों में 19 जून को 2796 परिषदीय शिक्षकों (1398 जोड़े) का तबादला हुआ था. हालांकि, तबादले का शासनादेश दो जून 2023 को जारी हुआ था, लेकिन कानूनी अड़चन के कारण शिक्षकों को सालभर इंतजार करना पड़ा था. परिषद ने शासन को भेजा प्रस्ताव स्थानान्तरण प्रक्रिया पूरी होने के बाद से बड़ी संख्या में शिक्षक फिर से तबादला करने का अनुरोध कर रहे हैं. बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से इस संबंध में शासन को प्रस्ताव भेजा जा रहा है. सचिव सुरेन्द्र कुमार तिवारी का कहना है कि शासन से अनुमति मिलने पर सर्दी की छुट्टियों में अंतरजनपदीय पारस्परिक तबादले की प्रक्रिया की जाएगी.  

मध्य प्रदेश सरकार बच्चों के भविष्य से कर रही खिलवाड़ ? महज एक-एक शिक्षक से चलाए जा रहे 22 हजार विद्यालय

Is Madhya Pradesh government playing with the future of children?

Is Madhya Pradesh government playing with the future of children? 22 thousand schools are being run with just one teacher each. कमलेश ( विशेष संवादाता )भोपाल ! मध्य प्रदेश में स्कूली शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के तमाम दावे किए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत में यह दावे केवल कागजों ही शोभा बढ़ा रहे हैं. मध्य प्रदेश में 1275 स्कूल ऐसे हैं, जिनमें एक भी शिक्षक नहीं है, जबकि 22 हजार स्कूलों में महज एक-एक शिक्षक के भरोसे पढ़ाई चल रही है. मध्य प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए राज्य सरकार ने सीएम राईज स्कूल की शुरुआत की है. यह स्कूल सुविधाओं से युक्त है. इन स्कूलों में बच्चों को आने-जाने के लिए नि:शुल्क बस सुविधा भी उपलब्ध की है, लेकिन दूसरी ओर स्थिति यह है कि 46 जिलों के 1275 स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं है, जबकि करीब 22 हजार स्कूल एक-एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं और साढ़े तीन हजार स्कूल ऐसे हैं, जहां एक भी बच्चा नहीं है. 79 हजार शिक्षक पद खाली प्रदेश में माध्यमिक और प्राथमिक शिक्षकों के करीब 79 हजार पद खाली हैं. हालांकि इस साल 9 हजार पदों पर भर्ती होने के बाद भी करीब 70 हजार पद खाली रह जाएंगे. जिसका सीध असर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा है तो वहीं दूसरी ओर देखें तो शहरों में स्थित स्कूलों में शिक्षकों की भरमार है तो गांवों में टोटा पड़ा हुआ है. जिसकी वजह से गांवों में शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है. शहरों में जरूरत से ज्यादा शिक्षक हर शिक्षक अपने आपको शहर में पदस्थ करने की जुगाड़ में लगा रहता है. यही कारण है कि शहरों के स्कूलों में जरूरत से ज्यादा शिक्षक हैं. इंदौर में 1,337, ग्वालियर में 1,153, भोपाल में 1,115 और जबलपुर में 887 शिक्षक पदस्थ हैं, वहीं सतना, बालाघाट, रीवा, सागर, छिंदवाड़ा, उज्जैन, राजगढ़, भिंड, मुरैना और देवास जिलों में भी शिक्षकों की संख्या अत्याधिक है. शौचालय विहिन 20 प्रतिशत स्कूल केन्द्र सरकार के आह्वान व प्रयासों के बाद हर घर शौचालय की जरूरत तो पूरी हो गई है, लेकिन स्कूलों में इस सुविधा का अभाव है. प्रदेश में 20 प्रतिशत स्कूल शौचालयविहिन है. जहां शौचालय है वहां पानी की व्यवस्था नहीं है, ऐसे में 35.9 प्रतिशत शौचालयों का इस्तेमाल ही नहीं हो पाता. 28.4 प्रतिशत स्कूलों में छात्राओं के लिए अलग से शौचालय नहीं है. इसी राज्य प्रदेश के 5176 स्कूलों में पेयजल के इंतजाम नहीं है. 44 हजार 754 स्कूलों में खेल मैदान का अभाव है.

Teachers Day पर सामने आई नशेड़ी शिक्षक की करतूत, बच्ची की चोटी काटी, अब पुलिस कर रही तलाश

The actions of a drug addict teacher came to light on Teachers Day

The actions of a drug addict teacher came to light on Teachers Day, he chopped off the girl’s braid, now the police is searching. रतलाम ! शिक्षक दिवस के अवसर पर एक शराबी शिक्षक का नशे की हालत में छात्र की चोटी काटने का वीडियो सामने आया है. इस मामले में रतलाम कलेक्टर राजेश बाथम ने दोषी शिक्षक को निलंबित करते हुए उसके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने के निर्देश दे दिए हैं. रतलाम कलेक्टर राजेश बाथम ने बताया कि सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा था, जिसमें नशे की हालत में शिक्षक एक छात्रा के बाल काट रहा था. इस वीडियो के वायरल होने की जानकारी लगने के बाद उनके द्वारा संकुल केंद्र शासकीय हाई स्कूल नायन अंतर्गत आने वाले प्राथमिक विद्यालय सेमलखेड़ी 2 के शिक्षक वीर सिंह मेड़ा के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं. कलेक्टर ने बताया कि वीर सिंह को निलंबित कर दिया गया है. उनके द्वारा शिक्षक के पद की गरिमा के विपरीत मर्यादाहीन आचरण किया गया, जिसकी वजह से उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. निलंबन की अवधि में उनका मुख्यालय हाई स्कूल गुडभेली नियत किया गया है. इसके अलावा, नशे की हालत में छात्र की चोटी काटने वाले शिक्षक के खिलाफ अपराधिक केस दर्ज करने के भी निर्देश जारी किए गए हैं. छात्रा रोती रही, नहीं माना शिक्षकजब शिक्षक वीर सिंह मेड़ा छात्रा की चोटी काट रहा था, उस समय छात्रा काफी रो रही थी. वह भयभीत थी और मदद के लिए इधर-उधर देख रही थी. शिक्षक वीर सिंह ने किसी बात की चिंता किए बिना छात्रा के बाल काट दिए.

एक्सक्लूसिव खबर : किर्गिस्तान से डॉक्टरी करने वाले 82% स्टूडेंट भारत में फेल

Exclusive news: 82% of medical students from Kyrgyzstan fail in India डिग्री होने के बाद भी नहीं कर सकेंगे प्रैक्टिस; 2 हजार ही कर पाए क्वालिफाई विषेश संवाददाता  भोपाल। भारत से हर साल हजारों छात्र, रूस, यूक्रेन, किर्गिस्तान, फिलीपींस, चीन जैसे देशों में मेडिकल की पढ़ाई करने जाते हैं। यहां पांच साल पढ़ाई करने के बाद MBBS की डिग्री तो हासिल कर लेते हैं, लेकिन भारत लौटने पर इनमें से केवल 18 से 20 फीसदी ही प्रैक्टिस कर पाते हैं। दरअसल, दूसरे देशों से MBBS की डिग्री लेने वाले छात्रों के लिए फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (FMGE) स्क्रीन टेस्ट पास करना जरूरी है, लेकिन फॉरेन से डिग्री हासिल करने वाले 80 फीसदी से ज्यादा छात्र इस एग्जाम को क्लियर ही नहीं कर पाते। पहले जानिए मेडिकल की पढ़ाई के लिए विदेश क्यों जाते हैं छात्र  भारत में सीटों की कम संख्या, खर्च ज्यादा भारत में हर साल करीब 25 लाख छात्र NEET एग्जाम में शामिल होते हैं। यानी डॉक्टर बनने की इच्छा रखने वाले बच्चों की संख्या देश में मौजूद सीटों की संख्या से करीब 24 गुना है। नर्सिंग और पैरामेडिकल कोर्स लें या फिर रूस, चीन, किर्गिस्तान, तजाकिस्तान जैसे देशों में जाकर अपना सपना पूरा करें। ये देश ऐसे हजारों बच्चों का सपना पूरा कर देते हैं।  स्टूडेंटों का कहना है कि भारत में मेडिकल की पढ़ाई काफी महंगी है। यहां कोर्स पूरा करने में 60 लाख से 2 करोड़ रुपयों तक का खर्च आता है, लेकिन यूक्रेन, किर्गिस्तान, तजाकिस्तान जैसे देशों में छह साल की पढ़ाई, रहने-खाने का पूरा खर्च 22 से 25 लाख रुपयों तक ही है। यह रकम भी कई किस्तों में अदा करने की सुविधा है। अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया-कनाडा के संस्थानों में भी बहुत से विद्यार्थी जाते हैं, लेकिन वहां पढ़ाई और रहना दोनों महंगा है। ऐसे विद्यार्थियों की संख्या बेहद कम है। सबसे अधिक भीड़ चीन, रूस, यूक्रेन, बेलारूस, पोलैंड, किर्गिस्तान, सर्बिया, तजाकिस्तान, अर्मेनिया, अजरबैजान जैसे देशों में जाती है। यहां पढ़ाई और रहने का खर्च अपेक्षाकृत कम है।  स्टूडेंटों का कहते हैं । कि किर्गिस्तान जैसे देशों में एमबीबीएस में प्रवेश भारत की तरह कठिन नहीं है। वहां NEET जैसी परीक्षा नहीं होती, लेकिन 2021 के बाद बदले नियम से वहां की संस्थाओं में प्रवेश के लिए उन्हीं को अनुमति मिलती है जिन्होंने NEET परीक्षा को न्यूनतम अंकों से पास किया हो। इस पासिंग मार्क के साथ विद्यार्थी संबंधित विश्वविद्यालय में आवेदन करता है। वहां एक सामान्य सी परीक्षा होती है, जिसे अधिकतर विद्यार्थी आसानी से पास कर लेते हैं। 10 दिन के भीतर प्रवेश की प्रक्रिया पूरी कर मेल पर प्रवेश पत्र आ जाता है। नेशनल मेडिकल काउंसिल पहले विदेशी विश्वविद्यालयों की सूची जारी कर उनकी मान्यता तय करती थी। अब ऐसा नहीं है। अब वहां पढ़ाई का माध्यम अंग्रेजी होना ही अनिवार्य है। किर्गिस्तान में एमबीबीएस की पढ़ाई छह साल की है। इसमें पांच साल सैद्धांतिक पढ़ाई होती है और आखिरी का एक साल किसी अस्पताल में इंटर्न के तौर पर काम करते हुए बिताना पड़ता है। विदेशों से डिग्री लेकर आए 80 फीसदी छात्र प्रैक्टिस नहीं कर पाते एफएमजीई एग्जाम में विदेशों से डॉक्टरी करके आए छात्रों से तकनीकी सवाल पूछे जाते हैं। करीब 80% मेडिकल ग्रेजुएट यह परीक्षा पास ही नहीं कर पाते। उदाहरण के लिए 2023 में देश भर में 61 हजार 216 लोग एफएमजीई स्क्रीनिंग परीक्षा में शामिल हुए थे। उनमें से केवल 10 हजार 261 यानी 16.65% लोग ही पास हो पाए। किर्गिस्तान में एमपी के 1200 बच्चे फंसे हैं। मप्र सरकार ने उन्हें वहां से सुरक्षित बाहर निकालने का भरोसा दिया है। लेकिन, यहां रह रहे छात्र इस बात से नाराज है कि सरकार ने उन्हें वापस लाने के लिए कोई इंतजाम नहीं किए।

5वीं और 8वीं के नतीजे जारी, दोनों परिणामों में लड़कियों ने मारी बाजी

Results of class 5th and 8th released, girls won in both the results Result 2024: मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने कक्षा 5वीं और 8वीं के परीक्षा परिणाम जारी कर दिए हैं। कक्षा आठ का परीक्षा परिणाम 87.71% और कक्षा पांच का परीक्षा परिणाम 90.97% रहा है।प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (एमपीबीएसई) ने कक्षा 5वीं और 8वीं के परीक्षा परिणाम जारी कर दिए हैं। कक्षा आठवीं का परीक्षा परिणाम 87.71% रहा है, वहीं कक्षा पांच का परीक्षा परिणाम 90.97% रहा। कक्षा पांच में 89.62% बालक और 92.41% बालिकाएं उत्तीर्ण हुई हैं। वहीं, कक्षा आठ में बालकों का पास प्रतिशत 85.94% और बालिकाओं का 89.56% रहा। www. rskmp.in मदरसों का परिणाम सरकारी और प्राइवेट स्कूल से पीछेकक्षा पांच की बात करें तो सरकारी स्कूलों का पास प्रतिशत 91.53% रहा, जबकि प्राइवेट स्कूलों में 90.18% बच्चे ही पास हुए। मदरसे में 73.26% बच्चे ही पास हो सके। कक्षा आठ की बात करें तो सरकारी स्कूलों का पास प्रतिशत 86.22% रहा, जबकि प्राइवेट स्कूलों में 90.60% बच्चे पास हुए। मदरसों का पास प्रतिशत 67.40% ही रहा। ग्रामीण स्कूलों का रिजल्ट बेहतरग्रामीण और शहरी स्कूलों की तुलना करें तो पांचवीं और आठवीं में ग्रामीण स्कूलों का प्रदर्शन शहरी स्कूलों से बेहतर रहा है। कक्षा पांचवीं में ग्रामीण स्कूलों में पास प्रतिशत 92.60% रहा, जबकि शहरी स्कूलों में 86.19% बच्चे ही पास हुए है। इसी तरह आठवीं कक्षा में ग्रामीण स्कूलों के 88.35 प्रतिशत बच्चे पास हो गए। वहीं, कक्षा आठवीं में शहरी स्कूलों में 86.04 प्रतिशत बच्चे ही पास हुए।

खातेगांव cm राइस विद्यालय के लिए आवंटित 5 हेक्टेयर भूमि में से सिर्फ तीन हेक्टेयर भूमि पर कब्जा दिला पाए खातेगांव तहसीलदार

Khategaon Tehsildar was able to get possession of only three hectares of land out of 5 hectares allotted for Khategaon CM Rice School. ब्लॉक शिक्षा अधिकारी एवं cm राइस विद्यालय प्रभारी पर इतना दबाव की केमरे पर अपना हक भी ना मांग पाएमामला देवास जिले के खातेगांव का है जहां बहु प्रचलित मामला cm राइस विद्यालय भवन निर्माण का है,जिला कलेक्टर द्वारा 5 हेक्टेयर भूमि cm राइस भवन के लिए खातेगांव शिक्षा विभाग को आवंटित की गई थी,जिस दिनांक को cm राइस भवन का भूमि पूजन हुआ उस दिनांक को किसी अन्य के कब्जे में थी संबंधित भूमि,खबरें प्रकाशित होने के पश्चात खातेगांव तहसीलदार अपने दलबल के साथ संबंधित भूमि पर पहुंचे और सीमांकन कर कब्जा दिलाने के कार्यवाही प्रारंभ की उस दौरान पीआईयू के इंजीनियर एवं शिक्षा विभाग से ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर एवं cm राइस विद्यालय प्रभारी भी वहा मौजूद थे,किंतु तहसीलदार तीन साढे तीन हेक्टेयर भूमि ही शिक्षा विभाग को हैंडोवर कर पाए, इस दौरान अनेको बार विद्यालय परिवार की ओर से 5 हेक्टर भूमि कब्जा दिलाने के लिए निवेदन किया गया लेकिन तहसीलदार ने एक ना सुनी,जब मीडिया कर्मी संबंधित खबर को प्रकाशित करने के लिए ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर एवं cm राइस विद्यालय प्रभारी से संपर्क किया तो आफ द कैमरा उन्होंने अपनी पीड़ा सुनाई और बताया कि हमें सिर्फ तीन हेक्टेयर भूमि पर कब्जा दिलाया गया है भविष्य में अगर वहां कोई निर्माण होना है तो उसके लिए कोई जगह उपलब्ध नहीं रहेगी,मीडिया द्वारा अनेकों बार शिक्षा विभाग के कर्मचारियों को कहा गया कि आपकी पीड़ा केमरे पर सुनाइए किंतु लोकल प्रशासन का शिक्षा विभाग पर इतना दबाव है कि वह अपनी पीड़ा खुलकर बता भी नहीं पाए,आखिरकार प्रशासन का यह रवैया क्या सिद्ध करना चाहता है, पूरे मामले पर भाजपा मंडल अध्यक्ष कचरू पटेल का कहना है मेरे द्वारा भी अनेकों बार खातेगांव तहसीलदार को कहा गया कि आवंटित पांच हेक्टेयर भूमि को शिक्षा विभाग के सुपुर्द किया जाए लेकिन तहसीलदार सुनने को तैयार नहीं है,जब इस पूरे मामले पर खातेगांव विधायक आशीष शर्मा से बात की गई तो विधायक आशीष शर्मा के अनुसार मेरे द्वारा तहसीलदार को निर्देशित किया गया है कि संबंधित पांच हेक्टेयर भूमि शिक्षा विभाग को आवंटित की जाए,इस पूरे मामले पर सामाजिक कार्यकर्ता रवि वर्मा ने जिला कलेक्टर से पत्राचार के माध्यम से शिकायत की थी जिसमें लिखा था की शिक्षा विभाग की जमीन पर व्यावसायिक दुकान का निर्माण किया जा रहा है जवाब में जिला कलेक्टर द्वारा पत्र भेजा गया जिसमें उल्लेख किया गया क्योंकि cm राइस भवन के लिए लगभग 5 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता होती है इसलिए उक्त भूमि पर cm राइस भवन ना बनाते हुए अन्य स्थान पर cm राइस भवन का निर्माण किया जाएगा, तो अब कैसे मात्र 3 हेक्टेयर भूमि में cm राइस भवन निर्माण हो जाएगा क्या दोनों स्थान पर कानून की परिभाषा अलग-अलग हो गई है,अंततः एक बात साफ नजर आती है कि शिक्षा विभाग के छोटे कर्मचारियों पर प्रशासन का दबाव इतना है कि वह अपनी बात भी खुलकर नहीं रख पा रहे हैं,और खातेगांव प्रशासन की दमनकारी नीति के चलते छात्र-छात्राओं के उज्जवल भविष्य के लिए निर्माणाधीन cm राइस भवन महज 3 हेक्टेयर भूमि में निर्माण होकर ही रह जाएगा,संदर्भ में मीडिया द्वारा तहसीलदार एवं एसडीएम से अनेकों बार बात करने का प्रयास किया गया किंतु बात नहीं हो पाई

5 साल की बच्ची पर टीचर ने बरसाए थप्पड़, अस्पताल में भर्ती

Teacher slaps 5 year old girl, admitted to hospital शिवपुरी जिले में एक टीचर ने 5 साल की बच्ची की पिटाई कर दी. होमवर्क पूरा न करने पर टीचर ने बच्ची पर थप्पड़ों की बौछार कर दी. टीचर की पिटाई से बच्ची की हालत गंभीर हो गई. बच्ची को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज चल रहा है. शिवपुर ! एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. कोलारस थाना क्षेत्र अंतगर्त आने वाले बांगरोद गांव की रहने वाली एक पांच साल की मासूम बच्ची की होमवर्क न करने पर टीचर ने पिटाई कर दी. टीचर ने बेरहमी से बच्ची के एक गाल पर थप्पड़ बरसाए, जिससे बच्ची के गाल पर टीचर द्वारा मारे गए थप्पड़ के निशान पड़ गए. वहीं आंख में भी चोट आ गई. फिलहाल मासूम बच्ची को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है. जानकारी के मुताबिक, बांगरोद गांव निवासी कृपान सिंह रावत ने बताया कि उनकी पांच साल की बेटी तमन्ना कक्षा एक की छात्रा है. वह गांव के ही सरकारी स्कूल में पढ़ती है. गांव में एक कोलारस कस्बे का रहने वाला शिक्षक सुनील कुशवाह बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने आता था. सुनील गांव की आंगनबाड़ी पर बच्चों की ट्यूशन पढ़ाता था. उसने अपनी बेटी को भी ट्यूशन भेजना शुरू कर दिया था. आज बेटी ट्यूशन का होमवर्क करके नहीं ले गई थी. बच्ची के गाल पर उंगलियों के निशानइससे भड़के शिक्षक सुनील कुशवाहा ने अन्य छात्राओं से उसके हाथ पकड़वाए और बेटी के गाल पर थप्पड़ों की बौछार कर दी. शिक्षक की मारपीट से बेटी के गाल पर उंगलियों के निशान बन गए. घंटों बाद उंगलियों के निशान नहीं हटे. उसकी एक आंख में भी चोट आ गई. साथ ही कान में भी लगातार दर्द हो रहा था. थाने में नहीं की शिकायतकृपान सिंह रावत ने बताया कि आनन-फानन में वह अपनी बेटी को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचा, जहां उसे भर्ती कर इलाज किया जा रहा है. वहीं बच्ची के पिता कृपान सिंह ने आरोपी शिक्षक सुनील कुशवाहा के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की बात कही है. जब कोलारस पुलिस से बच्ची से मारपीट को लेकर जानकारी ली गई तो पुलिस ने कहा कि अभी तक मामले की शिकायत थाने में नहीं आई है. शिकायत आने पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी.

प्राइवेट स्कूल संचालक नहीं बेच सकते बस्ता और बैग, नियम तोड़ा तो…

Private school operators cannot sell backpacks and bags, if rules are broken… मध्य प्रदेश में निजी स्कूल संचालकों के खिलाफ भोपाल के कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने एक निर्देश जारी किया है. कलेक्टर के इस निर्देश को अभिभावक खूब सराह रहे हैं और काफी खुश हैं भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह के निर्देशों से भोपाल के अभिभावकों में खुशी का माहौल है. भोपाल के कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने निजी संचालकों के लिए आदेश जारी किए हैं कि कोई भी स्कूल संचालक बस्ता और ड्रेस नहीं बेच सकेगा. नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूल संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी. भोपाल कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह ने जिले में संचालित होने वाले सभी निजी स्कूलों के संचालकों के लिए एक आदेश जारी किया है. इस आदेश में स्पष्ट किया है कि विद्यालय की स्टेशनरी, यूनिफार्म पर स्कूल का नाम प्रिंट कराकर दुकानों से क्रय कराने या एक विशिष्ट दुकान से यूनिफार्म और पाठ्य पुस्तकें बेचना पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा. निर्देश का पालन नहीं करने पर होगी कार्रवाई आदेश का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति, विद्यालय के प्राचार्य और प्रबंध के विरुद्ध भारतीय दंड विधान की धारा 188 के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी. इसके साथ ही संबंधित एसडीएम और जिला शिक्षा अधिकारी को इस आदेश का पालन सुनिश्चित कराने के लिए कहा गया है. कलेक्टर ने निजी विद्यालयों को स्पष्ट किया है कि आगामी शिक्षण सत्र प्रारंभ होने से पहले ही लेखक और प्रकाशक के नाम और मूल्य के साथ कक्षावार पुस्तकों की सूची विद्यालय के सूचना पटल पर प्रदर्शित करें. कलेक्टर ने कहा कि विद्यार्थियों को ऐसी सूची मांगने पर उपलब्ध कराई जाना चाहिए, ताकि विद्यार्थी और उनके अभिभावकगण इन पुस्तकों को अपनी सुविधानुसार खुले बाजार से खरीद सकें. अभिभावकों में खुशी की लहर भोपाल के कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि स्कूल संचालकों को सूचना पटल पर यह भी अंकित करना होगा कि किसी दुकान विशेष से सामग्री क्रय करने की बाध्यता नहीं है. कहीं से भी पुस्तकें, यूनिफार्म और अन्य आवश्यक सामग्री क्रय की जा सकती है. पुस्तकों के अतिरिक्त स्कूल प्रबंधकों की ओर से यूनिफार्म, टाई, जूते, कापियां आदि भी स्कूल से उपलब्ध या बेचने की कोशिश नहीं की जाएगी. भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह की तरफ से जारी किए गए इस तरह के आदेश से भोपाल के अभिभावकों ने खुशी जाहिर कर जिला प्रशासन की सराहना की है. उनका कहना है कि इस आदेश के बाद निजी स्कूल संचालकों की मनमानी पर विराम लग सकेगा, साथ ही कमीशन खोरी नहीं होने की वजह से स्कूलों का कोर्स भी अधिक कीमत का नहीं रहेगा. यह अच्छा फैसला है. इसे पूरे प्रदेश में सख्ती के साथ लागू किया जाना चाहिए.

रानी अवंती बाई लोधी राजकीय विश्वविद्यालय का सीएम ने किया शुभारंभ एवं सागर के लोगों को दी बड़ी सौगात

CM inaugurated Rani Avanti Bai Lodhi Government University and gave a big gift to the people of Sagar. मोहन यादव ने रानी अवंती बाई लोधी राजकीय विश्वविद्यालय का शुभारंभ करते हुए कहा कि ‘हमने सौ दिन से भी कम समय में विश्वविद्यालय दिया। इसी सत्र से विश्वविद्यालय कामकाज करना शुरू करेगा। यहां के बच्चे जो कोर्स चाहेंगे, वो सारे के सारे खोले जाएंगे। सागर । मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बुधवार को पीटीसी मैदान में आयोजित रानी अवंती बाई लोधी राजकीय विश्वविद्यालय का शुभारंभ किया। सीएम ने कहा कि डा. हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय बनने के बाद यहां के विद्यार्थियों को विवि में प्रवेश के लिए परेशान होना पड़ रहा था। इसलिए मैंने अपने सौ दिन के कार्यकाल के अंदर ही सागर में रानी अवंती बाई लोधी राजकीय विवि की न सिर्फ घोषणा की बल्कि उसका शुभारंभ भी किया है, जिसमें इसी सत्र से यहां के विद्यार्थियो की मांग के अनुसार सभी विषय पढ़ाए जाएंगे। इसके बाद जल्द ही सागर में राज्य स्तरीय हवाई यातायात की शुरूआत की जाएगी। विधायक से कहा- उंगली पकड़ी अब कोंचा मत पकड़ो ….मुख्यमंत्री मंच से घोषणाएं कर रहे थे तभी बार-बार विधायक शैलेंद्र जैन उनके पास अपनी मांगों की लिस्ट लेकर पहुंच रहे थे। उन्हें प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में शामिल होना था तो वह जल्दी-जल्दी घोषणा कर रहे थे, लेकिन विधायक के बार-बार आने पर सीएम उनसे बोले, लालच मत करो, बहुत हो गया। अब मुझे कुछ नहीं दिख रहा, कुछ नहीं सुन रहा। एक अंगुली पकड़ी, दो पकड़ी, तीन पकड़ी, पूरी ही पकड़ रहे हो। जरा ठहरो तो सही आखिरी बार थोड़ी आया, बार-बार आता रहूंगा। यह बात सुनकर विधायक पीछे हट गए। हैलीपेड से मुख्यमंत्री कार द्वारा संत शिरोमणि रविदास मंदिर एवं संग्रहालय का अवलोकन करने बड़तूमा पहुंचे और यहां संत रविदास महाराज को नमन किया। मुख्यमंत्री ने मंच से की यह घोषणाएं …

निजी स्कूलों की मनमानी जारी, नहीं की पोर्टल पर जानकारी अपलोड

Arbitrariness of private schools continues, information is not uploaded on the portal भोपाल। फीस का ब्यौरा पोर्टल पर अपलोड करने को लेकर प्रदेश में निजी स्कूलों की मनमानी जारी है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आदेश जारी होने के एक माह बाद भी स्कूलों ने जानकारी पोर्टल पर अपलोड नहीं की है। हालात यह है कि राजधानी भोपाल में ही भोपाल में 321 स्कूलों में से करीब 13 स्कूलों ने ही जानकारी अपलोड की है।  दरअसल, स्कूल शिक्षा विभाग ने आठ फरवरी को आदेश जारी कर प्रदेश में फीस विनियमन अधिनियम 2020 कानून का पालन करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत प्रदेश के निजी स्कूलों से फीस, पाठ्यक्रम और किताबों की जानकारी मांगी गई थी, लेकिन स्कूलों ने जानकारी अपलोड नहीं की है।  उल्लेेखनीय है कि राज्य शासन ने मध्यप्रदेश निजी विद्यालय (फीस तथा संबंधित विषयों का विनियमन) 2017 एवं नियम-2020 लागू कर चुका है। जिसके तहत निजी स्कूलों को विगत तीन वर्षों (2020-21, 2021-22, 2022-23) के बजट की जानकारी वेबसाइट पर अपलोड करनी होगी। बैलेंस शीट, प्राप्ति एवं भुगतान पत्रक, आय-व्यय शेड्यूल सहित अंकेक्षण प्रतिवेदन शामिल होंगे। इसके बाद संबंधित विषयों के पालन में निजी स्कूलों द्वारा 100 रूपये के गैर न्यायिक स्टांप पेपरों पर आवश्यक वचन पत्र भी अपलोड करना होगा।

बीयू में 4000 रुपए स्पेशल लेट फीस देकर पहले पेपर दो बाद में भरो परीक्षा फार्म

Pay special late fee of Rs 4000 in BU, give paper first and fill exam form later. भोपाल। बरकलउल्ला विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने विवि के विद्यार्थियों के भविष्य को देखते हुए बड़ा निर्णय लिया है। इस फैसले का लाभ अब परीक्षार्थियों को मिलेगा। कार्यपरिषद की हुई बैठक में पिछले दिनों यह निर्णय लिया गया है कि विवि के किसी भी पात्र छात्र के भविष्य को देखते हुए विवि उसे परीक्षा से वंचित नहीं करेगा। यदि कोई छात्र जो उस परीक्षा में बैठने की पात्रता रखता है और वह परीक्षा शुरू होने के दिन भी सीधे किसी भी परीक्षा केंद्र पर उपस्थित होता है, तो उससे 4000 रुपए विशेष विलंब शुल्क परीक्षा केंद्र पर जमा कराते हुए उसे परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाएगी। इसके साथ ही छात्र पहले पेपर में शामिल होने के बाद संबंधित कॉलेज में पहुंच कर परीक्षा आवेदन पत्र भरने की प्रक्रिया पूरी कर सकेगा। बीयू के रजिस्ट्रार ने अब इस आशय का आदेश भी जारी कर दिया है।

मान्यता नियमों का पालन नहीं करने वाले स्कूलों पर होगी कार्यवाही

Action will be taken against schools that do not follow recognition rules भोपाल। मान्यता नियमों का पालन नहीं करने वाले स्कूलों को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग सख्त रवैया अपनाया है। अब मान्यता नवीनीकरण और मापदंड पूरे नहीं करने वाले स्कूलों पर कार्यवाही की तैयारी है। इसको लेकर लोक शिक्षण संचालनालय ने प्रदेशभर के संभागीय संयुक्त संचालक और जिला शिक्षा अधिकारियों को आदेश जारी कर कहा गया है कि ऐसे शैक्षणिक संस्थाओं के विरूद्ध कार्यवाही की जाए, जिन्होंने वर्ष 2024-25 में मान्यता नवीनीकरण के लिए आवेदन नहीं किया है। आयुक्त ने संभागीय और जिला अधिकारियों से अपने संबंधित क्षेत्र में इस संबंध में प्रमाणीकरण रिपोर्ट भी मांगी है। रिपोर्ट में यह बताने के लिये कहा गया है कि उनके क्षेत्र में वर्ष 2024-25 में कोई भी ऐसी संस्था नहीं जिसने मान्यता नवीनीकरण के लिये आवेदन नहीं दिया है। ऐसी शैक्षणिक संस्थाओं की सूची भेजी जाने के निर्देश दिये गए हैं। ऐसी अशासकीय संस्थाओं के खिलाफ दण्डात्मक कार्यवाही करते हुए तत्काल बंद करने के लिए कहा है। जिला शिक्षा अधिकारियों से अशासकीय शैक्षणिक संस्थाओं का सतत् निरीक्षण करने के लिए भी कहा गया है।

किसी भी स्थिति में बच्चों को परीक्षा न किया जाए वंचित, अन्यथा होगी कार्यवाही

Children should not be deprived of exams under any circumstances, otherwise action will be taken निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ पहुंची शिकायत, कलेक्टर का अल्टीमेंटम भोपाल। आरटीई के तहत पढ़ने वाले बच्चों की फीस और पढ़ाई को लेकर निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ लगातार शिकायतें मिलने के बाद कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने निजी स्कूलों को अल्टीमेटम दिया है। कलेक्टर ने सभी स्कूलों को आदेश दिए कि किसी भी स्थिति में स्कूल में प्रवेशित छात्र-छात्राओं को स्कूल से तथा आयोजित होने वाली परीक्षाओं से वंचित न किया जाए। अन्यथा की स्थिति में अनुशासनात्मक कार्यवाही के लिए बाध्य होना पड़ेगा, जिसके लिए स्कूल खुद जिम्मेदार होंगें। मामले में अभिभावकों को लेकर राहत देते हुए कहा गया है कि निजी स्कूलों की इस तरह की किसी भी शिकायत के लिए कलेक्टर व जिला शिक्षा अधिकारी से संपर्क किया जा सकता है। यह है पूरा मामला दरअसल, शास, अशास, अल्पसंख्यक, सीबीएससी स्कूलों में पढ़ने वाले कई विद्यार्थियों के अभिभावकों द्वारा जनसुनवाई के दौरान और विभिन्न आवेदनों के माध्यम से इसको लेकर कलेक्टर सहित अन्य कार्यालयों में शिकायतें की गई हैं। इस शिकायत में बताया गया है कि संबंधित शाला द्वारा उनके बच्चों की आर.टी.ई. प्रावधान अंतर्गत फीस प्रतिपूर्ति न होने, पूर्व संस्था द्वारा टी.सी. प्रदाय न करने, समग्र पोर्टल में नाम अंकित न होने अथवा त्रुटिपूर्ण होने, शाला में फीस जमा न कर पाने के कारण बच्चों को शाला में अध्ययन न कराते हुए परीक्षा से वंचित किया जा रहा है एवं अलग से फीस की मांग की जा रही है, जबकि आर.टी.ई. के अंतर्गत आने वाले छात्रों को पूर्णतः निःशुल्क शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार है।

मध्य प्रदेश में RTE के तहत फ्री स्कूल एडमिशन के लिए आवेदन चालू

Application open for free school admission under RTE in Madhya Pradesh मध्य प्रदेश राज्य शिक्षा केन्द्र, भोपाल द्वारा शैक्षणिक सत्र 2024-25 के लिये शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत गैर-अनुदान मान्यता प्राप्त अशासकीय स्कूलों में कमजोर वर्ग एवं वंचित समूह के बच्चों के ऑनलाइन नि:शुल्क प्रवेश के लिये समय-सारणी जारी की गई है। शिक्षा का अधिकार ऑनलाइन आवेदन के लिए अधिकृत वेबसाइट संचालक राज्य शिक्षा केन्द्र श्री धनराजू एस ने बताया कि 23 फरवरी से 3 मार्च, 2024 तक www.educationportal.mp.gov.in/rte पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन लिये जायेंगे। पोर्टल पर त्रुटि सुधार के लिये विकल्प उपलब्ध रहेगा। ऑनलाइन आवेदन के बाद आवेदक 24 फरवरी से 5 मार्च तक पावती डाउनलोड और मूल दस्तावेजों का केन्द्रों में सत्यापन करा सकेंगे। MP RTE स्कूल एडमिशन के लिए ऑनलाइन लॉटरी की तारीख आरटीई के तहत 7 मार्च, 2024 को पारदर्शी रेण्डम पद्धति से ऑनलाइन लॉटरी आयोजित करते हुए आवेदकों को स्कूल आवंटित किया जायेगा। आवेदकों को एसएमएस से भी सूचित किया जायेगा। लॉटरी में चयनित आवेदक 11 मार्च से 19 मार्च, 2024 तक आवंटन-पत्र डाउनलोड कर आवंटित स्कूल में प्रवेश पा सकेंगे। प्रवेश लेते समय ही संबंधित प्रायवेट स्कूल द्वारा मोबाइल एप के माध्यम से एडमिशन रिपोर्ट भी दर्ज की जायेगी।MP RTE का सेकंड राउंड कब शुरू होगा प्रथम चरण की प्रक्रिया समाप्त होते ही द्वितीय चरण में प्रवेश के लिये प्रक्रिया शुरू की जायेगी। पोर्टल पर 21 मार्च, 2024 को रिक्त सीटों को प्रदर्शित किया जायेगा। द्वितीय चरण में 22 से 26 मार्च तक स्कूलों की च्वाइस अपडेट की जा सकेगी। द्वितीय चरण की ऑनलाइन लॉटरी 28 मार्च को होगी और स्कूलों का आवंटन किया जायेगा। द्वितीय चरण में लॉटरी से चयनित आवेदक 30 मार्च से 5 अप्रैल, 2024 के बीच आवंटन-पत्र डाउनलोड कर आवंटित स्कूल में प्रवेश प्राप्त कर सकेंगे। राज्य शिक्षा केन्द्र ने सभी जिला कलेक्टर्स को नियमानुसार पूर्ण पारदर्शी तरीके से नियत समय में यह कार्य सम्पादित किये जाने के निर्देश जारी किये हैं।

वर्षों से विभिन्न विभागों में अटैच प्रोफेसरों को वापस बुलाने की तैयारी

Preparation to recall professors attached to various departments for years भोपाल। वर्षों से विभिन्न विभागों में अटैच प्रोफेसरों को वापस बुलाने के लिए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पदाधिकारियों ने उच्च शिक्षा मंत्री इंदरसिंह परमार को ज्ञापन सौंपा है। जिसके बाद इन प्रोफेसरों को मूल पदस्थापना पर भेजने के तैयारी चल रही है। हालांकि कुछ इसे रोकने के लिए मंत्रियों और विभाग के आला अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। दरअसल, प्रदेश के कॉलेजों में वर्षों से प्रोफेसरों और कर्मचारियों के पद खाली पड़े हैं। प्रोफेसरों की पदस्थापना कॉलेजों में होने के कारण उन पदों पर अतिथि विद्वान भी नहीं रखे जा रहे हैं।  ऐसे में प्रदेश के अधिकांश सरकारी कॉलेजों में नए असिस्टेंट प्रोफेसरों और अतिथि विद्वानों के भरोसे पढ़ाई चल रही है। जबकि विषय विशेषज्ञ प्रोफेसर उच्च शिक्षा विभाग के कार्यालयों में बाबूगिरी कर रहे हैं। सूत्रों की माने तो करीब सौ से अधिक प्रोफेसर विभाग, मंत्रियों और विधायकों के पास अटैच हैं। अकेले राजधानी में डेढ़ दर्जन प्रोफेसर मुख्यालय और अन्य विभागों में अटैच होकर काम कर रहे हैं। जबकि इनका वेतन उनकी मूल पदस्थापना वाले कॉलेजों से निकल रहा है।

अब विदेशी प्रोफेसर लेंगे आईआईआईटी में ऑनलाइन क्लास, विद्यार्थियों को मिलेगा कई विषयों में विशेष मागर्दशन

Now foreign professors will take online class in triple IIIT, students will get special guidance in many subjects भोपाल। राजधानी स्थित भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईआईटी) ने अपने विद्यार्थियों के विश्वस्तरीय शिक्षण के लिए चीन, ऑस्ट्रेलिया एवं जापान सहित अन्य देशों के प्रसिद्ध शिक्षकों के साथ अनुबंध किया है। यह विदेशी प्रोफेसर ऑनलाइन माध्यम से विश्वस्तरीय अनुसंधान एवं तकनीकों से विद्यार्थियों को अवगत कराएंगे। प्रोफेसरों में शियाओचिंग वेन, एथानासियोस वासिलकोस, सी टेंग सो, डॉण् वॉल्कर लिंडेंसट्रुथ, चंग नेन ली और गुरदीप सिंह जैसे अनुभवी एवं विश्व स्तरीय प्रोफेसर शामिल हैं। यह सभी यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड ईस्टर्न शोर्स, सुन्येत्सन यूनिवर्सिटी, कर्टीन यूनिवर्सिटी और यूआईए नॉर्वे जैसी विश्व प्रसिद्ध संस्थाओं में कार्यरत हैं।  प्रोफेसर अथानासियोस वी. वासिलकोस स्वीडन में लूलिया यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी में पूर्णकालिक प्रोफेसर हैं। वे कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रिकल और स्पेस इंजीनियरिंग में प्रोफेसर हैं। उनकी विशेषज्ञता साइबर-भौतिक प्रणालियों में सुरक्षा है। उन्होंने सुरक्षा और गोपनीयता, क्रिप्टोग्राफी, साइबर सुरक्षा के अर्थशास्त्र, क्रिप्टोकरेंसी प्रोटोकॉल, नेटवर्क, कॉम्प्लेक्स नेटवर्क, क्लाउड कंप्यूटिंग, बिग डेटा, मशीन लर्निंग, बायोकंप्यूटिंग में गहन शोध किया है। उन्होंने 1500 से अधिक शोध प्रकाशित किए हैं। ट्रिपल आईटी भोपाल ने प्रोण् वासिलकोस के साथ सहयोग किया है। वे ऑनलाइन व्याख्यान के माध्यम से कॉलेज के छात्रों के साथ अपने अनुभव साझा करेंगे। यह है इन प्रोफेसर्स की विशेषज्ञताडॉ. सी तेंग सोह वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया के पर्थ में कर्टिन विवि में एसोसिएट प्रोफेसर हैं।  विज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग के तहत इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, कंप्यूटर और गणित विज्ञान स्कूल में कार्यरत हैं। उन्होंने लुइसियाना स्टेट यूनिवर्सिटी, बैटन रूज से पोस्ट-डॉक्टरेट की पढ़ाई पूरी की है। वे कंप्यूटर नेटवर्क, नेटवर्क, विश्वसनीयता, वायरलेस मेष नेटवर्क ट्रैफिक इंजीनियरिंग, पीयर-टू-पीयर नेटवर्क, एल्गोरिदम डिजाइन शामिल हैं। जर्मनी के फ्रेंकफर्ट में निदेशक हैं प्रो. वोल्कर:प्रो. वोल्कर लिंडेनस्ट्रुथ वर्तमान में जर्मनी के फ्रेंकफर्ट में फ्रेंकफर्ट इंस्टीट्यूट फॉर एडवांस्ड स्टडीज में निदेशक मंडल के अध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने कई वैज्ञानिक पदों पर काम किया है और 1997 में आईकोर प्रौद्योगिकियों की स्थापना की है। उनके शोध का क्षेत्र कंप्यूटर विज्ञान और एआई सिस्टम है, जिसमें ऊर्जा, बिग डेटा, उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग और परमाणु भौतिकी पर प्रमुख ध्यान दिया गया है। प्रो. हुरा यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड ईस्टर्न से जुड़ेप्रोण् गुरदीप एस. हुरा वर्तमान में यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड ईस्टर्न शोर से जुड़े हुए हैं। उन्होंने 1972 में जबलपुर विवि (भारत) से बीई, 1975 में रूड़की विवि से एमई और 1984 में रूड़की विवि से पीएच.डी. प्राप्त की। मील का पत्थर साबित होगाट्रिपल आईटी के निदेशक प्रो.आशुतोष कुमार सिंह ने कहा कि ट्रिपल आईटी के विद्यार्थियों को विश्वस्तरीय विदेशी प्रोफेसर्स का शिक्षण ट्रिपल आईटी भोपाल के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा।

युवा क्रांति की मांग- डॉ धारणा के विरुद्ध कार्यवाही हो 

2 साल में भी कमेटी की जांच नहीं हुई पूरी; शासकीय भूमि पर किया था। कब्जा  Demand for youth revolution – action should be taken against Dr. Dharana. The investigation of the committee was not completed even in 2 years; done on government land. Retraction  जबलपुर। जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ प्रदीप कुमार बिसेन ने अपनी बहु डॉ धारणा बिसेन को नियम विरुद्ध नियुक्त किया था। जिस पर लोकायुक्त जबलपुर ने संज्ञान लेते हुए डॉ बिसेन के खिलाफ अपराध दर्ज किया था। अब डॉ धारणा बिसेन के खिलाफ भी कार्रवाई की जाए। यह बात युवा क्रांति संगठन के संयोजक अनुराग तिवारी ने प्रेसवार्ता के दौरान कहीं। उन्होंने कहां लोकायुक्त में इस अपराध की विवेचना जारी है। इस अपराध में पूर्व कुलपति डॉ पीके बिसेन के साथ पूर्व रजिस्ट्रार अशोक कुमार इंगले को भी अपराधी बनाया गया है। अब उनकी बहू धारणा बिसेन के खिलाफ भी कार्यवाही की जाए। संगठन का आरोप हैं कि उनकी नियुक्ति भी नियम विरुद्ध तरीके से की गई है। जिसको लेकर युवा क्रांति लोकायुक्त को शिकायत कर चुकी हैं। 2 साल बीते यूनिवर्सिटी ने नहीं की जांच क्रांति संगठन के प्रदेश सचिव देवा झारिया का कहना है की यूनिवर्सिटी में पदस्थ प्रोफेसर ने शासकीय 57 एकड़ भूमि पर कब्जा किया था। जिसे तत्कालीन कलेक्टर इलैया राजा टी ने अतिक्रमण मुक्त कराया था। जिसको लेकर लोकायुक्त ने विश्वविद्यालय को पत्र लिख जांच करने की अनुमति मांगी थी। लेकिन विश्वविद्यालय के कुलपति और कुलसचिव ने अनुमति नहीं दी। हालांकि 2 साल पहले 15 मार्च 2022 को कमेटी बनाई और 15 दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपने कहां था। कुलसचिव के आदेशों की भी उड़ाई गई धज्जियां बावजूद इसके 2 साल बीत जाने के बाद भी कुलसचिव के आदेश की धज्जियां उड़ाई गई और अभी तक रिपोर्ट नहीं सौंपी गई। ऐसे में यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ एम ए खान और डॉ परवेज राजन खान के ऊपर भी कार्यवाही की जानी चाहिए। जिन्होंने शहपुरा भिटौनी के ग्राम खैरी में शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा किया था। प्रेसवार्ता के दौरान पुष्पराज पांडे, वैभव पांडे, विवेक ठाकुर, रूपेश सिंह, अंकित पटेल, संतोष तिवारी, अंबुज स्वामी सुजीत पटेल सहित अन्य मौजूद रहे।

स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को उनके अधिकारों से अवगत कराया जाए: स्कूल शिक्षा मंत्री

Children studying in schools should be made aware of their rights: School Education Minister भोपाल। शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है और महत्वपूर्ण है, उसी तरह बच्चों की सुरक्षा और उनका संरक्षण भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। आवश्यक है कि स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को उनके अधिकारों से अवगत कराया जाए। यह बात स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कही। बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2005, किशोर न्याय अधिनियम-2012 एवं पॉक्सो अधिनियम-2015 की जागरूकता के लिए मप्र बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा राजधानी स्थित समन्वय भवन में बुधवार को राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में स्कूल शिक्षा तथा परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह, महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया और मप्र राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष देवेन्द्र मोरे, आयोग के सदस्य ओंकार सिंह, डॉ. निशा श्रीवास्तव, मेघा पवार, अनुराग पाण्डेय, डॉ. निवेदिता शर्मा और सोनम निमामा सहित अन्य उपस्थित रहे। स्कूल शिक्षा मंत्री सिंह ने कहा कि इस संदर्भ में और बेहतर कार्य कैसे किया जा सकता है, इसके लिये स्कूल शिक्षा और महिला बाल विकास विभाग संयुक्त बैठक कर आगे की रणनीति बनाएगे। हमारी कोशिश है कि जनजाति क्षेत्रों मे भी आंगनवाड़ी खोले जाएं:मंत्री निर्मला भूरियामहिला बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा कि अब आदिवासी क्षेत्रों में भी ऐसी कार्यशालाएं आयोजित होंगी, जिससे उस क्षेत्र के बच्चे भी अपने अधिकारों को समझ सकेंगे। उन्होंने कहा कि शहरों में कई संस्थाएँ काम कर रही हैं, परंतु आदिवासी क्षेत्रों मे इसका अभाव है। संस्थाएँ ऐसे क्षेत्रों में भी जागरूकता के लिये काम करें। हमारी कोशिश है कि बच्चों और महिलाओं के उत्थान के लिये जनजाति क्षेत्रों मे भी आंगनवाड़ी खोले जाएं।आरटीई में 12वीं तक निःशुल्क शिक्षा करने का प्रस्ताव: कार्यशाला में म.प्र. बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष रविन्द्र मोरे ने सुझाव दिया कि प्रवासी मजदूर परिवारों के बच्चों को भी देश के हर प्रदेश में एक जैसी शिक्षा एवं मध्यान्ह भोजन प्राप्त कर सकें, इसके लिये वन नेशन वन ऐनरोल्मेंटपर कार्य किया जाना चाहिए। उन्होंने निःशुल्क एवं अनिवार्य बात शिक्षा अधिनियम मे कक्षा 8वीं तक निःशुल्क शिक्षा को बढ़ाकर कक्षा 12वीं तक करने का प्रस्ताव रखा।

स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग होंगे मर्ज,सभी जिलों में खुलेंगे पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस

भोपाल ! मध्यप्रदेश में चिकित्सा शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग अब मिलकर एक होंगे। मंत्रालय में शाम को होने वाली कैबिनेट बैठक में इसे मंजूरी दी जाएगी। वहीं प्रदेश के सभी जिलों में पीएम कॉलेज आफ एक्सीलेंस खोले जाएंगे। मध्यप्रदेश में चिकित्सा शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग के अलग-अलग होंने के कारण कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। दोनो विभाग आमजनता की स्वास्थ्य सुविधाओं पर काम करते है। लेकिन चिकित्सा शिक्षा विभाग मेडिकल एजूकेशन पर काम करता है और स्वास्थ्य विभाग केवल प्रदेश की स्वास्थ्य सुविधाओं पर ही काम करता है। मेडिकल एजूकेशन विभाग के अंतर्गत प्रदेशभर के मेडिकल कॉलेज आते है और इन कालेजों से सम्बद्ध अस्पतालों में ही जूनियर डॉक्टर और चिकित्सा शिक्षा विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टर काम करते है। नीतिगत मसलों पर दोनो विभाग अलग- अलग होने के कारण कई दिक्कते आ रही थी। इन्हें दूर करने के लिए अब दोनो विभागों को मिलाकर एक किया जा रहा है नये विभाग का नाम लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग होगा। इन्हें दूर करने के लिए अब दोनो विभागों को मिलाकर एक किया जा रहा है। प्रदेश के सभी जिलों में प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस खोले जाने है। इस प्रस्ताव पर भी आज होंने वाली कैबिनेट बैठक में चर्चा की जाएगी। ये कॉलेज विशेष होंगे और इनमें विद्यार्थियों को सभी तरह के विषयों पर अध्ययन करने की सुविधा होगी। इन कॉलेजों को रोजगारोन्नमुखी शिक्षा से भी जोड़ा जाएगा। हर जिले में ऐसा एक कॉलेज खोला जाएगा। इसके अलावा अशोकनगर जिले में मल्हारगढ़ सिचाई परियोजना के लिए 72 करोड़ रुपए की मंजूरी देने के प्रस्ताव पर भी कैबिनेट में चर्चा की जाएगी। चार अधिकारियों और कर्मचारियों के द्वारा की गई अनियमितताओं के चलते उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही करने और उनकी विभागीय जांच शुरु करने के प्रस्तावों पर भी चर्चा की जाएगी।

विज्ञान मेले में बच्चों ने दिखाई अपनी प्रतिभा, एक से बढ़कर एक माडल किए तैयार

Children showed their talent in the science fair, prepared many models हरिप्रसाद गोहे आमला । प्रतिवर्ष अनुसार इस वर्ष भी जन शिक्षा केंद्र कन्या शाला अमला द्वारा संकुल स्तर पर विज्ञान मेंले का आयोजन नगर के नगर पालिका स्कूल में आयोजित किया गया। जन शिक्षक मानवेंद्र सिंह सिसोदिया ने बताया आयोजित मेले से चयनित माडल विकासखंड स्तरीय मेले में शामिल होंगे ! वहां से चयनित माडल को जिला स्तरीय मेले में स्थान मिलेगा । गौरतलब हो की आयोजित विज्ञान मेले में संकुल स्तर पर आने वाले विभिन्न ग्रामों के स्कूलों के बच्चे अपने-अपने प्रदर्शन लेकर मेले में पहुंचे थे । उपस्थित प्रदर्शों का संयुक्त चयन दल द्वारा चयन कर उन्हें प्रोत्साहित किया गया । मिली जानकारी अनुसार प्रदर्शनी में विज्ञान गणित पर्यावरण एवं सामाजिक विज्ञान थीम पर प्रदर्शनी जन शिक्षा केंद्र हायर सेकेंडरी कन्या स्कूल आमला द्वारा कक्षा 6 से 8 एवं 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए प्रतियोगिता नपा स्कूल आमला में आयोजित की गई । जिसमें इकाई परिवर्तन, पर्यावरण , स्वस्थ जीवन के मानक एवं विज्ञान, डीजे साउंड मॉडल के अलावा अन्य मॉडल बच्चों द्वारा प्रस्तुत किए गए । जिसमें से तीन तीन मॉडलों का चयन किया गया। उक्त प्रदर्शनी में शासकीय माध्यमिक शाला ठानी से कक्षा आठवीं की छात्रा उर्वशी इवने, ग्यारसू परते, शासकीय माध्यमिक शाला तिरमहु से गरिमा ठाकरे , अंकिता मालवीय, चेतना बारस्कर,द्वारा त्रिकोणमिति चार्ट बनाया गया । प्रदर्शनी में निर्णायक भूमिका बतौर सर दिलीप हाथिया, ममता चौहान, ओम प्रकाश साहू एकेडमिक समन्वयक प्रभारी द्वारा प्रदर्शों का चयन किया गया । इस अवसर पर प्रमुख रूप से जन शिक्षक मानवेंद्र सिंह सिसोदिया, जितेंद्र पवार, जन शिक्षक राजेश घोरसे,मोहन कापसे देवेंद्र शरणागत, कैलाश सलामे, प्रतिभा सोनी, रितु चौहान, रीता गौरसे, उषा गावंडे, आदि शिक्षक मौजूद रहे ।

बीच सत्र में अतिथि शिक्षकों को हटाने के निर्देश

Instructions to remove guest teachers mid-session भोपाल। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के खाली पदों के विरुद्ध रखे गए अतिथि शिक्षकों को बीच सत्र में हटाने के निर्देश जारी किए गए हैं। प्रदेशभर के जिला शिक्षा अधिकारियों ने जहां पर शिक्षकों की पदस्थापना हो गई है, वहां से अतिथि शिक्षकों को बाहर करने के निर्देश जारी किए हैं। दरअसल, प्रदेश के स्कूलों में जिन विषयों पर अतिथि शिक्षक पढ़ा रहे थे। उन विषयों पर नए शिक्षक नियुक्त हो गए हैं इसलिए अतिथि शिक्षकों को हटाया जा रहा है। इसके चलते अतिथि शिक्षकों के समक्ष रोजी रोटी का संकट उत्पन्न हो गया है।

अपनी जगह सॉल्वर को बिठाकर परीक्षा की थी पास, आरक्षक पर मामला दर्ज

Passed exam by using solver instead case registered against constable शिकायत की जांच के बाद विभाग द्वारा वर्ष 2021 में किया जा चुका है बर्खास्त भोपाल। मिसरोद पुलिस ने विभाग द्वारा बर्खास्त हो चुके आरक्षक पर धोखाधड़ी और परीक्षा अधिनियम की धाराओं समेत अन्य धाराओं में प्रकरण दर्ज किया है। आरोपी ने वर्ष 2012 में हुई मध्य प्रदेश पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा में अपने स्थान पर साल्वर को बिठाकर परीक्षा पास की थी। इसके बाद शारीरिक दक्षता परीक्षा में वह खुद शामिल हुआ था। शारीरिक परीक्षा पास करने के बाद उसका चयन हो गया। वह नौकरी कर रहा था। इसी बीच शिकायत हो गई। शिकायत की जांच के बाद मामला दर्ज कर लिया गया। पुलिस के अनुसार वर्ष 2012 में पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा में गोरमी, जिला भिंड निवासी अमित सिंह शामिल हुआ था। फिजिकल और लिखित परीक्षा में पास होने के बाद सागर में उसकी नियुक्ति हो गई। करीब 9 साल नौकरी करने के बाद अमित सिंह ने अपना ट्रांसफर ग्वालियर करवा लिया। इसी बीच किसी व्यक्ति ने पुलिस मुख्यालय में उसकी शिकायत कर दी। शिकायत में बताया गया था कि अमित सिंह फिजिकल टेस्ट में स्वयं उपस्थित हुआ था, जबकि लिखित परीक्षा उसने साल्वर के माध्यम से पास की थी। शिकायत के आधार पर सागर और ग्वालियर एसपी ने जांच की तो शिकायत सही निकली। उसे वर्ष 2021 में पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। उसके खिलाफ धोखाधड़ी और परीक्षा अधिनियम की धाराओं में प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दिए थे। पुलिस ने ग्वालियर के यूनिवर्सिटी थाने में अमित सिंह के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया था। परीक्षा मिसरोद के आरकेडीएफ कालेज में आयोजित हुई थी। इसलिए मिसरोद पुलिस को केस डायरी भेजी गई है।

उच्च शिक्षा विभाग ने बनाया सोशलॉजी से पीएचडी धारक को स्पोर्ट्स में अतिथि विद्वान

Higher Education Department appointed PhD holder from Sociology as guest scholar in sports भोपाल। शिक्षा विभाग में अतिथि विद्वान की नियुक्ति में बड़ी गड़बड़ी प्रकाश में आई हैं। ताज़ा मामला सागर के आर्ट एंड कॉमर्स कॉलेज का सामने आया है जिसमें सोशलॉजी से पीएचडी धारक आवेदक को स्पोर्ट्स में अतिथि विद्वान के रूप में नियुक्ति दे दी गई है। इस गड़बड़ी में महाविद्यालय प्रशासन से लेकर स्थानीय एडी कार्यालय और उच्च शिक्षा विभाग का भोपाल संचालनालय में पदस्थ शीर्ष अधिकारी की भी संलिप्तता नज़र आ रही है। दिलचस्प पहलू यह है कि विभाग द्वारा अपने ही नियमों का पालन नहीं किया गया है। यानि अतिथि विद्वानों की नियुक्ति में संबंधित विषय में पीएचडी/ नेट /स्लेट अथवा सेट को अनिवार्य योग्यता में शामिल किया गया है। लेकिन हाल ही में जारी की गई सूची में विभाग ने प्रमाणिक योग्यताओं को दरकिनार करते हुए अयोग्य को नियुक्ति दे दी। उच्च शिक्षा विभाग की इस कार्यप्रणाली से जहां अतिथि विद्वानों की नियुक्तियों में पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ योग्य और जरूरतमंद आवेदकों का हक भी मारा जा रहा है।

स्वच्छ भारत मिशन कि धज्जियाँ उड़ा रहा शिक्षा विभाग.. जिम्मेदार मौन

सफाई के नाम से लाखो रुपए कि हो रही खर्च.. शासन के पैसा का दुरूपयोग.. स्वच्छ भारत मिशन कि धज्जियाँ उड़ा रहा शिक्षा विभाग.. जिम्मेदार मौन कार्यालय मे चल रही है बाबुगिरी, जिला शिक्षा अधिकारी के आदेश का हो रहा है खुला अवहेलना.. अब कार्यालय संचालित हो रहे हैं बाबू के भरोसे… सारंगढ़ ! केंद्र सरकार के महत्त्वकांक्षी योजना स्वच्छ भारत मिशन को लेकर सरकार काफ़ी सजग है जहाँ जगह जगह स्वच्छता का सन्देश देने सफाई अभियान चला कर लोगो को जागरूक किया जा रहा है,तो वही शिक्षा विभाग सारंगढ़ ने स्वच्छ भारत मिशन कि धज्जियाँ उड़ा रहे हैं,बहरहाल सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिले के जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय मे इन दिनों गन्दगी का आलम पसरा हुआ है,डीइओ कार्यालय के शौचालय इन दिनों अपने दुर्दशा पर आंसू बहाते नजर आ रहा है, जिसमे आप कार्यालय कि तस्वीर देखकर आप भी हैरान हो जाएंगे शौचालय के दयनीय हालत अनदेखी के चलते ऐसे नहीं हो रहे हैं बल्कि अपने आप को शिक्षा का देवता कहे जाने वाले जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय मे पदस्थ लोगो ने ही गन्दगी फैला रहे हैं, इस कार्यालय मे अगर आप आएँगे तो आपको आसानी से पान के छींटे जगह जगह दीवालों पर बेसिन, एवं शौचालयों मे दिख जाएंगे इस कार्यालय पर जैसे ही कदम रखेंगे आपको गन्दगी का आभास हो जाएगा, जिससे जिम्मेदारो के लापरवाही के चलते फ़ैल सकती है बड़ी संक्रमण लोग भी पड़ सकते हैं बीमार, स्वच्छता को लेकर शासन के पैसा को साफ सफाई के नाम से लाखो रुपए व्यय करने कि बात कह रहे हैं परन्तु यहाँ पर साफ सफाई सिर्फ कागजो मे ही रह गया है, अगर कार्यालय मे व्यय करने कि राशि का जाँच किया जाए तो बड़ी भ्रष्टाचार उजागर हो सकती है, अब देखना ये होगा कि खबर प्रकाशित होने के बाद जिम्मेदारो पर क्या कार्यवाही होता है या इसे ठन्डे बस्ते मे डाल दिया जाता है

शिक्षा विभाग की लापरवाही से बिना मापदंड चल रहे निजी स्कूल

Private schools running without standards due to negligence of education department मुरैना ! सरकार के नियम कानून तोड़ते निजी स्कूल संचालक अंबाह शिक्षा विभाग के अधिकारीयों की साठगांठ से निजी स्कूल वालो को नहीं है प्रशासन के नियमो का भय अंबाह तहसील मे माध्यमिक विद्यालय सभी मापदंडों को दरकिनार करके चला रहे है निजी स्कूल प्राथमिक विद्यालय प्रशासन के द्वारा शिक्षा विभाग द्वारा निजी स्कूलों के संचालन के लिए कुछ जरूरी शर्ते है लेकिन निजी स्कूलों के संचालको को अधिकारियों की मिलीभगत से सभी नियमो की अवेलना की जा रही है निजी स्कूलों के संचालन के लिए बीस जरूरी शर्तें प्राइवेट स्कूल खोलने 20 शर्तों का पालन करना होता है। इसमें सोसाइटी का पंजीकरण प्रमाण-पत्र, सोसाइटी सदस्यों की प्रतिलिपि, सोसाइटी का संविधान, ततीमा-जमाबंदी की प्रति, स्कूल भवन की फोटो, रेंट एवं लीज डीड संबंधी प्रमाण-पत्र, पेयजल-बिजली उपलब्धता प्रमाण, शौचालय से संबंधी फोटो, शैक्षणिक योग्यता सहित शिक्षक व गैर शिक्षक स्टाफ की जानकारी, आय के साधन, सुविधा उपलब्ध करवाने संबंधी शपथ पत्र, फीस की जानकारी, पुस्तकालय व प्रयोगशाला जानकारी और खेल मैदान की उपलब्धता सहित अन्य दस्तावेजी प्रमाण उपलब्ध करवाने होते हैं। निरीक्षण में नहीं जाते अफसर, इसलिए पंजी में खुद करा लेते हैं हस्ताक्षर मान्यता प्राप्त स्कूलों में अध्यापन व्यवस्था का जायजा जिला और ब्लाक शिक्षा कार्यालयों के अधिकारियों को महीने में कम से कम एक बार लेना है। अफसर स्कूल पहुंचकर निरीक्षण पंजी में अपनी टीम लिखते हैं, लेकिन यहां किसी भी अफसर को फुर्सत नहीं है कि वे इन स्कूलों की व्यवस्था देखें। लिहाजा निरीक्षण पंजी में टीप लिखवाने के लिए निजी स्कूल के संचालक ही पंजी लेकर जिला और ब्लाॅक दफ्तर पहुंच जाते हैं।

प्रतिबन्ध होने पर भी सरकारी शिक्षक चला रहे निजी कोचिंग सेंटर

Despite restrictions, government teachers are running private coaching centers मुरैना ! अम्बाह पोरसा नगर में सरकारी स्कूलों में पदस्थ लगभग 2 दर्जन से अधिक शिक्षक ऐसे हैं जो प्रतिबंध के बाद भी अपने घरो व हाथी गड्डा नामक जगह पर लंबे समय से निजी कोचिंग सेंटर संचालित कर रहे हैं। इसकी जानकारी शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों को होने के बाद भी उनके द्वारा ऐसे शिक्षकों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। गौरतलब है कि जिला शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों में पदस्थ शिक्षकों के पर निजी कोचिंग सेंटर पर छात्रों को पढ़ाने पर प्रतिबंध लगा रखा है। उसके बाद भी अम्बाह वा पोरसा नगर में लगभग 2 दर्जन से अधिक ऐसे सरकारी शिक्षक हैं जो कोचिंग सेंटर संचालित कर बच्चों से हजारों रुपये ऐंठ रहे हैं। सरकारी आदेश की कर रहे हैं अवहेलना :- ट्यूशन पर कड़ा प्रतिबंध होने के बावजूद नगर में सरकारी शिक्षक बेखौफ ट्यूशन पड़ा कर सरकारी आदेश की अवहेलना कर रहे हैं। सुबह से इन कोचिंग सेंटरों पर बच्चों की भीड़ एकत्रित हो जाती है, जो दोपहर तक चलती है। इसके बाद शाम से ट्यूशन दोपहर तक चलती है। इसके बाद शाम से ट्यूशन पढ़ाने का सिलसिला फिर शुरू हो जाता है, जो देर रात तक चलता है। शिक्षक सरकारी आदेश को ठेंगा दिखाकर मोटी कमाई कर रहे हैं। इसके अलावा इन कोचिंग सेंटर के पास वाहन पार्किंग ‘की सुविधा भी नहीं है। जिला अधिकारी कार्यवाही नही करते है फोन नही उठाते है

सतर्क सक्रिय और जागरूक, नागरिक बनाने की दिशा में एक दिवसीय अभिमुखीकरण कार्यक्रम संपन्न।

One day orientation program was conducted towards making Alert, Active and Aware citizens. सीताराम कुशवाहा, सहारा समाचार विदिशा ! देश अपनाएं सहयोग फाउंडेशन द्वारा जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्था में एक दिवसीय अभिमुखीकरण कार्यक्रम संपन्न हुआ ! जिसमें विदिशा विकासखंड के 46 हाई स्कूल एवं हाई सेकेंडरी स्कूल से शिक्षकों ने भाग लिया। फाउंडेशन के विदिशा जिले के प्रभारी अधिकारी श्री अशोक पांचाल ने बताया कि देश अपनाएं सहयोग फाउंडेशन द्वारा विदिशा जिले में विद्यार्थियों के बीच नागरिकता और लोकतांत्रिक मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए एक्टीजन कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थी अपने परिवेश के बारे में सर्तक रहें, समस्याओं और समाधान के बारे में सटीक और सही जानकारी प्राप्त करने के लिए उत्सुक और समर्थ हो तथा समुदाय के साथ व्यक्तिगत या सामूहिक रूप में समाज और देश की उन्नति में सहायता कर सकें।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि श्री गोविंद राठी (DEO विदिशा), श्री RK ठाकुर (डाइट प्राचार्य विदिशा), RK जैन (BEO विकासखंड विदिशा), श्री चक्रेश जैन (नोडल अधिकारी विदिशा), संस्था से श्री जीतेश शेल्के, सुश्री अन्नपूर्णा तिवारी, विनीता पंवार, श्री अविनाश सोनी उपस्थित रहे।

भोपाल, व्यावसायिक शिक्षा के विस्तार में और गति लायें – मुख्यमंत्री डॉ. यादव

Bhopal should bring more momentum in the expansion of vocational education – Chief Minister Dr. Yadav मुख्यमंत्री ने स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों से चर्चा कर दिए निर्देश भोपाल ! मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर देश में लागू की गई “नई शिक्षा नीति-2020″में व्यावसायिक शिक्षा (वोकेशनल स्टडीज) पर विशेष जोर दिया गया है। इसी के अनुरूप मध्यप्रदेश में व्यावसायिक शिक्षा के विस्तार के लिये किए जा रहे प्रयासों में और गति लाई जाए। विद्यार्थी द्वारा स्कूली शिक्षा प्राप्त करने के बाद उच्च शिक्षा के लिये प्रवेश लेने के दौरान ही उन्हें वोकेशनल स्टडीज से जोड़कर रोजगार और स्वरोजगार के लिये प्रेरित किया जाए। इससे संपूर्ण शिक्षा प्रणाली को और सार्थक बनाया जा सकता है। नये सीएम राइज विद्यालयों के लिए चयन में व्यावहारिक आधार पर निर्णय लिया जाये और विद्यालयों के निर्माण में डिजाइन और अन्य सभी व्यवस्थाओं को भी बेहतर तरीके से पूर्ण किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादवआज मंत्रालय में स्कूल शिक्षा विभाग की कार्य गतिविधियों की समीक्षा कर रहे थे। समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्कूल शिक्षा की वर्तमान व्यवस्थाओं, विद्यार्थियों को उपलब्ध करवाई जा रही सुविधाओं, नियमित पाठ्यक्रमों के संचालन, सीएम राइज स्कूलों के प्रबंधन और शिक्षा विभाग द्वारा अन्य विभागों के समन्वय से विद्यार्थियों के कल्याण के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली। उन्होंने विभाग द्वारा राज्य शासन की प्राथमिकताओं और संकल्प पत्र के बिन्दुओं के अनुरूप कार्ययोजना तैयार कर शीघ्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा श्रीमती रश्मि अरूण शमी ने विभाग के कार्यों और योजनाओं के संबंध मेंप्रस्तुतिकरण दिया। बैठक में विभागीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा दिए गए प्रमुख निर्देश

शिक्षा में विभाग में शासकीय राशि का भारी मात्रा में गबन, 15 लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज, जांच जारी.

Embezzlement of amount of government funds in the Education Department, cases filed against 15 individuals, investigation underway. बालाघाट, में शिक्षा विभाग में लाखों रुपये के घोटाले का मामला सामने आया है। जिला शिक्षा अधिकारी की शिकायत पर पुलिस ने 15 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। बालाघाट। जिला शिक्षा में विभाग में शासकीय राशि का भारी मात्रा में गबन करने का मामला प्रकाश में आया है। जिसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी अश्विनी कुमार उपाध्याय ने कोतवाली थाना पहुंचकर दोषी कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। उक्त मामले में पुलिस ने करीब 15 लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किया है।2018 से 2019 तक हुआ गोलमालकोतवाली थाना से मिली जानकारी के अनुसार जिला शिक्षा अधिकारी अश्विनी कुमार उपाध्याय ने कोतवाली थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी कि, 29 सितंबर 2018 से 19 दिसंबर 2023 के बीच उत्कृष्ट विद्यालय बालाघाट कार्यालय के प्राचार्य सहायक ग्रेड 3 दुर्गेश कुमार द्वारा योजनाबद्ध तरीके से शासकीय दस्तावेजों में कूटरचित कर धोखाधड़ी पूर्वक राशि निकाली गई और इस राशि को करीब 15 शासकीय और अशासकीय व्यक्तियों के खातों में बालाघाट के कोषालय के माध्यम से भुगतान कराया गया है। इनके विरुद्ध किया अपराध दर्जशिकायत मिलने के बाद लिखित शिकायत के आधार पर बालाघाट उत्कृष्ट विद्यालय के बीओ कार्यालय के प्राचार्य दुर्गेश कुमार, अंबेश, लक्ष्मी, देवी चरण पटले, परेश कुंभारे, मुकेश डिब्बे, शैलेंद्र खरखटे, अभिषेक शुक्ला, अबीर खटोले, सुरेश, तीरेश कुमार अग्रवाल, भक्ति दोहरे, कल्याणी, नरेश फुंदे, और रूपाली वामनकर के विरुद्ध कोतवाली थाने में भारतीय दंड विधान की धारा 420,467,468,471 और 120 बी के तहत अपराध दर्ज कर मामले को विवेचना में लिया है। इनका कहना कूटरचित दस्तावेज तैयार कर शासकीय राशि का दुरुपयोग करने से संबंधित कार्रवाई के लिए कलेक्टर महोदय से आदेश प्राप्त होने पर उक्त मामले में कोतवाली थाना में शिकायत दर्ज करवाई गई है। जिसकी विवेचना की जा रही है। विवेचना में जो भी तथ्य सामने आएंगे उस आधार पर कार्रवाई की जाएगी। -अश्विनी कुमार उपाध्याय, जिला शिक्षा अधिकारी जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा की गई शिकायत के आधार पर 15 लोगों के विरुद्ध शासकीय राशि 86 लाख 44 हजार 323 रुपये गबन किए जाने के संबंध में धोखाधड़ी की संबंधित धारा के तहत अपराध दर्ज कर मामले को विवेचना में लिया गया है, मामले की विवेचना की जा रही है। -प्रकाश वास्कले, निरीक्षक, कोतवाली.

अधिकारियों की लापरवाही के चलते चौपट व्यवस्था: परीक्षा को बचा सिर्फ एक माह.

Due to officials’ negligence, a chaotic system: only one month saved the examination. नहीं खुल सका दृष्टि एवं श्रवण बाधित बच्चों का हॉस्टल भोपाल। सामाजिक न्याय एवं निःशक्तजन कल्याण विभाग शैक्षणिक सत्र शुरू होने के 6 माह बाद भी राजधानी के शाहजहांनाबाद के परी बाजार के सामने स्थित शा. दृष्टि एवं श्रवण बाधित उमा विद्यालय का हॉस्टल शुरू नहीं करा सका है। विभाग के अधिकारियों लापरवाही का खामियाजा यहां के करीब 60 दृष्टि एवं श्रवण बाधित विद्यार्थी कई माह से भुगत रहे हैं। जो पढ़ाई इन विद्यार्थियों की सभी सुविधाओं के साथ इस हॉस्टल में रहकर हो सकती थी, वह नहीं हो सकी। इन विद्यार्थियों कक्षा दसवीं-बारहवीं के विद्यार्थी भी शामिल हैं। जो फरवरी में होने वाली माशिमं की बोर्ड परीक्षाओं में शामिल होंगे। हालांकि अब विभागीय अधिकारी जनवरी के पहले सप्ताह तक इस छात्रावास को शुरू करने की बात कह रहे हैं। उल्लेखनीय है कि सामाजिक न्याय एवं निःशक्तजन कल्याण विभाग द्वारा शाहजहांनाबाद के परी बाजार के सामने तैयार स्पर्श भवन में दो स्कूल एवं इनके छात्रावास संचालित किए जाते हैं। इनमें भोपाल संभाग के जिलों के विद्यार्थियों को प्रवेश दिए जाते हैं।

फर्जी दस्तावेज लगाकर 16 साल से नौकरी कर रहे 8 शिक्षक, 15 साल चली जांच.

Eight teachers have been working for 16 years using fake documents; investigation has been ongoing for the past 15 years. मध्य प्रदेश के शिक्षा विभाग में मचा हड़कंप, पुलिस ने दर्ज की एफआईआर Special Correspondent, Sahara Samachaar, Gwalior भोपाल। ग्वालियर में शिक्षक भर्ती परीक्षा के जरिये टीचर के रूप सोलह साल से नौकरी कर रहे, आठ शिक्षकों की जांच मे बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में पाया गया कि इन टीचरों ने शिक्षक भर्ती परीक्षा के समय फर्जी मार्कशीट और फर्जी दस्तावेज लगाए थे। पुलिस ने ऐसे आठ शिक्षकों के खिलाफ कूटरचित दस्तावेज बनाने और धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज कर ली है। इसकी खबर फैलने के बाद न केवल ग्वालियर बल्कि पूरे मध्यप्रदेश के शिक्षा विभाग में हड़कम्प मच गया है। 2007-08 में बने थे शिक्षक2007-08 में मध्य प्रदेश सरकार ने शिक्षक भर्ती परीक्षा आयोजित की थी। इस परीक्षा को पास करने के बाद कुछ शिक्षकों पर फर्जी दस्तावेज लगाकर नौकरी पाने का आरोप लगा था। ग्वालियर के भितरवार इलाके में फरियादी गौरी शंकर राजपूत ने इसकी शिकायत थाने में की थी। जिसमें बताया गया था कि जनपद पंचायत भितरवार में पदस्थ शिक्षा कर्मियों ने फर्जी और कूटरचित अंकसूचियों की संरचना करके शासकीय सेवा प्राप्त कर अनाधिकृत रूप से शासकीय सेवा का लाभ उठाया है। उन्होंने इस मामले में धर्मेंद्र सिंह यादव, भगवत शर्मा, कृष्णा ,पान सिंह यादव, अनिल पाठक, बृजेंद्र सिंह रावत, अरविंद सिंह राणा, सतीश कुमार रजक, केशव सिंह पर फर्जी दस्तावेज लगाकर शासकीय नौकरी पाने का आरोप लगाया था। 2008 से चल रही थी जांच, 15 साल बाद हुई एफआईआरएडिशनल एसपी ग्वालियर निरंजन शर्मा ने बताया कि इस मामले पर विभिन्न बिन्दुओं पर बारीकी से जांच पड़ताल और साक्ष्य संकलन किया गया और फरियादी द्वारा प्रस्तुत आरोप के दस्तावेज सही पाए जाने पर आठ आरोपियों के खिलाफ थाना भितरवार में धोखाधड़ी और दस्तावेजों की कूटरचना करके शासकीय नौकरी पाने की धारा में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। जांच का दायरा बढ़ने पर बढ़ सकती है आरोपियों की संख्याअतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि अभी जांच जारी है और इस मामले में आरोपियों की संख्या बढ़ सकती है। इस एफआईआर की सूचना से पूरे प्रदेश के शिक्षा विभाग में भूचाल मच गया है। क्योंकि जांच का दायरा बढ़ा तो प्रदेश भर में ऐसे सैकड़ों मामले उजागर हो सकते हैं।

जिला शिक्षा अधिकारी विदिशा, जी पी राठी ने की अशासकीय विधालयों की समीक्षा बैठक.

District Education Officer Vidisha, Mr. G.P. Rathi, conducted a review meeting of Non Government schools. सीताराम कुशवाहा विदिशा ! विदिशा जिला अन्तर्गत अशासकीय विधालयों (म.प्र.बोर्ड) की समीक्षा बैठक यू-डाइस/ छात्रवृति / परीक्षा सम्बंधी समीक्षा हेतु जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के सभा कक्ष में (डाइट) बैठक आयोजित की गई है। जिसमें विदिशा जिले के समस्त अशासकीय विघालयों के संचालक / सचिव/प्राचार्य उपस्थित हुये । उक्त बैठक को जिला शिक्षा अधिकारी श्री जी.पी.राठी जी के द्वारा निर्देश दिये गये. कि यू-डाइस, छात्रवृति की प्रोफइल 07 दिवस में शीघ्र तैयार की जावे एवं छा.वृति सबंधी कोई भी प्रकरण लंवित न रहे तथा परीक्षा सवधी निर्देश दिये गये । कोई भी विघालय की यू-डाइस सबंधी प्रोफाइल लंवित नही रहना चाहिये यदि लंवित रहती है तो वरिष्ठ कार्यालय को कार्यवाही हेतु लिखा जावेगा ।

भोपाल शिक्षा अधिकारी तोमर के खिलाफ जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी.

Arrest warrant issued against Bhopal Education Officer Tomar. मानव अधिकार आयोग की अवहेलना करने का आरोप भोपाल। एक जिला शिक्षा अधिकारी को मानव अधिकार आयोग की अवहेलना करना भारी पड़ गया है। आयोग ने अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने वर्ष 2022 के एक मामले में अब तक जवाब न देने के कारण भोपाल जिले के जिला शिक्षा अधिकारी केपीएस तोमर को 21 दिसंबर को अनिवार्यतः आयोग में व्यक्तिगत रूप से आकर अपना स्पष्टीकरण व प्रतिवेदन देने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही आयोग ने तोमर को कारण बताओ नोटिस एवं पांच हजार रुपये का नामजद जमानती गिरफ्तारी वारंट भी जारी किया है। नोटिस एवं वारंट की तामीली अतिरिक्त पुलिस आयुक्त, (नगरीय) भोपाल, जिला भोपाल को करवाने के निर्देश दिए हैं। ये है पूरा मामलाकई पदीय एवं नामजद स्मरण पत्र देने के बावजूद भी प्रतिवेदन न देने के कारण डीईओ केपीएस तोमर को 21 दिसंबर 2023 को आयोग में स्वयं उपस्थित होने के लिए कहा गया है। आयोग के एक प्रकरण के अनुसार नानक कॉम्प्लेक्स, गोविन्दपुरा, भोपाल निवासी आवेदक अरविन्द कुमार नामदेव, सेवानिवृत्त प्रधान अध्यापक ने स्कूल शिक्षा विभाग ने उनकी सेवानिवृत्ति के सात वर्ष पश्चात् भी तृतीय समयमान वेतनमान/क्रमोन्निति वेतनमान समय पर नहीं देने के कारण उनको देय पेंशन में हो रहे आर्थिक नुकसान का भुगतान दिलाने की गुजारिश आयोग से की थी। शिकायत मिलते ही आयोग ने मामला दर्जकर जिला शिक्षा अधिकारी, भोपाल से जवाब मांगा था। भेजे गए थे कई पत्रडीईओ को कई पत्र एवं स्मरण पत्र भी भेजे गए थे, फिर भी उनकी ओर से कोई भी जवाब नहीं मिला। इस पर आयोग ने उन्हें आठ नवंबर 2023 को आयोग कार्यालय में व्यक्तिशः आकर जवाब देने को कहा था। आयोग का यह आदेश पत्र उनके कार्यालय में डिलेवर भी हो गया, तब भी तोमर आयोग के समक्ष पेश नहीं हुए। इस नियम के तहत एक्शनमध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने अब व्यवहार प्रक्रिया संहिता की धारा 32 ग के अंतर्गत जिला शिक्षा अधिकारी, भोपाल केपीएस तोमर को आयोग में उपस्थित न होने के कारण शो-कॉज नोटिस एवं 21 दिसंबर 2023 को तोमर की आयोग में व्यक्तिशः उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए उनके विरुद्ध पांच हजार रुपये का नामजद जमानती गिरफ्तारी वारंट भी जारी किया गया है। वारंट की तामीली अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (नगरीय) भोपाल, जिला भोपाल के जरिये कराई जाएगी।

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