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स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही पर जब उठे सवाल — तो बौखलाए बीएमओ ने मीडिया से तोड़ा रिश्ता!

When questions were raised about the negligence of the health department, the distraught BMO broke ties with the media! नलखेड़ा। जनता के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी संभालने वाले ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. विजय यादव शायद भूल गए हैं कि सरकारी कुर्सी जवाबदेही के लिए होती है, अहंकार के लिए नहीं।स्वास्थ्य विभाग की अव्यवस्थाओं पर जब मीडिया ने आईना दिखाया, तो बीएमओ ने उस आईने को ही तोड़ देने का रास्ता चुन लिया।मीडिया और प्रशासनिक अधिकारियों के व्हाट्सएप ग्रुप से खुद को अलग कर लेना, क्या इस बात का प्रमाण नहीं कि अधिकारी आलोचना से भाग रहे हैं? नलखेड़ा में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति किसी से छिपी नहीं है।अस्पतालों में गंदगी, झोलाछाप डॉक्टरों का बोलबाला, पीने के पानी की दुर्दशा और जांच केंद्रों की मनमानी – इन सब पर जब पत्रकारों ने बार-बार लिखा, तो विभाग की नींद टूटने के बजाय बेबसी और दबाव की बदबू आने लगी।जिम्मेदार अधिकारी ने सुधार की दिशा में कदम उठाने के बजाय पत्रकारिता पर ही दूरी बनाकर यह साबित कर दिया कि अब सिस्टम की पारदर्शिता उन्हें खटकने लगी है। सबसे गंभीर सवाल यह है कि डॉ. यादव पिछले 23 सालों से नलखेड़ा में ही क्यों टिके हुए हैं?क्या स्वास्थ्य विभाग में कोई और अधिकारी नहीं जो इस जिम्मेदारी को संभाल सके?या फिर स्थानीय राजनीतिक संरक्षण और रसूख ने नियमों को ताक पर रख दिया है? इतने लंबे समय से एक ही जगह जमे रहना, खुद में एक बड़ा सवाल है —क्योंकि विभागीय नियम साफ कहते हैं कि हर अधिकारी का तबादला निश्चित अवधि में होना चाहिए ताकि निष्पक्षता बनी रहे।लेकिन जब अधिकारी खुद को पद से बड़ा समझने लगे, तो ऐसी ही नौबत आती है — जहां जनता बीमार है, और जिम्मेदार मौन। वंदे मातरम कार्यक्रम जैसे सरकारी आयोजनों से दूरी बनाना,मीडिया संवाद से पलायन करना,और ग्रुप छोड़ देना —ये सब वही संकेत हैं जो यह बताते हैं कि नलखेड़ा का स्वास्थ्य तंत्र बीमार है और इलाज करने वाला खुद इलाज से भाग रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा किक्या डॉ. विजय यादव इस आलोचना को आत्ममंथन का अवसर बनाएंगे,या फिर आलोचना से चिढ़कर नलखेड़ा को लाचारियों की नई दवा लिख देंगे।

प्रेस क्लब नलखेड़ा ने झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ की बड़ी पहल

Press Club Nalkheda took a big initiative against quack doctors. चंदा कुशवाह ( संवाददाता )नलखेड़ा ! क्षेत्र में बढ़ते झोलाछाप डॉक्टरों के आतंक और जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ को लेकर अब प्रेस क्लब नलखेड़ा ने निर्णायक कदम उठाया है। बीते मंगलवार को प्रेस क्लब प्रतिनिधिमंडल ने जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचएमओ) को एक शिकायती आवेदन सौंपा, जिसमें झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ त्वरित और कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है। आवेदन में उल्लेख किया गया कि नलखेड़ा नगर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में कई झोलाछाप डॉक्टर बिना किसी चिकित्सकीय योग्यता के लोगों का इलाज कर रहे हैं। इससे न केवल मरीजों की जान जोखिम में पड़ रही है, बल्कि शासन के स्वास्थ्य नियमों का भी खुला उल्लंघन हो रहा है। प्रेस क्लब के पदाधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं राज्य में झोलाछाप डॉक्टरों पर सख्त अभियान चलाने के निर्देश दे चुके हैं, लेकिन नलखेड़ा में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। आवेदन में इस बात पर नाराजगी जताई गई कि पूर्व में जिन झोलाछाप डॉक्टरों के क्लीनिक पर स्वास्थ्य विभाग ने सील लगाई थी, उन्होंने सील तोड़कर पुनः अपने क्लीनिक चालू कर लिए, जो सीधा-सीधा कानूनी अपराध है। प्रेस क्लब अध्यक्ष राजेश कश्यप ने कहा कि प्रेस क्लब ने यह शिकायत जनता की सुरक्षा और जनहित में दी है। जब प्रशासन कार्रवाई नहीं करता, तब मीडिया को अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभानी पड़ती है। अब स्वास्थ्य विभाग को यह साबित करना होगा कि मुख्यमंत्री के निर्देश सिर्फ कागजों में नहीं, जमीन पर भी लागू होते हैं। आवेदन में यह भी मांग की गई है कि जिन झोलाछाप डॉक्टरों ने सील तोड़ी है, उनके खिलाफ तत्काल कार्यवाही की जाकर उनके क्लीनिकों को स्थायी रूप से बंद कराया जाए। प्रेस क्लब ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में यह लापरवाही किसी बड़ी जनस्वास्थ्य त्रासदी का कारण बन सकती है। छिंदवाड़ा कफ सिरप कांड में जिस तरह जहरीली दवा से मासूम बच्चों की मौत हुई थी, उसी तरह झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा गलत दवा या इलाज नलखेड़ा क्षेत्र में भी किसी गंभीर हादसे का रूप ले सकता है। इसलिए इस खतरे को देखते हुए तत्काल और ठोस कार्रवाई आवश्यक है। जनता और मीडिया की बढ़ती जागरूकता के बीच अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या स्वास्थ्य विभाग वास्तव में इन झोलाछाप डॉक्टरों पर शिकंजा कस पाएगा या मामला फिर से फाइलों में दबकर रह जाएगा। इस संबंध में जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. दिनेश देहलकर ने कहा कि, झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ जांच कराई जाएगी। यदि किसी ने सील तोड़ी है या अवैध रूप से इलाज किया जा रहा है, तो उसके विरुद्ध पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।

‘चिकित्सा योजनाओं का बेहतर संचालन कर सुविधा उपलब्ध कराएं’, राजस्थान-जैसलमेर में स्वास्थ्य मंत्री ने ली चिकित्सा अधिकारियों की बैठक

जैसलमेर। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने कहा कि जैसलमेर जिले की भौगोलिक परिस्थिति को देखते हुए चिकित्सा सेवाऐं सुदृढीकरण के लिए बजट की कोई कमी नहीं रखी जायेगी। उन्होंने कहा कि जिले में एएनएम के जितने भी रिक्त पद है उनको शीघ्र ही भरवाने की कार्यवाही कर दी जायेगी। चिकित्सा मंत्री रविवार को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के सभागार में आयोजित चिकित्सा अधिकारियों की बैठक ले रहे थे। बैठक में जैसलमेर विधायक श्री छोटूसिंह भाटी, पूर्व विधायक डॉ. जितेन्द्र सिंह, जिला कलक्टर प्रताप सिंह, उप निदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाऐं, जोन-जोधपुर डॉ. आदित्य कुमार, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेन्द्र कुमार पालीवाल, प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. चन्दन सिंह तंवर के साथ खण्ड मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं उप मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी उपस्थित थे। चिकित्सा मंत्री ने कहा कि पोर्टल के माध्यम से विशेषज्ञ चिकित्सकों के साथ ही अन्य चिकित्सा अधिकारियों की पोसिं्टग की है, यदि इस जिले में किसी ने कार्यग्रहण नहीं किया है तो उसकी सूचना मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी दे ताकि उसमें भी उचित कार्यवाही करेगें। उन्होंने ने कहा कि डेजर्ट जिले जिनकी भौगोलिक स्थिति अन्य जिलों से भिन्न है, उनमें विशेष रियायत देकर चिकित्सा सुविधाओं को और भी बेहतर बनायेगें। चिकित्सा मंत्री ने कहा कि सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर चिकित्सा सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी के रिक्त पदों पर शीध्र ही पदस्थापन कर दिया जायेगा एवं निर्देश दिये कि वहां पर टेलीमेडिसन के समस्त उपकरण स्थापित कर दूर-दराज ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को चिकित्सा सुविधाओं का विशेषज्ञ चिकित्सकों के माध्यम से पूरा लाभ देवें। चिकित्सा मंत्री ने कहा कि जैसलमेर जिले में एफआरयू यूनिट स्थिति की जानकारी ली तो मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि जिले में 03 एफआरयू रामगढ, मोहनगढ, सांकडा में संचालित है, लेकिन यहां पर स्वीकृत विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद रिक्त है। चिकित्सा मंत्री ने इन रिक्त पदों को शीध्र भरवाने का विश्वास दिलाया। उन्होंने जिले में दी गई एएलएस एम्बुलेंस की जानकारी भी ली एवं कहा कि यहां कि जरूरत के अनुरूप लाठी व रामगढ के लिए एक-एक एएलएस एम्बुलेंस शीध्र ही उपलब्ध करवा दी जावेगी। चिकित्सा मंत्री ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी एवं प्रमुख चिकित्सा अधिकारी को निर्देश दिये की अपने जिले की आवश्यकता अनुसार सीटी स्केन एवं एमआरआई एवं अन्य महत्वपूर्ण चिकित्सा उपकरणों की सूची शीध्र ही उपलब्ध करावें। इसके साथ ही उप स्वास्थ्य केन्द्र एवं स्वास्थ्य केन्द्र का सुदृढीकरण करवाना है, उसके लिए भी प्लान जनवरी प्रथम सप्ताह तक भेज देवें ताकि बजट की व्यवस्था करवाई दी जायेगी। चिकित्सा मंत्री ने चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश दिये की वे चिकित्सा विभाग की समस्त योजनाओं को बेतहर ढंग से क्रियान्वयन कर आमजन को चिकित्सा सेवाओं का पूरा लाभ देवें एवं निःशुल्क चिकित्सा सुविधा हर मरीज को मिले इस बात का पूरा ध्यान रखें। उन्होंने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को निर्देश दिये कि वे 104 एम्बुलेंस की सेवाओं की प्रभावी मॉनिटिरिंग करें एवं कमी पाई जाने पर रिर्पोटिंग करें ताकि हम उनके विरूद्ध कार्यवाही कर सकें। अतिरिक्त एएनएम मुख्यालय जहां एएनएम का पद स्वीकृत है, लेकिन उक्त पद राजहैल्थ पोर्टल पर अपडेट नहीं हो रहे है, उसके सम्बन्ध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने जानकारी दी तो चिकित्सा मंत्री ने सीधे ही निदेशक से दूरभाष पर वार्ता कर पोर्टल पर सही स्थिति दर्शाने के निर्देश दिये। जैसलमेर विधायक छोटूसिंह भाटी एवं पूर्व विधायक डॉ. जितेन्द्र सिंह ने जिला अस्पताल में आंखों का विशेषज्ञ के साथ ही रेडियोग्राफर एवं अन्य महत्वपूर्ण उपकरणों की उपलब्धता कराने की आवश्यकता जताई। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पालीवाल ने जिले की चिकित्सा सेवाओं के बारे में अवगत करवाया कहा कि चिकित्सा सेवाओं की क्रियान्विति सुचारू से की जा रही है।

मरीजों से निःशुल्क चिकित्सा सुविधा का लिया फीडबैक, राजस्थान-जैसलमेर के श्रीजवाहिर चिकित्सालय का स्वास्थ्य मंत्री ने किया औचक निरीक्षण

जयपुर। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने अपनी जैसलमेर यात्रा के दौरान रविवार को जैसलमेर जिला अस्पताल श्रीजवाहिर चिकित्सालय का औचक निरीक्षण कर चिकित्सा व्यवस्थाऐं देखी एवं वार्डों का भ्रमण कर मरीजों की कुशलक्षेम पूछी एवं उनको जिला अस्पताल में मिल रही निःशुल्क चिकित्सा सुविधा की जानकारी ली एवं पूरा फीडबैक लिया। उन्होंने ट्रोमा सेन्टर की चिकित्सा व्यवस्था को भी देखा एवं निर्देश दिये कि यहां पर मरीज को तत्काल चिकित्सा सुविधा का लाभ दिया जावे। चिकित्सा मंत्री श्री सिंह ने अस्पताल के सर्जिकल वार्ड, मेडिकल वार्ड के साथ ही मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य यूनिट का भी भ्रमण कर चिकित्सा व्यवस्थाऐं देखी एवं वहां भर्ती मरीजों से भी उनको मिल रही चिकित्सा सुविधाओं की उनसे जानकारी ली, तो मरीजों ने बताया कि उन्हें निःशुल्क चिकित्सा सुविधा का लाभ मिल रहा है। चिकित्सा मंत्री ने जिला अस्पताल की चिकित्सा सुविधाओं के बारे में प्रमुख चिकित्सा अधिकारी से जानकारी ली एवं निर्देश दिये कि यहां आने वाले हर मरीज को निःशुल्क चिकित्सा सुविधा का पूरा लाभ दिया जावे एवं चिकित्सक सेवा भावना से मरीज का उपचार करें, यह सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शीध्र ही चिकित्सकों की भर्ती करने जा रही है एवं आने वाले समय में जैसलमेर-बाडमेर को विशेष रूप से चिकित्सक उपलब्घ करवाये जायेगें। उन्होंने कहा कि पोकरण व जैसलमेर के बीच में एक करोड रूपये लागत की एएलएस एम्बुलेंस शीध्र ही उपलब्ध करवा दी जावेगी, ताकि सड़क मार्ग में दुर्धटना होने पर यह एम्बुलेंस बहुत ही उपचार के लिए कारगर सिद्ध होगी। जैसलमेर विधायक श्री छोटूसिंह भाटी ने जिले की चिकित्सा व्यवस्था के बारे में विस्तार से अवगत कराया एवं कहा कि यहां की भौगोलिक परिस्थिति को देखते हुए चिकित्सकों एवं पैरामेडिकल स्टाफ के रिक्त पदों को भरावें।

फिर सामने आई स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही: नसबंदी शिविर में ऑपरेशन के बाद महिलाओं को जमीन पर लिटाया, बेड के बजाय दिए टेंट के गद्दे

Negligence of health department: Women made to lie on the ground after sterilization operation सीधी। मध्य प्रदेश के सीधी जिले से एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। नसबंदी शिविर में पहुंची महिलाओं को ऑपरेशन के बाद जमीन पर लिटाया गया। ठंड और ठिठुरन के बावजूद महिलाओं को बेड के बजाय टेंट हाउस से मंगाए गए गद्दों पर जमीन पर लिटाया। जिले में स्वास्थ्य विभाग की बदहाल व्यवस्था फिर उजागर हुई है। नसबंदी शिविर में बड़ी संख्या में महिलाएं ऑपरेशन के लिए पहुंची थी। जो ऑपरेशन के बाद जमीन पर लेटी नजर आईं। यह व्यवस्था स्वास्थ्य विभाग की गंभीर लापरवाही को उजागर करती है। शिविरों में महिलाओं के लिए बेड का कोई इंतजाम नहीं किया गया। ठंड के मौसम में इस तरह की लापरवाही महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकती है। बतादें कि, स्वास्थ्य विभाग द्वारा ऑपरेशन के बाद महिलाओं को जमीन पर लिटाने की तस्वीर पहले भी सामने आ चुकी है। इस बार फिर यहां एक-दो महिलाएं नहीं बल्कि कई महिलाएं जमीन पर लेटी नजर आई। वहीं मामले को लेकर प्रभारी एडीएम ने स्थिति का संज्ञान लिया है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था में जल्द सुधार किया जाएगा।

मध्य प्रदेश : हजारों फार्मासिस्टों की पोस्ट खाली फिर भी स्वास्थ्य विभाग कर रहा है अनदेखी ?

Madhya Pradesh: Posts of thousands of pharmacists are vacant yet the health department is ignoring it?

Madhya Pradesh: Posts of thousands of pharmacists are vacant yet the health department is ignoring it? भोपाल ( कमलेश )। मप्र में स्वास्थ्य विभाग के प्रशासकीय 10267 केंद्र संचालित हैं। यहां अभी तक फार्मासिस्टों की भर्ती नहीं हो सकी है, जबकि इन स्वास्थ केंद्रों में 126 प्रकार की दवाओं का वितरण और संधारण किया जाता है। वर्तमान में इन उप स्वास्थ्य केंद्रों में गैर-फार्मासिस्टों की मदद ली जा रही है, जो फार्मेसी एक्ट का उल्लंघन है। बता दें कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 के तहत देशभर के उपस्वास्थ्य केंद्रों में आयुष, नर्सिंग के साथ फार्मासिस्ट भी कम्युनिटी हेल्थ आफिसर पद के लिए योग्य हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मप्र द्वारा फार्मासिस्टों को नजरअंदाज किया जा रहा है।दरअसल, देश में संचालित चिकित्सा प्रणाली मुख्यतः एलोपैथी पर आधारित है, जिसके तहत एमबीबीएस व एमएस/एमडी डिग्रीधारी चिकित्सक इस पद्धति से उपचार करते हैं। एलोपैथी पद्धति में एमबीबीएस, एमएस डिग्रीधारी चिकित्सक के बाद फार्मासिस्ट ही मरीजों एवं बीमारियों से संबंधित जानकारी के सबसे नजदीक हैं।फार्मासिस्ट अपने बी फार्मेसी एवं एम फार्मेसी कोर्स के दौरान इसका अध्ययन भी करते हैं। बी फार्मेसी चार वर्षीय पाठ्यक्रम में थ्योरी एवं प्रैक्टिकल मिलाकर कुल 75 विषयों के तहत एलोपैथी पद्धति विशेषतः बीमारी एवं उसके उपचार से संबंधित अध्ययन किया जाता है, बावजूद इसके फार्मासिस्टों को कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर के पद के लिए योग्य नहीं समझा जा रहा।काउंसिल बना दलालों का अड्डाफार्मासिस्टों ने बताया है कि मप्र फार्मेसी काउंसिल में निरंतर अनियमितताएं पाई जा रही हैं। इसमें खासतौर पर पंजीकृत फार्मासिस्टों के रिनुअल, नए पंजीयन, एनओसी और पंजीयन के लिए प्रोफाइल क्रिएशन में समस्या होती है, जिससे हजारों फार्मासिस्ट परेशान होते हैं।फार्मासिस्टों का आरोप है कि काउंसिल में बिना लेने-देन कोई काम नहीं होता है, यह दलालों का अड्डा है। काउंसिल परिसर में दलाल सक्रिय हैं। जो फार्मासिस्ट रिश्वत नहीं देते हैं, उनके काम रोक दिए जाते हैं। जनता के साथ खिलवाड़स्वास्थ्य विभाग के 10267 उप स्वास्थ्य केंद्रों में फार्मासिस्ट के पद को स्वीकृत नहीं किया गया है। जिसके चलते दवाओं का वितरण, संधारण आदि कार्य गैर फार्मासिस्ट से कराया जा रहा है। इससे प्रदेश की जनता के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। – राजन नायर, प्रदेश संयोजक, स्टेट फार्मासिस्ट एसोसिएशन, मप्र

स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग होंगे मर्ज,सभी जिलों में खुलेंगे पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस

भोपाल ! मध्यप्रदेश में चिकित्सा शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग अब मिलकर एक होंगे। मंत्रालय में शाम को होने वाली कैबिनेट बैठक में इसे मंजूरी दी जाएगी। वहीं प्रदेश के सभी जिलों में पीएम कॉलेज आफ एक्सीलेंस खोले जाएंगे। मध्यप्रदेश में चिकित्सा शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग के अलग-अलग होंने के कारण कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। दोनो विभाग आमजनता की स्वास्थ्य सुविधाओं पर काम करते है। लेकिन चिकित्सा शिक्षा विभाग मेडिकल एजूकेशन पर काम करता है और स्वास्थ्य विभाग केवल प्रदेश की स्वास्थ्य सुविधाओं पर ही काम करता है। मेडिकल एजूकेशन विभाग के अंतर्गत प्रदेशभर के मेडिकल कॉलेज आते है और इन कालेजों से सम्बद्ध अस्पतालों में ही जूनियर डॉक्टर और चिकित्सा शिक्षा विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टर काम करते है। नीतिगत मसलों पर दोनो विभाग अलग- अलग होने के कारण कई दिक्कते आ रही थी। इन्हें दूर करने के लिए अब दोनो विभागों को मिलाकर एक किया जा रहा है नये विभाग का नाम लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग होगा। इन्हें दूर करने के लिए अब दोनो विभागों को मिलाकर एक किया जा रहा है। प्रदेश के सभी जिलों में प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस खोले जाने है। इस प्रस्ताव पर भी आज होंने वाली कैबिनेट बैठक में चर्चा की जाएगी। ये कॉलेज विशेष होंगे और इनमें विद्यार्थियों को सभी तरह के विषयों पर अध्ययन करने की सुविधा होगी। इन कॉलेजों को रोजगारोन्नमुखी शिक्षा से भी जोड़ा जाएगा। हर जिले में ऐसा एक कॉलेज खोला जाएगा। इसके अलावा अशोकनगर जिले में मल्हारगढ़ सिचाई परियोजना के लिए 72 करोड़ रुपए की मंजूरी देने के प्रस्ताव पर भी कैबिनेट में चर्चा की जाएगी। चार अधिकारियों और कर्मचारियों के द्वारा की गई अनियमितताओं के चलते उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही करने और उनकी विभागीय जांच शुरु करने के प्रस्तावों पर भी चर्चा की जाएगी।

मुरैना जिला अस्पताल में आग लगने से मचा हड़कंप।

There was a stir due to fire in Morena District Hospital संतोष सिंह तोमर मुरैना। जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में भीषण आग लग गई जिसके चलते पूरे वार्ड में अफरा तफरी फैल गई और अस्पताल परिसर में भगदड़ मच गई। बताया गया कि यह आग शॉर्ट सर्किट के चलते हुए लगी है । फटाफट इस वार्ड से नवजात बच्चों को और प्रसूति महिलाओं को दूसरे वार्ड में तत्काल प्रभाव से शिफ्ट किया गया । जैसे ही घटना की सूचना पुलिस और प्रशासन को मिली तो मुरैना के अपर कलेक्टर और पुलिसअफसर मौके पर पहुंचे । अस्पताल के अग्नि शमक यंत्र से कर्मचारियों के द्वारा आज पर काबू पाया गया मौके पर दमकल विभाग की दो गाड़ी पहुंची। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि जिला चिकित्सालय में हमारा बच्चा भर्ती था यहां न तो कोई सायरन बजा न कुछ प्रशासन की लापरवाही इतनी है कि आग लग गई हमारा बच्चा दूसरे वार्ड में शिफ्ट कर दिया है और प्रशासन कोई जवाब नहीं दे रहा है। वहीं सीएमएचओ का कहना है कि बिजली का जो फॉल्ट हुआ है उसकी हम जांच करवा रहे है और उसे दिखवा रहे है। उन्होंने बताया कि वार्ड में 47 बच्चे थे अब उनको दूसरे वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है । सारे बच्चे सुरक्षित है जिनको ऑक्सीजन की जरूरत है उनको प्रदाय की जा रही है और जिनको उपचार की जरूरत है उनको भी ट्रीटमेंट दिया जा रहा है।

देश में एक बार फिर कोरोना संक्रमण ने पकड़ी रफ्तार

Corona infection once again gained momentum in the country देश में एक बार फिर कोरोना संक्रमण ने पकड़ी रफ्तार, 24 घंटे में 636 नए मामले, जेएन.1 के मरीज 200 पार स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, पिछले 24 घंटे में केरल में दो और तमिलनाडु में एक मरीज की संक्रमण से मौत हो गई। पिछले साल पांच दिसंबर तक दैनिक मामलों की संख्या घटकर दोहरे अंक तक पहुंच गई थी। देश में कोरोना संक्रमण के 636 नए मामले सामने आए हैं, जिससे उपचाराधीन मरीजों की संख्या बढ़कर 4,394 हो गई है। साथ ही नए उपस्वरूप जेएन.1 के 37 नए मामले मिलने के बाद इसके मरीजों की संख्या 200 पार कर गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, पिछले 24 घंटे में केरल में दो और तमिलनाडु में एक मरीज की संक्रमण से मौत हो गई। पिछले साल पांच दिसंबर तक दैनिक मामलों की संख्या घटकर दोहरे अंक तक पहुंच गई थी, लेकिन ठंड और वायरस के नए उपस्वरूप के कारण मामलों में तेजी आई है। स्वास्थ्य मंत्रालय की वेबसाइट के अनुसार, अब तक संक्रमण से उबरने वाले लोगों की संख्या 4.4 करोड़ से अधिक हो गई है। किस राज्य में कितने जेएन.1 वैरिएंट के मामलेजेएन.1 वैरिएंट से संक्रमित लोगों की संख्या बताने के लिए INSACOG ने राज्यवार आंकड़े भी जारी किए। सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक केरल (83), गोवा (51), गुजरात (34), कर्नाटक (आठ), महाराष्ट्र (सात), राजस्थान (पांच), तमिलनाडु (चार), तेलंगाना (दो) ओडिशा (एक) और दिल्ली में एक मामला रिपोर्ट किया गया है। राज्यों को निगरानी बढ़ाने का निर्देशWHO के मुताबिक कोरोना वायरस के जेएन.1 सब-वैरिएंट को पहले बीए.2.86 का प्रकार माना गया। हालांकि, बीते कुछ हफ्तों में 40 से अधिक देशों में JN.1 मामले सामने आ चुके हैं। तेजी से फैलते संक्रमण को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से निरंतर निगरानी बनाए रखने को कहा है।

क्षेत्र की तरक्की के लिए मील का पत्थर साबित होगा नवीन स्वास्थ्य केंद्र- मलैया

New health center will prove to be a milestone for the progress of the area – Malaiya 306 लाख की लागत से बन रहे नवीन स्वास्थ केंद्र का हुआ भूमि पूजन चंद्रपाल सिंह दमोह ! क्षेत्र के लोगों की तरक्की के लिए उनकी उन्नति के लिए बांसा तारखेडा का यह है नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मील का पत्थर साबित होगा। यह बात पूर्व वित्त मंत्री एवं दमोह विधायक जयंत मलैया ने बांसा तारखेडा में बन रहे नवीन स्वास्थ्य केंद्र के भूमि पूजन के दौरान कही। उन्होंने कहा इस मार्च तक इसका कार्य पूरा होना था परंतु किसी कारणवश इसका कार्य लेट प्रारंभ हुआ है, लेकिन जल्दी ही यह बनकर तैयार होगा और इसका लाभ सभी क्षेत्र वासियों को मिलेगा। दमोह का जिला अस्पताल कुछ वर्षों पहले कैसे हुआ करता था, आज आप जाकर देखिए प्रदेश के कुछ बड़े अस्पतालों को छोड़ दें, तो दमोह का अस्पताल शानदार है। उन्होंने कहा विधानसभा चुनाव में जो आशीर्वाद क्षेत्र की जनता ने मुझे दिया है, इस उम्र में पार्टी ने मुझे टिकट दी, पार्टी का आदेश हुआ और मैं चुनाव लड़ा और आप सभी ने इतने प्रचंड मतों से मुझे जिताया।ज्ञात हो कि बांसा तारखेडा में 306 लाख रुपए की लागत से नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवं आवास गृहों का निर्माण किया जाना है, जिसका भूमि पूजन आज संपन्न हुआ। इस अवसर पर रश्मि/दीपक शेरू परिहार, नंदकिशोर तिवारी, राकेश नायक, डॉ जगत सिंह, नीरज राय, रोहन पाठक, शैलेन्द्र तिवारी, राम सिंह, अखिलेश हजारी, संतोष आठ्या, गुड्डा यादव, राजकुमार जैन सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण, अधिकारी-कर्मचारी, ग्रामवासियों की मौजूदगी रही।

झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्रवाई करने मैं प्रशासन सुस्त

Civil hospital in-charge unable to take action against quacks झोलाछाप डॉक्टरों पर जिला स्वास्थ्य अधिकारी प्रभारी दोनों ही मेहरबान जानकारी के बाद भी कार्रवाई नहीं कर रहे ऐसा लगता कहीं ना कहीं मोटी रकम दी जा रही है मलखान सिंह परमार अंबाह । झोलाछाप डॉक्टरों को प्रशासन का भय नहीं, बिना डिग्री के डाक्टरी और विना लायसेंस के मेडिकल स्टोर चला धड़ल्ले से चलाए जा रहे हैं, ऐसा एक मामला अंबाह पिनाहट रोड पर देखने को मिला है यहां डा पीयूष सेनी राज मार्केट में मौत का अस्पताल चला रहे हैं जब इसकी हमने जानकारी सिविल अस्पताल बीएमओ को दी तो उनका कहना लिखित में दो कार्रवाई करेंगे पर 19 10 2023 लिखित में दी गई उसके बावजूद भी कार्रवाई नहीं की बिना डिग्री के मरीजों की चिकित्सा कर रहे हैं यही नहीं एक मेडिकल स्टोर भी बिना लायसेंस के वैखोफ संचालित कर रहे हैं ऐसे झोलाछाप डॉक्टर मरीजों की सेहत के साथ खिलवाड़ करने में लगे हुए हैं जिस पर प्रशासन का भी कोई अंकुश नहीं है। यही बजय है कि लोग पैसे के लालच में लोगों के जीवन से खेल रहे हैं कई बार झोलाछाप डॉक्टरों के उपचार से भोले भाले ग्रामीण मरीज अपने जीवन से हाथ धो बैठते हैं।समय रहते ऐसे गैरकानूनी काम करने वाले लोगों पर प्रशासन की सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो झोलाछाप डॉक्टर एक बीमारी की तरह पूरे शहर को नष्ट-भुष्ट कर देंगे और प्रशासन को अवगत होने के बाद भी प्रशासन इन पर कार्रवाई नहीं कर रहा क्या चक्कर है सिविल अस्पताल से नोटिस जारी होते हैं पर कार्यवाही नहीं होती

लाखों की लागत से बने उप स्वास्थ्य केंद्र पर लगा रहता है ताला, लोगों को नहीं मिल रहा इलाज.

A lock is placed on the Sub health Center built at a cost of millions, depriving people of access to medical treatment. मलखान सिंह परमार मुरैना । ग्राम पंचायत आरोली मे बीच का पुरा गांव में स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए उप स्वास्थ्य केंद्र ताे खोले गए हैं। लेकिन इन स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में लोगों को इलाज के लिए लोगों को निजी चिकित्सालय क्लीनिकों पर या जिला स्तर पर अस्पताल में जाना पड़ता है। उप स्वास्थ्य केंद्रों पर कहने को तो यहां 24 घंटे एएनएम और इलाज की सुविधा मिलना है, लेकिन ताला नहीं खुलने से ग्रामीणों को विकासखंड के उप स्वास्थ्य केंद्रों पर इलाज की सुविधा नहीं मिल रही है। लाखों की लागत से बने बीच के पुरा पर स्थित उप स्वास्थ्य केंद्र बना जर्जर केंद्र जानकारी के अनुसार देखने में तो उप स्वास्थ्य केंद्र को बने अभी कुछ अधिक समय नहीं हुआ लेकिन उसकी दीवारें, प्लास्टर सभी खंडर हो गए है केंद्र को बनाने में घटिया सामग्री का उपयोग किए जाने से कम समय में ही उप स्वास्थ्य केंद्र खंडर हो गया है। ग्राम पंचायत अरोली में ग्राम बीच के पूरा को शासकीय उप स्वास्थ्य केंद्र में पिछले कई दिनों से ताला लटका हुआ हैं, वहीं जिले में बैठे जिम्मेदार जांच सहित अन्य के नाम पर वाहन द्वारा डीजल का भुगतान लेते है, लेकिन समझ से परे यह है कि आखिर इनके द्वारा किस चीज की जांच की जाती है। ग्रामीण क्षेत्र में लोगों को नि:शुल्क उपचार उपलब्ध कराना महज दिखावा बनकर रह गया है, क्योंकि कई क्षेत्र ऐसे हैं जहां पर पिछले कई दिनों से उप स्वास्थ्य केंद्र में ताला लटक रहा है। मजे की बात तो यह है कि यहां पदस्थ जिम्मेदार से अगर कोई पूछ ले कि आप कहां हैं, तो इनके द्वारा मीटिंग के साथ भ्रमण बताकर अपना पल्ला झाड़ लिया जाता है। ग्रामीणों को स्वास्थ्य लाभ मुहैया करवाने के उद्देश्य से सरकार ने गांव में उप-स्वास्थ्य केन्द्र खोला था, लेकिन यह ग्रामीणों का दुर्भाग्य ही रहा कि लाखों रुपये की लागत से बने उप-स्वास्थ्य केन्द्र में आये दिन ताला लटका रहता है।

कोरोना वायरस की दस्‍तक, बागेश्वर धाम से लौटा व्यक्ति संक्रमित.

Corona virus knocks, person returned from Bageshwar Dham infected. ग्वालियर में एक कोरोना संक्रमित मरीज मिला है, जिसे होम आइसोलेशन में रखा गया है। ग्‍वालियर में कोरोना संक्रमित मरीज की पुष्टि ,गजराराजा मेडिकल कालेज में लिए थे सैंपल ,चार कोविड टेस्ट में एक की रिपोर्ट पाजिटिव ग्वालियर। ग्वालियर में कोरोना पाजिटिव मरीज मिला है। इसके साथ ही जिले में एक्टिव मरीज की संख्या एक हो गई है। कोरोना संक्रमित मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड में आ गया है। कोरोना के चार सैंपल गजराराजा मेडिकल कालेज में जांच के लिए पहुंचे थे। इनमें से एक 58 वर्षीय व्यक्ति संक्रमित पाए गए। यह 15 दिन पहले बागेश्वर धाम छतरपुर गए थे। फिलहाल 58 वर्षीय मरीज को होम आइसोलेशन में रखा गया है। इनके संपर्क में आने वाले परिवार के सदस्यों के सैंपल लेने स्वास्थ्य विभाग की टीम सीएमएचओ के निर्देश पर उनके घर पहुंची।फिलहाल हालत स्थिरकोरोना संक्रमित ने बताया कि वह बागेश्वर धाम छतरपुर गए थे। वहां से लौटने पर सर्दी-जुखाम हुआ, तो एक हजार बिस्तर अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचा। यहां चिकित्सक ने कोरोना के लक्षण दिखाई देने पर जांच के लिए बोला। जांच गजराराजा मेडिकल कालेज में कराई तो रिपोर्ट पाजिटिव निकली। घर पर ही स्वास्थ्य लाभ ले रहा हूं। हालत स्थिर है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा.राजौरिया ने बताया कि मरीज की जांच के लिए रोजाना स्वास्थ्य टीम को भेजा जाएगा। दवा उपलब्ध करा दी गई हैं। संक्रमित के घर उनकी पत्नी व एक बच्चा भी है। इसलिए चिकित्सकों ने सलाह दी है कि अगर किसी को सर्दी-जुकाम के लक्षण दिखाई दें तो सूचना दें।सोमवार को लिए जाएंगे जीनोम सीक्वेंसिंग जांच के लिए सैंपलमुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा.आरके राजौरिया ने बताया कि मरीज की जीनोम सीक्वेंसिंग जांच के लिए सैंपल सोमवार को लिए जाएंगे। इस जांच से कोरोना के वेरिएंट का पता लगाया जाएगा। कोरोना संक्रमण की पुष्टि के बाद हमें उस मरीज में कोरोना का कौन सा वेरिएंट है, इसकी जांच करनी होती है। जेएएच के पुराने आइसीयू में 30 बेड आरक्षितकोरोना को लेकर जेएएच प्रबंधन अलर्ट है। यहां पुराने आइसीयू भवन में तीस बेड आरक्षित किए गए हैं। यहां दस वेंटिलेटर, मल्टीपैरा मीटर, दवा, पीपीइ किट के साथ अन्य व्यवस्थाएं की गई हैं। जीआरएमसी के डीन डा.अक्षय निगम कोविड वार्ड निरीक्षण कर चिकित्सक और स्टाफ को सतर्क रहने के निर्देश दे चुके हैं। इसके साथ ही जिला अस्पताल में दस पलंग का वार्ड आरक्षित किया गया है। सैंपल जांच की सुविधा शुरू की गई है।

जिला चिकित्सालय में रक्त स्त्राव से गर्भवती महिला की मृत्यु के मामले में चार सदस्यीय समिति गठित।

A four-member committee was formed in the case of death of a pregnant woman due to bleeding in the district hospital. विशेष संवाददाता सहारा समाचार कटनी। कलेक्टर अवि प्रसाद ने गर्भवती महिला श्रीमती रंजीता बर्मन निवासी डुमरिया की गुरूवार की सुबह उपचार के दौरान अधिक रक्त स्त्राव से मृत्यु के मामले में जिला अस्पताल द्वारा मृतिका को रक्त उपलब्ध कराने के समुचित प्रयासों की जांच हेतु समिति का गठन किया है। जिले के ब्लड बैंक मे रक्त की पर्याप्त उपलब्धता के मद्देनजर कलेक्टर अवि प्रसाद की अध्यक्षता में शनिवार 23 दिसंबर को शाम 5 बजे कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में बैठक आयोजित की गई है। बैठक में सामाजिक एवं स्वैच्छिक संगठनों सहित महाविद्यालयों के एन एस एस, स्काउट गाइड के कार्यक्रम अधिकारियों की सहभागिता से रक्तदान हेतु अभियान चलाकर लोगों को जागरूक किया जायेगा

फिक्स्ड-ड्रग कॉम्बिनेशन में क्लोरफेनिरामाइन मैलेट और फिनाइलफ्राइन, 4 साल से कम उम्र के बच्चों में नहीं दिया जाना चाहिए- Central Drugs Standard Control Organisation.

According to the Central Drugs Standard Control Organisation, the combination of Chlorpheniramine Maleate and Phenylephrine should not be administered to children under 4 years of age in a fixed-dose combination. Manish Trivedi, Sahara Samachaar. नई दिल्ली ! सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन के इस हफ़्ते लिए गए फ़ैसले के अनुसार फिक्स्ड-ड्रग कॉम्बिनेशन (एफडीसी) का इस्तेमाल करने पर दवा कंपनियों को दवा के लेबल पर लिखना होगा कि “एफडीसी का उपयोग 4 साल से कम उम्र के बच्चों में नहीं दिया जाना चाहिए ! सरकार का यह फ़ैसला कुछ महीने पहले कई देशों में कफ़ सीरप पीने से 100 से अधिक बच्चों की मौत होने के बाद आया है. सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन ने कहा है कि बच्चों के लिए एक अस्वीकृत सर्दी-रोधी दवा फॉर्मूलेशन के प्रमोशन को लेकर चिंता जताई गई थी. अब चार साल से कम उम्र के बच्चों के लिए एफडीसी का इस्तेमाल न करने की सिफारिश की गई. नियामक के आदेश के अनुसार, फिक्स्ड-ड्रग कॉम्बिनेशन (एफडीसी) का उपयोग करने पर दवा कंपनियों को अपने उत्पादों पर चेतावनी के साथ लेबल लगाने की ज़रूरत होगी. फिक्स्ड-ड्रग कॉम्बिनेशन में क्लोरफेनिरामाइन मैलेट और फिनाइलफ्राइन शामिल होते हैं. इसका उपयोग अक्सर सर्दी जुकाम के इलाज के लिए सिरप या गोलियों में किया जाता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन भी पांच साल से छोटे बच्चों में खांसी और सर्दी के इलाज के लिए बिना डॉक्टर की पर्ची के सिरप या अन्य दवाई के उपयोग की सिफ़ारिश नहीं करता.

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