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खजुराहो-सांची में भी गोल्फ कोर्ट और रिसॉर्ट बनाने के लिए 600 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव, नजरपुरा आईलैंड में लक्जरी रिसॉर्ट बनेंगे

भोपाल  ट्रेजर ग्रुप छह सौ करोड़ रुपए का निवेश कर खंडवा जिले के नजरपुरा आईलैंड में लक्जरी रिसॉर्ट बनाएगा, खजुराहो में मिनी गोल्फ कोर्स एवं रिसॉर्ट तथा सांची में गोल्फ कोर्स एवं लक्जरी रिसॉर्ट बनाएगा। वहीं अमेजन प्राइम, हालीवुड प्रोजेक्ट, जी फाइव और अन्य निवेशक मिलकर मध्यप्रदेश में तीन सौ करोड़ रुपए खर्च कर नये प्रोजेक्ट शुरु करेंगे। ट्रेजर समूह आने वाले समय में खंडवा जिले के नजरपुरा आईलैंड में लक्जरी रिसॉर्ट बनाएगा। दतला पहाड़ खजुराहों के समीप मिनी गोल्फ कोर्स भी समूह बनाएगा साथ ही यहां एक लक्जरी रिसार्ट भी बनाएगा। समूह सांची के पास भी एक गोल्फ कोर्स और लक्जरी रिसॉर्ट का निर्माण करेगा। इन सब पर ट्रेजर समूह छह सौ करोड़ रुपए खर्च करेगा। मध्यप्रदेश में बड़े निवेशक निखिल आडवाणी द्वारा रिवेल्यूशनरी अमेजन प्राइम सौ करोड़ खर्च कर इंदौर, खंडवा, खरगौन और महेश्वर में यूनिट शुरु करेगा। हालीवुड प्रोजेक्ट के तहत इंडिया टेक वन अस्सी करोड़ खर्च कर टीकममगढ़, ओरछा और चंदेरी में निर्माण करेगा। जीफाइव द्वारा हेनरी डी कुन्हा का रियलिटी शो अनटाइटल्ड भोपाल और सीहोर में 25 करोड़ रुपए खर्च कर शुरु किया जाएगा। वहीं आर्यन सक्सेना का प्रोजेक्ट अनटाईटल्ड थिएट्रिकल रिलीज आठ करोड़ से अनूपपुर और अमरकंटक में शुरु होगा। मध्यप्रदेश में सिनेमा हॉल के निर्माण और पुनर्निमाण के आठ प्रस्ताव भी नई नीति के तहत बुरहानपुर, कटनी, इंदौर, खजुराहो के लिए मिले है। इन पर 37 करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा। आईएचसीएल एमआरएस खोलेगे नई होटल्स- आईएचसीएल मध्यप्रदेश में विभिन्न नेशनल पार्क, भोपाल, एवं इंदौर में नौ होटल्स शुरु कर चुकी है। समूह अब इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर एवं पेंच में पांच नई इकाईयों की स्थापना करेगा। इसके लिए समूह मध्यप्रदेश में 1907 करोड़ रुपए खर्च करेगा।एमआरएस ग्रुप द्वारा महेन्द्र भवन पन्ना, क्योटी किला रीवा एवं सिंहपुर महल चंदेरी में डेढ़ सौ करोड़ रुपए खर्च कर लक्जरी बुटिक होटल विकसि किए जाएंगे। प्रमुख वैश्विक आतिथ्य कंपनी हिल्टन जबलपुर और भोपाल में 254 कमरों की दो इकाईयों शुरु करेगी। इस पर दो सौ करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा। जहानुमा ग्रुप आॅफ होटल्स द्वारा अठारह करोड़ रुपए खर्च कर मांडू में एक नया प्रीमियम होटल शुरु करेगा। सकूह मध्यप्रदेश में चार इकाईयां संचालित कर रहा है। ओबेराय सामूह बांधवगढ़ में विंध्यविलास वन्य जीव रिसॉर्ट का सफल संचालन कर रहा हे अब 450 करोड़ रुपए खर्च कर राजगढ़ पैलेस खजुराहो में एक नई इकाई में निवेश शुरु करेगा। आईटीसी होटल प्राइवेट लिमिटेड ढाई सौ करोड़ रुपए खर्च कर लुनेरा कासेल हेरिटेज होटल आईटीसी धर एवं आईटीसी भोपाल का विकास करेगा। आईटीसी जबलपुर में वेलकम होटल आईटीसी का सफलतापूर्वक संचालन कर रहा है।   खंडवा, सांची, खजुराहो के निवेश प्रस्ताव     नजरपुरा आइलैंड खंडवा: इंदिरा सागर डैम के बैक वाटर एरिये में ये आइलैंड है। यहां पर 17.57 हेक्टेयर भूमि पर 138.34 करोड़ रुपए से 106 लग्जरी रूम, 2 रेस्टोरेंट, वॉटर स्पोर्ट्स, विश्व स्तरीय वेलनेस रिसॉर्ट (स्पा, मेडटेशन-योगा) एवं अन्य एक्टिविटी होग और 500 से अधिक लोगों को रोजगार मिल सकेगा।     सांची में रिसॉर्ट: सांची के पास नीनोद में 77 हेक्टेयर जमीन पर कुल 246.02 करोड़ रुपए की लागत से 217 लग्जरी रूम एवं विलाज, 5 रेस्टोरेंट, गोल्फ कोर्ट, गोल्फ विला, कन्वेंशन सेंटर, वेलनेस सेंटर एवं टूरिज्म से जुड़ी अन्य एक्टिविटी होगी। इससे करीब साढ़े 6 सौ लोगों को रोजगार मिलेगा।     खजुराहो में गोल्फ कोर्ट: खजुराहो स्थित दतला पहाड़ में 72.943 हेक्टेयर जमीन पर 206.27 करोड़ रुपए की लागत से 204 लग्जरी स्वीट रूम्स, 2 रेस्टोरेंट, गोल्फ कोर्ट, वेलनेस सेंटर, थीम गार्डन, हेरिटेज वॉल, हॉट एयर बैलूनिंग जैसी पर्यटन सुविधाएं जुटाई जाएंगी। इसमें 500 से अधिक लोगों को रोजगार मिल सकेगा। ट्रेजर ग्रुप के इंदौर में भी प्रोजेक्ट्स ट्रेजर ग्रुप इंदौर का है। ग्रुप के यहां पर कई प्रोजेक्ट्स हैं। कंपनी रियल एस्टेट विकास, पैकेजिंग उत्पादों के निर्माण, पवन ऊर्जा उत्पादन, हर्बल उत्पादों समेत अन्य गतिविधियों में शामिल हैं। ग्रुप ने तीनों ही जगहों पर 600 करोड़ रुपए का निवेश प्रस्ताव दिया है।

मध्य प्रदेश के 2047 तक 2.11 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनेगा

भोपाल  प्रधानमंत्री मोदी का लक्ष्य 2027 तक भारत को विकसित बनाने का है। उन्होंने 2047 तक का समय इसलिए चुना है, क्योंकि तब तक आजादी को 100 साल पूरे हो जाएंगे। विकसित भारत बनाने में मध्यप्रदेश भी अपनी अहम भूमिका अदा करेगा। हाल ही में भोपाल में हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआइएस) ने मध्यप्रदेश का रोडमैप तैयार कर दिया है। हमारा मानना है कि 2047 तक ये 2.11 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था वाला राज्य बनेगा।  2011-12 में देश की अर्थव्यवस्था में मध्यप्रदेश का योगदान 3.6 फीसदी था, जो 2023-24 में 4.6 फीसदी हो चुका है। यदि मध्यप्रदेश की किसी देश की अर्थव्यवस्था से तुलना की जाए तो हम केन्या, मोरक्को या ओमान से भी बड़ी अर्थव्यवस्था वाले बन चुके हैं। 2030-31 तक मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था 31 लाख करोड़ हो जाएगी। 2047-48 तक ये 2.11 ट्रिलियन डॉलर पहुंचने की पूरी संभावना है। ऐसे में 8.3 से 8.6 फीसदी की विकास दर से बढऩे पर राज्य विकसित बन जाएगा। आने वाले समय में एग्रो फूड प्रोसेसिंग, टेक्सटाइल एंड अपेरल, ऑटोमोबाइल, लॉजिस्टिक एंड वेयर हाउसिंग, डिफेंस और एयरोस्पेस, रिन्यूएबल एनर्जी मध्यप्रदेश में खासे मजबूत सेक्टर हैं। इन सभी सेक्टरों में रोजगार का भी भरपूर निर्माण होगा। यहां की विकास दर को बढ़ाने इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने, एमएसएमई को बढ़ावा देने, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, स्किल डेवलपमेंट वर्क फोर्स को अपग्रेड करना होगा। इसके साथ ही यहां एक्सपोर्ट और ग्रीन स्टेट बनाने पर भी विशेष ध्यान देना होगा। पहले कभी क्षेत्रवार प्रगति पर ध्यान नहीं दिया गया। इस बार खुद सीएम डॉ.मोहन यादव ने संभागों में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव कीं। देश के प्रमुख उद्यमियों को वहां ले जाकर विशेषताएं बताईं। यही वजह है कि इस बार जो निवेश आ रहा है, वो भी प्रदेश में हर क्षेत्र में आ रहा है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पहली बार आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के 2025 संस्करण का उदघाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 फरवरी को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय परिसर किया। अपने उदघाटन संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्य की भौगोलिक स्थिति, मजबूत बुनियादी ढांचा और अनुकूल नीति निवेशकों को आकर्षित कर रही है। इसके साथ ही उन्होंने निवेशकों से मध्य प्रदेश सरकार की निवेश नीतियों का गहराई से अध्ययन कर सरकार द्वारा प्रदान की जा रही सुविधाओं का पूरी तरह से लाभ उठाने की अपील भी की। टेक्सटाइल,पर्यटन और प्रौद्योगिकी क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करने के प्रधानमंत्री मोदी के आह्वान के फलस्वरुप ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में प्रौद्योगिकी क्षेत्र में 78000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए तो वहीं पर्यटन क्षेत्र में 65000 करोड़ रुपये का निवेश प्राप्त हुआ है। जबकि टेक्सटाइल में मध्य प्रदेश को केंद्र से धार में एक टेक्सटाइल की परियोजना मिली है। पर्यटन के क्षेत्र में मध्य प्रदेश सरकार के काम की तारीफ करते हुये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश सरकार ने बहुत अच्छा काम किया है। पहले इस क्षेत्र में काम करने के लिए 30 अनुमतियां आवश्यक थीं, अब इन्हें घटाकर 10 कर दिया गया है। इन सभी नीतियों को सार्वजनिक सेवा गारंटी अधिनियम में अधिसूचित किया जायेगा। पर्यटन और आतिथ्य के क्षेत्र में प्राप्त निवेश प्रस्तावों में मुख्य तौर पर क्रूज पर्यटन, फिल्म निर्माण, होटल-रिसॉर्ट निर्माण, जल पार्क, गोल्फ कोर्स, अल्ट्रा मेगा परियोजनाओं और राज्य में पर्यटन सुविधाओं के विस्तार जैसे परियोजनाओं के लिए प्रस्तावित किया गया है। भारतीय होटल्स कंपनी लिमिटेड (IHCL) द्वारा विभिन्न राष्ट्रीय उद्यानों, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर में होटल स्थापित करने के लिए 1960 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुआ है। अयोध्या क्रूज लाइन्स द्वारा 100 करोड़ रुपये की लागत से क्रूज पर्यटन परियोजना, नॉलेज मरीन एंड इंजीनियरिंग वर्क्स लिमिटेड (KMEW) द्वारा 70 करोड़ रुपये की लागत से क्रूज पर्यटन परियोजना, ट्रेजर ग्रुप इंदौर द्वारा 600 करोड़ रुपये के अल्ट्रा मेगा परियोजनाओं में निवेश, और फिल्म क्षेत्र में अमेज़न प्राइम, ज़ी5 आदि द्वारा 300 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुआ है। राज्य में पर्यटन के विकास को नए आयाम देने के लिए मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड ने विभिन्न संस्थाओं के साथ 6 एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इन एमओयू पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत, राज्य पर्यटन मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेन्द्र भाव सिंह लोदी की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए। समिट के समापन सत्र को संबोधित करते हुये केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि दो दिवसीय ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट सिर्फ मध्य प्रदेश की नहीं बल्कि पूरे देश की उपलब्धि है। राज्य में उद्योगों की स्थापना को प्रोत्साहित करने के लिए उठाए गए कदम भारत के विकास को भी तेज कर रहे हैं। मध्य प्रदेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘धरोहर और विकास’ के नारे को पूरा कर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने 2047 तक भारत को पूरी तरह से विकसित बनाने का संकल्प लिया है। भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा। मध्य प्रदेश इस दिशा में महत्वपूर्ण सहायक राज्य साबित होगा, उन्होने कहा। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 को बहुत सफल बताते हुये केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनकी टीम समिट की इस सफलता के लिए बधाई और सम्मान के पात्र हैं। इस सम्मेलन में मध्य प्रदेश में किए गए समझौता ज्ञापनों (MoUs) का जल्द ही ठोस रूप दिया जाएगा और राज्य के विकास को तेज किया जाएगा। वहीं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस समिट को “राज्य की प्रगति का स्वर्णिम अध्याय” बताते हुए वर्ष 2025 को ‘उद्योग वर्ष’ के रूप में मनाये जाने का एलान किया। उन्होंने कहा कि सरकार औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और ईज ऑफ डुइंग बिजनस को और बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 की सफलता से उत्साहित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आगे बताया कि इस समिट में 25000 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें 100 से अधिक विशेषज्ञ और उद्योगपति शामिल थे। 60 से अधिक देशों से निवेशक प्रतिनिधि भोपाल आए थे। समिट में लगभग 5000 व्यवसाय से व्यवसाय और 600 व्यवसाय से सरकार तक बैठकें आयोजित की गईं। प्राप्त निवेश प्रस्तावों के बारे में जानकारी देते हुये मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा अब तक सरकार को 30 लाख 77 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। … Read more

अब तक मध्यप्रदेश में 10 साल में छह जीआईएस हुई, 30.13 लाख करोड़ के मिले निवेश प्रस्ताव पर 10 प्रतिशत ही हुआ निवेश

भोपाल मध्य प्रदेश में 10 साल में छह ग्लोबल इंवेटर्स समिट (जीआइएस) हुईं, इनमें कुल 30 लाख 13 हजार 41.60 करोड़ रुपये के 13,388 निवेश प्रस्ताव आए थे, लेकिन धरातल पर केवल तीन लाख 47 हजार 891.40 करोड़ रुपये के ही 762 निवेश उतर सके। इस पूंजी निवेश से प्रदेश में दो लाख सात हजार 49 बेरोजगार को रोजगार मिला। अब भोपाल में हुई सातवीं जीआइएस से सरकार को बेहद उम्मीद है। पूर्व के अनुभव को देखते हुए 24-25 फरवरी को भोपाल में हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआइएस) में मिले 26.61 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव में से आधा निवेश भी धरातल पर उतरता है तो मोहन सरकार की मेहनत सफल हो जाएगी। इसे लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रतिमाह दो बार समीक्षा करेंगे। सरकार की कार्ययोजना है कि समयसीमा में निवेश प्रस्ताव क्रियान्वित हों। इसके लिए मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और विभाग के स्तर पर निगरानी की व्यवस्था रहेगी। इधर, रोजगार पोर्टल पर मध्य प्रदेश में 26 लाख से अधिक बेरोजगार पंजीकृत है। सरकार का प्रयास है कि सरकारी नौकरी के साथ निजी क्षेत्र में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तोर पर इन्हें रोजगार मिल सके। इसलिए सरकार हर वो प्रयास कर रही है जिससे रोजगार सृजित हो। मप्र में 25,82,759 बेरोजगार, केवल 2,32,295 आवेदकों को ही मिली नौकरी भले ही प्रदेश में बेरोजगारी दूर करने के लिए राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही हो, बावजूद इसके वर्ष 2024 में प्रदेश में 25 लाख, 82 हजार 759 युवा बेरोजगार रह गए। हालांकि सरकार का दावा है कि इनमें से दो लाख 32 हजार 295 बेरोजगार आवेदकों को रोजगार कार्यालय के माध्यम से निजी क्षेत्र में आफर लेटर प्रदान किए गए, लेकिन आफर लेटर देने के बाद भी सरकार को यह नहीं पता कि बेरोजगार युवा किन कंपनियों में काम कर रहे हैं। वहीं गत चार वर्षों की बात करें तो वर्ष 2021 में रोजगार कार्यालय में 32 लाख 16 हजार 64 बेरोजगार पंजीकृत थे, 2022 में 27 लाख 82 हजार 29 रह गए। वर्ष 2023 में 35 लाख 73 हजार 694 हुए तो वर्ष 2024 में घटकर 25 लाख 82 हजार 759 रह गई हैं। रोजगार का बड़ा माध्यम बन सकता है एमएसएमई सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) का विस्तार सर्वाधिक रोजगार उपलब्ध कराने का माध्यम बन सकता है। इसके लिए सरकार ने एमएसएमई, स्टार्टअप और औद्योगिक भूमि एवं भवन आवंटन नीति बनाई है। 194 औद्योगिक क्षेत्र केवल एमएसएमई के लिए बनाए गए हैं और प्रदेश के एमएसएमई सेक्टर में क्लस्टर बनाए गए हैं। सरकार के अनुसार, तीन लाख 54 हजार एमएसएमई इकाइयों को पंजीकृत किया है। इनमें 18.33 लाख नौकरियां उत्पन्न करने की क्षमता है।   इधर, मध्य प्रदेश से अधिकांश उत्पादों को जीआइ टैग दिलाने भी प्रयास किए जा रहे हैं। इसमें आदिवासियों की पारंपरिक औषधियों, खाद्यान्न और उनकी कलात्मक वस्तुओं को प्राथमिकता दी जाएगी। मध्य प्रदेश के एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) की ब्रांडिंग की जा रही है। इसके लिए अलग से एक सेल गठित किया गया है।

GIS के बाद मध्य प्रदेश में रिकॉर्ड निवेश प्रस्ताव आने से खुशी का माहौल, 26.61 लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव

भोपाल राजधानी में हुए ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) के बाद मध्य प्रदेश में रिकॉर्ड निवेश प्रस्ताव आने से खुशी का माहौल है। लेकिन साथ ही, पुराने सवाल भी उठ रहे हैं। क्या वाकई में इतना निवेश आएगा? और क्या इतनी नौकरियां मिलेंगी? मुख्य सचिव अनुराग जैन ने GIS में मंगलवार को भरोसा दिलाया कि सरकार निवेश के वादों को हकीकत में बदलने के लिए काम करेगी। 26.61 लाख करोड़ से ज्यादा का निवेश दो दिन चले GIS में 26.61 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। यह राशि राज्य के कुल कर्ज और बजट से कई गुना ज्यादा है। पिछले पांच सालों में मिले कुल निवेश प्रस्तावों से भी यह काफी ज्यादा है। सरकार का अनुमान है कि इससे 17.34 लाख नौकरियां पैदा होंगी। अगर ऐसा हुआ तो मध्य प्रदेश की बेरोजगारी की समस्या आधी से ज्यादा हल हो सकती है। राज्य में करीब 30 लाख बेरोजगार युवा हैं। राज्य की आर्थिक स्थिति बदलने की उम्मीद GIS में मध्य प्रदेश को मिले निवेश प्रस्तावों से राज्य की आर्थिक तस्वीर बदलने की उम्मीद जगी है। 26.61 लाख करोड़ रुपये का यह आंकड़ा राज्य के मौजूदा कर्ज 4.15 लाख करोड़ रुपये से छह गुना से भी ज्यादा है। यह राशि राज्य के बजट, जो इस साल 4 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा होने का अनुमान है, से भी कई गुना ज्यादा है। इससे साफ है कि अगर ये निवेश प्रस्ताव हकीकत में बदलते हैं तो राज्य की अर्थव्यवस्था को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। 17.34 लाख नौकरियां मिलने की संभावना निवेश के साथ-साथ रोजगार के अवसर भी बड़ी संख्या में पैदा होने की उम्मीद है। सरकार का दावा है कि इन प्रस्तावों से 17.34 लाख नौकरियां पैदा होंगी। मध्य प्रदेश में बेरोजगार युवाओं की संख्या करीब 30 लाख है। ऐसे में अगर ये अनुमान सही साबित होते हैं तो राज्य में बेरोजगारी की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने GIS में इस बात की उम्मीद जताई कि निवेश के इरादे राज्य में फलित हों। पिछले अनुभवों को देखते हुए बढ़ी चिंता हालांकि, पिछले अनुभवों को देखते हुए कुछ चिंताएं भी हैं। पहले के निवेश प्रस्तावों में से सिर्फ 10% ही जमीन पर उतरे हैं। इस बार सरकार का कहना है कि वह हर निवेश प्रस्ताव पर नजर रखेगी। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भरोसा दिलाया है कि अधिकारी निवेशकों के साथ लगातार संपर्क में रहेंगे ताकि उनके वादे पूरे हों। मुख्य सचिव हर महीने इसकी समीक्षा करेंगे। जैन ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सामने GIS के समापन समारोह में यह जानकारी दी। निवेशकों की समस्याओं के समाधान के लिए एक पोर्टल भी बनाया जाएगा। बीजेपी ने 4 लाख नौकरियों का किया है वादा सरकारी नौकरियों की बात करें तो अगस्त 2022 से भाजपा सरकार ने 4 लाख सरकारी नौकरियों का वादा किया है। इनमें से करीब एक लाख नौकरियां देने का दावा किया गया है। सरकारी और निजी क्षेत्र की नौकरियों को मिलाकर मध्य प्रदेश में कुल 24 लाख नौकरियां मिलने की उम्मीद है। मध्य प्रदेश रोजगार पोर्टल के अनुसार, मंगलवार तक 29,68,663 युवा पंजीकृत थे। यह राज्य में बेरोजगार युवाओं की सही संख्या नहीं है, लेकिन इसे अनुमान का आधार माना जाता है। एक साल में एमपी में हुए 7 क्षेत्रीय शिखर सम्मेलन एक साल में, राज्य को मध्य प्रदेश में 7 क्षेत्रीय शिखर सम्मेलनों के माध्यम से 4.17 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। सरकार ने कहा था कि क्षेत्रीय शिखर सम्मेलनों में, मध्य प्रदेश को 4.17 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जिससे 4.5 लाख नौकरियां पैदा होने की उम्मीद थी। अगर GIS और क्षेत्रीय औद्योगिक शिखर सम्मेलनों के आंकड़ों को मिला दिया जाए, तो राज्य को लगभग 30 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव और 21 लाख से ज्यादा नौकरियों का आश्वासन मिला है।

मुख्यमंत्री ने कहा देश के औद्योगिक विकास और रोजगार विज़न से मध्यप्रदेश तेजी बढ़ रहा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यावद ने कहा है कि देश के औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विज़न पर काम करते हुए मध्यप्रदेश तेजी के साथ एक मजबूत स्टार्ट-अप हब के रूप में उभर रहा है। प्रदेश सरकार नवाचार, उद्यमिता और रोजगार सृजन को प्राथमिकता देते हुए युवा उद्यमियों की आकाँक्षाओं के अनुकूल स्टार्ट-अप कल्चर को विकसित करने की दिशा में प्रभावी रणनीति अपना रही है। हमारा प्रयास मध्यप्रदेश को “स्टार्ट-अप और नवाचार का केंद्र” बनाना है, जहां युवा उद्यमियों को अपने आईडियाज़ को सफल व्यवसायों में बदलने के लिए अनुकूल माहौल और पूरा सहयोग मिले। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि आगामी 24 एवं 25 फरवरी को भोपाल में होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट कई मायनों में खास होगी। समिट में कई देशों के उद्यमी एवं निवेशक शामिल होंगे। इससे हमारे युवा उद्यमियों को अंतर्राष्ट्रीय तकनीकी और नवाचारों का ज्ञान मिलेगा और मध्यप्रदेश के स्टार्ट-अप्स को नई उड़ान मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्टार्ट-अप्स न केवल प्रदेश के आर्थिक विकास में योगदान देंगे, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित करेंगे। हम प्रदेश में स्टार्ट-अप्स के विकास के लिए वित्तीय सहायता, सशक्त नीतिगत ढांचा और आधुनिक बुनियादी ढांचे की सुविधा प्रदान कर रहे हैं और इस दिशा में हमारी सरकार ठोस कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में ‘एमपी स्टार्ट-अप पॉलिसी एंड इम्प्लीमेंटेशन स्कीम लागू है, जिसके तहत स्टार्ट-अप्स को वित्तीय सहायता, बुनियादी ढांचा सहयोग और नीति समर्थन उपलब्ध कराया जा रहा है। नई स्टार्टअप नीति के अनुसार स्टार्ट-अप्स को कुल निवेश का 18 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता (अधिकतम 18 लाख रूपये तक) दी जाती है। यह सहायता स्टार्ट-अप के विकास के प्रत्येक चरण के लिए अलग-अलग प्रदान की जाती है, जिसमें अधिकतम 4 चरणों तक सहायता मिल सकती है। इस नीति के अनुसार स्टार्ट-अप्स को वित्तीय प्रोत्साहन, बुनियादी ढांचा सहयोग और क्षमता निर्माण जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके अलावा, स्टार्ट-अप्स को सरकारी निविदाओं में अनुभव और टर्न ओवर की शर्तों में छूट दी गई है और उन्हें अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट से भी मुक्त रखा गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार स्टार्ट-अप्स को अनिवार्य लाइसेंस एवं परमिट शुल्क से छूट प्रदान कर रही है और दो वर्षों तक सरकारी खरीद में प्राथमिकता दे रही है। इसके अतिरिक्त प्रदेश के पास भरपूर बिजली, पानी, और प्राकृतिक संसाधन उपलब्ध हैं, जो इसे निवेशकों के लिए एक आईडियल डेस्टिनेशन बनाते हैं। मध्यप्रदेश देश के प्रमुख औद्योगिक गलियारों से जुड़ा हुआ है, जिससे यहां से उत्पादों का सुगम और कम लागत में परिवहन संभव है। यह रणनीतिक बढ़त उन कंपनियों के लिए लाभदायक होगी, जो अपने व्यवसाय का विस्तार करना चाहती हैं। नवाचार और उद्योगों के लिए उपयुक्त केंद्र भारत के हृदय प्रदेश के रूप में पहचाने जाने वाले मध्यप्रदेश में 300 से अधिक औद्योगिक पार्क मौजूद हैं। प्रदेश की 8 करोड़ से अधिक की जनसंख्या के साथ, यह प्रतिभाओं का एक विशाल केंद्र है, जहां 1,287 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों, 1,373 सरकारी एवं निजी कॉलेजों और आईआईटी-आईआईएम जैसे शीर्ष शिक्षण संस्थानों से हर साल हजारों स्नातक पास आउट होते हैं। प्रदेश सरकार स्कूल और कॉलेजों के छात्रों में नवाचार और उद्यमिता की भावना को बढ़ावा देने के लिए विशेष कार्यक्रम संचालित कर रही है। युवाओं को प्रारंभिक स्तर पर ही सही मार्गदर्शन और संसाधन उपलब्ध होने पर वे अपने स्टार्ट-अप्स को सफलतापूर्वक स्थापित कर सकेंगे। प्रदेश सरकार की स्टार्ट-अप को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता का परिणाम है कि आज प्रदेश में 4,900 से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्ट-अप्स कार्यरत हैं। आईटी, सेमीकंडक्टर, टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल और सोलर जैसे विभिन्न क्षेत्रों के लिए विशेष औद्योगिक पार्क विकसित किए गए हैं, जो स्टार्ट-अप्स के लिए अनुकूल माहौल प्रदान करते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारा लक्ष्य ‘स्टार्ट-अप इंडिया’ के तहत पंजीकृत स्टार्ट-अप्स की संख्या को 100 प्रतिशत तक बढ़ाना और कृषि एवं खाद्य क्षेत्र में स्टार्ट-अप्स को 200 प्रतिशत तक बढ़ावा देना है। इसके लिए प्रदेश में 72 इनक्यूबेटर कार्यरत हैं और उत्पाद-आधारित स्टार्ट-अप्स को बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश सरकार का यह ठोस प्रयास मध्यप्रदेश को भारत के सबसे प्रमुख स्टार्ट-अप हब में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। स्टार्ट-अप्स को प्रोत्साहित करने के लिए वित्तीय सहायता और विशेष प्रोत्साहन • महिला, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों को विशेष सहायता स्टार्टअप के पहले निवेश पर 18 प्रतिशत (18 लाख रूपये तक) की वित्तीय सहायता। • अन्य स्टार्ट-अप्स को पहले निवेश पर 15 प्रतिशत (₹15 लाख तक) की सहायता। • स्टार्ट-अप्स द्वारा आयोजित कार्यक्रमों के लिए 5 लाख रूपये प्रति इवेंट (अधिकतम 20 लाख रूपये प्रति वर्ष) तक सहायता। • इनक्यूबेटर्स के विस्तार के लिए एक बार में 5 लाख रूपये का अनुदान। • स्टार्ट-अप्स के किराए के 50 प्रतिशत हिस्से (अधिकतम 5 हजार रूपये प्रति माह) की तीन वर्षों तक प्रतिपूर्ति। • पेटेंट कराने की लागत के लिए अधिकतम 5 लाख रूपये तक की सहायता। • घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय इवेंट्स में भाग लेने पर 75 प्रतिशत तक खर्च की प्रतिपूर्ति (50 हजार रूपये तक घरेलू इवेंट्स और 1.5 लाख रूपये तक अंतर्राष्ट्रीय इवेंट्स)। • स्टार्ट-अप्स के लिए लाइसेंस फीस में छूट और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट।  

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