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गुलाबी और सफ़ेद कलर का बैलेट पेपर, बड़े बदलाव के साथ होगा राजस्थान के पंचायत चुनाव

जयपुर. आगामी पंचायतीराज चुनाव इस बार एक बड़े बदलाव के साथ होने जा रहे है। राज्य निर्वाचन आयोग के आदेश के बाद पंच और सरपंच, दोनों ही पदों के चुनाव मतपत्र के जरिए होंगे। यह बदलाव केवल तकनीक का नहीं, बल्कि चुनावी प्रक्रिया की रफ्तार और परिणामों के समय पर असर डाल सकता है। बैलेट पेपर की वापसी से चुनावी अमला और प्रत्याशियों, दोनों की चुनौतियां बढ़ेंगी। ऐसा होगा इस बार का बैलेट पेपर पंच का मतपत्र गुलाबी रंग के कागज पर होगा। सरपंच का मतपत्र सफेद कागज पर छपेगा। मतपत्र की चौड़ाई 4 इंच तय की गई है। ऊपरी हिस्से में काली सीमारेखा, बाई ओर क्रमांक और दाई ओर पंचायत वार्ड से जुड़ी निर्वाचन जानकारी होगी। सभी विवरण हिन्दी में होंगे। अभ्यर्थियों के नाम बाई ओर और चुनाव चिह्न दाई ओर होंगे। नोटा भी अनिवार्य रूप से शामिल रहेगा। ईवीएम से बैलेट, क्या बदलेगा मतदान की गति थोड़ी धीमी हो सकती है। मतगणना में समय ज्यादा लगेगा, जिससे नतीजे देर रात आ सकते हैं। यदि किसी प्रत्याशी ने मतगणना पर आपत्ति दर्ज कराई, तो पुनः गणना करनी पड़ेगा, जिससे विवाद और देरी की आशंका बढ़ेगी। चुनाव कर्मचारियों का कार्यभार बढ़ेगा, क्योंकि हर मतपत्र की हाथ से गिनती होगी। अभ्यर्थियों की संख्या बढ़ी तो मुड़ेगा मतपत्र नोटा सहित 9 प्रत्याशी तक एक स्तम्भ 10 से 18 प्रत्याशी दो स्तम्भ, जरूरत पड़ने पर अंतिम पैनल छायादार 18 से अधिक प्रत्याशी: तीन या अधिक स्तम्भ, खाली पैनल छायादार रखे जाएंगे। यानी प्रत्याशियों की संख्या जितनी ज्यादा, मतपत्र उतना लंबा और जटिल। 30 सरपंच और 240 वार्ड पंचों के चुनाव होंगे – 30 ग्राम पंचायत में 30 सरपंच और 240 वार्ड पंचों के चुनाव होंगे। पंचायत चुनाव के लिए प्रगणक नियुक्त किए गए हैं। मतदान केंद्र बनाए गए हैं। मतदाता सूची अपडेट की जा रही है। – डॉ. कृति व्यास, उपखंड अधिकारी एवं निर्वाचन अधिकारी, रावतभाटा

असम में चुनावी तैयारी तेज, हिमंता ने महिलाओं को कैश और नौकरियों में आरक्षण का तोहफा दिया

गुवाहाटी  असम में विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही सियासत गर्मा गई है. मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने राज्य की जनता के लिए बड़ी घोषणाओं की झड़ी लगा दी है.  असम कैबिनेट की बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए, जिन्हें चुनाव से पहले सरकार का सबसे बड़ा कार्ड माना जा रहा है. सरकार ने ‘मुख्यमंत्री महिला उद्यमिता योजना’ का दायरा बढ़ाते हुए इसमें 1 लाख से ज्यादा नए लाभार्थियों को जोड़ने का फैसला किया है. इसके अलावा आदिवासी और चाय बागान समुदाय के लोगों के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण का रास्ता भी साफ कर दिया गया है. महिलाओं के खाते में सीधे पहुंचेगा पैसा, क्या है सरकार की स्कीम? असम सरकार की ‘मुख्यमंत्री महिला उद्यमिता योजना’ राज्य में काफी लोकप्रिय हो रही है. इस योजना के तहत राज्य की 32 लाख महिलाओं को पहले ही 10,000 रुपये की पहली किस्त मिल चुकी है. मुख्यमंत्री ने बताया कि कुछ पात्र महिलाएं इस फंड से वंचित रह गई थीं. इसी को देखते हुए कैबिनेट ने आज 1,03,500 नई लाभार्थियों को जोड़ने की मंजूरी दी है. बिहार, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की कैश ट्रांसफर योजनाओं की तर्ज पर असम की यह स्कीम भी महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए शुरू की गई है. जानकारों का मानना है कि चुनाव से ठीक पहले इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं को कैश देना वोट बैंक को साधने की एक बड़ी कोशिश है. नौकरियों में 3 प्रतिशत आरक्षण और नए सैनिक स्कूल की सौगात हिमंता कैबिनेट ने केवल महिलाओं के लिए ही नहीं, बल्कि आदिवासी और चाय बागान समुदायों के लिए भी बड़ा फैसला लिया है. अब राज्य की सरकारी नौकरियों (ग्रेड 1 और ग्रेड 2) में इन समुदायों के लिए 3 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया गया है. चाय बागान समुदाय असम की राजनीति में एक निर्णायक भूमिका निभाता है. ऐसे में यह आरक्षण चुनावी गणित को बदलने की ताकत रखता है. साथ ही कैबिनेट ने कार्बी आंगलोंग के लांगवोकु क्षेत्र में राज्य का दूसरा सैनिक स्कूल बनाने के लिए 335 करोड़ रुपये के फंड को भी हरी झंडी दिखा दी है. असम बना देश का सबसे तेजी से बढ़ने वाला राज्य असम की वित्त मंत्री अजंता नियोग ने विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 62,294.78 करोड़ रुपये का अंतरिम बजट (लेखानुदान) पेश किया. बजट भाषण के दौरान उन्होंने आरबीआई के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि असम इस समय देश का सबसे तेजी से बढ़ने वाला राज्य है. उन्होंने दावा किया कि राज्य की प्रति व्यक्ति आय पिछले पांच वर्षों में दोगुनी से भी अधिक हो गई है. साल 2020-21 में यह 86,947 रुपये थी, जो 2025-26 में बढ़कर 1,85,429 रुपये पहुंच गई है. यह 113 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़ोतरी है. सरकार का लक्ष्य असम को 2028 तक 10 लाख करोड़ रुपये की अर्थव्यवस्था बनाना है. चुनाव आयोग की तैयारी और राजनीतिक दलों की मांग एक तरफ सरकार घोषणाएं कर रही है, तो दूसरी तरफ चुनाव आयोग ने भी कमर कस ली है. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अगुवाई में आयोग की टीम असम के दौरे पर है. मंगलवार को सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने चुनाव आयोग से मुलाकात की. कांग्रेस, बीजेपी और आम आदमी पार्टी समेत कई दलों ने मांग की है कि असम में चुनाव एक या अधिकतम दो चरणों में कराए जाएं. इसके साथ ही दलों ने सुझाव दिया है कि चुनाव की तारीखें तय करते समय बिहू त्योहार का खास ख्याल रखा जाए. वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल 20 मई को समाप्त हो रहा है, ऐसे में मार्च या अप्रैल में चुनाव होने की पूरी संभावना है.

स्थापना दिवस समारोह की तैयारियां पूरी, राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम में रावत मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे

राज्य निर्वाचन आयोग का स्थापना दिवस समारोह 16 फरवरी को पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त  रावत होंगे मुख्य अतिथि भोपाल  मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग का 32वां स्थापना दिवस समारोह 16 फरवरी को सुबह 11 बजे से आयोजित किया जायेगा। समारोह के मुख्य अतिथि भारत निर्वाचन आयोग के पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त  ओ.पी. रावत होंगे।  रावत “वन नेशन-वन इलेक्शन में स्थानीय निर्वाचन की भूमिका” विषय पर व्याख्यान देंगे। पूर्व राज्य निर्वाचन आयुक्त  आर परशुराम “स्थानीय निर्वाचन में सुधार की चुनौतियाँ” विषय पर उद्बोधन देंगे। दैनिक भास्कर, स्कूल ऑफ जर्नलिज्म के विभागाध्यक्ष  नरेन्द्र कुमार सिंह “जमीनी लोकतंत्र में पारदर्शी एवं निष्पक्ष चुनाव” विषय पर और एडवोकेट  सिद्धार्थ सेठ स्थानीय निर्वाचन में न्यायालयीन सबक” विषय पर उद्बोधन देंगे। सचिव राज्य निर्वाचन आयोग  दीपक सिंह ने बताया है कि समारोह में आयोग के निर्वाचन साहित्य-ई बुक का विमोचन और प्रेक्षा मोबाइल ऐप का शुभारंभ किया जायेगा। साथ ही स्थानीय निर्वाचन में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारी-कर्मचारी को प्रशस्ति पत्र भी वितरित किये जायेंगे।  

निर्वाचन आयोग ने नगर निगम चुनाव में 14 प्रत्याशियों को चुनाव खर्च का सही विवरण न देने पर अयोग्य घोषित किया

भोपाल  मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग ने जून 2022 में हुए भोपाल नगर निगम चुनाव में 14 प्रत्याशियों को चुनाव खर्च का सही विवरण न देने पर अयोग्य घोषित कर दिया है। इनमें से 12 प्रत्याशियों पर दो वर्ष का प्रतिबंध, जबकि 2 पर पांच वर्ष का प्रतिबंध लगाया गया है। मध्यप्रदेश नगर पालिक निगम अधिनियम की धारा 14 क के तहत, पार्षद चुनाव में भाग लेने वाले प्रत्येक प्रत्याशी को नामांकन की तारीख से चुनाव परिणाम की घोषणा तक के सभी खर्चों का विवरण 30 दिनों के भीतर दाखिल करना अनिवार्य है। आयोग ने पाया कि इन प्रत्याशियों ने कई अवसर दिए जाने के बावजूद चुनाव खर्च का ब्यौरा उपलब्ध नहीं कराया। भोपाल के उप जिला निर्वाचन अधिकारी मध्यप्रदेश दीपक पांडेय ने कहा कि राज्य निर्वाचन आयोग ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया है। (   वार्ड संख्या प्रत्याशी का नाम प्रतिबंध     राधिका धीरेन्द्र सिंह 2 वर्ष (वार्ड नं- 1)     महेंद्र वानखेड़े 2 वर्ष (वार्ड नं- 1)     वैशाली गोस्वामी 2 वर्ष (वार्ड नं- 3)     माधु चांदवानी 2 वर्ष (वार्ड नं- 4)     किशोर साधवानी 2 वर्ष(वार्ड नं- 4)     अब्दुल हलीम 2 वर्ष (वार्ड नं- 22)     शराफत उल्ला खां 2 वर्ष (वार्ड नं- 22)     शजर उल्ला 5 वर्ष (वार्ड नं- 24)     सतीश विश्वकर्मा 2 वर्ष (वार्ड नं- 36)     अशरफ खान 5 वर्ष (वार्ड नं- 39)     ज्योति खर 2 वर्ष (वार्ड नं- 45)     मंजू विश्वकर्मा 2 वर्ष (वार्ड नं- 80)     लता अहिरवार 2 वर्ष (वार्ड नं- 81)     सुभाष काटे 2 वर्ष (वार्ड नं- 83)

निर्वाचन कार्य में लगे सभी अधिकारी-कर्मचारी तत्परता से कार्य करें: राज्य निर्वाचन आयुक्त अजय सिंह

रायपुर आगामी नगरीय निकाय चुनावों को लेकर राज्य निर्वाचन आयुक्त अजय सिंह ने आज जगदलपुर के धरमपुरा स्थित मॉडल कालेज में बनाए गए स्ट्रांग रूम का निरीक्षण किया और मतदान सामग्री वितरण एवं मतगणना स्थल की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों को कमिशनिंग की तिथि, सुरक्षा व्यवस्था, स्ट्रांग रूम की सुरक्षा व्यवस्था सहित अन्य व्यवस्थाओं के संबंध में जानकारी लेकर आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने नगरीय निकाय चुनाव हेतु ईवीएम मशीनों की कमिशनिंग प्रक्रिया तथा मशीनों के परिवहन की व्यवस्था का भी संज्ञान लिया। अधिकारियों ने बताया कि मशीनों की जांच के बाद  स्ट्रांग रूम तक सुरक्षित पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। राज्य निर्वाचन आयुक्त सिंह ने कहा कि निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव संपन्न कराने के लिए हरसंभव कदम उठाए जाए। उन्होंने निर्वाचन प्रक्रिया में लगे अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देशित किया कि वे पूरी तत्परता से कार्य करें और सभी आवश्यक तैयारियों को समय पर पूरा करें। इस निरीक्षण के दौरान कमिश्नर डोमन सिंह, आई जी सुंदरराज पी., राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव डॉ सर्वेश्वर नरेन्द्र भुरे, नोडल अधिकारी पुलिस ओ पी पाल, कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी हरिस एस, पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा और अन्य संबंधित अधिकारी भी मौजूद रहे।

रायपुर : नगर पंचायत बसना में एक नगर पंचायत अध्यक्ष, और 33 पार्षद निर्विरोध चुने गए

रायपुर नगर पालिक निगम बिलासपुर वार्ड क्रमांक 13 से रमेश पटेल, नगर पालिक निगम कोरबा के वार्ड क्रमांक 18 से नरेन्द्र कुमार देवांगन, नगर पालिक निगम दुर्ग के वार्ड क्रमांक 21 से विद्यावती सिंह, रायगढ़ जिला के नगर पालिक निगम रायगढ़ के वार्ड क्रमांक 18 से श्रीमती पूनम दिबेश सोलंकी और वार्ड क्रमांक 45 से नारायण पटेल पार्षद पद हेतु नगरीय निकाय निर्वाचन 2025 में निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। मुंगेली जिले के नगर पालिक परिषद लोरमी के वार्ड क्रमांक 10 से धारनी पुरूषोत्तम राठौर, वार्ड क्रमांक 17 से भीखम शिवशंकर यादव, कोरबा जिला के नगर पालिका परिषद दीपका के वार्ड क्रमांक 8 से आलोक परेडा, नगर पालिका परिषद कटघोरा वार्ड क्रमांक 13 श्रीमती शिवमती पटेल (नीतू), महासमुंद जिले के नगरपालिका परिषद सरायपाली के वार्ड क्रमांक 5 से रोहित प्रधान एवं वार्ड क्रमांक 13 से गंगाराम पटेल पार्षद पद हेतु निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। नगर पंचायत बसना से अध्यक्ष पद हेतु डॉ. खूशबू अभिषेक अग्रवाल निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। इसी प्रकार नगर पंचायत बसना के वार्ड क्रमांक 4 से आशीष साहू (तिरथो होटल), वार्ड क्रमांक 11 से महेन्दर सिंह (पिन्टू), वार्ड क्रमांक 13 से राकेश डड़सेना पार्षद पद हेतु निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। मुंगेली जिले के नगर पंचायत पथरिया के वार्ड क्रमांक 5 से मनोज कुमार पाण्डे और वार्ड क्रमांक 7 से मेला राम जायसवाल, सक्ती जिला के नगर पंचायत नया बाराद्वार के वार्ड क्रमांक 7 से जितेश शर्मा (अन्नपूर्णा), नगर पंचायत डभरा के  वार्ड क्रमांक 7 से राधा देवी टंडन एवं वार्ड 15 से जयशंकर पटेल, सारगढ़-बिलाईगढ़ जिले के नगर पंचायत बिलाईगढ़ के वार्ड क्रमांक 2 से घनश्याम कहार, वार्ड क्रमांक 3 से मुकेश जायसवाल उर्फ लालू, वार्ड क्रमांक 8 से सौभाग्य शरण सिंह पार्षद पद के लिए निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। सूरजपुर जिले के नगर पंचायत प्रतापपुर के वार्ड क्रमांक 7 से सीता पैकरा, सरगुजा जिले के नगर पंचायत सीतापुर के वार्ड क्रमांक 14 से विवेक कुमार नामदेव, जशपुर जिले के नगर पंचायत बगीचा के वार्ड क्रमांक एक से रामनिवास गुप्ता, रायपुर जिले के नगर पंचायत समोदा के वार्ड क्रमांक 15 से सत्येन्द्र चेलक एवं गरियाबंद जिले के नगर पंचायत फिंगेश्वर के वार्ड क्रमांक 6 से दीपक श्रीवास पार्षद पद के लिए निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। इसी प्रकार बालोद जिले के नगर पंचायत डौण्डी के वार्ड क्रमांक 8 से माधुरी रावटे, वार्ड क्रमांक 9 से राजेन्द्र कुमार मानकर और नगर पंचायत चिखलाकसा के वार्ड क्रमांक 4 से राजू रावटे एवं दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा जिले के नगर पंचायत बारसूर के वार्ड क्रमांक एक से श्रीमती गीता बघेल पार्षद पद हेतु निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। नगर पालिका उप निर्वाचन 2025 के लिए नगरपालिक निगम भिलाई के वार्ड क्रमांक 35 से चंदन यादव और नगर पंचायत कोटा के वार्ड क्रमांक 13 से पी. विजय कुमार परिमि पार्षद पद हेतु निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं।

आज दो बजे चुनाव आयोग करेगा तारीखों का एलान, दिल्ली में एक चरण में हो सकता है चुनाव

नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में चुनावी बिगुल बजने वाला है।  चुनाव आयोग आज विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा करेगा। चुनाव आयोग दोपहर दो बजे चुनावी कार्यक्रम साझा करने के लिए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करेगा। दिल्ली में 70 विधानसभा सीटें हैं। मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 23 फरवरी को समाप्त होने वाला है। दिल्ली में एक चरण में चुनाव हो सकता है। इस बार भी दिल्ली में आम आदमी पार्टी, भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच त्रिकोणीय मुकाबला देखा जा सकता है। सोमवार को ही चुनाव आयोग ने अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी है। इस चुनाव में दो लाख के करीब मतदाता 18 से 19 वर्ष के हैं। वह पहली बार विधानसभा चुनाव में अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। इस सूची में कुल एक करोड़ 55,24,858 मतदाता हैं। चुनाव आयोग ने दर्ज की आठ प्राथमिकी इस सूची में पुरुष मतदाता 85,49,645 हैं, जबकि 71,73,952 महिला मतदाता हैं। इस अंतिम मतदाता सूची के बाद अब आयोग आज चुनाव की तिथियों की घोषणा कर सकता है। थर्ड जेंडर 1,261 हैं। पिछले 20 दिन में रिकार्ड 5.1 लाख फार्म 6 नए मतदाताओं ने आवेदन किया। चुनाव आयोग ने 8 प्राथमिकी दर्ज की है। इसमें 24 लोगों पर गलत सूचना और जानकारी देकर मतदाता पहचान पत्र बनाने का आरोप है। इसे लेकर चुनाव आयोग ने चुनाव पंजीकरण अधिकारियों से एक एक आवेदन की गहन जांच कराने के आदेश दिए हैं। प्रक्रिया के तहत नाम जोड़े और हटाए जाते हैं चुनाव आयोग ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची के लिए नाम प्रक्रिया के तहत जोड़े और हटाए जाते हैं। इसके लिए फॉर्म 6 और फार्म सात होता है। नामों के घटाने और जोड़ने की जानकारी समय-समय पर राजनीति दलों को दी जाती है। 1,67,329 नए मतदाता जुड़े चुनाव आयोग से मिली जानकारी के मुताबिक दिल्ली में एक महीने में 29 अक्तूबर से 28 नवंबर तक 1,35,089 मतदाताओं ने फार्म- 6 और 83,825 ने फार्म 8 के तहत मतदाता सूचियों में नाम जुड़वाने, पता बदलने, नाम को सूची से हटाने और आपत्तियां और सुझाव के लिए आवेदन किया। चुनाव आयोग के संबंधित अधिकारियों ने सभी आवेदनों को 24 दिसंबर तक सुलझा दिया। इस तरह से अंतिम मतदाता सूची जारी होने तक 3,08,942 नए नाम मतदाता सूचियों में जुड़े। 1,41,613 नाम हटाए गए। इस दौरान कुल 1,67,329 मतदाता नए जुड़े। दिल्ली में मतदाता बढ़े वहीं, 2020 के विधानसभा चुनाव की तुलना में इस बार 7.26 लाख और 2024 के लोकसभा चुनाव की तुलना में 3.10 लाख वोटर्स दिल्ली में बढ़े हैं। 2020 के चुनाव में दिल्ली में 1.47 करोड़ मतदाता थे, जबकि, पिछले साल हुए लोकसभा चुनाव में दिल्ली में मतदाताओं की संख्या 1.52 करोड़ से अधिक थी। हर आवेदन को जांचा गया चुनाव आयोग ने पाया की 16 दिसंबर से एक माह में 5.10 लाख नए लोगों ने अपना नाम जुड़वाने के लिए आवेदन किया। ऐसा पहली बार हुआ। ऐसा तब हुआ जबकि तय समय में तीन लाख से ज्यादा मतदाता नई सूची में जुड़ चुके थे। क्योंकि ऐसा 20 दिन के भीतर हो रहा था जब आपत्तियां, जांच का समय गुजर चुका था। यह तत्काल जांच का विषय था। सभी चुनाव पंजीकरण अधिकारियों- ईआरओ को जांच के लिए निर्देशित किया गया। हर आवेदन को जांचा गया। संबंधित अधिकारियों को सौ फीसदी सत्यापन के लिए कहा गया है। फरवरी में खत्म हो रहा दिल्ली विधानसभा का कार्यकाल विधानसभा का कार्यकाल 23 फरवरी, 2025 तक का है। इससे पहले दिल्ली विधानसभा का गठन करने के लिए चुनाव होने हैं। इसके लिए दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से तैयारियां की जा रही हैं। साल 2020 में दिल्ली में ये रहे थे नतीजे साल 2020 के चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 62 सीटों पर जीत दर्ज की थी। भाजपा के खाते में आठ सीटें आईं थीं। जबकि, कांग्रेस का खाता भी नहीं खुला था। दो चुनाव से एक भी सीट नहीं जीत सकी है। साल 2015 के चुनाव में भी आम आदमी पार्टी ने 67 सीटों पर जीत दर्ज की थी। भाजपा को तीन सीटें मिलीं थीं। जबकि कांग्रेस का हाथ खाली रहा था।

विजयपुर में 77.76 प्रतिशत एवं बुधनी में 77.07 प्रतिशत मतदान हुआ

भोपाल मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सुखवीर सिंह ने बताया कि प्रदेश की विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र क्र. 02-विजयपुर एवं विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र क्र. 156-बुधनी में 13 नवम्बर को सफलतापूर्वक मतदान सम्पन्न हुआ। पीठसीन अधिकारियों की डायरी एवं अन्य दस्तावेजों से दर्ज की गई जानकारी के अनुसार दोनों ही विधानसभा क्षेत्रों में हुए मतदान की अंतिम जानकारी निम्नानुसार है- विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र क्र. 02-विजयपुर में कुल 77.76 प्रतिशत मतदान हुआ। यहां 79.14 प्रतिशत पुरूष मतदाताओं और 76.24 प्रतिशत महिला मतदाताओं ने मतदान किया। इसी प्रकार विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र क्र. 156-बुधनी में कुल 77.07 प्रतिशत मतदान हुआ। यहां 80.10 प्रतिशत पुरूष मजदाताओं और 73.82 प्रतिशत महिला मतदाताओं ने मतदान किया। उल्लेखनीय है कि इस मतदान प्रतिशत में पोस्टल बैलेट तथा अनुपस्थित मतदाताओं (Absentee voters) के मतदान की जानकारी सम्मिलित नहीं है। मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्ण सम्पन्न होने पर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री सिंह ने दोनों ही विधानसभा क्षेत्रों के सभी मतदाताओं, राजनैतिक दलों, अभ्यर्थियों, मतदान दल में सम्मिलित सभी अधिकारियों/कर्मचारियों, सुरक्षा व्यवस्था में लगे सभी केन्द्रीय पुलिस सुरक्षा बल एवं राज्य के पुलिस बल तथा मीडिया प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा है कि उप निर्वाचन में शांतिपूर्ण मतदान कराने में सभी का महत्वपूर्ण योगदान रहा। 23 नवम्बर को सुबह 8 बजे से आरंभ होगी मतगणना मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री सुखवीर सिंह ने बताय कि विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र क्र. 02-विजयपुर की मतगणना शासकीय पॉलीटेक्निक महाविद्यालय, जिला श्योपुर एवं विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र क्र. 156-बुधनी की मतगणना शासकीय महिला पॉलीटेक्निक महाविद्यालय, जिला सीहोर में 23 नवम्बर को सुबह 8 बजे से आरंभ होगी।  

विधानसभा चुनाव खर्च पर्यवेक्षक उम्मीदवारों के खर्चों का तीन बार ऑडिट करेंगे

मुंबई  महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में खड़े उम्मीदवारों के खर्च पर चुनाव आयोग की पैनी नजर रहेगी। चुनाव खर्च पर्यवेक्षक उम्मीदवारों के खर्चों का तीन बार ऑडिट करेंगे। पहला निरीक्षण 8-9 नवंबर को होगा, जो उम्मीदवारों के नाम वापस लेने की आखिरी तारीख 4 नवंबर के बाद होगा। इसके बाद 18 नवंबर तक दो और बार जांच की जाएगी। चुनाव आयोग ने उम्मीदवारों के खर्च की सीमा 12 लाख रुपये बढ़ाकर 40 लाख रुपये कर दी है। पहले यह सीमा 28 लाख रुपये थी। उम्मीदवार लंबे समय से खर्च सीमा बढ़ाने की मांग कर रहे थे। चुनाव खर्च में बड़ा बदलाव कब? चुनाव आयोग ने 2022 में लोकसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की खर्च सीमा 75 लाख रुपये से बढ़ाकर 90 लाख रुपये और विधानसभा चुनाव के लिए 28 लाख रुपये से बढ़ाकर 40 लाख रुपये कर दी थी। चुनाव खर्च सीमा में आखिरी बड़ा बदलाव 2014 में किया गया था, जिसे 2020 में 10 प्रतिशत और बढ़ा दिया गया था। 2022 में ही चुनाव आयोग ने लागत फैक्टर और अन्य संबंधित मुद्दों का अध्ययन करने और उचित सिफारिशें करने के लिए एक समिति का गठन किया था। 2014 में किस आधार पर हुआ था बदलाव? समिति ने राजनीतिक दलों, मुख्य निर्वाचन अधिकारियों और चुनाव पर्यवेक्षकों से सुझाव आमंत्रित किए थे। समिति ने पाया कि मतदाताओं की संख्या में वृद्धि हुई है और 2014 के बाद से लागत मुद्रास्फीति सूचकांक में भी वृद्धि हुई है। इसने प्रचार के बदलते तरीकों पर भी विचार किया, जो धीरे-धीरे वर्चुअल प्रचार की ओर बढ़ रहे हैं। चुनाव अधिकारियों ने बताया कि उम्मीदवारों को खर्च के रजिस्टर में बदलाव करते समय विवरण जमा करना होगा और अगर कोई उम्मीदवार सीमा से अधिक खर्च करता है, तो नोटिस जारी किए जाएंगे। कैसे तय किया जाता है चुनाव खर्च खर्च प्रकोष्ठ को सौंपे गए खर्चों में गड़बड़ी के लिए चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के खिलाफ नोटिस जारी किए जा सकते हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान भी प्रमुख उम्मीदवारों को नोटिस जारी किए गए थे। उम्मीदवारों को 48 घंटे के भीतर नोटिस का जवाब देने का समय दिया जाता है। एक अधिकारी ने बताया कि अगर तय समय सीमा के भीतर खर्च का विवरण जमा नहीं किया जाता है, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। विधानसभा चुनाव से पहले जिला निर्वाचन अधिकारी उन वस्तुओं की दरें तय करते हैं जिनका उपयोग उम्मीदवार करेंगे, और वही दर चुनावी खर्च के तहत दिखानी होगी। दरें तय करने से पहले विचार-विमर्श किया जाता है। 10 रुपये की चायआने-जाने के लिए रिक्शा, टेंपो, एसयूवी किराए पर लेने की दरें चुनाव व्यय प्रकोष्ठ की ओर से निर्धारित मूल्य सूची में लिखी गईं हैं। इन दरों के आधार पर चुनावी खर्चों की जांच की जाती है। इसमें चाय की कीमत 10 रुपये और कॉफी की कीमत 15 रुपये तय करने से लेकर स्टॉल लगाने के लिए फर्नीचर और प्रचार सामग्री के उपयोग तक, चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार इन्हीं दरों के आधार पर खर्च दिखा सकते हैं। सभी हितधारकों से चर्चा के बाद दरें तय की जाती हैं। यह चुनाव आयोग का एक महत्वपूर्ण कदम है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हों। इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि पैसे वाले उम्मीदवारों को अनुचित लाभ न मिले।

बुधनी और विजयपुर में 13 नवम्बर को होगा मतदान, सम्पूर्ण सीमाक्षेत्र में लागू रहेगी आदर्श आचार संहिताः सुखवीर सिंह

भोपाल सीईओ सुखवीर सिंह ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग ने विधानसभा क्षेत्र में उप निर्वाचन कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। घोषणा के साथ ही सीहोर जिले की सम्पूर्ण सीमाक्षेत्र में आदर्श आचार संहिता पूरी तरह से प्रभावशील हो गई है। उन्होंने दल पदाधिकारियों से आदर्श आचार संहिता का शब्दशः पालन करने की अपील की। उन्होंने दल पदाधिकारियों को बताया कि उप निर्वाचन के लिए 18 से 25 अक्तूबर तक नाम-निर्देशन पत्र भरे जाएंगे। नाम-निर्देशन पत्रों की संवीक्षा 28 अक्तूबर को होगी और 30 अक्तूबर तक नाम-निर्देशन पत्र वापस लिये जा सकेंगे। मतदान 13 नवंबर को एवं मतगणना 23 नवंबर को होगी। सीईओ सिंह ने बताया कि बुदनी विधानसभा क्षेत्र में 363 मतदान केन्द्र बनाये गये हैं। बुधनी में मतदाता बता दें कि सीहोर जिले की बुधनी विधानसभा क्षेत्र में वर्तमान में 2 लाख 76 हजार 591 मतदाता हैं, जिसमें 1 लाख 33 हजार 280 महिला मतदाता और 1 लाख 43 हजार 111 पुरूष मतदाता हैं। थर्ड जेण्डर 06 और सर्विस वोटर्स 194 हैं। उप निर्वाचन कार्यक्रम 18 अक्तूबर को उप निर्वाचन के गजट नोटिफिकेशन के साथ नाम-निर्देशन पत्र भरने की प्रक्रिया होगी शुरू, 25 अक्तूबर- नाम-निर्देशन पत्र भरने की अंतिम तारीख, 28 अक्तूबर- नाम-निर्देशन पत्रों की संवीक्षा, 30 अक्तूबर- नाम वापसी की अंतिम तारीख, 13 नवंबर – मतदान दिवस, 23 नवंबर मतगणना होगी। विजयपुर में 327 एवं बुधनी में हैं 363 मतदान केंद्र सीईओ सुखवीर सिंह ने बताया कि विजयपुर विधानसभा क्षेत्र में 327 एवं बुदनी विधानसभा क्षेत्र में 363 मतदान केन्द्र बनाये गये हैं। विजयपुर एवं बुधनी में मतदाता उन्होंने बताया कि श्योपुर जिले की विजयपुर विधानसभा क्षेत्र में वर्तमान में 2 लाख 54 हजार 750 मतदाता हैं, जिसमें 1 लाख 21 हजार 01 महिला मतदाता और 1 लाख 33 हजार 554 पुरुष मतदाता हैं। थर्ड जेण्डर मतदाता 02 और सर्विस वोटर्स 103 हैं। इसी प्रकार सीहोर जिले की बुधनी विधानसभा क्षेत्र में वर्तमान में 2 लाख 76 हजार 591 मतदाता हैं, जिसमें 1 लाख 33 हजार 280 महिला मतदाता और 1 लाख 43 हजार 111 पुरूष मतदाता हैं। थर्ड जेण्डर 06 और सर्विस वोटर्स 194 हैं। बैठक में अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी राजेश कुमार कौल, संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी बसंत कुर्रे, विवेक श्रोतिय, मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी से एसएस उप्पल, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जेपी धनोपिया, आम आदमी पार्टी से सुमित चौहान एवं बहुजन समाज पार्टी से पूर्णेंद्र अहिरवार उपस्थित रहे। उप निर्वाचन कार्यक्रम – 18 अक्टूबर को उप निर्वाचन के गजट नोटिफिकेशन के साथ नाम-निर्देशन पत्र भरने की प्रक्रिया होगी शुरू – 25 अक्टूबर – नाम-निर्देशन पत्र भरने की अंतिम तारीख – 28 अक्टूबर – नाम-निर्देशन पत्रों की संवीक्षा – 30 अक्टूबर – नाम वापसी की अंतिम तारीख – 13 नवम्बर – मतदान दिवस – 23 नवम्बर – मतगणना दिवस

हरियाणा के 2 दिग्गजों को हरा, दुष्यंत चौटाला की जब्त कराई जमानत तक, 32 वोट से जीते देवेंद्र अत्री

रोहतक हरियाणा में बीजेपी 48 सीटें जीतकर लगातार तीसरी बार सरकार बनाने जा रही है. इस बार हरियाणा में सबसे बड़ी जीत फिरोजपुर झिरका सीट से कांग्रेस प्रत्याशी मामन खान ने दर्ज की है. नूंह दंगों में गिरफ्तार हुए मामन खान 98 हजार से ज्यादा वोटों से जीते हैं. उन्होंने बीजेपी कैंडिडेट नसीम अहमद को हराया है. वहीं अगर सबसे कम अंतर वाली जीत की बात करें तो उचाना कलां में बीजेपी कैंडिडेट देवेंद्र अत्री सबसे कम वोटों से जीते हैं.   फिरोजपुर झिरका से कांग्रेस विधायक मामन खान को नूंह हिंसा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. इन आरोपों के बावजूद मामन खान सबसे ज्यादा जीत के अंतर से विजेता बनकर उभरे. हालांकि हरियाणा में उनकी पार्टी सरकार नहीं बना सकी. मामन खान को मिले एक लाख 30 हजार वोट मामन खान को जहां 1,30,497 वोट मिले, वहीं  नसीम अहमद को केवल 32 हजार 56 वोट मिले. इसके अलावा आईएनएलडी प्रत्याशी मोहम्मद हबीब को 15,638 वोट ही मिले. इस सीट पर जेजेपी प्रत्याशी जान मोहम्मद को केवल 720 वोट मिले और वो 5वें नंबर पर रहे. इस सीट पर आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी वसीम जफर को NOTA से भी कम वोट मिले. जहां NOTA को 439 वोट मिले, जबकि AAP कैंडिडेट को केवल 234 वोट मिले.   BJP के देवेंद्र अत्री सबसे कम वोटों से जीते इसके अलावा अगर सबसे कम अंतर से जीत की बात करें तो वो उचाना कलां से बीजेपी प्रत्याशी देवेंद्र अत्री की हुई है. इस सीट पर देवेंद्र अत्री ने कांग्रेस उम्मीदवार बृजेंद्र सिंह को महज 32 वोटों से हराया है. जहां देवेंद्र अत्री को 48,968 वोट मिले हैं, वहीं बृजेंद्र सिंह को 48,936 वोट मिले. इसके अलावा इस सीट पर सबसे चर्चित नाम पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला का था, जो इस बार 5वें नंबर पर रहे. दुष्यंत को महज 7,950 वोट ही मिले. जबकि आम आदमी पार्टी के कैंडिडेट पवन फौजी 8वें नंबर पर रहे. हरियाणा में क्या रहे चुनाव के नतीजे? हरियाणा में बीजेपी ने इस बार शानदार प्रदर्शन करते हुए जीत की हैट्रिक लगाई है. बीजेपी को इस बार 48 सीटों पर जीत मिली है, जबकि कांग्रेस 37 सीटों पर ही जीत सकी. इस चुनाव में जनता ने दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी को पूरी तरह से नकार दिया. जेजेपी ने चंद्रशेखर की पार्टी एएसपी के साथ गठबंधन किया था. इसके बाद भी दोनों में से किसी का खाता नहीं खुला. इसके अलावा इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) का इस बार ठीक प्रदर्शन रहा. पार्टी दो सीटें जीतने में कामयाब रही. हालांकि ऐलनाबाद सीट से अभय चौटाला की हार हुई. चुनावों में INLD और BSP ने मिलकर चुनाव लड़ा था. उसके बाद भी BSP अपना खाता नहीं खोल पाई. राज्य में तीन निर्दलीय उम्मीदवारों की भी जीत हुई है. इनमें हिसार से सावित्री जिंदल, गनौर से देवेंद्र काद्यान और बहादुरगढ़ से राजेश जून की जीत हुई है.  

Jammu Kashmir में एनसी को पूर्ण बहुमत, BJP की सीटों ने सबको चौंकाया

नई दिल्ली  हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए हो रही मतगणना के अब तक के रुझानों में भाजपा ने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है। दोपहर 2 बजे तक के ताजा रुझानों के मुताबिक, राज्य की 90 में से 50 सीटों पर भाजपा आगे चल रही है, जबकि कांग्रेस 35 सीटों पर और निर्दलीय तीन सीटों पर आगे चल रहे हैं। ये चुनावी रुझान एग्जिट पोल के तमाम अनुमानों से ठीक उलट हैं। ऐसे में फिर से इस बात की चर्चा होने लगी है कि क्या भाजपा ने अपनी पुरानी ट्रिक आजमा कर हरियाणा में चुनावी बाजी पलट दी और हरियाणा में चुनावी इतिहास रचते हुए जीत की हैट्रिक लगाई है। इससे पहले राज्य में अब तक किसी भी राजनीतिक दल ने लगातार तीन बार चुनावों में जीत दर्ज नहीं की थी। हरियाणा में बीजेपी को बड़ा बहुमत मिल गया है। अब तक के चुनाव परिणामों के मुताबिक बीजेपी 49 सीटों पर जीत हासिल कर रही है। वहीं कांग्रेस 26, आईएनएलडी 2 और अन्य 3 सीटों पर जीत रहे हैं। हरियाणा के चुनाव परिणाम एग्जिट पोल को फेल कर दिया है। ज्यादातर एग्जिट पोल में हरियाणा में कांग्रेस की जीत की भविष्यवाणी की गई थी। हालांकि बीजेपी ने बड़ी जीत दर्ज कर ली है। कैथल से रणदीप सिंह सुरजेवाला के बेटे आदित्य सुरजेवाला ने जीत दर्ज की है। लाडवा सीट से मुख्यमंत्री नायब सैनी जीत गए हैं। हरियाणा के मंत्री अनिल विज शुरुआती रुझानों में पीछे चल रहे थे। हालांकि उन्होंने भी अपने प्रतिद्वंद्वी को शिकस्त दे दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शाम नई दिल्ली में बीजेपी हेडक्वार्टर में कार्यकर्ताओं क संबोधित करेंगे। बीजेपी ने जश्न के लिए 100 किलो जलेबी का ऑर्डर दे दिया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस जीत का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी कार्यकर्ताओं को दिया है। जम्मू-कश्मीर के चुनाव परिणाम का हर अपडेट लोकसभा चुनावों के बाद हरियाणा में विधानसभा चुनाव भाजपा और कांग्रेस के बीच पहला बड़ा सीधा मुकाबला था। इस चुनाव के परिणाम का इस्तेमाल विजेता द्वारा अन्य राज्यों में अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए किया जाएगा, जहां अगले कुछ महीनों में चुनाव होने हैं। हरियाणा की 90 सीट पर 464 निर्दलीय और 101 महिलाओं सहित कुल 1,031 उम्मीदवार मैदान में थे। इन सीटों पर पांच अक्टूबर को एक ही चरण में मतदान हुआ था। कई एग्जिट पोल ने हरियाणा में कांग्रेस की जीत का अनुमान जताया था। इस बार हरियाणा में 67.90 फीसदी मतदान हुआ था। नेशनल कॉन्फ्रेंस बनी सबसे बड़ी पार्टी जम्मू-कश्मीर विधानसभा की सभी 90 सीटों पर चुनाव परिणाम परिणाम घोषित कर दिए गए हैं. नेशनल कॉन्फ्रेंस को 42, बीजेपी को 29, कांग्रेस को 6, पीडीपी 3, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस 1, आप 1, सीपीआई-एम 1 और निर्दलीय 7 शामिल हैं. ‘दो राज्यों को कर दिया कांग्रेस मुक्त’, जी किशन रेड्डी केंद्रीय मंत्री और  जम्मू-कश्मीर बीजेपी विधानसभा चुनाव प्रभारी जी. किशन रेड्डी ने चुनाव परिणाम के रुझानो पर कहा, “NC ने लोगों को धर्म के नाम पर बांटने का प्रयास किया. उन्होंने बहुत कुछ कहा, लेकिन इतना करने के बाद भी जम्मू और कश्मीर में हमें अच्छी सीटें मिली हैं. राहुल गांधी बार-बार कहते रहे कि पीएम मोदी पर जनता का विश्वास कम हो गया है, लेकिन ऐसा नहीं है. हरियाणा को हमने कांग्रेस मुक्त कर दिया है और जम्मू-कश्मीर भी कांग्रेस मुक्त हो गया है.” क्या है भाजपा की वह ट्रिक दरअसल, भाजपा किसी भी राज्य में अपनी सरकार के लंबे कार्यकाल के खिलाफ उपजे जनाक्रोश या गुस्से को दबाने और एंटी इनकम्बेंसी फैक्टर को कम करने के लिए चुनावों से कुछ महीने पहले मुख्यमंत्री को बदलती रही है। भाजपा ने इसका सफल प्रयोग गुजरात में किया था। उसके बाद उत्तराखंड में भी भाजपा इसे आजमा चुकी थी। उसी ट्रिक को भाजपा ने चुनावों से कुछ महीने पहले हरियाणा में भी आजमाया और तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को हटाकर और उनकी जगह नायब सिंह सैनी की ताजपोशी करवा दी। भाजपा ने इसी के साथ प्रदेश भाजपा अध्यक्ष को भी बदल दिया। खट्टर ने 26 अक्तूबर 2014 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। वह इस पद पर 12 मार्च 2024 तक रहे। फिर उनकी जगह उनके ही करीबी और प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष रहे नायब सिंह सैनी को मुख्यमंत्री बनाया गया। इसके बाद भाजपा खट्टर को केंद्र की राजनीति में ले आई। इससे हरियाणा में खट्टर सरकार के प्रति जो नाराजगी और एंटी एनकम्बेंसी थी, वह कम हो गई। चूंकि नायब सिंह सैनी अभी नए-नए मुख्यमंत्री हैं और उनका कार्यकाल बहुत छोटा रहा और इस बीच उन्होंने कई जन कल्याणकारी योजनाओं का ऐलान किया। इसलिए आम जनों को भाजपा ये संदेश देने में कामयाब रही कि सैनी को एक और मौका देना चाहिए, ताकि वह पूर्ण कार्याकल के लिए काम कर सकें। पीएम मोदी ने भी कम रैलियों को किया संबोधित खट्टर गैर जाट नेता थे और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की पसंद थे। चूंकि भाजपा लोकसभा चुनावों में यह देख चुकी है कि केंद्रीय नेतृत्व के प्रति जनाक्रोश है, इसलिए प्रदेश स्तर के नेताओं को चुनाव प्रचार में खुली छूट दी और संभवत: यही वजह रही कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिर्फ चार चुनावी रैलियां हरियाणा में कीं, जबकि इससे पहले 2014 और 2019 में उन्होंने धुआंधार चुनाव प्रचार किया था। ऐसा कर प्रधानमंत्री ने जवानों, पहलवानों और अग्विनीरों के तथाकथित आक्रोश को भी कम करने की सोची समझी रणनीति पर काम की और चुनावों के दौरान केंद्र सरकार की कई संस्थाओं ने भर्तियों में अग्निवीरों के लिए कोटे का ऐलान किया। रही-सही कसर भाजपा ने चुनावी घोषणा पत्र के जरिए पूरी कर दी, जिसमें महिलाओं को कांग्रेस से भी ज्यादा नकद देने का वादा किया गया है। भाजपा ने और कहां अपनाई CM बदलो ट्रिक भाजपा ने गुजरात में 2022 के विधानसभा चुनावों से पहले विजय रुपाणी की जगह भूपेंद्र पटेल को मुख्यमंत्री बना दिया था। इससे नरेंद्र मोदी के बाद की सरकार के खिलाफ उपजा एंटी इनकम्बेंसी फैक्टर कम हो गया था और 2022 के दिसंबर में गुजरात चुनावों में भाजपा फिर से जीतने में कामयाब रही थी। गुजरात में यह भाजपा की डबल हैट्रिक थी। इसी तरह उत्तराखंड में भी 2022 के विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा ने वहां के … Read more

हरियाणा में लोकतंत्र के महापर्व में आहुति देने सुबह से लोग लाइन में लगे, हो रहा मतदान

रोहतक हरियाणा में 15वीं विधानसभा का चुनाव आज हो रहा है, जिसके लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. . अंबाला शहर विधानसभा में कुल 271 बूथ बनाए गए हैं, जहां चुनाव कराने के लिए प्रशासन ने सभी आवश्यक इंतजाम किए हैं. 5 अक्टूबर को एक चरण में ही 90 सीटों पर वोटिंग हो जाएगी। जम्मू-कश्मीर में जहां फारुख अब्दुल्ला की पार्टी नैशनल कॉन्फ्रेंस मुकाबले में आगे है तो हरियाणा में स्थिति अलग है। यहां बीजेपी, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच मुकाबला है। दोनों विधानसभा चुनाव के नतीजे 8 अक्टूबर को आ जाएंगे। कल हरियाणा में वोटिंग के बाद शाम को एग्जिट पोल भी जारी कर दिए जाएंगे। अशोक तंवर के पार्टी में आने के बाद अजय माकन ने कहा- हम सभी ने संविधान की रक्षा करने का प्रण लिया है अशोक तंवर के कांग्रेस में आने के बाद पार्टी के कोषाध्यक्ष अजय माकन ने कहा कि हम सभी ने संविधान की रक्षा करने का प्रण लिया है। हम देश के संविधान और बाबासाहेब आंबेडकर के सिद्धांतों की रक्षा के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। हमें आशा है कि अशोक तंवर जी के आने से इन प्रयासों को और बल मिलेगा। वहीं पार्टी ज्वाइन करते हुए अशोक तंवर ने कहा कि मेरे राजनीतिक जीवन की शुरुआत कांग्रेस पार्टी से हुई। कुछ समय के लिए मैं भाजपा में शामिल हो गया था, लेकिन वहां देश के संविधान और बाबासाहेब के प्रति कोई आस्था नहीं है। EVM और चुनाव सामग्री का वितरण  चुनाव आयोग के अधिकारियों के सामने स्ट्रांग रूम खोला गया, और ईवीएम मशीनों तथा चुनाव से संबंधित सामग्री उन सभी कर्मचारियों को सौंपी गई जो विभिन्न बूथों पर तैनात रहेंगे. अंबाला शहर में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है. चुनाव अधिकारी दर्शन कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि अंबाला शहर विधानसभा में कुल 271 बूथ बनाए गए हैं. सभी पोलिंग पार्टियां यहां पहुंच चुकी हैं और उनकी ट्रेनिंग भी पूरी कर ली गई है. उन्होंने कहा कि चुनाव से जुड़ी सारी सामग्री इन सभी लोगों को दी जा रही है, जिन्हें पुलिस फोर्स के साथ अपने-अपने बूथों के लिए रवाना होना है. सुरक्षा व्यवस्था सुरक्षा को लेकर अधिकारियों ने बताया कि शहर में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरी तरह से पुलिस बल की तैनाती की गई है. सभी पोलिंग बूथ पर सुरक्षा के लिए कैमरे लगाए गए हैं, जो हर समय लाइव चलेंगे. इसके अलावा, तीन विशेष बूथ भी बनाए गए हैं, जिसमें पिंक बूथ और युवा बूथ शामिल हैं. कई सीटों पर चुनाव बहुकोणीय होने की संभावना कुल 1031 उम्मीदवारों में से 464 निर्दलीय उम्मीदवार है। चुनाव बहुकोणीय है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पाटर्ी (भाजपा) और मुख्य विपक्षी दल काँग्रेस के अलावा चुनावी मैदान में जननायक जनता पाटर्ी-आजाद समाज पार्टी, गठबंधन, इंडियन नैशनल लोकदल-बहुजन समाज पाटर्ी गठजोड़ और आम आदमी पार्टी भी हैं। मुख्य मुकाबला भाजपा और काँग्रेस में माना जा रहा है। जहां भाजपा‘नॉन-स्टॉप हरियाणा’व‘भरोसा दिलसे, भाजपा फिर से’के नारे के साथ हैट्रिक लगाने की उम्मीद कर रही है, वहीं काँग्रेस ‘भाजपा जा रही है, काँग्रेस आ रही है’ और ‘हाथ बदलेगा हालात’ के नारों के साथ सत्ता में वापसी का दावा कर रही है। अन्य दल भी ‘किंगमैकर’ बनने से लेकर अपने बूते सरकार बनाने तक के दावे कर रहे हैं। छोटे दलों, रिश्तेदारों के एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ने से लेकर बागियों सहित बड़ी संख्या में निर्दलीय प्रत्याशियों के मैदान में होने से राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों का खेल बिगाड़ने की संभावनाओं के कारण कई सीटों पर मुकाबला कड़ा व रोचक हो गया है। वीआईपी सीटों पर सभी की रहेंगी निगाहें जिन सीटों पर लोगों की नजर रहेगी उनमें कुरुक्षेत्र जिले की लाड़वा (मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी यहाँ से प्रत्याशी हैं), सोनीपत जिले की गढ़ी सांपला किलोई (पूर्व मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष भूपेन्द्र सिंह हुड्डा प्रत्याशी हैं) जींद जिले की उचाना कलाँ (पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला यहाँ से प्रत्याशी हैं) और जुलाना (काँग्रेस ने पहलवान विनेश फोगाट को टिकट दिया है), हिसार (यहाँ अमीरतम महिला प्रत्याशी सावित्री जिंदल भाजपा से बगावत कर चुनाव लड़ रही हैं जबकि उनके पुत्र नवीन जिंदल लोकसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर जीतकर सांसद बने हैं), सिरसा जिले की डबवाली जहां चौटाला कुनबे से तीन सदस्य – काँग्रेस के अमित सिहाग, भाजपा से इनेलो गए आदित्य चौटाला और जजपा से दिग्विजय चौटाला आपस में भिड़ रहे हैं), एलानाबाद 2019 के विधानसभा चुनाव में यह एकमात्र सीट थी, जिस पर इनेलो को जीत हासिल हुई थी। अभय सिंह चौटाला ने किसान आंदोलन में दिया था इस्तीफा किसान आंदोलन के समर्थन में अभय सिंह चौटाला ने इस्तीफा दिया था और फिर उपचुनाव में जीते थे), भिवानी जिले की तोशाम (हाल ही में अपनी माँ किरण चौधरी के साथ काँग्रेस छोड़कर भाजपा में गई बंसीलाल परिवार की श्रुति चौधरी का मुकाबला उनके चचेरे भाई अनिरुद्ध चौधरी से है) और अंबाला शहर और अंबाला छावनी (शहर से जहां पूर्व मंत्री निर्मल सिंह काँग्रेस प्रत्याशी हैं, उनकी बेटी चित्र सरवारा छावनी से काँग्रेस से बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ रही हैं और पूर्व गृह मंत्री अनिल विज को टक्कर दे रही हैं) आदि हैं।

JK विधानसभा चुनाव के दौरान 130 करोड़ रुपये की जब्ती हुई: मुख्य निर्वाचन अधिकारी

श्रीनगर  चुनाव अधिकारियों के अनुसार जम्मू-कश्मीर में चल रहे विधानसभा चुनावों के दौरान आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) के कुल 1,263 उल्लंघनों की सूचना मिली और 130 करोड़ रुपये की नकदी और अन्य सामग्री जब्त की गई। मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) पीके पोल ने कहा कि पुलिस विभाग ने सबसे अधिक 107.50 करोड़ रुपये जब्त किए हैं। उन्होंने बताया कि अब तक कुल 1,263 एमसीसी उल्लंघनों में से 600 को जांच और उचित कार्रवाई के बाद बंद कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि 364 शिकायतों की जांच चल रही है, जिनका भी जल्द ही निपटारा कर दिया जाएगा। इसके अलावा 115 उम्मीदवारों, राजनीतिक दलों, मीडिया घरानों और अन्य को एमसीसी उल्लंघन के लिए नोटिस जारी किए गए हैं। सीईओ ने बताया कि ड्रग्स, नकदी और शराब से जुड़ी अवैध गतिविधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए प्रवर्तन एजेंसियों ने 32 एफआईआर दर्ज की हैं। पोल ने कहा, “2024 के विधानसभा चुनाव के दौरान अब तक जम्मू-कश्मीर में विभिन्न प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा कुल 130 करोड़ रुपये की जब्ती की गई है।” विस्तृत जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि पुलिस विभाग ने 107.50 करोड़ रुपये, सीजीएसटी ने 9.88 करोड़ रुपये, एसजीएसटी/सीटी ने 8.03 करोड़ रुपये, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने 2.06 करोड़ रुपये, आयकर विभाग ने 87 लाख रुपये तथा राज्य आबकारी विभाग ने 50 लाख रुपये की जब्ती की है। विभिन्न राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को रैलियां, जुलूस, पार्टी कार्यालय खोलने, वाहन, बैनर, झंडे, पर्चे, होर्डिंग्स, नुक्कड़ सभाएं, घर-घर जाकर प्रचार आदि के संबंध में 7,088 अनुमतियां दी गई हैं। तीसरे और अंतिम चरण के लिए मतदान 1 अक्टूबर को होना है। पहले चरणों में मतदाताओं की संख्या काफी अच्छी रही थी, 18 सितंबर को पहले चरण में 61.38 प्रतिशत और 26 सितंबर को दूसरे चरण में 57.31 प्रतिशत मतदान हुआ था। अगस्त 2019 में संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद से जम्मू और कश्मीर में यह पहला विधानसभा चुनाव है, जिसके नतीजे 8 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे।  

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