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राजस्थान निकाय चुनाव अपडेट: MP से EVM किराए पर, करार पर हुई मुहर

 ग्वालियर राजस्थान राज्य में स्थानीय निकाय चुनाव कराने के लिए मध्य प्रदेश से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें किराए पर लेगा. प्रदेश के चुनाव आयुक्त राजेश्वर सिंह ने कहा कि EVM की उपलब्धता के संबंध में राजस्थान और मध्य प्रदेश के राज्य चुनाव आयोगों के बीच एक अतिरिक्त MoU साइन किया गया है. उन्होंने कहा कि MoU के तहत, मध्य प्रदेश राज्य चुनाव आयोग शहरी स्थानीय निकाय और पंचायती राज चुनावों में इस्तेमाल के लिए राजस्थान को किराए पर 30 हजार कंट्रोल यूनिट और 60 हजार बैलेट यूनिट देगा. उन्होंने कहा कि EVM की सप्लाई, इस्तेमाल, रखरखाव, सुरक्षा और वापसी से संबंधित सभी शर्तों को भारत निर्वाचन आयोग के दिशानिर्देशों के अनुसार सुनिश्चित किया जाएगा. राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने बताया- MOU के तहत मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग की तरफ से राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग को चुनावों के लिए कुल 30 हजार कंट्रोल यूनिट और 60 हजार बैलेट यूनिट किराए पर उपलब्ध कराई जाएंगी। स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों के लिए मध्यप्रदेश से मंगाई जाएंगी ईवीएम मशीन। (फाइल फोटो) इन्होंने कहा कि इन ईवीएम का उपयोग प्रदेश में नगर निकाय एवं पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों में किया जाएगा। ईवीएम की आपूर्ति, उपयोग, रख-रखाव, सुरक्षा और वापसी से संबंधित सभी शर्तें भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत सुनिश्चित की जाएंगी। ईवीएम के तकनीकी परीक्षण (एफ.एल.सी.), मरम्मत और आवश्यक तकनीकी सहयोग का काम भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (ईसीआईएल), हैदराबाद के अधिकृत इंजीनियरों द्वारा किया जाएगा। राजेश्वर सिंह ने यह भी कहा कि यह समझौता दोनों आयोगों के बीच EVM की उपलब्धता और इस्तेमाल पर पहले हुई सहमति का ही विस्तार है. चुनाव अधिकारी ने कहा कि EVM की सुरक्षा, ट्रांसपोर्टेशन, स्टोरेज और संचालन की व्यवस्था निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार सुनिश्चित की जाएगी और मशीनों के लिए टेक्निकल टेस्टिंग (फर्स्ट-लेवल चेकिंग), मरम्मत और जरूरी टेक्निकल सपोर्ट इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ECIL) हैदराबाद के इंजीनियर करेंगे.

महाराष्ट्र में विपक्षी उम्मीदवार जो चुनाव हार चुके है उनकी ECI से मांग, ईवीएम और वीवीपैट का हो मिलान

मुंबई महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में हार का सामना करने वाले महा विकास आघाडी (एमवीए) के उम्मीदवारों ने अपने-अपने क्षेत्रों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) और वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल्स (वीवीपैट) के मिलान की मांग करने का फैसला किया है। विपक्ष के एक नेता ने मुंबई में यह जानकारी दी है। आपको बता दें कि महाराष्ट्र में चुनाव नतीजे सामने के बाद शिवसेना (यूबीटी) लगातार ईवीएम पर सवाल उठा रही है। चुनाव हारने वाले कई उम्मीदवारों ने मंगलवार को पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे के साथ बातचीत के दौरान ईवीएम पर सवाल उठाए। उद्धव ठाकरे ने मुंबई स्थित अपने आवास पर आयोजित बैठक में अपनी पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन की समीक्षा की। आपको बता दें कि पिछले सप्ताह आए चुनावी नतीजों में शिवसेना, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के महायुति गठबंधन ने भारी बहुमत के साथ सत्ता बरकरार रखा। इस चुनाव में महा विकास अघाड़ी को करारी हार का सामना करना पड़ा है। 288 विधायकों वाले महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में महायुति गठबंधन ने 230 सीटों पर जीत दर्ज की। वहीं महाविकास अघाड़ी को सिर्फ 46 सीटों से संतोष करना पड़ा। इनमें उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) 20 सीट जीतकर विपक्षी खेमे में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। उसके बाद कांग्रेस ने 16 सीटें और एनसीपी (शरदचंद्र पवार) 10 सीट के साथ सबसे पीछे रही। मुंबई की चांदीवली विधानसभा सीट से चुनाव हारने वाले कांग्रेस के नेता आरिफ नसीम खान ने मंगलवार को कहा कि उन्होंने उद्धव ठाकरे से चर्चा की है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं से शिकायत मिली है कि ईवीएम से छेड़छाड़ की जा सकती है। खान ने कहा, ‘‘हमें राज्य के विभिन्न हिस्सों से परिणामों पर संदेह व्यक्त करते हुए शिकायतें मिल रही हैं। लोकतंत्र में शिकायतों का सत्यापन होना जरूरी है और मेरे साथ ही हममें से कई लोग (जो हार गए हैं) सत्यापन के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया में हैं।’’ मुंबई से शिवसेना (यूबीटी) के एक विधायक ने दावा किया है कि डाले गए वोट और ईवीएम में गिने गए वोट की संख्या में विसंगतियां थीं। विधायक ने कहा, ‘‘लगभग सभी उम्मीदवारों ने ईवीएम की कार्यप्रणाली पर संदेह जताया है।’’

ईवीएम 100 प्रतिशत फुलप्रूफ हैं, अगर वे आज फिर सवाल उठाते हैं, तो हम उन्हें फिर से बताएंगे-राजीव कुमार

नई दिल्ली  महाराष्ट्र और झारखंड के लिए चुनाव तिथियों की घोषणा से पहले विपक्षी दलों द्वारा एक बार फिर ईवीएम में हेराफेरी का मुद्दा उठाए जाने के बाद, मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने मंगलवार को कहा कि जनता ने मतदान में हिस्सा लेकर सवालों के जवाब दिए हैं. कुमार ने कहा, “जनता मतदान में भाग लेकर सवालों के जवाब देती है. जहां तक ​​ईवीएम का सवाल है, वे 100 प्रतिशत फुलप्रूफ हैं. अगर वे आज फिर सवाल उठाते हैं, तो हम उन्हें फिर से बताएंगे.” कांग्रेस नेता ने पेजर हैक का उदाहरण देकर ईवीएम पर उठाया सवाल इससे पहले, कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने दावा किया था कि ईवीएम में हेराफेरी की जा सकती है, उन्होंने इजरायल द्वारा आतंकवादी संगठन हिजबुल्लाह के पेजर हैक करने का उदाहरण दिया. राशिद अल्वी ने कहा, “महाराष्ट्र में विपक्ष को ईवीएम के बजाय पेपर बैलेट से मतदान कराने पर जोर देना चाहिए. अन्यथा महाराष्ट्र में भाजपा सरकार और चुनाव आयोग कुछ भी कर सकते हैं. अगर इज़रायल पेजर और वॉकी-टॉकी के इस्तेमाल से लोगों को मार सकता है, तो ईवीएम कहां है? प्रधानमंत्री के इज़रायल के साथ बहुत अच्छे संबंध हैं. इजरायल ऐसी चीजों में माहिर है. ईवीएम का बड़ा खेल कहीं भी हो सकता है और उसके लिए भाजपा चुनाव से पहले यह सब खेल कर लेती है.” कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने हरियामा चुनाव को लेकर दी है लिखित शिकायत पिछले हफ्ते कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने चुनाव आयोग को एक ज्ञापन सौंपा और कहा कि उन्हें उम्मीद है कि निकाय इस मुद्दे का संज्ञान लेगा और उचित निर्देश देगा. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पार्टी के संचार प्रभारी महासचिव ने लिखा, “9 अक्टूबर को कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने चुनाव आयोग को शिकायतों से भरा ज्ञापन सौंपा था. इसे आगे बढ़ाते हुए आज हमने हरियाणा के 20 विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव प्रक्रिया में गंभीर और स्पष्ट अनियमितताओं को उजागर करते हुए एक अपडेटेड ज्ञापन दिया है. हमें उम्मीद है कि चुनाव आयोग इसका संज्ञान लेगा और उचित निर्देश जारी करेगा.” कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने 20 सीटों पर गड़बड़ी की लिस्ट आयोग को सौंपी है कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि पार्टी ने 20 सीटों की सूची भेजी है, जिन पर उम्मीदवारों ने हरियाणा विधानसभा चुनाव में ईवीएम की मतगणना को लेकर अपनी लिखित और मौखिक शिकायतें प्रस्तुत की हैं. खेड़ा ने कहा, “हमने चुनाव आयोग को 20 सीटों की सूची भेजी है, जिसके बारे में हमारे उम्मीदवारों ने 99 प्रतिशत बैटरी चार्ज होने की लिखित और मौखिक शिकायतें दी हैं. यह मुद्दा मतगणना के दिन उठाया गया था… यह एक अजीब संयोग है कि जिन मशीनों में 99 प्रतिशत बैटरी चार्ज दिखाई गई, वे वही मशीनें थीं जिन पर कांग्रेस को ज्यादातर हार का सामना करना पड़ा. 60-70 प्रतिशत बैटरी चार्ज वाली मशीनें वे थीं जिन पर कांग्रेस जीती. ऐसा क्यों हुआ?” चुनाव आयोग मंगलवार को महाराष्ट्र और झारखंड के लिए चुनाव की तारीखों की घोषणा करेगा.

हरियाणा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस ने ईवीएम और चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर फिर सवाल उठाए

नई दिल्ली राहुल गांधी ने एक बार कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की असली ताकत उनका इकबाल है और एक दिन वह उस इकबाल को खत्म करके रहेंगे। इसके लिए उन्होंने कोशिशें भी खूब की। राफेल सौदे को लेकर ‘चौकीदार चोर है’ का अभियान हो या हिंडनबर्ग रिपोर्ट को लेकर ‘मोदानी’ का हमला या फिर अंबानी-अडानी की जेब में सरकार वाला नैरेटिव…राहुल गांधी ने हर मुमकिन कोशिश की लेकिन कामयाबी नहीं मिली। राहुल गांधी मोदी का इकबाल खत्म भले न कर पाए लेकिन ऐसा लगता है कि उनकी पार्टी अब संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को ध्वस्त करने के खतरनाक खेल में जुट गई है। हरियाणा चुनाव में हार का ठीकरा ईवीएम पर फोड़ने और चुनाव आयोग पर हमले से कांग्रेस असल में यही कर रही। उस ईवीएम पर सवाल उठा रही जो एक बार नहीं बल्कि कई बार, बार-बार अग्निपरीक्षा में पास हुई है। बेदाग साबित हुई है। सुप्रीम कोर्ट से क्लीन चिट मिली। चुनाव आयोग ने हैकिंग का ओपन चैलेंज तक दिया लेकिन कोई सामने नहीं आया। जीत गए तो ईवीएम ठीक, हार गए तो सारा दोष ईवीएम का! मंगलवार को दो राज्यों के चुनाव नतीजे आए। जम्मू-कश्मीर और हरियाणा। जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस-नैशनल कॉन्फ्रेंस गठबंधन की जीत हुई तो हरियाणा में बीजेपी की। लेकिन दोनों परिणामों को लेकर कांग्रेस की प्रतिक्रिया में जमीन-आसमान का फर्क था। जहां जीते वहां तो लोकतंत्र की जीत। राज्य के साथ ‘अन्याय’ और ‘अपमान’ का जनता का करारा जवाब। तरह-तरह के लच्छेदार जुमले। लेकिन जहां हार गए, वहां जनादेश का सम्मान तो दूर, उसे न स्वीकार करने का अहंकार। जीत गए तो ईवीएम ठीक, हार गए तो सारा दोष ईवीएम का। हरियाणा चुनाव के लिए मंगलवार सुबह 8 बजे जब काउंटिंग शुरू हुई तो शुरुआती रुझानों में कांग्रेस बहुमत के आंकड़े को पार कर चुकी थी। लेकिन 1-2 घंटे बाद ही रुझान पलट गए। बीजेपी आगे हो गई। एक बार आगे हुई तो फिर अंतिम नतीजे आने तक आगे ही रही। पिछड़ने के बाद से ही कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। पहले काउंटिंग के आंकड़ों के कथित धीमे अपडेट का मुद्दा उठाया। वक्त के साथ जब रुझान निर्णायक मोड़ पर पहुंच गए तब कांग्रेस ने ईवीएम पर ही सवाल उठाना शुरू कर दिया। जनादेश को स्वीकार करने के बजाय कांग्रेस ने काउंटिंग की प्रक्रिया पर सवाल उठा दिए। ईवीएम पर उंगली उठाई। साजिश का आरोप लगाने लगे। जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि मतगणना के वक्त कई ईवीएम में 99 प्रतिशत बैटरी चार्ज मिली। जिन ईवीएम की बैटरी 60-70 प्रतिशत चार्ज थीं वहां कांग्रेस के अच्छे प्रदर्शन का दावा किया। जहां 99 प्रतिशत बैटरी चार्ज थी वहां बीजेपी की जीत का दावा किया. लेकिन चुनाव आयोग ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ईवीएम बैटरी की क्षमता और नतीजों में कोई संबंध ही नहीं है। आत्ममंथन के बजाय ईवीएम का रोना! कांग्रेस ने हार को स्वीकार कर आत्ममंथन और समीक्षा के बजाय बहानेबाजी का आसान रास्ता चुना लेकिन ऐसा करते हुए वह दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की महान लोकतांत्रिक प्रक्रिया और उसकी विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा रही है। हरियाणा में इस बार कांग्रेस के प्रदर्शन में सुधार हुआ है। 90 विधानसभा सीटों वाले राज्य में 2019 में 31 सीट जीतने वाली कांग्रेस ने इस बार 37 सीटों पर जीत हासिल की। वोट शेयर में भी जबरदस्त इजाफा हुआ। पिछली बार कांग्रेस का वोटशेयर 28 प्रतिशत था तो इस बार 39 प्रतिशत यानी 11 प्रतिशत ज्यादा रहा। लेकिन प्रदर्शन में ये सुधार सत्ता तक नहीं पहुंचा पाया। ऐसा क्यों हुआ, उसकी समीक्षा के बजाय पार्टी चुनावी प्रक्रिया पर ही लांछन लगाने लगी है। वैसे कांग्रेस या विपक्षी दल ऐसा पहली बार नहीं कर रहे। इससे पहले भी अपनी-अपनी सुविधा के हिसाब से पार्टियां ईवीएम पर चुप्पी या हो-हल्ला मचाती रही हैं। ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल तो सबसे पहले बीजेपी ने ही उठाए थे। 2009 की हार के बाद लाल कृष्ण आडवाणी ने ईवीएम पर संदेह किया था। बीजेपी के एक और नेता जीवीएल नरसिम्हा राव ने तो बाकायदे किताब लिखकर ईवीएम पर संदेह जताया था। लेकिन ईवीएम एक बार नहीं, कई बार अग्निपरीक्षा से गुजरी और हर बार बेदाग निकली। जब देश की सबसे बड़ी अदालत से ईवीएम और चुनाव आयोग को क्लीन चिट मिल गई तब इस पर चल रहा विवाद खत्म हो जाना चाहिए था। हर अग्निपरीक्षा में बेदाग साबित हुई है ईवीएम निहित स्वार्थ के तहत चुनाव आयोग और ईवीएम को लांछित करने की कोशिशों पर सुप्रीम कोर्ट एडीआर जैसे समूहों को लताड़ लगा चुका है। इसी साल अप्रैल में जब लोकसभा चुनाव की प्रक्रिया चल रही थी तब सर्वोच्च अदालत ने पिछले 70 सालों से स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग की तारीफ की और साथ में इस पर दुख जताया कि ‘निहित स्वार्थी समूह’ देश की उपलब्धियों को कमजोर कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ईवीएम पर 8 बार परीक्षण किया गया और ये हर बार बेदाग निकली। ईवीएम को लेकर कई बार मामले हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट पहुंचे लेकिन हर बार उसकी विश्वसनीयता असंदिग्ध मिली। वीवीपैट पर्चियों और ईवीएम में दर्ज वोटों के मिलान में कभी कोई विसंगति नहीं दिखी। अभी हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कई राज्यों में ईवीएम में दर्ज वोट और वीवीपैट का मिलान हुआ। सब सही पाया गया और ईवीएम बेदाग साबित हुई। सात साल पहले 2017 में तो चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों या किसी भी व्यक्ति या संगठन को ईवीएम हैक करके दिखाने का खुला चैलेंज दिया था। तब सिर्फ 2 पार्टियों ने ही चैलेंज स्वीकार किया था- एनसीपी और सीपीएम। तय तारीख को दोनों पार्टियों के नेता चुनाव आयोग के दफ्तर तो पहुंचे लेकिन चैलेंज में हिस्सा लेने की हिम्मत नहीं हुई। हां, आम आदमी पार्टी ने जरूर दिल्ली विधानसभा के भीतर प्रहसन किया। विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर जुगाड़ के डिब्बों को ईवीएम का नाम देकर कथित तौर पर हैक करके दिखाया गया। पार्टी ने असली ईवीएम के बजाय ‘जुगाड़ डिब्बे’ का इस्तेमाल करके सस्ती पब्लिसिटी का हथकंडा अपनाया। चुनाव आयोग कार्रवाई न कर दे, इसलिए विधानसभा के विशेष सत्र की आड़ ली गई। हार-जीत होती रहेगी, जनता में … Read more

अब जीतू पटवारी ने इलेक्शन कमीशन पर लगाए गंभीर आरोप

भोपाल देश में लोकसभा चुनावों के परिणामों के बाद एक बार फिर EVM को लेकर सवाल उठने शुरू हो गए हैं. इसको लेकर राहुल गांधी ने भी पहली सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट किया है. जिसमें उन्होंने EVM को ब्लैक बॉक्स बताया और कहा कि भारत जैसे देश में किसी को भी इसकी जांच करने की अनुमति नहीं है. इसके बाद सियासत तेज हो चली है. इस पूरे मामले को लेकर अब प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी सवाल उठाए हैं. जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया X पर लिखा “EVM को लेकर लगातार कई सवाल उठ रहे हैं, जिसमें तर्क के साथ तथ्य भी दिए जा रहे हैं. इसमें संदेह के बाद सबूत भी दिए जा रहे हैं! लेकिन इलेक्शन कमीसन ऑफ इंडिया अभी भी चुप है. जीतू ने आगे लिखा “क्या यह चुप्पी किसी बड़ी साजिश का कारण है? EVM को लेकर लंबे समय से उठ रहा विवाद EVM को लेकर लंबे समय से कांग्रेस सवाल खड़े करती नजर आई है. विधानसभा चुनाव हो या फिर लोकसभा चुनाव हर समय कांग्रेस ने EVM पर कई तरह के सवाल खड़े किए हैं. मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने तो कई बार इसको लेकर आंदोलन भी किया है. लेकिन, इस पूरे मामले पर ELON मस्क के पोस्ट के बाद राजनीति गर्मा गई है. राहुल ने EVM को बताया ब्लैक बॉक्स राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि “भारत में ई. वी. एम. एक “ब्लैक बॉक्स” है और किसी को भी उनकी जांच करने की अनुमति नहीं है. हमारी चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर गंभीर चिंताएं जताई जा रही हैं. जब संस्थानों में जवाबदेही की कमी होती है तो लोकतंत्र एक दिखावा बन जाता है. और, धोखाधड़ी का शिकार हो जाता है. एलन मस्क के पोस्ट के बाद राजनीति तेज दुनिया के सबसे अमीर उद्योगपति और टेस्ला के मालिक एलन मस्क भी इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन पर सवाल उठा चुके हैं. उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि हमें इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों को खत्म कर देना चाहिए. मनुष्यों या एआई द्वारा हैक होने का खतरा भले ही छोटा लगे, लेकिन यह अभी भी बहुत अधिक है.  

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