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मैहर के रामनगर पहुंचे जंगली हाथी आये हाई टेंशन की चपेट, एक की मौत

 सतना शहडोल के रास्ते से मैहर के रामनगर पहुंचे जंगली हाथी, सुबह तकरीबन 4:30 बजे हाई टेंशन तार में फंसने के कारण मेल हाथी की मौत हाे गई है। सूचना मिलते ही कलेक्टर मैहर एवं डीएफओ मौके पर पहुंचे विद्युत सप्लाई कराई गई बंद। शहडोल से बूढ़ा बाउर ग्राम पंचायत के कुआं गांव में पहुंचे थे हाथी शहडोल जिले की जंगलों में एक हफ्ते से मूवमेंट कर रहे जंगली ही हाथियों का दल बीती रात मैहर जिले के रामनगर तहसील अंतर्गत बूढ़ा बाउर ग्राम पंचायत के गांव कुआं पहुंच गया। जहां विद्युत विभाग की हाइट टेंशन के तार में चपेट में आने से एक मेल हाथी की मौत हो गई है। अभी क्षेत्र में चार जंगली हाथियों का मूवमेंट बताया जा रहा है। पीएम के लिए पन्ना से डॉक्टर संजय गुप्ता को मौके पर बुलाया गया मुकुंदपुर रेंज की सभी बीट की टीमों को अन्य चार जंगली हाथियों की तलाश के लिए लगाया गया है। जबकि पीएम के लिए पन्ना से डॉक्टर संजय गुप्ता को मौके पर बुलाया गया है। टीमों को अन्य चार जंगली हाथियों की तलाश के लिए लगाया गया …     अन्य जंगली हाथी करंट के चपेट में ना आए इसके लिए सुबह ही मुकुंदपुर रेंज के आसपास के गांव की विद्युत सप्लाई बंद कराई गई है।     लगातार टीम में अन्य चार की संख्या मौजूद हाथियों के दल को खोज रहा है। हाथी की मौत की सूचना पाकर मैहर कलेक्टर रानी बाटड मौके के पर पहुंची।     उन्होंने पूरे घटनाक्रम की न केवल जानकारी ली बल्कि अन्य जंगली हाथियों की तलाश के लिए जरूरी दिशा निर्देश भी जारी किया है।  

रेंज में बाघ के साथ हाथियों के मूवमेंट ने वन विभाग की मुश्किलें बढ़ाई, बंद कराने पड़े स्कूल और हाट बाजार

 डिंडौरी  सामान्य वनमंडल के एक ही रेंज में मादा बाघ के साथ हाथियों के मूवमेंट ने वन विभाग की मुश्किलें बढ़ा दी है। मादा बाघ के रिहायशी क्षेत्र में मूवमेंट व हाथियों के द्वारा घरों व फसलों को नुकसान पहुंचाए जाने से ग्रामीण दहशत में है। वन्यजीवों के बढ़ते मूवमेंट को ध्यान में रखते हुए आस-पास के विद्यालयों में 25 से 29 नवंबर तक पांच दिन का अवकाश घोषित कर दिया गया है। वहीं इन वन्यजीवों पर लगातार नजर रखी जा रही है। इनकी निगरानी के लिए तीन रेंज का अमला तैनात किया गया है। घर से ना निकलने की सलाह खौफ के चलते ग्रामीण खेत, बाजार और स्कूलों से दूरी बना रहे हैं। वन अमला भी ग्रामीणों को घर से नहीं निकलने की समझाइश दे रहा है। बता दें, शुक्रवार से पश्चिम करंजिया वन परिक्षेत्र अंतर्गत ठाढ़ पथरा वन ग्राम में मादा बाघ का मूवमेंट बना हुआ है। शुक्रवार सुबह संभर पिता गुलौआ गौड़ के घर के सामने बछिया का शिकार किया था। इसके बाद वन विभाग ने ट्रैप कैमरा लगाया, जिसमें दूसरी बार यहां पहुंची मादा बाघ ट्रैप हुई। फोटो और वीडियो को देखने के बाद बताया गया कि बाघिन की उम्र तीन साल है। हाथियों का उत्पात एक सप्ताह से जारी ग्राम पंचायत पंडरी पानी व ढाढ़पथरा के गांवों अम्हादादर, झिरिया बहरा, इमली टोला व चकरार में हाथियों का उत्पात एक सप्ताह से जारी है। हाथी के दल ने अब ग्राम चकरार के किसानों के खेत की खड़ी फसल को खाकर चौपट करने के साथ शेष खड़ी फसलों को रौंद दिया। वहीं बाघिन की सतत मौजूदगी से ग्रामीण भय में हैं और सर्दी में भी रात जागरण कर रहे हैं। फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हाथी जंगली हाथियों का दल लगातार चकरार, उद्दौर, आम्हा, पंडरीपानी, ख्हारखुदरा, चकमी, ठाढपथरा, इमली टोला सहित दर्जनों गांव में फसलों के साथ घरों को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। शनिवार रात हाथियों ने चकरार में प्रमिला गौंड, दिनेश पिता धनेश्वर और दिनेश पिता सुखदेव सिंह नामक किसानों की फसल को क्षति पहुंचाई है। कड़कड़ाती ठंड से दोगुनी मार वर्तमान में जिन क्षेत्रों में हाथियों के दल ने आतंक मचा रखा है वहां के ग्रामीणों चैन सुकून छिन गया हैं। वनांचल के लोगों की मानें तो वे दिन किसी तरह से तो गुजार लेते हैं लेकिन रात होते ही उनके घरों पर हाथियों के हमले का डर सताने लगता हैं। ऐसे में अपनी जान की सलामती के लिए कच्चे मकानों को यूं ही भगवान भरोसे छोड़ मकानों की छतों पर कड़कड़ाती ठंड में तंबू तान रात काटने मजबूर हैं। शुक्रवार की रात में पंडरी पानी, कांदाटोला, केंद्रा बहरा व ठाढ़पथरा के लोगों ने हमले की आशंका से जहां छत में बैठकर जागरण किया वहीं कुछ युवाओं ने अपने घरों की निगरानी के लिए रतजगा किया। ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों का दल दिन भर जंगल के आसपास रुका रहता हैं, लेकिन शाम होते ही आबादी में घुस रहें हैं ऐसे स्थिति में ग्रामीण बहुत भयभीत हैं। बाजारों में कराई गई मुनादी हाथी और बाघिन के आतंक का वनांचल क्षेत्र ग्रामीणों के मन में फिलहाल डर बैठा हुआ है। फलस्वरूप अब लोग रात की बजाए दिन में भी सुरक्षा की दृष्टि से सूनसान इलाकों में जाने से बच रहें हैं। ग्रामीणों का मानना हैं कि जब तक इन वन्य प्राणियों का यहां से गमन नहीं हो जाता तब तक इस क्षेत्र में इनके हमले की आशंका बरकरार है। ऐसी स्थिति में वे किसी भी सूरत में जान जोखिम में डालकर कोई काम नहीं करना चाहते। इसी क्रम में रविवार को ग्राम पंडरी पानी के साप्ताहिक बाजार में पंचायत द्वारा खतरे को भांपते हुए दुकानदार व ग्राहकों को सतर्क और जागरूक करने के उद्देश्य से कोटवार के माध्यम से मुनादी कराकर सचेत किया गया। पंचायत सचिव दिलीप कुमार मरावी ने बताया कि दो सप्ताह से लगातार इसी प्रकार मुनादी कराई जा रही हैं। रविवार को एक बार फिर मुनादी के बाद जहां सूर्यास्त के पहले दुकानदारों व बाजार करने आए लोग बाजार बंद कर घर की ओर चले गए। रविवार का साप्ताहिक बाजार आम दिनों की अपेक्षा समय से पहले दिन डूबने के पूर्व ही बंद हो गया। मटके का पानी पी गई बाघिन बाघिन ने दो दिन पूर्व शिकार करने के बाद पुनः शनिवार की रात आबादी के अंदर पहुंचकर गौशाला में बंधे पशुओं का शिकार करने का प्रयास किया। इस दरमियान बाघिन ने मटके में रखे पानी को पीकर अपनी प्यास बुझाई है। ग्रामीणों ने बताया कि वह सभी पास के मकान की छत पर वह सुरक्षित होने के लिहाज से बैठ रहे। रात्रि में ज बाघिन ने गौशाला के नजदीक पहुंचकर पशुओं को ले जाने के चक्कर में झपट्टा मारी तो आहट और पशुओं द्वारा चिल्लाने की आवाज आने लगी। तब हमारे द्वारा टार्च के रोशनी और हल्ला मचाया गया। तब बाघिन वहां से हटकर अरहर के खेत में रात भर डेरा जमाएं रहीं और सुबह उजाला होने के पूर्व जंगल में चली गई।

ग्रामीण इलाके में पहुंचा 35 हाथियों का दल, हाथी जिले के लुण्ड्रा ब्लॉक के कछार गांव के जंगलों में घूम रहे हैं, जागने पर लोग मजबूर

सरगुजा छत्तीसगढ़ के सरगुजा में 35 हाथियों का दल फिर से ग्रामीण इलाके में पहुंच गया है. ये हाथी जिले के लुण्ड्रा ब्लॉक के कछार गांव के जंगलों में घूम रहे हैं, जिससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल है. हाथियों के डर से ग्रामीण कड़कड़ाती ठंड के बीच पूरी रात जगराता करने को मजबूर हैं. वहीं वन अमला ग्रामीणों को हाथियों से दूर रहने और सतर्क रहने के लिए अपील कर रहा है. फसलों को पहुंचा रहे नुकसान बता दें, हाथियों का यह दल क्षेत्र में टमाटर और धान की फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है, जिससे किसानों की मेहनत पर पानी फिर रहा है. ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल मदद की मांग की है. बता दें, सरगुजा में हाथियों का आतंक कोई नई बात नहीं है, लेकिन ठंड के इस मौसम में यह समस्या ग्रामीणों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है. वहीं और वन विभाग की टीम लगातार ग्रामीणों को सतर्क रहने व हाथियों से दूर रहने की सलाह दे रही है और साथ ही हाथियों को जंगल की ओर खदेड़ने की कोशिश कर रही है. वन विभाग की अपील है कि ग्रामीण किसी भी परिस्थिति में हाथियों के करीब न जाएं और आस-पास हाथी दिखाई देने पर विभाग को तत्काल सूचित करें.

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में हाथियों की रहस्यमय मौत के मामले में एनजीटी ने खुद संज्ञान लिया

भोपाल  मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में हाथियों की रहस्यमय मौत के मामले में एनजीटी ने खुद संज्ञान लिया है। एनजीटी ने इस मामले में कई अधिकारियों को नोटिस जारी किए हैं। इनमें प्रधान मुख्य वन संरक्षक (मध्य प्रदेश), मुख्य वन्यजीव व warden (एमपी), कलेक्टर (उमरिया), भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के निदेशक, भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) के निदेशक और केंद्रीय कृषि मंत्रालय के सचिव शामिल हैं। एक सप्ताह में मांगी रिपोर्ट वहीं, एनजीटी ने सभी को एक हफ्ते के अंदर, अगली सुनवाई से पहले, जवाब दाखिल करने को कहा है। यह मामला शुरुआत में एनजीटी की प्रधान पीठ के सामने आया था, जिसे बाद में केंद्रीय पीठ को स्थानांतरित कर दिया गया। एनजीटी के आदेश में उन रिपोर्टों का हवाला दिया गया है जो बांधवगढ़ में 10 हाथियों की मौत को दूषित कोदो बाजरा खाने से जोड़ती हैं। ये हैं शुरुआती वजह शुरुआती जांच से पता चलता है कि मौतें बाजरा में मायकोटॉक्सिन संदूषण के कारण हुई हो सकती हैं। प्रभावित क्षेत्र से नमूने आगे के विश्लेषण के लिए दो प्रयोगशालाओं में भेजे गए थे, उत्तर प्रदेश में भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान और मध्य प्रदेश के सागर में एक फोरेंसिक लैब। मायकोटॉक्सिन का पड़ता है प्रभाव एनजीटी के आदेश में आगे कहा गया है कि कोदो बाजरा, जो भारत के कई हिस्सों में मुख्य भोजन है, अपने उच्च फाइबर और खनिज सामग्री के लिए जाना जाता है। हालांकि, जब यह मायकोटॉक्सिन से संक्रमित हो जाता है। खासकर मानसून के मौसम में नमी की स्थिति में तो इसमें फंगल संक्रमण हो सकता है। यह संदूषण मनुष्यों और जानवरों दोनों के लिए गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है। इससे लीवर और किडनी खराब हो सकती है और साथ ही गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएं भी हो सकती हैं। कोदो को ठहराया जा रहा जिम्मेदार यह आरोप लगाया गया है कि बांधवगढ़ में हाथियों ने दूषित कोदो बाजरा या उसके उपोत्पादों का सेवन किया होगा, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें जहर मिला होगा। माना जा रहा है कि फंगल संदूषण से उत्पन्न मायकोटॉक्सिन से हाथियों की मौत हुई है। एनजीटी ने इस तरह के व्यापक प्रभावों के बारे में चिंता व्यक्त की है। उसने कहा कि इससे वन्यजीवों और पशुधन दोनों को खतरा हो सकता है जो दूषित फसल के संपर्क में आ सकते हैं। इस फैसले का दिया हवाला एनजीटी ने यह भी कहा कि यह घटना संभावित रूप से वन संरक्षण अधिनियम, 1980 और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 का उल्लंघन हो सकती है, जो महत्वपूर्ण पर्यावरणीय अनुपालन मुद्दों को जन्म देती है। ट्रिब्यूनल ने मामले को स्वत: संज्ञान लेने के अपने अधिकार पर जोर दिया। इसके लिए माननीय सर्वोच्च न्यायालय के नगर निगम ग्रेटर मुंबई बनाम अंकिता सिन्हा और अन्य (2021 एससीसी ऑनलाइन एससी 897) के मामले में फैसले का हवाला दिया। एक सप्ताह में जवाब मांगा अपने आदेश के हिस्से के रूप में, एनजीटी ने राज्य और केंद्र सरकार के अधिकारियों को अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले ट्रिब्यूनल की केंद्रीय क्षेत्रीय पीठ के समक्ष हलफनामे के रूप में अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। ट्रिब्यूनल ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई प्रतिवादी अपने कानूनी वकील की सलाह के बिना जवाब दाखिल करता है, तो उसे ट्रिब्यूनल की सहायता के लिए वर्चुअली उपस्थित रहना होगा। यह मामला भोपाल में केंद्रीय क्षेत्रीय पीठ के अधिकार क्षेत्र में होने के कारण इस पीठ को स्थानांतरित कर दिया गया था। मूल केस रिकॉर्ड को तदनुसार अग्रेषित करने का निर्देश दिया गया था।

MP में हाथियों को भी लगाया जाएगा सैटेलाइट कॉलर, जानें क्या है पूरा प्लान

भोपाल मध्य प्रदेश में चीते और बाघ की तर्ज पर अब हाथियों को भी सैटेलाइट कॉलर लगाये जायेंगे. सैटेलाइट कॉलर लगाने से हाथियों की लोकेशन का पता चल सकेगा. वन विभाग के एपीसीसीएफ एल. कृष्णमूर्ति ने बताया कि हाथी झुंड में रहते हैं. इसलिए सैटेलाइट कॉलर झुंड के किसी एक हाथी को लगाई जाएगी. इसकी मॉनिटरिंग कॉरिडोर वाले जिलों के डीएफओ और वाइल्ड लाइफ मुख्यालय स्थित कंट्रोल कमांड सेंटर से होगी. उन्होंने बताया कि हाथियों की लोकेशन पता करने के लिए नई व्यवस्था की जा रही है. यदि हाथी गांव की तरफ जाते हैं तो उन्हें मैनेज कर जंगल की तरफ हांका जाएगा. सैटेलाइट कॉलर लगाने के लिए कर्नाटक वाइल्ड लाइफ मुख्यालय ने स्वीकृति दे दी है. बताया जा रहा है कि कर्नाटक में इस तरह के प्रयोग हो रहे हैं. गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में लगभग 160 हाथी हैं. आंकड़ों के मुताबिक बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 70 हाथी हैं. वहीं, संजय डुबरी नेशनल पार्क में 25 हाथियों का डेरा है. हाथियों को मैनेज करने का गुर सीखने अधिकारियों का दो दल मैसूर और कोयम्बटूर जाएगा. अब हाथियों को लगाये जायेंगे सैटेलाइट कॉलर दोनों दलों में कान्हा, संजय दुबरी, बांधवगढ़, उमरिया, मंडला, सीधी, शहडोल, अनूपपुर, मंडला सहित अन्य हाथी कॉरिडोर और प्रभावित इलाकों के डीएफओ शामिल हैं. सैटेलाइट कॉलर लगाने से जंगल के पास रहने वाली आबादी को बड़ी राहत मिलेगी. जंगली हाथी के गांव की तरफ जाने पर मैनेज कर जंगल की तरफ हांक दिया जाएगा. वन विभाग की तरफ से लोगों को भी जागरूक करने का काम किया जाएगा. बता दें कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 10 हाथियों की रहस्मयी मौत के बाद मध्य प्रदेश सरकार भी गंभीर है. हाथियों की मौत ने मध्य प्रदेश के वन्य प्राणियों की  सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के 10 हाथियों की मौत मामले फॉरेंसिक रिपोर्ट आ गयी है. 

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 10 हाथियों की रहस्मयी मौत? जल्द आएगी फॉरेंसिक रिपोर्ट

 उमरिया मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में मरे दस हाथियों के नमूनों की फोरेंसिक लैब रिपोर्ट जल्द ही आएगी. इससे मौत के कारणों की साफ वजह सामने आ जाएगी. अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एल कृष्णमूर्ति ने एक न्यूज एजेंसी को बताया कि नमूने सागर स्थित राज्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला और जबलपुर व नागपुर की प्रयोगशालाओं में भेजे गए हैं. एपीसीसीएफ ने कहा, “हमें भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI), बरेली की रिपोर्ट पहले ही मिल चुकी है. एफएसएल सागर, जबलपुर और नागपुर की रिपोर्ट भी जल्द ही आ जाएगी और इससे मौत के कारणों के बारे में और जानकारी मिलेगी.” कृष्णमूर्ति हाथियों की मौत की जांच के लिए राज्य सरकार द्वारा गठित पैनल के प्रमुख हैं. बता दें कि 29 अक्टूबर को उमरिया जिले के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में चार हाथी मृत पाए गए थे. बाद में मरने वालों की संख्या बढ़कर दस हो गई थी. आईवीआरआई की रिपोर्ट के अनुसार, विसरा में न्यूरोटॉक्सिन साइक्लोपियाज़ोनिक एसिड पाया गया था, लेकिन कोई कीटनाशक या कीटनाशक नहीं था. इससे साफ पता चलता है कि कोई जहर नहीं था, बल्कि जहर बड़ी मात्रा में खराब हो चुके कोदो बाजरे के पौधों के खाने से हुआ था. रिजर्व में बचे हुए तीन हाथियों के बारे में पूछे जाने पर कृष्णमूर्ति ने कहा कि वन विभाग की टीमें उनकी गतिविधियों पर नज़र रख रही हैं. एक बच्चा हाथी कटनी की ओर बढ़ गया था और उस पर नज़र रखी जा रही थी.  

रोमांचित लोगों के कारण लगी वाहनों की लंबी कतार, छत्तीसगढ़-कोरबा में सड़क पार करते दिखा हाथियों का झुंड

कोरबा. कोरबा जिले में कटघोरा से चोटिया नेशनल हाईवे के बीच ग्राम मड़ई के पास का दृश्य लोगों की सांस थाम कर रखने वाला रहा। बच्चों सहित दंतैल और हाथियों का दल इस पार से सड़क पार कर उस पार के जंगल को जाने निकला था। जानकारी होने पर दोनों तरफ से आवागमन रुकवाया गया। दोपहिया से लेकर चार पहिया और भारी वाहनों के पहिये थमे रहे। इतनी संख्या में हाथियों को नजदीक से देखने का रोमांच के साथ भय भी रहा कि जरा से कोई गड़बड़ी हुई और हाथी बिदक गए तो भगदड़ के हालात बन कर जान जोखिम में पड़ना तय था। लोगों ने सूझबूझ का परिचय दिया और बिना उग्र हुए, बिना धैर्य खोए हाथियों को छेड़छाड़ किए बगैर सड़क पार करने दिया। हालांकि थोड़ा बहुत शोर होता रहा लेकिन सभी हाथी बिना नुकसान पहुंचाए जंगल के भीतर चले गए। स्थानीय लोगों की माने तो कई बार सड़क पर करते हुए हाथीयो का झुंड नजर आता है लेकिन इस बार इतने हाथियों को एक साथ समूह में सड़क पार करते हुए पहली बार देखा गया है। जहां इस घटना के बाद सड़क के दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतार लग गई। वहीं, लोग इस दृश्य को अपने मोबाइल में भी कैद करते नजर आए। अगर हाथियों का झुंड मुख्य सड़क पर आता या किसी तरह का उत्पादत मचाता तो बड़ी घटना घट सकती थी।

केंद्र सरकार भी 10 हाथियों की मौत पर सख्त, मांगी रिपोर्ट

उमरिया उमरिया जिले में आने वाले बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 10 हाथियों की मौत के बाद हड़कंप मचा हुआ है। सब यह जानना चाहते हैं कि अचानक से इतने हाथियों की मौत कैसे हुई। राज्य सरकार ने भी इस मामले में प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है। जबकि केंद्र सरकार भी इस मुद्दे पर सख्त नजर आ रहा है। पीएमओ ने इस मामले में रिपोर्ट मांगी है, क्योंकि अब तक 10 हाथियों की मौत का खुलासा नहीं हो पाया है। फिलहाल, लैब की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। उमरिया में अचानक से 10 हाथियों की मौत के बाद हड़कंप मचा हुआ है। क्योंकि सभी हाथियों की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है। जबकि हाथियों की निगरानी के लिए टीम भी रहती है। फिलहाल, इस घटना के बाद हाथियों की निगरानी के लिए छह विशेष दल गठित किए गए हैं। हाल ही में सीएम मोहन यादव ने भी वन विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की थी। जहां लापरवाही मिलने पर फील्ड डायरेक्टर गौरव चौधरी और पनपथा एसडीओ फतेह सिंह निनामा को मामले में सस्पेंड भी किया गया है। सीएम ने इस मामले में तेजी से काम करने के निर्देश दिए हैं, जबकि केंद्र सरकार ने भी रिपोर्ट मांगी है। बताया जा रहा है कि हाथियों की मौत के मामले में अगर कुछ और अधिकारियों या कर्मचारियों की लापरवाही सामने आती है तो उस पर भी एक्शन हो सकता है। क्योंकि हाथियों ने मौत से पहले बड़ी मात्रा में कोदो खाया था। फिलहाल, जंगली हाथियों पर निगरानी रखने के लिए वन विभाग की टीम को भी अलर्ट किया गया है। सीएम मोहन यादव ने हाथियों की मौत के मामले में जांच के निर्देश दिए हैं। वहीं, पिछले कुछ समय में हाथियों और स्थानीय लोगों के बीच टकराव की बात भी सामने आई है। क्योंकि हाथी स्थानीय रहवासी इलाके में भी घुसे हैं, जिससे कई बार स्थानीय लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में स्थानीय लोग भी हाथियों को भगाते हैं, जिससे यहां डर बना रहता है। यही वजह है कि स्पेशल फोर्स गठित करने के निर्देश भी सीएम ने दिए हैं।

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