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राज्यसभा चुनाव परिणाम: NDA-22, कांग्रेस-6, जानिए किसे मिला लाभ और किसे हुआ नुकसान

 नई दिल्ली बिहार, हरियाणा और ओडिशा की 11 राज्यसभा सीटों पर सोमवार को चुनाव में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के आगे विपक्षी की सारी कोशिश बेकार साबित हुईं. बीजेपी ने ऐसी रणनीति बनाई कि बिहार में आरजेडी नेता तेजस्वी यादव का असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के साथ हाथ मिलान भी काम नहीं आ सका तो ओडिशा में कांग्रेस और बीजेडी की जोड़ी भी कोई कमाल नहीं कर सकी। तीन राज्यों की 11 राज्यसभा सीटों में से एनडीए ने 9 सीटों पर जीत दर्ज की है जबकि विपक्ष को सिर्फ दो राज्यसभा सीटें ही मिल सकी है. बीजेपी ने 5 सीटें जीती हैं और उसके सहयोगियों को 4 सीट मिली है. कांग्रेस और बीजेडी एक-एक राज्यसभा सीटें जीत सकती है. राज्यसभा के ये नतीजे सोमवार को हुए चुनाव के है, लेकिन फाइनल आंकड़ा अलग है। देश के 10 राज्यों की कुल 37 राज्यसभा सीटों पर चुनाव हुए हैं, जिसमें सात राज्यों के 26 राज्यसभा सदस्य पहले ही निर्विरोध निर्वाचित चुन लिए गए थे. तीन राज्यों की 11 सीटों पर सोमवार को चुनाव हुए और उसके बाद नतीजे आए हैं. इस तरह से 37 राज्यसभा सीटों के चुनाव का फाइनल नतीजे देखें तो बीजेपी के अगुवाई वाले एनडीए ने 22 सीटें जीती हैं तो विपक्ष के खाते में 15 सीटें आईं हैं। 37 राज्यसभा सीटों का फाइनल नतीजा अप्रैल-2026 में खाली होने वाली 37 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव हो गए हैं और अब फाइनल नतीजे भी आ गए. 37 राज्यसभा सीटों में 26 सीटें पर पहले ही निर्विरोध सदस्यों का चुन लिया गया था, जिसमें एनडीए और विपक्ष को 13-13 सीटें मिली थी. अब सोमवार को हरियाणा, बिहार और ओडिशा की 11 राज्यसभा सीटों पर सोमवार को चुनाव हुए, जिसमें एनडीए 9 और विपक्ष दो सीटें जीती है. इस तरह से चुनाव का फाइनल स्कोर देखें तो एनडीए को 22 सीटें मिली है जबकि विपक्ष के हिस्सा में 15 सीट ही आ सकी हैं। राज्यसभा चुनाव में एनडीए को मिली 22 सीटों में देखें तो 13 सीटें बीजेपी ने जीती हैं जबकि 9 सीटें उसके सहयोगी ने जीती हैं. जेडीयू ने 2, शिंद की शिवसेना एक, अजित पवार की एनसीपी एक, पीएमके एक, AIADMK एक, यूपीपीएल एक, आरएलएसएम एक और एक सीट पर बीजेपी के समर्पित निर्दलीय उम्मीदवार ने जीती है। वहीं, विपक्ष को मिली 15 राज्यशभा सीटों के पार्टी के लिहाज से देखें तो कांग्रेस को 6 सीटें टीएमसी को 4 सीटें, डीएमके को 3 सीटें, शरद पवार की एनसीपी को एक सीटें और एक सीट बीजेडी को मिली है। राज्यसभा में किसे नफा और किसे नुकसान राज्यसभा चुनाव पहले और नतीजे आने के बाद देखते हैं तो एनडीए को 10 सीटों का फायदा हुआ और विपक्ष को 10 सीटों का नुकसान. चुनाव से पहले एनडीए के पास 12 राज्यसभा सीटें थी, लेकिन अब बढ़कर 22 हो गई हैं जबकि विपक्ष के पास 25 राज्यसभा सीटें थी, जो अब घटकर के 15 रह गई हैं। देश के 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के आंकड़े देखें तो बीजेपी के पास 9 सीटें थी, जो अब बढ़कर 13 हो गई हैं. जेडीयू ने अपनी दोनो सीटों को बरकरार रखा है.  इसके अलावा AIADMK, ने अपनी एक सीट, पीएमके ने भी अपनी एक सीट तो आरएलएसएम ने अपनी-अपनी एक-एक सीट को बचाए रखा है। वहीं, विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक की बात करें तो 18 राज्यसभा सीटें उसके कब्जे में थी, जिसमें से 4 सीटें कांग्रेस के पास थी, जो बढ़कर अब 6 हो गई हैं. इस तरह कांग्रेस को दो सीटों का फायदा मिला है. टीएमसी ने अपनी 4 सीटें बरकार रखी हैं. डीएमके 4 सीटों से घटकर 3 पर रह गई है। आरजेडी के पास 2 सीटें थी, जो अब घटकर जीरो हो गई है. एक सीट शिवसेना (यूबीटी) और एक सीट सीपीआईएम के पास थी, लेकिन उन्हें एक सीट भी नहीं मिली. इसके चार सीटें अन्य दलों के पास थी, जिसमें दो सीटें बीजेडी के पास थी, जिसमें से एक सीट ही उसे मिल सकी. बीआरएस ने अपनी एकलौती सीट भी गंवा दी। राज्यवार राज्यसभा चुनाव के नतीजे क्या रहे? महाराष्ट्र से 7 राज्यसभा सीटों में बीजेपी को चार, एनसीपी और शिवसेना को एक-एक सीट मिली है. इसके अलावा एक सीट पर विपक्ष से शरद पवार चुने गए हैं.  बीजेपी को दो सीट का फायदा तो कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और शरद पवार की एनसीपी को एक सीट का घाटा हुआ. अजित पवार और शिंदे को एक-एक सीट का लाभ मिला। तमिलनाडु की  छह राज्यसभा सीटों पर चुनाव में डीएमके को एक सीट का नुकसान तो कांग्रेस को एक सीट का लाभ मिला है. AIADMK और पीएमके अपनी एक-एक सीट बचाने में कामयाब रहीं. पश्चिम बंगाल की 5 राज्यसभा सीटों में टीएमसी अपनी चार सीटें बचाए रखा तो बीजेपी को एक सीट का लाभ और लेफ्ट को नुकसान हुआ। बिहार की पांच राज्यसभ सीटों में जेडीयू ने अपनी दोनों सीटें बचाए रखा तो आरजेडी को 2 सीट का नुकसान. बीजेपी को दो सीट का लाभ हुआ तो उपेंद्र कुशवाहा अपनी सीट बचा लिया है.  ओडिशा की चार राज्यसभा सीटों में बीजेपी अपनी दोनों सीटें बचाए रख लिया तो बीजेडी को एक सीट का नुकसान हुआ है.  इसके अलावा एक सीट बीजेपी ने अपने समर्थन से निर्दलीय को जिता लिया. असम की तीन राज्यसभा सीटों में बीजेपी अपनी दोनों सीटें बचा ली है तो असम गढ़ परिषद के पास एक सीट का नुकसान हुआ। छत्तीसगढ़ में बीजेपी को एक सीट का फायदा तो कांग्रेस को एक सीट का नुकसान हुआ. तेलंगाना की दोनों सीटें कांग्रेस जीत ली है, उसे एक सीट का लाभ मिला है तो बीआरएस को एक सीट का नुकसान. हरियाणा की दो सीटों में बीजेपी और कांग्रेस एक-एक सीट जीती हैं, लेकि बीजेपी को एक सीट का नुकसान हुआ है.  हिमाचल में कांग्रेस को एक सीट का लाभ मिला तो बीजेपी को नुकसान। 

बारामती उपचुनाव में सुप्रिया सुले का बड़ा कदम, सुनेत्रा पवार को दिया वॉकओवर, भाभी के खिलाफ नहीं उतरे उम्मीदवार

मुंबई  राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने कहाकि उनकी पार्टी आगामी बारामती विधानसभा उपचुनाव में डिप्टी सीएम और राकांपा नेता सुनेत्रा पवार के खिलाफ कोई उम्मीदवार नहीं उतारेगी। निर्वाचन आयोग ने रविवार को घोषणा की कि पुणे के बारामती और अहिल्यानगर के राहुरी में उपचुनाव 23 अप्रैल को होंगे। बारामती और राहुरी उपचुनाव क्रमश: पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक शिवाजी कर्डिले के निधन के कारण जरूरी हो गए हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) की अध्यक्ष सुनेत्रा पवार के बारामती से उपचुनाव लड़ने की संभावना है। चुनाव पर क्या कहा सुले ने दिल्ली में पत्रकारों से कहाकि मैंने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि राकांपा (शप) बारामती उपचुनाव नहीं लड़ेगी। हम सुनेत्रा वहिनी (भाभी) के खिलाफ अपना उम्मीदवार नहीं उतारेंगे। राहुरी सीट के संबंध में (विपक्षी) महा विकास आघाडी (एमवीए) के सहयोगी इस सीट पर विचार-विमर्श करेंगे और अगले कुछ दिनों में निर्णय लिया जाएगा। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रविवार को कहा था कि बारामती और राहुरी विधानसभा सीट पर उपचुनाव आम सहमति से निर्विरोध कराए जाने के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर मुकाबला होता है तो भाजपा इसके लिए तैयार है। साल 2024 के आम चुनावों में राकांपा (शप) प्रमुख शरद पवार की बेटी सुले ने अपने चचेरे भाई अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को हराकर बारामती लोकसभा सीट बरकरार रखी थी, जो पहली बार चुनाव लड़ रही थीं। बाद में सुनेत्रा पवार राज्यसभा सदस्य चुनी गईं। इस साल 28 जनवरी को पुणे जिले के बारामती हवाई पट्टी के पास एक विमान दुर्घटना में उनके पति अजित पवार और चार अन्य लोगों की मौत हो गई, जिसके बाद उन्हें उपमुख्यमंत्री और राकांपा का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। अजित पवार की मौत की हो जांच अजित पवार के विमान दुर्घटना की जांच के संबंध में सुले ने कहाकि वे इस मामले में पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं। पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच एलपीजी की स्थिति के बारे में सुले ने कहा कि केंद्र को एक सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए और सभी को विश्वास में लेना चाहिए। उन्होंने कहाकि होटल उद्योग सहित व्यवसायों को भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। बारामती की सांसद ने इस मुद्दे पर संसद में चर्चा की भी मांग की। सुले ने कहाकि मुझे आश्चर्य हो रहा है कि राज्य और केंद्र सरकार एलपीजी संकट को स्वीकार क्यों नहीं कर रही हैं। इसे दबाने की कोशिशें क्यों की जा रही हैं? इस संकट से निपटने के लिए एक व्यापक कार्य योजना तैयार की जानी चाहिए।

चुनावी रणभेरी: पांच राज्यों में मतदान की तारीखें तय, बंगाल में दो चरणों में चुनाव

नई दिल्ली  पश्चिम बंगाल, असम समेत पांच राज्यों/केंद्र शासित प्रदेश में चुनाव कार्यक्रम की घोषणा हो गई है। पश्चिम बंगाल में दो चरण में मतदान होंगे, जबकि तमिलनाडु, असम, पुडुचेरी और केरल में सभी सीटों पर एक ही फेज में वोट डाले जाएंगे। सभी राज्यों के नतीजों का ऐलान चार मई को होगा। बंगाल में पहले चरण के तहत 23 अप्रैल को वोटिंग होगी, जबकि दूसरे फेज में 29 अप्रैल को मतदान होगा। असम, केरल और पुडुचेरी की सभी सीटों पर 9 अप्रैल को वोटिंग होगी, जबकि तमिलनाडु की सभी विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। पांच राज्यों में कुल 17.4 करोड़ वोटर्स मतदान करेंगे और कुल विधानसभा सीटें 824 हैं। इन राज्यों में चुनाव को सफलतापूर्वक संपन्न करवाने के लिए चुनाव आयोग 25 लाख कर्मचारियों की तैनाती करेगा। इस महीने की शुरुआत में चुनाव आयोग ने इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश का दौरा किया था और चुनावी तैयारियों का जायजा लिया था। आयोग ने इन राज्यों में राजनीतिक दलों, सुरक्षा एजेंसियों तथा प्रशासनिक अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श किया है। किस राज्य में कब होगा मतदान पश्चिम बंगाल-दो फेज- 23 अप्रैल और 29 अप्रैल- चार मई रिजल्ट तमिलनाडु- एक फेज- 23 अप्रैल- चार मई रिजल्ट असम- एक फेज- 9 अप्रैल- चार मई रिजल्ट केरल- एक फेज- 9 अप्रैल- चार मई रिजल्ट पुडुचेरी- एक फेज- 9 अप्रैल- चार मई रिजल्ट संवाददाता सम्मेलन में चुनाव आयुक्त डॉ. एस.एस. संधु और विवेक जोशी भी उपस्थित थे। ज्ञानेश कुमार ने कहा, “आयोग प्रत्येक मतदाता का मतदान केंद्र पर स्वागत करने के लिए तैयार है। हम खासकर पहली बार वोट डालने वाले और युवा मतदाताओं से अपील करते हैं कि वे अपने मताधिकार का उत्साह, आत्म सम्मान और विवेक के साथ प्रयोग कर लोकतंत्र में अपनी जिम्मेदारी निभाएं।” 17.4 करोड़ वोटर्स डालेंगे वोट मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि पांच राज्यों में 17.4 करोड़ वोटर्स मतदान करेंगे। इन सभी राज्यों को मिलाकर कुल 824 विधानसभा सीटें हैं। 2.19 लाख पोलिंग बूथ बनाए गए हैं। सीईसी के अनुसार, असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में प्रति पोलिंग बूथ पर मतदाताओं की औसत संख्या 750-900 है। उन्होंने मतदाताओं के बारे में ब्योरा देते हुए बताया कि अंतिम सूची के अनुसार असम में लगभग 2.25 करोड़, केरल में 2.7 करोड़, पुडुचेरी में 9.44 लाख, तमिलनाडु में 5.67 करोड़ मतदाता होंगे। और पश्चिम बंगाल में, 28 फरवरी को जारी अंतिम सूची में 6.44 करोड़ मतदाता शामिल हैं। इसके अलावा, माननीय न्यायाधीशों के निर्णय के बाद जो भी पूरक सूची आएगी, उसे भी इसमें जोड़ दिया जाएगा।” किस राज्य में कब खत्म हो रहा कार्यकाल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (CEC) ने कहा, ”असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के मतदाता। पिछले कुछ दिनों के दौरान, आयोग ने आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों की समीक्षा करने के लिए चुनाव वाले सभी राज्यों का दौरा किया। इन दौरों के दौरान, आयोग ने सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों से मुलाकात की और उनके सुझाव प्राप्त किए। आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारियों, एसपी, आईजी, डीआईजी और सभी प्रवर्तन एजेंसियों के नोडल अधिकारियों से भी मुलाकात की। आयोग ने संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों, मुख्य सचिवों और डीजीपी के साथ भी बैठकें कीं।” असम विधानसभा का कार्यकाल 20 मई को, केरल विधानसभा का 23 मई को, तमिलनाडु विधानसभा का 10 मई को और पश्चिम बंगाल विधानसभा का सात मई को तथा पुडुचेरी विधानसभा का कार्यकाल 15 जून को समाप्त हो रहा है। इन तारीखों से पहले ही यहां नई विधानसभा का गठन होना है।  

असम चुनाव 2026: AAP ने 14 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की, चुनावी बिगुल बजाया

गुवाहाटी असम विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक बिसात अब बिछनी शुरू हो गई है। अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (AAP) ने असम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए आज अपने 14 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी है। चुनाव आयोग भी आज शाम असम और पश्चिम बंगास समेत 5 राज्यों में चुनाव की तारीखों का ऐलान करने जा रहा है। बता दें कि, 126 विधानसभा सीटों वाली असम विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल 20 मई 2026 तक है। इससे पहले वहां नई विधानसभा का गठन किया जाना है। दिल्ली और पंजाब के बाद अब आम आदमी पार्टी ने पूर्वोत्तर के इस राज्य में अपनी ताकत झोंकने का फैसला किया है। असम राज्य प्रभारी राजेश शर्मा के हस्ताक्षर के साथ पार्टी द्वारा आधिकारिक तौर पर आज जारी की गई इस पहली लिस्ट में ‘आप’ ने 14 उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतार दिया है। सेंट्रल गुवाहाटी से अनुरूपा डेकाराजा को मिला टिकट ‘आप’ ने अपनी इस पहली लिस्ट में असम की विभिन्न महत्वपूर्ण विधानसभा सीटों को कवर किया है। पार्टी ने सेंट्रल गुवाहाटी जैसी शहरी सीट से लेकर सिबसागर, नादुआर और टीटाबार जैसी ग्रामीण और अर्ध-शहरी सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं। सेंट्रल गुवाहाटी से अनुरूपा डेकाराजा को टिकट दिया गया है, जो एक महत्वपूर्ण मुकाबला माना जा रहा है। देखें 14 उम्मीदवारों की पूरी लिस्ट आम आदमी पार्टी द्वारा जारी आधिकारिक सूची के अनुसार, इन क्षेत्रों से ये उम्मीदवार मैदान में होंगे: 1. नओबोइचा (75): अच्युत दास 2. डेरगांव (104): पुलिन गोगोई 3. गोहपुर (72): जरबोम कुतुम 4. सेंट्रल गुवाहाटी (36): अनुरूपा डेकाराजा 5. खुमटाई (106): आशीष हजारिका 6. सिबसागर (96): तपन गोगोई 7. रोनगांदी (74): टिकेंद्र थापा 8. चेंगा (23): जाहिदु इस्लाम खान 9. नादुआर (69): रंजीत बोड़ो 10. टीटाबार (102): पल्लव सैकिया 11. ईस्ट गोलपाड़ा (14): जिन्ना अमीर हुसैन 12. राहा (61): बरुण विकास दास 13. बोकाजन (108): रेणुका तिमुंगपी 14. बिस्वनाथ (70): अनंत गोगोई क्या है ‘आप’ की रणनीति? ऐसा माना जा रहा है कि इतनी जल्दी उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी करके ‘आप’ ने असम में सत्तारूढ़ भाजपा और प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस को कड़ी टक्कर देने के संकेत दे दिए हैं। ‘आप’ असम में भी दिल्ली और पंजाब मॉडल (शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली) के मुद्दे पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है। जल्द जारी हो सकती है दूसरी लिस्ट आम आदमी पार्टी आने वाले हफ्तों में जल्द ही दूसरी लिस्ट भी जारी कर सकती है। असम की जनता के बीच पैठ बनाने के लिए पार्टी अब इन 14 क्षेत्रों में सघन जनसंपर्क अभियान शुरू करेगी।

5 राज्यों में चुनाव की तारीखों का ऐलान आज, चुनाव आयोग से मिलेगी अहम जानकारी

नई दिल्ली असम, पश्चिम बंगाल समेत 5 राज्यों की चुनाव तारीखों का ऐलान आज हो सकता है. चुनाव आयोग ने आज शाम 4 बजे विज्ञान भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है. इस कॉन्फ्रेंस में चुनाव आयोग पांच राज्यों की चुनाव तारीखों का ऐलान किया जा सकता है। जिन 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, उनमें असम, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी शामिल हैं। चुनाव आयोग के मुताबिक, असम विधानसभा का कार्यकाल 20 मई, केरल का 23 मई, तमिलनाडु का 10 मई, पश्चिम बंगाल का 7 मई और पुडुचेरी का 15 जून को खत्म हो रहा है. यानी 7 मई से पहले-पहले पांचों राज्यों में चुनाव खत्म हो सकते हैं। चुनाव आयोग ने चुनावी राज्यों का किया दौरा पिछले कुछ हफ्तों में चुनाव आयोग की टीम ने इन सभी राज्यों का दौरा किया था. फरवरी में असम, तमिलनाडु और पुडुचेरी, 6-7 मार्च को केरल और 9-10 मार्च को पश्चिम बंगाल में तैयारियों का जायजा लिया गया. इन दौरों में राजनीतिक दलों, पुलिस, प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों से मीटिंग हुई. आयोग ने हिंसा रोकने, मतदाता सूची सुधारने, EVM-VVPAT की जांच और CAPF तैनाती पर खास फोकस किया. मीडिया रिपोर्ट्स और सूत्रों के अनुसार, यह ऐलान आज ही होगा क्योंकि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के खिलाफ अपील की आखिरी तारीख 15 मार्च (आज) है और बाकी राज्यों में यह समयसीमा पहले ही खत्म हो चुकी है. राज्यों का कार्यकाल कब खत्म हो रहा है?     पश्चिम बंगाल: 7 मई 2026     तमिलनाडु: 10 मई 2026     असम: 20 मई 2026     केरल: 23 मई 2026     पुडुचेरी: 15 जून 2026   पिछली बार क्या रहे थे नतीजे?     असम: 126 सीटों के लिए पिछली बार तीन चरणों में चुनाव हुए थे. एनडीए ने 75 सीटें जीती थीं. लगातार दूसरी बार असम में बीजेपी की सरकार बनी थी।     पश्चिम बंगाल: राज्य की 294 सीटों के लिए पिछली बार 8 चरणों में चुनाव हुए थे. टीएमसी ने 215 और बीजेपी ने 77 सीटें जीती थीं. ममता बनर्जी मुख्यमंत्री बनी थीं।     तमिलनाडु: 234 विधानसभा सीटों के लिए एक ही चरण में वोट डाले गए थे।  डीएमके ने 133 सीटें जीती थीं. अन्नाद्रमुक ने 66 और बीजेपी ने 5 सीटें जीती थीं. एमके स्टालिन सीएम बने थे।     केरल: 140 सीटों के लिए एक ही चरण में वोटिंग हुई थी. एलडीएफ ने 99 और यूडीएफ ने 41 सीटें जीती थीं. पिनराई विजयन लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बने थे।     पुडुचेरी: 30 विधानसभा सीटों के लिए एक चरण में वोट पड़े थे. एनडीए ने 16 और यूपीए ने 9 सीटें जीती थीं. एनडीए के एन. रंगास्वामी मुख्यमंत्री बने थे।  

जगदलपुर में पार्षद चुनाव की बन रही फोटोयुक्त मतदाता सूची, बस्तर में पंचायत उपचुनाव के तैयारी तेज

बस्तर. जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में रिक्त पड़े पंचायत पदों को भरने की प्रक्रिया तेज हो गई है। राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देश पर ग्राम पंचायतों में खाली पंच पदों के लिए उपचुनाव की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसके तहत जगदलपुर, बस्तर, बकावंड, लोहंडीगुड़ा, तोकापाल और दरभा विकासखंडों में कुल 22 पदों पर मतदान कराया जाएगा। चुनाव प्रक्रिया के लिए 1 अप्रैल 2026 को संदर्भ तिथि मानते हुए नई फोटोयुक्त मतदाता सूची तैयार की जा रही है। प्रशासन द्वारा मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया दो चरणों में पूरी की जाएगी। बता दें कि पहले चरण की शुरुआत 23 मार्च से होगी, जिसमें रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों की नियुक्ति और आवश्यक कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी। इसके बाद विधानसभा की मतदाता सूची से वार्डवार आंकड़ों को अलग कर सॉफ्टवेयर की मदद से त्रुटिरहित मतदाता सूची तैयार की जाएगी। प्रशासन के अनुसार 13 अप्रैल को प्रारंभिक मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा। इसके बाद दावा-आपत्ति की प्रक्रिया शुरू होगी, जिसमें नागरिक 20 अप्रैल तक नाम जोड़ने, हटाने या संशोधन के लिए आवेदन कर सकेंगे। प्राप्त दावों और आपत्तियों का निराकरण 27 अप्रैल तक किया जाएगा। इसके बाद 5 मई को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि पूरी चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराई जाएगी, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में रिक्त पदों को जल्द भरा जा सके। जगदलपुर नगर निगम के वार्ड 16 में पार्षद पद के लिए उपचुनाव, चुनावी प्रक्रिया शुरू जगदलपुर. नगर निगम के वार्ड क्रमांक 16 इंदिरा गांधी वार्ड में रिक्त पार्षद पद को भरने के लिए उपचुनाव की घोषणा कर दी गई है। इसके साथ ही निर्वाचन शाखा ने फोटोयुक्त मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। मतदाता सूची के लिए 1 अप्रैल 2026 को संदर्भ तिथि निर्धारित की गई है। प्रशासन ने चुनावी प्रक्रिया को दो चरणों में पूरा करने की कार्ययोजना बनाई है। पहले चरण में 23 मार्च तक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों की नियुक्ति और कर्मचारियों का चयन किया जाएगा। इसके बाद मतदाता सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया शुरू होगी। प्रारंभिक मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद नागरिकों को अपने नाम जोड़ने, हटाने या संशोधन कराने का अवसर दिया जाएगा। निर्वाचन आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को पूरी तरह त्रुटिरहित बनाने के लिए विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इधर, स्थानीय स्तर पर निर्वाचन से जुड़े अधिकारी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं। वहीं वार्ड में उपचुनाव की घोषणा के साथ ही राजनीतिक सरगर्मी भी बढ़ने लगी है और संभावित प्रत्याशियों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

गुलाबी और सफ़ेद कलर का बैलेट पेपर, बड़े बदलाव के साथ होगा राजस्थान के पंचायत चुनाव

जयपुर. आगामी पंचायतीराज चुनाव इस बार एक बड़े बदलाव के साथ होने जा रहे है। राज्य निर्वाचन आयोग के आदेश के बाद पंच और सरपंच, दोनों ही पदों के चुनाव मतपत्र के जरिए होंगे। यह बदलाव केवल तकनीक का नहीं, बल्कि चुनावी प्रक्रिया की रफ्तार और परिणामों के समय पर असर डाल सकता है। बैलेट पेपर की वापसी से चुनावी अमला और प्रत्याशियों, दोनों की चुनौतियां बढ़ेंगी। ऐसा होगा इस बार का बैलेट पेपर पंच का मतपत्र गुलाबी रंग के कागज पर होगा। सरपंच का मतपत्र सफेद कागज पर छपेगा। मतपत्र की चौड़ाई 4 इंच तय की गई है। ऊपरी हिस्से में काली सीमारेखा, बाई ओर क्रमांक और दाई ओर पंचायत वार्ड से जुड़ी निर्वाचन जानकारी होगी। सभी विवरण हिन्दी में होंगे। अभ्यर्थियों के नाम बाई ओर और चुनाव चिह्न दाई ओर होंगे। नोटा भी अनिवार्य रूप से शामिल रहेगा। ईवीएम से बैलेट, क्या बदलेगा मतदान की गति थोड़ी धीमी हो सकती है। मतगणना में समय ज्यादा लगेगा, जिससे नतीजे देर रात आ सकते हैं। यदि किसी प्रत्याशी ने मतगणना पर आपत्ति दर्ज कराई, तो पुनः गणना करनी पड़ेगा, जिससे विवाद और देरी की आशंका बढ़ेगी। चुनाव कर्मचारियों का कार्यभार बढ़ेगा, क्योंकि हर मतपत्र की हाथ से गिनती होगी। अभ्यर्थियों की संख्या बढ़ी तो मुड़ेगा मतपत्र नोटा सहित 9 प्रत्याशी तक एक स्तम्भ 10 से 18 प्रत्याशी दो स्तम्भ, जरूरत पड़ने पर अंतिम पैनल छायादार 18 से अधिक प्रत्याशी: तीन या अधिक स्तम्भ, खाली पैनल छायादार रखे जाएंगे। यानी प्रत्याशियों की संख्या जितनी ज्यादा, मतपत्र उतना लंबा और जटिल। 30 सरपंच और 240 वार्ड पंचों के चुनाव होंगे – 30 ग्राम पंचायत में 30 सरपंच और 240 वार्ड पंचों के चुनाव होंगे। पंचायत चुनाव के लिए प्रगणक नियुक्त किए गए हैं। मतदान केंद्र बनाए गए हैं। मतदाता सूची अपडेट की जा रही है। – डॉ. कृति व्यास, उपखंड अधिकारी एवं निर्वाचन अधिकारी, रावतभाटा

असम में चुनावी तैयारी तेज, हिमंता ने महिलाओं को कैश और नौकरियों में आरक्षण का तोहफा दिया

गुवाहाटी  असम में विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही सियासत गर्मा गई है. मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने राज्य की जनता के लिए बड़ी घोषणाओं की झड़ी लगा दी है.  असम कैबिनेट की बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए, जिन्हें चुनाव से पहले सरकार का सबसे बड़ा कार्ड माना जा रहा है. सरकार ने ‘मुख्यमंत्री महिला उद्यमिता योजना’ का दायरा बढ़ाते हुए इसमें 1 लाख से ज्यादा नए लाभार्थियों को जोड़ने का फैसला किया है. इसके अलावा आदिवासी और चाय बागान समुदाय के लोगों के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण का रास्ता भी साफ कर दिया गया है. महिलाओं के खाते में सीधे पहुंचेगा पैसा, क्या है सरकार की स्कीम? असम सरकार की ‘मुख्यमंत्री महिला उद्यमिता योजना’ राज्य में काफी लोकप्रिय हो रही है. इस योजना के तहत राज्य की 32 लाख महिलाओं को पहले ही 10,000 रुपये की पहली किस्त मिल चुकी है. मुख्यमंत्री ने बताया कि कुछ पात्र महिलाएं इस फंड से वंचित रह गई थीं. इसी को देखते हुए कैबिनेट ने आज 1,03,500 नई लाभार्थियों को जोड़ने की मंजूरी दी है. बिहार, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की कैश ट्रांसफर योजनाओं की तर्ज पर असम की यह स्कीम भी महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए शुरू की गई है. जानकारों का मानना है कि चुनाव से ठीक पहले इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं को कैश देना वोट बैंक को साधने की एक बड़ी कोशिश है. नौकरियों में 3 प्रतिशत आरक्षण और नए सैनिक स्कूल की सौगात हिमंता कैबिनेट ने केवल महिलाओं के लिए ही नहीं, बल्कि आदिवासी और चाय बागान समुदायों के लिए भी बड़ा फैसला लिया है. अब राज्य की सरकारी नौकरियों (ग्रेड 1 और ग्रेड 2) में इन समुदायों के लिए 3 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया गया है. चाय बागान समुदाय असम की राजनीति में एक निर्णायक भूमिका निभाता है. ऐसे में यह आरक्षण चुनावी गणित को बदलने की ताकत रखता है. साथ ही कैबिनेट ने कार्बी आंगलोंग के लांगवोकु क्षेत्र में राज्य का दूसरा सैनिक स्कूल बनाने के लिए 335 करोड़ रुपये के फंड को भी हरी झंडी दिखा दी है. असम बना देश का सबसे तेजी से बढ़ने वाला राज्य असम की वित्त मंत्री अजंता नियोग ने विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 62,294.78 करोड़ रुपये का अंतरिम बजट (लेखानुदान) पेश किया. बजट भाषण के दौरान उन्होंने आरबीआई के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि असम इस समय देश का सबसे तेजी से बढ़ने वाला राज्य है. उन्होंने दावा किया कि राज्य की प्रति व्यक्ति आय पिछले पांच वर्षों में दोगुनी से भी अधिक हो गई है. साल 2020-21 में यह 86,947 रुपये थी, जो 2025-26 में बढ़कर 1,85,429 रुपये पहुंच गई है. यह 113 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़ोतरी है. सरकार का लक्ष्य असम को 2028 तक 10 लाख करोड़ रुपये की अर्थव्यवस्था बनाना है. चुनाव आयोग की तैयारी और राजनीतिक दलों की मांग एक तरफ सरकार घोषणाएं कर रही है, तो दूसरी तरफ चुनाव आयोग ने भी कमर कस ली है. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अगुवाई में आयोग की टीम असम के दौरे पर है. मंगलवार को सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने चुनाव आयोग से मुलाकात की. कांग्रेस, बीजेपी और आम आदमी पार्टी समेत कई दलों ने मांग की है कि असम में चुनाव एक या अधिकतम दो चरणों में कराए जाएं. इसके साथ ही दलों ने सुझाव दिया है कि चुनाव की तारीखें तय करते समय बिहू त्योहार का खास ख्याल रखा जाए. वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल 20 मई को समाप्त हो रहा है, ऐसे में मार्च या अप्रैल में चुनाव होने की पूरी संभावना है.

स्थापना दिवस समारोह की तैयारियां पूरी, राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम में रावत मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे

राज्य निर्वाचन आयोग का स्थापना दिवस समारोह 16 फरवरी को पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त  रावत होंगे मुख्य अतिथि भोपाल  मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग का 32वां स्थापना दिवस समारोह 16 फरवरी को सुबह 11 बजे से आयोजित किया जायेगा। समारोह के मुख्य अतिथि भारत निर्वाचन आयोग के पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त  ओ.पी. रावत होंगे।  रावत “वन नेशन-वन इलेक्शन में स्थानीय निर्वाचन की भूमिका” विषय पर व्याख्यान देंगे। पूर्व राज्य निर्वाचन आयुक्त  आर परशुराम “स्थानीय निर्वाचन में सुधार की चुनौतियाँ” विषय पर उद्बोधन देंगे। दैनिक भास्कर, स्कूल ऑफ जर्नलिज्म के विभागाध्यक्ष  नरेन्द्र कुमार सिंह “जमीनी लोकतंत्र में पारदर्शी एवं निष्पक्ष चुनाव” विषय पर और एडवोकेट  सिद्धार्थ सेठ स्थानीय निर्वाचन में न्यायालयीन सबक” विषय पर उद्बोधन देंगे। सचिव राज्य निर्वाचन आयोग  दीपक सिंह ने बताया है कि समारोह में आयोग के निर्वाचन साहित्य-ई बुक का विमोचन और प्रेक्षा मोबाइल ऐप का शुभारंभ किया जायेगा। साथ ही स्थानीय निर्वाचन में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारी-कर्मचारी को प्रशस्ति पत्र भी वितरित किये जायेंगे।  

निर्वाचन आयोग ने नगर निगम चुनाव में 14 प्रत्याशियों को चुनाव खर्च का सही विवरण न देने पर अयोग्य घोषित किया

भोपाल  मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग ने जून 2022 में हुए भोपाल नगर निगम चुनाव में 14 प्रत्याशियों को चुनाव खर्च का सही विवरण न देने पर अयोग्य घोषित कर दिया है। इनमें से 12 प्रत्याशियों पर दो वर्ष का प्रतिबंध, जबकि 2 पर पांच वर्ष का प्रतिबंध लगाया गया है। मध्यप्रदेश नगर पालिक निगम अधिनियम की धारा 14 क के तहत, पार्षद चुनाव में भाग लेने वाले प्रत्येक प्रत्याशी को नामांकन की तारीख से चुनाव परिणाम की घोषणा तक के सभी खर्चों का विवरण 30 दिनों के भीतर दाखिल करना अनिवार्य है। आयोग ने पाया कि इन प्रत्याशियों ने कई अवसर दिए जाने के बावजूद चुनाव खर्च का ब्यौरा उपलब्ध नहीं कराया। भोपाल के उप जिला निर्वाचन अधिकारी मध्यप्रदेश दीपक पांडेय ने कहा कि राज्य निर्वाचन आयोग ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया है। (   वार्ड संख्या प्रत्याशी का नाम प्रतिबंध     राधिका धीरेन्द्र सिंह 2 वर्ष (वार्ड नं- 1)     महेंद्र वानखेड़े 2 वर्ष (वार्ड नं- 1)     वैशाली गोस्वामी 2 वर्ष (वार्ड नं- 3)     माधु चांदवानी 2 वर्ष (वार्ड नं- 4)     किशोर साधवानी 2 वर्ष(वार्ड नं- 4)     अब्दुल हलीम 2 वर्ष (वार्ड नं- 22)     शराफत उल्ला खां 2 वर्ष (वार्ड नं- 22)     शजर उल्ला 5 वर्ष (वार्ड नं- 24)     सतीश विश्वकर्मा 2 वर्ष (वार्ड नं- 36)     अशरफ खान 5 वर्ष (वार्ड नं- 39)     ज्योति खर 2 वर्ष (वार्ड नं- 45)     मंजू विश्वकर्मा 2 वर्ष (वार्ड नं- 80)     लता अहिरवार 2 वर्ष (वार्ड नं- 81)     सुभाष काटे 2 वर्ष (वार्ड नं- 83)

निर्वाचन कार्य में लगे सभी अधिकारी-कर्मचारी तत्परता से कार्य करें: राज्य निर्वाचन आयुक्त अजय सिंह

रायपुर आगामी नगरीय निकाय चुनावों को लेकर राज्य निर्वाचन आयुक्त अजय सिंह ने आज जगदलपुर के धरमपुरा स्थित मॉडल कालेज में बनाए गए स्ट्रांग रूम का निरीक्षण किया और मतदान सामग्री वितरण एवं मतगणना स्थल की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों को कमिशनिंग की तिथि, सुरक्षा व्यवस्था, स्ट्रांग रूम की सुरक्षा व्यवस्था सहित अन्य व्यवस्थाओं के संबंध में जानकारी लेकर आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने नगरीय निकाय चुनाव हेतु ईवीएम मशीनों की कमिशनिंग प्रक्रिया तथा मशीनों के परिवहन की व्यवस्था का भी संज्ञान लिया। अधिकारियों ने बताया कि मशीनों की जांच के बाद  स्ट्रांग रूम तक सुरक्षित पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। राज्य निर्वाचन आयुक्त सिंह ने कहा कि निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव संपन्न कराने के लिए हरसंभव कदम उठाए जाए। उन्होंने निर्वाचन प्रक्रिया में लगे अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देशित किया कि वे पूरी तत्परता से कार्य करें और सभी आवश्यक तैयारियों को समय पर पूरा करें। इस निरीक्षण के दौरान कमिश्नर डोमन सिंह, आई जी सुंदरराज पी., राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव डॉ सर्वेश्वर नरेन्द्र भुरे, नोडल अधिकारी पुलिस ओ पी पाल, कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी हरिस एस, पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा और अन्य संबंधित अधिकारी भी मौजूद रहे।

रायपुर : नगर पंचायत बसना में एक नगर पंचायत अध्यक्ष, और 33 पार्षद निर्विरोध चुने गए

रायपुर नगर पालिक निगम बिलासपुर वार्ड क्रमांक 13 से रमेश पटेल, नगर पालिक निगम कोरबा के वार्ड क्रमांक 18 से नरेन्द्र कुमार देवांगन, नगर पालिक निगम दुर्ग के वार्ड क्रमांक 21 से विद्यावती सिंह, रायगढ़ जिला के नगर पालिक निगम रायगढ़ के वार्ड क्रमांक 18 से श्रीमती पूनम दिबेश सोलंकी और वार्ड क्रमांक 45 से नारायण पटेल पार्षद पद हेतु नगरीय निकाय निर्वाचन 2025 में निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। मुंगेली जिले के नगर पालिक परिषद लोरमी के वार्ड क्रमांक 10 से धारनी पुरूषोत्तम राठौर, वार्ड क्रमांक 17 से भीखम शिवशंकर यादव, कोरबा जिला के नगर पालिका परिषद दीपका के वार्ड क्रमांक 8 से आलोक परेडा, नगर पालिका परिषद कटघोरा वार्ड क्रमांक 13 श्रीमती शिवमती पटेल (नीतू), महासमुंद जिले के नगरपालिका परिषद सरायपाली के वार्ड क्रमांक 5 से रोहित प्रधान एवं वार्ड क्रमांक 13 से गंगाराम पटेल पार्षद पद हेतु निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। नगर पंचायत बसना से अध्यक्ष पद हेतु डॉ. खूशबू अभिषेक अग्रवाल निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। इसी प्रकार नगर पंचायत बसना के वार्ड क्रमांक 4 से आशीष साहू (तिरथो होटल), वार्ड क्रमांक 11 से महेन्दर सिंह (पिन्टू), वार्ड क्रमांक 13 से राकेश डड़सेना पार्षद पद हेतु निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। मुंगेली जिले के नगर पंचायत पथरिया के वार्ड क्रमांक 5 से मनोज कुमार पाण्डे और वार्ड क्रमांक 7 से मेला राम जायसवाल, सक्ती जिला के नगर पंचायत नया बाराद्वार के वार्ड क्रमांक 7 से जितेश शर्मा (अन्नपूर्णा), नगर पंचायत डभरा के  वार्ड क्रमांक 7 से राधा देवी टंडन एवं वार्ड 15 से जयशंकर पटेल, सारगढ़-बिलाईगढ़ जिले के नगर पंचायत बिलाईगढ़ के वार्ड क्रमांक 2 से घनश्याम कहार, वार्ड क्रमांक 3 से मुकेश जायसवाल उर्फ लालू, वार्ड क्रमांक 8 से सौभाग्य शरण सिंह पार्षद पद के लिए निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। सूरजपुर जिले के नगर पंचायत प्रतापपुर के वार्ड क्रमांक 7 से सीता पैकरा, सरगुजा जिले के नगर पंचायत सीतापुर के वार्ड क्रमांक 14 से विवेक कुमार नामदेव, जशपुर जिले के नगर पंचायत बगीचा के वार्ड क्रमांक एक से रामनिवास गुप्ता, रायपुर जिले के नगर पंचायत समोदा के वार्ड क्रमांक 15 से सत्येन्द्र चेलक एवं गरियाबंद जिले के नगर पंचायत फिंगेश्वर के वार्ड क्रमांक 6 से दीपक श्रीवास पार्षद पद के लिए निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। इसी प्रकार बालोद जिले के नगर पंचायत डौण्डी के वार्ड क्रमांक 8 से माधुरी रावटे, वार्ड क्रमांक 9 से राजेन्द्र कुमार मानकर और नगर पंचायत चिखलाकसा के वार्ड क्रमांक 4 से राजू रावटे एवं दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा जिले के नगर पंचायत बारसूर के वार्ड क्रमांक एक से श्रीमती गीता बघेल पार्षद पद हेतु निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। नगर पालिका उप निर्वाचन 2025 के लिए नगरपालिक निगम भिलाई के वार्ड क्रमांक 35 से चंदन यादव और नगर पंचायत कोटा के वार्ड क्रमांक 13 से पी. विजय कुमार परिमि पार्षद पद हेतु निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं।

आज दो बजे चुनाव आयोग करेगा तारीखों का एलान, दिल्ली में एक चरण में हो सकता है चुनाव

नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में चुनावी बिगुल बजने वाला है।  चुनाव आयोग आज विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा करेगा। चुनाव आयोग दोपहर दो बजे चुनावी कार्यक्रम साझा करने के लिए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करेगा। दिल्ली में 70 विधानसभा सीटें हैं। मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 23 फरवरी को समाप्त होने वाला है। दिल्ली में एक चरण में चुनाव हो सकता है। इस बार भी दिल्ली में आम आदमी पार्टी, भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच त्रिकोणीय मुकाबला देखा जा सकता है। सोमवार को ही चुनाव आयोग ने अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी है। इस चुनाव में दो लाख के करीब मतदाता 18 से 19 वर्ष के हैं। वह पहली बार विधानसभा चुनाव में अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। इस सूची में कुल एक करोड़ 55,24,858 मतदाता हैं। चुनाव आयोग ने दर्ज की आठ प्राथमिकी इस सूची में पुरुष मतदाता 85,49,645 हैं, जबकि 71,73,952 महिला मतदाता हैं। इस अंतिम मतदाता सूची के बाद अब आयोग आज चुनाव की तिथियों की घोषणा कर सकता है। थर्ड जेंडर 1,261 हैं। पिछले 20 दिन में रिकार्ड 5.1 लाख फार्म 6 नए मतदाताओं ने आवेदन किया। चुनाव आयोग ने 8 प्राथमिकी दर्ज की है। इसमें 24 लोगों पर गलत सूचना और जानकारी देकर मतदाता पहचान पत्र बनाने का आरोप है। इसे लेकर चुनाव आयोग ने चुनाव पंजीकरण अधिकारियों से एक एक आवेदन की गहन जांच कराने के आदेश दिए हैं। प्रक्रिया के तहत नाम जोड़े और हटाए जाते हैं चुनाव आयोग ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची के लिए नाम प्रक्रिया के तहत जोड़े और हटाए जाते हैं। इसके लिए फॉर्म 6 और फार्म सात होता है। नामों के घटाने और जोड़ने की जानकारी समय-समय पर राजनीति दलों को दी जाती है। 1,67,329 नए मतदाता जुड़े चुनाव आयोग से मिली जानकारी के मुताबिक दिल्ली में एक महीने में 29 अक्तूबर से 28 नवंबर तक 1,35,089 मतदाताओं ने फार्म- 6 और 83,825 ने फार्म 8 के तहत मतदाता सूचियों में नाम जुड़वाने, पता बदलने, नाम को सूची से हटाने और आपत्तियां और सुझाव के लिए आवेदन किया। चुनाव आयोग के संबंधित अधिकारियों ने सभी आवेदनों को 24 दिसंबर तक सुलझा दिया। इस तरह से अंतिम मतदाता सूची जारी होने तक 3,08,942 नए नाम मतदाता सूचियों में जुड़े। 1,41,613 नाम हटाए गए। इस दौरान कुल 1,67,329 मतदाता नए जुड़े। दिल्ली में मतदाता बढ़े वहीं, 2020 के विधानसभा चुनाव की तुलना में इस बार 7.26 लाख और 2024 के लोकसभा चुनाव की तुलना में 3.10 लाख वोटर्स दिल्ली में बढ़े हैं। 2020 के चुनाव में दिल्ली में 1.47 करोड़ मतदाता थे, जबकि, पिछले साल हुए लोकसभा चुनाव में दिल्ली में मतदाताओं की संख्या 1.52 करोड़ से अधिक थी। हर आवेदन को जांचा गया चुनाव आयोग ने पाया की 16 दिसंबर से एक माह में 5.10 लाख नए लोगों ने अपना नाम जुड़वाने के लिए आवेदन किया। ऐसा पहली बार हुआ। ऐसा तब हुआ जबकि तय समय में तीन लाख से ज्यादा मतदाता नई सूची में जुड़ चुके थे। क्योंकि ऐसा 20 दिन के भीतर हो रहा था जब आपत्तियां, जांच का समय गुजर चुका था। यह तत्काल जांच का विषय था। सभी चुनाव पंजीकरण अधिकारियों- ईआरओ को जांच के लिए निर्देशित किया गया। हर आवेदन को जांचा गया। संबंधित अधिकारियों को सौ फीसदी सत्यापन के लिए कहा गया है। फरवरी में खत्म हो रहा दिल्ली विधानसभा का कार्यकाल विधानसभा का कार्यकाल 23 फरवरी, 2025 तक का है। इससे पहले दिल्ली विधानसभा का गठन करने के लिए चुनाव होने हैं। इसके लिए दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से तैयारियां की जा रही हैं। साल 2020 में दिल्ली में ये रहे थे नतीजे साल 2020 के चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 62 सीटों पर जीत दर्ज की थी। भाजपा के खाते में आठ सीटें आईं थीं। जबकि, कांग्रेस का खाता भी नहीं खुला था। दो चुनाव से एक भी सीट नहीं जीत सकी है। साल 2015 के चुनाव में भी आम आदमी पार्टी ने 67 सीटों पर जीत दर्ज की थी। भाजपा को तीन सीटें मिलीं थीं। जबकि कांग्रेस का हाथ खाली रहा था।

विजयपुर में 77.76 प्रतिशत एवं बुधनी में 77.07 प्रतिशत मतदान हुआ

भोपाल मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सुखवीर सिंह ने बताया कि प्रदेश की विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र क्र. 02-विजयपुर एवं विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र क्र. 156-बुधनी में 13 नवम्बर को सफलतापूर्वक मतदान सम्पन्न हुआ। पीठसीन अधिकारियों की डायरी एवं अन्य दस्तावेजों से दर्ज की गई जानकारी के अनुसार दोनों ही विधानसभा क्षेत्रों में हुए मतदान की अंतिम जानकारी निम्नानुसार है- विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र क्र. 02-विजयपुर में कुल 77.76 प्रतिशत मतदान हुआ। यहां 79.14 प्रतिशत पुरूष मतदाताओं और 76.24 प्रतिशत महिला मतदाताओं ने मतदान किया। इसी प्रकार विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र क्र. 156-बुधनी में कुल 77.07 प्रतिशत मतदान हुआ। यहां 80.10 प्रतिशत पुरूष मजदाताओं और 73.82 प्रतिशत महिला मतदाताओं ने मतदान किया। उल्लेखनीय है कि इस मतदान प्रतिशत में पोस्टल बैलेट तथा अनुपस्थित मतदाताओं (Absentee voters) के मतदान की जानकारी सम्मिलित नहीं है। मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्ण सम्पन्न होने पर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री सिंह ने दोनों ही विधानसभा क्षेत्रों के सभी मतदाताओं, राजनैतिक दलों, अभ्यर्थियों, मतदान दल में सम्मिलित सभी अधिकारियों/कर्मचारियों, सुरक्षा व्यवस्था में लगे सभी केन्द्रीय पुलिस सुरक्षा बल एवं राज्य के पुलिस बल तथा मीडिया प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा है कि उप निर्वाचन में शांतिपूर्ण मतदान कराने में सभी का महत्वपूर्ण योगदान रहा। 23 नवम्बर को सुबह 8 बजे से आरंभ होगी मतगणना मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री सुखवीर सिंह ने बताय कि विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र क्र. 02-विजयपुर की मतगणना शासकीय पॉलीटेक्निक महाविद्यालय, जिला श्योपुर एवं विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र क्र. 156-बुधनी की मतगणना शासकीय महिला पॉलीटेक्निक महाविद्यालय, जिला सीहोर में 23 नवम्बर को सुबह 8 बजे से आरंभ होगी।  

विधानसभा चुनाव खर्च पर्यवेक्षक उम्मीदवारों के खर्चों का तीन बार ऑडिट करेंगे

मुंबई  महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में खड़े उम्मीदवारों के खर्च पर चुनाव आयोग की पैनी नजर रहेगी। चुनाव खर्च पर्यवेक्षक उम्मीदवारों के खर्चों का तीन बार ऑडिट करेंगे। पहला निरीक्षण 8-9 नवंबर को होगा, जो उम्मीदवारों के नाम वापस लेने की आखिरी तारीख 4 नवंबर के बाद होगा। इसके बाद 18 नवंबर तक दो और बार जांच की जाएगी। चुनाव आयोग ने उम्मीदवारों के खर्च की सीमा 12 लाख रुपये बढ़ाकर 40 लाख रुपये कर दी है। पहले यह सीमा 28 लाख रुपये थी। उम्मीदवार लंबे समय से खर्च सीमा बढ़ाने की मांग कर रहे थे। चुनाव खर्च में बड़ा बदलाव कब? चुनाव आयोग ने 2022 में लोकसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की खर्च सीमा 75 लाख रुपये से बढ़ाकर 90 लाख रुपये और विधानसभा चुनाव के लिए 28 लाख रुपये से बढ़ाकर 40 लाख रुपये कर दी थी। चुनाव खर्च सीमा में आखिरी बड़ा बदलाव 2014 में किया गया था, जिसे 2020 में 10 प्रतिशत और बढ़ा दिया गया था। 2022 में ही चुनाव आयोग ने लागत फैक्टर और अन्य संबंधित मुद्दों का अध्ययन करने और उचित सिफारिशें करने के लिए एक समिति का गठन किया था। 2014 में किस आधार पर हुआ था बदलाव? समिति ने राजनीतिक दलों, मुख्य निर्वाचन अधिकारियों और चुनाव पर्यवेक्षकों से सुझाव आमंत्रित किए थे। समिति ने पाया कि मतदाताओं की संख्या में वृद्धि हुई है और 2014 के बाद से लागत मुद्रास्फीति सूचकांक में भी वृद्धि हुई है। इसने प्रचार के बदलते तरीकों पर भी विचार किया, जो धीरे-धीरे वर्चुअल प्रचार की ओर बढ़ रहे हैं। चुनाव अधिकारियों ने बताया कि उम्मीदवारों को खर्च के रजिस्टर में बदलाव करते समय विवरण जमा करना होगा और अगर कोई उम्मीदवार सीमा से अधिक खर्च करता है, तो नोटिस जारी किए जाएंगे। कैसे तय किया जाता है चुनाव खर्च खर्च प्रकोष्ठ को सौंपे गए खर्चों में गड़बड़ी के लिए चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के खिलाफ नोटिस जारी किए जा सकते हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान भी प्रमुख उम्मीदवारों को नोटिस जारी किए गए थे। उम्मीदवारों को 48 घंटे के भीतर नोटिस का जवाब देने का समय दिया जाता है। एक अधिकारी ने बताया कि अगर तय समय सीमा के भीतर खर्च का विवरण जमा नहीं किया जाता है, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। विधानसभा चुनाव से पहले जिला निर्वाचन अधिकारी उन वस्तुओं की दरें तय करते हैं जिनका उपयोग उम्मीदवार करेंगे, और वही दर चुनावी खर्च के तहत दिखानी होगी। दरें तय करने से पहले विचार-विमर्श किया जाता है। 10 रुपये की चायआने-जाने के लिए रिक्शा, टेंपो, एसयूवी किराए पर लेने की दरें चुनाव व्यय प्रकोष्ठ की ओर से निर्धारित मूल्य सूची में लिखी गईं हैं। इन दरों के आधार पर चुनावी खर्चों की जांच की जाती है। इसमें चाय की कीमत 10 रुपये और कॉफी की कीमत 15 रुपये तय करने से लेकर स्टॉल लगाने के लिए फर्नीचर और प्रचार सामग्री के उपयोग तक, चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार इन्हीं दरों के आधार पर खर्च दिखा सकते हैं। सभी हितधारकों से चर्चा के बाद दरें तय की जाती हैं। यह चुनाव आयोग का एक महत्वपूर्ण कदम है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हों। इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि पैसे वाले उम्मीदवारों को अनुचित लाभ न मिले।

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