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गौतम अडानी ने 8,100 करोड़ के इक्विटी मूल्य पर ओरिएंट सीमेंट को खरीदा

मुंबई  भारत और एशिया के दूसरे सबसे बड़े रईस गौतम अडानी ने एक और सीमेंट कंपनी को खरीद लिया है। अडानी ग्रुप की कंपनी अंबुजा सीमेंट ने मंगलवार को घोषणा की कि वह 8,100 करोड़ रुपये के इक्विटी मूल्य पर ओरिएंट सीमेंट लिमिटेड (OCL) का अधिग्रहण करेगी। ओरिएंट सीमेंट सीके बिड़ला ग्रुप की कंपनी है। यह सौदा 395.4 रुपये प्रति शेयर के भाव पर हुआ है। अंबुजा ने साथ ही कंपनी में अतिरिक्त 26% हिस्सेदारी हासिल करने के लिए ओपन ऑफर पेश किया है। इस अधिग्रहण से अडानी सीमेंट को देश के मुख्य बाजारों में अपनी उपस्थिति बढ़ाने और सीमेंट मार्केट में अपनी हिस्सेदारी में 2% की वृद्धि करने में मदद मिलेगी। अडानी ग्रुप देश की दूसरी बड़ी सीमेंट कंपनी है। आदित्य बिड़ला ग्रुप की कंपनी अल्ट्राटेक पहले नंबर पर है। अंबुजा सीमेंट ने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में कहा कि 3-4 महीनों के भीतर ओपन ऑफर SAST से नियमों के प्रावधानों के अनुसार पूरा हो जाएगा। ओपन ऑफर 395.40 रुपये प्रति इक्विटी शेयर पर किया जा रहा है। इस घोषणा के बाद शुरुआती कारोबार में दोनों सीमेंट कंपनियों के शेयर में तेजी दिख रही है। अंबुजा के शेयर 1.49% बढ़कर 580 रुपये पर पहुंच गए जबकि ओरिएंट सीमेंट के शेयर 9:20 बजे तक 1.65% बढ़कर 358.25 रुपये पर कारोबार कर रहे थे। कितनी बढ़ेगी क्षमता डील के मुताबिक ओरिएंट सीमेंट लिमिटेड के मौजूदा प्रमोटरों और कुछ सार्वजनिक शेयरधारकों से अंबुजा 46.8% शेयर हासिल करेगी। अधिग्रहण को पूरी तरह से आंतरिक स्रोतों से फंड किया जाएगा। अंबुजा सीमेंट्स के डायरेक्टर करण अडानी ने कहा कि यह अधिग्रहण अंबुजा सीमेंट्स की विकास यात्रा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। अंबुजा के अधिग्रहण के दो वर्षों के भीतर सीमेंट क्षमता में 30 MTPA की वृद्धि हुई है। OCL के अधिग्रहण से अंबुजा वित्त वर्ष 2025 में 100 MTPA सीमेंट क्षमता तक पहुंचने के लिए तैयार है। अडानी ने कहा कि ओसीएल के पास स्ट्रैटजिक लोकेशन, हाई क्वालिटी वाले चूना पत्थर के भंडार और सभी तरह के जरूरी अप्रूवल हैं। निकट भविष्य में इसी सीमेंट उत्पादन क्षमता 16.6 एमटीपीए तक बढ़ सकती है। अडानी ग्रुप ने अंबुजा सीमेंट्स और एसीसी लिमिटेड को $10.5 अरब में स्विट्जरलैंड के होलसिम ग्रुप से खरीदा था। इस साल अगस्त में अंबुजा सीमेंट्स ने गुजरात में सांघी इंडस्ट्रीज को 5,000 करोड़ रुपये में खरीदा। इसकी उत्पादन क्षमता 6.1 MTPA है।

दुनिया के अमीरों की लिस्ट में भारी उलटफेर, अडानी, अंबानी की नेटवर्थ में भी गिरावट

नई दिल्ली  भारत और एशिया के सबसे बड़े रईस मुकेश अंबानी और गौतम अडानी की नेटवर्थ में हफ्ते के पहले दिन  गिरावट देखने को मिली। अडानी पहले ही 100 अरब डॉलर क्लब से बाहर हो चुके हैं। अब उन पर अमीरों की लिस्ट में टॉप 20 से बाहर होने का खतरा मंडरा रहा है। ब्लूमबर्ग बिलिनेयर इंडेक्स के मुताबिक सोमवार को उनकी नेटवर्थ में 67.3 करोड़ डॉलर की गिरावट आई। वह 98.9 अरब डॉलर की नेटवर्थ के साथ दुनिया के अमीरों की लिस्ट में 18वें नंबर पर हैं। इस साल उनकी नेटवर्थ में 14.6 अरब डॉलर की तेजी आई है। इस बीच देश की सबसे वैल्यूएबल कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी की नेटवर्थ में भी 98.4 लाख डॉलर की गिरावट आई। वह 104 अरब डॉलर की नेटवर्थ के साथ दुनिया के अमीरों की लिस्ट में 14वें नंबर पर है। इस साल उनकी नेटवर्थ में 7.91 अरब डॉलर की गिरावट आई है। रिलायंस ने बाजार बंद होने के बाद अपने तिमाही नतीजों की घोषणा की। दूसरी तिमाही में कंपनी के नेट प्रॉफिट में तीन फीसदी गिरावट आई है। सोमवार को कंपनी का शेयर बीएसई पर 0.11 फीसदी गिरावट के साथ बंद हुआ जबकि सेंसेक्स 0.73 फीसदी तेजी के साथ बंद हुआ। जेंसन हुआंग टॉप 10 की दहलीज पर इस बीच अमेरिका की दिग्गज एआई चिप कंपनी एनवीडिया का शेयर  रेकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इसके साथ ही यह दुनिया की सबसे वैल्यूएबल कंपनी बनने के करीब पहुंच गई। इसका मार्केट कैप 3.39 ट्रिलियन डॉलर हो गया है जबकि ऐपल का मार्केट कैप 3.52 ट्रिलियन डॉलर है। इस तेजी से कंपनी के फाउंडर और सीईओ जेंसन हुआंग की नेटवर्थ 121 अरब डॉलर पहुंच गई है। इस बीच लैरी एलिसन 186 अरब डॉलर की नेटवर्थ के साथ चौथे नंबर पर पहुंच गए हैं। एलिसन सॉफ्टवेयर कंपनी ओरेकल कॉर्प के सबसे बड़े स्टेकहोल्डर हैं। टेस्ला, स्पेसएक्स, एक्स समेत कई कंपनियों को चला रहे एलन मस्क 241 अरब डॉलर की नेटवर्थ के साथ दुनिया के अमीरों की लिस्ट में टॉप पर बने हुए हैं। ऐमजॉन के फाउंडर जेफ बेजोस 210 अरब डॉलर के साथ फिर दूसरे नंबर पर आ गए हैं। फेसबुक की पेरेंट कंपनी मेटा प्लेटफॉर्म के सीईओ मार्क जकरबर्ग 209 अरब डॉलर के साथ अब तीसरे नंबर पर खिसक गए हैं। फ्रांसीसी कारोबारी बर्नार्ड अरनॉल्ट 185 अरब डॉलर की नेटवर्थ के साथ पांचवें नंबर पर खिसक गए हैं। इस साल उनकी नेटवर्थ में 22.2 अरब डॉलर की गिरावट आई है।

अडानी की नेटवर्थ में 4.35 अरब डॉलर की तेजी आई, नेटवर्थ 101 अरब डॉलर पहुंच गई

नई दिल्ली  लगातार छह दिन की गिरावट के बाद घरेलू शेयर बाजार में तेजी लौटी। शुरुआत में मार्केट में भारी उतारचढ़ाव दिख रहा था लेकिन हरियाणा विधानसभा चुनावों की मतगणना आगे बढ़ने के साथ ही शेयर मार्केट में तेजी दिखने लगी। इस तेजी से सबसे ज्यादा फायदे में गौतम अडानी रहे। अडानी ग्रुप के चेयरमैन की नेटवर्थ में  4.35 अरब डॉलर यानी करीब 36,505 करोड़ रुपये की तेजी आई। इसके साथ ही वह दुनिया के अमीरों की लिस्ट में दो स्थान की छलांग लगाते हुए 16वें नंबर पर पहुंच गए हैं। ब्लूमबर्ग बिलिनेयर इंडेक्स के मुताबिक उनकी नेटवर्थ 101 अरब डॉलर पहुंच गई है। अडानी  एनवीडिया के फाउंडर और सीईओ जेंसन हुआंग के बाद सबसे ज्यादा कमाई करने वाले शख्स रहे। हुआंग की नेटवर्थ में 4.36 अरब डॉलर की तेजी आई। अडानी की नेटवर्थ में इस साल 16.3 अरब डॉलर की तेजी आई है। देश की सबसे वैल्यूएबल कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी की नेटवर्थ में भी  तेजी रही। उनकी नेटवर्थ 2.12 अरब डॉलर की तेजी के साथ 106 अरब डॉलर पहुंच चुकी है। इस साल उनकी नेटवर्थ में 9.90 अरब डॉलर की तेजी आई है और वह दुनिया के अमीरों की लिस्ट में 14वें नंबर पर हैं। अंबानी और अडानी की नेटवर्थ में अब केवल 5 अरब डॉलर का फासला रह गया है। कौन-कौन है टॉप 10 में इस बीच एलन मस्क 259 अरब डॉलर की नेटवर्थ के साथ दुनिया के अमीरों की लिस्ट में पहले नंबर पर बने हुए हैं। फेसबुक की पेरेंट कंपनी मेटा प्लेटफॉर्म के सीईओ मार्क जकरबर्ग 210 अरब डॉलर के साथ दूसरे नंबर पर हैं। जेफ बेजोस ($206 अरब) तीसरे, बर्नार्ड अरनॉल्ट ($191 अरब) चौथे, लैरी एलिसन पांचवें ($185 अरब), बिल गेट्स ($161 अरब) छठे, लैरी पेज ($149 अरब) सातवें, स्टीव बाल्मर ($144 अरब) आठवें, वॉरेन बफे ($143 अरब) नौवें और सर्गेई ब्रिन ($140 अरब) दसवें नंबर पर हैं।

गौतम अडानी त्योहारी सीजन में 10,000 करोड़ रुपये की खरीदारी की तैयारी में

नई दिल्ली  भारत और एशिया के दूसरे बड़े रईस गौतम अडानी सीमेंट सेक्टर में बड़ी खरीदारी की तैयारी में हैं। सूत्रों के मुताबिक अडानी ग्रुप ने जर्मनी की कंपनी हीडलबर्ग मैटेरियल्स के भारत में सीमेंट कारोबार को खरीदने के लिए बातचीत शुरू कर दी है। इस खरीदारी की अगुवाई ग्रुप की कंपनी अंबुजा सीमेंट्स करेगी। माना जा रहा है कि यह डील 1.2 अरब डॉलर (10,000 करोड़ रुपये) में हो सकती है। यदि यह डील सफल होती है तो इससे इंडस्ट्री में चल रही कंसोलिडेशन की रेस तेज होगी। देश की की टॉप सीमेंटकंपनी अल्ट्राटेक भी अपनी पोजीशन को बनाए रखने के लिए कंपनियों का अधिग्रहण कर रही है। अडानी ग्रुप अभी देश की दूसरी बड़ी सीमेंट निर्माता कंपनी है। उसने साल 2022 में होलसिम के भारतीय बिजनस को खरीदकर सीमेंट इंडस्ट्री में एंट्री की थी। सूत्रों के मुताबिक अडानी ग्रुप होलसिम की तरह हीडलबर्ग के साथ भी डील को तेजी से आगे बढ़ना चाहता है। 30 जून, 2024 को अंबुजा सीमेंट्स के पास 18,299 करोड़ रुपये की नकदी समकक्ष थे। हालांकि एक सूत्र ने कहा कि अगर दूसरे दावेदार भी आगे आते हैं तो अडानी ग्रुप इससे बाहर निकल सकता है। जर्मन कंपनी भारत में लिस्टेड हीडलबर्ग सीमेंट इंडिया और अनलिस्टेड जुआरी सीमेंट के जरिए ऑपरेट करती है। भारत में हीडलबर्ग का बिजनस हीडलबर्ग सीमेंट इंडिया का मार्केट कैप 4,957 करोड़ रुपये है और इसमें 69.39% हिस्सेदारी मूल कंपनी की है। हीडलबर्ग दुनिया की सबसे बड़ी सीमेंट उत्पादकों में से एक है और 50 देशों में मौजूद है। सूत्रों ने कहा कि हीडलबर्ग हेडक्वार्टर के एक सीनियर अधिकारी अडानी ग्रुप के साथ बातचीत का नेतृत्व कर रहे हैं। हालांकि उत्पादन क्षमता को लेकर मतभेद हो सकते हैं। हीडलबर्ग का दावा है कि उसकी क्षमता लगभग 14 मिलियन टन है लेकिन यह कम हो सकती है। यह वैल्यूएशन को प्रभावित कर सकती है। हीडलबर्ग ने साल 2006 में मैसूर सीमेंट, कोचीन सीमेंट और इंडोरामा सीमेंट के जॉइंट वेंचर के अधिग्रहण के साथ भारत में प्रवेश किया था। कंपनी का दावा है कि साल 2016 में इटालसीमेंटी के अधिग्रहण के बाद भारत में उसकी उत्पादन क्षमता 14 मिलियन टन पहुंच गई। इस बारे में हीडलबर्ग और अडानी ग्रुप ने प्रश्नों का उत्तर नहीं दिया।  

चीन, जापान और साउथ कोरिया 2028 तक बुक, 30 साल में 50,000 से अधिक जहाजों की जरूरत

नई दिल्ली  भारत और एशिया के दूसरे सबसे बड़े रईस गौतम अडानी (Gautam Adani) अब जहाज निर्माण यानी शिपबिल्डिंग में उतरने की योजना बना रहे हैं। गुजरात के मुंद्रा में अडानी ग्रुप (Adani Group) के फ्लैगशिप पोर्ट पर जहाज बनाने का काम शुरू हो सकता है। इसकी वजह यह है कि चीन, जापान और दक्षिण कोरिया में अधिकांश यार्ड कम से कम 2028 तक पूरी तरह बुक हैं। यही वजह है कि दुनिया में जहाज ऑपरेट करने वाली बड़ी कंपनियों को शिपबिल्डिंग के लिए वैकल्पिक जगहों की तलाश है। इनमें भारत भी शामिल है। इस मौके का फायदा उठाने के लिए अडानी ग्रुप शिपबिल्डिंग में उतरने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। अडानी ग्रुप देश का सबसे बड़ा पोर्ट ऑपरेटर है। मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 में भारत को शीर्ष 10 शिपबिल्डर बनाने और मैरीटाइम अमृत काल विजन में 2047 तक शीर्ष पांच में शामिल होने का लक्ष्य रखा गया है। अडानी ग्रुप का प्लान देश की इस योजना में फिट बैठता है। दुनिया में कमर्शियल शिपबिल्डिंग मार्केट में भारत की हिस्सेदारी महज 0.05% है। दुनिया में कमर्शियल जहाज बनाने वाले देशों की लिस्ट में भारत 20वें स्थान पर है। देश की कुल विदेशी माल-ढुलाई आवश्यकताओं में भारतीय स्वामित्व वाले और भारतीय झंडे वाले जहाजों का हिस्सा लगभग 5% है। अडानी की जहाज निर्माण योजना को मुंद्रा बंदरगाह के लिए 45,000 करोड़ रुपये की विस्तार योजना में शामिल कर लिया गया है। इस योजना को हाल में पर्यावरण मंत्रालय से मंजूरी मिली है। 62 अरब डॉलर का मार्केट अडानी ग्रुप ऐसे समय जहाज निर्माण में उतरने की तैयारी कर रहा है जब ग्लोबल शिपिंग इंडस्ट्री डीकार्बनाइजेशन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए धीरे-धीरे ग्रीन शिप की ओर बढ़ रही है। एक अनुमान के अनुसार मौजूदा बेड़े को बदलने के लिए अगले 30 वर्षों में 50,000 से अधिक जहाजों का निर्माण किया जाना है। अडानी ग्रुप ने इस बारे में भेजे गए ईमेल का जवाब नहीं दिया। केपीएमजी की एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2047 तक भारत का कमर्शियल शिपबिल्डिंग मार्केट 62 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। साथ ही इससे जुड़े सहायक उद्योग के 37 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। इससे 1.2 करोड़ लोगों को नौकरी मिलने की उम्मीद है। केपीएमजी के अनुसार मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 और अमृत काल विजन लक्ष्यों तक पहुंचने के लिए भारतीय शिपयार्ड्स के सालाना उत्पादन को 2030 तक 0.072 मिलियन ग्रॉस टन से बढ़ाकर 0.33 मिलियन ग्रॉस टन और 2047 तक 11.31 मिलियन ग्रॉस टन तक बढ़ाने की आवश्यकता है। साल 2047 तक घरेलू कार्गो क्षमता में वृद्धि के अलावा भारतीय विदेशी कार्गो की न्यूनतम 5% ढुलाई प्राप्त करने के लिए, अतिरिक्त बेड़े की क्षमता की आवश्यकता है। इसके परिणामस्वरूप घरेलू जहाज निर्माण की मांग अगले 23 वर्षों में 59.74 मिलियन ग्रॉस टन होने का अनुमान है। इनमें पुराने जहाजों का रिप्लेसमेंट भी शामिल है। क्या है एडवांटेज जानकारों का कहना है कि किसी नई कंपनी को इस सेक्टर में काफी समय लग सकता है लेकिन अडानी ग्रुप के लिए परिस्थितियां आसान हैं। उसके पास इसके लिए जमनी और और पर्यावरणीय मंजूरी है। हैवी इंजीनियरिंग में अडानी ग्रुप का यह पहला कदम होगा। एसईजेड का दर्जा मिलने से अडानी ग्रुप को अनेक वित्तीय और टैक्स चुनौतियों से निपटने में मदद मिलेगी। इन चुनौतियों के कारण स्थानीय कंपनियां चीन की शिपबिल्डिंग कंपनियों के साथ होड़ करने में असमर्थ है। भारत में आठ सरकारी यार्ड और करीब 20 निजी यार्ड हैं। लार्सन एंड टुब्रो चेन्नई के पास कट्टुपल्ली में एक यार्ड ऑपरेट करती है।  

ग्रीन हाइड्रोजन के पहले चरण में अडानी का नौ अरब डॉलर के भारी-भरकम निवेश का प्लान, 10,000 लोगों को रोजगार मिलेगा

नई दिल्ली  भारत और एशिया के दूसरे सबसे बड़े अमीर गौतम अडानी (Gautam Adani) ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में बड़ा दांव खेलने की तैयारी में हैं। मिंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक अडानी ग्रुप (Adani Group) ने ग्रीन हाइड्रोजन बिजनस के पहले चरण के लिए नौ अरब डॉलर के निवेश की योजना बनाई है। इसमें से चार अरब डॉलर का निवेश मशीनरी, मैन्युफैक्चरिंग प्लांट आदि पर किया जाएगा जबकि पांच अरब डॉलर 5 गीगावॉट इलेक्ट्रोलाइजर मेकिंग कैपिसिटी के विकास पर खर्च किए जाएंगे। माना जा रहा है कि इससे करीब 10,000 लोगों को रोजगार मिलेगा। अडानी ग्रुप ने तीन मिलियन टन ग्रीन हाइड्रोजन कैपेसिटी का टारगेट रखा है। इसमें से एक मिलियन टन कैपेसिटी 2030 तक हासिल करने का लक्ष्य है। अडानी कई बार यह दावा कर चुके हैं कि उनकी दुनिया की सबसे सस्ती ग्रीन हाइड्रोजन बनाएगी। सूत्रों के मुताबिक ग्रीन हाइड्रोजन का प्रॉडक्शन शुरू होने के बाद अडानी ग्रुप इसे जहाजों के जरिए यूरोप और कुछ एशियाई देशों को एक्सपोर्ट करेगा। इस सेक्टर में अडानी ग्रुप का मुकाबला लार्सन एंड टुब्रो, इंडियन ऑयल और ऑयल इंडिया से हो सकता है। ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने में ग्रीन हाइड्रोजन की भूमिका को अहम माना जा रहा है। ग्रीन हाइड्रोजन पानी और क्लीन इलेक्ट्रिसिटी से बनती है और इसे भविष्य का ईंधन कहा जा रहा है। मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज ने भी ग्रीन एनर्जी में में 75 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की है। इलेक्ट्रोलाइजर सूत्रों का कहना है कि अडानी ग्रुप के ग्रीन हाइड्रोजन बिजनस का पहले चरण एल्केलाइन इलेक्ट्रोलाइजर पर आधारित होगा। इसमें एक किलो हाइड्रोजन बनाने के लिए कम से कम नौ किलो पानी की जरूरत होती है। बाद में एनियन एक्सचेंज मेंबरेन पर आधारित इलेक्ट्रोलाइजर बनाएगा। ग्रीन बिजनस के लिए अडानी ग्रुप ने अडानी न्यू इंडस्ट्रीज नाम से एक कंपनी बनाई है। पिछले फाइनेंशियल ईयर में अडानी ग्रुप की टोटल इनकम में इसकी हिस्सेदारी नौ फीसदी थी। अडानी ग्रुप की बिजनस कई सेक्टर्स में फैला है और यह मार्केट कैप के हिसाब से टाटा ग्रुप और रिलायंस के बाद देश का तीसरा सबसे बड़ा औद्योगिक घराना है।  

भारत 2050 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगा- गौतम अदाणी

 मुंबई  अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी नेक कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में कहा कि भारतीय होने का इससे अच्छा समय नहीं हो सकता। अगले एक दशक में भारत अपनी जीडीपी में हर 12 से 18 महीने में एक ट्रिलियन डॉलर जोड़ेगा। इसकी मदद से 2050 तक भारत 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगा। क्रिसिल रेटिंग्स के ‘एनुअल इन्फ्रास्ट्रक्चर सबमिट’ में गौतम अदाणी ने कहा कि भारत को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने में 58 वर्ष का समय लगा। अगला एक ट्रिलियन डॉलर जोड़ने में 12 वर्ष लगे और अगले पांच वर्ष में भारत तीन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन गया। संबोधन में अदाणी ग्रुप के चेयरमैन ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था जिस हिसाब से बढ़ रही है और सरकार द्वारा लगातार आर्थिक और सामाजिक सुधार किए जा रहे हैं, मुझे लगता है कि अगले एक दशक में भारत अपनी जीडीपी में हर 12 से 18 महीने में एक ट्रिलियन डॉलर जोड़ना शुरू कर देगा। इस तरह हम 2050 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएंगे। आगे उन्होंने कहा कि 2050 तक भारतीय शेयर बाजार का पूंजीकरण बढ़कर 40 ट्रिलियन डॉलर को पार कर जाएगा। इसका मतलब है कि भारत अगले 26 वर्षों में करीब 36 ट्रिलियन डॉलर का मार्केट कैप अपने शेयर बाजार में जोड़ेगा। बता दें, मौजूदा समय में भारत का बाजार पूंजीकरण 5 ट्रिलियन डॉलर का है। अदाणी ने आगे कहा कि और किसी भी अन्य देश के भारत जितना बढ़ने की संभावना नहीं है। ऐसे में भारतीय होने का ये सबसे अच्छा समय है। भारत की इन्फ्रास्ट्रक्चर इंडस्ट्री पर उन्होंने कहा कि देश के इन्फ्रास्ट्रक्चर में अभूतपूर्व बदलाव हो रहे हैं और जिस तरह का पूंजीगत व्यय किया जा रहा है, कभी नहीं देखा गया है। इसने भारत के कई दशकों के विकास की नींव रख दी है।  

गौतम अडाणी को भूटान में मिली एंट्री, ग्रीन हाइड्रो प्लांट के लिए हुई डील

 नई दिल्‍ली अडानी ग्रुप के मुख‍िया गौतम अडानी ने रविवार को थिम्‍पू में भूटान के राजा जिग्‍मे खेसर नामग्‍याल वांगचुक (Jigme Khesar Namgyel Wangchuck) और वहां के प्रधानमंत्री दाशो शेरिंग तोबगे (Dasho Tshering Tobgay) से मुलाकात की. इस दौरान उन्‍होंने भूटान में 570 मेगावाट के ग्रीन हाइड्रो प्लांट लगाने के लिए समझौते पर हस्‍ताक्षर करने की घोषणा की. इसके अलावा, गौतम अडानी ने भूटान में इंफ्राट्रक्‍चर के विकास में सहयोग करने की भी बात कही. गौतम अडानी ने इसकी जानकारी देते हुए ट्विटर यानी एक्‍स पर पोस्‍ट लिखा कि भूटान के माननीय प्रधानमंत्री दाशो शेरिंग तोबगे के साथ मुलाकात बहुत ही रोमांचक रही. चुखा प्रांत में 570 मेगावाट के हरित हाइड्रो प्लांट के लिए ड्रक ग्रीन पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (DGPC) के साथ समझौता किया गया है. हाइड्रो और इंफ्रा प्रोजेक्ट लेकर आएगा अडानी ग्रुप गौतम अडानी ने बताया कि भूटान के लिए उनके विजव और बड़े कंप्यूटिंग सेंटर व डेटा फैसिलिटी समेत गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी के इको फेंडली मास्‍टरप्‍लान से प्रेरित हुए हैं. उन्‍होंने कहा कि अडानी ग्रुप भूटान में हाइड्रो प्‍लांट लगाने से लेकर यहां पर अन्‍य इंफ्रा प्रोजेक्‍ट पर मिलकर काम करने के लिए उत्‍सुक है. जल्‍द ही इसे लेकर ऐलान हो सकता है. गौतम अडानी ने कहा कि इको फ्रेंडली देश के लिए ग्रीन एनर्जी मैनेंजमेंट के साथ-साथ इन प्रोजेक्‍ट्स में सहयोग के लिए उत्‍साहित हैं. बता दें पिछले साल नवंबर में गौतम अडानी ने भूटान नरेश से मुलाकात की थी और कहा था कि वे “अपने खुशहाल और गर्मजोशी से भरे पड़ोसी” के लिए ग्रीन इंफ्रास्टक्चर डेवलपमेंट में योगदान देने के लिए अडानी ग्रुप के लिए अवसर की तलाश में हैं. पीएम मोदी से भी मिले भूटान के राजा अडानी से मुलाकात से पहले, राजा ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी. अधिकारिक जानकारी के मुताबिक, इस बैठक में दोनों पक्षों ने भारत-भूटान साझेदारी के विस्तार पर चर्चा की, जिसमें बड़े स्‍तर पर कनेक्टिविटी के नए क्षेत्र, सीमा पार व्यापार के अवसर, व्‍यापर करने और आपसी निवेश, ऊर्जा, स्वास्थ्य, शिक्षा, अंतरिक्ष टेक्‍नोलॉजी और अन्‍य मुद्दे रहे.  

गौतम अदाणी ने कहा- तंजानिया के साथ बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों में करेंगे दीर्घकालिक समझौता

Hemant Soren will again become the Chief Minister of Jharkhand

नई दिल्ली अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने शुक्रवार को कहा कि अदाणी समूह अफ्रीका के सबसे महत्वपूर्ण देशों में से एक तंजानिया के साथ बंदरगाहों, नवीकरणीय ऊर्जा और हवाई अड्डों सहित अन्य उद्योगों में दीर्घकालिक समझौता करने को उत्सुक है। गौतम अदाणी ने तंजानिया की राष्ट्रपति सामिया सुलुहू हसन से मुलाकात की और कहा कि अफ्रीका के भविष्य के बारे में उनसे सुनना रोमांचक था। अदाणी समूह के चेयरमैन ने एक्स पर पोस्ट किया, “संयुक्त गणराज्य तंजानिया की करिश्माई राष्ट्रपति महामहिम सामिया सुलुहू से मिलना सम्मान की बात थी। उन्होंने कहा कि अफ्रीका के भविष्य के बारे में उनकी गहरी अंतर्दृष्टि सुनना और अफ्रीका के सबसे आशाजनक और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देशों में से एक के साथ दीर्घकालिक समझौतेे की संभावनाओं पर चर्चा करना रोमांचक था। गौतम अदाणी ने आगे कहा कि वे अदाणी समूह द्वारा विभिन्न बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में अपनी विशेषज्ञता का लाभ उठाने के बारे में उत्साहित हैं, इसमें बंदरगाह, नवीकरणीय ऊर्जा, हवाई अड्डे, ट्रांसमिशन, वितरण और रेल शामिल हैं, ताकि तंजानिया में विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचेे के निर्माण में मदद मिल सके। पिछले महीने, अदाणी इंटरनेशनल पोर्ट्स होल्डिंग्स ने पूर्वी अफ्रीकी देश में दार एस सलाम बंदरगाह पर कंटेनर टर्मिनल 2 (सीटी2) के संचालन व देखरेख के लिए तंजानिया पोर्ट्स अथॉरिटी के साथ 30 साल का समझौता किया। अदाणी इंटरनेशनल पोर्ट्स होल्डिंग्स अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड (एपीएसईजेड) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है। एपीएसईजेड के प्रबंध निदेशक करण अदाणी ने कहा कि अदाणी समूह ने तंजानिया पोर्ट्स अथॉरिटी के साथ 30 साल का समझौता किया है, ताकि पूर्वी अफ्रीकी देश में दार एस सलाम बंदरगाह पर कंटेनर टर्मिनल 2 (सीटी2) का संचालन और प्रबंधन किया जा सके। उन्होंने कहा कि यह कदम एपीएसईजेड की 2030 तक वैश्विक स्तर पर सबसे बड़े बंदरगाह संचालकों में से एक बनने की महत्वाकांक्षा के अनुरूप है। दार एस सलाम बंदरगाह एक प्रवेश द्वार बंदरगाह है, जो सड़क और रेलवे के नेटवर्क से जुड़ा हुआ है।

Gautam Adani की UAE की कंपनी से बड़ी डील, बनाएंगे ड्रोन और मिसाइल

 नई दिल्ली अडानी ग्रुप (Adani Group) के चेयरमैन और देश के दूसरे सबसे अमीर इंसान गौतम अडानी (Gautam Adani) का दबदबा अब डिफेंस सेक्टर में बढ़ने वाला है. दरअसल, उनकी कंपनी अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने (Adani Defence and Aerospace) ने UAE की कंपनी EDGE Group के साथ डील की है. इस करार के तरह अब दोनों कंपनियां मिलकर सेना के लिए मिसाइल-ड्रोन समेत अन्य आधुनिक हथियार बनाएंगी. हथियारों की मैन्युफैक्चरिंग समेत इन कामों पर जोर मंगलवार को अडानी ग्रुप की ओर से इस करार के बारे में जानकारी शेयर की गई. इसमें बताया गया कि अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस और ऐज ग्रुप मिलकर आधुनिक हथियारों की मैन्युफैक्चरिंग के साथ ही इलेक्ट्रॉनिक और साइबर सिस्टम डेवलपमेंट में मिलकर काम करेंगी. दोनों कंपनियों के बीच हुए इस समझौते के तहत रिसर्च और डेवलपमेंट फेसिलिटीज स्थापित करने पर विचार करने के साथ ही डिफेंस सेक्टर में टेक्निकल ग्रोथ पर भी जोर दिया गया है. एक ग्लोबल प्लेटफॉर्म स्थापित होगा इस समझौते का उद्देश्य अडानी ग्रुप और ऐज ग्रुप की दोनों कंपनियों की डिफेंस और एयरोस्पेस क्षमताओं को इस्तेमाल करते हुए ग्लोबल प्लेटफॉर्म स्थापित करना है. जिससे कि दोनों के संबंधित प्रोडक्ट पोर्टफोलियो को एक साथ लाकर पेश किया जा सके. इसमें EDGE और Adani के मुख्य प्रोडक्ट डोमेन में सहयोग का मूल्यांकन करना भी शामिल है, जिसमें हवाई, सतह, पैदल सेना, गोला-बारूद और एयर डिफेंस प्रोडक्ट्स को कवर करने वाली मिसाइलें और मानव रहित हवाई प्रणाली (UAS), लोइटरिंग मुनिशन, काउंटर ड्रोन सिस्टम के साथ ही साइबर टेक्नोलॉजी शामिल हैं. करार पर क्या बोले अडानी डिफेंस CEO? Gautam Adani की कंपनी अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस के सीईओ आशीष राजवंशी (Ashish Rajvanshi) ने इस डील को लेकर कहा है कि हमारे बीच यह समझौता रक्षा क्षमताओं के विस्तार में एक नए युग की शुरुआत है. यह एडवांस टेक्नोलॉजिकल ग्रोथ और India-UAE के बीच द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाने वाला भी है. हम मिलकर ग्लोबल डिफेंस लैंडस्केप में नए मानक स्थापित करना चाहते हैं. यूएई में बड़ा नाम है EDGE Group साल 2019 में स्थापित यूएई बेस्ड एडवांस्ड टेक ग्रुप EDGE के सीईओ हमद अल मरार भी इस करार को लेकर उत्साहित दिखे. उन्होंने कहा कि अडानी डिफेंस (Adani Defence) के साथ हमारा यह समझौता एक मील का पत्थर साबित होगा. यही नहीं ये डील दोनों देशों के सैन्य संबंधों को मजूबत बनाने की हमारी प्रतिबद्धता को दिखाता है. हम अपने ग्राहकों को सबसे आधुनिक प्रोडक्ट्स देना चाहते हैं. अब दोनों कंपनियां एक जॉइंट प्लेटफॉर्म तैयार करेंगी.  

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