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सरकार का बड़ा निर्णय: माउंट आबू, जहाजपुर और कामां—नाम बदलने के पीछे की ऐतिहासिक वजहें

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जयपुर राजस्थान में भजनलाल शर्मा सरकार ने प्रतीकों की राजनीति की दिशा में एक और कदम बढ़ाते हुए तीन प्रमुख नगरों के नाम बदलने की घोषणा की है। विधानसभा में विनियोग विधेयक पर उत्तर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि माउंट आबू का नाम ‘आबू राज’, जहाजपुर का ‘यज्ञपुर’ और कामां का ‘कामवन’ किया जाएगा। सरकार के अनुसार यह निर्णय स्थानीय मांग, ऐतिहासिक संदर्भ और सांस्कृतिक महत्व को ध्यान में रखकर लिया गया है। इससे पहले भी भजनलाल सरकार में पिछली सरकार की जगहों और कई योजनाओं के नाम बदले जा चुके हैं। इस घोषणा के बाद इन स्थानों के एतिहासिक और सांस्कृतिक आधार को लेकर चर्चा तेज हो गई है। माउंट आबू (अर्बुद पर्वत) का बहुआयामी इतिहास सिरोही जिले में स्थित माउंट आबू अरावली पर्वतमाला का सर्वोच्च भाग है। प्राचीन ग्रंथों में इसे अर्बुद पर्वत कहा गया है। स्कन्द पुराण के अर्बुद खंड में इसका उल्लेख मिलता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार यह ऋषियों की तपोभूमि रहा है। कथा है कि ऋषि वशिष्ठ ने यहां यज्ञ किया, जिसके अग्निकुंड से प्रतिहार, परमार, सोलंकी और चौहान वंश उत्पन्न हुए और इन्हें अग्निकुल राजपूत कहा गया।   अचलगढ़ क्षेत्र में स्थित अचलेश्वर महादेव मंदिर को भी पवित्र माना जाता है। मध्यकाल में यह क्षेत्र परमार वंश और बाद में देवड़ा चौहानों के अधीन रहा। महाराणा कुम्भा ने अचलगढ़ किला का पुनर्निर्माण कराया, जिससे इसका सामरिक महत्व बढ़ा। माउंट आबू जैन स्थापत्य कला के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां स्थित दिलवाड़ा जैन मंदिर 11वीं से 13वीं शताब्दी के बीच निर्मित हुए। 1031 ईस्वी में विमल शाह द्वारा निर्मित विमल वसाही मंदिर और 1230 ईस्वी में वास्तुपाल-तेजपाल द्वारा निर्मित लूण वसाही मंदिर अपनी संगमरमर नक्काशी के लिए विश्वप्रसिद्ध हैं। औपनिवेशिक काल में इसकी जलवायु के कारण अंग्रेजों ने इसे राजपूताना एजेंसी का मुख्यालय बनाया और इसे स्वास्थ्य केंद्र के रूप में विकसित किया। जहाजपुर (यज्ञपुर) की प्राचीन और मध्यकालीन विरासत भीलवाड़ा जिले में स्थित जहाजपुर का संबंध भी प्राचीन धार्मिक परंपराओं से जोड़ा जाता है। इतिहासकारों के अनुसार इसका प्राचीन नाम यज्ञपुर या यज्ञपुरी माना जाता है। पौराणिक परंपरा के अनुसार राजा जनमेजय ने अपने पिता परीक्षित की तक्षक नाग द्वारा मृत्यु के प्रतिशोध में यहां सर्पसत्र यज्ञ कराया था, जिससे इसका नाम यज्ञपुर पड़ा। समय के साथ यह नाम अपभ्रंश होकर जहाजपुर प्रचलित हुआ।   मध्यकाल में जहाजपुर मेवाड़ राज्य का एक महत्वपूर्ण दुर्ग-नगर बना। यहां का किला ऊंची पहाड़ी पर स्थित है और दूर से देखने पर विशाल जहाज जैसा प्रतीत होता है, जिससे इसके वर्तमान नाम की व्याख्या भी की जाती है। राणा कुम्भा के शासनकाल में इस दुर्ग का महत्व बढ़ा।

सरकार का अहम कदम: 25 लाख टन गेहूं और 5 लाख टन चीनी के निर्यात से किसानों की बढ़ेगी आय

नई दिल्ली घरेलू बाजार में बंपर पैदावार और गोदामों में भरे सरप्लस स्टॉक को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने शुक्रवार को 25 लाख टन गेहूं और 5 लाख टन चीनी के निर्यात को मंजूरी दे दी है। इस फैसले का सीधा मकसद घरेलू कीमतों में स्थिरता लाना और रबी सीजन की नई फसल आने से पहले किसानों को उनकी उपज का सही दाम दिलाना है। खाद्य मंत्रालय द्वारा जारी बयान के मुताबिक, गेहूं के अलावा 5 लाख टन गेहूं उत्पादों के निर्यात की भी अनुमति दी गई है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब निजी और सरकारी, दोनों ही स्तरों पर देश में अनाज का भंडार आरामदायक स्थिति में है। गेहूं: गोदाम फुल, निर्यात का रास्ता खुला सरकार के इस फैसले के पीछे का सबसे बड़ा कारण गेहूं का भारी स्टॉक है। आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति स्पष्ट होती है: निजी क्षेत्र के पास स्टॉक: वित्त वर्ष 2025-26 के लिए निजी कंपनियों और व्यापारियों के पास लगभग 75 लाख टन गेहूं का स्टॉक मौजूद है। यह पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में करीब 32 लाख टन ज्यादा है। एफसीआई की स्थिति: भारतीय खाद्य निगम (FCI) के पास 1 अप्रैल, 2026 तक केंद्रीय पूल में लगभग 182 लाख टन गेहूं उपलब्ध होने का अनुमान है। यह आंकड़ा यह सुनिश्चित करने के लिए काफी है कि निर्यात की अनुमति देने से देश की खाद्य सुरक्षा पर कोई आंच नहीं आएगी। बुवाई में बढ़ोतरी: रबी सीजन 2026 में गेहूं की बुवाई का रकबा बढ़कर 334.17 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले साल 328.04 लाख हेक्टेयर था। यह दर्शाता है कि किसानों ने एमएसपी और सरकारी खरीद पर भरोसा जताते हुए जमकर बुवाई की है और इस बार भी बंपर पैदावार की उम्मीद है। चीनी मिलों को नई राहत गेहूं के साथ-साथ सरकार ने चीनी उद्योग को भी राहत दी है। चीनी सत्र 2025-26 के लिए ‘इच्छुक’ चीनी मिलों को अतिरिक्त 5 लाख टन चीनी निर्यात करने की अनुमति दी गई है। पिछला ट्रैक रिकॉर्ड: इससे पहले 14 नवंबर, 2025 को सरकार ने 15 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति दी थी। हालांकि, मिलों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, 31 जनवरी, 2026 तक केवल 1.97 लाख टन चीनी का ही निर्यात हो पाया है, जबकि लगभग 2.72 लाख टन के सौदे अनुबंधित हो चुके हैं। कड़ी शर्तें: अतिरिक्त पांच लाख टन का कोटा केवल उन मिलों को दिया जाएगा जो इसके लिए इच्छा जताएंगे। शर्त यह है कि आवंटित कोटे का कम से कम 70% हिस्सा 30 जून, 2026 तक निर्यात करना अनिवार्य होगा। आवंटन प्रो-राटा (अनुपातिक) आधार पर होगा और मिलों को आदेश जारी होने के 15 दिनों के भीतर अपनी सहमति देनी होगी। सबसे अहम बात यह है कि इस निर्यात कोटे को किसी दूसरी मिल के साथ बदला नहीं जा सकेगा। सरकार का यह कदम बाजार में लिक्विडिटी (तरलता) सुधारने और पीक सीजन में ‘डिस्ट्रेस सेल’ (औने-पौने दाम पर बिक्री) को रोकने के लिए उठाया गया है। निर्यात खुलने से घरेलू बाजार में कीमतों को सपोर्ट मिलेगा, जिससे किसानों की आय सुरक्षित रहेगी। 

महापड़ाव के बाद सरकार का बड़ा फैसला, खेजड़ी की अवैध कटाई पर बनेगा कड़ा कानून

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बीकानेर बीकानेर में खेजड़ी वृक्षों की कटाई के विरोध में पिछले 11 दिनों से जारी महापड़ाव गुरुवार देर शाम समाप्त हो गया। लंबे समय से खेजड़ी संरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे स्थानीय लोगों ने सरकार के फैसले के बाद धरना खत्म करने की घोषणा की। 12 फरवरी की शाम सरकार की ओर से एक प्रतिनिधिमंडल वार्ता के लिए धरना स्थल पहुंचा। इसमें मंत्री केके बिश्नोई, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष बिहारी बिश्नोई, जसवंत बिश्नोई और पब्बाराम बिश्नोई शामिल रहे। प्रतिनिधिमंडल और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत के बाद अहम निर्णय लिया गया। सरकार ने पूरे राजस्थान में खेजड़ी वृक्षों की कटाई पर रोक लगाने के आदेश जारी कर दिए हैं। राजस्व सचिव की ओर से लिखित आदेश जारी कर सभी संभागीय आयुक्तों और जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि अवैध कटाई पर तत्काल प्रभाव से कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में सख्त निगरानी रखने और किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई करने को कहा गया है। उल्लेखनीय है कि 5 फरवरी को विधानसभा में खेजड़ी संरक्षण को लेकर घोषणा की गई थी, जिसके बाद इस दिशा में कार्रवाई तेज कर दी गई। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि खेजड़ी संरक्षण के लिए विशेष कानून लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रस्तावित विधेयक के जरिए अवैध कटाई पर सख्त प्रावधान, नियमित निरीक्षण और प्रशासनिक जवाबदेही तय की जाएगी। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे पर गंभीर नजर आ रहे हैं। सरकार का कहना है कि मरुस्थलीय क्षेत्रों में खेजड़ी का विशेष पारिस्थितिक महत्व है और इसे संरक्षित करना प्राथमिकता में शामिल है। सरकार के निर्णय के बाद संत समाज और पर्यावरण प्रेमियों ने आभार जताया है। उनका कहना है कि लंबे समय से खेजड़ी संरक्षण की मांग की जा रही थी और अब सरकार की पहल से सकारात्मक संदेश गया है। कब, क्या-क्या हुआ? 2 फरवरी : पॉलिटेक्निक कॉलेज में विशाल जनसभा के साथ महापड़ाव शुरू। हजारों पर्यावरण प्रेमी देशभर से पहुंचे। 3 फरवरी : 29 संतों सहित 363 पर्यावरण प्रेमी आमरण अनशन पर बैठे। 4 फरवरी : आमरण अनशन करने वालों की संख्या 537 पहुंची, महापड़ाव स्थल पर अस्थायी अस्पताल बनाया गया। 5 फरवरी : संसद और विधानसभा में गूंजी खेजड़ी संरक्षण की आवाज। मुख्यमंत्री का संदेश लेकर प्रतिनिधिमंडल पहुंचा, आमरण अनशन समाप्त हुआ। 6 फरवरी : प्रदेशभर में खेजड़ी कटाई पर रोक की मांग पर अड़े पर्यावरण प्रेमी, क्रमिक अनशन शुरू। 8 फरवरी : संतों का प्रतिनिधिमंडल जयपुर में मुख्यमंत्री से मिला। 9 फरवरी : महापड़ाव जारी रखने की घोषणा। 10 फरवरी : शहर में कलश यात्रा निकाली गई। 11 फरवरी : संतों ने मांग पूरी होने पर महापड़ाव स्थगित करने का शपथ पत्र दिया, मौन जुलूस निकाला। 12 फरवरी : सरकार के निर्देश जारी होने के बाद आंदोलन स्थगित करने की घोषणा। खेजड़ी संरक्षण कानून की तैयारी, प्रशासन अलर्ट राजस्व विभाग के निर्देशों के बाद अब प्रदेशभर में प्रशासन अलर्ट मोड पर है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि खेजड़ी कटाई रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही विशेष कानून लाकर खेजड़ी संरक्षण को स्थायी रूप से मजबूत किया जाएगा।

1 अप्रैल से नए वित्त वर्ष की शुरुआत, राजमार्ग पर आज से सफर करना होगा महंगा, भोपाल में 200 फीसदी तक महंगी हुई प्रॉपर्टी

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भोपाल नए वित्त वर्ष के पहले ही दिन से मध्य प्रदेश में लोगों पर महंगाई की मार पड़ने जा रही है। राजधानी भोपाल में जहां प्रॉपर्टी महंगी हुई है, वहीं प्रदेश में बिजली के दाम में औसत बढ़ोतरी 3.46 पैसे हुई है। इसी तरह अगर आप राष्ट्रीय राजमार्ग पर सफर करने जा रहे हैं तो अब आपको ज्यादा टोल टैक्स देना होगा। यहां पढ़िए 1 अप्रैल 2025 से लागू हुए नियमों के बारे में। टोल टैक्स: 1 अप्रैल से दरें होगी लागू, राजमार्ग पर सफर महंगा 30 मार्च की देर रात विद्युत नियामक आयोग ने नोटिफिकेशन जारी कर बिजली की दरों में 3.46 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है। तीन साल में नियामक ने 2 बार बिजली के दाम बढ़ाए हैं। अब घरेलू और कमर्शियल बिजली उपभोक्ताओं को एक यूनिट बिजली के दाम 3.46 प्रतिशत ज्यादा देने होंगे। इसके साथ ही राजधानी भोपाल में कलेक्टर ने 1800 से ज्यादा इलाकों में प्रॉपर्टी के रेट बढ़ा दिए हैं। वहीं, भोपाल नगर-निगम पानी के ज्यादा पैसे वसूलने की तैयारी कर रहा है। इंदौर-देवास हाईवे के टोल टैक्स में भी नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने वृद्धि कर दी है। इस बढ़ोतरी से आम आदमी की जेब पर क्या असर पड़ेगा? बिजली के अलावा और क्या-क्या महंगा हुआ? ​​​पढ़िए, ऐसे सभी ​​सवालों के जवाब… बिजली कीमतों में क्या बदलाव हुए हैं? राज्य विद्युत नियामक आयोग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए टैरिफ ऑर्डर जारी कर दिया। बिजली दरों में औसत 3.46% का इजाफा किया गया है यानी बिजली उपभोक्ताओं को हर यूनिट पर 18 पैसे ज्यादा चुकाने होंगे। यह इजाफा घरेलू और कमर्शियल दोनों तरह के उपभोक्ताओं के लिए हुआ है। प्रदेश में 1 अप्रैल से नई टोल दरें लागू हो गई हैं। जहां सभी प्रकार के वाहनों को 5 से 25 रुपये तक अधिक टोल देना होगा। एक तरफ का टोल कार सहित अन्य फोर व्हीकल 100, हल्के वाहन 160, बस और ट्रक 340 और कमर्शियल वाहन 370 रुपये को चुकाना होगा। अधिकारियों के मुताबिक जनवरी में भी टोल दरों में बदलाव किया था। तीन महीने के भीतर दरों में दूसरी मर्तबा बढ़ोत्तरी हुई है। एनएचएआइ ने कुछ स्थानों से गुजरने पर कार और हल्के वाहनों के लिए टोल टैक्स में वृद्धि नहीं की है, जिसमें मांगलिया टोल, मेठवाडा, माछलिया घाट शामिल है। इन वाहन चालकों पर आर्थिक रूप से बोझ नहीं बढ़ेगा। जबकि कमर्शियल और हेवी वाहनों को अतिरिक्त शुल्क देना होगा। महंगी बिजली: ई-रिक्शा चार्जिंग पर 24 पैसे यूनिट का भार प्रदेश में बिजली के दाम में बढ़ोतरी से कोई भी क्षेत्र नहीं बचा है। मध्यमवर्गीय से लेकर ई-रिक्शा चालक तक इस बढ़ोतरी से सीधे प्रभावित होंगे। ई-रिक्शा में सबसे ज्यादा चार्जिंग की दर बढ़ाई गई है। मौजूदा दर से 24 पैसे महंगी बिजली की गई है। इसके अलावा उच्च दाब उपभोक्ता श्रेणी में भी 26 पैसे तक बिजली के दाम बढ़े हैं। एक बिजली बिल में खपत के अतिरिक्त कितने चार्ज जुड़ते हैं? बिजली बिल में एनर्जी चार्ज, फिक्स चार्ज, फ्यूल कॉस्ट, ड्यूटी चार्ज जुड़ते हैं। बिजली की दरों में वृद्धि के अनुपात में ही बाकी सारे चार्ज बढ़ते-घटते हैं। नियामक आयोग ने फिक्स चार्ज को खत्म कर दिया है। 100 यूनिट का 100 रुपए बिल वाली योजना पर क्या असर पड़ेगा? मध्यप्रदेश में 1 करोड़ से अधिक घरेलू उपभोक्ताओं को सरकार 150 यूनिट पर सब्सिडी देती है। अटल गृह ज्योति योजना के दायरे में आने वाले 100 यूनिट मासिक बिजली खपत वाले उपभोक्ताओं से भी 24 रुपए का अतिरिक्त बिल लिया जाना है, लेकिन फिलहाल उपभोक्ताओं को 100 रुपए ही देने होंगे। 24 रुपए सरकार भरेगी। 150 यूनिट तक के खपत की तब भी शुरुआती 100 यूनिट के 100 रुपए ही भुगतान करने पड़ेंगे। बिजली उपभोक्ताओं को क्या कोई राहत भी मिलेगी? हां। निम्न दाब उपभाेक्ताओं (घरेलू उपभोक्ता या जिन्हें लो टेंशन केबल यानी 230 से 400 वोल्टेज लाइन से बिजली सप्लाई होती है) और मौसमी उच्च दाब उपभोक्ताओं (कमर्शियल उपभोक्ता या जिन्हें हाई टेंशन केबल 11000 वोल्टेज लाइन से बिजली सप्लाई होती है) के मिनिमम चार्ज समाप्त किए गए हैं। एक बिजली उपभोक्ता को उस घर या फैक्ट्री का भी बिल चुकाना पड़ता था, जिसमें कई माह से बिजली का उपयोग ही नहीं हो रहा था। अब इसे समाप्त कर दिया गया है। स्मार्ट मीटर वाले उपभोक्ताओं को क्या लाभ मिलेंगे? स्मार्ट मीटर वाले उपभोक्ताओं को सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक (8 घंटे) उपयोग की गई बिजली खपत पर 20% छूट देने की घोषणा की गई है। बाकी 16 घंटों में जितनी बिजली उपयोग करेंगे, उसका 10 प्रतिशत ज्यादा देना होगा। ऐसा करने के पीछे बिजली कंपनी से जुड़े अफसर ने बताया कि गर्मियों में सौर पैनल बाकी मौसम की तुलना में अधिकतम क्षमता के साथ ज्यादा बिजली बनाते हैं, इसलिए दिन में छूट देने का प्रावधान किया है। स्मार्ट मीटर की लागत, संचालन, मेंटेनेंस और डाटा भेजने का खर्च टैरिफ में जुड़ जाएगा। इसके एवज में 10 साल तक किस्तों में 25 हजार रुपए वसूले जाएंगे। आज से भोपाल के 1312 स्थानों पर प्रॉपर्टी 10 से 50 प्रतिशत महंगी भोपाल जिले में पिछले दस सालों में तेजी से हुए विकास के साथ ही प्रॉपर्टी के दामों में भी बेहताशा वृद्धि की गई है। यह हम नहीं बल्कि पंजीयन विभाग के अधिकारियों द्वारा तैयार किया गया गाइडलाइन 2025-26 का प्रस्ताव बता रहा है। इसमें बीमाकुंज क्षेत्र में 10 साल में प्रॉपर्टी के दाम 10 गुना तक बढ़ गए हैं। यहां वित्तीय वर्ष 2015-16 में प्रॉपर्टी के दाम 20 हजार रुपये प्रति वर्गमीटर थे और अब वित्तीय वर्ष 2025-26 में डेढ़ लाख से दो लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर हो गए हैं। शहर में सात स्थान ऐसे हैं जहां एक से चार लाख रुपये प्रति वर्गमीटर तक जमीनों के दाम हो गए हैं। साथ ही 1312 स्थानों पर आज से 10 से 50 प्रतिशत और उससे अधिक प्रॉपर्टी महंगी हो जाएगी। जिनके घरों में स्मार्ट मीटर नहीं हैं, क्या उन्हें ये सुविधा नहीं मिलेगी? स्मार्ट मीटर के अलावा सामान्य ग्राहकों पर यह प्रावधान इसलिए नहीं लागू किया गया, क्योंकि उन मीटरों में हर घंटे यूनिट काउंट करने की सुविधा नहीं है। उन मीटरों से यह गिना नहीं जा सकता कि सुबह 9 से 5 … Read more

बिहार को नहीं मिलेगा विशेष राज्य का दर्जा, सरकार ने साफ कह दिया

Bihar will not get special state status, government clearly said

Bihar will not get special state status, government clearly said केंद्र सरकार ने संसद में साफ कर दिया है कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा नहीं दिया जा सकता. मानसून सत्र के पहले दिन लोकसभा में एक लिखित जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी कहा कि पहले राष्ट्रीय विकास परिषद (NDC) की ओर से कुछ राज्यों को विशेष श्रेणी का दर्जा दिया गया था, लेकिन उसके पीछे कई आधार थे. एनडीसी की ओर से राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा कई विशेषताओं के आधार पर दिया गया था, जिन पर विशेष विचार करने की जरूरत थी. अपने लिखित जवाब में वित्त राज्य मंत्री ने बताया है कि जिन राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा दिया गया है उनमें पहाड़ी और कठिन भूभाग, कम जनसंख्या घनत्व या फिर आदिवासी आबादी का बड़ा हिस्सा, पड़ोसी देशों के साथ सीमाओं पर रणनीतिक स्थान, आर्थिक और बुनियादी ढांचे के मामले में पिछड़ापन और राज्य के वित्त की गैर-व्यवहार्य प्रकृति शामिल हैं. इसी आधार पर कुछ राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा दिया गया है. अंतर-मंत्रालयी समूह की रिपोर्ट का भी जिक्रउन्होंने आगे कहा कि इससे पहले विशेष श्रेणी के दर्जे के लिए बिहार के अनुरोध पर एक अंतर-मंत्रालयी समूह (IMG) ने विचार किया था, जिसने 30 मार्च, 2012 को अपनी रिपोर्ट भी पेश कर दी थी. आईएमजी इस निष्कर्ष पर पहुंचा था कि मौजूदा एनडीसी मानदंडों के आधार पर, बिहार के लिए विशेष श्रेणी का दर्जा का मामला नहीं बनता है. जेडीयू नेता बोले- बिहार को बहुत कुछ मिलेगासंसद में सरकार के लिखित जवाब पर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं. जेडीयू नेता संजय सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार ने कहा है कि बिहार को विशेष दर्जा नहीं मिल सकता है, लेकिन नीतीश कुमार ने कहा है की आने वाले दिनों में बिहार को केंद्र से बहुत कुछ मिलेगा. बिहार सरकार में मंत्री महेश्वर हजारी ने कहा कि आने वाले समय को बिहार की यह मांग जरूर पूरी होगी. बीजेपी कोटे से मंत्री नीरज बबलू ने ने कहा कि केंद्र सरकार का बिहार पर विशेष ध्यान है. आरजेडी ने जेडीयू पर बोला हमलावहीं, आरजेडी के विधायक आलोक मेहता ने कहा कि जदयू हमेशा बिहार को विशेष दर्जे की राजनीति करता रहा है. अब केंद्र ने नीतीश की मांग खारिज कर दी है तो जदयू नेताओं को केंद्र सरकार से इस्तीफा दे देना चाहिए. नीतीश कुमार को एनडीए से अलग हो जाना चाहिए.

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