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स्पेन में बाढ़ से मरने वालों की संख्या 223 से ज्यादा हुई, 50 साल का रिकॉर्ड तोड़ा

वैलेंसिया स्पेन के पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी हिस्से वैलेंसिया, कैस्टिला-ला मांचा और अंडालूसिया में 29 अक्टूबर को अचानक से मूसलाधार बारिश के बाद बाढ़ आ गई। इस बाढ़ ने प्रभावित क्षेत्रों में तबाही मचा दी। बाढ़ की वजह से प्रभावित इलाकों में हर जगह पानी के साथ ही कीचड़ भी हो गया है। जब बाढ़ आई, तो उसमें कई गाड़ियाँ बह गई, पुल टूट गए, रेलवे की सुरंगें ध्वस्त हो गई जिससे कई जगह की ट्रेनें ठप हो गई , फसलें तबाह हो गई। कई घरों को भी बाढ़ की वजह से काफी नुकसान पहुंचा। बड़ी संख्या में घरों की बिजली गुल हो गई। कच्चे घर तो बाढ़ की चपेट में आ गए और बह गए। बाढ़ की वजह से मरने वालों की संख्या अभी भी बढ़ रही है। मरने वालों की संख्या पहुंची 223 स्पेन के वैलेंसिया, कैस्टिला-ला मांचा और अंडालूसिया में अचानक आई इस बाढ़ की वजह से मरने वालों की संख्या अब तक 223 पहुंच चुकी है। स्पेन के परिवहन मंत्री की तरफ से यह जानकारी दी गई है। 78 लोग अभी भी लापता बाढ़ की वजह से स्पेन के वैलेंसिया, कैस्टिला-ला मांचा और अंडालूसिया में अभी भी करीब 78 लोग लापता हैं। लापता लोगों की तलाश जारी है। बचाव टीम ने अब तक हज़ार से ज़्यादा लापता लोगों को ढूंढ निकाला है। मरने वालों का आंकड़ा बढ़ सकता है बाढ़ के इतने दिन बाद भी कई लोगों के लापता होने से मरने वालों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। बचाव टीम ने हज़ारों लोगों को बाढ़ से बचाकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है।

तूफान हेलेन और मिल्टन के कारण अमेरिका में हेल्थ केयर प्रोवाइडर को मेडिकल प्रोडक्ट्स की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा

सैक्रामेंटो  संयुक्त राज्य अमेरिका में हेल्थ केयर प्रोवाइडर को मेडिकल प्रोडक्ट्स की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। तूफान हेलेन और मिल्टन ने इंट्रावेनस (आईवी) फ्लुइड्स की सप्लाई चेन को गंभीर रूप से बाधित कर दिया है। अमेरिका में सबसे बड़े अस्पताल-बेस्ड रिसर्च एंटरप्राइज, मास जनरल ब्रिघम ने शुक्रवार को घोषणा की कि वह  बुधवार तक गैर-आपातकालीन, वैकल्पिक प्रक्रियाओं को स्थगित कर देगा। इसने कहा कि यह साफ नहीं है कि आईवी फ्लुइड्स की आपूर्ति कब सुधरेगी। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, हेल्थकेयर लॉजिस्टिक्स कंपनी प्रीमियर इंक की तरफ से  जारी एक सर्वे के अनुसार, देश भर में 86 फीसदी से अधिक हेल्थ केयर प्रोवाइडर आईवी फ्लुइड्स की कमी का सामना कर रहे हैं। यह स्थिति तब शुरू हुई जब पिछले महीने के अंत में तूफान हेलेन ने उत्तरी कैरोलिना में बैक्सटर आईवी प्लांट को नुकसान पहुंचाया। इससे देश की 60 फीसदी आईवी सॉल्यूशन सप्लाई निकट भविष्य के लिए ऑफलाइन हो गई। अमेरिकी स्वास्थ्य एवं मानव सेवा मंत्री जेवियर बेसेरा ने 9 अक्टूबर को स्वास्थ्य सेवा नेताओं को लिखे पत्र में कहा कि आने वाले हफ्तों में सप्लाई ‘बाधित रह सकती है’ और तूफान मिल्टन ‘पहले से ही कमजोर बाजार’ को और अधिक बाधित कर सकता है। खाद्य और औषधि प्रशासन और बैक्सटर, वैकल्पिक आईवी, डायलिसिस और न्यूट्रिशन प्रोडक्ट की पहचान कर रहे हैं।    

सूडान में बाढ़ के कारण अब तक 42 जिलों और अबेई में लगभग 2 लाख 26 हजार लोग विस्थापित हो चुके

दक्षिण सूडान में बाढ़ से लगभग 9 लाख लोग प्रभावित हुए हैं : संयुक्त राष्ट्र सूडान में विनाशकारी बाढ़ से 8 लाख 90 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हुए सूडान में बाढ़ के कारण अब तक 42 जिलों और अबेई में लगभग 2 लाख 26 हजार लोग विस्थापित हो चुके जुबा संयुक्त राष्ट्र मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (ओसीएचए) ने बताया कि दक्षिण सूडान में बाढ़ से 8 लाख 90 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। विनाशकारी बाढ़ से निपटने के लिए कार्रवाई तेज कर दी गई है। संयुक्त राष्ट्र राहत एजेंसी ने  दक्षिण सूडान की राजधानी जुबा में जारी एक अपडेट रिपोर्ट में कहा कि बाढ़ के कारण अब तक 42 जिलों और अबेई में लगभग 2 लाख 26 हजार लोग विस्थापित हो चुके हैं। समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने ओसीएचए के हवाले से कहा कि दक्षिण सूडान अभूतपूर्व बाढ़ का सामना कर रहा है। पूर्वानुमानों में औसत से ज्यादा बारिश, युगांडा से नदियों का प्रवाह और संभावित रूप से रिकॉर्ड तोड़ बाढ़ की भविष्यवाणी की गई है। एजेंसी ने कहा कि सड़कों की स्थिति खराब होने के कारण प्रभावित समुदायों तक पहुंच एक चुनौती बनी हुई है। यह अपडेट दक्षिण सूडान की मंत्रिपरिषद द्वारा बाढ़ प्रभावित राज्यों में आपातकाल की घोषणा का समर्थन करने के एक दिन बाद आया है। उम्मीद है कि राष्ट्रपति साल्वा कीर के जल्द ही घोषणा जारी करेंगे, ताकि राहत प्रयासों में सहायता के लिए अंतरराष्ट्रीय दानदाताओं से संसाधन जुटाए जा सकें। संयुक्त राष्ट्र ने सितंबर में दक्षिण सूडान में बाढ़ से निपटने के लिए तत्काल कार्रवाई के लिए 15 मिलियन अमेरिकी डॉलर आवंटित किए थे। यह बाढ़ मई में शुरू हुई थी और तब से इसने घरों, फसलों और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया है। इसके अलावा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं भी बाधित हुई हैं।    

ग्वालियर कैचमेंट में ज्यादा बारिश से बने बाढ़ के हालात, एक दर्जन से ज्यादा कच्चे मकान गिरे

भिंड भिंड जिले के गोहद क्षेत्र के चितौरा गांव में 34 साल बाद बारिश के मौसम में पानी की तबाही का मंजर देखने को मिला। लोगों के घरों के अंदर घर – गृहस्थी का सामान पानी के कारण खराब हो गया है। घरों में दो से तीन दिन तक पानी हिलौरे मारता रहा। लोग छतों पर रहे, तो कुछ लोग सुरक्षित स्थानों के लिए चले गए थे। अब जब पानी उतर गया है, तो लोग पानी से भीगी गृहस्थी को संभालने में जुट गए हैं। गोहद विधानसभा के चितौरा गांव के लोगों का कहना है कि 1990 में भिंड जिला बाढ़ की चपेट में आया था। उस समय चितौरा गांव भी पानी में डूब गया था। अब 34 साल बाद दो दिनों तक ग्वालियर और भिंड की सीमा में होने वाली बारिश के कारण तेज पानी का बहाव गांव में आया। इससे बाढ़ आ गई। पानी निकालने के लिए तोड़ना पड़ीं सड़कें लोगों का कहना है कि पानी का बहाव इतना तेज था कि गांव के आसपास छह जगहों पर पक्की सड़क को तोड़ना पड़ा। पानी के निकासी के लिए जगह-जगह बनाई गई पुलिया में से पानी निकल नहीं पा रहा था और पानी का वेग लगातार बढ़ता जा रहा था।लोगों के घरों तक यह पानी पहुंच चुका था। सुरक्षा की दृष्टि से सड़क को जगह – जगह तोड़ना ही जिला प्रशासन के अफसर में मुनासिब समझा था। जब लोगों के घरों में पानी भरा तो लोग जरूरत का सामान लेकर सुरक्षित स्थान पर पलायन कर गए। अब पानी उतर गया तो लोग फिर वापस आकर घर की सफाई कर रहे हैं। एक दर्जन से ज्यादा कच्चे मकान गिरे गांव के लोगों का यह भी कहना है कि जो गृहस्थी थी, वो पानी में खराब हो गई है। इसको जोड़ने में बरसों लग गए थे। बाढ़ के पानी के कारण जहां एक दर्जन से ज्यादा कच्चे मकान गिर गए हैं, वहीं पक्के मकान में भी सीलन बैठ गई है। कुछ मकान ऐसे भी हैं, जिनमें दरारें आ गई है। हालांकि, अब तक इन मकानों के सर्वे को लेकर कोई भी प्रशासनिक अफसर में पुख्ता कदम नहीं उठाया। ग्वालियर के कैचमेंट एरिया में ज्यादा बारिश से बने बाढ़ के हालात दैनिक भास्कर से बातचीत में सिंचाई विभाग के कार्यपालन यंत्री अंजुल दोहरे ने बताया कि ग्वालियर के कैचमेंट एरिया में अधिक बारिश हुई है। जगह-जगह सड़के बनाई गई हैं, इस कारण से पानी का बहाव चितौरा के रास्ते आ गया। अब तक होने वाली बारिश का पानी दो तरह फ्लो के साथ बहता था। ग्वालियर के बिलौआ से लेकर चितौरा तक के कैचमेंट एरिया में होने वाली बारिश का कुछ हिस्सा सिंध नदी में जाता था और पानी का कुछ हिस्सा मुरार नदी में होते हुए बैसली नदी में आता था। लेकिन, एक कैचमेंट एरिया में अति बारिश होने के कारण पानी का बहाव सीधा उतर आया है और इससे बाढ़ जैसे हालात गोहद क्षेत्र के चितौरा और आसपास के गांव में बने हैं। सरपंच बोलीं- प्रशासन को जानकारी दे चुके गांव की सरपंच अंजू राणा का कहना है कि चितौरा में बाढ़ के पानी से भारी नुकसान हुआ है। घर गृहस्थी के साथ-साथ पशु धन का नुकसान हुआ है। सरकारी बिल्डिंगों से लेकर सड़क तक का नुकसान हुआ है। ऐसी बाढ़ को मैंने पहली बार गांव के अंदर देखा है। इस बात की जानकारी प्रशासनिक अफसर को दी जा चुकी है। गांव के धर्मेंद्र राणा का कहना है कि बाढ़ के कारण जहां घरों में भरा हुआ अनाज सड़ गया है, वही सरकारी खाद की 600 बोरी पानी में गल गईं। गोशाला के लिए रखा हुआ सुदाना भी खराब हो गया। गायों का भूसा भी पानी में बह गया है। कई लोगों के घरों में खाने-पीने के अनाज का टोटा बना हुआ है। SDM बोल- जांच करवा रहा हूं गोहद एसडीएम पराग जैन ने दैनिक भास्कर से चर्चा करते हुए कहा, ‘ग्वालियर के कैचमेंट एरिया में अति बारिश हुई है। इस कारण से यह हालत बने हैं। अब इस हालात के कारण कई गांवों को नुकसान हुआ है। गांव में नुकसान का सर्वे कराया जा रहा है। वहीं, सिंचाई विभाग के अफसर को निर्देशित किया है कि आखिर यह पानी इतनी अधिक मात्रा में चितौरा बेल्ट में कैसे आया, इसकी जांच कराई जा रही है।

असम में बाढ़ की स्थिति गंभीर, 28 जिलों की 23 लाख की आबादी प्रभावित, कई जिलों का सड़क संपर्क टूटा

ईटानगर अरुणाचल प्रदेश में बारिश के कारण हुए भूस्खलन से कई जिलों का सड़क संपर्क बाधित हो गया है। अधिकारियों ने  यह जानकारी दी। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को शि-योमी जिले में भूस्खलन के कारण एक व्यक्ति की मौत हो गई। राज्य में प्राकृतिक आपदाओं के कारण अप्रैल से अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है। इसने बताया कि लोहित और अंजाव जिलों के मोमपानी क्षेत्र में तेजू-हयुलियांग सड़क बाधित है, जबकि क्रा दादी जिले में दरी-चंबांग से लांगडांग गांव पालिन-ताराक्लेंगडी जाने वाली सड़क भूस्खलन के कारण अवरुद्ध हो गई है। एक रिपोर्ट के अनुसार, पूर्वी सियांग जिले के गेयिंग में राष्ट्रीय राजमार्ग-513 भी बाधित हो गया है। इस वर्ष अप्रैल से अब तक अरुणाचल प्रदेश में बाढ़ और भूस्खलन से 72,900 से अधिक लोग और 257 गांव प्रभावित हुए हैं। बाढ़ और भूस्खलन से सड़कों, पुलों, पुलियाओं, बिजली लाइनों, बिजली के खंभों, ट्रांसफार्मरों और जल आपूर्ति अवसरंचनाओं को भी व्यापक नुकसान पहुंचा है। रिपोर्ट के अनुसार अब तक 160 सड़कें, 76 बिजली लाइनें, बिजली के 30 खंभे, तीन ट्रांसफार्मर, नौ पुल, 11 पुलिया और 147 जल आपूर्ति प्रणालियां क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। इसमें बताया गया कि इसके अलावा 627 कच्चे और 51 पक्के घर तथा 155 झोपड़ियों को नुकसान पहुंचा है। पाइपलाइन को नुकसान पहुंचने के कारण राज्य की राजधानी ईटानगर में लोग गंभीर जल संकट से जूझ रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि मरम्मत का काम जारी है, लेकिन इसमें कई दिन लगेंगे। इस सप्ताह लगातार बारिश के कारण आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के कारण कुरुंग कुमेय जिले के अंतर्गत दमिन, पारसी पर्लो और पन्यासांग प्रशासनिक क्षेत्र का संपर्क राज्य के बाकी हिस्सों से कथित तौर पर कट गया है। रिपोर्ट के अनुसार, दमिन से पारसी पर्लो जाने वाली सड़क भी कई जगह अवरुद्ध हो गई है। ईटानगर को बंदरदेवा से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग-415 पर करसिंगसा खंड के पास भारी भूस्खलन हुआ, जिसके कारण राजधानी ईटानगर प्रशासन को यात्रियों की सुरक्षा के लिए सड़क को बंद करना पड़ा। उपायुक्त श्वेता नागरकोटी मेहता द्वारा घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद सड़क को बंद करने और यातायात को गुमटो के रास्ते मोड़ने का निर्णय लिया गया है।  असम में बाढ़ के कारण 28 जिलों में करीब 23 लाख लोग प्रभावित असम में बाढ़ की स्थिति भी गंभीर बनी रही और 28 जिलों की लगभग 23 लाख की आबादी इससे प्रभावित हुई। एक आधिकारिक बुलेटिन में यह जानकारी दी गई। बुलेटिन के अनुसार, अधिकतर नदियों का जल स्तर खतरे के निशान से ऊपर है। राज्य में इस वर्ष बाढ़, भूस्खलन और तूफान में 78 लोगों की मौत हुई जबकि इनमें से केवल बाढ़ के कारण 66 लोगों की मौत हुई। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का  सिलचर पहुंचने और मणिपुर जाते समय कछार जिले के फुलेर्तल में बाढ़ राहत शिविर का दौरा करने का कार्यक्रम है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने कहा कि बाढ़ प्रभावित जिलों में सभी राहत शिविरों में पूरी व्यवस्था की गई है और स्थिति सामान्य होने तक आवश्यक वस्तुओं का पर्याप्त भंडार रखा गया है। उन्होंने कहा कि बाढ़ राहत शिविरों की सुरक्षा और स्वच्छता सरकार की प्राथमिकता है और उनकी टीम वहां रह रहे लोगों के संपर्क में है। वर्तमान में, 28 जिलों में 3,446 गांवों के लगभग 23 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं, जबकि बाढ़ की दूसरी लहर से 68,432.75 हेक्टेयर फसल भूमि जलमग्न हो गई है। धुबरी में सबसे अधिक 7,54,791 लोग प्रभावित हुए, इसके बाद कछार में 1,77,928 लोग और बारपेटा में 1,34,328 लोग बाढ़ से प्रभावित हुए। कुल 53,689 लोगों ने 269 राहत शिविरों में शरण ली है, जबकि राहत शिविरों में नहीं रह रहे 3,15,520 लोगों को राहत सामग्री प्रदान की गई है। ब्रह्मपुत्र निमती घाट, तेजपुर और धुबरी में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। खोवांग में बुरही दिहिंग, शिवसागर में दिखौ, नंगलमुराघाट में दिसांग, नुमालीगढ़ में धनसिरी, धरमतुल में कोपिली, बारपेटा में बेकी, गोलकगंज में संकोश, बीपी घाट में बराक और करीमगंज में कुशियारा नदियां खतरे से निशान से ऊपर हैं। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) और स्थानीय प्रशासन सहित कई एजेंसियां राहत और बचाव कार्य कर रही हैं। राहत एवं बचाव कार्यों के लिए विभिन्न हिस्सों में 171 नौकाओं को तैनात किया गया है। विभिन्न एजेंसियों ने पिछले 24 घंटे में कुल 70 लोगों और 459 मवेशियों को बचाया। राज्य भर से बाढ़ के कारण सड़कों, पुलों, आंगनवाड़ी केंद्रों और मत्स्य पालन तालाबों को नुकसान पहुंचने की खबरें मिली हैं।    

नेपाल का पानी यूपी में मचाएगा तबाही, प्रदेश के दो जिले बाढ़ की चपेट में, श्रावस्ती से 11 और कुशीनगर से 76 लोगों को किया गया रेस्क्यू

 कुशीनगर  उत्तर प्रदेश में मानसून के पूरी तरह सक्रिय होने के बीच नदियों का जलस्तर बढ़ने लगा है और कुशीनगर, बलरामपुर तथा श्रावस्ती जिलों के कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई है. राज्य सरकार की ओर से रविवार को यहां जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि नेपाल में मूसलाधार बारिश के बाद अचानक पांच लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने के कारण श्रावस्ती और कुशीनगर में बाढ़ में फंसे 87 लोगों को राहत अभियान चलाकर सुरक्षित निकाला गया है. सीएम ने दिए ये निर्देश बयान के अनुसार श्रावस्ती जिले में बाढ़ में फंसे 11 और कुशीनगर जिले के 76 लोगों को बाहर निकाला गया है. मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ द्वारा बाढ़ प्रभावित इलाकों में मुस्तैदी बढ़ाने के आदेश के बाद अधिकारियों ने राहत अभियान चलाकर लोगों की जान बचायी. श्रावस्ती जिले में 18 गांव के करीब 400 ग्रामीणों को बाढ़ को देखते हुए सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया जबकि कुशीनगर में बचाव अभियान के दौरान फंसे हुए मवेशियों को भी सुरक्षित निकाला गया. योगी ने जिलाधिकारियों को 24 घंटे के भीतर क्षतिग्रस्त फसल की सर्वेक्षण रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिये और प्रशासन स्तर के अधिकारियों को सर्वेक्षण रिपोर्ट मिलते ही मुआवजा प्रदान करने को कहा है. नेपाल से अचानक छोड़े गए पानी में 11 लोगों के फंसे होने की सूचना राहत आयुक्त जी एस नवीन ने बताया कि शनिवार रात करीब आठ बजे राज्य स्तरीय आपातकालीन अभियान केंद्र को श्रावस्ती के तहसील जमुनहा की ग्राम पंचायत गजोभरी के ग्राम मोहनपुर भरथा एवं केवटन पुरवा में नेपाल से अचानक छोड़े गए पानी में 11 लोगों के फंसे होने की सूचना मिली, जिसमें तीन बच्चे, पांच महिलाएं और तीन पुरुष शामिल थे. सूचना मिलते ही तत्काल श्रावस्ती के जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी को इस संबंध में जानकारी दी गयी. इसके बाद लगभग आठ घंटे की कड़ी मेहनत के बाद सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और सभी का चिकित्सकों की टीम द्वारा प्राथमिक उपचार भी कराया गया. साथ ही सभी पीड़ितों को राप्ती बैराज स्थित गेस्ट हाउस में पहुंचाया गया. वहीं, रविवार को बाढ़ से प्रभावित श्रावस्ती जिले के 18 गांवों के करीब चार सौ लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया है, जहां पर उन्हें पौष्टिक भोजन के साथ अन्य सुविधाएं उपलब्ध करायी जा रही हैं. राहत आयुक्त ने बताया कि शनिवार रात करीब आठ बजे राज्य स्तरीय आपातकालीन अभियान केंद्र को नेपाल में मूसलाधार बारिश के बाद देवघाट बैराज से 5,71,850 क्यूसेक पानी छोड़े जाने की सूचना मिलने पर कुशीनगर जिलाधिकारी उमेश मिश्रा को बड़ी गंडक में बाल्मीकि नगर बैराज द्वारा तीन लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने की संभावना पर तहसील खड्डा के गांवों के प्रभावित होने की तत्काल जानकारी दी गयी. इसके बाद प्रशासन ने तहसील खड्डा के प्रभावित 13 गांवों का निरीक्षण किया और राहत अभियान चलाकर कड़ी मशक्कत के बाद 76 लोगों को बचाकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया. इस दौरान टीम ने 20 मवेशियों को भी सुरक्षित बचाया. इसके पहले, राहत आयुक्त कार्यालय से जारी रिपोर्ट में कहा गया कि कुशीनगर में गंडक नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है और खड्डा तहसील के 13 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं. रिपोर्ट के अनुसार बाढ़ की वजह से जिले के नारायणपुर के एक टापू पर 66 लोग फंस गए थे जिनमें से अब तक 62 लोगों को निकाला जा चुका है बाकी को निकालने का काम जारी है. श्रावस्ती में 18 गांव प्रभावित राप्ती नदी श्रावस्ती में खतरे के निशान को पार कर गई है. यहां 18 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं. बाढ़ प्रभावित इलाकों में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की एक और पीएसी की दो टीम तैनात हैं. जिले में 19 बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं और राप्ती बैराज पर लगातार निगरानी की जा रही है. रिपोर्ट के मुताबिक श्रावस्ती जिले में शनिवार रात बाढ़ के पानी से घिरीं 12 श्रमिक महिलाओं और उनके बच्चों को बचाने के लिए अभियान चलाया गया और उन सभी को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया. तड़के करीब तीन बजे यह अभियान संपन्न हुआ. रिपोर्ट के अनुसार बलरामपुर में भी बाढ़ की स्थिति है. यहां भी राप्ती नदी खतरे के निशान को पार कर गई है. बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत के लिए राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) और बाढ़ पीएसी की एक-एक टीम तैनात हैं. इसके अलावा 32 चिकित्सा दल भी गठित किए गए हैं. बस्ती में भी बारिश के आसार उत्तर प्रदेश के पूर्वी इलाकों में मानसून जोर पकड़ चुका है और इन इलाकों के विभिन्न जिलों में पिछले दो दिनों से लगातार बारिश हो रही है. आंचलिक मौसम केंद्र लखनऊ की रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के गोरखपुर, बहराइच, गोंडा, बस्ती, संत कबीर नगर, महराजगंज, बलरामपुर, श्रावस्ती, लखीमपुर खीरी तथा उसके आसपास के जिलों में रविवार को भी भारी बारिश होने का अनुमान है.

मुंबई में छह घंटे में 300 मिमी बारिश हुई, कई ट्रेनें भी बंद, मौसम विभाग ने जारी किया येलो अलर्ट

मुंबई  महाराष्ट्र के मुंबई में बीती रात से हो रही भारी बारिश के कारण शहर के कई इलाकों में जलभराव हो गया। लगातार हो रही बारिश से लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। रविवार को कल्याण-कसारा सेक्शन में खडावली और टिटवाला के बीच लंबा ट्रैफिक जाम लग गया और लोकल ट्रेन सेवाएं भी बाधित हुईं हैं। बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने कहा कि मुंबई में आज सुबह 1 बजे से 7 बजे तक यानि कुल छह घंटे में विभिन्न स्थानों पर 300 मिमी से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। कुछ निचले इलाकों में भारी बारिश के कारण जलभराव हो गया और ट्रेन सेवाएं बाधित हुईं। सड़कों पर पानी भर जाने के कारण यातायात बाधित हुआ है। मध्य रेलवे ने बताया कि भारी बारिश के कारण जलभराव हो गया है, जिससे मुंबई उपनगरीय और हार्बर लाइनों पर रेल यातायात में देरी हो रही है। प्रभावित स्टेशनों में छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, कुर्ला-विक्रोली और भांडुप शामिल हैं। छात्रों को असुविधा से बचाने के लिए मुंबई के सभी बीएमसी, सरकारी और निजी स्कूलों और कॉलेजों में पहले सत्र के लिए अवकाश घोषित किया गया है। स्थिति की समीक्षा के बाद अगले सत्र के लिए फैसले की घोषणा की जाएगी। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, 8 जुलाई (सोमवार) को पूरे दिन मुंबई में मध्यम से भारी बारिश जारी रहेगी। रात में आंधी आने की उम्मीद है। मौसम विभाग ने मुंबई में बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। जिसके अनुसार आंधी तूफान के साथ भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। ऐसे में मुंबई वासियों से भी अपील की गई है कि बगैर काम घर से बाहर नहीं निकलें। ताकि आपको बारिश के कारण किसी प्रकार की समस्या का सामना नहीं करना पड़े। कई लोकल ट्रेनें कैंसिल मुंबई में हो रही जोरदार बारिश के कारण जनजीवन पूरी तरह से प्रभावित हो चुका है। लोग एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन जाने के लिए घंटों ट्रेनों का इंतजार कर रहे हैं। रेलवे ट्रैक पर पानी भर जाने के कारण मुंबई के सेंट्रल, वेस्टर्न और हार्बर तीनों लाईनों पर कई ट्रेनें रोक दी गई हैं। ऐसे में कुछ लोग सड़क मार्ग से आवाजाही कर रहे हैं। लेकिन इसके बावजूद भी रास्ते में जल भराव के कारण फंसे हुए हैं। जानियें कहां कहां कैंसिल हो गई ट्रेनें     मुंबई के भांडुप रेलवे स्टेशन पर ट्रैक पर पानी भर जाने के कारण सेंट्रल लाइन की कई ट्रेनें बंद कर दी गई है।     कर्जत, खोपोली और कसारा से लोकल ट्रेनें सिर्फ ठाणे तक चल रही है। इसके आगे ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है।     हार्बर रूट पर कुर्ला, मानखुर्द स्टेशन पर भारी जल जमाव होने के कारण कई ट्रेनें बंद की गई हैं।     इसी प्रकार वडाला में भी ट्रैक पर पानी भर जाने के कारण गोरेगांव सीएसएमटी ट्रेनों को बंद किया गया है।     भारी बारिश के चलते कई सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में छुट्टी कर दी गई हैं।     ट्रेनों की आवाजाही बंद होने के कारण सुबह से काम पर पहुंचने वाले लोग आफिस नहीं पहुंच पाए हैं। कई फैक्ट्रियां, दुकान और कार्यालय बंद हैं।     सड़कों पर भी पानी भर जाने के कारण गाड़ियों से आवाजाही करना भी लोगों को काफी मुश्किल हो रहा है।    

AP में आफत की बारिश! भूस्खलन से 7 जिलों में सड़क संपर्क टूटा…कई यात्री फंसे

ईटानगर  अरुणाचल प्रदेश में बारिश के कारण हुए भूस्खलन से कम से कम सात जिलों में सड़क संपर्क टूट गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। भूस्खलन के कारण सियांग, पूर्वी सियांग, ऊपरी सियांग, पश्चिमी सियांग, शि योमी, लेपा रादा और ऊपरी सुबनसिरी जिले प्रभावित हैं। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में राजमार्ग के सहायक अभियंता गेमर पाडू ने बताया कि बृहस्पतिवार सुबह भूस्खलन के बाद पासीघाट-पंगिन-आलो सड़क पर राष्ट्रीय राजमार्ग-13 का एक हिस्सा अवरुद्ध हो गया। सियांग जिले में लोकपेंग और पांगिन तिराहे की ओर जाने वाले मार्ग पर एक विशाल पत्थर के गिर जाने से सड़क पूरी तरह से अवरुद्ध हो गई। उन्होंने कहा कि हल्के वाहनों के आवागमन के लिए सड़क को साफ किया जा रहा है। भूस्खलन के कारण निगमोई-आलो बाईपास सड़क भी अवरुद्ध हो गई। ऊपरी सियांग जिले की सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी वाई जेरांग ने बताया कि भूस्खलन के कारण टूटिंग उप-मंडल का संपर्क जिले के बाकी हिस्सों से कट गया है। उन्होंने बताया कि मोयिंग और मिगिंग गांवों में 29 जून को कई स्थानों पर भारी भूस्खलन होने के कारण टूटिंग से सड़क संपर्क पूरी तरह से कट गया है। उन्होंने कहा कि टूटिंग जाने वाले यात्री ऊपरी सियांग के जिला मुख्यालय यिंगकिओंग में फंसे हुए हैं। पीडब्ल्यूडी राजमार्ग विभाग के अधिकारी के हवाले से डीआईपीआरओ ने कहा कि यदि मौसम ठीक रहा तो सड़क पर आवागमन को पूरी तरह से बहाल करने में कम से कम एक सप्ताह का समय लगेगा। लगातार बारिश के कारण पश्चिमी सियांग जिले के आलो में जलापूर्ति बाधित हो गई है। अधिकारियों ने बताया कि बाढ़ और भूस्खलन के कारण सियांग जिले के लिकाबाली कस्बे में जलापूर्ति को भी भारी नुकसान पहुंचा है।    

पश्चिम – पूर्व इंफाल जिलों में लगातार बारिश के कारण दो प्रमुख नदियों के तटबंध टूटने के बाद कई स्थानों पर बाढ़

इंफाल  मणिपुर के इंफाल पश्चिम और इंफाल पूर्व जिलों में लगातार बारिश के कारण दो प्रमुख नदियों के तटबंध टूटने के बाद कई स्थानों पर बाढ़ आ गई है। अधिकारियों ने  यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार ने बाढ़ की स्थिति को देखते हुए  सभी सरकारी कार्यालयों में अवकाश घोषित कर दिया है, जबकि स्कूल बृहस्पतिवार तक बंद रहेंगे। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इम्फाल पश्चिम में सिंगजामेई ओइनम थिंगल में इम्फाल नदी के तटबंध तथा इम्फाल पूर्व में केइराओ के कुछ हिस्सों और कोंगबा इरोंग में कोंगबा नदी के तटबंध टूट गये। इम्फाल पूर्व में सावोमबंग और क्षेत्रेइगाओ के कुछ हिस्सों में इरिल नदी का पानी उफान पर है। अधिकारी ने कहा, ”भारी मात्रा में नदी का पानी आवासीय इलाकों में घुस गया है…। भारत-म्यांमा सड़क का तीन किलोमीटर से अधिक हिस्सा बाढ़ के पानी में डूब गया है और 1,000 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं।” उन्होंने बताया कि प्रभावित लोगों के लिए राहत और बचाव कार्य जारी है। इस बीच, अधिकारियों ने बताया कि मंगलवार की दोपहर में सेनापति नदी में गिरे 25 वर्षीय एक व्यक्ति का शव स्थानीय लोगों की मदद से ‘भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी’ की एक टीम ने नदी से बाहर निकाल लिया। पूर्वोत्तर राज्य के कई हिस्सों में पिछले कुछ दिनों में भारी बारिश हुई है।  

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