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चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत से अधिक रहेगी:ICRA

नई दिल्ली चालू वित्त वर्ष (2025-26) के लिए भारत की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत से अधिक रहेगी। यह अनुमान लीडिंग रेटिंग एजेंसी इक्रा का है। एजेंसी ने अपने आउटलुक में कहा कि इसी अवधि के दौरान देश की वास्तविक सकल मूल्य वर्धित (जीवीए) वृद्धि 6.3 प्रतिशत से अधिक होगी। जहां जीडीपी देश के भीतर उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के कुल मूल्य को निर्धारित करता है, वहीं जीवीए उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के कुल मूल्य में से मध्यवर्ती वस्तुओं और सेवाओं की लागत को घटाने पर प्राप्त होता है। महंगाई दर पर क्या है अनुमान रिपोर्ट में कहा गया है कि मुद्रास्फीति के संबंध में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई दर के 4.2 प्रतिशत से अधिक रहने का अनुमान है, जबकि थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) चालू वित्त वर्ष के लिए 2.7 प्रतिशत से अधिक रहेगा। इक्रा ने राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। इक्रा के अनुसार, रबी के नकदी प्रवाह और सामान्य से अधिक जलाशय स्तर की सहायता से ग्रामीण मांग में तेजी बनी रहने की संभावना है। बजट में ऐलान का फायदा रेटिंग एजेंसी ने कहा कि 2025-26 के लिए केंद्रीय बजट में आयकर में बड़ी राहत, दरों में कटौती से ईएमआई (मासिक किस्त) में कमी और खाद्य मुद्रास्फीति में नरमी से घरेलू खर्च योग्य आय में वृद्धि होने की उम्मीद है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत के वस्तु निर्यात में सुस्ती निकट भविष्य में भी जारी रह सकती है। इक्रा के अनुमान के अनुसार, सेवा निर्यात वस्तु निर्यात वृद्धि से आगे निकलने की संभावना है। रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्र का पूंजीगत व्यय 2025-26 में 10.1 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है, जिससे निवेश गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। आरबीआई का अनुमान चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए आरबीआई ने जीडीपी की वृद्धि दर के अनुमान को 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। जीडीपी वृद्धि दर वित्त वर्ष 2024-25 में 6.5 प्रतिशत दर्ज की गई थी और इसके 2025-26 में भी इतना ही रहने का अनुमान लगाया गया है।

2026 में भारत की वृद्धि दर 6.2 % और वित्त वर्ष 2027 के लिए 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया: मॉर्गन स्टेनली

नई दिल्ली वैश्विक उथल-पुथल और मौसमी प्रभावों के बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था काफी हद तक मजबूत बनी हुई है और वित्त वर्ष 2025 की चौथी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 6.4-6.5 प्रतिशत रहने का पूर्वानुमान है। यह जानकारी  जारी एसबीआई की एक रिपोर्ट में दी गई है। जीडीपी का सांख्यिकीय रूप से अनुमान लगाने के लिए, भारतीय स्टेट बैंक के इकोनॉमिक रिसर्च डिपार्टमेंट ने इंडस्ट्री एक्टिविटी, सर्विस एक्टिविटी और ग्लोबल इकोनॉमी से जुड़े 36 हाई फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स के साथ एक ‘नाउकास्टिंग मॉडल’ बनाया है। यह मॉडल वित्त वर्ष 2013 की चौथी तिमाही से वित्त वर्ष 2023 की दूसरी तिमाही तक सभी हाई-फ्रिक्वेंसी इंडिकेटर्स के कॉमन, रिप्रेजेंटेटिव या लेटेंट फैक्टर का अनुमान लगाने के लिए डायनेमिक फैक्टर मॉडल का इस्तेमाल करता है। वित्त वर्ष 2025 में जीडीपी 6.3 प्रतिशत रहने की उम्‍मीद एसबीआई के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर डॉ. सौम्य कांति घोष ने कहा, “हमारे ‘नाउकास्टिंग मॉडल’ के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 की चौथी तिमाही के लिए अनुमानित जीडीपी वृद्धि दर 6.4-6.5 प्रतिशत के आसपास आनी चाहिए।” घोष ने कहा कि यह मानते हुए कि एनएसओ से जारी अपकमिंग डेटा में पहली से तीसरी तिमाही के अनुमानों में कोई बड़ा रिविजन नहीं होगा, हमें उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2025 में जीडीपी 6.3 प्रतिशत रहेगी। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने कहा है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून 1 जून की अपनी सामान्य शुरुआत की तारीख से काफी पहले, अगले चार से पांच दिनों में केरल में पहुंचने की संभावना है। अगर मानसून केरल में अनुमान के अनुसार पहुंचता है, तो यह 2009 के बाद से भारत के मुख्य भूमि क्षेत्र पर जल्दी दस्तक देने को लेकर रिकॉर्ड किया जाएगा। एसबीआई की रिपोर्ट में कहा गया है, “भारत बेहतर मानसून बारिश के पूर्वानुमान पर जुलाई से शुरू होने वाले 2025-26 फसल वर्ष में 354.64 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य बना रहा है। चालू 2024-25 फसल वर्ष में, सरकार ने 341.55 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन (अब तक: 332.3 मिलियन टन) का लक्ष्य रखा था।” आईएमएफ के अनुसार, वैश्विक विकास 2025 में 2.8 प्रतिशत और 2026 में 3 प्रतिशत तक गिरने का अनुमान है। रिपोर्ट में बताया गया है, “भारत के लिए, विकास का दृष्टिकोण वित्त वर्ष 2025 में 6.2 प्रतिशत, वित्त वर्ष 2026 के लिए 6.3 प्रतिशत पर अपेक्षाकृत अधिक स्थिर है, जिसे निजी खपत, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में समर्थन प्राप्त है, लेकिन यह दर व्यापार तनाव और वैश्विक अनिश्चितता के उच्च स्तर के कारण पहले के अनुमान से 30 बीपीएस कम है।” मॉर्गन स्टेनली ने वित्त वर्ष 2026 के लिए भारत की वृद्धि दर 6.2 प्रतिशत वैश्विक वित्तीय सेवा क्षेत्र की प्रमुख कंपनी मॉर्गन स्टेनली नेभारत के लिए अपने सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर के अनुमान को वित्त वर्ष 2026 के लिए 6.2 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2027 के लिए 6.5 प्रतिशत पर बढ़ा दिया। कंपनी ने कहा कि बाहरी मोर्चे पर अनिश्चितता के बीच घरेलू मांग के रुझान देश की वृद्धि की गति के मुख्य चालक होंगे। इससे पहले वित्त वर्ष 2026 के लिए वृद्धि दर 6.1 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2027 के लिए 6.3 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था। वैश्विक ब्रोकरेज ने अपने नोट में कहा, “हमें उम्मीद है कि बाहरी कारकों से अनिश्चितता के बीच घरेलू मांग में मजबूती के कारण वृद्धि मजबूत रहेगी।” “राजकोषीय नीति में पूंजीगत व्यय को प्राथमिकता दिए जाने के साथ आसान मौद्रिक नीति के माध्यम से नीतिगत समर्थन जारी रहने की संभावना है। मजबूत बफर के साथ मैक्रो स्थिरता के आरामदायक क्षेत्र में रहने की उम्मीद है।” घरेलू मांग के मामले में, ब्रोकरेज को उम्मीद है कि शहरी मांग में सुधार और ग्रामीण खपत के स्तर में पहले से ही मजबूती के साथ खपत में सुधार अधिक व्यापक आधार पर होगा। “निवेश के मामले में, हम देखते हैं कि सार्वजनिक और घरेलू पूंजीगत व्यय वृद्धि को बढ़ावा दे रहे हैं, जबकि हम उम्मीद करते हैं कि निजी कॉर्पोरेट पूंजीगत व्यय धीरे-धीरे ठीक हो जाएगा,” इसने कहा। मॉर्गन स्टेनली को उम्मीद है कि खाद्य मुद्रास्फीति में कमी और मुख्य मुद्रास्फीति में सीमाबद्ध प्रवृत्ति के कारण हेडलाइन मुद्रास्फीति सौम्य बनी रहेगी।  

India जल्द बनने वाला है दुनिया की तीसरी बड़ी इकॉनमी, जापान की इकनॉमी की ग्रोथ रेट अभी शून्‍य से भी नीचे

नई दिल्‍ली भारत ने हाल में ही जर्मनी को पीछे छोड़कर चौथी बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था का खिताब हासिल कर लिया है और अब उसकी निगाह तीसरी बड़ी अव्‍यवस्‍था बनने पर है. भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था से आगे फिलहाल जापान, चीन और अमेरिका ही बचे हैं. इसमें भी जापान की हालत लगातार खराब होती जा रही है. जापान सरकार ने  एक रिपोर्ट जारी कर बताया कि उसकी सालाना ग्रोथ रेट 2025 की पहली तिमाही में गिरकर 0.7 फीसदी पर आ गई है, जबकि भारत अभी 6 फीसदी से ज्‍यादा की दर से आगे बढ़ रहा है. जापान सरकार की ओर से जारी बयान के अनुसार, जापान का वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (या किसी देश की वस्तुओं व सेवाओं का माप) जनवरी-मार्च में अक्टूबर-दिसंबर 2024 (पिछली तिमाही) की तुलना में अनुमान से भी ज्‍यादा 0.2 फीसदी सिकुड़ गया है. पिछले एक साल में पहली बार इसमें संकुचन दर्ज किया गया. संकुचन का मतलब है कि जापान की ग्रोथ रेट शून्‍य से भी नीचे चली गई है और यह अर्थव्‍यवस्‍था का आकार बढ़ने के बजाय घटने लगा है. कहां से कहां पहुंच गया जापान रिपोर्ट के अनुसार, जापान की अर्थव्यवस्था 2024 की अंतिम तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में 2.4 फीसदी की वार्षिक दर से बढ़ रही थी. निर्यात में 2.3 फीसदी की दर से गिरावट दिख रही, जबकि उपभोक्ता खर्च स्थिर रहा और पूंजी निवेश में 5.8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. इससे पहले जनवरी-मार्च, 2024 की तिमाही में भी जापान की इकनॉमी शून्‍य से नीचे जाकर माइनस 0.4 फीसदी रही थी. इस तरह, सालाना आधार पर देखा जाए तो अभी जापान की अर्थव्‍यवस्‍था माइनस 0.7 फीसदी की दर से घट रही है. मंदी की तरफ जा रहा जापान जापान की मुश्किलें अभी खत्‍म नहीं हुई हैं, बल्कि आगे और चुनौतियां आ रही हैं. दरअसल, अमेरिकी शुल्क से जापान के बड़े निर्यातकों, खासतौर पर मोटर वाहन विनिर्माताओं को नुकसान होने की आशंका है. न केवल जापान से भेजे जाने वाले उत्पादों के लिए, बल्कि मैक्सिको और कनाडा जैसे अन्य देशों से भी. जापान के अधिकारियों ने माना कि प्रतिक्रिया की योजना बनाना भी एक चुनौती है, क्योंकि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपना रुख बदलते रहते हैं. ऐसे में जापान की तरफ से कोई प्रस्‍ताव देना भी बड़ा मुश्किल काम है. अगर टैरिफ का असर दिखा तो 2025 की दूसरी तिमाही में भी जापान की ग्रोथ रेट शून्‍य से नीचे रहने की आशंका है, जिससे यह तकनीकी रूप से मंदी में चला जाएगा. अभी कहां खड़ा है जापान साल 2025 में जापान की जीडीपी 4.39 ट्रिलियन डॉलर रहने का अनुमान है. इस दौरान जापान की पर्चेजिंग पॉवर 6.77 ट्रिलियन डॉलर रहने का अनुमान लगाया गया है. इस लिहाज से देखा जाए तो जापान अभी तीसरी अर्थव्‍यवस्‍था बना हुआ है. साल 2024 में जापान की पर्चेजिंग पॉवर 6.31 ट्रिलियन डॉलर रही थी. अब जबकि जापान की इकनॉमी ग्रोथ शून्‍य से भी नीचे चली गई है तो उसकी अर्थव्‍यवस्‍था का आकार भी कम हो सकता है. कहां खड़ा है भारत अगर भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था की बात करें तो अभी इसका आकार 4.3 ट्रिलियन डॉलर है. तमाम रेटिंग एजेंसियों ने अनुमान लगाया है कि भारत हर डेढ़ साल में अपनी इकनॉमी में 1 ट्रिलियन डॉलर जोड़ सकता है. इस तरह, देखा जाए तो अगले 2 से 3 महीने में ही भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था जापान को पीछे छोड़ देगी. भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था की ग्रोथ रेट अभी 6.5 फीसदी के आसपास चल रही है, जबकि जापान शून्‍य से भी नीचे चला गया है. लिहाजा जल्‍द ही भारत इसे पीछे छोड़ते हुए तीसरी बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था बन जाएगा. भारत की तेज गति भारत को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्‍यवस्‍था तक पहुंचने में 60 साल का समय लगा, जबकि 1 से 2 ट्रिलियन डॉलर का सफर महज 7 साल में पूरा किया. इसके बाद 3 और 4 ट्रिलियन डॉलर की इकनॉमी बनने में भी सिर्फ 4 साल का समय लगा. अब तो ग्रोथ इतनी तेज हो गई है कि भारत हर डेढ़ साल में अपनी इकनॉमी को 1 ट्रिलियन डॉलर बढ़ाने की क्षमता रखता है. आईएमएफ ने क्‍या लगाया अनुमान आईएमएफ ने साल 2025 में दुनिया की टॉप-5 इकनॉमी के साइज का अनुमान जारी किया है. इसमें सबसे ऊपर 30.5 ट्रिलियन डॉलर के साथ अमेरिका है. दूसरे पायदान पर 19.2 ट्रिलियन डॉलर के साथ चीन के रहने का अनुमान है. जर्मनी की इकनॉमी 5 ट्रिलियन डॉलर के साथ तीसरे पायदान पर और भारत की इकनॉमी 4.34 ट्रिलियन डॉलर के साथ चौथे तो जापान की इकनॉमी 4.38 ट्रिलियन डॉलर के साथ पांचवें पायदान पर रहने का अनुमान है.  

Moody’s ने 2025 में भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट के अनुमान में किया फेरबदल, जानें कितनी रफ्तार से आगे बढ़ेगा

नई दिल्ली ग्लोबल क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज ने 2025 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.3 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है और उम्मीद जताई है कि 2026 में देश की अर्थव्यवस्था में तेजी आएगी और यह 6.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करेगी। मूडीज का पूर्वानुमान आईएमएफ के दृष्टिकोण के अनुरूप मूडीज का पूर्वानुमान आईएमएफ के दृष्टिकोण के अनुरूप है, जो भारत को 2025 में 6 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर दर्ज करने वाली दुनिया की एकमात्र प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में देखता है। मूडीज ने अपने ग्लोबल मैक्रो आउटलुक के मई अपडेट में कही ये बात मूडीज ने अपने ग्लोबल मैक्रो आउटलुक के मई अपडेट में कहा, “वैश्विक आर्थिक नीतियों को लेकर अनिश्चितता का असर उपभोक्ता, व्यवसाय और वित्तीय गतिविधियों पर पड़ने की संभावना है।” रेटिंग एजेंसी ने पहले 6.5 प्रतिशत की वृद्धि दर का लगाया था अनुमान रेटिंग एजेंसी ने पहले भारत के लिए 6.5 प्रतिशत की वृद्धि दर का अनुमान लगाया था। मूडीज ने कहा कि अमेरिकी टैरिफ को लेकर कटौती के बावजूद भी नीति अनिश्चितता और अमेरिका-चीन के बीच व्यापार तनाव वैश्विक व्यापार और निवेश को प्रभावित कर सकते हैं, जिसका असर जी-20 देशों पर भी पड़ सकता है। भारत-पाकिस्तान के बढ़ते तनाव से विकास पर असर पड़ने की जताई संभावना व्यापार अनिश्चितताओं के अलावा, बढ़ते तनाव से विकास पर असर पड़ने की संभावना है। रेटिंग एजेंसी ने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव बेसलाइन पूर्वानुमानों के लिए एक और संभावित नकारात्मक जोखिम है। हाल के दिनों में, दक्षिण एशिया में भारत और पाकिस्तान और दक्षिण चीन सागर में चीन और फिलीपींस के बीच तनाव बढ़ गया है। मूडीज ने कहा कि ये देश भी अब रूस और यूक्रेन में अनसुलझे युद्धों की तरह आपसी तनाव में उलझ गए हैं। निवेशकों और व्यवसायों की लागत बढ़ने की संभावना इसमें कहा गया है, “निवेशकों और व्यवसायों की लागत बढ़ने की संभावना है।” मूडीज को उम्मीद है कि भारत की मुद्रास्फीति दर 2025 में 4 प्रतिशत और 2026 में 4.3 प्रतिशत रहेगी, जिससे देश के मैक्रो-इकोनॉमिक फंडामेंटल को मजबूती मिलेगी और आरबीआई के पास विकास को बढ़ावा देने के लिए ब्याज दरों में कटौती करने के लिए अधिक गुंजाइश होगी। भारतीय रिजर्व बैंक विकास को समर्थन देने के लिए दरों को और कम करेगा मूडीज ने कहा, “उभरते बाजारों के केंद्रीय बैंकों के लिए फेड की नीति का मार्ग उतना महत्वपूर्ण नहीं है, जितना पिछले साल इस समय था। दूसरे उभरते देशों में, हम उम्मीद करते हैं कि भारतीय रिजर्व बैंक विकास को समर्थन देने के लिए दरों को और कम करेगा।” आरबीआई ने अमेरिकी टैरिफ बढ़ोतरी के मद्देनजर वैश्विक व्यापार और नीति अनिश्चितताओं के बीच 2025-26 में भारत के लिए 6.5 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि का अनुमान लगाया है। ट्रेड फ्रिक्शन के कारण वैश्विक विकास पर पड़ने वाला असर घरेलू विकास को करेगा बाधित आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने हाल ही में कहा, “सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अनिश्चितता अपने आप में व्यवसायों और परिवारों के निवेश और खर्च के निर्णयों को प्रभावित कर विकास को धीमा कर देती है। दूसरा, ट्रेड फ्रिक्शन के कारण वैश्विक विकास पर पड़ने वाला असर घरेलू विकास को बाधित करेगा। तीसरा, उच्च टैरिफ का शुद्ध निर्यात पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।”आरबीआई गवर्नर ने कहा कि सभी कारकों को ध्यान में रखते हुए, 2025-26 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि अब 6.5 प्रतिशत अनुमानित है।

भारत 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनेगा

नई दिल्ली देश के विकास की दिशा को ध्यान में रखते हुए, जी20 शेरपा और नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत ने बिना किसी संकोच के कहा: 2047 तक विकसित भारत बनने के लिए , भारत को 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था से 30 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की अर्थव्यवस्था में बदलना होगा। यह सिर्फ़ एक छलांग नहीं है – यह एक पीढ़ीगत धुरी है, और उन्होंने तर्क दिया कि फिनटेक क्षेत्र को इसे आगे बढ़ाने वाले इंजनों में से एक होना चाहिए। कांत ने कहा, “भारत के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग नौ गुना वृद्धि होनी चाहिए, इसकी प्रति व्यक्ति आय में लगभग आठ गुना वृद्धि होनी चाहिए, और इसके विनिर्माण में लगभग 16 गुना वृद्धि होनी चाहिए।” उन्होंने व्यापक आर्थिक लक्ष्यों और क्षेत्र-विशिष्ट उत्प्रेरकों के बीच सीधी रेखा खींची। उनके लिए, फिनटेक केवल एक और उच्च-विकास वाला वर्टिकल नहीं है; यह समावेशी, व्यापक-आधारित विकास को प्राप्त करने का आधार है। “यह बहुत महत्वपूर्ण है कि फिनटेक क्षेत्र बढ़ता रहे और विस्तार करता रहे ताकि हम समाज में सभी स्तरों पर ऋण प्रदान करने में सक्षम हों।” आंकड़े उनके आत्मविश्वास को पुष्ट करते हैं। भारत अब वैश्विक स्तर पर तीसरा सबसे बड़ा फिनटेक हब है, न केवल मात्रा के मामले में बल्कि मूल्य के मामले में भी। इस क्षेत्र ने 2023 में 25 बिलियन डॉलर का राजस्व दर्ज किया – जो कि साल-दर-साल (YoY) 56 प्रतिशत की शानदार वृद्धि है। 2030 के लिए अनुमान और भी चौंकाने वाले हैं: 150 फिनटेक यूनिकॉर्न जिनका संयुक्त मूल्यांकन 500 बिलियन डॉलर है और वार्षिक राजस्व 190 बिलियन डॉलर तक पहुँच रहा है। कांत इस विस्फोट का श्रेय तकनीक-प्रेमी युवा जनसांख्यिकी, पूंजी तक बेहतर पहुंच, सरकारी नीतियों को सक्षम बनाने और मोबाइल और इंटरनेट बुनियादी ढांचे में व्यापक प्रगति के शक्तिशाली मिश्रण को देते हैं। लेकिन उन्होंने एक चेतावनी भी जारी की- इस वृद्धि को जिम्मेदारी में बांधा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “नवाचार फिनटेक की जीवनरेखा है, और जब हम नवाचार करते हैं, तो हमें जिम्मेदारी से ऐसा करना चाहिए।” इसका मतलब है कि ऐसे उत्पाद डिजाइन करना जो कमजोर आबादी की सेवा करें, न कि उन्हें किनारे करें। इसका मतलब है साइबर सुरक्षा खतरों के प्रति लगातार सतर्क रहना और यह सुनिश्चित करना कि UPI, डिजिटल वॉलेट, ब्लॉकचेन के माध्यम से मुख्यधारा का अपनाना, केवल नवीनता पर नहीं, बल्कि भरोसे पर आधारित हो। स्व-नियमन केंद्रीय विषय था। राज्य द्वारा हर कदम तय करने की प्रतीक्षा करने के बजाय, कांत भारतीय रिजर्व बैंक के साथ मिलकर काम करने वाले स्व-नियामक संगठनों (एसआरओ) में फिनटेक शासन का भविष्य देखते हैं। “ये संस्थाएँ आरबीआई की निगरानी में काम करती हैं। वे उद्योग मानकों को निर्धारित करने, अनुपालन लागू करने और नियामकों और फिनटेक कंपनियों के बीच एक सेतु के रूप में कार्य करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।” वर्ष 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था का दर्जा हासिल करने की राह की चुनौतियाँ:     गरीबी और असमानता:         वर्ष 1947 में स्वतंत्रता से लेकर वर्ष 1991 तक गरीबी कम करने के उद्देश्य से समाजवादी नीतियों के क्रियान्वयन के बावजूद भारत की गरीबी दर 50% के आसपास बनी रही।         हालाँकि, उदारीकरण के बाद  (1991-2011) गरीबी लगभग 20% तक कम हो गई, जहाँ 350 मिलियन लोग गरीबी से बाहर आ गए।     मध्यम-आय जाल:         विश्व बैंक की परिभाषा के अनुसार, मध्यम-आय जाल (Middle-Income Trap) से तात्पर्य ऐसी स्थिति से है, जिसमें एक मध्यम-आय देश बढ़ती लागत और घटती प्रतिस्पर्द्धा के कारण उच्च-आय अर्थव्यवस्था में परिवर्तित होने में विफल रहता है।         भारत के लिये भी मध्यम-आय जाल में फँसने का खतरा है, जहाँ देश मध्यम-आय से उच्च-आय की स्थिति में पहुँचने में विफल हो जाते हैं।         वर्ष 1960 में 101 मध्यम-आय अर्थव्यवस्थाओं में से केवल 23 ही वर्ष 2018 तक उच्च-आय अर्थव्यवस्था बन सके।         ऐसी आशंकाएँ व्यक्त की जाती हैं कि विकसित अर्थव्यवस्था की राह पर आगे बढ़ते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था मध्यम-आय जाल में फँस सकती है। माना जाता है कि 5,000-6,000 अमेरिकी डॉलर प्रति व्यक्ति आय तक पहुँचने के बाद यह अधिक तेज़ी से आगे नहीं बढ़ पाएगी।     वृद्ध होती आबादी:         भारत की आबादी, जो वर्तमान में लगभग 1.4 बिलियन है, वर्ष 2048 तक 1.64 बिलियन के सर्वोच्च स्तर पर पहुँचने के बाद बाद वर्ष 2100 तक घटकर 1.45 बिलियन रह जाएगी।         इसके परिणामस्वरूप, भारत को वृद्ध होती आबादी से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा, जिसमें स्वास्थ्य देखभाल पर बढ़ते खर्च, बढ़ती पेंशन देनदारियाँ और संभावित श्रम की कमी शामिल हैं।     गतिहीन कृषि:         कृषि क्षेत्र भारत की लगभग 46% आबादी को रोज़गार प्रदान करता है और भारत के सकल घरेलू उत्पाद में इसका योगदान लगभग 16.5% है।         हालाँकि, अप्रभावी भूमि सुधारों, अवैज्ञानिक अभ्यासों, संस्थागत ऋण प्रवाह की कमी और जलवायु अनिश्चितताओं के कारण यह गतिहीन एवं निम्न उत्पादक क्षेत्र बना हुआ है।     विनिर्माण क्षेत्र का पिछड़ापन:         आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24 के अनुसार, विनिर्माण क्षेत्र भारत के केवल 11.4% कार्यबल को रोज़गार प्रदान करता है।         इसके अलावा, विनिर्माण क्षेत्र को उच्च इनपुट लागत और अस्थिर मांग के कारण चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।     अकुशल लॉजिस्टिक्स:         आर्थिक सर्वेक्षण 2022-23 से पता चलता है कि भारत में लॉजिस्टिक्स लागत सकल घरेलू उत्पाद के 14-18% के बीच है, जो वैश्विक बेंचमार्क 8% से अधिक है। इसके साथ ही, लॉजिस्टिक प्रदर्शन सूचकांक (LPI) 2023 में भारत 38वें स्थान पर है।     रोज़गारहीनता और प्रच्छन्न बेरोज़गारी:         आईटी सेवाओं में उछाल से प्रेरित भारत के उच्च विकास वर्षों (2000-10) के बावजूद 46% श्रम शक्ति अभी भी कृषि में संलग्न है, जो सकल घरेलू उत्पाद में केवल 18% का योगदान देती है। इसकी उत्पादकता कम है और यह अल्प-रोज़गार (underemployment) की समस्या से भी ग्रस्त है।         इसके अलावा, CMIE के अनुसार भारत में बेरोज़गारी दर मई 2024 में 7% से तेज़ी से बढ़कर जून 2024 में 9.2% हो गई।     श्रम बल गतिशीलता:         महिला श्रम बल भागीदारी मात्र 37% है, हालाँकि वर्ष 2019 में 26% की तुलना में इसमें सुधार हुआ है। फिर भी, यह स्तर अन्य तेज़ी से विकास करते देशों की तुलना में कम है।     वैश्विक आर्थिक मंदी:         वैश्विक आर्थिक मंदी, वस्तुओं की अस्थिर कीमतें, भू-राजनीतिक तनाव और कठिन होती … Read more

रॉकेट की रफ्तार से भागेगी भारत की इकोनॉमी, बस करना होगा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा में निवेश : रिपोर्ट

नई दिल्ली भारतीय अर्थव्यवस्था अगले वित्त वर्ष (2025-26) में 6.5 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी. ईवाई इकनॉमी वॉच ने यह अनुमान लगाया है. ईवाई का मानना है कि एक अच्छी तरह से संतुलित राजकोषीय रणनीति जो राजकोषीय विवेक को बनाए रखते हुए मानव पूंजी विकास का समर्थन करती है, दीर्घकालिक वृद्धि की संभावनाओं को बढ़ाएगी. ईवाई इकनॉमी वॉच के मार्च संस्करण में वित्त वर्ष 2024-25 में भारत की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है. अगले वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है. इसमें कहा गया है कि इसके लिए राजकोषीय नीति को देश की विकसित भारत की यात्रा के मिलाने की जरूरत है. सरकारी खर्च बढ़ाना होगा राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के पिछले महीने जारी संशोधित राष्ट्रीय लेखा खाता आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2022-23 से 2024-25 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर अब क्रमश: 7.6 प्रतिशत, 9.2 प्रतिशत और 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है. चालू वित्त वर्ष 2024-25 के लिए तिमाही वृद्धि दर के संबंध में, तीसरी तिमाही की वृद्धि 6.2 प्रतिशत अनुमानित है. इसका अर्थ है कि एनएसओ द्वारा अनुमानित 6.5 प्रतिशत की वार्षिक जीडीपी वृद्धि प्राप्त करने के लिए चौथी तिमाही में 7.6 प्रतिशत की वृद्धि की जरूरत होगी. रिपोर्ट कहती है, अंतिम तिमाही में 7.6 प्रतिशत की वृद्धि के लिए निजी अंतिम उपभोग व्यय में 9.9 प्रतिशत की वृद्धि की आवश्यकता होगी. हाल के वर्षों में इतनी अधिक वृद्धि देखने को नहीं मिली है. इसका एक विकल्प निवेश व्यय में वृद्धि करना है, जिसमें सरकार की ओर पूंजीगत व्यय वृद्धि एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. इसमें कहा गया है कि संशोधित अनुमानों के अनुसार, सरकार का राजकोषीय घाटा अनुदान की किसी भी अनुपूरक मांग से प्रभावित हो सकता है. इस चीज पर बढ़ाना होगा बजट रिपोर्ट में कहा गया, बढ़ती आबादी और विकसित आर्थिक ढांचे के साथ, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा में अतिरिक्त निवेश दीर्घकालिक वृद्धि को बनाए रखने और मानव पूंजी परिणामों में सुधार करने के लिए आवश्यक हो सकता है. ईवाई इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, अगले दो दशक में, भारत को अपने सामान्य सरकारी शिक्षा और स्वास्थ्य व्यय को धीरे-धीरे बढ़ाने की आवश्यकता होगी, जिससे यह उच्च आय वाले देशों के करीब पहुंच सकता है. नौकरियों पर देना होगा जोर विश्लेषण से पता चलता है कि भारत की युवा आबादी और बढ़ती कार्यबल आवश्यकताओं को देखते हुए, सरकार द्वारा शिक्षा पर खर्च को वित्त वर्ष 2047-48 तक जीडीपी के मौजूदा 4.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.5 प्रतिशत करने की आवश्यकता हो सकती है. बेहतर स्वास्थ्य सेवा पहुंच और परिणाम सुनिश्चित करने के लिए सरकार के स्वास्थ्य व्यय को इस दौरान 2021 के 1.1 प्रतिशत से बढ़ाकर 2047-48 तक 3.8 प्रतिशत करने की जरूरत होगी.  

IMF के अनुसार पिछले दशक में भारत की GDP दोगुनी हुई, 2025 में अर्थव्यवस्था $4.3 ट्रिलियन होगी, जापान और जर्मनी से आगे निकल जाएगी.

नई दिल्ली भारत की अर्थव्यवस्था बीते 10 वर्षों में तेजी से बढ़ी है और इसकी जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में दोगुनी हो गई है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के ताजा आंकड़ों के अनुसार भारत की जीडीपी 2015 में 2.1 ट्रिलियन डॉलर थी, जो 2025 में बढ़कर 4.3 ट्रिलियन डॉलर होने का अनुमान है। नीतिगत सुधार और स्थिर आर्थिक विकास से सम्भव हुई तेज आर्थिक वृद्धि तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के चलते भारत 2025 में जापान और 2027 में जर्मनी को पीछे छोड़ देगा। इससे भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। IMF ने कहा कि भारत की तेज आर्थिक वृद्धि का मुख्य कारण मजबूत नीतिगत सुधार और स्थिर आर्थिक विकास है। बीजेपी नेता अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि साहसिक आर्थिक नीतियों, संरचनात्मक सुधारों और व्यापार करने में आसानी पर फोकस के कारण भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बन गया है। उन्होंने यह भी कहा कि आजादी के बाद किसी भी सरकार को यह सफलता हासिल नहीं हुई थी। 2025 तक जर्मनी, 2027 तक जापान को छोड़ देगी पीछे बीजेपी नेता अमित मालवीय द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर की गई पोस्ट में कहा गया कि विकास की यह गति भारत को एक वैश्विक आर्थिक महाशक्ति के रूप में स्थापित करती है, जो 2025 तक जापान और 2027 तक जर्मनी को पीछे छोड़ देगी. मालवीय ने आगे कहा कि यह असाधारण उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और उनकी सरकार के अथक प्रयासों का प्रमाण है. सक्रिय आर्थिक नीतियों, साहसिक संरचनात्मक सुधारों और व्यापार करने में आसानी पर निरंतर फोकस के माध्यम से मोदी सरकार ने भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना दिया है. शानदार वृद्धि के पीछे कई अन्य कारक मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है। मजबूत स्टार्टअप तंत्र और आईटी क्षेत्र की निरंतर प्रगति ने भी आर्थिक विकास को गति दी है। 10 साल में कोई और देश भी आसपास नहीं देश 2015 में जीडीपी 2025 में जीडीपी वृद्धि दर जर्मनी 3.4 4.9 44% जापान 4.4 4.4 0% यूके 2.9 3.7 28% फ्रांस 2.4 3.3 38% इटली 1.8 2.5 39% कनाडा 1.6 2.3 44% ब्राजील 1.8 2.3 28% रूस 1.4 2.2 57% द. कोरिया 1.5 1.9 27% ऑस्ट्रेलिया 1.2 1.9 58% स्पेन 1.2 1.8 50%   महत्वपूर्ण सुधारों को अपनाने में करता है मदद   अमित मालवीय ने साथ ही कहा कि यह एक ऐसी उपलब्धि जो आजादी के बाद से किसी भी पिछली सरकार को हासिल नहीं हुई थी. इस महीने की शुरुआत में, भारत की विवेकपूर्ण नीतियों की सराहना करते हुए आईएमएफ के कार्यकारी बोर्ड ने कहा है कि देश का मजबूत आर्थिक प्रदर्शन 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था बनने के लिए महत्वपूर्ण सुधारों को अपनाने में मदद कर सकता है.आईएमएफ के कार्यकारी बोर्ड ने कहा कि संरचनात्मक सुधार देश में उच्च-गुणवत्ता की नौकरियां पैदा करने और निवेश के लिए काफी जरूरी हैं. इस महीने की शुरुआत में IMF के कार्यकारी बोर्ड ने भी भारत की आर्थिक नीतियों की तारीफ की। बोर्ड ने कहा कि भारत का मजबूत प्रदर्शन उसे 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था बनने में मदद कर सकता है। IMF ने यह भी सुझाव दिया कि भारत को लेबर मार्केट में सुधार करने और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए, जिससे उच्च गुणवत्ता वाली नौकरियों का सृजन हो सके।  

मजबूत आर्थिक प्रदर्शन 2047 तक उन्नत अर्थव्यवस्था बनने की भारत की महत्वाकांक्षा को साकार करने के लिए महत्वपूर्ण: IMF

संयुक्त राष्ट्र भारत की विवेकपूर्ण नीतियों की सराहना करते हुए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के कार्यकारी बोर्ड ने कहा है कि देश का मजबूत आर्थिक प्रदर्शन 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था बनने के लिए महत्वपूर्ण सुधारों को अपनाने में मदद कर सकता है. आईएमएफ द्वारा जारी की गई रिपोर्ट में कहा गया, “भारत का मजबूत आर्थिक प्रदर्शन 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था का दर्जा हासिल करने के लिए जरूरी अहम और चुनौतीपूर्ण संरचनात्मक सुधारों को लागू करने में मदद कर सकता है.” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए आजादी के सौ साल पूरे होने की समय सीमा तय की है. रिपोर्ट में आईएमएफ के कार्यकारी निदेशकों ने भारतीय अधिकारियों की विवेकपूर्ण व्यापक आर्थिक नीतियों और सुधारों की सराहना की, जिन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और एक बार फिर सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बनाने में योगदान दिया है. रिपोर्ट में बताया गया कि भारत के वित्तीय क्षेत्र का स्वास्थ्य, मजबूत कॉरपोरेट बैलेंसशीट और अच्छा डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर दर्शाता है कि देश की वृद्धि दर मध्यम अवधि में तेज रहेगी. साथ ही जनकल्याण की योजनाएं भी जारी रहेंगी. रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया कि भू-आर्थिक विखंडन और धीमी घरेलू मांग से उत्पन्न प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करते हुए, व्यापक आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए उचित नीतियां जारी रखना आवश्यक है. इसके अलावा, रिपोर्ट में भारत द्वारा हाल ही में घटाए गए टैरिफ का भी स्वागत किया गया है. इससे देश की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी. पिछले महीने पेश किए गए बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऑटोमोबाइल से लेकर शराब तक कई प्रकार के आयात पर टैरिफ कम कर दिया था. “महिला भागीदारी को लेबर फोर्स में बढ़ाना चाहिए” आईएमएफ के कार्यकारी बोर्ड ने कहा कि संरचनात्मक सुधार देश में उच्च-गुणवत्ता की नौकरियां पैदा करने और निवेश के लिए काफी जरूरी हैं. रिपोर्ट में आगे कहा गया कि भारत को लेबर मार्केट सुधारों को लागू करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और महिला भागीदारी को लेबर फोर्स में बढ़ाना चाहिए.

भारत की इकोनॉमी में दिखी मजबूती, उम्मीद से बेहतर रही जीडीपी ग्रोथ

नई दिल्ली  वित्त वर्ष 2024-25 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2024) में भारत की आर्थिक वृद्धि 6.2% रही। यह कमी मुख्य रूप से निर्माण और खनन क्षेत्रों के कमजोर प्रदर्शन के कारण आई है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल इसी अवधि में 9.5% की वृद्धि दर्ज की गई थी। वहीं, मौजूदा चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर 2024) में 5.6% की ग्रोथ हुई थी। जीडीपी ग्रोथ का डेटा बताता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने सालाना आधार पर कमजोर प्रदर्शन किया है। हालांकि, तिमाही आधार पर इसमें रिवाइल के संकेत नजर आ रहे हैं। NSO ने 2024-25 के लिए विकास दर 6.5% रहने का अनुमान लगाया है। जनवरी 2025 में जारी पहली अग्रिम अनुमान में इसे 6.4% आंका गया था। साथ ही, 2023-24 के लिए GDP वृद्धि दर को संशोधित कर 9.2% कर दिया गया है, जो पहले 8.2% आंकी गई थी। मौजूदा वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही की जीडीपी ग्रोथ आंकड़ा अर्थशास्त्रियों के अनुमान के अनुसार ही है। लेकिन जुलाई-सितंबर तिमाही के संशोधित 5.6 फीसदी की वृद्धि दर से अधिक है। इकोनॉमिक एक्सपर्ट का अनुमान था कि सरकार के बढ़ते खर्च और शहरी खपत में सुधार के कारण मौजूदा वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में GDP ग्रोथ 6.2 से 6.3 फीसदी के बीच रह सकती है। पिछले तिमाही में आई थी जीडीपी में गिरावट हालांकि सरकार ने अनुमान लगाया कि तीसरी तिमाही में 6.3 फीसदी जीडीपी ग्रोथ रेट रह सकती है, इसलिए अनुमान से कम थोड़ा रहा है. लेकिन तिमाही दर तिमाही आधार पर देश की विकास दर में बढ़ोतरी देखने को मिली है, क्योंकि सितंबर तिमाही में देश की जीडीपी ग्रोथ 5.4 फीसदी पर थी. जुलाई से सितंबर तिमाही के दौरान इकोनॉमी में स्लोडाउन देखने को मिला था. जो सात तिमाहियों में सबसे धीमी थी. लेकिन अब सुधार के संकेत मिल रहे हैं. सालाना आधार पर कम हुई जीडीपी ग्रोथ दिसंबर तिमाही के जीडीपी आंकड़ों को सालाना आधार पर देखें तो Q3 GDP ग्रोथ 8.6 फीसदी से घटकर 6.2 फीसदी पर आ गई है. नेशनल स्टैटिक्स ऑफिस (NSO) के आकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025 में भारत की ग्रोथ रेट 6.5 फीसदी रहने का अनुमान है.

निवेशकों को आकर्षित करने के लिए मध्य प्रदेश सरकार इंवेस्टमेंट पॉलिसी में बदलाव कर रही, 15 नई नीतियां आएंगी

भोपाल  मध्य प्रदेश में आगामी 24 और 25 फरवरी को राजधानी में ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट का आयोजन किया जा रहा है. इसमें निवेशकों को आकर्षित करने के लिए मध्य प्रदेश सरकार इंवेस्टमेंट पॉलिसी में बदलाव कर रही है. बीते 11 फरवरी को आयोजित कैबिनेट बैठक में मध्य प्रदेश सरकार ने 5 नीतियों में बदलाव किया है. अब 18 फरवरी को होने वाली कैबिनेट बैठक में 15 और नीतियां आएंगी. सरकार को भरोसा है, कि इन नीतियों में बदलाव से मध्यप्रदेश में निवेश को गति मिलेगी और इसका फायदा प्रदेश की जीडीपी को भी मिलेगा. 2030 में 6 लाख करोड़ तक पहुंच सकती है जीडीपी अधिकारियों ने बताया कि निवेश की नीतियों में बदलाव करने से मध्य प्रदेश में उद्योग और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा. सरकार और जनता को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इसका फायदा मिलेगा. मध्य प्रदेश की वर्तमान जीडीपी 2.9 लाख करोड़ रूपये है. अब सरकार जीआईएस और निवेश नीति में बदलाव कर अगले 5 सालों में इसे 100 प्रतिशत से अधिक तक बढ़ाया जा सकता है. साल 2030 तक मध्य प्रदेश की जीडीपी लगभग 6 लाख करोड़ रूपये को पार कर सकती है. 5 साल में 20 लाख नए रोजगार जीआईएस से पहले निवेशकों को एक समग्र औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र प्रदान करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है. विश्व स्तरीय औद्योगिक अधोसंरचना का विकास करने, एनवायरनमेंटली सस्टेनेबल इंडस्ट्रियल ग्रोथ और संतुलित क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देने समेत अन्य मुद्दों पर विचार चल रहा है. अधिकारियों का दावा है कि आने वाले 5 साल में 20 लाख नए रोजगार का सृजन होगा. इसके अंतर्गत वृहद और मेगा स्तर की औद्योगिक इकाई को निवेश प्रोत्साहन सहायता, सामान्य सहायता और अतिरिक्त सहायता के प्रावधान शामिल किए गए हैं. निवेशकों को मिलेंगी ये सुविधाएं टैक्सटाइल नीति के अंतर्गत संयंत्र और मशीनरी के लिए गए टर्मलोन पर 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान सुविधा 5 वर्षों के लिए अधिकतम, 50 करोड़ रूपये प्रदाय की जाएगी. अपेरल प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना पर 25 प्रतिशत सहायता अधिकतम 50 लाख रूपये वित्तीय सहायता प्रदाय की जाएगी. साथ ही 500 करोड़ रूपये से अधिक का निवेश करने वाली मेगा श्रेणी की इकाईयां सीसीआईपी अंतर्गत कस्टमाइज्ड पैकेज के लिए पात्र होंगी. इसी प्रकार नवकरणीय ऊर्जा उपकरण विनिर्माण नीति में विकास शुल्क में 50 प्रतिशत की रियायत दी जाएगी. गुणवत्ता प्रमाणन लागत का 50 प्रतिशत या 1 लाख रूपये जो भी कम हो, की प्रतिपूर्ति की जाएगी. 250 करोड़ से अधिक का निवेश करने वाली मेगा श्रेणी की इकाइयां सीसीआईपी अंतर्गत कस्टामाइज्ड पैकज के लिए पात्र होंगे. रोजगार सृजन के लिए भी सरकार देगी प्रोत्साहन परिधान, फुटवियर, खिलौने और सहायक उपकरण नीति में रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार प्रति कर्मचारी 5 हजार रूपये प्रति माह 5 वर्षों तक नियोक्ता को दिया जाएगा. प्रशिक्षण और कौशल विकास के लिए 13 हजार रूपये प्रति नए कर्मचारी के लिए 5 वर्षों तक प्रदान किया जाएगा. इसी प्रकार टर्मलोन पर 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान, अधिकतम 50 करोड़ रूपये दिया जाएगा. विकास शुल्क में 25 प्रतिशत की रियायत देने के साथ स्टांप ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क सहायता में 100 प्रतिशत की छूट दी जाएगी. विद्युत टैरिफ रियायत के रूप में 1 रूपये प्रति यूनिट, अधिकतम 5 वर्षों के लिए प्रदान की जाएगी.

Economy में मजबूती, 2024-25 में GDP वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान, आरबीआई रिपोर्ट

नई दिल्ली देश का केंद्रीय बैंक यानी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सोमवार को जारी अपनी वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (एफएसआर) में कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था लचीलापन और स्थिरता प्रदर्शित कर रही है।  साथ ही कहा है कि भारत की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) के 2024-25 में 6.6 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है। पीटीआई की खबर के मुताबिक, इसमें कहा गया है कि देश की जीडीपी को ग्रामीण खपत में सुधार, सरकारी खपत और निवेश में तेजी और मजबूत सेवा निर्यात से मदद मिलेगी। शिड्यूल्ड कॉमर्शियल बैंकों की स्थिति हुई है मजबूत खबर के मुताबिक, आरबीआई ने वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (एफएसआर) का दिसंबर 2024 का अंक जारी किया है, जो भारतीय वित्तीय प्रणाली के लचीलेपन और वित्तीय स्थिरता के जोखिमों पर वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद (एफएसडीसी) की उप-समिति के सामूहिक मूल्यांकन को दर्शाता है। इसमें कहा गया है कि शिड्यूल्ड कॉमर्शियल बैंकों (एससीबी) की सुदृढ़ता मजबूत लाभप्रदता, घटती गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) और पर्याप्त पूंजी और तरलता बफर द्वारा मजबूत हुई है। जीएनपीए रेशियो कई वर्षों के निचले स्तर पर रिपोर्ट में कहा गया है कि शिड्यूल्ड कॉमर्शियल बैंकों परिसंपत्तियों पर रिटर्न (आरओए) और इक्विटी पर रिटर्न (आरओई) दशक के उच्चतम स्तर पर हैं, जबकि सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (जीएनपीए) अनुपात कई वर्षों के निचले स्तर पर आ गया है। मैक्रो स्ट्रेस टेस्ट से पता चलता है कि ज्यादातर एससीबी के पास प्रतिकूल तनाव परिदृश्यों के तहत भी विनियामक न्यूनतम सीमा के सापेक्ष पर्याप्त पूंजी बफर है। तनाव परीक्षण म्यूचुअल फंड और क्लियरिंग कॉरपोरेशन के लचीलेपन को भी मान्य करते हैं। वास्तविक जीडीपी वृद्धि में गिरावट अर्थव्यवस्था पर, आरबीआई ने वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट ने कहा कि 2024-25 की पहली छमाही के दौरान, वास्तविक जीडीपी वृद्धि (वर्ष-दर-वर्ष) 2023-24 की पहली और दूसरी छमाही के दौरान दर्ज की गई क्रमशः 8. 2 प्रतिशत और 8. 1 प्रतिशत की वृद्धि से 6 प्रतिशत तक कम हो गई। आरबीआई ने कहा कि इस हालिया मंदी के बावजूद, संरचनात्मक विकास चालक बरकरार हैं। घरेलू चालकों, मुख्य रूप से सार्वजनिक खपत और निवेश, मजबूत सेवा निर्यात और आसान वित्तीय स्थितियों में तेजी से समर्थित वास्तविक जीडीपी वृद्धि 2024-25 की तीसरी और चौथी तिमाही में ठीक होने की उम्मीद है।” रिपोर्ट में महंगाई को लेकर कहा गया है कि आगे चलकर, बंपर खरीफ फसल और रबी फसल की संभावनाओं के अवस्फीतिकारी प्रभाव से खाद्यान्न की कीमतों में नरमी आने की उम्मीद है। भू-राजनीतिक संघर्ष और भू-आर्थिक विखंडन भी ग्लोबल सप्लाई चेन और कमोडिटी की कीमतों पर उल्टा दबाव डाल सकते हैं। आरबीआई ने कहा, ‘‘इस हालिया सुस्ती के बावजूद संरचनात्मक वृद्धि चालक बरकरार हैं। घरेलू चालक, मुख्य रूप से सार्वजनिक खपत और निवेश तथा मजबूत सेवा निर्यात के कारण 2024-25 की तीसरी और चौथी तिमाही में जीडीपी की वृद्धि दर में सुधार होने की उम्मीद है।’’ रिपोर्ट में मुद्रास्फीति के बारे में कहा गया कि बंपर खरीफ फसल और रबी फसल के चलते आगे चलकर खाद्यान्न कीमतों में नरमी आने की उम्मीद है। हालांकि, चरम मौसम की घटनाओं के बढ़ते रुझानों के कारण जोखिम बने हुए हैं। भू-राजनीतिक संघर्ष वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और जिंस कीमतों पर दबाव डाल सकते हैं।  

वैश्विक अस्थिरता के बीच भारत की आर्थिक वृद्धि दर वित्त वर्ष 2025-26 में 7 प्रतिशत रहने का अनुमान

नई दिल्ली वैश्विक अस्थिरता के बीच भारत की आर्थिक वृद्धि दर वित्त वर्ष 2025-26 में 7 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह जानकारी जारी हुई एक्सिस बैंक की रिसर्च रिपोर्ट में दी गई। रिपोर्ट में बताया गया कि चक्र में बदलाव से भारत की विकास दर एक बार फिर से बढ़ जाएगी। रिपोर्ट के अनुसार, हमारे नजरिए से भारतीय अर्थव्यवस्था में वित्त वर्ष 2024-25 की पहली छमाही में ग्रोथ में आई कमी चक्रीय है। इसकी वजह मौद्रिक नीति में सख्ती और व्यापक स्थिरता पर ध्यान होने से क्रेडिट ग्रोथ को नुकसान होना है। हालांकि, राजकोषीय खर्च बढ़ने और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा सीआरआर में कटौती से वृद्धि दर को सहारा मिलेगा। रिपोर्ट में बताया गया कि भारत में राजनीतिक स्थिरता से भी वृद्धि दर को सहारा मिलेगा और वित्त वर्ष 26 में भारत की वृद्धि दर 7 प्रतिशत रह सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। मौजूद समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर स्थिर रहने का अनुमान है। हालांकि, 20 जनवरी के बाद डोनाल्ड ट्रंप द्वारा राष्ट्रपति पद का कार्यभार संभालने के बाद नीतिगत बदलाव होने की संभावना है। साथ ही बताया कि वैश्विक व्यापार और वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता बने रहने की संभावना है। रिपोर्ट के अनुसार, कैलेंडर वर्ष 25 में वैश्विक वृद्धि दर वर्तमान में कैलेंडर वर्ष 24 के समान ही 3.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो पूर्व-कोविड स्तरों से 30-40 आधार अंक कम है। इससे पहले एक अन्य रिपोर्ट में एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने कहा था कि वित्त वर्ष 25 में भारतीय अर्थव्यवस्था 6.8 प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है। वहीं, वित्त वर्ष 26 में यह दर 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है। वैश्विक क्रेडिट रेटिंग्स एजेंसी की रिपोर्ट में कहा गया कि वित्त वर्ष 27 में जीडीपी वृद्धि दर बढ़कर 7 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इसके अलावा कहा कि चालू वित्त वर्ष के साथ ही आने वाले वर्षों में भी भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था बना रहेगा।

GDP growth को लगा बड़ा झटका! RBI गर्वनर शक्तिकांत दास ने GDP अनुमान को घटाकर किया 6.6 प्रतिशत

मुंबई  चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में आर्थिक गतिविधियों के 5.4 प्रतिशत कर दर से बढ़ने के मद्देनजर आर्थिक विकास में आयी सुस्ती को ध्यान में रखकर भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को चालू वित्त वर्ष के विकास अनुमान को पहले के 7.2 प्रतिशत से 0.6 प्रतिशत कम कर 6.6 प्रतिशत कर दिया और आर्थिक गतिविधियों को गति देने के उद्देश्य से नकद आरक्षित अनुपात(सीआरआर) में 0.5 प्रतिशत की कटौती कर दी जिससे बैंकिंग तंत्र में 1.16 लाख करोड़ रुपये आ गये। रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन दिवसीय पांचवी द्विमासिक बैठक के समापन पर शुक्रवार को जारी अपने बयान में कहा “ एमपीसी ने नोट किया कि अक्टूबर नीति के बाद से भारत में निकट अवधि की मुद्रास्फीति और विकास परिणाम कुछ हद तक प्रतिकूल हो गए हैं। हालांकि, आगे चलकर, रिजर्व बैंक के सर्वेक्षणों में परिलक्षित व्यापार और उपभोक्ता भावनाओं में वृद्धि के साथ-साथ आर्थिक गतिविधि में सुधार होने की संभावना है। मुद्रास्फीति में हाल ही में हुई वृद्धि मुद्रास्फीति के दृष्टिकोण और अपेक्षाओं पर कई और अतिव्यापी झटकों के निरंतर जोखिमों को उजागर करती है। भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और वित्तीय बाजार में अस्थिरता ने मुद्रास्फीति के लिए और अधिक जोखिम बढ़ा दिया है। उच्च मुद्रास्फीति ग्रामीण और शहरी दोनों उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति को कम करती है और निजी खपत पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। एमपीसी ने जोर दिया कि उच्च विकास के लिए मजबूत नींव केवल टिकाऊ मूल्य स्थिरता के साथ ही सुरक्षित की जा सकती है। एमपीसी अर्थव्यवस्था के समग्र हित में मुद्रास्फीति और विकास के बीच संतुलन बहाल करने के लिए प्रतिबद्ध है। तदनुसार, एमपीसी ने इस बैठक में नीति रेपो दर को 6.50 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया। एमपीसी ने मौद्रिक नीति के तटस्थ रुख को जारी रखने का भी निर्णय लिया क्योंकि यह अवस्फीति और विकास पर प्रगति और दृष्टिकोण की निगरानी करने और उचित रूप से कार्य करने के लिए लचीलापन प्रदान करता है। एमपीसी स्पष्ट रूप से लक्ष्य के साथ मुद्रास्फीति के टिकाऊ संरेखण पर केंद्रित है, जबकि विकास का समर्थन करता है।” उन्होंने कहा कि सभी कारकों को ध्यान में रखते हुए 2024-25 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि अनुमान को पहले के 7.2 प्रतिशत से कम कर 6.6 प्रतिशत किया गया है। इसके साथ ही चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही 6.8 प्रतिशत और चौथी तिमाही 7.2 प्रतिशत रहने की संभावना जतायी गयी है।। अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यह 6.9 प्रतिशत और दूसरी तिमाही में 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। उन्होंने कहा कि सीआरआर में आधी फीसदी की कटौती गयी है और अब यह 4 प्रतिशत पर आ गया है जिससे बैंकिंग तंत्र में 1.16 लाख करोड़ रुपये आ गये हैं। दास ने कहा “ जैसा कि हम 2025 की दहलीज पर खड़े हैं, मुझे 2024 की घटनापूर्ण यात्रा पर विचार करने दें। पिछले कुछ वर्षों में चलन के अनुरूप, केंद्रीय बैंकों को एक बार फिर निरंतर, विशाल और जटिल झटकों के खिलाफ अपनी अर्थव्यवस्थाओं को स्थिर करने के लिए अंतिम परीक्षण के दौर से गुजरना पड़ा। केंद्रीय बैंक लगातार भू-राजनीतिक संघर्षों, भू-आर्थिक विखंडन, वित्तीय बाजार में अस्थिरता और निरंतर अनिश्चितताओं द्वारा निर्मित नए वैश्विक आर्थिक और वित्तीय परिदृश्य के अनुकूल हो रहे हैं, जो सभी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लचीलेपन का परीक्षण कर रहे हैं। उन्नत और उभरती बाजार अर्थव्यवस्थाओं (ईएमई) दोनों के लिए मुद्रास्फीति की अंतिम मील लंबी और कठिन होती जा रही है। व्यापक आर्थिक और वित्तीय स्थिरता बनाए रखना और बफर बनाना ईएमई के लिए दिशा-निर्देश बने हुए हैं। भारत में, विकास और मुद्रास्फीति के प्रक्षेपवक्र में हाल के विचलन के बावजूद, अर्थव्यवस्था प्रगति की ओर एक निरंतर और संतुलित पथ पर अपनी यात्रा जारी रखे हुए है। वैश्विक अर्थव्यवस्था के नए स्वरूप के बीच, भारत उभरते रुझानों से लाभ उठाने के लिए अच्छी स्थिति में है क्योंकि यह एक परिवर्तनकारी यात्रा पर आगे बढ़ रहा है।” रिजर्व बैंक के गवर्नर ने कहा कि एमपीसी ने विकास की गति में हाल की मंदी पर ध्यान दिया, जो चालू वर्ष के लिए विकास पूर्वानुमान में कमी के रूप में सामने आती है। इस वर्ष की दूसरी छमाही और अगले वर्ष की ओर बढ़ते हुए, एमपीसी ने विकास के दृष्टिकोण को लचीला माना, लेकिन इस पर कड़ी निगरानी की आवश्यकता है। दूसरी ओर, मुद्रास्फीति अक्टूबर में 6.0 प्रतिशत के ऊपरी सहनीय बैंड से ऊपर बढ़ गई, जो खाद्य मुद्रास्फीति में तेज उछाल से प्रेरित थी। खाद्य मुद्रास्फीति का दबाव इस वित्तीय वर्ष की तीसरी तिमाही में बना रहने की संभावना है और केवल 2024-25 की चौथी तिमाही से कम होना शुरू होगा, जिसे सब्जियों की कीमतों में मौसमी सुधार, खरीफ की फसल की आवक, संभावित रूप से अच्छे रबी उत्पादन और पर्याप्त अनाज बफर स्टॉक का समर्थन प्राप्त है। उन्होंने कहा कि उच्च मुद्रास्फीति उपभोक्ताओं के हाथों में उपलब्ध व्यय योग्य आय को कम करती है और निजी खपत को प्रभावित करती है, जो वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है। प्रतिकूल मौसम की घटनाओं की बढ़ती घटनाएं, भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं और वित्तीय बाजार में अस्थिरता मुद्रास्फीति के लिए जोखिम पैदा करती हैं। एमपीसी का मानना ​​है कि केवल टिकाऊ मूल्य स्थिरता के साथ ही उच्च विकास के लिए मजबूत नींव सुरक्षित की जा सकती है। एमपीसी अर्थव्यवस्था के समग्र हित में मुद्रास्फीति वृद्धि संतुलन को बहाल करने के लिए प्रतिबद्ध है। तदनुसार, एमपीसी ने इस बैठक में नीति रेपो दर को 6.50 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखने और मौद्रिक नीति के तटस्थ रुख को जारी रखने का फैसला किया क्योंकि यह मुद्रास्फीति और विकास पर दृष्टिकोण की निगरानी और आकलन करने और उचित रूप से कार्य करने के लिए लचीलापन प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था ने कई प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद 2024 में असामान्य लचीलापन दिखाया है। मुद्रास्फीति धीरे-धीरे अपने बहु-दशकीय उच्च स्तर से लक्ष्य की ओर बढ़ रही है, जिससे कई केंद्रीय बैंक नीतिगत बदलाव करने लगे हैं। वैश्विक व्यापार लचीला बना हुआ है और इसकी मात्रा भू-राजनीतिक ब्लॉकों तक सीमित है। पिछली एमपीसी बैठक के बाद से, बढ़ते अमेरिकी डॉलर और सख्त बॉन्ड यील्ड के बीच वित्तीय बाजार अस्थिर बने हुए … Read more

वित्त वर्ष 2024-25 की दूसरी तिमाही का जीडीपी डेटा जारी, राजकोषीय घाटे में आई कमी

नई दिल्ली राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने शुक्रवार को वित्त वर्ष 2024-25 की दूसरी तिमाही का जीडीपी डेटा जारी किया। जुलाई से सितंबर तिमाही में जीडीपी विकास दर 5.4 प्रतिशत रही है। हालांकि, जीडीपी वृद्धि में दूसरी तिमाही में धीमापन देखने को मिला है। लेकिन, भारत अभी भी दुनिया की सबसे तेज बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना हुआ है। भारतीय रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी विकास दर अनुमान 7.2 प्रतिशत निर्धारित किया है। वित वर्ष 25 की दूसरी तिमाही में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की विकास दर 2.2 प्रतिशत, खनन और उत्खनन सेक्टर की विकास दर नकारात्मक -0.1 प्रतिशत, कृषि और उससे जुड़े सेक्टर की विकास दर 3.5 प्रतिशत और कंस्ट्रक्शन सेक्टर की विकास दर 7.7 प्रतिशत रही है। ट्रेड, होटल, ट्रांसपोर्ट, कम्युनिकेशन और ब्रॉडकास्टिंग सर्विसेज की विकास दर चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 6 प्रतिशत रही है। तृतीयक क्षेत्र की विकास दर चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 7.1 प्रतिशत रही है । वित्त वर्ष 2024-25 की पहली छमाही में रियल ग्रॉस वैल्यू एडेड (जीवीए) में 6.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। निजी अंतिम उपभोग व्यय (पीएफसीई) वित्त वर्ष 2024-25 की दूसरी तिमाही में 6 प्रतिशत बढ़ा है। इस दौरान सरकारी अंतिम उपभोग व्यय में 4.4 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। देश की जीडीपी में निजी खपत की हिस्सेदारी 60 फीसदी है और विकास दर में तेजी भविष्य के लिए शुभ संकेत है। आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 के अप्रैल-अक्टूबर अवधि में राजकोषीय घाटा 7.51 लाख करोड़ रुपये रहा है, जो कि पिछले साल 8.04 लाख करोड़ रुपये था। यह पूरे वित्त वर्ष के लक्ष्य 16.13 लाख करोड़ रुपये का 46.5 प्रतिशत है। चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-अक्टूबर अवधि में कुल व्यय 24.74 लाख करोड़ रुपये रहा है, यह वित्त वर्ष 2023-24 की समान अवधि में 23.94 लाख करोड़ रुपये था। वित्त वर्ष 2024-25 के अप्रैल से अक्टूबर के बीच कुल प्राप्तियां 17.23 लाख करोड़ रुपये रही है। यह पिछले साल समान अवधि में 15.91 लाख करोड़ रुपये थी। चालू वित्त वर्ष के अप्रैल से अक्टूबर के बीच पूंजीगत खर्च 4.67 लाख करोड़ रुपये रहा है। यह पिछले साल समान अवधि में 5.47 लाख करोड़ रुपये था। वित्त वर्ष 2024-25 के अप्रैल-अक्टूबर अवधि में सकल कर आय 20.33 लाख करोड़ रुपये रही है, जो कि पिछले साल समान अवधि में 18.35 लाख करोड़ रुपये थी।

आरबीआई ने वित्त वर्ष की तीसरी और चौथी तिमाही के अपने वृद्धि दर के अनुमान को 7.3 और 7.2 से बढ़ाकर 7.4 प्रतिशत किया

मुंबई  भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने उपभोक्ता मांग तथा निवेश बेहतर रहने की संभावना के बीच चालू वित्त वर्ष 2024-25 के लिए अपने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि के अनुमान को 7.2 प्रतिशत पर कायम रखा है। हालांकि, केंद्रीय बैंक ने दूसरी तिमाही के अपने वृद्धि दर के अनुमान को 7.2 प्रतिशत से घटाकर सात प्रतिशत कर दिया है। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकान्त दास ने बुधवार को चालू वित्त वर्ष की चौथी द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए कहा कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत रही। पहले इसके 7.1 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था। इसके अलावा आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष की तीसरी और चौथी तिमाही के अपने वृद्धि दर के अनुमान को क्रमश: 7.3 और 7.2 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.4 प्रतिशत कर दिया है। आरबीआई ने अगस्त में अपनी पिछली द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर के 7.2 प्रतिशत पर रहने का ही अनुमान लगाया था। गवर्नर दास ने चालू वित्त वर्ष की चौथी द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए कहा कि भारत की वृद्धि गाथा कायम है क्योंकि वृद्धि को रफ्तार देने वाले कारक उपभोग तथा निवेश मांग में मजबूती है। उन्होंने कहा, ‘‘कुल मांग में महत्वपूर्ण हिस्सा रखने वाले निजी उपभोग की संभावनाएं बेहतर हैं क्योंकि कृषि परिदृश्य और ग्रामीण मांग की स्थिति बेहतर हुई है। सेवाओं में तेजी से शहरी मांग को भी समर्थन मिलेगा। केंद्र और राज्यों के सरकारी खर्च के बजट अनुमान के अनुरूप तेजी पकड़ने की उम्मीद है।’’ गवर्नर ने कहा कि उपभोक्ता और कारोबारी भरोसे से निवेश गतिविधियों को लाभ होगा। इसके अलावा सरकार निवेश पर जोर दे रही है और बैंकों तथा कॉरपोरेट जगत का बही-खाता भी मजबूत है। उन्होंने कहा, ‘‘ इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए हमारा अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में जीडीपी वृद्धि दर 7.2 प्रतिशत रहेगी। दूसरी तिमाही में इसके सात प्रतिशत, तीसरी में 7.4 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। अगले वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था के 7.3 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है।’’   मुद्रास्फीति पर सख्ती से लगाम लगानी होगी, अन्यथा यह फिर बढ़ सकती है: आरबीआई गवर्नर  भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने चालू वित्त वर्ष 2024-25 के लिए खुदरा मुद्रास्फीति के अपने अनुमान को बुधवार को 4.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा। आरबीआई के गवर्नर शक्तिकान्त दास ने चालू वित्त वर्ष की चौथी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद बुधवार को इस बात पर जोर दिया कि केंद्रीय बैंक को कीमतों की स्थिति पर कड़ी नजर रखनी होगी और ‘‘मुद्रास्फीति’’ पर सख्ती से लगाम लगानी होगी, नहीं तो इसमें फिर से तेजी आ सकती है। गवर्नर ने यह भी कहा कि लचीले मुद्रास्फीति लक्ष्य (एफआईटी) ढांचे को 2016 में लागू किए जाने के बाद से आठ वर्ष पूरे हो गए हैं और यह भारत में 21वीं सदी का एक प्रमुख संरचनात्मक सुधार है। केंद्रीय बैंक ने एफआईटी के तहत यह सुनिश्चित किया है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित खुदरा मुद्रास्फीति दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ चार प्रतिशत पर बनी रहे। आरबीआई ने 2024-25 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति के अपने अनुमान को 4.5 प्रतिशत पर कायम रखा है। महंगाई दर के दूसरी तिमाही में 4.1 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 4.8 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 4.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही के लिए मुद्रास्फीति के 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है। जोखिम समान रूप से संतुलित हैं। दास ने कहा, ‘‘ प्रतिकूल आधार प्रभाव तथा खाद्य पदार्थों कीमतों में तेजी से सितंबर में महंगाई दर में तेजी देखने को मिल सकती है। अन्य कारकों के अलावा 2023-24 में प्याज, आलू और चना दाल के उत्पादन में कमी इसकी प्रमुख वजह होगी।’’ उन्होंने कहा कि हालांकि अच्छी खरीफ फसल, अनाज के पर्याप्त भंडार और आगामी रबी मौसम में अच्छी फसल की संभावना से इस वर्ष की चौथी तिमाही में कुल मुद्रास्फीति की दर में क्रमिक रूप से नरमी आने का अनुमान है। दास ने कहा कि प्रतिकूल मौसम और भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने की स्थिति में मुद्रास्फीति के ऊपर जाने का जोखिम है। अक्टूबर में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम में काफी उतार-चढ़ाव रहा है। जुलाई और अगस्त में खुदरा मुद्रास्फीति में उल्लेखनीय गिरावट आई है। इसकी मुख्य वजह आधार प्रभाव है। दास ने कहा कि खाद्य कीमतों में निकट अवधि में तेजी की आशंका के बावजूद घरेलू स्तर पर कीमत को लेकर जो स्थितियां बन रही हैं उससे आगे कुल मुद्रास्फीति में कमी आने का संकेत मिलता है।     आरबीआई की द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा की मुख्य बातें  भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की चालू वित्त वर्ष 2024-25 की चौथी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा की मुख्य बातें इस प्रकार हैं- * मुख्य नीतिगत दर रेपो लगातार दसवीं बार 6.5 प्रतिशत पर यथावत। * फरवरी 2023 से रेपो दर में बदलाव नहीं। * मौद्रिक नीति रुख को बदलकर ‘तटस्थ’ किया गया। * यह पुनर्गठित मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की पहली बैठक थी। * चालू वित्त वर्ष के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि का अनुमान 7.2 प्रतिशत पर बरकरार। * दूसरी तिमाही के लिए जीडीपी वृद्धि का अनुमान सात प्रतिशत, तीसरी तिमाही के लिए 7.4 प्रतिशत और चौथी तिमाही के लिए 7.4 प्रतिशत। * चालू वित्त वर्ष के लिए मुद्रास्फीति का अनुमान 4.5 प्रतिशत पर कायम। * यूपीआई123पे (फीचर फोन के लिए) प्रति लेनदेन सीमा दोगुनी कर 10,000 रुपये करने का प्रस्ताव। * यूपीआई लाइट वॉलेट की सीमा बढ़ाकर 5,000 रुपये और प्रति लेनदेन सीमा बढ़ाकर 1,000 रुपये करने का प्रस्ताव। * एमपीसी की अगली बैठक चार से छह दिसंबर को होगी।      

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