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किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों की जानकारी, कृषि में तकनीकी बदलाव की ओर कदम

भोपाल राज्य शासन के निर्देशानुसार कृषक कल्याण वर्ष-2026 के तहत प्रदेश में कृषि रथों का भ्रमण जारी है। इसी क्रम में नरसिंहपुर जिले के सभी 6 विकासखंडों में कृषि रथ चलाया जा रहा है। जिले के किसानों को ई-विकास प्रणाली (ई-टोकन उर्वरक वितरण), आधुनिक कृषि यंत्रों और उन्नत खेती आदि की जानकारी दी जा रही है। कृषि विभाग द्वारा कृषि रथ के माध्यम से किसानों को जागरूक भी किया जा रहा है। कृषि रथ के माध्यम से किसानों को जैविक खेती एवं प्राकृतिक कृषि क्षेत्रों का विस्तार, मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना, एकीकृत पोषक तत्व, कीट एवं रोग प्रबंधन, कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाने के उपाय, फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने, विभागीय कृषि योजनाओं का प्रचार-प्रसार, प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना, ई-विकास प्रणाली अंतर्गत ई-टोकन उर्वरक वितरण व्यवस्था और पराली प्रबंधन की जानकारी दी गई। किसानों को नरवाई (फसल अवशेष) प्रबंधन के लिए आधुनिक यंत्रों जैसे सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, जीरो टिलेज सीड कम फर्टिलाइजर ड्रिल, स्ट्रॉ रीपर और रीपर कम बाइंडर की तकनीकी जानकारी दी गई। किसानों को जानकारी दी गई कि सुपर सीडर और हैप्पी सीडर जैसे यंत्र खेत की तैयारी, नरवाई प्रबंधन और बोनी जैसे तीन काम एक साथ करते हैं। इन यंत्रों के उपयोग से न केवल समय और लागत की बचत होती है, बल्कि पैदावार भी अच्छी मिलती है। उन्होंने किसानों को समझाइश दी गई कि नरवाई जलाने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति नष्ट होती है और वायु प्रदूषण फैलता है। नरवाई न जलाकर उसे खाद के रूप में उपयोग करना ही श्रेष्ठ है। रतलाम जिले में कृषि रथ के माध्यम से कृषि एवं संबद्ध विषयों जैसे उद्यानिकी, पशुपालन, आत्मा, मत्स्य पालन आदि पर किसानों एवं कृषि वैज्ञानिकों के मध्य सीधा संपर्क कायम कर नवीन एवं वैज्ञानिकी तकनीकी सुधार की जानकारी कृषकों को दी जा रही है। कृषि रथ द्वारा किसानों को जिले के विभिन्न ग्रामों में जैविक खेती एवं प्राकृतिक कृषि क्षेत्रों का विस्तार, पराली न जलाने, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, एकीकृत पोषक तत्व, कीट एवं रोग प्रबंधन, कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाने के उपाय, फसल विविधीकरण को बढावा देने, प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना, ई-विकास प्रणाली अंतर्गत ई-टोकन उर्वरक वितरण व्यवस्था आदि के संबंध में जानकारी दी गई।  

किसानों पर कर्ज का भारी बोझ: एमपी, आंध्र और नागालैंड में स्थिति का अंतर

भोपाल देश के किसानों की आर्थिक स्थिति पर संसद में पेश ताजा सरकारी आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश के हर किसान परिवार पर औसत बकाया 74,420 रुपए का कर्ज है। यह राष्ट्रीय औसत 74,121 रुपए के लगभग बराबर है। आंकड़े केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने टीएमसी सांसद कालिपद सरेन खेरवाल के प्रश्न के लिखित उत्तर में दिए। रिपोर्ट बताती है कि दक्षिण भारत के कई राज्यों में किसानों पर कर्ज का बोझ मध्य भारत की तुलना में काफी अधिक है, जबकि पूर्वोत्तर राज्यों में यह सबसे कम है। दरअसल, संसद में पेश की गई ताजा रिपोर्ट में मध्य प्रदेश के किसानों की मिली-जुली तस्वीर सामने आई है। वहीं आंकड़ों के मुताबिक, भारत में प्रति कृषक परिवार पर औसत बकाया ऋण 74,121 रुपए है। चौंकाने वाली बात यह है कि दक्षिण भारतीय राज्यों के किसान कर्ज के मामले में उत्तर भारत के मुकाबले कहीं आगे हैं। टीएमसी सांसद कालिपद सरेन खेरवाल के सवाल के जवाब में केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह जानकारी दी। एमपी की स्थिति: राष्ट्रीय औसत के करीब, राजस्थान से बेहतर आंकड़ों का विश्लेषण करें तो मध्य प्रदेश में किसानों की स्थिति कर्ज के मामले में कई राज्यों से बेहतर है। जहां पड़ोसी राज्य राजस्थान में प्रति किसान परिवार कर्ज का बोझ ₹1,13,865 है, वहीं मध्य प्रदेश में यह ₹74,420 पर टिका है। हालांकि, छोटे राज्यों जैसे छत्तीसगढ़ (₹21,443) की तुलना में एमपी के किसानों पर कर्ज का दबाव अधिक है। दक्षिण के राज्यों के किसान सबसे ज्यादा कर्जदार आंकड़ों के मुताबिक, भारत में प्रति कृषक परिवार पर औसत बकाया ऋण ₹74,121 है। चौंकाने वाली बात यह है कि दक्षिण भारतीय राज्यों के किसान कर्ज के मामले में उत्तर भारत के मुकाबले कहीं आगे हैं । केसीसी (KCC) का कर्ज ₹10 लाख करोड़ के पार कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सदन में बताया कि 30 सितंबर 2025 की स्थिति के अनुसार किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के तहत बकाया धनराशि ₹10.39 लाख करोड़ तक पहुंच गई है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया कि 1 फरवरी 2026 तक का एकदम सटीक डेटा उपलब्ध नहीं है, क्योंकि पिछला बड़ा सर्वेक्षण (NSS 77वां दौरा) साल 2019 में ही किया गया था। राजस्थान कर्ज के मामले में आगे     राजस्थान: ₹1,13,865     मध्य प्रदेश: ₹74,420     उत्तर प्रदेश: ₹51,107     बिहार: ₹23,534 इन राज्यों में बोझ कम     नागालैंड: सिर्फ ₹1,750     मेघालय: ₹2,237     अरुणाचल प्रदेश: ₹3,581 किसानों की आया बढ़ाने में जुटी राज्य सरकार इधर, मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने बढ़ती लागत और ऋण दबाव को देखते हुए वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष घोषित किया है। राज्य में जून 2026 तक शून्य प्रतिशत ब्याज पर फसल ऋण उपलब्ध रहेगा। समय पर भुगतान करने वाले किसानों को अतिरिक्त ब्याज अनुदान भी दिया जाएगा। सहकारी बैंकों के डिफॉल्टर किसानों को पुनर्वित्त के माध्यम से मुख्यधारा में लाने की योजना लागू है। साथ ही नर्मदा-क्षिप्रा सहित नदी जोड़ो परियोजनाओं से सिंचाई क्षेत्र बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। राष्ट्रीय औसत के करीब, राजस्थान से बेहतर दावा किया गया है कि मध्य प्रदेश में किसानों की स्थिति कर्ज के मामले में कई राज्यों से बेहतर है। जहां पड़ोसी राज्य राजस्थान में प्रति किसान परिवार कर्ज का बोझ 1,13,865 रुपए है। वहीं मध्य प्रदेश में यह 74,420 रुपए पर टिका है। हालांकि, छोटे राज्यों जैसे छत्तीसगढ़ (21,443) की तुलना में मध्यप्रदेश के किसानों पर कर्ज का दबाव अधिक है। केसीसी का कर्ज 10 लाख करोड़ के पार शिवराज ने सदन में बताया कि 30 सितंबर 2025 की स्थिति के अनुसार किसान क्रेडिट कार्ड के तहत बकाया धनराशि 10.39 लाख करोड़ तक पहुंच गई है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया कि 1 फरवरी 2026 तक का एकदम सटीक डेटा उपलब्ध नहीं है, क्योंकि पिछला बड़ा सर्वेक्षण साल 2019 में ही किया गया था। उत्तरप्रदेश-बिहार में औसत बोझ कम आंध्र प्रदेश प्रति किसान परिवार औसत 2,45,554 के साथ देश में सबसे अधिक कर्जदार राज्य है। इसके बाद केरल (2,42,482), पंजाब (2,03,249), हरियाणा (1,82,922) और तेलंगाना (1,52,113) का स्थान है। इसके विपरीत नागालैंड में औसत कर्ज मात्र 1,750, मेघालय में 2,237 और अरुणाचल प्रदेश में 3,581 दर्ज किया गया। उत्तर और मध्य भारत में राजस्थान (1,13,865) के किसान अपेक्षाकृत अधिक कर्जदार पाए गए, जबकि उत्तर प्रदेश (51,107) और बिहार (23,534) में औसत बोझ कम है। कर्ज में टॉप-5 राज्य राज्य         कर्ज रुपए में आंध्रप्रदेश    2,45,554 केरल          2,42,482 पंजाब         2,03,249 हरियाणा    1,82,922 तेलंगाना    1,52,113 एमपी सरकार की रणनीति: ‘किसान कल्याण वर्ष’ और जीरो ब्याज योजना बढ़ते कर्ज और खेती की लागत को देखते हुए मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने वर्ष 2026 को ‘किसान कल्याण वर्ष’ घोषित किया है। सरकार की ओर से किसानों को राहत देने के लिए कई बड़े कदम उठाए गए हैं।     ब्याज मुक्त ऋण: प्रदेश में किसानों को जून 2026 तक 0% ब्याज पर फसल ऋण (Crop Loan) मिलता रहेगा। समय पर कर्ज चुकाने वाले किसानों को 4% अतिरिक्त ब्याज अनुदान भी दिया जाएगा।     डिफॉल्टरों को राहत: सरकार ने सहकारी बैंकों के उन किसानों को फिर से मुख्यधारा में लाने की योजना बनाई है जो कर्ज के कारण डिफॉल्टर हो गए थे।     सिंचाई विस्तार: नर्मदा-क्षिप्रा और अन्य नदी जोड़ो परियोजनाओं के जरिए प्रदेश में सिंचाई का रकबा बढ़ाने का लक्ष्य है, ताकि खेती को लाभकारी बनाया जा सके। एमपी में भी बढ़ रहा किसान क्रेडिट कार्ड का दायरा आंकड़ों के मुताबिक, किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) कर्ज का सबसे बड़ा माध्यम बनकर उभरा है। मध्य प्रदेश में भी ग्रामीण बैंकों और सहकारी समितियों के माध्यम से केसीसी का वितरण तेजी से हुआ है। सरकार का कहना है कि यह कर्ज किसानों की निवेश क्षमता बढ़ाता है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि फसलों के उचित दाम (MSP) और प्राकृतिक आपदाओं के कारण यह कर्ज किसानों के लिए बोझ बन जाता है।  

कृषि रथ से किसानों को उर्वरक संतुलन और नवीन कृषि तकनीकों की जानकारी दी गई

“कृषक कल्याण वर्ष-2026” कृषि रथ से किसानों को फसलों में संतुलित उर्वरक एवं नवीन तकनीकों की दी गई जानकारी ई-टोकन के माध्यम से उर्वरक वितरण की नवीन प्रणाली से कराया अवगत भोपाल  कृषक कल्याण वर्ष 2026 के अंतर्गत झाबुआ जिले के 6 विकासखण्ड में निरंतर कृषि रथ के माध्यम से कृषि विशेषज्ञों के साथ कृषि एवं सम्बद्ध विभागों के अधिकारियों द्वारा प्रति दिन 3 ग्राम पंचायतों का भ्रमण किया जा रहा है। अधिकारियों द्वारा अभी तक 296 ग्राम पंचायतों का भ्रमण कर लगभग 20250 किसानों से सम्पर्क स्थापित किया गया है। किसानों को उनकी जिज्ञासाओं एवं समस्याओं का निराकरण करने के साथ ही कृषि एवं संबंद्ध विषयों पर नवीन एवं वैज्ञानिक तकनीक की जानकारी दी गई। जिन किसान भाइयों के पास सिंचाई के पर्याप्त साधन हैं उन्हें जायद के मौसम में तिलहनी फसलों की बुवाई करने की जानकारी से अवगत कराया जा रहा है, साथ ही किसानों को कृषि रथ के माध्यम से किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड का वितरण किया जा रहा है। उन्हें मृदा स्वास्थ्य कार्ड में अंकित अनुशंसा अनुसार संतुलित उर्वरक का उपयोग करने की सलाह दी जा रही है। किसानों को प्राकृतिक खेती, नरवाई प्रबंधन, फसल बीमा तथा शासन द्वारा उर्वरक वितरण की नवीन वितरण प्रणाली अंतर्गत ई-टोकन के माध्यम से पारदर्शी तरीके से उर्वरक वितरण व्यवस्था की जानकारी से अवगत कराया जा रहा है। अब उनके रकबे के आधार पर उर्वरक उपलब्धता की जाएगी, किसानों को उर्वरक लेने के लिए अब लम्बी लाइनों में नहीं लगना पड़ेगा साथ ही उनके पंजीकृत मोबाईल फोन पर खाद के उपलब्धता की जानकारी प्राप्त हो जायेगी। कृषि विशेषज्ञों द्वारा किसानों जायद मौसम की फसलों की जानकारी के साथ ही सूक्ष्म सिंचाई यंत्रो जैसे ड्रीप, स्प्रिंकलर आदि के उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी जा रही है। कृषि रथ के माध्यम से किसानों को शासन की महत्वाकांक्षी योजनाओं के साथ ही उद्यामनिकी फसलों तथा पशु पालन विभाग अंतर्गत दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने की जानकारी भी दी जा रही है ताकि किसानों की आय में वृद्धि की जा सके। कृषि रथ द्वारा ग्राम मानिकपुरा में कृषकों को प्राकृतिक और जैविक खेती का समझाया महत्व  टीकमगढ़ ज़िले के सभी विकासखंडों में कृषि रथ एक माह के लिए चलाये जा रहे हैं। कलेक्टर  विवेक श्रोत्रिय के द्वारा कृषि से सम्बद्ध अन्य विभागों को भी निर्देशित किया गया है कि कृषि रथ के माध्यम से विभागों में संचालित योजनाओं का कृषकों के मध्य प्रचार-प्रसार प्रसार करें। इसी तारतम्य में कृषि रथ के माध्यम से ग्राम पंचायत गणेशगंज के ग्राम मानिकपुरा में भ्रमण कर कृषकों को प्राकृतिक खेती/जैविक खेती करने के लिये प्रोत्साहित, नरवाई नहीं जलाने और मृदा परीक्षण कराने का महत्व समझाया गया। कृषि रथ द्वारा किसानों को खाद वितरण के लिए तैयार की गई ई-टोकन व्यवस्था और ई-विकास पोर्टल की जानकारी दी गई। साथ ही कृषि, उद्यानिकी, मत्स्य और पशुपालन विभाग में संचालित कृषक हितेषी योजनाओं की भी जानकारी दी गई। कृषि रथ के साथ नोडल अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक, संबंधित विकासखंडों के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, आत्मा योजना  एवं संबंधित विभागों का मैदानी अमला उपस्थित रहा।  

अब बार-बार नहीं किसानों को कराना होगा KYC, एक क्लिक में मिलेगा सभी स्कीम का लाभ, बस आज ही कर लें ये का

नई दिल्ली अगर आप एक किसान हैं तो आपके लिए खुशखबरी है. उत्तर प्रदेश में किसानों के लिए एग्री स्टैक योजना के तहत डिजिटल बेस किसान रजिस्ट्री तैयार की जा रही है. एग्री स्टैक योजना केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा प्रारंभ की गई है, जिसके तहत किसानों की भलाई और कृषि उद्योग की समग्र उन्नति के लिए एक व्यापक डिजिटल ढांचा तैयार किया जाएगा. इस योजना का मुख्य उद्देश्य भारतीय कृषि को डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से सशक्त बनाना और किसानों को तकनीकी साधनों से जोड़कर उनकी उत्पादकता और आय दोनों में वृद्धि करना है. इस योजना के अंतर्गत किसानों की डिजिटल प्रोफाइल तैयार की जाएगी, जिसमें उनके भूमि रिकॉर्ड, फसल के विवरण, और आर्थिक गतिविधियों सहित अन्य महत्वपूर्ण जानकारी शामिल होगी. इस रजिस्ट्री का उद्देश्य किसानों को फसली ऋण, पीएम किसान योजना, फसल बीमा और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से उपलब्ध कराना है.  इसको लेकर  यूपी के कृषि निदेशक डॉ जितेंद्र कुमार तोमर ने बताया कि प्रदेश के विभिन्न जनपदों में किसान रजिस्ट्री का कार्यक्रम बहुत तेजी से चलाया जा रहा है. जिसमें किसानों के अभिलेखों जैसे खसरा, खतौनी को उनके आधार से लिंक किया जा रहा है. इसका फायदा यह होगा कि इसके बाद से किसी भी सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को बार-बार  KYC नहीं करानी पड़ेगी. किसानों को मिलेगा काफी फायदा     पीएम किसान योजना     फसली लोन के लिए किसान क्रेडिट कार्ड     एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड एवं कृषि विकास     अन्य कोई भी लोन क्या काम करवाना है और कैसे करवाएं? इस योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को फॉर्मर रजिस्ट्री करवाना अनिवार्य है. जानकारी के मुताबिक, किसानों को 31 दिसंबर 2024 से पहले यह रजिस्ट्री का काम पूरा करवा लेना है. इसके लिए किसान अपने नजदीकी कैंप में जाकर रजिस्ट्री कराकर सभी सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से ले सकते हैं. इस पोर्टल पर जाकर कराएं रजिस्ट्रेशन फॉर्मर रजिस्ट्री करवाने के लिए आप विभाग की वेब पोर्टल https://upfr.agristack.gov.in पर जा सकते हैं. पोर्टल के अलावा आप अपने नजदीकी जन सुविधा केंद्र पर जाकर या फिर सरकार द्वारा पंचायत भवन या गांव में अन्य जगहों पर लगाए गए कैंप से आप ये काम करवा सकते हैं. इन दस्तावेजों की पड़ेगी जरूरत     आधार कार्ड     योजना से रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर     खतौनी  

ओवरलोडिंग दो हाईवा को आरटीओ संभागीय फ्लाइग टीम ने दबोचा.

The regional flying team of the RTO (Regional Transport Office) caught two trucks engaged in overloading. विशेष संवाददाता ‘कटनी‘ कटनी। जबलपुर स्थित आरटीओ के संभागीय कार्यालय से कटनी में हो रही ओवरलोडिंग पर लगाम लगाने के लिए एक विशेष टीम को कटनी में हो रही ओवरलोडिंग पर कार्रवाई के लिए भेजा गया है। आज शनिवार 9 दिसंबर की दोपहर लगभग 12:00 बजे जबलपुर से आई फ्लाइंग टीम ने रेत से लदे दो हाईवा को पकड़ा। पहले तो रेत के हाईवा को पकड़ने के संबंध में जानकारी देने से मौजूद कर्मचारी बचते रहे, लेकिन बाद में उन्होंने कहा कि ओवरलोडिंग को लेकर कार्यालय से निर्देश जारी हुए हैं जिसके तहत कार्यवाही की जा रही है।संभागीय फ्लाइंग एस्कॉर्ट के प्रभारी आरटीओ एसआई अक्षय पटेल के नेतृत्व में आई टीम ने आज कटनी शहडोल बाईपास पर रेत से लदे हाईवा क्रमांक एमपी 20 एचबी 6367 एवं एमपी 20 एचबी 7889 को पकड़ा। बातचीत करते हुए फ्लाइंग स्क्वायड टीम के प्रभारी अक्षय पटेल ने कहा कि दोनों वाहनों को ओवरलोडिंग करते हुए पाया गया है। जिसे पड़कर कुठला थाने के सामने खड़ा कराया गया है। दस्तावेजों की जांच चल रही है। दोनों वाहनों के खिलाफ ओवर लोडिंग की चालानी कार्यवाही की जाएगी।

गेहू और बटरी का अवैध परिवहन करते दो वाहनो से 50 हजार से अधिक की मंडी शुल्क की हुई वसूली.

Market fee of more than 50 thousand rupees has been collected from two vehicles illegally transporting wheat and batteri. कटनी! कृषि उपज मंडी कटनी अपडेट: गेहू और बटरी का अवैध परिवहन करते दो वाहनो से 50 हजार से अधिक की दाण्डिक मंडी शुल्क की हुई वसूली, कलेक्टर अवि प्रसाद के निर्देशन एवं मार्गदर्शन में वाहनों से गेहू , धान, बटरी आदि का जिले में बाहरी व्यापारियों द्वारा अवैध परिवहन करने वाले वाहनों पर सख्त निगरानी रखी जा रही है। इसी क्रम में अवैध परिवहन करते हुए दो वाहनों से 50 हजार रूपये से अधिक की दाण्डिक मंडी शुल्क की राशि वसूली गई। कृषि उपज मंडी के सचिव राकेश कुमार पनिका ने बताया की गेहू का अवैध परिवहन करते वाहन क्रमांक यूपी 33 एटी 9844 और बटरी का अवैध परिवहन करते हुए वाहन क्रमांक यूपी 90 एटी 0741 के विरूद्ध कार्यवाही की गई। इन दोनों वाहनों में से एक में 235 क्विंटल गेहू और 30 क्विंटल बटरी का अवैध परिवहन किया जाना पाया गया। दोनों वाहनों को मिलाकर 50 हजार 512 रूपये की दांण्डिक मंडी शुल्क वसूल कर जमा करायी गयी। इस कार्यवाही में जांच दल के रूप में सहायक उपनिरिक्षक प्रेम कुमार मांझी, राजेन्द्र कुमार चौधरी, किशोर कुमार पनिका, अमित कुमार केशरवानी और हरिमोहन कौरव शामिल रहे।

चाइना के यूरिया से भारत बनेगा आत्मानिर्भर ,जानिए पूरी कहानी.

India will become self-reliant in urea production with China’s assistance – learn the entire story. नई दिल्ली: चाइना से आया यूरिया, बोरी पे लिखा आत्मानिर्भर भारत, जानिए पूरी कहानी – यूरिया की एक बोरी की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। यह बोरी का फोटो दुनिया की सबसे बड़ी सहकारी कंपनी इफको (इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोआपरेटिव लिमिटेड) का है। इस फोटो में यूरिया की बोरी पर एक ओर लिखा है ‘सशक्त किसान-आत्मनिर्भर भारत’ और वही दूसरी ओर इस खाद का उद्गम स्थल चाइना को बताया गया है। इसी भ्रम को लेकर इस बोरी की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। इसी बीच इफको के एमडी डॉ. यूएस अवस्थी ने इस वायरल फोटो पर टिप्पणी की हैं। डॉ. अवस्थी ने इस वायरल की जा रही फोटो को भ्रामक बताते हुए कहा कि ऐसा करने वाले लोगो के पास समझ का अभाव हैं। वैसे आजकल एआई के समय में तकनीकी तौर पर देखा जाए तो बहुत हद तक डॉ. अवस्थी की बात सही भी हैं। भारत में 30 मिलियन टन यूरिया उत्पादन की क्षमता है, जिसमें से 90% उत्पादन क्षमता का उपयोग किया जाता है। यूरिया की बाकि जरूरतो के लिए उर्वरक कंपनियां दूसरे देशों से आयात करती हैं। ये जानना जरूरी हैं कि भारत अभी तक आत्मनिर्भर नहीं हैं लेकिन भारत सरकार 2025-26 तक य़ूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भर होने की कोशिश कर रहा हैं। आत्मनिर्भर भारत-सशक्त किसान‘ का नाराआत्मनिर्भर भारत-सशक्त किसान’ का नारा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देश की आर्थिक विकास योजनाओं के लिए इस नारे का इस्तेमाल किया और इसे लोकप्रिय बनाया। ‘आत्मनिर्भर भारत’ की प्रमुख कड़ी है आत्मनिर्भर किसान। श्री नरेंद्र मोदी ने ‘सशक्त और समृद्ध किसान, आत्मनिर्भर भारत’ की पहचान बताई है। ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत, देश के कृषि क्षेत्र को मज़बूत करने के लिए कई प्रयास किए गए हैं। इन प्रयासों से देश के किसान लाभान्वित हो रहे हैं और सशक्त भारत के निर्माण में अपना योगदान दे रहे हैं। दरअसल, भारत लंबे समय से खेती-किसानी में अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए रासायिन‍क उर्वरकों का दूसरे देशों से आयात कर रहे हैं। जिसमें यूरिया का आयात सबसे अधिक है। भारत आजादी के 75 साल बाद भी हम उर्वरकों के उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर नहीं हो सका हैं. लेकिन, अब उस रास्ते पर चल रहे हैं जिसमें आयात को कम करने और घरेलू उत्पादन को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। काफी हद तक इसमें सफलता भी मिली है। सरकार कृषि क्षेत्र की मांग को पूरा करने के लिए साल दर साल मजबूरी में खाद का आयात कर रही है।

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