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गेहूँ खरीदी 1 अप्रैल से इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम में, अन्य संभागों में 7 अप्रैल से शुरू होगी: खाद्य मंत्री राजपूत

इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभाग में 1 अप्रैल तथा शेष संभागों में 7 अप्रैल से होगी गेहूँ खरीदी : खाद्य मंत्री  राजपूत गेहूँ उपार्जन के लिये 19 लाख से अधिक किसानों ने कराया पंजीयन भोपाल  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि समर्थन मूल्य पर गेहूँ की खरीदी इंदौर, उज्जैन, भोपाल एवं नर्मदापुरम संभाग में 1 अप्रैल से तथा शेष संभागों में 7 अप्रैल से की जाएगी। गेहूँ की खरीदी शासकीय कार्य दिवसों में सुबह 8 से रात 8 बजे तक की जाएगी। उन्होंने बताया है कि सरकार ने गेहूं खरीदी पर 40 रुपये अतिरिक्त बोनस देने का भी फैसला लिया है। अब प्रदेश में गेहूं की खरीदी 2625 रुपए प्रति क्विंटल की दर से की जाएगी। मंत्री  राजपूत ने बताया है कि रबी विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये कुल 19 लाख 4 हजार 651 किसानों ने पंजीयन कराया है। गत् वर्ष 15 लाख 44 हजार किसानों ने पंजीयन कराया था। जिला इंदौर में 71713, झाबुआ में 7120, धार में 44466, अलीराजपुर में 476, खण्डवा में 35104, बुरहानपुर में 523, बड़वानी में 4724, खरगोन में 27557, शाजापुर में 73878, नीमच में 19445, उज्जैन में 123281, आगर-मालवा में 42446, मंदसौर में 65195, देवास में 76442, रतलाम, 45912, अशोक नगर में 16454, दतिया में 19118, शिवपुरी में 21312, ग्वालियर में 13763, गुना में 22914, भिण्ड में 12788, मुरैना में 10893, श्योपुर में 17617, डिण्डौरी में 4478, मण्डला में 19611, जबलपुर में 49642, कटनी में 52126, सिवनी में 53288, नरसिंहपुर में 38416, छिन्दवाड़ा में 29163, बालाघाट में 4383, पांढुर्णा में 863, नर्मदापुर में 71831, बैतूल में 18686, हरदा में 40273, भोपाल में 37129, रायसेन में 76264, विदिशा में 86479, सीहोर में 101793, राजगढ़ 98537, सीधी में 12813, सिंगरौली में 10970, महूगंज में 8018, सतना में 56376, मैहर में 19787, रीवा में 46923, अनुपपुर में 882, शहडोल में 9479, उमरिया में 13445, टीकमगढ़ में 15552, निवाड़ी में 4116, सागर में 75791, पन्ना में 30052, दमोह में 39938 और जिला छतपुर में 34378 किसानों ने पंजीयन कराया है।  

समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने को किसानों की बढ़ी भागीदारी, मंत्री राजपूत ने साझा किए आंकड़े

20 हजार से अधिक किसानों ने समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये कराया पंजीयन : मंत्री  राजपूत भोपाल  रबी विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये अब तक 20 हजार 98 किसानों ने पंजीयन करा लिया है। किसान 7 मार्च तक पंजीयन करा सकते हैं। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविंद सिंह राजपूत ने किसानों से अपील की है कि निर्धारित समय में पंजीयन अवश्य करा लें। उन्होंने बताया है कि किसान पंजीयन की व्यवस्था को सहज और सुगम बनाया गया है। कुल 3186 पंजीयन केन्द्र बनाये गए हैं। केन्द्र सरकार द्वारा वर्ष 2026-27 के लिये गेहूँ का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2585 रूपये प्रति क्विंटल घोषित किया गया है, जो गत वर्ष से 160 रूपये अधिक है। मंत्री  राजपूत ने बताया कि अभी तक इंदौर संभाग में 4084, उज्जैन में 9524, ग्वालियर में 476, चम्बल में 123, जबलपुर में 788, नर्मदापुरम में 900, भोपाल में 3602, रीवा में 68, शहडोल में 83 और सागर में 450 किसानों ने पंजीयन कराया है। पंजीयन की नि:शुल्क व्यवस्था पंजीयन की निःशुल्क व्यवस्था ग्राम पंचायत और जनपद पंचायत कार्यालयों में स्थापित सुविधा केन्द्र पर, तहसील कार्यालयों में स्थापित सुविधा केन्द्र पर और सहकारी समितियों एवं सहकारी विपणन संस्थाओं द्वारा संचालित पंजीयन केन्द्र पर की गई है। पंजीयन की सशुल्क व्यवस्था पंजीयन की सशुल्क व्यवस्था एम.पी. ऑनलाईन कियोस्क, कॉमन सर्विस सेन्टर कियोस्क, लोक सेवा केन्द्र और निजी व्यक्तियों द्वारा संचालित साइबर कैफे पर की गई है। किसानों को करें एसएमएस खाद्य मंत्री  राजपूत ने बताया है कि विगत रबी एवं खरीफ के पंजीयन में जिन किसानों के मोबाइल नंबर उपलब्ध हैं, उन्हें एसएमएस से सूचित करने के निर्देश दिये गये हैं। गांव में डोंडी पिटवाकर ग्राम पंचायतों के सूचना पटल पर पंजीयन सूचना प्रदर्शित कराने तथा समिति/ मंडी स्तर पर बैनर लगवाने के निर्देश भी दिये गये हैं।  

गेहूँ उपार्जन योजना: समर्थन मूल्य पंजीयन 7 फरवरी से, खाद्य मंत्री राजपूत का ऐलान

7 फरवरी से शुरू होगा समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन हेतु पंजीयन : खाद्य मंत्री  राजपूत भोपाल रबी विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये किसान पंजीयन 7 फरवरी से शुरू होगा। किसान 7 फरवरी से 7 मार्च तक पंजीयन करा सकते हैं। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविंद सिंह राजपूत ने किसानों से आग्रह किया है कि निर्धारित समय में पंजीयन करा लें। उन्होंने बताया है कि किसान पंजीयन की व्यवस्था को सहज और सुगम बनाया गया है। कुल 3186 पंजीयन केन्द्र बनाये गए हैं। केन्द्र सरकार द्वारा वर्ष 2026-27 के लिये गेहूँ का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2585 रूपये प्रति क्विंटल घोषित किया गया है, जो गत वर्ष से 160 रूपये अधिक है। पंजीयन की नि:शुल्क व्यवस्था पंजीयन की निःशुल्क व्यवस्था ग्राम पंचायत और जनपद पंचायत कार्यालयों में स्थापित सुविधा केन्द्र पर, तहसील कार्यालयों में स्थापित सुविधा केन्द्र पर और सहकारी समितियों एवं सहकारी विपणन संस्थाओं द्वारा संचालित पंजीयन केन्द्र पर की गई है। पंजीयन की सशुल्क व्यवस्था पंजीयन की सशुल्क व्यवस्था एम.पी. ऑनलाईन कियोस्क, कॉमन सर्विस सेन्टर कियोस्क, लोक सेवा केन्द्र और निजी व्यक्तियों द्वारा संचालित साइबर कैफे पर की गई है। इन केन्द्रों पर पंजीयन के लिये शुल्क राशि प्राप्त करने के संबंध में कलेक्टर निर्देश जारी करेंगे। प्रति पंजीयन के लिये 50 रूपये से अधिक शुल्क निर्धारित नहीं किया जाएगा। किसान पंजीयन के लिए भूमि संबंधी दस्तावेज़ एवं किसान के आधार कार्ड एवं अन्य फोटो पहचान-पत्रों का समुचित परीक्षण कर उनका रिकार्ड रखा जाना अनिवार्य होगा। सिकमी, बटाईदार, कोटवार एवं वन पट्टाधारी किसान के पंजीयन की सुविधा केवल सहकारी समिति एवं सहकारी विपणन सहकारी संस्था द्वारा संचालित पंजीयन केन्द्रों पर उपलब्ध होगी। इस श्रेणी के शत-प्रतिशत किसानों का सत्यापन राजस्व विभाग द्वारा किया जाएगा। पूर्व वर्षों की किसी अपात्र संस्था में केन्द्र प्रभारी एवं ऑपरेटर को किसी अन्य संस्था में पंजीयन के लिए नहीं रखा जायेगा। उपार्जित फसल के भुगतान हेतु बैंक खाता किसान द्वारा समर्थन मूल्य पर विक्रय उपज का भुगतान प्राथमिकता के आधार पर किसान के आधार लिंक बैंक खाते में किया जाएगा। किसान के आधार लिंक बैंक खाते में भुगतान करने में किसी कारण से समस्या उत्पन्न होने पर किसान द्वारा पंजीयन में उपलब्ध कराये गए बैंक खाते में भुगतान किया जा सकेगा। किसान पंजीयन के समय किसान को बैंक का नाम खाता नंबर और IFSC कोड की जानकारी उपलब्ध करानी होगी। अक्रियाशील बैंक खाते, संयुक्त बैंक खाते एवं फिनो, एयरटेल, पेटीएम, बैंक खाते पंजीयन में मान्य नहीं होंगे। पंजीयन व्यवस्था में बेहतर सेवा प्राप्त करने के लिए यह जरूरी होगा कि किसान अपने आधार नंबर से बैंक खाता और मोबाईल नंबर को लिंक कराकर उसे अपडेट रखें। जिला कलेक्टर्स को निर्देशित किया गया है कि जिला और तहसील स्तर पर स्थापित आधार पंजीयन केन्द्रों को क्रियाशील रखा जाए ताकि किसान वहां जाकर आसानी से अपना मोबाईल नंबर एवं बायोमेट्रिक अपडेट करा सकें। इस कार्य के लिए पोस्ट ऑफिस में संचालित आधार सुविधा केन्द्र का भी उपयोग किया जा सकता है। आधार नंबर से बैंक खाता लिंक कराने के लिए बैंकों के साथ भी समन्वय आवश्यक होगा। किसान के आधार लिंक बैंक खाते के सत्यापन हेतु पंजीयन के दौरान ही 1 रूपये का ट्रांजेक्शन मध्यप्रदेश राज्य आपूर्ति निगम द्वारा ई-उपार्जन/JIT पोर्टल के माध्यम से कराया जाएगा। आधार नंबर का वेरिफिकेशन पंजीयन कराने और फसल बेचने के लिए आधार नंबर का वेरिफिकेशन कराना अनिवार्य होगा। वेरीफिकेशन आधार नंबर से लिंक मोबाईल नंबर पर प्राप्त OTP से या बायोमेट्रिक डिवाईस से किया जा सकेगा। किसान का पंजीयन केवल उसी स्थिति में हो सकेगा जबकि किसान के भू-अभिलेख के खाते एवं खसरे में दर्ज नाम का मिलान आधार कार्ड में दर्ज नाम से होगा। भू-अभिलेख और आधार कार्ड में दर्ज नाम में विसंगति होने पर पंजीयन का सत्यापन तहसील कार्यालय से कराया जाएगा। सत्यापन होने की स्थिति में ही उक्त पंजीयन मान्य होगा। किसानों को करें एसएमएस विगत रबी एवं खरीफ के पंजीयन में जिन किसानों के मोबाइल नंबर उपलब्ध हैं, उन्हें एसएमएस से सूचित करने के निर्देश दिये गये हैं। गांव में डोंडी पिटवाकर ग्राम पंचायतों के सूचना पटल पर पंजीयन सूचना प्रदर्शित कराने तथा समिति/ मंडी स्तर पर बैनर लगवाने के निर्देश भी दिये गये हैं। किसान पंजीयन की सभी प्रक्रियाएँ समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिये गये हैं।  

धान मिलिंग और परिवहन के दौरान वाहनों में जीपीएस सिस्टम आवश्यक रूप से लगवाने के साथ उसकी मॉनिटरिंग भी करें : मंत्री राजपूत

भोपाल मध्य प्रदेश में पिछले दिनों  EOW  के छापे में सामने आये करीब 5 करोड़ रुपये के धान उपार्जन घोटाले के बाद सरकार सख्त हो गई है, हाल ही में जबलपुर में भी नागरिक आपूर्ति निगम, राइस मिलर्स और और सोसायटियों के कर्मचारियों की मिलीभगत से एक ही जिले में करीब 30 करोड़ रुपये से ज्यादा की हेराफेरी के सबूत मिले जिसके बाद कलेक्टर के निर्देश फर्जीवाड़े में शामिल 74 लोगों के खिलाफ जिले के 12 थानों में एफआईआर दर्ज की गई है। अब सरकार इन गड़बड़ियों पर नजर रखने के लिए एक मजबूत निगरानी तंत्र बनाने जा रहा है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि धान और गेहूं उपार्जन, परिवहन और भण्डारण में सामने आने वाली गड़बडियों को रोकने के लिए एकीकृत निगरानी तंत्र जल्द विकसित करें। जिससे कहीं भी होने वाली गड़बड़ी का तत्काल पता लग जाये और उसपर एक्शन लिया जा सके। खाद्य मंत्री राजपूत ने अफसरों को दिए ये निर्देश खाद्य मंत्री ने अपर मुख्य सचिव खाद्य एवं आयुक्त खाद्य को निर्देश दिये हैं कि धान और चावल के मिलिंग और परिवहन के दौरान वाहनों में जीपीएस सिस्टम आवश्यक रूप से लगवाने के साथ उसकी मॉनिटरिंग भी करें। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि मुख्यालय स्तर पर कन्ट्रोल कमांड सेन्टर बनाया जाए जिससे खाद्य विभाग, नागरिक आपूर्ति निगम एवं वेयर हाउसिंग कार्पोरेशन के जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों को पूरे प्रदेश में भण्डारित किये गये उपार्जित धान एवं गेहूँ और चावल की मात्रा, परिवहन और मिलिंग की जानकारी एक ही क्लिक पर उपलब्ध हो जाए। सदन को ये आश्वासन दिया है मंत्री ने गौरतलब है कि खाद्य मंत्री राजपूत ने विधानसभा में सदन को आश्वस्त किया था कि उपार्जन, परिवहन, भण्डारण में गड़बड़ी रोकने के लिए एकीकृत प्रणाली विकसित कर होने वाली गड़बड़ियों पर लगाम कसेंगे। सहकारिता विभाग के सहयोग से मिलकर गड़बड़ी करने वाली समितियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई जारी रखेगे। सीएमआर की रैंडम जांच के निर्देश प्रदेश में खरीफ उपार्जन वर्ष 2024-25 के तहत उपार्जित धान की मिलिंग का कार्य विभिन्न मिलर्स के माध्यम से जारी है। खाद्य मंत्री राजपूत ने प्रबंध संचालक नागरिक आपूर्ति निगम को 11 फरवरी 2025 को निर्देश दिये थे कि धान की मिलिंग कार्य उपरांत मानक गुणवत्ता के चावल प्राप्त करने के लिए नागरिक आपूर्ति निगम द्वारा मुख्यालय स्तर पर एक दल गठित कर मिलिंग के दौरान समय-समय पर सीएमआर की रैंडम जांच सुनिश्चित करें। 3 सदस्यीय दल करेगा जांच खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि खरीफ उपार्जन वर्ष 2024-25 में धान की मिलिंग उपरांत चावल की गुणवत्ता भारत शासन के निर्धारित मापदंडों के अनुरूप सुनिश्चित करने के लिए एक 3 सदस्यीय दल नागरिक आपूर्ति निगम के द्वारा गठित किया गया है। टीम में मुख्यालय में पदस्थ सहायक महाप्रबंधक (परिदान), सहायक महाप्रबंधक (गु.नि.), गुणवत्ता नियंत्रक (मुख्यालय) को शामिल किया गया है। यह समिति समय-समय पर जिलों में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी सामने आने पर संबंधित के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने के साथ उसी समय वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराएगी। EWO के छापे में 5 करोड़ का धान उपार्जन घोटाला आया सामने आपको बता दें मध्य प्रदेश में सामने आये धान उपार्जन घोटाले के बाद मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के निर्देश पर EOW  ने इस महीने की शुरुआत में प्रदेश व्यापी छापामार कार्यवाही की इसमें भोपाल, जबलपुर, सागर, रीवा और ग्वालियर EOW पुलिस अधीक्षक कार्यालयों की टीमों ने मिलकर 12 जिलों की 150 उपार्जन समितियों एवं 140 वेयर हॉउसेस पर छापे मारे थे जिसमें 19,910.53 क्विंटल धान की हेराफेरी के सबूत मिले जिसकी कीमत लगभग 5 करोड़ रुपये है। धान की बोरियों में मिली थी भूसी, कांग्रेस ने PM Modi को लिखा पत्र    खास बात रही कि सतना में EOW की टीम को कनक वेयर हाउस में 535 क्विंटल धान के स्थान पर भूसी मिली। वेयर हाउस में सेवा सहकारी समिति पिंडरा एवं सेवा सहकारी समिति हिरौंदी जिला सतना द्वारा धान का भण्डारण किया गया था। घोटाला सामने आने के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सीबी आई से इसकी जाँच कराने के लिए पत्र भी लिखा है। जबलपुर में सामने आया धान परिवहन घोटाला उधर जबलपुर में धान परिवहन घोटाला सामने आया है, एक शिकायत के बाद कलेक्टर दीपक सक्सेना ने जाँच समिति गठित कर जाँच कराई जिसमें पता चला कि जबलपुर जिले में अंतर-जिला मिलिंग के लिए बाहर भेजी जाने वाली धान को मिलर्स ने स्थानीय दलालों के जरिए बेच दिया। धान परिवहन के लिए 614 ट्रिप में से 571 का टोल नाकों पर कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। साथ ही, फर्जी रजिस्ट्रेशन नंबरों का इस्तेमाल किया गया, जिसमें 307 ट्रिप में ट्रक की बजाय कारों के नंबर दर्ज किए गए। 30 करोड़ रुपये से अधिक की हेराफेरी, 74 लोगों पर FIR दर्ज   शुरूआती जाँच में ही सामने आया कि 30 करोड़ 14 लाख 19 हजार 600 रुपये कीमत की 1 लाख 31 हजार 52 क्विंटल धान की हेराफेरी हुई, जाँच रिपोर्ट के बाद कलेक्टर के आदेश पर 74 व्यक्तियों के खिलाफ 12 थानों में 12 एफआईआर दर्ज की गई इसमें नागरिक आपूर्ति निगम के जिला प्रबंधक सहित 13 कर्मचारी, 17 राइस मिलर और सहकारी समितियों के उपार्जन केंद्रों से जुड़े 44 अधिकारी-कर्मचारी शामिल हैं।

मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने भेजा 20 करोड़ का मानहानि नोटिस, नेता प्रतिपक्ष बोले- न डरे हैं, न डरेंगे

 भोपाल मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को 20 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजा है. मंत्री पर जमीन खरीद घोटाले और परिवहन विभाग में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद यह नोटिस जारी किया गया है. राजपूत ने सिंघार पर उनकी छवि खराब करने का आरोप लगाते हुए नोटिस में 15 दिनों के भीतर जवाब देने और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है. नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने गोविंद सिंह राजपूत पर आरोप लगाया था कि उन्होंने परिवहन मंत्री रहते हुए परिवहन विभाग के भ्रष्टाचार से प्राप्त धन से 1250 करोड़ रुपये की जमीन खरीदी. इसके अलावा, सिंघार ने पूर्व आरटीओ कांस्टेबल सौरभ शर्मा के मामले को उठाते हुए परिवहन घोटाले में राजपूत की संलिप्तता का दावा किया था. इन आरोपों को राजपूत ने सिरे से खारिज करते हुए इसे उनकी प्रतिष्ठा को धूमिल करने की साजिश करार दिया. सिंघार ने कहा था-राजपूत ने खरीदी 400 करोड़ की जमीनें नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने 15 फरवरी को कांग्रेस प्रदेश कार्यालय में पत्रकार वार्ता में मंत्री गोविंद सिंह राजपूत पर कई आरोप लगाए थे. उन्होंने कहा था “2019 से 2024 तक गोविंद सिंह राजपूत और परिवार के लोगों के लोगों ने करोड़ों की जमीन खरीदी. उन्होंने रजिस्ट्री के कागजात दिखते हुए कहा था कि मंत्री गोविंद सिंह, पत्नी सविता सिंह, पुत्र आकाश सिंह, आदित्य सिंह के नाम पर सागर शहर में तिलीमाफी, बशियाभान्या, कनेरादेव, भापेल, जैसीनगर, झिला, नरयावली सहित कई क्षेत्रों में 150 एकड़ से ज्यादा जमीन की खरीदारी का रिकॉर्ड दर्ज है. उन्होंने पूछा था कि आखिर क्यों सौरभ शर्मा और उसके साथियों की गिरफ्तारी के बाद भी डायरी में छिपे नाम सामने नहीं आ रहे हैं.” नोटिस से बढ़ी सिंघार की मुश्किलें उनके आरोपों के बाद मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने 20 करोड़ के मानहानी का नोटिस उमंग सिंघार को भेज दिया है. वकील के माध्यम से भेजे गए नोटिस में कहा गया है कि छवि खराब करने के लिए झूठे आरोप लगाए गए हैं. नोटिस में 15 दिनों में नेता प्रतिपक्ष से जवाब देने के लिए कहा गया है. वहीं मानहानि नोटिस मामले में उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया X पर प्रतिक्रिया दी है. नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि “नोटिस का जवाब भी देंगे और कोर्ट भी जाएंगे. न डरे हैं, न डरेंगे! नोटिस के जवाब में उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने ट्वीट किया, “नोटिस का जवाब भी देंगे और कोर्ट भी जाएंगे. न डरेंगे, न झुकेंगे.” सिंगार ने अपने आरोपों पर कायम रहते हुए कहा कि वे इस मामले को कानूनी रूप से लड़ेंगे. गोविंद सिंह राजपूत ने नोटिस में स्पष्ट किया कि उमंग सिंघार के ‘बेबुनियाद और दुर्भावनापूर्ण’ आरोपों ने उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाया है. नोटिस में सिंगार से माफी मांगने के साथ-साथ 20 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की गई है. यह विवाद भोपाल की सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है, और अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि यह मामला कोर्ट में क्या मोड़ लेता है.

मध्यप्रदेश अब औद्योगिक विकास के नए दौर में प्रवेश कर रहा है:गोविंद सिंह राजपूत

भोपाल मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में दो दिन पूर्व संपन्न दो दिवसीय ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) न केवल मध्यप्रदेश बल्कि पूरे भारत की अर्थव्यवस्था के लिए मील का पत्थर साबित हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की उपस्थिति ने इस समिट को एक नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया। मध्यप्रदेश अब औद्योगिक विकास के नए दौर में प्रवेश कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में औद्योगीकरण को बढ़ावा देने के लिए “लोकल से ग्लोबल” दृष्टिकोण को अपनाया गया है। इस रणनीति के तहत रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव और रोड शो जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से निवेशकों और उद्योगपतियों को आकर्षित करने के ठोस प्रयास किए गए हैं। यह पहल न केवल राज्य की आर्थिक समृद्धि को गति दे रही हैं, बल्कि स्थानीय उद्योगों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान भी दिला रही हैं।  औद्योगिक विकास की नींव तब मजबूत होती है जब स्थानीय उद्योगों को आवश्यक संसाधन, तकनीकी सहायता और निवेश का अवसर मिलता है। इसी सोच के साथ मध्यप्रदेश सरकार ने बीते कुछ महीनों में संभाग स्तर पर 7 रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित किए, जिनका उद्देश्य स्थानीय व्यापारियों और उद्यमियों को निवेशकों और बड़े उद्योगपतियों से जोड़ना था। रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के कारण स्थानीय उद्योगों को राष्ट्रीय पहचान मिली। छोटे और मध्यम उद्यमों को बड़े व्यापारिक नेटवर्क से जोड़ा गया। इससे निवेशकों ने मध्यप्रदेश में उद्योग स्थापित करने की रुचि दिखाई। इसके साथ ही उद्योगों को और अधिक अनुकूल माहौल देने के लिए आवश्यक बदलावों पर विचार किया गया। बढ़ते उद्योगों के कारण युवाओं के लिए नए रोजगार सृजित हुए। इन कॉन्क्लेव्स के माध्यम से एमएसएमई सेक्टर को विशेष बढ़ावा मिला, जिससे छोटे और मझोले उद्योगों को नई उड़ान मिली। प्रदेशभर में रिजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के सफल आयोजन ने निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया और मध्यप्रदेश को निवेश के लिए एक मजबूत विकल्प के रूप में स्थापित किया। रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव और रोड शो जैसे आयोजनों के माध्यम से मध्यप्रदेश सरकार ने यह साबित कर दिया है कि वह न केवल स्थानीय उद्योगों को समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध है, बल्कि वैश्विक निवेश को भी आकर्षित करना चाहती है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य तेजी से औद्योगिक प्रगति की ओर बढ़ रहा है, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, आधारभूत संरचना मजबूत होगी और प्रदेश की आर्थिक स्थिति और अधिक सुदृढ़ होगी। औद्योगिक क्रांति के इस नए दौर में, मध्यप्रदेश सिर्फ निवेशकों के लिए एक संभावनाओं से भरा प्रदेश नहीं, बल्कि एक ऐसा हब बन गया है जहां उद्योग, व्यापार और नवाचार एक साथ विकसित हो रहे हैं। आने वाले वर्षों में इन प्रयासों का प्रभाव और अधिक स्पष्ट होगा, जिससे प्रदेश न केवल आत्मनिर्भर भारत अभियान में योगदान देगा, बल्कि औद्योगिक क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम करेगा। राजधानी में आयोजित ग्लोबल इनवेस्टर्स समिट के आयोजन पर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और उनके मंत्रिमण्डल सहयोगी तथा अफसरों के टीमवर्क की हौसला अफजाई करते हुए देश के गृहमंत्री अमित शाह  ने इस अवसर पर कहा कि यह आयोजन देश को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगा। प्रधानमंत्री ने “विकास की नई उड़ान” थीम पर जोर देते हुए कहा कि मध्यप्रदेश भारत के औद्योगिक और आर्थिक भविष्य का अहम स्तंभ बनेगा।  नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि  आज जब दुनिया भारत की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देख रही है, तब मध्यप्रदेश जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाएं वैश्विक निवेशकों को आकर्षित कर रही है।   प्रधानमंत्री ने पांच प्रमुख बिंदुओं पर बल दिया, जो  निवेशकों को मध्यप्रदेश में निवेश के लिए आकर्षित कर रही हैं।। उन्होंने कहा कि यहां पिछले 10 वर्षों में 5 लाख किलोमीटर से अधिक सड़कें बनीं।  100% रेलवे विद्युतीकरण  का कार्य पूरा हुआ। राज्य में नए लॉजिस्टिक्स हब और औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं।  रीवा और ओंकारेश्वर सोलर प्रोजेक्ट्स से मध्यप्रदेश भारत की ग्रीन एनर्जी कैपिटल बन रहा है।  मध्यप्रदेश में 31,000 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता है, जिसमें 30% नवीकरणीय ऊर्जा शामिल है।  मध्यप्रदेश को देश का “फूड प्रोसेसिंग हब बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।   मिलेट्स (अन्न) और जैविक कृषि के क्षेत्र में नई संभावनाएं दिखाई दे रही है। मध्यप्रदेश में ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल और फार्मा सेक्टर में रिकॉर्ड निवेश  आ रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पीथमपुर को भारत का “डिफेंस और ऑटोमोबाइल हब” बनाने की योजना है। ओंकारेश्वर, उज्जैन महाकाल लोक और सांची जैसे धरोहर स्थल वैश्विक आकर्षण के केंद्र बन रहे हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन और ” हील इन इंडिया “अभियान को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने आशा व्यक्त की कि भारत की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में मध्यप्रदेश की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनकी सरकार की निवेश अनुकूल नीतियों की प्रशंसा की और निवेशकों को प्रदेश में उद्योग स्थापित करने के लिए आमंत्रित किया।   केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने  कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर को पार करेगी और मध्यप्रदेश इसमें अहम योगदान देगा ।उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि  प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत अब “विरासत भी, विकास भी” की नीति के साथ आगे बढ़ रहा है । केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए उपयोगी नीतियाँ अपनाई गई हैं। लॉजिस्टिक्स हब, एक्सप्रेसवे और औद्योगिक गलियारों का तेजी से विकास हो रहा है।टेक्सटाइल, फार्मा,ऑटोमोबाइल और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस समिट की सफलता को राज्य के लिए ऐतिहासिक बताया है उन्होंने कहा कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में 30.77 लाख करोड़ से अधिकांश के निवेश प्रस्ताव मिले हैं  जिससे प्रदेश में लाखों नए रोजगार के अवसर सृजित होंगे।   मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने वर्ष 2025 को उद्योग वर्ष घोषित किया है जिसमें नवाचार, तकनीक और निवेश को प्रोत्साहित किया जाएगा। उन्होंने भोपाल में एक नए इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर बनाने की भी घोषणा की, जिससे भविष्य में ऐसे बड़े आयोजनों को और अधिक सुविधाजनक बनाया जा सके।     मध्यप्रदेश को “कॉटन कैपिटल ऑफ इंडिया” का दर्जा मिला है । चंदेरी और माहेश्वरी साड़ियों” को जीआई टैग … Read more

सुरखी विधानसभा के छोटे-छोटे गांव आज स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र तथा पक्की सड़कों से जुड़ चुके : मंत्री राजपूत

भोपाल सुरखी विधानसभा के छोटे-छोटे गांव आज स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र तथा पक्की सड़कों से जुड़ चुके हैं। कम समय में तेज विकास कार्य करके सुरखी विधानसभा क्षेत्र ने नया इतिहास रचा है। यह बात खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने सुरखी विधानसभा क्षेत्र के ग्राम बहादुरपुर तथा कल्याणपुर में विभिन्न विकास कार्यों के भूमि पूजन के अवसर कहीं। मंत्री राजपूत ने कहा कि भाजपा सरकार विकास करने वाली पार्टी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में हमारे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा सभी वर्गों के विकास के लिए योजनाएं बनाई जा रही हैं। आप सभी के आशीर्वाद से आपकी सुरखी विधानसभा क्षेत्र में महानगरों जैसी व्यवस्थाएं आपके लिए की जा रही हैं। उन्होंने ग्राम बहादुरपुर में 65 लाख की लागत से उप स्वास्थ्य केंद्र तथा 11 लाख की लागत से आंगनबाड़ी  का भूमि पूजन किया। साथ ही 15 लाख की पुलिया निर्माण की  घोषणा की। पटेल कुर्मी समाज का हर व्यक्ति सरदार है ग्राम कल्याणपुर में मंत्री राजपूत ने कुर्मी पटेल समाज के लिए 55 लाख की लागत से बनने वाले सामुदायिक भवन का भूमि पूजन किया। पटेल कुशवाहा समाज के लिए एक एकड़ करोड़ की जमीन सामुदायिक भवन बनाने के लिए दी गई है। मंत्री राजपूत ने कहा कि कुर्मी पटेल समाज का हर व्यक्ति सरदार है। क्योंकि सरदार वल्लभ भाई पटेल ने खंड-खंड भारत को अखंड बनाया है और आप सभी उन के वंशज है। आप सभी में प्रतिभा है और देश के निर्माण में पटेल समाज का बहुत योगदान है। हमारे प्रधानमंत्री  ने सरदार वल्लभभाई पटेल की विश्व की सबसे बड़ी प्रतिमा बनाकर यह बता दिया कि भाजपा सरकार पटेल साहब के द्वारा किए गए राष्ट्रीय निर्माण तथा  सेवा के लिए याद किया है। इस सामुदायिक भवन का नाम सरदार वल्लभभाई पटेल के नाम पर रखा जाएगा तथा मेरी ओर से यहां सरदार वल्लभभाई पटेल की बड़ी प्रतिमा लगाई जाएगी। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी राहतगढ़ की स्टेडियम का नाम सरदार वल्लभभाई पटेल के नाम पर रखा गया है। यह हमारी सरदार पटेल के प्रति श्रद्धा और आप लोगों के प्रति समर्पण है।   इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में मिलिंग नीति की खाद्य मंत्री ने की समीक्षा

भोपाल  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविंद सिंह राजपूत ने खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 के मिलिंग नीति की समीक्षा की। उन्होंने अफसरों को कड़े निर्देश दिये  कि उपार्जन के दौरान या उसके बाद होने वाली गड़बडि़यों को रोकने के लिए विभाग के प्रमुख सचिव और आयुक्त उपार्जन केन्द्रों का औचक निरीक्षण करें। मंत्रालय में प्रस्तावित मिलिंग नीति की समीक्षा करते हुए खाद्य मंत्री राजपूत ने कहा कि व्यवस्था में सुधार लाने के लिए अफसर कड़े निर्णय लेने से गुरेज न करें। व्यवस्था में सुधार लाने के लिए किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनिमितता पाये जाने पर जिम्मेदारों के  खिलाफ कठोर कार्यवाही करें। उपार्जन में गड़बड़ी रोकने के लिए उड़न दस्ता गठित करें। उड़नदस्ता औचक रूप से उपार्जन केंद्रों का निरीक्षण करेंगे।     मंत्री राजपूत ने कहा कि मैदानी स्तर पर   जिला प्रबंधक नियमानुसार कार्य करने में कोई कोताही न बरतें।  अफसरों को निर्देश दिये गये कि उपार्जन कार्य में संलग्न सर्वेयरों पर सतत् निगरानी रखें, जिससे वे उपार्जन के दौरान किसी प्रकार की लापरवाही न करें। उन्होंने व्यवस्था में सुधार लाने के लिए कुछ नई कार्य-योजना बनाने के भी निर्देश अधिकारियों को दिये। बैठक में प्रमुख सचिव खाद्य श्रीमती रश्मि अरूण शमी, आयुक्त खाद्य सिबि चक्रवर्ती, एमडी नागरिक आपूर्ति निगम पी.एन. यादव सहितसंबंधित अधिकारी उपस्थित थे।   मशीनों से होगी अनाज की सफाई, मंडला में पायलेट प्रोजेक्ट खाद्य मंत्री राजपूत ने निर्देश दिये कि भारतीय खाद्य निगम को उच्च गुणवत्ता का चावल प्रदान करने के लिए अनाज की सफाई मशीनों से कराई जाये। बैठक में निर्णय लिया गया कि इस कार्य को पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में मंडला से शुरूआत की जायेगी। इसे बाद में पूरे प्रदेश में लागू किया जायेगा, जिससे भारतीय खाद्य निगम को गुणवत्ता युक्त चावल दिया जा सके। 20 दिन में मानक स्तर का चावल जमा कराना अनिवार्य प्रस्तावित नई मिलर्स नीति 2024-25 में पहली बार दंड का प्रावधान किया गया है। इसमें  चावल की सूचना मिलर्स को प्राप्त होने के दिनांक से 20 दिवस में मानक स्तर का चावल जमा कराना अनिवार्य होगा। ऐसा न होने की स्थिति में मिलर्स पर 2 रूपये प्रति दिन प्रति क्विंटल का जुर्माना लगाया जाऐगा और एक माह में मानक स्तर का चावल जमा न कराये जाने पर मिलर्स द्वारा जमा की गई प्रतिभूति राशि राजसात कर ली जाऐगी। बैठक में निर्णय लिया गया कि मिलर्स द्वारा भारतीय खाद्य निगम को प्रदान किये जाने वाले चावल की मात्रा 60 प्रतिशत से कम प्रदान करने पर मिलर्स को प्रोत्साहन राशि नहीं दी जाऐगी।  

राहतगढ़ में आयोजित पार्षद क्रिकेट कप में खाद्य मंत्री राजपूत ने किया पुरस्कार वितरण

भोपाल खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा है कि सुरखी विधानसभा क्षेत्र में युवाओं के लिए स्टेडियम, जिम जैसी सुविधाएं उपलब्ध हो चुकी हैं। हमारे युवाओं के लिए हर सुविधा उपलब्ध है, इसलिए सभी युवा अपने शरीर पर और अपने खेल पर ध्यान दें। खाद्य मंत्री राजपूत ने सागर जिले की सुरखी विधानसभा क्षेत्र के राहतगढ़ में आयोजित पार्षद क्रिकेट कप के फाइनल मुकाबले में खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि इस टूर्नामेंट में सभी खिलाड़ी विजेता है, क्योंकि खिलाड़ी कभी हारता नहीं है। खिलाड़ी या तो वह जीतता है या तो सीखता है, इसलिए जो कमियां रही हो खिलाड़ी उन्हें पूरा करने का प्रयास करें और अगली बार फिर पूरी तैयारी के साथ मैदान पर जीत के इरादों के साथ उतरे।  मंत्री राजपूत ने  प्रतियोगिता में शामिल विजेता तथा  उपविजेता एवं टूर्नामेंट में भाग लेने वाले खिलाड़ियों को पुरस्कृत किया। पार्षद क्रिकेट कप का  आयोजन 4 नवंबर से किया गया था। इसमें 16 टीमों ने भाग लिया। प्रतियोगिता में चार-चार मैच खेले गए । रविवार को इस टूर्नामेंट का फाइनल मुकाबला खेला गया, जिसमें सानू-11 टीम विजेता रही तथा उप विजेता टीम अली-11 रही। इस दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधि  सहित क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।  

मिलर्स नीति और उपार्जन नीति की खाद्य मंत्री राजपूत ने मंत्रालय में समीक्षा

भोपाल अच्छा कार्य करने वाले मिलर्स को प्रोत्साहित करें और नियमानुसार कार्य नहीं करने वालों के विरूद्ध कार्रवाई करें। खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने यह निर्देश मिलर्स नीति और धान, ज्वार, बाजरा की उपार्जन नीति की समीक्षा के दौरान दिये। उन्होंने कहा कि मिलर्स द्वारा लापरवाही करने पर उनकी अमानत राशि राजसात करने की कार्रवाई करें। राजपूत ने मिलर्स से समय पर धान की मिलिंग कर एजेंसियों के पास चावल जमा कराना सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। उपार्जन केन्द्र पर हों सभी सुविधाएं खाद्य मंत्री राजपूत ने कहा कि उपार्जन केन्द्रों पर किसानों के लिये सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सुविधायुक्त उपार्जन केन्द्रों की फोटो बुलवाएं। क्वालिटी कंट्रोल पर पूरा ध्यान दें। क्वालिटी चेक करने वाले सर्वेयर पर भी नजर रखें। मंत्री राजपूत ने कहा कि सर्वेयर का नया कैडर बनाने का प्रस्ताव तैयार करें। उपार्जन केन्द्रों पड़ोसी राज्यों से लायी जाने वाली उपज की अवैध बिक्री को रोकने के समुचित प्रबंध करें। उच्च गुणवत्ता के बारदाने उपयोग में लाये जायें। सभी मंडियों, उपार्जन केन्द्रों एवं भण्डारण केन्द्रों के नापतौल उपकरणों एवं धर्मकाटों का सत्यापन एवं प्रमाणीकरण कराएं। केन्द्र सरकार की संस्थाएं, नेशनल कन्ज्यूमर कोऑपरेटिव फेडरेशन (एनसीसीएफ) और केन्द्रीय भण्डार को उपार्जन कार्य से जोड़ने के संबंध में भी चर्चा हुई। खाद्य मंत्री राजपूत ने निर्देश दिये कि वर्ष 2024-25 की मिलिंग नीति को जारी करने से पहले छोटे तथा बड़े मिलर्स एवं उपार्जन कार्य में पहली बार शामिल हो रही केन्द्र सरकार की संस्था एनसीसीएफ एवं केन्द्रीय भण्डार के लिये प्रदेश में अनुकूल और सहयोगात्मक वातावरण बनाया जाये। उन्होंने कहा कि उपार्जन कार्य को सरल एवं सुविधायुक्त बनाने के लिये वेयरहाउसिंग कार्पोरेशन तथा नागरिक आपूर्ति निगम से एक-एक अधिकारी नोडल ऑफिसर के रूप में नियुक्त किया जाये। इससे उपार्जन कार्य में शामिल एजेंसी की किसी भी प्रकार की समस्या का तुरंत निराकरण हो सकेगा। बैठक में बताया गया कि उपार्जन केन्द्र से मिलर्स अथवा गोदाम तक मैपिंग कराई जायेगी, इससे उपार्जित अनाज के परिवहन की सटीक जानकारी मिल सकेगी। पायलट प्रोजेक्ट के रूप में मंडला में अनाज की सफाई मशीनों द्वारा कराने का निर्णय लिया गया है। यहां पर प्रोजेक्ट सफल होने पर इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जायेगा। बैठक में प्रमुख सचिव खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण श्रीमती रश्मि अरूण शमी, आयुक्त खाद्य सिबि चक्रवर्ती, एमडी नागरिक आपूर्ति निगम पी.एन. यादव, एडिशनल एमडी वेयरहाउसिंग ओ.पी. सनोड़िया सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।  

दिवाली पर्व पर नाप-तौल उपकरणों की जाँच का विशेष अभियान 9 से 30 अक्टूबर तक

दिवाली पर्व पर नाप-तौल उपकरणों की जाँच का विशेष अभियान 9 से 30 अक्टूबर तक खाद्य मंत्री राजपूत ने दिये निर्देश भोपाल दशहरा एवं दिवाली पर्व पर उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए मिठाई, नमकीन, बर्तन, पेन्ट एवं सराफा व्यापारियों के यहाँ नाप-तौल उपकरणों की जाँच के लिये 9 से 30 अक्टूबर तक विशेष अभियान चलाया जायेगा। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा है कि उपभोक्ताओं का हित सर्वोपरि है। उपभोक्ताओं को सही कीमत और सही वजन की सामग्री मिलनी चाहिये। इसी उद्देश्य को पूरा करने के लिये विशेष अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के दौरान यह जाँच की जायेगी कि नाप-तौल उपकरण नियम अनुसार सत्यापित एवं मुद्रांकित हैं कि नहीं। मिठाई विक्रेता द्वारा मिठाई के साथ डिब्बे का वजन तौलना नियम विरुद्ध है। साथ ही यह भी जाँच की जायेगी कि पैक बंद वस्तुओं को एमआरपी से अधिक कीमत पर तो नहीं बेचा जा रहा है। जाँच अभियान में अनियमितता करने वाले व्यापारियों के विरुद्ध विधिक माप अधिनियम एवं नियमों के अंतर्गत प्रकरण पंजीबद्ध किये जायेंगे।  

पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू की गई

मध्यप्रदेश में लागू होगी‘’राशन आपके द्वार’’ योजना, घर-घर पहुंचेगा राशन : मंत्री राजपूत खाद्य मंत्री बोले, सिस्टम में सुधार और बदलाव दिखेगा पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू की गई “राशन आपके द्वार” योजना को आने वाले समय में पूरे मध्यप्रदेश में लागू : मंत्री राजपूत भोपाल खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा है कि मध्यप्रदेश के जनजातीय विकासखंडों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू की गई “राशन आपके द्वार” योजना को आने वाले समय में पूरे मध्यप्रदेश में लागू किया जाएगा। सोमवार को केन्द्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ गुना प्रवास पर पहुंचे राजपूत ने मीडिया से चर्चा के दौरान यह बात कही। मंत्री राजपूत ने बताया कि जरूरतमंद व्यक्तियों को राशन मिले, इसके लिए मध्यप्रदेश सरकार कृत संकल्पित है। वर्तमान में पीडीएस दुकानों में राशन वितरण के लिए बहुत सुधार किये जा रहे हैं। गांव में बुजुर्ग लोगों को राशन वितरण के लिए यदि उनका अंगूठा का निशान सही काम नहीं कर रहा है, तो उन्हें राशन देने की व्यवस्था नॉमिनी के माध्यम से की जा रही है। खाद्य मंत्री राजपूत ने बताया कि मध्यप्रदेश में कई जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में विशेष रूप से ट्रायबल एरिया में राशन घर-घर पहुंचाये जाने की तैयारी  की जा रही है। ‘’राशन आपके द्वार’’ के अंतर्गत राशन लोगों के घर-घर पहुंचाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। फिलहाल प्रदेश के 89 दूरस्थ ग्रामों में परिवहन के माध्यम से राशन पहुंचाया जा रहा है। अभी यह पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में है और आने वाले समय में इसे पूरे प्रदेश में लागू करेंगे। आने वाले समय में हम गांव – गांव की जगह घर – घर राशन पहुंचाने का कार्य करेंगे। पीडीएस सिस्टम में लगातार हो रहे सुधार खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  राजपूत ने कहा कि पीडीएस सिस्टम में लगातार सुधार जारी है। जहां भी अनियमितता सामने आती हैं, हम तुरंत  उसमें सुधार कर कार्रवाई करते हैं। खाद्य मंत्री राजपूत ने कहा कि आने वाले समय में पीडीएस सिस्टम में बदलाव और नवाचार लागू होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार जनकल्याण की दिशा में सतत विकास की ओर बढ़ रही है। राजपूत ने कहा कि हमारा प्रयास है कि गांव-गांव की जगह अब घर – घर राशन पहुंचे ताकि कोई भी पात्र हितग्राही इस लाभ से वंचित न रहे।  

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