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गाजा में राहत सामग्री लाने की कोशिश में फिलीस्तीनियों पर फिर से गोलीबारी , 36 की मौत, 207 अन्य जख्मी हो गए

गाजा   गाजा में सहायता सामग्री तक पहुंचने की कोशिश कर रहे फलस्तीनियों पर फिर से गोलीबारी की गई जिसमें 36 लोगों की मौत हो गई जबकि 207 अन्य जख्मी हो गए। फलस्तीन के स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह जानकारी दी। विशेषज्ञों और मानवीय सहायता कार्यकर्ताओं का कहना है कि इजराइल की नाकाबंदी और 20 महीने के सैन्य अभियान ने गाजा को भुखमरी के कगार पर पहुंचा दिया है। इजराइली और अमेरिकी समर्थन वाले ‘गाजा ह्मूमेनिटेरियन फाउंडेशन’ द्वारा संचालित सहायता वितरण स्थलों के पास गोलीबारी में कम से कम 163 लोगों की मौत हो गई है जबकि 1495 लोग जख्मी हुए हैं। इज़राइली सेना ने पहले उन लोगों पर चेतावनी के तौर पर गोलियां चलाने की बात स्वीकार की है, जो उसके अनुसार संदिग्ध तरीके से उसकी सेना की ओर बढ़ रहे थे। फाउंडेशन का कहना है कि वितरण केन्द्रों में या उसके आसपास कोई हिंसा नहीं हुई है। लेकिन इसने लोगों को निर्धारित पहुंच मार्गों पर ही रहने की चेतावनी दी है। नासेर अस्पताल के अनुसार, दक्षिणी गाजा में रफह के आसपास सहायता प्राप्त करने का प्रयास करते समय कम से कम आठ लोग मारे गए। अल-अवदा अस्पताल के प्रवक्ता नादेर गरगून के अनुसार, उत्तरी गाजा में मंगलवार को दो पुरुष और एक बच्चे की मौत हो गई और कम से कम 130 लोग घायल हो गए। अस्पताल में ही घायलों को भर्ती किया गया था। उन्होंने बताया कि ज़्यादातर लोगों को गोली लगी है। प्रत्यक्षदर्शियों ने ‘एसोसिएटेड प्रेस’ को बताया कि इज़राइली सेना ने मध्य गाजा में सहायता स्थल से कई सौ मीटर की दूरी पर देर रात करीब दो बजे गोलीबारी की। लोग सहायता सामग्री लेने की ‍उम्मीद में भोर से पहले ही सामग्री वितरण स्थल पर पहुंचना शुरू कर देते हैं। इज़राइली सेना ने कहा कि उसने लोगों पर चेतावनी के तौर पर गोलियां चलाईं और उसने लोगों को संदिग्ध बताया। उसने कहा कि लोग सहायता स्थल के खुलने के समय से पहले ही वहां पहुंचने लगे थे और उसके सैनिकों से कुछ मीटर दूर थे। इसके अतिरिक्त, स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, मंगलवार को गाजा शहर में इजराइली हमले में तीन फलस्तीनी चिकित्सक मारे गए। स्वास्थ्य मंत्रालय की आपातकालीन सेवा के चिकित्सक गाजा शहर के जाफा स्ट्रीट में एक घर पर हुए इजराइली हमले को लेकर प्रतिक्रिया दे रहे थे, तभी दूसरा हमला इमारत पर हुआ। इजराइली सेना ने हमले पर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन कहा कि पिछले दिनों वायु सेना ने रॉकेट लांचरों सहित हमास के सैन्य ढांचे से संबंधित दर्जनों लक्ष्यों को निशाना बनाया है। इस बीच प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मंगलवार को कहा कि संभावित युद्ध विराम समझौते पर “सार्थक प्रगति” हुई है, जिससे गाजा में बंधक के तौर पर रखे गए 55 लोगों में से कुछ को वापस लाया जा सकेगा, लेकिन उन्होंने कहा कि “अभी उम्मीद करना जल्दबाजी होगी।” विदेश मंत्री गिदोन सार ने भी मंगलवार को उल्लेख किया कि युद्ध विराम वार्ता में प्रगति हुई है। नेतन्याहू आगे के कदमों पर चर्चा करने के लिए मंगलवार शाम को इजराइली वार्ता दल और रक्षा मंत्री के साथ बैठक कर रहे थे।    

गाजा में भूख से हर घंटे हो रही मौत, फलस्तीनी आबादी मदद से वंचित; खतरे में हजारों बच्चे

गाजा गाजा में हालात इतने खराब हो गए हैं कि इजरायली हमलों से ज्यादा लोग भुखमरी से मरने लगे हैं। संयुक्त राष्ट्र के अध्यक्ष एंटोनियो गुटेरस ने कहा कि गाजा इस समय सबसे खराब समय का सामना कर रहा है। इजरायल ने लंबे समय की पाबंदी के बाद जब गाजा वालों के लिए राहत सामग्री वाले ट्रकों को जाने की इजाजत दी तो दर्जनों ट्रक रास्ते में ही लूट लिए गए। भूख और अभाव से त्रस्त लोगों ने राहत सामग्री वाले ट्रकों को लूट लिया। बता दें कि इजरायल ने एक बार फिर गाजा में आक्रामक तरीके से हमला शुरूर कर दिया है। गाजा सिविल डिफेंस एजेंसी के अधिकारी मोहम्मद अल मुगायीर ने बताया कि शुक्रवार को इजरायल के हवाई हमलों में कम से कम 71 लोग मारे गए और दर्जनों घायल हो गए। इसके अलावा अब भी कई लोग लापता हैं। यूएन चीफ ने कहा कि इजरायल को कम से कम राहत सामग्री पर रोक नहीं लगानी चाहिए। यह क्रूरता की हद है जिसका सामना गाजा के लोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हाल ही में इजरायल ने 400ट्रकों को अनुमति दी थी। हालांकि इनमें से 115 ही गाजा में पहुंचे। उन्होंने कहा कि इजरायल ने गाजा में नरसंहार तेज कर दिया है और जोरदार तबाही मचाने लगा है। वर्ल्ड फूड प्रोग्राम ने  कहा कि बीती रात दक्षिणी गाजा में करीब 15 ट्रंक लूट लिए गए। लोगों में भुखमरी है। ऐसे में लोगों को भरोसा नहीं है कि राहत सामग्री के और ट्रक आएंगे या नहीं। 2 मार्च के बाद सोमवार को गाजा में ट्रकों की आवाजाही शुरू हुई थी। गाजा में लोग पानी को भी तरस रहे हैं। एक फिलिस्तीनी ने कहा, मेरी बेटी सुबह से ही ब्रेड मांग रही है। लेकिन मेरे पास कुछ भी नहीं है। इजरायली वायुसेना ने गाजा पट्टी में आतंकवादियों के 75 से भी अधिक ठिकानों पर हमला किया है। इजरायल रक्षा बल (आईडीएफ) ने  यहां जारी बयान में कहा कि उसकी वायुसेना ने आतंकवादियों के 75 से भी ज्यादा ठिकानों को ध्वस्त कर दिया है। बयान के मुताबिक हमलों में आतंकवादियों , रॉकेट लांचरों, सैन्य परिसरो, हथियार भंडारण सुविधाओं और अन्य सैन्य बुनियादी ढांचों को निशाना बनाया गया है। गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय का बयान गाजा की स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इस्राइली हमलों में इस सप्ताह अब तक 82 लोगों की मौत हो चुकी है। दूसरी ओर, भुखमरी की स्थिति भी गंभीर होती जा रही है। राहत समूहों के पास हफ्तों से भोजन खत्म हो चुका है और करीब 23 लाख की आबादी में से अधिकांश अब सामुदायिक रसोइयों पर निर्भर हैं, जिनके पास भी अब लगभग कुछ नहीं बचा। रसोई में पड़ोसी जा रही पतली और पानी जैसी दाल मीडिया रिपोर्ट की माने तो गाजा सिटी में एक रसोई में केवल पतली और पानी जैसी दाल परोसी जा रही है। वहां की निवासी सोमाया अबू अमशा ने बताया कि हमने पिछले 10 दिनों से रोटी नहीं देखी। ये खाना कुत्ते भी नहीं खाएं, हमारे बच्चे कैसे खाएं? इस भीषण संघर्ष को देखते हुए उन्होंने युद्ध खत्म करने की अपील की। वेस्ट बैंक में डिप्लोमैट्स पर गोलीबारी इसी बीच वेस्ट बैंक के जेनिन में इस्राइली सेना ने चेतावनी स्वरूप फायरिंग की जब अंतरराष्ट्रीय राजनयिकों का एक समूह इलाके का दौरा कर रहा था। मामले में इस्राइली सेना का कहना है कि यह दौरा अनुमति प्राप्त था, लेकिन डेलीगेशन निर्धारित रास्ते से भटक गया, जिसके बाद यह कदम उठाया गया। साथ ही वीडियो फुटेज में देखा गया कि डिप्लोमैट्स मीडिया को बयान दे रहे थे, तभी गोलियों की आवाजें आईं और सभी ने वहां से भागकर अपनी जान बचाई। हालांकि कोई घायल नहीं हुआ। सेना ने घटना पर जताया खेद हालांकि सेना ने इस घटना पर खेद जताते हुए कहा कि संबंधित देशों से संपर्क किया जाएगा। गौरतलब है कि जेनिन में इस्राइली सेना अकसर छापेमारी करती रही है, खासकर 7 अक्तूबर 2023 को हमास के हमले के बाद से वेस्ट बैंक में कई इलाकों में बड़े पैमाने पर कार्रवाई जारी है, जिससे हजारों फलस्तीनी बेघर हो चुके हैं। टॉम फ्लेचर का दावा- 14 हजार बच्चों की हो सकती है मौत गाजा में संकट कितना गंभीर है, इसका अंदाजा उन मीडिया रिपोर्ट्स से लगाया जा सकता है, जिसमें संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख टॉम फ्लेचर के हवाले से कहा गया है कि अगर मानवीय सहायता गाजा के प्रभावित लोगों तक नहीं पहुंची तो 48 घंटे के भीतर लगभग 14 हजार बच्चों की मौत हो सकती है। हालांकि, फ्लेचर के इस दावे पर मानवीय मामलों के समन्वय के लिए संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (UNOCHA) के प्रवक्ता- जेन्स लार्के ने कहा है कि हजारों बच्चे ऐसे हैं, जो कुपोषण के शिकार हैं, और उन्हें तत्काल जीवन रक्षा मदद की जरूरत है।

नेतन्याहू के ‘ऑपरेशन क्लीन स्वीप’ से खौफ में गाजा,151 मौतों के बीच बड़ी राहत का भी ऐलान

गाजा  गाजा पट्टी एक बार फिर इतिहास के सबसे भयावह मानवीय संकटों में से एक का गवाह बन गई है. इजरायल की तरफ से शुरू किए गए ‘गिदओन्स चारियट्स’ ऑपरेशन के तहत महज एक दिन में 151 फिलिस्तीनियों की मौत ने दुनिया को झकझोर कर रख दिया है. वहीं, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गाजा में भोजन भेजने की घोषणा कर जंग और राहत का एक साथ ऐलान कर नया बवाल मचा दिया है.  इजरायल ने नए जमीनी ऑपरेशन में एक दिन में 151 लोगों की जान ले ली। उधर, उत्तरी इजरायल में एक इंडोनेशियाई अस्पताल पर भी कब्जे की सूचना है। इस बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गाजा में राहत सामग्री भेजने का ऐलान किया। उन्होंने कैबिनेट की मंजूरी के बाद कहा कि गाजा में भुखमरी की कगार पर खड़े फिलिस्तीनियों को भोजन मिलेगा। लेकिन यह फैसला इजरायली सेना के नए भीषण जमीनी हमले के बीच लिया गया है, जिसका मकसद हमास को पूरी तरह कुचलना है। इजरायल का गाजा में सबसे बड़ा ऑपरेशन इजरायल ने इस नए सैन्य अभियान को नाम दिया है “गिदओन्स चारियट्स” और यह अब तक का सबसे बड़ा ज़मीनी ऑपरेशन बताया जा रहा है। सिर्फ रविवार को ही इस हमले में 151 फिलिस्तीनियों की मौत हो गई। अलजजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, गाजा के इंडोनेशियन अस्पताल को इजरायली सेना ने घेर लिया है। इजरायल को अस्पताल में हमास के कुछ आतंकियों के इनपुट मिले थे। उधर, अस्पताल निदेशक डॉ. मरवान अल-सुल्तान के मुताबिक, अंदर 55 लोग फंसे हुए हैं, जिनमें डॉक्टर, मरीज और स्टाफ भी शामिल हैं। आधे मिलियन लोगों पर भूख का संकट Euronews की रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 5 लाख फिलिस्तीनी भुखमरी से जूझ रहे हैं। 10 लाख और लोग पोषण संकट से जूझ रहे हैं। भुखमरी के हालात को देखते हुए नेतन्याहू ने भोजन देने की बात कही है। लेकिन चेतावनी दी कि कोई भी मदद हमास के हाथ न लगे। नेतन्याहू ने सोमवार को ऐलान किया कि उनकी कैबिनेट ने सेना की सिफारिश पर गाज़ा में “मूलभूत मात्रा में भोजन” भेजने की अनुमति दी है। ये फैसला लगभग तीन महीने की नाकाबंदी के बाद लिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह कदम मानवीय राहत के साथ-साथ इजरायल की सैन्य रणनीति का हिस्सा है, ताकि गाजा में सेना का बड़ा अभियान और तेजी से आगे बढ़ाया जा सके।  

गाजा में चल रहे युद्ध को समाप्त करने के वास्ते सभी बंधकों को छोड़ने के लिए तैयार

गाजा इजरायल की ताबड़तोड़ कार्रवाई से हमास के हौंसले पस्त होते नजर आ रहे हैं। फिलिस्तीन के इस कट्टरपंथी संगठन ने एक महत्वपूर्ण घोषणा में कहा है कि वह गाजा में चल रहे युद्ध को समाप्त करने के वास्ते सभी बंधकों को छोड़ने के लिए तैयार है। हमास ने कहा है कि वह इजरायली सेना की पूर्ण वापसी और फिलिस्तीनी कैदियों की रिहाई के बदले सभी इजरायली बंधकों को रिहा करने के लिए तैयार है। यह बयान हमास के वरिष्ठ अधिकारी खलील अल-हय्या ने गुरुवार को एक टेलीविजन भाषण में दिया। इस प्रस्ताव को गाजा में डेढ़ साल से अधिक समय से चल रहे संघर्ष को खत्म करने की दिशा में एक संभावित कदम के रूप में देखा जा रहा है। हमास का प्रस्ताव हमास के वरिष्ठ अधिकारी खलील अल-हय्या ने कहा, “हम एक व्यापक समझौते के लिए तैयार हैं, जिसमें सभी इजरायली बंधकों की रिहाई, इजरायल में कैद फिलिस्तीनी कैदियों की रिहाई, गाजा युद्ध का अंत और क्षेत्र के पुनर्निर्माण की शुरुआत शामिल हो।” हालांकि, हमास ने स्पष्ट किया कि वह इजरायल की उस मांग को स्वीकार नहीं करेगा जिसमें उसे अपने हथियार डालने होंगे। अल-हय्या ने इजरायल के 45 दिन के अस्थायी युद्धविराम प्रस्ताव को भी खारिज कर दिया, जिसमें हमास के हथियार डालने की शर्त शामिल थी। हमास ने यह भी कहा कि कोई भी समझौता स्थायी युद्धविराम, इजरायली सेना की पूर्ण वापसी और गाजा के पुनर्निर्माण की गारंटी पर आधारित होना चाहिए। एक वरिष्ठ फिलिस्तीनी अधिकारी ने कहा, “इजरायल का नवीनतम प्रस्ताव युद्ध को पूरी तरह समाप्त करने की घोषणा नहीं करता और केवल बंधकों को प्राप्त करना चाहता है।” संघर्षविराम का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए कर रहे नेतन्याहू- हमास अल-हय्या ने इजराइल द्वारा प्रस्तावित 45 दिन की अस्थायी संघर्षविराम योजना को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि अब हमास किसी भी “आंशिक समझौते” को स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू संघर्षविराम का इस्तेमाल केवल अपने राजनीतिक फायदे के लिए कर रहे हैं। उन्होंने रॉयटर्स के हवाले से कहा, “नेतन्याहू और उनकी सरकार आंशिक समझौतों का इस्तेमाल अपनी उस राजनीतिक नीति को आगे बढ़ाने के लिए करते हैं, जिसका मकसद नरसंहार और भुखमरी के जरिए युद्ध को जारी रखना है — भले ही इसके लिए अपने ही बंधकों की बलि क्यों न देनी पड़े। हम इस नीति को लागू करने का हिस्सा नहीं बनेंगे।” हमास की इस सख्त स्थिति से मिस्र के मध्यस्थों द्वारा युद्धविराम को बहाल करने की कोशिशों को और झटका लग सकता है। काहिरा में इस हफ्ते हुई बातचीत बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई। हमास ने इजरायल की उस मांग को भी खारिज कर दिया है, जिसमें संगठन से अपने हथियार छोड़ने की शर्त रखी गई थी। हमास ने साफ कहा है कि वह तभी बचे हुए 59 इजराइली बंधकों को छोड़ेगा, जब इजराइल युद्ध को पूरी तरह समाप्त करने पर सहमत होगा। इजरायल ने तेज किए हमले इधर, इजरायली सेना ने गाजा पर अपने हमले तेज कर दिए हैं। गुरुवार को हुए हवाई हमलों में गाजा स्वास्थ्य विभाग के अनुसार कम से कम 32 फिलिस्तीनियों की मौत हुई, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। जबालिया में संयुक्त राष्ट्र संचालित एक स्कूल पर हमले में छह लोगों की जान गई। इजराइल ने दावा किया कि वहां एक हमास कमांड सेंटर था। वहीं, हमास ने यह जानकारी दी कि इजरायली-अमेरिकी सैनिक एडन अलेक्जेंडर को बंधक बनाकर रखने वाले लड़ाकों से उनका संपर्क टूट गया है। बताया गया कि जिस स्थान पर अलेक्जेंडर को रखा गया था, वहां इजराइली हमले हुए। हमास ने एक वीडियो संदेश में बंधकों के परिवारों को चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसे हमलों में उनके प्रियजन मारे जा सकते हैं। 2023 से चल रहा संघर्ष यह युद्ध 7 अक्टूबर 2023 को शुरू हुआ, जब हमास ने दक्षिणी इजरायल पर एक आश्चर्यजनक हमला किया, जिसमें इजरायली अधिकारियों के अनुसार 1,200 लोग मारे गए और 251 लोग बंधक बनाए गए। इसके जवाब में, इजरायल ने गाजा पर व्यापक सैन्य अभियान शुरू किया, जिसमें गाजा स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार अब तक 51,000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे गए हैं। हमास का कहना है कि वर्तमान में उसके पास 59 बंधक हैं, जिनमें से 24 के जीवित होने की उम्मीद है। इजरायल में जनता का दबाव इजरायल में, बंधकों की रिहाई को प्राथमिकता देने की मांग बढ़ रही है। सैकड़ों पूर्व मोसाद और वायुसेना कर्मियों ने सरकार से युद्ध को रोककर बंधकों की रिहाई पर ध्यान देने का आह्वान किया है। तेल अवीव में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, जहां लोग बंधकों की सुरक्षित वापसी के लिए समझौते की मांग कर रहे हैं। एक प्रदर्शनकारी, योना श्निट्जर ने कहा, “गाजा में बंधकों की स्थिति सामान्य नहीं होनी चाहिए। यह दिल दहलाने वाला है।”

गाजा में लंबे समय तक बने रहेंगे इजरायली सैनिक, सेना के नए चीफ ने की आक्रामक तैयारी

तेल अवीव इजरायल के रक्षा मंत्री इजराइल कैट्ज ने बुधवार को गाजा में सैन्य अभियान के बड़े विस्तार की घोषणा की। इस अभियान के दौरान गाजा के एक बड़े हिस्से पर कब्जा करने की योजना है, ताकि उन्हें इजरायल के सुरक्षा क्षेत्रों में शामिल किया जा सके। बयान में, कैट्ज ने कहा कि अभियान में “युद्ध क्षेत्रों से गाजा की आबादी को बड़े पैमाने पर निकालना” भी शामिल होगा। हालांकि उन्होंने ज्यादा जानकारी साझा नहीं की। बयान के अनुसार, सैन्य अभियान का विस्तार “आतंकवादियों और आतंकी ढांचे के क्षेत्र को कुचलने और साफ करने के लिए किया जाएगा, जबकि बड़े क्षेत्रों पर कब्जा किया जा सके।” दक्षिणी राफा से लोगों को बाहर निकलने को कहा मंगलवार देर रात अरबी मीडिया के लिए इजरायली सेना के प्रवक्ता ने गाजा के दक्षिणी राफा क्षेत्र के निवासियों को अपने घर छोड़ने और उत्तर की ओर जाने का आदेश दिया। सीएनएन ने पिछले महीने ही बताया था कि इजरायल गाजा में एक बड़े जमीनी हमले की योजना बना रहा है, जिसमें एन्क्लेव के एक बड़े हिस्से को साफ करने और उस पर कब्जा करने के लिए हजारों सैनिकों को युद्ध में भेजना शामिल होगा। गाजा पर जारी है इजरायली बमबारी बुधवार को कैट्ज के बयान में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि गाजा पट्टी के इस विस्तारित अभियान में अतिरिक्त इजरायली सैनिक शामिल होंगे या नहीं। यह घोषणा ऐसे समय में की गई है जब इजरायल ने गाजा पट्टी पर हवाई बमबारी जारी रखी है। नासेर अस्पताल और खान यूनिस में यूरोपीय अस्पताल के अधिकारियों के अनुसार, दक्षिणी गाजा में रात भर इजरायली हमलों में कम से कम 17 लोग मारे गए, जबकि दर्जनों घायल हुए हैं। अस्पतालों में आ रहे लोगों के शव नासेर अस्पताल के अनुसार, मारे गए लोगों में कम से कम 13 लोग – जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। मरने वाले लोग राफा क्षेत्र से विस्थापित होने के बाद एक आवासीय घर में शरण लिए हुए थे। अल अवदा अस्पताल के अनुसार, दो लोग मध्य गाजा में एक अलग हमले में मारे गए। इजरायल ने दो सप्ताह पहले गाजा पर अपना आक्रमण फिर से शुरू किया, जिससे हमास के साथ दो महीने पुराना युद्धविराम टूट गया। इजरायल ने पहले से ही गाजा में मानवीय सहायता की पूरी नाकाबंदी कर दी थी। गाजा में लंबे समय तक बने रहेंगे इजरायली सैनिक इजरायल ने चेतावनी दी कि उसके सैनिक गाजा के कुछ हिस्सों में तब तक स्थायी रूप से मौजूद रहेंगे जब तक कि शेष 24 बंधकों की रिहाई नहीं हो जाती, जिनके बारे में माना जाता है कि वे अभी भी जीवित हैं। तब से एन्क्लेव में सैकड़ों फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं। इस बीच संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि गाजा पट्टी में खाद्य आपूर्ति समाप्त हो रही है। इजरायली सेना के नए चीफ ने की आक्रामक तैयारी इजरायली सेना के नये चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल इयाल जमीर के नेतृत्व में इजराइली सेना पिछले कई सप्ताह से गाजा में बड़े पैमाने पर अभियान की योजना बना रही है। इस तरह के निर्णय से इजराइली सेना इस क्षेत्र पर कब्जा कर सकती है और वर्षों तक विद्रोहियों से लड़ सकती है। लेकिन गाजा में लंबे समय तक आक्रमण करने से इजराइली जनता का कड़ा प्रतिरोध भी हो सकता है, जिनमें से अधिकांश लोग युद्ध की वापसी के बजाय बंधकों की रिहाई के लिए समझौते की मांग कर रहे हैं।

गाजा में जनता का विरोध, युद्ध शुरू होने के बाद से हमास के खिलाफ सबसे बड़ा प्रदर्शन

गाजा इजराइल के साथ युद्ध शुरू होने के बाद से उत्तरी गाजा में फिलिस्तीनियों ने ही सबसे बड़ा हमास विरोधी विरोध प्रदर्शन किया है. इसमें शामिल होने लिए सैकड़ों फिलिस्तीनी सड़कों पर उतरे. उन्होंने युद्ध को समाप्त करने की मांग की और मांग की कि हमास सत्ता से हट जाए. ये प्रदर्शन गाजा पट्टी के उत्तरी हिस्से में बेत लाहिया में हुए. इजरायली सेना द्वारा लगभग दो महीने के संघर्ष विराम के बाद गाजा पर अपनी गहन बमबारी फिर से शुरू करने के एक हफ्ते बाद भीड़ इकट्ठा हुई थी। मंगलवार, 25 मार्च की देर रात सोशल मीडिया पर शेयर किए गए वीडियो और तस्वीरों में सैकड़ों प्रदर्शनकारी, जिनमें ज्यादातर पुरुष थे, “बाहर, बाहर, बाहर, हमास बाहर” और “हमास आतंकवादियों” के नारे लगाते हुए दिखाई दिए. उनके हाथों में प्ले कार्ड थे जिनपर “युद्ध बंद करो” और “हम शांति से रहना चाहते हैं” जैसे नारे लिखे हुए थे. सवाल यह है कि आखिर फिलिस्तीन में आम लोग अब हमास के खिलाफ क्यों सड़कों पर उतर रहे हैं. जानकारों का कहना है कि आम इंसान जंग से आजीज आ चुके हैं. कुछ ये भी कह रहे हैं कि यह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस चेतावनी का भी असर हो सकता है जिसमें उन्होंने हमास-इजरायल जंग को खत्म करने के लिए फिलिस्तीनियों को कहीं और बसाने की बात कही थी. खैर इसका कारण जो भी, लेकिन आम फिलिस्तीनियों का सड़क पर उतरना गाजा और पूरे मध्य पूर्व में शांति की आहट का संकेत देता है. बुधवार को ज्यादातर प्रदर्शन गाजा के उत्तरी हिस्से में हुए. लोग 17 महीने से चल रही इजराइल के साथ जंग को खत्म करने की मांग कर रहे थे, जिसने गाजा में जिंदगी को बहुत मुश्किल बना दिया है. लेकिन प्रदर्शनकारियों ने हमास की भी खुलकर आलोचना की, जिसका अब भी गाजा पर कब्जा है. बेत लाहिया कस्बे में करीब 3,000 लोग जमा हुए. वहां मंगलवार को भी ऐसा ही प्रदर्शन हुआ था. जनता हमास का पतन चाहती है… जैसे नारे लगाए गए. गाजा शहर के शिजैया इलाके में भी दर्जनों लोगों ने “बाहर, बाहर, हमास बाहर जाओ” के नारे लगाए. ‘हमारे बच्चे मारे गए’ न्यूज एजेंसी एपी की रिपोर्ट के मुताबिक अबेद रदवान नाम के एक शख्स ने कहा, “हमारे बच्चे मारे गए, हमारे घर तबाह हो गए.” उन्होंने बेत लाहिया के प्रदर्शन में हिस्सा लिया था और कहा कि यह युद्ध, हमास, फिलिस्तीनी गुटों, इजराइल और दुनिया की चुप्पी के खिलाफ था. अम्मार हसन, जिन्होंने मंगलवार को प्रदर्शन में हिस्सा लिया, ने बताया कि यह शुरू में युद्ध के खिलाफ छोटा प्रदर्शन था, लेकिन बाद में 2,000 से ज्यादा लोग जुट गए और हमास के खिलाफ नारे लगाने लगे. उन्होंने कहा, “हम सिर्फ हमास को प्रभावित कर सकते हैं. प्रदर्शन से इजराइल रुकेगा नहीं, लेकिन हमास पर असर पड़ सकता है.” हमास ने पहले प्रदर्शनों को हिंसा से रोका था, लेकिन इस बार कोई साफ हस्तक्षेप नहीं दिखा. शायद इसलिए कि इजराइल के साथ जंग फिर शुरू होने के बाद हमास कमजोर दिखाई दे रहा है. हमास के वरिष्ठ नेता बासेम नईम ने फेसबुक पर कहा कि लोगों को प्रदर्शन का हक है, लेकिन उनका ध्यान “अपराधी हमलावर” इजराइल पर होना चाहिए. बेत लाहिया के परिवारों के बुजुर्गों ने इजराइल के नए हमले और गाजा में सभी आपूर्तियों पर सख्त रोक के खिलाफ प्रदर्शनों का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि समुदाय इजराइल के खिलाफ सशस्त्र प्रतिरोध का पूरा समर्थन करता है. बेत हनून के मोहम्मद अबू साकर ने कहा, “यह प्रदर्शन राजनीति के बारे में नहीं था, यह लोगों की जिंदगी के बारे में था. हम हत्या और विस्थापन रोकना चाहते हैं. हम इजराइल को नहीं रोक सकते, लेकिन हमास से रियायतें मांग सकते हैं.” दो दिन से लगातार प्रदर्शन जबालिया में भी मंगलवार को ऐसा ही प्रदर्शन हुआ. एक प्रदर्शनकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि वे इसलिए शामिल हुए क्योंकि “सबने हमें नाकाम किया.” उन्होंने इजराइल, हमास, पश्चिमी समर्थित फिलिस्तीनी प्राधिकरण और अरब मध्यस्थों के खिलाफ नारे लगाए. वहां हमास की सुरक्षा बल नहीं दिखे, लेकिन समर्थकों और विरोधियों के बीच झड़पें हुईं. बाद में उन्हें प्रदर्शन में शामिल होने का पछतावा हुआ, क्योंकि इजराइली मीडिया ने हमास विरोध पर जोर दिया. इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने फिलिस्तीनियों से प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की. उन्होंने कहा, “हमास को गाजा से हटाओ और बंधकों को तुरंत रिहा करो. यही जंग रोकने का तरीका है.” यह प्रदर्शन इजराइल के हमास के साथ संघर्षविराम खत्म करने और सैकड़ों लोगों को मारने वाले हमलों के एक हफ्ते बाद शुरू हुए. इस महीने की शुरुआत में इजराइल ने गाजा में भोजन, ईंधन, दवा और मानवीय सहायता रोक दी. 7 अक्टूबर, 2023 को हमास के हमले, जिसमें 1,200 लोग मारे गए और 251 बंधक बनाए गए, के बाद यह जंग शुरू हुई थी. इजराइल के जवाबी हमलों में 50,000 से ज्यादा लोग मारे गए हैं.

इजरायली सेना ने गाजा पर पूरी तरह से कब्जा और सैन्य शासन स्थापित करने के लिए बड़े आक्रमण की योजना बनाई

वॉशिंगटन  इजरायल ने गाजा पर पूरी तरह से कब्जा करने का प्लान बनाया है। इजरायल की योजना है कि गाजा पर बड़े पैमाने पर हमला करने के बाद पूरे क्षेत्र को नियंत्रण में ले लिया जाए और सेना की मदद से यहां शासन किया जाए। फाइनेंशियल टाइम्स और हारेत्ज की रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल की सरकार गाजा पर पूरी तरह से कब्जा करने के बाद बड़ी तादाद में वहां सैनिकों की तैनाती करेगा। ये तैनाती 50 हजार सैनिकों की हो सकती है। वहीं गाजा की स्थानीय आबादी को भी बड़े पैमाने पर स्थानांतरित करने का प्लान है। इससे फिलिस्तीनियों और अरब देशों की मुश्किल बढ़ सकती है। इजरायल ने गाजा में अक्टूबर, 2023 के बाद से लगातार भीषण हमले किए हैं। इससे पहले भी इजरायल ने बार-बार गाजा में हमले किए हैं। हालांकि वह गाजा को पूरी तरह से नियंत्रण में लेने में कामयाब नहीं हो सकती है। अभी तक इजरायली सेना लड़ाई के बाद अस्थायी रूप से पीछे हट गई लेकिन अब उसकी योजना वापसी की नहीं है। वह पूरी तरह से गाजा पर नियंत्रण चाहती है। इजरायल ने बनाया नया प्लान इजरायल की नई योजना में गाजा पर कब्जा करने के लिए 50,000 सैनिकों (5 कॉम्बेट डिविजन) को तैनात करना शामिल है। प्लान में गाजा में सैन्य शासन स्थापित करने और यहां की आबादी को जबरदस्ती अल-मावासी क्षेत्र में स्थानांतरित करना भी शामिल है। अल-मावासी एक छोटा मानवीय क्षेत्र है। यानी एक छोटी जगह में बड़ी तादाद में लोगों को रहने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह प्रस्ताव इजरायल के सुरक्षा मंत्रिमंडल के सामने है, अभी इसे मंजूर नहीं किया गया है। FT ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि गाजा के लिए यह योजना इजरायली सेना के नए चीफ ऑफ स्टाफ ने बनाई गई है। इस प्लान पर उनको धुर दक्षिणपंथी मंत्रियों का समर्थन भी मिल गया है। इस योजना पर इजरायल बढ़ता है तो गाजा में बड़े पैमाने पर खून खराबा देखने को मिल सकता है और बड़ी मानवीय त्रासदी खड़ी हो सकती है। गाजा में और बिगड़ सकते हैं हालात गाजा के लिए इजरायल और अमेरिका की ओर से हालिया समय में जो प्लान आए हैं, उनमें यहां की स्थानीय आबादी को हटाने की बात कही जा रही है। ऐसे में इसका ना सिर्फ फिलिस्तीनी बल्कि अरब देश भी विरोध कर रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने भी हाल ही में कहा था कि गाजा के लोगों को यहां से निकालकर पड़ोस के अरब देशों में भेज दिया जाए। इसका कड़ा विरोध अरब मुल्कों और गाजावासियों ने किया। ऐसे में साफ है कि गाजा के लोगों को हटाना इजरायल के लिए आसान नहीं होगा।

डोनाल्ड ट्रंप का गाजा का पुनःनिर्माण में निकल जाएंगा पसीना! सिर्फ मलबा साफ करने में 1.2 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च

गाजा  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा पर कब्जा करने और उसे जन्नत बनाने की बात कही है। ट्रंप के बयान ने दुनिया को चौंका दिया है। अरब देशों के साथ साथ अमेरिका की डेमोक्रेटिक पार्टी ने भी उनके प्लान की निंदा की है। डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा को ‘मध्य पूर्व का रिवेरा’ बनाने और ‘गाजा को फिर से महाने बनाने’ का अपना प्लान पेश किया है। जिसके तहत गाजा में रहने वाले करीब 23 लाख लोगों को उन्होंने मिस्र, जॉर्डन और अरब देशों में भेजने की पेशकश की है। हालांकि, उनके प्लान को अरब देशों ने फौरन ही खारिज कर दिया। डोनाल्ड ट्रंप के प्लान पर विवाद जरूर हो रहे हैं, लेकिन एक सवाल भी उठ रहे हैं कि इजरायली बमबारी में ध्वस्त हो चुके गाजा का फिर से निर्माण कैसे होगा? डोनाल्ड ट्रंप के प्लान पर शक करने वाले लोगों का कहना है, कि असल में ये गाजा में रहने वाले लोगों के सफाए के लिए बनाया गया ये एक फॉर्मूला है। लोगों का कहना है कि ट्रंप का प्लान असल में गाजा पर कब्जा करना है। लेकिन सवाल ये है, कि गाजा को जन्नत बनाने में कितने साल लगेंगे? और गाजा स्वर्ग की तरह दिखे, ऐसा होने में जो खर्च आएगा, उसे कौन वहन करेगा? एक्सपर्ट्स का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा के लिए जो प्लान किया है, उसे पूरा करने में कई सालों का वक्त लगेगा और अरबों डॉलर का खर्च आएगा। गाजा को फिर से बनाने में कितने साल लगेंगे? गाजा में जिस तरह की बर्बादी फैली है, उसे देखते हुए एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि पुननिर्माण में कम से कम 20 सालों से ज्यादा का वक्त लगेगा। गाजा को साफ करने में अमेरिका को लाखों टन मलबा पट्टी से बाहर निकालना होगा। मलबे को निकालने में ही कई सालों का वक्त लग जाएगा। सवाल ये भी हैं, कि आखिर इतना मलबा कहां रखा जाएगा? ब्रिटिश सेना के कर्नल रिचर्ड केम्प ने द सन की रिपोर्ट में डोनाल्ड ट्रंप के प्लान का समर्थन किया है। उन्होंने इसे एक तार्किक योजना बताया है। उन्होंने कहा, कि “गाजा के पुनर्निर्माण में कम से कम एक दशक का समय लगेगा।” केम्प ने द सन की रिपोर्ट में कहा है, कि “गाजा को एक ऐसी जगह में बदलने के लिए, जहां लोग फिर से रह सकें, इसमें शायद कम से कम एक दशक लगने वाला है।” उन्होंने कहा, कि “इसमें शायद अरबों डॉलर खर्च होंगे, लेकिन मध्य पूर्व में कई अरब देश हैं, और वो इस प्रोजेक्ट में मदद दे सकते हैं।” हालांकि, बुधवार को व्हाइट हाउस ने कहा है, कि ट्रंप ने फिलिस्तीनी एन्क्लेव के अपने प्रस्ताव के तहत गाजा पट्टी में अमेरिकी सैनिकों को तैनात करने के लिए कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने संवाददाताओं से कहा, कि ट्रंप का मानना है कि “क्षेत्र में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए” गाजा के पुनर्निर्माण में संयुक्त राज्य अमेरिका को शामिल होना चाहिए। गाजा पट्टी में कितनी बर्बादी फैली है? यूनाइटेड नेशंस ने अनुमान लगाा है, कि गाजा में करीब 50 मिलियन टन मलबा फैला है, जिसे साफ करने में 21 सालों का वक्त लग सकता है। अनुमान में कहा गया है, कि गाजा पट्टी से सिर्फ मलबा साफ करने में 1.2 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च हो सकते हैं। केम्प ने कहा कि, “मेरा मानना है, कि गाजा में लोगों को ट्रंप के प्लान के मुताबिक अलग रखा जाए, सुरंगों को साफ किया जाए, हथियारों को हटाया जाए और फिर एक नये गाजा का निर्माण किया जाए। हवाई अड्डे का निर्माण हो, बंदरगाह का निर्माण हो और ये सभी के लिए बेहतर होगा।” लेकिन असल सवाल ये है, कि क्या गाजा से लोगों को निकालना संभव है? डोनाल्ड ट्रंप ने सुझाव दिया है, कि गाजा के लोगों को निकालकर अस्थाई तौर पर मिस्र और जॉर्डर में बसाया जाए, जिसे दोनों देशों ने खारिज कर दिया है। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, कि “गाजा के लोगों ने मौत और विनाश के अलावा कुछ नहीं देखा है और अगर नये गाजा का निर्माण होगा, तो कौन होगा जो वापस नहीं जाना चाहेगा।” अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, गाजा “मध्य पूर्व का रिवेरा” होगा। लेकिन, सवाल ये है कि क्या ऐसा संभव है?

‘गाजा में मौतों का आंकड़ा 44 हजार के पार’, इस्राइल-हमास जंग पर फलस्तीनी अधिकारी का दावा

 गाजा  गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इस्राइल और हमास के बीच चल रहे युद्ध में गाजा पट्टी में मरने वालों की संख्या 44,000 से अधिक हो गई है। बता दें कि 13 महीने से ज्यादा वक्त से जारी युद्ध के दौरान मारे गए लोगों में गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय लड़ाकों और नागरिकों के बीच अंतर नहीं करता है, उसक कहना है कि हताहतों में आधे से अधिक महिलाएं और बच्चे हैं। एक लाख से ज्यादा लोग घायल- गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय इधर इस्राइली सेना का कहना है कि उसने बिना सबूत दिए 17,000 से अधिक आतंकवादियों को मार गिराया है। गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि युद्ध शुरू होने के बाद से 44,056 लोग मारे गए हैं और 104,268 घायल हुए हैं। हालांकि मंत्रालय का ये भी दावा है कि वास्तविक संख्या अधिक है क्योंकि हजारों शव मलबे के नीचे या ऐसे क्षेत्रों में दबे हुए हैं जहां चिकित्सक और चिकित्सीय सुविधाएं नहीं पहुंच सकती हैं। नेतन्याहू के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट ने गुरुवार को इस युद्ध के लिए इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, पूर्व रक्षा मंत्री योआव गैलंट और हमास के सैन्य कमांडर मोहम्मद डेफ के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है. ICC ने इन्हें युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी माना है. कोर्ट ने नेतन्याहू के खिलाफ आरोपों की जांच का भी आदेश दिया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ICC ने कहा कि नेतन्याहू और इजराइल के रक्षा मंत्री ने जानबूझकर फिलिस्तीनी नागरिकों को मारने के आदेश दिए. साथ ही, गाजा में अंतरराष्ट्रीय मानवीय मदद पहुंचने से रोकने के लिए कदम उठाए, जिससे वहां भुखमरी जैसी स्थिति पैदा हुई. हमास के हमले से शुरू हुआ युद्ध यह युद्ध 7 अक्टूबर 2023 को शुरू हुआ, जब हमास के आतंकवादियों ने दक्षिणी इजराइल पर हमला किया. इस हमले में करीब 1,200 लोग मारे गए और 250 लोगों का अपहरण कर लिया गया. इनमें से करीब 100 लोग अब भी गाजा में बंधक हैं. रिपोर्ट के अनुसार इनमें से एक-तिहाई की मौत हो चुकी है. 7 अक्तूबर 2023 को शुरू हुआ था युद्ध इस्राइल और हमास में युद्ध तब शुरू हुआ जब 7 अक्तूबर, 2023 को हमास के लड़ाकों ने दक्षिणी इस्राइल में धावा बोल दिया, जिसमें लगभग 1,200 लोग मारे गए, जिनमें ज्यादातर नागरिक थे, और 250 अन्य का अपहरण कर लिया गया। एक जानकारी के अनुसार, लगभग 100 बंधक अभी भी गाजा के अंदर हैं, जिनमें से कम से कम एक तिहाई के मारे जाने का अनुमान है। बाकी में से ज्यादातर को पिछले साल संघर्ष विराम के दौरान रिहा कर दिया गया था। अचानक गाजा के दौरे पर पहुंचे थे पीएम बेंजामिन नेतन्याहू वहीं इससे दो दिन पहले 19 नवंबर को इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अचानक गाजा के दौरे पर पहुंचे थे। गाजा से एक वीडियो संदेश जारी करते हुए नेतन्याहू ने कहा कि हमास अब कभी भी गाजा पर फिर से शासन नहीं कर सकेगा। नेतन्याहू ने कहा कि इस्राइली सशस्त्र बलों ने हमास को पूरी तरह से तबाह कर दिया है, इस दौरान उन्होंने बंधकों को छुड़ाने की बात भी कही। इस वीडियो में नेतन्याहू बैलिस्टिक हेलमेट और युद्ध की वर्दी पहने दिखाई दिए थे।  

कई लोगों के मलबे में दबने की आशंका, उत्तरी गाजा में आईडीएफ के हमले में 73 की मौत

तेल अवीव. इस्राइल-हमास के बीच पिछले एक साल से युद्ध जारी है। इस युद्ध में अब लेबनान और ईरान भी शामिल हो चुका है। हमास की तरफ से पिछले साल किए गए हमले के बाद से ही इस्राइल ने गाजा को तबाह करने की कसम खाई थी। इस्राइली सुरक्षा बलों का लगातार गाजा पर हमले जारी है। उत्तरी गाजा के बेत लहिए में आईडीएफ के हमले में 73 लोगों की मौत हो गई। इस हमले के बाद कई लोगों के मलबे में दबे होने की संभावना है। गाजा के सरकारी मीडिया कार्यालय की तरफ से बताया गया कि मौतों के आंकड़ों में बढ़ोतरी हो सकती है। उत्तरी गाजा में 16 दिनों से जारी इस्राइली सैन्य घेराबंदी के कारण स्थिति गंभीर बनी हुई है। इस क्षेत्र में भोजन, पानी, दवा समेत अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंच बंद कर दी गई है। आईडीएफ ने उत्तरी गाजा में हाल के हमले में जान गंवाने वालों के आंकड़ों पर संदेह जताया है। ऑक्सम एक गैर सरकारी संगठन ने दक्षिण गाजा में एक हमले की सूचना दी। इस हमले में खान यूनिस के पास चार इंजीनियरों और श्रमिकों की मौत हो गई। बेंजामिन नेतन्याहू के आवास पर हमला इससे पहले इस्राइल ने हिजबुल्ला के ठिकानों को निशाना बनाते हुए लेबनान के बेरूत में कई रॉकेट दागे। हाल ही में हिजबुल्ला ने इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के आवास पर ड्रोन हमला किया। इसके बदले नेतन्याहू ने चेतावनी दी कि हिजबुल्ला ने बड़ी गलती की है। उन्होंने कहा, “हत्या का प्रयास उन्हें या इस्राइल को आतंकवादियों को खत्म करने से नहीं रोकेगा। शनिवार को लेबनान की तरफ से दागे गए दो अन्य ड्रोन को इस्राइली हवाई सुरक्षा ने मार गिराया।” इस हमले के बाद इस्राइली पीएम नेतन्याहू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा हिजबुल्ला को चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “इस्राइल के नागरिकों को नुकसान पहुंचाने वालों को भारी कीमत चुकानी पड़ती है।” उन्होंने आश्वासन दिया कि आतंकवादियों के खिलाफ इस्राइल अपना अभियान जारी रखेगा।

तुर्की के राष्ट्रपति ने संयुक्त राष्ट्र से कहा- इजरायल को रोका जाए

तेल अवीव  तुर्की के राष्ट्रपति तैय्यप एर्दोगन ने गाजा और लेबनान में इजरायल के हमलों को तुरंत रोकने की अपील की है। एर्दोगन ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद अगर गाजा और लेबनान में इजरायल के हमलों को रोकने में कामयाब नहीं हो रही है तो फिर इससे आगे बढ़ते हुए कदम उठाए जाएं। इजरायल नहीं रुक रहा है तो संयुक्त राष्ट्र महासभा को तुरंत 1950 में पारित प्रस्ताव के मुताबिक इजरायल के खिलाफ सेना के इस्तेमाल की सिफारिश करनी चाहिए। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार अंकारा में एक कैबिनेट बैठक के बाद एर्दोगन ने कहा, ‘अगर सुरक्षा परिषद जरूरी इच्छाशक्ति नहीं दिखाती है, तो संयुक्त राष्ट्र महासभा को बल के उपयोग की सिफारिश करने के अधिकार को तेजी से लागू करना चाहिए। एर्दोगन ने कहा कि गाजा में इजरायल ने भारी तबाही मचाई और अब वही लेबनान में शुरू हो गया है। ये सब रुकना बहुत ज्यादा जरूरी है।’ ‘दूसरे मुस्लिम देश भी बनेंगे इजरायल का निशाना’ एर्दोगन ने इस दौरान कहा कि हमारे क्षेत्र में रहने वाले सभी मुस्लिम, यहूदी और ईसाइयों के लिए हम शांति की चाह रखते हैं। हम शांति के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मुस्लिम दुनिया से एकजुट होने का आह्वान करते हैं। एर्दोगन ने कहा कि इजरायल का आक्रामक रवैया बढ़ता जा रहा है, अगर उसे जल्दी नहीं रोका गया तो उसके हमले दूसरे मुस्लिम देशों को भी निशाना बनाएंगे। उत्तर कोरिया के प्रतिनिधि किम सोंग ने भी इजरायल के हमलों की आलोचना की है। सोंग ने न्यूयॉर्क में यूएनजीए के 79वें सत्र में कहा कि यह कल्पना करना भी मुश्किल लगता है कि एक देश (इजरायल) गाजा में भयानक नरसंहार करने के बाद भी किसी भी तरह की निंदा और मंजूरी से अछूता है। ऐसा उसको अमेरिका के संरक्षण की वजह से है। इजरायल ने लेबनान में शुरू किया जमीनी आक्रामण इजरायली रक्षा बलों ने लेबनान में भीषण बमबारी के बाद जमीनी हमला भी शुरू कर दिया है। मंगलवार को आईडीएफ ने कहा कि उसके सैनिकों ने हिजबुल्लाह की साइटों को टारगेट करने के लिए लेबनान की सीमा पार की है। आईडीएफ का कहना है कि उसकी सैनिक दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर लक्षित जमीनी हमले कर रहे हैं। इयरायली सेना ने ऐसे संकेत दिए हैं, जिनसे लगता है कि आने वाले दिनों में हमले बढ़ सकते हैं।

इजरायल- हमास जंग में भीषण भुखमरी का खतरा, 8000 बच्चे भयंकर कुपोषण के शिकार

गाजा हमास और इजरायल के बीच पिछले 250 दिनों से जारी जंग ने गाजा के निवासियों की जिंदगी को नरक बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है. गाजा की सरकार का कहना है कि गाजा पर इजराइल के युद्ध के 250 दिनों के बाद 15,694 बच्चे मारे गए हैं और 17,000 बच्चे माता-पिता से दूर हैं. डब्ल्यूएचओ प्रमुख टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयसस ने गाजा में भयावह भुखमरी की चेतावनी दी है. उनके मुताबिक जंग से तबाह इलाकों में पांच साल से कम उम्र के 8,000 बच्चे गंभीर कुपोषण से पीड़ित हैं. गाजा पट्टी के उत्तर में एक सरकारी अधिकारी ने अल जजीरा को बताया कि खाद्यान्न की कमी संकट के चरम बिंदु पर पहुंच गई है क्योंकि अधिकांश खाने-पीने का सामान खत्म हो गया है. हमास ने कहा कि उसने इजराइल के साथ युद्धविराम समझौते पर पहुंचने के प्रयासों में पूरी सकारात्मकता दिखाई है. जबकि अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन का कहना है कि हमास ने जिस समझौते का प्रस्ताव दिया है उसमें कुछ बदलाव व्यावहारिक नहीं हैं. गौरतलब है कि 7 अक्टूबर से गाजा पर इजरायल के हमले में कम से कम 37,202 लोग मारे गए हैं और 84,932 घायल हुए हैं. वहीं हमास के हमलों में इजरायल में मरने वालों की संशोधित संख्या 1,139 है, और दर्जनों लोग अभी भी गाजा में बंदी हैं. इजरायली-हमास संघर्ष शुरू होने के बाद से गाजा पट्टी पर इजरायली सुरक्षाबलों के हमलों में फिलिस्तीनियों की मौत की संख्या बढ़कर 36,731 हो गई है, जबकि 83,530 लोग घायल हो गए हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि पिछले 24 घंटों के दौरान इजरायली सुरक्षाबलों के हमलों में 77 लोगों की मौत हो गई और 221 अन्य को घायल कर दिया, जिससे पिछले साल अक्टूबर में फिलिस्तीनी-इजरायल संघर्ष शुरू होने के बाद से मरने वालों की कुल संख्या 36,731 हो गई और 83,530 लोग घायल हो गए हैं. सुरक्षाबलों द्वारा की गई भारी बमबारी और बचाव दल की कमी होने के कारण कुछ लोग अभी भी मलबे में दबे हुए हैं. हमास द्वारा संचालित सरकार के मीडिया कार्यालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, गाजा शहर में अल-शती शरणार्थी शिविर में फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र एजेंसी यूएनआरडब्ल्यूए द्वारा संचालित एक स्कूल पर इजरायली हवाई हमले में तीन लोगों की मौत हो गई और सात अन्य घायल हो गए.  7 अक्टूबर से अब तक कब्जे वाले पश्चिमी तट और पूर्वी यरुशलम में 126 से अधिक बच्चों सहित कुल 521 लोग मारे गए हैं. जिनमें से अधिकांश मौतें फिलिस्तीनी शरणार्थी शिविरों, कस्बों, गांवों और शहरों पर इजरायली सैन्य छापों के दौरान हुई हैं.  संयुक्त राष्ट्र मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (ओसीएचए) की रिपोर्ट के मुताबिक अक्टूबर से अब तक इजरायली सेना द्वारा मारे गए लोगों में से 34 प्रतिशत लोग दो फिलिस्तीनी शहरों और उनके शरणार्थी शिविरों- जेनिन और तुलकरम में मारे गए. अक्टूबर से अब तक हमलों में 5,200 से अधिक फिलिस्तीनी घायल भी हुए हैं, जिनमें 800 बच्चे शामिल हैं. हमास ने अमेरिका से गाजा में स्थायी युद्धविराम के लिए इजरायल पर ‘दबाव’ डालने की अपील किया है. हमास ने एक बयान में कहा कि उसने इजरायल के साथ युद्धविराम समझौते पर पहुंचने के प्रयासों में पूरी सकारात्मकता दिखाई है. हमास ने कहा कि जबकि अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि इजरायल ने 31 मई को राष्ट्रपति जो बाइडेन द्वारा बताए गए युद्धविराम प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है. फिर भी हमने किसी भी इजरायली अधिकारी को इस स्वीकृति की पुष्टि करते नहीं सुना है.

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