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बिजली चोरी की रोकथाम के लिए चलाई जा रही पारितोषिक योजना, अब तक पांच उपभोक्ताओं के खाते में पहुंचाई राशि

भोपाल मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा बिजली चोरी की रोकथाम के लिए चलाई जा रही पारितोषिक योजना के तहत बिजली के अवैध उपयोग की सूचना देने पर प्रकरण बनाने एवं राशि वसूली होने पर सूचनाकर्ता को दी जाने वाली 10 प्रतिशत प्रोत्साहन राशि में से योजना के संशोधित प्रावधान के अनुसार पांच प्रतिशत राशि का भुगतान संबंधित सूचनाकर्ता को सूचना सही पाए जाने पर जारी किए गए अंतिम निर्धारण आदेश के तुरंत बाद किया जाएगा। शेष पांच प्रतिशत राशि का भुगतान पूर्ण वसूली उपरांत किया जा रहा है। इसी क्रम में एक अप्रैल 2025 से अब तक 5 सफल सूचनाकर्ताओं को 11,500 रुपये सीधे उनके बैंक खाते में जमा कराए गए हैं। साथ ही जांच एवं वसूली की कार्यवाही करने वाले संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारियों को भी तीन हजार रुपये प्रोत्साहन राशि का भुगतान उनके मासिक वेतन में जोड़कर किया गया है।  कंपनी द्वारा ऑनलाइन प्रक्रिया प्रारंभ होने के पूर्व कुल 63 प्रकरणों में पूर्ण राशि का भुगतान प्राप्त होने पर 7 सफल सूचनाकर्ताओं को उनके खाते में 2 लाख 18 हजार रूपये की प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया गया है। कंपनी में कार्यरत नियमित कर्मचारी/ संविदा/ आउटसोर्स कर्मचारी को भी सूचनाकर्ता के रूप में शामिल किया गया है, परंतु उसे सूचना सही पाए जाने एवं जारी किए गए अंतिम निर्धारण आदेश की पूर्ण वसूली होने पर एक प्रतिशत प्रोत्साहन राशि के रूप में दी जाएगी। कंपनी ने कहा है कि विभिन्न परिसरों की जांच एवं जांच के उपरांत बनाये गये पंचनामा के आधार पर आरोपी के विरूद्ध निकाली गयी राशि की वसूली में सभी कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहता है। कंपनी ने विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ-साथ जांच एवं वसूली के कार्य में सम्मिलित बाह्य स्त्रोत कर्मचारियों को भी पारितोषिक योजना के तहत दी जाने वाली 2.5 (ढाई) प्रतिशत प्रोत्साहन राशि को सभी संबंधितों को समान रूप में दिया जा रहा है। कंपनी ने कहा है कि पारितोषिक योजना की पूरी जानकारी जैसे बिलिंग, भुगतान से संबंधित गतिविधियां पूरी तरह से गोपनीय और ऑनलाइन है। अब सूचनाकर्ता को कंपनी के पोर्टल पर गुप्त रूप से दिए गए प्रारूप में बैंक खाता, पहचान क्र. (आधार अथवा पेन ) देना अनिवार्य है। योजना के अंतर्गत सूचनाकर्ता के संबंध में जानकारी पूर्णतः गोपनीय रखते हुए, कंपनी मुख्यालय से प्रोत्साहन की राशि सीधे संबंधित सूचनाकर्ता के बैंक के खाते में हस्तांतरित की जा रही है। इस योजना के अंतर्गत क्षेत्रीय, वृत्त स्तर के अधिकारियों को जो शिकायतें प्राप्त होती है, उन शिकायतों पर तत्परता से कार्यवाही सुनिश्चित किये जाने के लिये कंपनी मुख्यालय के द्वारा सतत रूप से निगरानी भी रखी जा रही है। पोर्टल अथवा उपाय ऐप पर देनी होगी सूचना कंपनी द्वारा योजना में सूचनाकर्ता को निर्धारित शर्तों के अधीन पारितोषिक देने का प्रावधान है। इस राशि की अधिकतम सीमा नहीं है। वर्तमान में इस व्यवस्था को पूर्ण रूप से ऑनलाइन किया गया है तथा कंपनी वेबसाइट portal.mpcz.in पर जाकर informer scheme लिंक पर क्लिक करके, सूचनाकर्ता के द्वारा गुप्त सूचना दर्ज की जा सकती है।  उपाय ऐप के माध्यम से भी बिजली चोरी की सूचना दी जा सकती है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा समस्त नागरिकों के साथ ही आउटसोर्स कर्मचारियों तथा उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि वे गुप्त सूचना देकर, पारितोषिक योजना का लाभ उठाये।  

बकायेदारों के खिलाफ विद्युत वितरण कंपनी की भोपाल में कार्रवाई जारी, 100 करोड़ रुपये से अधिक का बिल बकाया

भोपाल चिराग तले अंधेरा वाली कहावत तो आपने सुनी होगी..अब देख भी लीजिए. तेजी से उभरते मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बिजली विभाग को लंबा पलीता लगा रहा है. बिजली बिलों का बकाया अब खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है. अकेले शहर में घरेलू उपभोक्ताओं पर 100 करोड़ रुपये से अधिक का बिल बकाया है. हैरानी की बात तो ये कि इनमें से 86 उपभोक्ताओं पर 1 लाख रुपये से अधिक का बकाया है. बिजली वितरण कंपनी (डिस्कॉम) के अनुसार, इनमें से अधिकांश मामलों में कोई न कोई विवाद है. कई केस अदालतों में विचाराधीन हैं. सबसे अधिक बकाया एक घरेलू उपभोक्ता पर 4.21 लाख रुपये का सामने आया है. यह उपभोक्ता कटारा हिल्स वितरण क्षेत्र की एक कॉलोनी में रहता है. फिर भी कनेक्शन चालू TOI की रिपोर्ट के अनुसार, कटारा हिल्स वाले उपभोक्ता का मई महीने का चालू बिल 2,246 रुपये था, जिस पर 5,199 रुपये विलंब शुल्क और 4.15 लाख रुपये का पुराना विवादित बकाया जुड़कर कुल देय राशि 4,21,079 रुपये हो गई. मामला अदालत में लंबित होने के कारण बिजली कनेक्शन चालू है. इस मामले में डिस्कॉम के अधिकारियों का कहना है कि सामान्य स्थिति में यदि किसी घरेलू उपभोक्ता पर 5,000 रुपये से अधिक बकाया होता है तो उसका कनेक्शन काट दिया जाता है. लेकिन, जिन उपभोक्ताओं के बिल विवादित है या न्यायिक प्रक्रिया में है, उनके खिलाफ तत्काल कोई कार्रवाई नहीं हो पाती. छोटे बकायदार भी करीब 37 हजार 1 लाख रुपये से अधिक बकाया रखने वालों के बाद सबसे बड़ी संख्या उन उपभोक्ताओं की है, जिन पर 10,000 से 1 लाख के बीच की राशि बकाया है. ऐसे उपभोक्ताओं की संख्या 16,681 है. इनमें से किसी पर 99,797 रुपये तो किसी पर 10,001 रुपये तक का बकाया है. इसके अलावा 19,704 उपभोक्ता ऐसे भी हैं, जिन पर 5,000 से 10,000 रुपये तक की राशि लंबित है. बिजली कंपनी इस काम में लगी विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी बड़ी राशि का बकाया होना बिजली वितरण व्यवस्था और बिल वसूली प्रक्रिया में गहराते संकट की ओर संकेत करता है. यदि विवादों और अदालती मामलों का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो यह बकाया राशि और बढ़ सकती है. डिस्कॉम की ओर से फिलहाल ऐसे उपभोक्ताओं से संपर्क कर विवाद सुलझाने और समझौते की कोशिश की जा रही है. वहीं, अधिकारियों ने संकेत दिए कि सरकार से नीति-निर्माण स्तर पर भी हस्तक्षेप की मांग की जाएगी.

नई प्रणाली के तहत, व्यवसायी अब घर बैठे ही स्टेट सिंगल विंडो पोर्टल पर अस्थायी बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन कर सकते

 छत्तीसगढ़ में अस्थायी बिजली कनेक्शन के लिए ऑनलाइन सिस्टम लागू व्यवसायों के लिए अस्थायी बिजली कनेक्शन प्राप्त करने की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और सरल बनाया नई प्रणाली के तहत, व्यवसायी अब घर बैठे ही स्टेट सिंगल विंडो पोर्टल पर अस्थायी बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन कर सकते व्यवसायियों को मिली राहत रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार ने एक अभिनव कदम उठाते हुए व्यवसायों के लिए अस्थायी बिजली कनेक्शन प्राप्त करने की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और सरल बना दिया है। स्टेट सिंगल विंडो पोर्टल के माध्यम से शुरू की गई इस ऑनलाइन प्रणाली का उद्देश्य नियमों में सुधार करना और कठिन प्रक्रियाओं को सरल बनाना है। इस पहल से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि व्यवसायियों को समय और लागत की बचत भी होगी। छत्तीसगढ़ सरकार की इस पहल को उद्यमियों और व्यापारियों ने खूब सराहा है। नई प्रणाली के तहत, व्यवसायी अब घर बैठे ही स्टेट सिंगल विंडो पोर्टल पर अस्थायी बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की स्थिति को रीयल-टाइम में ट्रैक करने की सुविधा ने प्रक्रिया को और भी पारदर्शी बना दिया है। पहले जहां कागजी कार्रवाई और कई दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे, वहीं अब यह काम कुछ ही क्लिक में पूरा हो जाएगा। स्वचालित सिस्टम यह सुनिश्चित करता है कि सभी नियामक आवश्यकताएं पूरी हों, जिससे त्रुटियों की संभावना कम हो और ऑडिट प्रक्रिया भी सरल हो। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि हमारी सरकार का लक्ष्य है कि छत्तीसगढ़ में व्यवसाय करना आसान और सुगम हो। इस ऑनलाइन सिस्टम के जरिए हमने अस्थायी बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया को न केवल तेज किया है, बल्कि इसे पारदर्शी और व्यवसायी-अनुकूल भी बनाया है। यह ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो हमारे राज्य में निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा। इस डिजिटल प्रणाली ने कागजी कार्रवाई और बार-बार सरकारी दफ्तरों के दौरे की जरूरत को खत्म कर दिया है, जिससे प्रशासनिक खर्चों में भारी कमी आई है। छोटे और मझोले उद्यमी, जो पहले जटिल प्रक्रियाओं से जूझते थे, अब इस सुविधा का लाभ उठा रहे हैं। रायपुर के एक युवा व्यवसायी हरीश पटेल ने बताया, पहले कनेक्शन लेने में कई हफ्ते लग जाते थे, लेकिन अब यह काम कुछ ही दिनों में हो जाता है। सरकार का यह कदम वाकई सराहनीय है। यह सिस्टम न केवल तेज और सुगम है, बल्कि पूरी तरह नियमों के अनुरूप भी है। डिजिटल रिकॉर्ड-कीपिंग से ऑडिट प्रक्रिया आसान हो गई है, जिससे सरकारी विभागों और व्यवसायियों दोनों को फायदा होगा। सरकार का कहना है कि यह डिजिटलीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। भविष्य में अन्य सरकारी सेवाओं को भी इसी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी बनाने की योजना है। छत्तीसगढ़ सरकार की इस पहल से न केवल व्यवसायियों को   राहत मिली है, बल्कि यह राज्य को निवेश के लिए और आकर्षक बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। यह प्रणाली निश्चित रूप से नए छत्तीसगढ़ के निर्माण में मील का पत्थर साबित होगी।

मध्यप्रदेश को आगामी दो से तीन वर्षों में दो चरणों में 1230 मेगावॉट विद्युत की अतिरिक्त उपलब्धता रहेगी

भोपाल मध्यप्रदेश को आगामी दो से तीन वर्षों में दो चरणों में 1230 मेगावॉट विद्युत की अतिरिक्त उपलब्धता रहेगी। इसके लिये बिजली कंपनी के मुख्यालय जबलपुर में आरईसी ने अदानी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड को ट्रांसमिशन एसपीव्ही सौंपा। इस परियोजना के तहत मेसर्स महान एनर्जेन लिमिटेड के बंधौरा (सिंगरौली) पॉवर जनरेटिंग प्लांट से मध्यप्रदेश के हिस्से की 1230 मेगावॉट विद्युत निकासी के लिये ट्रांसमिशन नेटवर्क तैयार किया जाना है। पारेषण अद्योसंरचना होगी विस्तारित एम.पी. ट्रांसको के मुख्य अभियंता देवाशीष चक्रवर्ती ने बताया कि मध्यप्रदेश पॉवर मैनेजमेंट कंपनी ने 1230 मेगावॉट विद्युत प्रदाय हेतु मेसर्स महान एनर्जेन लिमिटेड से पॉवर परचेस अनुबंध किया था। मेसर्स महान एनर्जेन लिमिटेड द्वारा 2X800 मेगावॉट क्षमता के पॉवर जनरेटिंग प्लांट की स्थापना प्रस्तावित है। पॉवर प्लांट से मध्यप्रदेश के हिस्से की 1230 मेगावॉट विद्युत निकासी हेतु नियामक आयोग के विनियमानुसार टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धा बोली प्रक्रिया के अंतर्गत पारेषण अधोसंरचना के विस्तार हेतु मध्यप्रदेश पॉवर मैनेजमेंट कंपनी द्वारा मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी/एस.टी.यू. से अनुरोध किया गया था। शासन ने निविदा प्रक्रिया समन्वयक (बी.पी.सी.) के लिये आर.ई.सी.पी.डी.सी.एल. (आरईसी पॉवर डेवलपमेंट एंड कंसलटेंसी लिमिटेड) को नियुक्त किया। टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धा बोली (टीबीसीबी) में मेसर्स अदानी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड ने 2000 करोड़ रूपये की इस परियोजना को अन्य बिडर्स के मध्य न्यूनतम दर के आधार पर हासिल करने में सफलता प्राप्त की। पारेषण सेवा अनुबंध हस्ताक्षरित चक्रवर्ती ने जानकारी दी कि वैधानिक औपचारिकताओं को पूर्ण करने के बाद मध्यप्रदेश पॉवर मैनेजमेंट कंपनी एवं मेसर्स अदानी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड के मध्य पारेषण सेवा अनुबंध (ट्रांसमिशन सर्विस एग्रीमेंट) हस्ताक्षरित हुये, जिसके तहत टी.बी.सी.बी. में 400 के.व्ही., 220 के.व्ही. एवं 132 के.व्ही. की विभिन्न ट्रांसमिशन लाइनों सहित दो 400 के.व्ही. के सब-स्टेशन रीवा (सगरा) एवं अमरपाटन (मैहर) में स्थापित किये जाने है।

मध्य प्रदेश विद्युत वितरण कम्पनी 60 किलोमीटर की लाइन डाल रही, अब नहीं होगी बिजली कटौती

 जबलपुर बिजली उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना न करना पड़े, इसलिए आरआरडीएसएस योजना के तहत पहले चरण में 60 किलोमीटर की विद्युत लाइन को इंटर कनेक्ट किया जा रहा है। ऐसे में यदि एक जगह से आपूर्ति बाधित हुई, तो दूसरी जगह से तत्काल शुरू हो जाएगी। इससे औद्योगिक क्षेत्र के उपभोक्ता और कृषि उपभोक्ताओं को फायदा होगा। मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी के संचारण एवं संधारण वृत्त द्वारा यह 60 किलोमीटर की यह लाइन डालने का कम किया जा रहा है। यह लाइनें दो विद्युत लाइनों को जोड़ेंगी। पांच एमवीए का ट्रांसफार्मर, चार फीडर ओएंडएम के अंतर्गत आने वाले मुरई सब स्टेशन का काम पूरा हो चुका है। यहां 33/11 केवी का सब स्टेशन तैयार किया गया। इस सब स्टेशन से चार फीडर निकाले गए हैं। वहीं पांच एमवीए क्षमता का पावर ट्रांसफार्मर यहां लगाया गया है। औद्योगिक क्षेत्र को भी होगा फायदा लाइनों के इंटरकनेक्ट होने से सबसे ज्यादा फायदा औद्योगिक क्षेत्र हरगढ़ को होगा। यहां पहले एक ही लाइन और फीडर से सप्लाई की जा रही है। लाइनों के इंटरनेक्ट होने के बाद यहां बिजली की समस्या से निजात मिलेगी। इतना ही नहीं बिजली कम्पनी यहां आवश्यकतानुसार लोड बढ़ा और घटा भी सकेगी। वहीं लोड को ट्रांसफर भी किया जा सकेगा। हरगढ़ और रमखरिया की लाइनों को इंटरकनेक्ट किया जाएगा। इसके साथ ही ओएंडएम के अंतर्गत पाटन से ग्राम रौसरा, किसरोद से शहपुरा, कटंगी से पोला, रौसरा से बोरिया, बेलखेड़ा वन से बेलखेड़ा टू को जोड़ा जाएगा। वहीं शहर में कई जगहों पर रिंगमेन सिस्टम है। जहां यह सिस्टम नहीं है, वहां भी लाइनों का इंटरकनेक्ट किया जाएगा। आरआरडीएसएस योजना के तहत 60 किलोमीटर की विद्युत लाइन का इंटरकनेक्ट किया जा रहा है। इससे डबल सप्लाई का ऑप्शन मिल जाएगा। यदि एक फीडर बंद होता है, तो उसी लाइन के जरिए दूसरे फीडर से विद्युत सप्लाई की जा सकेगी। जल्द ही काम पूरा हो जाएगा।  

खुद की बिजली से दमकेंगे एमपी के 10 बड़े शहर, 12 मेगावाट तक की क्षमता के लगेंगे पावर प्लांट

भोपाल नगरीय विकास विभाग ने घरेलू कचरे के निस्तारण के मामले में बड़े जुर्माने से बचने के लिए प्रयास शुरू किए हैं। इसके तहत कहीं कचरे से सीएनजी बनाने के प्लांट लगाए जा रहे हैं तो कहीं कंपोस्टिंग के प्लांट लग रहे हैं। इसी सिलसिले में अब मध्यप्रदेश के 10 शहरों में कचरे से बिजली बनाने के प्लांट लगाए जा रहे हैं। इन्हें केन्द्र से अनुमति मिल गई है। यह वर्ष 2026 तक शुरू होने की संभावना है। सरकार ने प्रदेश में नगरीय निकायों को वर्ष 2027 तक कचरा प्रबंधन में आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य तय किया है। यहां पहले से बनाई जा रही रीवा, जबलपुर में कचरे से बिजली बनाने की यूनिट संचालित हैं। प्रतिदिन 950 टन कचरे का प्र-संस्करण कर 18 मेगावॉट बिजली पैदा की जा रही है। लीगेसी वेस्ट खत्म करने में मिलेगी मदद एनजीटी ने 2022 में सॉलिड वेस्ट प्रबंधन में लापरवाही के लिए 3 हजार करोड़ का जुर्माना लगाया था। तत्कालीन सीएस ने छह माह में प्रबंधन करने का शपथ-पत्र दिया था। इसके बाद जुर्माना स्थगित किया गया, लेकिन अब भी निकायों की डंपिंग साइट पर 25 लाख टन से ज्यादा लीगेसी वेस्ट जमा है। बिजली प्लांट बनने से वेस्ट भी खत्म करने में मदद मिलेगी। जुर्माने से बचा जा सकेगा। हाल ही में गीले कचरे की कंपोस्टिंग के लिए कटनी, सागर में स्वचालित यूनिट लगाई गई हैं। इन 10 नई इकाइयों को अनुमति 10 नगरीय निकायों के लिए क्लस्टर आधार पर 1018.85 टन प्रतिदिन क्षमता की इकाइयों के लिए मंजूरी मिली है। इन निकायों में सांची, हरदा, नया हरसूद, शाहगंज, आलीराजपुर, देपालपुर, उन्हेल, बाबई, धारकोटि और इंदौर शामिल हैं। इनमें आसपास के स्थानों को भी जोड़ा गया है। जहां कचरा कम निकलता है वहां समीपस्थ अन्य शहरों को जोड़ा गया है। इंदौर-उज्जैन को मिलाकर 607 टन कचरे से बिजली बनाने की यूनिट्स का काम प्रस्तावित है। इसके शुरू होने से 12.15 मेगावाट बिजली बन सकेगी।

बिजली का बिल दे सकता है शोक, बढ़े सकता है प्रति यूनिट 50 पैसे रेट

जबलपुर बिजली कंपनी दरें बढ़ाकर घरेलू उपभोक्ताओं पर बोझ डालना चाह रही है। मध्य प्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी ने 151-300 के बीच का स्लैब खत्म कर 151 यूनिट के बाद फ्लैट रेट वसूलने का प्रस्ताव मप्र विद्युत नियामक आयोग को दिया है। प्रस्ताव स्वीकृत हुआ तो सबसे ज्यादा नुकसान मध्यवर्ग के उन उपभोक्ताओं को होगा जो सब्सिडी के दायरे से बाहर आते हैं। प्रदेश में ऐसे करीब 25 लाख घरेलू उपभोक्ता हैं, जिन पर 50 पैसे प्रति यूनिट का बोझ डालने की तैयारी हो रही है। 24 जनवरी तक बुलाई गई आपत्ति मप्र पावर मैनेजमेंट कंपनी ने इस संबंध में याचिका मप्र विद्युत नियामक आयोग में दी है। इस पर सुनवाई से पूर्व आयोग ने जनता से 24 जनवरी तक आपत्ति बुलाई है। बता दें कि एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कुल राजस्व आवश्यकता 58744 करोड़ व वर्तमान दरों पर प्राप्त राजस्व 54637 करोड़ बताया है। कंपनी ने इस अंतर की राशि 4107 करोड़ रुपये की भरपाई के लिए औसत 7.52 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव दिया है। उपभोक्ताओं की चार श्रेणियों को तीन में समेटा इस प्रस्ताव में कंपनी ने घरेलू उपभोक्ता की बिजली खपत की चार श्रेणी को तीन में समेट दिया है। पहली श्रेणी 50 यूनिट, दूसरी श्रेणी 51 से 150 यूनिट और तीसरी श्रेणी 151 से ऊपर की रखी गई है। अभी 151 से 300 यूनिट की श्रेणी के लिए अलग दर तय थी। अब कंपनी 151 यूनिट के ऊपर एक दर तय करना चाह रही है। इससे 50 पैसे का बोझ प्रति यूनिट उपभोक्ता पर डालने का प्रस्ताव है। प्रदेश में अभी एक करोड़ 27 लाख कुल घरेलू उपभोक्ता हैं। इसमें बिजली कंपनी करीब एक करोड़ उपभोक्ता को सब्सिडी देती है। ये उपभोक्ता 150 यूनिट मासिक खपत के दायरे में आते हैं। कंपनी 100 यूनिट के लिए 100 रुपये और अगली 50 यूनिट पर सामान्य दर से बिलिंग करती है, इससे उपभोक्ता को करीब 450 रुपये से अधिक की बचत होती है। इस बीच 25 लाख से ज्यादा ऐसे बिजली उपभोक्ता है जिनकी मासिक खपत 151 से 300 यूनिट के भीतर रहती है। ऐेसे उपभोक्ताओं को भी अब फ्लैट रेट पर बिल भरना होगा। मध्यवर्गीय पर बोझ अधिक बिजली मामलों के जानकार एडवोकेट राजेंद्र अग्रवाल ने कहा कि टैरिफ में बदलाव करने से मध्यम वर्ग के उपभोक्ता जिनकी मासिक खपत 151 यूनिट से 300 यूनिट के बीच है उन पर अधिक बोझ डाला जा रहा है। ये वर्ग सरकारी सब्सिडी के दायरे से बाहर होता है, इसलिए उन्हें बिजली की पूरी कीमत देनी पड़ती है। एक दर की योजना मप्र पावर मैनेजमेंट कंपनी के सीजीएम शैलेंद्र सक्सेना ने बतााया कि कंपनी 151 से 300 यूनिट के स्लैब को खत्म कर एक दर तय करना चाहती है। ऐसी श्रेणी के उपभोक्ता से एक सामान्य दर से बिजली बिल लिया जाएगा।

बिजली उपभोक्ताओं को अब सस्ते में मिलेगा बिजली कनेक्शन! लोड आधारित कनेक्शन शुल्क तय

भोपाल बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। अब नए कनेक्शन पर बिजली कंपनी उपभोक्ताओं को अफोर्डेबल चार्ज का नया विकल्प देगी। उपभोक्ता चाहे तो घर के बिजली पॉइंट की जांच करवाकर कनेक्शन शुल्क जमा कर सकता है या नए एसएसी से तय औसत शुल्क से राशि जमाकर कनेक्शन ले सकता है, साथ ही तुरंत कनेक्शन भी मिल जाएगा। मप्र विद्युत नियामक आयोग इस पर 27 नवंबर को सुनवाई करेगा। आम उपभोक्ताओं को ज्यादा लाभ इस नए विकल्प का सबसे ज्यादा लाभ आम उपभोक्ता को मिलेगा। 0 से 3 किलोवॉट भार के कनेक्शन सामान्य घरों में होते हैं। इनके लिए मौजूदा से करीब 50 फीसदी राशि औसत दर में घट रही है। इंफ्रा चार्ज से भी ये मुक्त रहेंगे। 112 किलोवॉट भार के लिए एसएसी तय की है। 50 किलोवॉट तक भार के कनेक्शन को शुल्क से मुक्त रखा गया है। सप्लाई अफोर्डेबल चार्ज को लेकर 27 नवंबर को सुनवाई होगी। संबंधित लोगों से मामले में सुझाव आमंत्रित कराए थे। इसके बाद इसे लागू किया जाएगा। -उमाकांत पांडा, सचिव एमपीइआरसी सप्लाई अफोर्डेबल चार्ज के विकल्प में शुल्क गणना ● 0 से 03 किलोवॉट भार के लिए- 340 रुपए प्रति किलोवॉट ● 03 से 10 किलोवॉट भार के लिए- 1000 रुपए प्रति किलोवॉट ● 10 किलोवॉट से 25 किलोवॉट के लिए- 8080 रुपए व बाद में 2520 रुपए प्रति किलोवॉट ● 25 किलोवॉट से 50 किलोवॉट के लिए 46 हजार रुपए व बाद में प्रति किलोवॉट 4200 रुपए ● 50 किलोवॉट से 112 किलोवॉट के लिए 10 हजार रुपए प्रति किलोवॉट के लिए नोट- ये मल्टी यूजर कॉम्प्लेक्स व आवासीय कॉलोनी उपभोक्ता के लिए हैं। इसमें इंफ्रास्ट्रक्चर, सर्विस लाइन व सुपरविजन चार्ज है। इस तरह तीन श्रेणियों में चार्ज तय किया है। नियामक आयोग से इसका ड्राफ्ट लिया जा सकता है।

उज्जैन में स्थापित टेस्टिंग लेब को नेशनल एक्रिडिएशन बोर्ड फार टेस्टिंग कालिब्रेशन लेबोरेटरीज (NABL ) प्रमाण पत्र मिला

भोपाल मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा उज्जैन में स्थापित टेस्टिंग लेब को नेशनल एक्रिडिएशन बोर्ड फार टेस्टिंग कालिब्रेशन लेबोरेटरीज (NABL ) प्रमाण पत्र मिला है। आत्म-निर्भर भारत के उद्देश्य से कंपनी की जरूरत की विद्युत सामग्री की जांच के लिए अब इस तरह की एनएबीएल प्रयोगशाला स्थानीय स्तर पर ही होने से अन्यत्र सामग्री भेजने में लगने वाला समय, शुल्क बचेगा। कंपनी की प्रबंध निदेशक सुरजनी सिहं और मुख्य महाप्रबंधक प्रकाश सिंह चौहान ने उज्जैन की लेब को आगामी चार वर्षों के लिए राष्ट्रीय स्तर का प्रमाण पत्र मिलने पर बधाई दी है।  अतिरिक्त मुख्य अभियंता आरके नेगी ने बताया कि उक्त लेब पांच करोड़ की लागत से उज्जैन के शंकरपुर में तैयार हुई है। यहां अत्याधुनिक तरीके से ट्रांसफार्मर, तार और केबल की टेस्टिंग की जाएगी, जांच रिपोर्ट भी ऑटोमेटेड़ जनरेटेड़ प्राप्त होगी। उक्त लेब की स्थापना में विभागीय अधिकारी सोमनाथ मरकाम, अजीत लाल, अंशुल कारपेंटर, अमित कुमार का सरहानीय सहयोग रहा है। इस तरह की NABL प्रमाणीकरण वाली लेब इंदौर स्थित पोलोग्राउंड मुख्यालय में पहले से ही कार्यरत है। NABL स्तर की लेब से न केवल कंपनी का कामकाज तेज होती है, बल्कि आर्थिक बचत भी होती है।  

विद्युत वितरण कंपनी ने बिजली चोरी करने वालों से 26 करोड़ रुपये की वसूली की

भोपाल मध्य प्रदेश  (Madhya Pradesh) में इन दिनों बिजली चोरों की शामत आई हुई है. दरअसल, प्रदेश की मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी (Central Region Electricity Distribution Company) ने बिजली चोरी रोकने के लिए अभियान चला रखा है. इस मुहिम के तहत अब तक बिजली चोरी करने वालों से 26 करोड़ रुपये की राशि वसूली गई है.   अब तक वसूले गए 15 करोड़ रुपये आधिकारिक सूचना के मुताबिक, कंपनी ने अपने कार्यक्षेत्र के भोपाल, नर्मदापुरम, ग्वालियर एवं चंबल संभाग अंतर्गत आने वाले 16 जिलों में बिजली चोरी की रोकथाम की दिशा में चालू वर्ष में कारगर कदम उठाए गए हैं. कंपनी की कार्यक्षेत्र में 21,850 परिसरों की जांच की गई. इस दौरान कनेक्शन में अनियमितता पाए जाने पर 29 करोड़ की बिलिंग कर 15 करोड़ की राशि वसूल कर ली गई है. बिजली चोरी के 12,324 प्रकरण पकड़े गए इसी प्रकार विद्युत अधिनियम 2003 की धारा-135 के अंतर्गत सीधे बिजली चोरी के 12,324 प्रकरण पकड़े गए हैं, जिनमें 23 करोड़ से अधिक की बिलिंग कर 11 करोड़ की राशि वसूल की गई है. इसी प्रकार कंपनी के जांच दलों द्वारा 52 करोड़ से अधिक की बिलिंग की गई है. मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के सतर्कता विभाग ने अपने बिलिंग डाटा का विश्लेषण कर 5,379 बिजली चोरी वाले संदेहास्पद प्रकरण विजिलेंस टीम को सौंपे हैं. इनमें अनियमितता पाए जाने पर 50 लाख रुपये से अधिक की बिलिंग कर अब तक करीब 6 लाख की वसूली कर ली गई है. बिजली चोरी पारितोषिक योजना के अंतर्गत कंपनी कार्यक्षेत्र के विभिन्न क्षेत्रों से 241 शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें भिंड, मुरैना, बैतूल एवं ग्वालियर से सर्वाधिक हैं. अब तक इन शिकायतों पर कार्रवाई करके 12 लाख रुपये के बिल जारी किए गए हैं.

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