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अब बार-बार नहीं किसानों को कराना होगा KYC, एक क्लिक में मिलेगा सभी स्कीम का लाभ, बस आज ही कर लें ये का

नई दिल्ली अगर आप एक किसान हैं तो आपके लिए खुशखबरी है. उत्तर प्रदेश में किसानों के लिए एग्री स्टैक योजना के तहत डिजिटल बेस किसान रजिस्ट्री तैयार की जा रही है. एग्री स्टैक योजना केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा प्रारंभ की गई है, जिसके तहत किसानों की भलाई और कृषि उद्योग की समग्र उन्नति के लिए एक व्यापक डिजिटल ढांचा तैयार किया जाएगा. इस योजना का मुख्य उद्देश्य भारतीय कृषि को डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से सशक्त बनाना और किसानों को तकनीकी साधनों से जोड़कर उनकी उत्पादकता और आय दोनों में वृद्धि करना है. इस योजना के अंतर्गत किसानों की डिजिटल प्रोफाइल तैयार की जाएगी, जिसमें उनके भूमि रिकॉर्ड, फसल के विवरण, और आर्थिक गतिविधियों सहित अन्य महत्वपूर्ण जानकारी शामिल होगी. इस रजिस्ट्री का उद्देश्य किसानों को फसली ऋण, पीएम किसान योजना, फसल बीमा और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से उपलब्ध कराना है.  इसको लेकर  यूपी के कृषि निदेशक डॉ जितेंद्र कुमार तोमर ने बताया कि प्रदेश के विभिन्न जनपदों में किसान रजिस्ट्री का कार्यक्रम बहुत तेजी से चलाया जा रहा है. जिसमें किसानों के अभिलेखों जैसे खसरा, खतौनी को उनके आधार से लिंक किया जा रहा है. इसका फायदा यह होगा कि इसके बाद से किसी भी सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को बार-बार  KYC नहीं करानी पड़ेगी. किसानों को मिलेगा काफी फायदा     पीएम किसान योजना     फसली लोन के लिए किसान क्रेडिट कार्ड     एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड एवं कृषि विकास     अन्य कोई भी लोन क्या काम करवाना है और कैसे करवाएं? इस योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को फॉर्मर रजिस्ट्री करवाना अनिवार्य है. जानकारी के मुताबिक, किसानों को 31 दिसंबर 2024 से पहले यह रजिस्ट्री का काम पूरा करवा लेना है. इसके लिए किसान अपने नजदीकी कैंप में जाकर रजिस्ट्री कराकर सभी सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से ले सकते हैं. इस पोर्टल पर जाकर कराएं रजिस्ट्रेशन फॉर्मर रजिस्ट्री करवाने के लिए आप विभाग की वेब पोर्टल https://upfr.agristack.gov.in पर जा सकते हैं. पोर्टल के अलावा आप अपने नजदीकी जन सुविधा केंद्र पर जाकर या फिर सरकार द्वारा पंचायत भवन या गांव में अन्य जगहों पर लगाए गए कैंप से आप ये काम करवा सकते हैं. इन दस्तावेजों की पड़ेगी जरूरत     आधार कार्ड     योजना से रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर     खतौनी  

ओवरलोडिंग दो हाईवा को आरटीओ संभागीय फ्लाइग टीम ने दबोचा.

The regional flying team of the RTO (Regional Transport Office) caught two trucks engaged in overloading. विशेष संवाददाता ‘कटनी‘ कटनी। जबलपुर स्थित आरटीओ के संभागीय कार्यालय से कटनी में हो रही ओवरलोडिंग पर लगाम लगाने के लिए एक विशेष टीम को कटनी में हो रही ओवरलोडिंग पर कार्रवाई के लिए भेजा गया है। आज शनिवार 9 दिसंबर की दोपहर लगभग 12:00 बजे जबलपुर से आई फ्लाइंग टीम ने रेत से लदे दो हाईवा को पकड़ा। पहले तो रेत के हाईवा को पकड़ने के संबंध में जानकारी देने से मौजूद कर्मचारी बचते रहे, लेकिन बाद में उन्होंने कहा कि ओवरलोडिंग को लेकर कार्यालय से निर्देश जारी हुए हैं जिसके तहत कार्यवाही की जा रही है।संभागीय फ्लाइंग एस्कॉर्ट के प्रभारी आरटीओ एसआई अक्षय पटेल के नेतृत्व में आई टीम ने आज कटनी शहडोल बाईपास पर रेत से लदे हाईवा क्रमांक एमपी 20 एचबी 6367 एवं एमपी 20 एचबी 7889 को पकड़ा। बातचीत करते हुए फ्लाइंग स्क्वायड टीम के प्रभारी अक्षय पटेल ने कहा कि दोनों वाहनों को ओवरलोडिंग करते हुए पाया गया है। जिसे पड़कर कुठला थाने के सामने खड़ा कराया गया है। दस्तावेजों की जांच चल रही है। दोनों वाहनों के खिलाफ ओवर लोडिंग की चालानी कार्यवाही की जाएगी।

गेहू और बटरी का अवैध परिवहन करते दो वाहनो से 50 हजार से अधिक की मंडी शुल्क की हुई वसूली.

Market fee of more than 50 thousand rupees has been collected from two vehicles illegally transporting wheat and batteri. कटनी! कृषि उपज मंडी कटनी अपडेट: गेहू और बटरी का अवैध परिवहन करते दो वाहनो से 50 हजार से अधिक की दाण्डिक मंडी शुल्क की हुई वसूली, कलेक्टर अवि प्रसाद के निर्देशन एवं मार्गदर्शन में वाहनों से गेहू , धान, बटरी आदि का जिले में बाहरी व्यापारियों द्वारा अवैध परिवहन करने वाले वाहनों पर सख्त निगरानी रखी जा रही है। इसी क्रम में अवैध परिवहन करते हुए दो वाहनों से 50 हजार रूपये से अधिक की दाण्डिक मंडी शुल्क की राशि वसूली गई। कृषि उपज मंडी के सचिव राकेश कुमार पनिका ने बताया की गेहू का अवैध परिवहन करते वाहन क्रमांक यूपी 33 एटी 9844 और बटरी का अवैध परिवहन करते हुए वाहन क्रमांक यूपी 90 एटी 0741 के विरूद्ध कार्यवाही की गई। इन दोनों वाहनों में से एक में 235 क्विंटल गेहू और 30 क्विंटल बटरी का अवैध परिवहन किया जाना पाया गया। दोनों वाहनों को मिलाकर 50 हजार 512 रूपये की दांण्डिक मंडी शुल्क वसूल कर जमा करायी गयी। इस कार्यवाही में जांच दल के रूप में सहायक उपनिरिक्षक प्रेम कुमार मांझी, राजेन्द्र कुमार चौधरी, किशोर कुमार पनिका, अमित कुमार केशरवानी और हरिमोहन कौरव शामिल रहे।

चाइना के यूरिया से भारत बनेगा आत्मानिर्भर ,जानिए पूरी कहानी.

India will become self-reliant in urea production with China’s assistance – learn the entire story. नई दिल्ली: चाइना से आया यूरिया, बोरी पे लिखा आत्मानिर्भर भारत, जानिए पूरी कहानी – यूरिया की एक बोरी की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। यह बोरी का फोटो दुनिया की सबसे बड़ी सहकारी कंपनी इफको (इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोआपरेटिव लिमिटेड) का है। इस फोटो में यूरिया की बोरी पर एक ओर लिखा है ‘सशक्त किसान-आत्मनिर्भर भारत’ और वही दूसरी ओर इस खाद का उद्गम स्थल चाइना को बताया गया है। इसी भ्रम को लेकर इस बोरी की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। इसी बीच इफको के एमडी डॉ. यूएस अवस्थी ने इस वायरल फोटो पर टिप्पणी की हैं। डॉ. अवस्थी ने इस वायरल की जा रही फोटो को भ्रामक बताते हुए कहा कि ऐसा करने वाले लोगो के पास समझ का अभाव हैं। वैसे आजकल एआई के समय में तकनीकी तौर पर देखा जाए तो बहुत हद तक डॉ. अवस्थी की बात सही भी हैं। भारत में 30 मिलियन टन यूरिया उत्पादन की क्षमता है, जिसमें से 90% उत्पादन क्षमता का उपयोग किया जाता है। यूरिया की बाकि जरूरतो के लिए उर्वरक कंपनियां दूसरे देशों से आयात करती हैं। ये जानना जरूरी हैं कि भारत अभी तक आत्मनिर्भर नहीं हैं लेकिन भारत सरकार 2025-26 तक य़ूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भर होने की कोशिश कर रहा हैं। आत्मनिर्भर भारत-सशक्त किसान‘ का नाराआत्मनिर्भर भारत-सशक्त किसान’ का नारा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देश की आर्थिक विकास योजनाओं के लिए इस नारे का इस्तेमाल किया और इसे लोकप्रिय बनाया। ‘आत्मनिर्भर भारत’ की प्रमुख कड़ी है आत्मनिर्भर किसान। श्री नरेंद्र मोदी ने ‘सशक्त और समृद्ध किसान, आत्मनिर्भर भारत’ की पहचान बताई है। ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत, देश के कृषि क्षेत्र को मज़बूत करने के लिए कई प्रयास किए गए हैं। इन प्रयासों से देश के किसान लाभान्वित हो रहे हैं और सशक्त भारत के निर्माण में अपना योगदान दे रहे हैं। दरअसल, भारत लंबे समय से खेती-किसानी में अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए रासायिन‍क उर्वरकों का दूसरे देशों से आयात कर रहे हैं। जिसमें यूरिया का आयात सबसे अधिक है। भारत आजादी के 75 साल बाद भी हम उर्वरकों के उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर नहीं हो सका हैं. लेकिन, अब उस रास्ते पर चल रहे हैं जिसमें आयात को कम करने और घरेलू उत्पादन को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। काफी हद तक इसमें सफलता भी मिली है। सरकार कृषि क्षेत्र की मांग को पूरा करने के लिए साल दर साल मजबूरी में खाद का आयात कर रही है।

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