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फतेहगढ़ में शादी समारोह में भोजन के बाद 125 लोगों की तबीयत बिगड़ गई, स्कूल को बनाया अस्पताल

मंदसौर  जिले के ग्राम फतेहगढ़ में शादी समारोह में भोजन के बाद लगभग 125 लोगों की तबीयत बिगड़ गई। मंदसौर जिला अस्पताल से पहुंची टीम ने गांव के शासकीय स्कूल को ही अस्पताल बनाकर लोगों का उपचार किया। दोपहर तक लोगों की हालत में सुधार होने लगा था। बताया जा रहा है कि रस मलाई मिठाई खाने वाले लोग बीमार हुए हैं। इधर पहले विधायक विपिन जैन व बाद में सांसद सुधीर गुप्ता भी गांव में पहुंचे। सांसद गुप्ता ने सीएमएचओ के मौके पर नहीं पहुंचने पर नाराजगी भी जताई। 2 घंटे के इलाज में सुधरी हालत     जानकारी के अनुसार शनिवार को सुबह ग्राम फतेहगढ़ में एक शादी समारोह में भोजन का कार्यक्रम हुआ। यहां भोजन के बाद महिलाओं, पुरुषों व बच्चों को जी घबराने, मितली आने, उल्टी दस्त की शिकायत होने लगी।     तत्काल गांव में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं से उपचार की कोशिश के बाद विधायक विपिन जैन की सूचना पर जिला अस्पताल से टीम पहुंची। फतेहगढ़ गांव के स्कूल को अस्थायी अस्पताल बनाया गया।     लगभग दो घंटे उपचार के बाद अधिकांश लोग ठीक होने लगे। ग्राम फतेहगढ़ पहुंचे सांसद सुधीर गुप्ता ने भी मरीजों से मुलाकात की। सीएमएचओ और उनके उच्च स्टाफ के नहीं पहुंचने पर नाराजगी जताते हुए तत्काल मेडिकल सुविधा बढ़ाने को कहा।  

छात्रों ने दोपहर में मध्यान भोजन में दाल-चावल और सब्जी खाई थी, जिसके बाद शुरू हुए उल्टी-दस्त, कई छात्र बीमार

सिंगरौली सिंगरौली के शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय पिपराछापी में फूड प्वाइजनिंग से 10 से अधिक छात्र-छात्राएं बीमार हो गए। इन छात्रों ने दोपहर में मध्यान भोजन में दाल-चावल और सब्जी खाई थी, जिसके बाद उनके शरीर में दर्द और अन्य लक्षण दिखाई दिए। सबसे ज्यादा प्रभावित कक्षा 8 के छात्र-छात्राएं रहे। घटना के बाद 12 से ज्यादा छात्र-छात्राओं को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत पर चिकित्सकों की टीम नजर बनाए हुए है। कुछ बच्चों की हालत गंभीर बताई जा रही है। जिला कलेक्टर चंद्रशेखर शुक्ला, पुलिस अधीक्षक मनीष खत्री, एसडीएम सृजन वर्मा और अन्य प्रशासनिक अधिकारी अस्पताल में मौजूद हैं और स्थिति पर लगातार निगरानी रख रहे हैं। थाना प्रभारी अशोक सिंह परिहार भी मौके पर पहुंचे और मामले की जांच की। प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं, ताकि फूड प्वाइजनिंग की वजह का पता चल सके।

शिवपुरी कलेक्टर ने समारोह में खाने की गुणवत्ता को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए , पालन नहीं करने पर कार्रवाई की जाएगी

शिवपुरी जिले में एक शादी समारोह में फूड पॉइजनिंग के चलते 200 से अधिक लोग बीमार पड़ गए थे। इन सभी का उल्टी और दस्त से बुरा हाल हो गया था। सभी पीड़ित मरीजों को शिवपुरी के जिला अस्पताल और अन्य निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया था। इस शादी समारोह में हुए फूड पॉइजनिंग के बाद जिला प्रशासन एक्टिव हो गया है। दरअसल, शिवपुरी के कलेक्टर रविंद्र कुमार चौधरी ने एक एडवाइजरी जारी की है, जिसमें उन्होंने बताया है कि ऐसा आयोजन जहां 500 से अधिक लोगों की संख्या होगी, वहां भोजन तैयार करने के लिए एक निर्धारित एडवाइजरी का पालन करना होगा। इसमें खाने की गुणवत्ता को लेकर कुछ दिशा-निर्देश जारी किया गया है। यदि इसका उल्लंघन किया जाता है, तो कार्रवाई की जाएगी। इस एडवाइजरी का पालन सभी आयोजनकर्ताओं, होटल, मैरिज गार्डन संचालकों को करना होगा। डोसा की चटनी खाना पड़ गया भारी शहर के उदय विलास पैलेस में आयोजित शादी समारोह के दौरान 200 से अधिक लोगों के बीमार होने के बाद, वहां पर इस्तेमाल किए गए खाने के सामानों जैसे पनीर, दूध और अन्य सामानों के सैंपल फूड इंस्पेक्टर ने लिए थे। बाद में स्वास्थ्य विभाग की ओर से सीएमएचओ ने एक प्रेस नोट जारी किया था, जिसमें बताया गया था कि डोसा की चटनी खाने के कारण लोग बीमार हुए थे। स्वास्थ्य विभाग की ओर से बताया गया था कि बीमार मरीजों के बयानों के आधार पर यह जांच करके निष्कर्ष निकाला गया है। जब यह मामला सुर्खियों में आया तो कलेक्टर ने एडवाइजरी जारी कर दिया है।

अस्पताल में इलाज के लिए कराया भर्ती, छत्तीसगढ़-कोरबा में 16 बच्चों से फूड प्वाइजनिंग

कोरबा. कोरबा के पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के के ग्राम कटोरी नगोई कन्या आश्रम में रहकर पढाई करने वाले लगभग 16 बच्चे फूड प्वाइजनिंग का शिकार हो गए। जहां एक के बाद एक सभी बच्चों कों उल्टी दस्त और चक्कर आने लगे। इस घटना के बाद आश्रम में हड़कंप मच गया और इसकी सूचना तत्काल 108 वाहन को दी गई। जहां मौके पर पहुंच सभी बच्चों को कटघोरा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया सभी का उपचार अभी जारी है। बताया जा रहा है कि सभी बच्चे पोड़ी उपरोड़ा के जटगा आसपास के रहने वाले बच्चे हैं। जिनकी उम्र लगभग 7 से 10 साल तक बताई जा रही है। जो कक्षा पहली से पांचवी तक की पढ़ाई करते हैं। कन्या आश्रम में खाना खाने के बाद बच्चों की हालत बिगड़ने लगी। उल्टी दस्त से परेशान हो गए। 16 छात्रों को कटघोरा स्थित स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया हैं। कटघोरा बीएमओ बी आर रात्रे ने बताया कि सभी बच्चों की हालत में अब सुधार है, सभी खतरे से बाहर हैं।

फूड पॉइजनिंग तो सुनी होगी, लेकिन क्या होती है वाटर पॉइजनिंग?

You must have heard of food poisoning, but what is water poisoning?

You must have heard of food poisoning, but what is water poisoning? फूड पॉइजनिंग को आम बोलचाल की भाषा में समझे तो गंदा आ दूषित खाना खाने से यह बीमारी होती है. गंदा खाना खाने से बैक्टीरिया शरीर में घुस जाता है और फिर यह शरीर को बीमार कर देता है. फूड पॉइजनिंग को आम बोलचाल की भाषा में समझे तो गंदा आ दूषित खाना खाने से यह बीमारी होती है. गंदा खाना खाने से बैक्टीरिया शरीर में घुस जाता है और फिर यह काफी ज्यादा परेशानी करता है. कुछ तो अपने आप ठीक हो जाते हैं लेकिन कुछ लोगों के शरीर में इसके खतरनाक रिएक्शन दिखते हैं. फूड पॉइजनिंग क्यों होता है? कुछ लोगों पर फूड पॉइजनिंग का ऐसा असर होता है कि इससे उनकी जान भी जा सकती है. फूड पॉइजन कई कारणों से हो सकता है जैसे- अधपका मांस, कच्ची सब्जियां, गंदे तरीके से पकाया हुआ खाना. जिन लोगों की इम्युनिटी कमजोर है उन्हें खाना खाने के दौरान इन बातों का खास ख्याल रखना चाहिए कि जो वो खा रहे हैं वह पका, साफ और अच्छा या नहीं वरना वह इससे गंभीर रूप से बीमार हो सकते हैं. फूड पॉइजनिंग किसी को कभी भी हो सकती है. एबीपी लाइव हिंदी ने ‘आकाश हेल्थकेयर’ के कंसल्टेंट डॉक्टर सरोज कुमार यादव से खास बातचीत की. डॉक्टर सरोज यादव ने बताया कि अक्सर गर्मियों या मॉनसून के दौरान फूड पॉइजनिंग की समस्या ज्यादा होती है. खासकर हमने यह जानने की भी कोशिश की वॉटर पॉइजनिंग क्या होता है?खासकर कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों को इस बीमारी का खतरा काफी ज्यादा रहता है. शरीर में इस तरह की समस्या हो जाए तो शरीर पर कुछ इस तरह के लक्षण दिखाई देते हैं. वॉटर पॉइजनिंग क्या होता है? हाइपोनाट्रेमिया एक ऐसी कंडीशन होती है. जिसमें खून में सोडियम की मात्रा जरूरत से ज्यादा कम हो जाती है. ऐसा उस कंडीशन में होता है जब शरीर में पानी की जरूरत से ज्यादा होने जाने की वजह से सोडियम उसमें घुलता है. इसके कारण दिमाग की सेल्स यानी कोशिकाओं में सूजन आ जाती है. इस सूजन को सेरिब्रल ओएडेमा कहते हैं. इससे इलेक्ट्रोलाइट्स में कमी होने लगती है. वॉटर पॉइजनिंग का शरीर पर असर कम पानी पीने से शरीर में कई तरह के नुकसान होते हैं लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जरूरत से ज्यादा पानी पीने से भी शरीर को काफी ज्यादा नुकसान होता है. यहां तक कि मौत भी हो सकती है. वॉटर इनॉक्सिकेशन या वॉटर पॉइजनिंग भी कहते हैं. ज्यादा पानी पीने से ब्रेन ठीक से फंक्शन नहीं करता है. साथ ही साथ ब्लड में पानी की मात्रा बढ़ने लगती है. इसे ही वाटर पॉइजनिंग कहते हैं. वाटर पॉइजनिंग के कारण ब्लड में सोडियम का लेवल धीरे-धीरे कम होने लगता है. जिसका ब्रेन पर सीधा असर होता है और व्यक्ति कोमा में भी जा सकता है. शरीर में सोडियम की मात्रा कम होने पर ब्रेन और शरीर के सेल्स में सूजन भी हो सकती है. इसे सेल्युलर स्वेलिंग कहते हैं.

इंदौर आश्रय गृह में खाद्य विषाक्तता के कारण हुई 5 बच्चों की मौत, जांच समिति का हुआ गठन

इंदौर  इंदौर के श्री युगपुरुष धाम बौद्धिक विकास केंद्र में संदिग्ध फूड प्वाइजनिंग की घटना में दो और बच्चों की मौत हो गई, जिससे मरने वालों की संख्या बढ़कर पांच हो गई। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। जिला कलेक्टर आशीष सिंह ने बुधवार को बताया कि फूड प्वाइजनिंग के लक्षणों के कारण उपचार करा रहे बच्चों की संख्या भी बढ़कर 38 हो गई है, जिनमें से चार की हालत गंभीर है। सभी बच्चों का शहर के सरकारी चाचा नेहरू अस्पताल में इलाज चल रहा है और उनमें से चार को गहन चिकित्सा इकाई वार्ड में भर्ती कराया गया है। इससे पहले भी हो चुकी है कई बच्चों की मौत मंगलवार को दो और बच्चों की मौत की खबर आई। इससे पहले 1 जुलाई को दो बच्चों की मौत की खबर आई थी, जबकि 30 जून को भी दो बच्चों की मौत की खबर आई थी। कलेक्टर आशीष सिंह ने कहा, कुल 38 बच्चों का इलाज चल रहा है और इनमें से चार आईसीयू वार्ड में भर्ती हैं। हम अगले 48 घंटों तक आश्रम पर कड़ी नजर रखेंगे। अगर किसी बच्चे में कोई लक्षण पाया जाता है तो उसे अस्पताल में भर्ती कराया जाएगा। उन्होंने कहा, मौके से नमूने एकत्र कर जांच के लिए भेजे गए हैं, इसकी रिपोर्ट आज मिलेगी। इसके बाद हम घटना के कारणों का पता लगा पाएंगे। संक्रमण के कारण मंगलवार को दो बच्चों की मौत हो गई और सोमवार को भी दो बच्चों की मौत हो गई और 38 का इलाज चल रहा है। घटना की जांच के लिए हुआ समिति का गठन उन्होंने बताया कि घटना की जांच के लिए एक जांच समिति गठित की गई है जो मामले की जांच कर रही है। इससे पहले कलेक्टर ने कहा था कि 30 जून को एक बच्चे की मौत हुई थी और प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि उसकी मौत संक्रमण के कारण नहीं हुई, हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। राज्य के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और तुलसी सिलावट मंगलवार रात अस्पताल में बच्चों से मिलने भी पहुंचे थे। विजयवर्गीय ने पत्रकारों से कहा, आश्रम में सभी बच्चे मानसिक रूप से अविकसित और विकलांग हैं। इस आश्रम में पूरे मध्य प्रदेश के बच्चे हैं। यह एकमात्र ऐसा संस्थान है और वे अच्छा काम कर रहे हैं। लेकिन ऐसा क्यों हुआ, इसकी जांच की जा रही है। डॉक्टरों से बात की गई है। अधिकांश बच्चे डायरिया से पीड़ित हैं। इस मौसम में बच्चों को डायरिया हो जाता है। वहां के पानी के सैंपल लिए गए हैं, उनके खाने के सैंपल भी लिए गए हैं।     आश्रम में रहते हैं करीब 200 बच्चे उन्होंने कहा, मुख्यमंत्री ने मुझे और तुलसी सिलावट को यहां भेजा है, हमने कलेक्टर और कमिश्नर को संस्थान का पूरा मास्टर प्लान तैयार कर इसे विकसित करने के निर्देश दिए हैं। हम वहां के जीवन स्तर को उन्नत करेंगे और भोजन की गुणवत्ता में सुधार करेंगे, ताकि यह घटना दोबारा न हो। आश्रम में करीब 200 बच्चे रहते हैं। यह एक एनजीओ द्वारा संचालित है और यहां विकलांग और अनाथ बच्चे रहते थे। इनकी उम्र पांच साल से लेकर 15 साल के बीच है।

छत्तीसगढ़-कोण्डागांव की नौ आंगनबाड़ी बच्चे फूड प्वाइजनिंग का शिकार

कोण्डागांव. कोण्डागांव जिला के बनजुगानी गांव में एक ही परिवार के नौ बच्चे फूड प्वाइजनिंग का शिकार हो गए। बीमार सभी बच्चों को गंभीर हालत में कोण्डागांव जिला अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया है, जहां सभी का उपचार जारी है। बताया जा रहा है कि सभी बच्चे मंगलवार की सुबह घर के नजदीक आंगनबाड़ी केंद्र गए हुए थे, जहां खेलते-खेलते अधिकतर बच्चों ने रतनजोत का बीज खा लिया। आंगनबाड़ी में खेलने के दौरान रतनजोत बीज खाने वाले बच्चों में नित्या पोयाम 4 वर्ष,  दिवांसी पोयाम 4 वर्ष, कांति पोयाम 6 वर्ष, आयुष पोयाम 3 वर्ष, शिवानी पोयाम 5 वर्ष, नियासा पोयाम 4 वर्ष, दीपेश पोयाम 4 वर्ष, शामिल हैं। ये सभी बच्चे एक ही परिवार के हैं आंगनबाड़ी आए हुए थे जहां उन्होंने एक साथ रतनजोत का बीज खा लिया। घटना के तुरंत बाद परिजनों ने बच्चों को कोण्डागांव के जिला अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया है जहां सिविल सर्जन डॉ आरसी ठाकुर, पीडियाट्रिक डॉ रुद्र कश्यप, मेडिकल ऑफिसर डॉ अनामिका नेताम पीड़ितों का उपचार कर रहे हैं। डॉक्टर के अनुसार फिलहाल बच्चों की स्थिति खतरे से बाहर है।

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